Halloween party ideas 2015

 

 

accident at nilkanth road

आज दिनांक 28/08/26 को जनपद टिहरी गढ़वाल के थाना मुनि की रेती क्षेत्रान्तर्गत भद्रकाली मोड़ पर एक यात्री बस के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही SDRF टीम ढालवाला आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों के साथ तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई।


घटनास्थल पर पहुंचकर ज्ञात हुआ कि राजस्थान नंबर RJ18PB1409 की एक 60-सीटर यात्री बस, जिसमें लगभग 50 से 55 यात्री सवार थे, नीलकंठ दर्शन के उपरांत ऋषिकेश की ओर वापस लौट रही थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बस का ब्रेक फेल होने के कारण वाहन अनियंत्रित होकर भद्रकाली मोड़ के समीप सड़क पर पलट गया।


दुर्घटना में बस में सवार लगभग 04 से 05 यात्री घायल हुए, जिन्हें तत्काल 108 एम्बुलेंस सेवा की सहायता से उपचार हेतु राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश भेजा गया। वहीं दुर्घटना के दौरान बस की चपेट में आए स्कूटी सवार 02 व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए।


SDRF टीम द्वारा स्थानीय पुलिस, 108 आपातकालीन सेवा एवं अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर घटनास्थल पर राहत एवं बचाव कार्य संचालित किया गया। टीम द्वारा दुर्घटनाग्रस्त बस एवं उसके आसपास के क्षेत्र की गहन जांच कर यह सुनिश्चित किया गया कि कोई अन्य व्यक्ति उसमें फंसा न हो।


घटनास्थल पर SDRF, स्थानीय पुलिस एवं 108 आपातकालीन सेवा द्वारा आवश्यक राहत एवं बचाव कार्य किया गया।



नेपाल में आकस्मिक बाढ़: सहायता एवं जानकारी


◾️विदेश मंत्रालय के विशेष नियंत्रण कक्ष संपर्क सूत्र:


📞 +911123088718

📞 +911123088719

📞+911123012113


वॉट्सऐप कॉल/मैसेज: +91 9968291988

ईमेल: situationroom@mea.gov.in


◾️काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के आपातकालीन संपर्क नंबर:


📞 +9779851316807

📞 +9779709107500

📞 +9779810326117


आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री श्री मदन कौशिक ने कहा कि उत्तराखण्ड आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है और सरकार संभावित जोखिमों को कम करने के लिए पूरी गंभीरता के साथ कार्य कर रही है। नेपाल में हाल में घटित आपदा से सीख लेते हुए प्रदेश में ग्लेशियर झीलों, नदियों एवं अन्य संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है।


उन्होंने कहा कि संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण, नियमित मॉनीटरिंग और अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम की स्थापना पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जहां आवश्यकता होगी, वहां अतिरिक्त उपकरण एवं तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि किसी भी संभावित खतरे की सूचना समय रहते प्रशासन एवं आमजन तक पहुंचाई जा सके।


श्री कौशिक ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जन-जीवन की सुरक्षा है। आपदा से पहले की तैयारी, समय पर चेतावनी, स्थानीय स्तर पर क्षमता निर्माण और विभागों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से संभावित जनहानि को न्यूनतम करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। मानसून के दौरान सभी संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को सतर्क रहते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।



नेपाल में घटित भीषण आपदा के उपरांत राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में उत्तराखंड के नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर स्थापित किए गए थे। अब तक कुल 6 फोन कॉल राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र को प्राप्त हुए हैं। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उपरोक्त सूचनाओं को MHA के साथ साझा किया गया है। Seoc के माध्यम से MHA के साथ लगातार संपर्क बनाया गया है।

प्रेम की डोर, संस्कृति का सुंदर उत्सव-रक्षाबंधन

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी ने अमेरिका में मनाया रक्षाबंधन*

*पौधों को रक्षासूत्र बांधकर दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश

ऋषिकुमारों को राखी बांधकर स्वस्थ एवं समृद्ध जीवन की प्रार्थना

ऋषिकेश;



 रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति में प्रेम, विश्वास, जिम्मेदारी, कर्तव्य और संरक्षण का उत्सव है। श्रावणी पूर्णिमा के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन में रक्षाबंधन को आध्यात्मिक चेतना, सनातन संस्कारों और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ मनाया।


पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी ने अमेरिका में रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाते हुए इस पर्व के संदेश को परिवार और रिश्तों से आगे बढ़ाकर समाज, संस्कृति और प्रकृति से जोड़ने का आह्वान किया। इस अवसर पर पौधों को रक्षासूत्र बांधकर प्रकृति की रक्षा का संकल्प लिया गया। यह संदेश दिया गया कि जिस प्रकार राखी की डोर हमें अपने प्रियजनों की रक्षा और उनके प्रति अपने दायित्व का स्मरण कराती है, उसी प्रकार हमें पृथ्वी, जल, वायु, वन और वृक्षों के संरक्षण का भी संकल्प लेना होगा।


पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि रक्षाबंधन प्रेम और संरक्षण की संस्कृति का पर्व है। राखी की छोटी-सी डोर हमें एक बहुत बड़ा संदेश देती है, जिससे प्रेम हो, उसकी रक्षा का दायित्व भी हमारा है। आज आवश्यकता है कि हम इस रक्षा-सूत्र को परिवार की सीमाओं से आगे ले जाकर समाज और प्रकृति से जोड़ें। हमारी नदियाँ, वृक्ष, पर्वत, वन और धरती माता भी हमारी जिम्मेदारी हैं। यदि हम प्रकृति की रक्षा करेंगे, तो प्रकृति आने वाली पीढ़ियों की रक्षा करेगी।


उन्होंने कहा कि आज दुनिया अनेक पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में भारतीय संस्कृति का यह पर्व हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और संरक्षण का संस्कार देता है। एक वृक्ष को रक्षासूत्र बांधना केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि यह स्वयं से किया गया संकल्प है कि हम वृक्षों को बचाए, अधिक से अधिक पौधे लगाएं और प्रकृति के साथ अपने संबंधों को सुदृढ़ करें।


परमार्थ निकेतन में इस पावन अवसर पर ऋषिकुमारों का उपनयन संस्कार विधिवत सम्पन्न हुआ। वैदिक परंपरा के अनुसार उपनयन संस्कार जीवन में ज्ञान, अनुशासन, साधना, सेवा और सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ने का दिव्य संस्कार है। ऋषिकुमारों ने आचार्यों के सान्निध्य में वेदमंत्रों के उच्चारण के साथ विधिवत पूजा-अर्चना की और अपनी जीवन-यात्रा को ज्ञान एवं संस्कारों से प्रकाशित करने का संकल्प लिया।


वेदमंत्रों की पवित्र ध्वनि, यज्ञ की सुगंध और आध्यात्मिक वातावरण ने श्रावणी पूर्णिमा के इस अवसर को और भी दिव्य बना दिया। यह आयोजन एक धार्मिक अनुष्ठान के साथ भारत की प्राचीन ऋषि-परंपरा, ज्ञान-संस्कृति और संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम बना।


रक्षाबंधन का पर्व हमें यह संदेश देता है कि रिश्ते केवल अधिकारों से नहीं, बल्कि कर्तव्यों और समर्पण से मजबूत होते हैं। आज आवश्यकता है कि हम अपने परिवारों में प्रेम और संवाद बढ़ाएँ, समाज में करुणा और सहयोग की भावना विकसित करें तथा प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझें।


आइए, इस रक्षाबंधन हम एक ऐसी डोर बाँधें जो केवल भाई-बहन को नहीं, बल्कि मनुष्य को मनुष्य से, समाज को सेवा से और मानवता को प्रकृति से जोड़े। प्रेम से रिश्ते सँवारें, करुणा से समाज जोड़ें और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता से जीवन सँवारें।


 प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत देहरादून में 10 पिंक ई-बसें महिलाओं को समर्पित होंगी, चरणबद्ध रूप से पूरे प्रदेश में मिलेगी सुविधा* 

 *महिला स्वरोजगार योजना में रियायती बैंक ऋण की सीमा ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹2.50 लाख करने की मुख्यमंत्री ने की घोषणा* 

 


 

 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में महिलाओं की सुविधा, सुरक्षा और गरिमा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से युक्त हाईटेक टॉयलेट विकसित किए जाने की घोषणा की है। इन टॉयलेट्स में स्वच्छता के साथ-साथ महिलाओं की निजता, सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा।


मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृशक्ति की गरिमा और सम्मान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। प्रदेश के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों, बाजारों, पर्यटन स्थलों और अन्य आवश्यक स्थानों पर आधुनिक एवं सुरक्षित सुविधाएं उपलब्ध कराकर महिलाओं के लिए अधिक सुविधाजनक और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित किया जाएगा।


 *महिलाओं के लिए रोडवेज बसों में 60 वर्ष की आयु से मुफ्त सफर की घोषणा* 


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं को बड़ी सौगात देते हुए घोषणा की कि प्रदेश में वर्तमान में 65 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को रोडवेज बसों में उपलब्ध मुफ्त सफर की सुविधा को महिलाओं के लिए 60 वर्ष की आयु से लागू किया जाएगा। इससे प्रदेश की अधिकाधिक बुजुर्ग महिलाओं को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।


 *10 पिंक ई-बसें महिलाओं को होंगी समर्पित* 


मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के अंतर्गत उत्तराखंड को मिलने वाली 137 इलेक्ट्रिक बसों में से देहरादून में संचालित होने वाली 100 बसों में 10 बसें महिलाओं के लिए पिंक ई-बस के रूप में समर्पित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस सुविधा को चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के अन्य क्षेत्रों तक भी विस्तारित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को सुरक्षित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिल सके।


 *महिला स्वरोजगार योजना में ऋण की सीमा बढ़ाकर ढाई लाख रुपये की जाएगी* 


महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री ने महिला स्वरोजगार योजना के तहत रियायती बैंक ऋण की सीमा ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹2.50 लाख करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को स्वरोजगार के लिए आवश्यक पूंजी उपलब्ध कराकर उन्हें रोजगार मांगने वाली नहीं, बल्कि रोजगार देने वाली बनाने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।


 *चकरपुर में मुख्यमंत्री ने बहनों से बंधवाई राखी* 


रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर चकरपुर स्टेडियम में आयोजित रक्षाबंधन समारोह में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया और दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उपस्थित बहनों ने मुख्यमंत्री को भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक रक्षासूत्र बांधा। मुख्यमंत्री ने सभी बहनों का अभिवादन करते हुए उन्हें रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।


बहनों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन उनके लिए अत्यंत शुभ और भावनात्मक है। उन्होंने कहा कि बहनों का प्रेम और स्नेह उन्हें निरंतर जनसेवा के लिए प्रेरित करता है। यही प्रेम उन्हें अधिक मेहनत और ऊर्जा के साथ प्रदेश की जनता की सेवा करने की शक्ति देता है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच अटूट प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी का पर्व भी है। जब हम एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारियों का संकल्प लेते हैं और सुख-दुख में एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं, तो रिश्ते और मजबूत होते हैं। भारतीय संस्कृति में बहन के स्नेह और भाई के संकल्प का यह रिश्ता सदियों से परिवार, समाज और संस्कारों को मजबूत करने की प्रेरणा देता आया है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन का पर्व हमें समाज के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का भी बोध कराता है तथा मातृशक्ति के सम्मान का संदेश देता है। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है। एक भाई अपनी बहन के सम्मान, सुरक्षा और खुशहाली को अपना धर्म मानता है। इसी भावना के साथ राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 से मातृशक्ति को अपनी नीतियों और योजनाओं में सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने नारी सशक्तिकरण को केवल नारों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि धरातल पर योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू कर महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान किए हैं। प्रधानमंत्री जन-धन योजना के माध्यम से महिलाओं को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया, मुद्रा योजना के माध्यम से उन्हें स्वरोजगार के लिए पूंजी उपलब्ध कराने का अवसर दिया गया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से करोड़ों महिलाओं को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराकर उनकी रसोई को धुएं से मुक्त करने का कार्य किया गया है। स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से घर-घर शौचालय का निर्माण कर महिलाओं के सम्मान और गरिमा की रक्षा सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को भी सशक्त किया है। लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड में भी मातृशक्ति को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। नंदा गौरा योजना के माध्यम से बेटियों के जन्म से लेकर उनकी शिक्षा तक सरकार उनका साथ दे रही है। योजना के अंतर्गत बेटी के जन्म पर ₹11 हजार तथा कक्षा 12वीं उत्तीर्ण करने पर ₹51 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।


उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना के माध्यम से बच्चे के जन्म के बाद मां और शिशु की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उपयोगी सामग्री से युक्त किट उपलब्ध कराई जा रही है। 181 महिला हेल्पलाइन और वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से महिलाओं को सुरक्षा और सहायता का भरोसा दिया जा रहा है। राज्य सरकार ने सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश की महिलाएं केवल सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाली न बनें, बल्कि हर क्षेत्र में आगे बढ़कर नेतृत्व करें और रोजगार देने वाली बनें। इसी सोच के साथ राज्य में स्वयं सहायता समूहों को ₹5 लाख तक का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है, ताकि महिलाएं अपना व्यवसाय शुरू कर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें।


उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना के माध्यम से महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए सभी विकासखंडों में केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। देहरादून में प्रदेश के सभी 13 जिलों के उत्पादों की बिक्री के लिए 13 सेंटर स्थापित किए जाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं कठिन परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट उत्पाद तैयार कर रही हैं और अब उनके उत्पादों की मांग देश के साथ-साथ विदेशों में भी बढ़ रही है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 3 लाख 9 हजार बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि है। उन्होंने बहनों का आह्वान करते हुए कहा कि अब लखपति दीदी से आगे बढ़कर करोड़पति बनने का लक्ष्य रखें। सरकार इस यात्रा में उनके साथ खड़ी है।


उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि महिलाओं के मजबूत होते आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। सरकार का उद्देश्य है कि महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ें और नए कीर्तिमान स्थापित करें।



मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं एक भाई के रूप में हमेशा अपना कर्तव्य पूरी ईमानदारी के साथ निभाऊंगा।” उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता माताओं और बहनों की सेवा है। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह गर्व की बात है कि वे देवभूमि उत्तराखंड में अपनी माताओं-बहनों के भाई और बेटे के रूप में सेवा कर रहे हैं।


मुख्यमंत्री ने विश्वास दिलाया कि जब तक उत्तराखंड की प्रत्येक बहन सम्मानित, सशक्त और आत्मनिर्भर नहीं हो जाती, तब तक राज्य सरकार इसी संकल्प के साथ प्रदेश की उन्नति और मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए कार्य करती रहेगी।


इस अवसर पर दर्जा मंत्री मोहिनी पोखरिया, ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा, शोभा राणा, कुलविंदर कौर, हरिकेश चंद, पूनम, ममता चुफाल, मंडल अध्यक्ष माया जोशी, भागीरथी खोलिया, अंजना अडो, पूर्व ग्राम प्रधान शोभा राणा, रेखा राणा, गीता, लक्ष्मी, चंद्रकला रौतेला, विमला, सरोज कुशवाह, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद्र जोशी, दर्जा मंत्री गंभीर सिंह धामी, रणदीप पोखरिया, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति सहित सैकड़ों बहनें उपस्थित रहीं।


चम्पावत, 


*देवीधुरा में फलों-फूलों से बरसी बग्वाल, ऐतिहासिक पाषाण युद्ध के साक्षी बने लाखों श्रद्धालु*


*दोपहर 1:48 बजे शुरू होकर 1:55 बजे तक 8 मिनट तक चले इस अनूठे ऐतिहासिक युद्ध में फल और फूलों का किया गया प्रयोग*  


*मा. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने माँ वाराही के दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की*


*मा. मुख्यमंत्री ने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की बात कही*


चम्पावत के विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ वाराही धाम देवीधुरा में शुक्रवार को ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन हुआ। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर आयोजित इस प्रसिद्ध मेले में आस्था, परंपरा, संस्कृति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। मेले में प्रतिभाग करने के लिए मा. मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी हेलीकॉप्टर से देवीधुरा हेलीपैड पहुंचे। हेलीपैड पर कैबिनेट मंत्री श्री राम सिंह कैड़ा, जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक श्रीमती रेखा यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया। हेलीपैड पर पारंपरिक लोकनृत्य छोलिया की मनमोहक प्रस्तुति के साथ मा. मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया।


मा. मुख्यमंत्री ने शक्तिपीठ माँ वाराही देवी की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि माँ वाराही मइया सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।


मा. मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने देवीधुरा की पावन भूमि और विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बग्वाल मेले को उत्तराखंड की अगाध आस्था, समृद्ध लोक-संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विकास को केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित न रखते हुए ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहरों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।


उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ के अंतर्गत कुमाऊँ क्षेत्र के प्रमुख पौराणिक एवं धार्मिक स्थलों का कायाकल्प किया जा रहा है। देवीधुरा मंदिर परिसर में 4.27 करोड़ रुपये की लागत से गढ़वाल खाम भवन तथा 4.57 करोड़ रुपये की लागत से रणकोची मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। इसके अतिरिक्त घटोत्कच मंदिर का सौंदर्यीकरण, घटकु हिडिंबा मंदिर का निर्माण, सप्तेश्वर महादेव मंदिर में स्नानघाट तथा लधौनधुरा मेला स्थल का सौंदर्यीकरण कार्य पूर्ण किया जा चुका है।


मा. मुख्यमंत्री ने बताया कि घटोत्कच से झालिमाली मंदिर मार्ग के डामरीकरण पर 1.95 करोड़ रुपये, विभिन्न मंदिरों के सौंदर्यीकरण के लिए 4.70 करोड़ रुपये तथा पूर्णागिरि मार्ग पर 5 करोड़ रुपये की स्ट्रीट लाइट परियोजना के कार्य किए जा रहे हैं। इसके साथ ही पाताल रुद्रेश्वर, खेतीखान सूर्य मंदिर, भूमिया देव मंदिर, भिगराड़ा मंदिर एवं डुंगरी-फत्याल शिव मंदिर से संबंधित विकास कार्य भी गतिमान हैं। विगत पांच वर्षों में धार्मिक अवस्थापना एवं सौंदर्यीकरण के तहत 68.58 करोड़ रुपये की लागत से 397 कार्य किए गए हैं।


मा. मुख्यमंत्री ने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि देवीधुरा में 9.80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण कार्य शीघ्र कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि बग्वाल मेले को ‘राजकीय मेला’ घोषित कर इसकी गरिमा बढ़ाने के साथ ही व्यवस्थाओं को भी और अधिक सुदृढ़ किया गया है।


उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन का मूल उद्देश्य स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करना तथा रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है। उन्होंने प्रदेशवासियों और विशेष रूप से युवा पीढ़ी से अपनी समृद्ध लोक परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय सहभागिता का आह्वान करते हुए ‘विकास भी और विरासत भी’ के संकल्प को दोहराया।


*चार खाम-सात थोक के बीच खेली गई ऐतिहासिक बग्वाल*


मा. मुख्यमंत्री ने चार खाम–सात थोक के बीच खेले जाने वाले इस अनोखे प्राचीन पाषाण युद्ध का भी अवलोकन किया। रक्षाबंधन के अवसर पर मेले में बच्चियों एवं महिलाओं ने मा. मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी को राखी बांधकर रक्षाबंधन पर्व मनाया।


पाटी विकासखंड में स्थित माँ वाराही धाम में प्रधान पुजारी द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के साथ बग्वाल की शुरुआत हुई। इसके बाद चारों खाम—वालिक (सफेद), चम्याल (गुलाबी), गहड़वाल (भगवा) और लमगड़िया (पीला)—के बग्वालियों का प्रवेश हुआ। अलग-अलग रंगों के पारंपरिक वस्त्रों एवं पगड़ियों में सजे बग्वालियों के हाथों में बांस और रिंगाल से निर्मित ढालें थीं। शंखनाद और माँ वाराही के जयकारों के बीच बग्वाल का शुभारंभ हुआ।


फलों और फूलों की बरसात के बीच पूरा बग्वाल मैदान मां के जयकारों से गूंज उठा। इस वर्ष बग्वाल दोपहर 1:48 बजे शुरू होकर 1:55 बजे समाप्त हुई। 8 मिनट तक चले इस अनूठे ऐतिहासिक युद्ध में फल और फूलों का प्रयोग कर सदियों पुरानी परंपरा को जीवंत रखा गया। पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी के अनुसार, फल-फूलों से खेली जाने वाली बग्वाल को अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना जाता है।खामों के आगमन एवं बग्वाल के संचालन की जिम्मेदारी पीठाचार्य श्री कीर्तिबल्लभ जोशी ने निभाई।


 मा. मुख्यमंत्री ने कहा, “माँ वाराही मइया सबकी चिंता करती हैं। यह अनोखी विरासत केवल देवीधुरा के बग्वाल मैदान में देखने को मिलती है। यहां की परंपरा अनुशासन और भाईचारे की मिसाल है, जहां बग्वाल के बाद सभी योद्धा गले मिलते हैं।”


इस अवसर पर मा. कैबिनेट मंत्री श्री राम सिंह कैड़ा, केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद श्री अजय टम्टा, मा. अध्यक्ष जिला पंचायत श्री आनंद सिंह अधिकारी, माँ वाराही मंदिर समिति अध्यक्ष श्री हीराबल्लभ जोशी,भाजपा जिला अध्यक्ष श्री गोविन्द सामन्त, मुख्य विकास अधिकारी श्री जीएस खाती, परियोजना निदेशक श्री अजय सिंह, सीएमओ श्री देवेश चौहान, श्री महेन्द्र पाल, दर्जा राज्य मंत्री श्री मुकेश महराना, दर्जा राज्य मंत्री श्री हुकुम सिंह कुँवर, दर्जा राज्य मंत्री श्री श्याम नारायण पाण्डेय, दर्जा राज्य मंत्री श्री सुभाष बगौली, श्री लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता श्री सतीश पांडे, पूर्व विधायक लोहाघाट श्री पूरन सिंह फर्त्याल, श्री रवि नेगी, पूर्व अध्यक्ष मंदिर समिति श्री मोहन सिंह बिष्ट, श्री खीम सिंह लमगड़िया, श्री राजशेखर जोशी, श्री नरेन्द्र लडवाल, श्री खीमानन्द सनवाल, श्री देवेन्द्र पन्त, श्री त्रिलोक सिंह बिष्ट, श्री बिरेन्द्र सिंह लमगड़िया, श्री गंगा सिंह चम्याल, श्री बद्री सिंह बिष्ट, श्री चेतन, श्री राजेश बिष्ट, श्री जगदीश सिंह सिनग्वाल, मंच संचालक श्री कीर्तिबल्लभ जोशी, श्री हयात सिंह बिष्ट, श्री बिशन सिंह चम्याल, श्री राजेन्द्र बिष्ट, श्री लक्ष्मी दत्त जोशी, श्री दीवान सिंह बिष्ट, श्री मदन सिंह बोरा, श्री बहादुर सिंह नदगली, श्री ईश्वर सिंह बिष्ट, श्री विनोद चम्याल, श्री रमेश राना, श्री विनोद प्रकाश गड़कोटी, श्री गौरव सिनग्वाल, श्रीमती रश्मि लमगड़िया, श्री दीपक सिनग्वाल, श्री पवन लमगड़िया, श्री चन्दन बिष्ट, श्री दीपक चम्याल, श्री जितेन्द्र पाण्डेय, श्री दिनेश चम्याल, श्री विनोद जोशी एवं श्री सुदीप चम्याल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

.*मुख्यमंत्री धामी ने ‘लोकल फॉर वोकल’ को दिया प्रोत्साहन, लोहियाहेड में पैदल पहुंचकर स्थानीय स्टॉल पर लिया टिकी का स्वाद* 


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को लोहियाहेड में ‘लोकल फॉर वोकल’ की भावना को आत्मसात करते हुए स्थानीय व्यवसाय और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री पैदल चलते हुए आम लोगों के बीच पहुंचे और स्थानीय रूप से लोकप्रिय रवि के स्टॉल पर रुककर टिकी का स्वाद लिया।



मुख्यमंत्री को अपने बीच सहज रूप से पैदल चलते हुए देखकर स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। उन्होंने स्टॉल संचालक रवि से बातचीत कर उनके व्यवसाय के बारे में जानकारी ली और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के माध्यम से आजीविका अर्जित करने के प्रयासों की सराहना की।



इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों से भी आत्मीय संवाद किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों और छोटे व्यवसायों को प्रोत्साहन देना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। ‘लोकल फॉर वोकल’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का सशक्त माध्यम है।



मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम अपने आसपास के स्थानीय उत्पादों और सेवाओं को प्राथमिकता देते हैं, तो उसका सीधा लाभ स्थानीय कारीगरों, छोटे व्यापारियों, युवाओं और स्वरोजगार से जुड़े लोगों को मिलता है। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है, बल्कि आत्मनिर्भर समाज और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प को भी गति मिलती है।



मुख्यमंत्री श्री धामी का स्थानीय लोगों के बीच इस सहज और आत्मीय अंदाज में पहुंचना क्षेत्रवासियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने मुख्यमंत्री की सादगी तथा स्थानीय व्यवसायों के प्रति उनके प्रोत्साहन की सराहना की।

मुख्यमंत्री का यह कदम स्थानीय उद्यमियों के सम्मान, छोटे व्यवसायों के प्रोत्साहन और ‘वोकल फॉर लोकल’ के संदेश को व्यवहार में उतारने की दिशा में एक प्रेरक पहल के रूप में देखा गया।


 

raksha bandhn 2026


रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण के साथ ही पंचक का भी साया रहेगा, जिस वजह से राखी बांधने के मुहूर्त को लेकर काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। 

 28 अगस्त 2026 को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त कब से कब तक रहने वाला है।
आज रक्षाबंधन का सबसे शुभ मुहूर्त 05:57 बजे से 09:48 बजे तक रहेगा। इसके अलावा बहनें दोपहर और शाम में भी राखी बांध सकेंगी।रक्षाबंधन के दिन भाई को राखी बांधते समय 
"येयेन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। ,तेन त्वाम् अभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥" 
मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए।

इस मंत्र का अर्थ है - जिस रक्षा सूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी सूत्र मैं तुम्हें बांधती हूं, जो तुम्हारी रक्षा करेगा, हे रक्षा तुम स्थिर रहना, स्थिर रहना।
, श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाये जाने वाले  रिश्तों के पवित्र बंधन को एक सूत्र में पिरोने वाले रक्षाबन्धन का अपना एक विशेष महत्व है।भाई बहन के प्रेम और स्नेह को अपने मे समेटे इस त्योहार का धार्मिक,ऐतिहासिक,पौराणिक, औऱ सामाजिक  महत्व है,देवासुर संग्राम में इंद्र की पत्नी द्वारा रक्षा सूत्र बाँध्ने की कहानी हो या द्वापरयुग में द्रोपदी द्वारा भगवान कृष्ण को साड़ी का पल्लू बांधने की कहानी हो,अथवा राजा बलि की कहानी,या फिर महारानी कर्मावती द्वारा मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजकर सहायता की गुहार की कहानी हो ,सभी कहानियां हमे एक सूत्र में प्रेम स्नेह और एक दूसरे की सहायता करने और एक सूत्र में बंधे रहने की शिक्षा देते हैं।

 आपदा सुरक्षित उत्तराखण्ड के लिए 


*, आपदा न्यूनीकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को सराहा*

देहरादून:

world bank USDMA


विश्व बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चीफ नॉलेज ऑफिसर श्री पास्कल डोनोहोई ने कहा कि उत्तराखण्ड आपदाओं की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है और आपदा जोखिम न्यूनीकरण की दिशा में राज्य द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। आपदा सुरक्षित उत्तराखण्ड के निर्माण के लिए विश्व बैंक आगे भी अपना पूरा सहयोग जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए आपदा जोखिम को कम करने के लिए आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अध्ययन और मजबूत संस्थागत क्षमता का निरंतर विकास आवश्यक है।

विश्व बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चीफ नॉलेज ऑफिसर श्री पास्कल डोनोहोई के नेतृत्व में विश्व बैंक की हाई लेवल टीम ने बुधवार को उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) का भ्रमण किया। इस दौरान टीम ने आपदा प्रबंधन एवं आपदा जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में विश्व बैंक के सहयोग से संचालित विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा की तथा राज्य में किए जा रहे कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। 

भ्रमण के दौरान श्री पास्कल डोनोहोई ने विश्व बैंक पोषित विभिन्न योजनाओं एवं यूप्रीपेयर परियोजना के तहत किए जा रहे कार्यों तथा विशेष रूप से उत्तराखण्ड में भूस्खलन न्यूनीकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में अपनाई जा रही तकनीकों, जोखिम न्यूनीकरण के उपायों तथा इस दिशा में राज्य के सामने आ रही प्रमुख चुनौतियों के बारे में भी जानकारी ली। विश्व बैंक की टीम ने यूप्रीपेयर परियोजना के तहत अत्याधुनिक भूकंपरोधी एवं बेस आइसोलेशन तकनीक से निर्मित यूएसडीएमए भवन का भी मुआयना किया। टीम ने भवन में अपनाई गई आधुनिक तकनीकों और आपदा प्रतिरोधी निर्माण की सराहना की। टीम को भवन की संरचनात्मक विशेषताओं तथा भूकंप जैसी आपदाओं के दौरान इसकी सुरक्षा क्षमता के बारे में भी जानकारी दी गई।

इस अवसर पर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास ने उत्तराखण्ड में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए विश्व बैंक की ओर से मिल रहे सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्व बैंक की टीम को यूएसडीएमए द्वारा आपदा प्रबंधन, जोखिम न्यूनीकरण, क्षमता निर्माण और तकनीकी सुदृढ़ीकरण के क्षेत्र में संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्व बैंक के सहयोग से उत्तराखण्ड में 36 पुलों का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही आपदा शेल्टर का निर्माण, अत्याधुनिक उपकरणों की खरीद तथा स्लोप स्टैबिलाइजेशन से संबंधित कार्य भी किए जा रहे हैं। 

इन परियोजनाओं के माध्यम से राज्य के विभिन्न विभागों की आपदाओं से निपटने की क्षमता को मजबूत किया जा रहा है और आपदा के दौरान त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय एवं आपदा संवेदनशील राज्य में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को प्राथमिकता देते हुए सुरक्षित एवं मजबूत बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। विश्व बैंक की टीम ने यूएसडीएमए द्वारा आपदा जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में भी वित्तीय सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

इस अवसर पर विश्व बैंक से श्री जोहान्स जट्ट, रीजनल वाइस प्रेसिडेंट, श्री प्रकाश चंद्र, एसीईओ (प्रशासन), श्री राज कुमार नेगी, एसीईओ (ऑपरेशंस), श्री दिनेश चंद्र पुनेठा, जेसीईओ, श्री डी. दयानंद, चीफ इंजीनियर, पीआईयू-पीडब्ल्यूडी, सुश्री जोहाना मारिया ग्राडी, सुश्री सौम्या कपूर मेहता, सीनियर इकोनॉमिस्ट तथा सुश्री शिल्पा बनर्जी, एक्सटर्नल अफेयर्स ऑफिसर, श्री एस.के. बिरला, एपीडी (टेक्निकल), यू-प्रिपेयर, डॉ. शांतनु सरकार, निदेशक, यूएलएमएमसी, श्री संजय सिन्हा, सीएमई, पीआईयू-पीडब्ल्यूडी, डॉ. मोहित पूनिया, डीपीएम,पीआईयू-यूएसडीएमए, डॉ. पी.डी. माथुर, सीनियर डीआरएम एक्सपर्ट, पीआईयू-यूएसडीएमए, डॉ. पूजा राणा, डाॅ. पूजा कसारिया आदि उपस्थित रहे।

 बाला गौरिया’ फिल्म उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और लोक देवताओं की परंपरा को देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी: मुख्यमंत्री* 


 *मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में फिल्म 

Ball gauraya teaser poster CM Dhami


 *उत्तराखंड को फिल्म निर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए राज्य सरकार निरंतर कर रही है प्रयास* 


 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड की लोक संस्कृति एवं लोक आख्यानों पर आधारित बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बाला गौरिया’ के टीजर एवं पोस्टर का लोकार्पण किया। ‘हिमाद्रि प्रोडक्शंस’ के बैनर तले निर्मित की जा रही यह फिल्म उत्तराखंड के लोक में न्याय देवता के रूप में प्रतिष्ठित गोलज्यू के बाल जीवन पर आधारित है। फिल्म का निर्देशन श्री नितिन तिवारी तथा निर्माण श्री मनोज चंदोला द्वारा किया जा रहा है। फिल्म अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में रिलीज होने की संभावना है।



मुख्यमंत्री ने फिल्म के टीजर एवं पोस्टर के लोकार्पण पर पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, लोक परंपराएं, लोकगाथाएं और लोक देवताओं की समृद्ध विरासत हमारी विशिष्ट पहचान हैं। ‘बाला गौरिया’ जैसी फिल्में हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने के साथ ही देश-दुनिया के सामने उत्तराखंड की लोक संस्कृति को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का कार्य करेंगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार राज्य में फिल्म निर्माण और फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध लोक संस्कृति और विविध भौगोलिक परिस्थितियां फिल्म निर्माण के लिए उत्तराखंड को विशिष्ट बनाती हैं। सरकार का प्रयास है कि देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं को उत्तराखंड में शूटिंग के लिए बेहतर वातावरण, आवश्यक सुविधाएं और अनुकूल व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएं। उत्तराखंड पर्यटन नीति में भी फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने, फिल्म शूटिंग के लिए प्रोत्साहन एवं तेज अनुमति व्यवस्था विकसित करने तथा विभिन्न स्थानों पर फिल्म सिटी विकसित करने की दिशा में प्रावधान किए गए हैं।


उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को फिल्म शूटिंग के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन बनाने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को फिल्म निर्माण से जुड़े रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इससे प्रदेश की आर्थिकी को गति मिलने के साथ ही उत्तराखंड की कला, संस्कृति, बोली-भाषा, लोक परंपराओं और पर्यटन स्थलों को भी देश-दुनिया में पहचान मिलेगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के लोक देवताओं और लोक आख्यानों में हमारी सदियों पुरानी सांस्कृतिक चेतना, परंपराएं और जीवन मूल्य समाहित हैं। इनका संरक्षण और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने फिल्म निर्माताओं से उत्तराखंड की अन्य लोकगाथाओं, लोक देवताओं और सांस्कृतिक परंपराओं पर भी फिल्म निर्माण के लिए आगे आने का आह्वान किया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की लोक संस्कृति और स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए फिल्म निर्माताओं को हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि ‘बाला गौरिया’ जैसी फिल्मों के माध्यम से उत्तराखंड की लोक थातियों को व्यापक मंच मिलने के साथ ही प्रदेश के पर्यटन को भी नई पहचान मिलेगी।




इस अवसर पर फिल्म के निर्माता श्री मनोज चंदोला सहित फिल्म से जुड़े अन्य कलाकार एवं टीम के सदस्य उपस्थित रहे।

www.satyawani.com @ All rights reserved

www.satyawani.com @All rights reserved
Blogger द्वारा संचालित.