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international yoga festival in vidhya vihar ddun


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विद्या विहार बस्ती सरस्वती शाखा द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन किया गया जिसमें अधिक संख्या में क्षेत्रवासियों, महिलाओं ने संघ स्थान पर आकर योग किया, योग शिक्षिका अंजू अरोरा ने योग करवाएं 

 केसर सिंह नेगी ने बताया कि योग सिर्फ एक दिन नहीं प्रतिदिन सुबह योग करना चाहिए योग से शरीर की अनेकों बीमारियां दूर होती है नवीन नौटियाल ने बताया कि योग अनादि काल से हमारे ऋषि मुनियों के समय से चलता आ रहा है जिसे दुनियां ने भी स्वीकार किया है 

योग दुनिया के अनेकों देशो में मनाया जा रहा है योग हमे जीना सिखाता है 

इस अवसर पर धीरेन्द्र भारद्वाज, रामप्रसाद सेमवाल, धीरज नेगी,बिशन सिंह राणा, भानु पंचोली,विनोद भट्ट, भास्करानंद जोशी, कृष त्यागी रोशन  सोमवार,राजेन्द्र भण्डारी, विजेन्द्र रावत, प्रदीप नौटियाल, सत्य कंडवाल, अजय राणा,राजेंद्र जोशी, सुभाष अंथवाल आदि मौजूद रहे

देहरादून:



मुख्यालय उत्तराखंड सब एरिया ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 पर गढ़ी कैंट, देहरादून में उत्साहपूर्ण योग सत्र आयोजित किए। “योग - अनंत आयु के लिए प्रकाश” और थीम “योग से स्वस्थ जीवन” के अंतर्गत सैनिकों और उनके परिवारों ने सरल और व्यवहारिक योग व प्राणायाम में सक्रिय भागीदारी दिखाई। कार्यक्रम का उद्देश्य शारीरिक जीवंतता बढ़ाना, मानसिक शांति सुनिश्चित करना और दैनन्दिन सहनशीलता को सशक्त बनाना था, ताकि योग को दीर्घकालिक कल्याण के लिए दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जा सके।


कार्यक्रम का आरम्भ वैदिक मन्त्रोच्चारण के साथ हुआ और सत्रों में ऐसे आसन व प्राणायाम पर जोर दिया गया जिन्हें आसानी से दैनिक दिनचर्या में शामिल किया जा सके। यह पहल सभी आयु वर्ग के सहभागियों के लिए उपयोगी और सुलभ रही।


यह आयोजन *Indian Yogini Association, Adhya Kaushalam Trust* तथा *Patanjali Yogpeeth* के सहयोग से आयोजित किया गया था। सत्र साध्वी देवदिति और सुश्री शिखा द्वारा संचालित किए गए। मुख्यालय उत्तराखंड सब एरिया ने सत्र को समृद्ध और शिक्षाप्रद बनाने के लिए संचालन टीम की प्रशंसा की।

देहरादून'

विकेश सिंह नेगी





28 फरवरी1996 में खत्म हुए उर्दू अनुवादक-कनिष्ठ लिपिक के पद, 2026 में भी नौकरी जारी.?


देहरादून। उत्तराखंड में लैंड जिहाद, लव जिहाद और थूक जिहाद जैसे मुद्दों पर सरकार की सख्त कार्रवाई के बाद अब कथित “नौकरी जिहाद” का मामला सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर राज्य में 28 साल पुरानी नियुक्तियों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। विकेश सिंह नेगी का आरोप है कि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 1994-95 में सृजित अस्थायी/अधिसंख्य (Supernumerary) उर्दू अनुवादक-कनिष्ठ लिपिक पदों की अवधि 28 फरवरी 1996 को समाप्त हो चुकी थी, इसके बावजूद कई विभागों में संबंधित कर्मचारी गैरकानूनी तरीके से आज भी कार्यरत हैं। जबकि उत्तराखंड में सैंकड़ों प्रशिक्षित बेरोजगार युवा हैं। जिनकी इन पदों पर चयन हो सकती थी। विकेश सिंह नेगी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पूर्व के मुख्यमंत्रियों से भी उन्होनें इस मामले की शिकायत की लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब उन्हें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उम्मीदें हैं कि वह नौकरी जिहाद के मुद्दे पर कड़ा एक्शन लेंगें।

विकेश नेगी ने कहा कि नौकरी खत्म होने के बाद भी उच्चाधिकारियों से सेंटिंग गेटिंग के आधार पर सभी कर्मचारी प्रमोशन लेते रहे और आज भी नौकरी पर बरकरार हैं। विकेश नेगी ने कहा कि पूर्व में भी वह कई बार शिकायत कर चुके हैं लेकिन मामले को दबा दिया गया और सरकार व विभाग की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हुई।

सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि धामी सरकार ने लैंड जिहाद, लव जिहाद और थूक जिहाद जैसे मामलों में कठोर कदम उठाकर प्रदेश में कानून के राज का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि कथित “नौकरी जिहाद” जैसे गंभीर आरोपों की भी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए ताकि सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

वर्षों से जनहित के मुद्दे उठा रहे हैं नेगी
सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी लंबे समय से सूचना का अधिकार (आरटीआई) के माध्यम से जनहित से जुड़े मामलों को उजागर करते रहे हैं। उनके द्वारा उठाए गए कई मामलों में शासन और प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए कार्रवाई भी की है। यही कारण है कि उनकी ओर से उठाए गए इस नए मुद्दे ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।

1996 में समाप्त होनी थी पदों की अवधि
मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत में विकेश सिंह नेगी  ने उल्लेख किया है कि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 1994-95 में उर्दू अनुवादक सह कनिष्ठ लिपिक पदों का सृजन किया गया था। शासनादेश संख्या 80 सी०एम०/47-का4-94-10/10/10/94 के अनुसार, जहां नियमित कनिष्ठ लिपिक का पद उपलब्ध नहीं था, वहां अधिसंख्य पद सृजित किए गए थे। इन पदों की वैधता 28 फरवरी 1996 तक अथवा प्रथम रिक्ति होने तक, जो भी पहले हो, निर्धारित की गई थी। सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी का आरोप है कि इन पदों की वैधानिक अवधि समाप्त होने के बावजूद कुछ कर्मचारी आज भी विभिन्न सरकारी कार्यालयों में कार्यरत हैं। उनका दावा है कि उत्तराखंड गठन से पहले की गई इन नियुक्तियों के कर्मचारी वर्तमान में पुलिस विभाग, जिलाधिकारी कार्यालयों, तहसीलों, विकासखंड कार्यालयों, जिला आबकारी विभाग तथा अन्य सरकारी संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं।

आरटीआई दस्तावेजों का हवाला
सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त अभिलेखों और सूचनाओं के आधार पर यह मामला सामने आया है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ कर्मचारियों ने न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त किए थे, लेकिन कई मामलों में स्थगन समाप्त होने के बाद भी सेवाएं जारी रहने की बात सामने आई है। ऐसे मामलों में विभागीय अभिलेखों और सेवा पुस्तिकाओं की विस्तृत जांच आवश्यक है।

वित्तीय नुकसान की भी आशंका
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि यदि नियुक्तियां शासनादेश के विपरीत पाई जाती हैं तो इससे राज्य सरकार को वर्षों तक वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा हो सकता है। ऐसे में न केवल नियुक्त कर्मचारियों की स्थिति की समीक्षा जरूरी है, बल्कि उन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए जिन्होंने कथित रूप से नियमों के विपरीत सेवा निरंतरता प्रदान की। सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी का कहना है कि सरकारी सेवाओं में नियमों का पालन सर्वोपरि होना चाहिए और किसी भी स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर निष्पक्ष कार्रवाई होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री से की तीन प्रमुख मांगें
पुष्कर सिंह धामी को भेजे गए पत्र में विकेश सिंह नेगी ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, वर्तमान में कार्यरत सभी संबंधित उर्दू अनुवादक एवं कर्मचारियों की नियुक्तियों और सेवा अभिलेखों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। दूसरी, शासनादेश के अनुरूप पदों की वैधता और सेवा निरंतरता की समीक्षा की जाए। तीसरी, यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या नियम विरुद्ध नियुक्ति सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

सरकार के सामने नई चुनौती
प्रदेश में भर्ती घोटालों और नियुक्तियों को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में विकेश सिंह नेगी द्वारा उठाया गया यह नया मामला सरकार और प्रशासन के लिए एक नई चुनौती बन सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस शिकायत पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या वास्तव में कथित “नौकरी जिहाद” के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाती है।


अल्मोड़ा:






राजकीय महाविद्यालय दन्या में नवनिर्मित भवन का का किया लोकार्पण, 4 करोड़ 96 लाख रुपये की लागत से तैयार भवन से छात्रों को मिलेंगी बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं*


मुख्य घोषणाएं


* शहीद बीरेश्वर गोस्वामी के नाम पर अल्मोड़ा में भव्य द्वार का निर्माण किया जाएगा।

* चमतोला खेल मैदान का निर्माण किया जाएगा।

* राजकीय महाविद्यालय गरुड़ाबाँज में मिनी स्टेडियम का निर्माण किया जाएगा।

* जीआईसी गरुड़ाबाँज में चार अतिरिक्त कक्षा-कक्षों का निर्माण किया जाएगा।

* प्रेम मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर स्थल का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। 

* खेती जटेश्वर मोटर मार्ग के कचौरी नामक स्थान से कलूटा पोलिंग बूथ तक मोटर मार्ग बनाया जाएगा।

* राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चगेठी का उच्चीकरण किया जाएगा।


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को दन्या स्थित रामलीला मैदान में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश के समस्त क्षेत्रों का समेकित विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास एवं समृद्धि के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है तथा उत्तराखण्ड भी तेजी से प्रगति के पथ पर अग्रसर है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड को वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है तथा केदारखंड और मानसखंड में पर्यटन गतिविधियों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं पर्यटक राज्य में पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि जागेश्वर धाम के मूल स्वरूप को संरक्षित रखते हुए जागेश्वर मास्टर प्लान के माध्यम से वहां विकास एवं सौंदर्यीकरण के कार्य किए जा रहे हैं। पार्किंग क्षमता बढ़ाने के साथ ही धाम को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार धामों के संरक्षण और विकास के लिए प्रतिबद्ध है। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है तथा आयुर्वेद एवं योग आधारित पर्यटन के क्षेत्र में भी व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन फेस्टिवल’ की अवधारणा के तहत मेलों और स्थानीय सांस्कृतिक आयोजनों को नई पहचान दी जा रही है, जिससे स्वरोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं और प्रदेश आर्थिक रूप से लगातार मजबूत हो रहा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को देश का मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट बनने का गौरव प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि नक़ल विरोधी कानून के माध्यम से युवाओं का पारदर्शी भर्ती परीक्षाओं में विश्वास पुनः स्थापित हुआ है तथा भ्रष्टाचार के विरुद्ध राज्य सरकार लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है।


केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री श्री अजय टम्टा ने कहा कि डबल इंजन की सरकार  में प्रदेश का समग्र विकास हो रहा है।  उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए हम सभी को मिलकर कार्य करना है।



जनसभा के उपरांत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दन्या निवासी पवन पंत के आवास पहुंचे, जहां उन्होंने आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में सहभाग करते हुए कथा का श्रवण किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।


कार्यक्रम में विधायक मोहन सिंह महरा, जिला पंचायत अध्यक्ष हेमा गैड़ा, दर्जा राज्य मंत्री गंगा बिष्ट, दर्जा राज्य मंत्री कुंदन लटवाल, जिलाधिकारी अंशुल सिंह , वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर आर घोड़के , भाजपा जिलाध्यक्ष महेश नयाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।


 

योग को जीवनशैली बनाने का दिया संदेश, आयुष मंत्रालय से मिला सहभागिता प्रमाण-पत्र


श्रीनगर (गढ़वाल), 21 जून
yoga day in HNB university


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 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में शनिवार प्रातः भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों तथा नगरवासियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता कर योग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने  प्रतिभागियों को नियमित योग अपनाने तथा स्वस्थ जीवनशैली विकसित करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक संतुलन का प्रभावी माध्यम है। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के योग दिवस संदेश के सामूहिक श्रवण के साथ हुआ। इसके पश्चात निर्धारित कॉमन योग प्रोटोकॉल के अंतर्गत विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान का सामूहिक अभ्यास किया गया। योगाभ्यास का संचालन डॉ. विनोद नौटियाल एवं डॉ. रजनी नौटियाल ने किया। कार्यक्रम में कुलसचिव प्रो. वाईपी रैवानी, डीन भर्ती एवं पदोन्नति प्रो. एम.एस. पंवार, मुख्य प्रॉक्टर प्रो. दीपक कुमार, मुख्य छात्रावास अधीक्षक प्रो. एस.एस. बिष्ट, टिहरी परिसर निदेशक प्रो. बौराई, चौरास परिसर निदेशक प्रो. आर.एस. नेगी सहित विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ शिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे। विशेष अतिथि के रूप में राज्य युवा कल्याण सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष एवं राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त श्री विनोद सुयाल तथा उनकी समिति के सदस्य भी कार्यक्रम में शामिल हुए। योगाभ्यास के उपरांत विभागाध्यक्ष डॉ. अनुजा रावत ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया, जबकि अधिष्ठाता छात्र कल्याण (डीएसडब्ल्यू) प्रो. ओ.पी. गुसाईं ने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। वहीं विश्वविद्यालय के लिए यह गौरव का विषय रहा कि आयुष मंत्रालय के ‘संगम’ पोर्टल पर पंजीकरण के उपरांत संस्थान को मंत्रालय की ओर से सहभागिता प्रमाण-पत्र भी प्राप्त हुआ। इसे विश्वविद्यालय की सक्रिय सहभागिता और योग के प्रति प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जा रहा है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं स्थानीय नागरिकों का उल्लेखनीय योगदान रहा।

 

sdrf uttarakhand  yoga day 2026




अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आज दिनाँक 21 जून 2026 को SDRF वाहिनी मुख्यालय में अधिकारियों, कर्मचारियों एवं वाहिनी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रिक्रूट आरक्षियों द्वारा सामूहिक योगाभ्यास किया गया। 


कार्यक्रम के दौरान विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास कर योग के माध्यम से स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने नियमित योगाभ्यास को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प भी लिया।


योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाता है। आपदा प्रबंधन जैसे चुनौतीपूर्ण एवं संवेदनशील दायित्वों का निर्वहन करने वाले SDRF कार्मिकों के लिए योग शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता, एकाग्रता एवं कार्यकुशलता को बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है।


वाहिनी मुख्यालय के अतिरिक्त उत्तराखंड राज्य में व्यवस्थित SDRF की समस्त पोस्टों पर भी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें अधिकारियों एवं जवानों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से स्वस्थ जीवन, अनुशासन तथा सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने के साथ-साथ जनमानस को योग के प्रति जागरूक करने का संदेश भी दिया गया।


 

*तन, मन और आत्मा का समन्वय है योग-मुख्यमंत्री*



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस‘ की शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि योग भारत की सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व एवं प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है। योग ने सम्पूर्ण विश्व को स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली, मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया है। आज विश्व के अधिकतम देशों में करोड़ों लोग, योग को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना रहे हैं। योग अब सीमाओं से परे सशक्त समाज का आधार एवं मानवता के कल्याण का वैश्विक माध्यम बन चुका है।


अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि योग के द्वारा आज दुनिया में हमारी विशिष्ट पहचान बनी है। योग के लिये दुनिया भारत की ओर देख रही है। योग ने देश व दुनिया को स्वस्थता का भी संदेश दिया है। महान ऋषि पतंजलि ने योग के माध्यम से लोगों को जीने की राह दिखाई है। योग का अभ्यास शरीर, श्वास और मन को जोड़ता है। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नही, बल्कि तन, मन और आत्मा का समन्वय है। उन्होंने कहा कि नियमित योग अभ्यास तनाव कम करने, जीवन को संतुलित बनाए रखने तथा असंभव लक्ष्य को पाने में विशेष भूमिका निभाता है। योग भारत की प्राचीनतम और समृद्ध परम्परा की एक पहचान है। पूरी मनुष्यता को हमारे ऋषि-मुनियों की यह महत्वपूर्ण देन है। योग साधना के द्वारा हम शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदियों से योग, आध्यात्मिक साधना और ऋषि-मुनियों की तपस्थली रही है। यहां की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा और प्राकृतिक वातावरण मानवता को स्वास्थ्य, संतुलन और सकारात्मक जीवन का संदेश देते हैं। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार, उत्तराखंड को योग, आयुर्वेद, वेलनेस और प्राकृतिक चिकित्सा के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। नई योग नीति के माध्यम से योग एवं ध्यान केंद्रों को प्रोत्साहन, योग प्रशिक्षकों को सहयोग तथा योग एवं वेलनेस आधारित रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं।


मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से प्रतिदिन योग को अपनाने, स्वस्थ एवं अनुशासित जीवनशैली अपनाने, नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने तथा योग के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के युवा योग को जनआंदोलन का स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे तथा स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त उत्तराखंड के निर्माण में सहभागी बनेंगे।

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