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*श्री बदरीनाथ धाम चढ़ावा प्रकरण की जांच के आदेश, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई : बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी* 

 *तथ्यों की पुष्टि से पहले भ्रामक आरोपों से बचें : मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़* 


श्री बदरीनाथ धाम/ देहरादून: 




श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी)  अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा है कि सोशल मीडिया में श्री बदरीनाथ धाम में चढ़ावे एवं दान में कथित हेराफेरी के संबंध में जो आरोप लगाए गए हैं, उन्हें मंदिर समिति ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं तथ्यपरक जांच के लिए जांच समिति गठित करने के आदेश दे दिए गए हैं। तथा स्पष्टीकरण तलब किया गया है।जांच पूर्ण होने के उपरांत यदि कोई भी कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।


 *बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि सोशियल मीडिया में जिस कर्मचारी को उनका "निजी सचिव" बताया जा रहा है, वह उनका कोई निजी सचिव नहीं है। संबंधित कर्मचारी श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का नियमित  सरकारी कर्मचारी है तथा वैयक्तिक सहायक के रूप में पूर्व में भी मंदिर समिति के तीन  अध्यक्षों के साथ कार्य कर चुका है। इसलिए सोशल मीडिया में उसके संबंध में प्रसारित किये जा रहे आरोप सही पाये जाते है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जायेगी* 


इधर, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि बदरीनाथ मंदिर से संबंधित जो प्रकरण गत 2 जुलाई शाम  से सोशियल मीडिया पर वायरल हो रहा है, उसमें प्राप्त कथित शिकायत के आधार पर बदरीनाथ मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज की आज जांच करायी  गयी है। उपलब्ध फुटेज में अपेक्षित स्पष्टता नहीं है, फिर भी विषय की गंभीरता एवं संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे मामले से बीकेटीसी अध्यक्ष को अवगत करा दिया गया है।


मुख्य कार्याधिकारी ने बताया कि अध्यक्ष के निर्देशों के अनुपालन में संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण लिया जा रहा है। साथ ही मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच के लिए एक आंतरिक जांच समिति गठित किए जाने संबंधी आख्या अध्यक्ष को प्रेषित की जा रही है। 

समिति गठित होने के बाद वह सभी तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों एवं संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर विस्तृत जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।


उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यदि कोई प्रतिकूल तथ्य या अनियमितता संज्ञान में आती है तो श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम, 1939 तथा कर्मचारी आचरण नियमावली के प्रावधानों के अनुरूप दोषियों के विरुद्ध आवश्यक वैधानिक एवं विभागीय कार्रवाई अमल में लायी जाएगी।


मुख्य कार्याधिकारी ने कहा कि यह प्रकरण उत्तराखंड के विश्वविख्यात एवं करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र श्री बदरीनाथ धाम से जुड़ा हुआ है। इसलिए जब तक किसी भी आरोप की विधिवत जांच के माध्यम से पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक किसी भी प्रकार के अपुष्ट अथवा भ्रामक आरोप-प्रत्यारोप से बचना चाहिए। सभी से अपेक्षा है कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए संयम बरतें, ताकि पवित्र धाम की गरिमा एवं छवि पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

 *नियुक्ति पत्र जनसेवा का संकल्प और सवा करोड़ उत्तराखंडवासियों के विश्वास का प्रतीक : मुख्यमंत्री


appointment letter to  UkPSC selecteed ccaandidates


 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित पीसीएस मुख्य परीक्षा-2024 में चयनित 182 अभ्यर्थियों तथा कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग में वैयक्तिक सहायक के पद पर चयनित 5 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी नवचयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह नियुक्ति पत्र केवल सरकारी सेवा में प्रवेश का दस्तावेज नहीं, बल्कि सवा करोड़ उत्तराखंडवासियों के विश्वास, अपेक्षाओं और जनसेवा के संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अब प्रत्येक अधिकारी की पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसकी कार्यशैली, संवेदनशीलता और जनसेवा के प्रति समर्पण से होगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड पीसीएस मुख्य परीक्षा-2024 के लिए लगभग डेढ़ लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था तथा 71 हजार से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए, जिनमें से केवल 182 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। उन्होंने कहा कि यह सफलता चयनित अभ्यर्थियों की प्रतिभा, कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिणाम है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में पद का अर्थ शासन करना नहीं, बल्कि जनता की सेवा करना है। राज्य सरकार सरलीकरण, समाधान, निस्तारीकरण एवं संतुष्टि के मंत्र के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने नवचयनित अधिकारियों का आह्वान किया कि वे समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक शासन की योजनाओं और सेवाओं का लाभ संवेदनशीलता एवं पारदर्शिता के साथ पहुंचाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले प्रत्येक नागरिक को सरकारी कार्यालय में सम्मान, विश्वास और समयबद्ध समाधान का अनुभव होना चाहिए।


मुख्यमंत्री  ने कहा कि राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया। इसके परिणामस्वरूप भर्ती परीक्षाओं के प्रति युवाओं का विश्वास सुदृढ़ हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बीते साढ़े चार वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को पूर्ण पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ सरकारी सेवाओं में नियुक्ति प्रदान की है। आज 187 और युवाओं के इस अभियान से जुड़ने के साथ राज्य सरकार की युवा हितैषी प्रतिबद्धता और अधिक मजबूत हुई है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड के प्रत्येक युवा को उसकी प्रतिभा और योग्यता के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि रोजगार की तलाश में युवाओं को राज्य से बाहर जाने के लिए विवश न होना पड़े। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहाड़ के पानी और पहाड़ की जवानी, दोनों को उत्तराखंड के विकास की सबसे बड़ी शक्ति बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने बाबा केदार की पावन भूमि से 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया है। इस संकल्प को साकार करने में नवचयनित अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि सरकार नीतियां बनाती है, लेकिन उन्हें प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने का दायित्व अधिकारियों और कर्मचारियों का होता है। उन्होंने सभी अधिकारियों से विकसित उत्तराखंड के निर्माण के लिए पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ईमानदारी और निष्पक्षता से कार्य करने वाले प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी के साथ राज्य सरकार पूरी मजबूती से खड़ी रहेगी। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे किसी भी प्रकार के दबाव से मुक्त होकर संविधान, कानून और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करें।


इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी, डॉ. धन सिंह रावत, श्री रामसिंह कैड़ा, विधायक श्रीमती सविता कपूर, गोरखा कल्याण परिषद की अध्यक्ष श्रीमती ज्योति कोटिया,  प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, सचिव श्री शैलेश बगौली, श्री दिलीप जावलकर, श्री रविनाथ रमन, श्री चंद्रेश कुमार, श्री बृजेश कुमार संत, श्री विनय शंकर पांडेय, श्री एस.एन. पाण्डेय, डीजी होमगार्ड डॉ. पी. वी. के प्रसाद, डीजी अभिसूचना एवं सुरक्षा श्री अभिनव कुमार, एडीजी श्री डॉ. वी. मुरुगेशन, अपर सचिव श्री नवनीत पाण्डेय एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

 

देहरादून, 

MDDA action rishikesh, rajpur



मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध निर्माणों और मानचित्र स्वीकृति के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए शुक्रवार को व्यापक कार्रवाई की। प्राधिकरण की टीम ने ऋषिकेश क्षेत्र में बिना स्वीकृत मानचित्र के किए जा रहे एक बड़े निर्माण को सील किया, जबकि देहरादून के राजपुर, जाखन, पुरकुल, डीआईटी मालसी समेत विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर नियमों के उल्लंघन पर कड़ी चेतावनी दी। यह कार्रवाई उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के निर्देशों पर की गई। उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के अधिकारियों को सख्त निर्देश हैं कि विकास क्षेत्र में अनियोजित और अवैध निर्माण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे तथा ऐसे मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाये। 


*ऋषिकेश में बिना स्वीकृति बन रही इमारत सील*

एमडीडीए के अभियान के दौरान ऋषिकेश क्षेत्र में निर्मल ब्लॉक-बी, निकट द गंगाज में भवन स्वामी जखमोलो द्वारा बिना मानचित्र स्वीकृति के किए जा रहे बड़े अवैध निर्माण पर कार्रवाई की गई। प्राधिकरण की टीम द्वारा निरीक्षण के दौरान पाया गया कि निर्माण कार्य प्राधिकरण की अनुमति के बिना किया जा रहा था। नियमों के स्पष्ट उल्लंघन को देखते हुए एमडीडीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर निर्माण को सील कर दिया। सीलिंग की पूरी प्रक्रिया नियमानुसार संपन्न कराई गई ताकि भविष्य में किसी प्रकार का अवैध निर्माण आगे न बढ़ सके। कार्रवाई के दौरान सहायक अभियंता अभिषेक भारद्वाज, अवर अभियंता, सुपरवाइजर तथा पुलिस बल मौजूद रहा। 


*राजपुर, जाखन, पुरकुल और मालसी क्षेत्रों में चला निरीक्षण अभियान*

एमडीडीए ने केवल सीलिंग तक ही अपनी कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि देहरादून के तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में भी विशेष निरीक्षण अभियान चलाया। उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के निर्देशों पर संयुक्त सचिव गौरव चटवाल ने राजपुर, जाखन, पुरकुल, डीआईटी मालसी तथा आसपास के क्षेत्रों में निर्माणाधीन भवनों का स्थलीय निरीक्षण किया निरीक्षण के दौरान विभिन्न निर्माण स्थलों पर जाकर स्वीकृत मानचित्रों और वास्तविक निर्माण कार्यों का मिलान किया गया। कई स्थानों पर निर्माणकर्ताओं को दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए, जबकि स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण कार्य पाए जाने पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए। संयुक्त सचिव गौरव चटवाल ने कहा जिन निर्माणों के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई है अथवा स्वीकृत नक्शे से हटकर निर्माण किया जा रहा है, उनके विरुद्ध उत्तराखंड नगर एवं ग्राम नियोजन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे अभियान में क्षेत्रीय अवर अभियंता सचिन तोमर, सिद्धार्थ सेमवाल, विदिता कुमारी व पवन भट्ट तथा सुपरवाइजर के साथ संबंधित अन्य कर्मचारीशामिल रहे। 


*अवैध निर्माणों पर लगातार जारी रहेगा अभियान*

प्राधिकरण का उद्देश्य सुनियोजित शहरी विकास सुनिश्चित करना तथा नागरिकों की सुरक्षा और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए निर्माण गतिविधियों को नियमानुसार संचालित करना है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि विकास प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों, बिना स्वीकृति के भवन निर्माण और मानचित्र के विपरीत किए जा रहे निर्माण कार्यों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। 


*निर्माण शुरू करने से पहले आवश्यक स्वीकृतियां आवश्य ले- बंशीधर तिवारी* 

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि लगातार निरीक्षण और प्रवर्तन अभियान चलाकर ऐसे निर्माणों की पहचान की जा रही है जो बिना मानचित्र स्वीकृति अथवा स्वीकृत मानचित्र के विपरीत बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऋषिकेश में की गई सीलिंग कार्रवाई इसी अभियान का हिस्सा है। उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि सभी भवन स्वामियों और निर्माणकर्ताओं को नियमों का पालन करना चाहिए तथा निर्माण शुरू करने से पहले आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाए, वहां तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जाए। 



*निर्माण गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है- मोहन सिंह बर्निया* 

एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने देहरादून के नागरिकों से अपील की कि भवन निर्माण से पूर्व सभी आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करें और स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप ही निर्माण कार्य कराएं। इससे अनावश्यक कानूनी कार्रवाई से बचा जा सकेगा तथा क्षेत्र का नियोजित विकास सुनिश्चित होगा।

देहरादून:

aapda mitr training at SDRF centre  jollygrant


राज्य में आपदा के समय स्थानीय स्तर पर त्वरित एवं प्रभावी राहत कार्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से SDRF वाहिनी मुख्यालय, जॉलीग्रांट में हरिद्वार जनपद के 54 आपदा मित्रों के लिए आयोजित 12 दिवसीय आपदा प्रबंधन के मूलभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह प्रशिक्षण 22 जून 2026 से प्रारम्भ हुआ था।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आपदा प्रबंधन से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर व्यवहारिक एवं सैद्धांतिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसमें मूलभूत आपदा प्रबंधन, मेडिकल फर्स्ट रेस्पांडर, फ्लड रेस्क्यू, सर्च एंड रेस्क्यू, CBRN (Chemical, Biological, Radiological & Nuclear) तथा CSSR (Collapsed Structure Search & Rescue) सहित विभिन्न आपदा परिस्थितियों में प्रभावी कार्यवाही की तकनीकों का प्रशिक्षण शामिल रहा।


समापन समारोह के अवसर पर सेनानायक SDRF श्री अर्पण यदुवंशी ने कहा कि "आपदा के समय सबसे पहले स्थानीय नागरिक ही सहायता के लिए आगे आते हैं। ऐसे में प्रशिक्षित आपदा मित्र किसी भी आपदा की प्रारम्भिक अवस्था में अमूल्य भूमिका निभाते हैं। यह प्रशिक्षण केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण एवं मानवीय संवेदनाओं को भी सुदृढ़ करता है। आशा है कि सभी प्रशिक्षित आपदा मित्र अपने-अपने क्षेत्रों में आपदा के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर प्रभावी राहत एवं बचाव कार्यों में सक्रिय योगदान देंगे।"

प्रशिक्षण के समापन पर सभी प्रतिभागियों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण करने पर शुभकामनाएँ दी गईं तथा भविष्य में राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाने में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया गया।

 

मेष

अ, आ, चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो

यात्रा लाभदायक रहेगी। भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। कोई बड़ी समस्या का हल सहज ही होगा। समय अनुकूल है। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। वाणी पर नियंत्रण रखें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। शेयर मार्केट, म्युचुअल फंड से मनोनुकूल लाभ होगा। बेरोजगारी के प्रयास सफल रहेंगे।

Rashifal


वृषभ

ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो

परिवार के किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर खर्च होगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में नि‍श्चितता रहेगी। चिंता तथा तनाव रहेंगे। जल्दबाजी न करें। विवाद को बढ़ावा न दें। फालतू खर्च होगा। अपेक्षाकृत कार्यों में विलंब होगा। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। किसी व्यक्ति के बहकावे में न आएं।


मिथुन

का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह

आय में वृद्धि होगी। लाभ में वृद्धि होगी। कारोबार में वृद्धि होगी। शेयर मार्केट से लाभ होगा। व्यापार ठीक चलेगा। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। समय की अनुकूलता का लाभ लें। यात्रा लाभदायक रहेगी। रुका हुआ धन प्राप्त हो सकता है। विरोधी सक्रिय रहेंगे। स्वास्थ्‍य का ध्यान रखें। पारिवारिक चिंता रहेगी। जो‍खिम न लें।


कर्क

ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो

आर्थिक उन्नति की योजना बनेगी। व्यापार लाभदायक रहेगा। कार्यस्थल पर परिवर्तन हो सकता है। नए उपक्रम प्रारंभ हो सकते हैं। कार्यसिद्धि होगी। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। मान-सम्मान मिलेगा। जल्दबाजी से काम बिगड़ सकते हैं। थकान व कमजोरी रहेगी। किसी बड़े काम को करने की तीव्र इच्छा जागृत होगी।


सिंह

मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे

नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। पार्टनरों का सहयोग मिलेगा। दुष्टजनों से सावधान रहें। प्रमाद न करें। धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने का अवसर प्राप्त होगा। तीर्थयात्रा की योजना बनेगी। कानूनी अड़चन दूर होकर लाभ की स्थिति बनेगी। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल लाभ देगा। निवेश में सोच-समझकर हाथ डालें।


कन्या

ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

बनते कामों में विघ्न आ सकते हैं। चिंता तथा तनाव रहेंगे। बेकार बातों की तरफ ध्यान न दें। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय होगी। फालतू खर्च होगा। विवाद को बढ़ावा न दें। चोट व दुर्घटना के प्रति सावधानी आवश्यक है। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें।


तुला

रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते

प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। व्यापार लाभदायक रहेगा। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। भाइयों का सहयोग प्राप्त होगा। मानसिक बेचैनी रहेगी। सभी तरफ से सफलता प्राप्त होगी। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। ऐश्वर्य के साधनों पर अधिक व्यय होगा। कानूनी अड़चन दूर होकर लाभ की स्थिति बनेगी। शत्रु पस्त होंगे।


वृश्चिक

तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

स्थायी संपत्ति के कार्य बड़ा लाभ दे सकते हैं। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। समय की अनुकूलता का लाभ लें। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रह सकता है। जोखिम न उठाएं। प्रसन्नता रहेगी। किसी व्यक्ति के बहकावे में न आएं। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें।


धनु

ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे

रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। पार्टी व पिकनिक का आनंद प्राप्त होगा। मित्रों के साथ समय मनोरंजक व्यतीत होगा। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। रोजगार मिलेगा। भाग्योन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। कानूनी अड़चन सामने आएगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। बेचैनी रहेगी। व्यर्थ दौड़धूप रहेगी।


मकर

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

मेहनत अधिक होगी। लाभ के अवसर टलेंगे। मानसिक बेचैनी रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। लाभ होगा। कोई बड़ी बाधा उठ खड़ी हो सकती है। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें, गुम हो सकती है। विवाद के बढ़ावा न दें। बुरी खबर मिल सकती है, धैर्य रखें। किसी व्यक्ति विशेष से कहासुनी हो सकती है।



कुंभ

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा

व्यापार लाभदायक रहेगा। निवेश शुभ रहेगा। ऐश्वर्य के साधनों पर खर्च होगा। घर-बाहर सुख-शांति रहेगी। भाग्य का साथ रहेगा। प्रमाद न करें। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। मेहनत का फल मिलेगा। मान-सम्मान मिलेगा। मित्रों का सहयोग कर पाएंगे। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे।


मीन

दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची

उत्साहवर्धक सूचना मिलेगी। आत्मसम्मान बना रहेगा। बुद्धि का प्रयोग करेंग। कार्य में सफलता मिलेगी। पार्टनरों का सहयोग प्राप्त होगा। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। लाभ में वृद्धि होगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। समय सुखपूर्वक व्यतीत होगा। भूले-बिसरे साथियों से मुलाकात होगी।




पर्यावरण को उजाड़ने का काम कर रही है सरकार, 3000 से अधिक वृक्षों का कटान प्रकृति पर निर्मम प्रहार - मोहित उनियाल

defforestation near airport dehradun


देहरादून एयरपोर्ट से ऋषिकेश मार्ग के फोरलेन चौड़ीकरण के लिए वन क्षेत्र में 3000 से अधिक वृक्षों का कटान शुरू होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। कुछ समय पूर्व पर्यावरण संरक्षण के लिए विभिन्न सामाजिक, पर्यावरणीय एवं राजनीतिक संगठनों ने संयुक्त रूप से आंदोलन करते हुए वृक्षों को रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें बचाने का संकल्प लिया था, लेकिन सरकार ने जनता की भावनाओं और पर्यावरणीय चिंताओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।


परवादून कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल ने आज मौके पर पहुंचकर वृक्षों के कटान का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसके जंगल और प्राकृतिक धरोहर हैं, लेकिन भाजपा सरकार विकास के नाम पर अंधाधुंध वृक्षों का सफाया कर पर्यावरण का संतुलन बिगाड़ने पर आमादा है।


मोहित उनियाल ने कहा कि एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास की बड़ी-बड़ी बातें करती है, वहीं दूसरी ओर हजारों वर्षों में तैयार हुए वन क्षेत्र को कुछ दिनों में उजाड़ा जा रहा है। यह केवल पेड़ों का कटान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित भविष्य पर सीधा प्रहार है।


उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या सड़क चौड़ीकरण का ऐसा कोई विकल्प नहीं था, जिसमें अधिकतम वृक्षों को बचाया जा सके? क्या पर्यावरणीय प्रभावों का गंभीरता से आकलन किया गया? यदि हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं, तो उनकी भरपाई केवल कागजों में नहीं, धरातल पर कब और कैसे होगी?


प्रकृति को हमारी ज़रूरत नहीं, हमें प्रकृति की ज़रूरत है।

कोविड-19 ने हमें यह कड़वा सच दिखाया कि जब सांसें संकट में पड़ती हैं, तब विकास नहीं, स्वच्छ हवा और स्वस्थ पर्यावरण सबसे बड़ी आवश्यकता बन जाते हैं।


यदि विकास परियोजनाओं के लिए परिपक्व वृक्षों का कटान अपरिहार्य है, तो उनकी भरपाई के लिए वर्षों पहले से वृक्षारोपण और उसके संरक्षण की ठोस योजना होनी चाहिए


मोहित उनियाल ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मामले में संवेदनशीलता नहीं दिखाई और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता नहीं दी, तो कांग्रेस जनमानस, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर व्यापक जनआंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होगी। उत्तराखंड की हरियाली और प्राकृतिक विरासत को किसी भी कीमत पर उजड़ने नहीं दिया जाएगा।

 पदक विजेता खिलाड़ियों को तय समय के अंदर सरकारी सेवा में समायोजित करें: मुख्यमंत्री

राष्ट्रीय खेल नीति 2025 के अनुरूप ही राज्य में लाई जाए नई खेल नीति

मुख्यमंत्री ने खेल विश्वविद्यालय - गोलापार , हल्द्वानी में आगामी माह से सत्र को प्रारंभ करने के दिए निर्देश

38वें राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता के दौरान विकसित किए गए बुनियादी ढांचे के रख-रखाव के लिए कार्य योजना हो तैयार

mock drill dehradun CM Dhami madan kaushik


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में खेल एवं युवा कल्याण विभाग की बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक विजेता खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न सरकारी सेवा में समायोजित करने की प्रक्रिया को तय समय के अंदर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा आउट ऑफ टर्न नौकरी पाने वाले अधिकांश खिलाड़ियों को खेल विभाग में ही नियुक्त मिले सके, इस पर भी कार्ययोजना बनाई जाए। 


मुख्यमंत्री ने कहा केंद्र सरकार द्वारा लाई गई राष्ट्रीय खेल नीति 2025 के अनुरूप ही राज्य में नई खेल नीति लाई जाए।  मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उत्तराखंड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय-गोलापार, हल्द्वानी में आगामी माह से सत्र को प्रारंभ करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा गोलापार स्टेडियम में प्रवेश प्रक्रिया एवं कोच, कर्मचारी, अधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा एक ब्लॉक एक मिनी स्टेडियम के तहत मिनी स्टेडियमों के निर्माण कार्य में भी तेजी लाई जाए।


मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को लेगेसी प्लान पर तेज गति से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज देहरादून, हल्द्वानी गोलापार स्टेडियम, रुद्रपुर वेलोड्रोम, टिहरी झील, हरिद्वार एवं पिथौरागढ़ स्थित स्टेडियमों में विकसित की गई सुविधाओं को खिलाड़ियों के लिए और उपयोगी बनाई जाएं। उन्होंने कहा 38वें राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता के दौरान विकसित किए गए बुनियादी ढांचे के रख-रखाव पर विशेष ध्यान दिया जाए एवं इसके लिए कार्य योजना बनाई जाए। 


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आगामी 39वें राष्ट्रीय खेल 2027 के लिए खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने के लिए विभिन्न विधाओं में विशेष प्रशिक्षण शिविर संचालन शुरू किया जाए। विभिन्न खेल संघों के साथ खिलाड़ियों की चयन/ चिन्हीकरण प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा राज्य सरकार का संकल्प आगामी राष्ट्रीय खेलों में और बेहतर प्रदर्शन कर देवभूमि को खेलभूमि के रूप में भी स्थापित करना है। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जिला एक स्पोर्ट्स के तहत सभी जनपदों में निर्धारित खेलों के लिए संबंधित जनपदों में कोचिंग, प्रतिभा पहचान एवं प्रतिस्पर्धा को भी विकसित किया जाए। प्रत्येक जिला खेल छात्रावास को उस जनपद के निर्धारित खेल हेतु ODOS खेल नर्सरी के रूप में विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प प्रदेश के प्रत्येक खिलाड़ी तक गुणवत्तापूर्ण खेल सुविधाएं पहुंचाना तथा उन्हें अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि युवाओं के सपनों को साकार करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं है। उन्होंने कहा विभागीय अधिकारी खिलाड़ियों की आवश्यकता अनुसार राज्य में खेल योजनाओं को आगे बढ़ाएं।


बैठक में बताया गया कि अब तक कुल  29 मेडल धारक खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी में समायोजित किया जा चुका है। इसके साथ एक ब्लॉक एक मिनी स्टेडियम के तहत अब तक कुल 48 मिनी स्टेडियम का निर्माण किया जा चुका है। वहीं 10 मिनी स्टेडियम का कार्य गतिमान है। अन्य मिनी स्टेडियमों पर भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई गतिमान है। 


बैठक में बताया गया कि भारत के प्रथम महिला आवासीय स्पोर्ट्स कॉलेज लोहाघाट का कार्य तेजी से गतिमान है। इस कॉलेज के संचालन के लिए कुल 16 पद सृजित किए गए हैं। इसकी प्रवेश प्रक्रिया भी गतिमान है। साथ ही उत्तराखण्ड का प्रथम एवं भारत का दसवां राज्य खेल विश्वविद्यालय — गोलापार, हल्द्वानी में विश्वविद्यालय सभागार, केंद्रीय पुस्तकालय, स्वास्थ्य केंद्र, कैफेटेरिया, अनुसंधान केंद्र, शूटिंग रेंज, सेमिनार हॉल, बैडमिंटन हॉल, फुटबॉल मैदान, हॉकी मैदान, 8 लेन एथलीट ट्रैक, सहित कुल 39 अवसंरचना घटक का विकास किया जा रहा है।


बैठक में खेल मंत्री श्रीमती रेखा आर्या, प्रमुख सचिव श्री आ.के सुधांशु, सचिव श्री शैलेश बगौली, विशेष प्रमुख सचिव खेल श्री अमित सिन्हा, निदेशक खेल दीप्ति सिंह, संयुक्त निदेशक श्री शक्ति सिंह, उप निदेशक श्री नीरज गुप्ता, सहायक निदेशक राजेश ममंगाई एवं अन्य लोग मौजूद रहे।


*माॅक ड्रिल से परखीं मानसून की तैयारियां*

मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल में अधिकारियों को दिए प्रभावी आपदा प्रबंधन के निर्देश


देहरादून;


 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को आईटी पार्क, देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल में अधिकारियों को प्रभावी आपदा प्रबंधन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूर्व तैयारी, त्वरित निर्णय, बेहतर समन्वय तथा आधुनिक तकनीकों का समुचित उपयोग अत्यंत आवश्यक है।

मा0 मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल आपदा प्रबंधन तंत्र की क्षमता को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यह केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, संचार व्यवस्था, संसाधनों की उपलब्धता तथा राहत एवं बचाव तंत्र की वास्तविक क्षमता का व्यापक परीक्षण है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन को केवल राहत एवं बचाव तक सीमित न रखकर जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी तथा तकनीक आधारित प्रबंधन पर विशेष बल दिया जाए।

मा0 मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में एआई आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग तथा डेटा आधारित जोखिम आकलन जैसी आधुनिक तकनीकों को आपदा प्रबंधन से जोड़ा जा रहा है, जिससे संभावित खतरों का समय रहते सटीक आकलन कर जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके। उन्होंने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित राहत एवं बचाव सुनिश्चित करने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को सशक्त बनाया गया है तथा अर्ली वार्निंग सिस्टम को लगातार मजबूत किया जा रहा है, ताकि दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों तक समय पर चेतावनी पहुंचाई जा सके। 

मा0 मुख्यमंत्री ने कहा कि जल स्रोत संरक्षण, ग्लेशियर अध्ययन, पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण तथा जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण ही आपदा जोखिम को कम करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। मा0 मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में संचालित विभिन्न राहत एवं बचाव अभियानों ने वैज्ञानिक सोच, आधुनिक तकनीकों, त्वरित निर्णय क्षमता तथा टीमवर्क की उत्कृष्ट मिसाल प्रस्तुत की है। उन्होंने निर्देश दिए कि मॉक ड्रिल के दौरान प्राप्त अनुभवों एवं कमियों का गंभीरता से विश्लेषण किया जाए तथा सभी जनपद 72 घंटे के भीतर अपनी विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को आपदा सुरक्षा उपायों,  आपातकालीन संपर्क नंबरों एवं प्राथमिक सावधानियों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान संचालित किए जाएं।

मा0 मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल आपदा के बाद राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि आपदा जोखिम को न्यूनतम करना, जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा उत्तराखण्ड को देश का सबसे तकनीक-सक्षम एवं जनभागीदारी आधारित आपदा प्रबंधन मॉडल बनाना है। उन्होंने सभी से पूर्व तैयारी, आधुनिक तकनीक, प्रभावी समन्वय एवं जनभागीदारी के बल पर उत्तराखण्ड को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए कार्य करने का आह्वान किया। 

इस अवसर पर आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री श्री मदन कौशिक,  आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष  श्री विनय रुहेला, लेफ्टिनेंट कर्नल (से.नि)रघुवीर सिंह भण्डारी, सचिव श्री विनोद कुमार सुमन, गढ़वाल मंडल आयुक्त श्री आनंद स्वरूप, आईजी अग्निशमन श्रीमती विम्मी सचदेव, अपर सचिव श्री प्रकाश चंद्र, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री दिनेश कुमार पुनेठा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


*एसडीएमपी तथा डीडीएमपी का विमोचन*

देहरादून। इस अवसर पर मा0 मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन योजना तथा राज्य के सभी 13 जनपदों की जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं का विमोचन भी किया। मा0 मुख्यमंत्री ने कहा कि एसडीएमपी राज्य स्तर पर आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, पूर्व चेतावनी, राहत, बचाव, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण के लिए सभी विभागों की भूमिका, दायित्व एवं समन्वय व्यवस्था निर्धारित करती है। वहीं डीडीएमपी प्रत्येक जनपद की स्थानीय परिस्थितियों, संभावित आपदाओं, उपलब्ध संसाधनों एवं त्वरित कार्रवाई की विस्तृत कार्ययोजना उपलब्ध कराती है, जिससे आपदा की स्थिति में जिला प्रशासन प्रभावी एवं समन्वित ढंग से कार्य कर सके।  आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के अनुरूप तैयार की गई ये योजनाएं राज्य एवं जनपद स्तर पर बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक के उपयोग, प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली, समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन तथा त्वरित एवं सुनियोजित आपदा प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण मार्गदर्शक दस्तावेज सिद्ध होंगी।


*उपकरणों की प्रदर्शनी का किया अवलोकन*

देहरादून। मा0 मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ एवं अग्निशमन विभाग द्वारा लगाए गए आधुनिक राहत एवं बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्हें उपकरणों के संचालन, उपयोगिता एवं आपदा के दौरान उनकी भूमिका की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रदर्शनी में विशेष रूप से एनडीआरएफ द्वारा सीबीआरएनई (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु एवं विस्फोटक) आपदाओं में उपयोग किए जाने वाले अत्याधुनिक उपकरण आकर्षण का केंद्र रहे। इसके अतिरिक्त डीप डाइविंग सेट, नाइट विजन कैमरा, थर्मल इमेजिंग कैमरा, विभिन्न प्रकार के हाइड्रोलिक कटर, अंडरवाटर कम्युनिकेशन सिस्टम, अंडरवाटर ड्रोन तथा सोनार सिस्टम सहित अनेक आधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन किया गया।


*एसईओसी से सवा घंटे तक की मॉक ड्रिल की निगरानी*

देहरादून। माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आपातकालीन परिचालन केन्द्र (एसईओसी) से करीब सवा घंटे तक राज्य स्तरीय मानसून मॉक ड्रिल की लाइव निगरानी की। इस दौरान उन्होंने सभी 13 जनपदों से क्रमवार जुड़कर विभिन्न आपदा परिदृश्यों, राहत एवं बचाव कार्यों तथा विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। मा0 मुख्यमंत्री ने विभिन्न जनपदों में तैनात इंसीडेंट कमांडरों से सीधे संवाद कर घटनास्थलों पर चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों, घायलों के उपचार की व्यवस्थाओं तथा स्टेजिंग एरिया में संसाधनों के प्रबंधन की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से यह भी जाना कि आपदा की सूचना प्राप्त होने के बाद किस प्रकार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। मा0 मुख्यमंत्री ने बागेश्वर में भारी वर्षा के बाद राहत एवं बचाव दलों की त्वरित प्रतिक्रिया, चम्पावत में शारदा नदी के उफान के दौरान चलाए गए रेस्क्यू अभियान तथा उत्तरकाशी के नेताला में संचालित राहत एवं बचाव कार्यों, नरकोटा में भूस्खलन तथा केदारनाथ पैदल मार्ग में मलबा आने के बाद उत्पन्न स्थित का एसईओसी से लाइव अवलोकन किया। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून के दौरान प्रत्येक परिस्थिति में त्वरित, समन्वित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए जन-धन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।


*सूखे एवं जर्जर पेड़ों को काटने के निर्देश*

देहरादून। राज्य स्तरीय मानसून मॉक ड्रिल की समीक्षा के दौरान माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान दुर्घटनाओं की आशंका उत्पन्न करने वाले सूखे एवं जर्जर पेड़ों की पहचान कर उन्हें समयबद्ध ढंग से हटाया जाए। उन्होंने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन को आपदा प्रबंधन विभाग की तरफ से दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही, सभी सीवेज शोधन संयंत्रों (एसटीपी) का सुरक्षा अंकेक्षण कर उनकी संरचनात्मक एवं परिचालन सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मा0 मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों से कहा कि वे जनप्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठकें आयोजित करें तथा उन्हें आपदा प्रबंधन की तैयारियों एवं राहत कार्यों में सक्रिय रूप से सहभागी बनाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे आमजन के बीच जाकर संवाद स्थापित करें, उनकी समस्याओं को सुनें तथा आपदा से जुड़ी सूचनाओं एवं सावधानियों को समय पर साझा करें। उन्होंने नगर निकाय, पंचायत एवं तहसील स्तर पर जनसंवाद कार्यक्रम आयोजत करने के निर्देश दिए। मा0 मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जनविश्वास सर्वोपरि हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आपदा के दौरान कार्य करते हुए हमारी नीति स्पष्ट और नीयत साफ होनी चाहिए।

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