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एक दिन पहले ही फर्जी प्रमाणपत्रों के मामले में की थी

कड़ी कार्रवाई*


देहरादून






उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के संकल्प को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का एक्शन जारी है। सोमवार को जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले अफसरों के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया गया है। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर नैनीताल जिले के ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति और अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने पर उत्तराखण्ड जल संस्थान और पेयजल निगम के छह वरिष्ठ और कनिष्ठ इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। राज्य में जन स्वास्थ्य से जुड़े किसी भी मामले में पहली बार इतनी बड़ी कार्रवाई की गई है। 


मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार किया है। एक दिन पूर्व ही सीएम धामी ने NEET UG 2026 की राज्य केंद्रीयकृत काउंसिलिंग के दौरान फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रवेश लेने के मामले में  सख्त एक्शन लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर अब तक इस मामले में शामिल आठ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त किए जा चुके हैं और उनकी प्रवेश प्रक्रिया भी रद्द कर दी गई है। 


जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड होने की शिकायत मिली तो मुख्यमंत्री ने शीर्ष अधिकारियों को पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर दोषी अफसरों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई अमल में लाने का आदेश दिया। इसी क्रम में जिला प्रशासन नैनीताल की रिपोर्ट के आधार पर अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने पर छह अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया गया है। इनमें

जल संस्थान हल्द्वानी के प्रभारी अधीक्षण अभियंता, नैनीताल जल संस्थान के सहायक अभियंता, अपर सहायक अभियंता तथा पेयजल निगम भीमताल के अधिशासी अभियंता, प्रभारी सहायक अभियंता तथा कनिष्ठ अभियंता  शामिल हैं। नैनीताल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को भविष्य में कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। 

जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़  किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। हमारी सरकार के लिए जनहित  सर्वोपरि है और जो भी अधिकारी या कर्मचारी जनता के हितों की अनदेखी करेगा, उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। सभी विभागाध्यक्षों और शीर्ष अधिकारियों को इस संबंध में बार-बार निर्देशित भी किया गया है। 

*पुष्कर सिंह धामी*

*मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड*

 

महाराज जी का जीवन आध्यात्मिक चेतना, समाजसेवा और लोककल्याण के प्रति समर्पण का प्रतीक: मुख्यमंत्री धामी* 

 *आगामी कुंभ को दिव्य और भव्य बनाने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता से कर रही कार्य: मुख्यमंत्री* 

 *देवभूमि की संस्कृति और पहचान की रक्षा के लिए सरकार का संकल्प स्पष्ट, सांस्कृतिक गौरव से नहीं होगा कोई समझौता* 




cabinet satpal  bday



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को ऋषिकुल मैदान, हरिद्वार में कैबिनेट मंत्री श्री सतपाल महाराज के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह  (सेवानिवृत्त) भी उपस्थित थे | इस अवसर पर उन्होंने श्री सतपाल महाराज को जन्मदिवस की  बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर सक्रिय जीवन की कामना की।



मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री सतपाल महाराज ने अपने जीवन के माध्यम से आध्यात्मिक चेतना, समाजसेवा, परोपकार और लोककल्याण का संदेश समाज तक पहुंचाया है। उनके जन्मदिवस पर बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति उनके प्रति जनमानस के प्रेम, श्रद्धा और सम्मान को प्रदर्शित करती है। उन्होंने कहा कि श्री सतपाल महाराज की सरलता, सहजता, समर्पण और दूरदर्शिता ने उन्हें समाज में विशिष्ट पहचान दिलाई है।



मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें श्री सतपाल महाराज के साथ मंत्रिमंडल में कार्य करने का अवसर मिला है। इस दौरान उन्होंने उनके अनुभव, सहज व्यवहार और कार्य के प्रति समर्पण को करीब से देखा है। उन्होंने श्री महाराज को आध्यात्मिक व्यक्तित्व के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के प्रति निरंतर समर्पित कर्मयोगी बताया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव उत्तराखंड में भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि बाबा केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के पुनर्निर्माण, चारधाम यात्रा को सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनाने, केदारखंड और मानसखंड परियोजनाओं तथा संस्कृति एवं परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।


उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास उत्तराखंड की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाना है। इसके परिणामस्वरूप उत्तराखंड धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन के साथ-साथ साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में भी देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन और साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखंड को प्राप्त सम्मान इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की उपलब्धियों को दर्शाते हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी वर्ष धर्मनगरी हरिद्वार में होने वाला कुंभ केवल आस्था का महासंगम नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक शक्ति, सनातन परंपरा और सामाजिक समरसता का विराट उत्सव भी होगा। राज्य सरकार आगामी कुंभ को दिव्य, भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ तैयारियों में जुटी है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि देश-दुनिया से हरिद्वार आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु यहां से आध्यात्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और सुखद अनुभव लेकर लौटे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि साधु-संतों के आशीर्वाद और मार्गदर्शन से हरिद्वार का कुंभ देश-दुनिया के लिए आकर्षण और प्रेरणा का केंद्र बनेगा।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और गौरव की रक्षा के लिए भी निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण विरोधी कानून और दंगारोधी कानून जैसे महत्वपूर्ण निर्णय इसी दिशा में उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से आवश्यक है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने देवभूमि की संस्कृति और पहचान को संरक्षित रखने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रभावी कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि उत्तराखंड की विशिष्ट सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पहचान को अक्षुण्ण रखते हुए विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि सनातन परंपराओं और धार्मिक आस्था को बदनाम करने के प्रयासों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की रक्षा के लिए आगे भी पूरी मजबूती से कार्य करती रहेगी। उन्होंने कहा कि जनसहयोग, संत समाज के मार्गदर्शन और सभी के सामूहिक प्रयासों से उत्तराखंड को विश्व की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी बनाने के संकल्प को साकार करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ा जाएगा।


इस अवसर पर  कैबिनेट मंत्री श्री भरत सिंह चौधरी, अन्य जनप्रतिनिधि  सहित संतगण एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

Aangan ka milan for aanganvadi workers rekha Arya cabinet minster

 

सेवा संकल्प अभियान के तहत पौड़ी जनपद के 1853 आंगनबाड़ी केंद्रों में आयोजित होगा “आंगन का मिलन” कार्यक्रम, मंत्री रेखा आर्या ने अधिकारियों को दिए सफल एवं व्यवस

*आंगनबाड़ी केंद्रों पर योजनाओं की जानकारी के साथ बच्चों के लिए होंगी रचनात्मक गतिविधियां-रेखा आर्या*

*लाभार्थियों से सीधा संवाद कर समस्याओं का करें समाधान, उत्कृष्ट कार्य करने वाली कार्यकत्रियों को किया जाएगा सम्मानित- रेखा आर्या*

पौड़ी:  


कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या की अध्यक्षता में आज  सोमवार को श्रीनगर स्थित वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली मेडिकल कॉलेज, श्रीकोट के मुख्य कॉन्फ्रेंस हॉल में सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित होने वाले “आंगन का मिलन” कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम के सफल संचालन को लेकर मंत्री ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।


बैठक में कैबिनेट मंत्री ने कहा कि जनपद के 1853 आंगनबाड़ी केंद्रों में आयोजित होने वाले “आंगन का मिलन” कार्यक्रम का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों को महिलाओं, बच्चों और ग्रामीण समुदाय से और अधिक जोड़ना तथा सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यक्रमों में अभिभावकों एवं ग्रामीण समुदाय की अधिकतम सहभागिता हो।


उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, गोद भराई, जन्मोत्सव सहित अन्य केंद्र एवं राज्य पोषित योजनाओं की जानकारी आमजन को दी जाएगी साथ ही  पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई पूरी कर ली जाए।


कैबिनेट मंत्री ने निर्देश दिए कि लाभार्थियों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी ली जाए और प्राप्त शिकायतों एवं समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी या बाधा नहीं आनी चाहिए।साथ ही उन्होंने  कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों, गणमान्य नागरिकों, महिला समूहों एवं ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  


विभागीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्यक्रमों की जानकारी व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाई जाए, ताकि अधिक से अधिक पात्र परिवार इनसे लाभान्वित हो सकें।उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि  आंगनबाड़ी केंद्रों में खेलकूद, कला, सांस्कृतिक एवं अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाएगा। 


उन्होंने निर्देश दिए कि अभियान के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं आशा कार्यकत्रियों को सम्मानित किया जाए, ताकि उनके कार्यों को प्रोत्साहन मिले। इसके साथ ही मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, बाल संरक्षण तथा बाल विकास से संबंधित जागरूकता गतिविधियों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जाए।


कैबिनेट मंत्री ने कहा कि कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें। उन्होंने अधिकारियों को कार्यक्रम स्थल पर साफ-सफाई, पेयजल, बैठने की व्यवस्था, आवश्यक प्रचार-प्रसार सामग्री तथा अन्य व्यवस्थाएं समय से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्यक्रमों में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो और सभी तैयारियां आयोजन से पूर्व पूरी कर ली जाएं।


इस अवसर पर बैठक में जिला पंचायत अध्यक्षा रचना बुटोला, नगर पालिका अध्यक्ष पौड़ी हिमानी नेगी, ब्लॉक प्रमुख पौड़ी अस्मिता नेगी, मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी, जिला विकास अधिकारी रमेश चन्द, जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र थपलियाल, जिला पंचायतीराज अधिकारी जितेंद्र कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं पार्टी पदाधिकारी उपस्थित रहे।


देहरादून:


transfer in police department


 पुलिस मुख्यालय, उत्तराखंड द्वारा आज *01 सहायक पुलिस अधीक्षक, 10 सीधी भर्ती के पुलिस उपाधीक्षक एवं 03 पदोन्नत पुलिस उपाधीक्षकों, कुल 14 अधिकारियों की विभिन्न जनपदों एवं इकाइयों में रिक्त पदों के सापेक्ष नवीन तैनाती* के आदेश जारी किए गए हैं।


*1 श्री देव व्रत जोशी, IPS-RR-2023 - सहायक पुलिस अधीक्षक, जनपद हरिद्वार*


*पदोन्नति के फलस्वरूप*

1 श्री राजेश साह — जनपद बागेश्वर

2 श्री प्रदीप पन्त — 40वीं वाहिनी पीएसी, हरिद्वार

3 श्री नदीम अतहर — आईआरबी द्वितीय, देहरादून


*प्रशिक्षण पूर्ण करने उपरान्त*

1 श्री दक्ष शोखंद — हरिद्वार

2 श्री दिव्येश उपाध्याय — पौड़ी गढ़वाल

3 श्री अंकित थपलियाल —  ऊधमसिंहनगर

4 श्री लव शर्मा — नैनीताल

5 सुश्री तनुजा बिष्ट — टिहरी गढ़वाल

6 श्री आदित्य तिवारी — देहरादून

7 श्री समीरण भट्ट — नैनीताल

8 सुश्री दीप्ति कैड़ा — पिथौरागढ़

9 सुश्री अवनी तिवारी — रुद्रप्रयाग

10 श्री विनय सिंह — नैनीताल



हीरो मोटोकॉर्प के सीईओ श्री हर्षवर्धन छिताले ने स्नातक छात्रों को संबोधित किया

आईआईटी रुड़की के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र डॉ. कपिल गर्ग सम्मानित अतिथि के रूप में समारोह में शामिल हुए

1,424 स्नातकोत्तर, डॉक्टोरल और एमएस बाय रिसर्च छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं

518 पीएचडी डिग्रियों के साथ आईआईटी रुड़की ने अब तक की सबसे अधिक डॉक्टोरल डिग्रियां प्रदान कीं


भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) ने आज दीक्षांत समारोह 2026 का समापन किया। इस अवसर पर स्नातकोत्तर और डॉक्टोरल छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। दो दिवसीय दीक्षांत समारोह के दूसरे दिन उच्च शिक्षा, शोध, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता की उपलब्धियों को सम्मानित किया गया।


दीक्षांत समारोह के दूसरे दिन कुल 1,424 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 903 स्नातकोत्तर डिग्रियां, 518 पीएचडी/पीएचडी ड्यूल डिग्रियां और 3 एमएस बाय रिसर्च डिग्रियां शामिल हैं।


समारोह में हीरो मोटोकॉर्प के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्री हर्षवर्धन छिताले मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। ऑयलमैक्स एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक और एशियन एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ. कपिल गर्ग समारोह में सम्मानित अतिथि रहे।


दीक्षांत समारोह 2026 का एक प्रमुख आकर्षण 518 पीएचडी डिग्रियों का प्रदान किया जाना रहा, जो आईआईटी रुड़की द्वारा अब तक प्रदान की गई पीएचडी डिग्रियों की सबसे अधिक संख्या है। यह संस्थान में उन्नत शोध पर बढ़ते जोर और ज्ञान सृजन तथा नवाचार में इसके योगदान को दर्शाता है।


संस्थान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के प्रावधानों के तहत डॉक्टोरल कार्यक्रम से बाहर होने वाले छात्रों को पहली बार एमएस बाय रिसर्च की डिग्री भी प्रदान की।


903 स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों में एम.आर्क., एम.टेक., एम.एससी., एम.यू.आर.पी., एम.बी.ए., पीजी डिप्लोमा, ई-एमबीए और एम.डिजाइन कार्यक्रमों के छात्र शामिल हैं। आधिकारिक डिग्री विवरण के अनुसार, स्नातकोत्तर श्रेणी में 702 छात्र और 201 छात्राएं शामिल हैं, जबकि पीएचडी श्रेणी में 346 छात्र और 172 महिला छात्राएं हैं।


इस वर्ष डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों में स्नातकोत्तर छात्र 906, मास्टर ऑफ आर्किटेक्चर छात्र 12, मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी के 579 छात्र, मास्टर ऑफ साइंस के 174, मास्टर ऑफ अर्बन एंड रूरल प्लानिंग के 11 छात्र, मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) के 77 छात्र, एग्जीक्यूटिव MBA के 29, मास्टर ऑफ डिजाइन के 19, पीजी डिप्लोमा के 2 और एम.एस. बाय रिसर्च के 3 छात्र शामिल रहे।


साथ ही डॉक्टोरल छात्र 518, डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (Ph.D.) के 518 छात्र भी शामिल रहे। कुल डिग्री प्राप्त करने वालों की संख्या 1,424 की रही।


दीक्षांत समारोह के दूसरे दिन संस्थान की स्नातकोत्तर शिक्षा और शोध व्यवस्था पर विशेष ध्यान रहा। डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र विभिन्न विषयों में उन्नत अकादमिक प्रशिक्षण और शोध का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह जटिल तकनीकी और सामाजिक चुनौतियों के समाधान के प्रति आईआईटी रुड़की की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


आईआईटी रुड़की के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन एडवोकेट हरीश साल्वे ने दीक्षांत समारोह 2026 के दूसरे दिन के बारे में कहा, “आज जिन स्नातकोत्तर और डॉक्टोरल छात्रों की उपलब्धियों का जश्न मनाया जा रहा है, वे उन्नत शिक्षा, जिज्ञासा और शोध की उस भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो आईआईटी रुड़की के मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ज्ञान की खोज डिग्री मिलने के साथ समाप्त नहीं होती, बल्कि यह नए सवालों, नई संभावनाओं और अधिक जिम्मेदारियों के द्वार खोलती है। जब ये स्नातक और शोधार्थी शिक्षा, शोध, उद्योग और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ेंगे, तो मुझे विश्वास है कि वे नवाचार और समाज की प्रगति में योगदान देंगे। मैं सभी स्नातक छात्रों और शोधार्थियों को बधाई देता हूं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं।”


आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत ने कहा, “दीक्षांत समारोह का दूसरा दिन हमारे स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और शोधार्थियों की उपलब्धियों का उत्सव है। उनकी शैक्षणिक और शोध यात्राएँ गहन ज्ञान की खोज तथा नई संभावनाओं के सृजन का प्रतिनिधित्व करती हैं। कुल 1,424 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की जाएंगी। इनमें 518 पीएच.डी. उपाधियाँ शामिल हैं, जिनमें 172 महिला शोधार्थी हैं। यह आईआईटी रुड़की के इतिहास में पीएच.डी. उपाधियों की सर्वाधिक संख्या है, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और हमारे शोध तंत्र की मजबूती एवं व्यापकता को दर्शाती है। हमें यह भी प्रसन्नता है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के तहत पहली बार एमएस बाय रिसर्च की उपाधि प्रदान की जा रही है। मुझे विश्वास है कि हमारे स्नातक और शोधार्थी ज्ञान को आगे बढ़ाने, नवाचार को गति देने तथा समाज और राष्ट्र के समक्ष उपस्थित कुछ सबसे गंभीर चुनौतियों के समाधान में अपना योगदान देने का कार्य निरंतर जारी रखेंगे।”


दीक्षांत समारोह 2026 के दूसरे दिन स्नातकोत्तर और डॉक्टोरल छात्रों को कुल 71 पुरस्कार, जिनमें 33 पदक शामिल हैं, प्रदान किए गए। इनमें से 4 पुरस्कार और 19 पदक संस्थान द्वारा स्थापित किए गए थे, जबकि 34 पुरस्कार और 14 पदक दानदाताओं द्वारा प्रायोजित थे।


स्नातकोत्तर छात्रों के लिए संस्थान स्तर के पुरस्कार और पदक, श्री बृजेंद्र एवं श्रीमती सरोज सिंह कैश प्राइज लालावमपुइया, एम.टेक. स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग, मनोरमा एवं शशि बुधिराजा फाउंडेशन अवॉर्ड आर.पी. अभिनया, एम.आर्क. , श्री रवि मोहन मंगल कैश प्राइज साहिल गुप्ता, एम.टेक. ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम्स मैनेजमेंट, फार्माफिलिएट्स एक्सीलेंस अवॉर्ड श्रेष्ठा दत्ता चौधरी, एम.एससी. केमिस्ट्री को मिला।


पीजी और पीएचडी दीक्षांत समारोह 2026 के लिए संस्थान स्तर के पुरस्कार और पदक, डॉ. सुशील शर्मा एक्सीलेंस इन डॉक्टोरल रिसर्च अवॉर्ड शिवानी चौधरी, पीएचडी फिजिक्स, एक्सीलेंस इन डॉक्टोरल रिसर्च अवॉर्ड गिएथ अल वराह, पीएचडी आर्किटेक्चर, एक्सीलेंस इन डॉक्टोरल रिसर्च अवॉर्ड अद्रिजा घोष, पीएचडी केमिस्ट्री, एक्सीलेंस इन डॉक्टोरल रिसर्च अवॉर्ड शैला मीर, पीएचडी मेटलर्जिकल एंड मैटेरियल्स इंजीनियरिंग, एक्सीलेंस इन डॉक्टोरल एक्सीलेंस अवॉर्ड सौम्यदीप बसाक, पीएचडी बायोटेक्नोलॉजी, ए.के. गोयल ग्रीन एनर्जी प्राइज एंड गोल्ड मेडल विद्यसागर तुम्माकुरी, पीएचडी वाटर रिसोर्स डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट को मिला।


हीरो मोटोकॉर्प के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री हर्षवर्धन छिताले ने कहा, “आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह का हिस्सा बनना और यहां से डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों की उपलब्धियों का जश्न मनाना मेरे लिए सम्मान की बात है। तकनीक और उद्योग की दुनिया तेजी से बदल रही है, जिससे नए अवसरों के साथ-साथ जटिल चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं। लगातार सीखने, नवाचार करने और ज्ञान को उपयोगी समाधानों में बदलने की क्षमता अगली पीढ़ी के पेशेवरों और शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण होगी। आईआईटी रुड़की की प्रतिभाओं को तैयार करने और नवाचार को बढ़ावा देने की समृद्ध परंपरा रही है। मुझे विश्वास है कि इसके छात्र उद्योग, शिक्षा, उद्यमिता और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। मैं सभी स्नातक छात्रों को बधाई देता हूं और उनके उज्ज्वल एवं सफल भविष्य की कामना करता हूं।”


ऑयलमैक्स एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक और एशियन एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ. कपिल गर्ग ने कहा, “आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह का हिस्सा बनना और इसके स्नातकोत्तर छात्रों तथा डॉक्टोरल शोधार्थियों की उपलब्धियों का जश्न मनाना मेरे लिए सम्मान की बात है। उद्योग और समाज के सामने मौजूद चुनौतियों के समाधान तैयार करने में उच्च शिक्षा और शोध की महत्वपूर्ण भूमिका है। शोध की यात्रा में जिज्ञासा, निरंतर प्रयास और नए विचारों को तलाशने का साहस जरूरी है। ये गुण हमारे स्नातकों के लिए आने वाले वर्षों में बहुत उपयोगी साबित होंगे। मैं सभी स्नातक छात्रों और शोधार्थियों को बधाई देता हूं तथा उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में ज्ञान, नवाचार और उत्कृष्टता की दिशा में लगातार आगे बढ़ने और सार्थक प्रभाव पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करता हूं।”


दो दिवसीय दीक्षांत समारोह आईआईटी रुड़की के व्यापक अकादमिक तंत्र को दर्शाता है, जिसमें स्नातक शिक्षा, स्नातकोत्तर शिक्षा और डॉक्टोरल शोध शामिल हैं।


दीक्षांत समारोह 2026 के समापन के साथ संस्थान ने अब तक की सबसे अधिक कुल 2,701 डिग्रियां प्रदान की हैं। इनमें 1,277 स्नातक, 903 स्नातकोत्तर, 518 पीएचडी और 3 एमएस बाय रिसर्च डिग्रियां शामिल हैं।


आईआईटी रुड़की के उप निदेशक प्रो. प्रवीण कुमार ने कहा, “हमारे स्नातकोत्तर और डॉक्टोरल छात्रों की उपलब्धियां आईआईटी रुड़की में उपलब्ध अकादमिक और शोध के व्यापक अवसरों को दर्शाती हैं। इस वर्ष प्रदान की गई पीएचडी डिग्रियों की रिकॉर्ड संख्या संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मैं सभी स्नातक छात्रों को बधाई देता हूं और उनके निरंतर सफलता की कामना करता हूं, ताकि वे अपने ज्ञान को आगे बढ़ाते हुए शोध, नवाचार और पेशेवर उत्कृष्टता के माध्यम से समाज में योगदान देते रहें।”


आईआईटी रुड़की के डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एन.के. नवानी ने कहा, “दीक्षांत समारोह हमारे छात्रों की मेहनत, दृढ़ता और बौद्धिक विकास का उत्सव है। मैं सभी स्नातक छात्रों को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई देता हूं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं। मुझे विश्वास है कि वे आईआईटी रुड़की के मूल्यों को आगे बढ़ाएंगे और समाज में सार्थक योगदान देंगे।”


संस्थान ने सभी डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों को हार्दिक बधाई दी और उनकी अकादमिक यात्रा में सहयोग के लिए उनके परिवारों, फैकल्टी सदस्यों, मार्गदर्शकों और कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

 भारतीय सेना और स्थानीय नागरिकों के बीच सहयोग एवं समन्वय को मजबूत करता देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026 संपन्न*

devbhumi cultural festival



श्री बदरीनाथ धाम के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में भारतीय सेना एवं जिला प्रशासन चमोली के संयुक्त तत्वावधान में ऑपरेशन सद्भावना के तहत आयोजित दो दिवसीय ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026’ का रविवार को समापन हुआ। ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ थीम पर आयोजित महोत्सव में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के विजेता एवं उपविजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया।


मुख्यमंत्री ने इससे पहले बामणी गांव पहुंचकर नंदा अष्टमी के पावन अवसर पर आयोजित उत्सव में ग्रामीणों के साथ प्रतिभाग किया। उन्होंने ग्रामीणों को नंदा अष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए देवभूमि की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन पर जोर दिया।


मुख्यमंत्री ने महोत्सव परिसर में लगाए गए स्थानीय उत्पादों, महिला स्वयं सहायता समूहों, हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजनों एवं अन्य प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों एवं पहाड़ी व्यंजनों की जानकारी ली और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को पर्यटन से जोड़ने से सीमांत क्षेत्रों में आजीविका और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।


मुख्यमंत्री ने भारतीय सेना द्वारा लगाई गई सैन्य प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया तथा अत्याधुनिक हथियारों एवं सैन्य उपकरणों के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनी युवाओं को भारतीय सेना की कार्यप्रणाली से परिचित कराने के साथ ही उनमें राष्ट्र सेवा और देशभक्ति की भावना को और मजबूत करने का माध्यम है।


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने समारोह को संबोधित करते हुए भगवान बदरीविशाल की पावन धरा पर आयोजित इस सांस्कृतिक महोत्सव में सेना के वीर जवानों, अधिकारियों, स्थानीय नागरिकों, युवाओं, विद्यार्थियों, कलाकारों एवं श्रद्धालुओं का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड की आत्मा उसकी लोक संस्कृति में बसती है। हमारे लोक नृत्य, लोक गीत, परंपराएं एवं रीति-रिवाज हमारी विशिष्ट पहचान हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और जड़ों से जोड़ने के साथ ही सीमांत क्षेत्रों के युवाओं को भारतीय सेना में सेवा के लिए प्रेरित करते हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘विकास भी, विरासत भी’ के मूल मंत्र के साथ राज्य सरकार संस्कृति एवं विरासत के संरक्षण के साथ विकास कार्यों को गति दे रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में श्री बदरीनाथ धाम मास्टर प्लान के तहत तेजी से कार्य किया जा रहा है। कठिन भौगोलिक एवं मौसमी परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विकास कार्यों को समयबद्ध रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है।


उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के माध्यम से सीमांत क्षेत्रों में सड़क, बिजली, दूरसंचार, पर्यटन एवं आजीविका से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। माणा, नीति और जादुंग जैसे सीमांत क्षेत्रों को पर्यटन एवं आजीविका से जोड़ते हुए स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। सीमांत क्षेत्रों से पलायन रोकना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, होम स्टे, कृषि, बागवानी, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मधुमक्खी पालन, सुगंधित पौधों एवं स्थानीय मसालों की खेती के साथ-साथ शीतकालीन पर्यटन, साहसिक पर्यटन और ‘वेडिंग इन उत्तराखण्ड’ जैसी पहलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 3.10 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं स्थानीय उत्पादों, पहाड़ी व्यंजनों एवं हस्तशिल्प के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सेना एवं स्थानीय नागरिकों के बीच सहयोग, समन्वय और आपसी जुड़ाव को मजबूत करने में इस प्रकार के आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने महोत्सव में माणा गांव के ग्रामीणों द्वारा दी गई पारंपरिक प्रस्तुति की भी सराहना की।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पर्यटन, आयुष, वेलनेस, आईटी एवं सौर ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप इंडिया की रैंकिंग में उत्तराखण्ड को ‘लीडर्स’ श्रेणी प्राप्त हुई है तथा नीति आयोग के SDG इंडेक्स में उत्तराखण्ड ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि विकास की यात्रा में अपनी संस्कृति और जड़ों को साथ लेकर आगे बढ़ना आवश्यक है। लोक भाषाओं, लोक गीतों, लोक नृत्यों, पारंपरिक वेशभूषा, मेलों एवं पर्वों का संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।


मुख्यमंत्री ने देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026 के सफल आयोजन के लिए भारतीय सेना, जिला प्रशासन चमोली एवं सभी आयोजकों को बधाई दी। उन्होंने भगवान बदरीविशाल से सभी के सुख, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।


इस अवसर पर जीओसी-इन-सी सेंट्रल कमान लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, जीओसी उत्तर भारत एरिया लेफ्टिनेंट जनरल डी.जी. मिश्रा, दर्जा मंत्री श्री हरक सिंह, ब्रिगेडियर गौरव बत्रा, श्री माधव प्रसाद सेमवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री गजपाल सिंह बर्त्वाल, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री गजेन्द्र सिंह रावत, भाजपा जिला महामंत्री श्री विनोद कनवासी, श्री अरुण मैठाणी, जिलाधिकारी श्री गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक श्री सुरजीत सिंह पंवार सहित भारतीय सेना के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, स्थानीय नागरिक, युवा, विद्यार्थी एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए अतिथि उपस्थित रहे

 श्री बदरीनाथ धाम में मुख्यमंत्री ने की पूजा-अर्चना, मास्टर प्लान के कार्यों का लिया जायजा*


*भगवान बदरीविशाल से प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की*


*मास्टर प्लान के कार्यों को गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने के निर्देश*


*बदरीनाथ धाम कथा महोत्सव में 150 से अधिक संत-साध्वी एवं 1200 से अधिक हरिभक्त हुए शामिल*

श्री badri vishal CM Dhami



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को श्री बदरीनाथ धाम पहुंचकर भगवान बदरीविशाल के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।


इसके पश्चात मुख्यमंत्री ने बदरीनाथ मास्टर प्लान के अंतर्गत संचालित विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने आस्था पथ सहित अन्य निर्माणाधीन कार्यों का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों से कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ ही धाम की धार्मिक, आध्यात्मिक एवं पारंपरिक गरिमा का विशेष ध्यान रखा जाए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में श्री बदरीनाथ धाम को उसके धार्मिक एवं पौराणिक महत्व के अनुरूप भव्य, दिव्य और सुव्यवस्थित स्वरूप देने की दिशा में तेजी से कार्य किए जा रहे हैं। मास्टर प्लान के अंतर्गत विकसित की जा रही सुविधाओं से धाम में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में धाम की पारंपरिक पहचान, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक स्वरूप के संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।


इसके बाद मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने श्री स्वामीनारायण गुरुकुल राजकोट संस्थान के तत्वावधान में आयोजित ‘बदरीनाथ धाम कथा महोत्सव’ में प्रतिभाग किया। महोत्सव में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए 150 से अधिक संत-साध्वी तथा 1200 से अधिक हरिभक्त शामिल हुए। इस अवसर पर श्री स्वामीनारायण गुरुकुल राजकोट संस्थान के पूज्यपाद महंत स्वामी श्री देवप्रसाददास जी स्वामी, पूज्यपाद सद्गुरुवर्य धर्मवल्लभदास जी स्वामी सहित बड़ी संख्या में संत एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री बदरीनाथ धाम आना अपने आप में एक विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभूति है। भगवान बदरीविशाल की कृपा और आशीर्वाद से इस पावन धाम में संतों एवं श्रद्धालुओं के बीच आयोजित कथा महोत्सव में सहभागी होना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि श्री बदरीनाथ धाम भारत की सनातन चेतना और आध्यात्मिक विरासत का प्रमुख केंद्र है। भारतीय शास्त्रों में भी इस पवित्र धाम की महिमा का विशेष वर्णन मिलता है। यह भूमि सदियों से तप, साधना और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र रही है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की प्राचीन विरासत, सनातन संस्कृति और आस्था के केंद्रों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड के प्रमुख तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार के साथ ही उनकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है।


उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बाबा केदार की भूमि से 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखण्ड का दशक बताया था। राज्य सरकार इस संकल्प को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उत्तराखण्ड को प्रकृति ने अनुपम सौंदर्य के साथ ही अद्वितीय आध्यात्मिक संपदा भी प्रदान की है। चारधाम, पवित्र गंगा-यमुना, हिमालय और हेमकुंड साहिब सहित अनेक धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थल देवभूमि की विशिष्ट पहचान हैं। सरकार का प्रयास है कि इन तीर्थस्थलों का विकास श्रद्धालुओं की सुविधा के अनुरूप सुव्यवस्थित तरीके से हो और उनकी आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा भी अक्षुण्ण रहे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि संत समाज का आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन समाज और राष्ट्र के लिए सदैव प्रेरणादायी रहा है। इस प्रकार के आध्यात्मिक आयोजनों से हमारी सनातन परंपराओं, संस्कृति और जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित संतों एवं श्रद्धालुओं का आभार भी व्यक्त किया।


इस अवसर पर राज्य मंत्री श्री हरक सिंह, श्री माधव प्रसाद सेमवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री गजपाल सिंह बर्त्वाल, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री गजेन्द्र सिंह रावत, भाजपा जिला महामंत्री श्री विनोद कनवासी, श्री अरुण मैठाणी, जिलाधिकारी श्री गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक श्री सुरजीत सिंह पंवार सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

देवभूमि की लोक संस्कृति हमारी पहचान, नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री*


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