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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज करेंगे मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना का शुभारंभ*

*प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए युवाओं को मिलेगी निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग*


देहरादून, 7 सितंबर

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 मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज प्रदेश के युवाओं के भविष्य निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का शुभारंभ करेंगे। इस योजना के माध्यम से राज्य के युवाओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग एवं गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।


योजना का उद्देश्य युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक संसाधनों की कमी किसी भी प्रतिभाशाली युवा के सपनों के आड़े न आए।


योजना के तहत राज्य के विश्वविद्यालयों तथा शासकीय एवं सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा प्रदान की जाएगी। इसमें सिविल सर्विसेज (UPSC एवं राज्य लोक सेवा आयोग), रक्षा सेवाएं (CDS), बैंकिंग, रेलवे और SSC सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाएं शामिल होंगी।


इसके अतिरिक्त CAT, MAT, GATE, NET और CSIR-NET जैसी उच्च शिक्षा एवं पात्रता परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी युवाओं को मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।


मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना विशेष रूप से प्रदेश के दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगी। अब युवाओं को गुणवत्तापूर्ण कोचिंग के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा और वे घर बैठे ही विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में अपनी तैयारी कर सकेंगे।

[07/09, 18:31] Deepa Gaur Informdept: *11 हजार विद्यार्थियों को मिलेगी निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा* 



 *UPSC/State PCS से लेकर SSC, Banking, Railway, Defence, NET, GATE, CSIR-JRF और CAT/MAT जैसी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी* 





मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज प्रदेश के विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी एवं प्रवेश परीक्षाओं की गुणवत्तापूर्ण तैयारी के लिए निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग योजना का शुभारंभ किया। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के प्रतिभावान एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं को आर्थिक बाधाओं से मुक्त करते हुए देश के प्रतिष्ठित शिक्षकों, विषय-विशेषज्ञों एवं प्रोफेशनल कोचिंग संस्थानों की गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सुविधाएं ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराना है।



योजना के अंतर्गत कुल 11,000 विद्यार्थियों को निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत UPSC एवं State PCS की तैयारी के लिए 2,000 विद्यार्थियों, SSC, Railway, Banking Services एवं समकक्ष परीक्षाओं के लिए 5,000 विद्यार्थियों, Defence Services की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए 2,000 विद्यार्थियों, NET, GATE, CSIR एवं JRF जैसी परीक्षाओं के लिए 1,000 विद्यार्थियों तथा CAT/MAT जैसी प्रबंधन प्रवेश परीक्षाओं के लिए 1,000 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन दिया जाएगा।



 *खुली ऑनलाइन स्क्रीनिंग परीक्षा से होगा विद्यार्थियों का चयन* 



योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक छात्र-छात्राओं का चयन खुली ऑनलाइन स्क्रीनिंग परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा। इच्छुक विद्यार्थी निर्धारित पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर स्क्रीनिंग परीक्षा में प्रतिभाग कर सकेंगे। स्क्रीनिंग परीक्षा के प्रदर्शन के आधार पर विद्यार्थियों का चयन संबंधित परीक्षा की तैयारी के लिए किया जाएगा।


योजना में टॉपर एवं मेधावी छात्र-छात्राओं को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही चयन प्रक्रिया में विद्यार्थियों की योग्यता, परीक्षा में प्रदर्शन तथा निर्धारित पात्रता मानकों को ध्यान में रखा जाएगा। इस प्रकार योजना का लाभ उन विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाएगा, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गंभीर हैं और अपनी प्रतिभा एवं क्षमता के बल पर आगे बढ़ना चाहते हैं।


 *सिर्फ ऑनलाइन कक्षाएं नहीं, मिलेगा पूरा डिजिटल लर्निंग सपोर्ट* 


इस योजना की महत्वपूर्ण विशेषता यह होगी कि विद्यार्थियों को केवल लाइव ऑनलाइन कक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उन्हें रिकॉर्डेड लेक्चर, डिजिटल स्टडी मटेरियल, विषयवार प्रश्न बैंक, नियमित ऑनलाइन टेस्ट, मॉक टेस्ट, परीक्षा पैटर्न आधारित अभ्यास तथा प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।


विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार रिकॉर्डेड कक्षाओं और डिजिटल अध्ययन सामग्री का दोबारा अध्ययन कर सकेंगे। नियमित टेस्ट एवं मॉक टेस्ट के माध्यम से उनकी तैयारी का आकलन किया जाएगा तथा विद्यार्थियों को यह समझने में सहायता मिलेगी कि किन विषयों में उन्हें अधिक अभ्यास की आवश्यकता है।


 *देश के प्रतिष्ठित एवं प्रोफेशनल ट्यूटर विद्यार्थियों को देंगे मार्गदर्शन* 


गुणवत्तापूर्ण प्रतियोगी परीक्षा प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा Study IQ, Delhi, Mahendra Private Limited, Lucknow तथा Doon Dreamers, Dehradun जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का चयन किया गया है।


इन संस्थानों के विशेषज्ञ शिक्षकों एवं विषय-विशेषज्ञों के माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी एवं प्रवेश परीक्षाओं की व्यवस्थित तैयारी कराई जाएगी। इसके साथ ही सरकार की ओर से देश के प्रसिद्ध, अनुभवी एवं प्रोफेशनल ट्यूटरों और विषय-विशेषज्ञों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा, ताकि उत्तराखंड के विद्यार्थियों को देशभर में उपलब्ध उत्कृष्ट शिक्षण एवं मार्गदर्शन का लाभ मिल सके।


 *विद्यार्थियों को कैसे मिलेगा लाभ?* 


योजना के तहत लाभ लेने की प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी रखा जाएगा। इच्छुक विद्यार्थी—


1. निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल पर अपना पंजीकरण करेंगे।

2. आवश्यक विवरण एवं दस्तावेज अपलोड कर आवेदन करेंगे।

3. ऑनलाइन स्क्रीनिंग परीक्षा में प्रतिभाग करेंगे।

4. परीक्षा में प्रदर्शन एवं निर्धारित पात्रता के आधार पर चयनित विद्यार्थियों को संबंधित कोर्स में प्रवेश दिया जाएगा।

5. चयनित विद्यार्थियों को ऑनलाइन कक्षाओं, रिकॉर्डेड लेक्चर एवं डिजिटल अध्ययन सामग्री तक निःशुल्क पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी।

6. नियमित टेस्ट एवं मॉक टेस्ट के माध्यम से विद्यार्थियों की तैयारी का मूल्यांकन किया जाएगा।

7. विद्यार्थियों को उनकी तैयारी एवं प्रदर्शन के अनुरूप आवश्यक शैक्षणिक मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा।


 *आर्थिक रूप से सक्षम न होने वाला विद्यार्थी भी कर सकेगा बड़े लक्ष्य की तैयारी* 


सरकार का प्रयास है कि किसी भी प्रतिभावान विद्यार्थी की सफलता के रास्ते में आर्थिक संसाधनों की कमी बाधा न बने। प्रदेश में अनेक विद्यार्थी प्रतिभाशाली होने के बावजूद महंगी कोचिंग का खर्च वहन नहीं कर पाते। ऐसे विद्यार्थियों के लिए यह योजना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।


डिजिटल तकनीक के माध्यम से विद्यार्थियों को उनके घर से ही देश के श्रेष्ठ शिक्षकों एवं विषय-विशेषज्ञों से सीखने का अवसर मिलेगा। इससे पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी बड़े शहरों में जाकर महंगी कोचिंग लेने की आवश्यकता कम होगी।


 *Technology, Quality और Accessibility को एक साथ जोड़ने का प्रयास* 


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज के समय में डिजिटल तकनीक शिक्षा की पहुंच, गुणवत्ता और अवसरों को व्यापक बनाने का प्रभावी माध्यम बन चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार Technology, Quality और Accessibility को एक साथ जोड़कर प्रदेश के विद्यार्थियों को उनके लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन एवं अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है।



उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि उत्तराखंड के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर संसाधन, गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन और समान अवसर उपलब्ध हों। आर्थिक परिस्थितियां किसी विद्यार्थी की प्रतिभा और उसके सपनों के बीच बाधा न बनें, इसी उद्देश्य से निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग की यह पहल शुरू की गई है।



इस योजना के माध्यम से उत्तराखंड के 11,000 विद्यार्थियों को निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण कोचिंग उपलब्ध कराते हुए उन्हें विभिन्न राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय प्रतियोगी एवं प्रवेश परीक्षाओं के लिए तैयार किया जाएगा।

[07/09, 20:32] Deepa Gaur Informdept: *स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से की भेंट* 



 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में आज स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति, हरिद्वार के राष्ट्रीय महासचिव श्री जितेंद्र रघुवंशी के नेतृत्व में  प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने स्वतंत्रता सेनानियों एवं उनके आश्रित परिवारों से जुड़े विभिन्न विषयों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी देश की स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन का सर्वस्व न्योछावर करने वाले राष्ट्र के महान नायक हैं। उनके त्याग, संघर्ष और बलिदान के कारण ही आज हम स्वतंत्र भारत में स्वतंत्रता एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ जीवन जी रहे हैं। स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वतंत्रता सेनानियों तथा उनके परिवारों के सम्मान और कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार द्वारा स्वतंत्रता सेनानी सम्मान पेंशन की व्यवस्था के साथ ही उनके आश्रित परिवारों के हितों का भी ध्यान रखा जा रहा है। स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों एवं उनके योगदान को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उनके नाम पर स्मारकों एवं अन्य सम्मानजनक पहलों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।


उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की वीरभूमि ने देश की स्वतंत्रता के आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और प्रदेश के अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने राष्ट्र की आजादी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राज्य सरकार का प्रयास है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान को इतिहास और जनमानस में सदैव जीवंत रखा जाए।


मुख्यमंत्री श्री धामी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि स्वतंत्रता सेनानी एवं उनके उत्तराधिकारी परिवारों से जुड़े जायज विषयों का नियमों के अनुरूप प्राथमिकता से परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को प्राप्त प्रकरणों का परीक्षण करते हुए नियमानुसार उचित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।


प्रतिनिधिमंडल ने स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के सम्मान एवं हितों के प्रति राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया।


 इस अवसर पर श्री सुरेश चंद्रा सुयाल, श्री अनुराग सिंह गौतम तथा श्री आदित्य सिंह सहित अन्य स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के सदस्य भी उपस्थित थे |



 *तीन वर्षों में 37वें से 12वें स्थान तक का सफर, धामी सरकार के सतत प्रयासों और जनभागीदारी को मिली बड़ी सफलता* 



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स्वच्छ और स्वस्थ उत्तराखंड की दिशा में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों को एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा जारी स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 के परिणामों में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून ने वायु गुणवत्ता सुधाppर के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए 3 से 10 लाख की जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में देशभर में 12वां स्थान प्राप्त किया है। देहरादून की यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में शहर ने वायु गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है और तीन वर्षों की समग्र यात्रा में 37वें स्थान से 12वें स्थान तक की उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।



वर्ष 2024 में देहरादून इस श्रेणी में 41वें स्थान पर था, जबकि वर्ष 2025 में इसमें उल्लेखनीय सुधार करते हुए शहर 19वें स्थान पर पहुंचा और अब वर्ष 2026 में देहरादून ने 12वां स्थान हासिल किया है। यह लगातार सुधार केवल रैंकिंग में बदलाव नहीं, बल्कि शहर में वायु प्रदूषण की रोकथाम, धूल नियंत्रण, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर निगरानी, स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने, सड़क सफाई, जनजागरूकता और पर्यावरणीय निगरानी के लिए किए जा रहे बहुआयामी प्रयासों की सफलता का प्रमाण है |



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ वायु को जनस्वास्थ्य से जोड़ते हुए इस दिशा में ठोस एवं वैज्ञानिक उपायों पर विशेष जोर दिया है। सरकार की प्राथमिकता केवल प्रदूषण के स्तर को कम करना ही नहीं, बल्कि ऐसा स्थायी और प्रभावी तंत्र विकसित करना है, जिसके माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को भी स्वच्छ, स्वस्थ और बेहतर पर्यावरण उपलब्ध कराया जा सके। देहरादून की रैंकिंग में हुआ यह सुधार इसी दीर्घकालिक सोच और निरंतर निगरानी के परिणामस्वरूप सामने आया है।



देहरादून नगर निगम एवं संबंधित विभागों द्वारा वायु गुणवत्ता सुधार के लिए अपनाई गई बहुआयामी रणनीति में आधुनिक तकनीक का भी प्रभावी उपयोग किया गया। शहर के संवेदनशील एवं सघन क्षेत्रों में धूल तथा प्रदूषक कणों को नियंत्रित करने के लिए ड्रोन के माध्यम से जल छिड़काव किया गया। इसके साथ ही सड़क किनारे एवं प्रमुख मार्गों पर धूल के जमाव को कम करने के लिए यांत्रिक सफाई व्यवस्था को मजबूत किया गया तथा मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों के नियमित संचालन पर विशेष ध्यान दिया गया। इन प्रयासों का उद्देश्य सड़क की धूल से उत्पन्न होने वाले प्रदूषक कणों को नियंत्रित कर शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार लाना रहा।



वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में खुले में कूड़ा एवं पराली जलाना भी शामिल है। इसे देखते हुए नगर क्षेत्र में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों को खुले में कूड़ा जलाने से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में लगातार जागरूक किया गया। सरकार और स्थानीय निकायों की ओर से नागरिकों से स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण को अपनी दैनिक आदतों का हिस्सा बनाने की अपील की गई। प्रशासनिक प्रयासों के साथ जनभागीदारी को जोड़ने का यह मॉडल देहरादून की वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ है।



शहर में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण के लिए भी निरंतर अभियान चलाए गए। प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र यानी पीयूसी की नियमित एवं सघन जांच के माध्यम से ऐसे वाहनों पर निगरानी बढ़ाई गई, जो निर्धारित मानकों से अधिक उत्सर्जन कर रहे हैं। इसके साथ ही स्वच्छ परिवहन को प्रोत्साहित करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। ईवी अपनाने के लिए प्रोत्साहन के साथ शहर में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। सरकार का प्रयास है कि आने वाले समय में स्वच्छ एवं पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाए।


वायु गुणवत्ता सुधार के लिए केवल एक-दो विभागों के प्रयास पर्याप्त नहीं होते, बल्कि इसके लिए विभिन्न विभागों, स्थानीय निकायों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास आवश्यक होते हैं। इसी सोच के साथ देहरादून में वायु गुणवत्ता की सतत निगरानी के लिए सुदृढ़ मॉनिटरिंग व्यवस्था विकसित की गई है। प्राप्त आंकड़ों के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। इस निरंतर निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई ने शहर में वायु प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


देहरादून की यह उपलब्धि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के ‘स्वच्छ, स्वस्थ और सतत विकास वाले उत्तराखंड’ के विजन को भी मजबूती प्रदान करती है। राज्य सरकार विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कायम करते हुए ऐसी व्यवस्थाओं पर जोर दे रही है, जिनमें शहरों का आर्थिक एवं आधारभूत विकास भी हो और पर्यावरणीय गुणवत्ता भी बनी रहे। राजधानी देहरादून का स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लगातार बेहतर प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि योजनाबद्ध प्रयासों, आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में ठोस परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।


यह उपलब्धि देहरादून नगर निगम, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, संबंधित विभागों, सफाई एवं पर्यावरण कर्मियों तथा शहर की जागरूक जनता के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। विशेष रूप से देहरादून के नागरिकों द्वारा स्वच्छता, कूड़ा प्रबंधन, खुले में कचरा न जलाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति दिखाई जा रही जागरूकता ने सरकार के प्रयासों को जनआंदोलन का स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री श्री धामी ने भी समय-समय पर पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए नागरिकों से स्वच्छ एवं प्रदूषणमुक्त उत्तराखंड के निर्माण में सक्रिय सहयोग का आह्वान किया है।


देहरादून के साथ ही उत्तराखंड के अन्य शहरों ने भी वायु गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में सकारात्मक प्रदर्शन किया है। राज्य के ऋषिकेश और काशीपुर शहरों में भी पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के अन्य शहरों में भी वायु गुणवत्ता सुधार के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी कार्ययोजनाएं लागू की जाएं और स्वच्छ वायु के इस अभियान को पूरे उत्तराखंड में व्यापक जनअभियान के रूप में आगे बढ़ाया जाए।


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में देहरादून की उपलब्धि पर देहरादूनवासियों, नगर निगम, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा संबंधित विभागों को बधाई देते हुए कहा कि........


 *“स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में देहरादून का 37वें से 12वें स्थान पर पहुंचना पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। यह उपलब्धि देहरादून की जागरूक जनता की सक्रिय भागीदारी, नगर निगम देहरादून के समर्पित कार्यों तथा उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सतत निगरानी का सम्मिलित परिणाम है। सरकार का प्रयास है कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। स्वच्छ वायु केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के स्वस्थ जीवन और बेहतर भविष्य से जुड़ा विषय है। देहरादून की यह उपलब्धि हमें और बेहतर करने की प्रेरणा देती है। मैं देहरादूनवासियों एवं सभी संबंधित विभागों को हार्दिक बधाई देता हूं और विश्वास करता हूं कि स्वच्छ वायु के लिए यह सामूहिक प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेगा।”* 


- *पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड*


*परियोजनाओं की प्राथमिकता तय कर ही भारत सरकार को प्रस्ताव भेजे जाएँ: मुख्य सचिव*



मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सोमवार को सचिवालय में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम से सम्बन्धित राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति (एसएलएससी) की बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए परियोजनाओं का चयन एवं प्राथमिकता निर्धारण किया जाए। बैठक में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के फेज-1 एवं फेज-2 के अंतर्गत प्रस्तावित विभिन्न विकास कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर विभिन्न परियोजनाओं को संस्तुति प्रदान की गई।


मुख्य सचिव ने कहा कि वाइब्रेंट विलेज क्षेत्रों में सड़क एवं विद्युत ग्रिड से कनेक्टिविटी, नेटवर्क, टेलीविजन एवं संचार सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम से सम्बन्धित परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार करते समय सेना, एसएसबी एवं आईटीबीपी से सम्बन्धित आवश्यक परियोजनाओं को भी समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने सम्बन्धित जनपदों की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित करने के निर्देश दिए।


मुख्य सचिव ने कहा कि केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले परियोजना प्रस्तावों में कार्यों की प्राथमिकता स्पष्ट रूप से निर्धारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं की सूची प्राथमिकता के अवरोही क्रम में तैयार की जाए, इसके लिए सम्बन्धित जनपदों से परियोजनाओं की प्राथमिकता प्राप्त कर प्रस्ताव तैयार किए जाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं की फंडिंग के लिए भारत सरकार अथवा राज्य सरकार की किसी अन्य योजना के अंतर्गत वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं, उन्हें सम्बन्धित योजनाओं के माध्यम से वित्तपोषित कराने का प्रयास किया जाए। ऐसी परियोजनाओं को वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की सूची से हटाकर उनके स्थान पर अन्य आवश्यक एवं प्राथमिकता वाली परियोजनाओं को शामिल किया जा सकता है।


मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के फेज-1 एवं फेज-2 के अंतर्गत सभी परियोजनाओं को प्राथमिकता निर्धारित करने के बाद ही केंद्र सरकार को भेजा जाए। उन्होंने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के लिए प्रत्येक सम्बन्धित जनपद से पांच-पांच बड़े एवं महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाएं तैयार की जाएँ, जो वाइब्रेंट विलेज क्षेत्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। इन परियोजनाओं में क्षेत्र की स्थानीय आवश्यकताओं, कनेक्टिविटी, बुनियादी सुविधाओं, पर्यटन, आजीविका तथा सीमावर्ती क्षेत्रों की रणनीतिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाए।


बैठक में प्रमुख सचिव श्री आर. मीनाक्षी सुन्दरम, डीजी कारागार श्री अभिनव कुमार, सचिव श्री धीराज सिंह गर्ब्याल, श्री सी. रविशंकर, आईजी डॉ. नीलेश आनन्द भरणे सहित सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।




देहरादून :






प्राधिकरण ने कहा- नियम तोड़ने वालों को नहीं मिलेगी छूट*


मसूरी के अपर माल रोड स्थित रॉक स्टोन में अनाधिकृत निर्माण के खिलाफ मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए निर्माण को ध्वस्त कर दिया। प्राधिकरण के अनुसार संजय मेहरोत्रा और राजीव मेहरोत्रा द्वारा किए गए अनाधिकृत निर्माण के मामले में नियमानुसार वाद दायर किया गया था। सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित पक्ष की ओर से प्रस्तुत जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।


मसूरी के बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील अपर माल रोड क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई को एमडीडीए की ओर से अनाधिकृत निर्माण के खिलाफ सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि पर्वतीय क्षेत्रों में भवन निर्माण के लिए निर्धारित नियमों, स्वीकृत मानचित्र और आवश्यक अनुमतियों का पालन अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी कर किए गए निर्माण के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। एमडीडीए के मुताबिक रॉक स्टोन स्थल पर अनाधिकृत निर्माण पाए जाने के बाद संबंधित पक्ष के खिलाफ उत्तराखण्ड (उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973) यथासंशोधित की सुसंगत धाराओं के तहत वाद योजित किया गया। कार्रवाई से पहले विपक्षी पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया। सुनवाई के दौरान संबंधित पक्ष की ओर से प्रस्तुत प्रतिउत्तर का प्राधिकरण ने नियमानुसार परीक्षण किया। हालांकि, जवाब से निर्माण को नियमों के अनुरूप ठहराने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिला। इसके बाद नियमानुसार ध्वस्तीकरण के आदेश पर कार्रवाई की गई।


*संवेदनशील क्षेत्र में निर्माण पर सख्ती*


प्राधिकरण का कहना है कि मसूरी की भौगोलिक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए यहां अनियोजित और अनाधिकृत निर्माण गंभीर विषय है। पर्यटन नगरी में लगातार बढ़ते निर्माण दबाव के बीच भवन निर्माण से जुड़े नियमों और स्वीकृत मानचित्रों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है। प्राधिकरण का कहना है कि बिना अनुमति निर्माण अथवा स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किए गए निर्माण को किसी भी स्थिति में प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा। एमडीडीए ने साफ कर दिया है कि मसूरी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में नियमों से खिलवाड़ करने वालों को कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।


*एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि* प्राधिकरण की प्राथमिकता देहरादून और मसूरी क्षेत्र में नियोजित एवं नियमबद्ध विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक निर्माणकर्ता के लिए स्वीकृत मानचित्र, निर्धारित मानकों और प्रचलित नियमों का पालन करना आवश्यक है। रॉक स्टोन प्रकरण में संबंधित पक्ष को सुनवाई का पर्याप्त अवसर दिया गया और सुनवाई के बाद जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि एमडीडीए किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करता है। मसूरी की भौगोलिक एवं पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए अनाधिकृत निर्माण को किसी भी स्थिति में बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। जहां भी निर्माण नियमों का उल्लंघन सामने आएगा, वहां प्रचलित अधिनियम और नियमों के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।


*निष्पक्ष कार्रवाई रहेगी जारी*


एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि रॉक स्टोन, अपर माल रोड के मामले में उत्तराखण्ड (उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973) के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है। संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था, लेकिन सुनवाई के दौरान संतोषजनक प्रतिउत्तर प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य कानून के प्रावधानों का निष्पक्ष रूप से पालन कराना है। विकास क्षेत्र में बिना स्वीकृति अथवा नियमों के विपरीत किए जा रहे निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। अधिकारियों ने निर्माणकर्ताओं से अपील की है कि भवन निर्माण शुरू करने से पहले सभी आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करें और स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप ही निर्माण करें।


 समयबद्ध कार्य-निस्तारण एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के दिए कड़े निर्देश*


देहरादून, 05 सितम्बर 2026



महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, डॉ. सुनीता टम्टा की अध्यक्षता में आज स्वास्थ्य महानिदेशालय में कार्यरत समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में महानिदेशालय के विभिन्न अनुभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई तथा कार्यप्रणाली में आवश्यक सुधार, पारदर्शिता एवं समयबद्ध कार्य-निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।


महानिदेशक ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि कार्यालय में प्राप्त किसी भी पत्रावली अथवा प्रकरण को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए तथा प्रत्येक प्रकरण का निर्धारित समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि कार्यों में अनावश्यक विलंब अथवा लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी। यदि किसी प्रकरण के निस्तारण में विलंब पाया जाता है तो संबंधित अनुभाग के प्रभारी अधिकारी की जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी तथा विलंब के कारणों का स्पष्ट उत्तरदायित्व तय किया जाएगा।


डॉ. सुनीता टम्टा ने संयुक्त निदेशक एवं सहायक निदेशक स्तर के अधिकारियों को अपने-अपने अनुभागों में संचालित कार्यों की नियमित निगरानी करने तथा प्रत्येक लंबित प्रकरण की समीक्षा कर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अपने अनुभागों की कार्यप्रणाली के प्रति पूर्ण जवाबदेही के साथ कार्य करना होगा और किसी भी स्तर पर अनावश्यक लंबित प्रकरण नहीं रहना चाहिए।


बैठक में सूचना का अधिकार (RTI) अनुभाग के कार्यों की भी विशेष रूप से समीक्षा की गई। महानिदेशक ने निर्देश दिए कि RTI से संबंधित सभी प्रकरणों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से निस्तारण किया जाए, ताकि आवेदक/अपीलकर्ता को समय पर वांछित सूचना उपलब्ध हो सके।


*कार्यालयीन अनुशासन एवं समयपालन सुनिश्चित करने के निर्देश*


महानिदेशक ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्धारित कार्यालय समय में अनिवार्य रूप से कार्यालय में उपस्थित रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अनधिकृत अनुपस्थिति अथवा विलंब से कार्यालय पहुंचने की स्थिति को गंभीरता से लिया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


उन्होंने कहा कि एक प्रभावी एवं उत्तरदायी कार्यालय व्यवस्था के लिए समयपालन, अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक हैं। प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी को अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा एवं गंभीरता से करना होगा।


महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आह्वान करते हुए कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता अथवा अनावश्यक विलंब न किया जाए। विभागीय कार्यों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निष्ठा, अनुशासन, पारदर्शिता एवं समयबद्धता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने के निर्देश दिए।


बैठक में स्वास्थ्य महानिदेशालय के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

 


ऋषिकेश  : 



हरिद्वार-देहरादून हाईवे पर रविवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में 18 वर्षीय स्कूटी सवार युवक की मौत हो गई। हादसा छिद्दरवाला चौक से कुछ दूरी पर हुआ । तेज रफ्तार डंपर ने स्कूटी को टक्कर मार दी, जिससे स्कूटी सवार युवक की मौके पर ही मौत हो गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार को सुबह  रायवाला पुलिस को छिद्दरवाला चौक  से आगे सड़क दुर्घटना की सूचना मिली। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के अनुसार, डंपर  ने स्कूटी को टक्कर मारी थी।

हादसे में स्कूटी सवार अनिकेत गुसाईं पुत्र दीपक गुसाईं, निवासी कोटद्वार, उम्र 18 वर्ष गंभीर रूप से घायल हो गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव को 108 एंबुलेंस के माध्यम से एम्स ऋषिकेश भेजा, जहां मृतक के परिजन भी मौजूद रहे।

बताया गया कि दुर्घटना के बाद डंपर चालक वाहन को लाल तप्पड़ क्षेत्र में छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त डंपर और स्कूटी को आवश्यक कार्रवाई के लिए थाने में खड़ा करा दिया है। वहीं फरार चालक की गिरफ्तारी के लिए पुलिस प्रयास कर रही है।

मृतक के परिजनों की तहरीर के आधार पर रायवाला थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस फरार डंपर चालक की तलाश में जुटी है।

  नन्दाजात) यात्रा 2026

हिमालय महाकुंभ से विख्यात विश्व की सबसे लंबी पवित्र,ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पैदल महायात्रा 2026


Nanda  Rajjaat yatra2026


श्री नन्दादेवी बड़ीजात (नन्दाजात) यात्रा 2026 

05 सितम्बर से 30 सितम्बर 2026

प्रस्थान  05 सितंबर 2026 को "श्री नन्दा देवी सिद्धपीठ कुरुड़" से 20 सितम्बर नन्दानवमी तिथि के दिन  सम्पूर्ण विधि-विधान, पौराणिक परंपरा एवं धार्मिक रीति-रिवाजों पूजा पाठ साथ माता को होमकुंड में चौसिंग्या खाडू के साथ मायके से ससुराल कैलाश विदाई कार्यक्रम सम्पन्न होगी.


नंदानगर स्थित श्री नन्दादेवी राजराजेश्वरी सिद्धपीठ कुरुड़ से शुरू होकर कैलाश हिमालय होमकुण्ड की यात्रा   ने माँ नंदा देवी की विदाई पर फूट फूट कर रोई महिलाएं। मायके से कैलाश को रवाना करते हुए , महिलाओ ने चांचरी नृत्य और गायन द्वारा माँ  नंदा को प्रसन्न भी किया।


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