Halloween party ideas 2015


 चौधरी फार्म और सर्वे स्टेडियम में बहनों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री,

 *रक्षाबंधन पर 28 और 29 अगस्त को महिलाओं को रोडवेज बसों में निःशुल्क यात्रा की सौगात* 

 *महिला सशक्तिकरण के लिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का मुख्यमंत्री ने किया उल्लेख* 

 *प्रदेश की करीब 5 लाख महिलाएं 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर बढ़ा रहीं आत्मनिर्भरता की ओर कदम* 


 *3 लाख से अधिक बहनें बनीं लखपति दीदी, सरकारी सेवाओं में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण* 



 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को रक्षाबंधन के पावन अवसर पर देहरादून में आयोजित दो कार्यक्रमों में प्रतिभाग कर प्रदेश की मातृशक्ति के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया। मुख्यमंत्री ने सर्वप्रथम जीएमएस रोड स्थित चौधरी फार्म में आयोजित रक्षाबंधन समारोह में प्रतिभाग किया। इसके पश्चात उन्होंने हाथीबड़कला स्थित सर्वे स्टेडियम में आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। दोनों ही कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी को रक्षा सूत्र बांधा और उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने सभी बहनों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्नेह और आशीर्वाद के प्रति आभार व्यक्त किया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि वह उत्तराखंड की समस्त माताओं और बहनों को रक्षाबंधन की अग्रिम शुभकामनाएं देते हैं और ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि यह पवित्र पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशियों की नई सौगात लेकर आए। उन्होंने कहा कि आज बहनों के बीच पहुंचकर उन्हें ऐसा अनुभव हो रहा है, जैसे कोई भाई अपने घर-परिवार के बीच पहुंचा हो। मातृशक्ति से मिल रहा स्नेह और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और यही उन्हें उत्तराखंड के प्रत्येक नागरिक की सेवा के लिए निरंतर कार्य करने की प्रेरणा देता है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं है, बल्कि यह अटूट स्नेह, विश्वास, समर्पण और सुरक्षा के उस पवित्र संकल्प का पर्व है, जिसे भाई अपनी बहन के प्रति जीवनभर निभाने का प्रयास करता है। यह पर्व हमें यह भी सिखाता है कि रिश्ते केवल अधिकारों से नहीं, बल्कि कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के निर्वहन से मजबूत होते हैं। भाई का बहन के प्रति स्नेह एवं सुरक्षा का संकल्प और बहन का भाई के प्रति अटूट विश्वास—इन दोनों पवित्र भावनाओं को रक्षाबंधन और अधिक मजबूत करता है।


उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन हमें नारी सम्मान के महत्व का भी स्मरण कराता है। नारी का सम्मान केवल हमारा कर्तव्य नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और संस्कार का आधार है। नारी परिवार की आधारशिला होने के साथ-साथ समाज और संस्कृति की भी मूल शक्ति है। जिस समाज में महिलाओं का सम्मान होता है, वही समाज वास्तव में समृद्ध और संस्कारित बनता है। 



मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी समाज और राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी मातृशक्ति होती है। जब महिला सशक्त होती है तो उसका लाभ केवल परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा समाज और राष्ट्र आगे बढ़ता है। आज महिलाएं अंतरिक्ष से लेकर देश की सीमाओं तक, घर-परिवार से लेकर उद्योग और व्यवसाय तक हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रही हैं। अब महिलाएं केवल सहभागिता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका में भी आगे बढ़ रही हैं।


उन्होंने कहा कि जब देवभूमि उत्तराखंड की मातृशक्ति की बात आती है तो उनका सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है। पहाड़ की महिलाओं ने संघर्ष को अपनी शक्ति बनाया है और परिवार, समाज तथा प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


 *महिला सशक्तिकरण के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ऐतिहासिक पहल* 


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री जी ने ‘नारी तू नारायणी’ के भाव को शासन की नीतियों और कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाया है। उज्ज्वला योजना के माध्यम से माताओं-बहनों को धुएं से मुक्ति दिलाने, जल जीवन मिशन के माध्यम से घर-घर नल से जल पहुंचाने, प्रधानमंत्री आवास योजना में महिलाओं को घर के स्वामित्व से जोड़ने तथा लखपति दीदी अभियान के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया गया है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण, शौचालयों का निर्माण और तीन तलाक जैसी कुप्रथा के खिलाफ निर्णायक कदम भी महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हैं। केंद्र सरकार की नीतियों के केंद्र में मातृशक्ति का सम्मान और कल्याण सर्वोपरि है।


 *उत्तराखंड में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष जोर* 


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तराखंड सरकार भी मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त हों।


इसी उद्देश्य से उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, सशक्त बहना उत्सव, मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना और मुख्यमंत्री उद्यमशाला जैसी पहलों के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रदेश की लगभग 5 लाख महिलाएं 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी कर रही हैं। ये स्वयं सहायता समूह केवल आय का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सामूहिक शक्ति, नेतृत्व और आत्मनिर्भरता के मजबूत केंद्र बन चुके हैं। प्रदेश में 7 हजार से अधिक ग्राम संगठन और 500 से अधिक क्लस्टर संगठन भी महिलाओं की सामूहिक क्षमता और नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।


उन्होंने कहा कि 3 लाख से अधिक बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। इन महिलाओं ने न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि पूरे प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल कायम की है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ उन्हें सामाजिक और संवैधानिक अधिकारों के स्तर पर भी सशक्त किया जा रहा है। प्रदेश में सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया है। वहीं समान नागरिक संहिता के माध्यम से सभी वर्गों की महिलाओं के अधिकारों की रक्षा तथा उन्हें समान न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया है।


उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए संचालित योजनाओं की संख्या इतनी अधिक है कि यदि वे एक-एक योजना का उल्लेख करने लगें तो समय कम पड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार के लिए ये योजनाएं केवल सरकारी योजनाएं नहीं हैं, बल्कि मातृशक्ति को आत्मनिर्भर, सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन प्रदान करने की प्रतिबद्धता हैं।



 *34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी* 


मुख्यमंत्री ने कहा कि एक मां के लिए सबसे बड़ी खुशी तब होती है, जब उसका बेटा या बेटी पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ा हो जाए, रोजगार प्राप्त करे और अपने परिवार का सहारा बने। इसके विपरीत बच्चे के पढ़-लिखने के बाद भी रोजगार के लिए भटकना मां के लिए सबसे बड़ा दर्द होता है। सरकार ने इसी पीड़ा को समझते हुए अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी देने का कार्य किया है।


उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल रोजगार देने की बात नहीं की, बल्कि भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार भी किए हैं। नकल विरोधी कानून लागू किया गया, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई तथा योग्य युवाओं के साथ अन्याय रोकने के लिए कठोर व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। आज प्रदेश का युवा यह विश्वास कर सकता है कि उसकी मेहनत का परिणाम उसकी योग्यता तय करेगी, न कि किसी नकल माफिया या भ्रष्ट व्यवस्था का प्रभाव।


“ *मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, एक भाई के रूप में आपके बीच आया हूं”* 


मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के रक्षाबंधन समारोह में वे केवल मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक भाई के रूप में अपनी बहनों के बीच उपस्थित हैं। उन्होंने मातृशक्ति से कहा कि प्रदेश की किसी भी बहन या बेटी को कभी कोई परेशानी हो तो वह निःसंकोच अपनी बात मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा सकती है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि उनकी समस्या का संज्ञान लेकर उसके समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा और वे एक भाई होने के अपने दायित्व को निभाने का पूरा प्रयास करेंगे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके लिए बहनों का विश्वास और स्नेह सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। सरकार का लक्ष्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है जहां बेटियां सुरक्षित हों, बहनें आत्मनिर्भर हों, माताएं सम्मान के साथ जीवन व्यतीत करें और प्रदेश का युवा अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त हो। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उन्होंने मातृशक्ति से आशीर्वाद, सहयोग और विश्वास की अपेक्षा की।


 *रक्षाबंधन पर महिलाओं को निःशुल्क रोडवेज यात्रा की सौगात* 

मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं को विशेष सौगात देते हुए 28 और 29 अगस्त को उत्तराखंड रोडवेज की बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा की घोषणा की। इस सुविधा से प्रदेश की महिलाएं रक्षाबंधन के अवसर पर अपने मायके और परिवारजनों से मिलने के लिए सुगमता से यात्रा कर सकेंगी। सरकार ने इस सुविधा के माध्यम से रक्षाबंधन के पर्व को मातृशक्ति के लिए और अधिक सुविधाजनक एवं आत्मीय बनाने का प्रयास किया है।


चौधरी फार्म, जीएमएस रोड में आयोजित कार्यक्रम में कार्यक्रम के आयोजक श्री जोगिंदर सिंह पुंडीर, उत्तराखंड  आपदा प्रबंधन राज्य सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष श्री विनय कुमार रोहिला, अन्य जनप्रतिनिधि तथा प्रदेशभर से बड़ी संख्या में आई महिलाएं उपस्थित रहीं।


वहीं, हाथीबड़कला स्थित सर्वे स्टेडियम में आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी एवं राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विजया राहटकर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रही।




दोनों कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री ने उपस्थित बहनों से संवाद करते हुए रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं और कहा कि उत्तराखंड की मातृशक्ति का स्नेह, आशीर्वाद और विश्वास ही उन्हें प्रदेश की सेवा के लिए निरंतर प्रेरित करता रहेगा।

 *हरिद्वार में संत समागम में एक राष्ट्र-एक चुनाव पर संवाद में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की सहभागिता*



*प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को बल: शिवराज सिंह चौहान ने कहा- एक राष्ट्र-एक चुनाव आज देश की जरूरत*


*केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संदेश: बार-बार चुनाव विकास में बाधक*


*जनजागरण की अपील: शिवराज सिंह चौहान ने संत समाज से किया आग्रह- मोदी जी के विचार को जनता तक पहुँचाएँ*


*शिवराज सिंह चौहान ने कहा- देश पहले, पार्टी बाद में; एक राष्ट्र-एक चुनाव का मोदी जी का संकल्प हो पूरा*


*वंदे मातरम: पूरा गान देश की एकता का प्रतीक; अब भारत को और विभाजित नहीं होने दिया जाएगा- शिवराज सिंह चौहान*


*हरिद्वार/नई दिल्ली/भोपाल, 23 अगस्त 2026,* हरिद्वार के प्राचीन अवधूत मण्डल आश्रम में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने संत समागम को सम्बोधित करते हुए "एक राष्ट्र-एक चुनाव" की ताकत और आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बार-बार होने वाले चुनावों को देश की प्रगति के लिए बाधक बताते हुए संत समाज से इस संवैधानिक परिवर्तन के लिए जनजागरण का आह्वान किया। उत्तराखंड मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी भी इस मौके पर उपस्थित रहे और केंद्रीय मंत्री के साथ जुड़कर समर्थन व्यक्त किया। 


केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा उठाए गए इस आग्रह और संकल्प का खुलकर समर्थन करते हुए "एक राष्ट्र-एक चुनाव" की परिकल्पना को देश के हित में आवश्यक करार दिया। श्री चौहान ने कहा कि बार-बार होने वाले चुनाव राष्ट्र की विकास गति और जनसेवा को प्रभावित कर रहे हैं और समय, पैसा तथा प्रशासनिक ऊर्जा का भारी क्षय कर रहे हैं। शिवराज सिंह ने कहा कि लगातार चुनावों के कारण स्कूलों में पढ़ाई रुकती है, प्रशासनिक मशीनरी चुनाव की तैयारियों में लग जाती है और जनता तक विकास कार्यों की गति धीमी पड़ जाती है। उन्होंने चुनावों की तैयारी पर लगने वाले समय और खर्च, जो रिपोर्ट के मुताबिक लाखों करोड़ तक पहुँचते हैं, को रोका जा सके तो देश लाभान्वित होगा। श्री चौहान ने कहा कि यदि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ हों तो संसाधनों की बचत होगी, चुनाव सम्बंधी समय की बचत होगी और प्रशासनिक ध्यान विकास पर केंद्रित रहेगा।


उन्होंने संत समाज से अपील की कि वे अपनी उपस्थिति और कहने की शक्ति से जनजागरण में मदद करें। श्री चौहान ने कहा कि संतों के आशीर्वाद और उनके शिष्यों के व्यापक प्रभाव से यह विचार देश में तेजी से फैल सकता है और राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित के लिए एक मजबूत जनप्रेरणा बन सकती है।उन्होंने यह भी निवेदन किया कि संत अपने प्रवचनों में "एक राष्ट्र-एक चुनाव" का समर्थन करें ताकि जनता में उत्साह पैदा हो और संवैधानिक संशोधन का मार्ग सुगम बने। इस दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस विषय पर उठाए गए कदमों और विधेयक का उल्लेख करते हुए उनका समर्थन किया और कहा कि यह काम सिर्फ एक पार्टी का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश का मुद्दा है, देश आगे रहेगा तो पार्टियाँ भी बनी रहेंगी। 


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंच से कहा कि उत्तराखंड सरकार और वे व्यक्तिगत रूप से इस विचार को समर्थन देते हैं और साथ मिलकर जनसमर्थन बढ़ाने में योगदान देंगे। श्री चौहान ने उपस्थित संत समाज और जनता से आशीर्वाद मांगा और वंदे मातरम के पूरे स्वरूप का समर्थन करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि संत समाज का साथ मिलने पर "एक राष्ट्र-एक चुनाव" का संकल्प पूरा हो सकता है और इससे भारत के समृद्धि, विकास व आत्मनिर्भरता के मार्ग खुलेंगे।


शिवराज सिंह चौहान ने अपने भाषण में वंदे मातरम के महत्व पर विशेष जोर दिया और कहा कि यह गीत देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है, न कि किसी पार्टी या समुदाय का। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के पूर्व मुस्लिम लीग के दबाव में वंदे मातरम के दो टुकड़े कर दिए गए थे और वही विभाजन का एक कारण बना; अब और भारत विभाजित नहीं होने दिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने संत समाज से आह्वान किया कि वे अपने प्रवचनों में वंदे मातरम के पूरे स्वरूप का समर्थन करें और जनता में यह भावना जगाएं कि देश की मातृभूमि की वंदना में कोई विवाद नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब संतों की आवाज़ से जनजागरण होगा, तो कोई भी वंदे मातरम के पूरे गान का विरोध करने का साहस नहीं कर पाएगा।

 

छिददरवाला :




 ग्राम पंचायत छिददरवाला में लगातार गुलदार की दस्तक से ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है। अब गुलदार आबादी क्षेत्र में पहुंचकर ग्रामीणों के मवेशियों को निशाना बनाने लगा है। शनिवार देर शाम गुलदार ने ग्रामीण नीमा देवी के घर के आंगन में बंधी बछड़ी पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया।

नीमा देवी ने बताया कि देर रात जब वह घर से बाहर निकलीं तो बछड़ी में कोई हलचल नजर नहीं आई। पास जाकर देखने पर उसके शरीर पर गुलदार के हमले के निशान मिले और बछड़ी मृत अवस्था में पड़ी थी। इसके बाद उन्होंने परिवार के अन्य सदस्यों को बाहर बुलाया।

परिजनों ने घर के पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तो उसमें गुलदार की चहलकदमी दिखाई दी। घटना की सूचना ग्राम प्रधान गोकुल रमोला को दी गई। ग्राम प्रधान ने तत्काल वन विभाग को मामले की जानकारी दी।

सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने तथा रात के समय घरों के बाहर पर्याप्त रोशनी रखने की सलाह दी है।

आबादी में बढ़ती गुलदार की सक्रियता से ग्रामीणों में चिंता

ग्रामीणों का कहना है कि गुलदार लगातार आबादी क्षेत्र के आसपास दिखाई दे रहा है। अब घर के आंगन में बंधे मवेशी पर हमला होने से लोगों में भय और बढ़ गया है। ग्रामीणों ने वन विभाग से गुलदार को पकडने  के लिये क्षेत्र मे पिजरा लगाने की मांग की है।


देहरादून, 23 अगस्त 2026



सहस्त्रधारा में स्नान के दौरान एक व्यक्ति के डूबने की सूचना पर SDRF ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सर्च अभियान चलाया और लगभग 02 किलोमीटर दूर उसका शव बरामद कर लिया।


आज प्रातः CCR/आपदा कंट्रोल देहरादून से सूचना प्राप्त हुई कि सहस्त्रधारा क्षेत्र में एक व्यक्ति के पानी में बहने की सूचना है। सूचना मिलते ही SDRF टीम सहस्त्रधारा, एडिशनल एसआई मनोज जोशी के नेतृत्व में तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई।


घटनास्थल पर पहुंचने पर जानकारी मिली कि एक व्यक्ति सहस्त्रधारा में स्नान के दौरान पानी के तेज बहाव में डूब गया था। SDRF टीम ने परिजनों से आवश्यक जानकारी प्राप्त कर संभावित स्थानों पर गहन सर्चिंग अभियान शुरू किया।


लगातार सर्चिंग के बाद SDRF जवानों ने उक्त व्यक्ति का शव सहस्त्रधारा झरने से लगभग 02 किलोमीटर दूर पांडव वाला पुल के पास बरामद कर लिया।


शव को बरामद करने के उपरांत आवश्यक कार्रवाई हेतु जिला पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।


मृतक की पहचान *नौथ राम, उम्र लगभग 50 वर्ष, निवासी दिल्ली* के रूप में हुई है।

 यूफोरिया 2026



 22 अगस्त 2026 को यूफोरिया के अंतर्गत कला एवं सांस्कृतिक कार्यकर्मो पर आधारित प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया । प्रतियोगिता के इस मंच पर अनेक विद्यालयों से आए प्रतिभागियों को देखकर विभिन्नता में एकता का आभास प्रदर्शित हो रहा था l

 यूफोरिया विद्यालय के छात्र छात्राओं को आगे बढ़ने एवं प्रतिस्पर्धा की भावना सिखाने का एक उच्चतम माध्यम है l

 इस कार्यक्रम के अंतर्गत अनेक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया जैसे विज़न एंड वॉइस, फ़ैशन शो, संगीत एवं नृत्य आदि l यूफोरिया के विभिन्न आयोजनों के निर्णायकों में विजय ठाकुर, मृगाक्षी चौधरी, अमित देव, हैरिस जॉर्ज , दुर्गा वर्मा, नितिन मालिक, स्वीटी गोसाईं, मिस काकोली एवम् विशाल सिंह उपस्थित थे l संगीत  एवं नृत्य के क्षेत्र में निर्णायक के रूप में अभिषेक मिश्रा, रोहित जोशी, स्वीकृति अरोड़ा, मोहित एवं हर्षित ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। सर्वप्रथम परंपरा का निर्वहन करते हुए दीप प्रज्वलन का आयोजन किया गया जिसमें विद्यालय के  प्रधानाचार्य अजित जेकब, उप प्रधानाचार्या श्रीमती अंजू वर्मा एवं विजय ठाकुर उपस्थित थे। प्रतियोगिता में  16 विद्यालयों ने भाग लिया l निर्णायको ने यूफोरिया में प्रदर्शित प्रतिभा के स्तर को सराहा और कहा कि युवाओं को उच्च स्तर की उपलब्धि हासिल करने के लिए ऐसे मंच की आवश्यकता हैl साथ ही साथ उन्होंने  प्रतिभागियों एवं विजेताओं को बधाई दी I कार्यक्रम के उत्साह को बढ़ाते हुए दून इंटरनेशनल स्कूल (सिटी कैंपस) का  छात्र प्रणव जौहरी और रिवरसाइड कैंपस की भूतपूर्व छात्रा अनमोल कौर ने खास प्रस्तुतियां दीं।  बहुमुखी प्रतिभा के धनी श्री देवांश शर्मा जो आज कल वायरस के नाम से चर्चित हैं उनकी  खास परफॉर्मेंस के साथ यह जश्न अपने चरम पर पहुंच गया।दून इंटरनेशनल स्कूल सिटी कैंपस ने 'यूफोरिया' ओवरऑल चैंपियन का खिताब जीता l अंत में विद्यालय की उपप्रधानाचार्या अंजू वर्मा ने सभी विद्यालयों एवं सभी प्रतिभागियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का अंत राष्ट्रगान से किया गया।

 राष्ट्रीय स्तर पर चमका ऋषिकेश का नाम: मशहूर शेफ संजीव कपूर ने 'शर्मा कैटरर्स एंड इवेंट प्लानर' को दिया बेस्ट कैटरर्स का अवार्ड

​ऋषिकेश / नई दिल्ली:

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राजधानी दिल्ली के मयूर विहार स्थित 'होटल हॉलिडे इन' में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के समारोह 'इंडियाज मोस्ट प्रॉमिसिंग कुलिनरी एंड कैटरिंग अवार्ड्स - 2026' में ऋषिकेश के प्रमुख संस्थान 'शर्मा कैटरर्स एंड इवेंट प्लानर?' ने सफलता का परचम लहराया है। देशभर से चुनिंदा प्रतिभागियों के बीच आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में पूरे उत्तराखंड राज्य से मात्र 3 लोगों का चयन इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए हुआ, जिनमें से ऋषिकेश के 'शर्मा कैटरर्स' प्रमुख रहे।

​समारोह में भारत के मशहूर सेलिब्रिटी शेफ एवं पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित शेफ संजीव कपूर ने 'शर्मा कैटरर्स एंड इवेंट प्लानर' को 'बेस्ट कैटरर्स इन ऋषिकेश' (Best Caterers in Rishikesh) के राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा। यह कार्यक्रम 'मेरिट अवार्ड्स एंड मार्केट रिसर्च। प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा आयोजित किया गया था।

​कड़ी मेहनत, संघर्ष और यादों का स्वाद:

इस राष्ट्रीय सम्मान पर भावुक होते हुए संस्थान के संचालक ने कैटरिंग व्यवसाय के पीछे के अदृश्य परिश्रम को साझा किया। उन्होंने कहा, "कैटरिंग का काम सिर्फ खाना पकाना नहीं, बल्कि लोगों के शुभ अवसरों में खुशियां घोलना और उनकी जिंदगी भर की यादों का हिस्सा बनना है। इस उपलब्धि के पीछे लाल-गर्म भट्टी के सामने घंटों खड़े रहने का संघर्ष, दिन-रात का कड़ा परिश्रम और बिना थकान देखे लगातार काम करने का जुनून है। जब किसी परिवार के खुशियों के पल हमारे परोसे स्वादिष्ट खाने से यादगार बन जाते हैं, तो हमारी सारी थकावट दूर हो जाती है।"

​पिता, टीम और ग्राहकों को दिया श्रेय:

उन्होंने आगे कहा, "इस बड़ी सफलता का संपूर्ण श्रेय मेरे पूज्य पिताजी स्वर्गीय श्री भगवान शर्मा जी के आशीर्वाद, हमारी कैटरिंग टीम और स्टाफ के अथक परिश्रम, तथा हमारे आदरणीय ग्राहकों को जाता है। ग्राहकों ने जिस अटूट विश्वास के साथ हमें अपनी खुशियों की जिम्मेदारी सौंपी, उसी भरोसे ने आज हमें इस राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया है।"

​संस्थान ने दोहराया कि पद्म श्री शेफ संजीव कपूर से मिला यह सम्मान पूरे ऋषिकेश का सम्मान है और वे भविष्य में भी शुद्धता, स्वाद और बेहतरीन सेवा की इस परंपरा को और ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस उपलब्धि पर ऋषिकेश के स्थानीय व्यवसायियों एवं गणमान्य व्यक्तियों ने बधाई व शुभकामनाएं व्यक्त की हैं।

 

मुख्यमंत्री के अधीन विभाग में वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मियों को बाहर करने की तैयारी, 62 पदों पर सीधी भर्ती पूरी, नियुक्ति पत्र की तैयारी से बढ़ी बेचैनी


देहरादून : 




कर्मचारी राज्य बीमा योजना एवं श्रम चिकित्सा सेवाएं, उत्तराखंड में पिछले करीब 15 वर्षों से उपनल के माध्यम से सेवाएं दे रहे फार्मासिस्टों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। विभाग में फार्मासिस्ट के 62 स्वीकृत पदों पर सीधी भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाने की तैयारी बताई जा रही है। ऐसे में वर्षों से इन्हीं पदों के सापेक्ष सेवाएं दे रहे उपनल फार्मासिस्टों के सामने सेवा से बाहर होने का खतरा मंडराने लगा है।फार्मासिस्टों का कहना है कि उन्होंने 15 वर्षों से अधिक समय तक लगातार विभाग में सेवाएं दी हैं। इस दौरान कर्मचारी राज्य बीमा योजना के बीमित व्यक्तियों और उनके आश्रितों को दवाइयां उपलब्ध कराने से लेकर चिकित्सा व्यवस्था को सुचारु रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।

लेकिन अब उन्हीं स्वीकृत पदों पर नियमित भर्ती होने के बाद इन कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा होने की आशंका है। यदि सभी 62 पदों पर नियुक्तियां हो जाती हैं तो फार्मासिस्ट के स्वीकृत पदों पर कोई रिक्ति नहीं बचेगी और लंबे समय से कार्यरत उपनल कर्मियों के लिए विभाग में जगह बनाए रखना चुनौती बन जाएगा।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि कर्मचारी राज्य बीमा योजना विभाग मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के अधीन है। ऐसे में मुख्यमंत्री के अपने विभाग में वर्षों से लगातार सेवाएं दे रहे उपनल कर्मियों के भविष्य पर तलवार लटकना सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।

एक तरफ सरकार उपनल कर्मचारियों के हितों, सेवा सुरक्षा और समान कार्य-समान वेतन की बात करती है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से विभाग की व्यवस्था संभाल रहे कर्मचारियों के सामने नई भर्ती के बाद सेवा समाप्त होने की स्थिति पैदा हो रही है।

यदि मुख्यमंत्री के अधीन विभाग में ही 15 वर्षों से सेवाएं दे रहे उपनल कर्मियों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो प्रदेश के अन्य विभागों में वर्षों से कार्यरत उपनल कर्मचारियों को सरकार से क्या उम्मीद रखनी चाहिए?

उपनल कर्मियों का कहना है कि वर्षों की सेवा, अनुभव और विभागीय कार्यप्रणाली की जानकारी को नजरअंदाज कर उन्हें बाहर किया गया तो यह केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि उनके परिवारों के भविष्य का भी सवाल होगा।

62 पदों पर भर्ती पूरी होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार वर्षों से कार्यरत उपनल फार्मासिस्टों के अनुभव और सेवा अवधि को ध्यान में रखते हुए उनके भविष्य की कोई राह निकालेगी, या फिर 15 वर्षों की सेवा के बाद उन्हें विभाग से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा?

मामला अब सिर्फ 62 पदों का नहीं, बल्कि वर्षों से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा बने उपनल कर्मचारियों के भविष्य का है।

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