Halloween party ideas 2015

आखिरकार गंगोत्री धाम में प्रवेश हेतु पंचगव्य को अनिवार्य कर दिया गया है जिससे सनातनियों में खुशी की लहर है

पंचगव्य पान कर देवालयों धामों के दर्शन अनिवार्य*

सत्यवाणी/संवाददाता

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टिहरी-चारधाम यात्रा को लेकर जहाँ शासन प्रशासन चुस्त दुरुस्त है, वहीँ गंगोत्री मँदिर समिति के सचिव चारधाम महापंचायत के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल नें गंगोत्री धाम में गैर सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगानें की बात कही है, उन्होनें मंदिर् समिति से इस नियम को जारी करनें पर विशेष जोर दिया, हालांकि मंदिर् समिति के सचिव सुरेश सेमवाल नें पंचगव्य लेकर गंगा दर्शन और मन्दिर में प्रवेश करनें की सशर्त छूट देंनें की ढील भी दी है। 


गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव और चारधाम महापंचायत के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल नें बताया कि गैर सनातनियों को अगर गंगोत्री मंदिर में दर्शन करना है तो उन्हें पंचगव्य का पान करना होगा, पंचगव्य में गोमूत्र, गोबर, दूध, दही और घी शामिल होते हैं, इसे लेने के बाद ही गैर सनातनी श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे, इस फैसले से मंदिर में दर्शन के नियमों में जहां एक ओर नया बदलाव आया है, तो वहीं दूसरी और यह मामला विवादों और चर्चाओं का विषय भी बन गया है। 


उत्तराखंड के चारधामों में ही नहीं बल्कि उत्तराखंड में देवभूमि के सभी देवालयों मंदिरों में प्रवेश होंनें से पहले पंचगव्य सेवन की मांग काफी समय से चली आ रही थी, भगवा फोर्स के बैनर् पर पाँच साल पूर्व इक्कट्ठा हुए विभिन्न संगठनों के प्रमुखों नें यात्रा के प्रथम द्वार ऋषिकेश से ही यह मांग उठाई थी, धीरे-धीरे इस महत्वपूर्ण विषय पर बुद्धिजीवियों विचार किया उसी का नतीजा है कि देवालयों से धामों तक पंचगव्य श्रद्धालुओं के लिए जरूरी हो गया। 


पंचगव्य को लेकर वर्षों से उठाई जा रही मांग पर त्रयम्बक सेमवाल, यशपाल विद्रोही, अनिल चन्द, सोनपाल‌ राणा, ओम प्रकाश केदारखंडी, सतेंद्र चौहान, अंकित खंखरियाल, अर्जुन गर्वाण जैसे अनेक धर्म रक्षकों और विभिन्न संगठनों नें अपनी सुलगाई चिंगारी पर खुशी व्यक्त की, निश्चित रूप से इस तरह के फैसले से देवालयों से धामों तक की शुद्धता बनी रहेगी, और देवताओं की शक्ति बनी रहेगी।

 मुख्यमंत्री आवास परिसर में मंगलवार को शहद निष्कासन कार्य किया गया। पहले चरण में 60 किलोग्राम शहद निकाला किया गया। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने उद्यान विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि मुख्यमंत्री आवास परिसर एवं आस-पास के क्षेत्र में 3-बी गार्डन (बी- फ्रेंडली गार्डन, बटर - फ्लाई फ्रेंडली गार्डन एवं बर्ड फ्रेंडली गार्डन) विकसित करने की दिशा में कार्य किये जाएं। 

 


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में मौन पालन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में प्रचुर मात्रा में फूलों की प्रजातियां हैं, जो उच्च गुणवत्ता वाले जैविक शहद उत्पादन में सहायक हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में औषधीय गुणों वाला शहद तैयार करने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाए। 


इस अवसर पर उद्यान प्रभारी श्री दीपक पुरोहित और चेयरमैन देवभूमि पर्वतीय ग्रामोद्योग विकास संस्थान हरबर्टपुर श्री अजय कुमार सैनी मौजूद थे।

 *मुख्यमंत्री  ने सामूहिक कन्या पूजन कार्यक्रम में किया प्रतिभाग*



मुख्यमंत्री  श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को प्रेमनगर, देहरादून स्थित सनातन धर्म मंदिर परिसर में आयोजित सामूहिक कन्या पूजन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर  उन्होंने प्रदेशवासियों को चैत्र नवरात्र की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि चैत्र नवरात्र केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति एवं संस्कारों के माध्यम से शक्ति उपासना का महापर्व है। उन्होंने 1100 कन्याओं के पूजन को अत्यंत सौभाग्यपूर्ण बताते हुए आयोजन समिति की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में नारी सम्मान को सुदृढ़ करने तथा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे मूल्यों को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में कन्या को साक्षात देवी स्वरूप माना गया है। शास्त्रों में भी कन्याओं को अत्यंत सम्मानजनक स्थान दिया गया है। बेटियां अपने संस्कार, स्नेह और त्याग से समाज को सशक्त और समृद्ध बनाती हैं तथा हमारी संस्कृति और परंपराओं की सशक्त वाहक हैं। उन्होंने कहा कि कन्या पूजन के इस पावन अवसर पर समाज को यह संकल्प लेना चाहिए कि प्रत्येक बेटी को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान का अधिकार सुनिश्चित किया जाएगा।



मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र एवं राज्य सरकार बेटियों के सशक्तिकरण हेतु निरंतर कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बेटियों की शिक्षा और प्रोत्साहन के लिए छात्रवृत्ति, कक्षा 9 में प्रवेश पर साइकिल वितरण, 12वीं उत्तीर्ण करने पर प्रोत्साहन राशि, तथा सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।



मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की बेटियों के सामूहिक विवाह हेतु 61 हजार रुपये तथा व्यक्तिगत विवाह हेतु 55 हजार रुपये तक की सहायता दी जा रही है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को विवाह सहायता के रूप में 50 हजार रुपये तक का अनुदान प्रदान किया जा रहा है। 



मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नंदा गौरा योजना, गौरा देवी कन्याधन योजना, मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना, पोषाहार योजना सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बेटियों के जन्म से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक हर स्तर पर उनके सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि नवरात्र के नौ दिवस केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आत्मशुद्धि, सेवा, विनम्रता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करने का अवसर भी प्रदान करते हैं। कन्या पूजन हमारी परंपरा के साथ-साथ सेवा, करुणा और विनम्रता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे हर बेटी की रक्षा, शिक्षा और प्रगति का संकल्प लें, जिससे कन्या पूजन की भावना वास्तविक रूप से सार्थक हो सके।


मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रेमनगर स्थित गुरुद्वारा में माथा टेका।


इस अवसर पर विधायक श्रीमती सविता कपूर, भाजपा के महानगर अध्यक्ष श्री सिद्धार्थ अग्रवाल, आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष श्री विनय रोहिला, उपाध्यक्ष छावनी परिषद देहरादून श्री विनोद पंवार, भाजपा नेता श्री विनय गोयल एवं अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

 

आधुनिक तकनीक से आपदा प्रबंधन को मिलेगी नई दिशा-सुमन


कहा, एआई को अपने सहयोगी के तौर पर इस्तेमाल करें


देहरादून:



त्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) में मंगलवार को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना तथा अधिकारियों एवं कार्मिकों को एआई के प्रभावी और जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूक करना था। 


कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि वर्तमान समय तकनीक के तीव्र बदलाव का दौर है और एआई इस परिवर्तन का प्रमुख आधार बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि एआई को हमें अपने सहयोगी के रूप में अपनाना चाहिए, न कि उस पर पूर्ण निर्भर होकर उसे अपना ‘बॉस’ बना लेना चाहिए। 


उन्होंने कहा कि एआई के माध्यम से आपदाओं की पूर्वानुमान क्षमता को मजबूत किया जा सकता है, जैसे मौसम आधारित अलर्ट, भूस्खलन और बाढ़ की संभावनाओं का पूर्व आकलन। रियल टाइम डाटा एनालिसिस के जरिए त्वरित निर्णय लेने में सहायता मिल सकती है, जिससे आपातकालीन प्रतिक्रिया (रिस्पॉन्स) अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनती है।


इसके अतिरिक्त, एआई आधारित सिस्टम के माध्यम से जोखिम मानचित्रण (रिस्क मैपिंग), संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में भी मदद मिल सकती है। सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन डाटा के विश्लेषण से प्रभावित क्षेत्रों का तेजी से आकलन किया जा सकता है, जिससे राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर संचालित किया जा सके।


इस अवसर पर आईटीडीए के निदेशक श्री आलोक कुमार पाण्डेय ने कहा कि एआई के उपयोग में जिम्मेदारी और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से डाटा के सत्यापन (वेरिफिकेशन) पर जोर देते हुए कहा कि बिना पुष्टि के किसी भी सूचना का उपयोग या प्रसार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई एक शक्तिशाली उपकरण है, जिसका सही दिशा में उपयोग कर आपदा प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक, त्वरित और प्रभावी बनाया जा सकता है। हालांकि, इसके साथ ही मानवीय निर्णय क्षमता, अनुभव और संवेदनशीलता को बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।


कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को एआई की मूल अवधारणा, उसके कार्य करने के तरीके तथा विभिन्न प्लेटफॉर्म जैसे चैट जीपीटी, क्लॉड और जैमिनी के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि किस प्रकार एआई टूल्स का उपयोग कर ऑडियो, वीडियो और इमेज तैयार किए जा सकते हैं, बड़े दस्तावेजों को संक्षिप्त (समराइज) किया जा सकता है तथा जटिल आंकड़ों का विश्लेषण आसान बनाया जा     सकता है।


कार्यशाला में यह भी बताया गया कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एआई आधारित कम्युनिकेशन सिस्टम के माध्यम से आम जनता तक समय पर सही जानकारी पहुंचाई जा सकती है। इससे अफवाहों पर नियंत्रण पाने और जन-जागरूकता बढ़ाने में सहायता मिलती है। साथ ही, प्रशिक्षण और सिमुलेशन के लिए एआई का उपयोग कर विभिन्न आपदा परिदृश्यों (सिनेरियो) का अभ्यास कराया जा सकता है, जिससे फील्ड स्तर पर तैयारियां और अधिक सुदृढ़ होती हैं।


इस अवसर पर अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन श्री महावीर सिंह चौहान, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो. ओबैदुल्लाह अंसारी, श्री शांतनु सरकार आदि मौजूद रहे।

 

मेष

अ, आ, चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो

सही काम का भी विरोध होगा। कोई पुरानी व्याधि परेशानी का कारण बनेगी। कोई बड़ी समस्या बनी रहेगी। चिंता तथा तनाव रहेंगे। नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। सामाजिक कार्य करने के प्रति रुझान रहेगा। मान-सम्मान मिलेगा। रुके कार्यों में गति आएगी। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में चैन बना रहेगा।

Rashifal today 24 march 2026


वृषभ

ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो

धर्म-कर्म में रुचि रहेगी। कोर्ट व कचहरी के कार्य मनोनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। चोट व रोग से बचें। सेहत का ध्यान रखें। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। झंझटों में न पड़ें। व्यापार-व्यवसाय में वृद्धि होगी। नौकरी में मातहतों का सहयोग मिलेगा। निवेश शुभ रहेगा। परिवार में प्रसन्नता रहेगी।


मिथुन

का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह

शत्रुभय रहेगा। जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। विवाद से क्लेश होगा। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। ऐश्वर्य के साधनों पर सोच-समझकर खर्च करें। कोई ऐसा कार्य न करें जिससे कि बाद में पछताना पड़े। दूसरे अधिक अपेक्षा करेंगे। नकारात्मकता हावी रहेगी।


कर्क

ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो

प्रतिद्वंद्विता कम होगी। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। बात बिगड़ सकती है। शत्रुभय रहेगा। कोर्ट व कचहरी के काम मनोनुकूल रहेंगे। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। स्त्री वर्ग से सहायता प्राप्त होगी। नौकरी व निवेश में इच्छा पूरी होने की संभावना है।


सिंह

मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे

भूमि व भवन संबंधी खरीद-फरोख्त की योजना बनेगी। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। आर्थिक उन्नति होगी। संचित कोष में वृद्धि होगी। देनदारी कम होगी। नौकरी में मनोनुकूल स्थिति बनेगी। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। शेयर मार्केट आदि से बड़ा फायदा हो सकता है। परिवार की चिंता बनी रहेगी।


कन्या

ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

शारीरिक कष्ट संभव है। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। किसी आनंदोत्सव में भाग लेने का अवसर प्राप्त होगा। यात्रा मनोरंजक रहेगी। स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। किसी प्रभावशाली व्यक्ति मार्गदर्शन प्राप्त होगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। झंझटों में न पड़ें।


तुला

रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते

शत्रुओं का पराभव होगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। दु:खद समाचार मिल सकता है। व्यर्थ भागदौड़ रहेगी। काम पर ध्यान नहीं दे पाएंगे। बेवजह किसी व्यक्ति से कहासुनी हो सकती है। प्रयास अधिक करना पड़ेंगे। दूसरों के बहकावे में न आएं। फालतू बातों पर ध्यान न दें। लाभ में वृद्धि होगी।


वृश्चिक

तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

पुराना रोग परेशानी का कारण बन सकता है। जल्दबाजी न करें। आवश्यक वस्तुएं गुम हो सकती हैं। चिंता तथा तनाव रहेंगे। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। भेंट व उपहार देना पड़ सकता है। प्रयास सफल रहेंगे। कार्य की बाधा दूर होगी। निवेश शुभ रहेगा। व्यापार में वृद्धि तथा सम्मान में वृद्धि होगी।


धनु

ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे

किसी भी तरह के विवाद में पड़ने से बचें। जल्दबाजी से हानि होगी। राजभय रहेगा। दूर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। घर में मेहमानों का आगमन होगा। व्यय होगा। सही काम का भी विरोध हो सकता है। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। निवेश शुभ रहेगा। सट्टे व लॉटरी के चक्कर में न पड़ें।


मकर

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर करें। किसी अनहोनी की आशंका रहेगी। शारीरिक कष्ट संभव है। लेन-देन में लापरवाही न करें। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल चलेगा। शेयर मार्केट से बड़ा लाभ हो सकता है।


कुंभ

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा

मस्तिष्क पीड़ा हो सकती है। आवश्यक वस्तु गुम हो सकती है या समय पर नहीं मिलेगी। पुराना रोग उभर सकता है। दूसरों के झगड़ों में न पड़ें। हल्की हंसी-मजाक करने से बचें। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। चिंता रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। यश बढ़ेगा।


मीन

दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची

बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। विवेक से कार्य करें। लाभ में वृद्धि होगी। फालतू की बातों पर ध्यान न दें। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में उन्नति होगी। व्यापार-व्यवसाय की गति बढ़ेगी। चिंता रह सकती है। थकान रहेगी। प्रमाद न करें।



पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री व नैनीताल उधम सिंह नगर संसदीय क्षेत्र से सांसद श्री अजय भट्ट ने लोकसभा सदन में पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत से सवाल किया है कि क्या देश में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पर्वतीय पर्यटन परिपथों का विकास करने का प्रस्ताव है? इसके अलावा विकास के लिए प्रारंभ में पांच राज्यों की पहचान की गई है क्या उत्तराखंड को भी उसे सूची में शामिल किया गया है और इन राज्यों के लिए स्वीकृत तथा जारी की गई निधि और विकास कार्य का ब्यौरा दिया जाना चाहिए




श्री भट्ट द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया है कि पर्यटन स्थलों और उत्पादों का विकास मुख्य रूप से संबंधित राज्य सरकार/संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन द्वारा किया जाता है। तथापि, पर्यटन मंत्रालय पहाड़ी क्षेत्र में स्थित परियोजनाओं सहित संपूर्ण देश में पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने हेतु पर्यटन अवसंरचना के विकास के लिए अपनी योजनाओं के माध्यम से राज्य सरकारों/संघ राज्यक्षेत्र प्रशासनों को वित्तीय सहायता प्रदान कर उनके प्रयासों को संपूरित करता है। मंत्रालय ने हिमालयन थीम सहित पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्र को शामिल करते हुए चिह्नित विषयगत परिपथों के तहत पर्यटन अवसंरचना के विकास के विचार के साथ वर्ष 2014-15 में अपनी 'स्वदेश दर्शन योजना' की शुरुआत की और देश के भीतर 76 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की।


इस योजना को सतत और उत्तरदायी पर्यटक गंतव्य के विकास के उद्देश्य के साथ 'स्वदेश दर्शन 2.0 (एसडी 2.0)' के नाम से नया रूप दिया गया है और मंत्रालय ने इस पहल के तहत देश में 53 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। इसके अलावा, मंत्रालय ने 'तीर्थस्थल कायाकल्प एवं आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान (प्रशाद)' और 'चुनौती आधारित गंतव्य विकास (सीबीडीडी)' नामक स्वदेश दर्शन योजना की एक उप योजना के अंतर्गत भी परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है।


इसके अतिरिक्त भारत सरकार ने 'पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता वैश्विक पैमाने पर प्रतिष्ठित पर्यटक केदो का विकास' योजना के तहत देश में 23 राज्यों में 3295.76 करोड़ रुपए की 40 परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसका प्राथमिक उ‌द्देश्य देश में समग्र रूप से प्रतिष्ठित पर्यटक केंद्रों का विकास करना है। भारत सरकार ने वर्ष 2026-27 की अपनी बजट घोषणा में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू एवं कश्मीर तथा पूर्वी घाट में अराकू घाटी और पश्चिमी घाट में पौढ़ीगई मलाई में पर्वतीय ट्रेल्स के विकास के लिए और विश्व स्तरीय ट्रैकिंग एवं हाइकिंग का अनुभव प्रदान करने के क्षेत्र में भारत की क्षमता और अवसर को भी समझा है।


उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों में एसडी, एसडी 2.0, सीबीडीडी, एसएएससीआई और प्रशाद के तहत स्वीकृत परियोजनाओं का ब्योरा अनुबंध में दिया गया है।


इसके अलावा पर्यटन मंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में भी कई विकास परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। इको परिपथ के लिए उत्तराखंड के टिहरी झील और निकटवर्ती क्षेत्रों का नए गंतव्य के रूप में विकास के लिए इको-पर्यटन, एडवेंचर स्पोर्ट्स और संबद्ध पर्यटन संबंधी अवसंरचना का एकीकृत विकास जिला टिहरी 69.17 करोड़ दिया गया है। चंपावत में टी गार्डन एक्सपीरियंस 19.89 करोड़, 

पिथौरागढ़, गुंजी में ग्रामीण पर्यटन क्लस्टर एक्सपीरियंस के लिए 17.86 करोड रुपए जारी किया गया है, इसके अलावा जादूंग (जीवंत ग्राम जादुंग उत्सव मैदान, जादूंग कार्यक्रम) का विकास 4.99 करोड़, कैचीधाम परिसर का विकास के लिए 17.60 करोड रुपए जारी किया गया है।माना गांव (जीवंत ग्राम माना हाट) के लिए 4.99 करोड रुपए जारी किया गया है। इसी प्रकाश प्रतिष्ठित शहर ऋषिकेशः ऋषिकेश में राफ्टिंग बेस स्टेशन   के लिए 100 करोड रुपए जारी किया गया है। इसी प्रकार केदारनाथ के विकास के लिए 34.77 करोड़ रूपया, बद्रीनाथ धाम तीर्थ यात्रा सुविधा के लिए 56.15 करोड़ रूपया जारी किया गया है। गंगोत्री और यमुनोत्री में तीर्थ यात्रा सुविधाओं के लिए 54.56 करोड़ रूपया जारी किया गया है।

    कात्यायनी नवदुर्गा या हिंदू देवी पार्वती (शक्ति) के नौ रूपों में छठवीं रूप हैं-

    चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहन ।
    कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी ॥

Maa katyayani sixth navratri story



माँ का नाम कात्यायनी कैसे पड़ा इसकी भी एक कथा है- 
कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे। उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए। इन्हीं कात्य के गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे। इन्होंने भगवती पराम्बा की उपासना करते हुए बहुत वर्षों तक बड़ी कठिन तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी माँ भगवती उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। माँ भगवती ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली।कुछ समय पश्चात जब दानव महिषासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बढ़ गया तब भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों ने अपने-अपने तेज का अंश देकर महिषासुर के विनाश के लिए एक देवी को उत्पन्न किया। महर्षि कात्यायन ने सर्वप्रथम इनकी पूजा की। इसी कारण से यह कात्यायनी कहलाईं।

माँ कात्यायनी की भक्ति और उपासना द्वारा मनुष्य को बड़ी सरलता से अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति हो जाती है। वह इस लोक में स्थित रहकर भी अलौकिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है।


'कात्यायनी' पार्वती के लिए दूसरा नाम है, संस्कृत शब्दकोश में उमा, कात्यायनी, गौरी, काली, हेेमावती व ईश्वरी इन्हीं के अन्य नाम हैं। यजुर्वेद के तैत्तिरीय आरण्यक में उनका उल्लेख प्रथम किया है। स्कन्द पुराण में उल्लेख है कि वे परमेश्वर के नैसर्गिक क्रोध से उत्पन्न हुई थीं , जिन्होंने देवी पार्वती द्वारा दी गई सिंह पर आरूढ़ होकर महिषासुर का वध किया। वे शक्ति की आदि रूपा है, जिसका उल्लेख पाणिनि पर पतञ्जलि के महाभाष्य में किया गया है, जो दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में रचित है। उनका वर्णन देवीभागवत पुराण, और मार्कंडेय ऋषि द्वारा रचित मार्कंडेय पुराण के देवी महात्म्य में किया गया है।

परम्परागत रूप से देवी दुर्गा की तरह वे लाल रंग से जुड़ी हुई हैं। नवरात्रि उत्सव के षष्ठी को उनकी पूजा की जाती है। उस दिन साधक का मन 'आज्ञा चक्र' में स्थित होता है। योगसाधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इस चक्र में स्थित मन वाला साधक माँ कात्यायनी के चरणों में अपना सर्वस्व निवेदित कर देता है।परिपूर्ण आत्मदान करने वाले ऐसे भक्तों को सहज भाव से माँ के दर्शन प्राप्त हो जाते हैं।

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