लेखक-पत्रकार जगमोहन ‘आज़ाद’ अमेरिका की सीडरब्रुक यूनिवर्सिटी से मानद डॉक्टरेट की उपाधि एवं गोल्ड मेडल से सम्मानित
नई दिल्ली :
शनिवार को नई दिल्ली के होटल वेलकम में अमेरिका की सेडारब्रुक यूनिवर्सिटी (Cedarbrook University) द्वारा लेखन,पत्रकारिता,समाज सेवा,शिक्षा,साहित्य,कला और उद्यमिता जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्ट व्यक्तियों को मानद डॉक्टरेट(Honorary Doctorate) की उपाधि और गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।
इस मौके पर अमेरिका सीडर ब्रुक यूनिवर्सिटी द्वारा लेखक और पत्रकार जगमोहन ‘आज़ाद’ को पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों के विशिष्ट योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट(Ph.D.)की उपाधि और गोल्ड मेडल से सम्मानित किया है। जिसके तह्त उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि के साथ प्रमाण पत्र और स्वर्ण पदक(गोल्ड मेडल)प्रदान किया गया
आपको बता दें कि सीडर ब्रुक यूनिवर्सिटी ने इस विशेष अंतर्राष्ट्रीय दीक्षांत समारोह में भारत के कई प्रतिष्ठित शिक्षाविदों,समाजसेवियों और शोधकर्ताओं को शिक्षा,अकादमिक नेतृत्व और सामाजिक योगदान के क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य के लिए 'मानद डॉक्टरेट' (Honorary Doctorate) की उपाधि से सम्मानित किया।
अग्रणी वैश्विक शिक्षा परामर्श और सेवा मंच ऐमले (Aimlay) के तत्वावधान में नई दिल्ली में आयोजित इस ग्लोबल एक्सीलेंस समिट(Global Excellence Summit) में वैश्विक स्तर के विचारक,शिक्षाविद,शोधकर्ता और उद्योगपतियों सहित दुनिया भर के कई देशों से सैकड़ों प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जिसमें उत्तराखंड मूल के कवि-लेखक और पत्रकार जगमोहन ‘आजाद’ को मानद डॉक्टरेट की उपाधि एवं गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।
मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित होने के बाद जगमोहन ‘आज़ाद’ ने सीडरब्रुक यूनिवर्सिटी अमेरिका और ऐमले का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिस हिमालय को देखने के लिए दुनिया भर से लोग हमारे उत्तराखंड आते है,उसे हम सुबह उठकर प्रणाम करते है,क्योंकि हिमालय हमारे लिए केवल पहाड़ नहीं,बल्कि देवता और जीवंत सांस्कृतिक धरोहर भी है। जिस प्राकृतिक संपदा और पावन नदियों को देखने और मानसिक शांति पाने के लिए दुनिया भर से लोग मीलों का सफर तय करके हमारे पास आते हैं,उन्हें हम रोज़ सुबह उठकर एक मां और चेतना के रूप में प्रणाम करते हैं। हम पहाड़ों और नदियों को देवता मानते है। पेड़-पौधे,बांज और देवदार के जंगलों को श्रद्धा से देखते है और उन्हें बचाते है। उत्तराखंड की मातृशक्ति जो हमारे पहाड़ की सामाजिक,सांस्कृतिक और आर्थिक रीढ़ मानी जाती हैं,जिन्होंने कठिन पहाड़ी जीवन और राज्य निर्माण के संघर्ष में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। जिनसे मैं संघर्षों के मायनों को समझता हूं। मैं इन सब को अपनी इस उपाधि को समर्पित करता हूं। क्योंकि मैं आज जो कुछ भी हूं,इन सब की वजह से हूं।
मूल रूप से उत्तराखंड,पौड़ी गढ़वाल की पट्टी कफोलस्यूं में ग्राम नौली रहने वाले है जगमोहन
सेडारब्रुक यूनिवर्सिटी (Cedarbrook University) से मानद डॉक्टरेट(Honorary Doctorate) की उपाधि और गोल्ड मेडल से सम्मानित जगमोहन ‘आज़ाद’ मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के ग्राम नौली के रहने वाले और पिछले 30 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता से जुड़े हैं और कई उपलब्धियां प्राप्त कर चुके हैं। दिल्ली दूरदर्शन,हिदुस्तान,इंडिया टुडे,अमर उजाला,जनसत्ता,राष्ट्रीय सहारा जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पत्रकारिता के क्षेत्र में नयी भूमिका स्थापित करते हुए जगमोहन ‘आज़ाद’ वर्तमान में सहारा न्यूज चैनल में वरिष्ठ संपादक के पद पर कार्यरत हैं। उनके अभी तक तीन कविता संग्रह,एक बाल कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुका है। जगमोहन ने गढ़वाली कवि ‘चंद्र कुंवर बर्त्वाल’ पर पुस्तक ‘प्रकृति के कवि चन्द्रकुंवर बर्त्वाल’ का संपादन किया हैं तो,वो उत्तराखंड के लोक कलाकारों के जीवन परिवेश पर शोध करने वाले पहले शोधकर्ता है। इस शोध पर उनका शोध कार्य ‘लोक की बात’ नाम से प्रकाशित एवं पुरस्कृत है,इसी के साथ जगमोहन ‘उत्तराखंड सिनेमा का इतिहास’और ‘उत्तराखंड की लोक विरासत’ पर भी शोध कर रहे हैं। वह साहित्य कला एवं फिल्म से जुड़े लगभग एक हजार से अधिक लोगों के साक्षात्कार कर चुके हैं।
जगमोहन ‘आज़ाद’को साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के साथ-साथ कई सामाजिक संस्थाएं सम्मानित कर चुकी है।
पहाड़ की माटी से उपजे,पहाड़ के संघर्षों में पले-बढ़े और पहाड़ जैसा जीवन जीने वाले जगमोहन ‘आजाद’ के संघर्षों की कहानी बहुत संघर्षपूर्ण है,जो कई बार आपको विचलित कर देती है।दिल्ली की सड़कों पर रिक्शा चलाने,दिल्ली के छापखानों में जीवन के लिए संघर्ष करने और तमाम पहाड़ के लोगों की तरह खुद को साबित करने लिए संघर्षों का लंबा अनुभव समेटे जगमोहन ‘आज़ाद’ने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना नाम कमाया है।
जगमोहन उत्तराखंड के माटी से जुडी खबरों के वे-पोर्टल संवाद जाह्नवी का संपादन भी कर रहे है। साथ ही यूट्यूब चैनल Travel With Me-‘संवाद जाह्नवी’ के माध्यम से लोक संस्कृतिक,लोक कलाओं,पर्यटन एवं लोक विरासत से जुडे ब्लॉग का निर्माण करते है।
लेखक-कवि पत्रकार जगमोहन ‘आजाद’ देश-विदेश में कई साहित्य और संस्कृतिक यात्राएं कर चुके है और कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित। जिनमें वियतनाम में आयोजित 20वें अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मलेन में ‘सलेकचंद जैन’ एवं ‘हो ची मिन्ह स्मृति सम्मान’। भूटान में आयोजित 21वें अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में ‘श्रीकांत वर्मा स्मृति सम्मान’। श्रीलंका में 22वें अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में ‘मुक्तिबोध स्मृति सम्मान’ और हिन्दी आकादमी दिल्ली 2004-05 का 'नवोदित लेखक सम्मान',कविता संग्रह 'शाम होते ही' के लिए प्रथम 'राजेंद्र बोहरा काव्य' सम्मान,जयपुर,पर्वतीय कला मंच,नोएडा से पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान हेतु 'पर्वतीय कला संस्कृति' सम्मान,डॉ.शोभनाथ यादव कविता सम्मान,कौथिग फाउंडेशन मुंबई,युवा पत्रकार सम्मान और मलेशिया,इंडोनेशिया,बाली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन के रजत पर्व में पत्रिकारिता के लिए ‘ट्रू मीडिया सम्मान-2025 प्रमुख है।
इस मौके पर पूर्व मंत्री यूपी पर्यावरण परिषद की चेयरपर्सन और ब्राह्मण सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व राज्य मंत्री साधना मिश्रा, ऐमले निदेशक राकेश कुमार गुप्ता,बिज़नेस हेड अभिषेक सिंह सिंह सहित कई विश्वविद्यालयों के कुलपति और उप-कुलपति उपस्थित थे।







