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हरिद्वार प्रशासन के मार्गदर्शन एवं सहयोग से सेवानिवृत्त पुलिस-परिवारजन कल्याण जनसमिति एवं शिव शक्ति वेलनेस फाउंडेशन सोसाइटी द्वारा संयुक्त रूप से गंगा स्वच्छता अभियान आयोजित

हरिद्वार:



हरिद्वार प्रशासन के मार्गदर्शन एवं सहयोग से डॉ. ललित नारायण मिश्र जी, मुख्य विकास अधिकारी (CDO), हरिद्वार, सुश्री मीरा रावत जी, जिला मलेरिया अधिकारी (DMO), हरिद्वार तथा डॉ. पवन कार्की जी, प्रभारी नगर निगम, हरिद्वार के सहयोग एवं प्रेरणा से आज दिनांक 02 नवंबर 2026 को प्रातः 08:00 बजे से 11:30 बजे तक माँ गंगा की अविरल धारा एवं गंगा घाटों की स्वच्छता तथा निर्मलता के संकल्प के साथ हरकी पौड़ी से नीचे धोबी घाट स्थित विभिन्न घाट क्षेत्रों में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया गया।

इस पुनीत अभियान का आयोजन सेवानिवृत्त पुलिस-परिवारजन कल्याण जनसमिति, जनपद हरिद्वार द्वारा किया गया, जिसमें शिव शक्ति वेलनेस फाउंडेशन सोसाइटी, हरिद्वार के पदाधिकारियों एवं सक्रिय सदस्यों ने संयुक्त रूप से सहभागिता करते हुए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

अभियान के दौरान गंगा घाटों एवं आसपास के क्षेत्रों में फैले कूड़े-कचरे को एकत्रित कर सफाई की गई तथा घाटों को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने का प्रयास किया गया। सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों ने अपने सेवाकाल के दौरान विकसित अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, टीम भावना एवं सेवा के संकल्प को बरकरार रखते हुए इस अभियान को धार्मिक, सामाजिक एवं जनकल्याणकारी सेवा के रूप में संपन्न किया।

कार्यक्रम में सेवानिवृत्त पुलिस-परिवारजन कल्याण जनसमिति की ओर से समिति के सचिव श्री चेतन बहुगुणा, संरक्षक श्री जे.पी. जुयाल, उपाध्यक्ष श्री सोहन लाल जुयाल, कोषाध्यक्ष श्री जयकृत भंडारी, श्री सुरेश कुमार, श्री सत्यप्रकाश एवं समिति के अन्य कर्मठ सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा।

वहीं शिव शक्ति वेलनेस फाउंडेशन सोसाइटी की ओर से अध्यक्षा श्रीमती शिप्रा गुप्ता, उपाध्यक्ष श्री भूपेश चंद्र पांडेय, सह सचिव श्री जितेंद्र परमार, वरिष्ठ प्रवक्ता एवं सेवानिवृत्त श्रीमती रेणुका श्रीवास्तव, वरिष्ठ प्रबंधक श्री विनय श्रीवास्तव (पीएनबी बैंक, रानीपुर, बीएचईएल, हरिद्वार), श्रीमती नीतू धीमान, श्रीमती अनिता कर्णवाल, श्रीमती मनीषा गुप्ता, श्री मनोज सैनी, श्री आलोक सहित अन्य सक्रिय सदस्यों ने पूरे उत्साह, निष्ठा एवं समर्पण के साथ अपनी सेवाएँ प्रदान कीं।

दोनों संस्थाओं के सदस्यों ने सामूहिक सहभागिता एवं आपसी समन्वय के माध्यम से यह संदेश दिया कि माँ गंगा की स्वच्छता एवं निर्मलता केवल प्रशासन या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक एवं सामाजिक दायित्व है।

इस अवसर पर उपस्थित सभी सदस्यों ने भविष्य में भी ऐसे जनहितकारी एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों को निरंतर जारी रखने तथा समाज में स्वच्छता, जागरूकता एवं सेवा भावना को प्रोत्साहित करने का संकल्प लिया।

दोनों संस्थाओं ने इस पुनीत अभियान में मार्गदर्शन, प्रेरणा एवं सहयोग प्रदान करने वाले हरिद्वार प्रशासन, नगर निगम एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों तथा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी सहयोगियों के प्रति हार्दिक आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया।

माँ गंगा की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा के प्रति दोनों संस्थाओं का यह संयुक्त प्रयास निश्चित रूप से समाज के लिए प्रेरणादायी है।

उत्तरकाशी :



दिनांक 27.10.2026, समय सायं लगभग - 6:39 बजे ।

जिला आपातकालीन परिचालन, उत्तरकाशी से प्राप्त सूचना के अनुसार-

दिनांक 30.10.2026 को रात्रि लगभग 10:00 बजे DEOC उत्तरकाशी द्वारा अवगत कराया गया कि दिनांक 27.10.2026 को एक 12 सदस्यीय दल (07 ट्रेकर्स, 01 गाईड, 01 कुक एवं 03 पोर्टर) वन विभाग से अनुमति लेकर गंगोत्री से केदारताल ट्रैक पर गये थे, जिनकी गंगोत्री वापसी दिनांक 29.10.2026 को होनी थी मौसम खराब होने एवं अत्यधिक बर्फबारी / हिमस्खलन के कारण उक्त ट्रैकरों का भोजखड़क के समीप फंसे होने के बारे में

बताया गया ।

दिनांक 31.10.2026 को की गयी कार्यवाही का विवरण-

• दिनांक 31.10.2026 को प्रातः उत्तरकाशी जिला प्रशासन एवं जिला आपातकालीन केन्द्र द्वारा उपरोक्त घटना का संज्ञान लेते हुए SDRF, NDRF, वन विभाग एवं स्थानीय पुलिस तथा संबंधित ट्रैवल एजेंसी के साथ SAR Operation टीम को घटना स्थल के लिए भेजा गया ।

• DEOC उत्तरकाशी द्वारा बताया गया कि उपरोक्त रास्ते में जगह-जगह हिमस्खलन / बर्फ हो रखी है, जिसे SAR टीम द्वारा बर्फ को हटाकर लगातार नया रास्ता बनाया गया तथा स्थान कच्ची ढांग के समीप से 03 पोर्टर एवं 01 कुक ( कुल 04 व्यक्ति) को सुरक्षित रैस्क्यू किया गया । जिन्हें SAR की स्पेशल टीम द्वारा दिनांक 31.10.2026 को गंगोत्री लाया गया। आगे के रास्ते में भारी बर्फवारी तथा हिमस्खलन आने से ट्रैक अवरूद्ध होने के कारण SAR टीम आगे नहीं जा सकी ।

• दिनांक 31.10.2026 को हैली द्वारा केदारताल के मध्य गहन रैकी किया गया, लेकिन जिसमें उन्हें कोई भी ट्रैकर्स एवं उनका कोई भी सामान दिखाई नहीं दिया । दिनांक 01.11.2026 को की गयी कार्यवाही का विवरण-

• आज दिनांक 01.11.2026 को यूकाड़ा के हैली द्वारा एस. डी. आर.एफ. के जवान के साथ घटना स्थल की 02 बार पुनः सघन रैकी की गई, जिसमें कोई भी ट्रैकर्स एवं सामान इत्यादि कुछ भी नहीं दिखाई दिया।

• मौसम खराब होने के कारण हैली रैकी को कुछ समय के लिए स्थगित कर दी गई है। मौसम साफ होने पर हैली रैकी उपरोक्त ट्रैकरों को खोजने हेतु जारी रखा जायेगा ।

• एन०डी०आर०एफ० की 01 स्पेशल एम.आर.टी. टीम एवं चिकित्सक टीम तथा Soul Seeker Trekking Agency के 04 सदस्यों के साथ गंगोत्री से पैदल रैस्क्यू की टीम घटना स्थल के लिए रवाना है तथा रास्ते में है। मौसम खराब होने के कारण एवं ट्रैक में भारी बर्फबारी के कारण बाधाएं उत्पन्न हो रही है ।

• हर्षिल हैलीपैड़ पर डिप्टी डायरेक्टर गंगोत्री नेशनल पार्क, पुलिस, आर्मी, मेडिकल टीम एवं राजस्व टीम तैनात है साथ ही आज दिनांक 01.11.2026 को निम के 05 सदस्यों को हर्षिल के लिये रवाना किया गया ।

• दिनांक 02.11.2026 को प्रातः हैली द्वारा एस०डी०आर०एफ० के 05 सदस्यीय हाई एलटीट्यूड रेस्क्यू दल एवं निम के 04 सदस्यों को उक्त क्षेत्र में ड्रॉप किया जायेगा एवं पुनः ग्राउड सर्च अभियान आरम्भ किया जायेगा ।9

 

BD singh kumbh haridwar sama.nvyak


 *मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी के चारधाम यात्रा एवं श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य यात्रा सलाहकार के रूप में भी निभा रहे हैं महत्वपूर्ण दायित्व*


देहरादून/ गोपेश्वर: 1 नवंबर ।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मुख्य सलाहकार (चारधाम यात्रा एवं श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति) तथा सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी/ बीकेटीसी पूर्व प्रशासक / पूर्व मुख्य कार्याधिकारी बी.डी. सिंह को पर्यटन विभाग द्वारा हरिद्वार कुंभ मेला-2027 के अंतर्गत समन्वयक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गयी है।उनकी नियुक्ति को उत्तराखंड में चारधाम यात्रा, धार्मिक पर्यटन एवं कुंभ मेले की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


 उल्लेखनीय है कि बी.डी. सिंह का दीर्घ प्रशासनिक अनुभव, कार्यकुशलता, दूरदर्शिता एवं धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में गहरी समझ कुंभ मेला-2027 के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी‌  कुंभ समन्वयक का दायित्व मिलने पर बीकेटीसी सहित धार्मिक सामाजिक संगठनों, शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी है।


कहा है कि उनके अनुभव एवं मार्गदर्शन से देश-विदेश से हरिद्वार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं एवं तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर सुविधाओं, सुव्यवस्थित प्रबंधन, यातायात, स्वच्छता तथा पर्यटन संबंधी व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाने महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।साथ ही उत्तराखंड की धार्मिक एवं आध्यात्मिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाई प्राप्त होगी।

 बी.डी. सिंह को इस महत्वपूर्ण दायित्व मिलने से माना जा रहा है कि उनके अनुभव एवं नेतृत्व क्षमता से हरिद्वार कुंभ मेला-2027 को भव्य, दिव्य, सुव्यवस्थित एवं ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।




 दिनांक: 01 नवंबर 2026

dead bodies of badrinath helicopter incident


बद्रीनाथ क्षेत्र में हुए हेलीकॉप्टर क्रैश हादसे के बाद घटनास्थल की अत्यंत दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच संयुक्त रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी 06 मृतकों के शवों को सुरक्षित मुख्य मार्ग तक पहुंचा दिया गया।


हादसे का घटनास्थल खड़ी एवं दुर्गम पहाड़ी पर स्थित होने के कारण वहां तक पहुंचना और शवों को सुरक्षित नीचे लाना रेस्क्यू टीमों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था। इस चुनौतीपूर्ण अभियान में SDRF, NDRF, उत्तराखंड पुलिस, फायर सर्विस, ITBP एवं वन विभाग की संयुक्त टीमों ने आपसी समन्वय, विशेष रेस्क्यू तकनीकों एवं उपलब्ध उपकरणों का उपयोग करते हुए कठिन परिस्थितियों में लगातार कार्य किया।


सेनानायक SDRF श्री अर्पण यदुवंशी के दिशा-निर्देशन एवं मार्गदर्शन में SDRF की टीमों ने अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित किया। उनके मार्गदर्शन में जवानों ने अत्यंत जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में अदम्य साहस, सूझबूझ एवं कड़ी मेहनत का परिचय देते हुए सभी 06 मृतकों के शवों को दुर्गम पहाड़ी से सुरक्षित नीचे मुख्य मार्ग तक पहुंचाया। इसके उपरांत सभी शवों को आवश्यक अग्रिम कार्रवाई हेतु जिला पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।


इस पूरे रेस्क्यू अभियान में शामिल सभी एजेंसियों के कार्मिकों ने विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों एवं तमाम चुनौतियों के बावजूद पूर्ण समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा एवं आपसी तालमेल के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया।


हादसे में मृतकों का विवरण


1. कैप्टन हिमांशु (पायलट) – दिल्ली।

2. प्रताप (यात्री) – बेंगलुरु, कर्नाटक।

3. अरुण (यात्री) – बेंगलुरु, कर्नाटक।

4. शंकर गौड़ा (यात्री) – बेंगलुरु, कर्नाटक।

5. सुधीर के. (यात्री) – बेंगलुरु, कर्नाटक।

6. एच. एस. नटराजा (यात्री) – बेंगलुरु, कर्नाटक।

 

स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री* 

 *प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में विकास के साथ विरासत के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रही राज्य सरकार।* 

*उत्तराखंड में 3 लाख से अधिक महिलाएं बन चुकी हैं लखपति दीदी, मातृशक्ति ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला।* 

*स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध करा रही सरकार, ‘एक जनपद-दो उत्पाद’ और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ से मिल रही नई पहचान।

*रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि, स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को मिल रही गति।


* *लोकभाषा, लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सांस्कृतिक आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका।* 




मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को रेंजर्स कॉलेज ग्राउंड, देहरादून में अखिल गढ़वाल सभा, देहरादून द्वारा आयोजित उत्तराखंड कौथिक-2026 में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए अखिल गढ़वाल सभा के प्रयासों की सराहना की। 


उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति हमारी पहचान ही नहीं, बल्कि हमारी आत्मा भी है। हमारी लोकभाषाएं, लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वेशभूषा, मेले और पर्व हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत के अभिन्न अंग हैं। इन परंपराओं को संरक्षित रखना और भावी पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।



मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड कौथिक जैसे आयोजन हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने के साथ ही नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, भाषा और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।


 ऐसे आयोजनों से प्रदेश की लोककलाओं, पारंपरिक वेशभूषा, हस्तशिल्प, कारीगरी और खानपान को करीब से जानने-समझने का अवसर मिलता है। 


उन्होंने महोत्सव में विभिन्न स्टॉलों के माध्यम से प्रदर्शित किए गए पारंपरिक हस्तशिल्प, जैविक उत्पादों और उत्तराखंडी व्यंजनों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रयास स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने और उन्हें व्यापक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ‘विकास भी, विरासत भी’ के मूलमंत्र को आत्मसात करते हुए प्रदेश के समग्र विकास के साथ-साथ इसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी सोच के अनुरूप केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में पुनर्विकास के कार्यों के माध्यम से श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। 


साथ ही धार्मिक पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के अंतर्गत सीमांत क्षेत्रों में सड़क, बिजली, दूरसंचार, पर्यटन और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि सीमांत क्षेत्रों का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि उत्तराखंड के युवाओं और स्थानीय नागरिकों को रोजगार के लिए अपने घर और गांव से दूर न जाना पड़े, बल्कि उन्हें अपने ही क्षेत्र में आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों।


 इसी उद्देश्य से स्थानीय उत्पादों, स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। ‘एक जनपद, दो उत्पाद’ और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसी पहलों के माध्यम से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार और व्यापक पहचान उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, होम-स्टे योजना, कृषि, बागवानी, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मधुमक्खी पालन, सुगंधित पौधों तथा स्थानीय मसालों की खेती को प्रोत्साहित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की जा रही है।


उन्होंने कहा कि ‘वेड इन उत्तराखंड’, शीतकालीन पर्यटन और एडवेंचर टूरिज्म जैसी पहलों के माध्यम से प्रदेश में वर्षभर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे स्थानीय युवाओं, उद्यमियों, होटल व्यवसायियों, होम-स्टे संचालकों और छोटे कारोबारियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन के साथ-साथ आयुष, वेलनेस, आईटी और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं को भी विस्तार दे रही है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की मातृशक्ति प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है। राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी का परिणाम है कि ‘लखपति दीदी’ अभियान के तहत प्रदेश की 3 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं स्थानीय उत्पादों, पहाड़ी व्यंजनों, हस्तशिल्प, कृषि और विभिन्न लघु उद्यमों के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड कौथिक में महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों के स्टॉल महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता की इस यात्रा का प्रेरणादायी उदाहरण हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के सतत प्रयासों से उत्तराखंड ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान स्थापित की है। स्टार्टअप इंडिया की राज्यों की रैंकिंग में प्रदेश को ‘लीडर’ श्रेणी में स्थान प्राप्त हुआ है। नीति आयोग के एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2023-24 में भी उत्तराखंड देश के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल रहा और केरल के साथ संयुक्त रूप से सर्वोच्च स्कोर प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि पलायन निवारण आयोग की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह इस बात का संकेत है कि प्रदेश में स्थानीय स्तर पर आजीविका और रोजगार के अवसरों में निरंतर विस्तार हो रहा है।


उन्होंने कहा कि राज्य की सिंगल विंडो सिस्टम को ‘टॉप अचीवर्स’ श्रेणी में सम्मानित किया गया है। भारत सरकार के राज्य खनन तत्परता सूचकांक में उत्तराखंड को श्रेणी-सी में देश में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। इसी प्रकार लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस में भी प्रदेश को ‘अचीवर्स’ श्रेणी में स्थान मिला है। ये उपलब्धियां राज्य में सुशासन, पारदर्शी व्यवस्था, निवेश के अनुकूल वातावरण और आधारभूत सुविधाओं के विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास की इस यात्रा में अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता। आधुनिकता और प्रगति के साथ अपनी लोकभाषाओं, लोककलाओं, पारंपरिक वेशभूषा, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को भी समान महत्व देना आवश्यक है। उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने में समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। उत्तराखंड कौथिक जैसे आयोजन इस दिशा में सराहनीय पहल हैं, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ ही स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को मंच प्रदान करते हैं।


मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अखिल गढ़वाल सभा सहित प्रदेश की विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाएं उत्तराखंड की लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में इसी प्रकार योगदान देती रहेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को देश के श्रेष्ठ राज्यों में शामिल करने के ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ आगे बढ़ रही है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में प्रदेशवासियों का सहयोग, सहभागिता और आशीर्वाद अत्यंत महत्वपूर्ण है।


इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री खजान दास, अखिल गढ़वाल सभा के पदाधिकारी, विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधिगण, श्री नरेंद्र सिंह नेगी एवं श्रीमती संगीता ढोंडियाल सहित अन्य लोक कलाकार, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक, युवा तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के विभिन्न जनपदों में सड़क निर्माण एवं सुधार, धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण, बाध/बैराजों की सुरक्षा, सीवर लाइनों, नलकूप निर्माण, बहुउदेशीय भवन व अन्य विकास कार्यों के साथ ही शहरी स्थानीय निकायों को तृतीय त्रैमासिक किश्त के लिए ₹ 805 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की हैं। 

CM Dhami financial-approve


मुख्यमंत्री द्वारा जनपद अल्मोडा के विधानसभा क्षेत्र रानीखेत के पृथक-पृथक कार्यों हेतु  ₹ 1.72 करोड तथा यू०जे०वी०एन०एल० लि० के 06 बाधों/बैराजों की सुरक्षा एवं सुदृढीकरण हेतु विश्व बैंक पोषित परियोजना के अन्तर्गत ₹ 398.30 करोड की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

  

मुख्यमंत्री द्वारा जनपद चम्पावत के विधानसभा क्षेत्र चम्पावत के ग्राम पंचायत दुधौरी में भगवती मेला स्थल का सौन्दर्यीकरण किये जाने हेतु ₹ 58.67 लाख तथा ग्राम पंचायत क्वारसिंह (अमोड़ी) चम्पावत में भगवती दुर्गा मंदिर का विकास एवं सौन्दर्यीकरण किये जाने हेतु ₹ 47.85 लाख की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


मुख्यमंत्री द्वारा जनपद देहरादून के अन्तर्गत रायपुर में RGICS की मौजूदा पहली मंजिल पर प्रस्तावित शेड का निर्माण किये जाने हेतु ₹ 2.20 करोड़, जनपद पिथौरागढ़ के विधानसभा क्षेत्र डीडीहाट में किरौली स्कूल से जैतबुगा तक सीसी मार्ग का निर्माण किये जाने हेतु ₹ 74.44 लाख तथा जनपद उत्तरकाशी के हर्षिल में मुख्य मार्ग स्थित भवनों (भवन संख्या 1 से 23 तक) के बाह्य सरफेस के सौन्दर्यीकरण (फसॉड ट्रीटमेंट) का प्रथम फेज के कार्य हेतु ₹ 4.92 करोड की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


मुख्यमंत्री द्वारा छठवां राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों की प्रत्याशा में पंचम राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर समस्त शहरी स्थानीय निकायों को तदर्थ आधार पर वित्तीय वर्ष 2026-27 की तृतीय त्रैमासिक किश्त (अक्टूबर से दिसम्बर, 2026) हेतु ₹ 328.28 करोड़ की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


मुख्यमंत्री  द्वारा जनपद हरिद्वार में हरिद्वार की अनुरक्षण शाखा (गंगा) जोन प्रथम भूपतवाला हरिद्वार क्षेत्रान्तर्गत स्थित क्षतिग्रस्त एवं कम व्यास की सीवर लाईनों के प्रतिस्थापन की योजना हेतु ₹ 7.65 करोड़ तथा अनुरक्षण शाखा (गंगा) जोन द्वितीय कनखल हरिद्वार के विभिन्न स्थानों पर सीवर लाईनों के प्रतिस्थापन की योजना हेतु ₹ 6.24 करोड की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

 

मुख्यमंत्री द्वारा जनपद उधमसिंहनगर के विधानसभा क्षेत्र जसपुर हेतु मंदिरों के सुदृढीकरण हेतु ₹ 1.62 करोड, जनपद पिथौरागढ में गुरु गोरखनाथ मंदिर मेला स्थल के विकास एवं सौन्दर्यीकरण किये जाने हेतु ₹ 32.53 लाख तथा जनपद अल्मोड़ा के विधानसभा क्षेत्र जागेश्वर के चलनीछीना में घटीका मंदिर का सौन्दर्यीकरण किये जाने हेतु ₹ 99.39 लाख की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

 

मुख्यमंत्री द्वारा जनपद हरिद्वार में आबकारी विभाग रोशनाबाद के कार्यालय एवं आवासीय भवन के निर्माण हेतु ₹ 9.09 करोड़, जनपद पिथौरागढ़ में नगर निगम, पिथौरागढ़ के कार्यालय भवन निर्माण हेतु ₹ 24.47 करोड तथा जनपद चम्पावत के विधानसभा क्षेत्र चम्पावत में पूर्णागिरी मेले हेतु सेलागांव में बहुउदेशीय प्रशासनिक भवन में मेला मजिस्ट्रेट, मेला अधिकारी, पुलिस, चिकित्सकों आदि को एक स्थान पर कार्य करने की सुविधा हेतु  ₹ 4.00 करोड की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


मुख्यमंत्री द्वारा जनपद देहरादून में विकासखण्ड रायपुर के चक तुनवाला 1/4 भद्रकाली एन्कलेव 1/2 क्षेत्र में नलकूप, ओवर हैड टैंक, राइजिंग मेन तथा वितरण प्रणाली के सुदृढीकरण किये जाने हेतु ₹ 9.84 करोड तथा जनपद देहरादून की दक्षिण शाखा के अन्तर्गत धामावाला वार्ड में डिस्पेंसरी रोड से राजा रोड तक मौजूदा क्षतिग्रस्त सीवर लाईन को बदलने हेतु ₹ 3.80 करोड की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

 

तहसील विकासनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत ढकरानी में विश्व प्रसिद्ध आसन वेटलैंड (रामसर साइट) के प्रतिबंधित बफर जोन में दो दर्जन से अधिक स्टोन क्रेशर बिना किसी पर्यावरणीय अनुमति के संचालित किए जा रहे हैं। ये क्रेशर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT), माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों की खुली अवहेलना कर रहे हैं।



इन अवैध स्टोन क्रेशरों से निकलने Y0प गंदा पानी हजारों बीघा फसलों को बर्बाद कर किसानों की आजीविका छीन चुका है।न अंधाधुंध मशीनी खनन के कारण किसानों के खेत यमुना की भेंट चढ़ गए हैं। यमुना का पानी उत्तराखंड की सीमा में हर बरसात में तबाही मचा रहा है। रात-दिन चलने वाले इन क्रेशरों की तेज आवाज स्थानीय निवासियों के साथ-साथ जलजीवों और वन्यजीवों के जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है, जिससे गांव के लोग अपना घर-बार छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।

आसन वेटलैंड में साइबेरियन पक्षियों सहित अन्य प्रवासी पक्षियों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। चारों ओर सिर्फ स्टोन क्रेशरों का शोर और धूल के गुब्बार फैले हुए हैं। कभी हरा-भरा और सुंदर दिखने वाला यह क्षेत्र अब धूल और यमुना के विशाल गड्ढों में तब्दील हो चुका है। हजारों जीव-जंतुओं का जीवन समाप्त हो चुका है।

उक्त खनिज सामग्री को यमुना जल विद्युत निगम की क्षतिग्रस्त परियोजना के पुलों से हजारों ट्रक एवं अन्य भारी वाहनों द्वारा प्रतिदिन आवागमन कराया जा रहा है। शक्ति नहर के पुलों की समयावधि समाप्त होने तथा क्षतिग्रस्त स्थिति के कारण इन पर भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगाई जा चुकी थी, फिर भी ओवरलोडेड खनन सामग्री से भरे हजारों वाहनों का आवागमन निरंतर जारी है। इससे उत्तराखंड जल विद्युत निगम की परियोजना को गंभीर खतरा बना हुआ है। इनमें से एक पुल पहले भी गिर चुका है। यदि परियोजना को और नुकसान पहुंचता है तो प्रदेश में विद्युत संकट के साथ आर्थिक संकट भी उत्पन्न हो सकता है।

स्थानीय किसानों, पर्यावरणविदों और ग्रामवासियों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि आसन वेटलैंड जैसी अंतरराष्ट्रीय महत्व की साइट को बचाने के लिए अवैध खनन और क्रेशरों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

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