Halloween party ideas 2015

प्रेम की डोर, संस्कृति का सुंदर उत्सव-रक्षाबंधन

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी ने अमेरिका में मनाया रक्षाबंधन*

*पौधों को रक्षासूत्र बांधकर दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश

ऋषिकुमारों को राखी बांधकर स्वस्थ एवं समृद्ध जीवन की प्रार्थना

ऋषिकेश;



 रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति में प्रेम, विश्वास, जिम्मेदारी, कर्तव्य और संरक्षण का उत्सव है। श्रावणी पूर्णिमा के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन में रक्षाबंधन को आध्यात्मिक चेतना, सनातन संस्कारों और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ मनाया।


पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी ने अमेरिका में रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाते हुए इस पर्व के संदेश को परिवार और रिश्तों से आगे बढ़ाकर समाज, संस्कृति और प्रकृति से जोड़ने का आह्वान किया। इस अवसर पर पौधों को रक्षासूत्र बांधकर प्रकृति की रक्षा का संकल्प लिया गया। यह संदेश दिया गया कि जिस प्रकार राखी की डोर हमें अपने प्रियजनों की रक्षा और उनके प्रति अपने दायित्व का स्मरण कराती है, उसी प्रकार हमें पृथ्वी, जल, वायु, वन और वृक्षों के संरक्षण का भी संकल्प लेना होगा।


पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि रक्षाबंधन प्रेम और संरक्षण की संस्कृति का पर्व है। राखी की छोटी-सी डोर हमें एक बहुत बड़ा संदेश देती है, जिससे प्रेम हो, उसकी रक्षा का दायित्व भी हमारा है। आज आवश्यकता है कि हम इस रक्षा-सूत्र को परिवार की सीमाओं से आगे ले जाकर समाज और प्रकृति से जोड़ें। हमारी नदियाँ, वृक्ष, पर्वत, वन और धरती माता भी हमारी जिम्मेदारी हैं। यदि हम प्रकृति की रक्षा करेंगे, तो प्रकृति आने वाली पीढ़ियों की रक्षा करेगी।


उन्होंने कहा कि आज दुनिया अनेक पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में भारतीय संस्कृति का यह पर्व हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और संरक्षण का संस्कार देता है। एक वृक्ष को रक्षासूत्र बांधना केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि यह स्वयं से किया गया संकल्प है कि हम वृक्षों को बचाए, अधिक से अधिक पौधे लगाएं और प्रकृति के साथ अपने संबंधों को सुदृढ़ करें।


परमार्थ निकेतन में इस पावन अवसर पर ऋषिकुमारों का उपनयन संस्कार विधिवत सम्पन्न हुआ। वैदिक परंपरा के अनुसार उपनयन संस्कार जीवन में ज्ञान, अनुशासन, साधना, सेवा और सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ने का दिव्य संस्कार है। ऋषिकुमारों ने आचार्यों के सान्निध्य में वेदमंत्रों के उच्चारण के साथ विधिवत पूजा-अर्चना की और अपनी जीवन-यात्रा को ज्ञान एवं संस्कारों से प्रकाशित करने का संकल्प लिया।


वेदमंत्रों की पवित्र ध्वनि, यज्ञ की सुगंध और आध्यात्मिक वातावरण ने श्रावणी पूर्णिमा के इस अवसर को और भी दिव्य बना दिया। यह आयोजन एक धार्मिक अनुष्ठान के साथ भारत की प्राचीन ऋषि-परंपरा, ज्ञान-संस्कृति और संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम बना।


रक्षाबंधन का पर्व हमें यह संदेश देता है कि रिश्ते केवल अधिकारों से नहीं, बल्कि कर्तव्यों और समर्पण से मजबूत होते हैं। आज आवश्यकता है कि हम अपने परिवारों में प्रेम और संवाद बढ़ाएँ, समाज में करुणा और सहयोग की भावना विकसित करें तथा प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझें।


आइए, इस रक्षाबंधन हम एक ऐसी डोर बाँधें जो केवल भाई-बहन को नहीं, बल्कि मनुष्य को मनुष्य से, समाज को सेवा से और मानवता को प्रकृति से जोड़े। प्रेम से रिश्ते सँवारें, करुणा से समाज जोड़ें और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता से जीवन सँवारें।

 

raksha bandhn 2026


रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण के साथ ही पंचक का भी साया रहेगा, जिस वजह से राखी बांधने के मुहूर्त को लेकर काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। 

 28 अगस्त 2026 को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त कब से कब तक रहने वाला है।
आज रक्षाबंधन का सबसे शुभ मुहूर्त 05:57 बजे से 09:48 बजे तक रहेगा। इसके अलावा बहनें दोपहर और शाम में भी राखी बांध सकेंगी।रक्षाबंधन के दिन भाई को राखी बांधते समय 
"येयेन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। ,तेन त्वाम् अभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥" 
मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए।

इस मंत्र का अर्थ है - जिस रक्षा सूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी सूत्र मैं तुम्हें बांधती हूं, जो तुम्हारी रक्षा करेगा, हे रक्षा तुम स्थिर रहना, स्थिर रहना।
, श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाये जाने वाले  रिश्तों के पवित्र बंधन को एक सूत्र में पिरोने वाले रक्षाबन्धन का अपना एक विशेष महत्व है।भाई बहन के प्रेम और स्नेह को अपने मे समेटे इस त्योहार का धार्मिक,ऐतिहासिक,पौराणिक, औऱ सामाजिक  महत्व है,देवासुर संग्राम में इंद्र की पत्नी द्वारा रक्षा सूत्र बाँध्ने की कहानी हो या द्वापरयुग में द्रोपदी द्वारा भगवान कृष्ण को साड़ी का पल्लू बांधने की कहानी हो,अथवा राजा बलि की कहानी,या फिर महारानी कर्मावती द्वारा मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजकर सहायता की गुहार की कहानी हो ,सभी कहानियां हमे एक सूत्र में प्रेम स्नेह और एक दूसरे की सहायता करने और एक सूत्र में बंधे रहने की शिक्षा देते हैं।

 आपदा सुरक्षित उत्तराखण्ड के लिए 


*, आपदा न्यूनीकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को सराहा*

देहरादून:

world bank USDMA


विश्व बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चीफ नॉलेज ऑफिसर श्री पास्कल डोनोहोई ने कहा कि उत्तराखण्ड आपदाओं की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है और आपदा जोखिम न्यूनीकरण की दिशा में राज्य द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। आपदा सुरक्षित उत्तराखण्ड के निर्माण के लिए विश्व बैंक आगे भी अपना पूरा सहयोग जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए आपदा जोखिम को कम करने के लिए आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अध्ययन और मजबूत संस्थागत क्षमता का निरंतर विकास आवश्यक है।

विश्व बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चीफ नॉलेज ऑफिसर श्री पास्कल डोनोहोई के नेतृत्व में विश्व बैंक की हाई लेवल टीम ने बुधवार को उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) का भ्रमण किया। इस दौरान टीम ने आपदा प्रबंधन एवं आपदा जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में विश्व बैंक के सहयोग से संचालित विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा की तथा राज्य में किए जा रहे कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। 

भ्रमण के दौरान श्री पास्कल डोनोहोई ने विश्व बैंक पोषित विभिन्न योजनाओं एवं यूप्रीपेयर परियोजना के तहत किए जा रहे कार्यों तथा विशेष रूप से उत्तराखण्ड में भूस्खलन न्यूनीकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में अपनाई जा रही तकनीकों, जोखिम न्यूनीकरण के उपायों तथा इस दिशा में राज्य के सामने आ रही प्रमुख चुनौतियों के बारे में भी जानकारी ली। विश्व बैंक की टीम ने यूप्रीपेयर परियोजना के तहत अत्याधुनिक भूकंपरोधी एवं बेस आइसोलेशन तकनीक से निर्मित यूएसडीएमए भवन का भी मुआयना किया। टीम ने भवन में अपनाई गई आधुनिक तकनीकों और आपदा प्रतिरोधी निर्माण की सराहना की। टीम को भवन की संरचनात्मक विशेषताओं तथा भूकंप जैसी आपदाओं के दौरान इसकी सुरक्षा क्षमता के बारे में भी जानकारी दी गई।

इस अवसर पर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास ने उत्तराखण्ड में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए विश्व बैंक की ओर से मिल रहे सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्व बैंक की टीम को यूएसडीएमए द्वारा आपदा प्रबंधन, जोखिम न्यूनीकरण, क्षमता निर्माण और तकनीकी सुदृढ़ीकरण के क्षेत्र में संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्व बैंक के सहयोग से उत्तराखण्ड में 36 पुलों का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही आपदा शेल्टर का निर्माण, अत्याधुनिक उपकरणों की खरीद तथा स्लोप स्टैबिलाइजेशन से संबंधित कार्य भी किए जा रहे हैं। 

इन परियोजनाओं के माध्यम से राज्य के विभिन्न विभागों की आपदाओं से निपटने की क्षमता को मजबूत किया जा रहा है और आपदा के दौरान त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय एवं आपदा संवेदनशील राज्य में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को प्राथमिकता देते हुए सुरक्षित एवं मजबूत बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। विश्व बैंक की टीम ने यूएसडीएमए द्वारा आपदा जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में भी वित्तीय सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

इस अवसर पर विश्व बैंक से श्री जोहान्स जट्ट, रीजनल वाइस प्रेसिडेंट, श्री प्रकाश चंद्र, एसीईओ (प्रशासन), श्री राज कुमार नेगी, एसीईओ (ऑपरेशंस), श्री दिनेश चंद्र पुनेठा, जेसीईओ, श्री डी. दयानंद, चीफ इंजीनियर, पीआईयू-पीडब्ल्यूडी, सुश्री जोहाना मारिया ग्राडी, सुश्री सौम्या कपूर मेहता, सीनियर इकोनॉमिस्ट तथा सुश्री शिल्पा बनर्जी, एक्सटर्नल अफेयर्स ऑफिसर, श्री एस.के. बिरला, एपीडी (टेक्निकल), यू-प्रिपेयर, डॉ. शांतनु सरकार, निदेशक, यूएलएमएमसी, श्री संजय सिन्हा, सीएमई, पीआईयू-पीडब्ल्यूडी, डॉ. मोहित पूनिया, डीपीएम,पीआईयू-यूएसडीएमए, डॉ. पी.डी. माथुर, सीनियर डीआरएम एक्सपर्ट, पीआईयू-यूएसडीएमए, डॉ. पूजा राणा, डाॅ. पूजा कसारिया आदि उपस्थित रहे।

 बाला गौरिया’ फिल्म उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और लोक देवताओं की परंपरा को देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी: मुख्यमंत्री* 


 *मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में फिल्म 

Ball gauraya teaser poster CM Dhami


 *उत्तराखंड को फिल्म निर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए राज्य सरकार निरंतर कर रही है प्रयास* 


 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड की लोक संस्कृति एवं लोक आख्यानों पर आधारित बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बाला गौरिया’ के टीजर एवं पोस्टर का लोकार्पण किया। ‘हिमाद्रि प्रोडक्शंस’ के बैनर तले निर्मित की जा रही यह फिल्म उत्तराखंड के लोक में न्याय देवता के रूप में प्रतिष्ठित गोलज्यू के बाल जीवन पर आधारित है। फिल्म का निर्देशन श्री नितिन तिवारी तथा निर्माण श्री मनोज चंदोला द्वारा किया जा रहा है। फिल्म अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में रिलीज होने की संभावना है।



मुख्यमंत्री ने फिल्म के टीजर एवं पोस्टर के लोकार्पण पर पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, लोक परंपराएं, लोकगाथाएं और लोक देवताओं की समृद्ध विरासत हमारी विशिष्ट पहचान हैं। ‘बाला गौरिया’ जैसी फिल्में हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने के साथ ही देश-दुनिया के सामने उत्तराखंड की लोक संस्कृति को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का कार्य करेंगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार राज्य में फिल्म निर्माण और फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध लोक संस्कृति और विविध भौगोलिक परिस्थितियां फिल्म निर्माण के लिए उत्तराखंड को विशिष्ट बनाती हैं। सरकार का प्रयास है कि देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं को उत्तराखंड में शूटिंग के लिए बेहतर वातावरण, आवश्यक सुविधाएं और अनुकूल व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएं। उत्तराखंड पर्यटन नीति में भी फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने, फिल्म शूटिंग के लिए प्रोत्साहन एवं तेज अनुमति व्यवस्था विकसित करने तथा विभिन्न स्थानों पर फिल्म सिटी विकसित करने की दिशा में प्रावधान किए गए हैं।


उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को फिल्म शूटिंग के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन बनाने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को फिल्म निर्माण से जुड़े रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इससे प्रदेश की आर्थिकी को गति मिलने के साथ ही उत्तराखंड की कला, संस्कृति, बोली-भाषा, लोक परंपराओं और पर्यटन स्थलों को भी देश-दुनिया में पहचान मिलेगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के लोक देवताओं और लोक आख्यानों में हमारी सदियों पुरानी सांस्कृतिक चेतना, परंपराएं और जीवन मूल्य समाहित हैं। इनका संरक्षण और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने फिल्म निर्माताओं से उत्तराखंड की अन्य लोकगाथाओं, लोक देवताओं और सांस्कृतिक परंपराओं पर भी फिल्म निर्माण के लिए आगे आने का आह्वान किया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की लोक संस्कृति और स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए फिल्म निर्माताओं को हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि ‘बाला गौरिया’ जैसी फिल्मों के माध्यम से उत्तराखंड की लोक थातियों को व्यापक मंच मिलने के साथ ही प्रदेश के पर्यटन को भी नई पहचान मिलेगी।




इस अवसर पर फिल्म के निर्माता श्री मनोज चंदोला सहित फिल्म से जुड़े अन्य कलाकार एवं टीम के सदस्य उपस्थित रहे।

 *सूचना*



देहरादून। नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ से हुई जन-धन की क्षति को देखते हुए उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) ने उत्तराखण्ड के नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।


यदि कोई उत्तराखण्ड का नागरिक नेपाल के प्रभावित क्षेत्र में फंसा हुआ है अथवा कोई किसी व्यक्ति के संबंध में कोई जानकारी साझा करना चाहता है, तो राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, देहरादून के इन हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है।


राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, देहरादून के हेल्पलाइन नंबर:

0135-2710334, 2710335 2664314, 2664315, 2664316 8218867005


इसके अलावा टोल फ्री नंबर 1070 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की*



 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सहारनपुर चौक, देहरादून में टपकेश्वर महादेव की भव्य शोभायात्रा में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने टपकेश्वर महादेव मंदिर के महंत श्री कृष्णा गिरी महाराज , महंत दिगम्बर भरत गिरी महाराज  एवं टपकेश्वर सेवा दल के अध्यक्ष मनोज कुमार गुप्ता के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर शोभायात्रा का शुभारंभ किया।


मुख्यमंत्री ने भगवान टपकेश्वर महादेव से प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराएं हमारी अमूल्य धरोहर हैं। इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में आस्था, एकता और आपसी सद्भाव को सुदृढ़ करने के साथ ही नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति एवं परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं।


मुख्यमंत्री ने शोभायात्रा के आयोजन से जुड़े सभी संत-महात्माओं, आयोजन समिति के सदस्यों एवं श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान टपकेश्वर महादेव की कृपा समस्त प्रदेशवासियों पर बनी रहे और उत्तराखण्ड निरंतर प्रगति एवं समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ता रहे।

शोभायात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान टपकेश्वर महादेव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

 भाई ने अपनी दो सगी बहनों को गोलियों से भून दिया

रुड़की :


sister murdered by brother


    रक्षाबंधन से ठीक पहले रुड़की में भाई-बहन के रिश्ते को तार-तार कर देने वाली घटना सामने आई है। बहनें जहां भाई की कलाई पर राखी बांधने की तैयारी कर रही थीं, वहीं भाई ने ही दोनों बहनों को गोलियों से भून दिया।  त्योहार की  तैयारी कर रहे परिवार में इस वारदात के बाद मातम पसर गया। वहीं, पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।


घटनाक्रम के अनुसार, मंगलवार शाम आरोपी भाई पहले प्रीत विहार में रह रही संगीता उर्फ शकुंतला (50) के यहां पहुंचा। करीब 7:20 बजे वह घर से कुछ दूरी पर सेक्टर रोड पर ई-रिक्शा से जा रही थी। इसी दौरान उसके भाई ने उस पर गोली चला दी।


गोली पेट में लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गई। इसके बाद आरोपी करीब दो किलोमीटर दूर करीब 20 मिनट के अंतराल पर सुभाषनगर पहुंचा, जहां उसकी दूसरी बहन पुष्पा (42) रहती थी। आरोपी के पहुंचने पर जैसे ही पुष्पा ने दरवाजा खोला, उसने उस पर भी गोली चला दी। गोली की आवाज सुनकर पुष्पा के पति संदीप बाहर आए तो आरोपी ने उन्हें भी कंधे में गोली मारकर घायल कर दिया और मौके से फरार हो गया।


सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों बहनों को सिविल अस्पताल भिजवाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घायल संदीप का उपचार चल रहा है। घटना की जानकारी मिलते ही गंगनहर कोतवाली प्रभारी मणिभूषण श्रीवास्तव, सिविल लाइंस कोतवाली प्रभारी प्रदीप बिष्ट पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। सीओ रुड़की ओसीन जोशी और एसपी देहात शेखर चंद्र सुयाल ने भी घटनास्थलों का निरीक्षण किया।

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