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मुख्यमंत्री के अधीन विभाग में वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मियों को बाहर करने की तैयारी, 62 पदों पर सीधी भर्ती पूरी, नियुक्ति पत्र की तैयारी से बढ़ी बेचैनी


देहरादून : 




कर्मचारी राज्य बीमा योजना एवं श्रम चिकित्सा सेवाएं, उत्तराखंड में पिछले करीब 15 वर्षों से उपनल के माध्यम से सेवाएं दे रहे फार्मासिस्टों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। विभाग में फार्मासिस्ट के 62 स्वीकृत पदों पर सीधी भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाने की तैयारी बताई जा रही है। ऐसे में वर्षों से इन्हीं पदों के सापेक्ष सेवाएं दे रहे उपनल फार्मासिस्टों के सामने सेवा से बाहर होने का खतरा मंडराने लगा है।फार्मासिस्टों का कहना है कि उन्होंने 15 वर्षों से अधिक समय तक लगातार विभाग में सेवाएं दी हैं। इस दौरान कर्मचारी राज्य बीमा योजना के बीमित व्यक्तियों और उनके आश्रितों को दवाइयां उपलब्ध कराने से लेकर चिकित्सा व्यवस्था को सुचारु रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।

लेकिन अब उन्हीं स्वीकृत पदों पर नियमित भर्ती होने के बाद इन कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा होने की आशंका है। यदि सभी 62 पदों पर नियुक्तियां हो जाती हैं तो फार्मासिस्ट के स्वीकृत पदों पर कोई रिक्ति नहीं बचेगी और लंबे समय से कार्यरत उपनल कर्मियों के लिए विभाग में जगह बनाए रखना चुनौती बन जाएगा।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि कर्मचारी राज्य बीमा योजना विभाग मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के अधीन है। ऐसे में मुख्यमंत्री के अपने विभाग में वर्षों से लगातार सेवाएं दे रहे उपनल कर्मियों के भविष्य पर तलवार लटकना सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।

एक तरफ सरकार उपनल कर्मचारियों के हितों, सेवा सुरक्षा और समान कार्य-समान वेतन की बात करती है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से विभाग की व्यवस्था संभाल रहे कर्मचारियों के सामने नई भर्ती के बाद सेवा समाप्त होने की स्थिति पैदा हो रही है।

यदि मुख्यमंत्री के अधीन विभाग में ही 15 वर्षों से सेवाएं दे रहे उपनल कर्मियों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो प्रदेश के अन्य विभागों में वर्षों से कार्यरत उपनल कर्मचारियों को सरकार से क्या उम्मीद रखनी चाहिए?

उपनल कर्मियों का कहना है कि वर्षों की सेवा, अनुभव और विभागीय कार्यप्रणाली की जानकारी को नजरअंदाज कर उन्हें बाहर किया गया तो यह केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि उनके परिवारों के भविष्य का भी सवाल होगा।

62 पदों पर भर्ती पूरी होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार वर्षों से कार्यरत उपनल फार्मासिस्टों के अनुभव और सेवा अवधि को ध्यान में रखते हुए उनके भविष्य की कोई राह निकालेगी, या फिर 15 वर्षों की सेवा के बाद उन्हें विभाग से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा?

मामला अब सिर्फ 62 पदों का नहीं, बल्कि वर्षों से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा बने उपनल कर्मचारियों के भविष्य का है।

  जनहित में महत्वपूर्ण सूचना





देहरादून–मसूरी मार्ग स्थित पानीवाला बैंड पर अत्यधिक वर्षा के कारण मार्ग पर पूर्व निर्मित दीवार क्षतिग्रस्त हो गई है। आमजन की सुरक्षा के दृष्टिगत उप जिला मजिस्ट्रेट, मसूरी द्वारा जारी आदेश के अनुसार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के अंतर्गत उक्त मार्ग पर भारी वाहनों का आवागमन अग्रिम आदेशों तक प्रतिबंधित किया गया है।


🛠️ संबंधित विभाग द्वारा क्षतिग्रस्त मार्ग की तत्काल मरम्मत कर आमजन के सुरक्षित आवागमन हेतु आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।


📢 यात्रियों से अपील—


🌧️ अत्यधिक वर्षा के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें।


🚗 यात्रा से पहले मार्ग एवं मौसम की स्थिति की जानकारी अवश्य लें।


⚠️ भूस्खलन एवं क्षतिग्रस्त मार्ग वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतें।


🚧 प्रशासन एवं पुलिस द्वारा जारी यातायात निर्देशों का पालन करें।


🙏 किसी भी प्रकार का जोखिम लेकर यात्रा न करें।


उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की आम जनमानस से अपील है कि बरसात के मौसम में सुरक्षित रहकर यात्रा करें। मौसम एवं सड़क की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सतर्क रहें और अपनी एवं अपने परिवार की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।


उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण

जनहित में जारी।


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*मुख्यमंत्री ने ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की बैठक में दिए निर्देश*



 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन की स्थिति, रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने, स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने तथा स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने से संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।


बैठक में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग द्वारा विभिन्न जनपदों में आयोजित की जा रही प्रवासी पंचायतों, पलायन निवारण एवं स्वरोजगार जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गई। आयोग के सदस्यों ने पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने तथा रिवर्स पलायन को गति देने के संबंध में विभिन्न महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बैठक में प्राप्त सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार करते हुए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने के लिए सभी विभाग अपनी-अपनी विभागीय गतिविधियों और योजनाओं के माध्यम से समन्वित रूप से कार्य करें। विभागीय योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को स्वरोजगार एवं आजीविका से जुड़ी योजनाओं की जानकारी सरल और प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराई जाए। योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों अथवा बैंकों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा योजनाओं की जानकारी गांव स्तर तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं। स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और कौशल को रोजगार से जोड़ते हुए युवाओं को अपने गांव में ही आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएं। उन्होंने स्थानीय उत्पादों को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने, उनकी गुणवत्ता एवं ब्रांडिंग पर ध्यान देने तथा बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि रिवर्स पलायन केवल रोजगार उपलब्ध कराने से नहीं, बल्कि गांवों में बेहतर आजीविका, सुविधाएं और संभावनाएं विकसित करने से संभव होगा। इसके लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ परिणामोन्मुखी कार्य करना होगा।


बैठक में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष श्री एस.एस. नेगी, सदस्य श्री अनिल सिंह शाही, श्री दिनेश रावत, श्री सुरेश सुयाल, श्री राम प्रकाश पैन्यूली एवं श्रीमती रंजना रावत, 

सचिव श्री धीराज गर्ब्याल, डॉ॰ श्रीधर बाबू अद्दांकी, श्री सी. रविशंकर,  श्री अहमद इकबाल,अपर सचिव श्री  सौरभ गहरवार, श्रीमती अनुराधा पाल, श्री संतोष बडोनी उपस्थित रहे।

 

*गौहरी माफी में सौंग नदी का बढ़ता कटाव बना चुनौती, स्थायी समाधान पर जोर*

देहरादून :



ऋषिकेश क्षेत्र के गौहरी माफी एवं रायवाला के बाढ़ एवं जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का गुरुवार को आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक एवं विधायक प्रेमचंद्र अग्रवाल ने स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने  प्रभावित क्षेत्रों में भू-कटाव, जलभराव और क्षतिग्रस्त पुलिया की स्थिति का जायजा लेते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों से अब तक की गई कार्रवाई और प्रस्तावित कार्ययोजना की जानकारी ली।


निरीक्षण के दौरान तहसील प्रशासन, जिला आपदा प्रबंधन, सिंचाई, लोक निर्माण विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। मंत्री एवं विधायक ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं सुरक्षा कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी न हो और आवश्यक कार्यवाही प्राथमिकता के आधार पर तत्काल सुनिश्चित की जाए।

गौहरी माफी में भू-कटाव और आवासीय क्षेत्रों में जल प्रवेश का लिया जायजा


गौहरी माफी क्षेत्र में सौंग नदी के कारण हो रहे भू-कटाव तथा नदी का पानी आवासीय क्षेत्रों में प्रवेश करने की समस्या का निरीक्षण किया गया। इस दौरान अधिकारियों से क्षेत्र में अब तक किए गए सुरक्षात्मक कार्यों की जानकारी ली गई। मंत्री एवं विधायक ने प्रभावित क्षेत्र में तत्काल आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय करने के साथ ही समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।


*क्षतिग्रस्त पुलिया के पुनर्निर्माण के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश*

रायवाला खेल मैदान के समीप गौहरी माफी और रायवाला को जोड़ने वाली क्षतिग्रस्त पुलिया का भी निरीक्षण किया गया। यह पुलिया सुसुवा नदी के कारण क्षतिग्रस्त हुई है। मंत्री एवं विधायक ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को पुलिया के पुनर्निर्माण/मरम्मत के लिए तत्काल डीपीआर तैयार कर जिलाधिकारी कार्यालय अथवा जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय को आवश्यक धनराशि की स्वीकृति एवं आवंटन के लिए प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।


*अड़वाणी प्लॉट में जलभराव के स्थायी समाधान पर जोर*

रायवाला के अड़वाणी प्लॉट क्षेत्र में मानसून के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या का भी स्थलीय निरीक्षण किया गया। अधिकारियों को मानसून अवधि में लगातार पंपिंग के माध्यम से जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए आवश्यक तकनीकी एवं सुरक्षात्मक कार्यों के प्रस्ताव शीघ्र तैयार करने को कहा गया।  


निरीक्षण के दौरान मंत्री मदन कौशिक एवं विधायक प्रेमचंद्र अग्रवाल ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में जनसुरक्षा सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करते हुए प्रभावित नागरिकों को आवश्यक राहत एवं सुरक्षा उपलब्ध कराएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आपदा एवं जलभराव से संबंधित समस्याओं के समाधान में किसी भी स्तर पर विलंब न हो तथा दीर्घकालिक समाधान के लिए आवश्यक कार्यवाही शीघ्र पूरी की जाए।

 देहरादून :




मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने गुरुवार को सचिवालय में कुंभ मेला-2027 के दौरान आपदा प्रबंधन एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं की तैयारियों को लेकर सम्बन्धित विभागों एवं जिलाधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने निर्देश दिए कि संभावित आपदाओं एवं आपातकालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सभी तैयारियां पूर्व से पूरी कर ली जाएं, ताकि मेला अवधि में किसी भी आपात स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके।


मुख्य सचिव ने कहा कि कुंभ मेला-2027 के लिए आपातकालीन कार्ययोजना एवं क्षेत्र-विशिष्ट प्लान तैयार किए जाएं। उन्होंने पूरे कुम्भ क्षेत्र की सेक्टरवार निकासी योजना तैयार किए जाने के निर्देष दिए। कहा कि क्राउड मैनेजमेंट, ट्रैफिक प्लान, इवेक्यूएशन प्लान और फायर कंट्रोल मैकेनिज्म को लेकर एक समेकित आपदा प्रबंधन योजना तैयार की जाए, जिसमें भूकंप, बाढ़ तथा केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल एवं न्यूक्लियर (सीबीआरएन) आपातकाल जैसी संभावित परिस्थितियों के लिए स्पष्ट एसओपी तैयार की जाए।


 मुख्य सचिव ने बाढ़, भूकम्प एवं सीबीआरएन आपदा प्रबंधन के लिए आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल उपकरणों की खरीद पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका ऑपरेशनल होना, नियमित रखरखाव और सम्बन्धित कार्मिकों को प्रशिक्षण दिया जाना भी आवश्यक है। उन्होंने उपकरणों से सम्बन्धित गैप का आंकलन कर एसडीआरएफ के माध्यम से कुंभ मेला-2027 के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए।


मुख्य सचिव ने एटीएस को और मजबूत करने के निर्देश देते हुए कहा कि पर्वों एवं मेले के पीक टाइम को ध्यान में रखते हुए नियमित मॉक ड्रिल आयोजित की जाएं। आपातकालीन परिस्थितियों को वास्तविक रूप से सिम्युलेट कर उनके दौरान अपनाए जाने वाले वैकल्पिक मार्गों एवं रिस्पांस मैकेनिज्म का परीक्षण किया जाए।  उन्होंने कहा कि सभी व्यवस्थाओं का उद्देश्य आपात स्थिति में रिस्पांस टाइम को न्यूनतम करना होना चाहिए।


मुख्य सचिव ने एआई एवं आधुनिक तकनीक के उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कुंभ मेले के दौरान विभिन्न विभागों से प्राप्त सूचनाओं एवं अनुभवों का व्यवस्थित डेटाबेस तैयार किया जाए, ताकि भविष्य के आयोजनों में इसका उपयोग किया जा सके। उन्होंने आवश्यक तकनीकी एवं विशेषज्ञ सहयोग के लिए आईटीडीए, आपदा प्रबंधन विभाग सहित संबंधित संस्थाओं की सहायता लेने तथा आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञों को हायर करने के भी निर्देश दिए।


मुख्य सचिव ने कम्युनिकेशन मैनेजमेंट मजबूत किए जाने के निर्देष दिए हैं। उन्होंने कहा कि अफवाहों की रोकथाम के लिए भी प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए। साथ ही मेले के दौरान अतिरिक्त भीड़ एवं पीक टाइम को ध्यान में रखते हुए मोबाइल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने तथा आवश्यकतानुसार अतिरिक्त मोबाइल टावर एवं संचार सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।


मुख्य सचिव ने कंट्रोल रूम को मजबूत करने तथा सभी संबंधित विभागों के साथ आवश्यक समन्वय बैठकें कर व्यवस्थाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कुंभ मेला-2027 एक बड़े स्तर का आयोजन है और इसके लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए किसी भी संभावित आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा।


इस अवसर पर सचिव श्री शैलेश बगौली, श्री नितेश कुमार झा, श्री विनय शंकर पाण्डेय, आयुक्त गढ़वाल श्री आनन्द स्वरूप एवं मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका, सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं जिलाधिकारी उपस्थित रहे।




उत्तराखण्ड : अपने आशियाने का सपना हो रहा साकार*

*पीएमएवाई (शहरी) के तहत 84 फीसदी मकान बनकर तैयार*

*मुख्यमंत्री धामी का लक्ष्य है "हर पात्र परिवार का हो अपना घर"

देहरादून:



 मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू)  को नई गति दी है। जरूरतमंद पात्र परिवारों का अपने आशियाने का सपना साकार हो रहा है। आगामी दिसंबर माह तक 15 हजार से अधिक परिवारों को पक्की छत मिलने जा रही है। आवास विभाग ने लंबित आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए अगले माह सितंबर तक की टाइम लाइन निर्धारित की है।


प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत हर पात्र परिवार को पक्की छत उपलब्ध कराने के लिए धामी सरकार प्रतिबद्ध है। सचिव आवास डॉ आर राजेश के अनुसार प्रदेश में कुल 18 परियोजनाओं के तहत 15496 आवासीय इकाइयों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें लगभग 84 फीसदी यानी 12948 आवासों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। जबकि 1271 घरों की चाबियां भी लाभार्थियों को सौंपी जा चुकी है। इनमें 768 रुड़की और 503 लाभार्थी हरिद्वार के हैं। लंबित आवासीय परियोजनाओं को 30 सितंबर तक हर हाल में पूरा करने के निर्देश कार्यदायी संस्थाओं को दिए गए हैं।


*योजना के तहत कहां कितने आवास*


*जनपद ऊधमसिंह नगर*

योजना के तहत सर्वाधिक 10200 मकान ऊधमसिंह नगर जनपद में बनाए जा रहे हैं। इनमें रुद्रपुर हाउसिंग स्कीम के 1872 आवास बनकर तैयार हो चुके हैं। इसके अलावा 1264 आवास भवानीपुर (जसपुर), 1168 उकरौली-1 (सितारगंज), 864 उकरौली-2 (सितारगंज), 1256 कनकपुर (काशीपुर), 928 मटकोटा (रुद्रपुर), 928 श्यामनगर (गदरपुर), 824 महुवाखेड़ागंज, 512 मानपुर (काशीपुर) एवं 584 गंगापुर गोसाल (काशीपुर) में पात्र लाभार्थियों को मिलेंगे।


*हरिद्वार*

जनपद में कुल 4528 आवासीय इकाइयों का निर्माण किया जा रहा है, इनमें 544 मंगलौर, 448 झब्बरपुर, 1152 अन्नेखी, 1088 बेल्दी (बेलड़ी, रुड़की), 768 आवास शिकारपुर एवं 528 इंद्रलोक आवासीय योजना के तहत बन रहे हैं। 


*नैनीताल*

जनपद के उम्मेदनगर (रामनगर) में सभी 528 आवासीय इकाइयों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है।


*देहरादून*

जनपद में धौलास हाउसिंग स्कीम के तहत 240 में से 180 आवासों का निर्माण पूर्ण हो चुका है।


*कोट*--------


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मंत्र "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के अनुरूप विकास योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए हम संकल्पबद्ध हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की मजबूत नींव है। प्रदेश में हजारों गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को योजना का सीधा मिला है। पात्र परिवारों की मदद के लिए योजना में अब राज्य सरकार की हिस्सेदारी को ₹50 हजार से बढ़ाकर ₹75 हजार किया जा रहा है।


*-पुष्कर सिंह धामी*

*मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड*


देहरादून:





*मियांवाला स्थित जौहड़ की भूमि का 8.63 करोड़ की लागत से सौंदर्यीकरण, पुराने जलस्रोत को मिला नया जीवन*

*जल-सृष्टि पार्क में जल संरक्षण के साथ आमजन के लिए आधुनिक सुविधाएं*


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के विजन को धरातल पर उतारते हुए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने मियांवाला स्थित जौहड़ की भूमि का व्यापक सौंदर्यीकरण कर इसे आधुनिक एवं आकर्षक जल-सृष्टि पार्क के रूप में विकसित किया है। करीब 8.63 करोड़ रुपये की लागत से किए गए इस सौंदर्यीकरण कार्य के बाद वर्षों से उपेक्षित पड़े पुराने जलस्रोत और उसके आसपास का क्षेत्र अब आमजन के लिए प्रकृति, स्वास्थ्य, मनोरंजन और सुकून का नया ठिकाना बनकर तैयार है। सिटी फॉरेस्ट के बाद एमडीडीए की यह पहल देहरादून में हरित क्षेत्रों और प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार शहरी विकास को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने पर जोर देते रहे हैं। इसी सोच के अनुरूप मियांवाला के पंचायत घर गन्ना सेंटर के समीप स्थित जौहड़ की भूमि और पुराने तालाब क्षेत्र का कायाकल्प कर इसे आधुनिक पार्क का स्वरूप दिया गया है। परियोजना में जलस्रोत के संरक्षण के साथ आसपास के क्षेत्र का व्यवस्थित सौंदर्यीकरण किया गया है। जल संरक्षण और जलीय जीवों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के साथ नौकायन जैसी गतिविधियों के लिए भी व्यवस्थाएं की गई हैं।


एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने जल-सृष्टि पार्क का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने पार्क परिसर में रुद्राक्ष का पौधा भी रोपा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में एमडीडीए ऐसी परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनसे विकास के साथ प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित हो। मियांवाला में जौहड़ की भूमि का सौंदर्यीकरण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। पार्क में उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी शैली में मुख्य प्रवेश द्वार, योग डेक, योग से संबंधित मूर्तिकला, गजीबो, वॉकिंग ट्रैक, गार्डन बेंच, कैंटीन, स्वच्छ शौचालय और सुरक्षा रेलिंग जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। जलीय फूल, मछलियां, पक्षी और हरियाली पार्क की खूबसूरती बढ़ाते हैं। यह पार्क परिवारों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने के साथ शहर में एक बेहतर सार्वजनिक स्थल के रूप में भी विकसित हुआ है। एमडीडीए की यह परियोजना मुख्यमंत्री धामी के उस विजन को मजबूती देती है, जिसमें शहरों का विकास आधुनिक सुविधाओं के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को ध्यान में रखकर करने पर जोर दिया जा रहा है। मियांवाला का जल-सृष्टि पार्क इसी सोच का उदाहरण है, जहां जौहड़ की भूमि और पुराने जलस्रोत को संरक्षित करते हुए उसे जनसुविधा, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा गया है।


*जीर्ण तालाब से खूबसूरत जल-सृष्टि पार्क तक*

पंचायत घर गन्ना सेंटर के समीप लंबे समय से उपेक्षित पड़े जौहड़ और तालाब क्षेत्र का कायाकल्प कर एमडीडीए ने इसे आकर्षक पार्क का स्वरूप दिया है। 8.63 करोड़ रुपये की लागत से जौहड़ की भूमि पर किए गए सौंदर्यीकरण कार्य के तहत तालाब के संरक्षण के साथ आसपास हरित क्षेत्र और जनसुविधाएं विकसित की गई हैं। नौकायन जैसी गतिविधियों के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं, जबकि जलीय जीवों के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच प्राकृतिक जलस्रोतों का संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है। मियांवाला की यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चला जा सकता है।


*पारंपरिक पहाड़ी शैली में प्रवेश द्वार, योग डेक और वॉकिंग ट्रैक*

जल-सृष्टि पार्क को आधुनिक सुविधाओं के साथ उत्तराखंड की स्थानीय संस्कृति से भी जोड़ा गया है। पार्क का मुख्य प्रवेश द्वार पारंपरिक पहाड़ी शैली में तैयार किया गया है। यहां योग डेक, योग से संबंधित मूर्तिकला, आकर्षक गजीबो, वॉकिंग ट्रैक, गार्डन बेंच, कैंटीन और स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। तालाब के आसपास सुरक्षा रेलिंग लगाई गई है। हरियाली से भरपूर खुले क्षेत्र पार्क की खूबसूरती बढ़ाते हैं। ऐसे में यह पार्क बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों और परिवारों के लिए उपयोगी सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित हुआ है।


*सिटी फॉरेस्ट के बाद पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और कदम*

एमडीडीए की ओर से विकसित जल-सृष्टि पार्क को सिटी फॉरेस्ट के बाद आमजन के लिए एक और पर्यावरणीय तोहफा माना जा रहा है। सिटी फॉरेस्ट की तर्ज पर यह परियोजना भी देहरादून में हरित क्षेत्रों और प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने की सोच को आगे बढ़ाती है। जौहड़ और पुराने जलस्रोत के पुनर्जीवन से जहां क्षेत्र की सुंदरता बढ़ी है, वहीं जल संरक्षण और स्थानीय पारिस्थितिकी को भी मजबूती मिलेगी। नौकायन जैसी गतिविधियों के जरिए लोगों को जलस्रोतों से जोड़ने और प्रकृति के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी किया गया है।


*विकास में हरियाली और जल संरक्षण को प्राथमिकता*

एमडीडीए का जोर अब ऐसी परियोजनाओं पर है, जिनमें विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन भी कायम रहे। पुराने तालाब, जौहड़, जलस्रोत और हरित क्षेत्रों को संरक्षित कर उन्हें जनोपयोगी स्वरूप देने से शहर को बेहतर सार्वजनिक स्थल मिलने के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी संभव होगा। मियांवाला का जल-सृष्टि पार्क इसी सोच का परिणाम है। यह सिर्फ एक पार्क नहीं, बल्कि 8.63 करोड़ रुपये की लागत से जौहड़ की भूमि के सौंदर्यीकरण, पुराने जलस्रोत को बचाने, प्रकृति को संवारने और आमजन को बेहतर सुविधाएं देने की एकीकृत पहल है।


*बंशीधर तिवारी : पुराने जलस्रोतों को बचाना हमारी प्राथमिकता*

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून के विकास में पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मियांवाला का पुराना तालाब और जौहड़ क्षेत्र लंबे समय से उपेक्षित था, जिसे 8.63 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं के साथ जल-सृष्टि पार्क के रूप में विकसित किया गया है। हमारा उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि जलस्रोत का संरक्षण, जलीय जीवों के लिए अनुकूल वातावरण और आमजन को बेहतर सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराना है। सिटी फॉरेस्ट के बाद यह एमडीडीए की एक और महत्वपूर्ण पर्यावरणीय पहल है। आने वाले समय में भी ऐसे प्राकृतिक जलस्रोतों और हरित क्षेत्रों को संरक्षित करने का प्रयास जारी रहेगा।


*मोहन सिंह बर्निया : विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण जरूरी*

एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि मियांवाला जल-सृष्टि पार्क विकास और पर्यावरण संरक्षण का बेहतर उदाहरण है। जौहड़ की भूमि और पुराने तालाब क्षेत्र को संरक्षित कर उसका 8.63 करोड़ रुपये की लागत से सौंदर्यीकरण किया गया है और इसे जनसुविधाओं से जोड़ा गया है। पार्क में हरियाली, योग, वॉकिंग और नौकायन जैसी सुविधाएं लोगों को प्रकृति से जोड़ेंगी। एमडीडीए भविष्य में भी शहर के प्राकृतिक संसाधनों और हरित क्षेत्रों के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए जनहित से जुड़ी ऐसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाएगा।

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