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▪️ *मानव तस्करी के खिलाफ एकजुट होंगे पुलिस, अर्द्धसैनिक बल, सम्बन्धित विभाग और विशेषज्ञ, पंतनगर में कल राज्य स्तरीय सम्मेलन*



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तस्करी के खिलाफ सख्त रणनीति, विभागों व एजेंसियों के बीच समन्वय और पीड़ितों के पुनर्वास पर होगा जोर*


*मानव तस्करी (Human Trafficking)* की रोकथाम, पीड़ितों के सुरक्षित रेस्क्यू, पुनर्वास तथा कानूनी अभियोजन को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा 09 अक्टूबर 2026 को *गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर, जनपद ऊधमसिंहनगर में एक दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन* का आयोजन किया जा रहा है।


सम्मेलन का उद्घाटन श्री वी. मुरूगेशन, अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, उत्तराखण्ड द्वारा किया जाएगा। इससे पूर्व आज पुलिस महानिरीक्षक, कुमाऊँ परिक्षेत्र श्रीमती निवेदिता कुकरेती द्वारा आयोजन स्थल का स्थलीय निरीक्षण कर सुरक्षा एवं अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया।


*मानव तस्करी के अंतर-राज्यीय एवं सीमावर्ती आयामों को ध्यान में रखते हुए सम्मेलन में पुलिस के साथ विभिन्न संबंधित विभागों, सुरक्षा बलों, न्यायिक व्यवस्था एवं नागरिक समाज के प्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। सम्मेलन में लगभग 200 अधिकारी एवं विशेषज्ञ प्रतिभाग करेंगे।*


सम्मेलन में ऊधमसिंहनगर, नैनीताल, चम्पावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा, देहरादून एवं हरिद्वार सहित 08 जनपदों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक, प्रदेश के सभी 13 जनपदों से एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) के नोडल अधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक, प्रभारी निरीक्षक एवं पुलिसकर्मी प्रतिभाग करेंगे।


भारत-नेपाल सीमा एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में मानव तस्करी की रोकथाम के दृष्टिगत भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) एवं सशस्त्र सीमा बल (SSB) के अधिकारी भी सम्मेलन में शामिल होंगे। इसके साथ ही बाल संरक्षण एवं कल्याण तंत्र को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विभिन्न जनपदों के बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (CWPO), बाल कल्याण समिति (CWC) के सदस्य एवं परिवीक्षा अधिकारी, श्रम विभाग के श्रम निरीक्षक, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी तथा अभियोजन को मजबूत बनाने के लिए वरिष्ठ लोक अभियोजक भी प्रतिभाग करेंगे। मानव तस्करी के पीड़ितों के बचाव एवं पुनर्वास के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे प्रमुख गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) एवं समाजसेवियों की सहभागिता भी सुनिश्चित की गई है।


सम्मेलन के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में मानव तस्करी से जुड़े कानूनी प्रावधानों, आधुनिक अन्वेषण एवं विवेचना तकनीकों तथा पीड़ितों के बचाव एवं पुनर्वास में पुलिस, एनजीओ और नागरिक समाज की भूमिका पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।


सम्मेलन का उद्देश्य उत्तराखण्ड में मानव तस्करी के नेटवर्क के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही के लिए विभिन्न विभागों एवं संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय को और मजबूत करना, पीड़ितों के बचाव, संरक्षण एवं पुनर्वास के लिए पीड़ित-केंद्रित व्यवस्था को सुदृढ़ करना तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी एवं सुरक्षा तंत्र को प्रभावी बनाना है। सम्मेलन में होने वाले विचार-विमर्श एवं प्राप्त सुझावों के आधार पर मानव तस्करी की रोकथाम, पीड़ितों के संरक्षण एवं पुनर्वास के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाएगी।


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39,815 परिवारों को अपने गांव में मिली पक्की छत*

*प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण ने पकड़ी रफ्तार*

*मुख्यमंत्री धामी की प्रभावी पैरवी से साकार हुआ सपना*


देहरादू

PMAY uttarakhand CM dbami

न। प्रदेश के गांवों में  जरूरतमंद और बेघर परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराने की दिशा में धामी सरकार लगातार काम कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के आंकड़ों पर ही नजर दौड़ाएं तो वर्ष 2022 से अब तक 39,815 परिवारों को इस योजना से लाभान्वित किया जा चुका है। इनमें सर्वाधिक 4882 आवास ऊधमसिंह नगर जनपद में बने हैं, जबकि हरिद्वार में 4493 और रुद्रप्रयाग जनपद में 4032 परिवारों का पक्की छत का सपना साकार हुआ है।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार बेघर परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराने पर जोर दे रहे हैं। इसके लिए वो प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी और ग्रामीण के तहत अधिक से अधिक आवासों की स्वीकृति के लिए लगातार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्र सरकार के समक्ष पैरवी करते रहे हैं। और इसी का परिणाम रहा है कि जहां एक तरफ पीएम आवास योजना (शहरी) 2.0 में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत भी किया जा चुका है। वहीं पीएम आवास योजना ग्रामीण में भी राज्य लगातार उल्लेखनीय प्रदर्शन कर रहा है। 


पीएम आवास योजना ग्रामीण 

वर्ष 2016 में शुरू की गई प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का उद्देश्य सभी बेघर, कच्चे और जीर्ण शीर्ण मकानों में रह रहे परिवारों को बुनियादी सुविधायुक्त पक्का घर उपलब्ध कराना है। योजना के तहत लाभार्थी को प्रति आवास एक लाख 30 हजार रुपये की अनुदान राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके खाते में भेजी जाती है। साथ ही बीबी रामजी योजना का लाभ भी लाभार्थी को दिया जाता है। 


*किस जनपद में कितने आवास*


जनपद       आवास

चमोली       3900             

पिथौरागढ़   3386              

पौड़ी           3195              

उत्तरकाशी   3057              

देहरादून       2839              

चंपावत        2789             

बागेश्वर        2279             

टिहरी          2134              

नैनीताल।     1480             

अल्मोड़ा।     1349             


किचन सामग्री के लिए धनराशि बढ़ाई गई

मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत वर्ष 2022-23 से प्रति लाभार्थी किचन सामग्री बर्तन खरीद के लिए दी जाने वाली अतिरिक्त सहायता धनराशि 05 हजार से बढ़ाकर ₹06 हजार की गई है।


*शौचालय निर्माण के लिए मिलते हैं ₹12 हजार*

स्वच्छ भारत मिशन के तहत लाभार्थी को शौचालय निर्माण के लिए मनरेगा/स्वजल से ₹12 हजार की अतिरिक्त धनराशि दी जा रही है। इसके अलावा स्वयं के आवास के लिए 95 दिन की मजदूरी बीबी रामजी योजना से दी जा रही है। इसके साथ ही पेयजल सुविधा, उज्ज्वला गैस कनेक्शन और विद्युत कनेक्शन की सुविधा भी दी जा रही है।


*प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में हमारी सरकार हर जरूरतमंद परिवार को पक्का घर उपलब्ध कराने के लिए संकल्पित है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुंचाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। योजना ने हजारों ग्रामीणों का पक्की छत का सपना साकार किया है।*

*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड*

 *मुख्यमंत्री धामी ने रेशमा बिष्ट की तलाश के प्रकरण में आवश्यक सहायता का दिया आश्वासन* 

 *संवेदनशील प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगी राज्य सरकार : मुख्यमंत्री* 

reshma bisht missing


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने टिहरी गढ़वाल के प्रतापनगर क्षेत्र निवासी श्रीमती रेशमा देवी के लापता होने के प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए उनके परिजनों को आवश्यक सहायता का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेशमा की तलाश के लिए शासन स्तर से हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने इस संबंध में एसएसपी टिहरी से फोन पर वार्ता कर प्रकरण की जानकारी ली तथा रेशमा की तलाश के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के लापता होने का मामला परिवार के लिए अत्यंत पीड़ादायक और संवेदनशील होता है। ऐसे मामलों में पुलिस एवं प्रशासन की जिम्मेदारी है कि सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध तकनीकी एवं वैज्ञानिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग कर तलाश एवं जांच की कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाए।


मुख्यमंत्री श्री धामी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए  कि प्रकरण में अब तक की गई कार्रवाई की समीक्षा करते हुए रेशमा की तलाश के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि मामले की जांच एवं तलाश की कार्रवाई में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए तथा परिजनों को जांच की प्रगति से भी अवगत कराया जाए।



मुख्यमंत्री ने परिजनों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस संवेदनशील प्रकरण में आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी और रेशमा की तलाश के लिए सभी संभावित प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि रेशमा की सकुशल तलाश के लिए पुलिस एवं प्रशासन द्वारा हरसंभव प्रयास सुनिश्चित किए जाएं।

 विद्यासागर कापड़ी की अनुपम रचना


मोहन कब आओगे....*



poem mohan


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बढ़ते पापों की ज्वाला से,

     कब तुम हमें बचाओगे ।

हरने भार धरा का मोहन,

    बोलो कब तुम आओगे।।


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तात पुत्र में नेह नहीं है,

      माँ भी मौन तरसती है।

अब पुत्रों की रसना से भी,

     तपती आग बरसती है।।

बूढ़ों को आश्रम से लेकर,

     कब उनके घर लाओगे।

हरने भार धरा का मोहन,

    बोलो कब तुम आओगे।।


🪔🌹🪔🕉️🪔🌹🪔


गौमाता क्यूँ अपने घर से,

      बाहर छोड़ निकाली है।

दूध निचोड़ने को यहाँ अब,

      सबने गैया पाली है।।

गोमाता को उनके घर कब,

      मोहन आप दिलाओगे।

हरने भार धरा का मोहन,

    बोलो कब तुम आओगे।।


🪔🌹🪔🕉️🪔🌹🪔


गंगा सबको करती पावन,

       उसमें खोली नाली है।

गंगा माँ के आँचल में ही,

       मैल गंदगी डाली है।।

बोलो आकर कब गंगा को,

    फिर पावन कर जाओगे।

हरने भार धरा का मोहन,   

    बोलो कब तुम आओगे।।

ताप बढ़ रहा धरती माँ का,

     जाने कब जल जायेगी।

कैसे मानवता बोलो तो,

      ये जिंदी रह पायेगी।।

फिर धरती को स्वर्णिम युग में,

     कब आकर ले जाओगे।

हरने भार धरा का मोहन,

    बोलो कब तुम आओगे।

बढ़ते पापों की ज्वाला से,

      कब तुम हमें बचाओगे।

हरने भार धरा का मोहन,

    बोलो कब तुम आओगे।


 *डा० विद्यासागर कापड़ी*


जनपद में चिन्हित 12,127 परिसंपत्तियों में से 6,219 की मैपिंग पूर्ण, 51 प्रतिशत कार्य संपन्न*

*एडीएम प्रशासन ने विभागों को तेजी से Geo Referencing एवं Verification कार्य पूर्ण करने के दिए निर्देश*


देहरादून:




विभिन्न विभागों की राजकीय/शासकीय भूमि एवं परिसंपत्तियों की सुरक्षा एवं संरक्षा सुनिश्चित करने तथा उन पर होने वाले अतिक्रमण को प्रभावी रूप से रोकने एवं हटाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा निरंतर कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान के निर्देशानुसार जनपद में विभिन्न विभागों से संबंधित भूमि एवं परिसंपत्तियों की Geo Referencing, मैपिंग एवं Verification का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है।

इस संबंध में अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी सभागार में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों की राजकीय/शासकीय भूमि एवं परिसंपत्तियों की वर्तमान स्थिति, Geo Referencing एवं मैपिंग कार्य की प्रगति तथा Verification की स्थिति की समीक्षा की गई।

अपर जिलाधिकारी प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग अपने-अपने अधीन आने वाली समस्त राजकीय भूमि एवं परिसंपत्तियों का Geo Referencing एवं Verification कार्य निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करें। उन्होंने कहा कि राजकीय भूमि एवं परिसंपत्तियों का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से इनके सीमांकन, निगरानी एवं संरक्षण में प्रभावी मदद मिलेगी तथा भविष्य में अतिक्रमण की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।

बैठक में अवगत कराया गया कि जनपद में विभिन्न विभागों की कुल 12,127 चिन्हित परिसंपत्तियों के सापेक्ष अब तक 6,219 परिसंपत्तियों की मैपिंग का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इस प्रकार जनपद में कुल चिन्हित परिसंपत्तियों के सापेक्ष लगभग 51 प्रतिशत मैपिंग कार्य पूर्ण हो चुका है।

अपर जिलाधिकारी प्रशासन ने शेष परिसंपत्तियों की मैपिंग एवं Geo Referencing कार्य में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने विभागवार प्रगति की नियमित समीक्षा करने तथा जिन परिसंपत्तियों का मैपिंग एवं Verification कार्य अभी लंबित है, उसे प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि राजकीय/शासकीय भूमि एवं परिसंपत्तियां सरकार की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियां हैं। इनकी सुरक्षा एवं संरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। परिसंपत्तियों का अद्यतन डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से उनकी वास्तविक स्थिति, सीमाएं एवं स्थान संबंधी जानकारी सुरक्षित रहेगी और अतिक्रमण जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

बैठक में जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी एस.के. गिरी सहित नगर निगम एवं विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।




मुख्य सचिव  ने आपदा प्रबंधन विभाग को दिए निर्देश* 

*भूकम्प के प्रति जनजागरूकता और भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के नियमित परीक्षण के लिए उत्तराखण्ड में नई पहल*


देहरादून:

siern of earthquake


 उत्तराखण्ड में भूकम्प के प्रति आमजन को जागरूक करने तथा राज्य में स्थापित भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के अंतर्गत लगाए गए सेंसर एवं सायरनों की कार्यप्रणाली का नियमित परीक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अब हर माह की 09 तारीख को पूर्वाह्न 11.00 बजे राज्य में भूकम्प का सायरन बजाया जाएगा। यह सायरन किसी वास्तविक भूकम्प की सूचना नहीं होगा, बल्कि भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के नियमित परीक्षण एवं जनजागरूकता के उद्देश्य से बजाया जाएगा।


मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने इस संबंध में आपदा प्रबंधन विभाग को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने देर शाम बैठक कर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन के साथ इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किए जाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने कहा कि उत्तराखण्ड भूकम्प की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है। राज्य का बड़ा भू-भाग भूकम्पीय दृष्टि से संवेदनशील जोन चार एवं पांच में आता है। ऐसे में भूकम्प के प्रति जागरूकता, पूर्व तैयारी और समय रहते चेतावनी प्राप्त करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के अंतर्गत स्थापित सायरनों एवं सेंसरों की नियमित जांच की जानी आवश्यक है, ताकि आपात स्थिति में यह प्रणाली पूरी क्षमता के साथ कार्य कर सके।


उन्होंने कहा कि नियमित परीक्षण के साथ-साथ राज्य में आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त संख्या में नए सायरन एवं सेंसर स्थापित किए जाने के निर्देश आपदा प्रबंधन विभाग को दिए गए हैं। नियमित परीक्षण से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किसी भी स्थान पर स्थापित सायरन सही स्थिति में हैं और आवश्यकता पड़ने पर समय से चेतावनी प्रसारित कर सकते हैं। 



*हर माह होगी सायरन एवं प्रणाली की जांच*

देहरादून। मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने बताया कि प्रत्येक माह की 09 तारीख को पूर्वाह्न 11 बजे बजने वाला सायरन प्रणाली के नियमित परीक्षण का हिस्सा होगा। इस दौरान यह जांच की जाएगी कि राज्य में स्थापित सायरन सही ढंग से कार्य कर रहे हैं या नहीं। यदि किसी स्थान पर सायरन के संचालन में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या पाई जाती है तो उसे तत्काल ठीक कराने की कार्रवाई की जाएगी। इस नियमित परीक्षण से तकनीकी खामियों की समय रहते पहचान की जा सकेगी और वास्तविक आपदा के समय चेतावनी प्रणाली के प्रभावी संचालन को सुनिश्चित किया जा सकेगा।


*राज्य में 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित*

देहरादून। सचिव श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि वर्तमान में उत्तराखण्ड राज्य में भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के अंतर्गत 169 सेंसर तथा 112 सायरन स्थापित किए गए हैं। इन सेंसरों के माध्यम से भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी की जाती है और निर्धारित प्रणाली के माध्यम से चेतावनी प्रसारित की जाती है। उन्होंने बताया कि यूएसडीएमए एवं आईआईटी रुड़की के सहयोग से भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली परियोजना के अंतर्गत और अधिक सेंसर स्थापित किए जाने का प्रस्ताव गतिमान है। अतिरिक्त सेंसर स्थापित होने से भविष्य में होने वाली भूकम्पीय घटनाओं की निगरानी और चेतावनी प्रणाली की क्षमता में और सुधार होगा तथा भूकम्पीय घटनाओं की चेतावनीध्सूचना अधिक सटीकता से प्राप्त की जा सकेगी।


*06 अक्टूबर को आए भूकम्प में पूर्व चेतावनी प्रणाली ने किया कार्य*

देहरादून। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि 06 अक्टूबर 2026 को रात्रि 10.23 बजे चमोली जनपद के थराली के निकट भूकम्प की घटना हुई, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.9 आंकी गई। भूकम्प का केन्द्र बिन्दु लगभग 13 किलोमीटर की गहराई में था। उन्होंने बताया कि इस भूकम्प के दौरान आईआईटी रुड़की के सहयोग से संचालित भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के माध्यम से भूकंपीय तरंगों के आम जनमानस तक पहुंचने से पूर्व ही चेतावनी प्राप्त हुई। भूदेव मोबाइल ऐप एवं स्थापित सायरनों के माध्यम से लोगों को भूकम्प की चेतावनी मिली। उन्होंने कहा कि यह घटना भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली की उपयोगिता को रेखांकित करती है। भूकम्प जैसी अचानक आने वाली आपदा में कुछ सेकंड की पूर्व चेतावनी भी लोगों को सुरक्षित स्थान लेने, गैस एवं विद्युत उपकरणों को बंद करने तथा आवश्यक सावधानी बरतने के लिए महत्वपूर्ण समय प्रदान कर सकती है।


*आमजन को पता चलेगा, कैसा सायरन बजेगा*

देहरादून। सचिव श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य आम लोगों को भूकम्प के सायरन के प्रति जागरूक करना भी है। सामान्य तौर पर लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि वास्तविक भूकम्प की स्थिति में चेतावनी मिलने पर किस प्रकार का सायरन बजेगा। हर माह निर्धारित समय पर सायरन बजने से लोगों को इसकी ध्वनि से परिचित होने का अवसर मिलेगा। इससे वास्तविक भूकम्प की स्थिति में सायरन सुनाई देने पर लोग इसे पहचान सकेंगे और अनावश्यक भय या भ्रम की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य लोगों को डराना नहीं, बल्कि जागरूक, सतर्क और तैयार करना है। नियमित परीक्षण के कारण आमजन को यह भी समझने में मदद मिलेगी कि भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली किस प्रकार कार्य करती है।


*सायरन के साथ भूदेव ऐप पर भी मिलेगा परीक्षण संदेश*

देहरादून। सचिव श्री सुमन ने बताया कि प्रत्येक माह की 09 तारीख को पूर्वाह्न 11.00 बजे भूकम्प का सायरन बजाया जाएगा। यह सायरन केवल प्रणाली के परीक्षण एवं जनजागरूकता के लिए होगा। इसी क्रम में भूदेव मोबाइल ऐप के उपयोगकर्ताओं के मोबाइल फोन पर भी चेतावनी संदेश प्राप्त होगा। इसमें मोबाइल में वाइब्रेशन तथा बीप-बीप की ध्वनि के माध्यम से चेतावनी संकेत प्राप्त होगा। उन्होंने आमजन से अपील की कि भूदेव मोबाइल ऐप को अपने मोबाइल फोन में अपडेटेड वर्जन में इंस्टॉल/अपडेट रखें तथा ऐप को मोबाइल की लोकेशन की अनुमति हमेशा के लिए प्रदान करें, ताकि भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के माध्यम से संबंधित क्षेत्र के लिए जारी चेतावनी समय पर मोबाइल फोन तक पहुंच सके।


*यूएसडीएमए की आमजन से अपील*

देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने आमजन से अपील की है कि प्रत्येक माह की 09 तारीख को पूर्वाह्न 11.00 बजे सायरन बजने पर घबराएं नहीं। यह सायरन भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के नियमित परीक्षण एवं जनजागरूकता के लिए बजाया जाएगा।

आमजन से अनुरोध है कि-

*  अपने मोबाइल फोन में भूदेव मोबाइल ऐप तथा सचेत एप का अपडेटेड वर्जन इंस्टॉल/अपडेट रखें।

*  भूदेव मोबाइल तथा सचेत एप को लोकेशन की अनुमति हमेशा के लिए प्रदान करें।

*सायरन की आवाज को ध्यान से पहचानें, ताकि वास्तविक भूकम्प की स्थिति में चेतावनी को समझने में कठिनाई न हो।

*  नियमित सायरन परीक्षण के दौरान घबराएं नहीं और इसे भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के परीक्षण के रूप में समझें।

*  परिवार के सदस्यों, बच्चों, बुजुर्गों तथा आसपास के लोगों को भी इस व्यवस्था के बारे में जानकारी दें।

*  भूकम्प के दौरान सुरक्षित व्यवहार और आपदा प्रबंधन से संबंधित जानकारी प्राप्त करें तथा आवश्यकता पड़ने पर मॉक ड्रिल में सक्रिय भागीदारी करें।


*डीएम डॉ. आशीष चौहान व पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी ने किया शरदोत्सव-2026 का शुभारंभ*


*पद्मश्री बसंती बिष्ट के जागर और पांडवाज बैंड की शानदार प्रस्तुति ने बांधा समां*


देहरादून 06 अक्टूबर:

sharad utsav 8nussourie 2026


पर्यटन नगरी मसूरी में मंगलवार को ‘मसूरी शरदोत्सव 2026’ का रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ भव्य आगाज़ हुआ। नगर पालिका परिषद द्वारा आयोजित यह 5 दिवसीय सांस्कृतिक व खेल मेला 06 से 10 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर गांधी चौक में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान एवं नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने शरदोत्सव का ध्वजारोहण कर मेले का विधिवत उद्घाटन किया।


उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और देवभूमि की परंपराओं को प्रदर्शित करने वाले इस उत्सव का आनंद स्थानीय लोगों के साथ-साथ पहुंचे पर्यटकों ने भी लिया। रिमझिम बारिश, घने कोहरे और ठंडी हवाओं के प्राकृतिक मिज़ाज ने उद्घाटन दिवस पर शरदोत्सव की सुंदरता में चार चांद लगा दिए।


*पद्मश्री बसंती बिष्ट के जागर और ‘पांडवाज़’ के सुरों से गुंजायमान हुआ टाउन हॉल*

उत्सव के पहले दिन नगर पालिका टाउन हॉल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला का आगाज पद्मश्री बसंती बिष्ट के पारंपरिक जागर गायन से हुआ। उन्होंने अपनी सुरीली आवाज़ और प्रामाणिक जागर शैली से उपस्थित श्रोताओं को उत्तराखंड की अलौकिक देव-संस्कृति से भावविभोर कर दिया।


इसके बाद पांडवाज बैंड की शानदार प्रस्तुति ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। पांडवाज की टीम ने पारंपरिक उत्तराखंडी वाद्ययंत्रों और पाश्चात्य वाद्ययंत्रों के बीच शानदार जुगलबंदी प्रस्तुत करते हुए गढ़वाली गीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।


शरदोत्सव के अंतर्गत खेल प्रतियोगिताओं का भी शुभारंभ हुआ। पहले दिन एमपीजी कॉलेज में मसूरी स्पोर्ट्स एसोसिएशन के तत्वावधान में स्नूकर प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।


शुभारंभ अवसर पर पूर्व पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल, भाजपा मंडल अध्यक्ष रजत अग्रवाल, मोहन पेटवाल, महिला कांग्रेस अध्यक्ष जसबीर कौर, एसडीएम राहुल आनंद, भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष जसोदा शर्मा, पालिका अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन, सभासद गौरी थपलियाल, शिवानी भारती, पवन थलवाल, रणवीर कंडारी, होटल एसोसिएशन अध्यक्ष संजय अग्रवाल, कुशाल राणा सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, पर्यटक एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



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