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 जम्मू-कश्मीर की बेहद दुर्गम,छिपी हुई घाटी,पाडर वैली में द हंस फाउंडेशन द्वारा दृष्टि आई केयर मिशन एवं जनरल हेल्थ कैंप का आयोजन,125 गाँवों तक पहुँची निःशुल्क स्वास्थ्य एवं नेत्र चिकित्सा सेवाएं 

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‘द हंस फाउंडेशन’ के तत्वावधान जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले की बेहद दुर्गम, सुंदर और छिपी हुई घाटी,पाडर घाटी में 7 से 16 जुलाई-2026 तक दृष्टि आई केयर मिशन एवं जनरल हेल्थ कैंप–2026 का आयोजन किया गया। जिसके माध्यम से पाडर घाटी के 125 गाँवों के ग्रामीणों को निःशुल्क स्वास्थ्य एवं नेत्र चिकित्सा सेवाएं प्रदान की गई। 

आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले की दुर्गम और छिपी हुई घाटी पाडर वैली में द हंस फाउंडेशन के माध्यम से प्रथम चरण में गांधारी वैली में टुन,आलिया,खजरोनी,बटवास,सोहल,चाग्ग,मुथल और छिटू गांव में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए गए। जिनमें बड़ी संख्या में पहुंचकर यहां के ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। इसी के साथ 16 जुलाई को किश्तवाड़ जिले की दुर्गम एवं दूरस्थ पाडर घाटी के 125 सीमांत एवं वंचित गाँवों में आयोजित यह 10 दिवसीय निःशुल्क स्वास्थ्य एवं नेत्र चिकित्सा अभियान सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

द हंस फाउंडेशन के प्रेरणास्रोत माताश्री मंगला जी एवं श्री भोले जी महाराज जी के भागीरथी आशीर्वाद से पाडर वैली में 16 जुलाई 2026 तक आयोजित हुए इन स्वास्थ्य शिविरों में हजारों ग्रामीण को निःशुल्क स्वास्थ्य की सेवाएं प्रदान की गई। इस व्यापक स्वास्थ्य अभियान के माध्यम से उन क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएँ पहुँचाई गईं,जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता अत्यंत सीमित है। इस अभियान के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने गाँव-गाँव पहुँचकर लोगों को समग्र स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान कीं।

इन विशेष चिकित्सा शिविरों के माध्यम से पाडर वैली के ग्रामीणों को पहली बार कई तरह की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की गई। जिनमें आँखों की जाँच,स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह,लैब टेस्ट,डायग्नोस्टिक सेवाएँ,दवाइयों का वितरण और मोतियाबिंद की सर्जरी प्रमुख  रही।


'द हंस फाउंडेशन द्वारा दृष्टि आई केयर मिशन एवं जनरल हेल्थ कैंप–2026' में प्रदान की गई मुख्य सेवाए

द हंस फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित दृष्टि आई केयर मिशन एवं जनरल हेल्थ कैंप में 1,528 लोगों की विस्तृत नेत्र जाँच की गई। जिनमें 106 मोतियाबिंद रोगियों की पहचान हुई। इनमें से 78 मरीजों की विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा सफल मोतियाबिंद शल्य चिकित्सा सम्पन्न की गई।

इसी के साथ 726 लोगों को दृष्टि दोषानुसार चश्मों का वितरण किया गया।  2,082 लोगों का सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण एवं परामर्श दिया गया। साथ ही 1,045 का आवश्यक पैथोलॉजिकल एवं डायग्नोस्टिक परीक्षण किया गया और 66 ईसीजी (ECG) परीक्षण किए गए। इसी के साथ सभी मरीजों को आवश्यक दवाओं का वितरण किया गया। 

आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले की पाडर घाटी प्राकृतिक सौंदर्य,झरनों और फूलों के लिए प्रसिद्ध है। दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण,इस क्षेत्र का जीवन आज भी बाहरी दुनिया से काफी अलग-थलग और प्राकृतिक रूप से प्राचीन है। इस क्षेत्र में दृष्टि आई केयर मिशन एवं जनरल हेल्थ कैंप–2026 इस संकल्प का सशक्त उदाहरण है कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचें और भौगोलिक विषमताएँ किसी भी नागरिक के बेहतर स्वास्थ्य के अधिकार में बाधा न बनें।

पाडर वैली में द हंस फाउंडेशन द्वारा दी गई इन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए शासन-प्रशासन और ग्रामीणों ने संस्था और यहां सेवा प्रदान कर रहे हैं डॉक्टरों और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।

 

गतवर्ष की गई थी अब तक के सबसे वजनदार बोन ट्यूमर की सफलतम सर्जरी

मरीज के पैर की जांघ से 35 किलोग्राम भार का ट्यूमर हटाकर दिया था जीवनदान

 

AIIMS Rishikesh Guiness world record

एम्स, ऋषिकेश के चिकित्सकों ने दुनियाभर के चिकित्सकीय इतिहास में अब तक के सबसे वजनदार बोन ट्यूमर की सफलतम सर्जरी कर विश्व पटल पर देश एवं एम्स संस्थान का नाम रोशन किया है। इस उपलब्धि के लिए संस्थान की चिकित्सकीय टीम का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। विभिन्न विभागों के चिकित्सकीय दल ने उक्त सर्जरी को गतवर्ष जून-2025 में सफलतापूर्वक अंजाम दिया था। 

इस ऐतहासिक उपलब्धि पर संस्थान की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने इसे इतिहास गढ़ने की संज्ञा दी और कहा कि एम्स संस्थान मरीजों को हरसंभव चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने को प्रतिबद्ध है। 


गौरतलब है कि एम्स ऋषिकेश में 9 जून 2025 को संस्थान के वरिष्ठ शल्य चिकित्सकों की टीम द्वारा यह जटिल सर्जरी की गई थी, जिसमें एक 27 वर्षीय व्यक्ति के बाएं पैर की जांघ से लगभग 35 किलोग्राम के भारी ट्यूमर को सर्जरी की मदद से हटाने में सफलता हासिल की गई थी। इस जटिल सर्जरी को सफलता पूर्वक अंजाम देने वाले ऋषिकेश एम्स संस्थान के चिकित्सकों की इस टीम में हड्डी रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. मोहित धींगरा, सीटीवीएस विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अंशुमान दरबारी एवं बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग की प्रोफेसर डॉ. मधुवरी वाथुल्या प्रमुखरूप से शामिल रहीं।

संस्थान की ओर से इस सबसे अधिक वजनी ट्यूमर की सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिए जाने के बाद चिकित्सकीय दल की इस उपलब्धि से गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डस प्रकाशन को अवगत कराया गया था। जिसके बाद इंग्लैंड, लंदन से प्रकाशित गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डस, (जो कि विश्वभर में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों के उपलब्धिपूर्ण कार्यों के संग्रह व उसके प्रकाशन से दुनिया को अवगत कराने वाली महत्पूर्ण बुक है,) की ओर से इस जानकारी का संज्ञान लिया गया और अपने स्तर से परीक्षण किया गया।

बताया गया है कि, परीक्षण में उक्त जानकारी सही पाए जाने पर एम्स,ऋषिकेश में अब तक के सबसे अधिक वजनदार बोन ट्यूमर की जटिलतम सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाली चिकित्सकीय टीम की उपलब्धि को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्णय लिया गया। 

इसके लिए एम्स, ऋषिकेश की चिकित्सकीय टीम को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से प्रशस्तिपत्र से नवाजा गया है।

उल्लेखनीय है कि 35 किलोग्राम के सबसे अधिक वजनी बोन ट्यूमर की सफल शल्य चिकित्सा 9 जून- 2025 को एम्स ऋषिकेश में की गई थी, जबकि इससे पूर्व भारत के ही चिकित्सकों के एक दल ने वर्ष 2002 में उस वक्त के सबसे अधिक वजनी 16.5 किलोग्राम के ट्यूमर की सर्जरी की थी।

 

- संस्थान के विशेषज्ञ चिकित्सक कर रहे फ्रैक्चर कूल्हों का इलाज 

- एम्स ऋषिकेश में उपलब्ध है ’पेल्विस ऐसिटाबुलम सर्जरी’ की सुविधा  


एम्स ऋषिकेश

15 मई 2026

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किसी दुर्घटनावश कूल्हे की हड्डियाँ टूट गई हों या फिर खिसक गई हों तो घबराइये मत। एम्स ऋषिकेश के विशेषज्ञ चिकित्सक न केवल कूल्हे के जोड़ों को जोड़कर रोगी का बेहतर इलाज कर रहे हैं अपितु टूटी हुई हड्डियों को सही जगह फिक्स कर कूल्हे की सामान्य संरचना को भी बहाल करने में दक्ष हैं। मेडिकल भाषा में ’पेल्विस ऐसिटाबुलम सर्जरी’ के नाम से कही जाने वाली यह शल्य प्रक्रिया एम्स में नियमित तौर से की जा रही है। खास बात यह है कि यह प्रक्रिया आयुष्मान योजना में कवर है और सरकारी खर्चे पर पूरी तरह निःशुल्क है। 


पेल्विस ऐसिटाबुलम सर्जरी अत्यंत जटिल सर्जरी होती है। किसी सड़क दुर्घटना में अथवा बहुत अधिक उंचाई या पहाड़ी से नीचे गिर जाने की स्थिति में तीव्र आघात की वजह से कूल्हे की हड्डी टूट जाने पर यह सर्जरी की जाती है। ट्राॅमा के ऐसे मामलों में कभी-कभी हड्डी टूटने के साथ ही पेट की चोट, आंतों की चोट अथवा पेशाब की थैली में भी गहरी चोट लग जाती है। इस वजह से घायल व्यक्ति न तो बैठ पाता है और न ही चल पाने में सक्षम होता है। इसके लक्षणों में दुर्घटना ग्रस्त व्यक्ति की कमर और कूल्हे के जोड़ों में असहनीय दर्द, पांव का नहीं चलना और बैठने व खड़े होने में परेशानी होना शामिल है। इस जटिल सर्जरी में ऑपरेशन के दौरान यूरीन ब्लैडर, इंस्टेस्टाइन, बड़ी रक्त वाहिकाओं और नसों का विशेष ध्यान रखना होता है। ट्रॉमा सर्जरी विभाग के हेड प्रोफेसर डाॅ. कमर आजम ने बताया कि यह एक जटिल सर्जरी है और दुर्घटना के कारण क्षतिग्रस्त कूल्हे का सही वक्त पर सटीक इलाज किया जाना बहुत जरूरी है। कहा कि एम्स में इस सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। 


इंसेट-

क्या है पेल्विस और एसिटाबुलम सर्जरी?

पेल्विस (रीढ़ की हड्डी का निचला हिस्सा जो कूल्हे से जुड़ता है) और एसिटाबुलम कूल्हे के जोड़ (सॉकेट) सर्जरी के जटिल फ्रैक्चर को ठीक करने के लिए की जाने वाली यह एक प्रमुख ऑर्थोपेडिक प्रक्रिया है। आमतौर पर यह परेशानी भीषण दुर्घटनाओं के दौरान गंभीर चोट लगने या नीचे गिरने से होती है। इस सर्जरी में एम.आर.आई कम्पेटिबल धातु की प्लेटों और पेंचों का उपयोग करके कूल्हे की हड्डियों को स्थिर किया जाता है। 


इंसेट-

9 माह में की गयी 69 सर्जरी,

एम्स ऋषिकेश में ट्राॅमा सर्जन असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. मान सिंह जारोलिया इस जटिल सर्जरी के ज्ञाता हैं। डाॅ. मान सिंह द्वारा जुलाई 2025 में एम्स ज्वाॅइन करने के बाद 10 मई 2026 तक पेल्विस ऐसिटाबुलम की 69 सर्जरी की जा चुकी हैं। इसमें एक 15 वर्षीय युवक से लेकर अधिकतम 85 वर्ष की उम्र के एक वयोवृद्ध की सर्जरी शामिल है। इससे पहले डॉ. मान सिंह अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर इथियोपिया अफ्रीका, ऑस्ट्रिया और यूरोप देशों में इसका अनुभव हासिल कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए यह सेवा उच्च गुणवत्ता के इंप्लांट के साथ पूर्णत निःशुल्क है। 


इंसेट- 

’’ट्राॅमा सर्जरी और इरजेन्सी सेवाओं को संस्थान द्वारा सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उच्च अनुभवी डाॅक्टरों की टीम की बदौलत हम ट्राॅमा केयर में अपनी उत्कृष्टता बनाए हुए हैं। खासतौर से ट्राॅमा सर्जरी के मामले में एम्स विश्व स्तरीय तकनीक का इस्तेमाल कर इलाज में बेहतर अनुभव और कौशलता का उपयोग कर रहा है। हमारे चिकित्सक गंभीर स्थितियों और जटिल ट्राॅमा मामलों को संभालने में पूरी तरह सक्षम हैं। ’’

--------  प्रो. मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक एम्स ऋषिकेश।


aiims rishikesh


आयुष्मान भारत हेल्थ एकाउंट (Ayushman Bharat Health Account) से मिल रही सुविधा

डिजिटलीकरण से एम्स ऋषिकेश में पर्चा बनवाना हुआ आसान


आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत लागू आयुष्मान भारत हेल्थ एकाउंट आभा (ABHA) क्यूआर कोड आधारित स्कैन एंड शेयर प्रणाली एम्स, ऋषिकेश में मरीजों के लिए बड़ी सुविधा बनकर उभरी है। लिहाजा मरीजों को अब ओपीडी पंजीकरण के लिए लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ता।

करीब साढ़े तीन वर्ष पहले लागू हुई इस सुविधा से एम्स,ऋषिकेश में अब तक 9 लाख से अधिक मरीज लाभान्वित हो चुके हैं। गौरतलब है कि एम्स में बढ़ते मरीजों की संख्या के मद्देनजर यह व्यवस्था 26 नवंबर- 2022 से शुरू की गई थी, जिससे ऋषिकेश एम्स उत्तराखंड का पहला ऐसा सरकारी चिकित्सा संस्थान बना, जहां ओपीडी पंजीकरण के लिए यह डिजिटल प्रणाली लागू की गई।

योजना के तहत अब तक 2,633 हेल्थ प्रोफेशनल्स का पंजीकरण और 8.44 लाख से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से लिंक किए जा चुके हैं।

संस्थान की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने इस उपलब्धि पर एबीडीएम टीम की सराहना की। निदेशक एम्स ने इसे जन-जन के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। एम्स निदेशक प्रोफेसर मीनू सिंह ने बताया कि एम्स संस्थान में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अब तक उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश समेत देशभर के लगभग दो दर्जन राज्यों के मरीजों को चिकित्सा लाभ दिया जा  चुका है। 


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आभा के प्रमुख फायदे

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के नोडल अधिकारी डॉ. भरत भूषण भारद्वाज के मुताबिक—

क्यूआर कोड स्कैन कर तुरंत ओपीडी पंजीकरण 

मोबाइल में सुरक्षित स्वास्थ्य रिकॉर्ड 

कागजी दस्तावेजों की आवश्यकता समाप्त 

भविष्य में क्यूआर से बिल भुगतान की सुविधा प्रस्तावित 


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ऐसे करें आभा पंजीकरण

एम्स,ऋषिकेश में ओपीडी में स्वास्थ्य परीक्षण कराने वाले मरीज अस्पताल के सार्वजनिक प्रवेश द्वार गेट नंबर-3 व ओपीडी रजिस्ट्रेशन क्षेत्र में लगे क्यूआर कोड को स्कैन कर मोबाइल पर टोकन नंबर प्राप्त करते हैं। टोकन दिखाकर काउंटर से आसानी से पर्चा बनवाया जा सकता है।

योजना के समन्वयक कमल जुयाल के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया में सेवावीरों का सहयोग मरीजों को त्वरित सुविधा प्रदान कर रहा है।



एम्स में आयुष्मान भारत योजना से लाभान्वित हो चुके 1.83 लाख मरीज

संस्थान को आयुष्मान भारत योजना में सर्वाधिक मरीजों के उपचार के लिए मिल चुका है उत्तराखंड राज्य में प्रथम पुरस्कार


एम्स में उपचार कराने के लिए आने वाले मरीज भारत सरकार व राज्य सरकार द्वारा संचालित आयुष्मान भारत योजना का लाभ ले रहे हैं। अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क चिकित्सा सुविधा प्राप्त करने के इच्छुक ऐसे मरीज जिनके पास पहले से आयुष्मान कार्ड नहीं बना होता, उनके कार्ड बनाने अथवा एक्टिवेट करने के लिए अलग से हेल्प डेस्क स्थापित की गई है। जिसमें संबंधित व्यक्तियों से जरूरी दस्तावेज लेकर उन्हें उपचार के लिए आयुष्मान कार्ड एक्टिवेट कर उन्हें इस सुविधा को मुहैया कराया जाता है।

अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के नोडल ऑफिसर प्रोफेसर डॉ. मोहित ढींगरा ने बताया कि एम्स में अब तक आयुष्मान भारत योजना के तहत 1,83,121 मरीज अक्टूबर-2018 से 31 मार्च-2026 तक निशुल्क उपचार प्राप्त कर चुके हैं। यह आंकड़ा राज्य में स्थापित राजकीय स्वास्थ्य संस्थानों में सर्वाधिक है। उन्होंने बताया कि बीते दो वर्षों अप्रैल 2025 से मार्च-2026 तक एम्स में 29,622 मरीज  आयुष्मान योजना के अंतर्गत लाभान्वित हो चुके हैं। जिनमें एम्स,ऋषिकेश द्वारा उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश समेत देशभर के लगभग दो दर्जन राज्यों के मरीजों को इस योजना के अंतर्गत चिकित्सा लाभ दिया जा  चुका है।  

एम्स में अब तक हेल्प डेस्क के माध्यम से 6,487 मरीजों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। इसके अलावा अस्पताल में लागू गोल्डन कार्ड-एसजीएचएस के अंतर्गत अब तक 5,935 भर्ती मरीजों का उपचार हो चुका है। जबकि 70 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के वरिष्ठ नागरिकों की स्वास्थ्य सुविधा के लिए भारत सरकार द्वारा संचालित वय वंदना योजना के अंतर्गत अब तक 107 बुजुर्गों का उपचार हो चुका है।

 

ऋषिकेश:




बीते दिवस दिवंगत सुरेंद्रवती, सुदेश कुमारी एवं राहुल पंवार के परिजनों ने उनके प्रियजनों के निधन के उपरांत उनकी आंखें दान कर मानवता की मिसाल पेश की। इन आई डोनेशन के साथ ही अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश के आई बैंक में अब तक नेत्रदान का आंकड़ा 1246  हो गया है। इस नेक पहल से छह से आठ दृष्टिबाधित व्यक्तियों को पुनः दृष्टि मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।


एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह ने इस पुनीत कार्य के लिए दानदाता परिवारों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रेरणादायक कदम समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं और अन्य लोगों को भी इस दिशा में आगे आने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए ऋषिकेश आई बैंक, एम्स की टीम को भी बधाई दी।


एम्स ऋषिकेश के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉक्टर) संजीव कुमार मित्तल ने बताया कि सुरेंद्रवती (85 वर्ष, निवासी उग्रसेन नगर) के पुत्र अनुराग भारद्वाज, सुदेश कुमारी (79 वर्ष, निवासी गंगा नगर) के पुत्र राजेश जुनेजा तथा राहुल पंवार (29 वर्ष, निवासी रायवाला) के भाई विक्रम सिंह ने नेत्रदान की प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग किया। 


सभी परिवारों ने एम्स आई बैंक के साथ समन्वय स्थापित कर यह कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कराया।


उन्होंने यह भी बताया कि हर आयु वर्ग का व्यक्ति नेत्रदान कर सकता है, चाहे वह चश्मा पहनता हो या उसने मोतियाबिंद की सर्जरी कराई हो।

प्रो. मित्तल के मुताबिक नेत्रदान की प्रक्रिया लगभग 15 मिनट की सरल प्रक्रिया में संपन्न होती है, जिसमें कॉर्निया को सुरक्षित रूप से निकालकर संरक्षित किया जाता है।


आई बैंक की चिकित्सा निदेशक डॉ. नीति गुप्ता के अनुसार प्राप्त कुल 1246 कॉर्निया में से 61% ऋषिकेश, 22% हरिद्वार, 3% देहरादून, 1% रुड़की, 8% उत्तराखंड के अन्य क्षेत्रों तथा 5% देश के अन्य शहरों से प्राप्त हुए हैं।


निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह ने समाज में नेत्रदान को बढ़ावा देने में विभिन्न संस्थाओं एवं समाजसेवियों के योगदान की विशेषरूप से सराहना की। इनमें सुप्रयास कल्याण संस्थान के डॉ. सत्या नारायण एवं डॉ. शिवम शर्मा, लायंस क्लब ऋषिकेश के गोपाल नारंग, देह दान समिति, हरिद्वार के सुभाष चंद्र, मुस्कान फाउंडेशन की नेहा मलिक तथा मारवाड़ी महिला सम्मेलन (ऋषिकेश शाखा) की नूतन अग्रवाल शामिल हैं।


इसके अतिरिक्त समाजसेवी अनिल कक्कड़, संगीता आनंद (ऋषिकेश), अनिल अरोड़ा, समीर चावला, अशोक कालरा (हरिद्वार), विवेक अग्रवाल, हरदीप सिंह (देहरादून) तथा सीमा जैन (रुड़की) द्वारा नेत्रदान जागरूकता में किए गए प्रयासों को भी सराहा गया।


इस उपलब्धि के पीछे ऋषिकेश आई बैंक, एम्स की समर्पित टीम का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जो 24×7×365 निरंतर सेवाएं प्रदान कर रही है। टीम में आई बैंक मैनेजर महिपाल चौहान तथा परामर्शदाता सह तकनीशियन बिंदिया भाटिया, संदीप गुसाईं, पवन सिंह एवं आलोक सिंह का योगदान सराहनीय रहा।


एम्स ऋषिकेश आई बैंक की यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए गर्व का विषय है, बल्कि समाज में नेत्रदान के प्रति जनजागरूकता और सहभागिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

 

डोईवाला : 




डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत हिमालयन अस्पताल के आसपास इन दिनों स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होती नजर आ रही है। अस्पताल परिसर के बाहर स्थित मेडिकल स्टोरों के आसपास कूड़े के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है और गंभीर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार कूड़ा उठाने वाली गाड़ी नियमित रूप से नहीं आ रही है। कई बार एक-दो दिन तक कूड़ा नहीं उठता, जिससे कचरा जमा होकर पहाड़ बन जाता है। वहीं जब सफाई कर्मी पहुंचते भी हैं, तो कूड़ा पूरी तरह नहीं उठाया जाता और सड़क किनारे व दुकानों के पास बिखरा रह जाता है।क्षेत्र के कुछ लोगों द्वारा आसपास के खाली प्लॉटों में खुलेआम कचरा फेंका जा रहा है। इन स्थानों पर अब कूड़े के बड़े ढेर जमा हो चुके हैं, जो धीरे-धीरे पूरे इलाके को गंदगी में तब्दील कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि नगरपालिका इस गंभीर समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई करती नजर नहीं आ रही।यह स्थिति और भी चिंताजनक इसलिए है क्योंकि मामला एक बड़े अस्पताल क्षेत्र से जुड़ा है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों मरीज और उनके परिजन आते-जाते हैं। गंदगी और कूड़े के बीच रहना उनके स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुका है।

मेडिकल स्टोरों के बाहर पड़ा कूड़ा आवारा पशुओं द्वारा इधर-उधर फैलाया जा रहा है, जिससे समस्या और विकराल होती जा रही है। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है बल्कि संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका भी तेज हो गई है।क्षेत्रवासियों में इस अव्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि

कूड़ा उठाने की व्यवस्था को नियमित किया जाये,

खाली प्लॉटों में कचरा फेंकने वालों पर सख्त कार्रवाई हो,

तत्काल विशेष सफाई अभियान चलाया जाये,अस्पताल क्षेत्र में साफ-सफाई की निगरानी बढ़ाई जाये |


देहरादून:

Format of paramedical services will be changes in uttarakhand

Format of paramedical services will be changes in uttarakhand


*स्वास्थ्य शिक्षा में नई क्रांति की शुरुआत-10 श्रेणियों में 56 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाओं को दी गई मान्यता, पैरामेडिकल शिक्षा को मिलेगा नया स्वरूप*


*नए विषयों से बढ़ेगा युवाओं का दायरा, मजबूत होगी स्वास्थ्य सेवाएँ, पैरामेडिकल तथा Allied Health शिक्षा में आएगी एकरूपता, पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग प्रक्रिया होगी सरल और पारदर्शी* 


*हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड गुणवत्ता–आधारित स्वास्थ्य शिक्षा और हेल्थकेयर स्किल डेवलपमेंट का मॉडल बनकर उभरे- डॉ. आर. राजेश कुमार*


उत्तराखंड में स्वास्थ्य शिक्षा को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधुनिक, पारदर्शी और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में आज एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों और दूरदर्शी नेतृत्व और स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सहबद्ध और स्वास्थ्य देखरेख वृत्ति आयोग अधिनियम–2021 (National Commission for Allied and Healthcare Professions Act – 2021) के तहत उत्तराखंड राज्य सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखरेख परिषद के गठन की प्रक्रिया को तेजी देने हेतु सचिवालय में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने की। बैठक की शुरुआत में स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और आपदा–संवेदनशील राज्य में आधुनिक, प्रशिक्षित और प्रमाणित allied health workforce का विकास अत्यंत आवश्यक है। परिषद के गठन से न केवल शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि देशभर में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में उत्तराखंड अग्रणी भूमिका निभाएगा।


*परिषद गठन पर विस्तृत चर्चा, चयन समिति के गठन का निर्णय*

बैठक में परिषद के गठन, उसकी संरचना, भविष्य की आवश्यकताओं और कार्य प्रणालियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। यह तय किया गया कि परिषद के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए “तलाश–सह–चयन समिति” बनाई जाएगी, जो निर्धारित योग्यताओं और अनुभवों के आधार पर नामों का चयन करेगी। स्वास्थ्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परिषद के सुचारू संचालन के लिए प्रारंभिक बजट, कार्यालय संरचना, तकनीकी सहायता और मानव संसाधन की उपलब्धता तुरंत सुनिश्चित की जाए, ताकि परिषद अपने दायित्वों का निर्वहन शीघ्र आरंभ कर सके।


वर्तमान में राज्य में पैरामेडिकल शिक्षा उत्तराखंड पैरामेडिकल अधिनियम–2009 और स्टेट मेडिकल फैकल्टी के माध्यम से संचालित होती है। यहाँ स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर 22 विषयों के पाठ्यक्रम चल रहे हैं। राष्ट्रीय अधिनियम लागू होने के बाद इन सभी पाठ्यक्रमों को और अधिक मानकीकृत, रोजगारोन्मुख, और कौशल आधारित बनाया जाएगा। नए अधिनियम में कुल 10 श्रेणियों में 56 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाओं को मान्यता दी गई है। इससे विद्यार्थियों को न सिर्फ व्यापक करियर अवसर प्राप्त होंगे, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग्यता को उच्च पहचान मिलेगी।


*मजबूत होगी स्वास्थ्य सेवाएँ*

बैठक में विशेषज्ञों ने बताया कि अधिनियम के तहत कई नए और महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे—

पोषण विज्ञान, स्वास्थ्य सूचना प्रबंधन, क्लिनिकल साइकोलॉजी, डायलिसिस तकनीशियन, एनेस्थीसिया एवं ऑपरेशन थिएटर तकनीशियन, आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन आदि। इन विषयों के शामिल होने से राज्य के युवाओं को विस्तृत करियर विकल्प, निजी और सरकारी क्षेत्र में बेहतर प्लेसमेंट, तथा शोध और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं में अवसर मिलेंगे। अधिकारियों ने कहा कि यह कदम उत्तराखंड को स्वास्थ्य शिक्षा और allied health services के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करेगा और भविष्य में राज्य एक “हेल्थ एजुकेशन हब” के रूप में स्थापित होगा।


*स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान* 

उत्तराखंड सरकार स्वास्थ्य शिक्षा को सुदृढ़, सुगठित और राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखरेख परिषद का गठन हमारे लिए परिवर्तनकारी कदम साबित होगा। इससे पैरामेडिकल तथा allied health शिक्षा में एकरूपता आएगी, पाठ्यक्रमों का मानकीकरण होगा और पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग प्रक्रिया बेहद सरल और पारदर्शी बनेगी। नए अधिनियम के तहत कई उभरते विषय और विशेषज्ञताएँ शामिल होंगी, जिससे युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर मिलेगा। हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड गुणवत्ता–आधारित स्वास्थ्य शिक्षा और हेल्थकेयर स्किल डेवलपमेंट का मॉडल राज्य बनकर उभरे।

AIIMS trivendra singh rawat



अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में आयोजित विश्व आघात सप्ताह (World Trauma Week)–2025 का शुक्रवार को भव्य समापन हुआ। 



इस अवसर पर मुख्य अतिथि हरिद्वार सांसद एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य उत्तराखंड में एम्स ऋषिकेश ट्रॉमा चिकित्सा के क्षेत्र में जीवनरक्षक भूमिका निभा रहा है।


सांसद रावत ने कहा कि एम्स के ट्रॉमा एवं क्रिटिकल केयर विभाग ने आपदाओं और दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों की जान बचाने के क्षेत्र में जो कार्य किया है, वह सराहनीय और अनुकरणीय है। सांसद रावत ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में पहले गंभीर रूप से घायल मरीजों को हायर सेंटर तक पहुंचाना कठिन होता था, लेकिन एम्स की पहल पर शुरू हुई हेली एम्बुलेंस सेवा ने यह स्थिति बदल दी है। आज इस सेवा से अनगिनत जीवन बचाए जा रहे हैं।


सांसद रावत ने कहा कि आपात स्थितियों में जनजीवन की सुरक्षा के लिए ऐसी सेवाओं का अधिकाधिक प्रचार-प्रसार आवश्यक है ताकि आमजन समय रहते इनका लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि सिविल सोसाइटी को भी इस दिशा में आगे बढ़कर सहयोग करना चाहिए ताकि समाज स्तर पर आपात चिकित्सा जागरूकता को एक आंदोलन का रूप दिया जा सके।


इस अवसर पर सांसद रावत ने अपनी सांसद निधि से एम्स को प्रदान की गई रोगी परिवहन सेवा वाहन (Patient Transport Vehicle) की चाबी एम्स की निदेशक प्रो. मीनू सिंह को सौंपी। उन्होंने कहा कि यह वाहन “सेवा ही संस्कार” की भावना को सशक्त करेगा और एम्स की आपात चिकित्सा सेवाओं को और सुलभ बनाएगा।


कार्यक्रम के अंत में सांसद श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, निदेशक प्रो. मीनू सिंह, डीन प्रो. जया चतुर्वेदी, एवं चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्याश्री ने विश्व आघात सप्ताह के आयोजन में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विभिन्न विभागों के चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों, तकनीशियनों एवं अन्य स्टाफ को प्रशस्तिपत्र व स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया।

इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) मीनू सिंह, प्रो. जया चतुर्वेदी, प्रो. बी. सत्याश्री, प्रो. कमर आज़म, डॉ. मधुर उनियाल, डॉ. भास्कर सरकार, जनसंपर्क अधिकारी संदीप कुमार सिंह, सीएनओ अनीता रानी कंसल, ट्रॉमा सर्जन नीरज कुमार, डॉ. रूबी कटारिया, एसएनओ अखिलेश उनियाल, शशिकांत सहित एम्स के अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।


ऋषिकेश  : 


ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को नेत्र स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से निर्मल आश्रम आई इंस्टीट्यूट के सौजन्य से छिद्दरवाला कन्या पाठशाला में एक दिवसीय  निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया।

शिविर में सुबह से ही ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ी और बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी आँखों की जांच कराई। संस्थान की चिकित्सा टीम ने 223 मरीजों की नेत्र जांच की, जिनमें से 19 मरीजों को आँखों के ऑपरेशन हेतु अस्पताल भेजा गया।

निर्मल आई इंस्टीट्यूट की ओर से 105 मरीजों को निशुल्क चश्मे और 80 मरीजों को दवाइयाँ वितरित की गईं।

शिविर में डॉ. शिवाली, प्रबंधक अजय शर्मा, संतोष, संतू, गौरव नौटियाल, प्रभाकर शर्मा, आकाश राणा, शुभम पोखरियाल, धनज्योति, सीमा, कुलविंदर, कमलदीप कौर एवं गुरमुख सिंह की टीम ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।

ग्राम प्रधान गोकुल रमोला ने शिविर का शुभारंभ करते हुए कहा कि इस प्रकार के स्वास्थ्य शिविर समय-समय पर लगाए जाने चाहिए ताकि ग्रामीणों को निःशुल्क और सुलभ चिकित्सा सुविधा मिल सके। निर्मल आई इंस्टीट्यूट का यह प्रयास सराहनीय है |

ग्रामीणों ने शिविर के आयोजन पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की पहल से गाँवों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच आसान बनती है।

 


*उत्तराखण्ड में “स्वस्थ नारी–सशक्त परिवार” महाअभियान, कुल 4,39,973 लाभार्थियों ने उठाया विभिन्न शिविरों का लाभ* 

swasth naari sashakt parivaar in uttarakhand


*ई–रक्तकोश में हुआ 42,602 यूनिट रक्त का पंजीकरण, आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना अंतर्गत जारी किए गए 7,694 कार्ड* 


*46,523 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच, 61,982 महिलाओं की एनीमिया जांच और 66,194 बच्चों का किया गया टीकाकरण* 


देहरादून : 17 सितम्बर से ले कर लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती तक, उत्तराखण्ड स्वास्थ्य विभाग पूरे प्रदेश में “स्वस्थ नारी–सशक्त परिवार” अभियान बड़े पैमाने पर संचालित कर रहा है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी एवं  स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के नेतृत्व में यह अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिला स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के लिए एक संगठित आंदोलन का रूप ले चुका है।


*अभियान की प्रमुख उपलब्धियाँ (17–23 सितम्बर, 2025)*

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत उत्तराखण्ड में आयोजित इस महाअभियान ने कम समय में व्यापक उपलब्धियाँ दर्ज की हैं। प्रदेशभर में 17 से 23 सितम्बर 2025 तक कुल 9,112 स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए। इनमें से 249 विशेषता शिविर रहे, अब तक कुल 1,72,551 पुरूष व 2,67,422 महिलाओं ने इन शिविरों का लाभ उठाया। प्रदेशभर में 17 से 23 सितम्बर तक कुल 4,39,973 लाभार्थियों ने इन शिविरों का लाभ उठाया।


*महिलाओं, बच्चों और आमजन के लिए व्यापक स्वास्थ्य सेवाएँ*

स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से विभिन्न बीमारियों की जांच और उपचार किया गया। 17 सितंबर से 23 सितंबर तक कुल 95,557 पुरूषों व 1,29,217 महिलाओं की हाइपरटेंशन जांच जांच की गई। इसके साथ ही 85,643 पुरूषों व 1,24,234 महिलाओं की डायबिटीज जांच की गई। इसके साथ ही 52,491 पुरूषों व 1,54,124 महिलाओं की कैंसर स्क्रीनिंग जांच की गई।


*मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (RCH) अंतर्गत*

17 सितंबर से 23 सितंबर तक कुल 46,523 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच, 13,562 पुरूषों व  61,982 महिलाओं की एनीमिया जांच और 66,194 बच्चों का टीकाकरण किया गया। 30,875 पुरूषों व 45,711 अन्य गंभीर बीमारियों की, 2269 पुरूषों व 1847 महिलाओं की टीबी जांच और 43 लोगों की सिकल सेल डिज़ीज जांच की गई। विभिन्न कार्यक्रमों में  87,620 पुरूषों व 1,43,282 महिलाओं को परामर्श प्रदान किया गया। आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना अंतर्गत 7,694 कार्ड जारी किए गए और ई–रक्तकोश में 17 सितंबर से 23 सितंबर तक कुल 42,602 यूनिट रक्त का पंजीकरण हुआ। केंद्रीय सरकारी संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों और निजी संगठनों के सहयोग से अब तक 10 स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 2,748 लाभार्थियों को सेवाएँ दी गईं।


*अभियान की मुख्य गतिविधियाँ*

राज्य के 13 जिलों के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में दर्जनों गतिविधियाँ एक साथ संचालित हो रही हैं:

स्वास्थ्य एवं रक्तदान शिविर, एनीमिया, क्षय रोग, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग, निक्षय मित्र पंजीकरण, निःशुल्क दवा वितरण, पोषण एवं स्वच्छता पर परामर्श, महिलाओं व किशोरियों के लिए स्वास्थ्य एवं कौशल जागरूकता सत्र, नेतृत्व और संदेश अभियान की मुख्य गतिविधियाँ रहा है।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य की माताओं और बहनों का स्वास्थ्य सुदृढ़ करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वस्थ महिला ही सशक्त परिवार और सशक्त समाज की आधारशिला है। ‘स्वस्थ नार –सशक्त परिवार’ अभियान के माध्यम से हम इस दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं।



स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने भी बताया कि इस अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाओं को हर गांव और हर घर तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है।

 पौड़ी गढ़वाल:



 आगामी नवरात्रि एवं त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए सोमवार को व्यापार सभा भवन कोटद्वार,जिला पौड़ी गढ़वाल में खाद्य सुरक्षा विभाग एवं व्यापार मंडल एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में खाद्य कारोबारियों हेतु खाद्य सुरक्षा जागरुकता गोष्ठी का आयोजन किया गया।


कार्यक्रम में उपायुक्त (खाद्य सुरक्षा) गढ़वाल मंडल राजेन्द्र सिंह रावत ने व्यापारियों को बताया कि आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन उत्तराखंड द्वारा कुट्टू के आटे की बिक्री हेतु विशेष एसओपी/एडवाइजरी जारी की गई है।


व्यापारियों को निर्देशित करते हुए राजेंद्र सिंह रावत   कहा कि सभी व्यापारी क्रय-विक्रय का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें और एडवाइजरी का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें।


वहीं सहायक आयुक्त (खाद्य सुरक्षा) पौड़ी गढ़वाल पी.सी. जोशी ने विभागीय कार्यक्रमों एवं खाद्य सुरक्षा मानकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एफएसएसएआई द्वारा सभी श्रेणी के कारोबारियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम अनिवार्य किया गया है। साथ ही विभाग द्वारा ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सुधार नोटिस भी जारी किए जा रहे हैं। निर्धारित समय में कमियां दूर न करने पर संबंधित व्यापारी का लाइसेंस रद्द या निलंबित किया जा सकता है।


गोष्ठी में थोक व रिटेल मिठाई निर्माण से जुड़े कारोबारियों सहित बड़ी संख्या में व्यापारियों ने भाग लिया। 


इस अवसर पर वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी संदीप मिश्रा, विभागीय अधिकारीगण तथा व्यापार मंडल के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

 

देहरादून;

CMS foundation organised health camp


आज सीएमएस फाउंडेशन द्वारा आसरा ट्रस्ट, रायपुर (देहरादून) के प्रांगण में एक स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में लोगों की भारी संख्या में उपस्थिति रही और इसका उद्देश्य गरीब एवं ज़रूरतमंद बच्चों तथा उनके परिवारों को चिकित्सा सहायता प्रदान करना था।


शिविर में नेत्र जांच, ब्लड टेस्ट, डॉक्टर परामर्श और निःशुल्क दवाइयों का वितरण जैसी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई गईं। समाज कल्याण के प्रति इस पहल की सराहना की गई, क्योंकि इसने समाज के कमजोर वर्गों की स्वास्थ्य ज़रूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।


कार्यक्रम में कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे, जिनमें श्री अनूप (रीजनल मैनेजर), श्री व्योम शर्मा (रीजनल ह्यूमन रिसोर्स), श्री सुधाकर दढ़ियाल (रीजनल ऑपरेशन मैनेजर), और श्री आनंद सकलानी (ब्रांच मैनेजर) सहित अन्य सम्मानित सदस्य भी शामिल थे। उनकी उपस्थिति से डॉक्टरों और स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन हुआ, जिन्होंने शिविर को सफल बनाने के लिए दिनभर मेहनत की।


कार्यक्रम का समापन सभी डॉक्टरों, स्वयंसेवकों और सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किया गया। यह आयोजन इस बात को रेखांकित करता है कि समाज के ज़रूरतमंद वर्ग तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के लिए सामूहिक प्रयास कितने आवश्यक हैं।

हरिद्वार:




*मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देश पर हरिद्वार से शुरू हुई स्वास्थ्य महाकुंभ की तैयारियाँ*


*हर घर तक पहुंचे स्वास्थ्य सेवाएं, किसी स्तर पर न हो लापरवाही :- डॉ आर राजेश कुमार*

health camp 17 sep to 02 oct 2025


हरिद्वार:


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितम्बर से लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्मदिवस 2 अक्टूबर तक उत्तराखंड सरकार द्वारा "स्वास्थ्य पखवाड़ा" भव्य और दिव्य रूप में आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के नेतृत्व में यह आयोजन पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और जनजागरूकता बढ़ाने का एक ऐतिहासिक प्रयास बनने जा रहा है।


मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि प्रदेश का हर नागरिक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचे और लोग बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को सशक्त करने और अंतिम छोर तक सेवाएं पहुँचाने के लिए ठोस कदम उठा रही है।


*स्वास्थ्य सचिव डॉ. राजेश कुमार ने हरिद्वार से संभाली कमान*


धर्मनगरी हरिद्वार की जिम्मेदारी स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार को सौंपी गई है। मंगलवार को वे हरिद्वार पहुंचे, जहाँ विकास भवन सभागार में बैठक आयोजित की गई। बैठक में विधायक रुड़की प्रदीप बत्रा, विधायक भगवानपुर ममता राकेश समेत कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि स्वास्थ्य पखवाड़ा केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज और शासन के बीच सेतु बनने का प्रयास है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, निजी मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों तक विशेषज्ञ शिविर आयोजित हों। इन शिविरों में हृदय रोग, मधुमेह, स्त्री रोग, बाल रोग और अन्य गंभीर बीमारियों की जांच और उपचार होगा। साथ ही, रक्तदान शिविर भी लगाए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि हर जिले में रोस्टर तैयार कर जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों को इसमें जोड़ा जाए। इससे स्वास्थ्य शिविरों को व्यापक जनभागीदारी मिलेगी।


*निक्षय मित्र योजना पर विशेष जोर*


बैठक में डॉ. कुमार ने कहा कि प्रदेश को निक्षय मित्र योजना में देशभर में प्रथम स्थान दिलाना लक्ष्य है। इसके लिए सभी जनप्रतिनिधि और जिलास्तरीय अधिकारी क्षयरोग से पीड़ित मरीजों को गोद लें। इससे न केवल मरीजों को पोषण और सहयोग मिलेगा, बल्कि समाज में एक सकारात्मक संदेश भी जाएगा।


*पारदर्शिता और सख्ती का संदेश*


स्वास्थ्य सचिव ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही और शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अल्ट्रासाउंड केंद्रों की निगरानी सख्त करने और पीसीपीएनडीटी एक्ट का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। झोलाछाप डॉक्टरों पर भी नजर रखने और उनके खिलाफ अभियान चलाने की बात कही।


जनपद आगमन पर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और मुख्य विकास अधिकारी आकांक्षा कोण्डे ने स्वास्थ्य सचिव का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने आश्वस्त किया कि स्वास्थ्य पखवाड़े को जनभागीदारी से सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर व्यापक प्रचार-प्रसार करेगा, ताकि हर घर तक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुँच सके। बैठक में स्वास्थ्य विभाग द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना को पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आर.के. सिंह, परियोजना निदेशक के.एन. तिवारी, जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आशुतोष भंडारी, डॉ. कोमल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।


- ब्यासी में लगाया कैम्प, एम्स के चिकित्सकों ने दिया स्वास्थ्य परामर्श 


ऋषिकेश




-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में लगे श्रमिकों और अन्य कर्मचारियों के स्वास्थ्य परीक्षण हेतु एम्स द्वारा निःशुल्क मेडिकल कैम्प का आयोजन किया गया। इस दौरान एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा 100 से अधिक श्रमिकों की विभिन्न स्वास्थ्य जांचें कर उन्हें चिकित्सीय परामर्श उपलब्ध करवाया गया।   


ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के कार्यों को विभिन्न पैकेजों में विभाजित किया गया है। बीते रोज इस परियोजना के ब्यासी क्षेत्र में स्थित पैकेज-2 में एम्स ऋषिकेश ने स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया। शिविर स्थल में पंहुची संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो0 मीनू सिंह ने स्वयं भी कई श्रमिकों को आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श दिया। संस्थान में डिपार्टमेन्ट ऑफ टेलिमेडिसिन एवं बायोइन्फोर्मेटिक्स विभाग के प्रशासनिक प्रभारी विनीत कुमार ने बताया कि शिविर में जनरल मेडिसिन विभाग सहित विभिन्न विभागों के चिकित्सा विशेषज्ञों ने 100 से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। उन्होंने बताया कि शिविर में रिज्यूवेन कंपनी का भी सहयोग रहा। कंपनी द्वारा आधुनिक तकनीक आधारित मेडिकल उपकरणों से जरूरतमंद श्रमिकों का वाईटल्स, डेंटल, विजन, ह्यूमोग्लोबीन, ईसीजी स्कैन परीक्षण आदि विभिन्न जांचें की गयीं। इसके अलावा एम्स के चिकित्सकों ने विभिन्न स्वास्थ्य जांचें कर जरूरतमंदों को निःशुल्क दवा भी वितरित की। 


उल्लेखनीय है कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाईन परियोजना के श्रमिकों की स्वास्थ्य संबन्धित समस्या को देखते हुए पूर्व में एम्स ऋषिकेश और रेल विकास निगम लिमिटेड (आर.वी.एन.एल.) के मध्य एमओयू (मेमोरेन्डेम ऑफ अंडरस्टेन्डिंग) गठित किया गया था। इस संबन्ध में एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने बताया कि आर.वी.एन.एल. को नियमित स्तर पर टेलीकंसल्टेशन सुविधा उपलब्ध करवाने के अलावा जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन द्वारा भी स्वास्थ्य जाचें और चिकित्सीय परामर्श की सुविधा उपलब्ध करवायी जा रही है ताकि श्रमिकों का मेडिकल चेकअप करने के बाद उन्हें मौके पर ही स्वास्थ्य लाभ दिया जा सके। शिविर में जनरल मेडिसिन विभाग के डाॅ0 रजत शर्मा, टेलिमेडिसिन विभाग के डाॅ0 विवेक सिंह मलिक, डाॅ. ख्याति गुप्ता और धीरज, शुभम आदि का सहयोग रहा।

 


आज दिनांक 05/07/25 को निदेशक होम्योपैथी चिकित्सा सेवाऐं उत्तराखण्ड द्वारा

डोईवाला:

Homeopathy camp at Arya Kanya Junior High School Doiwala


डॉ जे एल फिरमाल  के निर्देशानुसार एवं जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ सरिता जोशी  के आदेश के अनुपालन में रा० हो० चि० डोईवाला के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ प्रियंका भारद्वाज के द्वारा आर्य कन्या इंटर कॉलेज, डोईवाला, देहरादून में निशुल्क Dengue Awareness Health Camp आयोजित किया गया जिसमें स्वास्थ्य जाँच के साथ साथ लोगों को डेंगू, चिकनगुनिया आदि विभिन्न प्रकार की बीमारियों के बारे में जानकारी दी गई एवं फार्मासिस्ट राजेंद्र कुमार द्वारा 91 छात्राओं को होम्योपैथिक औषधि यूपीटोरियम पर्फ 30 वितरित की गई। 


शिविर संचालन में योग अनुदेशक श्रीधर शर्मा एंव महिला योग अनुदेशक विजिया एंव आशा कार्यकर्ता कुंतेश्वरी द्वारा विषेश सहयोग दिया गया।


 श्री बदरीनाथ धाम श्री केदारनाथ धाम सहित श्री नृसिंह मंदिर ज्योतिर्मठ में योगदिवस के अवसर पर योगाभ्यास एवं "सर्वे भवन्तु निरामया" की प्रार्थना।

peaceful msg through yoga in Shri Kedarnath and Badrunath



श्री बदरीनाथ/ श्री केदारनाथ धाम/ ज्योर्तिमठ : 21 जून। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर " *एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य के लिए योग* " की थीम को चरितार्थ करते हुए श्री बदरीनाथ धाम श्री केदारनाथ धाम तथा श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ में आयुष एवं आयुष शिक्षा विभाग,  जिला चमोली एवं  रूद्रप्रयाग श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति  ( बीकेटीसी)द्वारा योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें  आयुष विभाग के चिकित्सकों,  बीकेटीसी, नगरपंचायत कर्मचारियों, अधिकारियों, सेना, आईटीबीपी, पुलिस होमगार्ड, तीर्थ पुरोहितों,तथा स्कूली बच्चों , अध्यापकों तथा बड़ी संख्या में देश विदेश के तीर्थयात्रियों ने प्रतिभाग किया।



इस अवसर पर कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों के  स्वागत के पश्चात योग गुरूओं द्वारा योगाभ्यास की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा  कि योग से व्यक्ति दीर्घायु एवं स्वस्थ रह सकता है।

इसके पश्चात योगाभ्यास की शुरुआत की गयी। योगाभ्यास से पहले शाररिक संचालन, तत्पश्चात विभिन्न आसन जैसे वृक्षासन, शशकासन, ताड़ासन, हलासन , व्रजासन, भुजंगासन शवासन आदि का अभ्यास किया गया तीसरे चरण में ध्यान एवं प्राणायाम का अभ्यास किया गया तत्पश्चात शांति पाठ के बाद योग दिवस का समापन हुआ।


श्री बदरीनाथ - केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने आज प्रात: को जारी संदेश में सभी तीर्थयात्रियों को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं दी कहा की  योग से निरोग यह योग की मुख्य धारणा है। बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती एवं बीकेटीसी उपाध्यक्ष विजय कपरवाण सहित बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने  अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं दी हैं।


बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में  बताया कि बदरीनाथ धाम में  अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य कार्यक्रम श्री बदरीनाथ मंदिर सिंह द्वार के आगे परिसर में बीकेटीसी के सौजन्य से आयुष विभाग चमोली द्वारा आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि बीकेटीसी बदरीनाथ धाम प्रभारी अधिकारी विपिन तिवारी ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।



विशिष्ट अतिथि बीकेटीसी पूर्व उपाध्यक्ष किशोर पंवार ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया कार्यक्रम का संचालन आयुष विभाग नोडल अधिकारी डा. त्रिलोक सिंह रावत ने किया। योगाभ्यास योग गुरु नरेंद्र सिंह कोठा बडवाल ने संपन्न करवाया।

इस अवसर पर आईटीबीपी डिप्टी कमांडेंट वाईपी जोशी, डा.ऋतु गुंज्याल,  धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल, वेदपाठी आचार्य रविंद्र भट्ट,थानाध्यक्ष नवनीत भंडारी, प्रशासनिक अधिकारी कुलदीप भट्ट बीकेटीसी पूर्व सदस्य धीरज मोनू पंचभैया,बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़, फार्मेसीडा.ऋतु अधिकारी गोविंद सिंह राणा, चंद्रमोहन बड़वाल, हरीश जोशी आदि मौजूद रहे। इसके अलावा आयुष विभाग चमोली द्वारा देश के प्रथम गांव माणा तथा श्री बदरीनाथ धाम के निकट गजकोटी  में भी योगाभ्यास का आयोजन किया।


श्री केदारनाथ में  आयुष विभाग रूद्रप्रयाग द्वारा आयोजित योगाभ्यास कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पुजारी बागेश लिंग ने कार्यक्रम की शुरुआत की योग अनुदेशक अरविंद शुक्ला एवं सर्वेश तिवारी ने योगाभ्यास करवाया इस अवसर आयुष विभाग से डा शुप्रभ दास,डा.  प्रमोद शुक्ला  केदारसभा अध्यक्ष राजकुमार तिवारी सहित  धर्माधिकारी औंकार शुक्ला,वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डी एस भुजवाण, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी यदुवीर पुष्पवान,  वेदपाठी  स्वयंबर सेमवाल, यशोधर मैठाणी, लोकेंद्र रिवाड़ी,प्रबंधक प्रदीप सेमवाल,कुलदीप धर्म्वाण, ललित त्रिवेदी आदि मौजूद रहे।



श्री नृसिंह मंदिर ज्योर्तिमठ परिसर  में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस उल्लासपूर्वक आयोजित हुआ बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि रहे तथा इस अवसर पर सभी को योग दिवस की बधाई दी।

इस अवसर पर  नगर पंचायत अध्यक्ष देवेश्वरी शाह श्री भुवन उनियाल,  मुख्य प्रशासनिक अधिकारी गिरीश चौहान, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी विजेंद्र बिष्ट, श्री नृसिंह मंदिर प्रभारी संदीप कपरवाण, प्रबंधक भूपेंद्र राणा,  पुजारी सुशील,डिमरी, आशुतोष शुक्ला, राकेश झिंक्वाण, माधव प्रसाद सेमवाल, रमेश डिमरी भगवती प्रसाद नंबूरी, मुकेश डिमरी लक्ष्मण सिंह रावत, कृष्णमणि थपलियाल, रोहिणी रावत, बबली राणा,  लक्ष्मी शाह कलम सिंह राणा, मुकेश कुमार समीर डिमरी, नैन सिंह भंडारी सुखदेव महिपाल, दीपक शाह, सौरभ राणा अनिल सकलानी श्रीमती सुषमा डिमरी कुशल लाल लोहानी,मुरली सिंह राणा, आरती शाह, आशीष डिमरी, ललित खंडूरी सहित सैकड़ो स्कूली बच्चे आचार्य गणों ने  योगाभ्यास कार्यक्रम मे़ प्रतिभाग किया।

 ऋषिकेश:


एम्स,ऋषिकेश में अंतराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) के उपलक्ष्य में विभिन्न यौगिक गतिविधियां शुरू हो गई हैं। 

जिसके तहत योग कार्यशाला व व्याख्यान का आयोजन किया गया। 

कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के कार्मिकों ने प्रतिभाग किया, इस दौरान उन्हें योग क्रियाओं का अभ्यास भी कराया गया।


संस्थान की निदेशक एवं सीईओ प्रोफेसर( डॉक्टर )मीनू सिंह के कुशल मार्गदर्शन में आयुष विभाग की ओर से सोमवार देर शाम प्रशासनिक एवं इंजीनियरिंग विभाग के लिए योग कार्यशाला आयोजित की गई। 


इस अवसर पर आयुष विभाग के वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीलॅय मोहंती ने कहा कि वर्तमान दौड़धूप व तनावग्रस्त दिनचर्या में सभी को अपने बेहतर स्वास्थ्य के लिए आयुष विधाओं का लाभ लेना चाहिए।

 उन्होंने बताया कि दुनिया को योग से रोग मुक्त रखने के संदेश के साथ वर्ष 2015 से हरवर्ष 21 जून को दुनियाभर में अंतराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है।

आयुष चिकित्साधिकारी डॉ. श्वेता मिश्रा ने बताया कि इस वर्ष "एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य " थीम के संदेश के साथ अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव मनाने का निर्णय लिया गया है। 


इसके मद्देनजर एम्स ऋषिकेश में विभिन्न विभागों की ओर से योग की विभिन्न गतिविधियां शुरू कर दी गई हैं। 

व्याख्यानमाला में डॉक्टर श्वेता ने बताया कि वर्तमान आपाधापी भरी जिंदगी में लाईफ स्टाइल से जनस्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है और लोग गलत खानपान, क्लाइमेट चेंज, प्रदूषण, शारीरक गतिविधियों के अभाव आदि कारणों के चलते गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। 

लिहाजा इन सबसे बचाव व स्वस्थ रहने के लिए हमें योग को आत्मसात करना होगा। 

सही मार्गदर्शन में नियमित योगाभ्यास, दिनचर्या में सुधार, व्यायाम से हम अपने आप को फिट व निरोगी रख सकते हैं। 

इस दौरान आयुष विभाग के योग प्रशिक्षक दीपचंद्र जोशी ने प्रतिभागियों को विभिन्न यौगिक क्रियाओं का अभ्यास भी कराया। 

कार्यशाला में इंजीनियरिंग विभाग से अधिशासी अभियंता राहुलजी सहित संस्थान के करीब 150 अधिकारी, कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया । 

उधर, बीते शनिवार को एम्स आयुष विभाग के तत्वावधान में नर्सिंग अधिकारियों के लिए योग कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें 200 से अधिक अधिकारियों ने विभिन्न योग क्रियाओं का अभ्यास किया।

मुख्यमंत्री आवास परिसर में गुरुवार को योगाभ्यास किया गया। 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के साथ इस अवसर पर मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी योग किया। 

yoga with CM Dhami


इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को योग को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि  योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि आंतरिक शांति और आत्मबोध की एक प्रक्रिया है। यह हमारे  मन को स्थिर कर चेतना की गहराइयों तक पहुँचाने का माध्यम है।


 उन्होंने भारतीय संस्कृति की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत ने सदैव मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि रखा है और हमारी सनातन संस्कृति का मूल स्तंभ योग है। यही कारण है कि आज योग दुनिया के करोड़ों लोगों की दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बन गया है और भारतीय जीवन शैली को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित कर रहा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में योग को अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मान्यता देने के लिए प्रस्ताव रखा था, जिसे 177 देशों ने समर्थन दिया और 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया।


 उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड योग और ऋषि मुनियों की भूमि है।  ग्राम स्तर तक सभी लोग योग से जुड़े, सरकार द्वारा इस दिशा में प्रयास किए गए हैं। योग से रोजगार के अवसर बढ़ाये जा रहे हैं। उत्तराखंड को योग और वेलनेस की वैश्विक राजधानी बनाने के लिए  नई योग नीति लाई गई है।

         

 ऋषिकेश : 



ग्राफिक एरा हॉस्पिटल देहरादून के सहयोग से  छिददरवाला प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र परिसर मे नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया। शिविर मे 130 लोगों ने चिकित्सकीय सलाह लेकर लाभ उठाया। रविवार को छिददरवाला प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र  परिसर में ग्राफिक एरा हॉस्पिटल देहरादून ने नि: शुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया। शुभारंभ निर्वतमान ब्लॉक प्रमुख भगवान सिंह पोखरियाल एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य देवेन्द्र सिंह नेगी   ने किया | शिविर में 130 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर जाचे एवं दवाईयो  दी गयी | शिविर से  दो मरीजो को अस्पताल ले जाया गया | पांच लोगो को अस्पताल आने की सलाह दी गयी | इस दौरान स्त्री रोग , नेत्र रोग,दन्त,अस्थि,जनरल फिजिशयन मौजूद रहे |  अस्पताल की डाक्टर की  टीम मे   प्रोफेसर बी.एस .बिष्ट ,डा निकिता ,डा सूरज मिश्रा,डा मानस ,डा अनुज,डा अम्बुज मित्तल,नर्सिग स्टाफ,मैंनजमेट से कुलदीप मौजूद रहे | इस दौरान  छिद्दरवाला निर्वतमान ग्राम प्रधान कमलदीपर कौर,शोबन सिंह कैंन्तुरा ,भगवान सिह मेहर,निर्वतमान क्षेत्र पंचायत सदस्य अमर खत्री,मण्डल अध्यक्ष सुरेन्द्र बिष्ट,पूर्व जिला पंचायत सदस्य  बिमला नैथानी ,अनीता राणा,पूर्व प्रधान हरीश कक्कड़ ,वरिष्ठ भाजपा नेता बलविन्दर सिह, ग्रामीण शैलेन्द्र रागड ,हुकम सिह रागड,हरीश पैन्यूली, समा पवार ,आयुष रावत मौजूद रहे |

 देहरादून;




केंद्रीय संचार ब्यूरो, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के देहरादून कार्यालय द्वारा आज हरिद्वार स्थित पतंजलि वेलनेस सेंटर में योग पर आधारित एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।


कार्यक्रम की शुरुआत योगगुरु स्वामी रामदेव जी महाराज के सान्निध्य में योग अभ्यास से हुई। उन्होंने उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों और आगंतुकों को विभिन्न योगासनों का अभ्यास कराया तथा योग के वैज्ञानिक, मानसिक, और आध्यात्मिक लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला।


इस अवसर पर स्वामी रामदेव जी का स्वागत केंद्रीय संचार ब्यूरो के अधिकारियों द्वारा पौधा भेंट कर किया गया। स्वामी रामदेव    ने   योग को भारत की ऋषि परंपरा की अनुपम देन बताते हुए कहा कि यह न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का साधन है, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और वैश्विक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।


उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि आगामी 21 जून, जो कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता है, को पूरे उत्साह के साथ मनाएं और बड़ी संख्या में योगाभ्यास में भाग लें। उन्होंने योग जागरूकता को बढ़ाने के लिए विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना भी की।


उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पूर्व देशभर में केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा जन-जागरूकता के उद्देश्य से विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य आम नागरिकों को योग के प्रति प्रेरित करना है ताकि वे अपने शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बना सकें तथा एक स्वस्थ और समर्थ भारत के निर्माण में योगदान दे सकें।


कार्यक्रम के अंतर्गत हरिद्वार की पंजीकृत सांस्कृतिक संस्था 'श्रीमान्त शांति खिलेराम सांस्कृतिक कला विकास समिति' द्वारा योग पर आधारित रागिनी की प्रस्तुति दी गई, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

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