Halloween party ideas 2015

 हरिद्वार कुंभ-2027 की पहचान को मिलेगा नया विस्तार, मुख्यमंत्री ने किया लोगो, वेबसाइट और गीत का लोकार्पण*

*आस्था, संस्कृति और आधुनिक संचार माध्यमों के जरिए देश-दुनिया तक पहुंचेगा कुंभ का संदेश*

*‘कुंभ का पर्व आ गया’ गीत से गूंजेगा कुंभ के आगमन का संदेश

हरिद्वार:



हरिद्वार कुंभ मेला-2027 की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कुंभ के आधिकारिक लोगो, वेबसाइट और गीत का लोकार्पण किया। इन तीनों माध्यमों के जरिए कुंभ की विशिष्ट पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने, आयोजन से संबंधित सूचनाओं को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने और कुंभ के आगमन का संदेश जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया गया है।


सोमवार को मेला नियंत्रण भवन (सीसीआर) सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कुंभ-2027 के आधिकारिक लोगो, वेबसाइट और गीत का लोकार्पण करते हुए कहा कि कुंभ भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा, सनातन संस्कृति और जनआस्था का विराट उत्सव है। हरिद्वार कुंभ का करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व है। राज्य सरकार कुंभ मेला-2027 के दिव्य एवं भव्य आयोजन के लिए प्रतिबद्ध है। आयोजन को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुगम बनाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि आधिकारिक लोगो, वेबसाइट और गीत कुंभ की पहचान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के साथ श्रद्धालुओं और आमजन को इससे जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


*लोगो में समाहित हरिद्वार की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत*


हरिद्वार कुंभ-2027 का आधिकारिक लोगो हरिद्वार की धार्मिक पहचान, गंगा के प्रति श्रद्धा और सनातन परंपरा की विशेषताओं को एक साथ दर्शाता है। इसमें मां गंगा, हर की पैड़ी क्षेत्र, धनुष पुल और सूर्योदय की दिव्य छटा को दर्शाया गया है। साथ ही शिव प्रतिमा, साधु-संतों, सनातन परंपरा के प्रतीक त्रिशूल एवं डमरू तथा मां मनसा देवी और मां चंडी देवी की पहाड़ियों को भी स्थान दिया गया है।


लोगो में समाहित ये प्रतीक हरिद्वार की आध्यात्मिक महत्ता और कुंभ की सांस्कृतिक विरासत को अभिव्यक्त करते हैं। इसका उपयोग आयोजन से संबंधित प्रचार सामग्री, प्रकाशनों और डिजिटल मंचों पर किया जा सकेगा। इससे कुंभ की दृश्य पहचान को एकरूपता के साथ प्रस्तुत करने और आयोजन के प्रचार-प्रसार को व्यवस्थित स्वरूप देने में मदद मिलेगी।


कुंभ मेला-2027 का लोगो डिजाइन करने के लिए मेला प्रशासन द्वारा राज्य के युवाओं एवं विद्यार्थियों से प्रविष्टियां आमंत्रित की गई थीं। प्राप्त सैकड़ों प्रविष्टियों में से 13 श्रेष्ठ एवं मौलिक डिजाइनों पर चयन समिति ने विचारकरने के बाद विकास कॉलोनी, जगजीतपुर, हरिद्वार निवासी मधु शर्मा द्वारा प्रस्तुत सर्वश्रेष्ठ डिजाइन का चयन किया। इसी डिजाइन के आधार पर हरिद्वार कुंभ-2027 के आधिकारिक लोगो को अंतिम रूप दिया गया।


*आधिकारिक वेबसाइट से कुंभ संबंधी सूचनाओं तक होगी आसान पहुंच*


कुंभ मेला-2027 की आधिकारिक वेबसाइट  https://haridwarkumbh.uk.gov.in के माध्यम से श्रद्धालुओं, आगंतुकों और आमजन तक कुंभ से संबंधित प्रामाणिक जानकारियां पहुंचाई जा सकेंगी।


डिजिटल मंच पर सूचनाओं की उपलब्धता से आयोजन संबंधी जानकारी को व्यवस्थित ढंग से प्रसारित करने और देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों में रहने वाले श्रद्धालुओं को भी कुंभ से जोड़ने में मदद मिलेगी। यह माध्यम कुंभ की तैयारियों और आयोजन से जुड़ी जानकारियों तक लोगों की पहुंच सुगम बनाने के साथ हरिद्वार की धार्मिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने में उपयोगी होगा।


*‘कुंभ का पर्व आ गया’ गीत में झलकेगा आस्था और उल्लास*


कुंभ मेला-2027 के आधिकारिक गीत का लोकार्पण समारोह का प्रमुख आकर्षण रहा। ‘साधु और संतों के मन में हर्ष छा गया, कुंभ का पर्व आ गया’ पंक्तियों से शुरू होने वाला यह गीत कुंभ के आगमन की प्रसन्नता, साधु-संतों के उत्साह और श्रद्धालुओं की आस्था को स्वर देता है।


इस गीत की रचना, गायन और संगीत हरिद्वार निवासी गायक राघव राजा ने किया है। गीत के माध्यम से कुंभ के आगमन का संदेश जन-जन तक पहुंचाने और आयोजन के प्रति सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करने का उद्देश्य है। धार्मिक आयोजनों में गीत-संगीत जनभावनाओं की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम रहा है। इस दृष्टि से आधिकारिक गीत कुंभ की परंपरा, उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण को आमजन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


*परंपरा की गरिमा के साथ आधुनिक संचार माध्यमों का समन्वय*


हरिद्वार कुंभ-2027 उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत, धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर है। आधिकारिक लोगो आयोजन को विशिष्ट दृश्य पहचान प्रदान करेगा, वेबसाइट सूचना के डिजिटल प्रसार का माध्यम बनेगी और गीत कुंभ के आगमन से जुड़ी भावनाओं को अभिव्यक्त करेगा। तीनों माध्यमों के समन्वित उपयोग से कुंभ की धार्मिक महत्ता, सांस्कृतिक वैभव और परंपराओं को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत किया जा सकेगा।


परंपरागत आध्यात्मिक गरिमा के साथ आधुनिक संचार माध्यमों का उपयोग कुंभ के संदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने में सहायक होगा। इन माध्यमों से हरिद्वार की धार्मिक पहचान और कुंभ की विशिष्टता को देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के सामने प्रस्तुत करने में मदद मिलेगी।


*लोकार्पण समारोह में कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित*


कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी, श्री धन सिंह रावत, श्री सुबोध उनियाल, श्री सौरभ बहुगुणा, श्री खजान दास, श्री भरत सिंह चौधरी, श्री मदन कौशिक, श्री प्रदीप बत्रा एवं श्री राम सिंह कैड़ा सहित मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका, जिलाधिकारी श्री मयूर दीक्षित, एसएसपी श्री नवनीत भुल्लर, महानिदेशक सूचना श्री वंशीधर तिवारी, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, अपर मेलाधिकारी श्री दयानंद सरस्वती, अपर जिलाधिकारी श्री जितेन्द्र कुमार तथा उप मेलाधिकारी श्री आकाश जोशी एवं श्री मनजीत सिंह सहित मेला एवं जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 भारतीय जनता पार्टी, संगठनात्मक जिला ऋषिकेश, उत्तराखंड की ओर से जिला अध्यक्ष राजेंद्र तड़ियाल जी द्वारा जिला योजना समिति हेतु डोईवाला नगर पालिका क्षेत्र के अठुरवाला से सभासद प्रदीप नेगी को प्रत्याशी घोषित किया गया ।



जिला अध्यक्ष भाजपा राजेंद्र तड़ियाल का कहना है कि हमें विश्वास है कि वह संगठन की अपेक्षाओं पर खरा उतरते हुए जनहित के विषयों को प्रमुखता देंगे तथा क्षेत्र के विकास और जनसेवा के कार्यों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएंगे।


आपके उज्ज्वल भविष्य एवं सफल कार्यकाल के लिए अनंत मंगलकामनाएँ।


**ग्राम पंचायतें ग्रामीण विकास की आधारशिला, पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण: मुख्यमंत्री**


CM dhami  gram pradhan union


 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से आज मुख्यमंत्री आवास में प्रदेश प्रधान संगठन की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती योगिता केंतुरा रावत के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से ग्रामीण विकास, ग्राम पंचायतों की भूमिका तथा प्रदेश में संचालित विकास योजनाओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की।



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि ग्राम पंचायतें लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण और मजबूत इकाइयों में से एक हैं। गांवों के समग्र विकास, स्थानीय स्तर पर जनसमस्याओं के समाधान तथा सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने में ग्राम प्रधानों एवं पंचायत प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ग्राम प्रधान ग्रामीण क्षेत्रों में जनता और प्रशासन के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं।



मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। गांवों में सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि विकास योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में निरंतर सुधार हो।



मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की वास्तविक शक्ति उसके गांवों, स्थानीय परंपराओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निहित है। गांवों को सशक्त बनाकर ही आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प को साकार किया जा सकता है। इस दिशा में पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता, जनभागीदारी और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों का क्रियान्वयन अत्यंत महत्वपूर्ण है।


उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनहित से जुड़े विषयों पर पंचायत प्रतिनिधियों के सुझावों और अनुभवों को महत्व देती है। ग्राम पंचायतों को विकास की योजनाओं में प्रभावी भागीदारी के अवसर उपलब्ध कराना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को और बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।



मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश प्रधान संगठन और ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि राज्य सरकार के साथ समन्वय बनाकर ग्रामीण विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे।



इस अवसर पर प्रदेश प्रधान संगठन की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती योगिता केंतुरा रावत, श्री पंकज पोखरियाल (प्रदेश प्रभारी), श्री ठाकुर कृपाल सिंह (जिलाध्यक्ष, उत्तरकाशी), श्री शुभम मल (संगठन महामंत्री), श्री सुधीर रतूड़ी (वरिष्ठ उपाध्यक्ष), श्री सुरेंद्र सिंह चौहान (प्रदेश महामंत्री), श्री जसपाल सिंह जस्सी (कुमाऊं मंडल अध्यक्ष), श्री शौर्य लखेड़ा (प्रभारी, कुमाऊं मंडल), श्री नयन कुमार (प्रदेश प्रवक्ता), श्री सुभाष खत्री (ग्राम प्रधान, लासी) एवं श्री संजय राणा (प्रदेश सचिव) उपस्थित रहे।

      

 या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।


ब्रह्मचारिणी माँ की नवरात्र पर्व के दूसरे दिन पूजा-अर्चना की जाती है। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल रहता है। यह जानकारी भविष्य पुराण से ली गई हे।


दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु |

 देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा  

SECOND Brahamcharini navratri,2024 march


इस दिन साधक कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने के लिए भी साधना करते हैं। जिससे उनका जीवन सफल हो सके और अपने सामने आने वाली किसी भी प्रकार की बाधा का सामना आसानी से कर सकें।


माँ दुर्गाजी का यह दूसरा स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनन्तफल देने वाला है। इनकी उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। जीवन के कठिन संघर्षों में भी उसका मन कर्तव्य-पथ से विचलित नहीं होता।

माँ ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन इन्हीं के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन ‘स्वाधिष्ठान ’चक्र में शिथिल होता है। इस चक्र में अवस्थित मनवाला योगी उनकी कृपा और भक्ति प्राप्त करता है।
 

इस दिन ऐसी कन्याओं का पूजन किया जाता है कि जिनका विवाह तय हो गया है लेकिन अभी शादी नहीं हुई है। इन्हें अपने घर बुलाकर पूजन के पश्चात भोजन कराकर वस्त्र, पात्र आदि भेंट किए जाते हैं।

प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में द्वितीय दिन इसका जाप करना चाहिए।

 यह त्योहार पहले दिन (11 अक्टूबर, नारंगी रंग) माँ शैलपुत्री की पूजा के साथ शुरू होता है और नौवें दिन (19 अक्टूबर, मोर जैसा हरा रंग) माँ सिद्धिदात्री की पूजा तक चलता है, और दसवें दिन (20 अक्टूबर) विजयादशमी के साथ इसका समापन होता है। कैलेंडर की पूरी जानकारी दिए गए स्रोत में देखी जा सकती है।

• घटस्थापना (पहला दिन): रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को सुबह का शुभ मुहूर्त सुबह 6:31 बजे से 10:27 बजे तक है, और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:01 बजे से 12:49 बजे तक है।

मुख्यमंत्री ने दी प्रदेशवासियों को शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं।*


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए सभी की सुख समृद्धि एवं मंगलमय जीवन की कामना की है। नवरात्रि पर्व की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि नवरात्रि में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की उपासना का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का यह पर्व हमें मातृशक्ति की उपासना तथा सम्मान की प्रेरणा देता है। समाज में नारी के महत्व को प्रदर्शित करने वाला यह पर्व हमारी संस्कृति एवं परम्परा का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नवरात्रि में कन्या बालिकाओं के सम्मान से जुड़ा विषय है।

घट स्थापना के साथ शारदीय नवरात्रि का प्रारम्भ  आज  से  हो रहा है।  

माता  के  अनेक  रूप है परन्तु नौ रूपों की महिमा अपरम्पार है . 

 

first navratri 21 sep 2025

शैलपुत्री देवी दुर्गाके नौ रूप में पहले स्वरूप में जानी जाती हैं। ये ही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम 'शैलपुत्री' पड़ा।

 नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को 'मूलाधार' चक्र में स्थित करते हैं। यहीं से उनकी योग साधना का प्रारंभ होता है।


वन्दे वंछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम् | 

वृषारूढाम् शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् ||



वृषभ-स्थिता इन माता के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। अपने पूर्व जन्म में ये प्रजापति दक्ष की कन्या के रूप में उत्पन्न हुई थीं, तब इनका नाम 'सती' था। इनका विवाह भगवान शंकरजी से हुआ था।


एक बार प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़ा यज्ञ किया। इसमें उन्होंने सारे देवताओं को अपना-अपना यज्ञ-भाग प्राप्त करने के लिए निमंत्रित किया, किन्तु शंकरजी को उन्होंने इस यज्ञ में निमंत्रित नहीं किया। सती ने जब सुना कि उनके पिता एक अत्यंत विशाल यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे हैं, तब वहाँ जाने के लिए उनका मन विकल हो उठा।

अपनी यह इच्छा उन्होंने शंकरजी को बताई। सारी बातों पर विचार करने के बाद उन्होंने कहा- प्रजापति दक्ष किसी कारणवश हमसे रुष्ट हैं। अपने यज्ञ में उन्होंने सारे देवताओं को निमंत्रित किया है। उनके यज्ञ-भाग भी उन्हें समर्पित किए हैं, किन्तु हमें जान-बूझकर नहीं बुलाया है। कोई सूचना तक नहीं भेजी है। ऐसी स्थिति में तुम्हारा वहाँ जाना किसी प्रकार भी श्रेयस्कर नहीं होगा।'

शंकरजी के इस उपदेश से सती का प्रबोध नहीं हुआ। पिता का यज्ञ देखने, वहाँ जाकर माता और बहनों से मिलने की उनकी व्यग्रता किसी प्रकार भी कम न हो सकी। उनका प्रबल आग्रह देखकर भगवान शंकरजी ने उन्हें वहाँ जाने की अनुमति दे दी।

सती ने पिता के घर पहुँचकर देखा कि कोई भी उनसे आदर और प्रेम के साथ बातचीत नहीं कर रहा है। सारे लोग मुँह फेरे हुए हैं। केवल उनकी माता ने स्नेह से उन्हें गले लगाया। बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव भरे हुए थे।

परिजनों के इस व्यवहार से उनके मन को बहुत क्लेश पहुँचा। उन्होंने यह भी देखा कि वहाँ चतुर्दिक भगवान शंकरजी के प्रति तिरस्कार का भाव भरा हुआ है। दक्ष ने उनके प्रति कुछ अपमानजनक वचन भी कहे। यह सब देखकर सती का हृदय क्षोभ, ग्लानि और क्रोध से संतप्त हो उठा। उन्होंने सोचा भगवान शंकरजी की बात न मान, यहाँ आकर मैंने बहुत बड़ी गलती की है।

वे अपने पति भगवान शंकर के इस अपमान को सह न सकीं। उन्होंने अपने उस रूप को तत्क्षण वहीं योगाग्नि द्वारा जलाकर भस्म कर दिया। वज्रपात के समान इस दारुण-दुःखद घटना को सुनकर शंकरजी ने क्रुद्ध होअपने गणों को भेजकर दक्ष के उस यज्ञ का पूर्णतः विध्वंस करा दिया।

सती ने योगाग्नि द्वारा अपने शरीर को भस्म कर अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया। इस बार वे 'शैलपुत्री' नाम से विख्यात हुर्ईं। पार्वती, हैमवती भी उन्हीं के नाम हैं। उपनिषद् की एक कथा के अनुसार इन्हीं ने हैमवती स्वरूप से देवताओं का गर्व-भंजन किया था।


'शैलपुत्री' देवी का विवाह भी शंकरजी से ही हुआ। पूर्वजन्म की भाँति इस जन्म में भी वे शिवजी की ही अर्द्धांगिनी बनीं। नवदुर्गाओं में प्रथम शैलपुत्री दुर्गा का महत्व और शक्तियाँ अनंत हैं।



*नवरात्रि के 9 दिन देवी कृपा के ल‍िए ये रंग पहने👇आज का रंग नारंगी*

नवरात्रि में मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। देवी के नौ स्वरूपों की आराधना करने से जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। 

नवरात्रि के प्रत्येक दिन के लिए एक विशेष रंग शुभ है  प्रत्येक देवी के स्वरूप और उनकी ऊर्जा से जुड़े होते हैं। इन रंगों को धारण करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। 


*पहला दिन: नारंगी रंग*

पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन नारंगी रंग पहनना ऊर्जा, उमंग और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। नारंगी रंग धारण करने से जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है।  



 





• *पितृ पक्ष के दौरान श्री बदरीनाथ धाम  पहुंचे पौने दो लाख श्रद्धालु* 


*बदरी-केदार धाम में 36.50 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन; चारधाम पहुंचे 56 लाख तीर्थयात्री: हेमंत द्विवेदी* 


श्री बदरीनाथ धाम: 10 अक्टूबर 

सर्वपितृ अमावस्या के पावन अवसर पर शनिवार को श्री बदरीनाथ धाम स्थित ब्रह्म कपाल तीर्थ में देश विदेश के हजारों श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की आत्मा की शांति एवं मुक्ति की कामना के साथ पिंडदान किया। अलकनंदा नदी के पवित्र तट पर भी श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से स्नान पश्चात तर्पण कर पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्म कपाल में पिंडदान और तर्पण का विशेष महत्व है। ब्रह्मकपाल तथा अलकनंदा तट पर तीर्थ ब्रह्मकपाल तीर्थ पुरोहितों आचार्यों ने विधि-विधान से पितृ कार्य संपन्न करवाये इसी के साथ पितृ पक्ष का समापन हो गया।


 अमावस्या समापन के बाद कल  रविवार से शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व प्रारंभ हो रहा है। इस अवसर पर श्री बदरीनाथ मंदिर प्रांगण में विधि-विधान के साथ घटस्थापना की जाएगी। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंच रहे श्रद्धालु भगवान बदरीविशाल के दर्शन के साथ ही नवरात्रि के पावन अवसर पर पूजा-अर्चना  करेंगे।


 *श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने चारधाम यात्रा पर पहुंच रहे सभी श्रद्धालुओं को शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं की सुखद, सुरक्षित एवं मंगलमय यात्रा की कामना की है।  बदरी-केदार धाम में बढ़ती तीर्थयात्रियों की संख्या, सर्वपितृ अमावस्या पर धार्मिक अनुष्ठानों और नवरात्रि के शुभारंभ से श्री बदरीनाथ तथा श्री केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं में उत्साह है। पितृ पक्ष के दौरान पौने दो लाख श्रद्धालुओं ने श्री बदरीनाथ धाम में दर्शन किये।*

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 *बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि श्री बदरीनाथ एवं श्री केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब लगातार उमड़ रहा है। 9 अक्टूबर 2026 तक दोनों धामों में कुल 36,50,112 तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। इनमें श्री बदरीनाथ धाम में 19,57,224 तथा श्री केदारनाथ धाम में 16,92,888 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। वहीं, श्री हेमकुंड साहिब सहित चारधाम यात्रा में पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या 56 लाख तक पहुंच गई है। यात्रा के प्रति श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है और दोनों धामों में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में यात्री पहुंच रहे हैं।*

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यात्रा पंजीकरण में भी उत्साह है बदरी-केदार के लिए 45.19 लाख से अधिक पंजीकरण हुए है श्री बदरीनाथ एवं श्री केदारनाथ धाम यात्रा के लिए पंजीकरण का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। 9 अक्टूबर 2026 तक श्री बदरीनाथ धाम के लिए 21,75,347 तथा श्री केदारनाथ धाम के लिए 23,44,197 पंजीकरण दर्ज किए गए हैं। इस प्रकार दोनों धामों के लिए कुल 45,19,544 पंजीकरण हो चुके हैं। वहीं, श्री हेमकुंड साहिब सहित चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण की कुल संख्या 71 लाख तक पहुंच गई है। 


 पितृ पक्ष समापन अवसर पर बीकेटीसी सदस्य धीरज पंचभैया "मोनू",बदरीनाथ धाम प्रभारी अधिकारी राजन नैथानी, प्रोटोकॉल अधिकारी राकेश सेमवाल, धर्माधिकारी  स्वयंबर सेमवाल, वेदपाठी डा.रवीन्द्र भट्ट, वाणी विलास डिमरी, अमित बंदोलिया,ब्रह्मकपाल तीर्थ पुरोहित समाज अध्यक्ष अमित सती, उपाध्यक्ष उमेश सती, संदीप कपरवाण बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़, अतुल डिमरी ब्रह्मकपाल तीर्थ पुरोहित क्रमश हरीश सती,धीरेन्द्र हटवाल, शैलेंद्र हटवाल, प्रदीप नौटियाल, पंडा पंचायत अध्यक्ष प्रवीण ध्यानी, अशोक टोडरिया, वैभव उनियाल, योगंबर नेगी, राहुल नेगी, राकेश झिंक्वाण विकास सनवाल,संजय भंडारी हरीश जोशी, सुरेंद्र बिष्ट, सत्येंद्र झिंक्वाण हरीश बिष्ट आदि मौजूद रहे।


 

आज दिनांक 10 अक्टूबर 2026 को महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती रुचि भट्ट के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की महिला कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस भवन का घेराव धरना प्रदर्शन किया। 



प्रदेश अध्यक्ष रुचि भट्ट ने बताया कि कांग्रेस पार्टी के सांसद के द्वारा कॉलेज में छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार किया जा रहा है उसे पर कांग्रेस पार्टी दोहरा चरित्र रखती है कांग्रेस पार्टी लगातार अपने इस दौहरे चरित्र को अपनाकर समाज में और देश में भ्रम फैलाने का काम कर रही है कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी राजनीतिक मुद्दों पर तो बात नहीं करते हैं क्योंकि उनके पास आज के समय में कोई भी राजनीतिक मुद्दा नहीं है । जब उनके ही पार्टी के सांसद छात्रोंओ के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं उसे पर वह चुपि साध लेते हैं। इस प्रकार के चरित्र को देश की जनता देश की महिलाएं माता में कठोर निंदा करती हैं और भारतीय जनता पार्टी की कार्यकर्ताएं प्रश्न पूछती हैं राहुल गांधी जी से की क्या उनके सांसद इसी प्रकार के चरित्र को लेकर समाज में चलते हैं। 


कार्यक्रम में प्रदेश प्रवक्ता कमली भट्ट जी लक्ष्मी अग्रवाल जी प्रदेश उपाध्यक्ष भावना डोभाल जी महानगर महिला मोर्चा अध्यक्ष सुमन सिंह प्रदेश प्रवक्ता कमलेश रमन जी महानगर संगठन मीडिया माया राणा जी मंडल अध्यक्ष सुनीता भट्ट  रानी बबली चौहान अंजु गोयल अनीता सक्सेना ममता नयाल पुष्पा बटवाल जी आदि सैकड़ो महिला कार्यकर्ता उपस्थित रही। 



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