Halloween party ideas 2015


नैनीताल:



- नशे के खिलाफ नाटक 'पुनर्वास की आस' और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ संपन्न हुआ कार्यक्रम

- यह कार्यक्रम 'विकसित भारत - रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण' विषय पर केंद्रित रहा


केंद्रीय संचार ब्यूरो, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के क्षेत्रीय कार्यालय, नैनीताल द्वारा आयोजित 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन', 'ग्रामीण अभियान' एवं 'नशा मुक्त भारत अभियान' पर आधारित दो दिवसीय एकीकृत संचार और आउटरीच कार्यक्रम का बुधवार को पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज, कालाढूंगी में धूमधाम और उत्साह के साथ संपन्न हुआ।


कार्यक्रम में भारत सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं और अभियानों पर आधारित चित्र प्रदर्शनी लगाई गईं। छात्रों के ज्ञानवर्धन के लिए आयोजित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में संजना, सचिन, हर्षित, रूप, हिमानी, योगेश और नितिन ने सही उत्तर देकर आकर्षक पुरस्कार अपने नाम किए।


चित्रकला एवं पोस्टर प्रतियोगिता में गोस्वामी सरस्वती विद्या मंदिर (बालिका वर्ग): नेहा शाह ने प्रथम, शुभांगी ने द्वितीय तथा साक्षी विष्णु ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। 'विकसित भारत' विषय (बालक वर्ग): हर्षित सैनी ने प्रथम, बिलाल ने द्वितीय एवं फैजान ने तृतीय स्थान हासिल किया। पोस्टर प्रतियोगिता में सत्य बिष्ट ने प्रथम, महक बिष्ट ने द्वितीय और रचना मेरा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।


कार्यक्रम के दौरान स्थानीय प्रतिभाओं और कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों से समां बांध दिया। छात्र-छात्राओं—निधि डबल, तमन्ना बिष्ट और अंजली पांडे—ने कुमाऊनी संस्कृति पर आधारित मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। सांस्कृतिक कला उत्थान समिति, खुरपा ताल के कलाकारों ने भी पारंपरिक कुमाऊनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का सुंदर प्रदर्शन किया।


कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता फैलाने का संदेश रहा। वहीं केंद्रीय संचार ब्यूरो, नैनीताल के कलाकारों ने 'पुनर्वास की आस' नामक नाटक का भावुक और प्रभावी मंचन कर युवाओं को नशे से दूर रहने तथा समाज को नशा मुक्त बनाने के लिए प्रेरित किया।


सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, कालाढूंगी की चिकित्सक डॉ. प्रियंका कांडपाल ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा- "नशा एक बीमारी है। इससे दूर रहकर ही हम सही मायनों में देश की सेवा कर सकते हैं और समाज को एक सशक्त, स्वस्थ एवं ऊर्जावान मानव संसाधन प्रदान कर सकते हैं।"


इस आउटरीच कार्यक्रम ने स्थानीय युवाओं और छात्राओं को न केवल सरकार की दूरगामी योजनाओं से जोड़ा, बल्कि उन्हें एक स्वस्थ और नशा-मुक्त भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प भी दिलाया।


 





मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा जनपद पिथौरागढ़ के विधानसभा क्षेत्र डीडीहाट के ग्राम पंचायत सिरड के नैनीपातल सेे ग्राम पंचायत नाघर इण्टर कालेज तक सीसी सम्पर्क मार्ग निर्माण किये जाने हेतु ₹ 79.87 लाख, जनपद चम्पावत के विधानसभा क्षेत्र लोहाघाट में विकासखण्ड बाराकोट के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय कल्याण सिंह अधिकारी के सम्मान में मूर्ति स्थापित किये जाने हेतु ₹ 32.49 लाख तथा विधानसभा क्षेत्र चम्पावत के सेलागाड से कोटकेन्द्री तक सम्पर्क मार्ग का निर्माण किये जाने हेतु ₹ 40.53 लाख की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा क्षेत्र पिथौरागढ़ में मोस्टामानू मन्दिर का सौन्दर्यीकरण किये जाने हेतु अवशेष धनराशि ₹ 39.31 लाख, जनपद पिथौरागढ़ के ग्राम कुशैल रसेपाटा स्थित प्राचीन सैम मंदिर का जीर्णाेद्धार/सौन्दर्यीकरण किये जाने हेतु ₹ 59.80 लाख, जनपद पौडी के विधानसभा क्षेत्र यमकेश्वर में विकासखण्ड द्वारीखाल के अन्तर्गत कठुड बडा देवीखाल में स्थित मॉ बाल कुँवारी माता मंदिर का सौन्दर्यीकरण किये जाने हेतु ₹ 72.67 लाख की   स्वीकृति के सापेक्ष अवशेष धनराशि ₹ 39.30 लाख तथा जनपद अल्मोडा के विधानसभा क्षेत्र जागेश्वर में विकासखण्ड धौलादेवी के न्याय पंचायत क्षेत्र ध्याडी के भेटाबडोली में भीमादेवी मंदिर का सौन्दर्यीकरण किये जाने हेतु ₹ 98.50 लाख  की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


जनपद उधमसिंहनगर के विधानसभा क्षेत्र गदरपुर के ग्राम रामबाग हरिपुरा एवं ग्राम पंचाननपुर गांव में कमश गोविन्द मंदिर/धर्मशाला, मसीत मंदिर/धर्मशाला एवं तालाब के पास मंदिर/धर्मशाला का निर्माण किये जाने हेतु ₹ 2.54 करोड की स्वीकृति के सापेक्ष प्रथम किश्त में ₹ 1.01 करोड तथा जनपद अल्मोडा के विधानसभा क्षेत्र सल्ट में मल्ली मनिला मंदिर का सौन्दर्यीकरण किये जाने हेतु ₹ 98.80 लाख की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा क्षेत्र चम्पावत के अन्तर्गत ग्राम पचांयत मैरोली के आन्तरिक मार्गों के इंटरलॉकिंग टाईल्स द्वारा निर्माण एवं ग्राम पंचायत बडपास में आन्तरिक मार्गों के इंटरलॉकिंग टाईल्स द्वारा निर्माण किये जाने हेतु ₹ 3.89 करोड़ के सापेक्ष प्रथम किश्त में ₹ 1.87 करोड़ के साथ ही अमृत योजना के अन्तर्गत बीजापुर नहर के हैड का सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिकीकरण किये जाने हेतु ₹ 4.95 करोड़ की योजना स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


मुख्यमंत्री द्वारा प्राकृतिक आपदा से जनपद उत्तरकाशी के तहसील भटवाडी के अन्तर्गत ग्राम धराली में क्षतिग्रस्त व्यवसायिक प्रतिष्ठानो/भवनों के 13 प्रभावितों को नियमानुसार राहत धनराशि ₹ 1.24 करोड़ के सापेक्ष पूर्व में 03 प्रभावितों को आवंटित धनराशि ₹ 3.12 लाख का समायोजन करते हुए शेष धनराशि ₹ 1.21 करोड की धनराशि मुख्यमंत्री राहत कोष से स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


देहरादून:


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 उत्तराखण्ड में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी, त्वरित एवं समन्वित बनाने के उद्देश्य से बुधवार को उत्तराखण्ड सब एरिया में उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मानसून अवधि सहित विभिन्न आपदा की परिस्थितियों में संयुक्त रूप से बेहतर कार्ययोजना तैयार करने, उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने तथा आपसी समन्वय को और अधिक मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक को संबोधित करते हुए सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे आपदा संभावित राज्य में भारतीय सेना सदैव एक भरोसेमंद सहयोगी के रूप में कार्य करती रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में जब भी किसी बड़ी आपदा की स्थिति उत्पन्न हुई है, सेना ने अत्यंत संवेदनशीलता, तत्परता एवं पेशेवर दक्षता के साथ राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने वर्ष 2024 में केदारघाटी में आई आपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सेना एवं वायु सेना ने हजारों तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में उल्लेखनीय योगदान दिया। इसी प्रकार वर्ष 2025 में धराली सहित अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भी सेना ने राहत एवं बचाव कार्यों के साथ-साथ आवश्यक उपकरणों, मशीनरी एवं संसाधनों को दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचाने तथा प्रभावित लोगों की सुरक्षित निकासी में सराहनीय कार्य किया। श्री सुमन ने कहा कि राज्य सरकार और यूएसडीएमए सेना के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े किसी भी विषय पर सेना को विभागीय स्तर पर हर संभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। 

इस अवसर पर उत्तराखण्ड सब एरिया के डिप्टी जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) ब्रिगेडियर आर.एस. थापा ने कहा कि आपदा के समय भारतीय सेना का सर्वोच्च उद्देश्य मानव जीवन की रक्षा करना होता है। उन्होंने कहा कि सेना उत्तराखण्ड में किसी भी प्रकार की आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सदैव तैयार रहती है तथा यूएसडीएमए के साथ समन्वय को लगातार और अधिक सुदृढ़ बनाया जा रहा है। ब्रिगेडियर थापा ने कहा कि सेना का विशेष प्रयास रहता है कि आपदा के गोल्डन ऑवर के दौरान ही राहत एवं बचाव अभियान प्रारंभ कर दिया जाए, क्योंकि शुरुआती समय में की गई त्वरित कार्रवाई से अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सकती है। 

इस अवसर पर यूएसडीएमए के एसीईओ प्रशासन श्री प्रकाश चंद्र, एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, जेसीईओ श्री दिनेश कुमार पुनेठा, यूएसडीएमए के विशेषज्ञ उपस्थित रहे। 


*क्यूआरटी में सेना की सहभागिता पर चर्चा*

 बैठक के दौरान सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने सेना से अनुरोध किया कि राहत एवं बचाव कार्यों में उपयोगी उपकरणों, मशीनरी एवं संसाधनों का विवरण इंडिया डिजास्टर रिसोर्स नेटवर्क (आईडीआरएन) पोर्टल पर अपलोड किया जाए तो आवश्यकता पड़ने पर विभिन्न एजेंसियां इन संसाधनों का शीघ्र एवं प्रभावी उपयोग कर सकेंगी। इसके अतिरिक्त विभिन्न जनपदों में गठित क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) में सेना की सहभागिता तथा पूर्व सैनिकों के अनुभव एवं विशेषज्ञता का उपयोग राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के संबंध में भी विस्तृत चर्चा की गई।



*भारी वर्षा के बीच ग्राउंड जीरो पर डटे रहे डीएम डॉ0 आशीष चौहान, स्वयं किया संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण*

*मसूरी में पानीवाला बैंड पर बने नए लैंडस्लाईड जोन पर 15 दिन में 02 लेन बनाने के निर्देश;* 

*नंदा चौकी पुल की क्षतिग्रस्त लेन तत्काल बहाल कराने तथा अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट रहने के निर्देश*


देहरादून:



सोमवार रात्रि से जनपद में लगातार हो रही भारी वर्षा के दृष्टिगत जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क एवं सक्रिय रहा। जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने स्वयं सुबह से ही ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर वर्षा प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण किया तथा राहत एवं पुनर्बहाली कार्यों की निरंतर मॉनिटरिंग करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने नंदा चौकी, सौड़ा-सरौली मार्ग, मालदेवता, बल्दी नदी (सहस्त्रधारा), आईटी पार्क-सहस्त्रधारा रोड तथा मसूरी रोड स्थित पानी वाला बैंड के समीप भूस्खलन (लैंड स्लाइड) प्रभावित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनसुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता रहे तथा वर्षा से प्रभावित सभी मार्गों को यथाशीघ्र यातायात के लिए सुचारु किया जाए।

प्रातःकाल नंदा चौकी के समीप पुल की अप्रोच लेन क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त होते ही जिलाधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि तीन घंटे के भीतर क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कर यातायात सुचारु किया जाए। साथ ही लापरवाही के संबंध में संबंधित अधिकारी के विरुद्ध जिला प्रशासन द्वारा आवश्यक कार्रवाई किए जाने के निर्देश भी दिए। जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में लोक निर्माण विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए निर्धारित समय में पुल की क्षतिग्रस्त लेन  मरम्मत करने की कार्यवाही गतिमान है। 

इसके उपरांत जिलाधिकारी सौड़ा-सरौली मार्ग पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत वर्षा से क्षतिग्रस्त सड़क का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को सड़क को तत्काल यातायात के लिए खोलने के निर्देश दिए। वहीं मलबा आने के कारण अवरुद्ध थानों मार्ग को भी प्रशासन द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए पुनः यातायात हेतु बहाल करा दिया गया।

मालदेवता क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने प्रत्येक वर्ष बरसात में रपटे पर यातायात बाधित होने की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को उक्त स्थान पर पुल निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र शासन को प्रेषित करने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में वर्षा के दौरान आमजन को आवागमन में कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

जिलाधिकारी ने मसूरी रोड स्थित पानी वाला बैंड के समीप वर्षा से क्षतिग्रस्त सड़क का भी निरीक्षण किया। उन्होंने लोक निर्माण विभाग, प्रांतीय खंड के अधिकारियों को निर्देशित किया कि 15 दिनों के भीतर सड़क का दो लेन तक आवागमन पूर्ण रूप से सुचारु किया जाए। विभागीय अधिकारियों ने अवगत कराया कि 10 से 15 दिनों के भीतर दो लेन का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा तथा सुरक्षा के दृष्टिगत पुश्ता निर्माण का कार्य लगभग दो माह में पूरा कर लिया जाएगा।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कड़े निर्देश दिए कि जनपद में जहां-जहां सड़कें एवं संपर्क मार्ग वर्षा के कारण क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तत्काल बहाल किया जाए। उन्होंने सभी उप जिलाधिकारियों, आईआरएस प्रणाली से जुड़े विभागों तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को 24 घंटे सतर्क एवं सक्रिय रहकर किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि मानसून अवधि में जनसुरक्षा जिला प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए किसी भी प्रकार की आपदा अथवा मार्ग अवरोध की सूचना पर तत्काल राहत एवं पुनर्बहाली कार्य सुनिश्चित करें, ताकि आमजन को असुविधा न हो।

निरीक्षण के दौरान रायपुर क्षेत्र में स्थानीय विधायक श्री उमेश शर्मा काऊ, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, तहसीलदार सदर सुरेन्द्र देव तथा लोक निर्माण विभाग से एक्शियन भृगुनाथ द्विवेदी उपस्थित रहे। वहीं मसूरी रोड स्थित पानी वाला बैंड क्षेत्र में संयुक्त मजिस्ट्रेट मसूरी राहुल आनंद एवं लोक निर्माण विभाग, प्रांतीय खंड के अधिकारी प्रदीप शाही सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।


 



भारी वर्षा के कारण नंदा की चौकी स्थित पुल की एप्रोच रोड का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से आवागमन प्रभावित हुआ था। जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग एवं संबंधित एजेंसियों द्वारा तत्काल मरम्मत कार्य कराते हुए मार्ग को पुनः आवागमन के लिए सुचारु कर दिया गया।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रकरण की जांच एवं संबंधित अधिकारियों तथा ठेकेदार से स्पष्टीकरण प्राप्त करने की कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी गई है। जांच में लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


*धामी सरकार की त्वरित कार्रवाई: नंदा की चौकी में मात्र 12 घंटे के भीतर बहाल हुआ आवागमन*


*भारी वर्षा के कारण सुबह क्षतिग्रस्त हुई पुल की एप्रोच रोड को रिकॉर्ड समय में किया गया दुरुस्त, मुख्यमंत्री के निर्देश पर तत्काल शुरू हुई कार्रवाई*


देहरादून। भारी वर्षा के चलते मंगलवार प्रातः लगभग 6:30 बजे नंदा की चौकी स्थित पुल की एप्रोच रोड का एक छोटा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ। घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल अधिकारियों को मौके पर राहत एवं मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर शुरू करने के निर्देश दिए।


मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बाद लोक निर्माण विभाग, जिला प्रशासन एवं संबंधित एजेंसियों ने समन्वित रूप से कार्य करते हुए लगातार अभियान चलाया और मात्र 12 घंटे के भीतर क्षतिग्रस्त एप्रोच रोड की मरम्मत कर मार्ग को पुनः सुचारु रूप से आवागमन के लिए खोल दिया। मार्ग खुलते ही स्थानीय लोगों को राहत मिली तथा आवश्यक सेवाओं का संचालन भी सामान्य हो गया। एक एम्बुलेंस भी बिना किसी बाधा के मरीज को अस्पताल पहुंचाने में सफल रही।


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि आपदा की स्थिति में राहत एवं पुनर्स्थापन कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी आवश्यक तकनीकी एवं सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं।


मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुल, एप्रोच रोड एवं संबंधित निर्माण कार्यों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार से स्पष्टीकरण तलब करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।


स्थानीय नागरिकों ने भी मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिस तेजी से सरकार ने स्थिति पर नियंत्रण पाया और मात्र 12 घंटे में मार्ग को पुनः चालू कराया, उससे लोगों को बड़ी राहत मिली। नागरिकों ने इसे संवेदनशील, जवाबदेह और त्वरित निर्णय लेने वाली सरकार का उदाहरण बताया।


धामी सरकार ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि प्रदेशवासियों की सुरक्षा, सुगम आवागमन और जनहित सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा आपदा की हर स्थिति में सरकार पूरी तत्परता के साथ जनता के साथ खड़ी है।


  पुल पूरी तरह सुरक्षित, एप्रोच रोड धंसी

देहरादून:



लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री पंकज कुमार पांडेय ने कहा है कि देहरादून में नंदा की चौकी पर नवनिर्मित पुल पूरी तरीके से सुरक्षित है। भारी बारिश के कारण पुल की एप्रोच रोड का एक हिस्सा ढहा है, जिसे युद्ध स्तर पर ठीक किया जा रहा है।

श्री पांडेय ने बताया कि बीती रात हुई जोरदार बारिश के कारण पुल के एक हिस्से की एप्रोच रोड के नीचे से मलवा बह गया था,  इस कारण एप्रोच रोड एक जगह पर धंस गई है। उन्होंने बताया कि नवनिर्मित पुल पूरी तरीके से सुरक्षित है और एप्रोच रोड को युद्ध स्तर पर ठीक कर यातायात बहाल किए जाने के प्रयास चल रहे हैं। श्री पांडेय ने बताया कि लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को मौके पर भेज कर एप्रोच रोड को ठीक करने के साथ ही घटना के कारणों का पता लगाने के लिए कहा गया है। उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि इस मामले में किसी अधिकारी या ठेकेदार की गलती नजर में आती है तो संबंधित पक्ष के खिलाफ कार्यवाही भी की जाएगी। बताया कि लगातार बारिश के कारण नदी का बहाव तेज हो रहा है, इसलिए बहाव को बदलने का प्रयास किया जा रहा है, मौके पर सिंचाई विभाग के अधिकारी भी तैनात किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश में कहीं नई बनी सड़क जल्दी टूट जाती है तो इसके कारणों का भी पता लगाया जाएगा साथ ही जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार के खिलाफ भी कार्यवाही की जाएगी। सचिव लोक निर्माण विभाग ने बताया कि विभाग की ओर से बंद सड़कों को खोलने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा है, बंद सड़कों की पूरी स्थिति विभागीय पोर्टल पर लाइव अपडेट हो रही है। साथ ही विभाग का प्रयास है कि बंद सड़कों को हर हाल में 24 घंटे के अंदर खोल दिया जाए। उन्होंने बताया कि देहरादून मसूरी मार्ग पर भी एक जगह पर नया स्रोत आने से बार-बार मलवा आ रहा है, यहां पर विभागीय टीम उपकरणों के साथ तैनात की गई है।

 *एसडीआरएफ उत्तराखण्ड, हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश की टीमों द्वारा संयुक्त आपदा प्रबंधन मॉक अभ्यास सम्पन्न*

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पुलिस मुख्यालय उत्तराखंड के निर्देशानुसार आपदा की स्थिति में अंतरराज्यीय समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता तथा संसाधनों के प्रभावी उपयोग को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आज दिनांक 28 जुलाई 2026 को जनपद देहरादून के थानों क्षेत्रान्तर्गत मुंडिया गाँव में एसडीआरएफ उत्तराखण्ड, हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश की टीमों द्वारा संयुक्त आपदा प्रबंधन मॉक अभ्यास (जॉइंट डिजास्टर रिस्पॉन्स एक्सरसाइज) का आयोजन किया गया।


संयुक्त अभ्यास के अवसर पर आयोजित टेबल टॉक मीटिंग के दौरान सेनानायक एसडीआरएफ उत्तराखण्ड श्री अर्पण यदुवंशी द्वारा सभी प्रतिभागी अधिकारियों एवं जवानों को ब्रीफ करते हुए कहा गया कि किसी भी बड़ी आपदा के दौरान विभिन्न राज्यों की आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियों के मध्य प्रभावी समन्वय, त्वरित निर्णय क्षमता तथा एकीकृत कार्यप्रणाली ही सफल राहत एवं बचाव कार्यों की आधारशिला होती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संयुक्त अभ्यास विभिन्न एजेंसियों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली, संसाधनों एवं क्षमता को समझने का अवसर प्रदान करते हैं, जिससे वास्तविक आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्य अधिक प्रभावी एवं समन्वित रूप से संपादित किए जा सकते हैं। उन्होंने सभी टीमों को निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP), इंसिडेंट मैनेजमेंट सिस्टम तथा सुरक्षा मानकों का पूर्णतः पालन करते हुए अभ्यास सम्पन्न करने के निर्देश दिए।


अभ्यास के अंतर्गत घटनास्थल के समीप एक सुव्यवस्थित इंसिडेंट कमांड पोस्ट स्थापित किया गया, जहाँ से संपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन का संचालन एवं समन्वय किया गया। इसके अतिरिक्त घायलों के प्राथमिक उपचार एवं चिकित्सकीय सहायता हेतु मेडिकल पोस्ट भी स्थापित की गई, जिससे वास्तविक आपदा जैसी परिस्थितियों में विभिन्न इकाइयों के मध्य समन्वित कार्यप्रणाली का व्यावहारिक परीक्षण किया जा सके।


घटना की सूचना प्राप्त होते ही एसडीआरएफ वाहिनी मुख्यालय, जॉलीग्रांट में स्थापित स्टेजिंग एरिया से तीनों राज्यों की टीमें त्वरित रूप से घटनास्थल के लिए रवाना हुईं। निर्धारित समय में घटनास्थल पर पहुँचकर टीमों ने उत्कृष्ट समन्वय, प्रभावी संचार व्यवस्था तथा स्पष्ट कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम का प्रदर्शन करते हुए संयुक्त राहत एवं बचाव अभियान संचालित किया। संयुक्त अभ्यास में उत्तर प्रदेश एसडीआरएफ की ओर से सहायक कमांडेंट श्री सोमनाथ यादव एवं निरीक्षक श्री बृजेश सिंह ने अपनी टीम के साथ सक्रिय सहभागिता की, जबकि हरियाणा एसडीआरएफ की टीम का नेतृत्व टीम इंचार्ज निरीक्षक श्री शीशराम द्वारा किया गया। तीनों राज्यों की टीमों ने पूरे अभ्यास के दौरान आपसी समन्वय, तकनीकी दक्षता एवं पेशेवर कार्यप्रणाली का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए संयुक्त राहत एवं बचाव अभियान को सफलतापूर्वक सम्पन्न किया।


मॉक अभ्यास के दौरान रोप रेस्क्यू, कोलैप्स्ड स्ट्रक्चर सर्च एंड रेस्क्यू (CSSR), सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन, रिवर क्रॉसिंग टेक्नीक, विक्टिम सर्च एंड एक्सट्रैक्शन, कैजुअल्टी इवैक्यूएशन, मेडिकल रिस्पॉन्स, कम्युनिकेशन मैनेजमेंट, इंसिडेंट साइट मैनेजमेंट सहित विभिन्न तकनीकी रेस्क्यू प्रक्रियाओं का सफल अभ्यास किया गया। प्रत्येक गतिविधि के माध्यम से टीमों ने एक-दूसरे की कार्यप्रणाली, संसाधनों के उपयोग, प्रतिक्रिया क्षमता तथा समन्वय प्रणाली का व्यावहारिक अवलोकन किया।


अभ्यास का मुख्य उद्देश्य विभिन्न राज्यों की आपदा प्रतिक्रिया टीमों के मध्य इंटरऑपरेबिलिटी, आपसी समन्वय, कम्युनिकेशन सिस्टम, संसाधनों के साझा उपयोग तथा इंसिडेंट मैनेजमेंट ऑपरेशन के अंतर्गत कार्यप्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाना था, ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में सभी एजेंसियाँ एकीकृत रूप से त्वरित एवं प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित कर सकें।


अभ्यास के दौरान नियुक्त ऑब्जर्वर्स द्वारा समस्त गतिविधियों का गहन अवलोकन किया गया। ऑब्जर्वर्स ने विभिन्न चरणों में टीमों के समन्वय, कम्युनिकेशन, संसाधनों के उपयोग, सुरक्षा मानकों के अनुपालन तथा रेस्क्यू तकनीकों का मूल्यांकन करते हुए भविष्य में और अधिक प्रभावी संचालन हेतु आवश्यक सुधारात्मक बिंदुओं से सभी प्रतिभागी टीमों को अवगत कराया।


सहायक सेनानायक श्री सुशील रावत द्वारा विभिन्न रेस्क्यू गतिविधियों, इंसिडेंट कमांड पोस्ट, मेडिकल पोस्ट एवं अन्य परिचालन व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए टीमों के मध्य प्रभावी समन्वय बनाए रखा गया। इस दौरान निरीक्षक प्रमोद कुमार द्वारा भी अभ्यास के विभिन्न चरणों में परिचालन गतिविधियों के समन्वय एवं व्यवस्थाओं के सफल संचालन में सक्रिय भूमिका निभाई गई। दोनों अधिकारियों ने प्रतिभागी टीमों का उत्साहवर्धन करते हुए निर्धारित मानकों के अनुरूप अभ्यास को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।


अभ्यास के समापन पर उप सेनानायक श्री शुभांक रतूड़ी द्वारा विस्तृत डी-ब्रीफिंग सेशन आयोजित किया गया, जिसमें तीनों राज्यों की टीमों के साथ संपूर्ण मॉक अभ्यास की समीक्षा की गई। इस दौरान ऑब्जर्वर्स द्वारा दिए गए सुझावों एवं सुधारात्मक बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई तथा भविष्य में संयुक्त अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। साथ ही सभी प्रतिभागी टीमों द्वारा फीडबैक फॉर्म भरकर अपने सुझाव एवं अनुभव साझा किए गए, जिससे आगामी संयुक्त अभ्यासों को और अधिक व्यवहारिक एवं प्रभावी बनाया जा सके।


यह संयुक्त आपदा प्रबंधन मॉक अभ्यास पूर्णतः सफल रहा। अभ्यास के दौरान निर्धारित सभी उद्देश्यों की प्रभावी रूप से पूर्ति की गई तथा विभिन्न राज्यों की आपदा प्रतिक्रिया टीमों के मध्य समन्वय, संचार व्यवस्था, संसाधनों के साझा उपयोग एवं संयुक्त कार्यप्रणाली का सफल परीक्षण किया गया। इस अभ्यास के माध्यम से प्रतिभागी टीमों को एक-दूसरे की कार्यशैली एवं परिचालन प्रणाली को निकटता से समझने का अवसर प्राप्त हुआ, जिससे भविष्य में किसी भी वास्तविक आपदा की स्थिति में अधिक समन्वित, त्वरित एवं प्रभावी राहत एवं बचाव अभियान संचालित करने हेतु महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त हुए।


अंत में सेनानायक श्री अर्पण यदुवंशी ने सभी प्रतिभागी टीमों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के संयुक्त मॉक अभ्यास केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विभिन्न राज्यों की आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियों के मध्य विश्वास, समन्वय, संसाधनों के साझा उपयोग तथा परिचालन दक्षता को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक आपदा के समय त्वरित, सुरक्षित एवं प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए ऐसे संयुक्त अभ्यास अत्यंत आवश्यक हैं तथा भविष्य में भी इस प्रकार के इंटर-स्टेट जॉइंट मॉक एक्सरसाइज नियमित रूप से आयोजित किए जाते रहेंगे। उन्होंने सभी टीमों के अनुशासन, समर्पण एवं पेशेवर कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि इस संयुक्त अभ्यास से प्राप्त अनुभव वास्तविक आपदा की परिस्थितियों में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे तथा विभिन्न राज्यों की आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियों के मध्य समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करेंगे।

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