संसद में सवाल: AI डेटा सेंटर्स में पानी का सही इस्तेमाल
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर्स के लिए, 'एनवायरनमेंटल इम्पैक्ट असेसमेंट (EIA) नोटिफिकेशन, 2006' (जिसमें बाद में संशोधन किया गया) के तहत पर्यावरण मंज़ूरी (EC) की ज़रूरत नहीं होती है।
हालाँकि, अगर AI डेटा सेंटर्स को 'बिल्डिंग और कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट' (आइटम 8(a) के तहत, यानी 20,000 वर्ग मीटर से ज़्यादा बिल्ट-अप एरिया) या 'टाउनशिप और एरिया डेवलपमेंट प्रोजेक्ट' (आइटम 8(b) के तहत, यानी 50 हेक्टेयर से ज़्यादा एरिया और/या 1,50,000 वर्ग मीटर से ज़्यादा बिल्ट-अप एरिया) के हिस्से के तौर पर प्रस्तावित किया जाता है, तो उन्हें पहले से EC लेनी पड़ती है। ऐसे बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स के लिए EC राज्य/केंद्र शासित प्रदेश (UT) स्तर पर 'स्टेट एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी' (SEIAA) द्वारा दी जाती है।
EC देने के लिए ऐसे बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स की समीक्षा के दौरान, कई पहलुओं पर ठीक से विचार किया जाता है, जैसे कि खास तौर पर पानी की कमी वाले इलाकों में ताज़े पानी की उपलब्धता, वॉटर बैलेंस रिपोर्ट, ग्रे-वॉटर (इस्तेमाल किया हुआ पानी) का बनना, और ग्रे-वॉटर की रीसाइक्लिंग और दोबारा इस्तेमाल; साथ ही, पर्यावरण से जुड़े ज़रूरी सुरक्षा उपाय भी बताए जाते हैं। इसके अलावा, AI डेटा सेंटर्स के निर्माण और संचालन के दौरान पानी और ग्रे-वॉटर के इस्तेमाल और डिस्चार्ज को 'जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974' और 'वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981' के तहत रेगुलेट किया जाता है। इन अधिनियमों के प्रावधानों का पालन—जिसमें पानी के इस्तेमाल और वेस्ट-वॉटर डिस्चार्ज के लिए तय मानक शामिल हैं—संबंधित 'राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड' (SPCB) या 'प्रदूषण नियंत्रण समिति' (PCC) द्वारा मॉनिटर किया जाता है।
साथ ही, इंफ्रास्ट्रक्चर/कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के लिए ग्राउंड-वॉटर निकालने की प्रक्रिया को 'जल शक्ति मंत्रालय' द्वारा जारी गाइडलाइंस (नोटिफिकेशन S.O. 3289(E), तारीख 24.09.2020, जिसमें 29.03.2023 के नोटिफिकेशन के ज़रिए संशोधन किया गया) के अनुसार रेगुलेट किया जाता है।
'ब्यूरो ऑफ़ एनर्जी एफिशिएंसी' (BEE) ने 'डिस्ट्रिक्ट कूलिंग गाइडलाइंस, 2023' जारी की हैं। इन गाइडलाइंस में, अन्य बातों के अलावा, ताज़े पानी के स्रोतों पर निर्भरता कम करने और टिकाऊ जल प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए—जहाँ भी संभव हो—कूलिंग टॉवर में 'मेक-अप वॉटर' के तौर पर ट्रीटेड वॉटर (साफ़ किया हुआ पानी) के इस्तेमाल की सलाह दी गई है। इन गाइडलाइंस में ऊर्जा-कुशल कूलिंग टेक्नोलॉजी अपनाने, कूलिंग सिस्टम की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने, पानी के वैकल्पिक स्रोतों का इस्तेमाल करने और पानी बचाने के उपाय लागू करने पर भी ज़ोर दिया गया है। ये उपाय खास तौर पर डेटा सेंटर जैसी बड़ी कूलिंग-इंटेंसिव सुविधाओं के लिए अहम हैं और बेहतर ऊर्जा दक्षता, कम पानी की खपत और कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के टिकाऊ संचालन में मदद करते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, डिजिटल और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में ऊर्जा दक्षता, जल प्रबंधन और पर्यावरणीय लचीलेपन की जांच के लिए इंडिया AI इम्पैक्ट समिट का ‘रेज़िलिएंस, इनोवेशन एंड एफिशिएंसी’ वर्किंग ग्रुप बनाया गया है।
यह जानकारी पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने आज राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दी।






