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*सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में प्राधिकरण की सख्ती, बिना नक्शे दुकानें बनाने और भवनों का उपयोग बदलने वालों पर कार्रवाई*




राजधानी देहरादून में आवासीय कॉलोनियों के भीतर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने और भवन निर्माण के नियमों को ताक पर रखने वालों के खिलाफ मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने सख्त रुख अपना लिया है। आवासीय परिसरों को व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बदलने, बिना स्वीकृत मानचित्र के दुकानें बनाने और स्वीकृत नक्शे से इतर निर्माण करने वालों पर अब सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम ने शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में अभियान चलाते हुए पांच मामलों में सीलिंग की कार्रवाई की। इस कार्रवाई से उन भवन स्वामियों और संचालकों को स्पष्ट संदेश दिया गया है, जो निर्धारित भू-उपयोग और निर्माण संबंधी नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। एमडीडीए ने यह कार्रवाई माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में की है। प्राधिकरण का कहना है कि शहर में सुनियोजित विकास सुनिश्चित करने, आवासीय क्षेत्रों की मूल प्रकृति बनाए रखने और अनधिकृत निर्माणों पर अंकुश लगाने के लिए प्रवर्तन अभियान लगातार जारी रहेगा।


*आवासीय कॉलोनियों में कारोबार, बिना नक्शे निर्माण पर कार्रवाई*


एमडीडीए की कार्रवाई के दौरान इंजीनियर इन्क्लेव फेस-1 में तीन मामलों में सीलिंग की गई। वहीं, ईस्ट होप टाउन के लक्ष्मीपुर क्षेत्र और महिमा इन्क्लेव में भी नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों पर कार्रवाई की गई। प्राधिकरण की टीम ने संबंधित परिसरों का निरीक्षण कर अनधिकृत निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के विरुद्ध कार्रवाई की।


*इंजीनियर इन्क्लेव फेस-1 में तीन परिसरों पर सीलिंग*


प्रवर्तन अभियान के तहत इंजीनियर इन्क्लेव फेस-1 में सबसे अधिक तीन मामलों में कार्रवाई की गई। यहां आवासीय कॉलोनी के भीतर कृष्णा डेयरी के नाम से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। प्राधिकरण ने नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आने पर संबंधित परिसर को सील कर दिया। इसी क्षेत्र में रोहित विशाल द्वारा भी आवासीय कॉलोनी के भीतर व्यावसायिक दुकान का संचालन किया जा रहा था। एमडीडीए की टीम ने इस मामले में भी कार्रवाई करते हुए परिसर को सील किया। प्राधिकरण की जांच में इसी क्षेत्र में एक अन्य आवासीय परिसर में बिना स्वीकृति परिवर्तन और परिवर्धन कर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित किए जाने का मामला सामने आया। इस पर भी सीलिंग की कार्रवाई की गई।प्राधिकरण की इस कार्रवाई का उद्देश्य आवासीय क्षेत्रों में निर्धारित भू-उपयोग के विपरीत संचालित गतिविधियों पर अंकुश लगाना है। एमडीडीए ने स्पष्ट किया है कि आवासीय भवनों का व्यावसायिक उपयोग करने से पहले संबंधित नियमों और आवश्यक अनुमतियों का पालन करना अनिवार्य है।


*ईस्ट होप टाउन में बिना मानचित्र बनाई जा रहीं दुकानें*


अभियान के दौरान ईस्ट होप टाउन के लक्ष्मीपुर, प्रेमनगर क्षेत्र में भी कार्रवाई की गई। यहां मयूर द्वारा प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत कराए बिना दो व्यावसायिक दुकानों का निर्माण किया जा रहा था। निर्माण को नियमों के विपरीत पाए जाने पर एमडीडीए की टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए संबंधित निर्माण को सील कर दिया। प्राधिकरण की कार्रवाई उन लोगों के लिए चेतावनी है, जो आवश्यक स्वीकृति प्राप्त किए बिना व्यावसायिक निर्माण शुरू कर देते हैं। भवन निर्माण से पहले मानचित्र स्वीकृत कराना और निर्धारित मानकों का पालन करना जरूरी है।


*महिमा इन्क्लेव में हॉस्टल निर्माण सील*


एमडीडीए की टीम ने महिमा इन्क्लेव, लेन नंबर-2, केहरी गांव में भी कार्रवाई की। यहां कुन्दन सिंह द्वारा स्टिल्ट सहित तीन तलों पर हॉस्टल का निर्माण किया जा रहा था। प्राधिकरण के अनुसार, निर्माण में स्वीकृत मानचित्र से विचलन किया गया था और भवन के उपयोग में भी बदलाव किया गया था। नियमों के उल्लंघन को देखते हुए संबंधित निर्माण को सील कर दिया गया। प्राधिकरण का कहना है कि स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण करना और भवन के उपयोग में अनधिकृत बदलाव करना नियमों का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



*बंशीधर तिवारी बोले—नियमों के उल्लंघन पर होगी सख्ती*


एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण और भू-उपयोग संबंधी नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जा रहा है। माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करना प्राधिकरण की प्राथमिकता है। आवासीय कॉलोनियों में बिना अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करना, स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण करना और भवनों के उपयोग में अनधिकृत बदलाव करना नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। प्राधिकरण की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं और शिकायतों तथा स्थलीय निरीक्षण के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आमजन से अपील की कि भवन निर्माण से पहले आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करें और निर्धारित मानकों का पालन करें, ताकि भविष्य में सीलिंग जैसी कार्रवाई की नौबत न आए।


*मोहन सिंह बर्निया ने दिए सख्त निर्देश*


एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माणों और अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों के विरुद्ध प्रवर्तन अभियान निरंतर जारी रहेगा। सभी भवन स्वामियों और संचालकों को स्वीकृत मानचित्र तथा निर्धारित भू-उपयोग के अनुरूप ही निर्माण और संचालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित पक्ष के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रवर्तन टीमों को क्षेत्र में लगातार निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। एमडीडीए की इस कार्रवाई से साफ है कि देहरादून में अनधिकृत निर्माण और आवासीय परिसरों के दुरुपयोग के मामलों पर प्राधिकरण का शिकंजा कस रहा है। आने वाले दिनों में भी नियमों के उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।

 नगर निगम हरिद्वार प्रशासन द्वारा संचालित गंगा घाटों पर विशेष स्वच्छता अभियान में शिव शक्ति वेलनेस फाउंडेशन सोसाइटी की सक्रिय सहभागिता


हरिद्वार, 21 अक्टूबर 2026।



माँ गंगा के पावन घाटों की स्वच्छता, सुंदरता एवं पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से नगर निगम हरिद्वार प्रशासन द्वारा विशेष स्वच्छता अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान में शिव शक्ति वेलनेस फाउंडेशन सोसाइटी, हरिद्वार ने सक्रिय सहभागिता करते हुए स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक जागरूकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।


यह अभियान डॉ. ललित नारायण मिश्र जी, मुख्य विकास अधिकारी (CDO), हरिद्वार के आह्वान पर आयोजित किया गया। इस पहल का उद्देश्य गंगा घाटों को स्वच्छ एवं सुंदर बनाए रखना तथा श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों को स्वच्छता के प्रति जागरूक एवं प्रेरित करना है।


अभियान के सफल संचालन में डॉ. ललित नारायण मिश्र जी, मुख्य विकास अधिकारी, हरिद्वार; श्री पवन कार्की जी, प्रभारी, नगर निगम हरिद्वार; तथा श्री नितिन गौतम जी, राज्य मंत्री, उत्तराखंड सरकार एवं अध्यक्ष, गंगा सभा, हरिद्वार की प्रमुख भूमिका रही।


स्वच्छता अभियान को प्रभावी रूप से संपन्न कराने में सफाई निरीक्षक श्री आकाश कुमार जी एवं सफाई निरीक्षक श्री अनिल कुमार जी ने अग्रणी भूमिका निभाई। इनके साथ नगर निगम हरिद्वार के कर्मचारीगण ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अभियान को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।


शिव शक्ति वेलनेस फाउंडेशन सोसाइटी के सदस्यों ने स्वच्छता अभियान में सहभागिता कर यह संदेश दिया कि माँ गंगा की निर्मलता एवं घाटों की स्वच्छता बनाए रखना केवल प्रशासन का ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक एवं सामाजिक दायित्व है। गंगा हमारी आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक हैं, इसलिए उनकी स्वच्छता एवं संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं।


नगर निगम हरिद्वार प्रशासन द्वारा संचालित यह विशेष स्वच्छता अभियान 8 नवंबर 2026 तक हरिद्वार के सभी गंगा घाटों पर निरंतर जारी रहेगा। संस्था ने इस जनहितकारी पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं समाजसेवा से जुड़े अभियानों में सक्रिय सहयोग देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।



 मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दी विजयदशमी व दशहरा पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं*


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को विजयदशमी व दशहरा पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। विजयदशमी की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयदशमी का पर्व अधर्म पर धर्म, बुराई पर अच्छाई तथा असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। हम सभी को अपने भीतर की बुराइयों को त्यागकर जीवन में सदाचार की राह पर चलने की प्रेरणा भी यह पर्व देता है। उन्होंने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि हम अपने जीवन में अहंकार से मुक्त होकर सच्चाई के रास्ते पर चलें और प्रदेश व देश की सामाजिक समरसता के लिए मिलजुल कर कार्य करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पावन पर्व हमें इस बात का भी स्मरण कराता है कि सच्चाई का साथ देने वालों की हमेशा जीत होती है। 

 

उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि बुराई पर अच्छाई की विजय के इस पावन पर्व पर भगवान श्रीराम की शिक्षाओं को आत्मसात कर जीवन को सार्थक बनायें। मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्म और सत्य की विजय के इस मंगल पर्व पर प्रभु श्रीराम से यही प्रार्थना है कि सब सुखी हों, सबका कल्याण हो, हर घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आये।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने गांधी जयंती के अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का स्मरण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधी जी के सत्य व अहिंसा के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक है। गांधी जी ने अंग्रेजी शासन से देश को आजाद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अपने आचरण में अहिंसा का भाव जागृत करने के साथ ही मानवता के प्रति करूणा का भाव पैदा करना होगा। यही हमारी उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की जयंती की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि शास्त्री जी ने ‘जय जवान जय किसान’ का नारा देकर राष्ट्र को स्वाभिमान और एकजुटता के साथ मजबूती से खड़े होने का रास्ता दिखाया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि शास्त्री जी ने सार्वजनिक जीवन में सादगी, सत्यनिष्ठा, लगन, नैतिकता व राष्ट्र के प्रति समर्पण की जो अदभुत मिसाल कायम की, वह हम सबके लिए प्रेरणादायी है। शास्त्री जी का व्यक्तित्व व कृतित्व देश की युवापीढ़ी के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

 देहरादून :

Vijadashmi festival 2024 12 october



 दशहरा (विजयदशमी)-2024



दशहरा , विजयदशमी ’के रूप में भी जाना जाता है, भारत में सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है जो नवरात्रि के नौ दिवसीय उत्सव के अंत और दुर्गा पूजा के चार / पांच दिवसीय उत्सव का प्रतीक है। यह दिन अच्छी और बुरी शक्तियों के बीच एक लंबी लड़ाई का द्योतक  है जिसमें रामचंद्र ने रावण पर विजय प्राप्त की थी।रामलीला के एक भाग मे विजयदशमी पर ही श्रीराम ने रावण एवम अन्य राक्षसों का संहार कर सीता को वापिस लाये थे।

नवरात्रि में बोए जाने वाले जौ को आज ही के दी विजय के प्रतीक में सभी बहने 

अपने भाईयों के कानों और सिर पर रखकर सदैव उनके विजय की कामना करती है। 

 उस दिन को विजय दशमी (विजय का दिन) कहा जाता है। वह दिन भी है जब देवी दुर्गा महिषासुर की सेना से भिड़ गईं और उसका संहार कर दिया था।

दशहरा को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है. कहा जाता है कि भगवान राम ने अश्विन महीने की पहली तारीख से लेकर नवमी तक मां दुर्गा की खास पूजा-अर्चना की थी. फिर, दशमी के दिन उन्होंने रावण का वध करके बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया था. इसी वजह से दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है.

दशहरा के दिन रावण दहन का क्या मुहूर्त रहेगा.

 हिंदू पंचांग के अनुसार, दशहरा की दशमी तिथि की शुरुआत 20 अक्टूबर की शाम 7 बजकर 01 मिनट पर होगी और तिथि का समापन 21 अक्टूबर, गुरुवार शाम 7 बजकर 10 मिनट पर होगा. 


दशहरा 2025 पूजन मुहूर्त:

2 अक्टूबर को दशहरा के दिन पूजन के लिए सबसे विशेष मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 09 मिनट से लेकर दोपहर 2 बजकर 56 मिनट तक रहेगा, जिसकी अवधि 47 मिनट की रहेगी. वहीं, अपराह्न पूजा का समय (देवी अपराजिता और शस्त्रों के पूजन का समय) दोपहर 1 बजकर 21 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 44 मिनट तक रहेगा, जिसकी अवधि 2 घंटे 22 मिनट की रहेगी.


: हर साल इस दिन देशभर में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले जलाए जाते हैं. रावण दहन देखकर बच्चों को यह समझाना चाहिए कि चाहे बुराई कितनी भी बड़ी क्यों न हो, एक दिन उसकी हार निश्चित होती है और सच्चाई की हमेशा जीत होती है. तो चलिए जानते हैं कि 


 *मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार ने की शिष्टाचार भेंट*

*उत्तराखण्ड की फिल्म नीति और प्रदेश में फिल्म निर्माण की संभावनाओं पर हुई चर्चा*

*फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन के रूप में उत्तराखण्ड की पहचान हो रही और मजबूत : मुख्यमंत्री*

Akshay kumar  meet CM Dhami



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से रविवार को मुख्यमंत्री आवास में प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता श्री अक्षय कुमार ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उत्तराखण्ड की फिल्म नीति, प्रदेश में फिल्म निर्माण की संभावनाओं तथा फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने के संबंध में चर्चा हुई।


अभिनेता श्री अक्षय कुमार इन दिनों मसूरी और लंढौर क्षेत्र में अपनी आगामी फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड देश के प्रमुख फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुका है। प्रदेश की नैसर्गिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, विविध भौगोलिक परिस्थितियां और फिल्म निर्माण के अनुकूल वातावरण लगातार फिल्म निर्माताओं को आकर्षित कर रहे हैं। उत्तराखण्ड में बड़े फिल्म प्रोजेक्ट्स की शूटिंग से फिल्म डेस्टिनेशन के रूप में प्रदेश की पहचान और मजबूत हो रही है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लागू की गई उत्तराखण्ड फिल्म नीति-2024 के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। फिल्म निर्माताओं को सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से शूटिंग की अनुमति सहित विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही फिल्म निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए अनुदान की व्यवस्था भी की गई है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास उत्तराखण्ड में अधिक से अधिक फिल्मों की शूटिंग को प्रोत्साहित करने के साथ ही स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करना है। प्रदेश में फिल्म निर्माण की गतिविधियां बढ़ने से पर्यटन, होटल व्यवसाय, परिवहन और अन्य स्थानीय व्यवसायों को भी लाभ मिल रहा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार फिल्म निर्माताओं को हरसंभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।


**छोटे उद्यमियों के निवेश पर सवाल उठाना उनके परिश्रम और रोजगार सृजन का अपमान: सचिव उद्योग**

 *₹24 हजार करोड़ के निवेश की अगली ग्राउंडिंग की तैयारी, जल्द आयोजित होगी चौथी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी*** 

**सरकार की निवेश प्रक्रिया पारदर्शी, उद्योग विभाग और सिंगल विंडो पोर्टल पर उपलब्ध है परियोजनाओं की पूरी जानकारी**



 उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर समिट-2023 को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही खबरों और उठाए जा रहे सवालों पर सचिव उद्योग एवं सचिव मुख्यमंत्री श्री विनय शंकर पांडे ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य में निवेश से संबंधित सभी आंकड़े सार्वजनिक हैं और प्रत्येक परियोजना का विवरण संबंधित सरकारी वेबसाइटों पर उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि तथ्यों की पूरी जानकारी के बिना निवेश को लेकर भ्रामक धारणा बनाना उचित नहीं है। सरकार ने निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए निरंतर काम किया है, जिसके परिणामस्वरूप अब तक एक लाख एक हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की ग्राउंडिंग हो चुकी है।



सचिव उद्योग ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां अन्य राज्यों से अलग हैं। राज्य का लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है और भारी उद्योगों की स्थापना की संभावनाएं मुख्यतः देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर तथा नैनीताल के कुछ हिस्सों में अधिक हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप राज्य की औद्योगिक नीतियां तैयार की गई हैं, जिनका उद्देश्य पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखते हुए अधिक से अधिक रोजगार सृजित करना है।



उन्होंने बताया कि दिसंबर 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के दौरान लगभग 3.56 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इन प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए समय-समय पर ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी आयोजित की गईं। निवेशकों की सहायता के लिए निवेश मित्रों की व्यवस्था की गई, जिन्होंने निवेशकों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा, सरकारी प्रक्रियाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान में सहयोग किया और परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



श्री पांडे ने कहा कि निवेश से संबंधित आंकड़े उद्योग विभाग, यूके स्पाइस और सिंगल विंडो सिस्टम के पोर्टल पर उपलब्ध हैं। इनमें परियोजनाओं, संबंधित विभागों और उनके स्थान सहित आवश्यक विवरण पारदर्शिता के साथ दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह विषय लगभग आठ महीने पहले भी सोशल मीडिया पर उठाया गया था, जिस पर तथ्यों के साथ जवाब दिया गया था। सरकार ने समय-समय पर सदन में भी निवेश की स्थिति स्पष्ट की है। ऐसे में उपलब्ध तथ्यों की अनदेखी कर सवाल उठाना उचित नहीं है।



छोटे उद्यमों और स्थानीय निवेशकों पर की जा रही टिप्पणियों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सचिव उद्योग ने कहा कि आटा चक्की, मोबाइल दुकान या अन्य छोटे व्यवसाय को निवेश की श्रेणी में शामिल करने पर सवाल उठाना सही दृष्टिकोण नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई स्थानीय व्यक्ति अपनी मेहनत की कमाई से 10 हजार रुपये का निवेश कर छोटा व्यवसाय शुरू करता है और उससे दो लोगों को रोजगार मिलता है, तो यह भी राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान है। निवेश का महत्व केवल उसकी राशि से नहीं, बल्कि उससे पैदा होने वाले रोजगार और स्थानीय आजीविका के अवसरों से भी तय होता है।



उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का स्पष्ट निर्देश है कि राज्य में बड़े से बड़े उद्यमी और छोटे से छोटे व्यवसायी, दोनों का समान सम्मान होना चाहिए। स्थानीय उद्यमियों को प्रोत्साहित करना और उनके लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। छोटे कारोबारियों के प्रयासों पर कटाक्ष करना उनके परिश्रम और आत्मनिर्भर बनने की भावना का अपमान है।



श्री पांडे ने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के लिए विदेशों के साथ-साथ देश के प्रमुख महानगरों में रोड शो आयोजित किए गए। इसके अतिरिक्त, गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों सहित प्रदेश के सभी जनपदों में निवेश सम्मेलनों के माध्यम से स्थानीय उद्यमियों और छोटे कारोबारियों को भी आमंत्रित किया गया। सरकार का उद्देश्य केवल बड़े औद्योगिक निवेश को आकर्षित करना नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योगों, स्वरोजगार और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देना है।



आगामी निवेश योजनाओं की जानकारी देते हुए सचिव उद्योग ने कहा कि लगभग 24 हजार करोड़ रुपये के निवेश की अगली ग्राउंडिंग की तैयारी की जा रही है। इससे संबंधित विवरण भी सिंगल विंडो सिस्टम पर उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने बताया कि जल्द ही चौथी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी आयोजित की जाएगी। उन्होंने मीडिया और संबंधित लोगों से अपील की कि वे परियोजनाओं का प्रत्यक्ष निरीक्षण करें, उद्यमियों से संवाद करें और धरातल पर हुए कार्यों का आकलन तथ्यों के आधार पर करें।



श्री पांडे ने कहा कि उत्तराखंड में निवेश को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट है। निवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता, उद्यमियों को सहयोग और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन सरकार की प्राथमिकताएं हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों और धरातलीय प्रगति के आधार पर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए।

       

नौंवे दिन यानि नवमी तिथि को मां के सिद्धीदात्री का पूजन और आराधना की जाती है। मां का यह स्वरूप सभी प्रकार की सिद्धियों को प्रदान करने वाला है।




भगवती सिद्धिदात्री का ध्यान, स्तोत्र व कवच का पाठ करने से 'निर्वाण चक्र' जाग्रत हो जाता है।  



वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम।

कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम॥

स्वर्णावर्णा निर्वाणचक्रस्थितां नवम दुर्गा त्रिनेत्राम।

शख, चक्र, गदा, पदम, धरां सिद्धीदात्री भजेम॥

पटाम्बर,परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम।

मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम॥

प्रफुल्ल वदना पल्लवाधरां कातं कपोला पीनपयोधराम।

कमनीयां लावण्यां श्रीणकटि निम्ननाभि नितम्बनीम॥  



*हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के 24,518 परीक्षार्थी होंगे शामिल, दूरस्थ क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर केंद्र निर्धारण पर मंथन*


*डीएम डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति की बैठक, परीक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा*


देहरादून:



उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की वर्ष 2027 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परिषदीय परीक्षाओं के लिए जनपद देहरादून में 123 परीक्षा केंद्र प्रस्तावित किए गए हैं। इन केंद्रों पर कुल 24,518 परीक्षार्थी परीक्षा देंगे। परीक्षा केंद्रों के निर्धारण, संवेदनशील एवं दूरस्थ केंद्रों की व्यवस्था तथा परीक्षाओं के सुचारु संचालन को लेकर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में परीक्षा केंद्रों की स्थिति और निर्धारित मानकों के अनुरूप व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।


प्रस्तावित आंकड़ों के अनुसार, हाईस्कूल में कुल 13,576 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं। इनमें 13,472 संस्थागत तथा 104 व्यक्तिगत परीक्षार्थी शामिल हैं। इसी प्रकार, इंटरमीडिएट में कुल 10,942 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं, जिनमें 10,684 संस्थागत और 258 व्यक्तिगत परीक्षार्थी हैं। इस तरह दोनों कक्षाओं को मिलाकर परीक्षार्थियों की कुल संख्या 24,518 है।

 

बैठक में परीक्षा केंद्रों की उपयुक्तता, संवेदनशील केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाओं तथा दूरस्थ क्षेत्रों में विद्यार्थियों की सुविधा से जुड़े पहलुओं पर चर्चा करते हुए जिलाधिकारी ने दूरस्थ क्षेत्रों के परीक्षा केंद्रों का स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए है।

 

*तीन संवेदनशील केंद्र चिह्नित, अति संवेदनशील केंद्र नहीं*

समिति के समक्ष प्रस्तुत विवरण के अनुसार, वर्ष 2027 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए जनपद में तीन संवेदनशील परीक्षा केंद्र प्रस्तावित हैं, जबकि अति संवेदनशील केंद्रों की संख्या शून्य है। संवेदनशील केंद्रों में ऋषिकेश स्थित श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज, रायपुर स्थित डीएवी इंटर कॉलेज करनपुर तथा चकराता स्थित राजकीय इंटर कॉलेज भटाड़ शामिल हैं। इनमें परीक्षार्थियों की अधिक संख्या और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के मार्ग की दूरी जैसे कारणों को संवेदनशीलता के निर्धारण में प्रमुखता दी गई है।


*छह विकासखंडों में परीक्षा केंद्रों का निर्धारण*

जनपद के छह विकासखंडों में परीक्षा केंद्रों का विवरण भी बैठक में प्रस्तुत किया गया। इसके अनुसार, रायपुर में हाईस्कूल के 36 और इंटरमीडिएट के 35, डोईवाला में क्रमशः 30 और 30, सहसपुर में 15 और 14, विकासनगर में 21 और 19, कालसी में 8 और 8 तथा चकराता में 13 और 11 परीक्षा केंद्र निर्धारित किए जाने का विवरण दिया गया है। हाईस्कूल के लिए केंद्रों की कुल संख्या 123 और इंटरमीडिएट के लिए 117 प्रस्तावित की गई है।


*दूरस्थ क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियों को मिलेगी प्राथमिकता*

समिति के समक्ष ऐसे विद्यालयों का विवरण भी रखा गया, जहां परीक्षार्थियों की संख्या निर्धारित 60 विद्यार्थियों के मानक से कम है। प्रस्तुत प्रस्ताव में ऐसे सात विद्यालयों को शामिल किया गया है, जहां विषम भौगोलिक परिस्थितियों और आवागमन संबंधी कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा केंद्र बनाए जाने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को परीक्षा देने में होने वाली कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए केंद्र निर्धारण करना है।


समिति की बैठक में मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जैसवाल, खंड शिक्षा अधिकारी विनिता कठैत, हेमलता गौढ़, भुवनेश्वर प्रसाद, बुशरा, शिवानी कौशल, कुन्दन सिंह सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

 

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