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 *मुख्यमंत्री ने भारी बारिश के मद्देनज़र अधिकारियों को सतर्क रहने के दिए निर्देश*



प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हो रही भारी वर्षा को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्धन और सचिव आपदा प्रबंधन श्री विनोद कुमार सुमन को पूरी स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा है कि जहां कहीं भी भारी बारिश, भूस्खलन या सड़क बंद होने जैसी स्थिति उत्पन्न हो, वहां प्रशासन तत्काल कार्रवाई करे। राहत एवं बचाव दल पूरी तरह तैयार रहें और प्रभावित लोगों को समय पर हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए।


मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सड़क, बिजली, पेयजल और संचार जैसी आवश्यक सेवाएं बाधित होने पर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर बहाल किया जाए। चारधाम यात्रा मार्ग सहित सभी प्रमुख मार्गों की स्थिति पर भी लगातार नजर रखी जाए।


मुख्यमंत्री श्री धामी ने प्रदेशवासियों और राज्य में आने वाले यात्रियों से अपील की है कि मौसम विभाग और प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करें। खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और उफनते नदी-नालों के आसपास जाने से परहेज करें। किसी भी असुविधा या आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क है और सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

*24×7 अलर्ट मोड में रहें सभी विभाग-सुमन*

*मा0 मुख्यमंत्री के निर्देश पर सचिव आपदा प्रबंधन ने की स्थिति की समीक्षा*

*संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश*

देहरादून;


 प्रदेश में लगातार सक्रिय मानसून तथा भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा कुछ जनपदों के लिए 20 जुलाई को रेड तथा ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने के उपरांत माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन से प्रदेशभर में स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने सभी विभागों एवं जनपदों को पूर्ण सतर्कता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं।


मा0 मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने रविवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केन्द्र (SEOC) पहुंचकर प्रदेशभर बारिश से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान मौसम पूर्वानुमान, संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति, सड़क संपर्क, नदियों के जलस्तर, राहत एवं बचाव संसाधनों की उपलब्धता तथा विभिन्न विभागों की तैयारियों का विस्तृत आकलन किया गया।


सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 20 जुलाई 2026 को देहरादून, टिहरी गढ़वाल एवं हरिद्वार जनपदों में रेड अलर्ट, उत्तरकाशी, नैनीताल, चम्पावत, पौड़ी एवं ऊधम सिंह नगर में ऑरेंज अलर्ट, जबकि रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा, बागेश्वर एवं पिथौरागढ़ में येलो अलर्ट जारी किया गया है। रेड अलर्ट वाले क्षेत्रों में कहीं-कहीं अत्यधिक से बहुत भारी वर्षा, भूस्खलन, जलभराव, अचानक बाढ़ जैसी परिस्थितियां तथा नदी-नालों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि की संभावना जताई गई है।


सचिव आपदा प्रबंधन ने सभी जनपद स्तरीय अधिकारियों एवं संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि मौसम विभाग द्वारा जारी प्रत्येक चेतावनी पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जिला एवं तहसील स्तर के आपदा नियंत्रण कक्षों को पूरी तरह सक्रिय रखा जाए तथा किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव दल बिना विलंब मौके पर पहुंचें।


उन्होंने कहा कि नदियों, बरसाती नालों, गाड़-गदेरों तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी रखी जाए। जोखिम वाले स्थानों पर रहने वाले परिवारों को आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए। निर्माणाधीन परियोजनाओं, सड़क निर्माण कार्यों तथा अन्य संवेदनशील स्थलों पर कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए खराब मौसम के दौरान आवश्यकतानुसार कार्य स्थगित करने के निर्देश भी दिए गए।


सचिव ने लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई, बीआरओ तथा अन्य कार्यदायी संस्थाओं को ग्रामीण एवं राष्ट्रीय राजमार्गों सहित सभी महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर सुचारु रखने के निर्देश दिए। उन्होंने संवेदनशील मार्गों पर जेसीबी, पोकलेन मशीनें, डंपर, आवश्यक उपकरण एवं प्रशिक्षित मानवबल की अग्रिम तैनाती सुनिश्चित करने को कहा, ताकि मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।


उन्होंने जल संस्थान, ऊर्जा, स्वास्थ्य, पुलिस, एसडीआरएफ, अग्निशमन तथा अन्य संबंधित विभागों को भी पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि पेयजल, विद्युत, संचार एवं अन्य आवश्यक सेवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा किसी भी व्यवधान की स्थिति में त्वरित बहाली की जाए।


बैठक में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) एवं डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, डॉ. शांतनु सरकार, डॉ. मोहित पूनिया, सभी जनपदों के ओसी आपदा तथा जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी (DDMO) वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।


प्रदेशवासियों से सतर्कता बरतने की अपील

देहरादून। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्ट को गंभीरता से लें तथा खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें। विशेषकर नदी-नालों, गाड़-गदेरों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों एवं जलभराव वाले स्थानों से दूर रहें। किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन, जिला आपदा नियंत्रण कक्ष अथवा आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करें तथा केवल शासन एवं प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें।

 डोईवाला:



डोईवाला:

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आज दिनांक 19/7/2026 को विश्व हिंदू परिषद दुर्गा वाहिनी मातृ शक्ति द्वारा एक दिवसीय बाल संस्कार वर्ग स्थान आयुष्मान गार्डन शक्ति वाला डोईवाला जिला ऋषिकेश में लगाया गया ,जिसमें बच्चों को संस्कार सिखाने के लिए बहनों को मानसिक रूप से तैयार किया 


जिसमें 4 सत्रों एवं सह भोज करके वर्ग किया, 4 सत्रों में बहनों को बताया गया कि की आज के समय में बच्चों को भारतीय संस्कृति, हिन्दू धर्म, श्लोक, भोजन मंत्र , दीप मंत्र, देश भक्ति गीत, महा पुरुषों की जीवनी के बारे में जानकारी दी, जिसमें में कुल संख्या 85 रही। वर्ग में मुख्य वक्ता श्रीमती नीलम त्रिपाठी जी प्रांत सह संयोजिका मातृ शक्ति, वर्ग अध्यक्ष श्रीमती संध्या कौशिक जी प्रांत कार्यकारणी सदस्य विश्व हिन्दू परिषद् एवं भावना ठाकुर जी प्रांत विद्यार्थी संपर्क प्रमुख विश्व हिन्दू परिषद् दुर्गा वाहिनी ! साथ ही व्यवस्था में राखी क्षेत्री जी जिला संयोजिका दुर्गा वाहिनी, लक्ष्मी जी जिला सह संयोजिका दुर्गा वाहिनी, एवं सोनी पुंडीर जी जिला संयोजिका मातृ शक्ति ऋषिकेश, अतिथि के रूप में अर्जुन जी विभाग संगठन मंत्री हरिद्वार विभाग (पूर्णकालिक),अजय भगवा जी जिला मंत्री , राजेंद्र पांडे जी जिला अध्यक्ष जिला ऋषिकेश विश्व हिन्दू परिषद वर्ग में उपस्थित रहे




आज दिनांक 19.07/2026 को सिटी कंट्रोल रूम द्वारा सूचना प्राप्त हुई कि *संतला देवी मंदिर* के आसपास नदी के बीच में कुछ लोग फंस गए हैं। नदी में पानी का बहाव तेज होने के कारण उन्हें तुरंत रेस्क्यू की आवश्यकता थी।


सूचना मिलते ही फायर स्टेशन टीम देहरादून मौके के लिए रवाना हुई।  

*रेस्क्यू टीम:*  

1. DVR - आकाश चौधरी  

2. FM - विनोद  

3. FM - भूपेंद्र  

4. WFM - अंजलि  

5. WFM - शालिनी  


फायर सर्विस की टीम व SDRF टीम ने संयुक्त रेस्क्यू अभियान चलाया तथा मल्टी परपज रोप व थ्रो बैग व अन्य उपकरणों की सहायता से सभी फंसे हुए लोगों को सकुशल नदी से बाहर निकाला गया।


*रेस्क्यू किए गए व्यक्तियों के नाम:*  

1. सुशील पुत्र इंद्रदेव, उम्र 26 वर्ष, निवासी सीमा द्वार  

2. मुकेश पुत्र महादेव, उम्र 35 वर्ष, निवासी बल्लीवाला  

3. प्रेम कुमार पुत्र महेंद्र, उम्र 27 वर्ष, निवासी सीमा द्वार  

4. रोशन गुप्ता पुत्र जनार्दन, उम्र 32 वर्ष  

5. राजेश पुत्र महेंद्र, उम्र 30 वर्ष, निवासी सीमा द्वार  

6. पवन पुत्र इंद्रदेव, उम्र 25 वर्ष, निवासी सीमा द्वार  

7. सूरज पुत्र  सिताई उम्र 30 वर्ष, निवासी सीमा द्वार  


*मौके पर उपस्थित:*  

रेस्क्यू के दौरान *सीओ मसूरी महोदय* व *थाना केंट* के पुलिसकर्मी व SI मौजूद रहे। इसके अतिरिक्त स्थानीय लोगों द्वारा भी रेस्क्यू कार्य में काफी सहयोग प्रदान किया गया।

देहरादून:

dholi garwali fim awarded 72nd national film fare


72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (फीचर फिल्म श्रेणी) में सर्वश्रेष्ठ गढ़वाली फ़िल्म के रूप में ‘ढोली’ को प्रतिष्ठित रजत कमल पुरस्कार तथा ₹2 लाख की नकद राशि से सम्मानित किए जाने पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने फिल्म की पूरी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।


मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि गढ़वाली फ़िल्म ‘ढोली’ को राष्ट्रीय स्तर पर मिला यह सम्मान उत्तराखंड की समृद्ध लोकभाषा, लोक संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत का सम्मान है। यह उपलब्धि प्रदेश के फिल्म उद्योग, कलाकारों और रचनाकारों के लिए प्रेरणादायक है तथा गढ़वाली सिनेमा को नई पहचान प्रदान करेगी।


मुख्यमंत्री ने फ़िल्म के निर्माता एससी फार्माकेम प्राइवेट लिमिटेड, निर्देशक दिनेश पी. भोंसले तथा पूरी टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराओं को प्रभावी ढंग से देश-दुनिया तक पहुंचाने में क्षेत्रीय सिनेमा की महत्वपूर्ण भूमिका है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को फिल्म निर्माण के अनुकूल गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। नई फिल्म नीति के माध्यम से प्रदेश में फिल्म निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं को नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं।



accident at bhavali, naini tal


दिनांक 18 जुलाई 2026 देर रात्रि जनपद नैनीताल के भवाली-रामगढ़ मार्ग पर कुलाटी बैड के समीप एक कार के गहरी खाई में गिरने की सूचना प्राप्त होने पर एसडीआरएफ पोस्ट नैनीताल की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों घायलों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया।

आपदा कंट्रोल रूम, नैनीताल से सूचना प्राप्त होते ही उप निरीक्षक मनीष भाकुनी के नेतृत्व में एसडीआरएफ टीम आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों के साथ तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई।

घटनास्थल पर पहुँचने पर पाया गया कि महिंद्रा मराजो कार (वाहन संख्या: DL08CBE0795) सड़क से लगभग 50 मीटर गहरी खाई में दुर्घटनाग्रस्त होकर गिरी हुई थी। वाहन में सवार *_खरेश दुग्गल एवं उनकी पत्नी रितु दुग्गल, निवासी सेक्टर-11, नोएडा,*_ सामान्य रूप से घायल अवस्था में थे।

एसडीआरएफ टीम ने त्वरित एवं सुरक्षित रेस्क्यू अभियान चलाते हुए दोनों घायलों को खाई से बाहर निकाला तथा प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराकर आगे के उपचार हेतु भवाली अस्पताल भेजा गया।

चल पड़ी पहली हाइड्रोजन ट्रेन ... मगर मंज़िल महज़ रेलवे नहीं

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 भारत ने हाइड्रोजन ट्रेन क्यों बनाई, तो शायद पहला जवाब होगा. ताकि डीज़ल की जगह एक साफ़ ईंधन इस्तेमाल हो सके।

जवाब सही है। लेकिन पूरी कहानी नहीं।


असल सवाल यह है कि जब भारतीय रेलवे का लगभग पूरा ब्रॉडगेज नेटवर्क पहले ही बिजली से चलने लगा है, तो फिर हाइड्रोजन ट्रेन की ज़रूरत क्यों पड़ी?


यहीं से इस खबर की असली कहानी शुरू होती है।


हरियाणा के जींद–सोनीपत रेलखंड (करीब 90 किलोमीटर) पर भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू हुई है। यह सिर्फ़ एक नई ट्रेन नहीं, बल्कि भारत के ग्रीन हाइड्रोजन मिशन की चलती. फिरती प्रयोगशाला है।


हाइड्रोजन ट्रेन चलती कैसे है?


इस ट्रेन में डीज़ल इंजन नहीं है।


इसके ऊपर लगे विशेष टैंकों में हाइड्रोजन गैस भरी जाती है। यह हाइड्रोजन फ्यूल सेल में हवा की ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करती है और बिजली बनाती है। यही बिजली ट्रेन के मोटर, एसी, लाइट और बाकी सिस्टम चलाती है।


इस पूरी प्रक्रिया में धुआँ नहीं निकलता। केवल पानी की भाप निकलती है। यानी पटरी पर चलते समय यह ट्रेन स्थानीय स्तर पर लगभग शून्य उत्सर्जन करती है।


ध्यान देने वाली बात यह है कि ट्रेन के आसपास की हवा साफ़ रहती है, हालाँकि हाइड्रोजन बनाने की प्रक्रिया कितनी हरी है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बिजली कहाँ से आती है।

क्या यह दुनिया की सबसे आधुनिक ट्रेन है?


इस 10 डिब्बों वाली ट्रेन में करीब 2600 यात्री सफ़र कर सकेंगे। इसे 75–120 किमी/घंटा की गति वाले उपनगरीय रूटों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें मेट्रो जैसी ऑटोमैटिक बंद होने वाली दरवाज़े, आधुनिक डिस्प्ले, एयर कंडीशनिंग और कई सुरक्षा प्रणालियाँ हैं। हाइड्रोजन रिसाव या आग की आशंका होने पर तुरंत अलर्ट देने वाले सेंसर भी लगाए गए हैं।

इसका एक बड़ा दावा यह भी है कि यह अपनी श्रेणी की दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल है।

लेकिन जब बिजली वाली ट्रेनें पहले से हैं, तो हाइड्रोजन क्यों?

यही सबसे दिलचस्प सवाल है।


अगर किसी रेलमार्ग पर पहले से बिजली की लाइन मौजूद है, तो इलेक्ट्रिक ट्रेन आज भी हाइड्रोजन ट्रेन से ज़्यादा ऊर्जा दक्ष और सस्ती मानी जाती है।

फिर रेलवे हाइड्रोजन पर इतना निवेश क्यों कर रहा है?


क्योंकि इस ट्रेन की मंज़िल सिर्फ़ यात्रियों को एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक पहुँचाना नहीं है।

भारत हाइड्रोजन बनाना, उसे सुरक्षित तरीके से जमा करना, ट्रेन में भरना, फ्यूल सेल बनाना और इस पूरी तकनीक में आत्मनिर्भर होना चाहता है।

यानी यह ट्रेन एक पूरे हाइड्रोजन इकोसिस्टम की शुरुआत है। हाइड्रोजन ट्रेन को आज की तारीख में ‘क्लाइमेट सॉल्यूशन’ से ज़्यादा ‘टेक्नोलॉजी डेमो’ और इंडस्ट्री‑बिल्डिंग प्रोजेक्ट के रूप में देखना ज़्यादा ईमानदार होगा।

क्या इससे रेल किराया सस्ता होगा?


फिलहाल इसकी उम्मीद नहीं करनी चाहिए।


एक हाइड्रोजन ट्रेन बनाने में लगभग 80 करोड़ रुपये तक का खर्च आ सकता है। इसके अलावा हाइड्रोजन बनाने, स्टोर करने और भरने का अलग इंफ्रास्ट्रक्चर भी बनाना पड़ता है, जिसकी लागत भी दर्जनों करोड़ रुपये है।

आज के समय में ग्रीन हाइड्रोजन, बिजली या डीज़ल की तुलना में अभी महंगी है।

इसलिए आज की तारीख में यह परियोजना ‘किराया घटाने’ नहीं, बल्कि ‘भविष्य की लागत को predictable रखने’ और फॉसिल ईंधन पर निर्भरता घटाने की दिशा में उठाया गया कदम है।

हालांकि भविष्य में अगर ग्रीन हाइड्रोजन सस्ती हो जाती है और इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन होने लगता है, तो परिचालन लागत स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। लेकिन अभी ऐसा कहना जल्दबाज़ी होगी।


फिर फायदा किसे होगा?

यात्रियों को कम शोर, साफ़ हवा और आधुनिक सफ़र का अनुभव मिलेगा।

रेलवे को उन इलाकों के लिए एक विकल्प मिलेगा, जहाँ बिजली की लाइन बिछाना मुश्किल या बहुत महंगा है।

और सबसे बड़ा फायदा देश को हो सकता है। 

भारत ने 2070 तक नेट‑ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है; स्टील, उर्वरक और हैवी ट्रांसपोर्ट जैसे ‘कठिन सेक्टरों’ में ग्रीन हाइड्रोजन एक प्रमुख औज़ार माना जा रहा है। यह ट्रेन उस दिशा में शुरुआती अभ्यास है।


अगर भारत हाइड्रोजन तकनीक में महारत हासिल करता है, तो यही तकनीक आगे चलकर स्टील, उर्वरक, भारी ट्रकों और जहाज़ जैसे उन क्षेत्रों में भी काम आ सकती है, जहाँ सिर्फ़ बिजली से काम चलाना आसान नहीं है।


असल कहानी


पहली नज़र में यह सिर्फ़ एक नई ट्रेन लगती है। लेकिन असल में यह भारत की ऊर्जा व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की तैयारी है।

कई बार कोई ट्रेन सिर्फ़ यात्रियों को नहीं ले जाती।

वह एक नई तकनीक, नया उद्योग और भविष्य की नई दिशा भी साथ लेकर चलती है।

 *मुख्यमंत्री धामी ने 180 नेचर गाइडों को रोजगार पंजीकरण प्रमाण-पत्र मिलने पर दी बधाई*




मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास सभागार से तराई पश्चिमी वन प्रभाग, रामनगर के फांटो जोन में आयोजित नेचर गाइड प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार पंजीकरण प्रमाण-पत्र वितरण कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से प्रतिभाग किया। इस अवसर पर 180 महिला एवं पुरुष नेचर गाइडों को रोजगार पंजीकरण प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।



मुख्यमंत्री ने सभी नेचर गाइडों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ये प्रमाण-पत्र केवल रोजगार का दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि युवाओं के कौशल, मेहनत और प्रकृति संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि नेचर गाइड स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने के साथ ही आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।



मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें विशेष प्रसन्नता है कि प्रमाण-पत्र प्राप्त करने वाले अनेक युवा रिवर्स पलायन कर अपने गांव और प्रदेश लौटे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल इन युवाओं की व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के गांवों में लौटते विश्वास, समृद्धि और रोजगार के अवसरों का भी प्रतीक है।



मुख्यमंत्री ने कहा कि फांटो जोन आज केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि ईको-टूरिज्म और समुदाय आधारित पर्यटन का उत्कृष्ट मॉडल बन चुका है। क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जैव विविधता, घने वन, शांत वातावरण और वन्यजीव देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फांटो जोन टाइगर साइटिंग के लिए भी तेजी से अपनी अलग पहचान बना रहा है। यहां विकसित ट्री हाउस पर्यटकों को प्रकृति के बीच अनूठा अनुभव प्रदान कर रहा है और पर्यटन गतिविधियों से प्रदेश को राजस्व प्राप्त होने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी आर्थिक लाभ मिल रहा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि प्रकृति का संरक्षण हो और प्रकृति से जुड़े स्थानीय समुदायों का जीवन भी समृद्ध बने। ईको-टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय युवाओं, महिलाओं, होमस्टे संचालकों, छोटे व्यापारियों, वाहन चालकों, स्थानीय उत्पाद निर्माताओं और ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर यह संतोष का विषय है कि उत्तराखंड ने विकास, सुशासन, रोजगार सृजन और जनकल्याण के क्षेत्र में अनेक नए आयाम स्थापित किए हैं। ईको-टूरिज्म और नेचर गाइड जैसी पहलें स्थानीय युवाओं को उनके गांवों में सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य सेवक के रूप में उनका निरंतर प्रयास रहा है कि उत्तराखंड का युवा अपने ही प्रदेश में रोजगार प्राप्त करे, अपने गांव में रहे और अपने परिवार के साथ रहते हुए प्रदेश के विकास में सहभागी बने।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से राज्य सरकार पर्यटन को केवल पर्यटन गतिविधि तक सीमित न रखकर रोजगार, स्वरोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और रिवर्स पलायन से जोड़ने का कार्य कर रही है। होमस्टे, शीतकालीन पर्यटन, एडवेंचर टूरिज्म, ईको-टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म, डेस्टिनेशन वेडिंग और आध्यात्मिक पर्यटन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का परिणाम है कि प्रदेश में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह इस बात का संकेत है कि उत्तराखंड के गांव अब केवल पुरानी यादों के नहीं, बल्कि नई संभावनाओं के भी केंद्र बन रहे हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में रोजगार के अवसर उपलब्ध होने से पलायन को रोकने में मदद मिलेगी, पर्यटन बढ़ने से स्थानीय व्यापार को गति मिलेगी और स्थानीय समुदायों के समृद्ध होने से आत्मनिर्भर उत्तराखंड का सपना साकार होगा।


मुख्यमंत्री ने नेचर गाइडों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनका दायित्व केवल पर्यटकों को जंगल घुमाने तक सीमित नहीं है। वे उत्तराखंड की पहचान, जंगलों के प्रहरी, वन्यजीव संरक्षण के सहयोगी और प्रदेश की संस्कृति, परंपरा एवं अतिथि देवो भवः की भावना के ब्रांड एम्बेसडर हैं। उन्होंने कहा कि नेचर गाइड पर्यटकों को केवल वन्यजीवों का दर्शन नहीं कराते, बल्कि उन्हें प्रकृति के प्रति प्रेम और संवेदनशीलता का संदेश भी देते हैं। वे लोगों को यह समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कि जंगल और वन्यजीव आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर हैं।


मुख्यमंत्री ने सभी नेचर गाइडों और प्रदेशवासियों से प्रकृति एवं वन्यजीवों के संरक्षण, पर्यावरण के प्रति जनजागरूकता, गांवों की समृद्धि और स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देकर उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ और आत्मनिर्भर राज्य बनाने के सरकार के ‘विकल्प रहित संकल्प’ को साकार किया जाएगा।


इस अवसर पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वन अधिकारी, जनप्रतिनिधि, नेचर गाइड तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

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