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चमोली:





 थाना श्री बद्रीनाथ के माध्यम से SDRF टीम को सूचना प्राप्त हुई कि जोशीमठ स्थित ड्रोन एडवेंचर ट्रैकिंग कंपनी के संचालक श्री नरेंद्र सिंह रावत अपने 15 सदस्यीय ट्रैकिंग दल के साथ 04 जून 2026 को घमसाली से श्री बद्रीनाथ के लिए ट्रैकिंग पर निकले थे। ट्रैकिंग के दौरान दल मुछुकुंद गुफा के ऊपरी पर्वतीय क्षेत्र स्थित "मूसा पानी" के समीप सरस्वती नदी के पार घने कोहरे, अंधेरे एवं प्रतिकूल मौसम के कारण रास्ता भटक गया।


दल के सदस्य टॉर्च की रोशनी एवं आवाज लगाकर सहायता की गुहार कर रहे थे, जिस पर क्षेत्र में गश्त कर रहे ITBP जवानों की नजर पड़ी। ITBP द्वारा तत्काल स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई, जिसके उपरांत SDRF टीम को अलर्ट किया गया।


सूचना प्राप्त होते ही अपर उपनिरीक्षक दीपक मेहता के नेतृत्व में SDRF टीम आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हुई। लगातार बारिश, घने कोहरे एवं दुर्गम पर्वतीय मार्ग के बीच टीम ने ट्रैकर्स की सटीक लोकेशन का पता लगाया। सरस्वती नदी के पार कोहरे के बीच ट्रैकर्स की हलचल दिखाई देने पर SDRF जवानों ने सीटी, टॉर्च एवं आवाज के माध्यम से संपर्क स्थापित किया तथा लगभग डेढ़ घंटे के कठिन प्रयास के बाद उनके पास पहुंच बनाई।


SDRF एवं ITBP की संयुक्त टीम ने सभी ट्रैकर्स का मनोबल बढ़ाते हुए उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला और माना की ओर वापस लाया। अभियान के दौरान ट्रैकिंग दल में शामिल 75 वर्षीय बुजुर्ग श्री उदय प्रांजल को चलने में अत्यधिक कठिनाई हो रही थी, जिन्हें SDRF जवानों ने पूरे मार्ग में विशेष सहायता प्रदान करते हुए सुरक्षित माना तक पहुंचाया।


सफल रेस्क्यू अभियान के उपरांत ट्रैकिंग दल के लीडर एवं ड्रोन एडवेंचर ट्रैकिंग कंपनी के संचालक नरेंद्र सिंह रावत ने SDRF एवं ITBP की त्वरित कार्यवाही, साहस, समर्पण एवं मानवीय सेवा भावना की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए पूरी टीम का आभार व्यक्त किया।


उत्तराखण्ड SDRF विपरीत परिस्थितियों, दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों एवं प्रतिकूल मौसम में भी जनसेवा, मानव जीवन की सुरक्षा तथा आपदा राहत कार्यों के प्रति अपने संकल्प के साथ निरंतर तत्पर एवं प्रतिबद्ध है।


*अन्य राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिस अपनाएगा उत्तराखंड, परियोजनाओं की निगरानी और शिकायत निस्तारण होगा और मजबूत*


देहरादून:



.मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के विजन को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखंड रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) में व्यापक सुधारों की तैयारी शुरू हो गई है। सचिव आवास एवं राज्य सम्पत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में रेरा की कार्यप्रणाली, परियोजनाओं की निगरानी, शिकायत निस्तारण, बिल्डरों के पंजीकरण तथा अवैध प्लॉटिंग और निर्माण पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव और निर्देश दिए गए।


रेरा से संबंधित समीक्षा बैठक में कार्यों की प्रगति, उपलब्धियों और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। सचिव आवास एवं राज्य सम्पत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार ने निर्देश दिए कि देश के विभिन्न राज्यों जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली, असम और हिमाचल प्रदेश में लागू रेरा व्यवस्थाओं का तुलनात्मक अध्ययन कर उत्तराखंड के लिए सर्वोत्तम व्यवस्थाएं अपनाई जाएं। इसके लिए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर राज्य में लागू किए जाने वाले सुधारों का खाका तैयार किया जाएगा।


सचिव आवास एवं राज्य सम्पत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार ने समीक्षा बैठक में रेरा के ऑनलाइन पोर्टल को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) से एकीकृत करने का सुझाव भी दिया गया, जिससे परियोजना पंजीकरण और अनुमोदन प्रक्रियाएं अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध हो सकें।



*स्वीकृत नक्शे में बदलाव के लिए दो-तिहाई आवंटियों की सहमति जरूरी*


सचिव आवास एवं राज्य सम्पत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार ने समीक्षा बैठक में यह भी प्रस्तावित किया गया कि रेरा पंजीकरण के बाद जारी प्रमाणपत्र में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख किया जाए कि स्वीकृत मानचित्र में किसी भी प्रकार का परिवर्तन करने से पहले संबंधित परियोजना के कम से कम दो-तिहाई आवंटियों की सहमति लेना अनिवार्य होगा। इससे फ्लैट और प्लॉट खरीदारों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। इसके अलावा राज्य में बिल्डर और प्रमोटर पंजीकरण व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने पर भी चर्चा हुई। प्रमोटरों द्वारा पूर्व में विकसित की गई परियोजनाओं का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया, जिससे खरीदारों को डेवलपर के ट्रैक रिकॉर्ड की जानकारी मिल सके।


*अवैध प्लॉटिंग पर रेरा की नजर, प्राधिकरणों के साथ साझा होगी कार्रवाई की सूचना*


समीक्षा बैठक में राज्यभर में बढ़ रही अवैध प्लॉटिंग और बिना स्वीकृति के निर्माण गतिविधियों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। सचिव आवास ने कहा कि विभिन्न विकास प्राधिकरणों से ऐसे मामलों की सूचनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इस पर रेरा स्तर से किस प्रकार प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है, इसके लिए विस्तृत अध्ययन करने के निर्देश दिए गए। साथ ही यह भी तय किया गया कि जिन निर्माणों के विरुद्ध विकास प्राधिकरणों द्वारा सीलिंग, ध्वस्तीकरण या अन्य कार्रवाई की जाती है, उनकी सूचना रेरा को भी उपलब्ध कराई जाए। इससे खरीदारों को संभावित जोखिम वाली परियोजनाओं की जानकारी मिल सकेगी और रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी।


बैठक में परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए स्पष्ट टाइमलाइन तय करने पर भी जोर दिया गया ताकि निवेशकों और खरीदारों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े। 


*रेरा के वर्तमान प्रभारी अध्यक्ष नरेश मठपाल* ने बैठक में बताया कि 500 वर्ग मीटर से अधिक भूखंड क्षेत्रफल अथवा आठ से अधिक निर्मित इकाइयों वाली सभी रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए विज्ञापन, बुकिंग, आवंटन तथा क्रय-विक्रय से पूर्व रेरा में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि परियोजना और एजेंट पंजीकरण के लिए प्राप्त आवेदनों के निस्तारण हेतु 30 कार्य दिवस की समय-सीमा निर्धारित की गई है।


*रेरा की उपलब्धियों पर जानकारी देते हुए वर्तमान प्रभारी अध्यक्ष नरेश मठपाल ने* बताया गया कि वर्ष 2017 में गठन के बाद से अब तक राज्य में 689 रियल एस्टेट परियोजनाएं पंजीकृत हो चुकी हैं। हिमालयी राज्यों में परियोजना पंजीकरण के मामले में उत्तराखंड दूसरे स्थान पर है। वहीं 510 पंजीकृत रियल एस्टेट एजेंटों के साथ राज्य पहले स्थान पर है।


शिकायत निस्तारण के क्षेत्र में भी रेरा का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है। प्राधिकरण को अब तक 1342 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 86 प्रतिशत का निस्तारण किया जा चुका है। सीएम हेल्पलाइन और सीपीग्राम्स के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का शत-प्रतिशत निस्तारण भी किया गया है।


बैठक में बैंक अकाउंट डायरेक्शन-2025 के क्रियान्वयन की जानकारी भी दी गई। इसके तहत प्रत्येक रियल एस्टेट परियोजना के लिए तीन अलग-अलग बैंक खाते खोले जाने का प्रावधान किया गया है, जिससे परियोजना निधियों की निगरानी और वित्तीय अनुशासन को मजबूत किया जा सके। *बैठक में संयुक्त सचिव आवास धीरेंद्र कुमार सिंह, अनु सचिव नरेंद्र सिंह रावत, अनुभाग अधिकारी राहुल सुन्दरियाल सहित सदस्य पंकज कुलश्रेष्ठ, सहायक अभियंता आनंद शंकर और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।*



*राज्य सरकार रियल एस्टेट क्षेत्र में पूर्ण पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध- डॉ. आर. राजेश कुमार*


सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी के नेतृत्व में राज्य सरकार रियल एस्टेट क्षेत्र में पूर्ण पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। समीक्षा बैठक में हमने अन्य राज्यों की सफल व्यवस्थाओं का अध्ययन कर उत्तराखंड में सर्वोत्तम प्रथाओं को लागू करने पर चर्चा की है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक परियोजना नियमानुसार संचालित हो और आम नागरिकों को सुरक्षित एवं भरोसेमंद निवेश का वातावरण मिले। अवैध प्लॉटिंग, अनधिकृत निर्माण और नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। साथ ही रेरा की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, डिजिटल और समयबद्ध बनाया जाएगा ताकि निवेशकों, गृह खरीदारों और डेवलपर्स को पारदर्शी व्यवस्था का लाभ मिल सके। राज्य में रियल एस्टेट सेक्टर को सुव्यवस्थित, जवाबदेह और जनहितकारी बनाने के लिए आवश्यक सुधारों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।


दिनांक 06 जून 2026 को सायं लगभग 18:15 बजे  कौड़ियाला क्षेत्र में रिवेरा रेस्ट्रो के समीप एक व्यक्ति के गंगा नदी में डूबने की सूचना प्राप्त होते ही SDRF टीमों द्वारा तत्काल घटनास्थल पर पहुँचकर सर्च अभियान चलाया गया। 



मौके पर पहुंचकर डूबे हुए व्यक्ति की पहचान आशीष जैन (उम्र 40 वर्ष), निवासी इंदिरापुरम, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई। घटना के उपरांत SDRF टीमों द्वारा स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करते हुए तत्काल सर्च अभियान प्रारंभ किया गया।


बीते कई दिनों से SDRF द्वारा गंगा नदी के संभावित क्षेत्रों में उपलब्ध सभी सर्चिंग संसाधनों एवं तकनीकों का उपयोग करते हुए लगातार अभियान संचालित किया जाता रहा। विषम परिस्थितियों और नदी के तेज बहाव के बावजूद टीमों द्वारा निरंतर प्रयास जारी रखे गए।


अथक प्रयासों के फलस्वरूप आज दिनाँक 11 जून 2026 को SDRF टीम एवं स्थानीय पुलिस के संयुक्त अभियान के दौरान शिवपुरी क्षेत्र से युवक का शव बरामद कर लिया गया। शव की पहचान परिजनों द्वारा की गई, जिसके उपरांत आवश्यक पंचनामा एवं अन्य औपचारिक कार्यवाही पूर्ण कर शव को अग्रिम वैधानिक कार्रवाई हेतु स्थानीय पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।


उल्लेखनीय है कि SDRF उत्तराखंड द्वारा क्षेत्र में पूर्व से लापता अन्य व्यक्तियों की तलाश हेतु भी सर्च अभियान निरंतर संचालित किया जा रहा है।

 देहरादून:



मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध प्लॉटिंग एवं अनधिकृत भूमि विकास के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत गुरुवार को सिमला बाईपास स्थित पित्थुवाला खुर्द क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से विकसित की जा रही प्लॉटिंग को ध्वस्त कर दिया।

पित्थुवाला खुर्द क्षेत्र में सुभाष कश्यप द्वारा लगभग एक बीघा भूमि पर बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति एवं स्वीकृत ले-आउट के अवैध प्लॉटिंग की जा रही थी। निरीक्षण के उपरांत प्रकरण की जांच की गई, जिसमें भूमि विकास कार्य नियमों के विपरीत पाया गया। इसके बाद प्राधिकरण द्वारा नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई गई। 


*अनधिकृत कॉलोनियों पर एमडीडीए की पैनी नजर*

 एमडीडीए ने स्पष्ट किया है कि प्राधिकरण क्षेत्र में बिना स्वीकृति किसी भी प्रकार की प्लॉटिंग, कॉलोनी विकास अथवा निर्माण गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अवैध विकास गतिविधियां न केवल शहरी नियोजन को प्रभावित करती हैं, बल्कि भविष्य में नागरिक सुविधाओं एवं आधारभूत संरचना के विकास में भी बाधा उत्पन्न करती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण द्वारा लगातार निगरानी एवं प्रवर्तन की कार्रवाई की जा रही है।

ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान सहायक अभियंता विजय सिंह रावत, अवर अभियंता मुनेष राणा एवं प्राधिकरण के सुपरवाइजर मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।


*नियमों के विरुद्ध भूमि विकास पर जारी रहेगा अभियान ;- बंशीधर तिवारी (उपाध्यक्ष एमडीडीए)* 


“ प्राधिकरण उपाध्यक्ष  बंशीधर तिवारी ने कहा क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग और अनधिकृत निर्माण के विरुद्ध हमारी कार्रवाई निरंतर जारी है। किसी भी व्यक्ति को नियमों की अनदेखी कर भूमि विकास करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्राधिकरण क्षेत्र में होने वाली प्रत्येक विकास गतिविधि पर नजर रखी जा रही है और उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आमजन से अपील है कि किसी भी भूखंड या संपत्ति में निवेश करने से पहले उसकी वैधानिक स्थिति एवं प्राधिकरण की स्वीकृतियों की जांच अवश्य कर लें।”


*नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा रही है :- मोहन सिंह बर्निया (सचिव एमडीडीए)* 

“प्राधिकरण सचिव  मोहन सिंह बर्निया ने कहा क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग के विरुद्ध अभियान लगातार जारी रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। नागरिक किसी भी संपत्ति में निवेश से पूर्व उसकी वैधता अवश्य सुनिश्चित करें।”

 *नीट (यूजी)-2026 की पुनः परीक्षा में सम्मिलत होने वाले अभ्यर्थियों को उत्तराखण्ड परिवहन निगम की बसों में मिलेगी प्रवेश पत्र के आधार पर निःशुल्क यात्रा सुविधा*


*उत्तराखण्ड के स्थायी निवासी अभ्यर्थियों को मिलेगा इस सुविधा का लाभ*

 

*साधारण श्रेणी की बसों में प्रवेश पत्र दिखाकर कर सकेंगे निःशुल्क यात्रा*



प्रदेश में नीट (यूजी)-2026 की पुनः परीक्षा में सम्मिलत होने वाले अभ्यर्थियों को उत्तराखण्ड परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान की जायेगी। उत्तराखण्ड के स्थायी निवासी अभ्यर्थियों को नीट (यूजी)-2026 का प्रवेश पत्र दिखाकर इस सुविधा का लाभ मिलेगा। यह सुविधा अभ्यर्थियों को परीक्षा से 02 दिन पूर्व तथा परीक्षा समाप्ति के 02 दिन बाद तक मान्य होगी । 


राज्य सरकार द्वारा नीट (यूजी)-2026 की पुनः परीक्षा में शामिल होने वाले प्रदेश के अभ्यर्थियों को उत्तराखण्ड परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा देने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में सचिव परिवहन श्री बृजेश कुमार सन्त द्वारा प्रबंध निदेशक उत्तराखण्ड परिवहन निगम को आदेश जारी कर दिए गए हैं। जारी आदेश के अनुसार, यह सुविधा उत्तराखण्ड राज्य के स्थायी निवासी अभ्यर्थियों को ही अनुमन्य होगी। जो नीट (यूजी)-2026  द्वारा निर्गत प्रवेश पत्र के आधार पर ही मान्य होगी। यह सुविधा उत्तराखण्ड परिवहन निगम द्वारा संचालित केवल साधारण श्रेणी की बसों तथा परीक्षा केंद्र के निकटतम मार्ग के लिए ही मान्य होगी। 


इस सुविधा के तहत परीक्षा की तिथि से 02 दिवस पूर्व से लेकर परीक्षा की तिथि तक अभ्यर्थी अपने गृह स्थान अथवा वर्तमान प्रवास से परीक्षा केंद्र तक निःशुल्क यात्रा कर सकेंगे। परीक्षा केंद्र से वापसी के लिए परीक्षा समाप्ति की तिथि से 02 दिवस के भीतर अपने गृह स्थान अथवा वर्तमान प्रवास के पते तक की वापसी यात्रा मान्य होगी।


चमोली;



आज दिनांक 10 जून 2026 को घास्तोली से एक खराब थार वाहन संख्या UK07HH 7712 को ट्रक वाहन संख्या UP81CT 7683 के माध्यम से बद्रीनाथ लाया जा रहा था। इसी दौरान मूसापानी नामक स्थान पर ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गया। दुर्घटना के समय वाहन में दो व्यक्ति सवार थे।

घटना की सूचना प्राप्त होते ही SDRF, पुलिस की टीम श्री बद्रीनाथ धाम से तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई। मौके पर पूर्व से उपस्थित भारतीय सेना एवं ITBP के जवानों के साथ संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान प्रारंभ किया गया। दुर्घटनाग्रस्त ट्रक में फंसे व्यक्ति को कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया।

दुर्घटना में मिंटू पुत्र जयवीर, उम्र 21 वर्ष, निवासी मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) गंभीर रूप से घायल हो गए थे। SDRF टीम द्वारा उन्हें तत्काल प्राथमिक उपचार प्रदान करते हुए एंबुलेंस के माध्यम से श्री बद्रीनाथ अस्पताल पहुंचाया गया। दुर्भाग्यवश अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों द्वारा उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

वहीं, दूसरे व्यक्ति जितेन्द्र, उम्र 47 वर्ष, निवासी मथुरा (उत्तर प्रदेश) सुरक्षित हैं तथा उनकी स्थिति सामान्य है।



- कम प्रगति वाले जिलों को सीईओ ने दिए विस्तृत निर्देश 

- चम्पावत,अल्मोड़ा पिथौरागढ़ फार्म वितरण में अब्बल 

- देहरादून,नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में फार्म वितरण की धीमी प्रगति


देहरादून;



मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बुधवार को विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दृष्टिगत सचिवालय में सभी जनपदों जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से समीक्षा बैठक की। इस दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने गणना फार्म वितरण में देहरादून,नैनीताल और ऊधमसिंह नगर की धीमी प्रगति को लेकर नाराजगी जाहिर की। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मुख्य रुप से इन तीनों जनपदों को अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सबसे अधिक गणना फार्म वितरित कर चुके शीर्ष तीन जनपदों चम्पावत, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ की सराहना की। 


मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश दिए कि शहरी क्षेत्रों में मतदाताओं के लिए आवासीय कॉलोनी, सार्वजनिक स्थानों में व्यापक प्रचार-प्रसार कर मतदाताओं तक पंहुच सुनिश्चित करें, उन्होंने बीएलओ के साथ तैनात आईटी वालिंटियर्स, बूथ अवेयरनेस ग्रुप और सक्रिय रुप भागीदारी सुनिश्चित की जाए।


समीक्षा बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी को अवगत कराया गया कि उत्तराखण्ड में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तीसरे दिन बुधवार दोपहर तक प्रदेश में 19 लाख मतदाताओं को गणना फार्म वितरित कर दिए गए हैं। प्रदेश में लगभग 24 प्रतिशत मतदाताओं को फार्म वितरण का कार्य पूरा कर दिया गया है। 


बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री प्रकाश चन्द्र दुम्का, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री किशन सिंह नेगी, सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री मस्तू दास सहित सभी जनपदों के जिलाधिकारी वर्चुअल रुप से जुड़े रहे।

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