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*तन, मन और आत्मा का समन्वय है योग-मुख्यमंत्री*



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस‘ की शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि योग भारत की सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व एवं प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है। योग ने सम्पूर्ण विश्व को स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली, मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया है। आज विश्व के अधिकतम देशों में करोड़ों लोग, योग को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना रहे हैं। योग अब सीमाओं से परे सशक्त समाज का आधार एवं मानवता के कल्याण का वैश्विक माध्यम बन चुका है।


अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि योग के द्वारा आज दुनिया में हमारी विशिष्ट पहचान बनी है। योग के लिये दुनिया भारत की ओर देख रही है। योग ने देश व दुनिया को स्वस्थता का भी संदेश दिया है। महान ऋषि पतंजलि ने योग के माध्यम से लोगों को जीने की राह दिखाई है। योग का अभ्यास शरीर, श्वास और मन को जोड़ता है। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नही, बल्कि तन, मन और आत्मा का समन्वय है। उन्होंने कहा कि नियमित योग अभ्यास तनाव कम करने, जीवन को संतुलित बनाए रखने तथा असंभव लक्ष्य को पाने में विशेष भूमिका निभाता है। योग भारत की प्राचीनतम और समृद्ध परम्परा की एक पहचान है। पूरी मनुष्यता को हमारे ऋषि-मुनियों की यह महत्वपूर्ण देन है। योग साधना के द्वारा हम शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदियों से योग, आध्यात्मिक साधना और ऋषि-मुनियों की तपस्थली रही है। यहां की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा और प्राकृतिक वातावरण मानवता को स्वास्थ्य, संतुलन और सकारात्मक जीवन का संदेश देते हैं। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार, उत्तराखंड को योग, आयुर्वेद, वेलनेस और प्राकृतिक चिकित्सा के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। नई योग नीति के माध्यम से योग एवं ध्यान केंद्रों को प्रोत्साहन, योग प्रशिक्षकों को सहयोग तथा योग एवं वेलनेस आधारित रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं।


मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से प्रतिदिन योग को अपनाने, स्वस्थ एवं अनुशासित जीवनशैली अपनाने, नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने तथा योग के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के युवा योग को जनआंदोलन का स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे तथा स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त उत्तराखंड के निर्माण में सहभागी बनेंगे।

  

CSC dehradun , PM kisan nidhi broadcast

20 जून 2026 को पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किश्त प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देश के किसानों को दी गयी है। जिसको देहरादून जिले के सीएससी केंद्रों पर भी प्रसारित किया गया और किसानों को लाइव प्रसारण दिखाया गया। राजेश सिंह बिष्ट जिला मंडल देहरादून ने यह जानकारी देते हुए बताया कि अनेकों केंद्रों पर सफलतापूर्वक यह आयोजन वीएलई द्वारा किया गया।साथ ही उन्हें डॉक्यूमेंटेशन संबंधी जानकारी भी 


अति महत्वपूर्ण सूचना - CSC देहरादून  ,21 जून योग दिवस कार्यक्रम  के अंतर्गत आयुष मंत्रालय के निर्देशानुसार

सभी VLE साथियों एवं भाई-बंधुओं को सूचित किया जाता है, कि 


1. दिनांक व समय:  21 जून 2026, सुबह 6:00 से 7:00 बजे के बीच

2. स्थान: अपने CSC सेंटर / पार्क / गार्डन / मंदिर या किसी भी उपयुक्त स्थान पर

3. गतिविधि:* योग कार्यक्रम अनिवार्य रूप से आयोजित करें


फोटो/वीडियो निर्देश:

- *Time Stamp Camera* से फोटो लेना अनिवार्य है

- हर एंगल से *कम से कम 4-6 फोटो* लें

- हो सके तो *वीडियो भी बनाएं*

*🏆 पुरस्कार:*

- *सभी प्रतिभागियों* को सर्टिफिकेट दिया जाएगा

- *Top 3 Best योगा फोटो/वीडियो* को CSC द्वारा *ट्रॉफी + सर्टिफिकेट*

- ग्रुप में शेयर की गई फोटो/वीडियो के आधार पर चयन होगा


* अटेंडेंस:* 

- अटेंडेंस का फॉर्मेट आपको दिया जाएगा।

- अटेंडेंस अपलोड करना अनिवार्य है।

- अटेंडेंस के आधार पर जुलाई अंत तक ₹1400 दिए जाएंगे।

CSC VLE ध्यान दें:* 

यह कार्यक्रम  आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देश पर है। CSC के लिए पालन अनिवार्य है। ग्रुप में जुड़े सभी सदस्यों के नाम पहले ही मंत्रालय को भेजे जा चुके हैं, अतः सभी का भाग लेना जरूरी है* .

यह जानकारी देते हुए बताया कि समय पर अपना बैनर तैयार कर लें और 21 जून को सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।




*अखाड़ों में उत्साह, कुंभ मेले के दिव्य एवं भव्य आयोजन को लेकर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को सराहा*

*तैयारियों पर जताया संतोष- दिया पूर्ण सहयोग का भरोसा*

हरिद्वार:



हरिद्वार में आगामी वर्ष आयोजित होने वाले कुंभ मेला-2027 के दिव्य एवं भव्य आयोजन को लेकर शासन-प्रशासन द्वारा संत समाज एवं अखाड़ों के साथ निरंतर संवाद स्थापित किया जा रहा है। संतों के मार्गदर्शन एवं सुझावों के अनुरूप कुंभ मेले की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसी क्रम में कुंभ मेला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा विभिन्न अखाड़ों के प्रमुखों, महामंडलेश्वरों, महंतों एवं साधु-संतों से निरंतर भेंट कर मेले के सफल आयोजन को लेकर सुझाव एवं मार्गदर्शन प्राप्त किए जा रहे हैं।


राज्य सरकार द्वारा अखाड़ों एवं संत समाज के मार्गदर्शन में कुंभ मेला-2027 के दिव्य एवं भव्य आयोजन की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है। कुंभ केवल एक प्रशासनिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और संत परंपरा का विराट उत्सव है। इसी भावना के अनुरूप कुंभ मेले की व्यवस्थाओं में संत समाज की गरिमा, सुविधाओं एवं धार्मिक परंपराओं के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।


राज्य सरकार की इसी प्रतिबद्धता के तहत मेला प्रशासन के अधिकारी संत समाज के साथ निरंतर संवाद कर व्यवस्थाओं की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। इसी क्रम में अधिकारियों द्वारा श्री निरंजनी अखाड़ा, श्री जूना अखाड़ा, श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा, श्री पंचायती अटल अखाड़ा, श्री पंचायती आनंद अखाड़ा, श्री पंच अग्नि अखाड़ा, श्री पंच दशनाम आवाहन अखाड़ा, श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन, श्री पंचायती उदासीन नया अखाड़ा, श्री पंचायती निर्मल अखाड़ा, श्री निर्वाणी अणि अखाड़ा, श्री दिगम्बर अणि अखाड़ा एवं श्री निर्मोही अणि अखाड़ा के प्रमुख संतों एवं पदाधिकारियों से भेंट कर कुंभ आयोजन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।


इस दौरान अखाड़ों के प्रमुख संतों एवं पदाधिकारियों द्वारा कुंभ मेले के दौरान होने वाले अमृत स्नान, पेशवाई, अखाड़ों की आवासीय व्यवस्थाओं, यातायात प्रबंधन, सड़क एवं पुलों के निर्माण व रखरखाव, घाटों की व्यवस्थाओं, स्वच्छता, विद्युत, पेयजल, सुरक्षा तथा श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए।


संत समाज ने सुझाव दिया कि कुंभ मेले की आध्यात्मिक गरिमा एवं धार्मिक परंपराओं का संरक्षण करते हुए आधुनिक सुविधाओं का बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव प्राप्त हो सके और कुंभ की प्राचीन परंपराएं भी अक्षुण्ण बनी रहें।


अखाड़ों के प्रमुखों एवं वरिष्ठ पदाधिकारियों ने  सरकार एवं मेला प्रशासन द्वारा प्रारंभिक चरण से ही संवाद स्थापित कर सुझाव लिए जाने की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि संत समाज को साथ लेकर तैयार की जा रही व्यवस्थाओं से कुंभ मेले का आयोजन अधिक प्रभावी, सुव्यवस्थित एवं सफल होगा।


संत समाज ने विश्वास व्यक्त किया कि कुंभ मेला-2027 दिव्य, भव्य, सुव्यवस्थित एवं ऐतिहासिक आयोजन के रूप में स्थापित होगा। उन्होंने कहा कि हरिद्वार की पावन भूमि पर आयोजित होने वाला कुंभ विश्वभर के श्रद्धालुओं और सनातन धर्मावलंबियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है तथा संत समाज मेले की सफलता में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए पूर्ण रूप से सहयोग प्रदान करेगा।

 

*उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के खाते में पहुंची धनराशि* 


4400 labour get more than 11 crore by CM Dhami



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार  को उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के 4400 से अधिक श्रमिक लाभार्थियों के खाते में डीबीटी के माध्यम से लगभग 11 करोड़ रुपये की धनराशि का अंतरण किया।


मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बोर्ड की विवाह उपरांत सहायता,  मृत्यु उपरांत अनुदान,  प्रसूति सुविधा तथा शिक्षा सहायता योजनाओं के लाभाथियों के खाते में वन क्लिक के माध्यम से यह राशि वितरित की। 


इस अवसर पर मुख्यमंत्री  ने श्रम विभाग को निर्देश दिए कि श्रमिक कल्याण योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए तथा विभिन्न क्षेत्रों में शिविर आयोजित कर अधिक से अधिक पात्र श्रमिकों को योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के कार्यस्थलों के निकट ही आवश्यक सामग्री वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे उन्हें सुविधाजनक तरीके से लाभ मिल सके।


मुख्यमंत्री ने श्रमिकों के स्वास्थ्य परीक्षण, उनके आश्रित बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहन तथा जीवनोपयोगी सामग्री के वितरण हेतु विशेष शिविरों के आयोजन पर भी जोर दिया। उन्होंने सभी योजनाओं के संचालन में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने और सूचना प्रौद्योगिकी के अधिकाधिक उपयोग के निर्देश दिए। साथ कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि केवल पात्र श्रमिकों को ही योजना का लाभ मिले। 


इस अवसर पर जानकारी दी गई कि बोर्ड द्वारा पिछले एक वर्ष में 24,323 श्रमिकों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से कुल 93 करोड़ 6 लाख रुपये की अनुदान राशि वितरित की जा चुकी है। 

इस अवसर पर श्री कैलाश पंत (राज्य सलाहकार, संविदा बोर्ड), श्रीमती गीता रावत (अध्यक्ष, सतर्कता समिति), श्रीमती मोहिनी पोखरिया (उपाध्यक्ष, राज्य सतर्कता समिति), अपर सचिव श्री विनीत कुमार, उप श्रम आयुक्त श्री विपिन कुमार, सहायक श्रम आयुक्त श्री शैलेश सती, वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ श्री दुर्गा चमोली उपस्थित हुए। कार्यक्रम का संचालन श्रम आयुक्त श्री प्रकाश चन्द्र दुम्का द्वारा किया गया।

योग के पहले धरा योग’ - गंगा एवं घाटों की स्वच्छता कर दिया ‘स्वच्छ धरा, स्वस्थ शरीर’ का संदेश’’*


’ऋषिकेश:


yoga in parmarth niketan on 21st june2026


उत्तराखण्ड।’’ 12वें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में व्यापक स्तर पर तैयारियाँ प्रारम्भ हो चुकी हैं। इस वर्ष की तैयारियों का शुभारम्भ केवल योगाभ्यास से नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए ’’‘योग के पहले धरा योग’’’ के प्रेरणादायी संदेश के साथ किया गया। परमार्थ निकेतन के ऋषिकुमारों, विद्यार्थियों, स्वयंसेवकों तथा देश-विदेश से आए साधकों ने माँ गंगा के तट एवं घाटों पर विशेष स्वच्छता अभियान चलाकर यह संदेश दिया कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ समाज का आधार स्वच्छ प्रकृति एवं स्वच्छ पर्यावरण ही है।


परमार्थ पीठाधीश्वर, परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के ’’पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी’’ ने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि सम्पूर्ण जीवन को संतुलित, समरस और जागरूक बनाने की दिव्य साधना है। उन्होंने कहा कि यदि हमारी धरती, हमारी नदियाँ और हमारा पर्यावरण प्रदूषित होंगे, तो मानव जीवन भी स्वस्थ नहीं रह सकता। इसलिए योग का वास्तविक आरम्भ प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और पर्यावरण संरक्षण से होना चाहिए। इसी भावना को जन-जन तक पहुँचाने के लिए ’’‘योग के पहले धरा योग’’’ अभियान का शुभारम्भ किया गया।


पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज विश्व योग को अपना रहा है, परन्तु योग का मूल दर्शन हमें यह संदेश देता है कि हम केवल अपने शरीर से ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि से जुड़े हुए हैं। जब हम धरती को स्वच्छ रखते हैं, जलस्रोतों का संरक्षण करते हैं और प्रकृति का सम्मान करते हैं, तभी योग की वास्तविक साधना पूर्ण होती है। योग हमें ‘मैं’ से ‘हम’ की यात्रा कराता है और यही भावना विश्व कल्याण का आधार है।


स्वच्छता अभियान के दौरान सभी प्रतिभागियों ने गंगा तटों एवं घाटों पर फैले प्लास्टिक, कूड़े-कचरे एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थों को एकत्रित कर उनके उचित निस्तारण की व्यवस्था की। साथ ही उपस्थित सभी लोगों ने एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक का उपयोग न करने, जल संरक्षण करने तथा अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने का संकल्प लिया।


इस अवसर पर ’’साध्वी भगवती सरस्वती जी’’ ने कहा कि योग केवल मैट पर बिताया गया एक घंटा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। यदि हमारा व्यवहार प्रकृति के प्रति उत्तरदायी नहीं है, तो हमारा योग अधूरा है। उन्होंने कहा कि धरती हमारी माता है और उसकी सेवा करना ही सच्ची साधना है। गंगा की स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और मानवीय जिम्मेदारी है।


उन्होंने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस का उद्देश्य केवल योगासन करना नहीं, बल्कि योग के मूल जीवन मूल्योंकृकरुणा, संतुलन, अनुशासन, सेवा और प्रकृति के प्रति सम्मानकृको जीवन में उतारना है। जब हम अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखते हैं, तभी हम अपने भीतर भी सकारात्मकता, शुद्धता और ऊर्जा का अनुभव करते हैं।


परमार्थ निकेतन द्वारा आयोजित इस अभियान में देश-विदेश से आए अनेक साधकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। ’’‘स्वच्छ गंगा, स्वस्थ भारत’, ‘योग के पहले धरा योग’, ‘धरती रहेगी स्वच्छ तभी जीवन होगा स्वस्थ’, ‘क्लीन गंगा, ग्रीन अर्थ’’’ तथा ’’‘हेल्दी प्लैनेट, हेल्दी पीपल’’’ जैसे प्रेरक नारों के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया।


12वें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस’’ के अवसर पर परमार्थ निकेतन में आयोजित ’’कॉमन योग प्रोटोकॉल में विश्व के अनेक देशों से आए राजदूत, प्रतिनिधि एवं राजनयिक सहभागिता करेंगे।


पूज्य ’’स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी’’ एवं ’’साध्वी भगवती सरस्वती जी’’ के पावन सान्निध्य में भारत के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों साधक, पर्यटक, योग-जिज्ञासु, योगाचार्य तथा परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमार परमार्थ गंगा तट पर कॉमन योग प्रोटोकॉल का सामूहिक अभ्यास करेंगे। तत्पश्चात विश्व शान्ति यज्ञ में अपनी आहुतियाँ समर्पित करेंगे।


’’‘योग के पहले धरा योग’’’ का यह संदेश केवल अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस तक सीमित नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के दैनिक जीवन का संकल्प बनेकृयही इस पहल का मुख्य उद्देश्य है। जब धरती स्वस्थ होगी, तभी मानव स्वस्थ होगा और तभी योग का वास्तविक स्वरूप विश्व में स्थापित हो सकेगा।


अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) द्वारा उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों में व्यापक स्तर पर योग दिवस कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। 

yoga on CSC centres on 21 june 2026


प्रदेश के सैकड़ों CSC केंद्रों पर योग शिविर आयोजित किए जाएंगे तथा नागरिकों को योग के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष गतिविधियां संचालित की जाएंगी।


CSC ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के राज्य कार्यालय द्वारा सभी जिला प्रबंधकों एवं ग्राम स्तरीय उद्यमियों (VLEs) को अपने-अपने क्षेत्रों में योग शिविर आयोजित करने एवं अधिक से अधिक नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन शिविरों में स्थानीय नागरिकों, महिलाओं, युवाओं, विद्यार्थियों एवं वरिष्ठ नागरिकों को योगाभ्यास कराया जाएगा तथा योग के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य संबंधी लाभों की जानकारी दी जाएगी।


योग दिवस के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संबोधन एवं सामूहिक योग कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी CSC केंद्रों पर किया जाएगा, जिससे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिक भी इस राष्ट्रीय आयोजन से जुड़ सकें। CSC केंद्रों पर बड़ी स्क्रीन एवं डिजिटल माध्यमों से लाइव प्रसारण की व्यवस्था की जा रही है।


सभी नागरिकों से अपील की कि वे अपने निकटतम CSC केंद्र पर आयोजित योग शिविर में प्रतिभाग कर योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं तथा स्वस्थ एवं निरोगी समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।

 

पांच साल बाद भवन बनकर तैयार, फिर भी एक कमरे में चल रहा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र

ऋषिकेश ;



आडवाणी प्लॉट स्थित छिद्दरवाला का नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र करीब दो करोड़ रुपये की लागत से बनकर पूरी तरह तैयार हो चुका है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक पुराने भवन से नए भवन में स्थानांतरण नहीं किया गया है। इसके चलते क्षेत्र के लोगों को आज भी सीमित संसाधनों के बीच स्वास्थ्य सेवाएं लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।

पूर्व में देहरादून-हरिद्वार हाईवे चौड़ीकरण की जद में आने से पुराने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन प्रभावित हो गया था। इसके बाद पिछले पांच वर्षों से स्वास्थ्य केंद्र एक कमरे में संचालित किया जा रहा है। भवन निर्माण के लिए भूमि संबंधी विवाद के कारण भी परियोजना लंबे समय तक अटकी रही, लेकिन अब सभी बाधाएं दूर होने के बाद नया भवन पूरी तरह तैयार है।

इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक नए भवन में स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं की हैं। नए भवन में स्वास्थ्य केंद्र संचालित होने से चार ग्राम सभाओं के हजारों ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

क्षेत्र में चर्चा है कि किसी जनप्रतिनिधि या माननीय के औपचारिक उद्घाटन के बिना नए भवन में स्वास्थ्य केंद्र का संचालन शुरू नहीं किया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि उद्घाटन की औपचारिकताओं से पहले आम जनता की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए नये भवन में जल्द से जल्द स्वास्थ्य सेवाएं शुरू की जाएं, ताकि वर्षों से चली आ रही अस्थायी व्यवस्था समाप्त हो सके।

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