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धनयाड़ी में जंगली हाथी के हमले में महिला की मौत पर ग्रामीणों का फूटा आक्रोश, राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर किया प्रदर्शन



डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के धनयाड़ी में जंगली हाथी के हमले में श्रीमती अंजली गुप्ता की दर्दनाक मृत्यु के विरोध में मंगलवार को ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। घटना से आक्रोशित सैकड़ों ग्रामीणों ने परवादून जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अश्विनी बहुगुणा, डोईवाला ब्लॉक प्रमुख गौरव सिंह चौधरी, बड़ासी ग्राम प्रधान राहुल मनवाल, हेमा पुरोहित, रेनू चुनारा, पाववाला सोडा ग्राम प्रधान करण रावत, नरेंद्र सौलंकी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ धनयाड़ी,एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया।


प्रदर्शनकारियों ने कहा कि क्षेत्र में लगातार जंगली हाथियों की आवाजाही से लोगों में भय का माहौल बना हुआ है और वन विभाग समय रहते प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहा है, जिसके कारण एक निर्दोष महिला की जान चली गई।


परवादून जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल ने कहा कि धनयाड़ी की घटना अत्यंत दुखद और वन विभाग की गंभीर लापरवाही का परिणाम है। पहले भी इस जंगली हाथी के द्वारा कई लोगों को मौत के घाट उतारा गया है।  ग्रामीण लंबे समय से जंगली हाथियों के आतंक से परेशान हैं, लेकिन सरकार और वन विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 48 घंटे के भीतर संबंधित जंगली हाथी को रेस्क्यू कर सुरक्षित अन्य क्षेत्र में नहीं भेजा गया, तो कांग्रेस ग्रामीणों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगी।


पूर्व जिला पंचायत सदस्य अश्विनी बहुगुणा ने कहा कि पीड़ित परिवार के साथ न्याय होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि मृतका के परिवार के एक सदस्य को तत्काल सरकारी नौकरी, पर्याप्त आर्थिक सहायता तथा प्रभावित क्षेत्र में स्थायी समाधान के लिए सोलर फेंसिंग और अन्य सुरक्षा उपाय तत्काल लागू किए जाएं।


डोईवाला ब्लॉक प्रमुख गौरव सिंह चौधरी ने कहा कि धनयाड़ी की घटना पूरे क्षेत्र के लिए बेहद दुखद और चिंताजनक है। ग्रामीण लंबे समय से जंगली हाथियों के आतंक से जूझ रहे हैं, लेकिन वन विभाग की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 48 घंटे के भीतर संबंधित हाथी को रेस्क्यू कर अन्य सुरक्षित क्षेत्र में भेजना चाहिए। साथ ही प्रभावित गांवों में सोलर फेंसिंग, नियमित गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल मजबूत किया जाए।


बड़ासी ग्राम प्रधान राहुल मनवाल ने कहा कि ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। एक परिवार ने अपना सदस्य खोया है और पूरे क्षेत्र में भय का माहौल है। उन्होंने मांग की कि पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए, पर्याप्त आर्थिक सहायता प्रदान की जाए तथा हाथियों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए स्थायी समाधान लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और वन विभाग ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो ग्रामीणों का आंदोलन और तेज किया जाएगा।


प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने एक स्वर में निम्न मांगें उठाईं:

• संबंधित जंगली हाथी को 48 घंटे के भीतर रेस्क्यू कर अन्य सुरक्षित क्षेत्र में भेजा जाए।

• पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।

• प्रभावित गांवों में सोलर फेंसिंग तत्काल लगाई जाए।

• हाथियों की आवाजाही रोकने के लिए स्थायी सुरक्षा व्यवस्था और प्रभावी वन प्रबंधन योजना लागू की जाए।

• पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और त्वरित सहायता प्रदान की जाए।

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वन विभाग रेंजर व वरिष्ठ अधिकारी से वार्ता के पश्चात धरना समाप्त किया गया। रेंजर द्वारा कल दोपहर डीएफओ से ग्रामीणों की वार्ता कराने की बात की गई है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

 मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की समस्याएं सुनीं



*जनसमस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों को दिए त्वरित कार्यवाही के निर्देश*

 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। जनसुनवाई के दौरान प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे लोगों ने अपनी समस्याओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।


मुख्यमंत्री ने लोगों की समस्याओं को एक-एक कर सुना और संबंधित प्रकरणों की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि और सरकार के बीच आमजन का सीधा संवाद लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाता है। जनसुनवाई के माध्यम से लोगों को अपनी बात सीधे सरकार तक पहुंचाने का अवसर मिलता है और विभिन्न स्तरों पर लंबित मामलों के समाधान का मार्ग भी प्रशस्त होता है।


मुख्यमंत्री के समक्ष लोगों ने सड़क एवं संपर्क मार्ग, पेयजल, विद्युत, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व, सिंचाई, रोजगार, स्थानांतरण तथा स्थानीय विकास से जुड़े विभिन्न मामले रखे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से प्रकरणों की स्थिति की जानकारी लेते हुए पात्रता एवं नियमों के अनुरूप आवश्यक कार्यवाही करने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन मामलों में विभागीय स्तर पर कार्रवाई संभव है, उनमें अनावश्यक विलंब न किया जाए तथा जिन प्रकरणों में शासन स्तर पर निर्णय अपेक्षित है, उन्हें आवश्यक प्रक्रिया के साथ प्रस्तुत किया जाए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक सुशासन का लाभ पहुंचाना है। सरकार की योजनाओं और नीतियों का प्रभाव तभी सार्थक होगा, जब उनका लाभ जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों को भेजकर  इन पर यथाशीघ्र कार्यवाही की जाए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनभावनाओं और जनअपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करते हुए प्रदेश के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि आमजन से जुड़े मामलों में मानवीय दृष्टिकोण के साथ नियमों के अनुरूप समाधान सुनिश्चित किया जाए।


इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, सचिव श्री शैलेश बगोली, आयुक्त गढ़वाल श्री आनंद स्वरूप, आईजी गढ़वाल श्री राजीव स्वरूप, अपर सचिव श्री जे.सी. काण्डपाल सहित मुख्यमंत्री कार्यालय के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री ने प्रदान की विभिन्न विकास योजनाओं के लिए ₹ 74 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति’*


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में अवस्थाना सुविधाओं के विकास, प्रारम्भिक व माध्यमिक विद्यालयों की आपदा के कारण क्षतिग्रस्त सम्पत्तियों की मरम्मत, शासकीय आवासीय भवनों के निर्माण, विभिन्न गांवों तथा कार्यालयों के बाढ़ सुरक्षा उपायों, क्षतिग्रस्त मार्गों के पुर्ननिर्माण, आपदा से बचाव व हेलीपैड निर्माण आदि कार्यों के लिए ₹ 74 करोड़ की धनराशि का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


मुख्यमंत्री द्वारा जनपद बागेश्वर के बेडा-मझड़ा (करीमपुर) हैलीपैड निर्माण किये जाने हेतु ₹ 8.91 करोड, गंगोत्री धाम में सीवर लाईन एवं छुटे हुए घरों/सार्वजनिक शौचालयों से सम्बंधित कार्यों हेतु ₹ 4.99 करोड की योजना स्वीकृत किये जाने के साथ ही अभियोजन कार्यालय में अभियोजन अधिष्ठान के अन्तर्गत अवशेष धनराशि ₹ 8.89 करोड़ की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


मुख्यमंत्री द्वारा आपदा के मध्येनजर विद्यालयों परिसरों में विद्यार्थियों एवं कार्मिकों की सुरक्षा के दृष्टिगत क्षतिग्रस्त आधारभूत सुविधाओं की त्वरित मरम्मत एवं शिक्षण कार्यों की निरन्तरता बनाये रखने के लिए माध्यमिक शिक्षा के अन्तर्गत संचालित विद्यालयों हेतु ₹ 15.00 करोड एवं प्रारम्भिक शिक्षा के अन्तर्गत संचालित विद्यालयों हेतु ₹ 15.00 करोड़ कुल धनराशि ₹ 30.00 करोड़ राज्य आपदा मोचन निधि के पुर्नप्राप्ति एवं पुर्ननिर्माण हेतु स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है। इसके साथ ही उत्तरकाशी, बागेश्वर, अल्मोडा, चमोली, चम्पावत, रूद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ एवं देहरादून जनपदों को राज्य आपदा मोचन निधि के विभिन्न मदों यथा राहत एवं बचाव, पुर्नप्राप्ति एवं पुर्ननिर्माण तथा तैयारी एवं क्षमता निर्माण हेतु ₹ 1.08 करोड की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


मुख्यमंत्री द्वारा जनपद उधमसिंहनगर के विकासखण्ड खटीमा के 07 ग्रामों में आवासीय भवनों की नदी/नालों की बाढ़ से सुरक्षा हेतु ₹ 4.01 करोड़ तथा भारत-नेपाल सीमा पर जगबूढा नदी के दांये पार्श्व पर स्थित ग्राम-सिसैया, मेलाघाट एवं एस.एस.बी. कैंप कार्यालय की बाढ़ सुरक्षा हेतु ₹ 4.62 करोड की योजना स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


मुख्यमंत्री द्वारा जनपद चमोली में वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2021 से पूर्व ओपन कम्यूनिकेशन के तहत आपदा क्षतिग्रस्त मागों को खोले जाने तथा मार्गों से मलबा हटाये जाने हेतु उपयोग में लाई गई    जे.सी.बी./पॉकलैण्ड के बीजकों का भुगतान ₹ 3.18 करोड की धनराशि राज्य आपदा मोचन निधि के राहत एवं बचाव मद से स्वीकृत किये का अनुमोदन प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री द्वारा नगर पालिका परिषद हरबर्टपुर क्षेत्रान्तर्गत ठोस अपशिष्ट परियोजना हेतु ₹ 3.27 करोड का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


मुख्यमंत्री द्वारा भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली यंत्रों के रख-रखाव हेतु ₹ 2.00 करोड, सैटेलाईट फोनों के रिचार्ज हेतु ₹ 1.90 करोड़, विश्व बैंक सहायतित परियोजना के सहयोग से जनपदों में स्थापित उपकरणों के रख-रखाव एवं मानदेय तथा जोशीमठ भूस्खलन कन्ट्रोल रूम में तैनात विशेषज्ञों के मानदेय हेतु ₹ 40 लाख, विभिन्न मॉक अभ्यासों के आयोजन हेतु ₹ 60 लाख तथा प्राधिकरण में तैनात ई.ई.आर.एस. कार्मिकों के मानदेय हेतु ₹ 18 लाख की धनराशि राज्य आपदा मोचन निधि के क्षमता विकास से अवमुक्त किये का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


*’मुख्यमंत्री ने चलकुडिया-मसमोली-नौखोली मोटर मार्ग का नाम शहीद मंदीप सिंह नेगी के नाम किये जाने का किया अनुमोदन’*

 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा विधानसभा क्षेत्र चौबटटाखाल के अन्तर्गत चलकुडिया-मसमोली- नौखोली मोटर मार्ग नाम शहीद मंदीप सिंह नेगी मोटर मार्ग रखे जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

चारधाम यात्रा : 114  दिनों में दर्शनार्थियों की संख्या 47 लाख पार*

*पिछले वर्ष के मुकाबले यात्रियों की संख्या 4.68 लाख अधिक*

*तीर्थयात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : सीएम धामी*


देहरादून:


उत्तराखण्ड में मानसून की बाधाओं और चुनौतियों के बावजूद चारधाम यात्रा नया रिकॉर्ड बनाने की ओर अग्रसर है। प्रदेश सरकार श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए यात्रा को नियंत्रित और आवश्यकता के अनुसार रोककर संचालित कर रही है, लेकिन तीर्थयात्रियों की आस्था में कोई कमी नहीं आई है।

114 दिनों में ही दर्शनार्थियों की संख्या 47 लाख के पार पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में साढ़े चार लाख से अधिक है।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा को बेहद सतर्कता और निगरानी के साथ संचालित किया जा रहा है। मानसून की सक्रियता को देखते हुए सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद राज्य आपदा कंट्रोल रूम के माध्यम से आपदा प्रबंधन पर नजर रखे हुए हैं। चारों धामों और यात्रा पड़ावों में यात्रियों के ठहरने, खाने और अन्य सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर यात्रियों की मदद के लिए सुरक्षा जवानों की तैनाती की गई है।


प्रदेश सरकार के बेहतर आपदा प्रबंधन और इंतजामों के चलते यात्रा नया कीर्तिमान बनाने की ओर बढ़ रही है। इस वर्ष 19 अप्रैल को गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाटोद्घाटन के साथ चारधाम यात्रा का आगाज हुआ था। सोमवार 10 अगस्त तक इस यात्राकाल के 114 दिनों में कुल 47 लाख 02 हजार 703 श्रद्धालु चारधाम दर्शन कर चुके हैं, जबकि बीते वर्ष 2025 में इतनी ही अवधि में 42 लाख 34 हजार 147 यात्री चारधाम दर्शन को पहुंचे थे। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 04 लाख 68 हजार 556 अधिक है। चारों धामों में अब तक की कुल संख्या की बात करें तो बद्रीनाथ में 16 लाख 12 हजार 112, केदारनाथ में 14 लाख 50 हजार 116, गंगोत्री में 07 लाख 37 हजार 629 और यमुनोत्री धाम में 06 लाख 62 हजार 347 यात्री दर्शन कर चुके हैं। जबकि हेमकुंट साहिब में 02 लाख 40 हजारे 499 श्रद्धालु शीश नवा चुके हैं।


*चारों धामों में एक दिन में पहुंचे 15 हजार से अधिक श्रद्धालु*

मौसम लगातार खराब होने और प्रशासनिक अलर्ट के बावजूद सोमवार को 15 हजार 376 श्रद्धालु चारधाम दर्शन को पहुंचे। इनमें सर्वाधिक 9559 यात्री बद्रीनाथ धाम पहुंचे। जबकि केदारनाथ में 4170, गंगोत्री में 1204 और यमुनोत्री धाम में 443 श्रद्धालुओं न दर्शन किए।


*बद्रीनाथ पहुंचे 16.12 लाख से अधिक श्रद्धालु*

भगवान बद्रीविशाल के दर्शनों को श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। 23 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा सोमवार 10 अगस्त को 110 दिन की अवधि पूर्ण कर चुकी है। इस दौरान 16 लाख 12 हजार 112 श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम में शीश नवा चुके हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 03 लाख 50 हजार 192 अधिक तीर्थयात्री दर्शनों को पहुंच चुके हैं। पिछले वर्ष 04 मई 2025 को बद्रीनाथ यात्रा का श्रीगणेश हुआ था। तब 21 अगस्त यानी 110 दिन में यह आंकड़ा 12 लाख 61 हजार 280 था।


*कोट--------*


चारधाम यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।  मानसून की सक्रियता को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। जिलाधिकारियों को सतर्क रहने को कहा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य तत्काल शुरू हो सके। भूस्खलन या अन्य किसी भी प्रकार की आपदा की स्थिति में श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर ठहराने के निर्देश दिए गए हैं। श्रद्धालुओं को मौसम के मिजाज को देखकर ही यात्रा करने की सलाह दी जा रही है।


 *-पुष्कर सिंह धामी*

*मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में विधायक पुरोला श्री दुर्गेश्वर लाल ने भेंट की


 उन्होंने विल्ला नौगांव, विधानसभा पुरोला के अंतर्गत 65 गांवों के आराध्य देवता श्री रुद्रेश्वर महादेव के डांडा देवराणा मंदिर, के सौंदर्यीकरण के लिए मुख्यमंत्री घोषणा के तहत ₹1.79 करोड़ की धनराशि स्वीकृत किए जाने पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया।


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार उत्तराखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों के साथ ही स्थानीय स्तर पर आस्था और परम्परा से जुड़े मंदिरों एवं मेलों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और परम्परायें उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान हैं तथा इनके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों का समग्र विकास हमारी प्राथमिकता है।


विधायक श्री दुर्गेश्वर लाल ने कहा कि डांडा देवराणा स्थित रुद्रेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र के 65 गांवों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की धार्मिक एवं सांस्कृतिक आस्थाएं जुड़ी हुई हैं। मंदिर के सौंदर्यीकरण एवं अवस्थापना सुविधाओं के विकास से क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को और मजबूती मिलेगी।


उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण और विकास के साथ-साथ स्थानीय आस्था से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों के विकास को प्राथमिकता दे रही है। रुद्रेश्वर महादेव मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए स्वीकृत धनराशि से मंदिर परिसर में विभिन्न विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्य किए जा सकेंगे, जिससे क्षेत्र के लोगों एवं श्रद्धालुओं को लाभ मिलेगा।


उन्होंने पूर्व में मुख्यमंत्री द्वारा डांडा देवराणा रुद्रेश्वर महादेव मेले को राजकीय मेला घोषित किए जाने के लिए भी उनका धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि राजकीय मेले का दर्जा मिलने से इस ऐतिहासिक एवं धार्मिक मेले को व्यापक पहचान मिलेगी और क्षेत्र की लोक संस्कृति, परंपराओं तथा धार्मिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन को नई गति प्राप्त होगी।


इस अवसर पर रुद्रेश्वर मंदिर समिति के केंद्रीय अध्यक्ष एवं मंदिर समिति के सदस्य तथा पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण सिंह चौहान, भाजपा नेता जगनमोहन चंद, सरदार सिंह राणा, पूर्व मंडल अध्यक्ष बचन चौहान एवं वर्तमान मंडल अध्यक्ष अनिल चौहान सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

 

कांवड़ मेला-2026 के सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन में सहभागी बने देशभर से आए सभी शिवभक्तों का हृदय से आभार एवं अभिनन्दन।

kanwad yatra 2026 concludes 5 crore


इस वर्ष देवभूमि उत्तराखण्ड ने श्रद्धा के ऐसे विराट स्वरूप का साक्षात्कार किया, जहां करोड़ों शिवभक्तों की आस्था के साथ सेवा, अनुशासन और व्यवस्था का अद्भुत समन्वय दिखाई दिया। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा और उत्तराखण्ड की सेवा एवं आतिथ्य परंपरा में उनके विश्वास को दर्शाता है।


इस विशाल जनसमागम को सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बनाने में प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबंधन दल, स्वच्छता कर्मियों, स्वयंसेवी संगठनों, धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं एवं स्थानीय नागरिकों का योगदान सराहनीय रहा।

महादेव से प्रार्थना है कि समस्त शिवभक्तों पर उनकी कृपा बनी रहे और सभी की मनोकामनाएं पूर्ण हों।

हर हर महादेव!

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राहत-बचाव से लेकर कनेक्टिविटी बहाली तक हर मोर्चे पर त्वरित कार्रवाई*

*CM धामी लगातार कर रहे मॉनिटरिंग, अधिकारियों को ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर स्थिति का आकलन करने के निर्देश

SEOC से 24×7 निगरानी, राहत-बचाव तंत्र अलर्ट मोड पर*


देहरादून;



चमोली जनपद के ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमकनाला में बेली ब्रिज बहने की घटना के बाद मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी पूरे घटनाक्रम की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। मंगलवार को भी मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी चमोली एवं गढ़वाल मंडल आयुक्त से स्थिति की जानकारी लेते हुए राहत-बचाव, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और कनेक्टिविटी बहाली को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में राशन, खाद्य सामग्री, दवाइयों एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर वैकल्पिक मार्गों एवं अन्य उपलब्ध माध्यमों से ग्रामीणों तक जरूरी सामग्री पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।


मुख्यमंत्री ने ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर आवाजाही को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए सभी संभावित विकल्पों पर तत्काल कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति एवं नुकसान का स्वयं आकलन करने को कहा, ताकि राहत और पुनर्व्यवस्था से जुड़े कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो।


बदलते मौसम और बढ़ते जलप्रवाह को देखते हुए मुख्यमंत्री ने निचले क्षेत्रों तथा नदी-नालों के आसपास विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जाए और आवश्यकता पड़ने पर लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की पूरी तैयारी रखी जाए।


राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) से भी चमोली सहित प्रदेश के सभी संवेदनशील क्षेत्रों पर 24×7 नजर रखी जा रही है। जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव दलों को तत्काल सक्रिय किया जा सके।


सोमवार को चमोली जनपद के ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमकनाला में अचानक अत्यधिक जलप्रवाह बढ़ने के कारण 123 बीआरटीएफ, सुराईथोटा द्वारा निर्मित बेली ब्रिज बह गया था। तेज बहाव की चपेट में एक व्यक्ति और एक कैंपर वाहन के बहने की सूचना भी प्राप्त हुई थी।


घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और राहत-बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। एसडीआरएफ एवं एनडीआरएफ की टीमों को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं संबंधित विभागों की टीमें भी मौके पर राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हैं।


संकट के बीच सरकार का फोकस—सुरक्षा, राहत और कनेक्टिविटी


तमकनाला की घटना के बाद सरकार की प्राथमिकता केवल राहत एवं बचाव कार्यों तक सीमित नहीं है। प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति, वैकल्पिक कनेक्टिविटी और आवाजाही की शीघ्र बहाली पर भी समान रूप से काम किया जा रहा है।


मुख्यमंत्री धामी की लगातार मॉनिटरिंग और अधिकारियों को ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर त्वरित निर्णय लेने के निर्देश राज्य सरकार की प्रो-एक्टिव आपदा प्रबंधन नीति को दर्शाते हैं। प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन समय पर सतर्कता, बेहतर समन्वय और त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई से उनके प्रभाव को कम किया जा सकता है।


मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि कठिन परिस्थितियों में प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

 आज , देश भर से जुटने वाले कांवड़िये, गंगाजल तीर्थस्थलों से एकत्रित कर अपने गृहथलों पर शिवालय में चढ़ाएंगे।

इस बार 13 दिनों में लगभग  4 करोड  से कांवड़िये हरिद्वार एवम अन्य तीर्थस्थलों पर गंगाजल भरने पंहुचे। ये यात्रा है, शिव को स्मरण करने की। अनवरत काल से चले आ रहे शिवरात्रि के पावन त्योहार को मनाये जाने की परंपरा है।

।शिव तत्व को समझना हो तो इस संसार के सभी जीवों और प्रकृति में रत पेड़ पौधों को भो समझना होगा।शिव को प्रिय है, गंगाजल, गौ अमृत, शहद, दही, अक्षत, हल्दी ,बेलपत्र, धतूरा,और सफेद पुष्प। इन सब से शिवलिंग पर जलाभिषेक कर शिव को फल अर्पण करते हुए, ओम नमः शिवाय  मन्त्र का सदैव जाप करना चाहिए।

 देहरादून ;




  • मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजनाः हरित ऊर्जा के साथ मिल रहा स्वरोजगार
  • योजना के तहत 1132 सौर ऊर्जा संयंत्रों के जरिए 210 मेगावाट क्षमता सौर उर्जा का उत्पादन
उत्तराखंड के मूल निवासियों को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना (एमएसएसवाई) राज्य में रोजगार के नए अवसर सृजित करने के साथ ही हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बन रही है। योजना के तहत जून माह तक 210 मेगावाट क्षमता के प्लांट स्थापित हो चुके हैं, जिससे 3500 से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है।
 
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभाग को मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत 250 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य प्रदान किया है। 

योजना के अंतर्गत स्थानीय निवासियों द्वारा 20, 25, 50, 100 और 200 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इसके लिए आवेदकों को एमएसएमई नीति-2023 के तहत सभी लाभ दिए जा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जून 2026 तक राज्य में कुल 1132 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी सम्मिलित क्षमता 2,10,420 किलोवाट यानी करीब 210 मेगावाट है। शेष परियोजनाओं पर स्थापना का कार्य चल रहा है।
 
टिहरी जिले ने बनाई बढ़त
जिलेवार आंकड़ों में टिहरी सबसे आगे है। यहां 369 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी सम्मिलित क्षमता 69,050 किलोवाट है। उत्तरकाशी में 227 संयंत्रों से 43,660 किलोवाट और चंपावत में 144 संयंत्रों से 28,200 किलोवाट क्षमता स्थापित हुई है। इसी तरह हरिद्वार में 86 संयंत्रों की क्षमता 16,900 किलोवाट, पौड़ी में 88 संयंत्रों की 15,440 किलोवाट, चमोली में 72 संयंत्रों की 11,725 किलोवाट और अल्मोड़ा में 32 संयंत्रों की 5,600 किलोवाट क्षमता दर्ज की गई है। देहरादून, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर में भी योजना के तहत सौर परियोजनाएं स्थापित की गई हैं।

3500 लोगों को रोजगार
मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना केवल सौर ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाने के माध्यम के रूप में भी देखा जा रहा है। योजना के तहत स्थापित परियोजनाओं से करीब 3500 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों भी तेज हो रही हैं। जिससे पलायन में भी कमी आने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना उत्तराखंड के युवाओं और राज्य के निवासियों को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। हमारा प्रयास है कि सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर उद्यमिता और रोजगार के अवसर बढ़ें।


*मुख्यमंत्री धामी ने मातृशक्ति से किया सीधा संवाद, महिला सशक्तिकरण को बताया विकास का आधार* 


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- *उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं का मुख्यमंत्री ने किया अभिनंदन, आत्मनिर्भर उत्तराखंड का लिया संकल्प* 


- *महिला संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सुनी महिलाओं की अपेक्षाएं और सुझाव* 


- ‘ *सशक्त नारी–समृद्ध उत्तराखंड’ के विजन को साकार करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री* 


- *महिलाओं को निर्णय लेने वाली शक्ति और नेतृत्वकर्ता बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास: मुख्यमंत्री* 


- *स्वयं सहायता समूहों, स्वरोजगार और कौशल विकास से बदल रही उत्तराखंड की महिलाओं की तस्वीर* 



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज देहरादून  के भाऊवाला  में तीज उत्सव के अवसर पर आयोजित महिला संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया तथा बड़ी संख्या में उपस्थित मातृशक्ति से आत्मीय संवाद स्थापित करते हुए उनके विचार, सुझाव और अपेक्षाएं सुनीं।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं से खुलकर संवाद करने का आग्रह करते हुए कहा कि सरकार की नीतियां तभी अधिक प्रभावी बनती हैं जब उनमें जनता की आवाज और अनुभव शामिल होते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखंड की मातृशक्ति आने वाले समय में भी राज्य के विकास और समृद्धि की सबसे बड़ी शक्ति बनेगी तथा ‘सशक्त नारी–समृद्ध उत्तराखंड’ का संकल्प साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


मुख्यमंत्री ने सभी महिलाओं को तीज पर्व और स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए उनके स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद के प्रति आभार व्यक्त किया।



मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की वास्तविक शक्ति उसकी मातृशक्ति है, जिसने कठिन परिस्थितियों में परिवार, समाज और राज्य को नई दिशा देने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण के संघर्ष से लेकर आज के विकास यात्रा तक महिलाओं की भूमिका सदैव प्रेरणादायी रही है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रदेश की महिलाएं केवल घरेलू दायित्वों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वयं सहायता समूहों, स्वरोजगार, स्थानीय उत्पादों, कृषि, बागवानी, होमस्टे, उद्यमिता और तकनीक आधारित गतिविधियों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभ देना नहीं, बल्कि उन्हें अवसर, सम्मान, नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करना है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण को नई गति मिली है। उज्ज्वला योजना, मातृ वंदना योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना, मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता, लखपति दीदी योजना, मिशन शक्ति, वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन जैसी अनेक पहलों ने महिलाओं के जीवन में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन लाया है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का मूल उद्देश्य महिलाओं को विकास की सहभागी और देश की आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी महिलाओं की शिक्षा, स्वरोजगार, कौशल विकास, आजीविका, स्वास्थ्य और सुरक्षा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत तथा सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया गया है। एकल महिला स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री महिला सतत आजीविका योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और लखपति दीदी योजना के माध्यम से हजारों महिलाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 2.65 लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं और लाखों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसे मंच विकसित किए जा रहे हैं, जबकि ‘ड्रोन दीदी’, ‘सोलर सखी’ और ‘महिला सारथी’ जैसी योजनाओं के माध्यम से उन्हें आधुनिक तकनीक और नए आर्थिक अवसरों से जोड़ा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृशक्ति के स्वास्थ्य और सम्मान को सरकार सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। ईजा-बोई शगुन, महालक्ष्मी किट, पोषण योजनाएं, आंगनबाड़ी एवं आशा कार्यकत्रियों के मानदेय में वृद्धि, नंदा गौरा योजना, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन तथा वरिष्ठ नागरिकों के लिए निःशुल्क धार्मिक यात्रा जैसी पहलें इसी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य महिलाओं को आत्मनिर्भर, सम्मानित और सशक्त नागरिक के रूप में स्थापित करना है।



इस अवसर पर विधायक श्री सहदेव सिंह पुंडीर, कार्यक्रम के आयोजक श्री पी के अग्रवाल तथा श्रीमती लक्ष्मी अग्रवाल  सहित अनेक जनप्रतिनिधि, महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्याएं, विभिन्न क्षेत्रों की उत्कृष्ट महिलाएं, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।



डोईवाला :




वरिष्ठ शिक्षाविद् डॉ. राजेश नैथानी जी के पूज्य पिता एवं पूर्व प्रोफेसर स्वर्गीय अनुसूया प्रसाद नैथानी जी का विगत दिनों निधन हो गया था। आज पूर्व शिक्षा मंत्री, भारत सरकार एवं पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जी ने अठुरवाला स्थित उनके आवास पर पहुंचकर शोक संतप्त परिवार से भेंट की और अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।


डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने स्वर्गीय श्री अनुसूया प्रसाद नैथानी जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा दिवंगत पुण्यात्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय अनुसूया प्रसाद नैथानी जी का शिक्षा एवं समाज के क्षेत्र में योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनका निधन परिवार के साथ-साथ समाज के लिए भी अपूरणीय क्षति है।


साथ में नगर पालिका परिषद डोईवाला के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह नेगी, पूर्व प्रधान श्री पुरुषोत्तम डोभाल, पूर्व महामंत्री भाजपा डोईवाला रविन्द्र बेलवाल, सभासद  सुरेश सैनी सहित अन्य गणमान्यजन एवं शुभचिंतक उपस्थित रहे।


सभी ने स्वर्गीय श्री अनुसूया प्रसाद नैथानी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

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