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 भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने उत्तराखंड राज्य को बड़ी आर्थिक सहायता प्रदान की है। वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए “पूंजी निवेश हेतु राज्यों को विशेष सहायता योजना (SASCI)” के अंतर्गत खनन क्षेत्र में सुधार के लिए उत्तराखंड को ₹200 करोड़ की विशेष सहायता (ऋण) स्वीकृत की गई है।



यह राशि माइनर मिनरल सुधारों तथा स्टेट माइनिंग रेडीनेस इंडेक्स से जुड़े सुधार कार्यों को पूरा करने के लिए दी गई है। यह सहायता भारत सरकार द्वारा निर्धारित नियमों, उत्तराखंड सरकार के प्रस्ताव और खान मंत्रालय की संस्तुति के आधार पर जारी की गई है।


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस सहायता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहयोग उत्तराखंड के खनन क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीकी सुधार और सतत विकास को नई गति देगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस राशि का उपयोग खनन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित, पर्यावरण-संवेदनशील और रोजगारोन्मुखी बनाने में करेगी, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे।

 

राष्ट्रपति ने विकसित भारत - रोज़गार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी–जी राम जी (विकसित भारत- जी राम जी) विधेयक, 2025 को अपनी स्वीकृति प्रदान की

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अधिनियम से रोज़गार की वैधानिक गारंटी 125 दिनों तक बढ़ी

भविष्य की अगुवाई पंचायतें करेंगी - योजना बनाने की शक्ति ग्राम सभा और पंचायतों के पास


विकसित भारत–जी राम जी विधेयक, विकसित भारत@2047 के विज़न के अनुरूप

प्रविष्टि तिथि: 21 DEC 2025 4:30PM by PIB Delhi

राष्ट्रपति ने विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी–जी राम जी (विकसित भारत-जी राम जी) विधेयक, 2025 को आज अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है, जो ग्रामीण रोज़गार नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। यह अधिनियम ग्रामीण परिवारों के लिए प्रति वित्तीय वर्ष मज़दूरी रोज़गार की वैधानिक गारंटी को 125 दिनों तक बढ़ाता है और सशक्तिकरण, समावेशी विकास, योजनाओं के अभिसरण (कन्वर्जेस) तथा परिपूर्ण (सेचूरेशन) तरीके से सेवा–प्रदाय को आगे बढ़ाने का प्रयास करता है, जिससे समृद्ध, सक्षम और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की नींव मजबूत होती है।


इससे पूर्व, संसद ने विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 पारित किया था, जिसने भारत के ग्रामीण रोज़गार और विकास ढांचे में एक निर्णायक सुधार का मार्ग प्रशस्त किया है। 


यह अधिनियम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम, 2005 (महात्मा गांधी नरेगा) को प्रतिस्थापित करते हुए आजीविका सुरक्षा को सुदृढ़ करने वाला एक आधुनिक वैधानिक ढांचा प्रदान करता है, जो विकसित भारत@2047 के राष्ट्रीय विज़न के अनुरूप है।


सशक्तिकरण, विकास, कन्वर्जेंस और परिपूर्णता (सेचूरेशन) के सिद्धांतों पर आधारित यह अधिनियम ग्रामीण रोज़गार को केवल एक कल्याणकारी योजना से आगे बढ़ाकर विकास का एक एकीकृत माध्यम बनाता है। यह ग्रामीण परिवारों की आय सुरक्षा को सुदृढ़ करता है, शासन और जवाबदेही को आधुनिक बनाता है तथा मज़दूरी रोज़गार को टिकाऊ और उत्पादक ग्रामीण परिसंपत्तियों के सृजन से जोड़ता है, जिससे समृद्ध एवं सक्षम ग्रामीण भारत की नींव और अधिक मजबूत होती है।


अधिनियम की प्रमुख विशेषताएं


रोज़गार की वैधानिक गारंटी में वृद्धि


यह अधिनियम प्रत्येक वित्तीय वर्ष में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को कम से कम 125 दिनों के मज़दूरी रोज़गार की वैधानिक गारंटी प्रदान करता है, बशर्ते परिवार के वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक कार्य करने के इच्छुक हों। (धारा 5(1))

पूर्व में उपलब्ध 100 दिनों के रोजगार के अधिकार की तुलना में यह वृद्धि ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सुरक्षा प्रदान करती है, काम को पहले से अनुमानित करती है और उनकी आय को अधिक स्थिर बनाती है। इसके साथ ही उन्हें राष्ट्रीय विकास में अधिक प्रभावी और सार्थक योगदान देने में सक्षम बनाती है।

कृषि और ग्रामीण श्रम के बीच संतुलित प्रावधान


बुवाई और कटाई के चरम सीजन के दौरान कृषि से संबंधित गतिविधियों हेतु कृषि श्रम की उपलब्धता आसान करने के लिए, यह अधिनियम राज्यों को एक वित्तीय वर्ष में कुल 60 दिनों की समेकित विराम अवधि अधिसूचित करने का अधिकार प्रदान करता है। (धारा 6)

श्रमिकों को मिलने वाले कुल 125 दिनों के रोज़गार के अधिकार यथावत बनी रहेगी, जिसे शेष अवधि में प्रदान किया जाएगा, जिससे कृषि उत्पादकता और श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के मध्य संतुलित समायोजन सुनिश्चित होता है।

समय पर मज़दूरी भुगतान


यह अधिनियम मज़दूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर अथवा किसी भी स्थिति में कार्य की समाप्ति के पंद्रह दिनों के भीतर किए जाने को अनिवार्य करता है (धारा 5(3))। निर्धारित अवधि से अधिक विलंब होने की स्थिति में, अनुसूची–II में उल्लिखित प्रावधानों के अनुसार विलंब मुआवज़ा देय होगा, जिससे मज़दूरी सुरक्षा को सुदृढ़ किया जाता है और श्रमिकों को विलंब से संरक्षण प्रदान किया जाता है।

टिकाऊ और उपयोगी ग्रामीण अवसंरचना से जुड़ा रोजगार


इस अधिनियम के अंतर्गत मज़दूरी रोज़गार को चार प्राथमिक विषयगत क्षेत्रों में टिकाऊ सार्वजनिक परिसम्पत्तियों के सृजन के साथ स्पष्ट रूप से जोड़ा गया है (धारा 4(2), अनुसूची–I के साथ पठित):


जल सुरक्षा एवं जल से संबंधित कार्य

मुख्य ग्रामीण अवसंरचना

आजीविका से संबंधित अवसंरचना

प्रतिकूल मौसमीय घटनाओं के प्रभाव को कम करने वाले कार्य

सभी कार्य बॉटम-अप एप्रोच यानि गाँव स्तर से प्रस्तावित किए जाते हैं, तथा सृजित सभी परिसंपत्तियों को विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक में समेकित किया जाता है, ताकि सार्वजनिक संसाधनों का कंवर्जेंस, विखंडन से बचाव और स्थानीय ज़रूरत के अनुसार आवश्यक ग्रामीण अवसंरचना के निर्माण सेचूरेशन लक्ष्य के आधार पर परिणाम-आधारित योजना सुनिश्चित हो सके।  


राष्ट्रीय स्तर पर अभिसरण के साथ विकेन्द्रीकृत योजना निर्माण


सभी कार्य ‘विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं’ से प्रारंभ होते हैं, जिन्हें ग्राम पंचायत स्तर पर सहभागितापूर्ण प्रकियाओं के माध्यम से तैयार किया जाता है तथा ग्राम सभा द्वारा अनुमोदित किया जाता है। (धाराएँ 4(1) से 4(3))

इन योजनाओं को पीएम गति शक्ति सहित राष्ट्रीय प्लेटफार्मों के साथ डिजिटल एवं स्थानिक रूप (spatially integrated) से एकीकृत किया जाता है, जिससे संपूर्ण-सरकार दृष्टिकोण के अंतर्गत कन्वर्जेंस संभव होता है, जबकि स्थानीय स्तर पर विकेन्द्रीकृत निर्णय निर्माण को यथावत बनाए रखा जाता है।

यह एकीकृत योजना निर्माण का फ्रेमवर्क, मंत्रालयों और विभागों को कार्यों की अधिक प्रभावी योजना बनाने और क्रियान्वयन करने में सक्षम बनाएगा, दोहराव से बचाव और सार्वजनिक संसाधनों की अपव्यय रोकने में सहायक होगा, तथा सेचूरेशन-आधारित परिणामों के माध्यम से विकास की गति को तेज़ करेगा।

 


सुधारित वित्तीय संरचना


यह अधिनियम एक केन्द्रीय प्रायोजित योजना के रूप में लागू किया जाएगा, जिसे राज्यों द्वारा अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार अधिसूचित और क्रियान्वित किया जाएगा।

व्यय-साझेदारी का पैटर्न केंद्र और राज्यों के बीच 60:40, पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्यों के लिए 90:10, तथा विधानसभारहित केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्तपोषण का है।

निधि राज्यवार मानकीकृत आवंटनों के माध्यम से प्रदान की जाएगी, जो नियमों में निर्दिष्ट वस्तुनिष्ठ मानकों पर आधारित होगी (धाराएँ 4(5) एवं 22(4)), जिससे पूर्वानुमेयता, वित्तीय अनुशासन और सुदृढ़ योजना निर्माण सुनिश्चित होगा, साथ ही रोज़गार तथा बेरोज़गारी भत्ते से संबंधित वैधानिक अधिकारों का पूर्ण संरक्षण बना रहता है।

प्रशासनिक क्षमता की सुदृढ़ता


प्रशासनिक व्यय की अधिकतम सीमा को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे बेहतर मानव संसाधन उपलब्धता, प्रशिक्षण, तकनीकी क्षमता तथा मैदानी स्तर पर सहायता सुदृढ़ होती है और संस्थानों की परिणामों को प्रभावी रूप से प्रदान करने की क्षमता मज़बूत होती है।

विकसित भारत - रोज़गार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025, विकसित भारत@2047 के विजन के अनुरुप भारत की ग्रामीण रोज़गार व्यवस्था को नया और मज़बूत रूप प्रदान करने की दिशा में एक निर्णायक कदम का प्रतिनिधित्व करता है। प्रति वित्तीय वर्ष मज़दूरी रोज़गार की वैधानिक गारंटी को 125 दिनों तक बढ़ाकर, यह अधिनियम काम मांगने के अधिकार को और मजबूत करता है, साथ ही विकेन्द्रीकृत और सहभागितापूर्ण शासन को बढ़ावा देता है। यह पारदर्शी, नियम-आधारित वित्तपोषण, जवाबदेही तंत्र, प्रौद्योगिकी (टेक्नालजी)-सक्षम समावेशन तथा कंवर्जेंस आधारित विकास को एकीकृत करता है, ताकि ग्रामीण रोज़गार न केवल आय सुरक्षा प्रदान करे, बल्कि टिकाऊ आजीविकाओं, सुदृढ़ परिसंपत्तियों और दीर्घकालिक ग्रामीण समृद्धि में भी योगदान दे।


रोज़गार की गारंटी और रोज़गार की मांग का अधिकार


यह अधिनियम रोज़गार की मांग के अधिकार को कमज़ोर नहीं करता है। इसके विपरीत, धारा 5(1) सरकार पर पात्र ग्रामीण परिवारों को कम से कम 125 दिनों के गारंटीकृत मज़दूरी रोज़गार प्रदान करने का स्पष्ट वैधानिक दायित्व निर्धारित करती है। गारंटीकृत दिनों में की गई यह वृद्धि, सुदृढ़ की गई जवाबदेही और शिकायत निवारण तंत्र के साथ मिलकर, इस अधिकार की प्रवर्तनीयता को और मज़बूत करती है।


मानक आधारित वित्तपोषण और रोज़गार प्रावधान


मानक आधारित (नॉर्मेटिव) आवंटनों की ओर किया गया परिवर्तन बजट निर्धारण और निधि प्रवाह की व्यवस्थाओं से संबंधित है और इससे रोज़गार के कानूनी अधिकार पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। धाराएँ 4(5) और 22(4) नियम-आधारित और पूर्वानुमेय आवंटन सुनिश्चित करती हैं, जबकि रोज़गार अथवा बेरोज़गारी भत्ता प्रदान करने का वैधानिक दायित्व यथावत बना रहता है।


विकेन्द्रीकरण और पंचायतों की भूमिका


यह अधिनियम योजना बनाने या क्रियान्वयन का केंद्रीकरण नहीं करता है। धाराएँ 16 से 19 तक, पंचायतों, कार्यक्रम अधिकारियों और जिला प्राधिकारियों में, उपयुक्त स्तरों पर योजना, क्रियान्वयन और निगरानी की शक्तियाँ निहित करती हैं। राष्ट्रीय स्तर पर केवल दृश्यता, कन्वर्जेंस और समन्वय किया जाएगा, न कि स्थानीय निर्णय लेने के अधिकार लिए जाएंगे।


रोज़गार और परिसंपत्ति सृजन


यह अधिनियम 125 दिनों की बढ़ी हुई आजीविका की वैधानिक गारंटी को स्थापित तो करता ही है, साथ ही यह भी सुनिश्चित करता है कि रोज़गार उत्पादक, टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल परिसंपत्तियों के निर्माण में योगदान दे। रोज़गार सृजन और परिसंपत्ति निर्माण को परस्पर पूरक उद्देश्यों के रूप में परिकल्पित किया गया है, जो दीर्घकालिक ग्रामीण विकास और अनुकूलन को समर्थन प्रदान करते हैं (धारा 4(2) एवं अनुसूची–I)।


प्रौद्योगिकी और समावेशन


अधिनियम के अंतर्गत प्रौद्योगिकी को एक बाधा नहीं, बल्कि एक सक्षम माध्यम के रूप में परिकल्पित किया गया है। धाराएँ 23 और 24, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, जियो-टैगिंग और रियल-टाइम डैशबोर्ड के माध्यम से प्रौद्योगिकी (टेक्नालजी)-सक्षम पारदर्शिता का प्रावधान करती हैं, जबकि धारा 20 ग्राम सभाओं द्वारा सोशल ऑडिट को सुदृढ़ करती है, जिससे सामुदायिक निगरानी, पारदर्शिता और समावेशन सुनिश्चित होता है।


बेरोज़गारी भत्ता


यह अधिनियम, बेरोजगारी भत्ते के संबंध में पहले के अयोग्य ठहराए (निरर्हता) जाने वाले प्रावधानों को हटाता है और इसे एक अर्थपूर्ण वैधानिक सुरक्षा उपाय के रूप में पुनर्स्थापित करता है। जहां निर्धारित अवधि के भीतर रोज़गार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, वहां पंद्रह दिनों के पश्चात बेरोज़गारी भत्ता देय हो जाता है।


निष्कर्ष


विकसित भारत - रोज़गार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 का पारित होना भारत की ग्रामीण रोज़गार गारंटी व्यवस्था के एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। वैधानिक रोज़गार को 125 दिनों तक विस्तारित कर, विकेन्द्रीकृत एवं सहभागितापूर्ण योजना को अंतर्निहित कर, जवाबदेही को सुदृढ़ कर तथा कन्वर्जेंस एवं परिपूर्णता (सेचूरेशन) आधारित विकास को संस्थागत रूप देकर, यह अधिनियम ग्रामीण रोज़गार को सशक्तिकरण, समावेशी विकास और समृद्ध एवं सक्षम ग्रामीण भारत के निर्माण के लिए एक रणनीतिक साधन के रूप में पुनः स्थापित करता है, जो विकसित भारत@2047 के विज़न के पूर्णतः अनुरूप है।

साभार पीआइबी

 

उपनगरीय और मासिक सीज़न टिकट के किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं

train fair clarification byunion govt


सामान्य श्रेणी में 215 किमी. तक कोई बढ़ोतरी नहीं


सामान्य श्रेणी में 215 किमी. से अधिक 1 पैसा प्रति किमी. की बढ़ोतरी


• मेल/एक्सप्रेस में नॉन एसी - 2 पैसे प्रति किमी. की बढ़ोतरी

• एसी श्रेणी में 2 पैसे प्रति किमी. की बढ़ोतरी

• रेलवे किराए को तर्कसंगत बनाकर इस वित्त वर्ष के बचे हुए महीनों में लगभग 600 करोड़ रुपये अर्जित करेगा। • यात्रियों को नॉन एसी कोच में 500 किमी. की यात्रा के लिए केवल 10 रुपये अधिक देने होंगे।


• रेलवे ने पिछले एक दशक में अपने नेटवर्क और परिचालन का बहुत विस्तार किया है। रेलवे अधिक परिचालन की आवश्यकताओं को पूरा करने और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ा रहा है।

• परिणामस्वरूप स्टाफ कॉस्ट कर्मचारियों पर होने वाला खर्चा बढ़कर 1,15,000 करोड़ रुपये हो गया है। पेंशन का खर्चा बढ़कर 60,000 करोड़ रुपये हो गया है। 2024-25 में परिचालन खर्च बढ़कर 2,63,000 करोड़ रुपये हो गया है।


• कर्मचारियों पर बढ़े हुए खर्च को पूरा करने के लिए रेलवे ज़्यादा कार्गो लोडिंग कर रहा है और यात्री किराए में मामूली बढ़ोतरी कर रहा है।

• सुरक्षा और बेहतर परिचालन के लिए इन प्रयासों के कारण, रेलवे सुरक्षा में काफी सुधार कर पाया है। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कार्गो ले जाने वाला रेलवे बन गया है।


• त्यौहारों के मौसम में 12,000 से अधिक ट्रेनों का हालिया सफल संचालन भी बेहतर परिचालन दक्षता का एक उदाहरण है।

• रेलवे अपने सामाजिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अधिक दक्षता और लागत को नियंत्रित करने के लिए निरंतर प्रयास करता रहेग

 

*मंत्रिमण्डल के निर्णय दिनांक 10 दिसंबर 2025*




1. पारेषण लाईनों के निर्माण में मार्गाधिकार सम्बन्धी समस्याओं के निराकरण हेतु विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों एवं अनुपूरक दिशा-निर्देशों को पिटकुल हेतु अंगीकार किये जाने का कैबिनेट द्वारा अनुमोदन। 

उपरोक्त के फलस्वरूप पिटकुल द्वारा निर्मित की जाने वाली 66 के.वी. एवं इससे अधिक क्षमता के अंतर्राज्यीय पारेषण लाइनों के निर्माण हेतु भू-स्वामियों को न्यायसंगत मुआवजा प्रदान कर Right of Way  से संबंधित विवादों के समाधान एवं परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित करते हुए मुआवजे की राशि में वृद्धि की गई है। अब पारेषण लाईनों के लिए बनाए जाने वाले टावर के चारों कोने के नीचे के क्षेत्र एवं इसके एक मीटर की परिधि के अंतर्गत आने वाली भूमि के लिए मुआवजा की राशि सर्किल रेट का दो गुना की गई है। पारेषण लाईन के नीचे अवस्थित खेतांे के लिए भी निर्धारित सर्किल दर के आधार पर ग्रामीण क्षेत्र में 30 प्रतिशत, अर्द्ध नगरीय में 45 प्रतिशत एवं नगरीय क्षेत्र में 60 प्रतिशत की दर पर मुआवजा देय होगा। सर्किल रेट एवं मार्केट रेट के दर पर बहुत अधिक अंतर होने की दशा में जिलाधिकारी या उनके द्वारा नामित अधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति देय मुआवजे की दरों का निर्धारण करेगी। इस समिति में भूमि के स्वामियों का प्रतिनिधि भी बतौर सदस्य सम्मिलित किया जाएगा।



2. उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अध्यादेश 2025“ के प्रख्यापन को मंत्रिमण्डल की स्वीकृति।


विभागों के अन्तर्गत छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने, कानूनों में छोटी तकनीकी और प्रक्रियात्मक खामियों के लिये नागरिक दंड एवं प्रशासनिक कार्यवाही आंरभ करने एवं कानूनों के अप्रचलित एवं अनावश्यक प्रावधानों को हटाये जाने आदि उद्देश्यों हेतु भारत सरकार द्वारा निर्गत दिशा-निर्देशों के क्रम में ’उत्तराखण्ड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अध्यादेश 2025’ को यथाप्रक्रिया प्रख्यापित किये जाने की मंत्रिमण्डल द्वारा अनुमति प्रदान की गयी है। इस अध्यादेश की प्रमुख विशेषतायें निम्नवत् हैंः-

(1) छोटे / विनियामक/प्रासंगिक अपराधों के लिए कारावास को मौद्रिक दंड से प्रतिस्थापित किया गया है।

(2) जहाँ निवारण की आवश्यकता थी, वहाँ दंड बढ़ाए गए या आनुपातिकता सुनिश्चित करने के लिए पुनर्गठित किए गए।

(3) स्वतः संशोधनः निवारक मूल्य बनाए रखने के लिए सभी जुर्माने / दंड हर तीन साल में 10 प्रतिशत बढ़ाए जाएंगे।

(4) प्रशासनिक / सुधारात्मक कार्रवाई पर जोर (उदाहरण के लिए, अनिवार्य उत्पाद वापसी, अनुपालन का शपथ पत्र)।

(5) गंभीर या बार-बार किए गए अपराधों के लिए अभी भी कारावास हो सकता है, लेकिन सख्त सीमाओं के भीतर।



3. भारत सरकार द्वारा Scheme for Special Assistance to States for Capital Investment 2025-26 (SASCI 2025-26)  में प्रदत्त दिशा-निर्देशों के क्रम में राज्य में नवीन भवनों के निर्माण में ग्रीन बिल्डिग के मानको को प्रोत्साहित किये जाने हेतु अतिरिक्त FAR दिए जाने का कैबिनेट द्वारा अनुमोदन।


उक्तानुसार पर्वतीय क्षेत्रों में पहाड़ी शैली एवं मैदानी क्षेत्रों में पारम्परिक श्रेणी के भवन निर्माणों को प्रोत्साहित किये जाने हेतु अतिरिक्त FAR देयता हेतु भवन निर्माण एवं विकास उपविधि/विनियम, 2011 में ग्रीन बिल्डिंग/हरित निर्माण तथा अन्य से संबंधित प्रावधानों का समावेश किये जाने के उद्देश्य से कतिपय संशोधन करने, मुख्यतः ऊर्जा दक्षता और स्थिरता मानकों का पालन सुनिश्चित करने तथा नवीन भवनों में शीत छत (Cool Roof) / हरित छत (Green Roof) एवं नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) का समावेश किए जाने से संबंधित प्राविधानों को कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गई।


4. भारत सरकार द्वारा SASCI 2025-26 में प्रदत्त दिशा-निर्देशों के क्रम में राज्यान्तर्गत लागू भवन निर्माण एवं विकास उपविधि को युक्तिसंगत किए की मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृति।

उक्तानुसार राज्य में प्रचलित भवन निर्माण एवं विकास उपविधि के अन्तर्गत मार्ग चौड़ाई, व्यावसायिक विकास के अन्तर्गत व्यावसायिक/कार्यालय के सैट बेक, भू-आच्छादन एवं FAR होटल की ऊँचाई एवं रिजोर्ट एवं इको-रिजोर्ट हेतु भू-आच्छादन एवं FAR, पहुँच मार्ग, पार्किंग में स्टिल्ट की ऊँचाई के वर्तमान प्रावधानों में संशोधन कर इन्हें युक्तिसंगत किए जाने का अनुमोदन। 

राज्य में पर्यटन विकास की संभावनों के दृष्टिगत इको-रिजोर्ट की भांति ही अब रिजॉर्ट निर्माण के लिए भी भू-उपयोग परिवर्तन के बिना कृषि भूमि का उपयोग किया जा सकेगा। इसके साथ ही रिजॉर्ट निर्माण हेतु पहुंच मार्ग की चौड़ाई के मानकों को भी घटाकर पर्वतीय क्षेत्र के लिए 6 मीटर और मैदानी क्षेत्र के लिए 9 मीटर किया गया है।


5. विषयः-Uttarakhand Town Planning Scheme (Implementation) Rules, 2025 के प्रख्यापन किए जाने को कैबिनेट की स्वीकृति।


राज्य के शहरी क्षेत्र के अन्तर्गत नियोजित शहरी क्षेत्र के विकास के लिए सभी आय वर्ग के लोगों के लिए इंटीग्रेटेड रोड नेटवर्क एवं आवासों के साथ अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराये जाने के उद्देश्य से टाउनशिप को विकसित किये जाने हेतु संबंधित मानकों को विनियमित किए जाने के निमित्त Uttarakhand Town Planning Scheme (Implementation) Rules, 2025 प्रख्यापित किए जाने का अनुमोदन।


6. राज्य के शहरी क्षेत्र के अन्तर्गत योजनाबद्ध विकास को सुव्यवस्थित किए जाने के उद्देश्य से बिना किसी अड़चन के भूमि प्राप्त करने सम्बन्धी मानकों को विनियमित किए जाने हेतु Uttarakhand Land Pooling Scheme (Implementation) Rules,2025  प्रख्यापित किए जाने की मंत्रिमण्डल द्वारा स्वीकृति दी गई है।


7. उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय में भी अन्य विश्वविद्यालयों की भांति फैकल्टी की भर्ती लोक सेवा आयोग की जगह अब विश्वविद्यालय के स्तर से किए जाने को कैबिनेट ने दी मंजूरी। 


8. उत्तराखण्ड लोक निर्माण विभाग, अधीनस्थ अभियन्त्रण (कनिष्ठ अभियन्ता सिविल, प्राविधिक, विद्युत तथा यांत्रिक) सेवा नियमावली, 2007 में संशोधन को कैबिनेट द्वारा स्वीकृति।


वर्तमान नियमावली, 2018 के नियम-5 ’क’ (1) (ब) में कनिष्ठ अभियन्ता के पद पर भर्ती के स्रोत में 05 प्रतिशत विभाग में मौलिक रूप से नियुक्त समूह ’ग’ के कर्मचारियों, (मानचित्रकार, लिपिक, व्यक्तिक सहायक, लेखा संवर्ग, मोटर चालक आदि अन्य संवर्ग) जिन्होंने विभाग से अनुज्ञा प्राप्त करने के पश्चात् अथवा सेवा में आने से पूर्व नियम 8 में विहित अर्हताएं अर्जित की हों और भर्ती वर्ष के प्रथम दिवस को विभाग में दस वर्ष की नियमित सेवा पूर्ण कर ली हो, में से अपने-अपने संवर्ग के स्वीकृत पदों की संख्या के अनुपात“ में लोक सेवा आयोग के माध्यम से पदोन्नति द्वारा भरे जाने का प्राविधान है। अब उक्त  नियम में “... अपने-अपने संवर्ग के स्वीकृत पदों की संख्या के अनुपात“ को विलोपित करते हुये “... भर्ती वर्ष के प्रथम दिवस को विभाग में दस वर्ष की नियमित सेवा पूर्ण कर ली हो, में से लोक सेवा आयोग के माध्यम से पदोन्नति से भरे जाने की व्यवस्था की गई है।


9. पिथौरागढ़ में स्थित नैनी-सैनी एयरपोर्ट को वाणिज्यिक एवं नागरिक विमानों के संचालन, बुनियादी ढांचे के विकास, निर्माण, आधुनिकीकरण तथा रख-रखाव एवं प्रबन्धन के उद्देश्य से भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण AAI को स्थायी रूप से हस्तान्तरित किये जाने एवं इस निमित राज्य सरकार व भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण AAI के मध्य MoU हस्ताक्षरित किये जाने का कैबिनेट द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है।


10. जनपद उधमसिंहनगर के तहसील सितारगंज अन्तर्गत कल्याणपुर में भूमिहीनों, आपदा या अन्य कारणों से विस्थापित खेतिहर मजदूरों को आवंटित भूमि के विनियमितीकरण हेतु निर्धारित सर्किल दर को शिथिल किये जाने के संबंध मे. मंत्रिमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया।


जनपद उधमसिंहनगर के तहसील सितारगंज अन्तर्गत कल्याणपुर में भूमिहीनों, आपदा या अन्य कारणों से विस्थापित खेतिहर मजदूरों को आवंटित भूमि के विनियमितीकरण हेतु वर्ष-2016 की सर्किल दर को शिथिल करते हुए शुल्क निर्धारण वर्ष-2004 के सर्किल रेट के आधार पर एक वर्ष के लिए किये जाने तथा तदोपरांत प्रचलित सर्किल रेट के अनुसार शुल्क निर्धारित किये जाने निर्णय। सर्किल रेट शिथिल किये जाने से प्रभावित / विस्थापित परिवार अपनी भूमि को विनियमित करा सकेंगे तथा भूमि का मालिकाना हक मिलने से उन्हें ऋण, बीमा और अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त हो सकेंगे।


11. राज्य में गतिमान मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना के अन्तर्गत सायलेज पर वर्तमान में स्वीकृत 75 प्रतिशत अनुदान को घटाकर 60 प्रतिशत अनुदान स्वीकृत किये जाने का कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय। 

सायलेज की मांग में निरन्तर हो रही वृद्धि के दृष्टिगत एवं मांग के सापेक्ष पर्याप्त सायलेज की आपूर्ति करते हुए अधिक से अधिक पशुपालकों को लाभान्वित किये जाने के उद्देश्य से सहकारिता विभाग की मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना में सायलेज पर वर्तमान में दिये जा रहे 75 प्रतिशत अनुदान को घटाकर 60 प्रतिशत किये जाने का लिया गया निर्णय।


12. डेरी विकास विभाग की साईलेज एवं दुधारू पशुपोषण योजना के अन्तर्गत साईलेज पर अनुदान दर 60 प्रतिशत किये जाने का कैबिनेट द्वारा अनुमोदन।

डेरी विकास विभाग की साईलेज एवं दुधारू पशुपोषण योजना (सामान्य) के अन्तर्गत साईलेज की मांग में निरन्तर वृद्धि होने के दृष्टिगत एवं अधिक से अधिक पशुपालको को लाभान्वित करने के उद्देश्य से डेरी विकास विभाग की साईलेज एवं दुधारू पशुपोषण योजना तथा सहकारिता विभाग की घस्यारी कल्याण योजना में साईलेज पर वर्तमान में दिये जा रहे 75 प्रतिशत अनुदान को घटाकर 60 प्रतिशत किये जाने का कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय।


13. देहरादून शहर में प्रस्तावित रिस्पना एवं बिंदाल एलिवेटेड परियोजनओं (4 लेन) के निर्माण कार्यों हेतू जी.एस.टी.एवं परियोजनाओं में प्रयुक्त होने वाली सामग्री पर देय होने वाली रॉयल्टी के व्यय भार हेतु छूट प्रदान किये जाने के संबंध में कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय।

देहरादून शहर में बढ़ते यातायात दवाब को कम करने हेतु प्रस्तावित रिस्पना एवं बिन्दाल ऐलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना का निर्माण एन.एच.ए.आई. द्वारा निष्पादित कराया जाना है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा उक्त दोनों परियोजनाओं के सिविल निर्माण का पूर्ण व्यय भार भारत सरकार द्वारा वहन किये जाने पर इस प्रतिबन्ध के अधीन सहमति व्यक्त की गयी कि राज्य सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण, यूटीलिटी शिफ्टिंग का व्यय भार स्वयं वहन किया जायेगा एवं डी.पी.आर. में आंकलित होने वाली जीएसटी तथा परियोजना में प्रयुक्त होने वाली सामग्री पर देय होने वाली रायल्टी को राज्य सरकार द्वारा छूट दिये जाने का कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय। 


14. सगन्ध पौधा केन्द्र (कैप), सेलाकुई का नाम परिवर्तित कर परफ्यूमरी एवं सगन्ध अनुसंधान संस्थान (Institute of Perfumery and Aromatic Research)  (IPAR) करने के सम्बन्ध में कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय।

15. स्क्रैप वाहनों के सापेक्ष समान श्रेणी के नये वाहनों के पंजीयन के समय मोटरयान कर में छूट प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय।


वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पूँजीगत निवेश हेतु राज्यों के लिए विशेष सहायता योजना 2025-26 के अनुसार Initiative-A  के माइलस्टोन 1 के अन्तर्गत सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार के अनुसार बीएस-1 एवं बीएस-2 प्रकार के परिवहन एवं गैर परिवहन यानों को स्क्रैप किये जाने की स्थिति में समान श्रेणी के नये वाहनों के पंजीयन के समय देय मोटरवाहन कर में 50 प्रतिशत छूट दिये जाने का कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय। 

16. मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योेजना को कैबिनेट ने दी मंजूरी

राज्य विश्वविद्यालयों एवं शासकीय तथा अनुदानित महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों को, जो विभिन्न प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे सिविल सर्विसेज (, रक्षा सेवाएं, बैंकिंग, रेलवे, एस०एस०सी० अथवा समान प्रकार की प्रतियोगी परीक्षा तथा विभिन्न प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश हेतु तथा योग्यता निर्धारण के लिए होने वाली परीक्षाओं (CAT, MAT, GATE, NE, CSIR  आदि) की तैयारी कर अपना भविष्य निर्माण करना चाहते हैं, उनके लिए निःशुल्क ऑन लाईन कोचिंग हेतु मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना के संचालन को कैबिनेट ने दी मंजूरी। 

उक्त कोचिंग सुविधा राष्ट्रीय स्तर की किसी अनुभवी संस्थान के माध्यम से प्रदान की जायेगी, जिनका चयन एक पारदर्शी प्रक्रिया से किया जायेगा। ऑनलाइन माध्यम से प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों के शिक्षकों द्वारा पाठ्यवस्तु पढ़ाई जायेगी। अध्ययन सामग्री, ऑनलाइन वीडियों, प्रैक्टिस पेपर चयनित संस्थान द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। विभिन्न प्रकृति के प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिगत विभिन्न कोचिंग संस्थाओं को एम्पैनल किया जाएगा जिनकी सुविधाएं छात्रों को प्राप्त हो सकेंगी।

उक्त योजना के अन्तर्गत लाइव क्लास, लर्निंग टूल्स AI-आधारित, पर्सनलाइज्ड संदेह समाधान, रीयल-टाइम प्रदर्शन विश्लेषण, अनुकूल मूल्यांकन, प्रत्येक छात्र के लिए सुरक्षित लॉगिन (डेस्कटॉप, टैबलेट, या मोबाइल ऐप के माध्यम से), लर्निंग संसाधन बहुभाषी अध्ययन सामग्री (अंग्रेजी, हिंदी, हिंग्लिश), डाउनलोड करने योग्य नोट्स, रिकॉर्डेड वीडियो, ट्रैकिंग और रिपोर्टिंग छात्रों की उपस्थिति, परीक्षा स्कोर, वीडियो की उपलब्धता और प्रगति ट्रैकिंग के लिए डैशबोर्ड, प्रत्येक छात्र हेतु साप्ताहिक मेंटर सत्र, सामूहिक वार्तालाप, परामर्श और वर्षवार तैयारी ट्रैकिंग तथा कोचिंग संस्थानों द्वारा छात्रों को नियमित रूप से मेन्टरिंग सुविधा प्रदान की जाएगी।

17. माध्यमिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत भी मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना के सम्बन्ध में कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय।

इस योजना के अन्तर्गत 11वीं तथा 12वीं के छात्रों को CLAT, NEET, JEEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जायेगी। 

18. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्राविधानों के अन्तर्गत उत्तराखण्ड राज्य में अभियोजन निदेशालय की स्थापना देहरादून में किए जाने का कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय। 

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के लागू होने के बाद प्रभावी एवं निष्पक्ष अभियोजन की दृष्टि से राज्य में अवर न्यायालय से उच्च न्यायालय तक अभियोजकों की नियुक्ति के प्रचलित समस्त तरीके एकीकृत करते हुए उक्त संहिता की धारा 18 के अन्तर्गत नियुक्त लोक अभियोजक एवं अपर लोक अभियोजक (या जिस भी नाम से वो ज्ञात हो), धारा 19 के अन्तर्गत नियुक्त सहायक लोक अभियोजक (या जिस भी नाम से वो ज्ञात हो) एवं धारा 20 के अन्तर्गत नियुक्त अभियोजन निदेशक, अभियोजन उप निदेशक एवं अभियोजन सहायक निदेशक (या जिस भी नाम से वो ज्ञात हो) एवं अन्य अधिकारियों के समस्त कार्य पर प्रभावी नियन्त्रण एवं पर्यवेक्षण हेतु पृथक से अभियोजन निदेशालय स्थापित किए जाने का निर्णय कैबिनेट द्वारा लिया गया। 

अभियोजन निदेशालय का प्रधान अभियोजन निदेशक होगा, जो राज्य में गृह विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कृत्य करेगा। 

19. उत्तराखण्ड वित्त विभाग के अन्तर्गत माल एवं सेवा कर संशोधन अध्यादेश को प्रख्यापित किये जाने का कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय।

आतंक के सरगना बनने की होड लगी है मदनियों में; सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान ले: डॉ सुरेन्द्र जैन

नई दिल्ली



कल भोपाल में जमीयत प्रमुख मौलाना मदनी द्वारा दिए गए कट्टरपंथी वक्तव्य की विश्व हिंदू परिषद ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उनके विरुद्ध कठोर कार्यवाही की मांग की है। 

.अपनी प्रतिक्रिया देते हुए विहिप के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेन्द्र जैन ने आज कहा कि बड़े मदनी हों या छोटे मदनी, दोनों में मुस्लिम समाज को भड़काने की होड़ लगी है। दोनों जुटे हैं कि कौन पहले लादेन या बगदादी बनता है। 

उन्होंने कहा कि चांदनी चौक में जिस प्रकार का बम विस्फोट किया गया, पूरे देश में आतंकवादी घटनाएं करने की तैयारी पूरे देश में चल रही थी। एक पूरी यूनिवर्सिटी को जिस प्रकार से आतंकवादियों का अड्डा बना दिया गया था, केवल मदरसों में पढ़े हुए नहीं, सरकारी कॉलेज में पढ़े हुए डॉक्टर भी इस आतंकवादी गिरोह के सरगना बनकर खड़े हो गए। 

क्या इनको किसी भी तरीके से कोई डिफेंड कर सकता है? उनको डिफेंड करने के साथ-साथ ये दोनों मौलाना इस होड़ में लगे हैं कि भारतीय संविधान, न्यायपालिका, प्रशासन, हिंदू समाज और देश की समस्त व्यवस्थाओं के खिलाफ मुस्लिम समाज को कैसे भड़काया जा सके! 


डॉ जैन ने कहा कि क्या ये मौलाना नहीं जानते कि कहीं रोटियों पर थूक लगाया जा रहा है, कहीं लव जिहाद के नाम पर हिन्दू बहनों से बलात्कार कर उनके टुकड़े किए जा रहे हैं! कल ही एक मामले में कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया है। ऐसे सब मामलों पर पर्दा डालने के लिए ही शायद इन्होंने मुस्लिम समाज को भड़काने का यह मार्ग अपनाया है। 

उन्होंने चेताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के विरोध में जिस प्रकार का वक्तव्य इन्होंने दिया है वह घोर आपत्तिजनक है। कब तक बाबरी मस्जिद का रोना रोते रहोगे? यह ध्यान कर लेना कि बाबर और बाबरी के नाम पर कोई अवशेष अब भारत की जनता स्वीकार नहीं करेगी! मुस्लिम समाज का बाबर से क्या लेना देना? उस विदेशी दुष्ट के नाम पर आप बार-बार मुस्लिम समाज को भड़काना चाहते हैं? चाहे वक़्फ़ बोर्ड का मामला हो या ट्रिपल तलक का, सब देश हित में उठाए गए संसदीय कदम ही तो हैं! वक्त बोर्ड और हलाल सर्टिफिकेशन के ऊपर जो पूरे देश में वातावरण बन रहा है और उसके नाम पर तुमने जो लूट मचा रखी थी, वह सामने आ गई तो बौखला गए? उस पैसे का उपयोग आतंकवादियों का केस लड़ने, हिंदुओं पर हमला करने वाले लोगों की सुरक्षा और उनको बचाने के लिए कर रहे थे! इसी की परेशानी है आपको? ये भाषण घोर आपत्तिजनक और देश के विरुद्ध खुली बगावत का ऐलान है जिसको कदापि स्वीकार नहीं किया जा सकता। 

मैं माननीय सर्वोच्च न्यायालय से अपील करूंगा स्वत: संज्ञान लें और इन राष्ट्रविरोधी वक्तव्यो के ऊपर लगाम लगाएं और इन लोगों को इनकी सही जगह बताएं! हम इनके भाषणों का अध्ययन करेंगे, जो कानूनी कार्यवाही करनी है वह भी करेंगे लेकिन ध्यान कर लेना कि तुम मुस्लिम समाज को बर्बादी की ओर ले जा रहे हो! किसी भी प्रकार से इस बगावत को सहन नहीं किया जाएगा। हर स्तर पर इसका मुकाबला किया जाएगा।


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martyred tejas  pilot namaansh syaal


नमांश स्याल अमर रहें' और 'भारत माता की जय' के नारों से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले का पटियालकड़ गांव गूंज उठा।

 जब भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर नमांश स्याल की पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। इस दौरान माता-पिता, पत्नी और परिजनों की आंखे में अश्रुधारा थी, गांव के लोग पथराई आंखों से अपने लाल का रास्ता देख रहे थे। 


 विंग कमांडर अफशां ने अपने पति नमांश स्याल को आखिरी श्रद्धांजलि दी। विंग कमांडर अफशां ने अपने पति, विंग कमांडर नमांश स्याल को सैल्यूट किया, और नम आंखों से उन्हें अलविदा कहा। नमांश स्याल का अंतिम संस्कार का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।


 शहीद नमांश स्याल को उनके भाई ने मुखाग्नि दी है। इस मौके पर हिमाचल सरकार के मंत्री, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और सैन्य अधिकारी ने भी विंग कमांडर को श्रद्धांजलि दी।  

 दिल्ली: 

red fort blast  in new delhi state uttarakhand also on high alery amit shah


लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए विस्फोट में  फोटो में पीड़ितों के हालात को जानने के लिए गृहमंत्री अमित शाह एलएनजेपी अस्पताल में पहुंचे।नदीम नाम के व्यक्ति के नाम से यह कार रजिस्टर्ड है। हरियाणा की यह गाड़ी है। दिल्ली में अनेक स्थानों पर छापेमारी चल रही है। दिल्ली से सटे राज्य हाई अलर्ट है। सूत्रों के अनुसार अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी यार 20 से अधिक लोग विस्फोट में घायल हुए हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र सिंह मोदी ने ट्वीट कर मृतकों के लिये संवेदना और दुःख जताया है। गृह मंत्री अमित शाह लाल किले का दौरा कर सकते है। जांच जारिहै। एनएसजी की टीम कार्य कर रही है।


 केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "आज शाम करीब 7 बजे दिल्ली में लाल किले के पास सुभाष मार्ग ट्रैफिक सिग्नल पर एक हुंडई i20 कार में विस्फोट हुआ। इस विस्फोट में कुछ पैदल यात्री घायल हुए और कुछ वाहन क्षतिग्रस्त हुए। प्रारंभिक रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि कुछ लोगों की जान चली गई है।


 विस्फोट की सूचना मिलने के 10 मिनट के भीतर ही दिल्ली क्राइम ब्रांच और दिल्ली स्पेशल ब्रांच की टीमें मौके पर पहुँच गईं। एनएसजी और एनआईए की टीमों ने एफएसएल के साथ मिलकर अब गहन जाँच शुरू कर दी है। आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरों की जाँच के आदेश दे दिए गए हैं। मैंने दिल्ली के पुलिस आयुक्त और स्पेशल ब्रांच प्रभारी से भी बात की है। दिल्ली के पुलिस आयुक्त और स्पेशल ब्रांच प्रभारी मौके पर मौजूद हैं। हम सभी संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं और सभी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए गहन जाँच करेंगे। सभी विकल्पों की तुरंत जाँच की जाएगी और हम परिणाम जनता के सामने पेश करेंगे। मैं शीघ्र ही घटनास्थल पर जाऊँगा और तुरंत अस्पताल भी जाऊँगा।"


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली में हुए विस्फोट की घटना को अत्यंत दुखद बताया है और इसमें हताहत एवं घायल हुए लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह घटना अत्यंत दुखद एवं चिंता का विषय है।


मुख्यमंत्री ने इस घटना के मद्देनज़र राज्य के पुलिस महानिदेशक को पुलिस को हाई अलर्ट पर रहने, पूरी सतर्कता बरतने और राज्य की सीमाओं पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि संवेदनशील एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए तथा हर संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखी जाए।


मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनता की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्थिति में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


दिल्ली स्थित लाल किले के समीप हुए कार धमाके के दृष्टिगत राज्य में High Alert जारी।*

high alert uttarakhand police


दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार धमाके की गंभीरता को देखते हुए *पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड* द्वारा राज्य भर में हाई अलर्ट जारी किया गया है।


राज्य के सभी जनपदों में *सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिगत अंतरराष्ट्रीय एवं अंतरराज्यीय सीमाओं, संवेदनशील स्थलों, धार्मिक स्थलों, बाजारों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों, मॉल तथा अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सघन चेकिंग अभियान* के निर्देश जारी किए गए हैं।


सभी *जिला प्रभारियों एवं पुलिस अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने, गश्त एवं चेकिंग बढ़ाने, तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की त्वरित सूचना एवं सोशल मीडिया की लगातार मॉनिटरिंग कर कार्रवाई सुनिश्चित* करने के निर्देश दिए गए हैं।


सभी जनपदों में *चीता मोबाइल यूनिट्स, पेट्रोल कार्, बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad) तथा डॉग स्क्वाड को सक्रिय कर दिया गया है।* इनकी टीमों द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में निरंतर सघन तलाशी एवं चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।

राज्य स्तर पर सभी गतिविधियों की निगरानी पुलिस मुख्यालय कंट्रोल रूम से की जा रही है।


पुलिस महानिदेशक ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, शांति बनाए रखें तथा किसी भी संदिग्ध व्यक्ति, वस्तु या गतिविधि की सूचना तत्काल नजदीकी पुलिस थाने या डायल 112 पर दें।


राज्य पुलिस पूर्ण सतर्कता के साथ सुरक्षा व्यवस्था पर कड़ी निगरानी रखे हुए है।


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 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती अवसर पर किया विशेष डाक टिकट का विमोचन



पीएम फसल बीमा योजना के तहत 28 हजार से अधिक किसानों को 62 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी


कचरा इधर-उधर नहीं, स्वच्छता का दिया बड़ा संदेश

-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रजत जयंती उत्सव के मुख्य कार्यक्रम में छोटी सी एक बात से देश को बड़ा संदेश दिया। स्वच्छता के लिए महा अभियान में जुटे प्रधानमंत्री ने रविवार को मंच से ही सफाई का बड़ा संदेश दिया। दरअसल, प्रधानमंत्री ने कॉफी टेबल बुक और डाक टिकट के स्पेशल कवर की लांचिंग की। इस दौरान बुक और स्पेशल कवर के ऊपर लिपटे रिबन को प्रधानमंत्री ने हटाया। इसके बाद, उन्होंने रिबन को इधर उधर न रख कर उठाकर सीधे अपनी जेब में रख लिया।

देहरादून;


उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती समारोह के अवसर पर आज देहरादून आगमन पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड डाक परिमंडल द्वारा राज्य के प्रमुख तीर्थ स्थलों एवं सांस्कृतिक प्रतीकों पर आधारित विशेष डाक टिकट श्रृंखला का विमोचन किया। इस विशेष डाक टिकट श्रृंखला के माध्यम से देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्रदान की गई है।


कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री श्री मोदी ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत राज्य के 28,000 से अधिक किसानों के बैंक खातों में ₹62 करोड़ से अधिक की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से जारी की। इस पहल से राज्य के किसानों को प्राकृतिक आपदाओं एवं फसल क्षति से सुरक्षा का लाभ प्राप्त होगा।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ पर आधारित एक विशेष प्रतीक चिन्ह भेंट किया

: *उत्तराखंड राज्य की जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ₹8260.72 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया ।*


*शिलान्यास की जाने वाली योजनाएं (₹7329.06 करोड़ की 19 योजनाएं)*

PM MOdi visit uttarakhand


सिंचाई विभाग- सौंग बांध पेयजल परियोजना - 2491.96 करोड़


देहरादून और टिहरी जनपद में प्रस्तावित सौंग बांध पेयजल परियोजन से देहरादून जनपद में 150 एमएलडी पेयजल आपूर्ति होगी। परियोजना में 130 मीटर ऊंचा बांध बनाया जाएगा। इससे देहरादून शहर की जलापूर्ति में सुधार होगी।

 

PM visit  CM dhami

जमरानी बांध पेयजल परियोजना - 2584.10 करोड़


नैनीताल जनपद में प्रस्तावित जमरानी बांध परियोजना, एक बहुउद्देशीय परियोजना है। इससे पेयजल, सिंचाई की आवश्यकता पूरी करने के साथ ही विद्युत उत्पादन भी किया जाएगा। परियोजना से 57065 हैक्टेयर क्षेत्रफल में सिंचाई होने के साथ 14 मेगावाट बिजली का भी उत्पादन होगा। 


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अन्य परियोजनाएं

Toe Protuction and Landslide Stablization work along left bank of Alaknanda River at Jyotirmath in Distt. Chamoli uttrakhand -  100.53 करोड़


जनपद पिथौरागढ के धारचूला में कालीनदी के दांये पार्श्व में स्थित विभिन्न स्थलों पर बाढ़ सुरक्षा योजनां कार्य - 140.22 करोड़


ऊर्जा (पिटकुल) -  जनपद चमोली के पीपलकोटी में 400 के०वी० पीपलकोटी स्वीचिंग उपसंस्थान एवं सम्बन्धित पारेषण लाईन (1.0 सर्किट किमी) - 340.29 करोड़


जनपद टिहरी के घनसाली में 220 के0वी0 उपसंस्थान (60 एमवीए) (राज्य पोषित)- 277.23 करोड़ 


ऊर्जा (उरेडा) - समस्त जनपदों में शासकीय भवनों में सोलर पावर प्लान्ट की स्थापना- 129.37 करोड़


चम्पावत के बनबसा में 220 के0वी0 उपसंस्थान (100 एमवीए) एवं संबंधित पारेषण लाइन (0.3 सर्किट किमी)(राज्य पोषित)- 223.71 करोड़


खेल विभाग-जनपद. चम्पावत के लोहाघाट में “महिला खिलाड़ियों के खेल कौशल विकास हेतु जनपद्. चम्पावत में महिला स्पोर्टस कॉलेज स्थापित किया जायेगा“ - 256.96 करोड़


लोक निर्माण विभाग - केन्द्रीय सडक अवस्थापना निधि के अन्तर्गत 08 विभिन्न योजनाओं तथा राज्य योजना के अन्तर्गत 02 विभिन्न योजनाओं का निर्माण कार्य- 127.43 करोड़ 


वन विभाग/वन्य जीव परिरक्षण संगठन/ (राजाजी टाइगर रिजर्व) उत्तराखण्ड पौडी जनपद - जनपद पौडी के यमकेश्वर में गौहरी रेंज के अन्तर्गत चौरासी कुटिया का पुनरोद्धार कार्य - 100.89 करोड़


प्राविधिक शिक्षा- राजकीय पॉलीटैक्निक लोहाघाट, सल्ट, दन्या, गरूड़, द्वाराहाट तथा पोखरी में भवन निर्माण कार्य -100.67 करोड़


पर्यटन- जनपद टिहरी तथा देहरादून के पर्यटन विकास कार्य - 58.21 करोड़


चिकित्सा शिक्षा -देहरादून एवं हल्द्वानी में भर्ती मरीजों के तीमारदार के ठहरने हेतु रैन बसेरा - 55.00 करोड़


चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण उत्तराखण्ड।- उप जिला चिकित्सालय खानपुर का भवन निर्माण।- 39.42 करोड़


शहरी विकास - कपकोट तथा कर्णप्रयाग में पम्पिंग पेयजल योजना एवं नानकमत्ता में पेयजल योजना पुर्नगठन - 79.83 करोड़


डेयरी विकास - जनपद नैनीताल के लालकुआं में दुग्ध संघ में 1.50 लाख ली०/दिन की अत्याधुनिक दुग्धशाला की स्थापना - 80.77 करोड़


पेयजल - जनपद पौड़ी में पेयजल योजना- 15.16 करोड़ 


कृषि - वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखण्ड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार पौड़ी गढ़वाल में चैनलिंक फेन्सिग कार्य - 11.48 करोड़


*लोकार्पण की जाने वाली योजनाएं(₹931.65 करोड़ की लागत 12 योजनाएं)*


ऊर्जा (पिटकुल) - जनपद पिथौरागढ के धारचूला में 220/33 के०वी० (50 एम०वी०ए०) बरम, उपसंस्थान एवं सम्बन्धित पारेषण लाईन (25.12 सर्किट किमी) - 161.98 करोड़


जनपद देहरादून के मसूरी, कैन्ट एवं राजपुर रोड में 132 के० वी० बिंदाल-पुरकुल पारेशण लाईन - 38.71 करोड़

ऊर्जा (उरेडा) - राज्य के समस्त जनपदों में शासकीय भवनों में सोलर पावर प्लान्ट की स्थापना - 32.61 करोड़


शहरी विकास - जनपद देहरादून के धर्मपुर, रायपुर, मसूरी एवं कैन्ट मैं अमृत 1.0 कार्यक्रम अन्तर्गत देहरादून जलापूर्ति की 23 जोन आच्छादन की योजना - 128.56 करोड़


प्राविधिक शिक्षा विभाग - राजकीय पालीटेक्निक चम्पावत, टनकपुर, ताकुला, बाडेछीना, चिन्यालीसौण, कुल्सारी में भवनों का निर्माण कार्य - 126.27 करोड़


लोक निर्माण विभाग -  राज्य योजना के अन्तर्गत 03 विभिन्न योजनायें तथा केन्द्रीय अवस्थापना निधि के अन्तर्गत 07 विभिन्न योजनाओं का निर्माण कार्य - 110.03 करोड़


पेयजल विभाग- जनपद पिथौरागढ़ में गंगोलीहाट, बागेश्वर में बागेश्वर नगर तथा जनपद पौडी गढवाल एवं श्रीनगर में पम्पिंग पेयजल योजना - 80.81 करोड़


जनपद पिथौरागढ के गंगोलीहाट में बेलपट्टी ग्राम समूह पम्पिंग पेयजल योजना-

57.50 करोड़ 


सिंचाई- जनपद पिथौरागढ़ के विकासखण्ड धारचूला के अन्तर्गत ग्वालगांव भूस्खलन के उपचारात्मक कार्य - 84.09 करोड़


जनपद पिथौरागढ एवं देहरादून में बाढ सुरक्षात्मक कार्य - 66.57 करोड़


कौशल विकास एवं सेवायोजन - Precision Manufacturing  की कार्यशाला का निर्माण कार्य - 25.91 करोड़ 


खेल विभाग- नैनीताल के हल्द्वानी स्टेडियम का निर्माण कार्य में हॉकी ग्राउंड (एस्ट्रोट्रफ) का निर्माण कार्य - 18.61 करोड़

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में नैनी सैनी हवाई अड्डे, पिथौरागढ़ के अधिग्रहण हेतु एमओयू पर हस्ताक्षर


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में आज भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) और उत्तराखंड सरकार के बीच पिथौरागढ़ स्थित नैनी सैनी हवाई अड्डे के अधिग्रहण के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह ऐतिहासिक समझौता उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल में सुगम, सुरक्षित और टिकाऊ हवाई संपर्क की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


नैनी सैनी हवाई अड्डे का कुल क्षेत्रफल लगभग 70 एकड़ है। यहां का टर्मिनल भवन व्यस्त समय में 40 यात्रियों को सेवा प्रदान करने में सक्षम है। साथ ही, एप्रन एक समय में दो विमानों (कोड-2B) को समायोजित करने की सुविधा से सुसज्जित है।


इस अधिग्रहण से हवाई अड्डे के मौजूदा बुनियादी ढांचे का उन्नयन, परिचालन मानकों का सुव्यवस्थित प्रबंधन, तथा उत्तराखंड की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार होगा।


नैनी सैनी हवाई अड्डे का विकास प्रदेश की स्थानीय कला, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन क्षेत्र को नया प्रोत्साहन देगा। इससे व्यापार, तीर्थ पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और आतिथ्य क्षेत्र में नए अवसर खुलेंगे तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए आयाम सृजित होंगे।


इस पहल से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सुगम्य और टिकाऊ विमानन अवसंरचना के दृष्टिकोण को बल मिलेगा और इस रणनीतिक हिमालयी क्षेत्र में आपदा-प्रतिक्रिया क्षमताओं को भी सुदृढ़ किया जा सकेगा।


यह समझौता उत्तराखंड को विकास की नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।

: *पहाड़ी बोली, पहाड़ी टोपी, पीएम का हर अंदाज पहाड़ी*


*रजत जयंती के मुख्य कार्यक्रम में उत्तराखंड से गहरा कनेक्ट कर गए पीएम नरेंद्र मोदी*


*इससे पहले अपने किसी भाषण में पीएम ने नहीं बोली इतनी अधिक गढ़वाली कुमाऊनी*


*लोक पर्वों से लेकर दयारा बुग्याल के बटर फेस्टिवल तक का जिक्र*


सिर पर पहाड़ी टोपी और भाषण में जगह-जगह गढ़वाली कुमाऊनी बोली। उत्तराखंड के रजत जयंती के मुख्य कार्यक्रम में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हर अंदाज पहाड़ीपन से घुला-मिला दिखा। उन्होंने गढ़वाली कुमाऊनी के कई-कई वाक्य बोले। वो भी कई बार। अक्सर प्रधानमंत्री उत्तराखंड के कार्यक्रमों में पहाड़ी बोली-भाषा का इस्तेमाल करते रहे हैं, मगर आज के भाषण में उन्होंने जितनी गढ़वाली कुमाऊनी बोली, उतनी कभी नहीं बोली थी। ये ही वजह रही, कि उत्तराखंड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इस बार और भी गहरा कनेक्ट महसूस किया।


प्रधानमंत्री ने अपने चिर-परिचित अंदाज में भाषण की शुरूआत की और कहा-देवभूमि उत्तराखंड का मेरा भै बंधु, दीदी, भुलियों, दाना सयानो, आप सबू तई म्यारू नमस्कार। पैलाग, सैंवा सौंली। अपने भाषण के बीच में प्रधानमंत्री ने जब फिर से गढ़वाली में बोलना शुरू किया, तो इसने लोगों को और रोमांचित कर दिया। प्रधानमंत्री बोले-पैली पहाडू कू चढ़ाई, विकास की बाट कैल रोक दी छै। अब वखि बटि नई बाट खुलण लग ली।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण मे पहाड़ के लोक पर्वों, लोक परंपराओं और महत्वपूर्ण आयोजनों को भी शामिल किया। इस क्रम में उन्होंने हरेला, फुलदेई, भिटोली, नंदादेवी, जौलजीबी, देवीधुरा मेले से लेकर दयारा बुग्याल के बटर फेस्टिवल तक का जिक्र किया।

 विधानसभा परिसर में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के आगमन पर  राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) , मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी,

विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खंडूडी भूषण एवं नेता प्रतिपक्ष श्री यशपाल आर्य  एवं मंत्रीगणों ने उनका स्वागत किया।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (3 नवंबर, 2025) उत्तराखंड राज्य के गठन की रजत जयंती के अवसर पर देहरादून, उत्तराखंड में उत्तराखंड विधानसभा को संबोधित किया।



इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि विधान सभाएं हमारी संसदीय प्रणाली का एक प्रमुख स्तंभ हैं। बाबासाहेब आंबेडकर ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने संसदीय प्रणाली को अपनाकर निरंतर जवाबदेही को अधिक महत्व दिया। जनता के प्रति निरंतर जवाबदेही संसदीय प्रणाली की एक ताकत और एक चुनौती दोनों है।

राष्ट्रपति ने कहा कि विधायक जनता और सरकार के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों से जुड़ने और जमीनी स्तर पर उनकी सेवा करने का अवसर मिलना बड़े सौभाग्य की बात है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर विधायक जनता की समस्याओं के समाधान और उनके कल्याण के लिए सक्रिय रूप से काम करते रहें तो जनता और उनके प्रतिनिधियों के बीच विश्वास का बंधन अटूट रहेगा।

राष्ट्रपति ने उत्तराखंड विधानसभा के सदस्यों से विकास और जनकल्याण के कार्यों को पूरी लगन से करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्य दलगत राजनीति से ऊपर उठकर होने चाहिए। उन्होंने समाज के वंचित वर्गों के कल्याण और विकास के लिए विशेष संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को विकास के अवसर प्रदान करना भी उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए।




राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 44 के अंतर्गत, हमारे संविधान निर्माताओं ने सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता का प्रावधान किया था। उन्होंने संवैधानिक निर्देशों के अनुरूप समान नागरिक संहिता विधेयक को लागू करने के लिए उत्तराखंड विधानसभा के सदस्यों की सराहना की। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि उत्तराखंड विधानसभा में 550 से अधिक विधेयक पारित हो चुके हैं, जिनमें उत्तराखंड लोकायुक्त विधेयक, उत्तराखंड जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार विधेयक और नकल-निरोधक विधेयक शामिल हैं। उन्होंने पारदर्शिता, नैतिकता और सामाजिक न्याय से प्रेरित होकर ऐसे विधेयक पारित करने के लिए विधायकों की सराहना की।


राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तराखंड अद्वितीय प्राकृतिक संपदा और सौंदर्य से भरपूर है। राज्य को प्रकृति के इन उपहारों को संरक्षित करते हुए विकास के पथ पर आगे बढ़ना चाहिए। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि पिछले 25 वर्षों में, उत्तराखंड के लोगों ने विकास की प्रभावशाली उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्य ने पर्यावरण, ऊर्जा, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा के क्षेत्रों में सराहनीय प्रगति की है। डिजिटल और भौतिक कनेक्टिविटी तथा बुनियादी ढांचे के विकास में भी प्रगति हुई है। व्यापक विकास प्रयासों के परिणामस्वरूप, उत्तराखंड ने मानव विकास सूचकांक के कई मानकों पर सुधार किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ, उत्तराखंड विधानसभा के सदस्य राज्य और देश को तीव्र विकास के पथ पर आगे ले जाते रहेंगे।

 


मुम्बई- अंग्रेजों के जमाने के जेलर श्री गोवर्धन असरानी का कल देहांत हो गया है।

कई दशकों तक हास्य अभिनेता के रूप में दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले चिर परिचित अभिनेता श्री गोवर्धन अंसारी के निधन पर प्रधानमंत्री मोदी समेत दिग्गज बॉलीवुड कलाकारों ने दुख व्यक्त किया है।


प्रधानमंत्री मोदी ने संवेदना जताते हुए पोस्ट किया है:-

श्री गोवर्धन असरानी जी के गुज़र जाने से बहुत दुख हुआ। एक टैलेंटेड एंटरटेनर और सच में वर्सेटाइल आर्टिस्ट, उन्होंने कई पीढ़ियों तक दर्शकों का मनोरंजन किया। 

उन्होंने अपनी यादगार परफॉर्मेंस से अनगिनत जिंदगियों में खुशी और हंसी भर दी। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उनके परिवार और चाहने वालों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ओम शांति


- खोज जर्मनी के जीएसआई हेल्महोल्ट्ज़ सेंटर फॉर हैवी आयन रिसर्च में सम्पन्न


- आईआईटी रुड़की के प्रो. एम. मैती ने निभाई अहम भूमिका

- अध्ययन फिजिकल रिव्यू लेटर्स जर्नल में प्रकाशित

- खोज "स्थिरता के द्वीप" की वैश्विक वैज्ञानिक तलाश में महत्वपूर्ण योगदान।

- अतिभारी तत्वों के जीवनकाल और नाभिकीय बलों की समझ में बड़ी उपलब्धि


 रुड़की : 



एक उल्लेखनीय वैश्विक वैज्ञानिक सफलता में शोधकर्ताओं ने एक नए अतिभारी समस्थानिक, सीबोर्गियम-257 (Sg-257) की खोज की है, जिसने परमाणु भौतिकी एवं ब्रह्मांड की हमारी समझ की सीमाओं को और आगे बढ़ाया है। यह अग्रणी प्रयोग जर्मनी के डार्मस्टाट स्थित जीएसआई हेल्महोल्ट्ज़ सेंटर फॉर हैवी आयन रिसर्च में किया गया, जिसमें आईआईटी रुड़की के भौतिकी विभाग के प्रो. एम. मैती का महत्वपूर्ण योगदान रहा। यह कार्य प्रतिष्ठित जर्नल फिजिकल रिव्यू लेटर्स में प्रकाशित हुआ है।


शक्तिशाली त्वरक और अत्याधुनिक संसूचन तकनीकों का उपयोग करते हुए, टीम ने एसजी-257, एक ऐसा अतिभारी तत्व जो प्रकृति में नहीं पाया जाता, का सफलतापूर्वक संश्लेषण किया। यह खोज इस मूलभूत प्रश्न का उत्तर देने में सहायता करती है कि परमाणु स्थिरता की सीमाओं पर कैसे व्यवहार करते हैं, और "स्थिरता के द्वीप" की वैज्ञानिक तलाश में प्रत्यक्ष योगदान देती है—जो परमाणु परिदृश्य का एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ अतिभारी तत्व लंबे समय तक टिक सकते हैं और संभावित उपयोगिता रख सकते हैं।


अंतर्राष्ट्रीय शोध दल के सदस्य प्रो. एम. मैती ने कहा, "यह खोज परमाणु भौतिकी में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे हमें यह समझने में सहायता मिलती है कि कुछ तत्व लंबे समय तक क्यों जीवित रहते हैं और चरम स्थितियों में परमाणु बल कैसे व्यवहार करते हैं।" उन्होंने बताया कि एसजी-257 जैसे अतिभारी तत्वों की अर्धायु अत्यंत कम होती है, जो अक्सर मिलीसेकंड तक ही जीवित रहते हैं। फिर भी, प्रत्येक खोज वैज्ञानिकों को परमाणु संरचना एवं नाभिकीय बलों के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्रदान करती है।


आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा, "यह ऐतिहासिक खोज अत्याधुनिक परमाणु अनुसंधान में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। आईआईटी रुड़की को इस वैश्विक उपलब्धि का हिस्सा बनने पर गर्व है। यह मौलिक विज्ञान में उत्कृष्टता प्राप्त करने के हमारे दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है, जिससे समाज को लाभ होगा और अगली पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी।"


यह शोध वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम द्वारा किया गया था, जिसमें आईआईटी रुड़की के प्रो. एम. मैती, जर्मनी के जीएसआई हेल्महोल्ट्ज़ सेंटर, जोहान्स गुटेनबर्ग विश्वविद्यालय (जेजीयू मेंज़), जापान परमाणु ऊर्जा एजेंसी, फ़िनलैंड के जैवस्किला विश्वविद्यालय एवं अन्य सहयोगी संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल थे। निष्कर्ष फिजिकल रिव्यू लेटर्स (जून 2025) में प्रकाशित हुए।


यह खोज इस बात का उदाहरण है कि मौलिक विज्ञान किस प्रकार तकनीकी प्रगति एवं वैश्विक ज्ञान में योगदान देता है। यह आईआईटी रुड़की की उस सतत प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है जो सैद्धांतिक समझ को आगे बढ़ाती है और प्रौद्योगिकी, उद्योग एवं समाज के भविष्य को आकार देने की क्षमता रखती है।

 प्रधानमंत्री ने देहरादून का दौरा किया और उत्तराखंड में बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए समीक्षा बैठक की

PM Modi talk to disaster affectex people sdrf and ndrf


प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में बाढ़ और बारिश से प्रभावित क्षेत्रों के लिए 1200 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की



प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिवारों के लिए 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की


प्रधानमंत्री ने हाल ही में आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण अनाथ हुए बच्चों के लिए पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत व्यापक सहायता की घोषणा की


प्रधानमंत्री ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की


प्रधानमंत्री ने एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आपदा मित्र स्वयंसेवकों से भी मिले और उनके प्रयासों की सराहना की


केंद्र सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की बहाली और पुनर्निर्माण के लिए पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया


https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2165767


अंतर मंत्रालय केंद्रीय टीम आज विभिन्न जनपदों में आपदा से हुई क्षति का आकलन तथा जायजा लेने के लिए देहरादून से प्रस्थान कर गई है।

चमोली 

Central team reached Dharali and disaster affected places in Uttarakhand

Central team reached Dharali and disaster affected places in Uttarakhand


*थराली में आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए भारत सरकार की अंतरमंत्रालयीय टीम  ने हवाई सर्वे कर किया विस्तृत सर्वेक्षण*


*टीम ने थराली के चेपड़ो,कोटदीप, राडीबगड़ और देवाल के मोपाटा सहित नंदानगर क्षेत्र में हो रहें भू-धसाव का किया हवाई सर्वे* 


*जिलाधिकारी ने पीपीटी  के माध्यम से जनपद में हुयी विभागीय परिसंपत्तियों की क्षति से टीम को अवगत कराया*


*टीम ने आपदा प्रभावित स्थानीय निवासियों से  बात कर आपदा से हुयी क्षति की जानकारी ली*


आपदा से हुई क्षति का आकलन करने के उद्देश्य से भारत सरकार की अंतरमंत्रालयीय टीम सोमवार थराली क्षेत्र के दौरे पर पहुँची। अंतर मंत्रालय केंद्रीय टीम का नेतृत्व निदेशक डॉ. वीरेन्द्र सिंह ने किया साथ ही टीम में विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे, जिसमें सदस्य अनु सचिव शेर बहादुर,अधीक्षण अभियंता सुधीर कुमार शामिल रहें,जिन्होंने हवाई सर्वे के साथ स्थलीय निरीक्षण कर आपदा से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का बारीकी से अध्ययन किया।टीम ने सबसे पहले थराली के चेपड़ो,कोटडीप, राड़ीबगड़, देवाल के मोपाटा और नंदानगर प्रभावित क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया और साथ ही सड़क मार्ग से भी क्षतिग्रस्त इलाकों का निरीक्षण किया।  


इस दौरान जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने कुलसारी रिलीफ सेंटर में आयोजित बैठक में पीपीटी के माध्यम से आपदा से हुयी विभागवार परिसंपत्तियों की क्षति की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने चेपड़ो बाजार एवं अन्य आपदा ग्रस्त क्षेत्र में स्थानीय लोगों के आवासों के पीछे हो रहें भूस्खलन के बारे में टीम को विस्तार से जानकारी दी।उन्होंने कहा कि लगातार वर्षा एवं भूस्खलन से सड़कों, पुलों, भवनों, पेयजल योजनाओं, विद्युत तंत्र तथा कृषि को भारी क्षति पहुँची है। जिलाधिकारी ने बताया कि आपदा से लगभग 11 सौ 50 करोड़ की विभागीय परिसंपत्तियों की क्षति का आकलन किया गया है।साथ ही जिलाधिकारी ने विकासखंड ज्योतिर्मठ के पल्ला गाँव में हो रहे भू-धसाव तथा नंदानगर क्षेत्र में लगातार सक्रिय हो रहे भू-धसाव से भी टीम को अवगत कराया।


क्षेत्र भ्रमण के दौरान टीम ने स्थानीय निवासियों बात भी की उन्होंने पाया कि वर्षा एवं भूस्खलन से ग्रामीणों की आवागमन सुविधा गंभीर रूप से प्रभावित हुई है तथा कई गाँवों का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट गया है। अनेक स्थानों पर मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और कुछ परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित करना पड़ा है।


टीम ने आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों में स्थानीय प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ तथा अन्य एजेंसियों द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई की सराहना की। साथ ही, उन्होंने विभागीय अधिकारियों से पुनर्वास कार्यों, प्रभावित परिवारों को दी जा रही सहायता, राशन व चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता, अस्थायी आश्रयों की व्यवस्था तथा सड़क मार्गों को शीघ्र खोलने के प्रयासों की जानकारी ली।


अंतर मंत्रालय केंद्रीय टीम का नेतृत्व कर रहें निदेशक डॉ. वीरेन्द्र सिंह ने कहा कि उनके इस दौरे का मुख्य उद्देश्य आपदा से हुई वास्तविक क्षति का आकलन करना है ताकि भारत सरकार को प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित क्षेत्रों के लिए आवश्यक सहायता एवं पुनर्निर्माण कार्यों की योजना शीघ्र बनाई जा सके।टीम द्वारा किए गए हवाई सर्वेक्षण, स्थलीय निरीक्षण एवं प्रशासन से हुई विस्तृत चर्चा से प्राप्त जानकारी को संकलित कर विस्तृत रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, बुनियादी ढाँचे की बहाली तथा दीर्घकालिक सुरक्षा उपायों के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।


इस दौरान थराली विधायक श्री भूपाल राम टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री दौलत सिंह बिष्ट, नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुनीता रावत,पुलिस अधीक्षक सर्वेश पवार, अपर जिला अधिकारी विवेक प्रकाश,एसडीएम सोहन सिंह रांगण,एसडीएम पंकज भट्ट सहित सभी विभागीय अधिकारी और स्थानीय निवासी उपस्थित रहें।

 आज सुबह राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में सचिव आपदा 33rMH एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने एक बैठक के दौरान टीम को आपदा से हुई क्षति के बारे में एक प्रस्तुतिकरण दिया।


बागेश्वर का भी निरीक्षण 

अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम ने बागेश्वर के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का किया स्थलीय निरीक्षण


केंद्रीय टीम ने आपदा के दौरान हुए नुकसान का लिया जायज़ा, जल्द भेजेगी विस्तृत रिपोर्ट 


केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्च-स्तरीय अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (IMCT) ने सोमवार को जनपद के पौंसारी, बैसानी क्षेत्र तथा जगथाना मोटर मार्ग सहित आपदा प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण किया। टीम का उद्देश्य आपदा से हुए जन–धन, आधारभूत संरचना, कृषि एवं स्थानीय आजीविका को हुए नुकसान का विस्तृत आकलन करना तथा राज्य सरकार द्वारा संचालित राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा करना रहा।


टीम के सदस्य राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हेलीपैड  लगभग 4 बजे पहुँचे, जहाँ से वे सीधे पौंसारी के लिए रवाना हुए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रभावित परिवारों से संवाद कर उनकी समस्याएँ जानीं तथा राहत–पुनर्वास कार्यों की जानकारी ली। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे त्वरित राहत एवं पुनर्वास प्रयासों की सराहना करते हुए सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास के लिए अपनी मांग रखी। 


टीम के नोडल वीरेंद्र कुमार, निदेशक, कृषि मंत्रालय; सुधीर कुमार, अधीक्षण अभियंता, केंद्रीय जल आयोग; शेर बहादुर, अवर सचिव, वित्त मंत्रालय तथा डॉ. शांतनु सरकार, निदेशक, उत्तराखंड लैंडस्लाइड मिटिगेशन एंड मैनेजमेंट सेंटर, देहरादून शामिल रहे।


निरीक्षण के दौरान टीम ने सड़कों, पुलों, सार्वजनिक भवनों, विद्युत एवं जल आपूर्ति लाइनों को हुए नुकसान के साथ–साथ कृषि, फसलों, पशुधन और अन्य स्थानीय आजीविका साधनों की क्षति का जायज़ा लिया। उन्होंने आपदा के समय मूलभूत सुविधाओं की बहाली और भोजन, पेयजल, चिकित्सा सहायता, अस्थायी आश्रयों एवं बचाव कार्यों की भी जानकारी ली।


इसके उपरांत अंतर मंत्रालयी केंद्रीय टीम ने जनपद बागेश्वर अन्तर्गत प्राकृतिक आपदाओं से हुई क्षति को लेकर कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक ली। बैठक में जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने आपदा की स्थिति, राहत एवं बचाव कार्यों तथा पुनर्वास योजनाओं की विस्तृत जानकारी टीम को दी। प्रस्तुतीकरण के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा हुए नुकसान की जानकारी के साथ–साथ ड्रोन शॉट्स के माध्यम से अलग–अलग स्थलों पर हुई क्षति की तस्वीरें और दृश्यावलोकन भी टीम के समक्ष प्रस्तुत किए गए। 


टीम ने आश्वासन दिया कि सभी पहलुओं का विस्तृत प्रतिवेदन शीघ्र केंद्र सरकार को प्रेषित किया जाएगा, ताकि प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास एवं विकास कार्यों के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।


*उत्तराखण्ड ने केंद्र सरकार को सौंपा 5702.15 करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज का प्रस्ताव*



*प्रमुख सचिव आरके सुधांशु तथा सचिव आपदा प्रबंधन  विनोद कुमार सुमन ने एनडीएमए के सदस्य एवं विभागाध्यक्ष राजेंद्र सिंह एवं एनडीएमए के सचिव  मनीष भारद्वाज को दिया ज्ञापन*

more than 5 thousand crore package demand by central govt



देहरादून। आपदा प्रबंधन विभाग ने इस वर्ष मानसून के दौरान हुई क्षति की प्रतिपूर्ति तथा भविष्य में अवस्थापना संरचनाओं को संभावित नुकसान से बचाने के लिए भारत सरकार से 5702.15 करोड़ रुपये की विशेष सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया है। माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रमुख सचिव, मा0 मुख्यमंत्री श्री आरके सुधांशु तथा सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने गुरुवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, गृह मंत्रालय भारत सरकार के सदस्य एवं विभागाध्यक्ष श्री राजेंद्र सिंह तथा एनडीएमए के सचिव श्री मनीष भारद्वाज को ज्ञापन सौंपा। 

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के विभागाध्यक्ष श्री राजेंद्र सिंह तथा सचिव श्री मनीष भारद्वाज ने उत्तराखण्ड को हर स्तर पर सहयोग का आश्वासन दिया है। श्री राजेंद्र सिंह ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य ने इस वर्ष मानसून सीजन में धराली, थराली जैसी भयावह आपदाओं का सामना किया है। राज्य को व्यापक क्षति हुई है, इसमें कोई दोराय नहीं। संकट की इस घड़ी में भारत सरकार राज्य के साथ खड़ी है और एनडीएमए के स्तर पर हर संभव आर्थिक सहयोग राज्य को प्रदान किया जाएगा ताकि आपदा प्रभावितों को हर स्तर पर मदद मिल सके, राज्य जल्द सामान्य स्थिति की ओर अग्रसर हो तथा आपदाओं के प्रभावों को कम करने की दिशा में दीर्घकालिक समाधान किए जा सकें। 

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि इस वर्ष प्राकृतिक आपदा से लोक निर्माण विभाग तथा सार्वजनिक सड़कों को लगभग रू0 1163.84 करोड़, सिंचाई विभाग की परिसम्पत्तियों को लगभग रू0 266.65 करोड़, ऊर्जा विभाग को रू0 123.17 करोड़, स्वास्थ्य विभाग की परिसम्पत्तियों को लगभग रू0 4.57 करोड़, विद्यालयी शिक्षा विभाग की परिसम्पत्तियों को 68.28 करोड़, उच्च शिक्षा विभाग की परिसम्पत्तियों को रू0 9.04 करोड़, मत्स्य विभाग को 2.55 करोड़, ग्राम्य विकास विभाग को 65.50 करोड़, शहरी विकास को 04 करोड़, पशुपालन विभाग को 23.06 तथा अन्य विभागीय परिसम्पत्तियों को 213.46 करोड़ तथा इस प्रकार सभी राजकीय विभागों को कुल लगभग रू0 1944.15 करोड़ की सीधे तौर पर क्षति हुई है। 

इन परिसम्पत्तियों के पुनर्निर्माण तथा पुनर्प्राप्ति में उपरोक्त धनराशि रू0 1944.15 करोड़ के साथ-साथ परिसम्पत्तियों को बचाने तथा अनेक ऐसी परिसम्पत्तियां, मार्ग, आबादी वाले क्षेत्र तथा अन्य अवस्थापना संरचानाओं को जो आपदा से क्षतिग्रस्त होने की कगार पर हैं, को स्थिर करने के लिये रू0 3758.00 करोड़ की सहायता प्रदान किए जाने का अनुरोध किया गया है। इस प्रकार वर्ष 2025 में हुई आपदा से क्षति के लिये उत्तराखण्ड राज्य को कुल रू0 5702.15 करोड़ की धनराशि की मांग की गई है, ताकि इस धनराशि से आपदा से क्षतिग्रस्त परिसम्पत्तियों की मरम्मत/पुनर्प्राप्ति/पुनर्निर्माण कराया जा सके तथा आपदा से क्षतिग्रस्त होने वाली अवस्थापना संरचनाओं/सार्वजनिक परिसम्पत्तियों/ मार्गों/आबादी वाले क्षेत्रों की सुरक्षा आदि हेतु कार्य कराया जा सके तथा उत्तराखण्ड को आपदा के प्रभाव को न्यूनतम रखा जा सके तथा बहुत बड़ी क्षति से बचा जा सके। 

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि प्राकृतिक आपदा से वर्ष 2025 में 01 अप्रैल, 2025 से 31 अगस्त, 2025 के मध्य कुल 79 व्यक्तियों की मृत्यु हुई है, 115 लोग घायल हुए हैं तथा 90 लोग लापता हैं। कुल 3953 छोटे तथा बड़े पशुओं की मृत्यु हुई है। कुल 238 पक्के भवन ध्वस्त हुए हैं, 02 कच्चे भवन ध्वस्त हुए हैं, 2835 पक्के भवन गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं तथा 402 कच्चे भवन गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त बहुत बड़ी मात्रा में व्यवसायिक भवन, दुकानें/होटल/होमस्टे, रेस्टोरेंट तथा अन्य संरचनायें क्षतिग्रस्त हुई हैं।  



*केंद्र से मिल रहा है भरपूर सहयोग- मुख्यमंत्री*


देहरादून। मा0 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में मा0 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी तथा गृह मंत्री श्री अमित शाह जी लगातार राज्य के साथ खड़े रहे हैं। केंद्र सरकार ने अब तक हर संभव सहयोग प्रदान किया है, जिसके परिणामस्वरूप राहत एवं बचाव कार्यों को त्वरित गति मिली है। मा0 प्रधानमंत्री जी ने राज्य को आपदाओं से हुई क्षति के संबंध में प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए थे। प्राप्त निर्देशों के क्रम में आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्वास कार्यों को गति देने के लिए राज्य सरकार ने भारत सरकार से विशेष सहयोग का अनुरोध किया है। हमने आग्रह किया है कि आपदा से हुई भारी क्षति की भरपाई हेतु राज्य को एक विशेष आर्थिक पैकेज प्रदान किया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके, क्षतिग्रस्त अवसंरचना का शीघ्र पुनर्निर्माण हो सके तथा आजीविका के साधनों को पुनर्स्थापित किया जा सके। उन्होंने कहा कि हमारी साझा प्रतिबद्धता ही उत्तराखंड को शीघ्र सामान्य स्थिति में लौटाने और आपदा प्रभावितों के जीवन में स्थिरता लाने में सहायक होगी।



*सीएस आनंद बर्द्धन के निर्देशन में तैयार हुआ ज्ञापन*


देहरादून। मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन के मार्गदर्शन एवं दिशा निर्देशन में यह ज्ञापन तैयार किया गया है। उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर एनडीएमए एवं भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार संपर्क स्थापित करते हुए उत्तराखण्ड में आपदा से हुई क्षति से अवगत कराया। पिछले दिनों नई दिल्ली में उन्होंने मा0 प्रधानमंत्री कार्यालय तथा गृह मंत्रालय में उच्च अधिकारीगणों से भेंट कर विशेष आर्थिक पैकेज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने कहा कि भारत सरकार ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए थे। भारत सरकार के निर्देशों के क्रम में राज्य सरकार के स्तर से एक विस्तृत ज्ञापन तैयार कर भारत सरकार को सौंप दिया गया है। 




*एनडीएमए के साथ वार्ता सकारात्मक- आरके सुधांशु*


देहरादून। प्रमुख सचिव मा0 मुख्यमंत्री श्री आर.के. सुधांशु ने बताया कि एनडीएमए के अधिकारीगणों के साथ हुई वार्ता अत्यंत सार्थक एवं सकारात्मक रही। बैठक में राज्य सरकार द्वारा आपदा से हुई क्षति के संबंध में प्रस्तुत विस्तृत ज्ञापन पर गहन विचार-विमर्श किया गया। ज्ञापन में प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति, अवसंरचना को हुई क्षति, आपदा राहत एवं पुनर्वास के लिए आवश्यक आर्थिक सहयोग तथा भविष्य की पुनर्निर्माण आवश्यकताओं से जुड़े सभी पहलुओं पर चर्चा हुई। एनडीएमए के अधिकारीगणों ने ज्ञापन में उल्लिखित तथ्यों और मांगों को पूर्णतः उचित ठहराते हुए अपनी सहमति प्रदान की है तथा यह आश्वासन दिया है कि राज्य को हर संभव आर्थिक पैकेज उपलब्ध कराया जाएगा। 


*08 सितंबर को आएगी केंद्रीय टीम-सुमन*


देहरादून। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि दिनांक 08 सितम्बर 2025 को गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गठित अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम उत्तराखण्ड के दौरे पर आ रही है। यह टीम राज्य में वर्ष 2025 के दौरान आई आपदाओं से हुई क्षति का स्थलीय आकलन करेगी। इस टीम का नेतृत्व श्री आर. प्रसना, संयुक्त सचिव गृह मंत्रालय करेंगे। टीम के साथ अन्य छह सदस्य भी रहेंगे जिनमें उप निदेशक महेश कुमार, अधीक्षण अभियंता सुधीर कुमार, उप निदेशक विकास सचान, मुख्य अभियंता पंकज सिंह, निदेशक डॉ. वीरेन्द्र सिंह तथा सुश्री आर. कृष्णा कुमारी शामिल हैं। अंतर-मंत्रालयी टीम आपदा प्रभावित जनपदों का दौरा करेगी और वहां की स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन करेगी। इस अवसर पर राज्य सरकार द्वारा सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं ताकि टीम को प्रभावित क्षेत्रों की वस्तुस्थिति से अवगत कराया जा सके तथा राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा सुचारू रूप से हो सके।

आज़ादी का अमृत महोत्स

 नई दिल्ली में आयोजित जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक की सिफ़ारिशें

GST council meeting, changes


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2025 को लाल किले की प्राचीर से घोषित अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार, एक ऐतिहासिक कर ढाँचे के रणनीतिक, सैद्धांतिक और नागरिक-केंद्रित विकास का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो प्रत्येक नागरिक के जीवन स्तर को बेहतर बनाएगा।


जीएसटी परिषद ने सभी नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने और छोटे व्यापारियों व व्यवसायियों सहित सभी के लिए व्यापार में आसानी सुनिश्चित करने पर बहु-क्षेत्रीय और बहु-विषयक फ़ोकस वाले सुधारों को मंज़ूरी दी है।


जीएसटी परिषद ने आम आदमी, श्रम-प्रधान उद्योगों, किसानों और कृषि, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के प्रमुख चालकों पर ध्यान केंद्रित करते हुए दरों को युक्तिसंगत बनाने को मंज़ूरी दी।


सभी व्यक्तिगत जीवन बीमा पॉलिसियों, चाहे वे टर्म लाइफ़, यूलिप या एंडोमेंट पॉलिसियाँ हों, और उनके पुनर्बीमा पर जीएसटी से छूट, ताकि आम आदमी के लिए बीमा को वहनीय बनाया जा सके और देश में बीमा कवरेज को बढ़ाया जा सके।


सभी व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों (फैमिली फ्लोटर पॉलिसियों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए पॉलिसियों सहित) और उनके पुनर्बीमा पर जीएसटी से छूट, ताकि आम आदमी के लिए बीमा को वहनीय बनाया जा सके और देश में बीमा कवरेज को बढ़ाया जा सके।


वर्तमान 4-स्तरीय कर दर संरचना को नागरिक-अनुकूल 'सरल कर' में युक्तिसंगत बनाना - 18% की मानक दर और 5% की योग्यता दर वाली 2 दर संरचना; कुछ चुनिंदा वस्तुओं और सेवाओं पर 40% की विशेष अवगुण दर


आम आदमी की कई वस्तुओं, जैसे हेयर ऑयल, टॉयलेट सोप बार, शैंपू, टूथब्रश, टूथपेस्ट, साइकिल, टेबलवेयर, किचनवेयर, अन्य घरेलू सामान आदि पर जीएसटी 18% या 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है।


अल्ट्रा-हाई टेम्परेचर (UHT) दूध, पहले से पैक और लेबल वाले छेना या पनीर पर जीएसटी 5% से घटाकर शून्य कर दिया गया है; सभी भारतीय रोटियों (चपाती, पराठा, परोटा, आदि) पर जीएसटी दर शून्य होगी।


पैकेज्ड नमकीन, भुजिया, सॉस, पास्ता, इंस्टेंट नूडल्स, चॉकलेट, कॉफी, संरक्षित मांस, कॉर्नफ्लेक्स, मक्खन, घी आदि जैसे लगभग सभी खाद्य पदार्थों पर जीएसटी दर 12% या 18% से घटाकर 5% कर दी गई है।


एयर कंडीशनिंग मशीनों, 32 इंच के टीवी (सभी टीवी पर अब 18% कर), डिशवॉशिंग मशीनों, छोटी कारों, 350 सीसी या उससे कम क्षमता वाली मोटरसाइकिलों पर जीएसटी दर 28% से घटाकर 18% कर दी गई है।


कृषि वस्तुओं, जैसे ट्रैक्टर, मिट्टी तैयार करने या खेती के लिए कृषि, बागवानी या वानिकी मशीनरी, कटाई या थ्रेसिंग मशीनरी, जिसमें पुआल या चारा बेलर, घास काटने की मशीन, कम्पोस्ट मशीन आदि शामिल हैं, पर जीएसटी दर 12% से घटाकर 5% कर दी गई है।


जीएसटी दर में कमी हस्तशिल्प, संगमरमर और ट्रैवर्टीन ब्लॉक, ग्रेनाइट ब्लॉक और मध्यवर्ती चमड़े के सामान जैसी श्रम-गहन वस्तुओं पर 12% से 5% तक जीएसटी।


सीमेंट पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% किया गया।


33 जीवनरक्षक दवाओं और औषधियों पर जीएसटी 12% से घटाकर शून्य कर दिया गया। कैंसर, दुर्लभ बीमारियों और अन्य गंभीर दीर्घकालिक बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 3 जीवनरक्षक दवाओं और औषधियों पर जीएसटी 5% से घटाकर शून्य कर दिया गया।


अन्य सभी दवाओं और औषधियों पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% किया गया।


चिकित्सा, शल्य चिकित्सा, दंत चिकित्सा या पशु चिकित्सा या भौतिक या रासायनिक विश्लेषण के लिए इस्तेमाल होने वाले विभिन्न चिकित्सा उपकरणों और उपकरणों पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% किया गया।


विभिन्न चिकित्सा उपकरणों और आपूर्ति उपकरणों जैसे वैडिंग गॉज, पट्टियाँ, डायग्नोस्टिक किट और अभिकर्मक, रक्त शर्करा निगरानी प्रणाली (ग्लूकोमीटर), चिकित्सा उपकरणों आदि पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है।


350 सीसी या उससे कम क्षमता वाली छोटी कारों और मोटरसाइकिलों पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है।


बसों, ट्रकों, एम्बुलेंस आदि पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है।


सभी ऑटो पार्ट्स पर, चाहे उनका एचएस कोड कुछ भी हो, 18% की एक समान दर; तिपहिया वाहनों पर 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है।


मानव निर्मित कपड़ा क्षेत्र के लिए लंबे समय से लंबित उलटे शुल्क ढांचे में सुधार किया गया है, जिसमें मानव निर्मित रेशे पर जीएसटी दर 18% से घटाकर 5% और मानव निर्मित धागे पर 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है।


उर्वरक क्षेत्र में सल्फ्यूरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड और अमोनिया पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है।


नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों और उनके निर्माण हेतु पुर्जों पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% किया गया


7,500 रुपये प्रति यूनिट प्रतिदिन या उसके समतुल्य मूल्य वाली "होटल आवास" सेवाओं पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% किया गया


आम आदमी द्वारा उपयोग की जाने वाली सौंदर्य और शारीरिक स्वास्थ्य सेवाओं, जिनमें जिम, सैलून, नाई, योग केंद्र आदि सेवाएँ शामिल हैं, पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% किया गया


जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित की गई। जीएसटी परिषद ने अन्य बातों के साथ-साथ जीएसटी कर दरों में बदलाव, व्यक्तियों, आम आदमी, आकांक्षी मध्यम वर्ग को राहत प्रदान करने और जीएसटी में व्यापार को सुगम बनाने के उपायों से संबंधित सिफारिशें कीं। शंकाओं के समाधान के लिए FAQ भी जारी किए जा रहे हैं। 
















 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को वाराणसी से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त के तहत देश के 09 करोड़ 71 लाख से अधिक किसानों के खातों में कुल 20 हजार 500 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का डिजिटल हस्तांतरण किया। 


More than 09 crore money DBT to Uttarakhand farmers under Kisan samman nidhi


इसके तहत उत्तराखण्ड के 08 लाख 28 हजार 787 लाभार्थी किसान परिवारों को 184.25 करोड़ रुपये की धनराशि हस्तांतरित की गई।


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने गढ़ीकैंट, देहरादून से इस कार्यक्रम में वर्चुअल प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अन्नदाताओं की आय को दोगुना करने तथा उनके जीवन स्तर को उठाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। योजना की 20वीं किस्त जारी किए जाने के साथ ही उत्तराखंड के किसानों को करीब 3300 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि प्रदान की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के किसानों के कल्याण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। प्रमुख फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि कर किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य प्रदान किया जा रहा है। ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, फसल रोगों और कीटों से होने वाले नुकसान के लिए सुरक्षा कवच भी प्रदान किया जा रहा है। ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड’ योजना के द्वारा खेतों की मिट्टी की वैज्ञानिक जांच कर किसानों को पोषक तत्वों की कमी और आवश्यक उर्वरकों की जानकारी भी दी जा रही है, जिससे उनकी उपज की गुणवत्ता और भूमि की उर्वरता दोनों में सुधार हो रहा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेश के किसानों के उत्थान एवं समृद्धि के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में किसानों को तीन लाख रुपये तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि उपकरण खरीदने के लिए फार्म मशीनरी बैंक योजना के माध्यम से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है। किसानों के हित में नहरों से सिंचाई को पूरी तरह मुफ्त किया गया है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए पॉलीहाउस के निर्माण के लिए 200 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान भी किया गया है। गेहूं खरीद पर किसानों को 20 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस प्रदान करने के साथ ही गन्ने के मूल्य में भी 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की गई है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा 1200 करोड़ रुपये की लागत से नई सेब नीति, कीवी नीति, ‘स्टेट मिलेट मिशन’ और ‘ड्रैगन फ्रूट नीति’ जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाओं को लागू किया गया है। इन नीतियों के तहत बागवानी को प्रोत्साहन देने के लिए किसानों को 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में उत्तराखण्ड को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। उत्तराखण्ड राज्य के युवाओं को रोजगार देने में भी प्रदेश अग्रणी बनकर उभरा है। एक वर्ष में बेरोजगारी दर में 4.4 प्रतिशत की कमी लाई गई। उत्तराखण्ड  देश का सबसे पहले “समान नागरिक संहिता” को लागू करने वाला राज्य बना। राज्य में प्रभावी नकल विरोधी कानून लागू करने के बाद लगभग 24 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी प्रदान की गई है। प्रदेश में सख्त धर्मांतरण विरोधी और दंगारोधी कानूनों को लागू किया गया है। प्रदेश में लैंड जिहाद पर कड़ी कार्रवाई करते हुए साढ़े छह हजार एकड़ से अधिक की सरकारी भूमि को मुक्त कराया गया है। राज्य में ऑपरेशन कालनेमि भी प्रारंभ किया गया है, जिसके माध्यम से पाखंडियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।


कृषि मंत्री श्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड को वर्ष 2023-24 में “मिलेट सेक्टर में सर्वश्रेष्ठ प्रदेश“ का पुरस्कार हैदराबाद में आयोजित इंटरनेशनल न्यूट्री-सीरियल कन्वेंशन में प्रदान किया गया। मृदा स्वास्थ्य और उर्वरता योजना तथा जैविक कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्य को भारत सरकार से राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि नैनीताल के ग्राम सुनकिया के कृषक हर्ष सिंह डंगवाल को “जैविक इंडिया अवार्ड” मिला, जबकि उत्तरकाशी को लाल धान के लिए “एक जिला-एक उत्पाद” में द्वितीय स्थान और हरिद्वार व टिहरी जनपद को पीएम फसल बीमा योजना में क्रमशः प्रथम व द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ।


इस अवसर पर विधायक श्रीमती सविता कपूर, श्री बृज भूषण गैरोला, पूर्व सांसद श्री बलराज पासी, सचिव श्री एस.एन. पाण्डेय, महानिदेशक कृषि श्री रणवीर सिंह चौहान एवं प्रदेशभर से आए किसान उपस्थित थे।

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