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 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को होटल नटराज, ऋषिकेश में अखिल भारतीय महापौर परिषद की 117वीं कार्यकारी समिति बैठक कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 29.78 करोड़ की 3 योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। जिसमें 23.15 करोड़ की 1 योजना का लोकार्पण एवं 6.63 करोड़ की 2 योजनाओं का शिलान्यास शामिल है। 




मुख्यमंत्री ने विभिन्न शहरों के मेयर का स्वागत करते हुए कहा कि सभी मेयर अपने शहर के प्रथम नागरिक और शहरवासियों की आशाओं, अपेक्षाओं और विश्वास के भी प्रतिनिधि हैं। आपके निर्णय का प्रभाव आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा हमारे देश की आत्मा गाँवों में बसती है, तो हमारे नागरिकों के सपने, उनकी आकांक्षाएँ और उनके भविष्य की संभावनाएँ शहरों में आकार लेती हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का उत्तराखंड से विशेष लगाव है। प्रधानमंत्री ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण पलों को उत्तराखंड में बिताया है। वे उत्तराखंड के प्रत्येक क्षेत्र से भली भांति परिचित हैं। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में इस वर्ष चार धाम यात्रा में अब तक कुल 45 दिनों में 30 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने यात्रा की है,जो एक नया रिकॉर्ड है। मुख्यमंत्री ने कहा हमारी प्राथमिकता है कि श्रद्धालुओं की यात्रा सरल, सुगम , सुरक्षित हो। उन्होंने कहा पहले, आदि कैलाश में 500 लोग आते थे, इस वर्ष यात्रा शुरू होने से अब तक प्रति दिन करीब 1000 लोग आदि कैलाश पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया मां पूर्णागिरि मंदिर में भी 24 लाख लोगों ने दर्शन कर लिए हैं। बीते चार सालों में 23 करोड़ से ज्यादा पर्यटक उत्तराखंड आ चुके हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में शहरी विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। आज स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से देश के लाखों शहरों में साफ-सफाई की नई संस्कृति विकसित हुई है। स्मार्ट सिटी मिशन द्वारा आधुनिक एवं सुव्यवस्थित शहरी विकास का मॉडल विकसित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से लाखों गरीब परिवारों का घर का सपना साकार हुआ है। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के माध्यम से रेहड़ी-पटरी वालों को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य हुआ है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में देवभूमि उत्तराखंड के शहरों के विकास को नई गति दी जा रही है। उत्तराखंड में स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत प्रत्येक नगर में ठोस कचरा प्रबंधन और सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है। स्मार्ट सिटी मिशन, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, अमृत मिशन, खुले में शौच मुक्त अभियान और लीगेसी वेस्ट प्रबंधन जैसी विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उत्तराखंड के प्रत्येक नागरिक को दिया जा रहा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी क्षेत्रों के गरीब परिवारों को सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में पहली बार नगर निकायों में अर्बन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्थापित किए गए हैं। राज्य में निराश्रित गौवंशों को आश्रय प्रदान करने के उद्देश्य से आश्रय योजना प्रारम्भ की है। स्थानीय निकायों में श्वानों की बढ़ती संख्या की रोकथाम हेतु एनिमल बर्थ कंट्रोल योजना की शुरुआत की है। हरित क्षेत्रों के विकास और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में भी प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे शहर, दुनिया के समक्ष देश की वास्तविक छवि भी प्रस्तुत करते हैं। शहर सुव्यवस्थित, स्वच्छ, सुरक्षित और विकसित होंगे तो भारत की छवि भी सशक्त, समृद्ध और अग्रणी राष्ट्र के रूप में स्थापित होगी। उन्होंने कहा शहर स्वच्छ होगा तो पूरा भारत स्वच्छ होगा। शहर सुव्यवस्थित होगा, तो पूरा देश सुव्यवस्थित होगा। उन्होंने कहा प्रत्येक शहर सशक्त, सुरक्षित और समृद्ध होगा, तो भारत विकसित राष्ट्र अवश्य बनेगा।



कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने कहा कि विकसित भारत 2047 तर्ज पर हम भी विकसित उत्तराखंड को आगे बढ़ने का काम कर रहे हैं। विकसित भारत की कल्पना को पूरा करने में महानगर को विकसित करने, आत्मनिर्भर बनाने, सौर ऊर्जा, कूड़ा प्रबंधक , रेनवाटर हार्वेस्टिंग, लोकल एवं छोटे उद्योग की स्थापना एवं आत्मनिर्भर महानगर की महत्वपूर्ण भूमिका है।


मुख्यमंत्री ने नगर निगम, ऋषिकेश में ₹1.80 करोड़ की लागत से बने पीपीपी मोड़ पर 10 स्थानों पर ई.वी. चार्जिंग स्टेशनों के निर्माण कार्यों एवं 4.83 करोड़ की लागत से ऋषिकेश के 12 स्थानों पर वर्षा जल का संचय कार्यों का शिलान्यास किया। उन्होंने ₹ 23.15 करोड़ की लागत से नगर निगम ऋषिकेश के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेन्ट योजनान्तर्गत कम्पोस्ट प्लांट एवं सैनेट्री लैन्डफिल साईट लाल पानी बीट निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। साथ ही मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्थलों का भी अवलोकन किया। 


इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री राम सिंह कैड़ा, विधायक श्री प्रेमचंद्र अग्रवाल, मेयर श्री शंभू पासवान, श्रीमती रेनू बाला गुप्ता, श्री आशुतोष एवं देशभर के विभिन्न शहरों से मेयर उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश स्थित ट्रांजिट कैंप का किया औचक निरीक्षण*


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को ऋषिकेश स्थित ट्रांजिट कैंप का औचक निरीक्षण कर चारधाम यात्रा एवं रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया से संबंधित व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने यात्रियों के पंजीकरण, स्वास्थ्य जांच, ठहरने की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने बड़ी संख्या में अन्य राज्यों से आए श्रद्धालुओं से यात्रा का फीडबैक भी लिया। 


*श्रद्धालुओं को रजिस्ट्रेशन के लिए न करना पड़े इंतजार*


मुख्यमंत्री ने ट्रांजिट कैंप में श्रद्धालुओं के लिए की गई पंजीकरण व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कहा यह सुनिश्चित किया जाए की श्रद्धालुओं को रजिस्ट्रेशन के लिए इंतजार ना करना पड़े। उन्होंने स्वास्थ्य जांच केंद्रों का निरीक्षण कर यात्रियों के स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान देने को बात कही। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया। बढ़ती गर्मी को देखते हुए उन्होंने ट्रांजिट कैंप में अतिरिक्त कुलर लगाने तथा पेयजल एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं को पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।


*श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री*


मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बेहतर भीड़ प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ट्रांजिट कैंप में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों से भी संवाद किया। उन्होंने सभी कर्मचारियों को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की सलाह देते हुए कहा कि चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं का "अतिथि देवो भव:" की भावना के साथ स्वागत करें तथा उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें।


*यात्रियों ने मुख्यमंत्री का किया आभार व्यक्त*


निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने ट्रांजिट कैंप में मौजूद श्रद्धालुओं से भी संवाद कर यात्रा व्यवस्थाओं का फीडबैक लिया। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश एवं बिहार सहित विभिन्न राज्यों से आए यात्रियों ने चारधाम यात्रा के लिए की गई व्यवस्थाओं की सराहना की। श्रद्धालुओं ने पंजीकरण, स्वास्थ्य जांच, आवास एवं अन्य सुविधाओं को संतोषजनक बताया। 


कई बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री से भेंट कर उन्हें आशीर्वाद दिया तथा यात्रा को सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं का कुशलक्षेम जाना और उन्हें सुरक्षित एवं सुखद यात्रा की शुभकामनाएं दीं।



*ट्रांजिट कैंप में धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण की भी सराहना*


ट्रांजिट कैंप में श्रद्धालुओं के लिए एलईडी स्क्रीन के माध्यम से रामायण एवं महाभारत के प्रसारण की विशेष व्यवस्था की गई है। यात्रियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे प्रतीक्षा के दौरान उन्हें आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण का अनुभव हो रहा है। उत्तर प्रदेश से आई कामिनी ने कहा कि "वह गुरुवार से अपनी चार धाम यात्रा शुरू करेंगी। आज सुबह उन्होंने रजिस्ट्रेशन करवा लिया है। वह सुबह से ही ट्रांसिट कैंप में बैठी हैं, वहां कूलर, पंखे, पानी की पर्याप्त व्यवस्था है उन्होंने बताया साथ ही टीवी में रामायण चलने से उनका समय भी अच्छा बीत रहा है।"


उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से आए शुभम ने बताया कि "वो अपने 3 दोस्तों के साथ चार धाम यात्रा से वापस ऋषिकेश लौटे आए हैं, आज सुबह से ही वह ट्रांजिट कैंप में हैं। उन्होंने अपनी यात्रा शुरू भी ट्रांसिट कैंप से की थी, जहां उन्हें सुविधा इतनी अच्छे लगी की वह लौटते समय भी यहां ठहरने के लिए आए हैं"। मध्य प्रदेश से आए ओमप्रकाश ने बताया कि वह भी सुबह ही ट्रांजिट कैंप पहुंचे हैं और आगे की यात्रा की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने ट्रांजिट कैंप में ही अपना भोजन किया और स्वास्थ्य जांच करवाई। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा की गई व्यवस्थाओं की सराहना की। 


*ट्रांजिट कैंप में लंगर सेवा के साथ स्थानीय उत्पादों को मिला बढ़ावा*


ट्रांजिट कैंप परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निरंतर लंगर एवं नि:शुल्क भोजन-पानी की व्यवस्था की जा रही है। एक ओर जहाँ  स्वयंसेवकों द्वारा यात्रियों को भोजन की सेवा उपलब्ध कराई जा रही है तो वहीं दूसरी ओर, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा कैंप परिसर में स्थानीय उत्पादों की बिक्री भी की जा रही है। इन स्टॉलों के माध्यम से स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पाद एवं स्वरोजगार से जुड़े सामान यात्रियों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे जहां एक ओर महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय उत्पादों को भी बढ़ावा मिल रहा है।

 

devprayag  accident


कल दिनांक 02/06/26 को देवप्रयाग क्षेत्र में एक इनोवा कार संख्या UK08TA-5433 अनियंत्रित होकर गहरी खाई में दुर्घटनाग्रस्त होते हुए नदी में समा गई थी। वाहन में चालक सहित कुल 08 व्यक्ति सवार थे, जिनमें 05 महिलाएं एवं 03 पुरुष शामिल थे।

उक्त घटनाक्रम में  आज दिनांक 03/06/26 को SDRF द्वारा तत्काल सर्च एवं रेस्क्यू अभियान प्रारम्भ किया गया। वर्तमान में SDRF की डीप डाइविंग टीम द्वारा नदी के भीतर संभावित स्थानों पर गहन सर्चिंग अभियान चलाया जा रहा है।

श्री अर्पण यदुवंशी, सेनानायक SDRF के निर्देशन में SDRF टीमों द्वारा अत्यंत विषम एवं चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच अभियान निरंतर संचालित किया जा रहा है। SDRF के डीप डाइवर्स द्वारा नदी के भीतर उतरकर गहराई वाले क्षेत्रों, तेज बहाव वाले स्थानों एवं संभावित लोकेशनों पर सघन तलाशी ली जा रही है।

वर्तमान में 03 लापता व्यक्तियों की तलाश हेतु SDRF टीमों द्वारा नदी एवं आसपास के सभी संभावित क्षेत्रों में व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अभियान में डीप डाइविंग, राफ्टिंग एवं अन्य आधुनिक खोज एवं बचाव तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।

SDRF द्वारा स्थानीय प्रशासन एवं अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है।



देहरादून:

VC MDDA Banshidhar tiwari


आढ़त बाजार पुनर्विकास परियोजना को मिली रफ्तार, जून तक पूरे होंगे सभी लंबित कार्य

*प्रतिकर लेने के बावजूद कब्जा नहीं छोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई, खुद स्थलीय निरीक्षण करेंगे उपाध्यक्ष


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की महत्वाकांक्षी आढ़त बाजार पुनर्विकास परियोजना को अब नई गति मिलने जा रही है। राजधानी के सबसे महत्वपूर्ण शहरी पुनर्विकास कार्यों में शामिल इस परियोजना के लंबित कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करने के लिए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने सख्त रणनीति तैयार कर ली है। बुधवार को एमडीडीए सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में परियोजना की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया और सभी विभागों को जून 2026 तक लंबित कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। 


आढ़त बाजार पुनर्विकास परियोजना समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्राथमिकताओं में शामिल इस परियोजना में किसी भी स्तर पर लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि परियोजना केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि राजधानी देहरादून के भविष्य की व्यापारिक और शहरी संरचना को नई दिशा देने वाली योजना है। ऐसे में सभी संबंधित विभागों को तय समयसीमा के भीतर अपने दायित्व पूरे करने होंगे।


*रजिस्ट्री प्रक्रिया में लाई जाएगी तेजी*

समीक्षा बैठक में प्रभावित परिसंपत्तियों की रजिस्ट्री प्रक्रिया को लेकर विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि अधिकांश मामलों में प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है, जबकि कुछ रजिस्ट्रियां अभी शेष हैं। इस पर उपाध्यक्ष ने निर्देश दिए कि लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाए। इसके लिए प्रत्येक बुधवार और शनिवार को विशेष रूप से रजिस्ट्री कार्य संपादित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को अनावश्यक परेशानी न हो और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए।


*निर्माण कार्यों की होगी नियमित निगरानी*

समीक्षा बैठक में कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए गए कि परियोजना के अंतर्गत शेष सभी निर्माण कार्य जून 2026 तक हर हाल में पूरे किए जाएं। उपाध्यक्ष ने कहा कि राजधानी की व्यापारिक गतिविधियों को आधुनिक स्वरूप देने वाली इस परियोजना की गुणवत्ता और समयसीमा दोनों अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने अधिकारियों को नियमित स्थलीय निरीक्षण करने तथा प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा आने पर तत्काल समाधान सुनिश्चित करने को कहा।


*आलयम आवासीय योजना पर भी फोकस*

आढ़त बाजार परियोजना के साथ-साथ एमडीडीए की आलयम आवासीय योजना की भी समीक्षा की गई। बैठक में निर्देश दिए गए कि योजना के शेष निर्माण कार्य जून माह तक पूरे किए जाएं और पात्र लाभार्थियों को आवासों का कब्जा देने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए। उपाध्यक्ष ने कहा कि आम नागरिकों को योजनाओं का लाभ समय पर मिलना सरकार और प्राधिकरण की प्राथमिक जिम्मेदारी है।


*18 करोड़ से स्थानांतरित होंगी आधारभूत सुविधाएं*

बैठक में वर्तमान आढ़त बाजार क्षेत्र में मौजूद विद्युत लाइनों और अन्य आधारभूत सुविधाओं के स्थानांतरण की प्रगति पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि शासन स्तर से स्वीकृत लगभग 18 करोड़ रुपये की धनराशि लोक निर्माण विभाग को शीघ्र हस्तांतरित की जाए, ताकि तकनीकी कार्यों में देरी न हो। एमडीडीए का मानना है कि आधारभूत सुविधाओं के स्थानांतरण के बाद परियोजना का अगला चरण और तेजी से आगे बढ़ सकेगा।


*प्रतिकर लेने के बाद भी कब्जा रखने वालों पर सख्ती*

समीक्षा बैठक के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ प्रभावित व्यक्तियों ने प्रतिकर राशि प्राप्त कर ली है, लेकिन उनके निर्माण अब तक नहीं हटाए गए हैं। इस पर उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसे मामलों का वे स्वयं स्थलीय निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण के बाद नियमानुसार  कार्रवाई  करते हुये बल पूर्वक ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की जायेगी । उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजना के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी और सार्वजनिक हित में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।


*राजधानी को मिलेगी नई व्यापारिक पहचान*

आढ़त बाजार पुनर्विकास परियोजना के पूर्ण होने के बाद राजधानी देहरादून को आधुनिक, सुव्यवस्थित और सुविधायुक्त व्यापारिक केंद्र के रूप में नई पहचान मिलेगी। इससे व्यापारियों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी, यातायात व्यवस्था अधिक सुगम बनेगी और क्षेत्र के समग्र शहरी विकास को नई गति मिलेगी। सरकार का मानना है कि यह परियोजना देहरादून के सुनियोजित विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। बैठक में एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया, संयुक्त सचिव प्रत्यूष, वित्त नियंत्रक संजीव कुमार, अधीक्षण अभियंता अतुल गुप्ता, अधिशासी अभियंता सुनील कुमार, लेखपाल नजीर अहमद सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं लोक निर्माण विभाग की ओर से अधिशासी अभियंता राजेश कुमार एवं सहायक अभियंता मुकेश कुमार ने भी बैठक में भाग लिया।


*परियोजना समय पर पूरी करना सर्वोच्च प्राथमिकता : बंशीधर तिवारी*

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा आढ़त बाजार पुनर्विकास परियोजना मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्राथमिकता वाली योजनाओं में शामिल है और इसे तय समयसीमा में पूरा करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। समीक्षा बैठक में सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि लंबित कार्यों को जून 2026 तक हर हाल में पूरा किया जाए। प्रभावित परिसंपत्तियों की रजिस्ट्री प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की नियमित निगरानी की जाएगी। विद्युत लाइनों एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं के स्थानांतरण से जुड़े कार्यों को भी शीघ्र पूरा कराया जाएगा। जिन लोगों ने प्रतिकर राशि प्राप्त कर ली है लेकिन अब तक प्रभावित निर्माण नहीं हटाए हैं, उनके मामलों का मैं स्वयं स्थलीय निरीक्षण करूंगा। हमारा लक्ष्य है कि यह परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी हो और देहरादून को आधुनिक एवं व्यवस्थित व्यापारिक अवसंरचना उपलब्ध हो।


*नियमित मॉनिटरिंग से पूरी होगी परियोजना : मोहन सिंह बर्निया*

एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा आढ़त बाजार पुनर्विकास परियोजना की प्रगति की लगातार समीक्षा की जा रही है। बैठक में सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा किया जाए। रजिस्ट्री प्रक्रिया, निर्माण कार्यों और आधारभूत सुविधाओं के स्थानांतरण की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। विभागीय स्तर पर समन्वय को और मजबूत बनाया गया है ताकि परियोजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की बाधा न आए। हमारा प्रयास है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी कार्य पूरे कर प्रभावितों और लाभार्थियों को परियोजना का लाभ उपलब्ध कराया जा सके।

 स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज का पावन अवतरण दिवस*

75 हजार पौधों के रोपण व संरक्षण का महासंकल्प*

पूज्य संतों ने शतायु, दिव्यायु और दीर्घायु होने की शुभकामनाएँ दीं



ऋषिकेश, 3 जून



इतिहास के कुछ क्षण युगों की दिशा निर्धारित करते हैं। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, आध्यात्मिक जगत के प्रेरणास्रोत, सेवा, साधना और संस्कारों के पर्याय परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के 75वें वर्ष में प्रवेश का पावन अवसर ऐसा ही एक दिव्य, विलक्षण और ऐतिहासिक क्षण है। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के प्रांगण में आज पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज, पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज, पूज्य दीदी माँ साध्वी ऋतंभरा जी, पूज्य गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज, पूज्य महंत रविन्द्र पुरी जी महाराज, पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी, पूज्य संत मुरलीधर जी महाराज, पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतानन्द जी महाराज, पूज्य स्वामी वेदविद्यानन्द जी महाराज हैदराबाद, पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी ईश्वरदास जी महाराज, पूज्य स्वामी दयाराम दास जी महाराज, पूज्य मूर्तिमन्त प्रभु जी, पूज्य स्वामी जयंत सरस्वती जी महाराज, पूज्य स्वामी शुक्राईनाथ जी तथा अनेक पूज्य संतों एवं विभूतियों का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ।


परमार्थ निकेतन द्वारा पूज्य स्वामी जी के अवतरण दिवस को “पर्यावरण महोत्सव” के रूप में मनाते हुए 75 हजार पौधों के रोपण का महासंकल्प संत श्री मुरलीधर जी महाराज ने लिया। इस पावन अभियान का शुभारम्भ परमार्थ निकेतन परिसर में दिव्य रुद्राक्ष के पौधे के रोपण के साथ हुआ, जो वास्तव में आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन, हरियाली और आशा का रोपण है। जैसे ही 75 हजार पौधों के रोपण की घोषणा व्यासपीठ से अनेक श्रद्धालुओं व भक्तों ने अपने संकल्पों को दोहराया कि हम भी अपने जन्मदिवस, विवाहदिवस, पर्व व त्यौहारों के अवसर पर एक से लेकर 11 हजार, 21 हजार पौधों का रोपण करेंगे, ऐसे अनेक संकल्प की गूंजें और हरित जन्मदिवस मनाने की प्रेरणा जागृत हुई। 


पूज्य स्वामी जी का जीवन स्वयं एक जीवंत महाकाव्य है। कैलाश मानसरोवर की दुर्गम एवं गगनचुम्बी हिमालयी चोटियों पर आश्रमों एवं फस्र्ट एड सेंटर्सं की स्थापना, माँ गंगा सहित अनेक नदियों की निर्मलता और अविरलता के लिए वैश्विक जनआंदोलन, ‘‘देवालय से शौचालय’’ तक स्वच्छता का क्रांतिकारी संदेश, विश्व पटल पर सनातन संस्कृति का गौरवपूर्ण उद्घोष, दिव्यांगता-मुक्त भारत का संकल्प, चिकित्सा एवं मानव सेवा के विराट अभियान, गौ संरक्षण, भारतीय विरासत के संवर्धन और राष्ट्र प्रथम की भावना, इन सभी आयामों में पूज्य स्वामी जी का व्यक्तित्व सदैव एक युगदृष्टा के रूप में रहा है।


वे संकल्प, सेवा और संवेदना की ऐसी ज्योति हैं, जो अनगिनत जीवनों को दिशा प्रदान कर रही है। उनका सहज, सरल, निर्मल और माँ गंगा की तरह निष्छल व्यक्तित्व करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।


परमार्थ निकेतन में संत मुरलीधर जी महाराज के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही मासिक मानस कथा की दिव्य व्यासपीठ से देश-विदेश से पधारे पूज्य संतों एवं विभूतियों ने उनके अवतरण दिवस पर शुभाशीष एवं मंगलकामनाएँ अर्पित कीं।


अवतरण दिवस के इस महापर्व पर परमार्थ निकेतन द्वारा हजारों श्रद्धालुओं, संतों, निराश्रितों एवं जरूरतमंदों के लिए महाप्रसाद वितरण का शुभारम्भ किया गया। सेवा, समर्पण और सद्भाव की यह धारा दिनभर अविरल प्रवाहित होती रही।


आज का यह आयोजन एक ऐसे संत के जीवन और संकल्पों का अभिनंदन है, जिन्होंने अपने जीवन को स्वयं तक सीमित न रखकर मानवता, प्रकृति, संस्कृति और राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया। 75 हजार पौधों का यह महासंकल्प आने वाले समय में एक हरित क्रांति का आधार बनेगा और यह संदेश देगा कि जब एक संत संकल्प लेता है, तो वह केवल वर्तमान ही नहीं, भविष्य भी बदल देता है।


माँ गंगा और धरती माँ को हरित अभिनंदन के साथ यह अवतरण दिवस सेवा, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण के एक नए अध्याय का शुभारम्भ है।


पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सभी पूज्य संतों व दिव्य विभूतियों का परमार्थ निकेतन में अभिनन्दन करते हुए कहा कि यह जीवन पूज्य गुरुओं और माता-पिता के दिव्य आशीर्वाद का प्रतिफल है।


“पड़ा था सूना सितार दिल का, हुई अचानक यह जाग तुमसे।

जो जिन्दगी रोग बन गई थी, वह बन गई आज राग तुमसे।

यह मेरे जीवन की रागिनी क्या, मिला है मुझको यह राग तुमसे,

मिला है मुझको यह प्यार तुमसे।”


“मैं तो कब से तेरी शरण हूँ, मेरी ओर तो भी तो ध्यान दो।” प्रभु के श्रीचरणों में प्रार्थना करते हुये कहा कि बस ये जीवन पूज्य महापुरूषों की कृपा से प्रभु की सेवा में लगा रहे, बस यही प्रभु से प्रार्थना है। पूज्य संतों का जो सान्निध्य आज हमें प्राप्त हुआ, यही जीवन का प्रसाद है। जीवन प्रेरणा बने, लक्ष्य के प्रति समर्पित रहे, यही जीवन का सार है।


इस अवसर पर पूज्य मुरारी बापू, पूज्य भाईश्री, पूज्य श्रीश्री रविशंकर जी महाराज सहित अनेक पूज्य संतों, राजनेताओं एवं विभिन्न क्षेत्रों की विभूतियों ने दूरभाष एवं संदेशों के माध्यम से पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ एवं मंगलकामनाएँ अर्पित कीं।


इस पावन अवसर पर पूज्य संतों के उद्बोधन


योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि पूज्य स्वामी जी पूरी मानवता के मुकुटमणि हैं। पूज्य संतों के जीवन का अनुकरण ही हमारा जीवन है। भारत के सभी सर्वोच्च कोटि के महापुरुष, वर्तमान व पूर्व माननीय राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मंत्री, सांसद अथवा विभिन्न राष्ट्रों के राजदूत, सभी का अपार स्नेह पूज्य स्वामी जी के प्रति है। ऐसा कोई दिन नहीं होता, जिस दिन कोई वैश्विक विभूति परमार्थ निकेतन न आती हो। ऐसा अद्भुत व्यक्तित्व है पूज्य स्वामी जी महाराज का।


पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज ने कहा कि पूज्य स्वामी जी ने पर्यावरण संरक्षण के प्रहरी के रूप में पूरे विश्व को जागृत किया और इस ज्ञान से पूरी मानवता को आलोकित कर रहे हैं। भारत के अमृतकाल में आपका 75वें वर्ष में प्रवेश वास्तव में अमृतकाल है। आपने पर्यावरण चेतना की जो अलख जगाई, वह वंदनीय है। उन्होंने कहा कि दस बेटों के बराबर एक बेटी है और सौ बेटों के बराबर एक पेड़ है, और वही पेड़ पूज्य स्वामी जी भेंटस्वरूप पूरी दुनिया को प्रदान करते हैं।


पूज्य दीदी माँ साध्वी ऋतंभरा जी ने कहा कि जो अर्पित व समर्पित हो जाए, वही तो संत है। संत व्यक्ति या वस्त्र नहीं, वह तो एक स्वभाव है। संत के चरणों में समर्पित मन निर्मल हो जाता है। पूज्य स्वामी जी ने धरती की पीड़ा को हरने का कार्य किया। धरती ने पूज्य स्वामी जी को पुत्र के रूप में पुकारा कि आइए और मेरी चुनरी को हरा-भरा बना दीजिए। पूज्य स्वामी जी ने अपना पूरा जीवन इसी हेतु समर्पित कर दिया।


पूज्य स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज ने कहा कि मनुष्य जन्म मिलना और उसके पश्चात उसकी सार्थकता होना अत्यंत दुर्लभ है। हजारों में कोई विरला ही होता है जिसे इसका अनुभव होता है। ऐसे ही हमारे पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज हैं। उन्होंने अपने अहं को तप से गलाकर मानवता, पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रचेतना और राष्ट्रप्रेम को समर्पित जीवन जिया है। गंगा जी की आरती के माध्यम से उन्होंने राष्ट्रचेतना को जागृत किया तथा परमार्थ आश्रम को विराट स्वरूप प्रदान किया।


पूज्य महंत रविन्द्र पुरी जी महाराज ने कहा कि गुरु कुम्हार की तरह होते हैं, जो सहलाकर श्रेष्ठ शिष्यों को गढ़ते हैं। पूज्य स्वामी जी गुरु परम्पराओं के ऐसे ही दिव्य गुरु हैं, जिनका पूरा जीवन मानवता को समर्पित है। मैं पिछले 40 वर्षों से पूज्य स्वामी जी को जानता हूँ, परन्तु उन्होंने कभी अपने व्यक्तिगत जीवन पर भौतिकता की चकाचैंध या राजनीति का रंग नहीं चढ़ने दिया।


पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि आज से 30 वर्ष पूर्व जब मैं भारत आई और मुझे माँ गंगा तथा पूज्य स्वामी जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त हुआ, तब पूज्य स्वामी जी ने मुझे तीन मंत्र दिए, सदैव प्रसन्न रहो, अपने समय और संसाधनों से मानवता की सेवा करो और सेवा का कोई भी अवसर मत चूको। आज यही मंत्र मैं आप सभी को दे रही हूँ।


पूज्य संत मुरलीधर जी महाराज ने कहा कि यह सौभाग्य का विषय है कि पूज्य स्वामी जी महाराज के जन्मदिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन में रहने का अवसर प्राप्त होता है। पूज्य संत हमारे आध्यात्मिक चिकित्सक हैं, जिनकी वाणी से करोड़ों-करोड़ों साधकों को युगों-युगों से आध्यात्मिक उपचार प्राप्त होता रहा है।


पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतानन्द जी महाराज ने कहा कि हरित क्रांति के जनक पूज्य स्वामी जी महाराज हैं। 3 जून को पूज्य स्वामी जी का जन्मदिवस और 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, यह संगम भी अद्भुत है। वर्ष 1984 से लेकर आज तक पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने हरित क्रांति हेतु अद्भुत भूमिका निभाई है। एक दिन ऐसा आएगा जब आपकी हरित क्रांति को पूरा विश्व सराहेगा। पूज्य स्वामी जी ने चाहे कुंभ हो या कोई पर्व, न लिफाफा दिया, न लिफाफा लिया परन्तु हाँ पौधे सबको अवश्य दिए और पौधे ही आपकी पहचान है।


पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी ईश्वरदास जी महाराज ने पूज्य स्वामी जी को अवतरण दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि कैलाश मानसरोवर पर भवन एवं अस्पताल का निर्माण भारत सरकार भी नहीं कर पाई, जो पूज्य स्वामी जी ने कर दिखाया। चाहे गंगा स्वच्छता का विषय हो या मानवता की सेवा, पूज्य स्वामी जी की भूमिका सदैव अग्रणी रही है।


राष्ट्रीय कवि संगम के अध्यक्ष श्री जगदीश मित्तल जी ‘परमार्थी’ ने कहा कि चार वर्ष पूर्व मुझे पूज्य स्वामी जी महाराज के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मैं यही भाव समर्पित करता हूँ “मैं शब्द, आप अर्थ और बाकी सब व्यर्थ।” पूज्य स्वामी जी के संरक्षण में पूरे देश में 5000 से अधिक कवियों का संगठन कार्य कर रहा है और इस संगठन पर उनकी विशेष कृपा है।


इस अवसर पर भारत सहित विश्व के अनेक देशों से पधारी विभूतियों, श्री आई. जी. अग्रवाल जी, श्री प्रवीण भाई, श्री प्रताप भाई, अनेक भक्तों, पूज्य संतों एवं श्रद्धालुओं ने पूज्य स्वामी जी महाराज को अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ अर्पित कीं।



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उत्तराखंड LUCC चिट फंड मामले में चल रही जांच में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 01.06.2026 को मुंबई, महाराष्ट्र में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनकी गिरफ्तारी जांच टीम के लगातार और गहन प्रयासों के बाद की गई, जिसमें भारी मात्रा में वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण, बैंक लेनदेन की जांच, मौखिक साक्ष्य जुटाना और देश के विभिन्न राज्यों में व्यापक फील्ड जांच शामिल थी।


नैनीताल स्थित उत्तराखंड के माननीय उच्च न्यायालय के दिनांक 17.09.2025 के आदेश (WPCRL संख्या 1020/2025 और अन्य मामलों में पारित) के अनुपालन में, CBI, ACB, देहरादून ने 26.11.2025 को IPC, BNS, उत्तराखंड जमाकर्ताओं के हितों का संरक्षण अधिनियम (UPID अधिनियम) और अनियमित जमा योजनाएं प्रतिबंध अधिनियम (BUDS अधिनियम) की विभिन्न धाराओं के तहत एक मामला दर्ज किया था। यह मामला M/s लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) के विभिन्न पदाधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया था, जिसके लिए उत्तराखंड की राज्य पुलिस द्वारा दर्ज की गई 18 FIRs की जांच CBI ने अपने हाथ में ले ली थी।

यह मामला LUCC द्वारा सार्वजनिक जमाओं के अवैध संग्रह, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक साजिश, अनियमित जमा योजनाओं के संचालन, धन के गबन आदि के आरोपों से संबंधित है। इस घोटाले ने उत्तराखंड राज्य के कई जिलों में बड़ी संख्या में जमाकर्ताओं को प्रभावित किया है।

अब तक की जांच में, उत्तराखंड राज्य में जनता के साथ हुई धोखाधड़ी का एक अभूतपूर्व पैमाना सामने आया है। इसमें बहुत बड़ी संख्या में निवेशकों (लगभग एक लाख से अधिक निवेशक) को LUCC की विभिन्न अनियमित जमा योजनाओं में निवेश करने के लिए लुभाया गया था। इन जमाकर्ताओं द्वारा किए गए कुल निवेश/जमा की राशि लगभग 800 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। जांच से पता चला है कि ये दोनों आरोपी, जिन्हें 01.06.2026 को गिरफ्तार किया गया था, मुख्य आरोपियों में से हैं और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर साजिश रचते हुए, LUCC द्वारा चलाई जा रही विभिन्न अनियमित जमा योजनाओं के तहत जमाकर्ताओं से एकत्र की गई धनराशि के संग्रह, प्रबंधन, हेराफेरी और दुरुपयोग में सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जांच के दौरान जुटाए गए सबूत लाखों निवेशकों से जुटाई गई धनराशि के मार्ग-निर्धारण (routing), प्रबंधन और उपयोग से जुड़ी बड़ी साजिश में उनकी संलिप्तता का संकेत देते हैं। ट्रांजिट रिमांड प्राप्त करने के बाद, दोनों आरोपियों को देहरादून स्थित माननीय BUDS अधिनियम न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा।

CBI ने इससे पहले, 12 और 13 मई, 2026 को 05 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें उत्तराखंड में LUCC के 03 वरिष्ठ सहकारी प्रमोटर शामिल थे; इन्होंने उत्तराखंड में जनता से सक्रिय रूप से जमा राशि एकत्र की थी और चेस्ट शाखाओं का प्रबंधन कर रहे थे। ये सभी 05 आरोपी वर्तमान में देहरादून की सुधोवाला जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।

ये गिरफ्तारियां सार्वजनिक जमाओं के अवैध संग्रहण और हेराफेरी के पीछे की बड़ी साजिश का पर्दाफाश करने की CBI की जांच में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई हैं। CBI ने अपराध से अर्जित आय से आरोपियों द्वारा खरीदी गई कई अचल संपत्तियों का विवरण भी प्राप्त किया है, और यह विवरण BUDS अधिनियम के तहत सक्षम प्राधिकारी, यानी उत्तराखंड सरकार के वित्त सचिव के साथ साझा किया गया है; इसके साथ ही, इन संपत्तियों को फ्रीज करने और BUDS अधिनियम के प्रावधानों के तहत पीड़ितों को वितरित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध भी किया गया है। CBI जांच को शीघ्रता से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

आगे की जांच जारी है।

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श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, मानसून अवधि के लिए सभी विभाग रहें पूरी तरह सतर्क*

*रात्रि 10 बजे से सुबह 4 बजे तक यात्रा मार्गों पर वाहनों की आवाजाही पर रोक का सख्ती से पालन हो*

*धामों में क्षमता के अनुरूप दर्शन व्यवस्था के लिए बनाई जाए एसओपी, भीड़ प्रबंधन हो वैज्ञानिक एवं चरणबद्ध*

*होल्डिंग एरिया में श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पार्किंग एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं*

*चारधाम यात्रा से जुड़े जिलों के डीएम और एसपी नियमित समीक्षा कर व्यवस्थाएं और बेहतर बनाएं*


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि चारधाम यात्रा प्रबंधन का मूल मंत्र ‘सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और सतत संवाद’ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेहतर समन्वय, प्रभावी संवाद और सुव्यवस्थित प्रबंधन से यात्रा को और अधिक सुरक्षित एवं सफल बनाया जा सकता है।


मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि चारों धामों में श्रद्धालुओं की संख्या के अनुरूप दर्शन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि रात्रि 10 बजे से सुबह 4 बजे तक चारधाम यात्रा मार्गों पर वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराया जाए। श्रद्धालुओं की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यात्रा मार्गों पर ट्रकों एवं अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े भारी वाहनों को केवल रात्रिकाल में ही अनुमति दी जाए तथा दिन के समय ऐसे वाहनों का संचालन प्रतिबंधित रखा जाए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी धाम अथवा पड़ाव पर निर्धारित क्षमता से अधिक भीड़ होने की स्थिति में नीचे स्थित होल्डिंग एरिया एवं प्रमुख चेक प्वाइंट्स पर वाहनों और श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित किया जाए। भीड़ प्रबंधन के लिए चरणबद्ध व्यवस्था अपनाते हुए यात्रियों को आगे भेजा जाए, जिससे धामों में अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर श्रद्धालुओं को रोका या ठहराया जा रहा है, वहां पार्किंग, भोजन, पेयजल, शौचालय एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि भीड़ नियंत्रण के दौरान श्रद्धालुओं को केवल रोका न जाए, बल्कि उन्हें इसके कारण, संभावित प्रतीक्षा अवधि तथा आगे की व्यवस्थाओं की जानकारी नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने पुलिस, प्रशासन एवं यात्रा प्रबंधन से जुड़े सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को श्रद्धालुओं के प्रति संवेदनशील, विनम्र एवं सहयोगात्मक व्यवहार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रियों को किसी भी परिस्थिति में सूचना के अभाव का सामना नहीं करना चाहिए। इसके लिए सार्वजनिक सूचना प्रणाली , एलईडी डिस्प्ले, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप चौनल एवं एफएम रेडियो के माध्यम से लगातार अद्यतन सूचनाएं प्रसारित की जाएं। मार्ग अवरोध, मौसम में बदलाव, यातायात जाम अथवा दर्शन में विलंब जैसी परिस्थितियों की जानकारी भी समय रहते यात्रियों तक पहुंचाई जाए, जिससे भ्रम एवं असंतोष की स्थिति उत्पन्न न हो।


मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा का प्रथम चरण प्रशासन, पुलिस, आपदा प्रबंधन एवं अन्य संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों से सफलतापूर्वक संचालित हुआ है। अब यात्रा दूसरे और अधिक चुनौतीपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है, जहां मानसून एवं प्रतिकूल मौसम प्रमुख चुनौती होंगे। ऐसे में यात्रा प्रबंधन को और अधिक सतर्कता, नियंत्रण तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ संचालित किया जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को श्रद्धालुओं से प्राप्त फीडबैक, शिकायतों एवं सुझावों की दैनिक समीक्षा करने तथा आवश्यकतानुसार तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।


मुख्यमंत्री ने संवेदनशील स्थलों पर जेसीबी, पोकलैंड मशीनें, सैटेलाइट फोन, एम्बुलेंस एवं राहत-बचाव उपकरणों की अग्रिम व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा, ताकि किसी भी आपात स्थिति अथवा मार्ग अवरोध की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। सभी अधिकारियों को फील्ड में रहकर व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण करने तथा श्रद्धालुओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।


मुख्यमंत्री ने गढ़वाल आयुक्त एवं आईजी गढ़वाल को चारधाम यात्रा की सभी व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा करने तथा श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने चारधाम यात्रा से जुड़े सभी जिलों के जिलाधिकारियों एवं पुलिस अधीक्षकों को यात्रा व्यवस्थाओं की निरंतर निगरानी एवं प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने यात्रा मार्गों पर संचालित होटल, रेस्टोरेंट एवं ढाबों में रेट लिस्ट का अनिवार्य प्रदर्शन सुनिश्चित करने तथा खाद्य पदार्थों की नियमित सैंपलिंग कर गुणवत्ता की जांच करने के निर्देश भी दिए।


बैठक में मुख्यमंत्री ने चारों धामों एवं पैदल यात्रा मार्गों पर स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने पैदल मार्गों पर पर्याप्त संख्या में शौचालयों की व्यवस्था एवं उनकी नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। गंभीर मरीजों को शीघ्र उपचार उपलब्ध कराने के लिए हेली एम्बुलेंस सेवा हेतु राज्य स्तर पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर जिलाधिकारी तत्काल समन्वय स्थापित कर मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचा सकें। मुख्यमंत्री ने केदारनाथ पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त संख्या में शेड स्थापित करने तथा वर्षा एवं धूप से बचाव की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।


बैठक में कैबिनेट मंत्री श्री सतपाल महाराज, श्री भरत चौधरी, विधायक श्री अनिल नौटियाल, राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष श्री विनय कुमार रोहिला, उत्तराखण्ड अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष श्री विश्वास डाबर, मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, सचिव श्री शैलेश बगोली, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, श्री विनय शंकर पाण्डेय, श्री रणवीर सिंह चौहान, श्री विनोद कुमार सुमन, आईजी गढ़वाल श्री राजीव स्वरूप, अपर सचिव श्री बंशीधर तिवारी तथा वर्चुअल माध्यम से विधायक श्री सुरेश चौहान, श्रीमती आशा नौटियाल, बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री हेमंत द्विवेदी, आयुक्त गढ़वाल श्री आनंद स्वरूप एवं संबंधित जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक उपस्थित रहे।

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