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सीएम योगी की माता जी पर अभद्र टिप्पणी  मामले पर हुई पहली FIR : उत्तराखंड में भारी रोष, सख्त कार्रवाई की मांग

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​लक्ष्मण झूला/स्वर्गाश्रम (यमकेश्वर): उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पूजनीय माता जी के खिलाफ सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंच पर की गई कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर उत्तराखंड में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में आज यमकेश्वर, स्वर्गाश्रम निवासी डॉ. सुनीता बौड़ाई विद्यार्थी ने स्थानीय पुलिस प्रशासन को एक शिकायती पत्र सौंपकर आरोपी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

​क्या है पूरा मामला?

​शिकायती पत्र के अनुसार, अब्दुल्ला सलीम तथाकथित मौलाना नामक व्यक्ति द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वृद्ध माता जी के विरुद्ध बेहद आपत्तिजनक और अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि सीएम योगी की माता जी का राजनीति से कोई सरोकार नहीं है और वे एक अति वृद्ध एवं सम्मानित महिला हैं। उनके सम्मान को ठेस पहुँचाने वाली इस टिप्पणी से न केवल मुख्यमंत्री पूज्य महाराज जी के  समर्थकों में, बल्कि समस्त उत्तराखंड वासियों में भारी दुख और नाराजगी है।



​प्रमुख मांगें:

​डॉ. सुनीता बौड़ाई विद्यार्थी ने थाना अध्यक्ष, लक्ष्मण झूला को सौंपे गए पत्र में निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया है:

​अभद्र टिप्पणी करने वाले व्यक्ति (अब्दुल्ला सलीम) का तत्काल संज्ञान लिया जाए।

​धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को आहत करने के जुर्म मेंv आरोपी पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए।

​ऐसे तत्वों पर लगाम कसी जाए जो समाज की शांति और मर्यादा को भंग करने का प्रयास करते हैं। ऐसे असामाजिक तत्वों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए. 


​जनता में आक्रोश

​डॉ. सुनीता बौड़ाई विद्यार्थी ने कहा, "हम सभी उत्तराखंड वासी इस घटना से बेहद आहत हैं। एक बुजुर्ग महिला, जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है, उनके प्रति ऐसी शब्दावली का प्रयोग असहनीय है। पुलिस को इस मामले में तुरंत कड़ा रुख अपनाना चाहिए।"

​अब पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही उचित कानूनी कदम उठाए जाएंगे।ल


- इस यात्रा के माध्यम से भारत सरकार के विभिन्न विकासात्मक प्रोजेक्ट्स और कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए व्यापक जनता तक प्रसारित होगी



- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो भुवनेश्वर की तरफ से यह प्रेस टूर आयोजित किया गया है


- चार दिवसीय कार्यक्रम के दौरान यह मीडिया प्रतिनिधिमंडल उत्तराखंड में शौर्य स्थल, वन अनुसंधान संस्थान, टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (THDC), राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना समेत दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का दौरा करेगा



मंगलवार को उड़ीसा से पत्रकारों का एक दल उत्तराखंड में चार दिवसीय दौरे पर पहुंचा। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो भुवनेश्वर की तरफ से यह प्रेस टूर आयोजित किया गया है। जिसका मुख्य उद्देश्य सरकारों के द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों, राज्य की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराकर बेहतर अनुभव प्रदान करना है। 


प्रेस सूचना ब्यूरो देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुंद्रियाल ने देहरादून में प्रेस सूचना ब्यूरो भुवनेश्वर के सहायक निदेशक महेंद्र जेना और सूचना सहायक विकास रंजम दलाई के साथ उड़ीसा के मीडिया प्रतिनिधिमंडल का  स्वागत किया। यह दल अगले चार दिन प्रदेश में चल रहे केंद्र सरकार के महत्वकांक्षी विकास परियोजनाओं का स्थल भ्रमण करेगा।


चार दिवसीय कार्यक्रम के दौरान उड़ीसा का यह मीडिया प्रतिनिधिमंडल उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह से भेंट करेगा। साथ ही शौर्य स्थल, वन अनुसंधान संस्थान, टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (THDC), राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना समेत दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का दौरा करेगा।


इस दौरान उड़ीसा के पत्रकारों का दल विभिन्न अधिकारियों से भेंट करेगा और प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त करेगी।


उड़ीसा के मीडिया प्रतिनिधियों की यह यात्रा उन्हें उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कला एवं परंपराओं का अनुभव करने और समझने का अवसर भी प्रदान करेगी।


इस यात्रा के माध्यम से पत्रकार राज्य में भारत सरकार के विभिन्न विकासात्मक प्रोजेक्ट्स और कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी एकत्र करेंगे तथा इसे अपनी-अपनी मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए व्यापक जनता तक प्रसारित करेंगे।

 माँ गंगा के पावन तट, परमार्थ निकेतन में प्रातः काल सैक्रेड सनराइज चेंटिंग के साथ हुआ इंटरनेशनल योग फेस्टिवल 2026 का भव्य शुभारम्भ*

80 से अधिक देशों से 1500 से अधिक योग साधक और योग जिज्ञासुओं का समागम*

प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय योगाचार्या शिवा रे ने अपने विशेष सत्र के माध्यम से योग, लय और ऊर्जा का अद्भुत संगम से किया आनंदित*

प्रसिद्ध ड्रम वादक शिवमणि जी का परमार्थ निकेतन में आगमन*

भारत की प्राचीन विद्या मल्लखंभ देख योग साधक हुए रोमांचित*

योग महोत्सव में मल्लखंभ, योग, प्राणायाम, ध्यान, सूर्य नमस्कार, कलारिपयट्टु, योग निद्रा, हठ योग और नाद योग जैसी अनेक प्राचीन विद्याएँ का अद्भुत समावेश*

पूरे सप्ताह सांध्यकालीन कार्यक्रमों में प्रसिद्ध ड्रम वादक शिवमणि और श्रीमती रूना रिजवी की प्रस्तुति, राधिका दास का दिव्य कीर्तन, सुधांशु शर्मा तथा साइमन ग्लोड के भजन, और पद्मश्री सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक गायक कैलाश खेर एवं कैलासा बैंड का लाइव कॉन्सर्ट, गुरनिमित सिंह की मधुर प्रस्तुतियाँ तथा परमार्थ निकेतन के ऋषिकुमारों द्वारा योग प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र होंगे*

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विश्वभर से साधक हिमालय की गोद में एकत्र होकर योग, ध्यान और प्रार्थना में लीन होते हैं, तब एक संदेश गूंजता है योग ही वह शक्ति है जो विभाजनों को मिटाकर मानवता को एकत्व प्रदान कर सकती है*

*💫स्वामी चिदानन्द सरस्वती*


ऋषिकेश, भारत, 09 मार्च। विश्व प्रसिद्ध इंटरनेशनल योग फेस्टिवल 2026 का आज परमर्थ निकेतन, ऋषिकेश में अत्यंत उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ शुभारम्भ हुआ। एक सप्ताह तक चलने वाले इस महोत्सव में 80 से अधिक देशों से 1500 से अधिक योग साधक, योग जिज्ञासु तथा 25 से अधिक राजदूत, उच्चायुक्त, राष्ट्राध्यक्ष और राजनयिकों का सहभाग अत्यंत गौरव का विषय है।

इंटरनेशनल योग फेस्टिवल के प्रथम दिन गंगा जी की आरती के दौरान योग साधकों ने संगीत, योग, मल्लखंभ  के अनोखे संगम का भरपूर आनंद लिया। 

पावन माँ गंगा के तट पर प्रातःकाल से लेकर सायंकाल तक आयोजित योग सत्रों, आध्यात्मिक प्रवचनों, वैदिक अनुष्ठानों और प्रेरणादायक संगीत के साथ महोत्सव का प्रथम दिन अत्यंत दिव्य और प्रेरणादायक रहा, यह आध्यात्मिक और वैश्विक एकता के वातावरण की एक दिव्य शुरुआत है।

इस महोत्सव की शुरुआत वर्ष 1989 में हुई थी, जब उत्तर प्रदेश सरकार और परमार्थ निकेतन के सहयोग से आयोजित किया गया था। वर्ष 1999 से यह महोत्सव परमर्थ निकेतन में 18 योग जिज्ञासुओं के साथ इस महोत्सव की शुरूआत पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने की थी जिसकी निदेशक डा साध्वी भगवती सरस्वती जी हैं। आज यह विश्व के सबसे प्रतिष्ठित योग सम्मेलनों में से एक है।

सभी प्रतिभागियों ने पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में विश्व शांति यज्ञ में आहुतियाँ समर्पित कीं। इस अवसर पर विश्व शांति के लिए विशेष प्रार्थना की गई, विशेष रूप से मध्य पूर्व के देशों में शांति, सद्भाव और मानवता की स्थापना के लिए सामूहिक सर्वमंगल की प्रार्थना समर्पित की।

अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के प्रेरणास्रोत, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि सांसों की पवित्र लय के साथ अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 का दिव्य और ऊर्जामय शुभारम्भ आज हुआ। हिमालय की गोद और माँ गंगा के पवित्र तट पर आरम्भ हुआ यह महोत्सव पूरी मानवता को एक सूत्र में जोड़ने वाला वैश्विक आध्यात्मिक संगम है।

विश्व के विभिन्न देशों से आए हजारों योग साधक, आध्यात्मिक गुरु और योग जिज्ञासु यहाँ एकत्र होकर योग, ध्यान, प्राणायाम और साधना के माध्यम से शांति, संतुलन और समरसता का संदेश दे रहे हैं। इस महोत्सव का उद्देश्य केवल योग का अभ्यास कराना ही नहीं, बल्कि मानव चेतना को जागृत करना और मानवता को एकत्व प्रदान करना है।

पावन गंगा तट पर गूंजते मंत्र, ध्यान की गहराई, योग की साधना और भक्ति की मधुर ध्वनियाँ मिलकर ऐसा दिव्य वातावरण निर्मित कर रही हैं, जहाँ प्रत्येक साधक अपने भीतर की शांति और दिव्यता से जुड़ने का अनुभव कर रहा है।

आज जब दुनिया विभाजन, तनाव और संघर्ष की चुनौतियों से जूझ रही है, तब यह महोत्सव एक शक्तिशाली संदेश देता है, योग केवल अभ्यास नहीं, बल्कि मानवता को एक परिवार के रूप में जुड़ने का मार्ग है। योग हमें संदेश देता है कि हम अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही चेतना के अंश हैं। 

डा साध्वी भगवती सरस्वती जी, निदेशक इंटरनेशनल योग फेस्टिवल, ने कहा कि आज विश्व में जो भी चुनौतियाँ, अन्याय या असंतुलन दिखाई दे रहा हैं, उनके प्रति जो क्रोध या निराशा हमारे भीतर उठती है, उसे अपने हृदय के द्वार पर दस्तक समझें। यह संकेत है कि कहीं न कहीं संतुलन बिगड़ा हुआ है।

फिर ऐसी साधना विकसित करें, जिसके माध्यम से आप उस क्रोध या निराशा को ईश्वर अथवा प्रकृति को समर्पित कर सकें। जब हम उसे समर्पित करते हैं, तो वही भाव धीरे-धीरे परिवर्तित होकर प्रेम की व्यापक और शक्तिशाली ऊर्जा में रूपांतरित हो जाता है।

यही वह मार्ग है, जिसके लिए हमें मां गंगा ने बुलाया है, ताकि हम उस दिव्य और शक्तिशाली प्रेम के माध्यम बन सकें। अपने जीवन में किसी व्यक्ति, किसी उद्देश्य या किसी सत्य को खोजिए जिससे आप सच्चा प्रेम करते हों, और उसी प्रेम को प्रेरणा बनाकर अपने जागरूक कर्मों को संसार की सेवा में प्रवाहित कीजिए।

अमेरिका से आये योगाचार्य टॉमी रोसेन ने कहा कि एक समय मुझे चिंता होती थी कि मैं महापुरूषों जैसा नहीं बन सकता। तब मुझे यह समझाया गया कि यदि मैं नियमित रूप से अपनी योग साधना करूँ और अपने हृदय के केंद्र से जुड़ूँ, तो स्वयं स्पष्ट हो जाएगा कि मैं इस संसार की सेवा किस प्रकार सबसे बेहतर ढंग से कर सकता हूँ। वही मेरा धर्म बन जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि इंटरनेशनल योग फेस्टिवल में उपस्थित प्रत्येक साधक के पास यह अनमोल अवसर है कि वह यह खोज सके कि हम स्वयं की, अपने परिवार की, अपने समुदाय की और पूरे विश्व की सेवा किस प्रकार कर सकते हैं।

शिवा रे ने सत्र की शुरुआत एक केंद्रित साधना के साथ की और कहा कि इंटरनेशनल योग फेस्टिवल, जो परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में हो रहा है, योगिक ज्ञान और आध्यात्मिक परंपरा का अद्भुत केंद्र है। उन्होंने इस पावन स्थल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए सभी प्रतिभागियों को अपने भीतर स्थिरता और जागरूकता से जुड़ने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, “धर्म और धारणा दोनों ही ‘धृ’ धातु से उत्पन्न शब्द हैं, जिसका अर्थ है धारण करना या संभालना। प्रत्येक व्यक्ति के भीतर एक विशिष्ट बीज होता है, जिसे उसका स्वधर्म कहा जाता है। उसी प्रकार भारत की भी विश्व में एक विशेष और महत्वपूर्ण भूमिका है, दुनिया को यह मार्ग दिखाने की कि हम आधुनिक       कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग अपनी प्राचीन और गहन आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता के आधार पर कैसे करें।

इंटरनेशनल योग फेस्टिवल हमें यह स्मरण कराता है कि योग भले ही दुनिया के अलग-अलग देशों और संस्कृतियों में विभिन्न रूपों में दिखाई देता हो, लेकिन उसकी जड़ें एक ही हैं। जैसे अलग-अलग वृक्ष ऊपर से भिन्न दिखाई देते हैं, परंतु उनकी जड़ें आपस में जुड़ी होती हैं, वैसे ही पूरी मानवता भी एक ही चेतना से जुड़ी हुई है।

उन्होंने कहा कि हमें अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा, माँ गंगा और प्रकृति के साथ अधिक सामंजस्य में जीना होगा और अपने स्वधर्म के अनुसार कार्य करते हुए समस्त प्राणियों के बीच सामंजस्य और शांति स्थापित करने में योगदान देना होगा। यही संदेश पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी  प्रतिदिन मां गंगा जी की आरती के माध्यम से हम सभी को आशीर्वाद स्वरूप प्रदान करते हैं।

योगाचार्या आनंद मेहरोत्रा ने कहा, जीवन में वास्तविक परिवर्तन केवल किसी विश्वास प्रणाली से नहीं, बल्कि आंतरिक क्रिया और साधना से आता है, जो साधक के भीतर गहरा रूपांतरण लाती है। 

उन्होंने कहा कि हम सभी परमार्थ निकेतन व पूज्य स्वामी जी के अत्यंत आभारी हैं, जिसने इंटरनेशनल योग फेस्टिवल का आयोजन कर इसे हमारा आध्यात्मिक घर बनाया है। यहीं से हम वह सकारात्मक परिवर्तन प्रारम्भ कर सकते हैं, जिसे हम संसार में देखना चाहते हैं।

महोत्सव के प्रथम दिन की शुरूआत माँ गंगा के पावन तट पर आनन्द्रा जॉर्ज द्वारा पवित्र मंत्रोच्चार, भजन और सैक्रेड सनराइज चैंटिंग के साथ हुई। हिमालय की गोद में गूँजते मंत्रों ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

प्रातःकालीन सत्रों में योगाचार्य दासा दास के साथ हठ योग, प्राणायाम और ईरान की योगाचार्य आध्या, द्वारा पारंपरिक हठ योग, हठ विन्यास अभ्यास तथा कैवल्यधाम योग संस्थान की प्रसिद्ध प्राणायाम विशेषज्ञ संध्या दीक्षित द्वारा “प्राणायाम की शक्ति” विषय पर विशेष सत्र आयोजित किए गए।

योगाचार्य सेंसई संदीप देसाई के मार्गदर्शन में ताई-ची फ्लो सत्र ने प्रतिभागियों को संतुलन और आंतरिक शांति का अनुभव कराया।

मैट से मिशन तक, कर्मयोग के रूप में जीवन जीना इस विषय पर एक विशेष प्रेरणादायक सत्र आयोजित किया गया। इस विशेष संवाद का संचालन ईडन गोल्डमैन ने किया, जिसमें योग और आध्यात्मिक जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियाँ डा साध्वी भगवती सरस्वती जी, ईशान तिगुनायत, विश्वप्रसिद्ध योगाचार्या शिवा रे, आनंद मेहरोत्रा, तथा टॉमी रोसेन आदि ने अपने उत्कृष्ट विचार रखें।

इस संवाद सत्र में वक्ताओं ने बताया कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह सेवा, करुणा, जागरूकता और जीवन के प्रत्येक क्षण में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग है।


दिन भर प्रतिभागियों ने योग की अनेक विधाओं का अनुभव किया, जिनमें मंत्र योग, चक्र बैलेंसिंग विन्यास, विन्यास योग, हृदय-केंद्रित ध्यान सत्र, कुंडलिनी योग तथा योग दर्शन पर गहन चर्चा शामिल रही।

साथ ही नाद योग और साउंड हीलिंग पर आधारित विशेष “सेक्रेड साउंड एक्सपीरियंस” में प्रतिभागियों ने मंत्र, संगीत और ध्वनि के माध्यम से गहन ध्यान का अनुभव किया। संध्या में परमार्थ निकेतन की विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती के पश्चात प्रतिभागियों ने भारत की प्राचीन योग परंपरा मल्लखंब का आनंद लिया।

इस विशेष कार्यशाला का संचालन द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित योगेश मालवीय तथा योगी कोमलेश्वर जी ने किया। परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने योगाचार्य मयंक भट्ट के नेतृत्व में रोमांचक प्रस्तुति दी।

 आज का राशिफल 

दिनांक 10 मार्च 2026 

दिन मंगलवार

rashifal today 10 मार्च 2026


मेष

अ, आ, चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो

आज रुका धन मिलेगा। मन की चंचलता पर नियंत्रण रखें। कानूनी अड़चन दूर होकर स्थिति अनुकूल रहेगी। जीवनसाथी पर आपसी मेहरबानी रहेगी। जल्दबाजी में धनहानि हो सकती है। व्यवसाय में वृद्धि होगी। नौकरी में सुकून रहेगा। निवेश लाभप्रद रहेगा। कार्य बनेंगे। घर-बाहर सुख-शांति बने रहेंगे।



वृषभ

ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो

स्थायी संपत्ति की खरीद-फरोख्त से बड़ा लाभ हो सकता है। प्रतिद्वंद्विता रहेगी। पार्टनरों का सहयोग समय पर मिलने से प्रसन्नता रहेगी। नौकरी में मातहतों का सहयोग मिलेगा। व्यवसाय ठीक-ठीक चलेगा। आय में वृद्धि होगी। चोट व रोग से बाधा संभव है। दूसरों के काम में दखलंदाजी न करें।


मिथुन

का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह

पार्टी व पिकनिक की योजना बनेगी। मित्रों के साथ समय अच्‍छा व्यतीत होगा। स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। बौद्धिक कार्य सफल रहेंगे। किसी प्रबुद्ध व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। नौकरी में अनुकूलता रहेगी। वाणी पर नियंत्रण रखें। शत्रु सक्रिय रहेंगे। जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी।



कर्क

ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो

घर-बाहर अशांति रहेगी। कार्य में रुकावट होगी। आय में कमी तथा नौकरी में कार्यभार रहेगा। बेवजह लोगों से कहासुनी हो सकती है। दु:खद समाचार मिलने से नकारात्मकता बढ़ेगी। व्यवसाय से संतुष्टि नहीं रहेगी। पार्टनरों से मतभेद हो सकते हैं। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। जल्दबाज न करें।


सिंह

मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे

प्रयास सफल रहेंगे। किसी बड़े कार्य की समस्याएं दूर होंगी। मित्रों का सहयोग कर पाएंगे। कर्ज में कमी होगी। संतुष्टि रहेगी। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। व्यापार मनोनुकूल चलेगा। अपना प्रभाव बढ़ा पाएंगे। नौकरी में अनुकूलता रहेगी। निवेश शुभ रहेगा। जोखिम व जमानत के कार्य न करें।


कन्या

ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

दूर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। नौकरी में सहकर्मी साथ देंगे। व्यवसाय में जल्दबाजी से काम न करें। चोट व दुर्घटना से बचें। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। घर-बाहर स्थिति मनोनुकूल रहेगी। प्रसन्नता का वातावरण रहेगा। वस्तुएं संभालकर रखें।


तुला

रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते

उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। अप्रत्याशित लाभ के योग हैं। भाग्य का साथ मिलेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। नौकरी में अधिकार बढ़ सकते हैं। जुए, सट्टे व लॉटरी के चक्कर में न पड़ें। निवेश शुभ रहेगा। प्रमाद न करें।


वृश्चिक

तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। व्यवस्था नहीं होने से परेशानी रहेगी। व्यवसाय में कमी होगी। नौकरी में नोकझोंक हो सकती है। पार्टनरों से मतभेद हो सकते हैं। थकान महसूस होगी। अपेक्षित कार्यों में विघ्न आएंगे। चिंता तथा तनाव रहेंगे। आय में निश्चितता रहेगी।


धनु

ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे

अज्ञात भय व चिंता रहेंगे। यात्रा सफल रहेगी। नेत्र पीड़ा हो सकती है। लेन-देन में सावधानी रखें। बगैर मांगे किसी को सलाह न दें। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा मनोनुकूल रहेगी। धनार्जन होगा। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे।


मकर

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। सामजिक कार्य करने की इच्छा जागृत होगी। प्रतिष्ठा वृद्धि होगी। सुख के साधन जुटेंगे। नौकरी में वर्चस्व स्थापित होगा। आय के स्रोत बढ़ सकते हैं। व्यवसाय लाभप्रद रहेगा। निवेश शुभ रहेगा। घर-बाहर सहयोग व प्रसन्नता में वृद्धि होगी।

कुंभ

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा

रुका धन मिलेगा। पूजा-पाठ व सत्संग में मन लगेगा। आत्मशांति रहेगी। कोर्ट व कचहरी के कार्य अनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। प्रसन्नता का वातावरण रहेगा। मातहतों का सहयोग मिलेगा। किसी सामाजिक कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर प्राप्त हो सकता है। दूसरे के काम में दखल न दें।



मीन

दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची

क्रोध व उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। विवाद को बढ़ावा न दें। पुराना रोग बाधा का कारण रहेगा। स्वास्थ्य पर खर्च होगा। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में लापरवाही न करें। छोटी सी गलती से समस्या बढ़ सकती है। व्यवसाय ठीक चलेगा। मित्र व संबंधी सहायता करेंगे। आय बनी रहेगी। जोखिम न लें।

 

उत्तरकाशी:

09 मार्च 2026

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उत्तरकाशी-जिलाधिकारी प्रशान्त आर्य ने सोमवार को सरेंडर किए गए राशन कार्डों की समीक्षा की। समीक्षा में पाया गया कि जिला आपूर्ति कार्यालय में राज्य खाद्य योजना (एसएफवाई) के 63, प्राथमिक परिवार (पीएचएच) के 33 तथा अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) के 16 राशन कार्ड सरेंडर किए गए हैं। वहीं ब्लाक कार्यालयों में राज्य खाद्य योजना के 14, प्राथमिक परिवार के 27 तथा अंत्योदय अन्न योजना के 10 राशन कार्ड जमा किए गए हैं।


जिलाधिकारी नें जिलापूर्ति अधिकारी को निर्देश देते हुए कहा कि सरेंडर किए गए राशन कार्डों के स्थान पर पात्र परिवारों का चयन निर्धारित मानदंडों के आधार पर प्राथमिकता के अनुसार सुनिश्चित किया जाए।


जिलापूर्ति अधिकारी आशीष कुमार नें बताया कि प्राथमिक परिवार योजना के अंतर्गत उन परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनका मुखिया दिव्यांग व्यक्ति या विधवा महिला हो तथा परिवार की कुल मासिक आय 15 हजार रुपये से कम हो, वहीं अंत्योदय अन्न योजना के तहत ऐसे परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनका मुखिया दिव्यांग व्यक्ति या विधवा महिला हो और जिनकी सभी स्रोतों से कुल मासिक आय चार हजार रुपये से कम हो, इसके अलावा उन्होंने बताया कि सत्यापन में अपात्र पाए जाने वाले कार्डधारकों के राशन कार्ड निरस्त कर दिए जाएंगे तथा अपात्र होने की तिथि से अब तक प्राप्त राशन की बाजार मूल्य पर वसूली की जाएगी, इसके साथ ही संबंधित के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जाएगी।


जिलाधिकारी नें सभी अपात्र परिवारों को अपने राशन कार्ड स्वेच्छा से सरेंडर करने की अपील करते हुए इसकी अंतिम तिथि 19 मार्च 2026 तक बढ़ा दी है, उन्होंने कहा कि 20 मार्च 2026 के बाद जिले में गहन राशन कार्ड सत्यापन अभियान चलाया जाएगा।


11 मार्च को उत्तराखंड के 13 जनपद जिलों में “महिला आयोग आपके द्वार” का होगा आयोजन



(चिराग कुमार) हरिद्वार। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उत्तराखंड पश्चिम प्रांत की देवभूमि शाखा हरिद्वार के सदस्यों द्वारा एक गोष्ठी समेत संस्कार मिलन का आयोजन किया गया। वहीं रविवार को शाखा की संरक्षिका, राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती कमला जोशी के निवास स्थान पर बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शाखा के सभी सदस्यों ने अपने-अपने विचार रखे। वहीं उत्तराखंड महिला आयोग की सदस्य श्रीमती कमला जोशी द्वारा एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यक्रम की सूचना देते हुए बताया कि  आगामी 11 मार्च को राष्ट्रीय महिला आयोग के अभियान “महिला आयोग आपके द्वार” के तहत राज्य महिला आयोग के द्वारा उत्तराखंड के समस्त 13 जनपदों में कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। इसी क्रम में आयोग के सदस्यों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचकर महिलाओं की समस्याएं सुनी जाएंगी। इस कार्यक्रम को जन- जन तक पहुंचाने के लिए प्रयास किए जा रहे है। इस जनसुनवाई कार्यक्रम में घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, संपत्ति विवाद, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न और मानव तस्करी जैसे मामलों को प्राथमिकता से सुना जाएगा। कार्यक्रम में आयोजित श्रीमती रश्मि चौहान, मीनाक्षी अग्रवाल, शिवानी गॉड, प्रेम चावला, रत्नेश गौतम, डॉ कुसुम उपाध्याय, ममता कंसल, कृष्ण शर्मा, विजेता शर्मा, प्रीतशिखा शर्मा, सुनीता जोशी, जनक सहगल, राजेश्वरी बहुगुणा,  नेहा सती, डॉ माधवी गोस्वामी, किरण अग्रवाल, काजल वर्मा, गीतांजलि खुराना, सुनीता धीमान, किशन शर्मा, मधु उपाध्याय, गीतांजलि बंगा ओर उमा ढींगरा आदि उपस्थित रहे।

 



उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026–27 का बजट केवल आंकड़ों का बड़ा पुलिंदा है, लेकिन इसमें प्रदेश की वास्तविक समस्याओं का कोई ठोस समाधान नजर नहीं आता। सरकार ने इसे प्रदेश का सबसे बड़ा बजट बताया है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि इसमें पहाड़, किसान, बेरोजगार युवा और आम जनता की पीड़ा कहीं दिखाई नहीं देती।



पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों के आतंक से किसान और ग्रामीण लगातार परेशान हैं, उनकी फसलें बर्बाद हो रही हैं, लेकिन सरकार ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई। 


स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति आज भी पहाड़ों में बदहाल है, अस्पतालों में डॉक्टर और संसाधनों की भारी कमी है, लेकिन इस बजट में स्वास्थ्य के क्षेत्र में कोई ठोस और कारगर योजना दिखाई नहीं देती।


उत्तराखंड की सबसे बड़ी समस्या पलायन है। गांव खाली होते जा रहे हैं, लेकिन पलायन रोकने के लिए सरकार के पास कोई ठोस रोडमैप नहीं है। 


बेरोजगार नौजवानों को भी इस बजट से उम्मीद थी कि रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, लेकिन युवाओं के लिए इसमें कुछ भी नया नजर नहीं आता।


महंगाई लगातार बढ़ रही है और आम आदमी की कमर टूट रही है, लेकिन सरकार के बजट में महंगाई कम करने का कोई प्रभावी उपाय नहीं दिखता। 


शिक्षा का क्षेत्र लगातार बाजारीकरण की ओर बढ़ रहा है और सरकार इस पर रोक लगाने के बजाय इसे मौन स्वीकृति देती नजर आ रही है।


सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि टिहरी बांध विस्थापितों और प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा को लेकर भी इस बजट में कोई चर्चा नहीं की गई।


 साथ ही प्रतापनगर क्षेत्र को केंद्रीय ओबीसी में शामिल करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी सरकार ने कोई पहल नहीं की।

कुल मिलाकर यह बजट जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने में पूरी तरह असफल साबित हुआ है। उत्तराखंड की जनता को इससे जो आशाएं थीं, वह इस बजट में पूरी होती दिखाई नहीं देतीं।

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