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11 मार्च को उत्तराखंड के 13 जनपद जिलों में “महिला आयोग आपके द्वार” का होगा आयोजन



(चिराग कुमार) हरिद्वार। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उत्तराखंड पश्चिम प्रांत की देवभूमि शाखा हरिद्वार के सदस्यों द्वारा एक गोष्ठी समेत संस्कार मिलन का आयोजन किया गया। वहीं रविवार को शाखा की संरक्षिका, राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती कमला जोशी के निवास स्थान पर बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शाखा के सभी सदस्यों ने अपने-अपने विचार रखे। वहीं उत्तराखंड महिला आयोग की सदस्य श्रीमती कमला जोशी द्वारा एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यक्रम की सूचना देते हुए बताया कि  आगामी 11 मार्च को राष्ट्रीय महिला आयोग के अभियान “महिला आयोग आपके द्वार” के तहत राज्य महिला आयोग के द्वारा उत्तराखंड के समस्त 13 जनपदों में कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। इसी क्रम में आयोग के सदस्यों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचकर महिलाओं की समस्याएं सुनी जाएंगी। इस कार्यक्रम को जन- जन तक पहुंचाने के लिए प्रयास किए जा रहे है। इस जनसुनवाई कार्यक्रम में घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, संपत्ति विवाद, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न और मानव तस्करी जैसे मामलों को प्राथमिकता से सुना जाएगा। कार्यक्रम में आयोजित श्रीमती रश्मि चौहान, मीनाक्षी अग्रवाल, शिवानी गॉड, प्रेम चावला, रत्नेश गौतम, डॉ कुसुम उपाध्याय, ममता कंसल, कृष्ण शर्मा, विजेता शर्मा, प्रीतशिखा शर्मा, सुनीता जोशी, जनक सहगल, राजेश्वरी बहुगुणा,  नेहा सती, डॉ माधवी गोस्वामी, किरण अग्रवाल, काजल वर्मा, गीतांजलि खुराना, सुनीता धीमान, किशन शर्मा, मधु उपाध्याय, गीतांजलि बंगा ओर उमा ढींगरा आदि उपस्थित रहे।

 



उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026–27 का बजट केवल आंकड़ों का बड़ा पुलिंदा है, लेकिन इसमें प्रदेश की वास्तविक समस्याओं का कोई ठोस समाधान नजर नहीं आता। सरकार ने इसे प्रदेश का सबसे बड़ा बजट बताया है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि इसमें पहाड़, किसान, बेरोजगार युवा और आम जनता की पीड़ा कहीं दिखाई नहीं देती।



पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों के आतंक से किसान और ग्रामीण लगातार परेशान हैं, उनकी फसलें बर्बाद हो रही हैं, लेकिन सरकार ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई। 


स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति आज भी पहाड़ों में बदहाल है, अस्पतालों में डॉक्टर और संसाधनों की भारी कमी है, लेकिन इस बजट में स्वास्थ्य के क्षेत्र में कोई ठोस और कारगर योजना दिखाई नहीं देती।


उत्तराखंड की सबसे बड़ी समस्या पलायन है। गांव खाली होते जा रहे हैं, लेकिन पलायन रोकने के लिए सरकार के पास कोई ठोस रोडमैप नहीं है। 


बेरोजगार नौजवानों को भी इस बजट से उम्मीद थी कि रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, लेकिन युवाओं के लिए इसमें कुछ भी नया नजर नहीं आता।


महंगाई लगातार बढ़ रही है और आम आदमी की कमर टूट रही है, लेकिन सरकार के बजट में महंगाई कम करने का कोई प्रभावी उपाय नहीं दिखता। 


शिक्षा का क्षेत्र लगातार बाजारीकरण की ओर बढ़ रहा है और सरकार इस पर रोक लगाने के बजाय इसे मौन स्वीकृति देती नजर आ रही है।


सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि टिहरी बांध विस्थापितों और प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा को लेकर भी इस बजट में कोई चर्चा नहीं की गई।


 साथ ही प्रतापनगर क्षेत्र को केंद्रीय ओबीसी में शामिल करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी सरकार ने कोई पहल नहीं की।

कुल मिलाकर यह बजट जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने में पूरी तरह असफल साबित हुआ है। उत्तराखंड की जनता को इससे जो आशाएं थीं, वह इस बजट में पूरी होती दिखाई नहीं देतीं।

 

गैरसैंण:



 उत्तराखंड विधानसभा के भराड़ीसैंण स्थित भवन में चल रहे बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026–27 का बजट सदन में पेश किया। करीब 1,11,703 करोड़ रुपये के इस बजट को प्रदेश के समग्र और संतुलित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने बजट का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार ने महिलाओं, बच्चों और समाज के कमजोर वर्गों के कल्याण को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि बजट में ‘सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0’ के लिए 598 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, वहीं मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना, आंचल अमृत योजना और वात्सल्य योजना जैसी योजनाओं के लिए भी बजट में व्यवस्था की गई है।

रेखा आर्या ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए 1,327 करोड़ रुपये का प्रावधान सरकार की संवेदनशील सोच को दर्शाता है। इसके अलावा ग्रामीण विकास, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, तकनीकी विकास और युवाओं के स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण बजट प्रावधान किए गए हैं।


भराड़ीसैंण:

budget:2026, CM Dhami


 भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में  विधानसभा बजट सत्र में परेड की सलामी  राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ।

 भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में  विधानसभा में अभिभाषण प्रस्तुत करते हुए   राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि)।

भराड़ीसैंण (गैरसैंण)  विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-2027 का बजट प्रस्तुत करने के लिए प्रस्थान करते हुए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी।

*संतुलित वित्तीय प्रबंधन को दर्शाता उत्तराखंड का बजट 2026–27*

उत्तराखंड में वित्तीय अनुशासन और विकास के संतुलन को मजबूत करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2026–27 का बजट प्रस्तुत किया। लगभग ₹1,11,703.21 करोड़ के इस बजट में जहां विकास की गति को बढ़ाने पर जोर है, वहीं मजबूत राजकोषीय प्रबंधन की झलक भी स्पष्ट दिखाई देती है। वर्ष 2025-26 के सापेक्ष 10.41 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। 


राज्य सरकार ने बजट में वित्तीय जिम्मेदारी और पारदर्शिता बनाए रखते हुए FRBM अधिनियम के प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया है। बजट के अनुसार राज्य में राजस्व आधिक्य (Revenue Surplus) की स्थिति बनी हुई है, जो दर्शाता है कि सरकार की आय उसके राजस्व व्यय से अधिक है। यह स्थिति किसी भी राज्य की मजबूत वित्तीय सेहत का संकेत मानी जाती है। बजट में 2536.33 करोड़ का राजस्व सरप्लस दिखाया गया है। 


राजकोषीय अनुशासन के तहत राज्य का राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 3 प्रतिशत की सीमा के भीतर रखा गया है। इसी प्रकार लोक ऋण भी जीएसडीपी के 32.50 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के अंदर बनाए रखा गया है। यह दर्शाता है कि सरकार विकास कार्यों पर खर्च करते हुए भी ऋण प्रबंधन और वित्तीय संतुलन पर पूरा ध्यान दे रही है। राजस्व आधिक्य, सीमित राजकोषीय घाटा और नियंत्रित सार्वजनिक ऋण जैसे संकेतक बताते हैं कि राज्य सरकार ने वित्तीय प्रबंधन में सावधानी और दूरदर्शिता अपनाई है। इससे भविष्य में विकास परियोजनाओं को स्थिर वित्तीय आधार मिलने की संभावना और मजबूत होगी।


कुल मिलाकर यह बजट विकास और वित्तीय अनुशासन के संतुलन का उदाहरण प्रस्तुत करता है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

:ज्ञान मॉडल से समग्र विकास का रोडमैप, गरीब-युवा-किसान-महिलाओं के सशक्तिकरण पर फोकस*

*समाज के हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर उत्तराखंड को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य: सीएम*


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार का संकल्प GYAN मॉडल के माध्यम से राज्य के समग्र विकास को आगे बढ़ाना है। इस मॉडल में गरीब, युवा, अन्नदाता (किसान) और नारी सशक्तिकरण को विकास के चार प्रमुख स्तंभ के रूप में रखा गया है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उत्तराखंड को समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। इसी दृष्टि से बजट में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।


*गरीब कल्याण पर विशेष ध्यान*

गरीब वर्ग के जीवन स्तर को सुधारने के लिए कई योजनाओं में बजट बढ़ाया गया है। अन्नपूर्ति योजना के लिए ₹1300 करोड़, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए ₹298.35 करोड़ और प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लिए ₹56.12 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के आवास के लिए ₹25 करोड़, परिवहन निगम की बसों में निर्धारित श्रेणी के यात्रियों को निःशुल्क यात्रा सुविधा के लिए ₹42 करोड़ तथा रसोई गैस पर अनुदान के लिए ₹43.03 करोड़ रखे गए हैं।

साथ ही दिव्यांग, तीलू रौतेली और अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लिए ₹167.05 करोड़ तथा आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए ₹25 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

*युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास*

प्रदेश के युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए भी कई योजनाओं को मजबूती दी गई है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के लिए ₹60 करोड़, पलायन रोकथाम योजना के लिए ₹10 करोड़ और पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के लिए ₹62.29 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

इसके अलावा गैर सरकारी महाविद्यालयों को सहायता के लिए ₹155.38 करोड़, शिक्षा मित्रों के मानदेय के लिए ₹10 करोड़ तथा मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना के लिए ₹10 करोड़ निर्धारित किए गए हैं।

*किसानों की आय बढ़ाने पर जोर*

किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कई योजनाओं को बजट में शामिल किया गया है। ट्राउट प्रोत्साहन योजना के लिए ₹39.90 करोड़, मिशन एप्पल के लिए ₹42 करोड़, दुग्ध उत्पादकों के प्रोत्साहन के लिए ₹32 करोड़ तथा दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के लिए ₹42.50 करोड़ का प्रावधान किया गया है।


इसके साथ ही प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लिए ₹160.13 करोड़, मिलेट मिशन के लिए ₹12 करोड़ तथा किसान पेंशन योजना के लिए ₹12.06 करोड़ भी निर्धारित किए गए हैं।


*महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता*

महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार ने विशेष प्रावधान किए हैं। नंदा गौरा योजना के लिए ₹220 करोड़, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए ₹47.78 करोड़ और मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना के लिए ₹30 करोड़ का प्रावधान किया गया है।


इसके अलावा मुख्यमंत्री बाल पोषण योजना, महिला पोषण योजना, आंचल अमृत योजना और स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण जैसी योजनाओं के लिए भी बजट रखा गया है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान मॉडल के माध्यम से गरीबों के उत्थान, युवाओं के सशक्तिकरण, किसानों की समृद्धि और महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी तथा उत्तराखंड विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

 *आठ मूल मंत्रों से सरकार ने साधा संतुलन*

*राज्य सरकार के बजट में संतुलन के एक-एक अक्षर के गहरे अर्थ*

*सीएम ने विकास व प्रगति की सोच को अनूठे अंदाज में सामने रखा*

समावेशी विकास से लेकर न्यायपूर्ण व्यवस्था तक की सोच परिलक्षित

वित्त मंत्री के रूप में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को जो बजट पेश किया, उसमें आठ मूल मंत्रों को केंद्र में रखकर संतुलन साधा गया है। ये मूल मंत्र अंग्रेजी में संतुलन शब्द को सामने रखकर बने हैं, जिसके एक-एक अक्षर में गहरे अर्थ समाहित हैं। सरकार ने इसी हिसाब से विभिन्न क्षेत्रों के लिए बजट का प्रावधान किया है। अनूठे अंदाज में सरकार ने राज्य के विकास और उसकी प्रगति से जुड़ी मजबूत परिकल्पना को भी सामने रखा है।

दरअसल, राज्य सरकार ने बजट में हर वर्ग का ख्याल रखते हुए संतुलित बजट पेश किया है। विकास और प्रगति की सोच को जिस अंदाज में सामने रखा गया है, वह अनूठी है। सरकार ने संतुलन शब्द को अंग्रेजी के हिसाब से सामने रखते हुए एक-एक अक्षर पर विकास और प्रगति की तस्वीर खींची है। मसलन, संतुलन के पहले अक्षर एस से समावेशी विकास, ए से आत्मनिर्भरता, एन से नई सोच और टी से तीव्र विकास की परिकल्पना को न सिर्फ पेश किया है, बल्कि उसके अंतर्गत विभिन्न योजनाओं और मदों में अच्छे खासे बजट का प्रावधान भी किया है। इसी तरह, यू अक्षर की जब बात की गई है, तो उसमें उत्तराखंड के उन्नत गांव एवं शहरों को ध्यान में रखा गया है। एल से लोकसहभागिता, ए से आर्थिक विकास और एन से न्यायपूर्ण व्यवस्था की परिकल्पना प्रकट की गई है और विभिन्न मदों में बजट का प्रावधान किया गया है।

*संतुलन का अनूठा मॉडल*


*संतुलन (SANTULAN) समावेशी विकास (s)*


* सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं में समग्र रूप से लगभग रु  1327.73 करोड़ 

* अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना हेतु रु 600.00 करोड़ 

* सक्षम आंगनबाडी एण्ड पोषण 2.0 योजना हेतु समग्र रूप से लगभग रु  598.33 करोड़ 

* ईडब्ल्यूएस आवासों हेतु अनुदान के अन्तर्गत रु 25.00 करोड़ 

* राज्य खाद्यान्न योजना के अन्तर्गत रू 25.00 करोड़ 

* प्रधानमंत्री पोषण मिशन हेतु समग्र रूप से लगभग रु 149.45 करोड़ 

* मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना हेतु रु 30.00 करोड़ 

* मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना हेतु रु 15.00 करोड़ 

* राज्य में प्रसूता के लिए ईजा-बोई शगुन योजना हेतु समग्र रूप से लगभग रु 14.13 करोड़ 

* मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना हेतु लगभग रु 13.44 करोड़ 

* मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना हेतु रु 15.00 करोड़ 

* मुख्यमंत्री बाल एवं महिला बहुमुखी विकास निधि रु 8.00 करोड़.


*संतुलन (SANTULAN)*

*आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड (A)*


* पशुपालन विभाग के अन्तर्गत स्वरोजगार परक व लाभार्थीपरक योजना हेतु लगभग रु 42.02 करोड़ 

* समग्र रूप से मिशन एप्पल के लिए रु 42.00 करोड़ 

* ट्राउट प्रोत्साहन योजना हेतु लगभग रु 39.90 करोड़ 

* उच्च मूल्य वाले फलों (कीवी, ड्रेगन फ्रूट आदि) के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लगभग रु 30.70 करोड़ 

* राज्य में चाय विकास योजना के लिए लगभग रु 25.93 करोड़ 

* सगन्ध पौधा केन्द्र को अनुदान एवं सगन्ध पौधों के कलस्टर विकास के लिए लगभग रु 24.75 करोड़ 

* फसलों की सुरक्षा के लिए घेरबाड़ हेतु रु 20.00 करोड़ 

* प्रदेश के सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यमों को सहायता योजना के लिए रु 75.00 करोड़ 

* मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के लिए रु 60.00 करोड़ 

* प्रमोशन ऑफ इंवेस्टमेंट, स्टार्टअप और इंटरप्रीनियोरशिप के लिए रु 30.00 करोड़ 

* स्टार्ट अप वेंचर फंड हेतु रु 25.00 करोड़ 

* मेगा इंडस्ट्रियल एवं मेगा टेक्सटाईल नीति के तहत अनुदान के लिए रु 25.00 करोड़ 

* इको टूरिज्म गतिविधियों के लिए समग्र रूप से रु 18.50 करोड़ 

* हरिद्वार गंगा कॉरिडोर परियोजना रु 10.00 करोड़ 

* ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर परियोजना रु 10.00 करोड़ 

* सरयू एवं अन्य रिवर फ्रंट योजनाओं हेतु रु 10.00 करोड़


*संतुलन (SANTULAN) नई सोच (N)*


* संस्कृत पाठशालाओं को अनुदान हेतु रू 28.00 करोड़ 

* खनन सर्विलांस योजना के अन्तर्गत रू 24.50 करोड़ 

* विद्यालयी शिक्षा विभाग के अन्तर्गत छात्रवृति हेतु रु 15.00 करोड़ 

* उच्च शिक्षा विभाग के अन्तर्गत छात्रवृति हेतु रु 15.00 करोड़ 

* खेल विभाग के अंतर्गत छात्रवृति हेतु लगभग रु 13.50 करोड़ 

* उद्यमिता, कौशल एवं नवाचार योजना के अन्तर्गत लगभग रु 7.11 करोड़ 

* राजकीय महाविद्यालयों में ई-ग्रंथालय की स्थापना हेतु रु 7.00 करोड़ 

* "लैब ऑन व्हील्स" योजना के लिए रु 4.00 करोड़ 

* राज्य डॉटा सेंटर सुदृढ़ीकरण के लिए समग्र रूप से रू 65.00 करोड़ 

* सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना के अन्तर्गत लगभग रु 47.50 करोड़ 

* पहाड़ी शहर में नगर निकायों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने हेतु रु 30.00 करोड़ 

* साइबर सिक्योरटी के क्रियान्वयन हेतु रु 15.00 करोड़ 

* इमरजिंग टेक्नोलॉजी एवं ए०आई० (सी०ओ०ई०) के क्रियान्वयन हेतु लगभग रु 11.50 करोड़ 

* शहरी क्षेत्रों में पैदल मार्ग अवसंरचना के अन्तर्गत रु 10.00 करोड़ 

* विधि विज्ञान प्रयोगशाला के अन्तर्गत रू 6.71 करोड़ 

* पैक्स के कम्प्यूटरीकरण हेतु लगभग रु 5.67 करोड़ 

* जनपदों में केंद्रीकृत रिकॉर्ड रूम के अन्तर्गत रु 10.00 करोड़ 

* यूनीफार्म सिविल कोड के अन्तर्गत रुपये रु 5.00 करोड़


*संतुलन (SANTULAN) तीव्र विकास (T)*


* पीएमजीएसवाई योजना के अन्तर्गत पूंजीगत मद में रु 1050.00 करोड 

* गड्ढा मुक्त सड़क अभियान हेतु रु 400.00 करोड़ 

* नागरिक उड्डयन विभाग के अन्तर्गत समग्र रूप से पूंजीगत मद में लगभग रु 52.50 करोड़ 

* नंदा देवी राजजात यात्रा के लिए रू 25.00 करोड़


*संतुलन (SANTULAN) उन्नत शहर एवं गांव का विकास (U)*


* विकसित भारत - जी राम जी हेतु समग्र रूप से लगभग रु 705.25 करोड़ 

* ग्रामीण विकास विभाग के अन्तर्गत समग्र रूप से पूंजीगत मद में रू 1642.20 करोड़ 

* वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम हेतु रु 40.00 करोड़ 

* शहरी निकायों हेतु समग्र रूप से रुपये रू 1814.00 करोड़ एवं पंचायती राज संस्थाओं हेतु रू  1491.00 करोड़ 

* आवास विकास विभाग के अन्तर्गत अवस्थापना सुविधाओं के विकास आदि हेतु रु 130.00 करोड़ 

* नगरीय अवस्थापना के सुदृढ़ीकरण हेतु रु 60.00 करोड़


*संतुलन (SANTULAN)*

*लोक सहभागिता (L)*


* राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी का सुदृढ़ीकरण/आईटीडीए को अनुदान-रू 25.00 करोड़ 

* राज्य डाटा सेंटर सुदृढीकरण - रू 40.00 करोड़ 

* एआई मिशन के क्रियान्वयन हेतु एसपीवी का गठन- रू 25.00 करोड़ 

* विज्ञान केंद्र चंपावत- रू 10.00 करोड़


*संतुलन (SANTULAN)*

*आर्थिक शक्ति (A)*


* रिस्पना बिंदाल की एलिवेटेड यूटिलिटी शिफ्टिंग- रु 350.00 करोड़ 

* टिहरी रिंग रोड परियोजना- रु 10.00 करोड़ 

* प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना- रु 1050.00 करोड़ 

* स्टार्ट अप वेंचर फंड हेतु- रू 25.00 करोड़ 

* प्रदेश के सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यमों को सहायता योजना के लिए- रु 75.00 करोड़ 

* मेगा इंडस्ट्रियल एवं मेगा टेक्सटाईल नीति के तहत अनुदान के लिए- रु 25.00 करोड़ 

* इको टूरिज्म गतिविधियों के लिए समग्र रूप से- रु 18.50 करोड़ 

* प्रमोशन ऑफ इंवेस्टमेंट, स्टार्टअप और इंटरप्रीनियोरशिप के लिए- रु 30.00 करोड़ 

* मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के लिए- रु 60.00 करोड़


*संतुलन (SANTULAN)*

*न्यायपूर्ण व्यवस्था (N)*


* पुलिस आवास हेतु - रु 100.00 करोड़ 

* इण्डिया रिजर्व वाहिनी की स्थापना- रु 10.00 करोड़ 

* स्टेट डिजास्टर रिस्पोन्स फोर्स- रु 10.00 करोड़ 

* आन्तरिक सुरक्षा हेतु केन्द्रीय पुलिस बल आदि को भुगतान- रु 2.50 करोड़ 

* जेलों का निर्माण / भूमि क्रय- रू 25.00 करोड़ 

* कारागार हेतु आवासीय भवनों का निर्माण - रु 10.00 करोड़ 

* उत्तराखण्ड न्यायिक एवं विधिक अकादमी- रू 6.96 करोड़ 

* रेप एंड पोक्सो एक्ट के लंबित प्रकरणों हेतु फास्ट ट्रैक विशेष कोर्ट - रू 3.42 करोड़.

: भारत सरकार द्वारा प्रवासी भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जो पश्चिम एशिया के विभिन्न देशों में निवास कर रहे हैं और भारत लौटना चाहते हैं। इस संबंध में सचिव उत्तराखण्ड शासन, राजेन्द्र कुमार द्वारा समस्त जिलाधिकारियों को जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में ईरान एवं इजराइल के मध्य संघर्ष के दृष्टिगत पश्चिम एशिया के देशों में उत्पन्न वर्तमान परिस्थितियों, विशेषकर ईरान एवं इजरायल के मध्य चल रहे संघर्ष को देखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के सभी प्रवासी नागरिकों का विवरण एकत्र करने की प्रक्रिया प्रारम्भ की गई है, जो वर्तमान में पश्चिम एशिया के देशों जैसे संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, जॉर्डन, बहरीन, ईरान, इजरायल, ओमान, लेबनान, इराक, कुवैत तथा कतर आदि में रह रहे हैं और भारत वापस आना चाहते हैं।


सचिव राजेन्द्र कुमार द्वारा राज्य के सभी जिलाधिकारियों तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों/पुलिस अधीक्षकों से अपेक्षा की है गई कि ऐसे प्रवासी नागरिकों की जानकारी शीघ्र उपलब्ध कराई जाए, ताकि भारत सरकार को समय पर सूचना प्रेषित कर उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सके। इसके लिए जिला स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए नागरिकों से जानकारी प्राप्त की जाए साथ ही इच्छुक प्रवासियों का विवरण भी निर्धारित प्रारूप में प्रेषित किये जाने की अपेक्षा सभी जिलाधिकारियों से की गई है।

*मातृशक्ति की बेहतरी को संजीदा दिखी सरकार*


*जेंडर बजट का आकार बढ़ाने से लेकर कई योजनाओं में बजट का प्रावधान*

*महिला दिवस के एक दिन बाद पेश बजट में महिलाओं का खास ख्याल*

*पोषण से लेकर सुरक्षा तक सुनिश्चित करने के लिए गंभीर कोशिश*


अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के एक दिन बाद और बजट सत्र के पहले ही दिन राज्य सरकार ने मातृ शक्ति को भरोसा दिला दिया की उनकी बेहतरी के लिए वह संजीदा है। महिला समानता के लिहाज से महत्वपूर्ण जेंडर बजट का आकार बढ़ाने की बात हो या फिर विभिन्न ऐसी योजनाएं, जो महिलाओं से सीधे जुड़ी हैं, उनके लिए बजट का प्रावधान किया गया है।

राज्य सरकार ने पिछले वर्ष सोलह हजार नौ सौ इकसठ करोड़ बत्तीस लाख रूपये का जेंडर बजट प्र्रस्तुत किया था। मुख्यमत्री पुष्कर सिंह धामी ने बजट पेश करते हुए बताया है कि इस बार जेंडर बजटिंग में उन्नीस हजार छह सौ बयानवे करोड़ दो लाख के बजट का प्रावधान किया जा रहा है। यानी यह साफ है कि महिलाओं के कल्याण से किए जा रहे प्रयास इस बजट के बाद और तेजी पकडे़ंगे।


राज्य सरकार ने प्रसूता को सीधे एड्रेस करने वाली ईजा-बोई शगुन योजना हो या बेटियों को सुरक्षा देने वाला निर्भया फंड, सभी के लिए बजट प्रावधान कर यह भरोसा दिलाया है कि नारी शक्ति का हित उसकी प्राथमिकता में है। मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना, वात्सल्य योजना, मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना, निराक्षित विधवाओं की पुत्रियों के विवाह हेतु अनुदान से जुड़ी जैसी योजनाओं की एक लंबी फेहरिस्त है, जिसमें बजट का प्रावधान कर सरकार ने महिलाओं की बेहतरी के लिए अपने संजीदा प्रयासों की झलक पेश की है।


*योजनाएं और उसमें बजट प्रावधान*


निर्भया फंड-112 . 02 करोड़

मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना-30 करोड़

मुख्यमंत्री बाल पोषण योजना-25 करोड़

वात्सल्य योजना-15 करोड़

मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना-13 .44 करोड़

ईजा-बोई शगुन योजना-14 .13 करोड़

निराक्षित विधवाओं की पुत्रियों के विवाह हेतु अनुदान-पांच करोड़

मुख्यमंत्री बाल एवं महिला बहुमुखी विकास निधि-आठ करोड़

आपदा सखी-दो करोड़

*मां-बच्चे के पोषण के प्रति भी गंभीरता*

-सक्षम आंगनबाड़ी एंड पोषण 2 .0 योजना के अंतर्गत राज्य सरकार ने 598 . 33 करोड़ का बजट प्रावधान किया है। इस योजना के तहत छह माह से लेकर छह वर्ष तक के लगभग सात लाख तैंतीस हजार लाभार्थियों को अनुपूरक पोषाहार आंगनबाड़ी केंद्रों से दिया जा रहा है। बच्चे के साथ ही मां के पोषण का ख्याल रखते हुए चलाई जा रही प्रधानमंत्री पोषण मिशन हेतु समग्र रूप से लगभग 149 . 45 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।

 ₹1.11 लाख करोड़ का संतुलित बजट, विकसित उत्तराखंड की दिशा में मजबूत कदम: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी*

*गरीब, युवा, किसान और महिलाओं पर फोकस, विकास और विरासत के संतुलन का रोडमैप*


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को उत्तराखंड के भविष्य का रोडमैप बताते हुए कहा कि यह केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि राज्य के समग्र विकास की दिशा तय करने वाला बजट है। उन्होंने प्रेस वार्ता में कहा कि लगभग 1.11 लाख करोड़ रुपये का यह बजट विकास, विरासत, संस्कृति और आधुनिकता के संतुलन को दर्शाता है और “विकसित भारत के लिए विकसित उत्तराखंड” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य गठन के समय उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 14,500 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 3.81 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यानी राज्य की आर्थिकी में 26 गुना से अधिक वृद्धि हुई है। इसी प्रकार प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2000-01 में 15,285 रुपये थी, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2,73,921 रुपये होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में राज्य की वास्तविक विकास दर 7.23 प्रतिशत अनुमानित है, जो राष्ट्रीय औसत के आसपास है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने FRBM अधिनियम के सभी मानकों का पालन करते हुए बेहतर वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है। सरकार ने राजस्व अधिशेष बनाए रखा है और राजकोषीय घाटे को जीएसडीपी के 3 प्रतिशत के भीतर रखा है। उन्होंने कहा कि यह राज्य के कुशल वित्तीय प्रबंधन को दर्शाता है।


बजट में कुल 1,11,703 करोड़ रुपये का व्यय प्रस्तावित है, जिसमें 64,989 करोड़ रुपये राजस्व व्यय और 18,153 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय शामिल हैं। वहीं कुल प्राप्तियां 1,10,143 करोड़ रुपये अनुमानित हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार से मिलने वाले करों में राज्य के हिस्से के रूप में लगभग 17,415 करोड़ रुपये तथा विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के तहत लगभग 18,491 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त होगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट गरीब, किसान, युवा और मातृशक्ति को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लिए 1,327 करोड़ रुपये, अन्नपूर्ति योजना के लिए 1,300 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लिए 298 करोड़ रुपये तथा शहरी आवास योजना के लिए 56 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।


युवाओं के लिए शिक्षा और खेल के क्षेत्र में 11,871 करोड़ रुपये तथा कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए 586 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कृषि और बागवानी क्षेत्र में 1,113 करोड़ रुपये, जबकि पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र के लिए 815 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए इस वर्ष 19,692 करोड़ रुपये का जेंडर बजट रखा गया है। इसके अंतर्गत सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0, ईजा-बोई शगुन योजना, मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट और नन्दा गौरा योजना जैसी योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।


उन्होंने बताया कि राज्य में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए लोक निर्माण विभाग के लिए 2,501 करोड़ रुपये, ऊर्जा क्षेत्र के लिए 1,609 करोड़ रुपये तथा लघु सिंचाई के लिए 1,642 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में कई नई योजनाओं की शुरुआत भी की जा रही है। इनमें कुंभ मेला तैयारियों के लिए लगभग 1,027 करोड़ रुपये, साइबर सुरक्षा के लिए 15 करोड़ रुपये, इको-टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 18.5 करोड़ रुपये, स्पिरिचुअल इकोनॉमिक जोन के विकास के लिए 10 करोड़ रुपये और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व उभरती तकनीकों के लिए 13 करोड़ रुपये शामिल हैं।


उन्होंने कहा कि सरकार नवाचार को भी बढ़ावा दे रही है। इसके तहत कीवी और ड्रैगन फ्रूट उत्पादन, ट्राउट मछली पालन, सेब नर्सरी विकास, मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना और महक क्रांति जैसी योजनाएं शुरू की जा रही हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बजट का मूल मंत्र SANTULAN है, जिसका अर्थ है – समावेशी, आत्मनिर्भर, नई सोच, तीव्र विकास, उन्नत गांव और शहर, लोक सहभागिता, आर्थिक शक्ति और न्यायपूर्ण व्यवस्था। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास और पर्यावरण के संतुलन के साथ उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना है।


उन्होंने कहा कि यह बजट वास्तव में “विकल्प रहित संकल्प से विकसित उत्तराखंड तक की यात्रा का दस्तावेज” है।

 *तीन 'ग्रोथ डाइवर्स' करेंगे तीन बड़े लक्ष्यों की पूर्ति*


*आत्मनिर्भरता की यात्रा में सरकार को कृषि, उद्योग व पर्यटन से सर्वाधिक आस*


आत्मनिर्भर उत्तराखंड की जिस यात्रा पर राज्य सरकार आगे बढ़ रही है, उसमें तीन क्षेत्रों से उसे सर्वाधिक आस है। यह क्षेत्र हैं-कृषि, उद्योग और पर्यटन। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन तीन क्षेत्रों को आत्मनिर्भरता की यात्रा के  'डाइवर्स' की संज्ञा दे दी है। मुख्यमंत्री ने बजट में इसी अनुरूप इन क्षेत्रों का विशेष ध्यान रखा है। सरकार की मंशा ये ही है कि इन तीनों क्षेत्रों को एक साथ आगे बढ़ाते हुए ऐसा परिवेश बनाए, जो एक साथ तीन उद्देश्यों की पूर्ति कर सके। ये उद्देश्य हैं-उत्पादकता बढे़, निवेश आकर्षित हो और सम्मानजनक आजीविका के अवसर मिले।


*तीन क्षेत्रों को बजट की डोज*


01-कृषि व संबंधित क्षेत्र

उद्यान बीमा योजना-40 करोड़

मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास योजना-20 करोड़

कीवि, ड्रेटेन फ्रूट प्रोत्साहन-30 .70 करोड़

मिशन एप्पल-42 करोड़

फसलों की सुरक्षा, घेर बाड़-20 करोड़

चाय विकास योजना-25 .93 करोड़

संगंध पौधा विकास व अन्य-24 .75 लाख

महक क्रांति हेतु-10 करोड़


02-उद्योग

सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यमों को सहायता योजना-75 करोड़

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना-60 करोड़

मेगा इंडस्ट्रियल एवं मेगा टेक्सटाइल नीति अनुदान-25 करोड़

प्रमोशन ऑफ इंवेस्टमेंट, स्टार्टअप, एंटरप्रीनियोरशिप-30 करोड़

स्टार्ट अप वेंचर फंड-25 करोड़


03-पर्यटन

पर्यटन विभाग के अंतर्गत राजस्व मद में बजट-210 .59 करोड़

पर्यटन विभाग के अंतर्गत पूंजीगत मद में बजट-296 .45 करोड़

वैश्विक पर्यटक स्थलों का विकास-दस करोड़

इको टूरिज्म गतिविधियों के लिए-18 .50 करोड़

योग दिवस आयोजन-दो करोड़

संस्थान में मंगलवार (आज) से होंगे विभिन्न कार्यक्रम 

- आम लोगों को किडनी रोगों के प्रति जागरूक करना है उद्देश्य 

9 मार्च 2026



विश्व किडनी डे पर इस बार एम्स जन जागरूकता की लंबी श्रृंखला शुरू करने जा रहा है। श्रृंखला के पहले दिन कल मंगलवार को संस्थान में पब्लिक अवरनेस प्रोग्राम आयोजित होगा। कार्यक्रम में किडनी संबन्धित रोगों और उनसे बचाव पर विस्तृत जानकारी दी जायेगी। 


विश्व में किडनी रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार भारत में आबादी के 17 प्रतिशत से अधिक लोगों में क्रोनिक किडनी डिसीज के लक्षण दिखायी देते हैं। इनमें से 33 प्रतिशत मामले क्रोनिक किडनी डिसीज़ के और 30-40 प्रतिशत मामले डायबिटिक किडनी डिसीज़ के हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए आम लोगों को किडनी रोगों की जानकारी देने और उनमें किडनी रोगों के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से एम्स ऋषिकेश में कल मंगलवार से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होने जा रहे हैं। इस बारे में जनरल मेडिसिन विभाग के हेड प्रो. रविकांत ने बताया कि मंगलवार को आयोजित किए जा रहे किडनी रोग जनजागरूकता कार्यक्रम में किडनी रोग के लक्षण, बचाव और इलाज के बारे में लाभकारी जानकारी दी जायेगी। साथ ही क्रोनिक किडनी डिसीज के बारे में भी बताया जायेगा। प्रो. रविकांत ने बताया इस कार्यक्रम में किडनी ट्रांसप्लांट करवा चुके रोगी भी अपने अनुभव साझा करेंगे। अगले दिन बुद्धवार को संस्थान में किडनी रोग विषय पर ही सीएमई आयोजित की गयी है। जबकि बृहस्पतिवार को अस्पताल में नेफ्रो ओपीडी एरिया में जन जागरूकता का विशेष कार्यक्रम होगा। 


इंसेट- 

डायबिटिक किडनी डिसीज को समझना जरूरी

ऋषिकेश। डायबिटिक किडनी डिसीज़ किडनी फेलियर के मुख्य कारणों में से एक है। यह एक गंभीर कॉम्प्लिकेशन है जिसमें लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर किडनी के नाजुक फिल्टरिंग सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है और इस कारण किडनी पूरी तरह फेल हो सकती है। एम्स में नेफ्रो व जनरल मेडिसिन विभाग के हेड प्रो. रविकांत ने बताया कि शुरूआती चरण में इस बीमारी के कोई विशेष लक्षण नहीं होते हैं लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ने लगती है लक्षण पहिचान मे आने लगते हैं। उन्होंने बताया कि इसके प्रमुख लक्षणों में पैरों, टखनों या हाथों में सूजन, झागदार पेशाब आना या पेशाब कम आना, सांस लेने में दिक्कत और अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर शामिल हैं। प्रो. रविकांत ने बताया कि अनियंत्रित ब्लड शुगर और हाई ब्लड प्रैशर सहित धूम्रपान, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और किडनी की बीमारी की फैमिली हिस्ट्री इसके कारणों में शामिल हैं। अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो यह परमानेंट डैमेज (एंड-स्टेज किडनी डिसीज) का कारण बन सकता है जिसके लिए डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। बचाव के बारे में उन्होंने बताया कि ब्लड शुगर मैनेज करके रखना, ब्लड प्रेशर मॉनिटर करना और नियमित स्तर पर ब्लड शुगर की जांच करवाते रहना चाहिए। बताया कि आइबुप्रोफेन या नेप्रोक्सन जैसी पेन रिलीवर का ज्यादा इस्तेमाल कतई नहीं करना चाहिए।

जन औषधि दवाओं की उत्कृष्ट बिक्री पर एम्स को मिला पुरस्कार 

- केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ने किया कार्यकारी निदेशक को सम्मानित


प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत जन औषधि केन्द्र के माध्यम से दवाओं की बिक्री पर उत्कृष्ट योगदान हेतु एम्स ऋषिकेश को पुरस्कार प्रदान किया गया। यह पुरस्कार केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा द्वारा बीते रोज दिल्ली में आयोजित एक समारोह के दौरान दिया गया। 


नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित 8वें जन औषधि दिवस सम्मान समारोह कार्यक्रम के दौरान, विभिन्न राज्यों के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जनऔषधि केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों को इस योजना के माध्यम से किफायती स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने हेतु सम्मानित किया गया। केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने विजेताओं को यह पुरस्कार देकर उन्हें सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने जनऔषधि योजना के लाभार्थियों से बातचीत की। इस दौरान लाभार्थियों ने उन्हें बताया कि कैसे सस्ती जेनेरिक दवाओं ने स्वास्थ्य देखभाल के वित्तीय बोझ को कम करने में मदद की है। 


एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने इस दौरान जेनेरिक दवाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने के बारे में संस्थान द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि दवाएं सस्ती होने के कारण कई लोगों को भ्रम है कि यह दवाएं ज्यादा प्रभावी नहीं होती हैं। जबकि ऐसा नहीं है और यह केवल भ्रांति है। देशभर में 18 हजार से अधिक जन औषधि केन्द्रों से लोगों को इन दवाओं से बहुत फायदा हुआ है। प्रो. मीनू ने इन दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता के लिए डिजिटल नेटवर्क विकसित करने की आवश्यकता बतायी। उन्होंने बताया कि किस तरह एम्स ऋषिकेश ड्रोन मेडिकल सेवा के माध्यम से उत्तराखण्ड के सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक इन दवाओं को पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि यह दवाएं न केवल सस्ती और गुणवत्ता परक हैं अपितु आम परिवारों के लिए भी सुलभ और किफायती हैं। 


कार्यक्रम में बताया गया कि प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना की पहुंच बढ़ाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और योजना का उद्देश्य जनऔषधि केंद्रों के राष्ट्रव्यापी नेटवर्क के माध्यम से किफायती कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराना है। इस अवसर पर एम्स ऋषिकेश के जन औषधि केन्द्र के प्रभारी फार्मोकाॅलिजस्ट प्रो. पुनीत धमीजा भी मौजूद रहे।


फोटो सलंग्न-

 

मेष

अ, आ, चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो

स्थायी संपत्ति के कार्य बड़ा लाभ दे सकते हैं। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। आय में वृद्धि तथा उन्नति मनोनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। पार्टनरों का सहयोग समय पर प्राप्त होगा। यात्रा की योजना बनेगी। घर-बाहर कुछ तनाव रहेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

Rashifal today 09 march 2026


वृषभ

ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो

पार्टी व पिकनिक का कार्यक्रम बनेगा। स्वादिष्ट व्यंजनों का लाभ मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल रहेंगे। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। काम में मन लगेगा। शेयर मार्केट में लाभ रहेगा। नौकरी में सुविधाएं बढ़ सकती हैं। व्यस्तता के चलते स्वास्थ्‍य का ध्यान रखें। धन प्राप्ति सुगमता से होगी।


मिथुन

का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह

दु:खद सूचना मिल सकती है, धैर्य रखें। फालतू खर्च होगा। कुसंगति से बचें। बेकार की बातों पर ध्यान न दें। अपने काम पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। वाणी पर नियंत्रण रखें। चिंता तथा तनाव रहेंगे। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। लाभ होगा।


कर्क

ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो

भूले-बिसरे साथी तथा आगंतुकों के स्वागत तथा सम्मान पर व्यय होगा। आत्मसम्मान बना रहेगा। उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त होगी। बड़ा काम करने का मन बनेगा। परिवार के सदस्यों की उन्नति के समाचार मिलेंगे। प्रसन्नता रहेगी। पारिवारिक सहयोग बना रहेगा। किसी व्यक्ति की बातों में न आएं, लाभ होगा।


सिंह

मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे

घर-बाहर प्रसन्नतादायक वातावरण रहेगा। नौकरी में चैन महसूस होगा। व्यापार से संतुष्टि रहेगी। संतान की चिंता रहेगी। प्रतिद्वंद्वी तथा शत्रु हानि पहुंचा सकते हैं। मित्रों का सहयोग व मार्गदर्शन प्राप्त होगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। यात्रा की योजना बनेगी। प्रसन्नता रहेगी।


कन्या

ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

यात्रा मनोनुकूल मनोरंजक तथा लाभप्रद रहेगी। भेंट व उपहार की प्राप्ति संभव है। व्यापार-व्यवसाय से मनोनुकूल लाभ होगा। घर-बाहर सफलता प्राप्त होगी। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। काम में लगन तथा उत्साह बने रहेंगे। मित्रों के साथ प्रसन्नतापूर्वक समय बीतेगा।



तुला

रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते

स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। बनते कामों में विघ्न आएंगे। चिंता तथा तनाव रहेंगे। जीवनसाथी से सामंजस्य बैठाएं। फालतू खर्च होगा। कुसंगति से बचें। बेवजह लोगों से मनमुटाव हो सकता है। बेकार की बातों पर ध्यान न दें। आय में निश्चितता रहेगी। मित्रों का सहयोग मिलेगा। जल्दबाजी न करें।


वृश्चिक

तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। यात्रा मनोरंजक रहेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। नौकरी में सुकून रहेगा। जल्दबाजी में कोई आवश्यक वस्तु गुम हो सकती है। कानूनी अड़चन आ सकती है। विवाद न करें। व्यवसाय ठीक चलेगा। घर-बाहर प्रसन्नता बनी रहेगी।


धनु

ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे

नई योजना लागू करने का श्रेष्ठ समय है। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। सामाजिक कार्य सफल रहेंगे। मान-सम्मान मिलेगा। कार्यसिद्धि होगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। घर-बाहर प्रसन्नता का माहौल रहेगा। पारिवारिक सहयोग प्राप्त होगा। बड़ा कार्य करने का मन बनेगा। सफलता के साधन जुटेंगे। जोखिम न उठाएं।


मकर

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

किसी जानकार प्रबुद्ध व्यक्ति का सहयोग प्राप्त होने के योग हैं। तंत्र-मंत्र में रुचि रहेगी। किसी राजनयिक का सहयोग मिल सकता है। लाभ के दरवाजे खुलेंगे। चोट व दुर्घटना से बचें। व्यस्तता रहेगी। थकान व कमजोरी महसूस होगी। विवाद से बचें। धन प्राप्ति होगी। प्रमाद न करें।


कुंभ

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा

स्वास्थ्य का ध्यान रखें। चोट व दुर्घटना से बचें। आय में कमी रह सकती है। घर-बाहर असहयोग व अशांति का वातावरण रहेगा। अपनी बात लोगों को समझा नहीं पाएंगे। ऐश्वर्य के साधनों पर बड़ा खर्च होगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। हितैषी सहयोग करेंगे। धनार्जन संभव है।


मीन

दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची

प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। किसी वरिष्ठ व्यक्ति के सहयोग से कार्य की बाधा दूर होकर लाभ की स्थिति बनेगी। परिवार के लोग अनुकूल व्यवहार करेंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। नए लोगों से संपर्क होगा। आय में वृद्धि तथा आरोग्य रहेगा। चिंता में कमी होगी। जल्दबाजी न करें।



देहरादून, दिनांक 08 मार्च 2026,


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 अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं के गौरव, सम्मान और सशक्तिकरण को समर्पित ‘‘साड़ी गौरव मैराथन’’ का आयोजन जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय, देहरादून द्वारा महिला कल्याण विभाग, उत्तराखण्ड के तत्वावधान में किया गया। पारम्परिक भारतीय परिधान साड़ी में आयोजित इस विशेष मैराथन में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग करते हुए उत्साह और ऊर्जा का परिचय दिया।

मैराथन का शुभारम्भ नारी निकेतन चौराहा, दून विश्वविद्यालय रोड से किया गया, जो आगे दून विश्वविद्यालय मार्ग पर 02 किलोमीटर तथा 03 किलोमीटर की दूरी पर सम्पन्न हुई। इस अवसर पर विभिन्न आयु वर्ग की महिलाओं ने पारम्परिक परिधान में दौड़ लगाकर समाज में महिलाओं की शक्ति, आत्मविश्वास और सक्रियता का संदेश दिया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती गीता खन्ना, अध्यक्ष, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग रहीं। उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि महिलाएं अपनी संस्कृति और परम्पराओं को संजोते हुए हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रही हैं।

मैराथन में जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय, राजकीय नारी निकेतन तथा राजकीय बाल देखरेख संस्थाओं में कार्यरत अधिकारी एवं कार्मिकों के साथ-साथ निदेशालय महिला कल्याण के अधिकारियों/कार्मिकों तथा आम जनमानस की महिलाओं ने भी स्वेच्छा से प्रतिभाग किया। कुल 70 से अधिक महिलाओं ने इस मैराथन में भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया।

प्रतियोगिता के अंतर्गत 02 किलोमीटर दौड़ में प्रथम स्थान नविता, द्वितीय स्थान रेखा चौहान तथा तृतीय स्थान  मीनू तड़ियाल ने प्राप्त किया। वहीं 03 किलोमीटर दौड़ में प्रथम स्थान गीता बहुगुणा, द्वितीय स्थान रियांका तथा तृतीय स्थान ऋतु ने प्राप्त किया। सभी विजेताओं को मुख्य अतिथि द्वारा मेडल पहनाकर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में प्रतिभाग करने वाली महिला मानेश्वरी को भी उनके उत्साह एवं प्रेरणादायी सहभागिता के लिए मेडल पहनाकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर आयोजकों ने बताया कि मैराथन का मुख्य उद्देश्य यह संदेश देना है कि महिलाएं अपनी परम्पराओं और संस्कृति को संजोते हुए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं। साथ ही व्यस्त जीवनशैली के बीच महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष रूप से सजग रहने की आवश्यकता है, ताकि वे शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहकर परिवार, समाज और कार्यस्थल की जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर सकें।

कार्यक्रम का आयोजन मुख्य परिवीक्षा अधिकारी अंजना गुप्ता के मार्गदर्शन में जिला प्रोबेशन अधिकारी, देहरादून मीना बिष्ट द्वारा किया गया। कार्यक्रम में निदेशालय महिला कल्याण से उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी राजीव नयन, विधि अधिकारी समीक्षा शर्मा, कार्यक्रम प्रबंधक प्रीति उपाध्याय, राजकीय नारी निकेतन की अधीक्षिका सोनल राणा,  मधु, पूजा सहित अन्य अधिकारी/कार्मिक एवं बड़ी संख्या में अन्य महिलाओं ने प्रतिभाग किया।

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