Halloween party ideas 2015

रुद्रप्रयाग;
भूपेंद्र भण्डारी

अकसर पर्यटकों से गुलजार रहने वाली चोपता दुगलविट्टा की मखमली वादियां इन दिनों अशांत हैं। यहां पर प्रशासन के अतिक्रमण का डण्डा चल पडा है जिसके चलते सैन्चुरी क्षेत्र व वन पंचायत की जमीनों में अवैध खनन करने व बिना इजाजत टैंट व अस्थाई हट्स बनाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरु हो गयी है।
अब तक अवैध खनन में 12 लोगों के चालान कर दिये गये हैं तो 130 अतिक्रमणकारियों का चिन्हीकरण कर निर्माण कार्य को ध्वस्त करने के निर्देश दिेये जा चुके हैं। 
अपनी सुन्दरता के जरिये मिनी स्विटजरलैण्ड कही जाने वाली तुंगनाथ धाटी भू माफियाओं की चपेट में है। यहां के बेसकीमती बुग्यिालों को खुर्दबुर्द कर चोपता दुगलविट्टा को भी प्लास्टिक की घाटी बना दिया गया है।

यहां पर हर वर्ष लाखों की तादाद में देशी व विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं और प्रकृ्रति का आनंद लेते हैं मगर कई बाहरी लोगों द्वारा यहां सांठगांठ कर बुग्यिालों में टैंट कालौनियां तैयार कर दी गयी हैं और कइयों ने तो अस्थाई हटों का भी निर्माण कर दिया है।

यहां पर रोजगार व पर्यटन को विकसित करने के लिए स्थानीय लोगों को वन पंचायत द्वारा लीज पर जमीन आवंटित की जाती है जिस पर टेंट कालौनियां स्थापित होती हैं। अब अवैध अतिक्रमण के नाम पर प्रशासन ने इनको गिराना शुरु कर दिया है तो प्रशासन की इस कार्यवाही से स्थानीय बेरोजगारों का भी विरोध शुरु हो गया है।

वहीं जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल का कहना है कि बिना परमीशन के सैंचुरी व वन पंचायत की जमीनों में अवैध तरीके से खनन व टैंट निर्माण का कार्य चल रहा है। जिसको लेकर यह कार्यवाही की गयी है।
स्थानीय लागों का रोजगार ठप्प न हो इसको लेकर तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है और सभी पहलुओं पर विचार कर यहां टेंट कलौनी स्थापित करने के विषय पर कार्ययोजना बनाई जायेगी।

सहकारिता मंत्री बोले चोपता में रोजगार परख विकास को लेकर कार्ययोजना बनाई जाएगी  ।इधर प्रदेश के सहकारिता मंत्री डा0 धनसिंह रावत का कहना है कि चोपता पर्यटकों को लम्बे समय से आकर्षित करता चला आ रहा है यहां पर विकास तो होना चाहिए मगर यहां की सुन्दरता पर दाग भी नहीं लगना चाहिए। कहा कि वे स्वयं पर्यटन मंत्री से इस मसले पर वार्ता करेंगे और शीघ्र ही चोपता के नियंत्रित विकास व स्थानीय रोजगार को लेकर कार्ययोजना तय करेंगे।
बताया जा रहा है कि उंची पहुंच रखने वाले करीब 24 बाहरी लोगों द्वारा यहां बुग्यालों में अवैध अतिक्रमण किया गया है। जबकि वर्षेां से यहां पर वन पंचायत के जरिये कई लोगों को जमीनें आवंटित की गयी हैं। अब ऐसे में सवाल जायज है कि आखिर स्थानीय लोगों की सांठगांठ व विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के चलते ही बाहरी ऐजेन्सियां यहां तक पहुंची पंहुच बना पाई है। अब प्रशासन का डण्डा क्या असर दिखाता है यह तो आने वाले दिनों में पता लग जायेगा

एक टिप्पणी भेजें

www.satyawani.com @ All rights reserved

www.satyawani.com @All rights reserved
Blogger द्वारा संचालित.