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देहरादून :



जनपद में शिक्षा निदेशक व अन्य अधिकारियों पर हुए हमले एवं कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को लेकर परवादून जिला कांग्रेस कमेटी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इस संबंध में माननीय राज्यपाल महोदय को उपजिलाधिकारी डोईवाला कार्यालय के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित कर रायपुर विधायक उमेश काऊ व अन्य दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।


परवादून कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल ने कहा कि सरकारी कार्यालय में घुसकर शिक्षा निदेशक व अन्य अधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार एवं मारपीट की घटना लोकतंत्र और प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि ही कानून को हाथ में लेने लगेंगे तो प्रदेश में कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा होगा। कांग्रेस पार्टी ऐसे कृत्यों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेगी और रायपुर विधायक उमेश काऊ व अन्य दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करती है।


डोईवाला कांग्रेस नगर अध्यक्ष करतार नेगी ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं प्रशासनिक अधिकारियों का मनोबल तोड़ने का कार्य करती हैं। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या प्रदेश में कानून सबके लिए समान है या नहीं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि न्यायसंगत कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस जन आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।


डोईवाला ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र स्वरूप भट्ट ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति व्यक्त करने के संवैधानिक तरीके मौजूद हैं, लेकिन हिंसा और दबाव की राजनीति किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और दोषियों के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।


परवादून जिला कांग्रेस की मांग है कि रायपुर विधायक उमेश काऊ व अन्य दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई की जाए अन्यथा कांग्रेस द्वारा उग्र आंदोलन किया जाएगा।


इस दौरान परवादून कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल,डोईवाला कांग्रेस नगर अध्यक्ष करतार नेगी,डोईवाला ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र स्वरूप भट्ट,वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनोज नौटियाल,सभासद गौरव मल्होत्रा,राहुल सैनी,स्वतंत्र बिष्ट,अमित सैनी,आरिफ अली,रानीपोखरी मंडलम कांग्रेस अध्यक्ष मोहित कपरवान,आशिक अली,रेखा कांडपाल सती,रीता क्षेत्री,साहिल अली,संजीव भट्ट,राहुल आर्य,हर्षित उनियाल,विमल गोला,मनोज पाल,महिपाल रावत आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे ।


गंगा एक्सप्रेसवे के मेरठ–हरिद्वार विस्तारीकरण पर प्रस्तुतीकरण

CS  uttarakhand ganga express way haridwar to meerut


यूपीडा (Uttar Pradesh expressways industrial development authority) के अधिकारियों ने मुख्य सचिव आनंद बर्धन के समक्ष गंगा एक्सप्रेसवे के मेरठ से हरिद्वार तक विस्तारीकरण संबंधी प्रस्तुतीकरण दिया। बैठक में एक्सप्रेसवे के दो तुलनात्मक एलाइनमेंट विकल्प साझा किए गए—पहला विकल्प मेरठ–मुजफ्फरनगर–हरिद्वार जनपदों से होकर गुजरने वाला तथा दूसरा विकल्प हापुड़–मेरठ–मुजफ्फरनगर–हरिद्वार जनपदों को कवर करने वाला। दोनों एलाइनमेंट पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।


*प्रारंभिक औपचारिकताओं व अंतरराज्यीय समन्वय पर निर्देश*

मुख्य सचिव ने यूपीडा को निर्देश दिए कि राज्य सरकार की ओर से की जाने वाली अग्रिम औपचारिकताओं—भूमि उपलब्धता, यूटिलिटी शिफ्टिंग, पर्यावरणीय स्वीकृतियां, EIA तथा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच समन्वय—से संबंधित प्रारंभिक कार्यवाही का विस्तृत प्रारूप तैयार किया जाए।


 बैठक में सचिव पंकज पांडेय, अपर सचिव विनीत कुमार तथा यूपीडा से चुनकु राम पटेल, विनय प्रकाश सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

अधिकृत वित्त समिति की बैठक में विकास परियोजनाओं को मिली स्वीकृति


मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में अधिकृत वित्त समिति की बैठक आयोजित की गई।


*यूआईडीएफ फंड के अंतर्गत न्यू कैंट मार्ग अपग्रेडेशन को मंजूरी*

बैठक में यूआईडीएफ  फंड के अंतर्गत न्यू कैंट मार्ग, दिलाराम बाजार से विजय कॉलोनी पुल तक 2 लेन से 3 लेन में उन्नयन हेतु यूटिलिटी शिफ्टिंग (विद्युत लाइनों को यूटिलिटी डक्ट में स्थानांतरित करना) एवं वाटर सप्लाई लाइन शिफ्टिंग के ₹1257.96 लाख के कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई।


*पिथौरागढ़ में पेयजल योजना सुदृढ़ीकरण*

जनपद पिथौरागढ़ की पिथौरागढ़ शाखा  के अंतर्गत घाट पंपिंग पेयजल योजना की जीर्ण-शीर्ण पाइपलाइन, राइजिंग मेन के प्रतिस्थापन एवं पुनर्संरेखण संबंधी ₹1338.53 लाख रू की योजना को अनुमोदन दिया गया।


*मसूरी राज्य राजमार्ग पर दो लेन स्टील बॉक्स पुल का निर्माण*

मसूरी राज्य राजमार्ग संख्या-1 के कि.मी. 18 पर सहसपुर, जनपद देहरादून में क्षतिग्रस्त एकल लेन पुल के स्थान पर ₹1200.17 लाख  रू की लागत से 60 मीटर स्पैन का दो लेन, क्लास-ए लोडिंग स्टील बॉक्स पुल निर्माण को स्वीकृति दी गई।


*रामनगर बस टर्मिनल परियोजना पर सख्त रुख*

मुख्य सचिव ने पेयजल निगम के रामनगर बस टर्मिनल निर्माण कार्य के पुनरीक्षित आकलन परियोजना में परियोजना के कुल खर्च के मुकाबले फाउंडेशन वर्क व साइट विकास की अधिक लागत  पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने HOD, पीडब्ल्यूडी एवं एमडी, पेयजल निगम को प्रारंभिक लागत, विस्तारित लागत, साइट चयन, नींव खर्च एवं कुल व्यय की व्यवहारिकता, प्रासंगिकता, मितव्ययिता और उपयोगिता की जांच हेतु कमेटी गठित करते हुए  रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।


*पब्लिक फंड की मितव्ययिता और सख्त स्क्रूटनी पर जोर*

मुख्य सचिव ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि सार्वजनिक धन की मितव्ययिता सर्वोपरि है। केवल कंसलटेंट के प्रस्तावों पर निर्भर न रहते हुए विभाग स्वयं जिम्मेदारीपूर्वक पर्याप्त स्क्रूटनी करें। बिना समुचित जांच के किसी भी प्रस्ताव को हाई पावर कमेटी में प्रस्तुत न किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा—कार्य पब्लिक-सेंट्रिक हों।


*तेज और पारदर्शी क्रियान्वयन के निर्देश*

आज स्वीकृत सभी परियोजनाओं पर शीघ्र, पारदर्शी एवं समयबद्ध अग्रिम कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।


बैठक में सचिव पंकज पांडेय, एस.ए. Adannki, बृजेश संत सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखंड राज्य को पूंजीगत निवेश हेतु विशेष सहायता योजना (SASCI) के भाग-IX “वित्तीय प्रबंधन में दक्षता के लिए राज्यों को प्रोत्साहन” के अंतर्गत 350 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है।* इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का आभार व्यक्त किया है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्वीकृति राज्य सरकार द्वारा अपनाए गए सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन, पारदर्शिता और राजकोषीय अनुशासन का परिणाम है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड ने कर संग्रह बढ़ाने, व्यय नियंत्रण, डिजिटल भुगतान प्रणाली को सशक्त करने तथा बजटीय प्रबंधन में सुधार जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है।


मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि इससे पूर्व राज्य को खनन क्षेत्र में पारदर्शी नीतियों, ई-टेंडरिंग एवं ऑनलाइन मॉनिटरिंग प्रणाली लागू करने तथा परिवहन विभाग में सुधारों के लिए भी केंद्र सरकार से प्रोत्साहन राशि प्राप्त हो चुकी है। यह दर्शाता है कि उत्तराखंड लगातार सुधार आधारित शासन मॉडल को अपनाकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड सुशासन, पारदर्शिता और विकास के नए मानक स्थापित कर रहा है। केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर दिया गया यह प्रोत्साहन राज्य के लिए प्रेरणास्रोत है और इससे हमारी विकास परियोजनाओं को नई गति मिलेगी।


उन्होंने प्रधानमंत्री और भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार ‘विकास भी, विरासत भी’ के संकल्प के साथ उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने हेतु निरंतर प्रयासरत है।

 

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने गठित की समिति*

*उत्तराखण्ड के जोन छह में आने के बाद उठाया अहम कदम*

*सीबीआरआई के निदेशक प्रो. प्रदीप करेंगे समिति की अध्यक्षता

देहरादून:

New building rules will be applicable in uttarakhand

New building rules will be applicable in uttarakhand


 उत्तराखण्ड राज्य की बढ़ती भूकंपीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने भवन निर्माण नियमों को अधिक सुरक्षित और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। भारतीय मानक ISO 1893-2025 के अनुसार पूरे राज्य के भूकंप जोन छह में शामिल होने के बाद अब बिल्डिंग बायलाॅज में व्यापक संशोधन किया जाएगा।

। माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन द्वारा वर्तमान बिल्डिंग बायलाॅज की समीक्षा एवं संशोधन हेतु सीएसआईआर-सीबीआरआई रुड़की के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार की अध्यक्षता में 14 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। 


यूएलएमएमसी के निदेशक डाॅ. शांतनु सरकार को समिति का संयोजक बनाया गया है। बता दें कि वर्तमान में उत्तराखण्ड राज्य में बिल्डिंग बायलाॅज भारतीय मानक ब्यूरो के पुराने संस्करण ISO 1893-2002 पर आधारित हैं। 

समिति में सीबीआरआई रुड़की, भारतीय मानक ब्यूरो, आईआईटी, ब्रिडकुल, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग, विकास प्राधिकरणों तथा भू-वैज्ञानिक विशेषज्ञों सहित विभिन्न तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।

 समिति वास्तुविदों के साथ ही विभिन्न अभियंताओं से भी विचार-विमर्श करेगी। समिति का उद्देश्य राज्य के मौजूदा बायलाॅज का गहन अध्ययन करते हुए उन्हें वर्तमान भूकंपीय मानकों, जलवायु परिस्थितियों और आधुनिक निर्माण तकनीकों के अनुरूप तैयार करना है।  

मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों और बढ़ती भूकंपीय संवेदनशीलता को देखते हुए भवन निर्माण के नियमों में परिवर्तन किया जा रहा है। राज्य सरकार भवन बायलाॅज को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और आपदा-सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। इसी कड़ी में विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है।


 समिति भवन बायलाॅज को अधिक व्यवहारिक, सुरक्षित और आपदा-रोधी बनाने के लिए अपने सुझाव देगी। उन्होंने कहा कि संशोधित नियमों से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और आपदा जोखिम में कमी आएगी।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल नियमों में बदलाव करना नहीं बल्कि सुरक्षित निर्माण की संस्कृति विकसित करना है। उन्होंने बताया कि संशोधित बिल्डिंग बायलाॅज में भूकंप-रोधी डिजाइन, भू-तकनीकी जांच, विंड लोड और स्ट्रक्चरल सेफ्टी से जुड़े प्रावधानों को शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही स्थानीय पारंपरिक निर्माण तकनीकों और जलवायु अनुकूल विकास को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे सतत एवं आपदा-सक्षम विकास सुनिश्चित हो सके। 

बता दें कि नए बिल्डिंग बायलाॅज लागू होने से भवनों की संरचनात्मक मजबूती बढ़ेगी, आपदा के दौरान जन-धन की हानि कम होगी और सुरक्षित व टिकाऊ शहरी विकास व निर्माण को नई दिशा मिलेगी। समिति अपनी रिपोर्ट उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा आवास विभाग को सौंपेगी। समिति द्वारा तैयार की जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर आवास विभाग द्वारा बायलाॅज में आवश्यक संशोधन एवं कार्यान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। 


*समिति का कार्यक्षेत्र*

उत्तराखण्ड राज्य के वर्तमान बिल्डिंग बायलाॅज की विस्तृत समीक्षा, विश्लेषण एवं मौजूदा तकनीकों का आकलन।

राज्य में मौजूद भूकंप, भूस्खलन और अन्य आपदा जोखिमों को समाहित करते हुए संशोधित बिल्डिंग बायलाॅज का मसौदा तैयार करना।

भूकंप-रोधी डिजाइन, नई निर्माण तकनीकों एवं संरचनात्मक सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को शामिल करना।

पारंपरिक पहाड़ी निर्माण प्रणालियों को वैज्ञानिक रूप से आधुनिक नियमों में समाहित करना।

पर्यावरण संरक्षण और जलवायु अनुकूल निर्माण के लिए विशेष प्रावधान तैयार करना।

संशोधित नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु कार्ययोजना एवं दिशा-निर्देश प्रस्तुत करना।

इंजीनियरों, योजनाकारों एवं संबंधित विभागों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के सुझाव देना।


*समिति में ये हैं शामिल*

समिति की अध्यक्षता सीएसआईआर-सीबीआरआई, रुड़की के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार करेंगे, जबकि यूएलएमएमसी, देहरादून के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार को संयोजक बनाया गया है। समिति में डॉ. अजय चैरसिया (मुख्य वैज्ञानिक, सीबीआरआई रुड़की), प्रो. महुआ मुखर्जी (वास्तुकला विभाग, आईआईटी रुड़की), सुश्री मधुरिमा माधव (वैज्ञानिक ‘ब्’, भारतीय मानक ब्यूरो, नई दिल्ली), डॉ. पी.के. दास (वरिष्ठ ग्रामीण आवास सलाहकार, यूएनडीपी), आर्किटेक्ट एस.के. नेगी (पूर्व मुख्य वैज्ञानिक, सीबीआरआई शिमला), उत्तराखण्ड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण के नामित प्रतिनिधि, ब्रिडकुल के प्रबंध निदेशक, लोक निर्माण विभाग तथा सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता एवं विभागाध्यक्ष, राज्य के नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के प्रतिनिधि, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण और हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण के प्रतिनिधियों के साथ-साथ भूकंप विशेषज्ञ धर्मेन्द्र कुशवाहा एवं भू-भौतिक विज्ञानी डॉ. विशाल वत्स सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं।

 *उत्तराखंड पुलिस को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित SKOCH Award हेतु चयन* 

 *चारधाम यात्रा 2025 के अभिनव ट्रैफिक कंट्रोल मॉडल के लिये युवा पुलिस अधिकारी लोकजीत सिंह को मिला राष्ट्रीय सम्मान

 *एसपी (ट्रैफिक ) लोकजीत सिंह के नेतृत्व में देहरादून ट्रैफिक पुलिस की पहल बनी सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण* 


skotch award to uttarakhand police


उत्तराखंड पुलिस के लिए अत्यंत गर्व का विषय है कि चारधाम यात्रा 2025 के सफल संचालन हेतु विकसित अभिनव ट्रैफिक एवं कंट्रोल रूम प्रबंधन प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित SKOCH Award – India’s Honest Independent Honour के लिए चयनित किया गया है।



पुलिस अधीक्षक (यातायात) देहरादून श्री लोकजीत सिंह के नेतृत्व में “चारधाम यात्रा 2025 : निर्बाध तीर्थ प्रबंधन हेतु अभिनव कंट्रोल रूम समाधान” नामांकन को 106वें SKOCH समिट में सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान शासन एवं विकास के क्षेत्र में विशिष्ट और परिणाम-आधारित नवाचारों के लिए प्रदान किया जाता है।



चारधाम यात्रा के दौरान उत्तराखंड में प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। वर्ष 2025 में यातायात प्रबंधन को सुचारु, सुरक्षित एवं तकनीक-आधारित बनाने के लिए ट्रैफिक पुलिस द्वारा उन्नत कंट्रोल रूम सिस्टम, रियल-टाइम मॉनिटरिंग, डिजिटल समन्वय, इंटेलिजेंट रूट डायवर्जन और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को सुदृढ़ किया गया। इस नवाचार के परिणामस्वरूप यातायात जाम में कमी, तीर्थयात्रियों की सुरक्षित आवाजाही तथा आपात स्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की गई।



यह सम्मान उत्तराखंड पुलिस व युवा पुलिस अधिकारी एसपी ( ट्रैफिक )  श्री लोकजीत सिंह की तकनीकी दक्षता, पारदर्शी कार्यशैली और जनसेवा के प्रति समर्पण का प्रमाण है। चारधाम यात्रा जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में प्रभावी यातायात प्रबंधन राज्य की प्रशासनिक क्षमता और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।



उल्लेखनीय है कि यह पुरस्कार 28 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 106वें SKOCH समिट के दौरान प्रदान किया जाएगा।



उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने इस उपलब्धि पर   एसपी ( ट्रैफिक )  श्री लोकजीत सिंह सहित पूरी ट्रैफिक पुलिस टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान पूरी उत्तराखंड पुलिस के लिए प्रेरणास्रोत है तथा भविष्य में भी नवाचार आधारित पुलिसिंग को प्रोत्साहन देता रहेगा।



उल्लेखनीय है कि प्रदेश के लिए यह अत्यंत गौरव का क्षण है कि चारधाम यात्रा के उत्कृष्ट, सुव्यवस्थित और प्रभावी प्रबंधन के लिए युवा पुलिस अधिकारी श्री लोकजीत सिंह को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित SKOCH Group द्वारा प्रदान किए जाने वाले SKOCH AWARD से सम्मानित किया जा रहा है। यह उपलब्धि न केवल एक अधिकारी के उत्कृष्ट नेतृत्व की पहचान है, बल्कि उत्तराखंड की प्रशासनिक दक्षता और पुलिस विभाग की प्रतिबद्धता का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी है।



वर्ष 2024 की चारधाम यात्रा के दौरान आई चुनौतियों ने प्रशासन को अनेक महत्वपूर्ण सीख दी थीं। इन्हीं अनुभवों को आधार बनाते हुए पुलिस मुख्यालय ने वर्ष 2025 की यात्रा को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए एक सशक्त रणनीति तैयार की। IG रेंज के अंतर्गत एक केंद्रीकृत और प्रभावी कंट्रोल रूम के गठन का निर्णय लिया गया, जिसकी जिम्मेदारी  एसपी श्री लोकजीत सिंह को सौंपी गई। सीमित समय में ही उन्होंने अपनी टीम के साथ कंट्रोल रूम की स्थापना कर व्यापक तैयारियां प्रारंभ कर दीं। आधुनिक तकनीकी संसाधनों, निरंतर मॉनिटरिंग और बहु-एजेंसी समन्वय के माध्यम से यात्रा प्रबंधन को एक व्यवस्थित और परिणामोन्मुख ढांचे में ढाल दिया गया। 



चारधाम यात्रा 2025 सरकार, शासन और पुलिस विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि लक्ष्य केवल व्यवस्थाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करना था। श्री लोकजीत सिंह के नेतृत्व में कंट्रोल रूम ने व्यवस्थित योजना और त्वरित निर्णय क्षमता के साथ कार्य किया। यात्रा के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों को गतिशील और संवेदनशील तरीके से संभाला गया। धराली आपदा के समय रेस्क्यू कार्यों का प्रभावी समन्वय, पहलगाम आतंकी हमले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखना, तथा विभिन्न हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी—इन सभी जटिल परिस्थितियों में उन्होंने सूझबूझ, संयम और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया। संकट की हर घड़ी में कंट्रोल रूम ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की, जिसके परिणामस्वरूप यात्रा को सुरक्षित और सुचारू रूप से संचालित किया जा सका।


श्री लोकजीत सिंह की यह उपलब्धि उनके निरंतर उत्कृष्ट कार्यों की श्रृंखला का एक और स्वर्णिम अध्याय है। इससे पूर्व वर्ष 2021 में कोविड प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें प्रतिष्ठित FICCI द्वारा FICCI Smart Policing Award से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2024 में चारधाम यात्रा प्रबंधन में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें राज्यपाल द्वारा उत्कृष्ट सेवा पदक भी प्रदान किया गया था।



चारधाम यात्रा जैसे विशाल और आस्था से जुड़े आयोजन का सफल संचालन केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनविश्वास और सुरक्षा का प्रश्न भी होता है। एसपी श्री लोकजीत सिंह ने अपने दूरदर्शी नेतृत्व, तकनीकी दक्षता और टीम भावना के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि सुनियोजित रणनीति और समर्पित प्रयासों से कठिन से कठिन चुनौतियों का भी प्रभावी समाधान संभव है। राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त यह सम्मान पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा, गौरव और विश्वास का प्रतीक है।

 

देहरादून :

coronation hospital dehradun


 पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय कोरोनेशन अस्पताल ,देहरादून में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएँ सामने आई हैं। हाल ही में एक युवती, प्रियंका चौहान, को उपचार के दौरान जिस प्रकार की अव्यवस्था, देरी और प्रक्रियात्मक जटिलताओं का सामना करना पड़ा, वह सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रियंका चौहान गंभीर अवस्था में अस्पताल की इमरजेंसी में पहुँचीं। परंतु तत्काल उपचार देने के बजाय उन्हें पहले इमरजेंसी विभाग से ऑर्थोपेडिक विभाग में भेजा गया। ऑर्थो विभाग में भी प्राथमिक उपचार शुरू करने से पहले बिलिंग की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद एक्स-रे के लिए भेजा गया, जहाँ पुनः बिलिंग की औपचारिकता पूरी करनी पड़ी। एक्स-रे रिपोर्ट आने के बाद प्लास्टर के लिए फिर से अलग से बिलिंग करवाई गई। इन सभी प्रक्रियाओं के बाद जाकर उनका प्लास्टर किया गया।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि कोई मरीज अत्यंत गंभीर स्थिति में हो या जीवन-मृत्यु की अवस्था में हो, तो क्या इस प्रकार की लंबी और जटिल प्रक्रिया उसकी जान को खतरे में नहीं डाल सकती? आपातकालीन सेवाओं का मूल उद्देश्य त्वरित और प्राथमिक उपचार देना होता है, न कि मरीज और उसके परिजनों को विभागों और बिलिंग काउंटरों के चक्कर लगवाना।

अस्पताल में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की स्थिति भी अत्यंत चिंताजनक बताई जा रही है। व्हीलचेयर जर्जर अवस्था में हैं, जिनका संचालन ठीक से नहीं हो पा रहा था। स्वच्छता व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई। मरीजों और उनके परिजनों को उचित मार्गदर्शन और सहयोग का अभाव महसूस हुआ।

सरकारी अस्पताल विशेषकर उन लोगों के लिए जीवनरेखा होते हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और निजी अस्पतालों का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं हैं। यदि सरकारी अस्पतालों में भी इस प्रकार की लापरवाही और अव्यवस्था बनी रही, तो आम जनता का भरोसा पूरी तरह से डगमगा सकता है।

हम उत्तराखंड सरकार एवं संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों से निम्नलिखित मांग करते हैं:

पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।

आपातकालीन सेवाओं में “ट्रीटमेंट फर्स्ट, बिलिंग लेटर” की नीति लागू की जाए।

विभागों के बीच समन्वय व्यवस्था को मजबूत किया जाए।

अस्पताल में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं जैसे व्हीलचेयर, स्ट्रेचर, स्वच्छता और उपकरणों का तत्काल निरीक्षण कर सुधार किया जाए।

जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

यह विषय केवल एक मरीज का नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र से जुड़ा हुआ है। जनहित में आवश्यक है कि स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी जाए और आम नागरिकों को सम्मानजनक तथा त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

 

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिव समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास को गति देने के लिए सचिवों एवं जिलाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।



मुख्य सचिव ने भराड़ीसैंण में प्रस्तावित विधानसभा सत्र की समुचित तैयारियों के निर्देश देते हुए SOP, कार्यपूर्ति दिग्दर्शिका, सुरक्षा प्रोटोकॉल, सैनिटेशन एवं अन्य व्यवस्थाओं को समयबद्ध रूप से दुरुस्त करने पर बल दिया।

*सुशासन, अनुशासन एवं डिजिटल गवर्नेंस पर कड़ा संदेश*

मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्मिकों अथवा सरकारी कार्यालयों में किसी भी प्रकार की बदसलूकी पर सख्त एनफोर्समेंट की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री द्वारा राज्य में किए गए सभी शिलान्यास कार्यों की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

ई-ऑफिस (डिजिटल फाइलिंग) के बेहतर इंप्लीमेंटेशन पर जनपदों की सराहना करते हुए सभी निदेशालयों को डिजिटल प्रगति और तेज करने के निर्देश दिए।

*ग्रामीण विकास, प्रवासी समन्वय एवं कृषि नवाचार*

मुख्य सचिव ने ADOPT A VILLAGE योजना की समीक्षा करते हुए जिन जनपदों में प्रगति धीमी है, उन्हें गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारियों को जनपदवार प्रवासियों का डाटा तैयार कर उनसे समन्वय स्थापित करने, उनके अनुभव, तकनीक एवं कार्य संस्कृति का प्रदेश हित में उपयोग करने के निर्देश दिए।

बैठक में आयुक्त सह सचिव, राजस्व परिषद रंजना राजगुरु द्वारा *एग्री स्टैग* योजना का प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिसमें कृषि विकास योजनाओं की प्रगति तेज कर केंद्र से मिलने वाले इंसेंटिव का अधिकतम लाभ उठाने पर जोर दिया गया।


*GIS आधारित गवर्नेंस, सतत कृषि व अंतर-विभागीय समन्वय*

जिलाधिकारी टिहरी द्वारा Using GIS for Fast Tracking Governance विषय पर वर्चुअल प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिसमें क्षतिपूरक वृक्षारोपण, फॉरेस्ट लैंड ट्रांसफर एवं भूमि अधिग्रहण मुआवजे के त्वरित निस्तारण पर प्रभावी पहल प्रस्तुत की गई, जिसकी सराहना की गई।

जिलाधिकारी उधम सिंह नगर ने सतत कृषि एवं जल संरक्षण से जुड़ी प्रेरणादायी पहल प्रेजेंटेशन के माध्यम से वर्चुअली प्रस्तुत की।

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों से विकास कार्यों एवं अंतर-विभागीय समन्वय की प्रगति की समीक्षा करते हुए पारदर्शिता के साथ कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए।

बैठक में प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, प्रमुख सचिव धनंजय चतुर्वेदी, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

*व्यय वित्त समिति की बैठक में विकास योजनाओं को मिली हरी झंडी*

*मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य के खेल, पर्यटन, कारागार व आधारभूत ढांचा परियोजनाओं को स्वीकृति*

देहरादून।

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित व्यय- वित्त समिति की बैठक में राज्य के विभिन्न जनपदों से संबंधित महत्वपूर्ण विकास योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई।

बैठक में माननीय मुख्यमंत्री की घोषणाओं के अंतर्गत जनपद चंपावत मुख्यालय स्थित गोरलचौड़ मैदान में स्टेडियम निर्माण कार्य तथा जनपद चंपावत में गोलज्यू कॉरिडोर परियोजना के अंतर्गत श्री गोलू देवता कॉरिडोर के निर्माण कार्य को मंजूरी दी गई।

देहरादून जनपद में आमवाला तरला क्षेत्र में रिंग फेसिंग कार्यक्रम के अंतर्गत 1788.34 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित आमवाला तरला सीवरेज परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई। वहीं, केंद्रीय कारागार सितारगंज के विस्तारीकरण कार्य हेतु 3814.72 लाख रुपये की धनराशि की मंजूरी दी गई।

बैठक में गोलापर, हल्द्वानी में प्रस्तावित खेल विश्वविद्यालय के प्रशासनिक एवं एकेडमिक भवन तथा 100 बेड क्षमता वाले छात्रावास के निर्माण हेतु 2679.37 लाख रुपये की योजना को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत जनपद चंपावत मुख्यालय स्थित गोल्जयु मंदिर के समीप लोक निर्माण विभाग एवं पशुपालन विभाग की भूमि पर पर्यटन अवस्थापनाओं के विकास के तहत श्री गोलज्ज्यू देवता कॉरिडोर के निर्माण कार्य के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजना का प्रस्ताव मंदिर को केंद्र में रखते हुए तैयार किया जाए तथा इसमें स्थानीय एवं कुमाऊं की पारंपरिक संस्कृति की झलक के साथ-साथ मंदिर के आसपास नैसर्गिक विकास से संबंधित निर्माण कार्यों को सम्मिलित किया जाए।

बैठक में विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, दिलीप जावलकर, एस.ए. Adannki, रणवीर सिंह चौहान, धीरज गब्र्याल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।


*डाक्टरों से घायल उपनिरीक्षक के स्वास्थय की जानकारी प्राप्त कर उन्हें बेहतर से बेहतर इलाज उपलब्ध कराने हेतु उपस्थित अधिकारियों को दिये निर्देश।*

*घायल पुलिस कर्मी के परिजनों से मुलाकात कर बेहतर उपचार के लिए हर संभव सहायता का दिलाया भरोसा*

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  दिनांक 21/22-02-2026 की रात्रि में डोईवाला क्षेत्रान्तर्गत लालतप्पड़ पुलिस चौकी गेट के सामने बैरियर लगाकर चेकिंग कर रहे पुलिस कर्मियों को हरिद्वार की ओर से आ रही एक तेज रफ्तार बीएमडब्ल्यू कर द्वारा टक्कर मारकर घायल कर दिया, उक्त दुर्घटना में मौके पर चेकिंग कर रहे उ०नि० रघुवीर कपरवान गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें मौके पर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों द्वारा तत्काल उपचार हेतु हिमालयन हॉस्पिटल जॉलीग्रांट ले जाया गया, जहाँ वर्तमान में उनका उपचार चल रहा है।


 आज दिनाँक 23/02/2026 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून द्वारा हिमालयन अस्पताल में जाकर  घायल उपनिरीक्षक का उपचार कर रहे डाक्टरों से वार्ता कर उनसे उनके स्वास्थ के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त की गयी,  साथ ही उन्हें बेहतर से बेहतर उपचार उपलब्ध कराये जाने हेतु उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिये गये। इस दौरान एसएसपी देहरादून द्वारा घायल उपनिरीक्षक से मुलाकात कर उनकी कुशलक्षेम पूछी तथा उन्हें व उनके परिजनों को बेहतर उपचार के लिये हर सम्भव सहायता का भरोसा दिलाया।




मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में उत्तराखंड में रोपवे परियोजनाओं के विकास, क्रियान्वयन, संचालन एवं रखरखाव से संबंधित विभागों, हितधारकों तथा पीपीपी कंपनियों के साथ प्रथम बोर्ड बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न जनपदों में गतिमान एवं प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई तथा संबंधित जिलाधिकारियों से भी परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली गई।


*प्रदेश की अर्थव्यवस्था व मोबिलिटी के लिए रोपवे परियोजनाएं अहम*

मुख्य सचिव ने रोपवे परियोजनाओं को प्रदेश की अर्थव्यवस्था, पर्यटन, मोबिलिटी एवं समग्र विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए इनके कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देशित किया कि विजिबिलिटी स्टडी जैसी प्रक्रियाओं को प्रारंभिक चरण में ही हाई पावर कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, जिससे परियोजनाओं के सभी पक्षों पर समय रहते विस्तृत विचार-विमर्श संभव हो सके।

साथ ही, रोपवे से संबंधित प्रस्तावों की गहन व त्वरित स्क्रूटनी कर सभी मुद्दों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि अनावश्यक विलंब से बचा जा सके।

*समन्वय, समयबद्धता और पीपीपी परियोजनाओं पर विशेष जोर*

मुख्य सचिव ने पीपीपी मोड पर बनने वाली रोपवे परियोजनाओं के तकनीकी, वित्तीय एवं प्रशासनिक अनुमोदनों सहित सभी औपचारिकताओं को शीघ्र पूर्ण करने तथा निर्धारित टाइमलाइन के अनुसार कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। देहरादून–मसूरी रोपवे परियोजना में हो रही देरी पर संज्ञान लेते हुए इसकी प्रगति में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए।

उन्होंने जिला प्रशासन, सरकारी निर्माण एजेंसियों, लोक निर्माण विभाग, सुरक्षा एजेंसियों (पुलिस) के  मध्य बेहतर समन्वय स्थापित कर स्थानीय स्तर पर आने वाली चुनौतियों का समाधान करने को कहा। साथ ही, जिन मुद्दों को हाई पावर कमेटी अथवा बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाना है, उन्हें समय से प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए।

इस अवसर पर सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज पांडेय, धीरज सिंह गर्ब्याल, अपर सचिव अभिषेक रूहेला, एनएचएलएमएल से प्रशांत जैन सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

 नई दिल्ली, 23 फरवरी 2026


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल से शिष्टाचार भेंट कर वर्ष 2027 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले महाकुंभ की तैयारियों तथा नमामि गंगे से संबंधित परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की।

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मुख्यमंत्री ने हरिद्वार कुंभ 2027 के सफल, सुव्यवस्थित एवं पर्यावरणीय दृष्टि से सतत आयोजन को सुनिश्चित करने हेतु राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के अंतर्गत ₹408.82 करोड़ की परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि जनवरी से अप्रैल 2027 तक आयोजित होने वाले इस महाआयोजन में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है, जिसके दृष्टिगत गंगा की निर्मलता, स्वच्छता एवं अविरलता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।


मुख्यमंत्री ने बाढ़ सुरक्षा कार्यों हेतु ₹253 करोड़ के प्रस्तावों की स्वीकृति, जल जीवन मिशन के अंतर्गत अतिरिक्त राशि जारी करने करने के साथ ही इकबालपुर नहर प्रणाली, कनखल एवं जगजीतपुर नहर की क्षमता विस्तार का भी अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे असिंचित भूमि की सिंचाई के लिए 665 क्यूसेक पानी उपलब्ध हो सकेगा। जिससे हरिद्वार जिले के भगवानपुर और लक्सर क्षेत्र को लाभ मिलेगा। परियोजना से लगभग 13 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने का अनुमान है।

साथ ही क्षेत्र में पेयजल समस्या के समाधान भी होगा।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से हरिद्वार कुंभ 2027 को दिव्य, भव्य एवं ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया जाएगा तथा गंगा संरक्षण के लक्ष्य को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा।


 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में प्रस्तावित कुंभ मेला 2027 की तैयारियों के लिए भारत सरकार द्वारा 500 करोड़ रुपये की धनराशि जारी किए जाने पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है।



मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और सामाजिक समरसता का विश्वविख्यात महापर्व है। केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत यह धनराशि कुंभ मेला 2027 को दिव्य, भव्य और सुव्यवस्थित स्वरूप प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण, यातायात प्रबंधन, पेयजल, स्वच्छता, सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े कार्यों को गति मिलेगी। ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री ने पूर्व में प्रधानमंत्री से कुंभ में सहायता हेतु अनुरोध किया था। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार निरंतर उत्तराखंड के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। चारधाम परियोजना, ऑल वेदर रोड, रेल एवं हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार सहित विभिन्न विकास कार्यों में केंद्र का सहयोग राज्य के लिए संबल सिद्ध हुआ है। कुंभ मेला 2027 के सफल आयोजन के लिए यह सहयोग राज्य सरकार के संकल्प को और मजबूती प्रदान करेगा।


श्री धामी ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से कुंभ मेला 2027 ऐतिहासिक, सुरक्षित और सुव्यवस्थित आयोजन के रूप में स्थापित होगा तथा देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को उत्कृष्ट सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्ता पूर्ण कार्य सुनिश्चित करते हुए दिव्य और भव्य कुंभ मेला 2027 आयोजित करने के लिए प्रतिबद्ध है।


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकारी कार्यालयों और कार्यस्थलों पर अधिकारी- कर्मचारी और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए मुख्य सचिव को एसओपी बनाने के निर्देश दिए हैं। 


सोमवार को उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक मोर्चा के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट कर, 21 फरवरी को प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में हुई घटना के साथ ही हाल के समय में अन्य स्थानों पर सरकारी अधिकारी- कर्मचारियों के साथ हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए, ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने की मांग की। मुख्यमंत्री ने कर्मचारी नेताओं की बातों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि सरकार कार्मिकों के मान - सम्मान और सुरक्षा को लेकर हमेशा गंभीर रही है। 


मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को फोन कर, अधिकारी,  कर्मचारियों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए एसओपी तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने डीजीपी को भी निर्देश दिए हैं कि सरकारी कार्यालयों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, साथ ही इस तरह की घटनाओं पर त्वरित कानूनी कार्रवाई की जाए, उन्होंने एसएसपी देहरादून को भी शिक्षा निदेशालय में हुई घटना में शामिल दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए। 


इस मौके पर राज्य औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री प्रताप सिंह पंवार, उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक मोर्चा के अध्यक्ष श्री राम सिंह चौहान, महामंत्री श्री मुकेश बहुगुणा एवं अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

 डोईवाला:


ग्राम पंचायत सिमलास ग्रांट के झडोन्द  गांव  में एक अज्ञात बिना नम्बर की गाड़ो पाई गयी है, जिसके शीशे टूटे हुए है, टायर निकाल लिया गए है। यही नही आस पास लाठियां भी पड़ी है।गाड़ी के साथ तोड़ फोड़ की गई है।

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यह जानकारी समाजसेवी उमेद वोहरा ने दी है, कि एकांत स्थान में अज्ञात गाड़ी का पाया जाना, संदेह उत्पन्न करता है और किसी अनहोनी की आशंका से नही इनकार नही किया जा सकता। यह गाड़ी यहां कौन लाया और क्या घटना हुई है,यह जानकारी होना भी आवश्यक है।




जनपद पिथौरागढ़ में दुःखद घटना, गहरी खाई में गिरे वाहन से दो व्यक्तियों के शव SDRF उत्तराखंड ने किए बरामद*


दिनांक 22 फरवरी 2026 को सांय डीसीआर पिथौरागढ़ से सूचना प्राप्त हुई कि घाट के पास एक वाहन दुर्घटनाग्रस्त होकर गहरी खाई में गिर गया है। 


उक्त सूचना प्राप्त होते ही पोस्ट पिथौरागढ़ से SDRF टीम, एएसआई महिपाल सिंह के नेतृत्व में तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई।


घटनास्थल पर पहुंचने पर ज्ञात हुआ कि वाहन संख्या UK06AZ8788 (महिंद्रा एसयूवी 300) लगभग 250 मीटर गहरी खाई में गिरा हुआ है, जिसमें 02 व्यक्ति सवार थे। SDRF टीम द्वारा जिला पुलिस व राजस्व पुलिस के साथ मिलकर त्वरित रेस्क्यू अभियान चलाते हुए एक महिला व एक पुरुष के शव को खाई से बाहर निकालकर आवश्यक कार्यवाही हेतु जिला पुलिस के सुपर्द किया गया।

[23/02, 06:45] Vineet Sdrf: *जनपद अल्मोड़ा, ट्रक में फंसे व्यक्ति का SDRF उत्तराखंड द्वारा शव बरामद*


दिनांक 23 फरवरी 2026 को समय 01:31 बजे आपदा नियंत्रण कक्ष, अल्मोड़ा से सूचना प्राप्त हुई कि बिनसर से लगभग 03 किमी आगे ताकुला रोड पर एक ट्रक में एक व्यक्ति फंसा हुआ है।


सूचना प्राप्त होते ही पोस्ट सरियापानी से SDRF टीम मुख्य आरक्षी नवीन सिंह कुंवर के नेतृत्व में तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई। घटनास्थल पर एक व्यक्ति जो ट्रक और बैरीकेड के बीच फंसा हुआ था एवं जिसकी मौके पर ही मृत्यु हो गयी थी। SDRF टीम द्वारा आवश्यक उपकरणों की सहायता से ट्रक में फंसे व्यक्ति का शव सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया।


*जनपद अल्मोड़ा, ट्रक में फंसे व्यक्ति का SDRF उत्तराखंड द्वारा शव बरामद*


दिनांक 23 फरवरी 2026 को समय 01:31 बजे आपदा नियंत्रण कक्ष, अल्मोड़ा से सूचना प्राप्त हुई कि बिनसर से लगभग 03 किमी आगे ताकुला रोड पर एक ट्रक में एक व्यक्ति फंसा हुआ है।


सूचना प्राप्त होते ही पोस्ट सरियापानी से SDRF टीम मुख्य आरक्षी नवीन सिंह कुंवर के नेतृत्व में तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई। घटनास्थल पर एक व्यक्ति जो ट्रक और बैरीकेड के बीच फंसा हुआ था एवं जिसकी मौके पर ही मृत्यु हो गयी थी। SDRF टीम द्वारा आवश्यक उपकरणों की सहायता से ट्रक में फंसे व्यक्ति का शव सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया।


मृतक की पहचान भूपेन्द्र सिंह पुत्र चन्द्र मान, उम्र 42 वर्ष, निवासी जिला भिवानी (हरियाणा) के रूप में की गई। शव को आवश्यक कार्यवाही हेतु जिला पुलिस को सुपुर्द किया गया।


मृतक की पहचान भूपेन्द्र सिंह पुत्र चन्द्र मान, उम्र 42 वर्ष, निवासी जिला भिवानी (हरियाणा) के रूप में की गई। शव को आवश्यक कार्यवाही हेतु जिला पुलिस को सुपुर्द किया गया।


*टिहरी, तोताघाटी के भूस्खलन की चपेट में आया ट्रक, SDRF टीम द्वारा किया गया ट्रक चालक का शव बरामद*


दिनांक 23 फरवरी 2026 को प्रातः 03:05 बजे सूचना प्राप्त हुई कि तोता घाटी के पास भूस्खलन के कारण एक ट्रक के ऊपर अत्यधिक मात्रा में मलबा एवं पत्थर गिर गए हैं। सूचना में ट्रक के केबिन में एक व्यक्ति के फंसे होने की संभावना जताई गई थी, साथ ही मार्ग भी पूर्णतः अवरुद्ध हो गया था।


सूचना प्राप्त होते ही SDRF उत्तराखंड की टीम उप निरीक्षक सावर सिंह नेगी के नेतृत्व में तत्काल घटनास्थल हेतु रवाना हुई। SDRF टीम द्वारा कड़ी मशक्कत के बाद मलबे में दबे ट्रक से एक शव को बाहर निकाला गया।


मृतक की पहचान मुरारी लाल पुत्र श्री दुर्गा लाल, निवासी घुट्टियानी, जनपद चमोली गढ़वाल, उम्र लगभग 55 वर्ष के रूप में हुई है। SDRF टीम द्वारा बरामद शव को आवश्यक  कार्रवाई हेतु जिला पुलिस के सुपुर्द किया गया।


*टिहरी, तोताघाटी के भूस्खलन की चपेट में आया ट्रक, SDRF टीम द्वारा किया गया ट्रक चालक का शव बरामद*


दिनांक 23 फरवरी 2026 को प्रातः 03:05 बजे सूचना प्राप्त हुई कि तोता घाटी के पास भूस्खलन के कारण एक ट्रक के ऊपर अत्यधिक मात्रा में मलबा एवं पत्थर गिर गए हैं। सूचना में ट्रक के केबिन में एक व्यक्ति के फंसे होने की संभावना जताई गई थी, साथ ही मार्ग भी पूर्णतः अवरुद्ध हो गया था।


सूचना प्राप्त होते ही SDRF उत्तराखंड की टीम उप निरीक्षक सावर सिंह नेगी के नेतृत्व में तत्काल घटनास्थल हेतु रवाना हुई। SDRF टीम द्वारा कड़ी मशक्कत के बाद मलबे में दबे ट्रक से एक शव को बाहर निकाला गया।


मृतक की पहचान मुरारी लाल पुत्र श्री दुर्गा लाल, निवासी घुट्टियानी, जनपद चमोली गढ़वाल, उम्र लगभग 55 वर्ष के रूप में हुई है। SDRF टीम द्वारा बरामद शव को आवश्यक  कार्रवाई हेतु जिला पुलिस के सुपुर्द किया गया।

 

virat hindu samnelan balawala dehradun CM Dhami




मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को बालावाला देहरादून में विराट हिन्दू सम्मेलन में प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा कि यह मात्र एक सम्मेलन नहीं, बल्कि हिंदू समाज की चेतना, एकता और आत्मगौरव का महापर्व भी है। हिंदू समाज आज न केवल जागृत और समर्पित है बल्कि अपने धर्म, संस्कृति एवं राष्ट्र के प्राचीन वैभव को पुनः लौटाने के लिए पूर्ण निष्ठा के साथ संगठित भी हो रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण करने के उपलक्ष में पूरे देश में इस प्रकार के विराट हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उनके लिए गर्व का विषय है कि वे विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन से जुड़े हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 100 वर्षों में देश के सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्जीवित कर राष्ट्रभक्ति की भावना को जन-जन के हृदय में सशक्त रूप से स्थापित करने का कार्य भी किया है। शिक्षा, कृषि, ग्राम विकास, समाज कल्याण, महिला सशक्तिकरण, आदिवासी उत्थान, सेवा कार्य, कला और विज्ञान ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जहाँ संघ के स्वयंसेवकों ने निस्वार्थ भाव से योगदान न दिया हो।


मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत विविधताओं से भरा हुआ देश है। यहां भाषा, संस्कृति, जाति और क्षेत्र के आधार पर अनेकों भिन्नताएँ हैं। लेकिन इन सबके बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने हमेशा भेदभाव से ऊपर उठकर भारत की एकात्मता को मजबूत किया है और जन-जन में एक भारत - श्रेष्ठ भारत की भावना जगाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश में भाषाएं अलग हो सकती है, परंपराएँ भिन्न हो सकती हैं, पूजा- पद्धतियां और जीवन शैली अलग हो सकती है, परंतु मूल सत्य और मानवीय मूल्य एक ही रहते हैं। इसी भावना का व्यापक स्वरूप ही हिंदुत्व है । जो भारत को अपनी मातृभूमि और पितृभूमि मानता है, इसकी संस्कृति, परंपरा, जीवनशैली और मूल्यों का आदर करता है, उसकी पूजा-पद्धति चाहे कोई भी हो, पर उसकी आत्मा हिंदू है। हिंदुत्व हमें सिखाता है कि हम सब एक हैं, हमारी विविधताएँ ही हमारी शक्ति हैं, और हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान है। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि के मूल स्वरूप को बनाये रखने लिए निरंतर कार्य कर रही है। सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून के साथ ही ऑपरेशन कालनेमी के माध्यम से सनातन धर्म को बदनाम करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जा रही है। देश में सबसे पहले यूसीसी लागू कर सभी को समान अधिकार देना हो, मदरसा बोर्ड को खत्म कर सभी संप्रदायों के बच्चों के लिए राज्य में समान शिक्षा व्यवस्था की नींव डालनी हो या फिर राज्य में “हिन्दू स्टडी सेंटर बनाकर सनातन हिंदू संस्कृति के विभिन्न विषयों में शोध करने वाले युवाओं की सहायता करनी हो, हर क्षेत्र में कार्य किये जा रहे हैं। 


इस अवसर पर विधायक श्री बृज भूषण गैरोला, पार्षद श्री प्रशांत खरोला, ब्रहम्चारी केशर स्वरूप, श्री ललित बुड़ाकोटी, श्री सुभाष बड़थ्वाल, श्री गोपाल सिंह एवं बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।



- “भारत को विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में दिव्यांगजन होंगे निर्णायक शक्ति” — राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह


- चालू वर्ष के बजट में दिव्यांगजनों के लिए सहायक उपकरणों की खरीद और फिटिंग के लिए 375 करोड़ का प्रावधान है- राज्य मंत्री श्री बी एल वर्मा

- भारत सरकार ने दिव्यांग उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए 20 करोड़ से अधिक के ऋण स्वीकृत किए

- देहरादून में लगे दिव्य कला मेला में 16 राज्यों से 100 से अधिक दिव्यांग कारीगर, कलाकार और उद्यमी कर रहे प्रतिभाग 

- देशभर के दिव्यांग कारीगर हस्तशिल्प, हथकरघा, कढ़ाई, होम डेकोर, वस्त्र, ऑर्गेनिक खाद्य उत्पाद, आभूषण, खिलौने जैसे उत्पाद लेकर पहुंचे दिव्य कला मेला



रविवार को देहरादून के रेंजर्स मैदान में 30वें ‘दिव्य कला मेला’ का भव्य उद्घाटन हुआ। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से नि) श्री गुरमीत सिंह ने कहा- “दिव्य कला मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि प्रेरणा और उत्साह का एक सशक्त मंच है, जो भारत को विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में दिव्यांगजनों की निर्णायक भूमिका को रेखांकित करता है।” उन्होंने कहा कि यहां प्रदर्शित रचनात्मकता केवल कला नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की जीवंत अभिव्यक्ति है।


उत्तराखंड के राज्यपाल ने अपने संबोधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीकी नवाचारों को दिव्यांगजनों के लिए नए अवसरों का सेतु बताते हुए कहा कि तकनीक किसी में भेदभाव नहीं करती। उन्होंने आह्वान किया कि मेले में निर्मित उत्पादों को वैश्विक बाज़ार तक पहुंचाया जाए, ताकि दिव्य प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सके। उनके अनुसार, संकल्प और सामर्थ्य के बल पर दिव्यांगजन किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकते हैं।


कार्यक्रम में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बी. एल. वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016’ और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं ने दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने का सशक्त आधार तैयार किया है। उन्होंने जानकारी दी कि चालू वर्ष के बजट में Artificial Limbs Manufacturing Corporation of India के माध्यम से सहायक उपकरणों की खरीद और फिटिंग के लिए ₹375 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे बड़ी संख्या में लाभार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा।


कार्यक्रम में सांसद, टिहरी, माला राज्य लक्ष्मी शाह ने कहा कि दिव्य कला मेला जैसे आयोजन केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के प्रेरक माध्यम हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे राष्ट्रीय आयोजन उत्तराखंड जैसे राज्यों को नई पहचान और ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने विशेष रूप से पैरालंपिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती।


कार्यक्रम में विधायक खजान दास ने आयोजन को दिव्यांगजनों के सम्मान और अवसर का सशक्त उदाहरण बताते हुए कहा कि इस प्रकार के मंच समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और आत्मविश्वास को नई ऊंचाई प्रदान करते हैं।


दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के निदेशक श्री प्रदीप ए. ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि यह मेला दिव्यांग उद्यमियों को बाजार, वित्त और रोजगार के अवसरों से जोड़ने का समग्र प्रयास है। उन्होंने बताया कि मेले में सहायक उपकरणों हेतु पंजीकरण, विभिन्न संस्थाओं की जानकारी और रोजगार मेलों के माध्यम से दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।


देहरादून में आयोजित यह 30वां ‘दिव्य कला मेला’ देशभर में आयोजित मेलों की श्रृंखला का महत्वपूर्ण पड़ाव है। अब तक 29 स्थानों पर आयोजित मेलों में लगभग 2362 प्रतिभागियों ने भाग लिया है और 23 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार दर्ज किया गया है। सरकार ने दिव्यांग उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए ₹20 करोड़ से अधिक के ऋण स्वीकृत किए हैं, जो आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में ठोस प्रतिबद्धता को दर्शाता है। रोजगार मेलों में अब तक लगभग 3131 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें से 1007 को शॉर्टलिस्ट किया गया और 313 से अधिक को रोजगार प्रस्ताव प्राप्त हुए।


इस नौ दिवसीय दिव्य कला मेले में लगभग 90 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें देश के 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए 100 से अधिक दिव्यांग कारीगर, कलाकार और उद्यमी भाग ले रहे हैं। हस्तशिल्प, हथकरघा, कढ़ाई, होम डेकोर, वस्त्र, ऑर्गेनिक खाद्य उत्पाद, आभूषण, खिलौने और उपहार सामग्री सहित विविध उत्पाद यहां उपलब्ध हैं। 26 फरवरी 2026 को विशेष रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा, जबकि 1 मार्च 2026 को ‘दिव्य कला शक्ति’ नामक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें दिव्यांग कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।


21 फरवरी से 1 मार्च तक प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से रात्रि 9 बजे तक आयोजित इस मेले में प्रवेश निःशुल्क है। रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, खेल गतिविधियां और सहायक उपकरणों के लिए पंजीकरण सुविधाएं इसे एक समावेशी, प्रेरक और सशक्त मंच बनाती हैं—जहां कला के माध्यम से आत्मनिर्भरता और सम्मान की नई कहानी लिखी जा रही है।

 


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास में जन प्रतिनिधियों और संस्कृति स्कूल के बच्चों के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम के 131वें एपिसोड को सुना। 


मुख्यमंत्री  ने कहा कि मन की बात कार्यक्रम जन-जन को प्रेरित करने वाला माध्यम है, जो नवाचारों, सामाजिक एकता तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान को प्रोत्साहित करता है।

CM Dhami man ki baat 131 st episode


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस एपिसोड में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर वैश्विक शिखर सम्मेलन, अंगदान की प्रेरणादायक कहानियां तथा डिजिटल अरेस्ट जैसी धोखाधड़ी से सावधानी बरतने पर जोर दिया। उन्होंने प्रदेशवासियों से पइन संदेशों को अपनाने तथा AI, स्वास्थ्य जागरूकता एवं डिजिटल सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।


इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सांसद श्रीमती माला राज्यलक्ष्मी शाह, विधायक श्री खजानदास, श्रीमती सविता कपूर, श्री सुरेश गड़िया, पूर्व विधायक श्री बलवंत सिंह भौंरियाल मौजूद थे।

 *मुख्यमंत्री ने की कुंभ मेला तैयारियों की समीक्षा*

*दिव्य, भव्य और ऐतिहासिक होगा कुंभ मेला : मुख्यमंत्री*

*श्रद्धालुओं की सुविधा, सुगमता और सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता- जिसके लिए होंगे सभी जरूरी प्रबंध*


हरिद्वार;

CM review kumbh mela prep





मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को हरिद्वार में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में कुंभ मेला-2027 की तैयारियों की समीक्षा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार में अगले वर्ष आयोजित होने वाला कुंभ मेला दिव्य, भव्य और ऐतिहासिक होगा। मेले के दौरान श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधा, सुगमता और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस महाआयोजन की व्यवस्थाओं में कोई भी कमी नहीं रहने दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कुंभ मेले से संबंधित कार्य निर्धारित समय पर पूर्ण करने के सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सभी विभाग बेहतर समन्वय के साथ कार्य करें और लिए गए निर्णयों का अविलंब अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।


मेला नियंत्रण भवन, हरिद्वार में आयोजित इस बैठक में मुख्यमंत्री ने मेले की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने पिछली बैठक में दिए गए निर्देशों पर हुई कार्रवाई तथा वर्तमान में चल रहे कार्यों की प्रगति की जानकारी भी ली। मुख्यमंत्री ने मेले से संबंधित सभी कार्य आगामी अक्टूबर माह तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मेले के लिए सभी प्रमुख स्थायी कार्यों को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है तथा अस्थायी कार्यों के प्रस्तावों को अंतिम रूप देकर उन्हें भी समयबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए। जोन एवं सेक्टर स्तर पर की जाने वाली तैयारियों को तय लक्ष्यों और समयसीमा के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण ढंग से संपन्न करने के निर्देश दिए गए। निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग हेतु थर्ड पार्टी ऑडिट भी कराने के निर्देश दिए गए।


मुख्यमंत्री ने मेले के दौरान परिवहन एवं पार्किंग की प्रभावी एवं पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए वैकल्पिक मार्गों को चिन्हित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के सुरक्षित एवं सुविधाजनक आवागमन तथा स्नान की समुचित व्यवस्था की जाए। संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए स्नान, आवागमन एवं ठहराव के लिए विस्तृत योजना तैयार की जाए। महिला एवं वृद्ध श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रबंध किए जाने के भी निर्देश दिए गए।


कुंभ क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्य में स्वयंसेवी संगठनों का सहयोग भी लिया जाए। स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि बीमार श्रद्धालुओं को निकटतम स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने के लिए बोट एवं बाइक एंबुलेंस की व्यवस्था की जाए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ मेले के सुव्यवस्थित एवं सफल आयोजन के लिए साधु-संतों, अखाड़ों, जनप्रतिनिधियों तथा धार्मिक एवं स्वयंसेवी संगठनों का सहयोग लिया जाए और उनके सुझावों को ध्यान में रखकर कार्य किए जाएं।


उन्होंने कुंभ मेले में चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती पर जोर दिया। साथ ही साइबर सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था तथा रेस्क्यू कार्यों के लिए दक्ष कार्मिकों की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा।


स्थायी कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कुंभ क्षेत्र में निर्मित सभी पुलों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर उनकी मरम्मत समय पर पूर्ण की जाए। गंगा नदी के घाटों के अनुरक्षण हेतु यदि गंग नहर के क्लोजर की आवश्यकता हो तो उत्तर प्रदेश के अधिकारियों से समन्वय स्थापित किया जाए। घाटों के सुदृढ़ीकरण, सुरक्षा रेलिंग तथा फिसलन-रोधी व्यवस्थाएं समय से पूर्ण की जाएं। कुंभ प्रारंभ होने से पूर्व सभी विद्युत लाइनों को भूमिगत कर लिया जाए।


कुंभ क्षेत्र में भूमि प्रबंधन एवं आवंटन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी मॉनिटरिंग मेलाधिकारी स्वयं करें तथा क्षेत्र को अतिक्रमणमुक्त रखा जाए।


बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल तथा पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भी प्रतिभाग करते हुए उपयोगी सुझाव दिए। इस अवसर पर मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका ने बैठक में मेले से संबंधित स्वीकृत कार्यों की प्रगति की जानकारी दी तथा प्रस्तावित कार्यों एवं व्यवस्थाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत किया। बैठक में सचिव, शहरी विकास विभाग श्री नितेश कुमार झा; सचिव, लोक निर्माण विभाग श्री पंकज कुमार पाण्डे; आयुक्त, गढ़वाल मंडल श्री विनय शंकर पाण्डेय; सचिव, पेयजल श्री रणवीर सिंह चौहान; सचिव, सिंचाई श्री युगल किशोर पंत; सचिव, पर्यटन श्री धीराज गर्ब्याल; अपर पुलिस महानिदेशक श्री ए.पी. अंशुमान; तथा उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल की डीआरएम श्रीमती विनीता श्रीवास्तव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने मेले की तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी।


बैठक में मेयर हरिद्वार श्रीमती किरन जैसल, मेयर रुड़की श्रीमती अनीता अग्रवाल, मेयर ऋषिकेश श्री शंभू पासवान; विधायक रानीपुर श्री आदेश चौहान, विधायक रुड़की श्री प्रदीप बत्रा, विधायक हरिद्वार ग्रामीण श्रीमती अनुपमा रावत, विधायक ज्वालापुर श्री रवि बहादुर; दायित्वधारी श्री अजीत चौधरी, श्री जयपाल सिंह चौहान, श्री देशराज कर्णवाल, श्री शोभाराम प्रजापति; पूर्व मंत्री एवं प्रदेश उपाध्यक्ष स्वामी यतीश्वरानंद; जिलाध्यक्ष भाजपा हरिद्वार श्री आशुतोष शर्मा, जिलाध्यक्ष रुड़की डॉ. मधु; पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल श्री राजीव स्वरूप; सचिव श्री सी. रविशंकर, श्री आनंद स्वरूप; जिलाधिकारी श्री मयूर दीक्षित; वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री नवनीत सिंह भुल्लर; मुख्य विकास अधिकारी श्री ललित नारायण मिश्रा; अपर जिलाधिकारी श्री पी.आर. चौहान; अपर मेलाधिकारी श्री दयानंद सरस्वती सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।


*स्वच्छ देहरादून, सशक्त महिलाएंः नगर निगम की पहल से बदली तस्वीर,*

*देहरादून निगम के 100 में से 57 वार्डो में महिला समूह को सौंपी गई कमान*

*समयद्व शुल्क संग्रहण से बढ़ा राजस्व, व्यवस्था में आया सुधार- आयुक्त नमामि बंसल*


*देहरादून 21 फरवरी,2026:

63 lakh collected by nagar nigam ddun by wastage


राजधानी देहरादून में स्वच्छता प्रबंधन के क्षेत्र में एक अभिनव पहल ने सफलता की नई मिसाल प्रस्तुत की है। नगर निगम देहरादून द्वारा राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के अंतर्गत पंजीकृत महिला स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से संचालित घर-घर कूड़ा संग्रहण शुल्क अभियान ने न केवल सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ किया है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।


नगर निगम ने शहर के 100 वार्डों में से 57 वार्डों में कूड़ा शुल्क संग्रहण की जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूहों को सौंपी है। इन समूहों द्वारा त्रैमासिक (प्रत्येक तीन माह) आधार पर घर-घर जाकर निर्धारित शुल्क का संग्रहण किया जा रहा है। अभियान के प्रारंभिक चरण में ही जुलाई, अगस्त और सितंबर माह के दौरान 63 लाख रुपये से अधिक की राजस्व प्राप्ति दर्ज की गई है।


इस पहल की विशेषता यह है कि कुल प्राप्त मुनाफे का 25 प्रतिशत भाग सीधे संबंधित महिला समूहों को प्रदान किया जा रहा है। इससे महिलाओं को स्थायी आय का स्रोत मिला है तथा वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह व्यवस्था न केवल पारदर्शी और व्यवस्थित है, बल्कि इससे नगर निगम की कार्यप्रणाली में भी सुधार आया है।


महिला समूहों द्वारा शुल्क संग्रहण के साथ-साथ नागरिकों से फीडबैक भी लिया जा रहा है, जिससे सफाई व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं उत्तरदायी बनाया जा रहा है। इस समन्वित प्रयास से शहर की स्वच्छता व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।


वार्ड संख्या 64, नेहरूग्राम की समूह सदस्य सीमा बिष्ट ने इस पहल के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं नगर निगम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना से उनके जैसी अनेक महिलाओं को रोजगार का सशक्त अवसर प्राप्त हुआ है।


नगर निगम आयुक्त नमामि बंसल ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन से संबद्ध महिला समूहों को कूड़ा उठान शुल्क संग्रहण का दायित्व सौंपा गया है। समूहों द्वारा निर्धारित समय में प्रभावी शुल्क संग्रहण कर निगम को उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे राजस्व में वृद्धि के साथ कार्य प्रणाली में भी सुधार हुआ है।


सहायक नगर आयुक्त राजवीर सिंह चौहान ने जानकारी दी कि त्रैमासिक प्रणाली के तहत तीन माह का शुल्क एकमुश्त संग्रहित किया जा रहा है। अब तक 63 लाख रुपये की प्राप्ति हो चुकी है, जिसमें से 25 प्रतिशत राशि महिला समूहों को प्रदान की जाएगी।


यह अभिनव मॉडल स्वच्छता, पारदर्शिता और महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। इस पहल ने न केवल देहरादून को अधिक स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित बनाने में योगदान दिया है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त आधार भी प्रदान किया है।



 सीएम के निर्देशानुसार सरकारी विद्यालयों में डिजिटल एजुकेशन की दिशा में जिला प्रशासन के कदम तेज,880 एलईडी टीवी का स्टॉक हुआ तैयार



निजी स्कूलों की भांति अब हर कक्षा में एलईडी स्क्रीन अपने सरकारी विद्या के मंदिर; जिला प्रशासन का दस्ता प्री डिस्पैच निरीक्षण हेतु एसीईआर फैक्टरी पांडूचेरी को हुआ रवाना 


जिले का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्टः सरकारी विद्यालयों में स्मार्ट क्लास हेतु 880 स्मार्ट टीवी होगी वास्तविकता 


बिड डाक्यूमेंट विशिष्टताएं, विश्लेषण; प्री बिड मीटींग पर महीनों मेहनत पश्चात सफल हुुआ प्रोजेक्ट


सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा लिए मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट में स्मार्ट टीवी गुणवत्ता सुनश्चित करेगी प्री-डिस्पेच इन्सपैक्शन टीम 


देहरादून दिनांक 21 फरवरी 2026, (सूवि), मा0 मुख्यमंत्री के निर्देशन में जिला प्रशासन, देहरादून द्वारा विद्यालयी शिक्षा को आधुनिक, तकनीकी एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जनपद के सरकारी विद्यालयों में स्मार्ट क्लास सुविधा विकसित करने के उद्देश्य से कुल 880 स्मार्ट टीवी क्रय किए गए हैं, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों को डिजिटल, इंटरएक्टिव एवं दृश्य-आधारित शिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे जिले के अपने सरकारी विद्यालय भी निजी विद्वालयों की भांति आधुनिक शिक्षा से जुड़ेगें। जिला प्रशासन द्वारा जिले में पिछले ढेड वर्ष से सरकारी विद्यालयों को प्रोजेक्ट ‘‘उत्कर्ष’’ के तहत सुविधा सम्पन्न बनाया जा रहा है। सभी विद्यालयों को फर्नीचरयुक्त कर दिया है तथा विद्यालयों में खेल अवस्थापना सुविधा, शौचालय, विद्युत, पेयजल, मंकीनेट, लाईब्रेरी आदि समुचित व्यवस्थाएं की गई है। 

जिलाधिकारी सविन बसंल  के निर्देशानुसार क्रय की गई सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्री-डिस्पेच इंस्पेक्शन (पीडीआई) कराया जाएगा। इसके अंतर्गत जिला सूचना विज्ञान अधिकारी तथा मुख्य शिक्षा अधिकारी स्वयं कंपनी के विनिर्माण स्थल पर जाकर उपकरणों का भौतिक निरीक्षण करेंगे।

इस क्रम में संबंधित अधिकारीगण कंपनी के प्रतिष्ठान, पांडिचेरी में स्मार्ट टीवी की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों, सुरक्षा प्रावधानों तथा निर्धारित विनिर्देशों के अनुरूपता की विस्तृत जांच करेंगे। निरीक्षण में संतोषजनक पाए जाने के पश्चात ही सामग्री को जनपद में भेजने की अनुमति प्रदान की जाएगी। जिला प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विद्यालयों को उच्च गुणवत्ता वाले उपकरण प्राप्त हों और सार्वजनिक धन का उपयोग पारदर्शी एवं जवाबदेही के साथ किया जाए। जिला प्रशासन के इस प्रयासों से सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को आधुनिक डिजिटल सामग्री से सीखने का अवसर मिलेगा, शिक्षण प्रक्रिया अधिक रोचक, प्रभावी एवं सहभागितापूर्ण बनेगी, शिक्षकों को ऑडियो-विजुअल माध्यम से पढ़ाने में सुविधा होगी, ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालय भी तकनीकी रूप से सशक्त होंगे, जिला प्रशासन, देहरादून शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। स्मार्ट क्लास परियोजना से जनपद के हजारों विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षण संसाधनों का लाभ प्राप्त होगा तथा भविष्य की डिजिटल शिक्षा प्रणाली के लिए मजबूत आधार तैयार होगा। उपकरणों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्री-डिस्पेच इंस्पेक्शन (पीडीआई) कराया जाएगा। जिला सूचना विज्ञान अधिकारी एवं मुख्य शिक्षा अधिकारी कंपनी के विनिर्माण स्थल, पांडिचेरी में जाकर स्मार्ट टीवी की तकनीकी मानकों एवं विनिर्देशों के अनुरूपता की जांच करेंगे। निरीक्षण के उपरांत संतोषजनक पाए जाने पर ही सामग्री जनपद में भेजी जाएगी। इस पहल से सरकारी विद्यालयों में शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी, रोचक एवं आधुनिक बनेगी तथा विद्यार्थियों को उन्नत शिक्षण संसाधनों का लाभ मिलेगा।

 5 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचा ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान 


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर 45 दिन तक चला अभियान 

681 शिविरों के जरिए हुआ 33 हजार जन समस्याओं का समाधान 



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चला ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान 45 दिन की अवधि के बाद शुक्रवार को अभूतपूर्व रिकॉर्ड के साथ सम्पन्न हो गया है। इस अभियान के दौरान 681 शिविरों का आयोजन किया गया, जिसमें पांच लाख से अधिक लोगों ने प्रत्यक्ष तौर पर भागीदारी निभाई, यही नहीं इस दौरान करीब 33 हजार जन शिकायतों का त्वरित समाधान किया गया। 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि लोगों को जन समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़े, बल्कि प्रशासन खुद लोगों के पास पहुंच कर उनकी शिकायतों का निस्तारण करे। मुख्यमंत्री की इसी सोच को केंद्र में रखते हुए दिसंबर माह से सरकार ने ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान शुरु किया। जिसके तहत शुक्रवार 20 फरवरी तक, लगातार 45 दिन, प्रदेशभर में शिविर आयोजित किए गए। इसी क्रम में शुक्रवार को अभियान सम्पन्न होने तक प्रदेश भर में कुल 681 कैंपों का आयोजन किया गया, जिसमें 5,33,452 नागरिकों ने प्रत्यक्ष तौर पर भाग लेकर विभिन्न सेवाओं का लाभ लिया, साथ ही अपनी समस्याएं भी दर्ज कराई। अकेले शुक्रवार को ही इस क्रम में 11 कैम्प आयोजित किए गए, जिसमें 8209 नागरिकों ने प्रतिभाग लिया। 


33 हजार से अधिक शिकायतों का निस्तारण 

अभियान के तहत प्रदेश भर में 51053 शिकायती पत्र प्राप्त हुए, जिसमें से 33755 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। इन शिविर के जरिए, विभिन्न प्रकार के प्रमाणपत्रों के लिए 74184 आवेदन प्राप्त हुए, जिन पर त्वरित गति से कार्य किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त करीब तीन लाख लोगों ने विभिन्न सेवाओं का भी लाभ लिया। यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश सरकार योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। 


लोगों को बिना किसी भागदौड़ के सरकारी सेवाएं मिली, यही सुशासन की पहली सीढ़ी है। इसी क्रम में 45 दिन की अवधि के लिए ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान शुरु किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा है। यह विशेष अभियान भले ही सम्पन्न हो गया हो, लेकिन प्रशासन लगातार जनता के सम्पर्क में बना रहेगा, अधिकारियों का आगे भी लगातार आगे बढ़कर जन शिकायतों का त्वरित समाधान करने को कहा गया है।

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड


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पौड़ी:


*जनपद मुख्यालय में बजट पूर्व संवाद: संवाद

*जनसहभागिता से तैयार होगा जनता का बजट, रांसी में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में व्यापक मंथन*

*पर्वतीय विकास, रोजगार और आधारभूत संरचना पर केंद्रित रहा बजट पूर्व संवाद*


*पौड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल, जनसहभागिता से आकार लेगा भविष्य का बजट



जनपद पौड़ी गढ़वाल के रांसी स्थित बहुउद्देश्यीय भवन में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में बजट पूर्व संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मंडल मुख्यालय पहुंचने पर मुख्यमंत्री का जोर शोर से स्वागत किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए जनप्रतिनिधियों, कृषकों, उद्यमियों, व्यापारियों, महिला समूहों, पर्यटन व्यवसायियों, मत्स्य पालकों, कृषि वैज्ञानिकों, स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों एवं विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों ने सहभागिता करते हुए आगामी बजट के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसा जनहितकारी बजट तैयार करना है, जो प्रदेश की जमीनी आवश्यकताओं, क्षेत्रीय विशेषताओं और जनअपेक्षाओं के अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि विकसित उत्तराखण्ड के निर्माण का रोडमैप है, जिसमें प्रत्येक वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।


उन्होंने इस संवाद में शामिल होकर अपने महत्वपूर्ण सुझाव देने के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि समाज के प्रत्येक वर्ग जैसे पर्यटन व्यवसायियों, व्यापारियों, महिला स्वयं सहायता समूहों, किसानों और उद्यमियों की अपेक्षाएं और आवश्यकताएं बजट में समुचित रूप से परिलक्षित हों। उन्होंने कहा कि इस संवाद के दौरान अनेक व्यावहारिक और दूरदर्शी सुझाव प्राप्त हुए हैं, जो राज्य के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य के निर्माण का रोडमैप होता है। उन्होंने कहा कि बजट निर्माण की प्रक्रिया को पारदर्शी, सहभागी और जनोन्मुखी बनाने का संकल्प लिया है। सीमांत क्षेत्रों सहित प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर संवाद कर सुझाव प्राप्त किए जा रहे हैं, ताकि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और प्रत्येक वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है और व्यापार, उद्योग, पर्यटन, कृषि एवं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। राज्य में होमस्टे, स्वरोजगार और निवेश के नए अवसर सृजित हुए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा मिला है। सरकार का लक्ष्य किसानों को उद्यमी के रूप में विकसित करना, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना तथा राज्य की अर्थव्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करना है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट पूर्व संवाद के दौरान प्राप्त सभी सुझावों का गंभीरता से परीक्षण कर उन्हें आगामी बजट और नीतिगत निर्णयों में यथासंभव शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा बजट प्रस्तुत करना है, जो आकार में व्यापक, प्रभाव में ठोस और पूरी तरह जनहित पर केंद्रित हो, ताकि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच सके।


मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक उत्तराखंड को आत्मनिर्भर एवं अग्रणी राज्य बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि प्रदेश ने वित्तीय अनुशासन और विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनसहभागिता से तैयार होने वाला यह बजट राज्य की विकास यात्रा को और अधिक गति प्रदान करते हुए समृद्ध और सशक्त उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


संवाद के दौरान ग्रामीण विकास को गति देने के लिए अनुदान में वृद्धि, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था सुदृढ़ करने, सीवर लाइन एवं शौचालय निर्माण, पंचायतों को सशक्त बनाने, बंजर भूमि के उत्पादक उपयोग तथा ग्राम स्तर पर सोलर प्लांट संचालन जैसे सुझाव प्राप्त हुए। शहरी क्षेत्रों के लिए नगर निकायों के संसाधन बढ़ाने, सोलर सिटी की अवधारणा को बढ़ावा देने, पार्किंग व सफाई व्यवस्था सुदृढ़ करने तथा शहरी आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण पर बल दिया गया।


कृषि एवं उद्यान क्षेत्र में पर्वतीय कृषि को प्रोत्साहन, बागवानी एवं उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन, जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा हेतु प्रभावी उपाय, पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन, कोल्ड स्टोरेज एवं क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा देने के सुझाव सामने आए। कृषकों के तकनीकी प्रशिक्षण, जिला स्तर पर प्रसंस्करण केंद्रों की स्थापना तथा ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ विकसित करने पर भी जोर दिया गया।


उद्योग एवं एमएसएमई क्षेत्र में पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योग स्थापना हेतु पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज अनुदान, मशीनरी पर विशेष छूट, सेवा क्षेत्र आधारित उद्योगों को बढ़ावा तथा स्थानीय उत्पादों पर आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन की मांग रखी गई। आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों को उद्योगों से सीधे जोड़ने, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें और पलायन रुके, इस पर भी सुझाव दिए गए।


महिला सशक्तिकरण के अंतर्गत प्रत्येक जनपद में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने, ब्याज-मुक्त ऋण उपलब्ध कराने तथा स्थानीय सेवाओं में महिलाओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई। गौशालाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने, जैविक खाद उत्पादन को प्रोत्साहन देने तथा मत्स्य पालन के लिए आधुनिक तकनीकों एवं बायोफ्लॉक टैंकों को बढ़ावा देने के सुझाव भी प्रस्तुत किए गए।


पर्यटन क्षेत्र में होमस्टे के लिए रियायती ऋण सुविधा, हैली सेवा का विस्तार, वैकल्पिक मार्गों का निर्माण, छोटे पर्यटन स्थलों का विकास, संस्कृत ग्रामों एवं सांस्कृतिक स्थलों को पर्यटक ग्राम के रूप में विकसित करने, नेचर एवं एग्री-टूरिज्म को बढ़ावा देने तथा स्थानीय उत्पादों के विपणन के लिए ठोस नीति बनाने की आवश्यकता बताई गई।


ऊर्जा क्षेत्र में ऊर्जा नेटवर्क को सुदृढ़ बनाने, कृषि एवं उद्योग आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहन देने हेतु कर एवं शुल्क में राहत तथा ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के सुझाव भी प्राप्त हुए।


बजट पूर्व संवाद कार्यक्रम में स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी ने कहा कि जनसहभागिता के आधार पर तैयार होने वाला बजट ही प्रदेश के समग्र विकास की नींव बनेगा। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पर्यटन, कृषि, लघु उद्योग एवं आधारभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में आगामी बजट जनअपेक्षाओं के अनुरूप होगा और पौड़ी सहित पूरे प्रदेश के संतुलित विकास को नई दिशा देगा।


वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने सभी होमस्टे संचालकों, एमएसएमई उद्यमियों, लखपति दीदियों, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस संवाद का उद्देश्य आगामी बजट को जनभावनाओं, स्थानीय आवश्यकताओं और विकास की प्राथमिकताओं के अनुरूप दिशा देना है, ताकि वित्तीय संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन करते हुए अधिकतम जनकल्याण सुनिश्चित किया जा सके। राज्य में आधारभूत संरचना, पर्यटन, कनेक्टिविटी, स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में निरंतर सकारात्मक प्रगति हो रही है, जिससे विकास की नई संभावनाएं साकार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने विकास की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि प्रत्येक रुपया पारदर्शिता के साथ सही व्यक्ति तक पहुंचे और उसका अधिकतम जनहित में उपयोग हो। बजट पूर्व संवाद इसी सहभागी सोच का महत्वपूर्ण माध्यम है। आप सभी से अपेक्षा है कि अपने संक्षिप्त, व्यवहारिक एवं दूरदर्शी सुझाव प्रस्तुत कर आगामी बजट को और अधिक जनोन्मुखी, प्रभावी एवं विकासोन्मुख बनाने में सक्रिय योगदान दें।


जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने सभी जनप्रतिनिधियों, हितधारकों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के संवाद से जनता की सहभागिता और विश्वास और अधिक सुदृढ़ होता है। उन्होंने कहा कि प्राप्त सुझाव प्रदेश के संतुलित, समावेशी एवं सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार सिद्ध होंगे।


बजट पूर्व संवाद कार्यक्रम का संचालन अपर सचिव मनमोहन मैनाली द्वारा किया गया। कार्यक्रम में कृषि, उद्योग, व्यापार, पंचायत, शहरी विकास आदि से जुड़े 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। जिला पंचायत पौड़ी की अध्यक्षा रचना बुटोला, मेयर नगर निगम श्रीनगर आरती भंडारी, ऋषिकेश शंभू पासवान, कोटद्वार शैलेन्द्र रावत, रुड़की अनीता देवी अग्रवाल, नगर पालिकाध्यक्ष पौड़ी हिमानी नेगी, आयुक्त गढ़वाल/सचिव उद्योग विनय शंकर पांडे, पुलिस महानिरीक्षक राजीव स्वरूप, संयुक्त सचिव सुरेन्द्र सिंह रावत, आयुक्त ग्राम विकास अनुराधा पाल, अपर सचिव डॉ. आनंद श्रीवास्तव, डॉ. सौरभ गहरवार, अभिषेक रोहिला, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार, मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत, अपर ज़िलाधिकारी अनिल गर्ब्याल, संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी, जिलाध्यक्ष भाजपा कमल किशोर रावत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कृषक, उद्यमी, जनप्रतिनिधि तथा हितधारक मौजूद रहे। 

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