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accident at bhavali, naini tal


दिनांक 18 जुलाई 2026 देर रात्रि जनपद नैनीताल के भवाली-रामगढ़ मार्ग पर कुलाटी बैड के समीप एक कार के गहरी खाई में गिरने की सूचना प्राप्त होने पर एसडीआरएफ पोस्ट नैनीताल की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों घायलों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया।

आपदा कंट्रोल रूम, नैनीताल से सूचना प्राप्त होते ही उप निरीक्षक मनीष भाकुनी के नेतृत्व में एसडीआरएफ टीम आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों के साथ तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई।

घटनास्थल पर पहुँचने पर पाया गया कि महिंद्रा मराजो कार (वाहन संख्या: DL08CBE0795) सड़क से लगभग 50 मीटर गहरी खाई में दुर्घटनाग्रस्त होकर गिरी हुई थी। वाहन में सवार *_खरेश दुग्गल एवं उनकी पत्नी रितु दुग्गल, निवासी सेक्टर-11, नोएडा,*_ सामान्य रूप से घायल अवस्था में थे।

एसडीआरएफ टीम ने त्वरित एवं सुरक्षित रेस्क्यू अभियान चलाते हुए दोनों घायलों को खाई से बाहर निकाला तथा प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराकर आगे के उपचार हेतु भवाली अस्पताल भेजा गया।

 *मुख्यमंत्री धामी ने 180 नेचर गाइडों को रोजगार पंजीकरण प्रमाण-पत्र मिलने पर दी बधाई*




मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास सभागार से तराई पश्चिमी वन प्रभाग, रामनगर के फांटो जोन में आयोजित नेचर गाइड प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार पंजीकरण प्रमाण-पत्र वितरण कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से प्रतिभाग किया। इस अवसर पर 180 महिला एवं पुरुष नेचर गाइडों को रोजगार पंजीकरण प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।



मुख्यमंत्री ने सभी नेचर गाइडों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ये प्रमाण-पत्र केवल रोजगार का दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि युवाओं के कौशल, मेहनत और प्रकृति संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि नेचर गाइड स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने के साथ ही आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।



मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें विशेष प्रसन्नता है कि प्रमाण-पत्र प्राप्त करने वाले अनेक युवा रिवर्स पलायन कर अपने गांव और प्रदेश लौटे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल इन युवाओं की व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के गांवों में लौटते विश्वास, समृद्धि और रोजगार के अवसरों का भी प्रतीक है।



मुख्यमंत्री ने कहा कि फांटो जोन आज केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि ईको-टूरिज्म और समुदाय आधारित पर्यटन का उत्कृष्ट मॉडल बन चुका है। क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जैव विविधता, घने वन, शांत वातावरण और वन्यजीव देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फांटो जोन टाइगर साइटिंग के लिए भी तेजी से अपनी अलग पहचान बना रहा है। यहां विकसित ट्री हाउस पर्यटकों को प्रकृति के बीच अनूठा अनुभव प्रदान कर रहा है और पर्यटन गतिविधियों से प्रदेश को राजस्व प्राप्त होने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी आर्थिक लाभ मिल रहा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि प्रकृति का संरक्षण हो और प्रकृति से जुड़े स्थानीय समुदायों का जीवन भी समृद्ध बने। ईको-टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय युवाओं, महिलाओं, होमस्टे संचालकों, छोटे व्यापारियों, वाहन चालकों, स्थानीय उत्पाद निर्माताओं और ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर यह संतोष का विषय है कि उत्तराखंड ने विकास, सुशासन, रोजगार सृजन और जनकल्याण के क्षेत्र में अनेक नए आयाम स्थापित किए हैं। ईको-टूरिज्म और नेचर गाइड जैसी पहलें स्थानीय युवाओं को उनके गांवों में सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य सेवक के रूप में उनका निरंतर प्रयास रहा है कि उत्तराखंड का युवा अपने ही प्रदेश में रोजगार प्राप्त करे, अपने गांव में रहे और अपने परिवार के साथ रहते हुए प्रदेश के विकास में सहभागी बने।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से राज्य सरकार पर्यटन को केवल पर्यटन गतिविधि तक सीमित न रखकर रोजगार, स्वरोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और रिवर्स पलायन से जोड़ने का कार्य कर रही है। होमस्टे, शीतकालीन पर्यटन, एडवेंचर टूरिज्म, ईको-टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म, डेस्टिनेशन वेडिंग और आध्यात्मिक पर्यटन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का परिणाम है कि प्रदेश में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह इस बात का संकेत है कि उत्तराखंड के गांव अब केवल पुरानी यादों के नहीं, बल्कि नई संभावनाओं के भी केंद्र बन रहे हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में रोजगार के अवसर उपलब्ध होने से पलायन को रोकने में मदद मिलेगी, पर्यटन बढ़ने से स्थानीय व्यापार को गति मिलेगी और स्थानीय समुदायों के समृद्ध होने से आत्मनिर्भर उत्तराखंड का सपना साकार होगा।


मुख्यमंत्री ने नेचर गाइडों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनका दायित्व केवल पर्यटकों को जंगल घुमाने तक सीमित नहीं है। वे उत्तराखंड की पहचान, जंगलों के प्रहरी, वन्यजीव संरक्षण के सहयोगी और प्रदेश की संस्कृति, परंपरा एवं अतिथि देवो भवः की भावना के ब्रांड एम्बेसडर हैं। उन्होंने कहा कि नेचर गाइड पर्यटकों को केवल वन्यजीवों का दर्शन नहीं कराते, बल्कि उन्हें प्रकृति के प्रति प्रेम और संवेदनशीलता का संदेश भी देते हैं। वे लोगों को यह समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कि जंगल और वन्यजीव आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर हैं।


मुख्यमंत्री ने सभी नेचर गाइडों और प्रदेशवासियों से प्रकृति एवं वन्यजीवों के संरक्षण, पर्यावरण के प्रति जनजागरूकता, गांवों की समृद्धि और स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देकर उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ और आत्मनिर्भर राज्य बनाने के सरकार के ‘विकल्प रहित संकल्प’ को साकार किया जाएगा।


इस अवसर पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वन अधिकारी, जनप्रतिनिधि, नेचर गाइड तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।


एसईओसी ने जारी किया पत्र

लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की


देहरादून:





 भारत मौसम विज्ञान विभाग, देहरादून द्वारा उत्तराखण्ड के विभिन्न  जनपदों में आगामी दिनों के दौरान भारी से अत्यधिक भारी वर्षा, आकाशीय बिजली एवं तेज वर्षा की चेतावनी जारी किए जाने के बाद राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर आवश्यक एहतियाती एवं निवारक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। पत्र में 18 से 22 जुलाई तक जारी मौसम चेतावनी के अनुरूप जनपद स्तर पर सतर्कता बढ़ाने, संवेदनशील क्षेत्रों की निरंतर निगरानी रखने तथा राहत एवं बचाव दलों को पूर्ण रूप से तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।

19 जुलाई को मौसम विभाग ने नैनीताल, चम्पावत एवं ऊधमसिंह नगर जनपदों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जहां कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा होने की संभावना है। वहीं देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार एवं बागेश्वर में भारी से बहुत भारी वर्षा तथा आकाशीय बिजली के साथ अत्यंत तीव्र वर्षा की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा एवं पिथौरागढ़ जनपदों में भारी वर्षा की संभावना के मद्देनजर येलो अलर्ट घोषित किया गया है।

20 जुलाई को देहरादून, हरिद्वार एवं टिहरी जनपदों के कुछ क्षेत्रों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है, जहां भारी से बहुत भारी वर्षा के साथ कहीं-कहीं अत्यंत भारी वर्षा होने की संभावना है। वहीं देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, टिहरी, उत्तरकाशी एवं पौड़ी के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। 

21 जुलाई को देहरादून एवं बागेश्वर जनपद में भारी से बहुत भारी वर्षा तथा आकाशीय बिजली के साथ अत्यंत तीव्र वर्षा की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। जबकि टिहरी, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, नैनीताल, चमोली एवं पिथौरागढ़ जनपदों में भारी वर्षा की संभावना के कारण येलो अलर्ट प्रभावी रहेगा। 22 जुलाई को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर एवं पिथौरागढ़ जनपदों में भारी वर्षा की संभावना के दृष्टिगत येलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके साथ ही राज्य के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक, आकाशीय बिजली एवं तेज वर्षा का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए सभी जिलाधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने, जिला आपदा परिचालन केंद्रों को 24×7 सक्रिय रखने, राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखने तथा भूस्खलन संभावित मार्गों पर आवश्यक मशीनरी एवं संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। 

सचिव श्री विनोद कुमार सुमन ने प्रदेशवासियों, चारधाम यात्रियों एवं पर्यटकों से अपील करते हुए कहा कि मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों को गंभीरता से लें तथा अनावश्यक यात्रा से बचें। यात्रा पर निकलने से पहले मौसम एवं सड़क की स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त करें। भारी वर्षा के दौरान नदी-नालों, गदेरों एवं जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें तथा भूस्खलन संभावित स्थानों पर विशेष सावधानी बरतें। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन अथवा आपदा नियंत्रण कक्ष को सूचित करें तथा सहायता के लिए 112, 1070 एवं 1077 पर संपर्क करें।

देहरादून:

MDDA  building


मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध निर्माणों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत शुक्रवार को राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो निर्माणों को सील कर दिया। प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम ने स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किए जा रहे बहुमंजिला निर्माण तथा बिना मानचित्र स्वीकृति के चल रहे व्यवसायिक निर्माण पर कार्रवाई की।


 एमडीडीए ने स्पष्ट किया है कि नियमानुसार अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य स्वीकार नहीं किया जाएगा।


*व्योमप्रस्थ कॉलोनी में बहुमंजिला निर्माण पर कार्रवाई*

एमडीडीए की टीम ने जीएमएस रोड स्थित व्योमप्रस्थ कॉलोनी में संगीता गोयल और प्रवीन कुमार गर्ग द्वारा किए जा रहे बहुमंजिला निर्माण का निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि निर्माण कार्य स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किया जा रहा है। नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर प्राधिकरण ने मौके पर ही निर्माण को सील कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि स्वीकृत मानचित्र से हटकर किए गए निर्माण न केवल विकास नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि भविष्य में क्षेत्रीय नियोजन और नागरिक सुविधाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।


*कण्डोगल में बिना स्वीकृति व्यवसायिक निर्माण सील*

इसी क्रम में एमडीडीए की प्रवर्तन टीम ने धारकोट रोड, कण्डोगल थानों क्षेत्र में उमेद अली द्वारा किए जा रहे व्यवसायिक निर्माण का निरीक्षण किया। जांच में सामने आया कि निर्माण कार्य बिना किसी मानचित्र स्वीकृति के संचालित किया जा रहा था। इसके बाद प्राधिकरण ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए निर्माण स्थल को सील कर दिया। अधिकारियों ने संबंधित पक्ष को भविष्य में नियमों के अनुरूप ही कार्य करने के निर्देश भी दिए।


*अवैध निर्माणों पर लगातार नजर*

एमडीडीए का कहना है कि तेजी से हो रहे शहरी विस्तार के बीच अनधिकृत निर्माण और अवैध भूमि विकास की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम नियमित रूप से विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही है और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार बिना स्वीकृति किए जा रहे निर्माण शहर के सुनियोजित विकास में बाधा उत्पन्न करते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।


*निवेश से पहले वैधानिक स्थिति जांचने की अपील*

प्राधिकरण ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी भूखंड की खरीद-फरोख्त या निर्माण कार्य शुरू करने से पहले उसकी वैधानिक स्थिति की जांच अवश्य कर लें। बिना स्वीकृति विकसित की जा रही कॉलोनियों या निर्माण परियोजनाओं में निवेश करने से भविष्य में आर्थिक और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।


नियमों से समझौता नहीं : बंशीधर तिवारी

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग और अनधिकृत निर्माण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नियोजित, सुरक्षित और टिकाऊ शहरी विकास सुनिश्चित करना एमडीडीए की प्राथमिकता है। हाल की कार्रवाई उन लोगों के लिए स्पष्ट संदेश है जो नियमों को दरकिनार कर निर्माण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।


प्रवर्तन अभियान रहेगा जारी : मोहन सिंह बर्निया

एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्रवर्तन टीम लगातार क्षेत्रीय निरीक्षण कर रही है। जहां भी बिना स्वीकृति निर्माण या भूमि विकास कार्य संचालित पाए जा रहे हैं, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि भवन निर्माण और भूमि विकास कार्य केवल निर्धारित मानकों और स्वीकृत नियमों के अनुरूप ही किए जाने चाहिए। प्राधिकरण का अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

 *देहरादून–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना को लेकर पिछले कुछ दिनों से अनेक नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों एवं स्थानीय लोगों द्वारा व्यक्त की जा रही चिंताओं और सुझावों का मैंने गंभीरता से संज्ञान लिया है।*

postponed forest cutting rishikesh highway, CM Dhami


यह परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की एक महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजना है, जिस पर माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों तथा सभी आवश्यक वैधानिक एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों एवं प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कार्यवाही की जा रही थी। परियोजना में वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए लगभग 3.5 किलोमीटर लंबे हाथी अंडरपास तथा छोटे वन्यजीवों के आवागमन के लिए विशेष कल्वर्ट जैसी व्यवस्थाओं का भी प्रावधान किया गया है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष एवं सड़क दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की मृत्यु की घटनाओं में कमी लाने में सहायता मिलेगी, जो अक्सर इस रास्ते में देखा जाता है।


विकास हमारे लिए आवश्यक है, लेकिन जनभावनाओं, पर्यावरण और स्थानीय हितों की अनदेखी कर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। इसी उद्देश्य से प्रमुख सचिव एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी हितधारकों, स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं विशेषज्ञों से पुनः विस्तृत संवाद स्थापित किया जाए।


माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों एवं निर्णय का पूर्ण सम्मान करते हुए आगे की कार्यवाही की जाएगी। *साथ ही, जब तक सभी पक्षों के साथ संतोषजनक सहमति एवं विश्वास का वातावरण नहीं बन जाता, तब तक इस परियोजना के अंतर्गत आने वाले पेड़ों का कटान स्थगित रखा जाएगा।*


मेरे लिए उत्तराखण्ड की प्रकृति, जनभावनाएँ और प्रदेश का विकास—तीनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। हमारी सरकार संवाद, सहमति और व्यापक जनहित के आधार पर ही आगे बढ़ेगी।


https://x.com/i/status/2078410850000670825


उत्तराखंड के कुमायूं क्षेत्र के रामनगर को पौड़ी क्षेत्र के देहरादून के बीच कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए रेल मंत्रालय द्वारा द्विसाप्ताहिक एक्सप्रेस के संचलन को स्वीकृति प्रदान की है। 




क्षेत्रीय जनता की रामनगर से देहरादून के मध्य अंतर नगरीय एक्सप्रेस ट्रेन चलाये जाने की मांग तथा माननीय सांसद श्री अनिल बलूनी जी के विशेष प्रयास को ध्यान में रखते हुए रेल मंत्रालय द्वारा 15310/15309 रामनगर-देहरादून-रामनगर एक्सप्रेस के संचलन को मंजूरी प्रदान की गयी।

 

15310/15309 रामनगर-देहरादून-रामनगर एक्सप्रेस बुधवार एवं शुक्रवार को रामनगर से 05.50 बजे प्रस्थान कर 12.40 बजे देहरादून पहुंचेगी तथा उसी दिन देहरादून से 15.55 बजे प्रस्थान कर 23.30 बजे रामनगर पहुंचेगी। यह एक्सप्रेस ट्रेन अपनी यात्रा मार्ग में काशीपुर, रोशनपुर, पीपलसाना, मुरादाबाद, नजीबाबाद एवं हरिद्वार स्टेशनों पर रुकेगी। रामनगर-देहरादून के मध्य यह पहली एक्सप्रेस ट्रेन है। इस ट्रेन के चलने से क्षेत्रीय जनता की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी हुयी। 


इस ट्रेन के चलने से उत्तराखंड नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून तथा उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद, बिजनौर जिलों के छात्रों, किसानों, व्यावसायियों सहित समाज के सभी वर्गों को लाभ होगा। क्षेत्र के लोगों को प्रदेश की राजधानी देहरादून एवं तीर्थ नगरी हरिद्वार जाकर वहां अपने कार्य कर उसी दिन वापस आने की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। 


इस गाड़ी के चलने से ‘जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान’ जाने वाले वन्यजीव प्रेमियों एवं रामनगर के निकट कोसी नदी के बीच एक विशाल चट्टान पर स्थित गिरजा देवी मंदिर और सीतामढ़ी/सीतावनी जैसे पौराणिक स्थलों के दर्शन हेतु आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा होगी। इसके अतिरिक्त हरिद्वार/देहरादून पहुँच कर बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री, गंगोत्री आदि तीर्थ स्थलों  को जाने में सहूलियत होगी।


इस गाड़ी में वातानुकूलित द्वितीय, वातानुकूलित तृतीय, वातानुकूलित चेयर कार, शयनयान, द्वितीय श्रेणी चेयर कार तथा सामान्य द्वितीय श्रेणी के कोच लगाये जायेंगे।

*मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश — आपदा प्रबंधन में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं होगी।* 


 *बिजली, पेयजल, सड़क और संचार सेवाएं तत्काल बहाल हों, हर जिले में 24×7 अलर्ट मोड पर रहें सभी जिलाधिकारी एवं एजेंसियां।*

 *डेंगू रोकथाम पर युद्धस्तर पर अभियान चलाने के निर्देश, जलभराव और गंदगी पर तत्काल कार्रवाई के आदेश।* 

 *चारधाम यात्रा, मानसून और आपदा प्रबंधन की व्यापक समीक्षा, संवेदनशील क्षेत्रों में हेली सेवा और राहत संसाधन पूरी तरह तैनात रखने के निर्देश।* 


' *जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' का तीसरा चरण 15 सितंबर से नए स्वरूप में होगा शुरू, अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर।* 



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में राज्य के सभी जनपदों से अतिवृष्टि, मानसून की स्थिति, चारधाम यात्रा, डेंगू की रोकथाम तथा आपदा प्रबंधन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर लापरवाही, शिथिलता अथवा उदासीनता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि अधिकारी केवल बैठकों तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें तथा प्रत्येक स्थिति पर सतत निगरानी बनाए रखें।



मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून के दौरान प्रत्येक अधिकारी को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड में रहना होगा। किसी भी प्रकार की आपदा अथवा आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों में एक क्षण की भी देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में होने वाली प्रत्येक महत्वपूर्ण घटना की जानकारी तत्काल मुख्यमंत्री कार्यालय एवं राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष को उपलब्ध कराई जाए तथा राहत एवं पुनर्वास कार्यों में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए।



मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों से जिलेवार सड़कों की स्थिति, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, चारधाम यात्रा मार्गों, यात्रियों की संख्या तथा विभिन्न धामों में व्यवस्थाओं की विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा राज्य की आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों से जुड़ी है। इसलिए यात्रा मार्गों पर यात्रियों की सुरक्षा, सुगम आवाजाही, चिकित्सा सुविधाएं, पेयजल, स्वच्छता तथा यातायात प्रबंधन में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए।



समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने अवगत कराया कि इस वर्ष अब तक 44.65 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम यात्रा कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का राज्य में आगमन उत्तराखण्ड के प्रति लोगों की आस्था का प्रमाण है। सरकार की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक श्रद्धालु सुरक्षित, व्यवस्थित और संतोषजनक यात्रा का अनुभव लेकर लौटे।



मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर भूस्खलन अथवा मार्ग अवरुद्ध होने की संभावना अधिक रहती है, वहां पहले से पर्याप्त संख्या में जेसीबी, पोकलैंड मशीनें, आवश्यक उपकरण तथा तकनीकी दल तैनात किए जाएं ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में तत्काल यातायात बहाल किया जा सके। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में जीपीएस एवं आधुनिक संचार प्रणाली का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।



मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जिलों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, विद्युत, पेयजल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सहित सभी विभाग पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करें। किसी भी विभाग द्वारा यह नहीं कहा जाना चाहिए कि सूचना समय पर नहीं मिली या संसाधन उपलब्ध नहीं थे। प्रत्येक विभाग अपनी जिम्मेदारी तय करते हुए समयबद्ध कार्य सुनिश्चित करे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि किसी भी स्थान पर भारी वर्षा अथवा भूस्खलन के कारण बिजली, पेयजल अथवा संचार सेवाएं बाधित होती हैं तो उनकी बहाली सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर की जाए। आमजन को मूलभूत सुविधाओं से लंबे समय तक वंचित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि आवश्यक होने पर अतिरिक्त टीमें भेजी जाएं और वैकल्पिक व्यवस्थाएं तत्काल लागू की जाएं।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों में खाद्यान्न, दवाइयों, ईंधन तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडारण पहले से सुनिश्चित किया जाए ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।



उन्होंने गर्भवती महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों तथा गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों की विशेष निगरानी के निर्देश देते हुए कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को आवश्यकता के अनुसार समय रहते सुरक्षित स्थानों अथवा चिकित्सा सुविधाओं से युक्त स्थानों पर पहुंचाया जाए। जहां आवश्यकता हो वहां हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध कराई जाए। किसी भी परिस्थिति में चिकित्सा सहायता के अभाव में जनहानि नहीं होनी चाहिए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने संवेदनशील क्षेत्रों में आपातकालीन परिस्थितियों के लिए हेली सेवा उपलब्ध रखने का निर्णय लिया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्यों में तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके।


डेंगू की रोकथाम की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों तथा ग्राम पंचायतों को युद्धस्तर पर अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जलभराव वाले सभी स्थानों की तत्काल पहचान कर वहां पानी की निकासी सुनिश्चित की जाए तथा नियमित फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव और विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाए।



मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल सरकारी विभागों के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। डेंगू के विरुद्ध व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाते हुए स्वयंसेवी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, युवा मंडलों, महिला समूहों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इस अभियान से जोड़ा जाए। प्रत्येक नागरिक को यह समझाया जाए कि अपने घरों एवं आसपास पानी जमा न होने दें।


उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि सभी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू जांच किट, पर्याप्त दवाइयां, रक्त की उपलब्धता, बेड तथा चिकित्सा कर्मियों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मरीजों को उपचार में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होनी चाहिए।


मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आपदा प्रबंधन केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देना चाहिए। अधिकारी जनता के बीच जाएं, समस्याओं का समाधान करें और प्रत्येक स्थिति की व्यक्तिगत निगरानी करें। जनता का विश्वास ही सरकार की सबसे बड़ी पूंजी है और उस विश्वास को बनाए रखना प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है।



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में गत वर्ष आई आपदाओं से संबंधित जिन कार्यों को पूरा किया जाना था, उनमें से कोई भी कार्य लंबित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपदा के बाद पुनर्निर्माण एवं सुरक्षात्मक कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी भविष्य में बड़ी समस्या का कारण बन सकती है। सभी जिलाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि पिछले वर्ष स्वीकृत सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण हों तथा उनकी अद्यतन प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से शासन एवं मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।


मुख्यमंत्री ने अल्मोड़ा नगर में संचालित मास्टर प्लान के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से प्रगति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य के सभी जनपदों में 15 अक्टूबर तक पूर्ण होने वाले सभी विकास कार्यों की विस्तृत सूची एवं उनकी वर्तमान प्रगति तत्काल मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। जिन कार्यों में बाधाएं हैं, उन्हें तत्काल चिन्हित कर उनका समाधान किया जाए।


मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राज्य सरकार द्वारा की गई सभी मुख्यमंत्री घोषणाओं की नियमित समीक्षा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक घोषणा समयबद्ध ढंग से धरातल पर दिखाई देनी चाहिए। जनता के बीच की गई घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका लाभ समय पर आम नागरिकों तक पहुंचे। जिन विभागों में कार्यों की गति धीमी है, वे अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाएं और व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करें।


बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्यभर में संचालित "जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार" अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम ने सरकार और जनता के बीच संवाद को और अधिक मजबूत किया है। उन्होंने निर्देश दिए कि इस अभियान का तीसरा चरण आगामी 15 सितंबर से नए स्वरूप और अधिक प्रभावी तरीके से प्रारंभ किया जाएगा। इसके लिए अभी से विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए ताकि अधिक से अधिक लोगों को योजनाओं का लाभ मिल सके।


मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल शिविर लगाना नहीं है, बल्कि सरकार को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। प्रत्येक पात्र व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का लाभ मिले, उसकी समस्याओं का मौके पर समाधान हो तथा प्रमाण पत्र, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, राजस्व संबंधी सेवाएं और अन्य सुविधाएं सरलता से उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि यही सुशासन की वास्तविक पहचान है।


मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिविरों को केवल औपचारिकता न बनाया जाए। प्रत्येक शिविर का परिणाम धरातल पर दिखाई देना चाहिए। आमजन को यह महसूस होना चाहिए कि सरकार स्वयं उनके द्वार तक पहुंची है। उन्होंने कहा कि अधिकारी जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें।


मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जनता के प्रति उत्तरदायी बनना ही सुशासन की पहली शर्त है। प्रत्येक अधिकारी अपने दायित्वों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करे। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता पाई गई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।


बैठक में मुख्यमंत्री ने मानसून के दौरान सभी पुलों का सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन पुलों की स्थिति कमजोर है, वहां तत्काल आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाएं तथा आवश्यकता पड़ने पर यातायात को नियंत्रित किया जाए। किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।


उन्होंने नगर निकायों एवं संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि सभी शहरों, कस्बों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में नालों की विशेष सफाई अभियान चलाया जाए ताकि जलभराव की समस्या उत्पन्न न हो। जहां भी जल निकासी बाधित है, वहां तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान जलभराव से होने वाली समस्याओं को हर हाल में रोका जाए।


मुख्यमंत्री ने दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में वैकल्पिक संचार व्यवस्था विकसित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्थान पर प्राकृतिक आपदा के कारण मोबाइल अथवा अन्य संचार सेवाएं बाधित होती हैं तो तत्काल वैकल्पिक संचार माध्यम उपलब्ध कराए जाएं ताकि राहत एवं बचाव कार्यों में कोई बाधा न आए।


उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में एम्बुलेंस सेवाएं, जीवनरक्षक दवाइयां, चिकित्सकीय उपकरण तथा आपातकालीन संसाधन पूरी तरह तैयार रहें। स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करें।


 *मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं सरकार द्वारा विभिन्न जन सेवाओं के लिए चलाए जा रहे दूरभाष नंबरो पर संपर्क कर व्यवस्थाओं की जांच करते  हैं और आवश्यकता पड़ने पर किसी भी समय समीक्षा करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार प्रत्येक परिस्थिति पर सतत निगरानी बनाए हुए है और आमजन की सुरक्षा एवं सुविधाओं  के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।* 



बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने हरेला पर्व का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से कहा कि "एक पेड़ मां के नाम" अभियान को व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाए। सभी अधिकारी स्वयं पौधारोपण करें तथा समाज को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दें। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक दायित्व है और इसमें प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें बल्कि नियमित रूप से ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें। उन्होंने कहा कि जनता को यह भरोसा होना चाहिए कि प्रशासन हर कठिन परिस्थिति में उनके साथ खड़ा है।


उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि विभागीय समन्वय को और अधिक मजबूत बनाया जाए। किसी भी आपदा अथवा आपात स्थिति में सभी एजेंसियां एक टीम के रूप में कार्य करें ताकि राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाई जा सके और जनधन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आपदा आने के बाद राहत कार्य करना नहीं है, बल्कि आपदा से पूर्व प्रभावी तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया और समयबद्ध पुनर्वास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रत्येक विभाग को हर समय सतर्क रहना होगा। किसी भी चुनौती का सामना केवल बेहतर समन्वय, त्वरित निर्णय और जिम्मेदार कार्यशैली से ही किया जा सकता है।



मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मानसून की स्थिति पर राज्य सरकार लगातार नजर बनाए हुए है। सभी जिलाधिकारी अपने-अपने जनपदों में नियमित रूप से फील्ड भ्रमण करें तथा संवेदनशील क्षेत्रों का स्वयं निरीक्षण करें। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी आपदा अथवा आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए "गोल्डन ऑवर" का विशेष ध्यान रखा जाए और प्रभावित क्षेत्रों तक प्रशासन की पहुंच तत्काल सुनिश्चित हो।



मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि आमजन की समस्याओं का समाधान केवल फाइलों के माध्यम से नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास बनाए रखना प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है और शासन की प्राथमिकता भी। उन्होंने दोहराया कि जनता की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा कोई भी विषय लंबित नहीं रहना चाहिए।




मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक जिले के कार्यों की नियमित समीक्षा करेगी। जिन अधिकारियों द्वारा उत्कृष्ट कार्य किया जाएगा, उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा, वहीं अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनहित के मामलों में किसी भी स्तर पर शिथिलता, उदासीनता अथवा लापरवाही को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा |


मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों, ग्राम प्रधानों, महिला मंगल दलों, युवक मंगल दलों तथा सामाजिक संगठनों के साथ नियमित समन्वय स्थापित करें, ताकि आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि समाज की सहभागिता से ही आपदा प्रबंधन को अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।



मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक तक समय पर सहायता पहुंचाना है। इसके लिए सभी विभागों को उत्तरदायित्व, संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय क्षमता के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन का प्रत्येक अधिकारी स्वयं को जनता के प्रति जवाबदेह समझे और अपने दायित्वों का पूर्ण निष्ठा से निर्वहन करे।



बैठक में कैबिनेट मंत्री श्री मदन कौशिक एवं श्री सतपाल महाराज, आपदा प्रबंधन राज्य सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष श्री विनय कुमार रोहिल्ला, मुख्य सचिव श्री विनोद कुमार सुमन, सचिव श्री विनय शंकर पांडे, जिलाधिकारी देहरादून श्री आशीष चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून, अपर सचिव श्री बंशीधर तिवारी, श्री विनीत कुमार सहित विभिन्न विभागों के सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। वर्चुअल माध्यम से राज्य के सभी जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, आपदा प्रबंधन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, विद्युत, पेयजल, नगर निकायों तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी  मुख्यमंत्री आवास में राज्य के सभी जनपदो से अति वृष्टि, डैंगू से रोकथाम सहित मानसून की स्थिति की जानकारी लेते हुए आपदा प्रबन्धन की समीक्षा कर रहे है | 

बैठक मे आपदा प्रबन्धन राज्य सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष श्री विनय कुमार रोहिल्ला, समन्धित विभागो के सचिव, वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारी, आपदा प्रबन्धन विभाग के अधिकारी उपस्थित हैं |


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी  मुख्यमंत्री आवास में राज्य के सभी जनपदो से अति वृष्टि, डैंगू से रोकथाम सहित मानसून की स्थिति की जानकारी लेते हुए आपदा प्रबन्धन की समीक्षा की है | 




 देहरादून:

देहरादून जनपद में 17 जुलाई को भारी वर्षा के चलते एवं 18 जुलाई को भारी वर्षा होने की संभावना की दृष्टिगत जिलाधिकारी देहरादून द्वारा जनपद देहरादून के समस्त कक्षा 1 से 11 12 तक संचालित स्कूलों में आंगनबाड़ी में घोषित किया गया है।

holiday on 18 july,2026



*देहरादून:

loudspeaker removed from religious places dehradun


*सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के शत-प्रतिशत अनुपालन हेतु एसएसपी देहरादून के निर्देशों पर दून पुलिस ने चलाया अभियान*

*बिना अनुमति एवं निर्धारित मानकों के विपरीत संचालित लाउडस्पीकरों पर की गई कार्रवाई।*

*निर्धारित मानकों से अधिक ध्वनि में बजने वाले लाउडस्पीकर धार्मिक स्थलों से गये हटवाये*

 *भविष्य में नियमों के उल्लंघन पर संबंधित व्यक्तियों/संस्थानो के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की दी चेतावनी*



माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण एवं सार्वजनिक शांति व्यवस्था बनाए रखने के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराने हेतु एसएसपी देहरादून के निर्देशों पर दून पुलिस द्वारा विशेष अभियान चलाया गया।


अभियान के दौरान जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों में पुलिस टीमों द्वारा पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड की टीम के साथ धार्मिक स्थलों पर लगाए गए ध्वनि विस्तारक यंत्रों का निरीक्षण किया गया तथा निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज में संचालित होने वाले  लाउडस्पीकरों को 43 धार्मिक स्थलों से हटवाया गया तथा भविष्य में बिना सक्षम अनुमति एवं निर्धारित ध्वनि मानको का पालन किए बिना लाउडस्पीकर संचालित न करने के निर्देश दिए गए। 


इस दौरान संबंधित व्यक्तियों को ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियमों, माननीय न्यायालय के आदेशों तथा शासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने हेतु जागरूक किया गया। साथ ही स्पष्ट किया गया कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित अधिनियमों एवं नियमों के अंतर्गत विधिक कार्यवाही की जाएगी।

 


उत्तरकाशी:


पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण ने जनपद के बाड़ागड्डी क्षेत्र के कुरोली, किशनपुर एवं अलेथ गांवों में आयोजित पारम्परिक फूलोई मेले में प्रतिभाग कर क्षेत्र के आराध्य देवताओं की पावन डोलियों के दर्शन एवं देव आशीर्वाद प्राप्त किया। 

इस अवसर पर उन्होंने समस्त क्षेत्रवासियों को फूलोई मेले की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई प्रेषित की।


इससे पूर्व उन्होंने धनारी क्षेत्र के फोल्ड गांव में आयोजित ध्याणी मिलन समारोह तथा सिरोर गांव के पारम्परिक मेले में भी सहभागिता कर ग्रामीणों से आत्मीय भेंट की और उन्हें शुभकामनाएं दीं।


इस दौरान श्री सजवाण ने क्षेत्र के आराध्य भगवान श्री हरि महाराज, भगवान नागराजा देवता, माँ खण्डद्वारी, हूण देवता एवं भगवान श्री छत्र घंडियाल देवता के पावन सानिध्य में आयोजित धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में श्रद्धापूर्वक सहभागिता करते हुए देव आशीर्वाद ग्रहण किया।


पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण ने कहा कि फूलोई मेला उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक संस्कृति, धार्मिक आस्था, प्रकृति के प्रति श्रद्धा और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। ऐसे पारम्परिक मेले हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के साथ-साथ समाज को आपसी भाईचारे और एकता के सूत्र में बांधने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि मेले में ग्रामीणों के साथ आत्मीय संवाद, पारम्परिक रासो नृत्य और लोक संस्कृति की मनमोहक झलक ने पूरे वातावरण को श्रद्धा, उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा से ओत-प्रोत कर दिया।


उन्होंने कहा कि हमारी लोक परम्पराएं और सांस्कृतिक धरोहर ही हमारी वास्तविक पहचान हैं। इनका संरक्षण और संवर्धन हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी गौरवशाली संस्कृति, परम्पराओं और संस्कारों से प्रेरणा प्राप्त करती रहें।


इस दौरान ग्रामीणों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों से विभिन्न जनसरोकारों पर भी चर्चा हुई। क्षेत्रवासियों ने श्री सजवाण के जनहितैषी कार्यों, सहज एवं मृदुभाषी व्यक्तित्व तथा विकासोन्मुख सोच की सराहना करते हुए उनके प्रति अपना विश्वास व्यक्त किया। ग्रामीणों ने क्षेत्र के समग्र विकास और जनभावनाओं के अनुरूप नेतृत्व की आवश्यकता पर बल देते हुए श्री सजवाण के प्रति व्यापक समर्थन और सकारात्मक जनभावना को भी व्यक्त किया।


अंत में श्री सजवाण ने समस्त आराध्य देवताओं से क्षेत्रवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि देवताओं की असीम कृपा पूरे क्षेत्र पर सदैव बनी रहे तथा हमारी सांस्कृतिक परम्पराएं इसी प्रकार पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत बनी रहें।

  देहरादून :


कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले हुई बड़ी दुर्घटना 



राहुल गांधी के कार्यक्रम स्थल पर कांग्रेसी नेता के ऊपर  लोहे का बड़ा पिलर  गिर जाने से अमर सिंह मेहता  गंभीर घायल  हुए।

गंभीर हालत में  उन्हें सीएमआई अस्पताल में उन्हें सीएमआई अस्पताल में भर्ती  किया गया जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित  कर दिया।

CMI हॉस्पिटल के न्यूरो सर्जन डाक्टर महेश कुड़ियाल ने इसकी पुष्टी की।

  कांवड़ मेला 2026 के सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित आयोजन हेतु डीजीपी ने की उच्चस्तरीय समीक्षा- सुरक्षा, यातायात, तकनीकी निगरानी एवं अंतरराज्यीय समन्वय को लेकर दिए विस्तृत दिशा-निर्देश* 


*अभेद्य सुरक्षा चक्र में रहेगा कांवड़ मेला, ATS, BDS, STF और SDRF रहेंगी 24x7 मुस्तैद, ड्रोन व CCTV से होगी राउंड-द-क्लॉक मॉनिटरिंग, साइबर कमांडो सोशल मीडिया एवं साइबर स्पेस पर रखेंगे पैनी नजर*

 *उत्तराखंड पुलिस कांवड़ मेले के सफल संचालन हेतु पूरी तरह सतर्क और प्रतिबद्ध: डीजीपी दीपम सेठ

kanwad  mela  2026 meeting  , DGP


आगामी *श्रावण कांवड़ मेला-2026* के सुरक्षित, शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित आयोजन के दृष्टिगत आज *पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड श्री दीपम सेठ* की अध्यक्षता में पुलिस मुख्यालय स्थित सभागार में एक *उच्चस्तरीय बैठक* आयोजित की गई। बैठक में पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कांवड़ यात्रा से संबंधित जनपदों (देहरादून, हरिद्वार, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, उत्तरकाशी एवं रुद्रप्रयाग), जीआरपी के पुलिस अधीक्षकों, सेनानायक एसडीआरएफ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रतिभाग किया।


बैठक में कांवड़ मेले की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए पुलिस महानिदेशक ने कहा कि कांवड़ मेला एक विशाल और अति-संवेदनशील धार्मिक आयोजन है। *कांवड़ियों की सुरक्षा, सुगम आवागमन, प्रभावी यातायात प्रबंधन एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखना उत्तराखण्ड पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है।* उन्होंने सभी अधिकारियों को समय रहते समुचित तैयारियां पूर्ण करने तथा सम्बन्धित राज्यों व विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करने हेतु निर्देशित किया।


 *पुलिस महानिदेशक महोदय  द्वारा गोष्ठी में निम्न दिशा-निर्देश दिए गए :*

▪️ कांवड़ यात्रा मार्गों पर स्थित संवेदनशील एवं अत्यधिक भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों का आकलन कर वहां पर्याप्त संख्या में पुलिस बल, रिजर्व फोर्स एवं महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। *कांवड़ियों की सुरक्षा के दृष्टिगत एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS), बम निरोधक दस्ता (BDS), एसटीएफ तथा अभिसूचना इकाइयों* की टीमों को प्रमुख स्थलों पर सक्रिय रखा जाए तथा संदिग्ध व्यक्तियों एवं गतिविधियों पर सतत निगरानी रखी जाए। *रैपिड रिस्पॉन्स टीम* को हर समय सक्रिय रखा जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्यवाही की जा सके। इसके साथ ही सभी प्रमुख *स्नान घाटों पर गोताखोरों तथा SDRF* की टीमें तैनात रहें, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य संचालित किया जा सके।


▪️ कांवड़ यात्रा मार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग, वैकल्पिक मार्गों, पार्किंग स्थलों, होल्डिंग एरिया एवं डायवर्जन का *विस्तृत ट्रैफिक प्लान* तैयार किया जाए। इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार *उत्तराखण्ड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली एवं अन्य सीमावर्ती राज्यों में फ्लैक्स, होर्डिंग, डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं सोशल मीडिया के माध्यम से* किया जाए, ताकि श्रद्धालु पूर्व से ही निर्धारित यातायात व्यवस्था से अवगत हो सकें। साथ ही, किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए कंटिजेंसी प्लान भी पूर्व से तैयार रखा जाए। यात्रा के दौरान भारी वाहनों के समयबद्ध डायवर्जन, अस्थायी पुलिस चौकियों की स्थापना, मोबाइल पेट्रोलिंग तथा पैदल एवं डाक कांवड़ियों के लिए निर्धारित मार्ग से आवागमन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही स्थानीय नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक यातायात व्यवस्थाओं का प्रभावी संचालन किया जाए।


▪️ सम्पूर्ण कांवड़ यात्रा मार्ग के साथ ही रेलवे परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले *कांवड़ मेला क्षेत्र को सुपर जोन, जोन एवं सेक्टरों* में विभाजित कर सुव्यवस्थित ढंग से पुलिस बल का व्यवस्थापन किया जाए, ताकि रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म, फुटओवर ब्रिज, प्रतीक्षालय एवं ट्रेनों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण एवं निर्बाध आवागमन सुनिश्चित किया जा सके।


▪️ सुरक्षा की दृष्टि से सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों, घाटों, कांवड़ मार्गों एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में *सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन के माध्यम से 24x7 निगरानी* सुनिश्चित की जाए। पार्किंग स्थलों, होल्डिंग एरिया एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों का *फायर सेफ्टी ऑडिट* पूर्व में ही पूर्ण करा लिया जाए तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने हेतु पर्याप्त अग्निशमन संसाधन उपलब्ध रखे जाएं।


▪️ कांवड़ यात्रा के दौरान *सुरक्षा मानकों का कड़ाई से अनुपालन* सुनिश्चित कराया जाए। निर्धारित मानकों के अनुरूप कांवड़ के आकार का पालन करने, रेल की छतों पर यात्रा ना करने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाये। साथ ही ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए डीजे व लाउडस्पीकरों का उपयोग माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित मानक डेसीबल सीमा के अनुरूप हो। इसके लिए राज्य की सीमाओं एवं कांवड़ यात्रा मार्गों पर नियमित चेकिंग की जाए।


▪️ सोशल मीडिया सेल के माध्यम से कांवड़ यात्रा से संबंधित यातायात, डायवर्जन, मौसम, सुरक्षा एवं अन्य आवश्यक सूचनाएं नियमित रूप से साझा की जाएं तथा व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने हेतु उन्हें सीमावर्ती राज्यों की पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल को टैग करते हुए प्रसारित किया जाए। साथ ही *सोशल मीडिया पर सतत निगरानी* रखते हुए किसी भी भ्रामक अफवाह या आपत्तिजनक सामग्री का तत्काल खंडन कर वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। *साइबर कमाण्डोज की विशेष टीम हरिद्वार में कैम्प कर सोशल मीडिया एवं साइबर स्पेस पर 24×7 निगरानी रखेगी तथा किसी भी साइबर या सोशल मीडिया संबंधी चुनौती पर त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करेगी।*


▪️ अंतरराज्यीय समन्वय एवं आपात तैयारी के तहत *सीमावर्ती राज्यों एवं जनपदों के पुलिस अधिकारियों के साथ नियमित समन्वय बैठकें* आयोजित की जाएं तथा इंटेलिजेंस इनपुट्स का त्वरित आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जाए।


▪️ कांवड़ मेले के दौरान *ड्यूटीरत पुलिस कर्मियों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान* दिया जाए। उनकी तैनाती स्थलों के निकट ही आवास, भोजन, पेयजल, विश्राम एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि उनका मनोबल और कार्यक्षमता बनी रहे।


▪️ श्रद्धालुओं के साथ सम्मानजनक एवं संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित किया जाए तथा असामाजिक, शरारती एवं साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले तत्वों पर विशेष निगरानी रखी जाए। *कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वालों के विरुद्ध तत्काल एवं कठोर वैधानिक कार्यवाही* सुनिश्चित की जाए।

 

*डीजीपी महोदय ने कहा कि उत्तराखंड पुलिस पूर्ण समर्पण, सतर्कता एवं सेवा भावना से कार्य कर रही है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कांवड़ मेला 2026 शांति, सुरक्षा और समन्वय के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हो।*


*बैठक में अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था- श्री वी. मुरूगेशन, अपर पुलिस महानिदेशक, प्रशासन- श्री ए. पी. अंशुमान, पुलिस महानिरीक्षक, दूरसंचार/फायर सर्विस- श्रीमती विम्मी सचदेवा, पुलिस महानिरीक्षक/निदेशक यातायात- श्री कृष्ण कुमार वी.के, पुलिस महानिरीक्षक, एसटीएफ- श्री नीलेश आनन्द भरणे, पुलिस महानिरीक्षक, कार्मिक- श्री सुनील कुमार मीणा, पुलिस महानिरीक्षक, एसडीआरएफ/कुम्भ मेला- श्री योगेन्द्र सिंह रावत, पुलिस महानिरीक्षक, मुख्यालय/पी एंड एम- श्री बरिन्दरजीत सिंह, पुलिस उप महानिरीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था- श्री धीरेन्द्र गुंज्याल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ- श्री अजय सिंह, पुलिस अधीक्षक, अभिसूचना- श्री मणीकान्त मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारीगण उपस्थित रहे।*


 फलदार पौधों का किया निःशुल्क वितरण*


*प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधारोपण और संरक्षण की अपील, हरेला पर्व की दी शुभकामनाएं*



देहरादून,


 प्रदेश के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने उत्तराखण्ड की समृद्ध पर्यावरणीय एवं सांस्कृतिक परंपरा के प्रतीक हरेला पर्व की पूर्व संध्या पर अपने कैंप कार्यालय में उद्यान विभाग द्वारा आयोजित निःशुल्क फलदार पौधा वितरण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों एवं आम नागरिकों ने भाग लिया। इस दौरान आम, लीची, अमरूद, नींबू, अनार, कटहल सहित विभिन्न फलदार, सगंध एवं औषधीय प्रजातियों के पौधों का निःशुल्क वितरण किया गया।


इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरेला उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराता है। केवल पौधारोपण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों का संरक्षण और संवर्धन भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।


कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि पिछले वर्ष हरेला पर्व के अवसर पर उद्यान विभाग द्वारा 9 लाख से अधिक फलदार पौधों का रोपण किया गया था। इस वर्ष इस अभियान का विस्तार करते हुए 10 लाख फलदार पौधों, 50 हजार चाय के पौधों तथा 50 हजार रेशम विभाग के पौधों सहित कुल 11 लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस राज्यव्यापी अभियान का शुभारंभ आज देहरादून जनपद से किया गया। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि फलदार पौधों को प्राथमिकता देने का उद्देश्य यह है कि लोग फलों के प्रति स्वाभाविक लगाव के कारण इन पौधों की नियमित देखभाल करते हैं, जिससे पौधों के जीवित रहने की संभावना भी बढ़ती है और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों को भविष्य में आर्थिक एवं पोषण संबंधी लाभ भी प्राप्त होगा। कृषि मंत्री ने प्रदेशवासियों से हरेला पर्व पर अधिक से अधिक पौधे लगाने, उनका संरक्षण करने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित और स्वच्छ उत्तराखण्ड के निर्माण में सहभागी बनने का आह्वान किया।


इस अवसर पर कैंट विधायक सविता कपूर, सरकार में दायित्वधारी ज्योति कोटिया,  निदेशक उद्यान डॉ आरके सिंह, निदेशक कृषि दिनेश कुमार, मंडल अध्यक्ष प्रदीप रावत, मंडल अध्यक्ष राजीव गुरुंग सहित अन्य अधिकारीगण एवं कृषकगण उपस्थित रहे।


*एमडीडीए का बड़ा शिकंजा, 30 बीघा अवैध प्लॉटिंग ध्वस्त, कई निर्माणों पर सीलिंग*



 

चुनाव ड्यूटी ने बढ़ाई मुश्किलें  बच्चों की पढ़ाई पर संकट, विभाग के 


ऋषिकेश :



 ग्राम पंचायत जोगीवाला माफी स्थित प्राथमिक विद्यालय साहबनगर पिछले छह माह से मात्र एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहा है। जनवरी 2026 में एक शिक्षिका के सेवानिवृत्त होने के बाद से विद्यालय में केवल एक ही शिक्षक कार्यरत हैं, जिनके कंधों पर शिक्षण कार्य के साथ-साथ सभी सरकारी अभिलेख, विभागीय कार्य और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी हैं।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 14 और 15 जुलाई को उप प्रधान चुनाव के लिए इसी एकमात्र शिक्षक की चुनाव ड्यूटी लगा दी गई। ऐसे में विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने वाला कोई शिक्षक उपलब्ध नहीं रहेगा, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होना तय है।

इस संबंध में क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व ग्राम प्रधान शोबन सिंह कैन्तुरा ने बताया कि उन्होंने कुछ दिन पूर्व ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों से विद्यालय में एक अतिरिक्त शिक्षक की तत्काल नियुक्ति की मांग की थी। 

 इसके लिए विद्यालय के शिक्षक के साथ मिलकर निजी स्तर पर एक शिक्षिका भी रखी गई थी । जिन्होंने गत वर्ष तक बच्चों को पढ़ाया। लेकिन वर्तमान में एकमात्र शिक्षक होने के कारण पूरी व्यवस्था चरमरा गई है। 

उन्होंने  शिक्षा विभाग से मांग की है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए विद्यालय में तत्काल एक अतिरिक्त शिक्षक की नियुक्ति की जाए और एकमात्र शिक्षक को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने से बचाया जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो।


CM Dhami reached malagrAm on harela festival


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में संचालित पेयजल, पर्यटन, सिंचाई योजनाओं के क्रियान्वयन एवं पौड़ी गढ़वाल में एन.सी.सी. अकादमी स्थापना के लिये ₹ 38  करोड़ की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है।


मुख्यमंत्री ने नाबार्ड वित्तपोषण के अंतर्गत चमोली एवं अल्मोड़ा जनपदों में सिंचाई विभाग की 5 योजनाओं के लिए ₹12.83 करोड़ सहित सिंचाई विभाग की 7 अन्य योजनाओं के लिए ₹15.06 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति का अनुमोदन प्रदान किया है।


मुख्यमंत्री द्वारा जनपद चम्पावत के विभिन्न स्थानों पर 50 हैंडपंप तथा 31 सोलर पैनलों की स्थापना के लिये ₹3.98 करोड़ जनपद नैनीताल स्थित पर्यटक आवास गृह, मुक्तेश्वर के उच्चीकरण कार्य के लिए ₹4.96 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति प्रदान करने के साथ ही जनपद पौड़ी में एन.सी.सी. अकादमी की स्थापना के लिए संशोधित आगणन ₹50.00 करोड़ के सापेक्ष प्रथम किश्त के रूप में ₹1 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


*मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के सिविल एवं पारिवारिक पेंशनरों के लिए महंगाई राहत की दरों में वृद्धि का किया अनुमोदन*


मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के पांचवें एवं छठवें केन्द्रीय वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुसार लागू वेतन बैंड एवं ग्रेड वेतन में पेंशन प्राप्त कर रहे सिविल एवं पारिवारिक पेंशनरों के लिए महंगाई राहत की दरों में वृद्धि करते हुए 1 जनवरी 2026 से पांचवें वेतनमान के पेंशनरों के लिए महंगाई राहत 474 प्रतिशत से बढ़ाकर 484 प्रतिशत तथा छठवें वेतनमान के पेंशनरों के लिए 257 प्रतिशत से बढ़ाकर 262 प्रतिशत प्रतिमाह किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है। 


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास, आधारभूत संरचना को मजबूत बनाने, पर्यटन को बढ़ावा देने, किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को सभी स्वीकृत योजनाओं का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए है।



*कार्यालय जिला सूचना अधिकारी, पौड़ी गढ़वाल*

*हरेला पर्व पर मालाग्राम पहुंचे मुख्यमंत्री, सघन पौधरोपण कर दिया हरित संरक्षण का संदेश*

पौड़ी:


हरेला पर्व के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को जनपद पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर विकासखंड स्थित मालाग्राम पहुंचकर सघन पौधरोपण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित उत्तराखंड का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने 'श्री धन्वंतरि धाम हर्बल वर्ल्ड हिमालय' का विस्तृत भ्रमण कर वहां संरक्षित दुर्लभ औषधीय वनस्पतियों, अनुसंधान गतिविधियों तथा आयुर्वेद आधारित नवाचारों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने परिसर स्थित ध्यान कुटी का भी निरीक्षण किया।


मुख्यमंत्री ने भ्रमण के दौरान उत्तराखंड की समृद्ध जैव विविधता, हिमालयी औषधीय वनस्पतियों और पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष फोकस किया। उन्होंने कहा कि राज्य की यह प्राकृतिक धरोहर पूरे विश्व के लिए अमूल्य है तथा इसका संरक्षण और वैज्ञानिक शोध वर्तमान समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में किए जा रहे प्रयास पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने के साथ-साथ औषधीय पौधों के संवर्धन, आयुर्वेद आधारित अनुसंधान, हर्बल पर्यटन तथा स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित करेंगे।


मालाग्राम स्थित 'श्री धन्वंतरि धाम हर्बल वर्ल्ड हिमालय' देश का अपनी तरह का एक अनूठा हर्बल पार्क है, जहां देश के विभिन्न राज्यों एवं हिमालयी क्षेत्रों से लाई गई दुर्लभ जड़ी-बूटियों और औषधीय पौधों का वैज्ञानिक ढंग से संरक्षण एवं संवर्धन किया जा रहा है। यह परिसर पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और आधुनिक शोध के समन्वय का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है।



कार्यक्रम में पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल, यमकेश्वर विधायक रेनू बिष्ट, जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार, भाजपा जिलाध्यक्ष राजगौरव नौटियाल, उपजिलाधिकारी चतर सिंह चौहान सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

देहरादून ;

name verification and changing in voter list


जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने अवगत कराया कि फोटोयुक्त विधानसभा निर्वाचक नामावली के 01 जुलाई, 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर पुनरीक्षण कार्य के अंतर्गत निर्वाचक नामावली का प्रारूप प्रकाशन 14 जुलाई, 2026 को किया गया है। इसके पश्चात 14 जुलाई से 13 अगस्त, 2026 तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने, संशोधन एवं अन्य आवश्यक सुधार के लिए दावे एवं आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी।

उन्होंने बताया कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए पात्र नागरिक संबंधित मतदाता पंजीकरण अधिकारी, सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारी एवं बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) से संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त नागरिक निर्वाचन आयोग की वेबसाइट https://voters.eci.gov.in⁠ अथवा Voter Helpline App के माध्यम से भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की है कि वे अपने नाम की पुष्टि मतदाता सूची में अवश्य कर लें। यदि किसी मतदाता का नाम छूट गया है, नाम, पता अथवा अन्य विवरण में संशोधन आवश्यक है तो निर्धारित प्रपत्रों के माध्यम से आवेदन करें।

उन्होंने बताया कि नए मतदाता बनने के लिए प्रपत्र-6 में आवेदन किया जा सकता है।

मृतक, स्थानांतरित अथवा अपात्र मतदाताओं के नाम हटाने के लिए प्रपत्र-7 भरा जा सकता है।

मतदाता सूची में किसी प्रविष्टि के संशोधन हेतु प्रपत्र-8 में आवेदन किया जा सकता है।

जिलाधिकारी ने सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं आम नागरिकों से अपील की है कि वे निर्वाचक नामावली को अधिक शुद्ध एवं त्रुटिरहित बनाने में सहयोग प्रदान करें। उन्होंने कहा कि सशक्त लोकतंत्र के लिए प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में होना आवश्यक है।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विशेष अभियान के दौरान पात्र नागरिकों, युवाओं एवं नए मतदाताओं के नाम निर्वाचक नामावली में शामिल कराने हेतु व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए तथा प्राप्त आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।


जिलाधिकारी/ जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने नागरिकों से मतदाता सूची में नाम की पुष्टि करने की अपील की

भारत निर्वाचन आयोग एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखण्ड के निर्देशों के क्रम में जनपद देहरादून में फोटोयुक्त विधानसभा निर्वाचक नामावलियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत मतदाता सूची से संबंधित कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है।



 सीएम धामी बोले - देहरादून साइंस सिटी बनेगी विज्ञान और नवाचार का राष्ट्रीय केंद्र**

science city ddun CM DHAmi


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) में साइंस सिटी परियोजना के निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने के साथ ही विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति (STIP) परिसंवाद कार्यक्रम में भी प्रतिभाग किया। 


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देहरादून साइंस सिटी का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में ये साइंस सिटी केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के लिए विज्ञान, नवाचार और अनुसंधान का अग्रणी केंद्र बनकर उभरेगी। उन्होंने कहा कि इस साइंस सिटी में हमारे युवाओं को अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होंगी, जो उनके सपनों और विचारों को नई उड़ान देने का कार्य करेंगी। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में 'विज्ञान सेतु' परिकल्पना के अंतर्गत सामुदायिक विज्ञान रेडियो 'विज्ञान वाणी' (88.8 मेगाहर्ट्ज), 'विज्ञान दृश्यम' तथा 'विज्ञान धारा' का लोकार्पण करते हुए कहा कि इन प्रयासों से प्रयोगशालाओं के जटिल ज्ञान को उत्तराखंड के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। 


*तकनीकी में नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर*

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय प्रदेश में हरेला सप्ताह मनाया जा रहा है। हरेला केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी आस्था, पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारे दायित्व का "प्रतीक पर्व" भी है। उन्होंने कहा कि आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय संकट की चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में हरेला पर्व पूरी दुनिया को ये संदेश देता है कि विकास और प्रकृति साथ-साथ चल सकते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज पूरी दुनिया एक अभूतपूर्व तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है। अब रोबोट्स कारखानों से लेकर अस्पतालों तक में काम कर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसानी क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है। वहीं, डेटा साइंस, ड्रोन टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और बायो-टेक्नोलॉजी जैसी उभरती हुई प्रौद्योगिकियां आज दुनिया की दिशा और दशा तय कर रही हैं। ऐसे समय में, हमें इस बदलाव को न केवल स्वीकार करना है, बल्कि इसका नेतृत्व भी करना है। 


*उत्तराखंड की बेस्ट प्रैक्टिस को मिल रही सराहना*

 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज देश के कई राज्य उत्तराखंड को कई क्षेत्रों में बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में देख रहे हैं। सिलल्यारा टनल में फंसे श्रमिकों का सुरक्षित निकालने का अभियान इसमें शामिल है। जिसे ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में पेश किया गया। इसीलिए सरकार ने अब से हर वर्ष 28 नवंबर को आपदा प्रबंधन दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं में अद्भुत प्रतिभा और मेधा है। इसलिए अब हमें प्रदेश में ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है जहाँ हमारी इस युवा प्रतिभा को सही दिशा मिले ताकि वे वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकें। 


*विकसित भारत का आधार- विज्ञान, अनुसंधान*

 

मुख्यमंत्री  ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने देश के सामने "विकसित भारत 2047" का जो 'अमृत संकल्प' रखा है, उसकी सबसे मजबूत आधारशिला विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान ही है। इसीलिए प्रधानमंत्री जी ने 'जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान' के नारे में 'जय अनुसंधान' जोड़कर देश के वैज्ञानिकों और युवाओं को एक नया मंत्र दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और नेशनल क्वांटम मिशन जैसे बड़े अभियानों के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री के प्रयासों से भारत में अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। वहीं, सेमीकंडक्टर मिशन के माध्यम से भारत अब इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर होने की राह पर है। 

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी उत्तराखंड को विज्ञान, तकनीक और आधुनिक अनुसंधान का एक वैश्विक हब बनाने के लिए पूरी तरह संकल्पित होकर कार्य कर रही है। इसी दिशा में राज्य की पहली 'विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति' लागू हो चुकी है। इस नीति का उद्देश्य एक ऐसा आत्मनिर्भर इकोसिस्टम विकसित करना है जहाँ हमारा युवा केवल रोजगार खोजने वाला न रहे, बल्कि अपने इनोवेटिव आइडियाज के दम पर 'जॉब क्रिएटर' बने। ये नीति विज्ञान को केवल प्रयोगशालाओं की सीमाओं तक नहीं रखेगी, बल्कि उसे आम जनजीवन से जोड़ते हुए जन-जन तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बनेगी। 


*चुनौतियों का स्थानीय समाधान तलाशने का प्रयास*

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां हमारे सामने कई कठिन चुनौतियां खड़ी करती हैं। लेकिन हमारा हिमालय ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है और हमारी जैव-विविधता, अमूल्य औषधीय वनस्पतियां, बारहमासी जल स्रोत, जैविक कृषि और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर हमारी असली पूंजी हैं। इसलिए यदि हम अपनी स्थानीय समस्याओं के स्थानीय और वैज्ञानिक समाधान विकसित कर लें, तो उत्तराखंड पूरे देश के लिए विकास का एक आदर्श मॉडल बन सकता है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने नई  पॉलिसी तैयार की है। साथ ही सरकार प्रदेश में तकनीक, डिजिटल गवर्नेंस, शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने वाला एक मजबूत इकोसिस्टम भी विकसित कर रही है। इसी तरह वैज्ञानिक अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देते हुए उत्तराखंड को 'साइंस बेस्ड नॉलेज इकॉनॉमी' के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी निरंतर कार्य किया जा रहा है। 


*स्टार्टअप सेंटर विकसित करने की घोषणा*

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश में साइंस एंड इनोवेशन सेंटर, लैब्स ऑन व्हील्स, डिजिटल लाइब्रेरी, पेटेंट सूचना केंद्र, स्टेम लैब्स और जीआईएस आधारित आधुनिक तकनीकी प्रणालियों का भी विस्तार कर रही है। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन, सेमीकंडक्टर तथा प्री-इन्क्यूबेशन लैब जैसी भविष्य की तकनीकों को भी बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इस मौके पर उन्होंने यूकॉस्ट परिसर में स्टार्टअप सेंटर विकसित करने के लिए भूमि उपलब्ध कराने की भी घोषणा की। मुख्यमत्री ने इस अवसर पर पौधारोपण भी किया।


इस मौके पर कैबिनेट मंत्री श्री प्रदीप बत्रा, सहसपुर विधायक श्री सहदेव सिंह पुंडीर, सचिव श्री नितेश झा, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविन्द सिंह, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक  सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित हुए।: 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से सोमवार को मुख्यमंत्री कैंप  कार्यालय में साहित्यकार एवं इंडो-जर्मन सांस्कृतिक संबंधों के क्षेत्र में सक्रिय डॉ. योजना साह जैन ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने अपनी साहित्यिक कृतियां 'इमली का चटकारा' (कहानी-संग्रह), 'बनारस मीट्स बर्लिन' (उपन्यास) तथा 'कागज पे फुदकती गिलहरियां' (कविता-संग्रह) मुख्यमंत्री को भेंट की।



मुख्यमंत्री ने डॉ. योजना साह जैन को उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि साहित्य समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को सशक्त अभिव्यक्ति प्रदान करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने भारत और जर्मनी के मध्य सांस्कृतिक एवं बौद्धिक संवाद को प्रोत्साहित करने में डॉ. जैन के योगदान की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनकी रचनाएं भारतीय संस्कृति, लोकजीवन और संवेदनाओं को वैश्विक पटल पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के साथ दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायक होंगी।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास योजनाओं के लिए प्रदान की ₹ 17 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति।*


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न विकास योजनाओं के तहत नलकूप निर्माण, सीवरेज लाईन बिछाये जाने तथा आपदा प्रभावितों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराये जाने के साथ ही मन्दिर सौन्दर्यीकरण व खेल सुविधाओं के विकास हेतु ₹ 17 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है।


मुख्यमंत्री द्वारा जनपद नैनीताल की हल्द्वानी शाखा के अंतर्गत विभिन्न नलकूपों पर स्थापित पुराने एवं 15 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके पम्प सेटों के स्थान पर ऊर्जा दक्ष पम्प सेटों की आपूर्ति हेतु ₹ 3.01 करोड़ की योजना स्वीकृत किए जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


मुख्यमंत्री द्वारा जनपद देहरादून के विधानसभा क्षेत्र रायपुर के अंतर्गत रामगढ़ (वाणी विहार) क्षेत्र में सीवर लाइन बिछाने हेतु ₹ 3.11 करोड़ की योजना स्वीकृत किए जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


मुख्यमंत्री द्वारा जनपद चमोली की नगर पालिका परिषद ज्योतिर्मठ में वर्ष 2023 के भू-धंसाव से प्रभावित क्षेत्रों में लोक निर्माण विभाग द्वारा प्रस्तावित स्लोप स्टेबलाइजेशन कार्यों से प्रभावित भूमि के अधिग्रहण हेतु राज्य आकस्मिकता निधि से ₹10 करोड़ की धनराशि स्वीकृत किए जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है। इसके अतिरिक्त, वित्तीय वर्ष 2025-26 की प्राकृतिक एवं दैवीय आपदा के दृष्टिगत जनपद देहरादून की तहसील सदर क्षेत्रान्तर्गत ग्राम मझाड़ा एवं कालीगाड के 14 प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर किराये के भवन में आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रति परिवार ₹ 4,000 की दर से मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹ 3.36 लाख की स्वीकृति प्रदान की गयी है। 


मुख्यमंत्री ने जनपद पिथौरागढ़ के विधानसभा क्षेत्र पिथौरागढ़ के अंतर्गत ग्राम मिलम में नन्दा देवी मंदिर के सौन्दर्यीकरण कार्य हेतु ₹ 90.16 लाख, के साथ ही जनपद देहरादून के विधानसभा क्षेत्र रायपुर के अंतर्गत उत्तरांचल प्रेस क्लब को खेल सामग्री क्रय किए जाने हेतु ₹ 5 लाख की आर्थिक सहायता का अनुमोदन प्रदान किया गया है।


 *700 श्रद्धालु छह दिवसीय विशेष तीर्थ यात्रा में हुए शामिल* 

 *सोमनाथ भारत के अटूट विश्वास, स्वाभिमान और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक : मुख्यमंत्री* 

 *देवभूमि उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में तेजी से हो रहा कार्य* 

 *केदारखंड-मानसखंड, हरिद्वार-ऋषिकेश एवं शारदा कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं पर सरकार का विशेष फोकस* 

 *यात्रियों से उत्तराखंड की संस्कृति, संस्कार और 'अतिथि देवो भवः' की भावना के प्रतिनिधि बनने का आह्वान* 


harrawala ddun to somnath train ,CM Dhami inaugurated



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को रेलवे स्टेशन हर्रावाला, देहरादून से 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के उपलक्ष्य में वेरावल (सोमनाथ) के लिए विशेष रेल यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए इसे केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि राष्ट्र के स्वाभिमान, सांस्कृतिक चेतना और सनातन परंपराओं से जुड़ने का सशक्त माध्यम बताया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि छह दिवसीय इस विशेष यात्रा में प्रदेश के विभिन्न वर्गों से लगभग 700 श्रद्धालु सहभागी बन रहे हैं। इनमें स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी माताएं-बहनें, विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थी, संत समाज तथा समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि शामिल हैं। उन्होंने इस पहल के लिए संस्कृति विभाग की सराहना करते हुए सभी यात्रियों की मंगलमय, सुरक्षित एवं सुखद यात्रा की कामना भगवान सोमनाथ और बाबा केदार से की।




मुख्यमंत्री ने कहा कि यह यात्रा भारत की हजारों वर्षों पुरानी सनातन परंपरा, गौरवशाली विरासत और राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़ने का अवसर है। उन्होंने कहा कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर भारत की अटूट आस्था, अदम्य विश्वास और पुनरुत्थान का प्रतीक है। अनेक आक्रमणों और विध्वंस के बावजूद सोमनाथ ने पूरे विश्व को यह संदेश दिया है कि भारत हर चुनौती के बाद और अधिक शक्ति एवं संकल्प के साथ आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा कि 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' राष्ट्रबोध और सांस्कृतिक गौरव का अनुभव कराने वाला विशेष अवसर है।



मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में अभूतपूर्व सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दौर चल रहा है। अयोध्या से सोमनाथ, केदारनाथ से काशी विश्वनाथ, महाकाल से बद्रीनाथ धाम तक मंदिरों का व्यापक पुनरुद्धार और विकास भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की जीवनरेखा हैं। लंबे समय तक जिन धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों की उपेक्षा हुई, आज उन्हें पुनः सम्मान और गौरव प्राप्त हो रहा है, जो बदलते भारत की नई तस्वीर प्रस्तुत करता है।



मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री से प्रेरणा लेकर उत्तराखंड सरकार भी देवभूमि उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि केदारखंड और मानसखंड के मंदिर क्षेत्रों के सौंदर्यीकरण के साथ ही हरिपुर कालसी स्थित यमुनातीर्थ के पुनरुद्धार पर कार्य किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर तथा शारदा कॉरिडोर जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति, दर्शन और इतिहास के गहन अध्ययन एवं शोध को बढ़ावा देने के लिए दून विश्वविद्यालय में 'सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज' की स्थापना भी की गई है।



मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड के सांस्कृतिक मूल्यों और मूल स्वरूप की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य से राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून और दंगारोधी कानून लागू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध चलाए गए अभियान के तहत 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को मुक्त कराया गया है, जो केवल भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने का अभियान नहीं बल्कि देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और पवित्रता की रक्षा का प्रयास है।



मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में समान नागरिक संहिता लागू कर सभी नागरिकों के लिए समान कानून और समान न्याय व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भी सुधारात्मक कदम उठाते हुए 250 से अधिक अवैध मदरसों को सील किया गया तथा मदरसा बोर्ड के स्थान पर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना की गई है, ताकि शिक्षा राष्ट्र निर्माण का प्रभावी माध्यम बन सके।



मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है, जहां आधुनिक विकास और सनातन संस्कृति दोनों समान रूप से आगे बढ़ें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनता के सहयोग और आशीर्वाद से यह संकल्प अवश्य साकार होगा।



मुख्यमंत्री ने यात्रा पर जा रहे सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे जहां भी जाएं, देवभूमि उत्तराखंड की संस्कृति, संस्कार और 'अतिथि देवो भवः' की भावना का प्रतिनिधित्व करें। उन्होंने कहा कि सभी यात्री इस यात्रा के माध्यम से केवल सोमनाथ के दर्शन करने नहीं जा रहे हैं, बल्कि उत्तराखंड की आध्यात्मिक चेतना, समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों के भी प्रतिनिधि हैं। उन्होंने सभी से अपने आचरण, व्यवहार और विचारों से राज्य की सकारात्मक पहचान को सुदृढ़ करने का आह्वान किया।



इस अवसर पर विधायक श्री बृज भूषण गैरोला, मेयर देहरादून श्री सौरभ थपलियाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।


ऋषिकेश/डोईवाला।

protest-against30000 plant


परवादून जिला कांग्रेस कमेटी ने विभिन्न सामाजिक एवं पर्यावरण संरक्षण संगठनों के साथ मिलकर सात मोड़, ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग पर 3000 से अधिक पेड़ों के प्रस्तावित कटान के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए वृक्षों के अंधाधुंध कटान पर रोक लगाने की मांग की।


परवादून जिला कांग्रेस अध्यक्ष मोहित उनियाल ने कहा कि विकास के नाम पर हजारों हरे-भरे वृक्षों की बलि देना उत्तराखंड की प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पर्यावरण संरक्षण के इस जनहित के मुद्दे पर जनता के साथ मजबूती से खड़ी है और वृक्षों को बचाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी।


जिला महासचिव राहुल सैनी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसके जंगल और पर्यावरण से है। यदि विकास योजनाओं में पर्यावरण संरक्षण की अनदेखी की गई तो इसका दुष्प्रभाव आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा। सरकार को पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।


डोईवाला कांग्रेस नगर अध्यक्ष करतार नेगी ने कहा कि स्थानीय जनता की भावनाओं को दरकिनार कर पेड़ों का अंधाधुंध कटान स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि सरकार ने इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया, तो जनसहभागिता के साथ आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।


इस अवसर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए वृक्षों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।


इस दौरान परवादून कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल, जिला महासचिव राहुल सैनी, डोईवाला कांग्रेस नगर अध्यक्ष करतार नेगी, जिला महासचिव शार्दूल नेगी, स्वतंत्र बिष्ट, मनीष यादव, आशिक अली, रोहित नेगी, राजन थापा, सोहेब अली, हर्षित उनियाल, साहिल अली, विवेक सैनी, अमन बहुगुणा, राहुल बहुगुणा, सूरज भट्ट, शुभम काम्बोज, अनुज कन्नौजिया एवं अर्चित सहित अनेक कांग्रेस कार्यकर्ता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।


देहरादून;



जिला प्रशासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई ने एक दिव्यांग व्यक्ति के जीवन में नई उम्मीद जगा दी। अपर नत्थनपुर निवासी दिव्यांग सुनील चन्द्र, जो लंबे समय से सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित थे, अब उन्हें दिव्यांगता प्रमाण पत्र, मासिक दिव्यांग पेंशन, बैंक खाता और निःशुल्क व्हीलचेयर की सुविधा उपलब्ध हो गई है।


सुनील चन्द्र व्हीलचेयर के सहारे किसी तरह 29 जून को समाधान दिवस में पहुंचे और जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान को अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि ‘‘साहेब में बहुत गरीब हूं। शरीर से लाचार हूं। आज तक मेरा दिव्यांग प्रमाण पत्र नही बन पाया। कोई सरकारी मदद नहीं मिलती, बस जैसे-तैसे जी रहा हूं।’’


दिव्यांग की समस्या को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को कड़े और स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ‘‘इस व्यक्ति को तुरंत अपनी गाड़ी से कोरोनेशन अस्पताल ले जाइए। आज ही इनकी मेडिकल जांच होगी और आज ही इनका दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। इसमें कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।” साथ ही समाज कल्याण अधिकारी को हिदायत दी गई कि वे तहसील प्रशासन से तालमेल बैठाकर तुरंत सुनील का आय प्रमाण पत्र तैयार करवाएं और पेंशन की फाइल आगे बढ़ाएं।


जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए मेडिकल जांच के उपरांत सुनील चन्द्र को 45 प्रतिशत दिव्यांगता का प्रमाण पत्र जारी किया गया। समाज कल्याण विभाग ने तहसीलदार सदर के माध्यम से उनका आय प्रमाण पत्र तैयार कराया। इसके बाद विभागीय औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए अगस्त माह से उनकी दिव्यांग पेंशन भी स्वीकृत कर दी गई। 


लेकिन कहानी यही खत्म नहीं हुई। जांच में सामने आया कि सुनील चन्द्र का कोई बैंक खाता ही नहीं है। बिना खाते के पेंशन की रकम कैसे आती? ऐसे में प्रशासन ने इंडियन पोस्ट पेमेंट बैंक के अधिकारियों से संपर्क किया। बैंक के कर्मचारी खुद चलकर सुनील के घर पहुंचे और उनके चौखट पर ही उनका बैंक खाता भी खोला गया।

 

समाज कल्याण विभाग ने तत्परता दिखाते हुए सुनील चंद्र के लिए आगामी अगस्त महीने से दिव्यांग पेंशन स्वीकृत कर दी है। इतना ही नहीं, उनको निःशुल्क व्हीलचेयर भी उपलब्ध करा दी है।


प्रशासन के इस बदले और मददगार रूप को देखकर आज सुनील चन्द्र गदगद हैं। कभी दफ्तरों के चक्कर काटने के डर से सहमे रहने वाले सुनील ने जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और पूरी टीम का दिल से आभार जताया। उन्होंने कहा कि आज उन्हें महसूस हुआ है कि सरकार सचमुच गरीबों के द्वार पर खड़ी है

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