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 देहरादून: 



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प्रदेश की राजधानी देहरादून में ट्रिपल मर्डर से सनसनी मच गई है.

 देहरादून के रायपुर क्षेत्र में विष्णु लोक कॉलोनी में स्थित एक मकान में रहने वाले बुजुर्ग दंपति और उनकी काम करने वाली सहायिका को दिनदहाड़े मार मार डाला एक प्लंबर ने.

देहरादून रायपुर क्षेत्र में  श्री रमेश कपूर अपनी पत्नी रजनी कपूर के साथ विष्णु लोक कॉलोनी में रह रहे थे ।

उनके साथ उनके घरेलू सहायिका शीला भी उसे समय उपस्थित थी। दोनों पुत्र उनके पुणे में नौकरी करते हैं।

 उनके जान पहचान के एक प्लंबर को उन्होंने घर में किसी कार्य के लिए बुलाया जिससे कहा सुनी हो जाने पर उसने पेंचकस से उन पर हमला कर दिया 

हमले होते हुए यह घटना तब एक पड़ोसी ने देख ली जबकि वह सहायिका पर भी हमला कर रहा था ।

चीख पुकार करने के बाद आरोपी मौके से भागने लगा, जिसे पकड़ लिया गया तथा  तीनों को अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

मृतकों की पहचान 85 वर्षीय रमेश कपूर, उनकी 76 वर्षीय पत्नी रजनी कपूर और 45 वर्षीय घरेलू सहायिका शीला के रूप में हुई है। पुलिस ने वारदात के बाद एक संदिग्ध आरोपी को हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है।


 

मुख्यमंत्री ने श्री दिनेश आर्य को नामांकन के अवसर पर शुभकामनाएं दीं।

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इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री श्री तीरथ सिंह रावत, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट सहित मंत्रीगण, सांसद एवं विधायकगण उपस्थित रहे।


मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के बाद उत्तराखंड बना देश का छठवां पूर्ण साक्षर राज्य*

*पूर्ण साक्षरता मंजिल नहीं, डिजिटल और वित्तीय साक्षरता के साथ जीवन कौशल की दिशा में नई शुरुआत : मुख्यमंत्री*



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में उत्तराखंड के पूर्ण साक्षर राज्य बनने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान की परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने वाले नव-साक्षरों को सम्मानित किया।


मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के देश का छठवां पूर्ण साक्षर राज्य बनने पर सभी प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि शिक्षकों, विद्यार्थियों, नव-साक्षरों, स्वयंसेवकों और अभियान से जुड़े सभी लोगों की मेहनत एवं सामूहिक सहभागिता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों और दूरस्थ क्षेत्रों वाले उत्तराखंड में पूर्ण साक्षरता का लक्ष्य प्राप्त करना प्रदेशवासियों की दृढ़ इच्छाशक्ति और सामूहिक शक्ति का प्रमाण है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तराखंड ने पूर्ण साक्षर राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया है। मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के बाद उत्तराखंड देश का छठवां पूर्ण साक्षर राज्य बना है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य को शिक्षा सहित प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी बनाने के संकल्प को और मजबूती प्रदान करती है।


मुख्यमंत्री ने नव-साक्षरों को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने यह सिद्ध किया है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और आगे बढ़ने के लिए कभी देर नहीं होती। शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति को आत्मविश्वास देने के साथ उसके जीवन में नए अवसरों के द्वार खोलती है। उन्होंने कहा कि साक्षरता का अर्थ अब केवल पढ़ने-लिखने अथवा हस्ताक्षर करने तक सीमित नहीं है। बदलते समय में अपने अधिकारों और कर्तव्यों की समझ, डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता तथा जीवनोपयोगी कौशल भी इसके महत्वपूर्ण अंग हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में शिक्षा को समावेशी और आधुनिक बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री का संकल्प है कि कोई भी व्यक्ति शिक्षा से वंचित न रहे। एक शिक्षित व्यक्ति न केवल अपना जीवन बदलता है, बल्कि अपने परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। नंदा गौरा योजना के माध्यम से पात्र छात्राओं को प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है। राज्य के 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासरूम और सेंट्रल स्टूडियो की व्यवस्था की जा रही है, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके। प्रदेश में 189 अटल उत्कृष्ट विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री बालाश्रय योजना के माध्यम से अनाथ बच्चों की निःशुल्क शिक्षा सुनिश्चित की जा रही है। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के 100-100 विद्यालयों में आधुनिक प्रयोगशालाएं विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ण साक्षरता की उपलब्धि को मंजिल नहीं, बल्कि नई शुरुआत के रूप में देखना होगा। अब डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता और जीवन कौशल को प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ना है। राज्य का प्रत्येक नागरिक बदलती तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चले और उसका उपयोग अपने जीवन को बेहतर बनाने में कर सके, इसके लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।


शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने पूर्ण साक्षर राज्य बनने की महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि इस अभियान को सफल बनाने में करीब 25 हजार स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। अब अगले छह माह में राज्य को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत वर्ष 2035 तक उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात  को 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का राष्ट्रीय लक्ष्य है और उत्तराखंड इस लक्ष्य को इसी वर्ष हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। जिस गांव में एक भी बच्चा पढ़ने वाला होगा, वहां विद्यालय बंद नहीं किया जाएगा।


इस अवसर पर विधायक श्रीमती सविता कपूर, अपर सचिव भारत सरकार श्रीमती अर्चना शर्मा अवस्थी, सचिव शिक्षा ज्योति यादव, अपर सचिव श्रीमती नमामि बंसल एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।


- केरल, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, दिल्ली एवं राजस्थान के प्रतिभागियों ने लोक परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत को किया प्रस्तुत


- कैंप में युवाओं को राष्ट्रभक्ति, स्वयंसेवा, सामाजिक जिम्मेदारी, नेतृत्व, व्यक्तित्व विकास, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्र निर्माण में युवा भूमिका जैसे विषयों से जोड़ा गया

- प्रभावी संवाद और निखरा व्यक्तित्व ही युवाओं की असली पहचान और सफलता की नींव है: डॉ. गोविंद सिंह


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मंगलवार को मेरा युवा भारत, उत्तराखण्ड द्वारा देहरादून में आयोजित वन्दे मातरम कैंप 2026–27 का समापन विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, व्यक्तित्व विकास सत्र एवं प्रतिभागियों के सम्मान के साथ हुआ। कैंप के दौरान आयोजित विभिन्न गतिविधियों ने युवाओं को राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विविधता, नेतृत्व, सामाजिक जिम्मेदारी एवं युवा सहभागिता से जोड़ने का अवसर प्रदान किया।


दिन की शुरुआत प्रतिभागियों के लिए प्रातःकालीन मेडिटेशन सत्र से हुई। डॉ. गोविंद सिंह, मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड द्वारा कम्युनिकेशन स्किल्स एवं पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषय पर विशेष सत्र लिया गया। उन्होंने युवाओं के व्यक्तित्व विकास, प्रभावी संवाद एवं स्वयं को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने के महत्व पर प्रतिभागियों के साथ संवाद किया।


इसके बाद कैंप में विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों द्वारा सामूहिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। केरल, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, दिल्ली एवं राजस्थान के प्रतिभागियों ने अपने-अपने राज्यों की लोक परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को एक ही मंच पर देखने का अवसर मिला।


सामूहिक प्रस्तुतियों के बाद प्रतिभागियों द्वारा एकल सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं। इनमें केरल की पारंपरिक कलरिपयट्टू तथा राजस्थान की रागिनी सहित विभिन्न राज्यों की कला एवं सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों ने कार्यक्रम को विशेष रूप से आकर्षक बनाया। विभिन्न प्रस्तुतियों ने प्रतिभागियों के बीच सांस्कृतिक समझ और आपसी सम्मान की भावना को और मजबूत किया।


इसके पश्चात कैंप में सफलतापूर्वक सहभागिता करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। प्रमाण-पत्र वितरण कार्यक्रम में डॉ. गोविंद सिंह जी के साथ श्री राहुल डबराल, राज्य निदेशक, मेरा युवा भारत, उत्तराखण्ड तथा श्री अविनाश सिंह, उप निदेशक, मेरा युवा भारत उपस्थित रहे। अतिथियों द्वारा प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर उनके उत्साह एवं सहभागिता को सम्मानित किया गया।


प्रमाण-पत्र वितरण के पश्चात प्रतिभागियों ने विभिन्न राज्यों के अपने साथियों एवं आयोजक टीम के साथ समूह छायाचित्र लिए और कैंप की यादों को संजोया।

वन्दे मातरम् कैंप के समापन के साथ विभिन्न राज्यों से आए युवाओं के बीच बने संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सीखने की प्रक्रिया ने एक सकारात्मक अनुभव के रूप में अपनी छाप छोड़ी। कैंप के दौरान आयोजित विभिन्न सत्रों एवं गतिविधियों ने युवाओं को राष्ट्रभक्ति, स्वयंसेवा, सामाजिक जिम्मेदारी, नेतृत्व, व्यक्तित्व विकास, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्र निर्माण में युवा भूमिका जैसे विषयों से जोड़ने का प्रयास किया।

इस प्रकार वन्दे मातरम् कैंप 2026–27 अपने निर्धारित उद्देश्यों की दिशा में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और प्रतिभागियों को विविध अनुभवों, संवाद एवं सीख के साथ अपने-अपने राज्यों की ओर लौटने का अवसर मिला।


मुख्य सचिव उत्तराखंड श्री आनंद बर्द्धन 08 अक्टूबर को प्रातः 10 बजे करेंगे महोत्सव का उद्घाटन

- हर्षिल, चकराता और रामगढ़ के ए-ग्रेड सेब तथा कपकोट और रामगढ़ की उच्च गुणवत्ता वाली कीवी होगी आकर्षण का केंद्र 

- ताजी सब्जियां, देशी घी, जैविक उत्पाद, हिमालयी शहद सहित विभिन्न प्राकृतिक एवं ग्रामीण उत्पाद होंगे उपलब्ध 

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- ऐपण कला, ताम्र शिल्प और रिंगाल हस्तशिल्प सहित उत्तराखंड के पारंपरिक एवं GI उत्पादों का भी प्रदर्शन किया जाएगा


राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), उत्तराखंड क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून द्वारा 08 एवं 09 अक्टूबर 2026 को आईटी पार्क स्थित क्षेत्रीय कार्यालय परिसर में ‘सेब महोत्सव 3.0’ का आयोजन किया जा रहा है। दो दिवसीय महोत्सव प्रातः 10:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक आमजन के लिए खुला रहेगा।


महोत्सव का उद्घाटन 08 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड शासन के मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन द्वारा किया जाएगा। कार्यक्रम में उत्तराखंड शासन के कृषि सचिव, भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC), विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधियों तथा अन्य हितधारकों की सहभागिता प्रस्तावित है।


‘सेब महोत्सव 3.0’ का प्रमुख उद्देश्य नाबार्ड द्वारा समर्थित विकास परियोजनाओं से जुड़े किसानों, जनजातीय समुदायों एवं कृषक उत्पादक संगठनों (FPOs) को अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए प्रभावी विपणन मंच उपलब्ध कराना है। महोत्सव में प्रदर्शित उत्पाद उत्तराखंड के पांच जनपदों में नाबार्ड समर्थित जनजातीय विकास परियोजनाओं एवं कृषक उत्पादक संगठनों से जुड़े उत्पादकों द्वारा लाए जाएंगे।


इस वर्ष महोत्सव में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे। हर्षिल, चकराता एवं रामगढ़ क्षेत्र के ‘ए’-ग्रेड सेब उपलब्ध होंगे, जिनमें रॉयल डिलीशियस, गोल्डन डिलीशियस, गाला एवं रेड डिलीशियस जैसी प्रमुख किस्में शामिल हैं। इसके साथ ही कपकोट एवं रामगढ़ के कृषक उत्पादक संगठनों द्वारा प्राकृतिक विधि से उत्पादित उच्च गुणवत्ता वाली कीवी भी बिक्री के लिए उपलब्ध होगी।


महोत्सव में ताजी सब्जियां, देशी घी, जैविक सरसों तेल, जैविक गुड़, जैविक दालें, हिमालयी शहद एवं अन्य प्राकृतिक उत्पाद भी उपलब्ध रहेंगे। इसके अतिरिक्त उत्तराखंड के भौगोलिक संकेतक (GI) उत्पादों, ऐपण कला, ताम्र शिल्प एवं रिंगाल हस्तशिल्प सहित अन्य पारंपरिक एवं हस्तशिल्प उत्पादों का भी प्रदर्शन किया जाएगा।


इस आयोजन के माध्यम से नाबार्ड का उद्देश्य ग्रामीण उत्पादकों एवं कृषक उत्पादक संगठनों को उपभोक्ताओं से सीधे जोड़कर बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध कराना तथा उत्तराखंड के विशिष्ट कृषि उत्पादों, पारंपरिक उत्पादों एवं ग्रामीण उद्यमों को प्रोत्साहित करना है।


नाबार्ड ने देहरादून एवं आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों से अपने परिवार एवं मित्रों सहित ‘सेब महोत्सव 3.0’ में शामिल होने तथा प्रदेश के किसानों एवं ग्रामीण उत्पादकों द्वारा लाए गए गुणवत्तापूर्ण उत्पादों को देखने और खरीदने का आह्वान किया है।

 *देहरादून 06 अक्टूबर:



*जिलाधिकारी सम्बन्धित विभागाध्यक्षों से सीधे समन्वय कर समस्याओं का करें समाधान*


*माह के प्रथम मंगलवार को होने वाली बैठक से जनपदों के वर्षों से लंबित प्रकरणों के निस्तारण में मिली तेजी*


मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में जनपदों के शासन स्तर पर लंबित प्रकरणों के निस्तारण को लेकर बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने सभी जनपदों से सम्बन्धित लंबित प्रकरणों की विस्तार से जानकारी लेते हुए उनके निस्तारण की प्रगति की समीक्षा की।


मुख्य सचिव ने सम्बन्धित विभागों के विभागाध्यक्षों को आपसी समन्वय से जनपदों के लंबित प्रकरणों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनपद स्तर पर किसी प्रकरण के निस्तारण में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। जिलाधिकारी संबंधित विभागाध्यक्षों से सीधे संवाद कर समस्याओं का समाधान कराएं। आवश्यकता होने पर विभागीय उच्चाधिकारियों से सीधे समन्वय स्थापित कर प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।


मुख्य सचिव ने कहा कि जनपदों से सम्बन्धित विकास कार्यों में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने सड़कों, पुलों, भवनों तथा अन्य निर्माण कार्यों से जुड़े लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में विभागीय स्तर पर निर्णय लिया जाना है, उनमें समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जनपदों से सम्बन्धित लंबित प्रकरणों की नियमित रूप से समीक्षा करें तथा जिन मामलों में विभागाध्यक्ष स्तर पर समन्वय की आवश्यकता है, उनमें सीधे संबंधित विभागाध्यक्ष से वार्ता कर समाधान कराएं। उन्होंने कहा कि शासन और जनपदों के मध्य प्रभावी समन्वय से ही लंबित प्रकरणों का त्वरित निस्तारण संभव है।


उल्लेखनीय है कि जनपदों के शासन स्तर पर लंबित प्रकरणों के निस्तारण के लिए प्रत्येक माह के प्रथम मंगलवार को यह बैठक आयोजित की जा रही है। बैठक के दौरान विभिन्न जिलाधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए बताया कि इसके माध्यम से जनपदों के वर्षों से लंबित अनेक प्रकरणों का समाधान संभव हुआ है। जिलाधिकारियों ने कहा कि नियमित समीक्षा और विभागीय उच्चाधिकारियों के साथ सीधे समन्वय से लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आई है।


इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री एल. फैनाई, विशेष प्रमुख सचिव श्री अमित सिन्हा, सचिव श्री नितेश कुमार झा, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, श्री रविनाथ रमन, श्री चंद्रेश कुमार यादव, श्री बृजेश कुमार संत, डॉ. वी. षणमुगम, डॉ. आर. राजेश कुमार, श्री विनय शंकर पाण्डेय, श्री विनोद कुमार सुमन, सुश्री ज्योति यादव, श्री रणवीर सिंह चौहान, श्री धीराज सिंह गर्ब्याल एवं श्री राजेंद्र कुमार सहित विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, कमिश्नर कुमाऊँ श्री दीपक रावत, कमिश्नर गढ़वाल श्री आनन्द स्वरूप सहित जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।


 कैंची धाम पहुंचे ‘हनुमान अंश’ के कलाकार, मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी का किया धन्यवाद



 ‘हनुमान अंश’ के कलाकारों ने कैंची धाम, भीमताल पहुंचकर बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया।


इस दौरान कलाकारों ने देवभूमि उत्तराखण्ड में मिले स्नेह, सम्मान और आत्मीय स्वागत के लिए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी  का हृदय से धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। 


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