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स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री* 

 *प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में विकास के साथ विरासत के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रही राज्य सरकार।* 

*उत्तराखंड में 3 लाख से अधिक महिलाएं बन चुकी हैं लखपति दीदी, मातृशक्ति ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला।* 

*स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध करा रही सरकार, ‘एक जनपद-दो उत्पाद’ और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ से मिल रही नई पहचान।

*रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि, स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को मिल रही गति।


* *लोकभाषा, लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सांस्कृतिक आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका।* 




मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को रेंजर्स कॉलेज ग्राउंड, देहरादून में अखिल गढ़वाल सभा, देहरादून द्वारा आयोजित उत्तराखंड कौथिक-2026 में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए अखिल गढ़वाल सभा के प्रयासों की सराहना की। 


उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति हमारी पहचान ही नहीं, बल्कि हमारी आत्मा भी है। हमारी लोकभाषाएं, लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वेशभूषा, मेले और पर्व हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत के अभिन्न अंग हैं। इन परंपराओं को संरक्षित रखना और भावी पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।



मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड कौथिक जैसे आयोजन हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने के साथ ही नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, भाषा और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।


 ऐसे आयोजनों से प्रदेश की लोककलाओं, पारंपरिक वेशभूषा, हस्तशिल्प, कारीगरी और खानपान को करीब से जानने-समझने का अवसर मिलता है। 


उन्होंने महोत्सव में विभिन्न स्टॉलों के माध्यम से प्रदर्शित किए गए पारंपरिक हस्तशिल्प, जैविक उत्पादों और उत्तराखंडी व्यंजनों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रयास स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने और उन्हें व्यापक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ‘विकास भी, विरासत भी’ के मूलमंत्र को आत्मसात करते हुए प्रदेश के समग्र विकास के साथ-साथ इसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी सोच के अनुरूप केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में पुनर्विकास के कार्यों के माध्यम से श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। 


साथ ही धार्मिक पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के अंतर्गत सीमांत क्षेत्रों में सड़क, बिजली, दूरसंचार, पर्यटन और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि सीमांत क्षेत्रों का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि उत्तराखंड के युवाओं और स्थानीय नागरिकों को रोजगार के लिए अपने घर और गांव से दूर न जाना पड़े, बल्कि उन्हें अपने ही क्षेत्र में आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों।


 इसी उद्देश्य से स्थानीय उत्पादों, स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। ‘एक जनपद, दो उत्पाद’ और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसी पहलों के माध्यम से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार और व्यापक पहचान उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, होम-स्टे योजना, कृषि, बागवानी, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मधुमक्खी पालन, सुगंधित पौधों तथा स्थानीय मसालों की खेती को प्रोत्साहित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की जा रही है।


उन्होंने कहा कि ‘वेड इन उत्तराखंड’, शीतकालीन पर्यटन और एडवेंचर टूरिज्म जैसी पहलों के माध्यम से प्रदेश में वर्षभर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे स्थानीय युवाओं, उद्यमियों, होटल व्यवसायियों, होम-स्टे संचालकों और छोटे कारोबारियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन के साथ-साथ आयुष, वेलनेस, आईटी और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं को भी विस्तार दे रही है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की मातृशक्ति प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है। राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी का परिणाम है कि ‘लखपति दीदी’ अभियान के तहत प्रदेश की 3 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं स्थानीय उत्पादों, पहाड़ी व्यंजनों, हस्तशिल्प, कृषि और विभिन्न लघु उद्यमों के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड कौथिक में महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों के स्टॉल महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता की इस यात्रा का प्रेरणादायी उदाहरण हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के सतत प्रयासों से उत्तराखंड ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान स्थापित की है। स्टार्टअप इंडिया की राज्यों की रैंकिंग में प्रदेश को ‘लीडर’ श्रेणी में स्थान प्राप्त हुआ है। नीति आयोग के एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2023-24 में भी उत्तराखंड देश के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल रहा और केरल के साथ संयुक्त रूप से सर्वोच्च स्कोर प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि पलायन निवारण आयोग की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह इस बात का संकेत है कि प्रदेश में स्थानीय स्तर पर आजीविका और रोजगार के अवसरों में निरंतर विस्तार हो रहा है।


उन्होंने कहा कि राज्य की सिंगल विंडो सिस्टम को ‘टॉप अचीवर्स’ श्रेणी में सम्मानित किया गया है। भारत सरकार के राज्य खनन तत्परता सूचकांक में उत्तराखंड को श्रेणी-सी में देश में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। इसी प्रकार लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस में भी प्रदेश को ‘अचीवर्स’ श्रेणी में स्थान मिला है। ये उपलब्धियां राज्य में सुशासन, पारदर्शी व्यवस्था, निवेश के अनुकूल वातावरण और आधारभूत सुविधाओं के विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास की इस यात्रा में अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता। आधुनिकता और प्रगति के साथ अपनी लोकभाषाओं, लोककलाओं, पारंपरिक वेशभूषा, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को भी समान महत्व देना आवश्यक है। उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने में समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। उत्तराखंड कौथिक जैसे आयोजन इस दिशा में सराहनीय पहल हैं, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ ही स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को मंच प्रदान करते हैं।


मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अखिल गढ़वाल सभा सहित प्रदेश की विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाएं उत्तराखंड की लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में इसी प्रकार योगदान देती रहेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को देश के श्रेष्ठ राज्यों में शामिल करने के ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ आगे बढ़ रही है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में प्रदेशवासियों का सहयोग, सहभागिता और आशीर्वाद अत्यंत महत्वपूर्ण है।


इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री खजान दास, अखिल गढ़वाल सभा के पदाधिकारी, विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधिगण, श्री नरेंद्र सिंह नेगी एवं श्रीमती संगीता ढोंडियाल सहित अन्य लोक कलाकार, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक, युवा तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के विभिन्न जनपदों में सड़क निर्माण एवं सुधार, धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण, बाध/बैराजों की सुरक्षा, सीवर लाइनों, नलकूप निर्माण, बहुउदेशीय भवन व अन्य विकास कार्यों के साथ ही शहरी स्थानीय निकायों को तृतीय त्रैमासिक किश्त के लिए ₹ 805 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की हैं। 

CM Dhami financial-approve


मुख्यमंत्री द्वारा जनपद अल्मोडा के विधानसभा क्षेत्र रानीखेत के पृथक-पृथक कार्यों हेतु  ₹ 1.72 करोड तथा यू०जे०वी०एन०एल० लि० के 06 बाधों/बैराजों की सुरक्षा एवं सुदृढीकरण हेतु विश्व बैंक पोषित परियोजना के अन्तर्गत ₹ 398.30 करोड की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

  

मुख्यमंत्री द्वारा जनपद चम्पावत के विधानसभा क्षेत्र चम्पावत के ग्राम पंचायत दुधौरी में भगवती मेला स्थल का सौन्दर्यीकरण किये जाने हेतु ₹ 58.67 लाख तथा ग्राम पंचायत क्वारसिंह (अमोड़ी) चम्पावत में भगवती दुर्गा मंदिर का विकास एवं सौन्दर्यीकरण किये जाने हेतु ₹ 47.85 लाख की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


मुख्यमंत्री द्वारा जनपद देहरादून के अन्तर्गत रायपुर में RGICS की मौजूदा पहली मंजिल पर प्रस्तावित शेड का निर्माण किये जाने हेतु ₹ 2.20 करोड़, जनपद पिथौरागढ़ के विधानसभा क्षेत्र डीडीहाट में किरौली स्कूल से जैतबुगा तक सीसी मार्ग का निर्माण किये जाने हेतु ₹ 74.44 लाख तथा जनपद उत्तरकाशी के हर्षिल में मुख्य मार्ग स्थित भवनों (भवन संख्या 1 से 23 तक) के बाह्य सरफेस के सौन्दर्यीकरण (फसॉड ट्रीटमेंट) का प्रथम फेज के कार्य हेतु ₹ 4.92 करोड की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


मुख्यमंत्री द्वारा छठवां राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों की प्रत्याशा में पंचम राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर समस्त शहरी स्थानीय निकायों को तदर्थ आधार पर वित्तीय वर्ष 2026-27 की तृतीय त्रैमासिक किश्त (अक्टूबर से दिसम्बर, 2026) हेतु ₹ 328.28 करोड़ की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


मुख्यमंत्री  द्वारा जनपद हरिद्वार में हरिद्वार की अनुरक्षण शाखा (गंगा) जोन प्रथम भूपतवाला हरिद्वार क्षेत्रान्तर्गत स्थित क्षतिग्रस्त एवं कम व्यास की सीवर लाईनों के प्रतिस्थापन की योजना हेतु ₹ 7.65 करोड़ तथा अनुरक्षण शाखा (गंगा) जोन द्वितीय कनखल हरिद्वार के विभिन्न स्थानों पर सीवर लाईनों के प्रतिस्थापन की योजना हेतु ₹ 6.24 करोड की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

 

मुख्यमंत्री द्वारा जनपद उधमसिंहनगर के विधानसभा क्षेत्र जसपुर हेतु मंदिरों के सुदृढीकरण हेतु ₹ 1.62 करोड, जनपद पिथौरागढ में गुरु गोरखनाथ मंदिर मेला स्थल के विकास एवं सौन्दर्यीकरण किये जाने हेतु ₹ 32.53 लाख तथा जनपद अल्मोड़ा के विधानसभा क्षेत्र जागेश्वर के चलनीछीना में घटीका मंदिर का सौन्दर्यीकरण किये जाने हेतु ₹ 99.39 लाख की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

 

मुख्यमंत्री द्वारा जनपद हरिद्वार में आबकारी विभाग रोशनाबाद के कार्यालय एवं आवासीय भवन के निर्माण हेतु ₹ 9.09 करोड़, जनपद पिथौरागढ़ में नगर निगम, पिथौरागढ़ के कार्यालय भवन निर्माण हेतु ₹ 24.47 करोड तथा जनपद चम्पावत के विधानसभा क्षेत्र चम्पावत में पूर्णागिरी मेले हेतु सेलागांव में बहुउदेशीय प्रशासनिक भवन में मेला मजिस्ट्रेट, मेला अधिकारी, पुलिस, चिकित्सकों आदि को एक स्थान पर कार्य करने की सुविधा हेतु  ₹ 4.00 करोड की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


मुख्यमंत्री द्वारा जनपद देहरादून में विकासखण्ड रायपुर के चक तुनवाला 1/4 भद्रकाली एन्कलेव 1/2 क्षेत्र में नलकूप, ओवर हैड टैंक, राइजिंग मेन तथा वितरण प्रणाली के सुदृढीकरण किये जाने हेतु ₹ 9.84 करोड तथा जनपद देहरादून की दक्षिण शाखा के अन्तर्गत धामावाला वार्ड में डिस्पेंसरी रोड से राजा रोड तक मौजूदा क्षतिग्रस्त सीवर लाईन को बदलने हेतु ₹ 3.80 करोड की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

 

तहसील विकासनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत ढकरानी में विश्व प्रसिद्ध आसन वेटलैंड (रामसर साइट) के प्रतिबंधित बफर जोन में दो दर्जन से अधिक स्टोन क्रेशर बिना किसी पर्यावरणीय अनुमति के संचालित किए जा रहे हैं। ये क्रेशर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT), माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों की खुली अवहेलना कर रहे हैं।



इन अवैध स्टोन क्रेशरों से निकलने Y0प गंदा पानी हजारों बीघा फसलों को बर्बाद कर किसानों की आजीविका छीन चुका है।न अंधाधुंध मशीनी खनन के कारण किसानों के खेत यमुना की भेंट चढ़ गए हैं। यमुना का पानी उत्तराखंड की सीमा में हर बरसात में तबाही मचा रहा है। रात-दिन चलने वाले इन क्रेशरों की तेज आवाज स्थानीय निवासियों के साथ-साथ जलजीवों और वन्यजीवों के जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है, जिससे गांव के लोग अपना घर-बार छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।

आसन वेटलैंड में साइबेरियन पक्षियों सहित अन्य प्रवासी पक्षियों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। चारों ओर सिर्फ स्टोन क्रेशरों का शोर और धूल के गुब्बार फैले हुए हैं। कभी हरा-भरा और सुंदर दिखने वाला यह क्षेत्र अब धूल और यमुना के विशाल गड्ढों में तब्दील हो चुका है। हजारों जीव-जंतुओं का जीवन समाप्त हो चुका है।

उक्त खनिज सामग्री को यमुना जल विद्युत निगम की क्षतिग्रस्त परियोजना के पुलों से हजारों ट्रक एवं अन्य भारी वाहनों द्वारा प्रतिदिन आवागमन कराया जा रहा है। शक्ति नहर के पुलों की समयावधि समाप्त होने तथा क्षतिग्रस्त स्थिति के कारण इन पर भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगाई जा चुकी थी, फिर भी ओवरलोडेड खनन सामग्री से भरे हजारों वाहनों का आवागमन निरंतर जारी है। इससे उत्तराखंड जल विद्युत निगम की परियोजना को गंभीर खतरा बना हुआ है। इनमें से एक पुल पहले भी गिर चुका है। यदि परियोजना को और नुकसान पहुंचता है तो प्रदेश में विद्युत संकट के साथ आर्थिक संकट भी उत्पन्न हो सकता है।

स्थानीय किसानों, पर्यावरणविदों और ग्रामवासियों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि आसन वेटलैंड जैसी अंतरराष्ट्रीय महत्व की साइट को बचाने के लिए अवैध खनन और क्रेशरों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

 

 डोईवाला:

 

 *कोतवाली डोईवाला पर बिग स्क्रीन पर किया गया माननीय प्रधानमंत्री जी के संबोधन का लाइव प्रसारण*

 *एकता दिवस पर स्थानीय पुलिस अधिकारी व कर्मचारियो एवं नागरिको द्वारा ग्राहण की गयी शपथ*

 



*श्री प्रमेन्द्र सिंह डोबाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जनपद देहरादून* के दिशा-निर्देशानुसार आज दिनांक 31 अक्टूबर 2026 को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती (राष्ट्रीय एकता दिवस) के शुभ अवसर पर राष्ट्र की अखंडता और एकता को समर्पित विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कोतवाली डोईवाला द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया,  देश की एकता और सामाजिक सरोकार को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कोतवाली डोईवाला परिसर में एक नि:शुल्क रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में स्थानीय नागरिकों, पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारीगणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और उत्साहपूर्वक रक्तदान किया।  


                       इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार द्वारा देशवासियों को दिए गए विशेष संबोधन का कोतवाली डोईवाला में बड़ी स्क्रीन के माध्यम से लाइव प्रसारण कराया गया। इस सजीव प्रसारण को सुनने और देखने के लिए क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, स्थानीय निवासियों और कोतवाली डोईवाला पुलिस बल के अधिकारियों व कर्मचारियों की भारी उपस्थिति रही । प्रभारी निरीक्षक डोईवाला व व0उ0नि0 डोईवाला द्वारा उक्त सभी कार्यक्रमो का सकुशल संचालन करते हुए आयोजन के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने सरदार वल्लभभाई पटेल के आदर्शों पर चलने और देश की अखंडता व सुरक्षा को बनाए रखने का संकल्प लेकर शपथ ग्रहण करायी गयी ।

 *मुख्यमंत्री धामी ने अपने शिक्षकों के चरण स्पर्श कर लिया आशीर्वाद, वर्षों बाद गुरु-शिष्य के मिलन का भावुक क्षण बना यादगार* 



**जिन शिक्षकों ने कभी विद्यार्थी के रूप में मुख्यमंत्री धामी को दी थी शिक्षा, उन्हीं के सामने आज मुख्यमंत्री के रूप में पहुंचे धामी; शिक्षकों ने पुरानी यादें साझा कर बताया होनहार और बहुमुखी प्रतिभा का धनी विद्यार्थी**


CM Dhami teachers



 जीवन में कुछ मुलाकातें ऐसी होती हैं, जो पद, प्रतिष्ठा और औपचारिकताओं से परे सीधे हृदय को स्पर्श कर जाती हैं। ऐसी ही भावुक और आत्मीय अनुभूति उस समय देखने को मिली, जब मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की मुलाकात देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अपने पूर्व शिक्षकों से हो गई। वर्षों बाद अपने गुरुजनों को सामने देखकर मुख्यमंत्री धामी ने बिना किसी औपचारिकता के आगे बढ़कर अपने दोनों शिक्षकों के चरण स्पर्श किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।


मुख्यमंत्री श्री धामी के लिए यह केवल अपने शिक्षकों से मुलाकात नहीं, बल्कि अपने विद्यार्थी जीवन की जड़ों से दोबारा जुड़ने का आत्मीय अवसर था। कभी जिन गुरुजनों ने उन्हें कक्षा में बैठाकर शिक्षा दी, जीवन के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी, आज उन्हीं के सामने प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में खड़े होना एक भावुक क्षण बन गया।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्राथमिक कक्षा में शिक्षक रहे श्री जोहरा अब्बास तथा कक्षा 12वीं में शिक्षक रहे श्री सुदर्शन वर्मा से उनकी मुलाकात हुई। दोनों शिक्षकों ने मुख्यमंत्री को पहचानते ही अपने पुराने विद्यार्थी के प्रति स्नेह और प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन की यादें साझा करते हुए बताया कि पुष्कर सिंह धामी पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ विद्यालय की अन्य गतिविधियों में भी काफी सक्रिय रहते थे। वे विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लेते थे तथा एक होनहार और सक्रिय विद्यार्थी के रूप में उनकी पहचान थी।


अपने पुराने विद्यार्थी को आज प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में देखकर दोनों शिक्षकों ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन में उनकी सक्रियता, सहभागिता और आगे बढ़ने का उत्साह हमेशा उन्हें याद रहेगा। आज उन्हें इस रूप में देखकर स्वाभाविक रूप से गर्व और खुशी का अनुभव हो रहा है।


 मुख्यमंत्री श्री धामी ने भी अपने शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके योगदान को स्मरण किया।

 डोईवाला चीनी मिल में पेराई सत्र प्रारंभ करने से पूर्व पूजा अर्चना के बाद बॉयलर में अग्नि प्रज्वलित।



आज शुगर मिल डोईवाला में पैराई सत्र 2026-27 के संचालन हेतु बॉयलर का मुहूर्त किया गया। श्री अजयवीर सिंह, पी.सी.एस., अधिशासी निदेशक एवं मिल के अन्य अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना की गई तदोपरांत मिल के अधिशासी निदेशक द्वारा हवन की अग्नि बॉयलर में प्रज्वलित की गई। मिल के पेराई सत्र प्रारंभ करने हेतु अधिकांश आवश्यक तैयारियां पूर्ण की जा चुकी हैं। अधिशासी निदेशक ने बताया कि पेराई सत्र प्रारंभ करने की तिथि फाइनल कर शीघ्र घोषित कर दी जाएगी। इस अवसर पर डी पी शर्मा, सुनील चंद, आशुतोष अग्निहोत्री, अरविन्द कुमार शर्मा, एच एस पांडेय, असित प्रतिहार, जसबीर सिंह, शिवानी वर्मा, सुषमा आर्य, शुभम गिल, वेंकट झा, अवधेश कुमार, विजय प्रसाद, अंकित सिंह, देवेंद्र चमोला, नरेंद्र कुमार, दीपक विश्वकर्मा, सतविंदर संधू, मनोज कुमार, सेठी, प्रकाश, प्रवीण काला , अकरम, दीवान सिंह, संजय सैनी, वेदपाल आर्य, प्रेम सिंह, चंद्रजीत यादव, रामदेव, राजेश, बालकरन, संतोष यादव, इत्यादि   कर्मचारीगण/ अधिकारीगण उपस्थित  रहे। पूजा अर्चना पंडित पूर्णानंद भट्ट एवं जितेंद्र कुमार  द्वारा की गई।

 

उत्तराखण्ड पुलिस मुख्यालय द्वारा सशस्त्र पुलिस, यातायात एवं पीएसी संवर्ग में कार्यरत 08 उपनिरीक्षकों/प्लाटून कमाण्डरों को दलनायक (कंपनी कमांडर)  के पद पर पदोन्नति प्रदान कर नवीन वाहिनियों में तैनाती दी गई है।

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1. श्री दिनेश रावत (आई०आर०बी०-प्रथम)

2. श्री प्रेम राम (आई०आर०बी०-प्रथम)

3. श्री रामप्रवेश प्रसाद (31वीं वाहिनी)

4. श्री दीवान सिंह गुंसाई (46वीं वाहिनी)

5. श्री भारत सिंह (31वीं वाहिनी)

6. श्री विजय सिंह बिष्ट (आई०आर०बी०-द्वितीय)

7. श्री धर्मवीर सिंह (46वीं वाहिनी)

8. श्री सुधीर जुयाल (आई०आर०बी०-प्रथम)


*श्री दीपम सेठ, पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड ने सभी पदोन्नत अधिकारियों को बधाई देते हुए नई जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएं दी हैं।*


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