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चल पड़ी पहली हाइड्रोजन ट्रेन ... मगर मंज़िल महज़ रेलवे नहीं

first hydrogen train india


 भारत ने हाइड्रोजन ट्रेन क्यों बनाई, तो शायद पहला जवाब होगा. ताकि डीज़ल की जगह एक साफ़ ईंधन इस्तेमाल हो सके।

जवाब सही है। लेकिन पूरी कहानी नहीं।


असल सवाल यह है कि जब भारतीय रेलवे का लगभग पूरा ब्रॉडगेज नेटवर्क पहले ही बिजली से चलने लगा है, तो फिर हाइड्रोजन ट्रेन की ज़रूरत क्यों पड़ी?


यहीं से इस खबर की असली कहानी शुरू होती है।


हरियाणा के जींद–सोनीपत रेलखंड (करीब 90 किलोमीटर) पर भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू हुई है। यह सिर्फ़ एक नई ट्रेन नहीं, बल्कि भारत के ग्रीन हाइड्रोजन मिशन की चलती. फिरती प्रयोगशाला है।


हाइड्रोजन ट्रेन चलती कैसे है?


इस ट्रेन में डीज़ल इंजन नहीं है।


इसके ऊपर लगे विशेष टैंकों में हाइड्रोजन गैस भरी जाती है। यह हाइड्रोजन फ्यूल सेल में हवा की ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करती है और बिजली बनाती है। यही बिजली ट्रेन के मोटर, एसी, लाइट और बाकी सिस्टम चलाती है।


इस पूरी प्रक्रिया में धुआँ नहीं निकलता। केवल पानी की भाप निकलती है। यानी पटरी पर चलते समय यह ट्रेन स्थानीय स्तर पर लगभग शून्य उत्सर्जन करती है।


ध्यान देने वाली बात यह है कि ट्रेन के आसपास की हवा साफ़ रहती है, हालाँकि हाइड्रोजन बनाने की प्रक्रिया कितनी हरी है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बिजली कहाँ से आती है।

क्या यह दुनिया की सबसे आधुनिक ट्रेन है?


इस 10 डिब्बों वाली ट्रेन में करीब 2600 यात्री सफ़र कर सकेंगे। इसे 75–120 किमी/घंटा की गति वाले उपनगरीय रूटों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें मेट्रो जैसी ऑटोमैटिक बंद होने वाली दरवाज़े, आधुनिक डिस्प्ले, एयर कंडीशनिंग और कई सुरक्षा प्रणालियाँ हैं। हाइड्रोजन रिसाव या आग की आशंका होने पर तुरंत अलर्ट देने वाले सेंसर भी लगाए गए हैं।

इसका एक बड़ा दावा यह भी है कि यह अपनी श्रेणी की दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल है।

लेकिन जब बिजली वाली ट्रेनें पहले से हैं, तो हाइड्रोजन क्यों?

यही सबसे दिलचस्प सवाल है।


अगर किसी रेलमार्ग पर पहले से बिजली की लाइन मौजूद है, तो इलेक्ट्रिक ट्रेन आज भी हाइड्रोजन ट्रेन से ज़्यादा ऊर्जा दक्ष और सस्ती मानी जाती है।

फिर रेलवे हाइड्रोजन पर इतना निवेश क्यों कर रहा है?


क्योंकि इस ट्रेन की मंज़िल सिर्फ़ यात्रियों को एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक पहुँचाना नहीं है।

भारत हाइड्रोजन बनाना, उसे सुरक्षित तरीके से जमा करना, ट्रेन में भरना, फ्यूल सेल बनाना और इस पूरी तकनीक में आत्मनिर्भर होना चाहता है।

यानी यह ट्रेन एक पूरे हाइड्रोजन इकोसिस्टम की शुरुआत है। हाइड्रोजन ट्रेन को आज की तारीख में ‘क्लाइमेट सॉल्यूशन’ से ज़्यादा ‘टेक्नोलॉजी डेमो’ और इंडस्ट्री‑बिल्डिंग प्रोजेक्ट के रूप में देखना ज़्यादा ईमानदार होगा।

क्या इससे रेल किराया सस्ता होगा?


फिलहाल इसकी उम्मीद नहीं करनी चाहिए।


एक हाइड्रोजन ट्रेन बनाने में लगभग 80 करोड़ रुपये तक का खर्च आ सकता है। इसके अलावा हाइड्रोजन बनाने, स्टोर करने और भरने का अलग इंफ्रास्ट्रक्चर भी बनाना पड़ता है, जिसकी लागत भी दर्जनों करोड़ रुपये है।

आज के समय में ग्रीन हाइड्रोजन, बिजली या डीज़ल की तुलना में अभी महंगी है।

इसलिए आज की तारीख में यह परियोजना ‘किराया घटाने’ नहीं, बल्कि ‘भविष्य की लागत को predictable रखने’ और फॉसिल ईंधन पर निर्भरता घटाने की दिशा में उठाया गया कदम है।

हालांकि भविष्य में अगर ग्रीन हाइड्रोजन सस्ती हो जाती है और इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन होने लगता है, तो परिचालन लागत स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। लेकिन अभी ऐसा कहना जल्दबाज़ी होगी।


फिर फायदा किसे होगा?

यात्रियों को कम शोर, साफ़ हवा और आधुनिक सफ़र का अनुभव मिलेगा।

रेलवे को उन इलाकों के लिए एक विकल्प मिलेगा, जहाँ बिजली की लाइन बिछाना मुश्किल या बहुत महंगा है।

और सबसे बड़ा फायदा देश को हो सकता है। 

भारत ने 2070 तक नेट‑ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है; स्टील, उर्वरक और हैवी ट्रांसपोर्ट जैसे ‘कठिन सेक्टरों’ में ग्रीन हाइड्रोजन एक प्रमुख औज़ार माना जा रहा है। यह ट्रेन उस दिशा में शुरुआती अभ्यास है।


अगर भारत हाइड्रोजन तकनीक में महारत हासिल करता है, तो यही तकनीक आगे चलकर स्टील, उर्वरक, भारी ट्रकों और जहाज़ जैसे उन क्षेत्रों में भी काम आ सकती है, जहाँ सिर्फ़ बिजली से काम चलाना आसान नहीं है।


असल कहानी


पहली नज़र में यह सिर्फ़ एक नई ट्रेन लगती है। लेकिन असल में यह भारत की ऊर्जा व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की तैयारी है।

कई बार कोई ट्रेन सिर्फ़ यात्रियों को नहीं ले जाती।

वह एक नई तकनीक, नया उद्योग और भविष्य की नई दिशा भी साथ लेकर चलती है।


देहरादून:




उत्तराखंड के पारंपरिक लोकपर्व हरेला के शुभ अवसर पर सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज, देहरादून के अध्यक्ष एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने सीआईएमएस कैंपस, कुंआवाला में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया।


इस अवसर पर एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए इसके सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड, विशेष रूप से कुमाऊँ क्षेत्र में, हरेला सदियों से प्रकृति, हरियाली, समृद्धि एवं खुशहाली का प्रतीक रहा है। यह पर्व हमें प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का स्मरण कराता है।


उन्होंने बताया कि हरेला पर्व से नौ दिन पूर्व पाँच अथवा सात प्रकार के अनाज रिंगाल की टोकरी या पत्तों से बनी टोकरियों में बोए जाते हैं। प्रतिदिन इनकी सिंचाई कर इन्हें सुरक्षित रखा जाता है। दसवें दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद हरेले को काटकर देवताओं को अर्पित किया जाता है तथा परिवार के बड़े-बुजुर्ग इसे सभी सदस्यों के सिर पर रखकर सुख, समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद देते हैं।


एडवोकेट जोशी ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण मानव जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। हरेला केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी आस्था, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का प्रतीक है। यदि प्रत्येक व्यक्ति इस अवसर पर एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो हरियाली बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।


उन्होंने संस्थान के छात्र-छात्राओं से अधिक से अधिक पौधरोपण करने, लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल सुनिश्चित करने तथा पर्यावरण संरक्षण के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने का आह्वान किया। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने भी पर्यावरण संरक्षण एवं पौधरोपण अभियान को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया।


इस अवसर पर सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के मैनेजिंग डायरेक्टर संजय जोशी, पर्यावरण प्रेमी मनमोहन सिंह, लोक गायक गणेश कांडपाल सहित संस्थान के शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।


पर्यावरण को उजाड़ने का काम कर रही है सरकार, 3000 से अधिक वृक्षों का कटान प्रकृति पर निर्मम प्रहार - मोहित उनियाल

defforestation near airport dehradun


देहरादून एयरपोर्ट से ऋषिकेश मार्ग के फोरलेन चौड़ीकरण के लिए वन क्षेत्र में 3000 से अधिक वृक्षों का कटान शुरू होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। कुछ समय पूर्व पर्यावरण संरक्षण के लिए विभिन्न सामाजिक, पर्यावरणीय एवं राजनीतिक संगठनों ने संयुक्त रूप से आंदोलन करते हुए वृक्षों को रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें बचाने का संकल्प लिया था, लेकिन सरकार ने जनता की भावनाओं और पर्यावरणीय चिंताओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।


परवादून कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल ने आज मौके पर पहुंचकर वृक्षों के कटान का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसके जंगल और प्राकृतिक धरोहर हैं, लेकिन भाजपा सरकार विकास के नाम पर अंधाधुंध वृक्षों का सफाया कर पर्यावरण का संतुलन बिगाड़ने पर आमादा है।


मोहित उनियाल ने कहा कि एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास की बड़ी-बड़ी बातें करती है, वहीं दूसरी ओर हजारों वर्षों में तैयार हुए वन क्षेत्र को कुछ दिनों में उजाड़ा जा रहा है। यह केवल पेड़ों का कटान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित भविष्य पर सीधा प्रहार है।


उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या सड़क चौड़ीकरण का ऐसा कोई विकल्प नहीं था, जिसमें अधिकतम वृक्षों को बचाया जा सके? क्या पर्यावरणीय प्रभावों का गंभीरता से आकलन किया गया? यदि हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं, तो उनकी भरपाई केवल कागजों में नहीं, धरातल पर कब और कैसे होगी?


प्रकृति को हमारी ज़रूरत नहीं, हमें प्रकृति की ज़रूरत है।

कोविड-19 ने हमें यह कड़वा सच दिखाया कि जब सांसें संकट में पड़ती हैं, तब विकास नहीं, स्वच्छ हवा और स्वस्थ पर्यावरण सबसे बड़ी आवश्यकता बन जाते हैं।


यदि विकास परियोजनाओं के लिए परिपक्व वृक्षों का कटान अपरिहार्य है, तो उनकी भरपाई के लिए वर्षों पहले से वृक्षारोपण और उसके संरक्षण की ठोस योजना होनी चाहिए


मोहित उनियाल ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मामले में संवेदनशीलता नहीं दिखाई और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता नहीं दी, तो कांग्रेस जनमानस, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर व्यापक जनआंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होगी। उत्तराखंड की हरियाली और प्राकृतिक विरासत को किसी भी कीमत पर उजड़ने नहीं दिया जाएगा।


सत्यवाणी ब्यूरो

हरिद्वार,



विश्व पर्यावरण दिवस पर जहा आज वृहद स्तर पर पौधारोपण किया जा रहा है वही वर्ष भर भी छोटी पहल से भी हम पर्यावरण संरक्षण में अहम योगदान दे सकते है।


जैसे गैर जीव निम्नीकरण ,जैविक अजैविक कूड़ा प्रबंधन जिसकी शुरुआत और नियमित पालन हर घर में आसानी से किया जा सकता हैं।


इस विधि का विगत पांच वर्षो से नियमित पालन कर रही श्रवण नाथ मठ जवाहर लाल नेहरू पी जी महाविद्यालय की शिक्षिका डा.पदमावती तनेजा घरों में जैव निम्नीकरण प्रक्रिया ना केवल स्वयं अपनाती है बल्कि अन्य लोगो और विद्यार्थियों को भी जागरूक करती है।


फल सब्जियों के छिलके, चाय पत्ती,आदि  से घर पर ही खाद बनाती है जिसका प्रयोग वो घर के गमलों और किचन गार्डेन में उपयोग करती है।


साथ ही बचे हुए खाद को से महाविद्यालय परिसर के बागवानी हेतु प्रदान करती है।साथ ही प्लास्टिक ,पॉलीथीन को गत्ते के कूड़ेदान में एकत्र कर नगर निगम पर्यावरण मित्रो को देती है जिसेसे कूड़ा  प्रथक्करण में आसानी होती है।


बकौल डा पदमावती तनेजा पर्यावरण असुंतलन ,वैश्विक तापमान में वृद्धि पृथ्वी और मानव जीवन के लिए हानिकारक सिद्ध हो रहे है ।ऐसे में सभी को जागरूक होकर कार्बन उत्सर्जन को कम करने के उपाय भी करने होंगे।


उन्होंने चार धाम और गंगा स्नान आने वाले श्रद्धालुओं से भी पर्यावरण दिवस पर विशेष अनुरोध किया की वे अपने साथ प्लास्टिक की बोतल का प्रयोग ना करे वा स्टील , तांबे की बोतलों का ही प्रयोग करें।



देहरादून, 05 जून


प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अपने शासकीय आवास परिसर में फलदार पौधों का रोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के निर्माण के लिए पौधारोपण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। इस दौरान कृषि मंत्री गणेश जोशी ने लोगों को फलदार पौधे भी वितरित किए।


कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस तक सीमित न रहकर हमारी जीवनशैली का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि वृक्ष मानव जीवन के आधार हैं और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि फलदार पौधों का रोपण पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पोषण सुरक्षा और जैव विविधता को भी बढ़ावा देता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपने जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों पर पौधे लगाने और उनकी देखभाल का संकल्प लेने का आग्रह किया।


इस अवसर पर उन्होंने पारिवारिक मूल्यों को प्रकृति संरक्षण से जोड़ते हुए कहा कि परिवार के साथ पौधारोपण करना न केवल पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता भी बढ़ाता है। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के श्एक पेड़ माँ के नामश् अभियान से प्रेरणा लेते हुए प्रत्येक नागरिक को पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए और धरती को हरा-भरा बनाने में अपना योगदान देना चाहिए।


इस अवसर पर कृषि मंत्री की धर्मपत्नी निर्मला जोशी, सरकार में दायित्वधारी ज्योति कोटिया, शमशेर सिंह बिष्ट, मुख्य कृषि अधिकारी देवेन्द्र सिंह राणा, मुख्य उद्यान अधिकारी डीके तिवारी, पूर्व प्रधान समीर पुंडीर, मंडल महामंत्री अल्का कुल्हान सहित कई अन्य उपस्थित रहे।


देहरादून:


earth hpur today 28 march-2026


सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, उत्तराखण्ड शासन  अनु सचिव, श्री राज्यपाल, राज्यपाल सचिवालय, उत्तराखण्ड के से प्राप्त निर्देश के कर्म में जिलाधिकारी सविन बंसल ने अवगत कराया  है कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं भावी पीढ़ियों के उज्जवल भविष्य के उद्देश्य से “Earth Hour” अभियान के अंतर्गत  28 मार्च 2026 को रात्रि 8:30 बजे से 9:30 बजे तक एक घंटे के लिए सभी गैर-जरूरी विद्युत उपकरणों एवं लाइटों को बंद रखने का आह्वान किया गया है।


जिलाधिकारी ने जनपद के समस्त नागरिकों, शासकीय/अर्द्धशासकीय कार्यालयों, निजी संस्थानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, शैक्षणिक संस्थाओं एवं समाज के सभी वर्गों से अपील की है कि इस महत्वपूर्ण पर्यावरणीय पहल में बढ़-चढ़कर सहभागिता सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि “अर्थ आवर” केवल एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा एवं जलवायु परिवर्तन के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है।


जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि उक्त कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करते हुए आमजन को जागरूक किया जाए तथा कार्यक्रम का अक्षरशः अनुपालन कराया जाए।


जिलाधिकारी ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि निर्धारित समय पर अपने घरों, कार्यालयों एवं प्रतिष्ठानों की अनावश्यक लाइटें बंद कर पर्यावरण संरक्षण के इस वैश्विक अभियान में सहभागी बनें और भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण के निर्माण में अपना योगदान दें।



जलवायु परिवर्तन के कारण समय से पहले  खिलने लगा है बुराशं।


buransh in dhanolri

buransh dhanolti


जहां एक समय  फरवरी के अंतिम में बुरांश का खिलना शुरू होता था वहीं इस बार‌ जनवरी में ही खिल गया है। पहाड़ों में बर्फ की सफेद चादर ओढ़ने के बाद जंगलों में बुरांश की लाली छा जाती है।‌ जो फरवरी मार्च और अप्रैल तक रहती है।।


देहरादून में लोक पर्व हरेला हर्षोल्लास एवं पर्यावरण संरक्षण संकल्प के साथ मनाया गया* 


*वन विभाग के तत्वावधान में विभाग एवं जनसहयोग से हरेला पर्व पर जिले में लगाए 2.13 लाख पौधे।* 


देहरादून:

harela planting by forest department ddun


लोक पर्व हरेला जनपद देहरादून में हर्षोल्लास एवं पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ मनाया गया। मा0 मुख्यमंत्री की प्रेरणा और जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशन में इस वर्ष हरेला पर्व की थीम ‘‘ एक पेड़ माँ के नाम‘ के अंतर्गत वन विभाग के तत्वावधान में पूरे जनपद में वृहद स्तर पर पौधे रोपण किए गए। 


जिलाधिकारी ने हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ाव और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। यह पर्व हमें हरित क्षेत्र को बढ़ाने और जलवायु संतुलन बनाए रखने के लिए प्रेरित करता है। 


प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि हरेला पर्व के अवसर पर पहले दिन जनपद में 02 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जिले के सभी विकासखंडों में विभाग एव जनसमुदाय के सहयोग से व्यापक पौधरोपण अभियान के तहत 2.13 लाख पौधों का रोपण करने के साथ ही पौधों की देखरेख और संरक्षण का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी ली गई। 


प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशन में पूरे जनपद में वृहद स्तर पर पौधरोपण अभियान जारी है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की है कि एक माह तक चलने वाले हरेला पर्व पर 'एक पेड मां के नाम' जरूर लगाए और उसकी देखरेख व संरक्षण का संकल्प लें। 



हरिद्वार:

SP GRP celebrated harela festival  by plantation


राजकीय रेलवे पुलिस की पुलिस अधीक्षक तृप्ति भट्ट ( आईपीएस) ने आज  जीआरपी परिसर में 300 से ज्यादा जामुन, अमरुद, आंवला, अमलतास, आम, नीम, पापड़ी, अर्जुन, कनेर आदि पौधों का जवानों संग पौधारोपण कर समूचे परिसर को हरियाली से आच्छादित किया।


वृक्षारोपण उपरांत संपूर्ण परिसर में  साफ सफाई भी की गई।


कप्तान तृप्ति भट्ट ने अपने सम्बोधन में  जवानों में जोश का संचार भरते हुए कहा की "एक पौधा मां के नाम" इस वर्ष हरेला पर्व की थीम है।जैसे हम राजकीय  रेलवे की सेवा में तत्पर रहते है वैसे ही   हर जवान आज अपने द्वारा लगाए पौधे की रक्षा यानी देखभाल सुनिश्चित करे ताकि आज लगाए गए पौधे आने वालों दशकों तक हरियाली ,फल ,छाया और शुद्ध हवा प्रदान करते रहे।


*प्रकृति से सामंजस्य बैठाने हेतु यह एक बेहतरीन त्यौहार है, उत्तराखंड वैसे भी प्राकृतिक रूप से वन संपदा का एक खजाना है जिसको और बेहतर किए जाने हेतु सभी को कम से कम एक पौधा लगाकर अपना योगदान देना चाहिए" एसपी जीआरपी तृप्ति भट्ट*


   प्रकृतिप्रेमी IPS तृप्ति भट्ट द्वारा जामुन का पौधा तथा ऐ एस पी अरुणा भारती द्वारा द्वारा अमरूद का पौधा  उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला को जीआरपी जवानों के साथ सैकड़ों पौधों का रोपण कर त्यौहार के रूप में मनाया गया।



संपूर्ण जीआरपी परिसर में जोश से भरे हुए जवानों द्वारा आम, अमरूद, जामुन, नीम, अमलतास, नींबू, आंवला, कनेर आदि फलदार, छायादार एवम् औषधीय पौधे लगाए गए तत्पश्चात सभी के द्वारा जीआरपी एवं आवासीय परिसर में साफ सफाई अभियान चलाया गया।


इस अवसर पर कप्तान महोदया द्वारा समस्त अधि०/कर्म० को अधिक से अधिक संख्या में वृक्षारोपण कर पर्यावरण को हरा-भरा रखने एवं "एक पौधा मां के नाम" लगाने हेतु प्रोत्साहित किया साथ ही सभी जवानों को उनके द्वारा लगाए गए पौधों की देखरेख करने हेतु भी प्रोत्साहित किया गया।


ज्ञात रहे की श्रवण कांवड़ मेले में दिन रात की कठिन ड्यूटी के बावजूद जीआरपी अधिकारियों और जवानों ने तन्मयता से हरेला पर्व पर वृक्षारोपण और सफाई अभियान में प्रतिभाग किया।


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देहरादून :

 

harela festival by chaupal dehradun

चौपाल के संयोजक व मालती रावत सेवा संस्थान के अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार द्वारा उत्तराखण्ड़ की लोक परम्परा, प्रकृति, पर्यावरण, खुशहाली का प्रतीक “हरेला उत्सव” आज सड़क संसद, दीन दयाल पार्क, गांधी रोड़, देहरादून मे आयोजित किया गया। 

इस अवसर पर विभिन्न संगठनों ने हरेला उत्सव मे बढ़चढ़ कर भागीदारी कर संयुक्त रुप से हरियाली की पूजा अर्चना की गई। इस अवसर पर बोलते हुए उत्तराखण्ड़ कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष, चौपाल के संयोजक व मालती रावत सेवा संस्थान के अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार ने कहा कि हरेला हमारी परम्परा, हमारी संस्कृति की प्रतीक है मॉ नंदा देवी के मायके से जुड़ी हमारी परम्पराओं को इससे जोड़कर देखा जाता है  उत्तराखण्ड़ में हमारी बेटीयों को मायके से खुशहाली के रुप में हरियाली भेजने की परम्परा है, शिव-पार्वती के रुप में भी ये परम्परा विद्धमान रही है। उन्होने कहा कि राज्य की जनता को हरेला महसोत्सव व घी संक्राद की शुभकामनाए देते हुए कहा कि हमें अपने राज्य की इस प्राकृतिक व सास्कृतिक विरासत को अपने आने पीढी के लिये भी सहज के रखना है, इस प्रकृतिक व सास्कृतिक विविधता के सम्वर्धन व सुवर्धन के लिये भी प्रयास करना है। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अपना परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष पुरुषोत्तम भटट ने सभी को हरेला की शुभकामना देते हुए बताया हमें अपने राज्य की इस प्राकृतिक व सास्कृतिक विरासत को अपने आने पीढी के लिये भी सहज के रखना है, इस प्रकृतिक व सास्कृतिक विविधता के सम्वर्धन व सुवर्धन के लिये भी प्रयास करना है। उन्होने कहा कि आज घी संक्राद भी है मैं राज्य के सब लोगों को हरेला महोत्सव व घी संक्राद की शुभकामनाए दी। 

कार्यक्रम का संचालन कर रहे मोहन सिंह नेगी ने जनकवि सतीश धौलाखण्ड़ी से हरेला उत्सव के उपलक्ष्य मे पेड़ है सासे पेड़ है जीवन गीत गाया गया उपस्थित सभी लोगों ने ताली बजाकर धौलाखण्ड़ी का उत्साह बढ़ाया। 

 पं0 शशि बल्लभ शास्त्री द्वारा हरियाली की पूजा अर्चना सम्पन्न कराई तथा झंगोरे की खीर व मंडुवे की पकौड़ी के प्रसाद के रुप में वितरित की गई। इस अवसर पर कामरेड़ जगदीश कुकरेती, कामरेड़ समर भण्ड़ारी, राज्य आन्दोलनकारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, कामरेड़ सोहन सिंह रजवार, कांग्रेस नेता महेन्द्र गुरुजी, पूर्व ज्यूष्ठ प्रमुख जौनपुर महिपाल सिंह रावत, जनकवि सतीश धौलाखण्ड़ी, कुलदीप प्रसाद, अधिवक्ता प्रेम सिंह दानू, हरजिन्दर सिंह, विकास कुमार, राकेश पंत, प्रो0 प्रदीप जखमोला, अवधेश पंत, ट्रेड यूनियन राकेश डोभाल, आकाश राणा, हरीश जोशी, जसवंत सिंह जगपांगी, संजय कोठियाल, मंजूर अहमद बेग, आदि उपस्थित रहे।




sdrf uttarakhand harela festival


उत्तराखंड राज्य के पारंपरिक लोक पर्व हरेला के शुभ अवसर पर आज दिनांक 16 जुलाई 2025 को SDRF वाहिनी मुख्यालय, जॉलीग्रांट एवं प्रदेश में व्यवस्थापित SDRF की विभिन्न पोस्टों पर पर्यावरण संरक्षण की भावना के साथ वृहद वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया।


कमांडेंट SDRF श्री अर्पण यदुवंशी के दिशा-निर्देशन में आयोजित इस अभियान में SDRF के अधिकारियों, जवानों एवं उनके परिवारजनों द्वारा उत्साहपूर्वक सहभागिता की गई। इस अवसर पर रुद्राक्ष, आँवला, जामुन, अशोक, आम, पिलखन,  जैसे छायादार व फलदार वृक्षों का रोपण किया गया।


SDRF द्वारा इस पहल के माध्यम से राज्य की पारंपरिक सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी जनसामान्य तक पहुँचाया गया।


वृक्षारोपण कार्यक्रम में वाहिनी के अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।


उत्तराखंड की लोक परंपराओं में प्रकृति के संरक्षण की भावना सदैव रही है, और SDRF इस भावना को अपनाते हुए निरंतर पर्यावरणीय उत्तरदायित्वों का निर्वहन करती आ रही है।

 

 डा.श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर स्मरण।


श्री बदरीनाथ धाम: 




जनसंघ के संस्थापक प्रखर राष्ट्रवादी डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उनका स्मरण करते हुए  यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के  " एक पेड़ मां के नाम" हरित धरा अभियान के तहत श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने श्री बदरीनाथ धाम के झुनझुन काटेज परिसर में वृक्षारोपण रोपण किया।

इस अवसर पर पेड़वाले गुरुजी धन सिंह घरिया बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे।


बीकेटीसी द्वारा वन‌ विभाग के सहयोग से भोजपत्र, बुरांश, रैक्चयू के वृक्षों का रोपण किया गया। इस अवसर पर बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि आज का दिन स्मरणीय है जनसंघ के संस्थापक डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर बचाने को अपना बलिदान दिया था इस अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं उन्ही का स्मरण करते हुए यह वृक्षारोपण किया गया है साथ ही देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक पेड़ मां के नाम अभियान को भी मंदिर समिति आगे बढा रही है प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश को हरित प्रदेश बनाने का संकल्प लिया है जिससे हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण भी होगा।


इस अवसर पर बीकेटीसी बदरीनाथ प्रभारी अधिकारी विपिन तिवारी, अवर अभियंता गिरीश रावत, नंदिदेवी नेशनल पार्क फूलो की घाटी रेंज से अजय सिंह रावत,निजी सचिव प्रमोद नौटियाल, बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़, अजीत भंडारी, राहुल नेगी, हरीश जोशी, हरीश बिष्ट आदि मौजूद रहे।

 

पेड़ लगाए, पेड़ बचाए, सांसों को बढ़ाएं - कैप्टन चन्द्र प्रकाश शर्मा                                       

 शिवपुरी :



 पंचतत्व (क्षिति जल,पावक, गगन, वायु ) को सुरक्षित रखने के लिए वृक्षारोपण करना बहुत जरूरी है। पेड़ होंगे तो शुद्ध वायु के द्वारा मजबूत फेफड़े होंगे, हमारी सांसे लंबी होगी, जीवन स्वस्थ होगा। इसलिए "पेड़ लगाए हम, सांसों को बढ़ाएं हम"। यह शब्द अखंड ब्राह्मण सेवा समिति भारतवर्ष के जिला अध्यक्ष कैप्टन चंद्र प्रकाश शर्मा ने हाथीखाना में पेड़ लगाते हुए कहे।

  कैप्टन चंद्र प्रकाश शर्मा ने कहा कि आजकल हम पेड़ काटते हैं, तोड़ते हैं, लगाते नहीं है । मगर फल चाहिए, फूल चाहिए, छाया चाहिए, शुद्ध हवा चाहिए, कहां से लाओगे।  पर्यावरण को शुद्ध रखना हम सबका कर्तव्य है।  पर्यावरण में जो जहरीला प्रदूषण फैलता है , वह प्रदूषण मानव और अन्य जीव जंतुओं के लिए हानिकारक होता है । पर्यावरण प्रदूषण, औद्योगीकरण से निकलने वाला कचरा, वायु और धुवाँ हवा को प्रदूषित करता है ।और अम्लीय वर्षा  होती है । अपशिष्ट जहरीला पदार्थ जो निकलता है वह जल में मिल जाता है, इस प्रकार से जल भी प्रदूषित हो जाता है । और जल के प्रदूषित होने से जो जलीय जीव होते हैं , उनको नुकसान होता है । आधुनिकीकरण , आधुनिक प्रौद्योगिकी में अपनी प्रक्रियाओं से अनेक प्रकार की गैसों के साथ रसायन युक्त पदार्थ के माध्यम से जल , थल और वायु सभी को प्रदूषित करता है । 

आज  मानव जल्दबाजी में रहता है , वह साइकिल से नहीं चलता है। विभिन्न प्रकार के वाहनों से वायु प्रदूषण फैलता है ।  

श्रीमती कृष्णा त्रिपाठी ने कहा कि कंपोस्ट खाद, गोबर आदि का प्रयोग कम हो गया है। खेती में रसायनों का प्रयोग बढ़ गया है ।  रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंचाते हैं । खेतों में कीट लग जाते हैं।  उनको नष्ट करने के लिए कीटनाशक का जो उपयोग किया जाता , दवाओं का जो प्रयोग किया जाता है। हमारे स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता  है। 

 महासचिव दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है, यह सब पर्यावरण  प्रदूषण को बढ़ाता है । यह मिट्टी के कटाव, जल प्रदूषण , वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार होता है। पेड़ों की अंधा धुंध कटाई ,जनसंख्या वृद्धि है । कारखाने वायु प्रदूषण को जन्म देते है। वायु में कार्बन । सभी जीव जंतुओं को हानि पहुंचती है ।

सचिव अंकिता दीक्षित  ने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करना चाहिए । सिंगल यूज प्लास्टिक पर कठोरता के साथ बैन लगाना चाहिए। इस  अवसर पर वरिष्ठ स्काउट कमिश्नर प्रेम प्रकाश शर्मा, सुभाष शर्मा, उपाध्यक्ष हरवंश त्रिवेदी , श्रीमती प्रभा शर्मा , जिला अध्यक्ष श्रीमती कृष्णा त्रिपाठी, श्रीमती विमला शर्मा, श्रीमती अंजना दीक्षित, श्रीमती शशि शर्मा, विनोद शर्मा, सलाहकार कैलाश नारायण मुद्गल, संभागीय सचिव बालमुकुंद पुरोहित, वंश पुरोहित, तरुण शर्मा, देवेंद्र शर्मा मड़वासा, हरि बल्लभ शर्मा आनंद कुमार शर्मा, कैप्टन चन्द्र प्रकाश शर्मा, आयुष त्रिपाठी, पीयूष त्रिपाठी, एडवोकेट वरुण शर्मा, श्रीमती राजकुमारी शर्मा, श्रीमती गीता शर्मा, श्रीमती संध्या शर्मा, कु  वैष्णवी पुरोहित , श्रीमती बसंती शर्मा, कु आस्था शर्मा, कु आयुषी शर्मा, कु  मोनिका शर्मा, श्रीमती प्रभा शर्मा , श्रीमती रोशनी शर्मा , पंडित अभिमन्यु शर्मा ,पंडित ऐन के शर्मा, महासचिव दिनेश चंद्र शर्मा उपस्थित रहे। संचालन श्रीमती राजकुमारी शर्मा और श्रीमती प्रभा शर्मा ने आभार व्यक्त किया।

 डोईवाला:

आज दिनांक 5 जून पर्यावरण दिवस के अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष नरेंद्र सिंह नेगी , सभासद  प्रतिनिधि  वार्ड 20 प्रकाश कोठारी, सभासद ईश्वर रौथान, डोईवाला रेलवे रोड के वरिष्ठ व्यापारी पन्नालाल गोयल, बबिश चावला, मनीष सिद्धू , आयुष मल्ल ,मोहित डंगवाल,अभिनव गोपाल राणा,  , डोईवाला रेलवे स्टेशन के प्रांगण में पौधारोपण का कार्य किया गया।




 इस अवसर  पर  सभी के द्वारा जामुन, आवाला, अर्जुन की छाल आदि के पेड़ लगा कर पर्यावरण को स्वच्छ व सुंदर बनाने का संकल्प लिया गया

 

ऋषिकेश :

plantation by  MLA Rishikesh


क्षेत्रीय विधायक व पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कहा कि पर्यावरण संरक्षण में उत्तराखण्डवासियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 


प्रदेश सरकार समृद्ध जैव संसाधनों के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध हैं। इस मौके पर डॉ अग्रवाल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंचालक माधव राव सदाशिव राव गोलवलकर तथा पूर्व मंत्री प्रकाश पंत की पुण्य स्मृति पर पौधे रोपकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।


 इस दौरान यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के जन्मदिन पर भी पौधारोपण किया गया।


कैम्प कार्यालय में डॉ अग्रवाल ने पौधारोपण करते हुए कहा कि हमें सामूहिक रूप से प्रकृति के संरक्षण की दिशा में भी चिन्तन करना होगा। उन्होंने कहा कि सरकारी प्रयासों के साथ ही जनता, जन प्रतिनिधियों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं का पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन चेतना जागृत करने और इसके संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान है।


उन्होंने कहा प्रकृति को सहेज कर रखना हमारी गौरवशाली परम्परा है, जिसका प्रमाण वृक्षों की पूजा से मिलता है। उन्होंने कहा कि यह दिवस हमें मानव और प्रकृति के मध्य बेहतर सामंजस्य की आवश्यकता को रेखांकित करता है। यह दिवस साथ ही यह याद भी दिलाता है कि हम पर्यावरण को संरक्षित रखें। 


कहा कि पर्यावरण संतुलन बिगड़ने से आज जल, वायु, भूमि सभी क्षेत्रों में प्रदूषण एक बड़ी चुनौती के रूप में हमारे सामने है। उन्होंने कहा है कि पर्यावरण प्रदूषण से बचाव के लिए हमें अधिक से अधिक सामाजिक वानिकी-कृषि वानिकी को अपनाना होगा।


इस मौके पर पूर्व मंडल अध्यक्ष सुमित पवार, शिव कुमार गौतम, सोनू पांडे, संजय ध्यानी, मयंक शर्मा, विनायक कुमार, सौरभ रावत, वीरेंद्र रावत आदि परिजन उपस्थित थे।

 धनौल्टी:

आज ग्राम पंचायत धनौल्टी में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर स्वच्छता अभियान और वृक्षारोपण कार्यक्रम किया गया।। 

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जिसमें प्रशासक नीरज बेलवाल, इको पार्क सचिव मनोज उनियाल, कुलदीप नेगी, वन विभाग से प्रमोद बंगवाल सुशील गौड़ और इको समिति के सदस्य मौजूद रहे।।।

            

 सेलाकुई  :



  रविवार को  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नगर सेलाकुई में पर्यावरण संरक्षण गतिविधि में हरित संगम कार्यक्रम  की गोष्टी का आयोजन हुआ |


 जिसमे  पर्यावरण को कैसे बचाया जा सकता है | कही  महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चाएं हुयी | जिसमे  चंदन, प्रांत पर्यावरण संयोजक मुख्य वक्ता  रहे | इसमे कार्यक्रम का सचलान बलवन्त ,पर्यावरण  मित्र ने किया | इस मौके पर जयकृत, पियूष , योगेश सेमवाल, ज्ञान  सिंह राणा , रविंद्र रमोला, अनिल नौटियाल, सभी नगर कार्यकारिणी मौजूद रही,

 

Elephant moving in residential area
ऋषिकेश/हरिद्वार:

रविवार शाम को ऋषिकेश में बैराज कॉलोनी में अचानक बैराजपुर से होते हुए एक  हाथी घुस आया। जिसे आता देखकर कॉलोनी वीडियो में हड़कंप मच गया और सब इधर-उधर भागने लगे देहाती कॉलोनी से होता हुआ मीरा बहन की कुटिया से होता हुआ आगे निकल गया परंतु इसी बीच इसने सड़क पर चल रहे एक मुक बधिर व्यक्ति को उठाकर पटक दिया।

उसे व्यक्ति को तुरंत अस्पताल ले जाया गया परंतु मुख बधिर होने के कारण उसकी पहचान नहीं हो पाई है।

हरिद्वार बहादराबाद क्षेत्र से भी इसी प्रकार की घटनाएं सुनने को मिल रही है रोहलकी किशनपुर गांव में भी हाथी चहलकदमी करते हुए देखे गए है। रोहलकी किशनपुर से सटे से हुए खेतों में भी हाथियों ने तूफान मचाया है। किसानों का कहना है कि किसी  हथिनी ने बच्चों को जन्म दिया है,इसकी खबर है। परंतु वन विभाग कोई बात सुनने को तैयार नही है। उनका कहना है कि हाथी तो आएगा ही।

बड़े बड़े विकास कार्यों , पुलों, फ्लाई ओवर, हाईवे के निर्माणों ने हाथियों के कॉरिडोर को ध्वस्त कर दिया जिस कारण वे इधर उधर इंसानी मानव बस्तियों रुख करते है।इसके अतिरिक्त वन क्षेत्र में कमी आना भी इसका महत्वपूर्ण कारण है। खासतौर से उत्तराखंड में जंगलों को भारी नुकसान पंहुच है, जिसका खामियाजा इन जानवरों को चुकाना पड रहा है।ऐसे में ये भोजन के लिये बस्तियों की और खेतों की और जाते है।


चूंकि हाथी विशालकाय जीव है अतः इसे कोई डर भी नही होता। अमूमन सर्दियों में हाथी अपने कॉरिडोर में विचरण करते हुए अपने स्थान को परिवर्तित भी करते है।अपने रास्ते को आजीवन याद रखते है। उनके रास्ते मे आये निर्माणों पर उनका आक्रोशित होना स्वाभाविक है।  गन्ने की फसल की तरफ भी आकर्षित होते है क्योंकि यह उनका पसंदीदा भोजन है। शाकाहारी यह जीव शांत स्वभाव का होता है परंतु आक्रोशित हो जाने पर आक्रामक होता है। जंगल की तरफ और खेतों की तरफ रहनेवाले किसानों और राहगीरों को चाहिए कि सावधान रहें।

हाथियों के कॉरिडोर को लेकर समीक्षा की आवश्यकता भी है।

विशेषज्ञों और वन विभाग को चेतने की आवश्यकता है अन्यथा दुष्परिणाम हो सकते है।

कुल मिलाकर विकास के नाम पर पर्यावरण को नष्ट करना और उसके अनदेखी करना मनुष्य कर सकता है सकता है परंतु जीव जंतु प्रकृति को नष्ट होते हुए नहीं देख सकते हैं और अपने घरों पर कब्जा तो कोई भी बर्दाश्त नहीं कर सकता तो हाथी भी क्यों करें?


 केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023 जारी की


देहरादून :

India forest condition report released Uttarakhand

 पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून में ‘भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023’ का विमोचन किया। उल्लेखनीय है कि 1987 से भारतीय वन सर्वेक्षण द्वारा द्विवार्षिक आधार पर भारत वन स्थिति रिपोर्ट को प्रकाशित किया जा रहा है। भारतीय वन सर्वेक्षण (भा.व.स.) सुदूर संवेदन उपग्रह आंकड़ों और फील्ड आधारित राष्ट्रीय वन इन्वेंट्री (रा.व.इ) के निर्वचन के आधार पर देश के वन और वृक्ष संसाधनों का गहन आकलन करता है और इसके परिणाम भारत वन स्थिति रिपोर्ट (भा.व.स्थि.रि.) में प्रकाशित किए जाते हैं। भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023 इस श्रृंखला की 18वीं रिपोर्ट है।


रिपोर्ट में, वनावरण, वृक्ष आवरण, कच्छ वनस्पति आवरण, भारत के वनों में कार्बन स्टॉक, वनाग्नि की घटनाएं, कृषि वानिकी आदि विषयों पर जानकारी शामिल है। देश के स्तर पर वन स्वास्थ्य की विस्तृत तस्वीर पेश करने के लिए, वनावरण और वनों की महत्वपूर्ण विशिष्टताओं पर विशेष विषयगत जानकारी भा.व.स्थि.रि. में दर्शाई गई है। वर्तमान आकलन के अनुसार, कुल वन और वृक्ष आवरण 8,27,357 वर्ग कि.मी. है, जो देश के भौगोलिक क्षेत्र का 25.17 प्रतिशत है। वनावरण का क्षेत्रफल लगभग 7,15,343 वर्ग कि.मी. (21.76 प्रतिशत) है जबकि वृक्ष आवरण का क्षेत्रफल 1,12,014 वर्ग कि.मी. (3.41 प्रतिशत) है।


  उन्होंने ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की है कि 2021 की तुलना में देश के कुल वन और वृक्ष आवरण में 1445 वर्ग किलोमीटर की वृ‌द्धि हुई है। उन्होंने उन्नत प्रौ‌द्योगिकी का इस्तेमाल करके भा.व.स द्वारा प्रदान की जाने वाली नियर रियल टाइम अग्नि चेतावनी और वन अग्नि सेवाओं पर भी प्रकाश डाला।


प्रमुख निष्कर्ष 

देश का वन एवं वृक्ष आवरण 8,27,367 वर्ग कि.मी. है जो देश के भौगोलिक क्षेत्र का 25.17 प्रतिशत है, जिसमें 7,15,343 वर्ग कि.मी. (21.76 प्रतिशत) बनावरण और 1,12,014 वर्ग कि.मी. (3.41 प्रतिशत) वृक्ष आवरण है।

वर्ष 2021 की तुलना में, देश के वन और वृक्ष आवरण में 1445 वर्ग कि.मी. की वृद्धि हुई है, जिसमें वनावरण में 156 वर्ग कि.मी. और वृक्ष आवरण में 1289 वर्ग कि.मी. की वृद्धि शामिल है।

वन एवं वृक्ष आवरण में अधिकतम वृ‌द्धि दर्शाने वाले शीर्ष चार राज्य हैं- छत्तीसगढ़ (684) वर्ग कि.मी.), उत्तर प्रदेश (559 वर्ग कि.मी.), ओडिशा (559 वर्ग कि.मी.) तथा राजस्थान (394 वर्ग कि.मी.) हैं।

वनावरण में अधिकतम वृद्धि दर्शाने वाले शीर्ष तीन राज्य हैं- मिजोरम (242 वर्ग कि.मी.), गुजरात (180 वर्ग कि.मी.) और ओडिशा (152 वर्ग कि.मी.) हैं।

क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे अधिक वन एवं वृक्ष आवरण वाले शीर्ष तीन राज्य हैं- मध्य प्रदेश (85,724 वर्ग कि.मी.), अरुणाचल प्रदेश (67,083 वर्ग कि.मी.) और महाराष्ट्र (65,383 वर्ग कि.मी.) है।

क्षेत्रफल की दृष्टि से सर्वाधिक वनावरण वाले शीर्ष तीन राज्य हैं- मध्य प्रदेश (77,073 वर्ग कि.मी.), अरुणाचल प्रदेश (65,882 वर्ग कि.मी.) और छत्तीसगढ़ (55,812 वर्ग कि.मी.) हैं।

कुल भौगोलिक क्षेत्रफल की तुलना में वन आवरण के प्रतिशत की दृष्टि से, लक्ष‌द्वीप (91.33 प्रतिशत) में सबसे अधिक वन आवरण है, जिसके बाद मिजोरम (85.34 प्रतिशत) और अंडमान एवं निकोबार द्वीप (81.62 प्रतिशत) का स्थान है।

वर्तमान आकलन से यह भी जात होता है कि 19 राज्यों/केंद्र शासित क्षेत्रों में 33 प्रतिशत से अधिक भौगोलिक क्षेत्र वनावरण के अंतर्गत हैं। इनमें से आठ राज्यों/केंद्र शासित क्षेत्रों, जैसे मिजोरम, लक्ष‌द्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मेघालय, त्रिपुरा और मणिपुर में 75 प्रतिशत से अधिक वनावरण है।

कुल कच्छ वनस्पति आवरण 4,992 वर्ग कि.मी. है।

भारत के वन और वाह्य वन वृक्षों की कुल निधि 6430 मिलियन घन मीटर अनुमानित की गई है, जिसमें से 4479 मिलियन घन मीटर वनों के भीतर और 1951 मिलियन घन मीटर वन क्षेत्र के बाहर है। पिछले आकलन की तुलना में कुल निधि में 262 मिलियन घन मीटर की वृद्धि हुई है, जिसमें 91 मिलियन घन मीटर वनों के भीतर और 171 मिलियन घन मीटर वन क्षेत्र के बाहर की वृद्धि शामिल है।

देश में बांस धारित क्षेत्र का विस्तार 1,54,670 वर्ग किलोमीटर अनुमानित किया गया है। वर्ष 2021 में किए गए पिछले आकलन की तुलना में बांस क्षेत्र में 5,227 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है वाह्य वन वृक्षों से औ‌द्योगिक काष्ठ का कुल वार्षिक संभावित उत्पादन 91.51 मिलियन घन मीटर अनुमानित किया गया है।

वर्तमान आकलन में देश के वनों में कुल कार्बन स्टॉक 7,285.5 मिलियन टन अनुमानित किया गया है। पिछले आकलन की तुलना में देश के कार्बन स्टॉक में 81.5 मिलियन टन की वृद्धि हुई है।

एनडीसी के लक्ष्यों की प्राप्ति के संबंध में, वर्तमान आकलन से ज्ञात होता है कि भारत का कार्बन स्टॉक 30.43 बिलियन टन CO₂ के समतुल्य तक पहुंच गया है, जो दर्शाता है कि 2005 के आधार वर्ष की तुलना में, भारत पहले ही 2.29 बिलियन टन अतिरिक्त कार्बन सिंक तक पहुंच चुका है, जबकि 2030 तक 2.5 से 3.0 बिलियन टन का लक्ष्य रखा गया है।

 

देश के वन एवं वृक्ष संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करने के अलावा, भा.व.स्थि.रि. में दिए गए आंकड़े नीति निर्माताओं, योजनाकारों, राज्य वन विभागों, अनुसंधान संगठनों, विभिन्न विकास कार्यों में शामिल एजेंसियों, शिक्षाविदों, सिविल सोसायटी और प्राकृतिक संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन में रुचि रखने वाले अन्य हितधारकों के लिए सूचना के उपयोगी स्रोत के रूप में कार्य करते हैं।

 ऋषिकेश:

नगर-निगम  ऋषिकेश द्वारा मुख्य बाजार, सब्जी मंडी आदि क्षेत्रों में  रात्रि सफाई  का कार्य शुरू किया गया है। 

Cleaning campaign in Rishikesh


इससे पूर्व तीन-चार महीने पहले इसी क्षेत्र में रात्रि में  door to door कूड़ा उठाने का कार्य शुरू किया गया था जो बहुत सफल हुआ है इसके साथ ही सफाई का कार्य भी शुरू कर दिया गया है ताकि बाजार क्षेत्र में दुकान बंद होने के बाद गंदगी सड़क पर ना दिखाई दे।


दिनांक 27/11/24 को मेन मार्केट ,घाट रोड, मुखर्जी मार्ग , क्षेत्र रोड पर नाइट्  स्वीपिंग का कार्य किया गया और सफाई  करने के पश्चात कूडे को डोर टू डोर कूड़ा वाहन में भरवाया गया।


नगर आयुक्त द्वारा सभी  व्यापारी गणों एवं अन्य प्रतिष्ठान स्वामियों से अनुरोध किया गया है कि कृपया अपनी दुकान में कूड़ादन जरूर रखें और नगर निगम  वाहन को कूड़ा दें। सड़क पर किसी भी दिशा में कूड़ा न डालें । अन्यथा की स्थिति में चालानी एवं अन्य विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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