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*सचिव आपदा प्रबंधन ने दिखाई हरी झंडी*

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 प्रदेश में ग्लेशियर झीलों से संभावित जोखिमों को कम करने तथा आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से चमोली जनपद स्थित सरस्वती ताल तथा उत्तरकाशी जनपद स्थित केदारताल के सर्वेक्षण के लिए विशेषज्ञ दल मंगलवार को रवाना हो गया है। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) से दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी तथा माननीय आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री श्री मदन कौशिक ने इस महत्वपूर्ण अभियान के लिए विशेषज्ञ दल को शुभकामनाएं दी हैं।

माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश में स्थित संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का व्यापक सर्वेक्षण एवं वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है। इसके अंतर्गत झीलों की वर्तमान स्थिति, जलस्तर, आकार में होने वाले परिवर्तन, आसपास के भू-भाग की स्थिति तथा संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों का आकलन किया जाएगा। मा0 मुख्यमंत्री ने कहा कि संभावित खतरे की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों तक समय रहते चेतावनी पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए आधुनिक सेंसर, जलस्तर मापक उपकरण, संचार प्रणाली तथा अन्य आवश्यक तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसी भी संभावित आपदा की स्थिति में समय रहते प्रभावी कदम उठाए जा सकें।

माननीय आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री श्री मदन कौशिक ने बताया कि ग्लेशियर झीलों से संभावित आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए सभी आवश्यक सुरक्षात्मक एवं जोखिम न्यूनीकरण उपायों पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां आपदा की स्थिति में सुरक्षित निकासी मार्ग, संभावित प्रभावित क्षेत्रों का चिन्हांकन, संचार व्यवस्था, स्थानीय स्तर पर चेतावनी तंत्र तथा राहत एवं बचाव की तैयारियों को मजबूत किया जाएगा।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखण्ड में कुल 13 ग्लेशियर झीलों को संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित किया गया है। इनमें से 04 ग्लेशियर झीलों का सर्वेक्षण किया जा चुका है, जबकि शेष संवेदनशील झीलों का भी चरणबद्ध तरीके से सर्वेक्षण एवं वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में चमोली जनपद स्थित सरस्वती ताल तथा उत्तरकाशी जनपद स्थित केदारताल का बैथीमेट्री सर्वेक्षण करने के लिए विशेषज्ञ दल को रवाना किया गया है। सर्वेक्षण के दौरान दोनों ग्लेशियर झीलों की वर्तमान स्थिति, जलस्तर, संभावित खतरे के कारकों तथा डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में पड़ने वाले संभावित प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा।

सचिव श्री सुमन ने बताया कि सरस्वती ताल लगभग 5700 मीटर तथा केदारताल लगभग 4750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। अत्यधिक ऊंचाई एवं कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में स्थित इन झीलों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण आपदा जोखिम न्यूनीकरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

वहीं माननीय उपाध्यक्ष, राज्य सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विभाग श्री विनय रुहेला तथा ले. कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी (सेवानिवृत्त) ने भी विशेषज्ञ दल को शुभकामनाएं दी हैं। इस अवसर पर एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, जेसीईओ श्री दिनेश कुमार पुनेठा आदि उपस्थित रहे। 


*विभिन्न विशेषज्ञ संस्थानों की संयुक्त भागीदारी*

देहरादून। सर्वेक्षण अभियान में विभिन्न विशेषज्ञ संस्थानों एवं सुरक्षा बलों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। विशेषज्ञ दल में यूएसडीएमए, यूएलएमएमसी, बाबा साहनी पुराविज्ञान संस्थान लखनऊ, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, एनआईएच रुड़की, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ तथा नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के विशेषज्ञ शामिल हैं। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की संयुक्त भागीदारी से ग्लेशियर झीलों की स्थिति, संभावित जोखिमों तथा डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव का बहुआयामी एवं वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। दल में श्री रोहित कुमार (यूएसडीएमए, देहरादून), श्री निखिल पुनिया (यूएसडीएमए, देहरादून), डॉ. विशाल (यूएलएमएमसी, देहरादून), श्री दीपक भट्ट (यूएलएमएमसी, देहरादून), डॉ. शेख नवाज अली (बीएसआईपी, लखनऊ), श्री शुभजीत घोष (बीएसआईपी, लखनऊ), श्री प्रकाश रंजन जेना (बीएसआईपी, लखनऊ), डॉ. पिंकी बिष्ट (वाडिया, देहरादून), श्री स्वप्निल बिष्ट (वाडिया, देहरादून), श्री शिव्यांक सिंह नेगी (वाडिया, देहरादून), श्री शिव शंकर यादव (एनआईएच, रुड़की), डॉ. शिवानंद मंडराहा (एनआईएच, रुड़की), श्री नितेश खेतवाल (एसडीआरएफ, देहरादून), श्री संदीप सिंह (एसडीआरएफ, देहरादून), श्री सचिन कुमार (एनडीआरएफ, गदरपुर), श्री मनीष कुमार (एनडीआरएफ, गदरपुर), श्री महेंद्र (जिला चमोली), श्री मनोज सिंह (जिला चमोली), श्री शार्दुल गुसाईं, डीडीएमओ (जिला उत्तरकाशी) तथा इंजी. नरेंद्र सिंह रावत (जिला उत्तरकाशी) शामिल हैं।

 

          


                    भारतीय जनसंघ (1951) एवं भारतीय जनता पार्टी (1980)  के संस्थापक सदस्य रहे राजा यादवेन्द्र दत्त दुबे का जन्म 07 दिसंबर 1918 को राजमहल में हुआ था। 

27 वर्ष की अवस्था में ही पिता राजा श्री कृष्ण दत्त जी महाराज के देहत्याग के पश्चात वैदिक विधि विधान के साथ राज्याभिषेक हुआ था। राज परिवार से जुड़े सभी संस्कारों -ब्यवहारों से सम्पन्न राजा साहब पहले तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े फिर राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई।            


  राजनीति में उनकी पकड़ इतनी मजबूत हो चुकी थी कि  स्वतंत्र भारत के प्रथम आम चुनाव (1952) में स्टार प्रचारक की भूमिका में रहे। लोगों को अपने कार्य व्यवहार एवं ओजस्वी भाषण से इतना प्रभावित किया कि द्वितीय विधानसभा चुनाव (9157) में जौनपुर सदर से प्रत्याशी घोषित कर दिया गया, और विजयी होकर जनसंपर्क में अपना अधिकांश समय देने लगे। 1962 में जौनपुर सदर से कांग्रेसी सरकार में गृह मंत्री रहे हरगोविंद सिंह जैसे लोकप्रिय नेता को हराकर उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता विरोधी दल की भूमिका में रहे। 1967 के आम चुनाव में बरसठी से विधायक बने। उन्होंने ने जिसे चाहा चुनाव लडाया और जिताया भी।           


यह दौर ऐसा था जब बीबीसी लंदन से राजा साहब के चुनाव का कवरेज होता था। एक बार तो बीबीसी लंदन ने यह कहा कि - राजा यादवेन्द्र दत्त दुबे एवं राममनोहर लोहिया के सामने खड़ा होने के लिए कोई कांग्रेसी प्रत्याशी तैयार नहीं है। जबकि उस दौर में कांग्रेस का ही बोलबाला था।                   राजा साहब 1977 एवं 1989 में दो बार सांसद रहे। संसद में उनके भाषण की चर्चा राजनीतिक हल्कों में हुआ करता था।                   


     जनसंघ के अध्यक्ष रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय को जौनपुर से उपचुनाव में प्रत्याशी घोषित किया गया कि राजा साहब के लोकप्रियता का लाभ मिलेगा। लेकिन बाहरी प्रत्याशी के नाम पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।                           

     राजा साहब को तीन बार जेल भी जाना पड़ा था । पहली बार  महात्मा गांधी की हत्या में  गोडसे द्वारा प्रयोग में लाई गई गाड़ी और पिस्तौल को राजा साहब का बताया गया और 60 दिनों तक नैनी सेंट्रल जेल में कठोर कारावास में रखा गया। जिसमें बाद में निर्दोष साबित हुए। फिर इमरजेंसी और राममंदिर शिलापूजन के समय जेल यात्रा करना पड़ा।           

   राज पीजी कॉलेज के प्राचार्य रहे प्रोफेसर (डॉ) अखिलेश्वर शुक्ला ने संसद में अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर राजा साहब के एक भाषण की चर्चा करते हुए  बताया कि -राजा साहब के लम्बे भाषण के चलते जब लोकसभा अध्यक्ष द्वारा समय समाप्त होने की बात कही गई तो प्रधानमंत्री रहे भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई और उप प्रधानमंत्री रहे लाल कृष्ण आडवाणी ने अपना समय भी राजा साहब को देने का आग्रह किया।  इस दौरान कांग्रेस के नेता सीएम स्टीफन ने भाषण के बीच में टोका टाकी शूरु कर दिया तो राजा साहब ने भोजपुरी में समक्षाते हुए कहा कि --"तोहार उमर चालीस होई आई --अबही ना गई तोहार लरिकाई" - इसके बाद पुरा सदन ठहाकों से गूंज उठा ।                        


                              हवेली राजनेताओं एवं आमजन के आने जाने से गुलजार रहता था।  राजा साहब स्वयं भी प्रायः गांवों का दौरा किया करते थे। स्मरण शक्ति इतनी प्रबल थी कि जो एक बार मिला उसे नाम से ही पुकारते थे।                

              राजमहल में संघ के द्वितीय सरसंघचालक गुरु गोलवलकर, भाऊराव देवरस, वेणुगोपाल, नानाजी देशमुख, पं दीनदयाल उपाध्याय, प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई, उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कलराज मिश्र, सहित अन्य दलों के नेताओं का भी आना जाना लगा रहता था।           

  राजा साहब स्वयं की गाड़ी एवं राजपरिवार का झंडा ही प्रयोग करते थे।                  

      राजा साहब हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत सहित विज्ञान एवं ज्योतिष की‌ भी अच्छी जानकारी रखते थे।                   

    वह जीवन का अंतिम दिन अंक गणित का सर्वोच्च अंक - 09-09-1999 को प्रातः 09 बजे जब राजा साहब ने शरिर त्याग किया तो उनके शव यात्रा में जो जनसैलाब उमड़ा वह न *भूतो न भविष्यति*। हवेली से रामघाट तक लोगों का रेला उमड़ पड़ा था। आगे गृह राज्यमंत्री, अनेकों राजनीतिज्ञ, व्यापारी से लेकर आमजन शवयाञा में शरीक थे।  जिस जगह पर चंदन की लकड़ी से दाह-संस्कार किया गया वहां की अग्नि आज भी निर्बाध गति से प्रज्वलित हो रही है और वही अग्नि अन्य शवदाह में प्रयुक्त किया जा रहा है।                                    राजा यादवेन्द्र दत्त दुबे जी को अपने तरफ से जनपद वासियों की तरफ से सत सत नमन सहित श्रद्धांजलि अर्पित  करता हूं  


         प्रोफेसर (कैप्टन) डॉ अखिलेश्वर शुक्ला, पूर्व प्राचार्य -राज पीजी कॉलेज जौनपुर -उतर प्रदेश।                     .


डोईवाला :


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डोईवाला विधानसभा के विस्थापित क्षेत्र अठूरवाला में पुरानी टिहरी की स्मृतियों को संजोने के उद्देश्य से प्रस्तावित घंटाघर के निर्माण हेतु माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार पुष्कर सिंह धामी द्वारा वित्तीय स्वीकृति प्रदान किए जाने पर क्षेत्रवासियों में हर्ष का माहौल है।


इस महत्वपूर्ण स्वीकृति के लिए नगर पालिका परिषद डोईवाला के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह नेगी (नंदू प्रधान) के नेतृत्व में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने डोईवाला के लोकप्रिय विधायक बृजभूषण गैरोला के आवास पर पहुंचकर उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट कर एवं शॉल ओढ़ाकर इस उत्कृष्ट कार्य के लिए धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।


इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने कहा कि अठूरवाला टिहरी बांध परियोजना से विस्थापित परिवारों की भावनाओं और पुरानी टिहरी की यादों से गहराई से जुड़ा हुआ क्षेत्र है। ऐसे में प्रस्तावित घंटाघर आने वाली पीढ़ियों के लिए पुरानी टिहरी की संस्कृति, विरासत और स्मृतियों का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बनेगा।


वक्ताओं ने कहा कि विधायक बृजभूषण गैरोला द्वारा इस मांग को प्रमुखता से आगे बढ़ाना तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा इसके लिए वित्तीय स्वीकृति प्रदान करना क्षेत्र के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष विक्रम सिंह नेगी, फिल्म निर्माता संजय चमोली, पूर्व मंडल महामंत्री रविन्द्र बेलवाल, जिला उपाध्यक्ष ओबीसी मोर्चा प्रेम सिंह पम्मी राज, सभासद सुरेश सैनी, सभासद सुंदर लोधी, घंटाघर की मांग को प्रमुखता से रखने वाले वीरेंद्र सिंह नेगी (वेस्टन भाई), विनोद नेगी, पुष्कर सिंह नेगी, सुमेर सिंह नेगी, रणजीत सिंह गुसाईं, क्षेत्र पंचायत सदस्य अमित कुकरेती, कमल गोला, पंकज चौधरी, कु. अंशिका डोभाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य आयुष मल्ल सहित अनेक क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।


क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं विधायक बृजभूषण गैरोला का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह घंटाघर केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि पुरानी टिहरी की स्मृतियों और विस्थापित समाज की भावनाओं को सम्मान देने वाला एक ऐतिहासिक स्मारक साबित होगा।

 डोईवाला:

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महामहिम राज्यपाल महोदय जी द्वारा आपके सेवक रविंद्र बेलवाल को नगर पालिका परिषद् डोईवाला  का सभासद नामित किए जाने पर हृदय की गहराइयों से आभार एवं धन्यवाद।


इस सम्मान एवं विश्वास के लिए माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार श्री पुष्कर सिंह धामी जी, पूर्व शिक्षा मंत्री भारत सरकार एवं मेरे गुरु जी डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जी, प्रदेश अध्यक्ष आदरणीय श्री महेंद्र भट्ट जी, लोकप्रिय विधायक डोईवाला श्री बृजभूषण गैरोला जी, लोकप्रिय नगर पालिका अध्यक्ष डोईवाला बड़े भाई श्री नरेंद्र सिंह नेगी (नंदू प्रधान) जी  एवं सभी शुभचिन्तकों का हृदयतल की गहराइयों से बहुत-बहुत धन्यवाद एवं आभार।

 विशेष रूप से पूर्व प्रधान अठूरवाला श्री पुरुषोत्तम डोभाल जी,जिला उपाध्यक्ष भाजपा श्री विक्रम सिंह नेगी जी,सांसद प्रतिनिधि श्री संजय चमोली जी का हृदयतल की गहराइयों से बहुत-बहुत धन्यवाद!


आप सभी के स्नेह, आशीर्वाद और विश्वास को सदैव जनसेवा के माध्यम से सार्थक करने का प्रयास करूंगा


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज करेंगे मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना का शुभारंभ*

*प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए युवाओं को मिलेगी निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग*


देहरादून, 7 सितंबर

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 मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज प्रदेश के युवाओं के भविष्य निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का शुभारंभ करेंगे। इस योजना के माध्यम से राज्य के युवाओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग एवं गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।


योजना का उद्देश्य युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक संसाधनों की कमी किसी भी प्रतिभाशाली युवा के सपनों के आड़े न आए।


योजना के तहत राज्य के विश्वविद्यालयों तथा शासकीय एवं सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा प्रदान की जाएगी। इसमें सिविल सर्विसेज (UPSC एवं राज्य लोक सेवा आयोग), रक्षा सेवाएं (CDS), बैंकिंग, रेलवे और SSC सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाएं शामिल होंगी।


इसके अतिरिक्त CAT, MAT, GATE, NET और CSIR-NET जैसी उच्च शिक्षा एवं पात्रता परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी युवाओं को मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।


मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना विशेष रूप से प्रदेश के दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगी। अब युवाओं को गुणवत्तापूर्ण कोचिंग के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा और वे घर बैठे ही विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में अपनी तैयारी कर सकेंगे।

[07/09, 18:31] Deepa Gaur Informdept: *11 हजार विद्यार्थियों को मिलेगी निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा* 



 *UPSC/State PCS से लेकर SSC, Banking, Railway, Defence, NET, GATE, CSIR-JRF और CAT/MAT जैसी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी* 





मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज प्रदेश के विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी एवं प्रवेश परीक्षाओं की गुणवत्तापूर्ण तैयारी के लिए निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग योजना का शुभारंभ किया। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के प्रतिभावान एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं को आर्थिक बाधाओं से मुक्त करते हुए देश के प्रतिष्ठित शिक्षकों, विषय-विशेषज्ञों एवं प्रोफेशनल कोचिंग संस्थानों की गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सुविधाएं ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराना है।



योजना के अंतर्गत कुल 11,000 विद्यार्थियों को निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत UPSC एवं State PCS की तैयारी के लिए 2,000 विद्यार्थियों, SSC, Railway, Banking Services एवं समकक्ष परीक्षाओं के लिए 5,000 विद्यार्थियों, Defence Services की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए 2,000 विद्यार्थियों, NET, GATE, CSIR एवं JRF जैसी परीक्षाओं के लिए 1,000 विद्यार्थियों तथा CAT/MAT जैसी प्रबंधन प्रवेश परीक्षाओं के लिए 1,000 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन दिया जाएगा।



 *खुली ऑनलाइन स्क्रीनिंग परीक्षा से होगा विद्यार्थियों का चयन* 



योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक छात्र-छात्राओं का चयन खुली ऑनलाइन स्क्रीनिंग परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा। इच्छुक विद्यार्थी निर्धारित पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर स्क्रीनिंग परीक्षा में प्रतिभाग कर सकेंगे। स्क्रीनिंग परीक्षा के प्रदर्शन के आधार पर विद्यार्थियों का चयन संबंधित परीक्षा की तैयारी के लिए किया जाएगा।


योजना में टॉपर एवं मेधावी छात्र-छात्राओं को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही चयन प्रक्रिया में विद्यार्थियों की योग्यता, परीक्षा में प्रदर्शन तथा निर्धारित पात्रता मानकों को ध्यान में रखा जाएगा। इस प्रकार योजना का लाभ उन विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाएगा, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गंभीर हैं और अपनी प्रतिभा एवं क्षमता के बल पर आगे बढ़ना चाहते हैं।


 *सिर्फ ऑनलाइन कक्षाएं नहीं, मिलेगा पूरा डिजिटल लर्निंग सपोर्ट* 


इस योजना की महत्वपूर्ण विशेषता यह होगी कि विद्यार्थियों को केवल लाइव ऑनलाइन कक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उन्हें रिकॉर्डेड लेक्चर, डिजिटल स्टडी मटेरियल, विषयवार प्रश्न बैंक, नियमित ऑनलाइन टेस्ट, मॉक टेस्ट, परीक्षा पैटर्न आधारित अभ्यास तथा प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।


विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार रिकॉर्डेड कक्षाओं और डिजिटल अध्ययन सामग्री का दोबारा अध्ययन कर सकेंगे। नियमित टेस्ट एवं मॉक टेस्ट के माध्यम से उनकी तैयारी का आकलन किया जाएगा तथा विद्यार्थियों को यह समझने में सहायता मिलेगी कि किन विषयों में उन्हें अधिक अभ्यास की आवश्यकता है।


 *देश के प्रतिष्ठित एवं प्रोफेशनल ट्यूटर विद्यार्थियों को देंगे मार्गदर्शन* 


गुणवत्तापूर्ण प्रतियोगी परीक्षा प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा Study IQ, Delhi, Mahendra Private Limited, Lucknow तथा Doon Dreamers, Dehradun जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का चयन किया गया है।


इन संस्थानों के विशेषज्ञ शिक्षकों एवं विषय-विशेषज्ञों के माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी एवं प्रवेश परीक्षाओं की व्यवस्थित तैयारी कराई जाएगी। इसके साथ ही सरकार की ओर से देश के प्रसिद्ध, अनुभवी एवं प्रोफेशनल ट्यूटरों और विषय-विशेषज्ञों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा, ताकि उत्तराखंड के विद्यार्थियों को देशभर में उपलब्ध उत्कृष्ट शिक्षण एवं मार्गदर्शन का लाभ मिल सके।


 *विद्यार्थियों को कैसे मिलेगा लाभ?* 


योजना के तहत लाभ लेने की प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी रखा जाएगा। इच्छुक विद्यार्थी—


1. निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल पर अपना पंजीकरण करेंगे।

2. आवश्यक विवरण एवं दस्तावेज अपलोड कर आवेदन करेंगे।

3. ऑनलाइन स्क्रीनिंग परीक्षा में प्रतिभाग करेंगे।

4. परीक्षा में प्रदर्शन एवं निर्धारित पात्रता के आधार पर चयनित विद्यार्थियों को संबंधित कोर्स में प्रवेश दिया जाएगा।

5. चयनित विद्यार्थियों को ऑनलाइन कक्षाओं, रिकॉर्डेड लेक्चर एवं डिजिटल अध्ययन सामग्री तक निःशुल्क पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी।

6. नियमित टेस्ट एवं मॉक टेस्ट के माध्यम से विद्यार्थियों की तैयारी का मूल्यांकन किया जाएगा।

7. विद्यार्थियों को उनकी तैयारी एवं प्रदर्शन के अनुरूप आवश्यक शैक्षणिक मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा।


 *आर्थिक रूप से सक्षम न होने वाला विद्यार्थी भी कर सकेगा बड़े लक्ष्य की तैयारी* 


सरकार का प्रयास है कि किसी भी प्रतिभावान विद्यार्थी की सफलता के रास्ते में आर्थिक संसाधनों की कमी बाधा न बने। प्रदेश में अनेक विद्यार्थी प्रतिभाशाली होने के बावजूद महंगी कोचिंग का खर्च वहन नहीं कर पाते। ऐसे विद्यार्थियों के लिए यह योजना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।


डिजिटल तकनीक के माध्यम से विद्यार्थियों को उनके घर से ही देश के श्रेष्ठ शिक्षकों एवं विषय-विशेषज्ञों से सीखने का अवसर मिलेगा। इससे पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी बड़े शहरों में जाकर महंगी कोचिंग लेने की आवश्यकता कम होगी।


 *Technology, Quality और Accessibility को एक साथ जोड़ने का प्रयास* 


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज के समय में डिजिटल तकनीक शिक्षा की पहुंच, गुणवत्ता और अवसरों को व्यापक बनाने का प्रभावी माध्यम बन चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार Technology, Quality और Accessibility को एक साथ जोड़कर प्रदेश के विद्यार्थियों को उनके लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन एवं अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है।



उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि उत्तराखंड के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर संसाधन, गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन और समान अवसर उपलब्ध हों। आर्थिक परिस्थितियां किसी विद्यार्थी की प्रतिभा और उसके सपनों के बीच बाधा न बनें, इसी उद्देश्य से निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग की यह पहल शुरू की गई है।



इस योजना के माध्यम से उत्तराखंड के 11,000 विद्यार्थियों को निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण कोचिंग उपलब्ध कराते हुए उन्हें विभिन्न राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय प्रतियोगी एवं प्रवेश परीक्षाओं के लिए तैयार किया जाएगा।

[07/09, 20:32] Deepa Gaur Informdept: *स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से की भेंट* 



 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में आज स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति, हरिद्वार के राष्ट्रीय महासचिव श्री जितेंद्र रघुवंशी के नेतृत्व में  प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने स्वतंत्रता सेनानियों एवं उनके आश्रित परिवारों से जुड़े विभिन्न विषयों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी देश की स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन का सर्वस्व न्योछावर करने वाले राष्ट्र के महान नायक हैं। उनके त्याग, संघर्ष और बलिदान के कारण ही आज हम स्वतंत्र भारत में स्वतंत्रता एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ जीवन जी रहे हैं। स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वतंत्रता सेनानियों तथा उनके परिवारों के सम्मान और कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार द्वारा स्वतंत्रता सेनानी सम्मान पेंशन की व्यवस्था के साथ ही उनके आश्रित परिवारों के हितों का भी ध्यान रखा जा रहा है। स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों एवं उनके योगदान को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उनके नाम पर स्मारकों एवं अन्य सम्मानजनक पहलों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।


उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की वीरभूमि ने देश की स्वतंत्रता के आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और प्रदेश के अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने राष्ट्र की आजादी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राज्य सरकार का प्रयास है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान को इतिहास और जनमानस में सदैव जीवंत रखा जाए।


मुख्यमंत्री श्री धामी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि स्वतंत्रता सेनानी एवं उनके उत्तराधिकारी परिवारों से जुड़े जायज विषयों का नियमों के अनुरूप प्राथमिकता से परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को प्राप्त प्रकरणों का परीक्षण करते हुए नियमानुसार उचित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।


प्रतिनिधिमंडल ने स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के सम्मान एवं हितों के प्रति राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया।


 इस अवसर पर श्री सुरेश चंद्रा सुयाल, श्री अनुराग सिंह गौतम तथा श्री आदित्य सिंह सहित अन्य स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के सदस्य भी उपस्थित थे |



 *तीन वर्षों में 37वें से 12वें स्थान तक का सफर, धामी सरकार के सतत प्रयासों और जनभागीदारी को मिली बड़ी सफलता* 



clean aor survey dehradun 12th place


स्वच्छ और स्वस्थ उत्तराखंड की दिशा में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों को एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा जारी स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 के परिणामों में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून ने वायु गुणवत्ता सुधाppर के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए 3 से 10 लाख की जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में देशभर में 12वां स्थान प्राप्त किया है। देहरादून की यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में शहर ने वायु गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है और तीन वर्षों की समग्र यात्रा में 37वें स्थान से 12वें स्थान तक की उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।



वर्ष 2024 में देहरादून इस श्रेणी में 41वें स्थान पर था, जबकि वर्ष 2025 में इसमें उल्लेखनीय सुधार करते हुए शहर 19वें स्थान पर पहुंचा और अब वर्ष 2026 में देहरादून ने 12वां स्थान हासिल किया है। यह लगातार सुधार केवल रैंकिंग में बदलाव नहीं, बल्कि शहर में वायु प्रदूषण की रोकथाम, धूल नियंत्रण, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर निगरानी, स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने, सड़क सफाई, जनजागरूकता और पर्यावरणीय निगरानी के लिए किए जा रहे बहुआयामी प्रयासों की सफलता का प्रमाण है |



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ वायु को जनस्वास्थ्य से जोड़ते हुए इस दिशा में ठोस एवं वैज्ञानिक उपायों पर विशेष जोर दिया है। सरकार की प्राथमिकता केवल प्रदूषण के स्तर को कम करना ही नहीं, बल्कि ऐसा स्थायी और प्रभावी तंत्र विकसित करना है, जिसके माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को भी स्वच्छ, स्वस्थ और बेहतर पर्यावरण उपलब्ध कराया जा सके। देहरादून की रैंकिंग में हुआ यह सुधार इसी दीर्घकालिक सोच और निरंतर निगरानी के परिणामस्वरूप सामने आया है।



देहरादून नगर निगम एवं संबंधित विभागों द्वारा वायु गुणवत्ता सुधार के लिए अपनाई गई बहुआयामी रणनीति में आधुनिक तकनीक का भी प्रभावी उपयोग किया गया। शहर के संवेदनशील एवं सघन क्षेत्रों में धूल तथा प्रदूषक कणों को नियंत्रित करने के लिए ड्रोन के माध्यम से जल छिड़काव किया गया। इसके साथ ही सड़क किनारे एवं प्रमुख मार्गों पर धूल के जमाव को कम करने के लिए यांत्रिक सफाई व्यवस्था को मजबूत किया गया तथा मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों के नियमित संचालन पर विशेष ध्यान दिया गया। इन प्रयासों का उद्देश्य सड़क की धूल से उत्पन्न होने वाले प्रदूषक कणों को नियंत्रित कर शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार लाना रहा।



वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में खुले में कूड़ा एवं पराली जलाना भी शामिल है। इसे देखते हुए नगर क्षेत्र में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों को खुले में कूड़ा जलाने से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में लगातार जागरूक किया गया। सरकार और स्थानीय निकायों की ओर से नागरिकों से स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण को अपनी दैनिक आदतों का हिस्सा बनाने की अपील की गई। प्रशासनिक प्रयासों के साथ जनभागीदारी को जोड़ने का यह मॉडल देहरादून की वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ है।



शहर में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण के लिए भी निरंतर अभियान चलाए गए। प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र यानी पीयूसी की नियमित एवं सघन जांच के माध्यम से ऐसे वाहनों पर निगरानी बढ़ाई गई, जो निर्धारित मानकों से अधिक उत्सर्जन कर रहे हैं। इसके साथ ही स्वच्छ परिवहन को प्रोत्साहित करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। ईवी अपनाने के लिए प्रोत्साहन के साथ शहर में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। सरकार का प्रयास है कि आने वाले समय में स्वच्छ एवं पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाए।


वायु गुणवत्ता सुधार के लिए केवल एक-दो विभागों के प्रयास पर्याप्त नहीं होते, बल्कि इसके लिए विभिन्न विभागों, स्थानीय निकायों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास आवश्यक होते हैं। इसी सोच के साथ देहरादून में वायु गुणवत्ता की सतत निगरानी के लिए सुदृढ़ मॉनिटरिंग व्यवस्था विकसित की गई है। प्राप्त आंकड़ों के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। इस निरंतर निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई ने शहर में वायु प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


देहरादून की यह उपलब्धि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के ‘स्वच्छ, स्वस्थ और सतत विकास वाले उत्तराखंड’ के विजन को भी मजबूती प्रदान करती है। राज्य सरकार विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कायम करते हुए ऐसी व्यवस्थाओं पर जोर दे रही है, जिनमें शहरों का आर्थिक एवं आधारभूत विकास भी हो और पर्यावरणीय गुणवत्ता भी बनी रहे। राजधानी देहरादून का स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लगातार बेहतर प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि योजनाबद्ध प्रयासों, आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में ठोस परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।


यह उपलब्धि देहरादून नगर निगम, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, संबंधित विभागों, सफाई एवं पर्यावरण कर्मियों तथा शहर की जागरूक जनता के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। विशेष रूप से देहरादून के नागरिकों द्वारा स्वच्छता, कूड़ा प्रबंधन, खुले में कचरा न जलाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति दिखाई जा रही जागरूकता ने सरकार के प्रयासों को जनआंदोलन का स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री श्री धामी ने भी समय-समय पर पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए नागरिकों से स्वच्छ एवं प्रदूषणमुक्त उत्तराखंड के निर्माण में सक्रिय सहयोग का आह्वान किया है।


देहरादून के साथ ही उत्तराखंड के अन्य शहरों ने भी वायु गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में सकारात्मक प्रदर्शन किया है। राज्य के ऋषिकेश और काशीपुर शहरों में भी पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के अन्य शहरों में भी वायु गुणवत्ता सुधार के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी कार्ययोजनाएं लागू की जाएं और स्वच्छ वायु के इस अभियान को पूरे उत्तराखंड में व्यापक जनअभियान के रूप में आगे बढ़ाया जाए।


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में देहरादून की उपलब्धि पर देहरादूनवासियों, नगर निगम, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा संबंधित विभागों को बधाई देते हुए कहा कि........


 *“स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में देहरादून का 37वें से 12वें स्थान पर पहुंचना पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। यह उपलब्धि देहरादून की जागरूक जनता की सक्रिय भागीदारी, नगर निगम देहरादून के समर्पित कार्यों तथा उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सतत निगरानी का सम्मिलित परिणाम है। सरकार का प्रयास है कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। स्वच्छ वायु केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के स्वस्थ जीवन और बेहतर भविष्य से जुड़ा विषय है। देहरादून की यह उपलब्धि हमें और बेहतर करने की प्रेरणा देती है। मैं देहरादूनवासियों एवं सभी संबंधित विभागों को हार्दिक बधाई देता हूं और विश्वास करता हूं कि स्वच्छ वायु के लिए यह सामूहिक प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेगा।”* 


- *पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड*


*परियोजनाओं की प्राथमिकता तय कर ही भारत सरकार को प्रस्ताव भेजे जाएँ: मुख्य सचिव*



मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सोमवार को सचिवालय में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम से सम्बन्धित राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति (एसएलएससी) की बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए परियोजनाओं का चयन एवं प्राथमिकता निर्धारण किया जाए। बैठक में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के फेज-1 एवं फेज-2 के अंतर्गत प्रस्तावित विभिन्न विकास कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर विभिन्न परियोजनाओं को संस्तुति प्रदान की गई।


मुख्य सचिव ने कहा कि वाइब्रेंट विलेज क्षेत्रों में सड़क एवं विद्युत ग्रिड से कनेक्टिविटी, नेटवर्क, टेलीविजन एवं संचार सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम से सम्बन्धित परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार करते समय सेना, एसएसबी एवं आईटीबीपी से सम्बन्धित आवश्यक परियोजनाओं को भी समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने सम्बन्धित जनपदों की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित करने के निर्देश दिए।


मुख्य सचिव ने कहा कि केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले परियोजना प्रस्तावों में कार्यों की प्राथमिकता स्पष्ट रूप से निर्धारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं की सूची प्राथमिकता के अवरोही क्रम में तैयार की जाए, इसके लिए सम्बन्धित जनपदों से परियोजनाओं की प्राथमिकता प्राप्त कर प्रस्ताव तैयार किए जाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं की फंडिंग के लिए भारत सरकार अथवा राज्य सरकार की किसी अन्य योजना के अंतर्गत वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं, उन्हें सम्बन्धित योजनाओं के माध्यम से वित्तपोषित कराने का प्रयास किया जाए। ऐसी परियोजनाओं को वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की सूची से हटाकर उनके स्थान पर अन्य आवश्यक एवं प्राथमिकता वाली परियोजनाओं को शामिल किया जा सकता है।


मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के फेज-1 एवं फेज-2 के अंतर्गत सभी परियोजनाओं को प्राथमिकता निर्धारित करने के बाद ही केंद्र सरकार को भेजा जाए। उन्होंने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के लिए प्रत्येक सम्बन्धित जनपद से पांच-पांच बड़े एवं महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाएं तैयार की जाएँ, जो वाइब्रेंट विलेज क्षेत्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। इन परियोजनाओं में क्षेत्र की स्थानीय आवश्यकताओं, कनेक्टिविटी, बुनियादी सुविधाओं, पर्यटन, आजीविका तथा सीमावर्ती क्षेत्रों की रणनीतिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाए।


बैठक में प्रमुख सचिव श्री आर. मीनाक्षी सुन्दरम, डीजी कारागार श्री अभिनव कुमार, सचिव श्री धीराज सिंह गर्ब्याल, श्री सी. रविशंकर, आईजी डॉ. नीलेश आनन्द भरणे सहित सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।



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