Halloween party ideas 2015


- उत्तराखंड के 15 पत्रकारों का समूह उड़ीसा में क्रियान्वित भारत सरकार की प्रमुख योजनाओं का करेंगे अवलोकन

PIB  uttarakhand Jounalist tour odisha


- उड़ीसा में सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ फिशरीज एंड एक्वाकल्चर भुवनेश्वर, सेंट्रल राइस रिसर्च इंस्टिट्यूट, कट्टक, पारादीप पोर्ट, कोणार्क हेरिटेज साइट का भ्रमण करेंगे पत्रकार


- पत्रकारों का दल नंदनकानन प्राणी उद्यान, जगन्नाथ पुरी, रघुबरपुर हेरिटेज गांव का भ्रमण भी करेंगे। रघुबरपुर हेरिटेज गांव जो अपनी पारंपरिक कला और हस्तशिल्प के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है



रविवार को प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो देहरादून, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित उड़ीसा प्रेस टूर में उत्तराखंड के पत्रकारों का 15 सदस्यीय दल देहरादून से उड़ीसा पहुंचा।


केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण परियोजनाओं एवं विकास कार्यों को नजदीक से दिखाने के उद्देश्य से पीआईबी देहरादून द्वारा यह प्रेस टूर का आयोजन किया है। इस प्रेस टूर में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल मीडिया, स्वतंत्र पत्रकार समेत 15 पत्रकारों को उड़ीसा ले जाया गया है, जहां वे केंद्र सरकार के प्रमुख उपलब्धियों का प्रत्यक्ष अवलोकन करेंगे। यह प्रेस टूर PIB की उस परंपरा का हिस्सा है जिसमें सरकारी नीतियों, कार्यक्रमों एवं विकास गतिविधियों को मीडिया के माध्यम से जनता तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए जाते हैं।


PIB चयनित परियोजना स्थलों पर ऐसे प्रेस टूर आयोजित करता है ताकि पत्रकार देश में चल रही विकास गतिविधियों का सीधा लेखा-जोखा ले सकें। उड़ीसा में पत्रकार केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण कार्यों जैसे औद्योगिक विकास, विकास परियोजनाओं, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक कल्याण योजनाओं का दौरा करेंगे।


प्रेस टूर के कंडक्टिंग ऑफिसर श्री संजीव सुंद्रियाल, सहायक निदेशक, पीआईबी देहरादून ने कहा- "यह प्रेस टूर उत्तराखंड के पत्रकारों को केंद्र सरकार की विकास परियोजनाओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इससे राज्य के पत्रकारों को उड़ीसा में केंद्र सरकार की उपलब्धियों की गहन, सटीक और स्पष्ट जानकारी मिलेगी।"


श्री सुंद्रियाल ने बताया कि इस प्रेस टूर का उद्देश्य है, पत्रकारों को विभिन्न राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं, संस्थानों एवं गतिविधियों का ज़मीनी स्तर पर प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हो सके।


प्रेस टूर के शुरुआत में पत्रकारों का दल उड़ीसा के राज्यपाल से मुलाक़ात करेगा। अगले चरण में दल को सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ फिशरीज एंड एक्वाकल्चर भुवनेश्वर, सेंट्रल राइस रिसर्च इंस्टिट्यूट, कट्टक, पारादीप पोर्ट, कोणार्क हेरिटेज साइट का भ्रमण कराया जाएगा। 


इस दौरान पत्रकारों का दल नंदनकानन प्राणी उद्यान, जगन्नाथ पुरी, रघुबरपुर हेरिटेज गांव का भ्रमण भी करेंगा। रघुबरपुर हेरिटेज गांव जो अपनी पारंपरिक कला और हस्तशिल्प के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। इस हेरिटेज विलेज में लगभग हर घर में कलाकार रहता है और लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपनी कला को आगे बढ़ा रहे हैं। 


इस दौरान उत्तराखंड के पत्रकारों को उड़ीसा में चल रही केंद्र सरकार की विकास परियोजनाओं की प्रगति एवं भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी। यह आयोजन मीडिया को सरकारी प्रयासों की सटीक, स्पष्ट एवं तथ्यात्मक जानकारी प्रदान करने में सहायक होगा, जिससे जनता तक सही सूचना पहुंच सकेगी।

 चार साल बेमिसाल: सशक्त नेतृत्व में बदला उत्तराखण्ड का स्वरूप, ऐतिहासिक फैसलों से विकास को नई दिशा*

four year of CM Dhami




मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार ने अपने चार वर्ष के दौरान कई ऐसे ऐतिहासिक और सशक्त फैसले लिए, जिनसे राज्य की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई है।


सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बना, जहां समान नागरिक संहिता लागू की गई। इसके साथ ही राज्य में सशक्त भू-कानून, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून और दंगारोधी कानून लागू कर कानून-व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।


सरकार ने युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया। इसका परिणाम यह रहा कि बीते चार वर्षों में 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिलीं, जिससे पारदर्शिता और भरोसा दोनों बढ़े हैं।


शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव करते हुए उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया, जिसके अंतर्गत मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया गया है। अब यही प्राधिकरण पाठ्यक्रम और शिक्षा व्यवस्था को नियंत्रित करेगा।


वहीं, अवैध अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए राज्य में 12 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है, जो प्रशासनिक दृढ़ता का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।


*महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष फोकस*


धामी सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए कई अहम फैसले लिए हैं। सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया, वहीं सहकारी प्रबंध समितियों में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है।


महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना शुरू की गई।


प्रदेश में अब तक 2.54 लाख से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का संकेत है। स्वयं सहायता समूहों को ₹5 लाख तक का बिना ब्याज ऋण देकर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।


इसके अलावा, मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना की शुरुआत कर महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है।


*समग्र विकास की ओर बढ़ता उत्तराखण्ड*


चार वर्षों में लिए गए इन फैसलों और योजनाओं ने उत्तराखण्ड को विकास की नई दिशा दी है। मजबूत कानून व्यवस्था, पारदर्शी भर्ती प्रणाली और महिला सशक्तिकरण जैसे कदमों ने राज्य को एक मॉडल स्टेट के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ाया है।

*सम्मान और सेवा का संगम: धामी सरकार ने आंदोलनकारियों, सैनिकों और आमजन को दिया सशक्त सहारा*


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार ने अपने चार साल के कार्यकाल में राज्य आंदोलनकारियों, सैनिकों और आमजन के सम्मान व कल्याण को प्राथमिकता देते हुए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं।


*आंदोलनकारियों और सैनिकों को सम्मान*

राज्य आंदोलनकारियों के योगदान को सम्मान देते हुए सरकारी नौकरियों में उन्हें 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया गया है। इसके साथ ही उनके आश्रितों की पेंशन ₹3000 से बढ़ाकर ₹5500 प्रतिमाह कर दी गई है।


वहीं, राज्य आंदोलन के दौरान 7 दिन जेल गए अथवा घायल हुए आंदोलनकारियों की पेंशन भी ₹6000 से बढ़ाकर ₹7000 प्रतिमाह कर दी गई है, जो उनके संघर्ष के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।


सैनिकों के सम्मान में भी बड़े फैसले लिए गए हैं। शहीद सैनिकों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख कर दी गई है। वहीं, परमवीर चक्र विजेताओं के लिए यह राशि ₹50 लाख से बढ़ाकर ₹1.5 करोड़ कर दी गई है।


इसके अलावा, राज्य में अग्निवीर योजना के अंतर्गत सेवा देने वाले युवाओं को भी सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का निर्णय लिया गया है।


*‘सेवा का संकल्प’ से जन-जन तक पहुंची सरकार*


धामी सरकार की “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” पहल ने जनसेवा के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस अभियान के तहत प्रदेशभर में 686 शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 5.37 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया।


इन शिविरों के माध्यम से 2.96 लाख से अधिक नागरिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिला। वहीं, प्राप्त 51,317 शिकायतों में से 33,990 का मौके पर ही समाधान किया गया, जो प्रशासन की तत्परता को दर्शाता है।


डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देते हुए अपुणि सरकार पोर्टल के माध्यम से करीब 950 सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है, जिससे आम नागरिकों को घर बैठे सुविधाएं मिल रही हैं।


*समाज के हर वर्ग का ध्यान*


सरकार ने वृद्धजनों के लिए वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाकर ₹1500 कर दी है, जिससे अब बुजुर्ग दंपत्ति दोनों को इसका लाभ मिल रहा है। इसके अलावा, वृद्ध एवं आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों और लेखकों की मासिक पेंशन ₹3000 से बढ़ाकर ₹6000 करने का निर्णय लिया गया है।


*समावेशी विकास की दिशा में मजबूत कदम*


चार वर्षों में लिए गए इन फैसलों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार ने न केवल विकास को गति दी है, बल्कि समाज के हर वर्ग—आंदोलनकारी, सैनिक, बुजुर्ग, महिलाएं और आम नागरिक—को साथ लेकर चलने का प्रयास किया है।


सरकार का लक्ष्य “सेवा, सम्मान और सुशासन” के मूल मंत्र के साथ उत्तराखण्ड को एक सशक्त और संवेदनशील राज्य के रूप में स्थापित करना है।*

विकास भी, विरासत भी: निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और उपलब्धियों से उत्तराखण्ड ने रचा नया इतिहास*


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड ने पिछले चार वर्षों में विकास और विरासत का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया है, जिसने राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की गई है।

*निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ी छलांग*

राज्य में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में ₹3.56 लाख करोड़ के एमओयू साइन हुए, जिनमें से ₹1 लाख करोड़ से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है।


नैनीताल जिले की जमरानी बांध परियोजना और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का कार्य तेज गति से चल रहा है। वहीं, दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड भी जल्द शुरू होने वाली है।


स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए किच्छा (ऊधमसिंह नगर) में एम्स सैटलाइट सेंटर का निर्माण कार्य प्रगति पर है।


राज्य में उड़ान योजना के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में हेली सेवाओं का संचालन शुरू किया गया है, जिससे कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार आया है।


*ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों में विकास*


वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत चयनित गांवों में ₹270 करोड़ की लागत से करीब 200 विकास योजनाओं पर कार्य जारी है। साथ ही, 13 जिलों में 13 आदर्श संस्कृत ग्रामों का शुभारंभ किया गया है।

ऊधमसिंह नगर के खुरपिया फार्म में स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप की स्वीकृति और टनकपुर-बागेश्वर रेललाइन को राष्ट्रीय परियोजना घोषित कराने के प्रयास, राज्य के औद्योगिक विकास को नई दिशा दे रहे हैं।

*शिक्षा और संस्कृति में नवाचार*

उत्तराखण्ड राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना। वहीं, दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज की स्थापना की गई है।

राज्य के स्कूलों में श्रीमद् भगवद् गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय भी सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

*पर्यटन, ऊर्जा और खेलों में रिकॉर्ड उपलब्धियां*

राज्य में पर्यटन ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। वर्ष 2025 में 6.03 करोड़ से अधिक पर्यटक उत्तराखण्ड पहुंचे, जबकि चार धाम यात्रा में लगभग 48 लाख श्रद्धालु शामिल हुए। कांवड़ यात्रा में 4.15 करोड़ से अधिक शिवभक्तों की भागीदारी रही।

नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य की सौर ऊर्जा क्षमता 1 गीगावाट से अधिक पहुंच गई है। UPCL ने 42,000 से अधिक सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित कर नया कीर्तिमान बनाया है।

खेलों के क्षेत्र में भी उत्तराखण्ड ने पहली बार राष्ट्रीय खेल का आयोजन किया, जिसमें राज्य के खिलाड़ियों ने 103 पदक जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया।

*सम्मान और उपलब्धियों की झड़ी*


उत्तराखण्ड ने विभिन्न राष्ट्रीय सूचकांकों में शानदार प्रदर्शन किया है। नीति आयोग के निर्यात तैयारी सूचकांक 2024 में राज्य ने छोटे राज्यों की श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं, एसडीजी इंडेक्स 2023-24 में भी उत्तराखण्ड देश में शीर्ष स्थान पर रहा।


ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में “Achievers” और स्टार्टअप रैंकिंग में “Leaders” श्रेणी प्राप्त करना राज्य की कारोबारी अनुकूल नीतियों को दर्शाता है।

विंग्स इंडिया 2026 में उत्तराखण्ड को “बेस्ट स्टेट फॉर प्रमोशन ऑफ एविएशन इकोसिस्टम” पुरस्कार से सम्मानित किया गया। खनन सुधारों में राज्य ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया, जिसके लिए ₹200 करोड़ की प्रोत्साहन राशि मिली।


इसके अलावा, जखोल, सूपी, हर्षिल और गुंजी गांवों को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम के रूप में पुरस्कृत किया गया, जो ग्रामीण पर्यटन के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।


चार वर्षों में “विकास भी, विरासत भी” के मंत्र के साथ उत्तराखण्ड ने निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, पर्यटन और ऊर्जा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। यह दौर न केवल विकास का है, बल्कि राज्य के लिए एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

: *पर्यटन में बढ़ते कदम: आस्था, रोमांच और इंफ्रास्ट्रक्चर से उत्तराखण्ड बना फेवरेट डेस्टिनेशन*


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड पर्यटन के क्षेत्र में लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है। आस्था, रोमांच और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के संगम से राज्य को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत किया जा रहा है।


*रोपवे परियोजनाओं से आसान होगी यात्रा*


प्रदेश में तीर्थ यात्राओं को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए बड़े स्तर पर रोपवे परियोजनाओं की शुरुआत की गई है। केदारनाथ धाम के लिए सोनप्रयाग से 12.9 किमी लंबा रोपवे ₹4,081 करोड़ की लागत से बनाया जाएगा। वहीं, हेमकुण्ड साहिब के लिए गोविंदघाट से 12.4 किमी रोपवे ₹2,730 करोड़ की लागत से तैयार किया जाएगा।


इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद श्रद्धालुओं की यात्रा समय और कठिनाई दोनों में बड़ी कमी आएगी।


*शीतकालीन यात्रा और धार्मिक सर्किट पर फोकस*


उत्तराखण्ड में पहली बार शीतकालीन यात्रा की शुरुआत की गई, जिससे पर्यटन को वर्षभर बढ़ावा मिल रहा है। इस पहल को प्रोत्साहित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं मुखवा पहुंचे, जो मां गंगा का शीतकालीन निवास स्थल है।


कुमाऊं क्षेत्र में मानसखण्ड मंदिर माला मिशन के तहत 48 मंदिरों और गुरुद्वारों को एक धार्मिक सर्किट के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी।


*धामों का हो रहा कायाकल्प*


केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत तेजी से कार्य जारी है। बदरीनाथ धाम को स्मार्ट आध्यात्मिक पहाड़ी कस्बे के रूप में विकसित करने के लिए ₹255 करोड़ की योजनाएं संचालित हैं।


इसके साथ ही हरिपुर कालसी में यमुना तीर्थ स्थल का निर्माण और महासू मंदिर, हनोल के मास्टर प्लान को मंजूरी देकर नए धार्मिक स्थलों को भी विकसित किया जा रहा है।


*एडवेंचर और स्पोर्ट्स टूरिज्म को बढ़ावा*


उत्तराखण्ड को एडवेंचर टूरिज्म हब बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। राज्य में 83 प्रमुख हिमालयी चोटियों को पर्वतारोहण के लिए खोल दिया गया है, जिससे देश-विदेश के पर्वतारोहियों को आकर्षित किया जा रहा है।


आदि कैलाश में राज्य की पहली हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन का आयोजन किया गया, जिसमें 22 राज्यों से 700 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। यह आयोजन एडवेंचर टूरिज्म को नई पहचान दे रहा है।


राज्य ट्रेकिंग, रिवर राफ्टिंग, स्टार गैजिंग का प्रमुख आकर्षण बन कर उभरा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वेड इन उत्तराखंड की अपील के बाद वेडिंग डेस्टिनेशन के तौर पर भी पहचान बन रही है। 


चार वर्षों में उत्तराखण्ड ने पर्यटन के क्षेत्र में “आस्था के साथ आधुनिकता” का मॉडल प्रस्तुत किया है। रोपवे, धार्मिक सर्किट, धामों का पुनर्विकास और एडवेंचर गतिविधियों के विस्तार से राज्य पर्यटन में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।


*धामी सरकार के चार साल: विकास, विश्वास और नई दिशा का उत्तराखण्ड मॉडल*


उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में बीते चार वर्षों ने राज्य की विकास यात्रा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। यह दौर केवल योजनाओं की घोषणा का नहीं, बल्कि जमीनी क्रियान्वयन और परिणामों का रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत @2047” के विज़न को साकार करने में उत्तराखण्ड ने खुद को एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित किया है।


सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बना जिसने समान नागरिक संहिता लागू की। इसके साथ ही सशक्त भू-कानून, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून और नकल विरोधी कानून जैसे ऐतिहासिक निर्णयों ने शासन व्यवस्था को पारदर्शी और मजबूत बनाया। नकल विरोधी कानून के बाद भर्ती प्रक्रियाओं में विश्वास बढ़ा और चार वर्षों में 32 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिलना इसका प्रमाण है।


आर्थिक मोर्चे पर भी राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2024-25 में राज्य का जीएसडीपी ₹3.81 लाख करोड़ तक पहुँच गया, जो 2021-22 की तुलना में डेढ़ गुना वृद्धि दर्शाता है। प्रति व्यक्ति आय बढ़कर ₹2.73 लाख हो गई है, जबकि मल्टी डायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स घटकर 6.92 प्रतिशत पर आ गया है। राज्य का ग्रोथ रेट 7.23 प्रतिशत रहा, जो मजबूत आर्थिक आधार को दर्शाता है।


औद्योगिक विकास के क्षेत्र में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान ₹3.56 लाख करोड़ के एमओयू साइन हुए, जिनमें से ₹1 लाख करोड़ से अधिक का निवेश जमीन पर उतर चुका है। स्टार्टअप इकोसिस्टम में उत्तराखण्ड को “लीडर” का दर्जा मिला है, वहीं एमएसएमई की संख्या बढ़कर लगभग 80 हजार तक पहुँच गई है। इससे लाखों लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं।


स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में अटल आयुष्मान योजना के तहत 61 लाख कार्ड बनाए गए और 17 लाख से अधिक मरीजों को ₹3400 करोड़ से अधिक का मुफ्त इलाज मिला। महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण, सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत भागीदारी और “लखपति दीदी” योजना के माध्यम से 2.5 लाख से अधिक महिलाओं का सशक्तिकरण, राज्य की सामाजिक समावेशन नीति को दर्शाता है।


पर्यटन और धार्मिक आस्था के क्षेत्र में भी उत्तराखण्ड ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। वर्ष 2025 में 6 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ, जबकि चारधाम यात्रा और कांवड़ यात्रा में रिकॉर्ड श्रद्धालु पहुंचे। केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत विकास कार्य जारी हैं। साथ ही, मानसखंड मंदिर माला मिशन और शीतकालीन यात्रा की शुरुआत ने पर्यटन को वर्षभर सक्रिय बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।


इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में भी राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड, रोपवे परियोजनाएं और हेली सेवाओं का विस्तार, कनेक्टिविटी को नई दिशा दे रहे हैं। राज्य में हेलीपोर्ट और हेलीपैड की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।


कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी नवाचार देखने को मिला है। मिलेट्स नीति, कीवी नीति और ड्रैगन फ्रूट योजना के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। “हाउस ऑफ हिमालयाज” ब्रांड के जरिए स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल रहा है।


धामी सरकार के चार वर्ष उत्तराखण्ड के लिए परिवर्तनकारी रहे हैं। कानून व्यवस्था से लेकर अर्थव्यवस्था, पर्यटन, सामाजिक कल्याण और बुनियादी ढांचे तक हर क्षेत्र में व्यापक सुधार हुए हैं। केंद्र सरकार के सहयोग और मजबूत नेतृत्व के साथ उत्तराखण्ड अब विकसित भारत के निर्माण में एक सशक्त भागीदार बनने की ओर तेजी से अग्रसर है।


*हमारा संकल्प केवल विकास नहीं, बल्कि समग्र और संतुलित विकास है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड को श्रेष्ठ राज्य बनाने की दिशा में हम निरंतर कार्य कर रहे हैं। विकसित भारत @2047 के लक्ष्य में उत्तराखण्ड अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।*


प्रदेश की देवतुल्य जनता का हार्दिक आभार जिनका अटूट विश्वास हमें अथक परिश्रम करने की प्रेरणा देता है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य ने विकास, सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ हासिल की हैं। राज्य की विकास यात्रा में केंद्र सरकार का निरंतर सहयोग मिला है।केंद्र और राज्य के वरिष्ठ नेताओं के अनुभव, मार्गदर्शन और संगठन के कार्यकर्ताओं की मेहनत ने विकास यात्रा को गति दी है।*

हमारी सरकार ने *जन कल्याण सर्वोपरि* की भावना के साथ कार्य करते हुए हर वर्ग के कल्याण को प्राथमिकता दी है और आगे भी प्रदेश के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध रहेगी। जनता का यही स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद भविष्य में भी मिलता रहेगा।विकसित भारत @2047 के लक्ष्य में उत्तराखंड अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

हमारी सरकार के बीते चार साल, सेवा, सुशासन और जनकल्याण को समर्पित रहे हैं, इसी क्रम में मंत्रिमंडल में नए शामिल सदस्यों सहित मंत्रिमंडल के सभी सहयोगियों के मध्य कार्य आवंटन भी कर दिया गया है। मंत्रिमंडल के सभी सदस्य अनुभवी हैं और जनसेवा से गहराई से जुड़े हैं।जनसेवा को सर्वोपरी रखते हुए, उत्तराखंड को विकसित भारत का अग्रणी एवं श्रेष्ठ राज्य बनाने में पूरी सरकार अपना योगदान प्राणोप्रण से देगी।हम सभी को उत्तराखंड की सवा करोड़ देवतुल्य जनता की सेवा करने का मौका मिला है, और यह सेवा भाव ही हमें अपनी देव तुल्य जनता के सपनों एवं आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए सदैव प्रेरित करता है।

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री --

 सोनपाल राणा, राष्ट्रीय महामंत्री अन्तर्राष्ट्रीय भगवा सनातन रक्षक सेना ने मथुरा में चंद्रशेखर ‘फरसा वाले बाबा’ की निर्मम  हत्या पर कड़ा विरोध, कठोर कार्रवाई की मांग

 मथुरा/लखनऊ :

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 मथुरा में चंद्रशेखर ‘फरसा वाले बाबा’ की निर्मम  हत्या की घटना को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों में आक्रोश व्याप्त है। सोनपाल राणा, राष्ट्रीय महामंत्री अन्तर्राष्ट्रीय  भगवा सनातन रक्षक सेना–  ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि समाज में भय और असुरक्षा का वातावरण भी उत्पन्न करती है।

राणा जी ने कहा कि गौ तस्करी और उससे जुड़े आपराधिक तत्वों के खिलाफ अब आधे-अधूरे कदम पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन एवं  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में त्वरित और कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार के जघन्य अपराध करने का साहस न कर सके।

प्रेस विज्ञप्ति में प्रमुख मांगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मथुरा हत्याकांड की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कराई जाए और सभी दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी हो। इसके साथ ही गौ तस्करी से जुड़े संगठित गिरोहों के विरुद्ध व्यापक स्तर पर अभियान चलाकर उनका पूर्ण उन्मूलन किया जाए। उन्होंने पूरे देश में गौ तस्करी के विरुद्ध और अधिक कठोर एवं प्रभावी कानून बनाने की भी आवश्यकता जताई।

राणा ने यह भी मांग की कि गौ सेवकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंध किए जाएं। उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्य में लगे लोगों को भयमुक्त वातावरण मिलना चाहिए, ताकि वे बिना किसी दबाव के समाजहित में कार्य कर सकें।

अंत में उन्होंने कहा कि यह समय है जब सरकार को दृढ़ संकल्प के साथ अपराधियों के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए। कानून का भय स्थापित होना आवश्यक है, ताकि समाज में शांति और सुरक्षा का वातावरण बना रहे तथा निर्दोष नागरिकों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

 

मेष

अ, आ, चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो

धर्म-कर्म में रुचि रहेगी। कोर्ट व कचहरी के काम मनोनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। कुबुद्धि हावी रहेगी। चिंता तथा तनाव रहेंगे। मित्रों से संबंध सुधरेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। विरोधी सक्रिय रहेंगे। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रह सकता है।



Rashifal today 22 march 2026

वृषभ

ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो

वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। पुराना रोग परेशानी का कारण रह सकता है। दूसरों के कार्य में दखल न दें। बड़ों की सलाह मानें। लाभ होगा। अपेक्षित कार्यों में विलंब होगा। मानसिक बेचैनी रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। धैर्य रखें।


मिथुन

का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह

प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। बेवजह कहासुनी हो सकती है। कानूनी अड़चन दूर होगी। व्यापार में वृद्धि होगी। नौकरी में सहकर्मियों का साथ मिलेगा। निवेश शुभ रहेगा। प्रसन्नता रहेगी। लेन-देन में जल्दबाजी न करें।


कर्क

ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो

किसी अपने के व्यवहार से स्वाभिमान को ठेस पहुंच सकती है। शारीरिक कष्ट संभव है। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। शत्रु पस्त होंगे। वाणी पर नियंत्रण रखें। स्थायी संपत्ति के कार्य बड़ा लाभ दे सकते हैं। आर्थिक उन्नति के प्रयास सफल होंगे। निवेश शुभ रहेगा। व्यापार में वृद्धि होगी।


सिंह

मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे

घर के सदस्यों के स्वास्थ्य व अध्ययन संबंधी चिंता रहेगी। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। किसी आनंदोत्सव में भाग लेने का मौका मिलेगा। यात्रा मनोरंजक रहेगी। दुष्टजनों से दूरी बनाए रखें। निवेश शुभ रहेगा। व्यापार में वृद्धि होगी। नौकरी में उच्चाधिकारी सहयोग करेंगे।


कन्या

ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

शत्रु हानि पहुंचा सकते हैं। दु:खद समाचार मिल सकता है। व्यर्थ भागदौड़ रहेगी। लाभ के अवसर हाथ से निकलेंगे। बेवजह कहासुनी हो सकती है। पुराना रोग उभर सकता है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। व्यापार ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। प्रयास अधिक करना पड़ेंगे। धैर्य रखें।


तुला

रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते

शत्रु पस्त होंगे। सुख के साधन जुटेंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। पराक्रम बढ़ेगा। लंब समय से रुके कार्य सहज रूप से पूर्ण होंगे। कार्य की प्रशंसा होगी। शेयर मार्केट में सफलता मिलेगी। व्यापार-व्यवसाय में वृद्धि होगी। नौकरी में अधिकारी प्रसन्न रहेंगे। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। शुभ समय।


वृश्चिक

तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

घर में अतिथियों का आगमन होगा। व्यय होगा। दूर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। आय बनी रहेगी। अज्ञात भय रहेगा। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। घर-बाहर प्रसन्नता का माहौल रहेगा।


धनु

ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे

आंखों का ख्याल रखें। अज्ञात भय सताएगा। वाणी पर नियंत्रण रखें। कानूनी अड़चन आ सकती है। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। लॉटरी व सट्टे से दूर रहें। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। नौकरी में प्रमोशन प्राप्त हो सकता है। प्रसन्नता रहेगी।


मकर

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। किसी अप‍रिचित पर अतिविश्वास न करें। विवाद से क्लेश होगा। दूसरों के उकसाने में न आएं। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। चिंता तथा तनाव रहेंगे। व्यवसाय की गति धीमी रहेगी। आय में निश्चितता रहेगी। कोई बड़ी समस्या आ सकती है। धैर्य रखें।


कुंभ

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा

शारीरिक कष्ट संभव है तथा तनाव रहेंगे। सुख के साधन प्राप्त होंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। लंबे समय से रुके कार्यों में गति आएगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। मित्रों का सहयोग मिलेगा। प्रसन्नता रहेगी। पार्टनरों का सहयोग मिलेगा।


मीन

दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची

चोट व रोग से परेशानी संभव है। आराम तथा मनोरंजन के साधन उपलब्ध होंगे। यश बढ़ेगा। व्यापार वृद्धि होगी। नई योजना बनेगी जिसका तत्काल लाभ नहीं मिलेगा। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। विरोधी सक्रिय रहेंगे। नौकरी में उच्चाधिकारी प्रसन्न रहेंगे। प्रमाद न करें।


 धामी बने ‘धुरंधर’, उत्तराखंड विकास की राह पर अग्रसर: राजनाथ सिंह*

*धामी सरकार के फैसले बने मिसाल, विकास को मिली रफ्तार*

CM Dhami defence minister rajnathbsigh


उत्तराखंड सरकार के “चार साल बेमिसाल” कार्यक्रम के तहत हल्द्वानी स्थित एमबी इंटर कॉलेज में आयोजित भव्य जनसभा में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रक्षा मंत्री का नंदा देवी मंदिर की प्रतिकृति एवं स्थानीय हस्तनिर्मित शॉल भेंट कर स्वागत किया।


रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में उत्तराखंड के शहीदों को नमन करते हुए कहा कि यह देवभूमि आस्था, अध्यात्म, ऋषि-मुनियों और तपस्वियों की भूमि रही है। यहां के लोग सौम्य, परिश्रमी और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में राज्य निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है और आज देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।


उन्होंने धामी सरकार की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ तेजी से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि “धामी न केवल धाकड़ हैं, बल्कि अब धुरंधर बन चुके हैं”, जो प्रदेश के विकास के लिए निरंतर प्रभावी निर्णय ले रहे हैं।


रक्षा मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर चुका है और यह यात्रा बलिदान, संघर्ष और विकास की कहानी रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में सड़क, रेल, हवाई कनेक्टिविटी, बिजली क्षमता विस्तार, पर्यटन, रोजगार और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में तेजी से कार्य हो रहा है।


उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। छोटा राज्य होने के बावजूद हर क्षेत्र में उत्तराखंड ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि राज्य की जीडीपी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और प्रति व्यक्ति आय में भी बड़ा इजाफा दर्ज किया गया है, जो विकास की गति को दर्शाता है।


रक्षा मंत्री ने धामी सरकार के महत्वपूर्ण निर्णयों—यूनिफॉर्म सिविल कोड, नकल विरोधी कानून, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और सीमांत गांवों के विकास—को मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने यूसीसी लागू कर सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है।


अवैध घुसपैठ और अतिक्रमण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि देवभूमि की पवित्रता और सुरक्षा बनाए रखना आवश्यक है। राज्य सरकार द्वारा हजारों अतिक्रमण हटाए गए हैं और अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सीमांत क्षेत्रों के विकास, वाइब्रेंट विलेज योजना और पलायन रोकने के लिए ठोस प्रयास कर रही हैं।


उन्होंने कहा कि “पहाड़ की जवानी और पानी” का उपयोग स्थानीय विकास के लिए होना चाहिए, जिससे युवाओं को रोजगार मिले और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों का विस्तृत उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है और आज वैश्विक स्तर पर सशक्त भूमिका निभा रहा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बीते चार वर्षों में निवेश, पर्यटन, बुनियादी ढांचे, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के माध्यम से बड़े निवेश समझौते हुए हैं, जबकि स्टार्टअप और उद्योगों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि महिलाओं के सशक्तिकरण, युवाओं को रोजगार, पारदर्शी भर्ती प्रणाली और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई जैसे कदमों से राज्य में सकारात्मक बदलाव आया है।


उन्होंने कहा कि नकल विरोधी कानून लागू कर युवाओं के भविष्य को सुरक्षित किया गया है और हजारों युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। साथ ही, समान नागरिक संहिता लागू कर सामाजिक समरसता की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होमस्टे, होटल और धार्मिक स्थलों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही, सीमांत क्षेत्रों में विकास कार्यों से रिवर्स पलायन को भी बढ़ावा मिला है।


कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया, जिसमें जमरानी बांध परियोजना, राष्ट्रीय राजमार्ग, ग्रामीण विकास और वन्यजीव संरक्षण से संबंधित योजनाओं की जानकारी दी गई।


इस अवसर पर केबिनेट मंत्री रेखा आर्य, रामसिंह कैडा,प्रदीप बत्रा,मदन कौशिक,गणेश जोशी, खजान दास, केन्द्रीय मंत्री अजय टम्टा, सांसद अजय भट्ट, राज्यसभा सांसद व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भटट, विधायक बंशीधर भगत, दिवान सिंह बिष्ट,सरिता आर्या, डा0 मोहन सिंह बिष्ट, शिव अरोडा, सुरेश गड़िया सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में राज्य सरकार के चार वर्षों की उपलब्धियों और भविष्य की विकास योजनाओं की झलक प्रस्तुत की गई।


*मुख्यमंत्री ने कुम्भ मेला-2027 के कार्यो के साथ ही प्रदेश की विभिन्न विकास योजनाओं के लिए प्रदान की वित्तीय स्वीकृति*


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कुम्भ मेला-2027 के अन्तर्गत डिटेल्ड एस्टीमेट फॉर कन्सट्रक्शन ऑफ प्रपोज्ड कमान्ड एण्ड कंट्रोल सेंटर-2 बिल्डिग एट हरिद्वार कार्य की संस्तुत लागत ₹ 50.27 करोड की स्वीकृति प्रदान करते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रथम किश्त  में ₹  20.11 करोड स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है। 


मुख्यमंत्री ने जनपद उधम सिंह नगर के विधासभा क्षेत्र किच्छा में किच्छा कम्यूनिटी हॉल का निर्माण किये जाने हेतु ₹ 05 करोड़ स्वीकृत करते हुए प्रथम चरण में ₹ 50.00 लाख स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है। 


मुख्यमंत्री ने जनपद पिथौरागढ़ के विधासभा क्षेत्र पिथौरागढ़ में ग्राम चुल्कोट हरदौल मंदिर, महाकाली मंदिर माणीटुण्डी, देवी मंदिर मदकोट, रामलीला मंच मवानी का सौन्दर्यकरण व मेला स्थल का निर्माण किये जाने हेतु  ₹ 98.64 लाख स्वीकृत करते हुए प्रथम चरण में ₹ 59 लाख, ग्राम पंचायत दाखिम, क्वीटी, समकोट में आंतरिक सी०सी० मार्ग निर्माण किये जाने हेतु ₹ 01 करोड़ स्वीकृत करते हुए प्रथम चरण में ₹ 59 लाख, क्वीरिजिमिया से साईपोला, बुई पातों में आंतरिक सी०सी० मार्ग का निर्माण किये जाने हेतु ₹ 79.64 लाख स्वीकृत करते हुए प्रथम चरण में ₹ 47.86 लाख, ग्राम सभा खेला स्यांकुरी, गर्गवा में छिपला केदार हेतु ट्रैक रूट, ग्राम पांगला में ब्रहमदेव मंदिर का सौन्दर्यीकरण एवं सी०सी० मार्ग निर्माण किये जाने हेतु ₹ 01 करोड़ स्वीकृत करते हुए प्रथम चरण में ₹ 60 लाख स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है। 


मुख्यमंत्री द्वारा आपदा न्यूनीकरण मद में विधानसभा क्षेत्र चम्पावत के अन्तर्गत बूम से टनकपुर तक शारदा नदी के दांये पार्श्व पर (तट बंध) बाढ़ सुरक्षा कार्य (शारदा नदी के दांये पार्श्व पर 28 हैक्टेयर व चिलियाघोल की बाढ़ सुरक्षा कार्य हेतु ₹ 11.59 करोड के सापेक्ष प्रथम किश्त मे ₹4.64 करोड, नगर निगम, रूद्रपुर के मुख्य कार्यालय भवन के पुनर्निर्माण कार्य हेतु ₹ 15.74 करोड स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है। 


मुख्यमंत्री द्वारा जनपद देहरादून के डाण्डा लखौण्ड सहस्त्रधारा रोड में शहरी विकास निदेशालय के कार्यालय भवन के निर्माण कार्य हेतु ₹ 62.64 करोड़ की योजना स्वीकृत करते हुए प्रथम किश्त में ₹ 05 करोड़, रजत जयंती पार्क निर्माण सम्बन्धी विभिन्न नगर निकायों नगर पंचायत, रामपुर, नगर पंचायत, गुप्तकाशी, नगर पंचायत, तपोवन, नगर पंचायत, चमियाला, नगरपालिका परिषद चिन्यालीसौड एवं नगर पंचायत, गूलरभोज में पार्क निर्माण/सौन्दर्यीकरण तथा ओपन जिम की स्थापना हेतु ₹ 2.03 करोड की योजना स्वीकृत किये जाने के साथ ही शहरी विकास विभाग के अन्तर्गत अवस्थापना विकास निधि से वर्तमान वित्तीय वर्ष में विभिन्न 13 कार्यों/योजनाओं हेतु ₹ 53.12 करोड की योजना स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


मुख्यमंत्री ने जनपद देहरादून में बौद्ध विकास योजना के अन्तर्गत अनुमोदित कार्यदायी संस्था उत्तराखण्ड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम विकासनगर देहरादून के संबंध में कुल 03 परियाजोनाओं के क्रियान्वयन हेतु कुल धनराशि ₹ 16.04 करोड के सापेक्ष वित्तीय वर्ष 2025-26 में द्वितीय चरण में ₹ 11.11 करोड़ स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।

देहरादून, :




राज्य सरकार के चार वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 23 मार्च 2026 से 25 मार्च 2026 तक प्रदेशभर में जन-जन की सरकार-4 साल बेमिसाल’’ थीम के अन्तर्गत तीन दिवस में विभिनन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है। 

जनपद देहरादून में आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम में  मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड सरकार द्वारा 23 मार्च 2026 को अपरान्ह् 12ः30 बजे सम्बोधन किया जाएगा, जिसका सजीव प्रसारण राज्य के अन्य 12 जनपदों में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में किया जाएगा। जिलाधिकारी सविन बंसल ने जनपद में आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम की तैयारियों एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। 

जिलाधिकारी ने कार्यक्रम हेतु तैनात सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी अधिकारी अपने-अपने दायित्वों को भलीभांति समझ लें आपसी समन्वय से व्यवस्था बनाना सुनिश्चित करें ताकि कार्यक्रम के दिवस किसी प्रकार की अव्यवस्था न होने पाए। जिलाधिकारी ने  निर्देश दिए कि मंच , सिटिंग व्यवस्था, बेरिकेटिंग, लाईट, पेयजल सफाई आदि समुचित व्यवस्थाएं समय से पूर्ण कर ली जाएं। निर्देशित किया कि कार्यक्रम स्थल पर होने वाले कार्यक्रमों की मिनट-2-मिनट कार्यक्रम के अनुसार व्यवस्थाएं बनाई जाए। 

जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्साधिकारी को स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण एवं महिलाओं/युवतियों के लिए विशेष स्वास्थ्य जांच स्टॉल लगाने के निर्देश दिए। समाज कल्याण विभाग को डीडीआरसी के माध्यम से दिव्यांगजनों के प्रमाण पत्र निर्गत करने एवं सहायक उपकरण वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा विद्युत विभाग को निर्बाध विद्युत आपूर्ति, जल संस्थान को स्वच्छ पेयजल, जिला पूर्ति अधिकारी को जलपान व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। लोक निर्माण विभाग को मंच निर्माण एवं बैरिकेडिंग, नगर निगम को स्वच्छता व्यवस्था तथा पुलिस विभाग को सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से पूर्ण कर कार्यक्रम को भव्य एवं सुव्यवस्थित रूप से आयोजित किया जाए। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम सरकार की उपलब्धियों को आमजन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर है।

समस्त जनपद के मुख्यालयों में 23 मार्च 2026 को कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है जिसमें सूचना विभाग द्वारा राज्य सरकार की उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार तथा साहित्य वितरण भी किया जाएगा। 

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर मुख्य नगर आयुक्त  प्रवीन कुमार, पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के मिश्रा, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल कुमार, नगर मजिस्ट्रेट प्रत्युष सिंह, उप जिलाधिकारी सदर हरिगिरि, उप जिलाधिकारी अपूर्वा सिंह, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ मनोज शर्मा, निदेशक ग्राम्य विकास अभिकरण विक्रम सिहं, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, अधि.अभि लोनिवि ओपी सिंह, संभागीय परिवहन अधिकारी अनिता चमोला,  जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, जिला पूर्ति अधिकारी के.के अग्रवाल, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास जितेन्द्र कुमार सहित सम्बन्धित विभागों के अधिकारी  उपस्थित रहे।  



देहरादून :


 एलपीजी गैस की कालाबाजारी रोकने तथा शत्प्रतिशत् होमडिलिविरी सुनिश्चित करवाने के जिलाधिकारी सविन बसंल के निर्देशों के अनुपालन में जिले में क्षेत्रवार क्यूआरटी टीम गठित की गई है। क्यूआरटी टीम आज क्षेत्रवार गैस एजेंसियों के निरीक्षण करते हुए एलपीजी गैस की मांग, आपूर्ति आदि सभी गतिविधियों देखी। 

जिला प्रशासन द्वारा प्रसारित  1077, 0135-2626066, 2726066  और व्हाट्सएप नंबर 7534826066 के माध्यम से कुल 37  शिकायतें एलपीजी गैस की आपूर्ति के सम्बन्ध में दर्ज हुई है, वही कंट्रोलरूम में मौजूद जिला खाद्य पूर्ति विभाग, देहरादून में एलपीजी गैस की आपूर्ति, सिलेंडर उपलब्धता या अन्य किसी प्रकार की समस्या को लेकर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में आज लगभग 17705 अधिक उपभोक्ताओं को घरेलू तथा 384 उपभोक्ताओं को व्यवसायिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति की गई है। जबकि घरेलू गैस सिलेंडर में 90 हजार के लगभग बैकलॉग है। एलपीजी का घरेलू 37488 तथा व्यवसायिक का 1616 स्टॉक उपलब्ध है। बैकलॉग का कारण पिछलें दिनों  03 दिन जब बुंकिग सॉफ्टवेयर में क्राईसिस आ गई थी तो मैन्युअल रजिस्टर में अंकन कर उपभोक्ताओं को गैस की आपूर्ति की गई, जिसकी लगभग 25 हजार से अधिक की एन्ट्री साफ्टवेयर पर अद्यतन की जा रही है। घरेलू के साथ ही व्यवसायिक एलपीजी गैस सिलेंडर का लोड निंरतर बढाया जा रहा है।    

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  या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।'
06 oct2024



नवरात्र-पूजन के चौथे दिन कुष्माण्डा देवी के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन 'अनाहत' चक्र में अवस्थित होता है। अतः इस दिन उसे अत्यंत पवित्र और अचंचल मन से कूष्माण्डा देवी के स्वरूप को ध्यान में रखकर पूजा-उपासना के कार्य में लगना चाहिए।


जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब इन्हीं देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी। अतः ये ही सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदिशक्ति हैं। इनका निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में है। वहाँ निवास कर सकने की क्षमता और शक्ति केवल इन्हीं में है। इनके शरीर की कांति और प्रभा भी सूर्य के समान ही दैदीप्यमान हैं।

इनके तेज और प्रकाश से दसों दिशाएँ प्रकाशित हो रही हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में अवस्थित तेज इन्हीं की छाया है। माँ की आठ भुजाएँ हैं। अतः ये अष्टभुजा देवी के नाम से भी विख्यात हैं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। इनका वाहन सिंह है। 

  सुरासंपूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
    दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे ॥

माँ कूष्माण्डा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक मिट जाते हैं। इनकी भक्ति से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है। माँ कूष्माण्डा अत्यल्प सेवा और भक्ति से प्रसन्न होने वाली हैं। यदि मनुष्य सच्चे हृदय से इनका शरणागत बन जाए तो फिर उसे अत्यन्त सुगमता से परम पद की प्राप्ति हो सकती है।

विधि-विधान से माँ के भक्ति-मार्ग पर कुछ ही कदम आगे बढ़ने पर भक्त साधक को उनकी कृपा का सूक्ष्म अनुभव होने लगता है। यह दुःख स्वरूप संसार उसके लिए अत्यंत सुखद और सुगम बन जाता है। माँ की उपासना मनुष्य को सहज भाव से भवसागर से पार उतारने के लिए सर्वाधिक सुगम और श्रेयस्कर मार्ग है।

माँ कूष्माण्डा की उपासना मनुष्य को आधियों-व्याधियों से सर्वथा विमुक्त करके उसे सुख, समृद्धि और उन्नति की ओर ले जाने वाली है। अतः अपनी लौकिक, पारलौकिक उन्नति चाहने वालों को इनकी उपासना में सदैव तत्पर रहना चाहिए।चतुर्थी के दिन माँ कूष्मांडा की आराधना की जाती है। इनकी उपासना से सिद्धियों में निधियों को प्राप्त कर समस्त रोग-शोक दूर होकर आयु-यश में वृद्धि होती है। प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में चतुर्थ दिन इसका जाप करना चाहिए।

 मेष

अ, आ, चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो

वाणी पर नियंत्रण रखें। स्वास्‍थ्य का पाया कमजोर रहेगा। विवेक से कार्य करें। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड से लाभ होगा। स्थायी संपत्ति के कार्य बड़ा लाभ दे सकते हैं। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। यात्रा मनोरंजक रहेगी। समय की अनुकूलता का लाभ लें। मित्रों के साथ अच्छा समय बीतेगा।

Rashifal today 21 march 2026


वृषभ

ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो

पार्टी व पिकनिक का कार्यक्रम बनेगा। मनोरंजन का समय मिलेगा। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। मनपसंद भोजन का आनंद मिलेगा। कारोबारी वृद्धि की योजना बनेगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। समय की अनुकूलता रहेगी। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। जल्दबाजी से कोई भी कार्य न करें। विवाद में न पड़ें।


मिथुन

का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह

बुरी खबर प्राप्त हो सकती है। दौड़धूप अधिक होगी। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। काम में मन नहीं लगेगा। बाहर जाने की योजना बनेगी। मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा। परिवार के साथ समय मनोरंजन में व्यतीत होगा। आय होगी। व्यापार ठीक चलेगा।


कर्क

ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो

थकान व कमजोरी रह सकती है। खान-पान पर ध्यान दें। घर-परिवार की चिंता बनी रहेगी। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। किसी प्रभावशाली व्यक्ति का मार्गदर्शन व सहयोग प्राप्त होगा। मान-सम्मान मिलेगा। मित्रों की सहायता करने का मौका मिलेगा। समय अच्छा व्यतीत होगा। प्रसन्नता रहेगी।


सिंह

मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे

विवाद को बढ़ावा न दें। हल्की हंसी-मजाक करने से बचें। उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त होगी। आत्मसम्मान बनेगा। भूले-बिसरे साथियों से मुलाकात होगी। नए मित्र बनेंगे। कोई बड़ा कार्य करने की इच्छा जागृत होगी। यात्रा मनोरंजक रहेगी। व्यापार ठीक चलेगा। कुसंगति से दूर रहें। हानि संभव है।


कन्या

ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। यात्रा मनोरंजक रहेगी। नवीन वस्त्राभूषण की प्राप्ति पर व्यय होगा। व्यापार लाभदायक रहेगा। कोई बड़ा कार्य होने से प्रसन्नता रहेगी। दूसरों के काम में दखल न दें। मित्रों के साथ समय मनोरंजक व्यतीत होगा। भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। जल्दबाजी न करें।


तुला

रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते

स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। विवाद को बढ़ावा न दें। बनते काम बिगड़ सकते हैं। तनाव रहेगा। व्यापार ठीक चलेगा। यात्रा में विशेष सावधानी रखें। किसी भी व्यक्ति के उकसाने में न आएं। मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा। किसी मनोरंजक कार्यक्रम का हिस्सा बन सकते हैं।


वृश्चिक

तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

दूर से अच्‍छे समाचार प्राप्त होंगे। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। डूबी हुई रकम प्राप्त हो सकती है, प्रयास करें। यात्रा मनोरंजक रहेगी। सामाजिक कार्य करने की इच्छा जागृत होगी। व्यापार ठीक चलेगा। परिवार के साथ समय सुखमय व्यतीत होगा। प्रसन्नता बनी रहेगी।


धनु

ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे

लेन-देन में जल्दबाजी न करें। समय अनुकूल है। कोई आवश्यक वस्तु समय पर नहीं मिलने से खिन्नता रहेगी। रिश्तेदारों या मित्रों की सहायता करने का मौका मिलेगा। योजना फलीभूत होगी। कार्यस्थल पर परिवर्तन हो सकता है। मित्रों के साथ समय मनोरंजक बीतेगा।


मकर

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। कानूनी अड़चन दूर होगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। यात्रा मनोरंजक रहेगी। मनोरंजन के साधन प्राप्त होंगे। तीर्थदर्शन की योजना बनेगी। धर्म-कर्म में रुचि रहेगी। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। परिवार के साथ रहने का अवसर प्राप्त होगा। लाभ होगा।


कुंभ

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा

चोट व दुर्घटना से हानि संभव है। जल्दबाजी व लापरवाही भारी पड़ सकती है। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। हल्की हंसी-मजाक न करें। विवाद हो सकता है। किसी व्यक्ति की नाराजी से मन खराब होगा। मित्रों तथा रिश्तेदारों का सहयोग मिलेगा। प्रसन्नता रहेगी। मनोरंजन होगा।


मीन

दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची

बुद्धि का प्रयोग किसी भी समस्या का निवारण कर सकता है, यह याद रखें। किसी प्रभावशाली व्यक्ति का मार्गदर्शन व सहयोग प्राप्त होगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। मित्रों का सहयोग व साथ मिलेगा। भाइयों से मतभेद दूर होंगे। व्यापार ठीक चलेगा। समय सुखमय व्यतीत होगा।


 माँ चंद्रघंटा की कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं, दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है तथा विविध प्रकार की दिव्य ध्वनियाँ सुनाई देती हैं। ये क्षण साधक के लिए अत्यंत सावधान रहने के होते हैं।: 

Chandraghanta maa third navratri 








पिण्डजप्रवरारुढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता | प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता ||



माँ का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। इनके दस हाथ हैं। इनके दसों हाथों में खड्ग आदि शस्त्र तथा बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं। इनका वाहन सिंह है। इनकी मुद्रा युद्ध के लिए उद्यत रहने की होती है।
मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएँ विनष्ट हो जाती हैं। इनकी आराधना सद्यः फलदायी है। माँ भक्तों के कष्ट का निवारण शीघ्र ही कर देती हैं। इनका उपासक सिंह की तरह पराक्रमी और निर्भय हो जाता है। इनके घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों को प्रेतबाधा से रक्षा करती है। इनका ध्यान करते ही शरणागत की रक्षा के लिए इस घंटे की ध्वनि निनादित हो उठती है।
माँ का स्वरूप अत्यंत सौम्यता एवं शांति से परिपूर्ण रहता है। इनकी आराधना से वीरता-निर्भयता के साथ ही सौम्यता एवं विनम्रता का विकास होकर मुख, नेत्र तथा संपूर्ण काया में कांति-गुण की वृद्धि होती है। स्वर में दिव्य, अलौकिक माधुर्य का समावेश हो जाता है। माँ चंद्रघंटा के भक्त और उपासक जहाँ भी जाते हैं लोग उन्हें देखकर शांति और सुख का अनुभव करते हैं।

माँ के आराधक के शरीर से दिव्य प्रकाशयुक्त परमाणुओं का अदृश्य विकिरण होता रहता है। यह दिव्य क्रिया साधारण चक्षुओं से दिखाई नहीं देती, किन्तु साधक और उसके संपर्क में आने वाले लोग इस बात का अनुभव भली-भाँति करते रहते हैं।



हमें चाहिए कि अपने मन, वचन, कर्म एवं काया को विहित विधि-विधान के अनुसार पूर्णतः परिशुद्ध एवं पवित्र करके माँ चंद्रघंटा के शरणागत होकर उनकी उपासना-आराधना में तत्पर हों। उनकी उपासना से हम समस्त सांसारिक कष्टों से विमुक्त होकर सहज ही परमपद के अधिकारी बन सकते हैं।

हमें निरंतर उनके पवित्र विग्रह को ध्यान में रखते हुए साधना की ओर अग्रसर होने का प्रयत्न करना चाहिए। उनका ध्यान हमारे इहलोक और परलोक दोनों के लिए परम कल्याणकारी और सद्गति देने वाला है।

प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में तृतीय दिन इसका जाप करना चाहिए।



    या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।


 हे माँ! सर्वत्र विराजमान और चंद्रघंटा के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। हे माँ, मुझे सब पापों से मुक्ति प्रदान करें।




 

ऋषिकेश : 



चकजोगीवाला क्षेत्र में एक बार फिर गुलदार की चहलकदमी से ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया है। बड़कोट रेंज से सटे इस इलाके में बुधवार देर रात गुलदार देखे जाने की घटना सामने आई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम प्रधान मेहर सिंह असवाल के खेतों में गुलदार घुस आया था। इसी दौरान खेत में मौजूद निराश्रित पशु के शोर की आवाज सुनकर पास ही रहने वाले लक्की असवाल छत पर चढ़ गए और जोर-जोर से शोर मचाया। शोर सुनते ही गुलदार घबरा गया और शिकार को छोड़कर खेत से भाग निकला। यह पूरी घटना वीडियो में भी कैद हुई है।

गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व भी इसी क्षेत्र में गुलदार ने ग्राम प्रधान मोहर सिंह असवाल के घर के आंगन से एक कुत्ते को उठा लिया था। लगातार हो रही इन घटनाओं से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

चकजोगीवाला ग्राम प्रधान मोहर सिंह असवाल ने कहा  कि क्षेत्र में गुलदार की बढ़ती गतिविधियों के चलते बच्चों और पशुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और गुलदार को पकड़ने की मांग की है, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

 



 *सीएम धामी ने कार्यक्रम स्थल का किया निरीक्षण, व्यवस्थाओं को लेकर दिए सख्त निर्देश* 


 *जनसभा से पहले रूट डायवर्जन और सुविधाओं को लेकर प्रशासन अलर्ट* 


उत्तराखंड सरकार के 4 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर नैनीताल जनपद के एमबी इंटर कॉलेज, हल्द्वानी में शनिवार, 21 मार्च को एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर आयोजित जनसभा में मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार के  रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह प्रतिभाग करेंगे।



माननीय रक्षा मंत्री के प्रस्तावित भ्रमण कार्यक्रम एवं आयोजन की तैयारियों के दृष्टिगत  मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी शनिवार को हल्द्वानी पहुंचे। उन्होंने सर्किट हाउस, काठगोदाम में अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।



बैठक में आयुक्त कुमाऊं मंडल श्री दीपक रावत ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की तैयारियों की जानकारी दी। इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने एमबी इंटर कॉलेज मैदान पहुंचकर कार्यक्रम स्थल का स्थलीय निरीक्षण किया तथा व्यवस्थाओं का जायजा लिया।



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्देश दिए कि जनसभा में आने वाले लोगों के लिए बैठने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही पेयजल, साफ-सफाई एवं शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था की जाए, ताकि आगंतुकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।



मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि शहर की जनता एवं बाहरी आगंतुकों को आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए पूर्व में ही रूट डायवर्जन प्लान तैयार कर उसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।



इस अवसर पर क्षेत्रीय सांसद श्री अजय भट्ट, विधायक कालाढूंगी श्री बंशीधर भगत, लालकुआं से श्री मोहन सिंह बिष्ट, नैनीताल से श्रीमती सरिता आर्या, रामनगर से श्री दीवान सिंह बिष्ट, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दीपा दरमवाल, भाजपा जिला अध्यक्ष श्री प्रताप बिष्ट, प्रदेश महामंत्री श्री तरुण बंसल, दायित्वधारी डॉ. अनिल कपूर (डब्बू), श्री शंकर कोरंगा, श्रीमती शांति मेहरा, श्री दिनेश आर्य, श्री दीपक मेहरा सहित आईजी कुमाऊं श्रीमती रिद्धिम अग्रवाल, जिलाधिकारी श्री ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टीसी तथा अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

 

डोईवाला : 




डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत हिमालयन अस्पताल के आसपास इन दिनों स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होती नजर आ रही है। अस्पताल परिसर के बाहर स्थित मेडिकल स्टोरों के आसपास कूड़े के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है और गंभीर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार कूड़ा उठाने वाली गाड़ी नियमित रूप से नहीं आ रही है। कई बार एक-दो दिन तक कूड़ा नहीं उठता, जिससे कचरा जमा होकर पहाड़ बन जाता है। वहीं जब सफाई कर्मी पहुंचते भी हैं, तो कूड़ा पूरी तरह नहीं उठाया जाता और सड़क किनारे व दुकानों के पास बिखरा रह जाता है।क्षेत्र के कुछ लोगों द्वारा आसपास के खाली प्लॉटों में खुलेआम कचरा फेंका जा रहा है। इन स्थानों पर अब कूड़े के बड़े ढेर जमा हो चुके हैं, जो धीरे-धीरे पूरे इलाके को गंदगी में तब्दील कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि नगरपालिका इस गंभीर समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई करती नजर नहीं आ रही।यह स्थिति और भी चिंताजनक इसलिए है क्योंकि मामला एक बड़े अस्पताल क्षेत्र से जुड़ा है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों मरीज और उनके परिजन आते-जाते हैं। गंदगी और कूड़े के बीच रहना उनके स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुका है।

मेडिकल स्टोरों के बाहर पड़ा कूड़ा आवारा पशुओं द्वारा इधर-उधर फैलाया जा रहा है, जिससे समस्या और विकराल होती जा रही है। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है बल्कि संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका भी तेज हो गई है।क्षेत्रवासियों में इस अव्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि

कूड़ा उठाने की व्यवस्था को नियमित किया जाये,

खाली प्लॉटों में कचरा फेंकने वालों पर सख्त कार्रवाई हो,

तत्काल विशेष सफाई अभियान चलाया जाये,अस्पताल क्षेत्र में साफ-सफाई की निगरानी बढ़ाई जाये |

देहरादून ;

five cabinet ministers added to uttarakhand cabinet


   राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने शुक्रवार को लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उत्तराखण्ड सरकार के मंत्रिपरिषद के नवनियुक्त मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे। राज्यपाल ने विधायक श्री खजान दास, श्री मदन कौशिक, श्री भरत सिंह चौधरी, श्री प्रदीप बत्रा एवं श्री राम सिंह कैड़ा को मंत्री पद की शपथ दिलाई।


   शपथ ग्रहण समारोह में महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल एवं उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री श्री भगत सिंह कोश्यारी, कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल, श्रीमती रेखा आर्या, श्री गणेश जोशी एवं श्री सौरभ बहुगुणा, सांसद श्री महेन्द्र भट्ट और श्री नरेश बंसल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन द्वारा किया गया।

                                                           

     

 या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।


ब्रह्मचारिणी माँ की नवरात्र पर्व के दूसरे दिन पूजा-अर्चना की जाती है। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल रहता है। यह जानकारी भविष्य पुराण से ली गई हे।


दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु |

 देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा  

SECOND Brahamcharini navratri,2024 march


इस दिन साधक कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने के लिए भी साधना करते हैं। जिससे उनका जीवन सफल हो सके और अपने सामने आने वाली किसी भी प्रकार की बाधा का सामना आसानी से कर सकें।


माँ दुर्गाजी का यह दूसरा स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनन्तफल देने वाला है। इनकी उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। जीवन के कठिन संघर्षों में भी उसका मन कर्तव्य-पथ से विचलित नहीं होता।

माँ ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन इन्हीं के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन ‘स्वाधिष्ठान ’चक्र में शिथिल होता है। इस चक्र में अवस्थित मनवाला योगी उनकी कृपा और भक्ति प्राप्त करता है।
 

इस दिन ऐसी कन्याओं का पूजन किया जाता है कि जिनका विवाह तय हो गया है लेकिन अभी शादी नहीं हुई है। इन्हें अपने घर बुलाकर पूजन के पश्चात भोजन कराकर वस्त्र, पात्र आदि भेंट किए जाते हैं।

प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में द्वितीय दिन इसका जाप करना चाहिए।

 

मेष

अ, आ, चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो

कुबुद्धि हावी रहेगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। विवाद से दूर रहें। कुसंगति से बचें। भूमि व भवन संबंधी बाधा दूर होगी। बड़े सौदे बड़ा लाभ दे सकते हैं। आय में वृद्धि होगी। परीक्षा व साक्षात्कार आदि में सफलता प्राप्त होगी। निवेश शुभ रहेगा। भाग्य का साथ रहेगा। नौकरी में अनुकूलता रहेगी। प्रसन्नता रहेगी।

Rashifal today


वृषभ

ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो

मान-सम्मान मिलेगा। यात्रा मनोरंजक रहेगी। किसी मांगलिक कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर प्राप्त होगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता प्राप्त करेगा। स्वादिष्ट भोजन का आनंद प्राप्त होगा। व्यापार-व्यवसाय में मनोनुकूल लाभ होगा। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड में सोच-समझकर हाथ डालें। जल्दबाजी न करें। समय अनुकूल है।


मिथुन

का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह

व्यर्थ भागदौड़ रहेगी। समय का अपव्यय होगा। दूर से दु:खद समाचार प्राप्त हो सकता है। विवाद से क्लेश होगा। काम में मन नहीं लगेगा। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। किसी व्यक्ति विशेष से अनबन हो सकती है। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी।


कर्क

ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो

कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। शारीरिक कष्ट संभव है। परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। कोई ऐसा कार्य न करें जिससे कि नीचा देखना पड़े। आर्थिक उन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। मित्रों का सहयोग कर पाएंगे। पराक्रम व प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। धनार्जन होगा।


सिंह

मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे

शत्रु शांत रहेंगे। वाणी पर नियंत्रण रखें। दूर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। घर में प्रतिष्ठित अतिथियों का आगमन हो सकता है। व्यय होगा। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। आय बनी रहेगी। दुष्‍टजनों से दूर रहें। चिंता तथा तनाव रहेंगे।


कन्या

ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

भाग्योन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। रोजगार प्राप्ति सहज ही होगी। व्यावसायिक यात्रा से लाभ होगा। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। निवेशादि शुभ रहेंगे। कारोबार में वृद्धि के योग हैं। किसी बड़ी समस्या का हल प्राप्त होगा। प्रसन्नता रहेगी। दूसरों के काम में हस्तक्षेप न करें।


तुला

रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते

व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। शत्रु शांत रहेंगे। ऐश्वर्य पर खर्च होगा। मान-सम्मान मिलेगा। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। कर्ज लेना पड़ सकता है। पुराना रोग उभर सकता है। वाणी पर नियंत्रण रखें। किसी भी अपरिचित व्यक्ति पर अंधविश्वास न करें। चिंता तथा तनाव बने रहेंगे। अपेक्षित कार्यों में विलंब होगा।


वृश्चिक

तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। शुभ समाचार मिल सकता है। शारीरिक कष्ट संभव है। अज्ञात भय रहेगा। लेन-देन में सावधानी रखें। चिंता रहेगी। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा लाभदायक रहेगी। मित्रों का सहयोग कर पाएंगे। मान-सम्मान मिलेगा। आय में वृद्धि होगी।


धनु

ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे

आराम का समय मिलेगा। आशंका-कुशंका रहेगी। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। कारोबारी नए अनुबंध हो सकते हैं, प्रयास करें। आय में वृद्धि होगी। सामाजिक कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। प्रमाद न करें।


मकर

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

यात्रा मनोनुकूल लाभ देगी। राजभय रहेगा। जल्दबाजी व विवाद करने से बचें। थकान महसूस होगी। किसी के व्यवहार से स्वाभिमान को ठेस पहुंच सकती है। कोर्ट व कचहरी के काम अनुकूल रहेंगे। धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन हो सकता है। पूजा-पाठ में मन लगेगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। प्रसन्नता रहेगी।


कुंभ

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा

आज मान-सम्मान के योग बनेंगे। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। शारीरिक शिथिलता रहेगी। काम में मन नहीं लगेगा। किसी अपने का व्यवहार प्रतिकूल रहेगा। पार्टनरों से मतभेद हो सकते हैं। नौकरी में अपेक्षानुरूप कार्य न होने से अधिकारी की नाराजी झेलना पड़ेगी।


मीन

दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची

कष्ट, भय व चिंता का वातावरण बन सकता है। विवेक से कार्य करें। समस्या दूर होगी। कानूनी अड़चन दूर होकर स्थिति मनोनुकूल बनेगी। किसी वरिष्ठ व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। कारोबारी लाभ में वृद्धि होगी। नौकरी में शांति रहेगी। सहकर्मियों का साथ मिलेगा। धनार्जन होगा।


 *एसडीआरएफ वाहिनी, जौलीग्रान्ट में छत्तीसगढ़ आयुर्वेद विज्ञान संस्थान (CIMS), बिलासपुर (छत्तीसगढ़) के एम०बी०बी०एस० के छात्र-छात्राओं का शैक्षणिक भ्रमण।*


आज दिनाँक 19 फरवरी 2026 छत्तीसगढ़ आयुर्वेद विज्ञान संस्थान (CIMS), बिलासपुर (छत्तीसगढ़) के एम०बी०बी०एस० प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं द्वारा एसडीआरएफ वाहिनी, जौलीग्रान्ट का शैक्षणिक भ्रमण किया गया। यह भ्रमण उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के समन्वय में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य छात्रों को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव एवं जागरूकता प्रदान करना रहा।


भ्रमण के दौरान श्री अर्पण यदुवंशी, सेनानायक, SDRF के निर्देशानुसार  निरीक्षक ट्रैनिंग श्री प्रमोद कुमार के नेतृत्व में एसडीआरएफ टीमों द्वारा छात्रों को आपदा की विभिन्न परिस्थितियों—जैसे बाढ़, भूकंप, भूस्खलन आदि में किए जाने वाले सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी दी गई। टीम द्वारा अत्याधुनिक रेस्क्यू उपकरणों का प्रदर्शन करते हुए उनके उपयोग एवं कार्यप्रणाली को सरल तरीके से समझाया गया। साथ ही मॉक ड्रिल के माध्यम से रेस्क्यू तकनीकों का जीवंत प्रदर्शन किया गया, जिससे छात्रों को वास्तविक परिस्थितियों में कार्य करने की प्रक्रिया का अनुभव प्राप्त हुआ।


इसके अतिरिक्त छात्रों को आपदा के दौरान प्राथमिक उपचार, घायल व्यक्तियों के सुरक्षित निकासी (evacuation) तथा टीम समन्वय के महत्व के बारे में भी अवगत कराया गया। एसडीआरएफ द्वारा आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया, अनुशासन एवं तकनीकी दक्षता के साथ किए जाने वाले कार्यों की जानकारी पाकर छात्र अत्यंत उत्साहित एवं प्रभावित हुए।

 

ऋषिकेश : 



भारतीय जनता पार्टी संगठन को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए ऋषिकेश जिला युवा मोर्चा कार्यकारिणी का विस्तार किया गया है। यह निर्णय भाजपा ऋषिकेश के जिलाध्यक्ष राजेन्द्र तडियाल की सहमति एवं प्रदेश युवा मोर्चा अध्यक्ष विपुल मैन्दोली के परामर्श के बाद लिया गया।

कार्यकारिणी विस्तार के तहत ऋषिकेश निवासी युवा कार्यकर्ता पंकज थपलियाल को जिला युवा मोर्चा का जिला मंत्री नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति के बाद संगठन में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ है।

भाजपा पदाधिकारियों के अनुसार, पंकज थपलियाल लंबे समय से संगठन के प्रति सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ता के रूप में अपनी भूमिका निभाते रहे हैं। सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी निरंतर भागीदारी और कार्यशैली को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस अवसर पर जिलाध्यक्ष राजेन्द्र तडियाल ने कहा कि युवा मोर्चा पार्टी की रीढ़ है और युवाओं के माध्यम से ही संगठन को नई दिशा और ऊर्जा मिलती है। उन्होंने विश्वास जताया कि पंकज थपलियाल अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, ईमानदारी और सक्रियता के साथ करेंगे तथा पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

वहीं ऋषिकेश जिला युवा मोर्चा अध्यक्ष शिवम टुटेजा ने भी नव-नियुक्त जिला मंत्री को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संगठन विस्तार का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नेतृत्व के अवसर प्रदान करना है, जिससे पार्टी की जमीनी पकड़ और अधिक मजबूत हो सके।

नियुक्ति के बाद पंकज थपलियाल ने पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसे वह पूरी लगन और निष्ठा के साथ निभाएंगे। उन्होंने कहा कि वे युवाओं को संगठन से जोड़ने और पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे।

इस नियुक्ति पर क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए पंकज थपलियाल को शुभकामनाएं दी हैं।

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 *सूचना एवं लोक संपर्क विभाग की अभिनव पहल—पहली बार प्रकाशित हुआ पंचांग कैलेंडर* 

 हिन्दू नववर्ष के शुभ अवसर पर आज मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास पर सूचना एवं लोक संपर्क विभाग द्वारा प्रकाशित पंचांग कैलेंडर का विधिवत विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने इसे राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को सहेजने एवं जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड अपनी सनातन परंपराओं, धार्मिक आस्थाओं और सांस्कृतिक मूल्यों के लिए देश-विदेश में विशिष्ट पहचान रखता है। यहां की परंपराएं केवल आस्था का विषय नहीं हैं, बल्कि यह हमारी जीवनशैली, सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न अंग हैं। ऐसे में पंचांग कैलेंडर का प्रकाशन राज्य की इस गौरवशाली विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।



मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पंचांग कैलेंडर राज्यवासियों को न केवल तिथि, वार, पक्ष, मास, पर्व एवं विशेष दिवसों की सटीक जानकारी प्रदान करेगा, बल्कि पारंपरिक त्योहारों, व्रतों और धार्मिक आयोजनों की महत्ता से भी अवगत कराएगा। इससे लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं के साथ और अधिक गहराई से जुड़ने का अवसर मिलेगा।


मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि इस पंचांग में देवभूमि उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक एवं आस्था स्थलों को विशेष रूप से स्थान दिया गया है। ये स्थल न केवल श्रद्धा के केंद्र हैं, बल्कि राज्य की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रतीक भी हैं। इस प्रकार यह कैलेंडर एक जानकारीपरक दस्तावेज होने के साथ-साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत करने वाला प्रेरणादायक संकलन भी है।


मुख्यमंत्री ने सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के इस प्रयास की सराहना करते हुए आशा व्यक्त की कि यह पंचांग कैलेंडर राज्य के प्रत्येक नागरिक के लिए उपयोगी सिद्ध होगा और आने वाले समय में इसे और अधिक समृद्ध एवं व्यापक स्वरूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

इस अवसर पर  सचिव श्री विनय शंकर पांडेय, महानिदेशक सूचना श्री बंशीधर तिवारी सहित अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।

 दिनांक: 19 मार्च 2026, गुरुवार 

 प्रथम तिथि: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा  विक्रम संवत: 2083 का शुभारम्भ हिंदी पंचांग (बीकानेर) के अनुसार आज से सनातन परंपरा का नया वर्ष प्रारम्भ हो रहा है

नवरात्रि में कलश / घट स्थापना के लिए सर्वप्रथम प्रातः काल नित्य क्रिया से निवृत होने के बाद स्नान करके, नव वस्त्र अथवा स्वच्छ वस्त्र पहन कर ही विधिपूर्वक पूजा आरम्भ करनी चाहिए। प्रथम पूजा के दिन मुहूर्त (सूर्योदय के साथ अथवा द्विस्वभाव लग्न में  कलश स्थापना करना चाहिए।

first navratri  shailputri


कलश स्थापना के लिए अपने घर के उस स्थान को चुनना चाहिए जो पवित्र स्थान हो अर्थात घर में मंदिर के सामने या निकट या मंदिर के पास।  यदि इस स्थान में पूजा करने में दिक्कत हो तो घर में ही ईशान कोण अथवा उत्तर-पूर्व दिशा में, एक स्थान का चयन कर ले तथा उसे गंगा जल से शुद्ध कर ले


जौ पात्र का प्रयोग


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सर्वप्रथम जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र लेना चाहिए । इस पात्र में मिट्टी की एक अथवा दो परत बिछा ले । इसके बाद जौ बिछा लेना चाहिए। इसके ऊपर फिर मिट्टी की एक परत बिछाएं। अब पुनः एक परत जौ की बिछा ले । जौ को इस तरह चारों तरफ बिछाएं ताकि जौ कलश के नीचे पूरी तरह से न दबे। इसके ऊपर पुनः मिट्टी की एक परत बिछाएं।




कलश स्थापना


पुनः कलश में रोली से स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर गले में तीन धागावाली मौली लपेटे और कलश को एक ओर रख ले। कलश स्थापित किये जानेवाली भूमि अथवा चौकी पर कुंकुंम या रोली से अष्टदलकमल बनाकर निम्न मंत्र से भूमि का स्पर्श करना चाहिए।



ॐ भूरसि भूमिरस्यदितिरसि विश्वधाया विश्वस्य भुवनस्य धरत्री।


पृथिवीं यच्छ पृथिवीं द्रीं ह पृथिवीं मा हि सीः।।


कलश स्थापन मंत्र 


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ॐ आ जिघ्न कलशं मह्यं त्वा विशंतिवन्दवः।


पुनरूर्जा नि वर्तस्व सा नह सहत्रम् धुक्ष्वोरूधारा पयस्वती पुनर्मा विशताद्रयिः।।

पुनः इस मंत्रोच्चारण के बाद  कलश में गंगाजल मिला हुआ जल छोड़े उसके बाद क्रमशः चन्दन,  सर्वौषधि(मुरा,चम्पक, मुस्ता, वच, कुष्ठ, शिलाजीत, हल्दी, सठी)  दूब, पवित्री, सप्तमृत्तिका, सुपारी, पञ्चरत्न, द्रव्य कलश में अर्पित करे। पुनःपंचपल्लव(बरगद,गूलर,पीपल,पाकड़,आम) कलश के मुख पर रखें।अनन्तर कलश को वस्त्र से अलंकृत करें। तत्पश्चात चावल से भरे पूर्णपात्र को कलश के मुख पर स्थापित करें।


कलश पर नारियल की स्थापना


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इसके बाद नारियल पर लाल कपडा लपेट  ले उसके बाद मोली लपेट दें। अब नारियल को कलश पर रख दे । नारियल के सम्बन्ध में शास्त्रों में कहा गया है:


 नवरात्रि के पहले दिन (19 मार्च 2026) माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की जाती है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री (शैल = पर्वत, पुत्री = बेटी) कहा जाता है। वृषभ (बैल) पर सवार, दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल लिए माँ शैलपुत्री स्थिरता, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं।


“अधोमुखं शत्रु विवर्धनाय,ऊर्ध्वस्य वस्त्रं बहुरोग वृध्यै।


प्राचीमुखं वित विनाशनाय,तस्तमात् शुभं संमुख्यं नारीकेलं”।


अर्थात् नारियल का मुख नीचे की तरफ रखने से शत्रु में वृद्धि होती है ।नारियल का मुख ऊपर की तरफ रखने से रोग बढ़ते हैं। पूर्व की तरफ नारियल का मुख रखने से धन का विनाश होता है। इसलिए नारियल की स्थापना  के समय हमेशा इस बात का ध्यान रखनी चाहिए कि उसका मुख साधक की तरफ रहे। ध्यान रहे कि नारियल का मुख उस सिरे पर होता है, जिस तरफ से वह पेड़ की टहनी से जुड़ा होता है।


देवी-देवताओं का कलश में आवाहन

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भक्त को अपने दाहिने हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर वरुण आदि देवी-देवताओ का ध्यान और आवाहन करना चाहिए –


 ॐ भूर्भुवःस्वःभो वरुण! इहागच्छ, इह तिष्ठ, स्थापयामि, पूजयामि, मम पूजां गृहाण।ओम अपां पतये वरुणाय नमः बोलकर अक्षत और पुष्प कलश पर छोड़ देना चाहिए। पुनः दाहिने हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर चारो वेद, तीर्थो, नदियों, सागरों, देवी और देवताओ के आवाहन करना चाहिए उसके बाद फिर अक्षत और पुष्प लेकर कलश की प्रतिष्ठा करें।


कलशे वरुणाद्यावाहितदेवताः सुप्रतिष्ठता वरदा भवन्तु।


तथा 


ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः  इस मंत्र के उच्चारण के साथ ही अक्षत और पुष्प कलश के पास छोड़ दे।


वरुण आदि देवताओ को —

ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमःध्यानार्थे पुष्पं समर्पयामि

आदि मंत्र का उच्चारण करते हुए पुष्प समर्पित करे पुनः निम्न क्रम से वरुण आदि देवताओ को अक्षत रखे, जल चढ़ाये, स्नानीय जल, आचमनीय जल चढ़ाये, पंच्चामृत स्नान कराये,जल में मलय चन्दन मिलाकर स्नान कराये, शुद्ध जल से स्नान कराये, आचमनीय जल चढ़ाये, वस्त्र चढ़ाये, यज्ञोपवीत चढ़ाये, उपवस्त्र चढ़ाये, चन्दन लगाये, अक्षत समर्पित करे, फूल और फूलमाला चढ़ाये, द्रव्य समर्पित करे ,इत्र आदि चढ़ाये, दीप दिखाए, नैवेद्य चढ़ाये, सुपारी, इलायची, लौंग सहित पान चढ़ाये, द्रव्य-दक्षिणा चढ़ाये(समर्पयामि) इसके बाद आरती करे। पुनः पुस्पाञ्जलि समर्पित करे, प्रदक्षिणा करे तथा दाहिने हाथ में पुष्प लेकर प्रार्थना करे और अन्त में


ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, प्रार्थनापूर्वकं अहं  नमस्कारान समर्पयामि।


इस मंत्र से नमस्कारपूर्वक फूल समर्पित करे। पुनः हाथ में जल लेकर अधोलिखित वाक्य का उच्चारण कर जल कलश के पास छोड़ते हुए समस्त पूजन-कर्म वरुणदेव को निवेदित करना चाहिए।


कृतेन अनेन पूजनेन कलशे वरुणाद्यावाहितदेवताः प्रीयन्तां न मम।




अखंड ज्योति


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नवरात्री के प्रथम दिन ही अखंड ज्योति जलाई जाती है जो नौ दिन तक निरंतर जलती रहती है। अखंड ज्योति का बीच में बुझना अच्छा नही माना जाता है।  अतः इस बात का अवश्य ही धयान रखना चाहिए की अखंड ज्योति न बुझे।

देवी पूजन सामग्री

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माँ दुर्गा की सुन्दर प्रतिमा, माता की प्रतिमा स्थापना के लिए चौकी, लाल वस्त्र , कलश/ घाट , नारियल का फल, पांच पल्लव आम का, फूल,अक्षत, मौली, रोली, पूजा के लिए थाली , धुप और दशांग, गंगा का जल, कुमकुम, गुलाल पान,सुपारी, चौकी,दीप, नैवेद्य,कच्चा धागा, दुर्गा सप्तसती किताब ,चुनरी, पैसा, माता दुर्गा की विशेष कृपा हेतु संकल्प तथा षोडशोपचार पूजन करने के बाद, प्रथम प्रतिपदा तिथि को, नैवेद्य के रूप में गाय का घी माता को अर्पित करना चाहिए तथा पुनः वह घी किसी ब्राह्मण को दे देना चाहिए।


संकल्प


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 संकल्प में पुष्प, फल, सुपारी, पान, चांदी कासिक्का, नारियल (पानी वाला), मिठाई, मेवा, थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर संकल्प मंत्र बोलें 


ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णु:, ॐ अद्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीयपरार्धे श्री श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे,अष्टाविंशतितमे कलियुगे, कलिप्रथम चरणे जम्बूद्वीपेभरतखण्डे भारतवर्षे पुण्य (अपने नगर/गांव का नामलें) क्षेत्रे बौद्धावतारे वीर विक्रमादित्यनृपते(वर्तमानसंवत), तमेऽब्दे प्रमादी नाम संवत्सरे उत्तरायणे(वर्तमान)वसंत ऋतो महामंगल्यप्रदे मासानां मासोत्तमे(वर्तमान) मासे (वर्तमान) पक्षे (वर्तमान) तिथौ(वर्तमान) वासरे (गोत्र का नाम लें) गोत्रोत्पन्नोऽहंअमुकनामा (अपना नाम लें) सकलपापक्षयपूर्वकंसर्वारिष्ट शांतिनिमित्तं सर्वमंगलकामनया-श्रुतिस्मृत्योक्तफलप्राप्त्यर्थं मनेप्सित कार्य सिद्धयर्थं श्रीदुर्गा पूजनं च अहं क​रिष्ये। तत्पूर्वागंत्वेन ​निर्विघ्नतापूर्वक कार्य ​सिद्धयर्थं यथा​मिलितोपचारेगणप​ति पूजनं क​रिष्ये।


दुर्गा पूजन से पहले गणेश पूजन -


हाथ में पुष्प लेकर गणपति का ध्यान करें|और श्लोकपढें -


 गजाननम्भूतगणादिसेवितं कपित्थ जम्बूफलचारुभक्षणम्। उमासुतं शोक विनाशकारकं नमामिविघ्नेश्वरपादपंकजम्।

आवाहन: हाथ में अक्षत लेकर


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     आगच्छ देव देवेश, गौरीपुत्र ​विनायक।


     तवपूजा करोमद्य, अत्रतिष्ठ परमेश्वर॥

ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः इहागच्छ इह तिष्ठकहकर अक्षत गणेश जी पर चढा़ दें।


हाथ में फूल लेकर-ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः आसनं समर्पया​मि|


अर्घा में जल लेकर बोलें -ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः अर्घ्यं समर्पया​मि|


आचमनीय-स्नानीयं-ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः आचमनीयं समर्पया​मि |


 वस्त्र लेकर-ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः वस्त्रं समर्पया​मि|


यज्ञोपवीत-ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः यज्ञोपवीतं समर्पया​मि |

पुनराचमनीयम्-ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः |


रक्त चंदन लगाएं: इदम रक्त चंदनम् लेपनम् ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः |


श्रीखंड चंदन बोलकर श्रीखंड चंदन लगाएं|पटZ


सिन्दूर चढ़ाएं-



"इदं सिन्दूराभरणं लेपनम् ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः|



दूर्वा और विल्बपत्र भी गणेश जी को चढ़ाएं|


पूजन के बाद गणेश जी को प्रसाद अर्पित करें:


ॐ श्री ​सिद्धि विनायकाय नमः इदं नानाविधिनैवेद्यानि समर्पयामि |


मिष्ठान अर्पित करने के लिए मंत्र बोले


शर्करा खण्ड खाद्या​नि द​धि क्षीर घृता​नि च|

आहारो भक्ष्य भोज्यं गृह्यतां गणनायक।

प्रसाद अर्पित करने के बाद आचमन करायें- इदं आचमनीयं ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः|


इसके बाद पान सुपारी चढ़ायें-


ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः ताम्बूलं समर्पया​मि |

अब फल लेकर गणपति पर चढ़ाएं-


          ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः फलं समर्पया​मि|


            ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः द्रव्य समर्पया​मि|


 अब ​विषम संख्या में दीपक जलाकर ​निराजन करेंऔर भगवान की आरती गायें


 हाथ में फूल लेकर गणेश जी को अ​र्पित करें, ​फिर तीन प्रद​क्षिणा करें।


दुर्गा पूजन


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सबसे पहले माता दुर्गा का ध्यान करें

     सर्व मंगल मागंल्ये ​शिवे सर्वार्थ सा​धिके ।

 शरण्येत्रयम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते ॥

 आवाहन-

         श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। दुर्गादेवीमावाहया​मि॥


 आसन- 

        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। आसानार्थेपुष्पाणि समर्पया​मि।


अर्घ्य-


       श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। हस्तयो: अर्घ्यंसमर्पया​मि॥

आचमन-

       श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। आचमनं समर्पया​मि॥


स्नान-


       श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। स्नानार्थं जलंसमर्पया​मि॥


स्नानांग आचमन-


       स्नानान्ते पुनराचमनीयं जलं समर्पया​मि।




पंचामृत स्नान-


      श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। पंचामृतस्नानंसमर्पया​मि॥


गन्धोदक-स्नान-

      श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। गन्धोदकस्नानंसमर्पया​मि॥


शुद्धोदक स्नान-


      श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। शुद्धोदकस्नानंसमर्पया​मि॥


आचमन-  शुद्धोदकस्नानान्ते आचमनीयं जलं समर्पया​मि।


वस्त्र-

       श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। वस्त्रं समर्पया​मि ॥वस्त्रान्ते आचमनीयं जलं समर्पया​मि।


सौभाग्य सू़त्र-


       श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। सौभाग्य सूत्रंसमर्पया​मि ॥


चन्दन-

        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। चन्दनं समर्पया​मि॥


ह​रिद्राचूर्ण-


        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। ह​रिद्रां समर्पया​मि॥

कुंकुम-


        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। कुंकुम समर्पया​मि॥


​सिन्दूर-


         श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। ​सिन्दूरं समर्पया​मि॥


कज्जल-

         श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। कज्जलं समर्पया​मि।

आभूषण-


         श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। आभूषणा​निसमर्पया​मि ॥




पुष्पमाला-


        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। पुष्पमाला समर्पया​मि ॥


धूप-


        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। धूपमाघ्रापया​मि॥

दीप-


        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। दीपं दर्शया​मि॥

नैवेद्य-


        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। नैवेद्यं ​निवेदया​मि॥नैवेद्यान्ते ​त्रिबारं आचमनीय जलं समर्पया​मि।

फल-


         श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। फला​नि समर्पया​मि॥

ताम्बूल-


        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। ताम्बूलं समर्पया​मि॥


द​क्षिणा-


          श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। द्रव्यद​क्षिणां समर्पया​म

आरती-


          श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। आरा​र्तिकंसमर्पया​मि॥


प्रदक्षिणा

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“यानि कानि च पापानी जन्मान्तर कृतानि च।


तानी सर्वानि नश्यन्तु प्रदक्षिणपदे पदे॥


प्रदक्षिणा समर्पयामि।“


प्रदक्षिणा करें (अगर स्थान न हो तो आसन पर खड़े-खड़े ही स्थान पर घूमे)


क्षमा प्रार्थना


न मंत्रं नोयंत्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो


न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथाः ।


न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं


परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम् ॥


विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतया


विधेयाशक्यत्वात्तव चरणयोर्या च्युतिरभूत् ।ल


तदेतत्क्षतव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवे


कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ॥




पृथिव्यां पुत्रास्ते जननि बहवः सन्ति सरलाः


परं तेषां मध्ये विरलतरलोऽहं तव सुतः ।




मदीयोऽयंत्यागः समुचितमिदं नो तव शिवे


कुपुत्रो जायेत् क्वचिदपि कुमाता न भवति ॥




जगन्मातर्मातस्तव चरणसेवा न रचिता


न वा दत्तं देवि द्रविणमपि भूयस्तव मया ।




तथापित्वं स्नेहं मयि निरुपमं यत्प्रकुरुषे


कुपुत्रो जायेत क्वचिदप कुमाता न भवति ॥




परित्यक्तादेवा विविध​विधिसेवाकुलतया


मया पंचाशीतेरधिकमपनीते तु वयसि ।


इदानीं चेन्मातस्तव कृपा नापि भविता


निरालम्बो लम्बोदर जननि कं यामि शरण् ॥


श्वपाको जल्पाको भवति मधुपाकोपमगिरा


निरातंको रंको विहरति चिरं कोटिकनकैः ।


तवापर्णे कर्णे विशति मनुवर्णे फलमिदं


जनः को जानीते जननि जपनीयं जपविधौ ॥


चिताभस्मालेपो गरलमशनं दिक्पटधरो


जटाधारी कण्ठे भुजगपतहारी पशुपतिः ।


कपाली भूतेशो भजति जगदीशैकपदवीं

भवानि त्वत्पाणिग्रहणपरिपाटीफलमिदम् ॥


न मोक्षस्याकांक्षा भवविभव वांछापिचनमे


न विज्ञानापेक्षा शशिमुखि सुखेच्छापि न पुनः 


अतस्त्वां संयाचे जननि जननं यातु मम वै


मृडाणी रुद्राणी शिवशिव भवानीति जपतः ॥


नाराधितासि विधिना विविधोपचारैः


किं रूक्षचिंतन परैर्नकृतं वचोभिः ।


श्यामे त्वमेव यदि किंचन मय्यनाथे


धत्से कृपामुचितमम्ब परं तवैव ॥


आपत्सु मग्नः स्मरणं त्वदीयं


करोमि दुर्गे करुणार्णवेशि ।


नैतच्छठत्वं मम भावयेथाः


क्षुधातृषार्ता जननीं स्मरन्ति ॥


जगदंब विचित्रमत्र किं परिपूर्ण करुणास्ति चिन्मयि ।


अपराधपरंपरावृतं नहि मातासमुपेक्षते सुतम् ॥


मत्समः पातकी नास्तिपापघ्नी त्वत्समा नहि।


वं ज्ञात्वा महादेवियथायोग्यं तथा कुरु ॥


इसके बाद थाली में दीपक पुष्प सजाकर माँ की आरती करें

दुर्गा जी की आरती (1)


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जगजननी जय! जय! माँ! जगजननी जय! जय!


भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय। जगजननी ..

तू ही सत्-चित्-सुखमय, शुद्ध ब्रह्मरूपा।


सत्य सनातन, सुन्दर, पर-शिव सुर-भूपा॥ जगजननी ..

आदि अनादि, अनामय, अविचल, अविनाशी।


अमल, अनन्त, अगोचर, अज आनन्दराशी॥ जगजननी 

अविकारी, अघहारी, अकल कलाधारी।

कर्ता विधि, भर्ता हरि, हर संहारकारी॥ जगजननी ..


तू विधिवधू, रमा, तू उमा महामाया।

मूल प्रकृति, विद्या तू, तू जननी जाया॥ जगजननी ..

राम, कृष्ण तू, सीता, ब्रजरानी राधा।

तू वाँछाकल्पद्रुम, हारिणि सब बाघा॥ जगजननी ..

दश विद्या, नव दुर्गा नाना शस्त्रकरा।

अष्टमातृका, योगिनि, नव-नव रूप धरा॥ जगजननी ..

तू परधामनिवासिनि, महाविलासिनि तू।

तू ही श्मशानविहारिणि, ताण्डवलासिनि तू॥ जगजननी .

सुर-मुनि मोहिनि सौम्या, तू शोभाधारा।

विवसन विकट सरुपा, प्रलयमयी, धारा॥ जगजननी ..0L0

तू ही स्नेहसुधामयी, तू अति गरलमना।

रत्नविभूषित तू ही, तू ही अस्थि तना॥ जगजननी ..

मूलाधार निवासिनि, इह-पर सिद्धिप्रदे।

कालातीता काली, कमला तू वरदे॥ जगजननी ..

शक्ति शक्तिधर तू ही, नित्य अभेदमयी।

भेद प्रदर्शिनि वाणी विमले! वेदत्रयी॥ जगजननी ..

हम अति दीन दु:खी माँ! विपत जाल घेरे।

हैं कपूत अति कपटी, पर बालक तेरे॥ जगजननी ..

निज स्वभाववश जननी! दयादृष्टि कीजै।

करुणा कर करुणामयी! चरण शरण दीजै॥ जगजननी ....


 दुर्गा जी की आरती (2)


जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी ।

                      तुमको निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी ।।जय अम्बे गौरी...                           


मांग सिन्दूर विराजत टीको मृ्ग मद को ।

 उच्चवल से दोऊ नैना चन्द्र बदन नीको। जय अम्बे गौरी...

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै।

 रक्त पुष्प गलमाला कंठन पर साजै।।जय अम्बे गौरी...

केहरि वाहन राजत खडग खप्पर थारी

 सुर नर मुनि जन सेवत तिनके दु:ख हारी।।जय अम्बे गौरी..

कानन कुण्डली शोभित नाशाग्रे मोती ।।

कोटिक चन्द्र दिवाकर राजत सम ज्योति।।जय अम्बे गौरी..

शुम्भ निशुम्भ विदारे महिषासुर घाती ।

घूम्र विलोचन नैना निशिदिन मदमाती ।।जय अम्बे गौरी...

चौंसठ योगिन गावन नृ्त्य करत भैरूं ।

बाजत ताल मृ्दंगा अरू बाजत डमरू।।जय अम्बे गौरी...

भुजा चार अति शोभित खडग खप्पर धारी ।

मन वांछित फल पावत सेवत नर नारी ।।जय अम्बे गौरी...

कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती ।

श्री मालकेतु में राजत कोटि रत्न ज्योति।।जय अम्बे गौरी...

श्री अम्बे की आरती जो कोई नर गावै।

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पति पावै।। जय अम्बे गौरी...


आरती के बाद माँ को शाष्टांग प्रणाम कर प्रसाद को बांट दें। भक्त प्राय: पूरे नवरात्र उपवास रखते हैं. सम्पूर्ण नवरात्रव्रत के पालन में असमर्थ लोगों के लिए सप्तरात्र,पंचरात्र,युग्मरात्र और एकरात्रव्रत का विधान भी है. प्रतिपदा से सप्तमी तक उपवास रखने से सप्तरात्र-व्रत का अनुष्ठान होता है.


अष्टमी के दिन माता को हलुवा और चने का भोग लगाकर कुंवारी कन्याओं को खिलाते हैं तथा अन्त में स्वयं प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण (पूर्ण) करते हैं.


नवरात्रके नौ दिन साधना करने वाले साधक प्रतिपदा तिथि के दिन शैलपुत्री की, द्वितीया में ब्रह्मचारिणी, तृतीया में चंद्रघण्टा, चतुर्थी में कूष्माण्डा, पंचमी में स्कन्दमाता, षष्ठी में कात्यायनी, सप्तमी में कालरात्रि, अष्टमी में महागौरी तथा नवमी में सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं. तथा दुर्गा जी के १०८ नामों को मंत्र रूप में उसका अधिकाधिक जप करें।




विशेष👉 


यह पूजन विधि जिन साधको को वैदिक मंत्रों का ज्ञान नही है अथवा जिनके पास पूजा के लिये उपयुक्त समय नही है उनकी भावनाओं एवं यहाँ शब्द सीमा को ध्यान में रखकर बनाई गई है विस्तृत वैदिक मंत्रों से पूजन विधि जिसे आवश्यकता हो उसे व्यक्तिगत रूप से बतायी जाएगी।



*आचार्य पवन पराशर (श्रीधाम वृन्दावन)*

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