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*शहरी विकास मंत्री ने की कुंभ परियोजनाओं की समीक्षा, निर्माण कार्यों का किया स्थलीय निरीक्षण*

*श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सभी विभाग समन्वय के साथ करें कार्य*

हरिद्वार:




शहरी विकास मंत्री श्री राम सिंह कैड़ा ने सोमवार को हरिद्वार पहुंचकर कुंभ मेला-2027 की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की तथा विभिन्न निर्माणाधीन परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण कर उनकी प्रगति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कुंभ मेले से जुड़े सभी कार्यों को पूर्ण गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूरा किया जाए, ताकि आगामी कुंभ मेला दिव्य, भव्य और सुव्यवस्थित रूप में संपन्न हो सके।


शहरी विकास मंत्री ने सीसीआर भवन सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में कुंभ मेला-2027 से संबंधित अवस्थापना विकास कार्यों, निर्माणाधीन परियोजनाओं तथा विभिन्न विभागों द्वारा की जा रही तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सभी विभागों की जिम्मेदारी है कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ करें।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण होने चाहिए। कुंभ मेले के आयोजन में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। प्रत्येक विभाग अपने कार्यों की नियमित निगरानी करे तथा प्रगति की सतत समीक्षा सुनिश्चित करे।


श्री कैड़ा ने कहा कि कुंभ मेले में देश-दुनिया से करोड़ों श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचेंगे। ऐसे में उनके लिए सुगम आवागमन, सुरक्षित वातावरण और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए यह सुनिश्चित करें कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।


उन्होंने सड़कों, पुलों, घाटों, पार्किंग स्थलों तथा अन्य आधारभूत संरचनाओं के निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही यातायात प्रबंधन, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा व्यवस्थाओं को भी समय रहते सुदृढ़ करने पर बल दिया।


शहरी विकास मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगामी मानसून को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्यों में तेजी लाई जाए और वर्षा ऋतु से पहले अधिकतम प्रगति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान निर्माण कार्य प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए वर्तमान समय का अधिकतम उपयोग करते हुए परियोजनाओं को गति प्रदान की जाए।


उन्होंने कहा कि यदि किसी परियोजना में तकनीकी, प्रशासनिक अथवा अन्य किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है तो उसे तत्काल सक्षम अधिकारियों एवं शासन के संज्ञान में लाया जाए, ताकि समय रहते उसका समाधान किया जा सके और कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो।


श्री कैड़ा ने कहा कि गंग नहर पर निर्माणाधीन घाटों के कार्यों को समयबद्ध रूप से पूर्ण कराने के लिए क्लोजर अवधि बढ़ाए जाने हेतु उत्तर प्रदेश के सिंचाई मंत्री से वार्ता कर आवश्यक सहयोग प्राप्त किया जाएगा।


शहरी विकास मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार कुंभ मेला-2027 को ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुंभ मेला की तैयारियों के लिए धनराशि की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।


श्री कैड़ा ने कहा कि वह शीघ्र ही पुनः हरिद्वार आकर कुंभ मेला-2027 से जुड़े कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि अगली समीक्षा तक सभी विभाग अपने-अपने कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति सुनिश्चित करें।


उन्होंने कहा कि कुंभ मेले में आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु हरिद्वार से सकारात्मक अनुभव लेकर जाए तथा देश-दुनिया में उत्तराखंड की उत्कृष्ट छवि स्थापित हो, इसके लिए सभी विभागों को समर्पित भाव से कार्य करना होगा।


*मेलाधिकारी ने प्रस्तुत की प्रगति रिपोर्ट*


बैठक में मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका ने कुंभ मेला-2027 के लिए स्वीकृत कार्यों की प्रगति का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि सभी परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के लिए स्पष्ट टाइमलाइन निर्धारित की गई है तथा उनकी नियमित निगरानी एवं समीक्षा की जा रही है।


उन्होंने बताया कि निर्माणाधीन घाटों के कार्यों को समय पर पूर्ण कराने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजकर गंगा नहर की आगामी क्लोजर अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया गया है।


*शंकराचार्यों को सादर आमंत्रण एवं अखाड़ों से निरंतर संवाद*


बैठक के बाद मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए शहरी विकास मंत्री श्री राम सिंह कैड़ा ने कहा कि राज्य सरकार ने कुंभ मेला-2027 के लिए शंकराचार्यों को भी सादर आमंत्रित किया है। इसके अतिरिक्त सभी अखाड़ों एवं आश्रमों से निरंतर संवाद स्थापित कर उनके सुझाव एवं मार्गदर्शन प्राप्त किए जा रहे हैं।


उन्होंने कहा कि संत समाज, अखाड़ों एवं धार्मिक संस्थाओं का भरपूर सहयोग प्राप्त हो रहा है, जिससे कुंभ मेले के सफल आयोजन का मार्ग और अधिक प्रशस्त हुआ है।


*निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण*


अपने हरिद्वार भ्रमण के दौरान शहरी विकास मंत्री ने सीसीआर-2 भवन तथा एडमिन रोड के निर्माण कार्यों का भी स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण किया जाए तथा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए।


बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (कुंभ मेला) श्री आयुष अग्रवाल, नगर आयुक्त श्री नंदन कुमार, अपर मेलाधिकारी श्री दयानंद सरस्वती, उप मेलाधिकारी श्री आकाश जोशी, मेला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज कुमार वर्मा, अधीक्षण अभियंता यूपीसीएल श्री प्रदीप कुमार, अधीक्षण अभियंता पेयजल निगम श्री जी.एस. तोमर, अधीक्षण अभियंता सिंचाई श्री मनोज सिंह, अधीक्षण अभियंता जल संस्थान श्री यशवीर मलिक, उप निदेशक सूचना श्री मनोज श्रीवास्तव सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

 

संत श्री मुरलीधर जी महाराज के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही श्रीरामचरितमानस कथा में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं संत रामेश्वरानन्द जी महाराज का पावन सान्निध्य, आशीर्वाद एवं उद्बोधन* 

विश्व महासागर दिवस के अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने श्रद्धालुओं एवं राहगीरों की सेवा हेतु शीतल जल प्याऊ का लोकार्पण किया*


ऋषिकेश:

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विश्व महासागर दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने मानवता को झकझोरने वाला संदेश दिया कि आज पृथ्वी का सबसे विशाल हृदय, उसके महासागर, मौन होकर भी एक करुण पुकार कर रहे हैं। यह पुकार किसी एक देश, एक समाज या एक पीढ़ी के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव सभ्यता के लिए है।


संत श्री मुरलीधर जी महाराज के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही श्रीरामचरितमानस कथा के दिव्य अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं संत रामेश्वरानन्द जी महाराज का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पूज्य स्वामी जी ने कहा कि हम इन दिनों भक्ति, प्रेम और करुणा के महासागर प्रभु श्रीराम की कथा का श्रवण कर रहे हैं, परंतु उसी समय संसार के वास्तविक महासागर हमारी की असंवेदनशीलता के कारण प्रदूषण की पीड़ा में हैं।


पूज्य स्वामी जी ने कहा, महासागर केवल जलराशि नहीं हैं। वे पृथ्वी की श्वास हैं, उसकी चेतना हैं, उसके फेफड़े हैं। यदि महासागरों में प्लास्टिक, रसायन और कचरा भर जाएगा, तो मानवता की सांसें भी सुरक्षित नहीं रह पाएंगी।


उन्होंने कहा कि आज मनुष्य ने विकास के नाम पर सुविधा तो अर्जित कर ली, पर संवेदना खो दी। हम एक प्लास्टिक की बोतल कुछ मिनटों के लिए उपयोग करते हैं, लेकिन उसका दुष्प्रभाव सैकड़ों वर्षों तक महासागरों और समुद्री जीवन को भुगतना पड़ता है। जो प्लास्टिक समुद्र में फेंका जाता है, वही सूक्ष्म कण बनकर भोजन, जल और वायु के माध्यम से पुनः हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है।     प्रकृति का नियम स्पष्ट है, जो हम पृथ्वी को देते हैं, वही किसी न किसी रूप में लौटकर हमारे पास आता है।


पूज्य स्वामी जी ने समुद्र मंथन की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे शास्त्रों में समुद्र को रत्नों का स्रोत बताया गया है। समुद्र मंथन से चैदह रत्न निकले थे, अमृत निकला था, लक्ष्मीजी प्रकट हुई थीं। परंतु आज हमारे स्वार्थ और उपभोग की संस्कृति ने समुद्रों को ऐसा बना दिया है कि वहां से रत्न नहीं, बल्कि प्लास्टिक, प्रदूषण और पर्यावरणीय संकट निकल रहा है। यह केवल समुद्र का नहीं, हमारी चेतना का प्रदूषण है।


उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता केवल महासागरों की सफाई की नहीं, बल्कि हमारी मानसिकता की सफाई की है। जब तक हमारा अंतर्मन लोभ, अति-उपभोग और असंवेदनशीलता से मुक्त नहीं होगा, तब तक बाहरी प्रदूषण समाप्त नहीं हो सकता। पर्यावरणीय संकट वास्तव में आध्यात्मिक संकट है। पृथ्वी को बचाने के लिए केवल नीतियां नहीं, बल्कि करुणा, कृतज्ञता और उत्तरदायित्व की आवश्यकता है।


पूज्य स्वामी जी ने कहा कि जहां कथा होती है, वहां प्रेम का वातावरण बनता है, वहां संवेदना जागती है, वहां मनुष्य स्वयं को प्रकृति से जुड़ा हुआ अनुभव करता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में यह संकल्प ले कि वह एकल-उपयोग प्लास्टिक का उपयोग नहीं करेंगे, जल का सम्मान करेंगे और प्रकृति के प्रति     कृतज्ञ रहेंगे तो महासागरों की रक्षा का एक वैश्विक आंदोलन खड़ा हो सकता है।


उन्होंने कहा, समुद्र हमारे कचरे का अंतिम ठिकाना नहीं, हमारे अस्तित्व का मूल स्रोत हैं। यदि महासागर जीवित रहेंगे तो पृथ्वी जीवित रहेगी, यदि पृथ्वी जीवित रहेगी तो मानवता का भविष्य सुरक्षित रहेगा।


विश्व महासागर दिवस के अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने सभी नागरिकों, युवाओं, नीति-निर्माताओं और आध्यात्मिक संस्थाओं से आह्वान किया कि वे प्रकृति को संसाधन नहीं, संबंध मानें, उपभोग नहीं, उपासना का विषय मानें। उन्होंने कहा कि समय आ गया है जब हम यूज एंड थ्रो की संस्कृति को छोड़कर यूज एंड ग्रो की संस्कृति अपनाएं, जहां विकास का अर्थ विनाश नहीं, संरक्षण हो।


पूज्य स्वामी जी ने कहा, जब भी आप किसी नदी, समुद्र या जलधारा को देखें, उसे केवल जल मत समझिए। उसमें भविष्य की पीढ़ियों का जीवन प्रवाहित हो रहा है। महासागरों की रक्षा करना केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं, बल्कि मानवता की रक्षा करना है।


 डोईवाला में दर्दनाक हादसा: मिट्टी की ढांग गिरने से मजदूर की मौत, एक घायल

 डोईवाला:



आज दिनांक 08.06.2026 को डायल 112 के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई कि सौंग नदी केशवपुरी, डोईवाला में मिट्टी की ढांग गिरने से दो व्यक्ति घायल है सूचना पर कोतवाली डोईवाला से पुलिस बल आवश्यक/ बचाव कार्यवाही हेतु रवाना किया गया, डोईवाला पुलिस मौके पर पहुंची तो सौंग नदी केशवपुरी मे एक घायल व्यक्ति जिसका नाम जोगेन्द्र पुत्र रामबीर निवासी धनारी थाना धनारी जिला सम्भल उ0प्र0 उम्र 20 वर्ष को जनता के द्वारा पहले ही चिकित्सालय पहुँचा दिया गया व दूसरा व्यक्ति जिसकी हालत गम्भीर थी नाम हृदेश पुत्र किशनलाल निवासी सगरा थाना मुजरिया जिला बदायूँ हाल पताः- फतेहपुर माजरी डोईवाला उम्र 20 वर्ष को पुलिस द्वारा हिमालयन अस्पताल जौलीग्रान्ट भिजवाया गया। चिकित्सको द्वारा हृदेश उपरोक्त को मृत घोषित कर दिया गया। मृतक के परिजन भी मौके पर पहुच गये, मृतक के पंचायतनामा की कार्यवाही की जायेगी, शव को मोर्चरी मे रखवा दिया गया है । घटना के सम्बन्ध में मौके पर मौजूद व्यक्तियो/प्रत्यक्षदर्शी व मृतक के परिजनो से घटना की जानकारी ली गयी तो ज्ञात हुआ कि यह लोग यहां पर मजदूरी का काम करते है, दिन मे थकान लगने के कारण यह दोनो व्यक्ति मिट्टी की ढांग के नीचे छांव मे आराम कर रहे थे, अचानक मिट्टी की ढांग गिर गयी जिससे उक्त दोनो व्यक्ति ढांग गिरने से मलबे के नीचे दब गये। जिसमे एक व्यक्ति हृदेश उपरोक्त की मृत्यु हो गयी व दूसरा व्यक्ति जोगेन्द्र का उपचार शेड अस्पताल डोईवाला में चल रहा है । 


*मृतक का नाम/ पता* 

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हृदेश पुत्र किशनलाल निवासी सगरा थाना मुजरिया जिला बदायूँ हाल पताः- फतेहपुर माजरी डोईवाला उम्र 20 वर्ष


*घायल का नाम/पता*

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जोगेन्द्र पुत्र रामबीर निवासी धनारी थाना धनारी जिला सम्भल उ0प्र0 उम्र 20 वर्ष

बैंकिंग प्रक्रिया पर सवालः पात्रता जांचे बिना पहले दिया ऋण, अब घर नीलामी नोटिस, डीएम ने मांगी रिपोर्ट*

*बुजुर्ग पिता से मकान की रजिस्ट्री पत्नी के नाम कर खर्चा देने से मुकरा बेटा, भरण पोषण एक्ट में वाद दर्ज,*

*85 वर्षीय बुजुर्ग की शिकायत पर डीएम सख्त, निगम और निजी भूमि पर अवैध कब्जे की जांच के निर्देश*

*बाल स्वास्थ्य पर डीएम का फोकसः क्रोनिक रोगों से पीड़ित बच्चों की पहचान कर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश,*

*शहर के आंतरिक मार्गो का सुधारीकरण, पुलों के प्रोटेक्शन व नदियों के चैनलाइजेशन में लाएं तेजी*

*डीएम के निर्देशः डार्क स्पॉट मुक्त हो शहर और कस्बे, महिलाओं के लिए सुरक्षित बने माहौल*


देहरादून :

DM Ashish dehradun

DM dehradun ashish chauhan



जन समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी समाधान के उद्देश्य से सोमवार को आयोजित ‘समाधान दिवस’ में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने 194 नागरिकों की शिकायतें सुनते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई कर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर शिकायतों को लंबित रखना स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा प्रत्येक विभाग नागरिकों की समस्याओं के समाधान के प्रति संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करे।


समाधान दिवस में भूमि धोखाधड़ी, अतिक्रमण, सीमांकन, ऋण माफी, विधिक सहायता, आर्थिक सहायता तथा पेयजल जैसी समस्याएं प्रमुख रूप से सामने आईं। जिलाधिकारी ने सभी मामलों में संबंधित अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।


जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मधुमेह, हृदय रोग, किडनी रोग, कैंसर और अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों की सूची तैयार कर विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित करने तथा उनके समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़क संपर्क से वंचित गांवों में गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और प्रसव से पूर्व अस्पताल पहुंचाने के लिए माइक्रो स्तर की कार्ययोजना तैयार करने को भी कहा।


मानसून के दृष्टिगत जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग व सिंचाई विभाग के बजट स्वीकृत करते हुए शहर के आंतरिक मार्गों को ब्लैकटॉप कर सुरक्षित बनाने, जिले के 11 प्रमुख पुलों की मरम्मत, सुरक्षा कार्य एवं निचले क्षेत्रों में नदियों के चौनलाइजेशन का कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। नगर निगम को अवैध डंपिंग जोनों की सूची फोटोग्राफ सहित प्रस्तुत करने को कहा गया।


महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी ने जिले के प्रमुख शहरों और कस्बों में डार्क स्पॉट चिन्हित कर वहां पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही विभागों को निष्प्रयोज्य सामग्री की शीघ्र नीलामी, कार्यालयों में स्वच्छता, नियमित निरीक्षण तथा लंबित पेंशन एवं एसीपी मामलों के त्वरित निस्तारण के निर्देश भी दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन मामलों में कोई भी शिकायत नहीं मिलनी चाहिए।

 

समाधान दिवस में विभिन्न व्यक्तिगत शिकायतों पर भी जिलाधिकारी ने गंभीरता दिखाई। मातावाला बाग निवासी 85 वर्षीय सोमप्रकाश द्वारा मकान एवं नगर निगम भूमि पर अवैध कब्जे तथा धन उगाही की शिकायत पर मुख्य नगर आयुक्त को जांच के निर्देश दिए गए।

 

श्यामपुर निवासी रमाशंकर सिंह ने बताया कि उनका पुत्र सरकारी सेवा में है और उन्हें हर महीने 10-15 हजार खर्चा देने की बात पर धोखे से मकान की रजिस्ट्री अपनी पत्नी के नाम करवा दी। अब खर्चा देने से इनकार कर रहा है। जिससे उनके सामने जीवन यापन करने की विकट समस्या खडी हो गई है। इस पर एसडीएम को भरण पोषण अधिनियम के तहत नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

 

यमुना विहार निवासी दिव्यांग रोबिन डिक्रूज के संपत्ति विवाद एवं उत्पीड़न संबंधी मामले में एसडीएम सदर को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। मकान ऋण की अदायगी में असमर्थता के कारण बैंक द्वारा नीलामी नोटिस जारी किए जाने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने बैंक की ऋण स्वीकृति प्रक्रिया पर प्रश्न उठाते हुए एडीएम एवं लीड बैंक अधिकारी को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि यदि आवेदक ऋण जमा करने में सक्षम नही था तो बैंक ने किस आधार पर ऋण आवंटित किया।


राजेश्वर नगर में जल निकासी की समस्या, बालावाला की पेयजल योजना, ऋषिकेश में बडकोट माफी, झीलवाला व रानीपोखरी क्षेत्र में पर्यटन विभाग की भूमि के कथित अवैध विक्रय तथा ठाकुरपुर स्थित खेल मैदान की सुरक्षा संबंधी शिकायतों पर भी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। वहीं एक महिला के उत्पीड़न संबंधी मामले में जिला कार्यक्रम अधिकारी को वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से विधिक सहायता एवं संरक्षण उपलब्ध कराने को कहा गया। समाधान दिवस में विधवा आशा देवी ने प्रधानमंत्री आवास तो सविता बनवाल ने आर्थिक सहायता की गुहार लगाई।

 

जिलाधिकारी ने कहा कि जन समस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी विभागों को स्वतः संज्ञान लेते हुए नागरिकों की शिकायतों का प्रभावी एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करना होगा।


समाधान दिवस के मौके पर अपर जिलाधिकारी(वि.रा) केके मिश्रा, एसडीएम स्मृता परमार, एसडीएम कुमकुम जोशी, परियोजना निदेशक विक्रम सिंह, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार सहित सभी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।                      



 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवर को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री केदार सिंह स्टेडियम, नागथात, देहरादून में आयोजित जौनसार बावर लोक सांस्कृतिक महोत्सव एवं क्रीड़ा समारोह-2026 में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. श्री केदार सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। 

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मुख्यमंत्री ने इस दौरान समरजेंस मोटर मार्ग का चौड़ीकरण और डामरीकरण का कार्य किए जाने, प्राथमिक विद्यालय नागथात को आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित किए जाने, वि.ख. चकराता के बागी -खेड़ा -कोटा- तपलाड मार्ग में यमुना नदी पर 60 मी. स्पैन पुल का निर्माण कार्य किए जाने, चकराता के क्यारापुल - डामटा - म्यूँडा मोटर मार्ग के कि.मी. 22 से छामरी एवं जाखणी तक मोटर मार्ग का निर्माण कार्य, विकासखंड कालसी के अंतर्गत ग्राम सकरोल से ग्राम भोड़ा-भालनू एवं उटेल होते हुए द्वितीय सिद्ध पीठ श्री महासू महाराज थैना तक मोटर मार्ग का निर्माण कार्य , वि.ख. चकराता के अंतर्गत ग्राम खबऊ के अन्तर्गत खेड़ा रमारका- कुन्ना - बुराष्टी में यमुना नदी से पम्पिंग पेयजल योजना बनाए जाने, वि.ख चकराता के जगथान बुरायला मार्ग से ग्राम उदांवा तक सडक निर्माण को PMGSY में प्रस्तावित किए जाने एवं क्षेत्र की कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए द्वीना से बिसोई खुना अलमान तक नए संपर्क मार्ग का निर्माण कार्य किए जाने की घोषणा की।


मुख्यमंत्री ने श्री महासू देवता को नमन करते हुए कहा कि जौनसार बावर सांस्कृतिक पुनरूत्थान समिति पिछले 33 वर्षों से इस उत्सव के माध्यम से धरोहर को बचाने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा जौनसार भाबर प्राकृतिक सुंदरता के साथ अपनी मेहनतकश, सरल और स्वाभिमानी जनता के लिए जाना जाता है। यहां की लोक संस्कृति, एकता की भावना को बढ़ावा एवं भविष्य की पीढ़ियों को अपनी संस्कृति से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा जौनसार- बावर में उन्हें उत्तराखण्ड की मूल आत्मा के साक्षात दर्शन होते हैं। जौनसार की संस्कृति, परंपराएँ, सरलता, आत्मीयता और प्रकृति के प्रति सम्मान, राज्य की समृद्ध विरासत है। 


मुख्यमंत्री ने कहा जौनसार के रासो की थाप, हारूल की गूंज और बौंद जैसी महान परंपराएं  उत्तराखंड, के साथ पूरे देश का गौरव हैं। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में जनजातीय समाज के सम्मान, शिक्षा और समग्र विकास के लिए कई ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं। देश में जनजातीय समुदायों के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान, वन धन योजना, प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन जैसी अनेक योजनाएँ लागू की गईं हैं। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आदिवासी समाज की नीतियां और नियति दोनों बदली हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने उत्तराखंड जनजातीय महोत्सव के माध्यम से संस्कृति व विरासत को एक मंच देने का प्रयास किया है। सरकार ने प्रतिवर्ष जनजातीय खेल महोत्सव आयोजित करने का भी निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान  के अंतर्गत प्रदेश के 128 जनजातीय गांवों को चिन्हित किया है। जिसके तहत इन गांवों में सड़क, बिजली, पानी और इंटरनेट जैसी हर बुनियादी सुविधा पहुंचाकर इनका कायाकल्प करने का काम किया जा रहा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कालसी, मेहरावना, बाजपुर और खटीमा में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। जिसके माध्यम से जनजातीय बच्चों को निःशुल्क विश्वस्तरीय आवासीय शिक्षा की सुविधा मिल रही है। बाजपुर और चकराता में भी नए एकलव्य आवासीय विद्यालयों का निर्माण कार्य जारी है। जनजातीय समाज के बच्चों को पढ़ाई के लिए सरकार, प्राथमिक स्तर से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक छात्रवृत्ति भी प्रदान कर रही है। शैक्षिक विकास के लिए वर्तमान में 16 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय भी संचालित किए जा रहे हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा जनजातीय समुदाय की बेटियों के विवाह के लिए ₹ 50 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। जनजातीय शोध संस्थान के लिए 1 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड की स्थापित की गई है  जौनसार बावर क्षेत्र में सड़कों, पानी और बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए लगातार काम कर रही है। चकराता के विकास के लिए राज्य सरकार ने लगभग 39 करोड़ रुपये की 56 योजनाओं को मंजूरी दी थी। इनमें से 51 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। शेष 5 योजनाओ को भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। पूरे क्षेत्र की सड़कों को मजबूत करने के लिए 1,300 करोड़ रुपये से ज्यादा की योजनाओं पर काम चल रहा है। 


मुख्यमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग 707 और 707A का चौड़ीकरण युद्धस्तर पर जारी है। कालसी-चकराता मार्ग पर जजरेड के पास भूस्खलन की समस्या का स्थायी समाधान किया जा रहा है।  न्यू चकराता टाउनशिप हय्यो डांडा पंपिंग योजना पर लगभग 229 करोड़ रुपये की लागत से काम चल रहा है। जिससे भविष्य में पानी की कभी कमी नहीं होगी। श्री महासू देवता मंदिर परिसर के भव्य विकास के लिए 120 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक मास्टर प्लान पर विकास कार्य भी गतिमान है। 


इस अवसर पर विधायक श्री मुन्ना सिंह चौहान ,पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मधु चौहान, दायित्वधारी श्री गीता राम गौड़, मेला समिति के अध्यक्ष श्री नरेश चौहान, महासचिव मेला समिति श्री नरेन्द्र तोमर, श्री खुशीराम जोशी, श्री जयपाल सिंह तोमर, श्री शूरवीर सिंह तोमर, श्री बलवीर सिंह नेगी एवं अन्य लोग मौजूद रहे।


उत्तराखण्ड में विशेष गहन पुनरीक्षण SIR कार्यक्रम के तहत सचिवालय में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी को मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी. आर. सी. पुरुषोत्तम ने गणना फॉर्म सौंपा।

SIR counting form to leaders Uttarakhand


मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अवगत कराया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के शुद्धिकरण हेतु यह अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी मतदाताओं को गणना फार्म उपलब्ध कराए जाएंगे। आगामी 7 जुलाई तक एक माह के समय में बीएलओ द्वारा मतदाताओं के गणना फार्मों को बीएलओ एप्प के माध्यम से डिजिटिलाइज किया जाएगा। 



इस अवसर पर सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री मस्तू दास मौजूद रहे।


उत्तराखण्ड में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत सोमवार से प्रदेश के सभी मतदाताओं को गणना फार्म बांटने का कार्य प्रारम्भ हो गया है। इसी क्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री महेंद्र भट्ट, इंडियन नेशनल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल, कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (एम) के प्रदेश महासचिव राजकुमार पुरोहित, बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश सचिव श्री जसपाल सिंह को गणना फार्म वितरण किया गया।


REAP परियोजना से मिली उड़ान, ‘हिलान्स’ ब्रांड का सरसों तेल बाजार में बना भरोसेमंद नाम*


*उत्कृष्ट गुणवत्ता के दम पर बाजार में मजबूत पहचान बना रही सरसों तेल यूनिट : सोनम गुप्ता*


*14 ग्राम संगठन, 120 समूह और 764 महिलाएं लिख रहीं आत्मनिर्भरता की नई इबारत*


देहरादून;

kalsi women changes destiny  by making mustard oil


देहरादून जनपद के कालसी विकासखंड स्थित हरीपुर गांव में महिलाओं की मेहनत, लगन और सामूहिक नेतृत्व ने ग्रामीण उद्यमिता का एक प्रेरणादायक मॉडल स्थापित किया है। विकास महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन द्वारा संचालित कोल्ड एवं हॉट प्रेस्ड सरसों तेल यूनिट आज महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की सफल मिसाल बनकर उभरी है।


ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (ग्रामोत्थान) REAP के अंतर्गत सितंबर 2024 में स्थापित इस यूनिट ने न केवल महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया है, बल्कि स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार कर बाजार में अपनी अलग पहचान भी बनाई है।


*10 लाख की लागत से स्थापित हुई यूनिट*

विकास महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन ने REAP परियोजना के सहयोग से 10 लाख रुपये की लागत से सरसों तेल यूनिट स्थापित की। इसमें 6 लाख रुपये परियोजना सहायता, 3 लाख रुपये बैंक ऋण तथा 1 लाख रुपये महिलाओं के स्वयं के अंशदान से जुटाए गए।


आज यह यूनिट ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का स्थायी स्रोत बन चुकी है। यहां लकड़ी की घानी से कोल्ड प्रेस्ड तथा मशीन के माध्यम से हॉट प्रेस्ड तकनीक से शुद्ध सरसों तेल का उत्पादन किया जा रहा है, जिसकी मांग कालसी और विकासनगर क्षेत्र के साथ-साथ देहरादून शहर तक पहुंच चुकी है।


*764 महिलाओं को मिला आर्थिक सशक्तिकरण का मंच*

विकास महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन के अंतर्गत 14 ग्राम संगठन, 120 स्वयं सहायता समूह और 764 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। यूनिट के संचालन, उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन गतिविधियों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी है।


यूनिट से प्रतिमाह लगभग 70 हजार रुपये की आय अर्जित हो रही है, जबकि स्थापना से अब तक 24 से 25 लाख रुपये मूल्य का सरसों तेल बेचा जा चुका है। इसके अतिरिक्त यूनिट में चार से पांच महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार भी प्राप्त हुआ है।


*‘हिलान्स’ ब्रांड को बाजार में मिली पहचान*

महिलाओं द्वारा तैयार किया जा रहा सरसों तेल ‘हिलान्स’ ब्रांड के नाम से बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है। उत्पाद की गुणवत्ता और शुद्धता के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।


इस सफलता का सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि “हाउस ऑफ हिमालय” द्वारा यूनिट से 1700 लीटर सरसों तेल की खरीद की गई, जिससे महिलाओं को पांच लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त हुई। वहीं, प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी रुड़की को भी यहां से सरसों तेल की नियमित आपूर्ति की जा रही है।


वर्तमान में कोल्ड प्रेस्ड तेल 300 रुपये प्रति लीटर तथा हॉट प्रेस्ड तेल 240 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा रहा है।


*सरसों की खल भी बढ़ा रही आमदनी*

तेल उत्पादन के दौरान निकलने वाली सरसों की खल भी महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन गई है। फेडरेशन द्वारा इसे किसानों और पशुपालकों को 25 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा रहा है, जिससे आय के नए अवसर सृजित हुए हैं।


*ऑनलाइन मार्केटिंग से बढ़ा कारोबार*

फेडरेशन की सदस्य रीना चौहान बताती हैं कि समूह द्वारा तैयार सरसों तेल की बिक्री अब ऑनलाइन माध्यमों से भी की जा रही है। ‘हिलसम’ वेबसाइट के जरिए उपभोक्ताओं तक उत्पाद सीधे पहुंच रहा है। इसके अलावा विकास भवन, सरकारी कार्यक्रमों तथा विभिन्न सीएलएफ केंद्रों के माध्यम से भी उत्पादों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।


उन्होंने बताया कि यूनिट की जियो-मैपिंग की प्रक्रिया भी प्रगति पर है, जिससे भविष्य में उपभोक्ता सीधे यूनिट तक पहुंचकर उत्पाद खरीद सकेंगे।


*महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी यह पहल*

रीना चौहान का कहना है कि REAP परियोजना ने ग्रामीण महिलाओं को केवल रोजगार ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और पहचान भी प्रदान की है। आज महिलाएं स्वयं उत्पादन से लेकर विपणन तक की जिम्मेदारी संभाल रही हैं और आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं।


*आत्मनिर्भर गांव की ओर मजबूत कदम*

जिला परियोजना प्रबंधक रीप, सोनम गुप्ता के अनुसार कालसी ब्लॉक में स्थापित यह सरसों तेल यूनिट ग्रामीण उद्यमिता का उत्कृष्ट उदाहरण है। महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को स्थानीय बाजार, हाउस ऑफ हिमालय, विकास भवन तथा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है।


यह पहल मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के आत्मनिर्भर उत्तराखंड और महिला सशक्तिकरण के विजन को धरातल पर साकार करती दिखाई दे रही है। हरीपुर की महिलाओं ने साबित कर दिया है कि अवसर और संसाधन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं न केवल अपनी आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा भी बन सकती हैं।

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