Halloween party ideas 2015

देहरादून ;

five cabinet ministers added to uttarakhand cabinet


   राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने शुक्रवार को लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उत्तराखण्ड सरकार के मंत्रिपरिषद के नवनियुक्त मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे। राज्यपाल ने विधायक श्री खजान दास, श्री मदन कौशिक, श्री भरत सिंह चौधरी, श्री प्रदीप बत्रा एवं श्री राम सिंह कैड़ा को मंत्री पद की शपथ दिलाई।


   शपथ ग्रहण समारोह में महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल एवं उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री श्री भगत सिंह कोश्यारी, कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल, श्रीमती रेखा आर्या, श्री गणेश जोशी एवं श्री सौरभ बहुगुणा, सांसद श्री महेन्द्र भट्ट और श्री नरेश बंसल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन द्वारा किया गया।

                                                           

     

 या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।


ब्रह्मचारिणी माँ की नवरात्र पर्व के दूसरे दिन पूजा-अर्चना की जाती है। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल रहता है। यह जानकारी भविष्य पुराण से ली गई हे।


दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु |

 देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा  

SECOND Brahamcharini navratri,2024 march


इस दिन साधक कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने के लिए भी साधना करते हैं। जिससे उनका जीवन सफल हो सके और अपने सामने आने वाली किसी भी प्रकार की बाधा का सामना आसानी से कर सकें।


माँ दुर्गाजी का यह दूसरा स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनन्तफल देने वाला है। इनकी उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। जीवन के कठिन संघर्षों में भी उसका मन कर्तव्य-पथ से विचलित नहीं होता।

माँ ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन इन्हीं के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन ‘स्वाधिष्ठान ’चक्र में शिथिल होता है। इस चक्र में अवस्थित मनवाला योगी उनकी कृपा और भक्ति प्राप्त करता है।
 

इस दिन ऐसी कन्याओं का पूजन किया जाता है कि जिनका विवाह तय हो गया है लेकिन अभी शादी नहीं हुई है। इन्हें अपने घर बुलाकर पूजन के पश्चात भोजन कराकर वस्त्र, पात्र आदि भेंट किए जाते हैं।

प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में द्वितीय दिन इसका जाप करना चाहिए।

 

मेष

अ, आ, चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो

कुबुद्धि हावी रहेगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। विवाद से दूर रहें। कुसंगति से बचें। भूमि व भवन संबंधी बाधा दूर होगी। बड़े सौदे बड़ा लाभ दे सकते हैं। आय में वृद्धि होगी। परीक्षा व साक्षात्कार आदि में सफलता प्राप्त होगी। निवेश शुभ रहेगा। भाग्य का साथ रहेगा। नौकरी में अनुकूलता रहेगी। प्रसन्नता रहेगी।

Rashifal today


वृषभ

ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो

मान-सम्मान मिलेगा। यात्रा मनोरंजक रहेगी। किसी मांगलिक कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर प्राप्त होगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता प्राप्त करेगा। स्वादिष्ट भोजन का आनंद प्राप्त होगा। व्यापार-व्यवसाय में मनोनुकूल लाभ होगा। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड में सोच-समझकर हाथ डालें। जल्दबाजी न करें। समय अनुकूल है।


मिथुन

का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह

व्यर्थ भागदौड़ रहेगी। समय का अपव्यय होगा। दूर से दु:खद समाचार प्राप्त हो सकता है। विवाद से क्लेश होगा। काम में मन नहीं लगेगा। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। किसी व्यक्ति विशेष से अनबन हो सकती है। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी।


कर्क

ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो

कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। शारीरिक कष्ट संभव है। परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। कोई ऐसा कार्य न करें जिससे कि नीचा देखना पड़े। आर्थिक उन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। मित्रों का सहयोग कर पाएंगे। पराक्रम व प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। धनार्जन होगा।


सिंह

मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे

शत्रु शांत रहेंगे। वाणी पर नियंत्रण रखें। दूर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। घर में प्रतिष्ठित अतिथियों का आगमन हो सकता है। व्यय होगा। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। आय बनी रहेगी। दुष्‍टजनों से दूर रहें। चिंता तथा तनाव रहेंगे।


कन्या

ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

भाग्योन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। रोजगार प्राप्ति सहज ही होगी। व्यावसायिक यात्रा से लाभ होगा। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। निवेशादि शुभ रहेंगे। कारोबार में वृद्धि के योग हैं। किसी बड़ी समस्या का हल प्राप्त होगा। प्रसन्नता रहेगी। दूसरों के काम में हस्तक्षेप न करें।


तुला

रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते

व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। शत्रु शांत रहेंगे। ऐश्वर्य पर खर्च होगा। मान-सम्मान मिलेगा। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। कर्ज लेना पड़ सकता है। पुराना रोग उभर सकता है। वाणी पर नियंत्रण रखें। किसी भी अपरिचित व्यक्ति पर अंधविश्वास न करें। चिंता तथा तनाव बने रहेंगे। अपेक्षित कार्यों में विलंब होगा।


वृश्चिक

तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। शुभ समाचार मिल सकता है। शारीरिक कष्ट संभव है। अज्ञात भय रहेगा। लेन-देन में सावधानी रखें। चिंता रहेगी। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा लाभदायक रहेगी। मित्रों का सहयोग कर पाएंगे। मान-सम्मान मिलेगा। आय में वृद्धि होगी।


धनु

ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे

आराम का समय मिलेगा। आशंका-कुशंका रहेगी। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। कारोबारी नए अनुबंध हो सकते हैं, प्रयास करें। आय में वृद्धि होगी। सामाजिक कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। प्रमाद न करें।


मकर

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

यात्रा मनोनुकूल लाभ देगी। राजभय रहेगा। जल्दबाजी व विवाद करने से बचें। थकान महसूस होगी। किसी के व्यवहार से स्वाभिमान को ठेस पहुंच सकती है। कोर्ट व कचहरी के काम अनुकूल रहेंगे। धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन हो सकता है। पूजा-पाठ में मन लगेगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। प्रसन्नता रहेगी।


कुंभ

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा

आज मान-सम्मान के योग बनेंगे। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। शारीरिक शिथिलता रहेगी। काम में मन नहीं लगेगा। किसी अपने का व्यवहार प्रतिकूल रहेगा। पार्टनरों से मतभेद हो सकते हैं। नौकरी में अपेक्षानुरूप कार्य न होने से अधिकारी की नाराजी झेलना पड़ेगी।


मीन

दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची

कष्ट, भय व चिंता का वातावरण बन सकता है। विवेक से कार्य करें। समस्या दूर होगी। कानूनी अड़चन दूर होकर स्थिति मनोनुकूल बनेगी। किसी वरिष्ठ व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। कारोबारी लाभ में वृद्धि होगी। नौकरी में शांति रहेगी। सहकर्मियों का साथ मिलेगा। धनार्जन होगा।


 *एसडीआरएफ वाहिनी, जौलीग्रान्ट में छत्तीसगढ़ आयुर्वेद विज्ञान संस्थान (CIMS), बिलासपुर (छत्तीसगढ़) के एम०बी०बी०एस० के छात्र-छात्राओं का शैक्षणिक भ्रमण।*


आज दिनाँक 19 फरवरी 2026 छत्तीसगढ़ आयुर्वेद विज्ञान संस्थान (CIMS), बिलासपुर (छत्तीसगढ़) के एम०बी०बी०एस० प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं द्वारा एसडीआरएफ वाहिनी, जौलीग्रान्ट का शैक्षणिक भ्रमण किया गया। यह भ्रमण उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के समन्वय में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य छात्रों को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव एवं जागरूकता प्रदान करना रहा।


भ्रमण के दौरान श्री अर्पण यदुवंशी, सेनानायक, SDRF के निर्देशानुसार  निरीक्षक ट्रैनिंग श्री प्रमोद कुमार के नेतृत्व में एसडीआरएफ टीमों द्वारा छात्रों को आपदा की विभिन्न परिस्थितियों—जैसे बाढ़, भूकंप, भूस्खलन आदि में किए जाने वाले सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी दी गई। टीम द्वारा अत्याधुनिक रेस्क्यू उपकरणों का प्रदर्शन करते हुए उनके उपयोग एवं कार्यप्रणाली को सरल तरीके से समझाया गया। साथ ही मॉक ड्रिल के माध्यम से रेस्क्यू तकनीकों का जीवंत प्रदर्शन किया गया, जिससे छात्रों को वास्तविक परिस्थितियों में कार्य करने की प्रक्रिया का अनुभव प्राप्त हुआ।


इसके अतिरिक्त छात्रों को आपदा के दौरान प्राथमिक उपचार, घायल व्यक्तियों के सुरक्षित निकासी (evacuation) तथा टीम समन्वय के महत्व के बारे में भी अवगत कराया गया। एसडीआरएफ द्वारा आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया, अनुशासन एवं तकनीकी दक्षता के साथ किए जाने वाले कार्यों की जानकारी पाकर छात्र अत्यंत उत्साहित एवं प्रभावित हुए।

 

ऋषिकेश : 



भारतीय जनता पार्टी संगठन को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए ऋषिकेश जिला युवा मोर्चा कार्यकारिणी का विस्तार किया गया है। यह निर्णय भाजपा ऋषिकेश के जिलाध्यक्ष राजेन्द्र तडियाल की सहमति एवं प्रदेश युवा मोर्चा अध्यक्ष विपुल मैन्दोली के परामर्श के बाद लिया गया।

कार्यकारिणी विस्तार के तहत ऋषिकेश निवासी युवा कार्यकर्ता पंकज थपलियाल को जिला युवा मोर्चा का जिला मंत्री नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति के बाद संगठन में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ है।

भाजपा पदाधिकारियों के अनुसार, पंकज थपलियाल लंबे समय से संगठन के प्रति सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ता के रूप में अपनी भूमिका निभाते रहे हैं। सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी निरंतर भागीदारी और कार्यशैली को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस अवसर पर जिलाध्यक्ष राजेन्द्र तडियाल ने कहा कि युवा मोर्चा पार्टी की रीढ़ है और युवाओं के माध्यम से ही संगठन को नई दिशा और ऊर्जा मिलती है। उन्होंने विश्वास जताया कि पंकज थपलियाल अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, ईमानदारी और सक्रियता के साथ करेंगे तथा पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

वहीं ऋषिकेश जिला युवा मोर्चा अध्यक्ष शिवम टुटेजा ने भी नव-नियुक्त जिला मंत्री को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संगठन विस्तार का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नेतृत्व के अवसर प्रदान करना है, जिससे पार्टी की जमीनी पकड़ और अधिक मजबूत हो सके।

नियुक्ति के बाद पंकज थपलियाल ने पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसे वह पूरी लगन और निष्ठा के साथ निभाएंगे। उन्होंने कहा कि वे युवाओं को संगठन से जोड़ने और पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे।

इस नियुक्ति पर क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए पंकज थपलियाल को शुभकामनाएं दी हैं।

panchang callender DIPR uttarakhand CM dhami


 *सूचना एवं लोक संपर्क विभाग की अभिनव पहल—पहली बार प्रकाशित हुआ पंचांग कैलेंडर* 

 हिन्दू नववर्ष के शुभ अवसर पर आज मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास पर सूचना एवं लोक संपर्क विभाग द्वारा प्रकाशित पंचांग कैलेंडर का विधिवत विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने इसे राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को सहेजने एवं जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड अपनी सनातन परंपराओं, धार्मिक आस्थाओं और सांस्कृतिक मूल्यों के लिए देश-विदेश में विशिष्ट पहचान रखता है। यहां की परंपराएं केवल आस्था का विषय नहीं हैं, बल्कि यह हमारी जीवनशैली, सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न अंग हैं। ऐसे में पंचांग कैलेंडर का प्रकाशन राज्य की इस गौरवशाली विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।



मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पंचांग कैलेंडर राज्यवासियों को न केवल तिथि, वार, पक्ष, मास, पर्व एवं विशेष दिवसों की सटीक जानकारी प्रदान करेगा, बल्कि पारंपरिक त्योहारों, व्रतों और धार्मिक आयोजनों की महत्ता से भी अवगत कराएगा। इससे लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं के साथ और अधिक गहराई से जुड़ने का अवसर मिलेगा।


मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि इस पंचांग में देवभूमि उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक एवं आस्था स्थलों को विशेष रूप से स्थान दिया गया है। ये स्थल न केवल श्रद्धा के केंद्र हैं, बल्कि राज्य की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रतीक भी हैं। इस प्रकार यह कैलेंडर एक जानकारीपरक दस्तावेज होने के साथ-साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत करने वाला प्रेरणादायक संकलन भी है।


मुख्यमंत्री ने सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के इस प्रयास की सराहना करते हुए आशा व्यक्त की कि यह पंचांग कैलेंडर राज्य के प्रत्येक नागरिक के लिए उपयोगी सिद्ध होगा और आने वाले समय में इसे और अधिक समृद्ध एवं व्यापक स्वरूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

इस अवसर पर  सचिव श्री विनय शंकर पांडेय, महानिदेशक सूचना श्री बंशीधर तिवारी सहित अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।

 दिनांक: 19 मार्च 2026, गुरुवार 

 प्रथम तिथि: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा  विक्रम संवत: 2083 का शुभारम्भ हिंदी पंचांग (बीकानेर) के अनुसार आज से सनातन परंपरा का नया वर्ष प्रारम्भ हो रहा है

नवरात्रि में कलश / घट स्थापना के लिए सर्वप्रथम प्रातः काल नित्य क्रिया से निवृत होने के बाद स्नान करके, नव वस्त्र अथवा स्वच्छ वस्त्र पहन कर ही विधिपूर्वक पूजा आरम्भ करनी चाहिए। प्रथम पूजा के दिन मुहूर्त (सूर्योदय के साथ अथवा द्विस्वभाव लग्न में  कलश स्थापना करना चाहिए।

first navratri  shailputri


कलश स्थापना के लिए अपने घर के उस स्थान को चुनना चाहिए जो पवित्र स्थान हो अर्थात घर में मंदिर के सामने या निकट या मंदिर के पास।  यदि इस स्थान में पूजा करने में दिक्कत हो तो घर में ही ईशान कोण अथवा उत्तर-पूर्व दिशा में, एक स्थान का चयन कर ले तथा उसे गंगा जल से शुद्ध कर ले


जौ पात्र का प्रयोग


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सर्वप्रथम जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र लेना चाहिए । इस पात्र में मिट्टी की एक अथवा दो परत बिछा ले । इसके बाद जौ बिछा लेना चाहिए। इसके ऊपर फिर मिट्टी की एक परत बिछाएं। अब पुनः एक परत जौ की बिछा ले । जौ को इस तरह चारों तरफ बिछाएं ताकि जौ कलश के नीचे पूरी तरह से न दबे। इसके ऊपर पुनः मिट्टी की एक परत बिछाएं।




कलश स्थापना


पुनः कलश में रोली से स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर गले में तीन धागावाली मौली लपेटे और कलश को एक ओर रख ले। कलश स्थापित किये जानेवाली भूमि अथवा चौकी पर कुंकुंम या रोली से अष्टदलकमल बनाकर निम्न मंत्र से भूमि का स्पर्श करना चाहिए।



ॐ भूरसि भूमिरस्यदितिरसि विश्वधाया विश्वस्य भुवनस्य धरत्री।


पृथिवीं यच्छ पृथिवीं द्रीं ह पृथिवीं मा हि सीः।।


कलश स्थापन मंत्र 


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ॐ आ जिघ्न कलशं मह्यं त्वा विशंतिवन्दवः।


पुनरूर्जा नि वर्तस्व सा नह सहत्रम् धुक्ष्वोरूधारा पयस्वती पुनर्मा विशताद्रयिः।।

पुनः इस मंत्रोच्चारण के बाद  कलश में गंगाजल मिला हुआ जल छोड़े उसके बाद क्रमशः चन्दन,  सर्वौषधि(मुरा,चम्पक, मुस्ता, वच, कुष्ठ, शिलाजीत, हल्दी, सठी)  दूब, पवित्री, सप्तमृत्तिका, सुपारी, पञ्चरत्न, द्रव्य कलश में अर्पित करे। पुनःपंचपल्लव(बरगद,गूलर,पीपल,पाकड़,आम) कलश के मुख पर रखें।अनन्तर कलश को वस्त्र से अलंकृत करें। तत्पश्चात चावल से भरे पूर्णपात्र को कलश के मुख पर स्थापित करें।


कलश पर नारियल की स्थापना


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इसके बाद नारियल पर लाल कपडा लपेट  ले उसके बाद मोली लपेट दें। अब नारियल को कलश पर रख दे । नारियल के सम्बन्ध में शास्त्रों में कहा गया है:


 नवरात्रि के पहले दिन (19 मार्च 2026) माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की जाती है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री (शैल = पर्वत, पुत्री = बेटी) कहा जाता है। वृषभ (बैल) पर सवार, दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल लिए माँ शैलपुत्री स्थिरता, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं।


“अधोमुखं शत्रु विवर्धनाय,ऊर्ध्वस्य वस्त्रं बहुरोग वृध्यै।


प्राचीमुखं वित विनाशनाय,तस्तमात् शुभं संमुख्यं नारीकेलं”।


अर्थात् नारियल का मुख नीचे की तरफ रखने से शत्रु में वृद्धि होती है ।नारियल का मुख ऊपर की तरफ रखने से रोग बढ़ते हैं। पूर्व की तरफ नारियल का मुख रखने से धन का विनाश होता है। इसलिए नारियल की स्थापना  के समय हमेशा इस बात का ध्यान रखनी चाहिए कि उसका मुख साधक की तरफ रहे। ध्यान रहे कि नारियल का मुख उस सिरे पर होता है, जिस तरफ से वह पेड़ की टहनी से जुड़ा होता है।


देवी-देवताओं का कलश में आवाहन

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भक्त को अपने दाहिने हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर वरुण आदि देवी-देवताओ का ध्यान और आवाहन करना चाहिए –


 ॐ भूर्भुवःस्वःभो वरुण! इहागच्छ, इह तिष्ठ, स्थापयामि, पूजयामि, मम पूजां गृहाण।ओम अपां पतये वरुणाय नमः बोलकर अक्षत और पुष्प कलश पर छोड़ देना चाहिए। पुनः दाहिने हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर चारो वेद, तीर्थो, नदियों, सागरों, देवी और देवताओ के आवाहन करना चाहिए उसके बाद फिर अक्षत और पुष्प लेकर कलश की प्रतिष्ठा करें।


कलशे वरुणाद्यावाहितदेवताः सुप्रतिष्ठता वरदा भवन्तु।


तथा 


ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः  इस मंत्र के उच्चारण के साथ ही अक्षत और पुष्प कलश के पास छोड़ दे।


वरुण आदि देवताओ को —

ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमःध्यानार्थे पुष्पं समर्पयामि

आदि मंत्र का उच्चारण करते हुए पुष्प समर्पित करे पुनः निम्न क्रम से वरुण आदि देवताओ को अक्षत रखे, जल चढ़ाये, स्नानीय जल, आचमनीय जल चढ़ाये, पंच्चामृत स्नान कराये,जल में मलय चन्दन मिलाकर स्नान कराये, शुद्ध जल से स्नान कराये, आचमनीय जल चढ़ाये, वस्त्र चढ़ाये, यज्ञोपवीत चढ़ाये, उपवस्त्र चढ़ाये, चन्दन लगाये, अक्षत समर्पित करे, फूल और फूलमाला चढ़ाये, द्रव्य समर्पित करे ,इत्र आदि चढ़ाये, दीप दिखाए, नैवेद्य चढ़ाये, सुपारी, इलायची, लौंग सहित पान चढ़ाये, द्रव्य-दक्षिणा चढ़ाये(समर्पयामि) इसके बाद आरती करे। पुनः पुस्पाञ्जलि समर्पित करे, प्रदक्षिणा करे तथा दाहिने हाथ में पुष्प लेकर प्रार्थना करे और अन्त में


ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, प्रार्थनापूर्वकं अहं  नमस्कारान समर्पयामि।


इस मंत्र से नमस्कारपूर्वक फूल समर्पित करे। पुनः हाथ में जल लेकर अधोलिखित वाक्य का उच्चारण कर जल कलश के पास छोड़ते हुए समस्त पूजन-कर्म वरुणदेव को निवेदित करना चाहिए।


कृतेन अनेन पूजनेन कलशे वरुणाद्यावाहितदेवताः प्रीयन्तां न मम।




अखंड ज्योति


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नवरात्री के प्रथम दिन ही अखंड ज्योति जलाई जाती है जो नौ दिन तक निरंतर जलती रहती है। अखंड ज्योति का बीच में बुझना अच्छा नही माना जाता है।  अतः इस बात का अवश्य ही धयान रखना चाहिए की अखंड ज्योति न बुझे।

देवी पूजन सामग्री

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माँ दुर्गा की सुन्दर प्रतिमा, माता की प्रतिमा स्थापना के लिए चौकी, लाल वस्त्र , कलश/ घाट , नारियल का फल, पांच पल्लव आम का, फूल,अक्षत, मौली, रोली, पूजा के लिए थाली , धुप और दशांग, गंगा का जल, कुमकुम, गुलाल पान,सुपारी, चौकी,दीप, नैवेद्य,कच्चा धागा, दुर्गा सप्तसती किताब ,चुनरी, पैसा, माता दुर्गा की विशेष कृपा हेतु संकल्प तथा षोडशोपचार पूजन करने के बाद, प्रथम प्रतिपदा तिथि को, नैवेद्य के रूप में गाय का घी माता को अर्पित करना चाहिए तथा पुनः वह घी किसी ब्राह्मण को दे देना चाहिए।


संकल्प


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 संकल्प में पुष्प, फल, सुपारी, पान, चांदी कासिक्का, नारियल (पानी वाला), मिठाई, मेवा, थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर संकल्प मंत्र बोलें 


ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णु:, ॐ अद्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीयपरार्धे श्री श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे,अष्टाविंशतितमे कलियुगे, कलिप्रथम चरणे जम्बूद्वीपेभरतखण्डे भारतवर्षे पुण्य (अपने नगर/गांव का नामलें) क्षेत्रे बौद्धावतारे वीर विक्रमादित्यनृपते(वर्तमानसंवत), तमेऽब्दे प्रमादी नाम संवत्सरे उत्तरायणे(वर्तमान)वसंत ऋतो महामंगल्यप्रदे मासानां मासोत्तमे(वर्तमान) मासे (वर्तमान) पक्षे (वर्तमान) तिथौ(वर्तमान) वासरे (गोत्र का नाम लें) गोत्रोत्पन्नोऽहंअमुकनामा (अपना नाम लें) सकलपापक्षयपूर्वकंसर्वारिष्ट शांतिनिमित्तं सर्वमंगलकामनया-श्रुतिस्मृत्योक्तफलप्राप्त्यर्थं मनेप्सित कार्य सिद्धयर्थं श्रीदुर्गा पूजनं च अहं क​रिष्ये। तत्पूर्वागंत्वेन ​निर्विघ्नतापूर्वक कार्य ​सिद्धयर्थं यथा​मिलितोपचारेगणप​ति पूजनं क​रिष्ये।


दुर्गा पूजन से पहले गणेश पूजन -


हाथ में पुष्प लेकर गणपति का ध्यान करें|और श्लोकपढें -


 गजाननम्भूतगणादिसेवितं कपित्थ जम्बूफलचारुभक्षणम्। उमासुतं शोक विनाशकारकं नमामिविघ्नेश्वरपादपंकजम्।

आवाहन: हाथ में अक्षत लेकर


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     आगच्छ देव देवेश, गौरीपुत्र ​विनायक।


     तवपूजा करोमद्य, अत्रतिष्ठ परमेश्वर॥

ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः इहागच्छ इह तिष्ठकहकर अक्षत गणेश जी पर चढा़ दें।


हाथ में फूल लेकर-ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः आसनं समर्पया​मि|


अर्घा में जल लेकर बोलें -ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः अर्घ्यं समर्पया​मि|


आचमनीय-स्नानीयं-ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः आचमनीयं समर्पया​मि |


 वस्त्र लेकर-ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः वस्त्रं समर्पया​मि|


यज्ञोपवीत-ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः यज्ञोपवीतं समर्पया​मि |

पुनराचमनीयम्-ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः |


रक्त चंदन लगाएं: इदम रक्त चंदनम् लेपनम् ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः |


श्रीखंड चंदन बोलकर श्रीखंड चंदन लगाएं|पटZ


सिन्दूर चढ़ाएं-



"इदं सिन्दूराभरणं लेपनम् ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः|



दूर्वा और विल्बपत्र भी गणेश जी को चढ़ाएं|


पूजन के बाद गणेश जी को प्रसाद अर्पित करें:


ॐ श्री ​सिद्धि विनायकाय नमः इदं नानाविधिनैवेद्यानि समर्पयामि |


मिष्ठान अर्पित करने के लिए मंत्र बोले


शर्करा खण्ड खाद्या​नि द​धि क्षीर घृता​नि च|

आहारो भक्ष्य भोज्यं गृह्यतां गणनायक।

प्रसाद अर्पित करने के बाद आचमन करायें- इदं आचमनीयं ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः|


इसके बाद पान सुपारी चढ़ायें-


ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः ताम्बूलं समर्पया​मि |

अब फल लेकर गणपति पर चढ़ाएं-


          ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः फलं समर्पया​मि|


            ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः द्रव्य समर्पया​मि|


 अब ​विषम संख्या में दीपक जलाकर ​निराजन करेंऔर भगवान की आरती गायें


 हाथ में फूल लेकर गणेश जी को अ​र्पित करें, ​फिर तीन प्रद​क्षिणा करें।


दुर्गा पूजन


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सबसे पहले माता दुर्गा का ध्यान करें

     सर्व मंगल मागंल्ये ​शिवे सर्वार्थ सा​धिके ।

 शरण्येत्रयम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते ॥

 आवाहन-

         श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। दुर्गादेवीमावाहया​मि॥


 आसन- 

        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। आसानार्थेपुष्पाणि समर्पया​मि।


अर्घ्य-


       श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। हस्तयो: अर्घ्यंसमर्पया​मि॥

आचमन-

       श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। आचमनं समर्पया​मि॥


स्नान-


       श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। स्नानार्थं जलंसमर्पया​मि॥


स्नानांग आचमन-


       स्नानान्ते पुनराचमनीयं जलं समर्पया​मि।




पंचामृत स्नान-


      श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। पंचामृतस्नानंसमर्पया​मि॥


गन्धोदक-स्नान-

      श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। गन्धोदकस्नानंसमर्पया​मि॥


शुद्धोदक स्नान-


      श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। शुद्धोदकस्नानंसमर्पया​मि॥


आचमन-  शुद्धोदकस्नानान्ते आचमनीयं जलं समर्पया​मि।


वस्त्र-

       श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। वस्त्रं समर्पया​मि ॥वस्त्रान्ते आचमनीयं जलं समर्पया​मि।


सौभाग्य सू़त्र-


       श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। सौभाग्य सूत्रंसमर्पया​मि ॥


चन्दन-

        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। चन्दनं समर्पया​मि॥


ह​रिद्राचूर्ण-


        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। ह​रिद्रां समर्पया​मि॥

कुंकुम-


        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। कुंकुम समर्पया​मि॥


​सिन्दूर-


         श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। ​सिन्दूरं समर्पया​मि॥


कज्जल-

         श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। कज्जलं समर्पया​मि।

आभूषण-


         श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। आभूषणा​निसमर्पया​मि ॥




पुष्पमाला-


        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। पुष्पमाला समर्पया​मि ॥


धूप-


        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। धूपमाघ्रापया​मि॥

दीप-


        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। दीपं दर्शया​मि॥

नैवेद्य-


        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। नैवेद्यं ​निवेदया​मि॥नैवेद्यान्ते ​त्रिबारं आचमनीय जलं समर्पया​मि।

फल-


         श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। फला​नि समर्पया​मि॥

ताम्बूल-


        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। ताम्बूलं समर्पया​मि॥


द​क्षिणा-


          श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। द्रव्यद​क्षिणां समर्पया​म

आरती-


          श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। आरा​र्तिकंसमर्पया​मि॥


प्रदक्षिणा

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“यानि कानि च पापानी जन्मान्तर कृतानि च।


तानी सर्वानि नश्यन्तु प्रदक्षिणपदे पदे॥


प्रदक्षिणा समर्पयामि।“


प्रदक्षिणा करें (अगर स्थान न हो तो आसन पर खड़े-खड़े ही स्थान पर घूमे)


क्षमा प्रार्थना


न मंत्रं नोयंत्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो


न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथाः ।


न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं


परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम् ॥


विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतया


विधेयाशक्यत्वात्तव चरणयोर्या च्युतिरभूत् ।ल


तदेतत्क्षतव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवे


कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ॥




पृथिव्यां पुत्रास्ते जननि बहवः सन्ति सरलाः


परं तेषां मध्ये विरलतरलोऽहं तव सुतः ।




मदीयोऽयंत्यागः समुचितमिदं नो तव शिवे


कुपुत्रो जायेत् क्वचिदपि कुमाता न भवति ॥




जगन्मातर्मातस्तव चरणसेवा न रचिता


न वा दत्तं देवि द्रविणमपि भूयस्तव मया ।




तथापित्वं स्नेहं मयि निरुपमं यत्प्रकुरुषे


कुपुत्रो जायेत क्वचिदप कुमाता न भवति ॥




परित्यक्तादेवा विविध​विधिसेवाकुलतया


मया पंचाशीतेरधिकमपनीते तु वयसि ।


इदानीं चेन्मातस्तव कृपा नापि भविता


निरालम्बो लम्बोदर जननि कं यामि शरण् ॥


श्वपाको जल्पाको भवति मधुपाकोपमगिरा


निरातंको रंको विहरति चिरं कोटिकनकैः ।


तवापर्णे कर्णे विशति मनुवर्णे फलमिदं


जनः को जानीते जननि जपनीयं जपविधौ ॥


चिताभस्मालेपो गरलमशनं दिक्पटधरो


जटाधारी कण्ठे भुजगपतहारी पशुपतिः ।


कपाली भूतेशो भजति जगदीशैकपदवीं

भवानि त्वत्पाणिग्रहणपरिपाटीफलमिदम् ॥


न मोक्षस्याकांक्षा भवविभव वांछापिचनमे


न विज्ञानापेक्षा शशिमुखि सुखेच्छापि न पुनः 


अतस्त्वां संयाचे जननि जननं यातु मम वै


मृडाणी रुद्राणी शिवशिव भवानीति जपतः ॥


नाराधितासि विधिना विविधोपचारैः


किं रूक्षचिंतन परैर्नकृतं वचोभिः ।


श्यामे त्वमेव यदि किंचन मय्यनाथे


धत्से कृपामुचितमम्ब परं तवैव ॥


आपत्सु मग्नः स्मरणं त्वदीयं


करोमि दुर्गे करुणार्णवेशि ।


नैतच्छठत्वं मम भावयेथाः


क्षुधातृषार्ता जननीं स्मरन्ति ॥


जगदंब विचित्रमत्र किं परिपूर्ण करुणास्ति चिन्मयि ।


अपराधपरंपरावृतं नहि मातासमुपेक्षते सुतम् ॥


मत्समः पातकी नास्तिपापघ्नी त्वत्समा नहि।


वं ज्ञात्वा महादेवियथायोग्यं तथा कुरु ॥


इसके बाद थाली में दीपक पुष्प सजाकर माँ की आरती करें

दुर्गा जी की आरती (1)


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जगजननी जय! जय! माँ! जगजननी जय! जय!


भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय। जगजननी ..

तू ही सत्-चित्-सुखमय, शुद्ध ब्रह्मरूपा।


सत्य सनातन, सुन्दर, पर-शिव सुर-भूपा॥ जगजननी ..

आदि अनादि, अनामय, अविचल, अविनाशी।


अमल, अनन्त, अगोचर, अज आनन्दराशी॥ जगजननी 

अविकारी, अघहारी, अकल कलाधारी।

कर्ता विधि, भर्ता हरि, हर संहारकारी॥ जगजननी ..


तू विधिवधू, रमा, तू उमा महामाया।

मूल प्रकृति, विद्या तू, तू जननी जाया॥ जगजननी ..

राम, कृष्ण तू, सीता, ब्रजरानी राधा।

तू वाँछाकल्पद्रुम, हारिणि सब बाघा॥ जगजननी ..

दश विद्या, नव दुर्गा नाना शस्त्रकरा।

अष्टमातृका, योगिनि, नव-नव रूप धरा॥ जगजननी ..

तू परधामनिवासिनि, महाविलासिनि तू।

तू ही श्मशानविहारिणि, ताण्डवलासिनि तू॥ जगजननी .

सुर-मुनि मोहिनि सौम्या, तू शोभाधारा।

विवसन विकट सरुपा, प्रलयमयी, धारा॥ जगजननी ..0L0

तू ही स्नेहसुधामयी, तू अति गरलमना।

रत्नविभूषित तू ही, तू ही अस्थि तना॥ जगजननी ..

मूलाधार निवासिनि, इह-पर सिद्धिप्रदे।

कालातीता काली, कमला तू वरदे॥ जगजननी ..

शक्ति शक्तिधर तू ही, नित्य अभेदमयी।

भेद प्रदर्शिनि वाणी विमले! वेदत्रयी॥ जगजननी ..

हम अति दीन दु:खी माँ! विपत जाल घेरे।

हैं कपूत अति कपटी, पर बालक तेरे॥ जगजननी ..

निज स्वभाववश जननी! दयादृष्टि कीजै।

करुणा कर करुणामयी! चरण शरण दीजै॥ जगजननी ....


 दुर्गा जी की आरती (2)


जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी ।

                      तुमको निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी ।।जय अम्बे गौरी...                           


मांग सिन्दूर विराजत टीको मृ्ग मद को ।

 उच्चवल से दोऊ नैना चन्द्र बदन नीको। जय अम्बे गौरी...

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै।

 रक्त पुष्प गलमाला कंठन पर साजै।।जय अम्बे गौरी...

केहरि वाहन राजत खडग खप्पर थारी

 सुर नर मुनि जन सेवत तिनके दु:ख हारी।।जय अम्बे गौरी..

कानन कुण्डली शोभित नाशाग्रे मोती ।।

कोटिक चन्द्र दिवाकर राजत सम ज्योति।।जय अम्बे गौरी..

शुम्भ निशुम्भ विदारे महिषासुर घाती ।

घूम्र विलोचन नैना निशिदिन मदमाती ।।जय अम्बे गौरी...

चौंसठ योगिन गावन नृ्त्य करत भैरूं ।

बाजत ताल मृ्दंगा अरू बाजत डमरू।।जय अम्बे गौरी...

भुजा चार अति शोभित खडग खप्पर धारी ।

मन वांछित फल पावत सेवत नर नारी ।।जय अम्बे गौरी...

कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती ।

श्री मालकेतु में राजत कोटि रत्न ज्योति।।जय अम्बे गौरी...

श्री अम्बे की आरती जो कोई नर गावै।

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पति पावै।। जय अम्बे गौरी...


आरती के बाद माँ को शाष्टांग प्रणाम कर प्रसाद को बांट दें। भक्त प्राय: पूरे नवरात्र उपवास रखते हैं. सम्पूर्ण नवरात्रव्रत के पालन में असमर्थ लोगों के लिए सप्तरात्र,पंचरात्र,युग्मरात्र और एकरात्रव्रत का विधान भी है. प्रतिपदा से सप्तमी तक उपवास रखने से सप्तरात्र-व्रत का अनुष्ठान होता है.


अष्टमी के दिन माता को हलुवा और चने का भोग लगाकर कुंवारी कन्याओं को खिलाते हैं तथा अन्त में स्वयं प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण (पूर्ण) करते हैं.


नवरात्रके नौ दिन साधना करने वाले साधक प्रतिपदा तिथि के दिन शैलपुत्री की, द्वितीया में ब्रह्मचारिणी, तृतीया में चंद्रघण्टा, चतुर्थी में कूष्माण्डा, पंचमी में स्कन्दमाता, षष्ठी में कात्यायनी, सप्तमी में कालरात्रि, अष्टमी में महागौरी तथा नवमी में सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं. तथा दुर्गा जी के १०८ नामों को मंत्र रूप में उसका अधिकाधिक जप करें।




विशेष👉 


यह पूजन विधि जिन साधको को वैदिक मंत्रों का ज्ञान नही है अथवा जिनके पास पूजा के लिये उपयुक्त समय नही है उनकी भावनाओं एवं यहाँ शब्द सीमा को ध्यान में रखकर बनाई गई है विस्तृत वैदिक मंत्रों से पूजन विधि जिसे आवश्यकता हो उसे व्यक्तिगत रूप से बतायी जाएगी।



*आचार्य पवन पराशर (श्रीधाम वृन्दावन)*

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