मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य सचिव श्री आनंद वर्धन एवं महानिदेशक सूचना विभाग ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर किया ,ध्वजारोहण
स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने परेड ग्राउंड में किया ध्वजारोहण
*मुख्यमंत्री ने वीर बलिदानियों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को किया नमन, प्रदेशवासियों को दी स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं*
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय मुख्य समारोह में ध्वजारोहण किया। समारोह का शुभारंभ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन से हुआ। इसके उपरांत मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने ध्वजारोहण किया। ध्वजारोहण के पश्चात राष्ट्रगान जन गण मन का सामूहिक गायन हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री ने समारोह के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किया तथा फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 14 पुलिस के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मुख्यमंत्री सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया। जिसमें 7 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सेवा के आधार पर एवं 6 को विशिष्ट कार्यों के आधार पर सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सराहनीय प्रदर्शन करने वाले 13 खिलाड़ियों को भी मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले अमर शहीदों, वीर बलिदानियों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को नमन किया। उन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर सैनिकों, अर्धसैनिक बलों एवं पुलिस के बहादुर जवानों के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले राज्य आंदोलनकारियों एवं शहीदों को भी श्रद्धापूर्वक नमन किया।
मुख्यमंत्री ने हाल ही में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आई प्राकृतिक आपदाओं में प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन घड़ी में राज्य सरकार प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रभावित परिवारों तक शीघ्र राहत पहुंचाना, घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना तथा जिन लोगों ने अपने घर एवं आजीविका खोई है, उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान करना है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव सामग्री पहुंचाने के साथ क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों, पेयजल एवं विद्युत लाइनों को शीघ्र दुरुस्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 अनेक दृष्टियों से ऐतिहासिक है। इस वर्ष देश स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है तथा राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। इसी वर्ष संत शिरोमणि रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती तथा सिक्ख पंथ के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी वर्ष भी मनाया जा रहा है। उन्होंने विभाजन विभीषिका के दौरान अमानवीय यातनाएं झेलने, अपनों को खोने और विस्थापन का दर्द सहने वाले सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत विश्व मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। देश विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, रक्षा उत्पादन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, विज्ञान, अनुसंधान, स्टार्टअप, खेल, योग एवं आयुर्वेद सहित विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प देशवासियों के सामने रखा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि होने के साथ-साथ वीरभूमि भी है। राज्य सरकार अपने वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। देहरादून में सैन्य धाम का निर्माण किया जा रहा है। बलिदानियों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये तथा परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों की अनुग्रह राशि 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये की गई है। प्रत्येक बलिदानी परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजित करने के साथ सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को 25 लाख रुपये तक की संपत्ति खरीद पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से विशेष लगाव है। प्रधानमंत्री की माणा, आदि कैलाश, हर्षिल एवं मुखबा की यात्राओं तथा राष्ट्रीय खेलों में सहभागिता से उत्तराखंड को विकास, पर्यटन एवं खेल के क्षेत्र में नई दिशा मिली है। राज्य के रजत जयंती वर्ष में प्रधानमंत्री ने आगामी 25 वर्षों के लिए उत्तराखंड के विकास का स्पष्ट विजन भी प्रदेशवासियों के सामने रखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2021 में केदारनाथ की पावन धरती से प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए ‘21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा’ के मंत्र को साकार करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सरकार ने वर्ष 2035 तक विकसित उत्तराखंड के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि सड़क, रेल एवं रोपवे कनेक्टिविटी के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे तथा विभिन्न रोपवे परियोजनाओं से राज्य की कनेक्टिविटी को नई गति मिली है। जमरानी, लखवाड़, किशाऊ एवं सौंग बांध परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केदारनाथ एवं बदरीनाथ धाम के पुनर्निर्माण, केदारखंड-मानसखंड मंदिर माला मिशन, ऋषिकेश-हरिद्वार कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर, हरिपुर यमुना तीर्थ पुनर्विकास एवं शीतकालीन यात्रा जैसी पहलों से प्रदेश की आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के साथ पर्यटन एवं अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या 47 लाख के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर चुकी है, जबकि इस वर्ष कांवड़ मेले में 4 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पवित्र कांवड़ लेकर अपने गंतव्यों की ओर रवाना हुए। शीतकालीन यात्रा को लेकर भी श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी वर्ष हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ महापर्व में नया रिकॉर्ड बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड अब धार्मिक पर्यटन के साथ वेलनेस, एडवेंचर टूरिज्म, फिल्म शूटिंग एवं वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी तेजी से उभर रहा है। सरकार का प्रयास है कि उत्तराखंड आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु एवं पर्यटक यहां से एक अनूठा अनुभव लेकर लौटे और राज्य का ब्रांड एंबेसेडर बने। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने के लिए स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत किया जा रहा है। इन्क्यूबेशन सेंटरों के साथ 200 करोड़ रुपये के वेंचर फंड की व्यवस्था की गई है। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। होम-स्टे योजना एवं मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के माध्यम से भी युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी विद्यालयों में कक्षा 11वीं एवं 12वीं में अध्ययनरत प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी। प्रथम चरण में 10 हजार विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा तथा इसके लिए 7 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन से उत्तराखंड ने खेलों के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। प्रदेश के खिलाड़ियों ने 103 पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। स्पोर्ट्स लीगेसी प्लान के अंतर्गत 8 शहरों में 23 खेल अकादमियां स्थापित की जाएंगी। महिला स्पोर्ट्स कॉलेज के साथ खेल विश्वविद्यालय के निर्माण पर भी कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण, किसान कल्याण, औद्यानिकी, विज्ञान एवं नवाचार तथा सुशासन के क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना के अंतर्गत प्रदेश की 3 लाख से अधिक बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों को 3 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण, कृषि उपकरणों पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी तथा निःशुल्क नहर सिंचाई जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की पहली विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति लागू की गई है। देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण किया जा रहा है। साइंस एंड इनोवेशन सेंटर, लैब्स ऑन व्हील्स, डिजिटल लाइब्रेरी, पेटेंट इन्फॉर्मेशन सेंटर एवं स्टैम लैब्स जैसी पहलें राज्य में विज्ञान एवं तकनीक को बढ़ावा दे रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक वर्ष में राज्य की जीएसडीपी में 7.23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है तथा प्रतिव्यक्ति आय में 41 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। राज्य का बजट एक लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है। पिछले पांच वर्षों में 20 हजार से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए हैं तथा स्टार्टअप की संख्या 700 से बढ़कर लगभग 1,750 हो गई है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्यों के इंडेक्स में उत्तराखंड ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। सार्वजनिक वित्तीय प्रदर्शन सूचकांक एवं इंडिया इनोवेशन इंडेक्स में हिमालयी राज्यों की श्रेणी में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में एचीवर्स तथा स्टार्टअप रैंकिंग में लीडर्स की श्रेणी प्राप्त हुई है। उत्तराखंड को लगातार चार वर्षों से ‘मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट’ का गौरव भी प्राप्त हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता, सख्त भू-कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून एवं नकल विरोधी कानून जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरी मिली है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प ऐसा उत्तराखंड बनाना है, जहां विकास के साथ विरासत, रोजगार के साथ पलायन का समाधान, आधुनिकता के साथ संस्कृति और पहचान की मजबूती सुनिश्चित हो।
*मुख्यमंत्री ने की सात महत्वपूर्ण घोषणाएं*
*स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के विकास एवं जनकल्याण से जुड़ी सात महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं -*
*’’1.’’ चमोली, पौड़ी एवं अल्मोड़ा में विशेष औद्योगिक पार्क स्थापित किए जाएंगे।*
*’’2.’’ प्रदेश के प्रथम ‘युवा आयोग’ की स्थापना की जाएगी।*
*’’3.’’ सीमावर्ती ग्रामों के युवाओं, भूतपूर्व सैनिकों एवं अग्निवीरों को स्वरोजगार एवं उद्यम स्थापित करने के लिए अतिरिक्त सहायता एवं प्रोत्साहन दिया* जाएगा।
*’’4.’’ वर्ग-3 एवं वर्ग-4 की भूमि के विनियमितीकरण की समय-सीमा का विस्तार कर भूमिधरी अधिकार दिए जाएंगे।*
*’’5.’’ प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत राज्यांश 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 75 हजार रुपये किया जाएगा।*
*’’6.’’ 18 से 30 वर्ष के युवाओं के लिए मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार एवं उद्यमिता प्रोत्साहन योजना शुरू की जाएगी। आईआईटी एवं आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से निःशुल्क उद्यमिता एवं कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा उद्यम स्थापित करने के लिए बैंक ऋण की 30 प्रतिशत राशि सरकार द्वारा अनुदान के रूप में दी जाएगी।*
*’’7.’’ प्रदेश के बहादुर बच्चों को सम्मानित करने के लिए इस वर्ष से ‘बाल वीरता पुरस्कार’ प्रदान किया जाएगा।*
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों का विश्वास सरकार के लिए राजनीतिक समर्थन मात्र नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि सरकार इस संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने के लिए पूरी निष्ठा, प्रतिबद्धता एवं समर्पण के साथ कार्य करती रहेगी।
समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री महेन्द्र भट्ट, राज्यसभा सांसद श्री नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, मेयर देहरादून श्री सौरभ थपलियाल, मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन, डीजीपी श्री दीपम सेठ, शासन के सचिवगण, जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून श्री प्रमेन्द्र डोभाल एवं अन्य महानुभाव उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास में ध्वजारोहण किया। ध्वजारोहण से पहले मुख्यमंत्री एवं उपस्थित अधिकारियों-कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया। इसके पश्चात मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और उपस्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों तथा मां भारती की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को नमन करते हुए उनका स्मरण किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अमर बलिदानियों ने जिस सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का सपना देखा था, उसे साकार करने की दिशा में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ योगदान देना होगा। सामूहिक प्रयासों और जनभागीदारी से ही देश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के समग्र, संतुलित और सतत विकास के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि विकास का लाभ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास में सभी के सहयोग और सहभागिता से उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हमें राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराता है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सूचना एवं लोकसंपर्क विभाग के महानिदेशक श्री बंशी धर तिवारी ने विभागीय परिसर में ध्वजारोहण किया । इस अवसर पर उन्होंने विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं।
महानिदेशक श्री तिवारी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हमें देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान का स्मरण कराता है। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर अपर निदेशक श्री आशीष त्रिपाठी, संयुक्त निदेशक श्री के.एस. चौहान, उपनिदेशक श्री मनोज श्रीवास्तव, श्री रवि बिजारनीया, श्रीमती अर्चना सहित विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
*स्वतंत्रता दिवस पर मुख्य सचिव ने सुशासन, विकसित उत्तराखण्ड और हिमालय संरक्षण का लिया संकल्प*
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सचिवालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य सचिव, उत्तराखण्ड श्री आनन्द बर्द्धन ने प्रदेशवासियों, सचिवालय परिवार, उत्तराखण्ड पुलिस एवं पीएसी के जवानों, राजकीय इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों एवं शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
मुख्य सचिव ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि उन असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, तपस्या और बलिदान को स्मरण करने का दिन है, जिनके संघर्ष से आज भारत एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और संप्रभु राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। स्वतंत्रता हमें विरासत में मिली है, लेकिन राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी की है।
उन्होंने कहा कि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी एवं सामरिक क्षेत्रों में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। भारत के वैज्ञानिक अंतरिक्ष के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल कर रहे हैं, युवा विश्वभर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं और डिजिटल तकनीक ने शासन एवं नागरिक सेवाओं के स्वरूप में व्यापक परिवर्तन किया है। अब हमारा लक्ष्य ऐसा समावेशी, सतत और गुणवत्तापूर्ण विकास सुनिश्चित करना है, जिसमें प्रत्येक नागरिक को समान अवसर मिले और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
*25 वर्ष के उत्तराखण्ड में उपलब्धियों के साथ चुनौतियों पर भी ध्यान जरूरी*
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड की 25 वर्षों की यात्रा आत्मावलोकन और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है। राज्य का गठन केवल प्रशासनिक पुनर्गठन नहीं था, बल्कि इसके पीछे पर्वतीय क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक परिस्थितियों और विकास की आकांक्षाओं का लंबा संघर्ष रहा है। उन्होंने कहा कि इन 25 वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल, पर्यटन, डिजिटल कनेक्टिविटी और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इसके बावजूद पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन, रोजगार के पर्याप्त अवसरों का सृजन, दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य एवं शिक्षा की पहुंच, आपदा जोखिम को कम करना, जल स्रोतों का संरक्षण और हिमालयी पारिस्थितिकी की रक्षा जैसी चुनौतियों पर निरंतर कार्य करने की आवश्यकता है।
*विकसित भारत के साथ विकसित उत्तराखण्ड का लक्ष्य*
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री के वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प की सफलता में उत्तराखण्ड की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। हमारा लक्ष्य ‘विकसित भारत के साथ विकसित उत्तराखण्ड’ होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विकसित उत्तराखण्ड का अर्थ केवल बड़े शहरों और बड़ी परियोजनाओं से नहीं है। विकसित उत्तराखण्ड वह होगा, जहां पहाड़ का युवा अपने गांव में रहकर सम्मानजनक रोजगार प्राप्त कर सके, महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हों, प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रत्येक नागरिक को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलें। गांव सड़क, इंटरनेट और आधुनिक सुविधाओं से जुड़े हों तथा विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक बनें।
*सुशासन और परिणाम आधारित प्रशासन सर्वोच्च प्राथमिकता*
मुख्य सचिव ने कहा कि सचिवालय राज्य शासन का मस्तिष्क है और यहां लिए गए प्रत्येक निर्णय का प्रभाव प्रदेश के गांव-गांव और प्रत्येक नागरिक तक पहुंचता है। इसलिए प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि सरकार का प्रत्येक निर्णय नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कहा कि प्रशासन को केवल योजनाओं और फाइलों तक सीमित न रखते हुए ‘फाइल डिस्पोजल’ से आगे ‘आउटकम डिलीवरी’ की ओर ले जाना होगा। प्रशासन की सफलता इस बात से तय होगी कि सरकारी निर्णयों और योजनाओं से लोगों के जीवन में कितना वास्तविक सुधार आया। उन्होंने ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ की भावना के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल गवर्नेंस, डाटा एनालिटिक्स और अन्य आधुनिक तकनीकों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से प्रशासन को अधिक तेज, पारदर्शी, संवेदनशील और नागरिक-केंद्रित बनाया जाना चाहिए।
मुख्य सचिव ने सचिवालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कहा कि वे स्वयं को केवल सरकारी कर्मचारी नहीं, बल्कि लोक सेवक मानें। उन्होंने कहा कि उनके पास जो अधिकार हैं, वे व्यक्तिगत अधिकार नहीं बल्कि जनता द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियां हैं। कार्यालय में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को केवल एक केस या फाइल के रूप में नहीं, बल्कि उसकी आशाओं, अपेक्षाओं और परिवार से जुड़े व्यक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए।
*स्थानीय अर्थव्यवस्था और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाए*
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड की वास्तविक शक्ति हमारे गांवों, महिलाओं, युवाओं और प्राकृतिक संपदा में है। पर्वतीय अर्थव्यवस्था के ऐसे मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है, जो स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित हों और स्थानीय उत्पादन को वैश्विक बाजार से जोड़ें। उन्होंने मिलेट्स, स्थानीय कृषि उत्पाद, बागवानी, औषधीय एवं सुगंधित पौधों, हस्तशिल्प, जैविक उत्पाद तथा पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक बाजार से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों ने इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है और अब इन्हें केवल आजीविका समूहों तक सीमित न रखते हुए ग्रामीण उद्यमिता के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
*युवाओं के लिए रोजगार के साथ उद्यमिता के अवसर*
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड का युवा केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बने—यह हमारा लक्ष्य होना चाहिए। स्टार्टअप, नवाचार, पर्यटन, आईटी, नवीकरणीय ऊर्जा, क्रिएटिव इकोनॉमी और उद्यमिता के क्षेत्र में युवाओं के लिए नए अवसर विकसित करने होंगे। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास होना चाहिए कि उत्तराखण्ड का युवा रोजगार के लिए केवल देहरादून, दिल्ली, चंडीगढ़ या बेंगलुरु की ओर न देखे, बल्कि रोजगार और उद्यम के अवसर पहाड़ तक पहुंचें और प्रतिभा पहाड़ से बाहर जाने के बजाय यहीं अवसर प्राप्त करे।
*हिमालय और पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास*
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड हिमालय का प्रहरी है। राज्य की नदियां केवल जलधाराएं नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और अर्थव्यवस्था का आधार हैं। इसी प्रकार जंगल जल स्रोतों, जैव विविधता और जलवायु संतुलन के महत्वपूर्ण संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड का विकास हिमालय-संवेदनशील विकास मॉडल पर आधारित होना चाहिए। आपदा प्रबंधन में प्रतिक्रियात्मक दृष्टिकोण के बजाय पूर्व तैयारी और जोखिम न्यूनीकरण पर जोर दिया जाना चाहिए। अर्ली वार्निंग सिस्टम, रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट, आपदा-रोधी निर्माण और जलवायु अनुकूलन को विकास की मुख्यधारा में शामिल करना आवश्यक है।
*जिम्मेदार और उच्च मूल्य वाले पर्यटन पर जोर*
मुख्य सचिव ने कहा कि पर्यटन उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। अब पर्यटन को केवल अधिक संख्या में पर्यटकों तक सीमित न रखकर रिस्पॉन्सिबल, सस्टेनेबल और हाई-वैल्यू टूरिज्म की दिशा में आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने स्पिरिचुअल टूरिज्म, वेलनेस एवं योग, एडवेंचर, इको-टूरिज्म, होमस्टे, विंटर टूरिज्म और सांस्कृतिक पर्यटन की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि चारधाम यात्रा हमारी आध्यात्मिक विरासत है, लेकिन इसके साथ उत्तराखण्ड के छोटे गांवों, लोक संस्कृति, खान-पान, हस्तशिल्प और प्राकृतिक सौंदर्य को भी पर्यटन की मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता है।
*कर्तव्यनिष्ठा, पारदर्शिता और संवेदनशीलता का लिया संकल्प*
मुख्य सचिव ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हमें स्वतंत्रता, जिम्मेदारी और संकल्प—इन तीन मूल भावनाओं की याद दिलाता है। हमें स्वतंत्रता को समृद्धि, समान अवसर और सम्मानजनक जीवन में परिवर्तित करना है।
उन्होंने सचिवालय के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आह्वान किया कि वे कर्तव्यनिष्ठा, पारदर्शिता, नवाचार और संवेदनशीलता को अपनी कार्यसंस्कृति का आधार बनाएं तथा संकल्प लें कि उनका प्रत्येक निर्णय उत्तराखण्ड के हित में, प्रत्येक प्रयास जनहित में और प्रत्येक कार्य विकसित उत्तराखण्ड की दिशा में होगा।
अंत में मुख्य सचिव ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, शहीद भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद सहित सभी महान स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए समर्पित भारतीय सेना, अर्द्धसैनिक बलों, पुलिस बलों तथा सभी वीर जवानों के प्रति भी सम्मान व्यक्त किया और सभी से मिलकर नए एवं विकसित उत्तराखण्ड के निर्माण का आह्वान किया।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव, सचिवगण, अपर सचिवगण, सचिवालय परिवार के अधिकारी कर्मचारी एवं स्कूल के बच्चे भी उपस्थित थे।







