Halloween party ideas 2015

 दिनांक: 19 मार्च 2026, गुरुवार 

 प्रथम तिथि: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा  विक्रम संवत: 2083 का शुभारम्भ हिंदी पंचांग (बीकानेर) के अनुसार आज से सनातन परंपरा का नया वर्ष प्रारम्भ हो रहा है

नवरात्रि में कलश / घट स्थापना के लिए सर्वप्रथम प्रातः काल नित्य क्रिया से निवृत होने के बाद स्नान करके, नव वस्त्र अथवा स्वच्छ वस्त्र पहन कर ही विधिपूर्वक पूजा आरम्भ करनी चाहिए। प्रथम पूजा के दिन मुहूर्त (सूर्योदय के साथ अथवा द्विस्वभाव लग्न में  कलश स्थापना करना चाहिए।

first navratri  shailputri


कलश स्थापना के लिए अपने घर के उस स्थान को चुनना चाहिए जो पवित्र स्थान हो अर्थात घर में मंदिर के सामने या निकट या मंदिर के पास।  यदि इस स्थान में पूजा करने में दिक्कत हो तो घर में ही ईशान कोण अथवा उत्तर-पूर्व दिशा में, एक स्थान का चयन कर ले तथा उसे गंगा जल से शुद्ध कर ले


जौ पात्र का प्रयोग


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सर्वप्रथम जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र लेना चाहिए । इस पात्र में मिट्टी की एक अथवा दो परत बिछा ले । इसके बाद जौ बिछा लेना चाहिए। इसके ऊपर फिर मिट्टी की एक परत बिछाएं। अब पुनः एक परत जौ की बिछा ले । जौ को इस तरह चारों तरफ बिछाएं ताकि जौ कलश के नीचे पूरी तरह से न दबे। इसके ऊपर पुनः मिट्टी की एक परत बिछाएं।




कलश स्थापना


पुनः कलश में रोली से स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर गले में तीन धागावाली मौली लपेटे और कलश को एक ओर रख ले। कलश स्थापित किये जानेवाली भूमि अथवा चौकी पर कुंकुंम या रोली से अष्टदलकमल बनाकर निम्न मंत्र से भूमि का स्पर्श करना चाहिए।



ॐ भूरसि भूमिरस्यदितिरसि विश्वधाया विश्वस्य भुवनस्य धरत्री।


पृथिवीं यच्छ पृथिवीं द्रीं ह पृथिवीं मा हि सीः।।


कलश स्थापन मंत्र 


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ॐ आ जिघ्न कलशं मह्यं त्वा विशंतिवन्दवः।


पुनरूर्जा नि वर्तस्व सा नह सहत्रम् धुक्ष्वोरूधारा पयस्वती पुनर्मा विशताद्रयिः।।

पुनः इस मंत्रोच्चारण के बाद  कलश में गंगाजल मिला हुआ जल छोड़े उसके बाद क्रमशः चन्दन,  सर्वौषधि(मुरा,चम्पक, मुस्ता, वच, कुष्ठ, शिलाजीत, हल्दी, सठी)  दूब, पवित्री, सप्तमृत्तिका, सुपारी, पञ्चरत्न, द्रव्य कलश में अर्पित करे। पुनःपंचपल्लव(बरगद,गूलर,पीपल,पाकड़,आम) कलश के मुख पर रखें।अनन्तर कलश को वस्त्र से अलंकृत करें। तत्पश्चात चावल से भरे पूर्णपात्र को कलश के मुख पर स्थापित करें।


कलश पर नारियल की स्थापना


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इसके बाद नारियल पर लाल कपडा लपेट  ले उसके बाद मोली लपेट दें। अब नारियल को कलश पर रख दे । नारियल के सम्बन्ध में शास्त्रों में कहा गया है:


 नवरात्रि के पहले दिन (19 मार्च 2026) माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की जाती है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री (शैल = पर्वत, पुत्री = बेटी) कहा जाता है। वृषभ (बैल) पर सवार, दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल लिए माँ शैलपुत्री स्थिरता, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं।


“अधोमुखं शत्रु विवर्धनाय,ऊर्ध्वस्य वस्त्रं बहुरोग वृध्यै।


प्राचीमुखं वित विनाशनाय,तस्तमात् शुभं संमुख्यं नारीकेलं”।


अर्थात् नारियल का मुख नीचे की तरफ रखने से शत्रु में वृद्धि होती है ।नारियल का मुख ऊपर की तरफ रखने से रोग बढ़ते हैं। पूर्व की तरफ नारियल का मुख रखने से धन का विनाश होता है। इसलिए नारियल की स्थापना  के समय हमेशा इस बात का ध्यान रखनी चाहिए कि उसका मुख साधक की तरफ रहे। ध्यान रहे कि नारियल का मुख उस सिरे पर होता है, जिस तरफ से वह पेड़ की टहनी से जुड़ा होता है।


देवी-देवताओं का कलश में आवाहन

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भक्त को अपने दाहिने हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर वरुण आदि देवी-देवताओ का ध्यान और आवाहन करना चाहिए –


 ॐ भूर्भुवःस्वःभो वरुण! इहागच्छ, इह तिष्ठ, स्थापयामि, पूजयामि, मम पूजां गृहाण।ओम अपां पतये वरुणाय नमः बोलकर अक्षत और पुष्प कलश पर छोड़ देना चाहिए। पुनः दाहिने हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर चारो वेद, तीर्थो, नदियों, सागरों, देवी और देवताओ के आवाहन करना चाहिए उसके बाद फिर अक्षत और पुष्प लेकर कलश की प्रतिष्ठा करें।


कलशे वरुणाद्यावाहितदेवताः सुप्रतिष्ठता वरदा भवन्तु।


तथा 


ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः  इस मंत्र के उच्चारण के साथ ही अक्षत और पुष्प कलश के पास छोड़ दे।


वरुण आदि देवताओ को —

ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमःध्यानार्थे पुष्पं समर्पयामि

आदि मंत्र का उच्चारण करते हुए पुष्प समर्पित करे पुनः निम्न क्रम से वरुण आदि देवताओ को अक्षत रखे, जल चढ़ाये, स्नानीय जल, आचमनीय जल चढ़ाये, पंच्चामृत स्नान कराये,जल में मलय चन्दन मिलाकर स्नान कराये, शुद्ध जल से स्नान कराये, आचमनीय जल चढ़ाये, वस्त्र चढ़ाये, यज्ञोपवीत चढ़ाये, उपवस्त्र चढ़ाये, चन्दन लगाये, अक्षत समर्पित करे, फूल और फूलमाला चढ़ाये, द्रव्य समर्पित करे ,इत्र आदि चढ़ाये, दीप दिखाए, नैवेद्य चढ़ाये, सुपारी, इलायची, लौंग सहित पान चढ़ाये, द्रव्य-दक्षिणा चढ़ाये(समर्पयामि) इसके बाद आरती करे। पुनः पुस्पाञ्जलि समर्पित करे, प्रदक्षिणा करे तथा दाहिने हाथ में पुष्प लेकर प्रार्थना करे और अन्त में


ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, प्रार्थनापूर्वकं अहं  नमस्कारान समर्पयामि।


इस मंत्र से नमस्कारपूर्वक फूल समर्पित करे। पुनः हाथ में जल लेकर अधोलिखित वाक्य का उच्चारण कर जल कलश के पास छोड़ते हुए समस्त पूजन-कर्म वरुणदेव को निवेदित करना चाहिए।


कृतेन अनेन पूजनेन कलशे वरुणाद्यावाहितदेवताः प्रीयन्तां न मम।




अखंड ज्योति


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नवरात्री के प्रथम दिन ही अखंड ज्योति जलाई जाती है जो नौ दिन तक निरंतर जलती रहती है। अखंड ज्योति का बीच में बुझना अच्छा नही माना जाता है।  अतः इस बात का अवश्य ही धयान रखना चाहिए की अखंड ज्योति न बुझे।

देवी पूजन सामग्री

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माँ दुर्गा की सुन्दर प्रतिमा, माता की प्रतिमा स्थापना के लिए चौकी, लाल वस्त्र , कलश/ घाट , नारियल का फल, पांच पल्लव आम का, फूल,अक्षत, मौली, रोली, पूजा के लिए थाली , धुप और दशांग, गंगा का जल, कुमकुम, गुलाल पान,सुपारी, चौकी,दीप, नैवेद्य,कच्चा धागा, दुर्गा सप्तसती किताब ,चुनरी, पैसा, माता दुर्गा की विशेष कृपा हेतु संकल्प तथा षोडशोपचार पूजन करने के बाद, प्रथम प्रतिपदा तिथि को, नैवेद्य के रूप में गाय का घी माता को अर्पित करना चाहिए तथा पुनः वह घी किसी ब्राह्मण को दे देना चाहिए।


संकल्प


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 संकल्प में पुष्प, फल, सुपारी, पान, चांदी कासिक्का, नारियल (पानी वाला), मिठाई, मेवा, थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर संकल्प मंत्र बोलें 


ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णु:, ॐ अद्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीयपरार्धे श्री श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे,अष्टाविंशतितमे कलियुगे, कलिप्रथम चरणे जम्बूद्वीपेभरतखण्डे भारतवर्षे पुण्य (अपने नगर/गांव का नामलें) क्षेत्रे बौद्धावतारे वीर विक्रमादित्यनृपते(वर्तमानसंवत), तमेऽब्दे प्रमादी नाम संवत्सरे उत्तरायणे(वर्तमान)वसंत ऋतो महामंगल्यप्रदे मासानां मासोत्तमे(वर्तमान) मासे (वर्तमान) पक्षे (वर्तमान) तिथौ(वर्तमान) वासरे (गोत्र का नाम लें) गोत्रोत्पन्नोऽहंअमुकनामा (अपना नाम लें) सकलपापक्षयपूर्वकंसर्वारिष्ट शांतिनिमित्तं सर्वमंगलकामनया-श्रुतिस्मृत्योक्तफलप्राप्त्यर्थं मनेप्सित कार्य सिद्धयर्थं श्रीदुर्गा पूजनं च अहं क​रिष्ये। तत्पूर्वागंत्वेन ​निर्विघ्नतापूर्वक कार्य ​सिद्धयर्थं यथा​मिलितोपचारेगणप​ति पूजनं क​रिष्ये।


दुर्गा पूजन से पहले गणेश पूजन -


हाथ में पुष्प लेकर गणपति का ध्यान करें|और श्लोकपढें -


 गजाननम्भूतगणादिसेवितं कपित्थ जम्बूफलचारुभक्षणम्। उमासुतं शोक विनाशकारकं नमामिविघ्नेश्वरपादपंकजम्।

आवाहन: हाथ में अक्षत लेकर


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     आगच्छ देव देवेश, गौरीपुत्र ​विनायक।


     तवपूजा करोमद्य, अत्रतिष्ठ परमेश्वर॥

ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः इहागच्छ इह तिष्ठकहकर अक्षत गणेश जी पर चढा़ दें।


हाथ में फूल लेकर-ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः आसनं समर्पया​मि|


अर्घा में जल लेकर बोलें -ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः अर्घ्यं समर्पया​मि|


आचमनीय-स्नानीयं-ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः आचमनीयं समर्पया​मि |


 वस्त्र लेकर-ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः वस्त्रं समर्पया​मि|


यज्ञोपवीत-ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः यज्ञोपवीतं समर्पया​मि |

पुनराचमनीयम्-ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः |


रक्त चंदन लगाएं: इदम रक्त चंदनम् लेपनम् ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः |


श्रीखंड चंदन बोलकर श्रीखंड चंदन लगाएं|पटZ


सिन्दूर चढ़ाएं-



"इदं सिन्दूराभरणं लेपनम् ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः|



दूर्वा और विल्बपत्र भी गणेश जी को चढ़ाएं|


पूजन के बाद गणेश जी को प्रसाद अर्पित करें:


ॐ श्री ​सिद्धि विनायकाय नमः इदं नानाविधिनैवेद्यानि समर्पयामि |


मिष्ठान अर्पित करने के लिए मंत्र बोले


शर्करा खण्ड खाद्या​नि द​धि क्षीर घृता​नि च|

आहारो भक्ष्य भोज्यं गृह्यतां गणनायक।

प्रसाद अर्पित करने के बाद आचमन करायें- इदं आचमनीयं ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः|


इसके बाद पान सुपारी चढ़ायें-


ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः ताम्बूलं समर्पया​मि |

अब फल लेकर गणपति पर चढ़ाएं-


          ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः फलं समर्पया​मि|


            ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः द्रव्य समर्पया​मि|


 अब ​विषम संख्या में दीपक जलाकर ​निराजन करेंऔर भगवान की आरती गायें


 हाथ में फूल लेकर गणेश जी को अ​र्पित करें, ​फिर तीन प्रद​क्षिणा करें।


दुर्गा पूजन


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सबसे पहले माता दुर्गा का ध्यान करें

     सर्व मंगल मागंल्ये ​शिवे सर्वार्थ सा​धिके ।

 शरण्येत्रयम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते ॥

 आवाहन-

         श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। दुर्गादेवीमावाहया​मि॥


 आसन- 

        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। आसानार्थेपुष्पाणि समर्पया​मि।


अर्घ्य-


       श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। हस्तयो: अर्घ्यंसमर्पया​मि॥

आचमन-

       श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। आचमनं समर्पया​मि॥


स्नान-


       श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। स्नानार्थं जलंसमर्पया​मि॥


स्नानांग आचमन-


       स्नानान्ते पुनराचमनीयं जलं समर्पया​मि।




पंचामृत स्नान-


      श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। पंचामृतस्नानंसमर्पया​मि॥


गन्धोदक-स्नान-

      श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। गन्धोदकस्नानंसमर्पया​मि॥


शुद्धोदक स्नान-


      श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। शुद्धोदकस्नानंसमर्पया​मि॥


आचमन-  शुद्धोदकस्नानान्ते आचमनीयं जलं समर्पया​मि।


वस्त्र-

       श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। वस्त्रं समर्पया​मि ॥वस्त्रान्ते आचमनीयं जलं समर्पया​मि।


सौभाग्य सू़त्र-


       श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। सौभाग्य सूत्रंसमर्पया​मि ॥


चन्दन-

        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। चन्दनं समर्पया​मि॥


ह​रिद्राचूर्ण-


        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। ह​रिद्रां समर्पया​मि॥

कुंकुम-


        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। कुंकुम समर्पया​मि॥


​सिन्दूर-


         श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। ​सिन्दूरं समर्पया​मि॥


कज्जल-

         श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। कज्जलं समर्पया​मि।

आभूषण-


         श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। आभूषणा​निसमर्पया​मि ॥




पुष्पमाला-


        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। पुष्पमाला समर्पया​मि ॥


धूप-


        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। धूपमाघ्रापया​मि॥

दीप-


        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। दीपं दर्शया​मि॥

नैवेद्य-


        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। नैवेद्यं ​निवेदया​मि॥नैवेद्यान्ते ​त्रिबारं आचमनीय जलं समर्पया​मि।

फल-


         श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। फला​नि समर्पया​मि॥

ताम्बूल-


        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। ताम्बूलं समर्पया​मि॥


द​क्षिणा-


          श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। द्रव्यद​क्षिणां समर्पया​म

आरती-


          श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। आरा​र्तिकंसमर्पया​मि॥


प्रदक्षिणा

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“यानि कानि च पापानी जन्मान्तर कृतानि च।


तानी सर्वानि नश्यन्तु प्रदक्षिणपदे पदे॥


प्रदक्षिणा समर्पयामि।“


प्रदक्षिणा करें (अगर स्थान न हो तो आसन पर खड़े-खड़े ही स्थान पर घूमे)


क्षमा प्रार्थना


न मंत्रं नोयंत्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो


न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथाः ।


न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं


परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम् ॥


विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतया


विधेयाशक्यत्वात्तव चरणयोर्या च्युतिरभूत् ।ल


तदेतत्क्षतव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवे


कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ॥




पृथिव्यां पुत्रास्ते जननि बहवः सन्ति सरलाः


परं तेषां मध्ये विरलतरलोऽहं तव सुतः ।




मदीयोऽयंत्यागः समुचितमिदं नो तव शिवे


कुपुत्रो जायेत् क्वचिदपि कुमाता न भवति ॥




जगन्मातर्मातस्तव चरणसेवा न रचिता


न वा दत्तं देवि द्रविणमपि भूयस्तव मया ।




तथापित्वं स्नेहं मयि निरुपमं यत्प्रकुरुषे


कुपुत्रो जायेत क्वचिदप कुमाता न भवति ॥




परित्यक्तादेवा विविध​विधिसेवाकुलतया


मया पंचाशीतेरधिकमपनीते तु वयसि ।


इदानीं चेन्मातस्तव कृपा नापि भविता


निरालम्बो लम्बोदर जननि कं यामि शरण् ॥


श्वपाको जल्पाको भवति मधुपाकोपमगिरा


निरातंको रंको विहरति चिरं कोटिकनकैः ।


तवापर्णे कर्णे विशति मनुवर्णे फलमिदं


जनः को जानीते जननि जपनीयं जपविधौ ॥


चिताभस्मालेपो गरलमशनं दिक्पटधरो


जटाधारी कण्ठे भुजगपतहारी पशुपतिः ।


कपाली भूतेशो भजति जगदीशैकपदवीं

भवानि त्वत्पाणिग्रहणपरिपाटीफलमिदम् ॥


न मोक्षस्याकांक्षा भवविभव वांछापिचनमे


न विज्ञानापेक्षा शशिमुखि सुखेच्छापि न पुनः 


अतस्त्वां संयाचे जननि जननं यातु मम वै


मृडाणी रुद्राणी शिवशिव भवानीति जपतः ॥


नाराधितासि विधिना विविधोपचारैः


किं रूक्षचिंतन परैर्नकृतं वचोभिः ।


श्यामे त्वमेव यदि किंचन मय्यनाथे


धत्से कृपामुचितमम्ब परं तवैव ॥


आपत्सु मग्नः स्मरणं त्वदीयं


करोमि दुर्गे करुणार्णवेशि ।


नैतच्छठत्वं मम भावयेथाः


क्षुधातृषार्ता जननीं स्मरन्ति ॥


जगदंब विचित्रमत्र किं परिपूर्ण करुणास्ति चिन्मयि ।


अपराधपरंपरावृतं नहि मातासमुपेक्षते सुतम् ॥


मत्समः पातकी नास्तिपापघ्नी त्वत्समा नहि।


वं ज्ञात्वा महादेवियथायोग्यं तथा कुरु ॥


इसके बाद थाली में दीपक पुष्प सजाकर माँ की आरती करें

दुर्गा जी की आरती (1)


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जगजननी जय! जय! माँ! जगजननी जय! जय!


भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय। जगजननी ..

तू ही सत्-चित्-सुखमय, शुद्ध ब्रह्मरूपा।


सत्य सनातन, सुन्दर, पर-शिव सुर-भूपा॥ जगजननी ..

आदि अनादि, अनामय, अविचल, अविनाशी।


अमल, अनन्त, अगोचर, अज आनन्दराशी॥ जगजननी 

अविकारी, अघहारी, अकल कलाधारी।

कर्ता विधि, भर्ता हरि, हर संहारकारी॥ जगजननी ..


तू विधिवधू, रमा, तू उमा महामाया।

मूल प्रकृति, विद्या तू, तू जननी जाया॥ जगजननी ..

राम, कृष्ण तू, सीता, ब्रजरानी राधा।

तू वाँछाकल्पद्रुम, हारिणि सब बाघा॥ जगजननी ..

दश विद्या, नव दुर्गा नाना शस्त्रकरा।

अष्टमातृका, योगिनि, नव-नव रूप धरा॥ जगजननी ..

तू परधामनिवासिनि, महाविलासिनि तू।

तू ही श्मशानविहारिणि, ताण्डवलासिनि तू॥ जगजननी .

सुर-मुनि मोहिनि सौम्या, तू शोभाधारा।

विवसन विकट सरुपा, प्रलयमयी, धारा॥ जगजननी ..0L0

तू ही स्नेहसुधामयी, तू अति गरलमना।

रत्नविभूषित तू ही, तू ही अस्थि तना॥ जगजननी ..

मूलाधार निवासिनि, इह-पर सिद्धिप्रदे।

कालातीता काली, कमला तू वरदे॥ जगजननी ..

शक्ति शक्तिधर तू ही, नित्य अभेदमयी।

भेद प्रदर्शिनि वाणी विमले! वेदत्रयी॥ जगजननी ..

हम अति दीन दु:खी माँ! विपत जाल घेरे।

हैं कपूत अति कपटी, पर बालक तेरे॥ जगजननी ..

निज स्वभाववश जननी! दयादृष्टि कीजै।

करुणा कर करुणामयी! चरण शरण दीजै॥ जगजननी ....


 दुर्गा जी की आरती (2)


जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी ।

                      तुमको निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी ।।जय अम्बे गौरी...                           


मांग सिन्दूर विराजत टीको मृ्ग मद को ।

 उच्चवल से दोऊ नैना चन्द्र बदन नीको। जय अम्बे गौरी...

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै।

 रक्त पुष्प गलमाला कंठन पर साजै।।जय अम्बे गौरी...

केहरि वाहन राजत खडग खप्पर थारी

 सुर नर मुनि जन सेवत तिनके दु:ख हारी।।जय अम्बे गौरी..

कानन कुण्डली शोभित नाशाग्रे मोती ।।

कोटिक चन्द्र दिवाकर राजत सम ज्योति।।जय अम्बे गौरी..

शुम्भ निशुम्भ विदारे महिषासुर घाती ।

घूम्र विलोचन नैना निशिदिन मदमाती ।।जय अम्बे गौरी...

चौंसठ योगिन गावन नृ्त्य करत भैरूं ।

बाजत ताल मृ्दंगा अरू बाजत डमरू।।जय अम्बे गौरी...

भुजा चार अति शोभित खडग खप्पर धारी ।

मन वांछित फल पावत सेवत नर नारी ।।जय अम्बे गौरी...

कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती ।

श्री मालकेतु में राजत कोटि रत्न ज्योति।।जय अम्बे गौरी...

श्री अम्बे की आरती जो कोई नर गावै।

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पति पावै।। जय अम्बे गौरी...


आरती के बाद माँ को शाष्टांग प्रणाम कर प्रसाद को बांट दें। भक्त प्राय: पूरे नवरात्र उपवास रखते हैं. सम्पूर्ण नवरात्रव्रत के पालन में असमर्थ लोगों के लिए सप्तरात्र,पंचरात्र,युग्मरात्र और एकरात्रव्रत का विधान भी है. प्रतिपदा से सप्तमी तक उपवास रखने से सप्तरात्र-व्रत का अनुष्ठान होता है.


अष्टमी के दिन माता को हलुवा और चने का भोग लगाकर कुंवारी कन्याओं को खिलाते हैं तथा अन्त में स्वयं प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण (पूर्ण) करते हैं.


नवरात्रके नौ दिन साधना करने वाले साधक प्रतिपदा तिथि के दिन शैलपुत्री की, द्वितीया में ब्रह्मचारिणी, तृतीया में चंद्रघण्टा, चतुर्थी में कूष्माण्डा, पंचमी में स्कन्दमाता, षष्ठी में कात्यायनी, सप्तमी में कालरात्रि, अष्टमी में महागौरी तथा नवमी में सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं. तथा दुर्गा जी के १०८ नामों को मंत्र रूप में उसका अधिकाधिक जप करें।




विशेष👉 


यह पूजन विधि जिन साधको को वैदिक मंत्रों का ज्ञान नही है अथवा जिनके पास पूजा के लिये उपयुक्त समय नही है उनकी भावनाओं एवं यहाँ शब्द सीमा को ध्यान में रखकर बनाई गई है विस्तृत वैदिक मंत्रों से पूजन विधि जिसे आवश्यकता हो उसे व्यक्तिगत रूप से बतायी जाएगी।



*आचार्य पवन पराशर (श्रीधाम वृन्दावन)*

 

मेष

अ, आ, चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो

रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। कार्य की प्रशंसा होगी। प्रसन्नता तथा संतुष्टि रहेगी। यात्रा मनोरंजक हो सकती है। व्यापार-व्यवसाय में नए प्रयोग किए जा सकते हैं। समय की अनुकूलता का लाभ लें। धन प्राप्ति सुगम होगी। नौकरी में अनुकूलता रहेगी। कार्यभार व अधिकार में वृद्धि हो सकती है।

Rashifal today


वृषभ

ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो

विवाद को बढ़ावा न दें। बेवजह कहासुनी हो सकती है। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। थकान व कमजोरी रह सकते हैं। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। धनहानि की आशंका है। व्यापार-व्यवसाय में धीमापन रह सकता है। आय में निश्चितता रहेगी। समय शीघ्र सुधरेगा।


मिथुन

का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह

मित्रों का सहयोग करने का अवसर प्राप्त हो सकता है। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल चलेगा। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड से लाभ होगा। यात्रा सफल रहेगी। शत्रु सक्रिय रहेंगे। चिंता तथा तनाव रहेंगे। किसी दूसरे व्यक्ति के काम में हस्तक्षेप न करें। विवाद होगा।


कर्क

ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो

आत्मसम्मान बना रहेगा। उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त होगी। भूले-बिसरे साथियों व संबंधियों से मुलाकात होगी। कारोबार में अनुकूलता रहेगी। स्वास्थ्य कमजोर रह सकता है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। बुद्धि का प्रयोग लाभ में वृद्धि करेगा। प्रसन्नता बनी रहेगी। प्रमाद न करें।


सिंह

मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे

बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। नवीन वस्त्राभूषण की प्राप्ति हो सकती है। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। यात्रा लाभदायक रहेगी। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड मनोनुकूल लाभ देगा। प्रसन्नता का वातावरण रहेगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।


कन्या

ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने में जल्दबाजी न करें। फालतू खर्च होगा। कर्ज लेना पड़ सकता है। आय में कमी होगी। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। बेकार बातों पर बिलकुल ध्यान न दें।


तुला

रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते

यात्रा मनोनुकूल रहेगी। नया काम मिलेगा। नए अनुबंध होंगे। डूबी हुई रकम प्राप्त हो सकती है। कारोबार में वृद्धि होगी। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। समय की अनुकूलता रहेगी, लाभ लें। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। आय में वृद्धि होगी। जल्दबाजी न करें।


वृश्चिक

तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

कार्यस्थल पर सुधार व परिवर्तन हो सकता है। योजना फलीभूत होगी। तत्काल लाभ नहीं होगा। निवेश में जल्दबाजी न करें। आय के नए स्रोत प्राप्त हो सकते हैं। रुके कार्यों में गति आएगी। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। प्रमाद न करें।


धनु

ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे

अध्यात्म में रुझान रहेगा। सत्संग का लाभ प्राप्त होगा। राजकीय बाधा दूर होकर स्थिति लाभदायक बनेगी। कारोबार में वृद्धि होगी। आसपास का वातावरण सुखद रहेगा। पार्टनरों तथा भाइयों का सहयोग प्राप्त होगा। विवाद को बढ़ावा न दें। विवेक का प्रयोग करें। प्रमाद न करें।


मकर

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। क्रोध व उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। चोट व दुर्घटना से बड़ी हानि की आशंका बनती है, सावधानी आवश्यक है। लेन-देन में जल्दबाजी से बचें। आय बनी रहेगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। व्यापार-व्यवसाय की गति धीमी रहेगी।


कुंभ

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा

कोर्ट व कचहरी के कार्य अनुकूल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। कारोबार लाभदायक रहेगा। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। जीवनसाथी से सहयोग प्राप्त होगा। घर-बाहर प्रसन्नता का वातावरण रहेगा। लेन-देन में सावधानी रखें। धनहानि भी आशंका है।


मीन

दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची

भूमि-भवन व मकान-दुकान इत्यादि की खरीद-फरोख्त मनोनुकूल लाभ देगी। बेरोजगारी दूर होगी। आय के नए स्रोत प्राप्त हो सकते हैं। भाग्य का साथ मिलेगा। चारों तरफ से सफलता मिलेगी। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। उत्साह बना रहेगा। चिंता तथा तनाव कम होंगे।


 आज का राशिफल

दिनाँक 18 मार्च,2026

दिन बुधवार

rashifal today 18 march,2026


मेष

अ, आ, चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो

स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। वाहन, मशीनरी व अग्नि आदि के प्रयोग में विशेषकर स्त्रियां सावधानी रखें। कार्यों की गति धीमी रहेगी। बु‍द्धि का प्रयोग करें। प्रयास अधिक करना पड़ेंगे। निराशा हावी रहेगी। आय में निश्चितता रहेगी। व्यापार ठीक चलेगा। लाभ होगा।


वृषभ

ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो

आशंका-कुशंका के चलते कार्य की गति धीमी रह सकती है। घर-परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्‍य की चिंता रहेगी। वैवाहिक प्रस्ताव प्राप्त हो सकता है। कारोबार में वृद्धि के योग हैं। सभी ओर से सफलता प्राप्त होगी। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। लाभ होगा।


मिथुन

का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह

जीवनसाथी से कहासुनी हो सकती है। संपत्ति के बड़े सौदे बड़ा लाभ दे सकते हैं। बेरोजगारी दूर होगी। करियर बनाने के अवसर प्राप्त होंगे। नौकरी में प्रशंसा प्राप्त होगी। पारिवारिक सहयोग से कार्य में आसानी होगी। दूसरों के कार्य में दखल न दें। प्रमाद से बचें।

कर्क

ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो

बौद्धिक कार्य सफल रहेंगे। लाभ के असवर हाथ आएंगे। यात्रा में सावधानी रखें। किसी पारिवारिक आनंदोत्सव में हिस्सा लेने का मौका मिलेगा। स्वादिष्ट भोजन का आनंद प्राप्त होगा। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। शत्रु पस्त होंगे। विवाद न करें। बेचैनी रहेगी।

सिंह

मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे

धन का नुकसान या कोई बुरी खबर प्राप्त हो सकती है। पारिवारिक चिंताएं रहेंगी। मेहनत अधिक तथा लाभ कम होगा। दूसरों से अपेक्षा न करें। व्यवसाय ठीक चलेगा। मातहतों का सहयोग नहीं मिलेगा। कुसंगति से बचें, हानि होगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। आय में निश्चितता रहेगी। प्रमाद न करें।


कन्या

ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

मित्रों की सहायता कर पाएंगे। मेहनत का फल मिलेगा। मान-सम्मान मिलेगा। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। नौकरी में उच्चाधिकारी की प्रसन्नता रहेगी। नया उपक्रम प्रारंभ करने की योजना बनेगी। व्यापार मनोनुकूल लाभ देगा। समय अनुकूल है। प्रसन्नता रहेगी।


तुला

रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते

दूर से अच्‍छी खबर प्राप्त हो सकती है। आत्मविश्वास बढ़ेगा। कोई बड़ा काम करने की योजना बनेगी। पराक्रम व प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। घर में अतिथियों पर व्यय होगा। किसी मांगलिक कार्य का आयोजन हो सकता है। व्यवसाय ठीक चलेगा। शत्रु शांत रहेंगे। प्रसन्नता रहेगी।


वृश्चिक

तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

प्रेम-प्रसंग में जल्दबाजी न करें। शारीरिक कष्ट से कार्य में रुकावट होगी। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। यात्रा मनोरंजक रहेगी। नौकरी में अनुकूलता रहेगी। लाभ में वृद्धि होगी। निवेश में जल्दबाजी न करें। पार्टनरों का सहयोग मिलेगा। जरूरी वस्तु गुम हो सकती है।

धनु

ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे

अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। यात्रा में जल्दबाजी न करें, नुकसान संभव है। चिंता तथा तनाव बने रहेंगे। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। स्वास्थ्‍य पर बड़ा खर्च हो सकता है। विवाद को बढ़ावा न दें। आय में कमी रहेगी। व्यवसाय की गति धीमी रहेगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। बेचैनी रहेगी।


मकर

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

विवेक का प्रयोग लाभ में वृद्धि करेगा। कोई बड़ी बाधा से सामना हो सकता है। राजभय रहेगा। जल्दबाजी व विवाद करने से बचें। रुका हुआ धन मिल सकता है। व्यावसायिक यात्रा मनोनुकूल रहेगी। किसी अपने के व्यवहार से दु:ख होगा। नौकरी में उच्चाधिकारी का ध्यान खुद की तरफ खींच पाएंगे।


कुंभ

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा

समाजसेवा में रुझान रहेगा। प्रतिष्ठा बढ़ेगी। नई आर्थिक नीति बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। पुरानी व्याधि से परेशानी हो सकती है। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। व्यापार वृद्धि होगी। ऐश्वर्य पर व्यय होगा। भाइयों का सहयोग मिलेगा। समय अनुकूल है। लाभ लें। प्रमाद न करें।



मीन

दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची

राजकीय अवरोध दूर होंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। धर्म-कर्म में मन लगेगा। व्यापार मनोनुकूल चलेगा। नौकरी में सहकर्मी साथ देंगे। निवेश शुभ रहेगा। प्रभावशाली व्यक्तियों से परिचय होगा। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। प्रसन्नता रहेगी। जल्दबाजी न करें।

पुलिस  मुख्यालय,  उत्तराखंड*


उधम सिंह नगर पुलिस द्वारा लगभग 10 करोड़ रुपये मूल्य की नकली NCERT पुस्तकों का बड़ा जखीरा बरामद

DGP उत्तराखंड द्वारा पुलिस टीम को 20 हजार की धनराशि से पुरस्कृत करने की घोषणा*

fake ncert books godown caught by police


उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा नकली सामग्री के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के क्रम में जनपद उधमसिंहनगर में एक बड़ी सफलता मिली है इस कार्रवाई में भारी मात्रा में  नकली एनसीईआरटी पुस्तकों की बरामदगी का खुलासा हुआ है।


दिनांक 14.03.2026 की रात्रि में कोतवाली रुद्रपुर पुलिस टीम द्वारा आनंदम रिजॉर्ट के पास एक कैंटर वाहन को रोककर चेकिंग की गई। वाहन चालक ने कैंटर में किताबें होने तथा उन्हें मेरठ से लाने की जानकारी दी। कागजातों की जांच के दौरान चालक के पास ई-वे बिल नहीं पाया गया तथा प्रस्तुत बिलों में भिन्नता मिलने पर संदेह उत्पन्न हुआ।

जांच के दौरान कैंटर के अंदर अत्यधिक मात्रा में एनसीईआरटी की पुस्तकें पाई गईं। चालक द्वारा संबंधित गोदाम भी दिखाया गया। 

संदिग्धता के आधार पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने प्रथम दृष्टया पुस्तकों को नकली बताया।


तत्पश्चात मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में गोदाम का निरीक्षण किया गया, जहां लगभग 10 लाख पुस्तकों का भंडारण पाया गया।

जांच में गोदाम स्वामी का नाम राजेश कुमार जैन पाया गया, जबकि उक्त गोदाम संदीप नामक व्यक्ति को किराये पर दिया गया था।

एनसीईआरटी, नई दिल्ली से आई जांच टीम द्वारा पुस्तकों की गुणवत्ता की जांच में यह पाया गया कि छपाई, कागज, बाइंडिंग एवं कवर डिजाइन निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थे। 

साथ ही एनसीईआरटी के लोगो में कूटरचना करते हुए “NCERT” के स्थान पर “ACERT” अंकित कर आमजन को भ्रमित करने हेतु पुस्तकों का मुद्रण, वितरण एवं भंडारण किया जा रहा था।


*दिल्ली से आई NCERT की टीम द्वारा पुस्तक सामग्री नकली होने की पुष्टि करने पर इस संबंध में कल रात्रि  कोतवाली रुद्रपुर में सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है, जिसकी विवेचना प्रचलित है।*


*पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड, श्री दीपम सेठ द्वारा पुलिस टीम के इस उत्कृष्ट कार्य की सराहना करते हुए 20,000 रुपये की धनराशि से पुरुस्कृत करने की घोषणा की गई है।*



मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण, देहरादून 

MDDA ceilling action


अवैध निर्माणों पर ताबड़तोड़ सीलिंग की कार्रवाई, निर्माण स्थलों का प्रवर्तन टीम ने किया स्थलीय निरीक्षण


देहरादून में अनियंत्रित और अवैध निर्माणों पर लगाम कसने के लिए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए कई स्थानों पर निर्माण कार्यों को सील कर दिया। प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम ने नियमित निगरानी, प्राप्त शिकायतों और उच्चाधिकारियों के निर्देशों के तहत विभिन्न क्षेत्रों में अभियान चलाकर बिना मानचित्र स्वीकृति के हो रहे निर्माणों को चिन्हित किया और तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की।


आजाद कॉलोनी, साना मस्जिद क्षेत्र में युनुस द्वारा किए जा रहे अवैध व्यावसायिक निर्माण को निरीक्षण के दौरान पकड़ा गया। जांच में पाया गया कि निर्माण कार्य बिना मानचित्र स्वीकृति और आवश्यक अनुमति के किया जा रहा था, जो प्राधिकरण के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। टीम ने मौके पर पहुंचकर निर्माण स्थल को सील कर दिया।


कारगी चौक स्थित कलिंगा विहार क्षेत्र में भी प्राधिकरण ने सख्ती दिखाई। यहां संजय बमोला द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्य में आवश्यक दस्तावेजों का अभाव पाया गया। प्राधिकरण की टीम ने इसे अवैध मानते हुए मौके पर ही सीलिंग की कार्रवाई की। अधिकारियों के अनुसार, दोनों ही मामलों में निर्माणकर्ताओं को पूर्व में नियमों की जानकारी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद नियमों की अनदेखी की गई।


एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के निर्देशों पर पछवादून क्षेत्र के सेक्टर-12 में व्यापक संयुक्त निरीक्षण एवं सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान प्रवर्तन टीम ने क्षेत्र के विभिन्न निर्माण स्थलों का स्थलीय निरीक्षण करते हुए निर्माणकर्ताओं से मानचित्र स्वीकृति, नक्शा पास होने से संबंधित दस्तावेज और अन्य आवश्यक अभिलेखों की जांच की। अभियान के दौरान कुल 14 निर्माण कार्यों की जांच की गई, जिनमें आवासीय और व्यावसायिक दोनों प्रकार के भवन शामिल थे। निरीक्षण के दौरान कई मामलों में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके या संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ऐसे मामलों को चिन्हित करते हुए अग्रिम कार्रवाई की जायेगी। जबकि एक स्थान पर की जा रही प्लाटिंग के कार्य को तत्काल प्रभाव से रुकवाया गया गए। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।


*उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का बयान*

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति सख्ती से लागू की जा रही है। उन्होंने कहा कि देहरादून के सुनियोजित और व्यवस्थित विकास के लिए यह जरूरी है कि सभी निर्माण कार्य तय मानकों के अनुरूप हों। बिना मानचित्र स्वीकृति या नियमों का उल्लंघन कर किए जा रहे निर्माण न केवल अवैध हैं, बल्कि भविष्य में शहर की अव्यवस्था का कारण बनते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में सीलिंग के साथ-साथ ध्वस्तीकरण जैसी सख्त कार्रवाई भी की जाएगी। तिवारी ने प्रवर्तन टीम को नियमित निगरानी और त्वरित कार्रवाई के निर्देश देते हुए आमजन से नियमों का पालन करने की अपील की।


*सचिव मोहन सिंह बर्निया का बयान*

प्राधिकरण के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि एमडीडीए द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जहां भी अवैध निर्माण की शिकायत मिलती है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाती है। आज की सीलिंग कार्रवाई भी इसी क्रम का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान जिन निर्माणकर्ताओं द्वारा आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य शहर में अवैध निर्माणों पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना है और इसके लिए अभियान निरंतर जारी रहेगा।

 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मॉल ऑफ देहरादून में बहुचर्चित फिल्म ‘द केरला स्टोरी 2’ देखी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फिल्म समाज में घटित हो रही संवेदनशील घटनाओं को उजागर करते हुए जागरूकता का एक सशक्त माध्यम है।

governor general gurmeet singh, CM Dhami,


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सामाजिक समरसता और जनसंख्या संतुलन को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बना है जिसने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर एक ऐतिहासिक पहल की है, जो समाज में समानता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया है, जिससे अवैध और जबरन धर्मांतरण की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के कानून समाज में पारदर्शिता, सुरक्षा और विश्वास को मजबूत करने का कार्य करते हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी विशेष वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे जागरूक रहें और समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए अपनी भूमिका निभाएं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार की फिल्में समाज को सोचने और समझने का अवसर देती हैं, और सरकार ऐसे हर प्रयास का समर्थन करती है।


इस अवसर पर मेयर श्री सौरभ थपलियाल, विधायक श्री उमेश शर्मा काऊ, श्री दुर्गेश्वर लाल, पूर्व विधायक श्री राजेश शुक्ला एवं अन्य जनप्रतिनिधि थे


मुख्यमंत्री ने प्रदान की विभिन्न विकास योजनाओं के लिए 75 करोड़ की धनराशि


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में बढ़ते साईबर अपराधों की चुनौतियों का सामना करने, अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं का विकास,  के साथ ही विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में सड़कों के पुर्ननिर्माण आदि से संबंधित कर्यों हेतु 75 करोड़ की धनराशि की स्वीकृति प्रदान की है।


मुख्यमंत्री ने प्रदेश में बढ़ते साईबर अपराधों और चुनौतियों से निपटाने के लिए देहरादून में साईबर उत्कृष्टता केन्द्र साईबर सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस के निर्माण हेतु ₹ 31.63 करोड, जनपद उधम सिंह नगर के विधानसभा क्षेत्र किच्छा के अन्तर्गत एन०एच० 109 में पं० राम सुमेर शुक्ला राजकीय मेडिकल कॉलेज से अटरिया माता मंदिर मोड़ सिडकुल एवं आनन्दपुर होते हुए एस०एच० 44 तक सड़क पुर्ननिर्माण हेतु ₹ 22.72 करोड़ के साथ राज्य योजना के अन्तर्गत जनपद उधमसिंह नगर के विधानसभा क्षेत्र किच्छा के शिमला पिस्तौर कुरैया मोटर मार्ग का पुनः निर्माण एवं सुधार कार्य हेतु ₹ 19.40 करोड़ की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है।


मुख्यमंत्री द्वारा उपसम्भागीय परिवहन कार्यालय, रुड़की के निर्माणाधीन भवन हेतु एप्रोच मार्ग निर्माण कार्य के लिये ₹ 1.30 करोड़, अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं का विकास योजनान्तर्गत राजकीय अनुसूचित जाति बालिका छात्रावास मसूरी, देहरादून के भवन अनुरक्षण कार्य हेतु ₹ 67.42 लाख तथा जनपद उधमसिंह नगर के राजकीय जनजाति छात्रावास खटीमा में ट्यूबवेल एवं मास्ट लाईट के कार्य हेतु ₹ 18.06 लाख की स्वीकृति किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज लोक भवन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) से शिष्टाचार भेंट की।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न विकास कार्यों एवं जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर राज्यपाल को अवगत कराया तथा प्रदेश के समग्र विकास, सुशासन एवं जनकल्याण से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की ।

 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय श्री हेमवती नंदन बहुगुणा की पुण्य तिथि के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास में उनके चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय बहुगुणा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए कहा कि वे एक दूरदर्शी नेता एवं कुशल प्रशासक थे।  उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में सदैव जनहित को सर्वोपरि रखा और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर कार्य किया।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में उत्तराखण्ड सचिवालय बैडमिंटन क्लब द्वारा प्रकाशित स्मारिका “प्रयास बेहतर कल के लिए” का  विमोचन किया।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्मारिका के प्रकाशन हेतु क्लब के पदाधिकारियों एवं सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार की पहलें न केवल खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित करती हैं, बल्कि सकारात्मक कार्य संस्कृति के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।



मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल मानव जीवन में अनुशासन, टीम भावना और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने सचिवालय कर्मियों से नियमित रूप से खेल गतिविधियों में भाग लेने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य सुदृढ़ होता है, जिसका सकारात्मक प्रभाव कार्यकुशलता पर भी पड़ता है।


मुख्यमंत्री ने स्मारिका में प्रकाशित लेखों, उपलब्धियों एवं गतिविधियों की सराहना करते हुए आशा व्यक्त की कि यह प्रकाशन आने वाले समय में और अधिक लोगों को खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगा। 


इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री आर. के सुधांशु, सचिव श्री विनय शंकर पांडेय, उत्तराखण्ड सचिवालय बैडमिंटन क्लब के अध्यक्ष श्री हीरा सिंह बसेड़ा,  प्रधान  संपादक श्री भूपेंद्र सिंह बसेड़ा,महासचिव श्री प्रमोद कुमार, कोषाध्यक्ष श्री चंदन बिष्ट, संयुक्त सचिव श्री पुष्कर सिंह नेगी, सदस्य श्री चंद्रशेखर, श्री रंजीत सिंह, श्री दीपक बिष्ट, सुश्री विमला आर्या, सुश्री दीपा बोहरा और श्री संदीप कुमार मौजूद थे।

नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस के तत्वावधान में श्रीलंका के 40 सिविल सेवा अधिकारी पहुंचे एसईओसी*

देहरादून:

USDMA srilanka


नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस के तत्वावधान में श्रीलंका के 40 सिविल सेवा के अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का भ्रमण किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राज्य में आपदा प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों, व्यवस्थाओं एवं नवाचारों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) एवं डीआईजी श्री राजकुमार नेगी ने प्रतिनिधिमंडल को यूएसडीएमए द्वारा किए जा रहे कार्यों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि आपदा की स्थिति में किस प्रकार त्वरित राहत एवं बचाव कार्य धरातल पर संचालित किए जाते हैं। साथ ही राज्य एवं जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र की भूमिका, चेतावनी प्रसारण प्रणाली, अलर्ट जारी करने की प्रक्रिया तथा तकनीक के प्रभावी उपयोग के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।

प्रतिनिधिमंडल को यह भी बताया गया कि उत्तराखण्ड  में किस प्रकार आपदा जोखिम न्यूनीकरण में समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है तथा सूचना का आदान-प्रदान अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक प्रभावी रूप से किस प्रकार किया जाता है। इसके अतिरिक्त आपदा प्रबंधन विभाग की कार्यप्रणाली, इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम की अवधारणा एवं संरचना, आपदा पूर्व तैयारी, आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया तथा आपदा उपरांत पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण की प्रक्रियाओं पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। यूएसडीएमए तथा एनडीएमए किस प्रकार समन्वय करते हैं, इसके बारे में भी बताया गया। 

इस अवसर पर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक डॉ. रोहित थपलियाल ने मौसम पूर्वानुमान एवं बहु-स्तरीय चेतावनी प्रणाली पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि आईएमडी द्वारा मौसम संबंधी आंकड़े अत्याधुनिक वैज्ञानिक तकनीक के माध्यम से एकत्र किए जाते हैं, जिनमें उपग्रह आधारित अवलोकन प्रणाली, डॉप्लर वेदर रडार, स्वचालित मौसम केंद्र, स्वचालित वर्षामापी यंत्र, मौसम पूर्वानुमान मॉडल शामिल हैं। उन्होंने बताया कि विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का रियल-टाइम एकीकरण कर उच्च स्तरीय विश्लेषण किया जाता है, जिसके आधार पर विभिन्न स्तर के पूर्वानुमान तैयार किए जाते हैं। उन्होंने विशेष रूप से पर्वतीय राज्यों में लोकेशन-स्पेसिफिक पूर्वानुमानों के महत्व पर प्रकाश डाला, जहां मौसम की परिस्थितियां अत्यधिक परिवर्तनशील होती हैं।

वहीं यूएलएमएमसी के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार ने भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में राज्य द्वारा किए जा रहे वैज्ञानिक एवं संस्थागत प्रयासों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य में भूस्खलन एक प्रमुख आपदा है, जिसके प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य में भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की पहचान हेतु विस्तृत भूस्खलन संवेदनशीलता मानचित्रण एवं जोखिम क्षेत्र निर्धारण किया जा रहा है। आधुनिक तकनीकों, जैसे रिमोट सेंसिंग, जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम, ड्रोन सर्वेक्षण, लिडार तकनीक एवं रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग कर संवेदनशील क्षेत्रों की निरंतर निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही चयनित स्थलों पर अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किए जा रहे हैं, जो वर्षा, मिट्टी की नमी एवं ढलान की गति जैसे मापदंडों के आधार पर भूस्खलन की संभावना का पूर्व संकेत प्रदान करते हैं।

चूंकि श्रीलंका भी भूस्खलन एवं अत्यधिक वर्षा से उत्पन्न आपदाओं का सामना करता है, इसलिए वहां से आए प्रतिनिधियों ने इन विषयों में विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने उत्तराखण्ड में अपनाए जा रहे तकनीकी मॉडल, अर्ली वार्निंग सिस्टम, जोखिम आकलन पद्धतियों एवं सामुदायिक आधारित दृष्टिकोण के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की तथा इसे अपने देश में लागू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

इस अवसर पर संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, डाॅ. पीडी माथुर, डाॅ. पूजा राणा आदि मौजूद रहे। 


साझा दृष्टिकोण विकसित करने के लिए उपयोगी-सुमन

देहरादून। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय संवाद एवं अध्ययन भ्रमण अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये विभिन्न देशों के बीच ज्ञान, अनुभव एवं सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम बनते हैं। उत्तराखण्ड जैसे आपदा-संवेदनशील राज्य में विकसित की गई व्यवस्थाएं एवं तकनीकी पहलें अन्य देशों के लिए उपयोगी हो सकती हैं, वहीं हमें भी वैश्विक अनुभवों से सीखने का अवसर मिलता है। ऐसे इंटरैक्शन से न केवल संस्थागत क्षमता सुदृढ़ होती है, बल्कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक समन्वित एवं साझा दृष्टिकोण विकसित होता है, जो अंततः जन-जीवन की सुरक्षा एवं आपदा जोखिम न्यूनीकरण के प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाता है।


एनसीजीजी प्रशिक्षण के क्षेत्र में निभा रहा अहम भूमिका-सिंह

देहरादून। एनसीजीजी के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ एपी सिंह ने बताया कि नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस भारत सरकार द्वारा वर्ष 2014 में स्थापित एक प्रमुख संस्थान है, जो सुशासन, नीतिगत सुधार, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण के क्षेत्र में कार्य करता है। यह संस्थान न केवल भारत के सिविल सेवकों, बल्कि विभिन्न देशों के अधिकारियों के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करता है। एनसीजीजी ने अब तक 52 देशों के सिविल सेवकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए हैं और 5500 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है। श्रीलंका सरकार के साथ हुए समझौते के अंतर्गत एनसीजीजी द्वारा श्रीलंकाई सिविल सेवकों के लिए आपदा प्रबंधन विषय पर विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत यह अध्ययन भ्रमण आयोजित किया गया।

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