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देहरादून:

dholi garwali fim awarded 72nd national film fare


72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (फीचर फिल्म श्रेणी) में सर्वश्रेष्ठ गढ़वाली फ़िल्म के रूप में ‘ढोली’ को प्रतिष्ठित रजत कमल पुरस्कार तथा ₹2 लाख की नकद राशि से सम्मानित किए जाने पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने फिल्म की पूरी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।


मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि गढ़वाली फ़िल्म ‘ढोली’ को राष्ट्रीय स्तर पर मिला यह सम्मान उत्तराखंड की समृद्ध लोकभाषा, लोक संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत का सम्मान है। यह उपलब्धि प्रदेश के फिल्म उद्योग, कलाकारों और रचनाकारों के लिए प्रेरणादायक है तथा गढ़वाली सिनेमा को नई पहचान प्रदान करेगी।


मुख्यमंत्री ने फ़िल्म के निर्माता एससी फार्माकेम प्राइवेट लिमिटेड, निर्देशक दिनेश पी. भोंसले तथा पूरी टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराओं को प्रभावी ढंग से देश-दुनिया तक पहुंचाने में क्षेत्रीय सिनेमा की महत्वपूर्ण भूमिका है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को फिल्म निर्माण के अनुकूल गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। नई फिल्म नीति के माध्यम से प्रदेश में फिल्म निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं को नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं।



accident at bhavali, naini tal


दिनांक 18 जुलाई 2026 देर रात्रि जनपद नैनीताल के भवाली-रामगढ़ मार्ग पर कुलाटी बैड के समीप एक कार के गहरी खाई में गिरने की सूचना प्राप्त होने पर एसडीआरएफ पोस्ट नैनीताल की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों घायलों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया।

आपदा कंट्रोल रूम, नैनीताल से सूचना प्राप्त होते ही उप निरीक्षक मनीष भाकुनी के नेतृत्व में एसडीआरएफ टीम आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों के साथ तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई।

घटनास्थल पर पहुँचने पर पाया गया कि महिंद्रा मराजो कार (वाहन संख्या: DL08CBE0795) सड़क से लगभग 50 मीटर गहरी खाई में दुर्घटनाग्रस्त होकर गिरी हुई थी। वाहन में सवार *_खरेश दुग्गल एवं उनकी पत्नी रितु दुग्गल, निवासी सेक्टर-11, नोएडा,*_ सामान्य रूप से घायल अवस्था में थे।

एसडीआरएफ टीम ने त्वरित एवं सुरक्षित रेस्क्यू अभियान चलाते हुए दोनों घायलों को खाई से बाहर निकाला तथा प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराकर आगे के उपचार हेतु भवाली अस्पताल भेजा गया।

चल पड़ी पहली हाइड्रोजन ट्रेन ... मगर मंज़िल महज़ रेलवे नहीं

first hydrogen train india


 भारत ने हाइड्रोजन ट्रेन क्यों बनाई, तो शायद पहला जवाब होगा. ताकि डीज़ल की जगह एक साफ़ ईंधन इस्तेमाल हो सके।

जवाब सही है। लेकिन पूरी कहानी नहीं।


असल सवाल यह है कि जब भारतीय रेलवे का लगभग पूरा ब्रॉडगेज नेटवर्क पहले ही बिजली से चलने लगा है, तो फिर हाइड्रोजन ट्रेन की ज़रूरत क्यों पड़ी?


यहीं से इस खबर की असली कहानी शुरू होती है।


हरियाणा के जींद–सोनीपत रेलखंड (करीब 90 किलोमीटर) पर भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू हुई है। यह सिर्फ़ एक नई ट्रेन नहीं, बल्कि भारत के ग्रीन हाइड्रोजन मिशन की चलती. फिरती प्रयोगशाला है।


हाइड्रोजन ट्रेन चलती कैसे है?


इस ट्रेन में डीज़ल इंजन नहीं है।


इसके ऊपर लगे विशेष टैंकों में हाइड्रोजन गैस भरी जाती है। यह हाइड्रोजन फ्यूल सेल में हवा की ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करती है और बिजली बनाती है। यही बिजली ट्रेन के मोटर, एसी, लाइट और बाकी सिस्टम चलाती है।


इस पूरी प्रक्रिया में धुआँ नहीं निकलता। केवल पानी की भाप निकलती है। यानी पटरी पर चलते समय यह ट्रेन स्थानीय स्तर पर लगभग शून्य उत्सर्जन करती है।


ध्यान देने वाली बात यह है कि ट्रेन के आसपास की हवा साफ़ रहती है, हालाँकि हाइड्रोजन बनाने की प्रक्रिया कितनी हरी है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बिजली कहाँ से आती है।

क्या यह दुनिया की सबसे आधुनिक ट्रेन है?


इस 10 डिब्बों वाली ट्रेन में करीब 2600 यात्री सफ़र कर सकेंगे। इसे 75–120 किमी/घंटा की गति वाले उपनगरीय रूटों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें मेट्रो जैसी ऑटोमैटिक बंद होने वाली दरवाज़े, आधुनिक डिस्प्ले, एयर कंडीशनिंग और कई सुरक्षा प्रणालियाँ हैं। हाइड्रोजन रिसाव या आग की आशंका होने पर तुरंत अलर्ट देने वाले सेंसर भी लगाए गए हैं।

इसका एक बड़ा दावा यह भी है कि यह अपनी श्रेणी की दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल है।

लेकिन जब बिजली वाली ट्रेनें पहले से हैं, तो हाइड्रोजन क्यों?

यही सबसे दिलचस्प सवाल है।


अगर किसी रेलमार्ग पर पहले से बिजली की लाइन मौजूद है, तो इलेक्ट्रिक ट्रेन आज भी हाइड्रोजन ट्रेन से ज़्यादा ऊर्जा दक्ष और सस्ती मानी जाती है।

फिर रेलवे हाइड्रोजन पर इतना निवेश क्यों कर रहा है?


क्योंकि इस ट्रेन की मंज़िल सिर्फ़ यात्रियों को एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक पहुँचाना नहीं है।

भारत हाइड्रोजन बनाना, उसे सुरक्षित तरीके से जमा करना, ट्रेन में भरना, फ्यूल सेल बनाना और इस पूरी तकनीक में आत्मनिर्भर होना चाहता है।

यानी यह ट्रेन एक पूरे हाइड्रोजन इकोसिस्टम की शुरुआत है। हाइड्रोजन ट्रेन को आज की तारीख में ‘क्लाइमेट सॉल्यूशन’ से ज़्यादा ‘टेक्नोलॉजी डेमो’ और इंडस्ट्री‑बिल्डिंग प्रोजेक्ट के रूप में देखना ज़्यादा ईमानदार होगा।

क्या इससे रेल किराया सस्ता होगा?


फिलहाल इसकी उम्मीद नहीं करनी चाहिए।


एक हाइड्रोजन ट्रेन बनाने में लगभग 80 करोड़ रुपये तक का खर्च आ सकता है। इसके अलावा हाइड्रोजन बनाने, स्टोर करने और भरने का अलग इंफ्रास्ट्रक्चर भी बनाना पड़ता है, जिसकी लागत भी दर्जनों करोड़ रुपये है।

आज के समय में ग्रीन हाइड्रोजन, बिजली या डीज़ल की तुलना में अभी महंगी है।

इसलिए आज की तारीख में यह परियोजना ‘किराया घटाने’ नहीं, बल्कि ‘भविष्य की लागत को predictable रखने’ और फॉसिल ईंधन पर निर्भरता घटाने की दिशा में उठाया गया कदम है।

हालांकि भविष्य में अगर ग्रीन हाइड्रोजन सस्ती हो जाती है और इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन होने लगता है, तो परिचालन लागत स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। लेकिन अभी ऐसा कहना जल्दबाज़ी होगी।


फिर फायदा किसे होगा?

यात्रियों को कम शोर, साफ़ हवा और आधुनिक सफ़र का अनुभव मिलेगा।

रेलवे को उन इलाकों के लिए एक विकल्प मिलेगा, जहाँ बिजली की लाइन बिछाना मुश्किल या बहुत महंगा है।

और सबसे बड़ा फायदा देश को हो सकता है। 

भारत ने 2070 तक नेट‑ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है; स्टील, उर्वरक और हैवी ट्रांसपोर्ट जैसे ‘कठिन सेक्टरों’ में ग्रीन हाइड्रोजन एक प्रमुख औज़ार माना जा रहा है। यह ट्रेन उस दिशा में शुरुआती अभ्यास है।


अगर भारत हाइड्रोजन तकनीक में महारत हासिल करता है, तो यही तकनीक आगे चलकर स्टील, उर्वरक, भारी ट्रकों और जहाज़ जैसे उन क्षेत्रों में भी काम आ सकती है, जहाँ सिर्फ़ बिजली से काम चलाना आसान नहीं है।


असल कहानी


पहली नज़र में यह सिर्फ़ एक नई ट्रेन लगती है। लेकिन असल में यह भारत की ऊर्जा व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की तैयारी है।

कई बार कोई ट्रेन सिर्फ़ यात्रियों को नहीं ले जाती।

वह एक नई तकनीक, नया उद्योग और भविष्य की नई दिशा भी साथ लेकर चलती है।

 *मुख्यमंत्री धामी ने 180 नेचर गाइडों को रोजगार पंजीकरण प्रमाण-पत्र मिलने पर दी बधाई*




मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास सभागार से तराई पश्चिमी वन प्रभाग, रामनगर के फांटो जोन में आयोजित नेचर गाइड प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार पंजीकरण प्रमाण-पत्र वितरण कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से प्रतिभाग किया। इस अवसर पर 180 महिला एवं पुरुष नेचर गाइडों को रोजगार पंजीकरण प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।



मुख्यमंत्री ने सभी नेचर गाइडों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ये प्रमाण-पत्र केवल रोजगार का दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि युवाओं के कौशल, मेहनत और प्रकृति संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि नेचर गाइड स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने के साथ ही आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।



मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें विशेष प्रसन्नता है कि प्रमाण-पत्र प्राप्त करने वाले अनेक युवा रिवर्स पलायन कर अपने गांव और प्रदेश लौटे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल इन युवाओं की व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के गांवों में लौटते विश्वास, समृद्धि और रोजगार के अवसरों का भी प्रतीक है।



मुख्यमंत्री ने कहा कि फांटो जोन आज केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि ईको-टूरिज्म और समुदाय आधारित पर्यटन का उत्कृष्ट मॉडल बन चुका है। क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जैव विविधता, घने वन, शांत वातावरण और वन्यजीव देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फांटो जोन टाइगर साइटिंग के लिए भी तेजी से अपनी अलग पहचान बना रहा है। यहां विकसित ट्री हाउस पर्यटकों को प्रकृति के बीच अनूठा अनुभव प्रदान कर रहा है और पर्यटन गतिविधियों से प्रदेश को राजस्व प्राप्त होने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी आर्थिक लाभ मिल रहा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि प्रकृति का संरक्षण हो और प्रकृति से जुड़े स्थानीय समुदायों का जीवन भी समृद्ध बने। ईको-टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय युवाओं, महिलाओं, होमस्टे संचालकों, छोटे व्यापारियों, वाहन चालकों, स्थानीय उत्पाद निर्माताओं और ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर यह संतोष का विषय है कि उत्तराखंड ने विकास, सुशासन, रोजगार सृजन और जनकल्याण के क्षेत्र में अनेक नए आयाम स्थापित किए हैं। ईको-टूरिज्म और नेचर गाइड जैसी पहलें स्थानीय युवाओं को उनके गांवों में सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य सेवक के रूप में उनका निरंतर प्रयास रहा है कि उत्तराखंड का युवा अपने ही प्रदेश में रोजगार प्राप्त करे, अपने गांव में रहे और अपने परिवार के साथ रहते हुए प्रदेश के विकास में सहभागी बने।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से राज्य सरकार पर्यटन को केवल पर्यटन गतिविधि तक सीमित न रखकर रोजगार, स्वरोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और रिवर्स पलायन से जोड़ने का कार्य कर रही है। होमस्टे, शीतकालीन पर्यटन, एडवेंचर टूरिज्म, ईको-टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म, डेस्टिनेशन वेडिंग और आध्यात्मिक पर्यटन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का परिणाम है कि प्रदेश में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह इस बात का संकेत है कि उत्तराखंड के गांव अब केवल पुरानी यादों के नहीं, बल्कि नई संभावनाओं के भी केंद्र बन रहे हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में रोजगार के अवसर उपलब्ध होने से पलायन को रोकने में मदद मिलेगी, पर्यटन बढ़ने से स्थानीय व्यापार को गति मिलेगी और स्थानीय समुदायों के समृद्ध होने से आत्मनिर्भर उत्तराखंड का सपना साकार होगा।


मुख्यमंत्री ने नेचर गाइडों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनका दायित्व केवल पर्यटकों को जंगल घुमाने तक सीमित नहीं है। वे उत्तराखंड की पहचान, जंगलों के प्रहरी, वन्यजीव संरक्षण के सहयोगी और प्रदेश की संस्कृति, परंपरा एवं अतिथि देवो भवः की भावना के ब्रांड एम्बेसडर हैं। उन्होंने कहा कि नेचर गाइड पर्यटकों को केवल वन्यजीवों का दर्शन नहीं कराते, बल्कि उन्हें प्रकृति के प्रति प्रेम और संवेदनशीलता का संदेश भी देते हैं। वे लोगों को यह समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कि जंगल और वन्यजीव आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर हैं।


मुख्यमंत्री ने सभी नेचर गाइडों और प्रदेशवासियों से प्रकृति एवं वन्यजीवों के संरक्षण, पर्यावरण के प्रति जनजागरूकता, गांवों की समृद्धि और स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देकर उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ और आत्मनिर्भर राज्य बनाने के सरकार के ‘विकल्प रहित संकल्प’ को साकार किया जाएगा।


इस अवसर पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वन अधिकारी, जनप्रतिनिधि, नेचर गाइड तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।


एसईओसी ने जारी किया पत्र

लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की


देहरादून:





 भारत मौसम विज्ञान विभाग, देहरादून द्वारा उत्तराखण्ड के विभिन्न  जनपदों में आगामी दिनों के दौरान भारी से अत्यधिक भारी वर्षा, आकाशीय बिजली एवं तेज वर्षा की चेतावनी जारी किए जाने के बाद राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर आवश्यक एहतियाती एवं निवारक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। पत्र में 18 से 22 जुलाई तक जारी मौसम चेतावनी के अनुरूप जनपद स्तर पर सतर्कता बढ़ाने, संवेदनशील क्षेत्रों की निरंतर निगरानी रखने तथा राहत एवं बचाव दलों को पूर्ण रूप से तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।

19 जुलाई को मौसम विभाग ने नैनीताल, चम्पावत एवं ऊधमसिंह नगर जनपदों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जहां कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा होने की संभावना है। वहीं देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार एवं बागेश्वर में भारी से बहुत भारी वर्षा तथा आकाशीय बिजली के साथ अत्यंत तीव्र वर्षा की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा एवं पिथौरागढ़ जनपदों में भारी वर्षा की संभावना के मद्देनजर येलो अलर्ट घोषित किया गया है।

20 जुलाई को देहरादून, हरिद्वार एवं टिहरी जनपदों के कुछ क्षेत्रों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है, जहां भारी से बहुत भारी वर्षा के साथ कहीं-कहीं अत्यंत भारी वर्षा होने की संभावना है। वहीं देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, टिहरी, उत्तरकाशी एवं पौड़ी के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। 

21 जुलाई को देहरादून एवं बागेश्वर जनपद में भारी से बहुत भारी वर्षा तथा आकाशीय बिजली के साथ अत्यंत तीव्र वर्षा की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। जबकि टिहरी, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, नैनीताल, चमोली एवं पिथौरागढ़ जनपदों में भारी वर्षा की संभावना के कारण येलो अलर्ट प्रभावी रहेगा। 22 जुलाई को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर एवं पिथौरागढ़ जनपदों में भारी वर्षा की संभावना के दृष्टिगत येलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके साथ ही राज्य के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक, आकाशीय बिजली एवं तेज वर्षा का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए सभी जिलाधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने, जिला आपदा परिचालन केंद्रों को 24×7 सक्रिय रखने, राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखने तथा भूस्खलन संभावित मार्गों पर आवश्यक मशीनरी एवं संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। 

सचिव श्री विनोद कुमार सुमन ने प्रदेशवासियों, चारधाम यात्रियों एवं पर्यटकों से अपील करते हुए कहा कि मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों को गंभीरता से लें तथा अनावश्यक यात्रा से बचें। यात्रा पर निकलने से पहले मौसम एवं सड़क की स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त करें। भारी वर्षा के दौरान नदी-नालों, गदेरों एवं जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें तथा भूस्खलन संभावित स्थानों पर विशेष सावधानी बरतें। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन अथवा आपदा नियंत्रण कक्ष को सूचित करें तथा सहायता के लिए 112, 1070 एवं 1077 पर संपर्क करें।

देहरादून:

MDDA  building


मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध निर्माणों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत शुक्रवार को राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो निर्माणों को सील कर दिया। प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम ने स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किए जा रहे बहुमंजिला निर्माण तथा बिना मानचित्र स्वीकृति के चल रहे व्यवसायिक निर्माण पर कार्रवाई की।


 एमडीडीए ने स्पष्ट किया है कि नियमानुसार अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य स्वीकार नहीं किया जाएगा।


*व्योमप्रस्थ कॉलोनी में बहुमंजिला निर्माण पर कार्रवाई*

एमडीडीए की टीम ने जीएमएस रोड स्थित व्योमप्रस्थ कॉलोनी में संगीता गोयल और प्रवीन कुमार गर्ग द्वारा किए जा रहे बहुमंजिला निर्माण का निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि निर्माण कार्य स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किया जा रहा है। नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर प्राधिकरण ने मौके पर ही निर्माण को सील कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि स्वीकृत मानचित्र से हटकर किए गए निर्माण न केवल विकास नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि भविष्य में क्षेत्रीय नियोजन और नागरिक सुविधाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।


*कण्डोगल में बिना स्वीकृति व्यवसायिक निर्माण सील*

इसी क्रम में एमडीडीए की प्रवर्तन टीम ने धारकोट रोड, कण्डोगल थानों क्षेत्र में उमेद अली द्वारा किए जा रहे व्यवसायिक निर्माण का निरीक्षण किया। जांच में सामने आया कि निर्माण कार्य बिना किसी मानचित्र स्वीकृति के संचालित किया जा रहा था। इसके बाद प्राधिकरण ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए निर्माण स्थल को सील कर दिया। अधिकारियों ने संबंधित पक्ष को भविष्य में नियमों के अनुरूप ही कार्य करने के निर्देश भी दिए।


*अवैध निर्माणों पर लगातार नजर*

एमडीडीए का कहना है कि तेजी से हो रहे शहरी विस्तार के बीच अनधिकृत निर्माण और अवैध भूमि विकास की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम नियमित रूप से विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही है और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार बिना स्वीकृति किए जा रहे निर्माण शहर के सुनियोजित विकास में बाधा उत्पन्न करते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।


*निवेश से पहले वैधानिक स्थिति जांचने की अपील*

प्राधिकरण ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी भूखंड की खरीद-फरोख्त या निर्माण कार्य शुरू करने से पहले उसकी वैधानिक स्थिति की जांच अवश्य कर लें। बिना स्वीकृति विकसित की जा रही कॉलोनियों या निर्माण परियोजनाओं में निवेश करने से भविष्य में आर्थिक और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।


नियमों से समझौता नहीं : बंशीधर तिवारी

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग और अनधिकृत निर्माण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नियोजित, सुरक्षित और टिकाऊ शहरी विकास सुनिश्चित करना एमडीडीए की प्राथमिकता है। हाल की कार्रवाई उन लोगों के लिए स्पष्ट संदेश है जो नियमों को दरकिनार कर निर्माण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।


प्रवर्तन अभियान रहेगा जारी : मोहन सिंह बर्निया

एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्रवर्तन टीम लगातार क्षेत्रीय निरीक्षण कर रही है। जहां भी बिना स्वीकृति निर्माण या भूमि विकास कार्य संचालित पाए जा रहे हैं, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि भवन निर्माण और भूमि विकास कार्य केवल निर्धारित मानकों और स्वीकृत नियमों के अनुरूप ही किए जाने चाहिए। प्राधिकरण का अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

 *देहरादून–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना को लेकर पिछले कुछ दिनों से अनेक नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों एवं स्थानीय लोगों द्वारा व्यक्त की जा रही चिंताओं और सुझावों का मैंने गंभीरता से संज्ञान लिया है।*

postponed forest cutting rishikesh highway, CM Dhami


यह परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की एक महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजना है, जिस पर माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों तथा सभी आवश्यक वैधानिक एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों एवं प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कार्यवाही की जा रही थी। परियोजना में वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए लगभग 3.5 किलोमीटर लंबे हाथी अंडरपास तथा छोटे वन्यजीवों के आवागमन के लिए विशेष कल्वर्ट जैसी व्यवस्थाओं का भी प्रावधान किया गया है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष एवं सड़क दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की मृत्यु की घटनाओं में कमी लाने में सहायता मिलेगी, जो अक्सर इस रास्ते में देखा जाता है।


विकास हमारे लिए आवश्यक है, लेकिन जनभावनाओं, पर्यावरण और स्थानीय हितों की अनदेखी कर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। इसी उद्देश्य से प्रमुख सचिव एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी हितधारकों, स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं विशेषज्ञों से पुनः विस्तृत संवाद स्थापित किया जाए।


माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों एवं निर्णय का पूर्ण सम्मान करते हुए आगे की कार्यवाही की जाएगी। *साथ ही, जब तक सभी पक्षों के साथ संतोषजनक सहमति एवं विश्वास का वातावरण नहीं बन जाता, तब तक इस परियोजना के अंतर्गत आने वाले पेड़ों का कटान स्थगित रखा जाएगा।*


मेरे लिए उत्तराखण्ड की प्रकृति, जनभावनाएँ और प्रदेश का विकास—तीनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। हमारी सरकार संवाद, सहमति और व्यापक जनहित के आधार पर ही आगे बढ़ेगी।


https://x.com/i/status/2078410850000670825


उत्तराखंड के कुमायूं क्षेत्र के रामनगर को पौड़ी क्षेत्र के देहरादून के बीच कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए रेल मंत्रालय द्वारा द्विसाप्ताहिक एक्सप्रेस के संचलन को स्वीकृति प्रदान की है। 




क्षेत्रीय जनता की रामनगर से देहरादून के मध्य अंतर नगरीय एक्सप्रेस ट्रेन चलाये जाने की मांग तथा माननीय सांसद श्री अनिल बलूनी जी के विशेष प्रयास को ध्यान में रखते हुए रेल मंत्रालय द्वारा 15310/15309 रामनगर-देहरादून-रामनगर एक्सप्रेस के संचलन को मंजूरी प्रदान की गयी।

 

15310/15309 रामनगर-देहरादून-रामनगर एक्सप्रेस बुधवार एवं शुक्रवार को रामनगर से 05.50 बजे प्रस्थान कर 12.40 बजे देहरादून पहुंचेगी तथा उसी दिन देहरादून से 15.55 बजे प्रस्थान कर 23.30 बजे रामनगर पहुंचेगी। यह एक्सप्रेस ट्रेन अपनी यात्रा मार्ग में काशीपुर, रोशनपुर, पीपलसाना, मुरादाबाद, नजीबाबाद एवं हरिद्वार स्टेशनों पर रुकेगी। रामनगर-देहरादून के मध्य यह पहली एक्सप्रेस ट्रेन है। इस ट्रेन के चलने से क्षेत्रीय जनता की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी हुयी। 


इस ट्रेन के चलने से उत्तराखंड नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून तथा उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद, बिजनौर जिलों के छात्रों, किसानों, व्यावसायियों सहित समाज के सभी वर्गों को लाभ होगा। क्षेत्र के लोगों को प्रदेश की राजधानी देहरादून एवं तीर्थ नगरी हरिद्वार जाकर वहां अपने कार्य कर उसी दिन वापस आने की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। 


इस गाड़ी के चलने से ‘जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान’ जाने वाले वन्यजीव प्रेमियों एवं रामनगर के निकट कोसी नदी के बीच एक विशाल चट्टान पर स्थित गिरजा देवी मंदिर और सीतामढ़ी/सीतावनी जैसे पौराणिक स्थलों के दर्शन हेतु आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा होगी। इसके अतिरिक्त हरिद्वार/देहरादून पहुँच कर बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री, गंगोत्री आदि तीर्थ स्थलों  को जाने में सहूलियत होगी।


इस गाड़ी में वातानुकूलित द्वितीय, वातानुकूलित तृतीय, वातानुकूलित चेयर कार, शयनयान, द्वितीय श्रेणी चेयर कार तथा सामान्य द्वितीय श्रेणी के कोच लगाये जायेंगे।

*मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश — आपदा प्रबंधन में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं होगी।* 


 *बिजली, पेयजल, सड़क और संचार सेवाएं तत्काल बहाल हों, हर जिले में 24×7 अलर्ट मोड पर रहें सभी जिलाधिकारी एवं एजेंसियां।*

 *डेंगू रोकथाम पर युद्धस्तर पर अभियान चलाने के निर्देश, जलभराव और गंदगी पर तत्काल कार्रवाई के आदेश।* 

 *चारधाम यात्रा, मानसून और आपदा प्रबंधन की व्यापक समीक्षा, संवेदनशील क्षेत्रों में हेली सेवा और राहत संसाधन पूरी तरह तैनात रखने के निर्देश।* 


' *जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' का तीसरा चरण 15 सितंबर से नए स्वरूप में होगा शुरू, अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर।* 



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में राज्य के सभी जनपदों से अतिवृष्टि, मानसून की स्थिति, चारधाम यात्रा, डेंगू की रोकथाम तथा आपदा प्रबंधन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर लापरवाही, शिथिलता अथवा उदासीनता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि अधिकारी केवल बैठकों तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें तथा प्रत्येक स्थिति पर सतत निगरानी बनाए रखें।



मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून के दौरान प्रत्येक अधिकारी को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड में रहना होगा। किसी भी प्रकार की आपदा अथवा आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों में एक क्षण की भी देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में होने वाली प्रत्येक महत्वपूर्ण घटना की जानकारी तत्काल मुख्यमंत्री कार्यालय एवं राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष को उपलब्ध कराई जाए तथा राहत एवं पुनर्वास कार्यों में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए।



मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों से जिलेवार सड़कों की स्थिति, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, चारधाम यात्रा मार्गों, यात्रियों की संख्या तथा विभिन्न धामों में व्यवस्थाओं की विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा राज्य की आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों से जुड़ी है। इसलिए यात्रा मार्गों पर यात्रियों की सुरक्षा, सुगम आवाजाही, चिकित्सा सुविधाएं, पेयजल, स्वच्छता तथा यातायात प्रबंधन में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए।



समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने अवगत कराया कि इस वर्ष अब तक 44.65 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम यात्रा कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का राज्य में आगमन उत्तराखण्ड के प्रति लोगों की आस्था का प्रमाण है। सरकार की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक श्रद्धालु सुरक्षित, व्यवस्थित और संतोषजनक यात्रा का अनुभव लेकर लौटे।



मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर भूस्खलन अथवा मार्ग अवरुद्ध होने की संभावना अधिक रहती है, वहां पहले से पर्याप्त संख्या में जेसीबी, पोकलैंड मशीनें, आवश्यक उपकरण तथा तकनीकी दल तैनात किए जाएं ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में तत्काल यातायात बहाल किया जा सके। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में जीपीएस एवं आधुनिक संचार प्रणाली का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।



मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जिलों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, विद्युत, पेयजल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सहित सभी विभाग पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करें। किसी भी विभाग द्वारा यह नहीं कहा जाना चाहिए कि सूचना समय पर नहीं मिली या संसाधन उपलब्ध नहीं थे। प्रत्येक विभाग अपनी जिम्मेदारी तय करते हुए समयबद्ध कार्य सुनिश्चित करे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि किसी भी स्थान पर भारी वर्षा अथवा भूस्खलन के कारण बिजली, पेयजल अथवा संचार सेवाएं बाधित होती हैं तो उनकी बहाली सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर की जाए। आमजन को मूलभूत सुविधाओं से लंबे समय तक वंचित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि आवश्यक होने पर अतिरिक्त टीमें भेजी जाएं और वैकल्पिक व्यवस्थाएं तत्काल लागू की जाएं।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों में खाद्यान्न, दवाइयों, ईंधन तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडारण पहले से सुनिश्चित किया जाए ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।



उन्होंने गर्भवती महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों तथा गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों की विशेष निगरानी के निर्देश देते हुए कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को आवश्यकता के अनुसार समय रहते सुरक्षित स्थानों अथवा चिकित्सा सुविधाओं से युक्त स्थानों पर पहुंचाया जाए। जहां आवश्यकता हो वहां हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध कराई जाए। किसी भी परिस्थिति में चिकित्सा सहायता के अभाव में जनहानि नहीं होनी चाहिए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने संवेदनशील क्षेत्रों में आपातकालीन परिस्थितियों के लिए हेली सेवा उपलब्ध रखने का निर्णय लिया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्यों में तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके।


डेंगू की रोकथाम की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों तथा ग्राम पंचायतों को युद्धस्तर पर अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जलभराव वाले सभी स्थानों की तत्काल पहचान कर वहां पानी की निकासी सुनिश्चित की जाए तथा नियमित फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव और विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाए।



मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल सरकारी विभागों के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। डेंगू के विरुद्ध व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाते हुए स्वयंसेवी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, युवा मंडलों, महिला समूहों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इस अभियान से जोड़ा जाए। प्रत्येक नागरिक को यह समझाया जाए कि अपने घरों एवं आसपास पानी जमा न होने दें।


उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि सभी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू जांच किट, पर्याप्त दवाइयां, रक्त की उपलब्धता, बेड तथा चिकित्सा कर्मियों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मरीजों को उपचार में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होनी चाहिए।


मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आपदा प्रबंधन केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देना चाहिए। अधिकारी जनता के बीच जाएं, समस्याओं का समाधान करें और प्रत्येक स्थिति की व्यक्तिगत निगरानी करें। जनता का विश्वास ही सरकार की सबसे बड़ी पूंजी है और उस विश्वास को बनाए रखना प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है।



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में गत वर्ष आई आपदाओं से संबंधित जिन कार्यों को पूरा किया जाना था, उनमें से कोई भी कार्य लंबित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपदा के बाद पुनर्निर्माण एवं सुरक्षात्मक कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी भविष्य में बड़ी समस्या का कारण बन सकती है। सभी जिलाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि पिछले वर्ष स्वीकृत सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण हों तथा उनकी अद्यतन प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से शासन एवं मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।


मुख्यमंत्री ने अल्मोड़ा नगर में संचालित मास्टर प्लान के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से प्रगति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य के सभी जनपदों में 15 अक्टूबर तक पूर्ण होने वाले सभी विकास कार्यों की विस्तृत सूची एवं उनकी वर्तमान प्रगति तत्काल मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। जिन कार्यों में बाधाएं हैं, उन्हें तत्काल चिन्हित कर उनका समाधान किया जाए।


मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राज्य सरकार द्वारा की गई सभी मुख्यमंत्री घोषणाओं की नियमित समीक्षा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक घोषणा समयबद्ध ढंग से धरातल पर दिखाई देनी चाहिए। जनता के बीच की गई घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका लाभ समय पर आम नागरिकों तक पहुंचे। जिन विभागों में कार्यों की गति धीमी है, वे अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाएं और व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करें।


बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्यभर में संचालित "जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार" अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम ने सरकार और जनता के बीच संवाद को और अधिक मजबूत किया है। उन्होंने निर्देश दिए कि इस अभियान का तीसरा चरण आगामी 15 सितंबर से नए स्वरूप और अधिक प्रभावी तरीके से प्रारंभ किया जाएगा। इसके लिए अभी से विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए ताकि अधिक से अधिक लोगों को योजनाओं का लाभ मिल सके।


मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल शिविर लगाना नहीं है, बल्कि सरकार को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। प्रत्येक पात्र व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का लाभ मिले, उसकी समस्याओं का मौके पर समाधान हो तथा प्रमाण पत्र, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, राजस्व संबंधी सेवाएं और अन्य सुविधाएं सरलता से उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि यही सुशासन की वास्तविक पहचान है।


मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिविरों को केवल औपचारिकता न बनाया जाए। प्रत्येक शिविर का परिणाम धरातल पर दिखाई देना चाहिए। आमजन को यह महसूस होना चाहिए कि सरकार स्वयं उनके द्वार तक पहुंची है। उन्होंने कहा कि अधिकारी जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें।


मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जनता के प्रति उत्तरदायी बनना ही सुशासन की पहली शर्त है। प्रत्येक अधिकारी अपने दायित्वों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करे। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता पाई गई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।


बैठक में मुख्यमंत्री ने मानसून के दौरान सभी पुलों का सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन पुलों की स्थिति कमजोर है, वहां तत्काल आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाएं तथा आवश्यकता पड़ने पर यातायात को नियंत्रित किया जाए। किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।


उन्होंने नगर निकायों एवं संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि सभी शहरों, कस्बों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में नालों की विशेष सफाई अभियान चलाया जाए ताकि जलभराव की समस्या उत्पन्न न हो। जहां भी जल निकासी बाधित है, वहां तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान जलभराव से होने वाली समस्याओं को हर हाल में रोका जाए।


मुख्यमंत्री ने दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में वैकल्पिक संचार व्यवस्था विकसित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्थान पर प्राकृतिक आपदा के कारण मोबाइल अथवा अन्य संचार सेवाएं बाधित होती हैं तो तत्काल वैकल्पिक संचार माध्यम उपलब्ध कराए जाएं ताकि राहत एवं बचाव कार्यों में कोई बाधा न आए।


उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में एम्बुलेंस सेवाएं, जीवनरक्षक दवाइयां, चिकित्सकीय उपकरण तथा आपातकालीन संसाधन पूरी तरह तैयार रहें। स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करें।


 *मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं सरकार द्वारा विभिन्न जन सेवाओं के लिए चलाए जा रहे दूरभाष नंबरो पर संपर्क कर व्यवस्थाओं की जांच करते  हैं और आवश्यकता पड़ने पर किसी भी समय समीक्षा करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार प्रत्येक परिस्थिति पर सतत निगरानी बनाए हुए है और आमजन की सुरक्षा एवं सुविधाओं  के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।* 



बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने हरेला पर्व का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से कहा कि "एक पेड़ मां के नाम" अभियान को व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाए। सभी अधिकारी स्वयं पौधारोपण करें तथा समाज को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दें। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक दायित्व है और इसमें प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें बल्कि नियमित रूप से ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें। उन्होंने कहा कि जनता को यह भरोसा होना चाहिए कि प्रशासन हर कठिन परिस्थिति में उनके साथ खड़ा है।


उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि विभागीय समन्वय को और अधिक मजबूत बनाया जाए। किसी भी आपदा अथवा आपात स्थिति में सभी एजेंसियां एक टीम के रूप में कार्य करें ताकि राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाई जा सके और जनधन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आपदा आने के बाद राहत कार्य करना नहीं है, बल्कि आपदा से पूर्व प्रभावी तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया और समयबद्ध पुनर्वास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रत्येक विभाग को हर समय सतर्क रहना होगा। किसी भी चुनौती का सामना केवल बेहतर समन्वय, त्वरित निर्णय और जिम्मेदार कार्यशैली से ही किया जा सकता है।



मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मानसून की स्थिति पर राज्य सरकार लगातार नजर बनाए हुए है। सभी जिलाधिकारी अपने-अपने जनपदों में नियमित रूप से फील्ड भ्रमण करें तथा संवेदनशील क्षेत्रों का स्वयं निरीक्षण करें। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी आपदा अथवा आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए "गोल्डन ऑवर" का विशेष ध्यान रखा जाए और प्रभावित क्षेत्रों तक प्रशासन की पहुंच तत्काल सुनिश्चित हो।



मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि आमजन की समस्याओं का समाधान केवल फाइलों के माध्यम से नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास बनाए रखना प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है और शासन की प्राथमिकता भी। उन्होंने दोहराया कि जनता की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा कोई भी विषय लंबित नहीं रहना चाहिए।




मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक जिले के कार्यों की नियमित समीक्षा करेगी। जिन अधिकारियों द्वारा उत्कृष्ट कार्य किया जाएगा, उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा, वहीं अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनहित के मामलों में किसी भी स्तर पर शिथिलता, उदासीनता अथवा लापरवाही को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा |


मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों, ग्राम प्रधानों, महिला मंगल दलों, युवक मंगल दलों तथा सामाजिक संगठनों के साथ नियमित समन्वय स्थापित करें, ताकि आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि समाज की सहभागिता से ही आपदा प्रबंधन को अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।



मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक तक समय पर सहायता पहुंचाना है। इसके लिए सभी विभागों को उत्तरदायित्व, संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय क्षमता के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन का प्रत्येक अधिकारी स्वयं को जनता के प्रति जवाबदेह समझे और अपने दायित्वों का पूर्ण निष्ठा से निर्वहन करे।



बैठक में कैबिनेट मंत्री श्री मदन कौशिक एवं श्री सतपाल महाराज, आपदा प्रबंधन राज्य सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष श्री विनय कुमार रोहिल्ला, मुख्य सचिव श्री विनोद कुमार सुमन, सचिव श्री विनय शंकर पांडे, जिलाधिकारी देहरादून श्री आशीष चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून, अपर सचिव श्री बंशीधर तिवारी, श्री विनीत कुमार सहित विभिन्न विभागों के सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। वर्चुअल माध्यम से राज्य के सभी जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, आपदा प्रबंधन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, विद्युत, पेयजल, नगर निकायों तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी  मुख्यमंत्री आवास में राज्य के सभी जनपदो से अति वृष्टि, डैंगू से रोकथाम सहित मानसून की स्थिति की जानकारी लेते हुए आपदा प्रबन्धन की समीक्षा कर रहे है | 

बैठक मे आपदा प्रबन्धन राज्य सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष श्री विनय कुमार रोहिल्ला, समन्धित विभागो के सचिव, वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारी, आपदा प्रबन्धन विभाग के अधिकारी उपस्थित हैं |


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी  मुख्यमंत्री आवास में राज्य के सभी जनपदो से अति वृष्टि, डैंगू से रोकथाम सहित मानसून की स्थिति की जानकारी लेते हुए आपदा प्रबन्धन की समीक्षा की है | 




 देहरादून:

देहरादून जनपद में 17 जुलाई को भारी वर्षा के चलते एवं 18 जुलाई को भारी वर्षा होने की संभावना की दृष्टिगत जिलाधिकारी देहरादून द्वारा जनपद देहरादून के समस्त कक्षा 1 से 11 12 तक संचालित स्कूलों में आंगनबाड़ी में घोषित किया गया है।

holiday on 18 july,2026



*देहरादून:

loudspeaker removed from religious places dehradun


*सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के शत-प्रतिशत अनुपालन हेतु एसएसपी देहरादून के निर्देशों पर दून पुलिस ने चलाया अभियान*

*बिना अनुमति एवं निर्धारित मानकों के विपरीत संचालित लाउडस्पीकरों पर की गई कार्रवाई।*

*निर्धारित मानकों से अधिक ध्वनि में बजने वाले लाउडस्पीकर धार्मिक स्थलों से गये हटवाये*

 *भविष्य में नियमों के उल्लंघन पर संबंधित व्यक्तियों/संस्थानो के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की दी चेतावनी*



माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण एवं सार्वजनिक शांति व्यवस्था बनाए रखने के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराने हेतु एसएसपी देहरादून के निर्देशों पर दून पुलिस द्वारा विशेष अभियान चलाया गया।


अभियान के दौरान जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों में पुलिस टीमों द्वारा पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड की टीम के साथ धार्मिक स्थलों पर लगाए गए ध्वनि विस्तारक यंत्रों का निरीक्षण किया गया तथा निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज में संचालित होने वाले  लाउडस्पीकरों को 43 धार्मिक स्थलों से हटवाया गया तथा भविष्य में बिना सक्षम अनुमति एवं निर्धारित ध्वनि मानको का पालन किए बिना लाउडस्पीकर संचालित न करने के निर्देश दिए गए। 


इस दौरान संबंधित व्यक्तियों को ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियमों, माननीय न्यायालय के आदेशों तथा शासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने हेतु जागरूक किया गया। साथ ही स्पष्ट किया गया कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित अधिनियमों एवं नियमों के अंतर्गत विधिक कार्यवाही की जाएगी।

 ऋषिकेश: 

shrimadbhagwat katha, shri  durga mandir, IDPL Rishikesh


आइडीपीएल ऋषिकेश, दुर्गा मंदिर मालवीय नगर ऋषिकेश में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य कलश यात्रा के साथ 14 जुलाई को शुभारंभ हुआ।

आज कथा के दूसरे दिन वृन्दावन से पधारे कथावाचक श्री राम उपाध्याय ने  श्रीमद्भागवत कथा की महिमा का वर्णन करते हुए अमृतमयी श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण के महात्म्य को बताया।

श्रीमद्भागवत कथा सुनना ही सबसे बड़ा सत्कर्म है। इसीलिये नारद जी ने भक्ति ज्ञान वैराग्य के लिये श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया, ज8से सनत कुमार जी ने सुनाया।

श्रीमद्भागवत जी पापियों का भी कल्याण करती है.इस अवसर पर1








देहरादून:



राजधानी देहरादून में ’’छात्रों की गूंज’’ कार्यक्रम के भव्यय आयोजन हेतु कांग्रेस पार्टी द्वारा प्रदेश स्तर पर तैयारियां पूरी की जा रही हैं तथा कार्यक्रम स्थल पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, राष्ट्रीय सचिव एवं प्रदेश सहप्रभारी सुरेन्द्र शर्मा एवं मनोज यादव, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, चुनाव प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष डाॅ0 हरक सिंह सहित सभी वरिष्ठ नेतागणों ने स्वयं मोर्चा संभाला हुआ है।

उपरोक्त जानकारी देते हुए प्रदेश कांग्रेस के  मीडिया चेयरमैंन  राजीव महर्षि ने बताया कि पार्टी के सभी वरिष्ठ नेतागणों की देखरेख में देहरादून के बन्नू ग्राउंड में कार्यक्रम के भव्य आयोजन हेतु तैयारियां लगभग पूरी की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि छात्रों की गूंज कार्यक्रम के प्रति कंाग्रेसजनों में भारी उत्साह देखने को मिला है विषेशकर युवा वर्ग श्री राहुल गांधी जी के विचारों को सुनने के लिए उत्साहित है।

कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण करने पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि दिनांक 17 जुलाई, 2026 को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी देहरादून में छात्र-छात्राओं से खुले मंच पर संवाद करेंगे तथा उसी मंच से युवा नौजवान एवं छात्र हितों की लड़ाई लड़ने का आह्रवान करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा की केन्द्र व राज्य सरकारों की नाकामी का सबसे अधिक खामियाजा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे देश के युवा एवं बेरोजगार नौजवान वर्ग को भुगतना पड़ रहा है। वर्षों पढ़ाई और मेहनत करने के बावजूद उन्हें इसका प्रतिफल नहीं मिल पा रहा है तथा युवा आत्म हत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की इस पीड़ा को राहुल गांधी जी ने समझा है तथा उनकी लड़ाई लड़ने का बीडा उठाया है।

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि भाजपा सरकारों के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल में जो भी प्रतियोगी परीक्षायें हुई हैं उन सभी में युवा नौजवानों के साथ छलावा किया गया है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक के बाद एक प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होते जा रहे हैं तथा नीट परीक्षा के बाद तैयारी में अपने कई साल बरबाद कर चुके छात्र आत्म हत्या कर रहे हैं उससे यह भी साबित हो गया है कि भाजपा सरकार को देश के भविष्य कहे जाने वाले युवा वर्ग के हितों की कोई चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी ने देश के नौजवानों की पीडा को समझा है इसी के तहत उन्होंने देशभर के युवाओं से सीधा संवाद करने के उद्देश्य से ’’छात्रों की गूंज’’ कार्यक्रम करने का निर्णय लिया है तथा कोटा के बाद अब देहरादून में 17 जुलाई को इसका आगाज करने जा रहे हैं।

मीडिया प्रभारी राजीव महर्षि ने कहा कि भाजपा सरकार की अडंगेबाजी के बावजूद पार्टी स्तर पर ’’छात्रों की गूंज’’ कार्यक्रम को भव्य रूप से आयोजित करने हेतु तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। उन्होने कहा कि ’’छात्रों की गूंज’’ कार्यक्रम मे प्रदेश के कोने-कोने से छात्र, युवा एवं कांग्रेस कार्यकर्ता प्रतिभाग करने पहुंचेंगे तथा राज्य की भाजपा सरकार की विदाई की तारीख तय करेंगे।



 


उत्तरकाशी:


पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण ने जनपद के बाड़ागड्डी क्षेत्र के कुरोली, किशनपुर एवं अलेथ गांवों में आयोजित पारम्परिक फूलोई मेले में प्रतिभाग कर क्षेत्र के आराध्य देवताओं की पावन डोलियों के दर्शन एवं देव आशीर्वाद प्राप्त किया। 

इस अवसर पर उन्होंने समस्त क्षेत्रवासियों को फूलोई मेले की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई प्रेषित की।


इससे पूर्व उन्होंने धनारी क्षेत्र के फोल्ड गांव में आयोजित ध्याणी मिलन समारोह तथा सिरोर गांव के पारम्परिक मेले में भी सहभागिता कर ग्रामीणों से आत्मीय भेंट की और उन्हें शुभकामनाएं दीं।


इस दौरान श्री सजवाण ने क्षेत्र के आराध्य भगवान श्री हरि महाराज, भगवान नागराजा देवता, माँ खण्डद्वारी, हूण देवता एवं भगवान श्री छत्र घंडियाल देवता के पावन सानिध्य में आयोजित धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में श्रद्धापूर्वक सहभागिता करते हुए देव आशीर्वाद ग्रहण किया।


पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण ने कहा कि फूलोई मेला उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक संस्कृति, धार्मिक आस्था, प्रकृति के प्रति श्रद्धा और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। ऐसे पारम्परिक मेले हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के साथ-साथ समाज को आपसी भाईचारे और एकता के सूत्र में बांधने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि मेले में ग्रामीणों के साथ आत्मीय संवाद, पारम्परिक रासो नृत्य और लोक संस्कृति की मनमोहक झलक ने पूरे वातावरण को श्रद्धा, उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा से ओत-प्रोत कर दिया।


उन्होंने कहा कि हमारी लोक परम्पराएं और सांस्कृतिक धरोहर ही हमारी वास्तविक पहचान हैं। इनका संरक्षण और संवर्धन हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी गौरवशाली संस्कृति, परम्पराओं और संस्कारों से प्रेरणा प्राप्त करती रहें।


इस दौरान ग्रामीणों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों से विभिन्न जनसरोकारों पर भी चर्चा हुई। क्षेत्रवासियों ने श्री सजवाण के जनहितैषी कार्यों, सहज एवं मृदुभाषी व्यक्तित्व तथा विकासोन्मुख सोच की सराहना करते हुए उनके प्रति अपना विश्वास व्यक्त किया। ग्रामीणों ने क्षेत्र के समग्र विकास और जनभावनाओं के अनुरूप नेतृत्व की आवश्यकता पर बल देते हुए श्री सजवाण के प्रति व्यापक समर्थन और सकारात्मक जनभावना को भी व्यक्त किया।


अंत में श्री सजवाण ने समस्त आराध्य देवताओं से क्षेत्रवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि देवताओं की असीम कृपा पूरे क्षेत्र पर सदैव बनी रहे तथा हमारी सांस्कृतिक परम्पराएं इसी प्रकार पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत बनी रहें।

  देहरादून :


कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले हुई बड़ी दुर्घटना 



राहुल गांधी के कार्यक्रम स्थल पर कांग्रेसी नेता के ऊपर  लोहे का बड़ा पिलर  गिर जाने से अमर सिंह मेहता  गंभीर घायल  हुए।

गंभीर हालत में  उन्हें सीएमआई अस्पताल में उन्हें सीएमआई अस्पताल में भर्ती  किया गया जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित  कर दिया।

CMI हॉस्पिटल के न्यूरो सर्जन डाक्टर महेश कुड़ियाल ने इसकी पुष्टी की।


देहरादून:




उत्तराखंड के पारंपरिक लोकपर्व हरेला के शुभ अवसर पर सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज, देहरादून के अध्यक्ष एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने सीआईएमएस कैंपस, कुंआवाला में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया।


इस अवसर पर एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए इसके सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड, विशेष रूप से कुमाऊँ क्षेत्र में, हरेला सदियों से प्रकृति, हरियाली, समृद्धि एवं खुशहाली का प्रतीक रहा है। यह पर्व हमें प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का स्मरण कराता है।


उन्होंने बताया कि हरेला पर्व से नौ दिन पूर्व पाँच अथवा सात प्रकार के अनाज रिंगाल की टोकरी या पत्तों से बनी टोकरियों में बोए जाते हैं। प्रतिदिन इनकी सिंचाई कर इन्हें सुरक्षित रखा जाता है। दसवें दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद हरेले को काटकर देवताओं को अर्पित किया जाता है तथा परिवार के बड़े-बुजुर्ग इसे सभी सदस्यों के सिर पर रखकर सुख, समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद देते हैं।


एडवोकेट जोशी ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण मानव जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। हरेला केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी आस्था, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का प्रतीक है। यदि प्रत्येक व्यक्ति इस अवसर पर एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो हरियाली बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।


उन्होंने संस्थान के छात्र-छात्राओं से अधिक से अधिक पौधरोपण करने, लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल सुनिश्चित करने तथा पर्यावरण संरक्षण के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने का आह्वान किया। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने भी पर्यावरण संरक्षण एवं पौधरोपण अभियान को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया।


इस अवसर पर सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के मैनेजिंग डायरेक्टर संजय जोशी, पर्यावरण प्रेमी मनमोहन सिंह, लोक गायक गणेश कांडपाल सहित संस्थान के शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

आज का राशिफल

दिनाँक 16 जुलाई,2026

दिन गुरुवार

rashifal today16 july 2026

षाढ़


 मेष

अ, आ, चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो

स्थायी संपत्ति के कार्य बड़ा लाभ दे सकते हैं। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। आय में वृद्धि तथा उन्नति मनोनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। पार्टनरों का सहयोग समय पर प्राप्त होगा। यात्रा की योजना बनेगी। घर-बाहर कुछ तनाव रहेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।


वृषभ


ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो

पार्टी व पिकनिक का कार्यक्रम बनेगा। स्वादिष्ट व्यंजनों का लाभ मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल रहेंगे। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। काम में मन लगेगा। शेयर मार्केट में लाभ रहेगा। नौकरी में सुविधाएं बढ़ सकती हैं। व्यस्तता के चलते स्वास्थ्‍य का ध्यान रखें। धन प्राप्ति सुगमता से होगी।



मिथुन

का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह

दु:खद सूचना मिल सकती है, धैर्य रखें। फालतू खर्च होगा। कुसंगति से बचें। बेकार की बातों पर ध्यान न दें। अपने काम पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। वाणी पर नियंत्रण रखें। चिंता तथा तनाव रहेंगे। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। लाभ होगा।



कर्क

ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो

भूले-बिसरे साथी तथा आगंतुकों के स्वागत तथा सम्मान पर व्यय होगा। आत्मसम्मान बना रहेगा। उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त होगी। बड़ा काम करने का मन बनेगा। परिवार के सदस्यों की उन्नति के समाचार मिलेंगे। प्रसन्नता रहेगी। पारिवारिक सहयोग बना रहेगा। किसी व्यक्ति की बातों में न आएं, लाभ होगा।


सिंह

मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे

घर-बाहर प्रसन्नतादायक वातावरण रहेगा। नौकरी में चैन महसूस होगा। व्यापार से संतुष्टि रहेगी। संतान की चिंता रहेगी। प्रतिद्वंद्वी तथा शत्रु हानि पहुंचा सकते हैं। मित्रों का सहयोग व मार्गदर्शन प्राप्त होगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। यात्रा की योजना बनेगी। प्रसन्नता रहेगी।


कन्या

ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

यात्रा मनोनुकूल मनोरंजक तथा लाभप्रद रहेगी। भेंट व उपहार की प्राप्ति संभव है। व्यापार-व्यवसाय से मनोनुकूल लाभ होगा। घर-बाहर सफलता प्राप्त होगी। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। काम में लगन तथा उत्साह बने रहेंगे। मित्रों के साथ प्रसन्नतापूर्वक समय बीतेगा।

तुला

रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते

स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। बनते कामों में विघ्न आएंगे। चिंता तथा तनाव रहेंगे। जीवनसाथी से सामंजस्य बैठाएं। फालतू खर्च होगा। कुसंगति से बचें। बेवजह लोगों से मनमुटाव हो सकता है। बेकार की बातों पर ध्यान न दें। आय में निश्चितता रहेगी। मित्रों का सहयोग मिलेगा। जल्दबाजी न करें।


वृश्चिक

तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। यात्रा मनोरंजक रहेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। नौकरी में सुकून रहेगा। जल्दबाजी में कोई आवश्यक वस्तु गुम हो सकती है। कानूनी अड़चन आ सकती है। विवाद न करें। व्यवसाय ठीक चलेगा। घर-बाहर प्रसन्नता बनी रहेगी।


धनु

ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे

नई योजना लागू करने का श्रेष्ठ समय है। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। सामाजिक कार्य सफल रहेंगे। मान-सम्मान मिलेगा। कार्यसिद्धि होगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। घर-बाहर प्रसन्नता का माहौल रहेगा। पारिवारिक सहयोग प्राप्त होगा। बड़ा कार्य करने का मन बनेगा। सफलता के साधन जुटेंगे। जोखिम न उठाएं।


मकर

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

किसी जानकार प्रबुद्ध व्यक्ति का सहयोग प्राप्त होने के योग हैं। तंत्र-मंत्र में रुचि रहेगी। किसी राजनयिक का सहयोग मिल सकता है। लाभ के दरवाजे खुलेंगे। चोट व दुर्घटना से बचें। व्यस्तता रहेगी। थकान व कमजोरी महसूस होगी। विवाद से बचें। धन प्राप्ति होगी। प्रमाद न करें।

कुंभ

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा

स्वास्थ्य का ध्यान रखें। चोट व दुर्घटना से बचें। आय में कमी रह सकती है। घर-बाहर असहयोग व अशांति का वातावरण रहेगा। अपनी बात लोगों को समझा नहीं पाएंगे। ऐश्वर्य के साधनों पर बड़ा खर्च होगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। हितैषी सहयोग करेंगे। धनार्जन संभव है।


मीन

दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची

प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। किसी वरिष्ठ व्यक्ति के सहयोग से कार्य की बाधा दूर होकर लाभ की स्थिति बनेगी। परिवार के लोग अनुकूल व्यवहार करेंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। नए लोगों से संपर्क होगा। आय में वृद्धि तथा आरोग्य रहेगा। चिंता में कमी होगी। जल्दबाजी न करें।



  कांवड़ मेला 2026 के सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित आयोजन हेतु डीजीपी ने की उच्चस्तरीय समीक्षा- सुरक्षा, यातायात, तकनीकी निगरानी एवं अंतरराज्यीय समन्वय को लेकर दिए विस्तृत दिशा-निर्देश* 


*अभेद्य सुरक्षा चक्र में रहेगा कांवड़ मेला, ATS, BDS, STF और SDRF रहेंगी 24x7 मुस्तैद, ड्रोन व CCTV से होगी राउंड-द-क्लॉक मॉनिटरिंग, साइबर कमांडो सोशल मीडिया एवं साइबर स्पेस पर रखेंगे पैनी नजर*

 *उत्तराखंड पुलिस कांवड़ मेले के सफल संचालन हेतु पूरी तरह सतर्क और प्रतिबद्ध: डीजीपी दीपम सेठ

kanwad  mela  2026 meeting  , DGP


आगामी *श्रावण कांवड़ मेला-2026* के सुरक्षित, शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित आयोजन के दृष्टिगत आज *पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड श्री दीपम सेठ* की अध्यक्षता में पुलिस मुख्यालय स्थित सभागार में एक *उच्चस्तरीय बैठक* आयोजित की गई। बैठक में पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कांवड़ यात्रा से संबंधित जनपदों (देहरादून, हरिद्वार, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, उत्तरकाशी एवं रुद्रप्रयाग), जीआरपी के पुलिस अधीक्षकों, सेनानायक एसडीआरएफ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रतिभाग किया।


बैठक में कांवड़ मेले की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए पुलिस महानिदेशक ने कहा कि कांवड़ मेला एक विशाल और अति-संवेदनशील धार्मिक आयोजन है। *कांवड़ियों की सुरक्षा, सुगम आवागमन, प्रभावी यातायात प्रबंधन एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखना उत्तराखण्ड पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है।* उन्होंने सभी अधिकारियों को समय रहते समुचित तैयारियां पूर्ण करने तथा सम्बन्धित राज्यों व विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करने हेतु निर्देशित किया।


 *पुलिस महानिदेशक महोदय  द्वारा गोष्ठी में निम्न दिशा-निर्देश दिए गए :*

▪️ कांवड़ यात्रा मार्गों पर स्थित संवेदनशील एवं अत्यधिक भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों का आकलन कर वहां पर्याप्त संख्या में पुलिस बल, रिजर्व फोर्स एवं महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। *कांवड़ियों की सुरक्षा के दृष्टिगत एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS), बम निरोधक दस्ता (BDS), एसटीएफ तथा अभिसूचना इकाइयों* की टीमों को प्रमुख स्थलों पर सक्रिय रखा जाए तथा संदिग्ध व्यक्तियों एवं गतिविधियों पर सतत निगरानी रखी जाए। *रैपिड रिस्पॉन्स टीम* को हर समय सक्रिय रखा जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्यवाही की जा सके। इसके साथ ही सभी प्रमुख *स्नान घाटों पर गोताखोरों तथा SDRF* की टीमें तैनात रहें, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य संचालित किया जा सके।


▪️ कांवड़ यात्रा मार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग, वैकल्पिक मार्गों, पार्किंग स्थलों, होल्डिंग एरिया एवं डायवर्जन का *विस्तृत ट्रैफिक प्लान* तैयार किया जाए। इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार *उत्तराखण्ड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली एवं अन्य सीमावर्ती राज्यों में फ्लैक्स, होर्डिंग, डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं सोशल मीडिया के माध्यम से* किया जाए, ताकि श्रद्धालु पूर्व से ही निर्धारित यातायात व्यवस्था से अवगत हो सकें। साथ ही, किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए कंटिजेंसी प्लान भी पूर्व से तैयार रखा जाए। यात्रा के दौरान भारी वाहनों के समयबद्ध डायवर्जन, अस्थायी पुलिस चौकियों की स्थापना, मोबाइल पेट्रोलिंग तथा पैदल एवं डाक कांवड़ियों के लिए निर्धारित मार्ग से आवागमन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही स्थानीय नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक यातायात व्यवस्थाओं का प्रभावी संचालन किया जाए।


▪️ सम्पूर्ण कांवड़ यात्रा मार्ग के साथ ही रेलवे परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले *कांवड़ मेला क्षेत्र को सुपर जोन, जोन एवं सेक्टरों* में विभाजित कर सुव्यवस्थित ढंग से पुलिस बल का व्यवस्थापन किया जाए, ताकि रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म, फुटओवर ब्रिज, प्रतीक्षालय एवं ट्रेनों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण एवं निर्बाध आवागमन सुनिश्चित किया जा सके।


▪️ सुरक्षा की दृष्टि से सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों, घाटों, कांवड़ मार्गों एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में *सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन के माध्यम से 24x7 निगरानी* सुनिश्चित की जाए। पार्किंग स्थलों, होल्डिंग एरिया एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों का *फायर सेफ्टी ऑडिट* पूर्व में ही पूर्ण करा लिया जाए तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने हेतु पर्याप्त अग्निशमन संसाधन उपलब्ध रखे जाएं।


▪️ कांवड़ यात्रा के दौरान *सुरक्षा मानकों का कड़ाई से अनुपालन* सुनिश्चित कराया जाए। निर्धारित मानकों के अनुरूप कांवड़ के आकार का पालन करने, रेल की छतों पर यात्रा ना करने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाये। साथ ही ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए डीजे व लाउडस्पीकरों का उपयोग माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित मानक डेसीबल सीमा के अनुरूप हो। इसके लिए राज्य की सीमाओं एवं कांवड़ यात्रा मार्गों पर नियमित चेकिंग की जाए।


▪️ सोशल मीडिया सेल के माध्यम से कांवड़ यात्रा से संबंधित यातायात, डायवर्जन, मौसम, सुरक्षा एवं अन्य आवश्यक सूचनाएं नियमित रूप से साझा की जाएं तथा व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने हेतु उन्हें सीमावर्ती राज्यों की पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल को टैग करते हुए प्रसारित किया जाए। साथ ही *सोशल मीडिया पर सतत निगरानी* रखते हुए किसी भी भ्रामक अफवाह या आपत्तिजनक सामग्री का तत्काल खंडन कर वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। *साइबर कमाण्डोज की विशेष टीम हरिद्वार में कैम्प कर सोशल मीडिया एवं साइबर स्पेस पर 24×7 निगरानी रखेगी तथा किसी भी साइबर या सोशल मीडिया संबंधी चुनौती पर त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करेगी।*


▪️ अंतरराज्यीय समन्वय एवं आपात तैयारी के तहत *सीमावर्ती राज्यों एवं जनपदों के पुलिस अधिकारियों के साथ नियमित समन्वय बैठकें* आयोजित की जाएं तथा इंटेलिजेंस इनपुट्स का त्वरित आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जाए।


▪️ कांवड़ मेले के दौरान *ड्यूटीरत पुलिस कर्मियों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान* दिया जाए। उनकी तैनाती स्थलों के निकट ही आवास, भोजन, पेयजल, विश्राम एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि उनका मनोबल और कार्यक्षमता बनी रहे।


▪️ श्रद्धालुओं के साथ सम्मानजनक एवं संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित किया जाए तथा असामाजिक, शरारती एवं साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले तत्वों पर विशेष निगरानी रखी जाए। *कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वालों के विरुद्ध तत्काल एवं कठोर वैधानिक कार्यवाही* सुनिश्चित की जाए।

 

*डीजीपी महोदय ने कहा कि उत्तराखंड पुलिस पूर्ण समर्पण, सतर्कता एवं सेवा भावना से कार्य कर रही है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कांवड़ मेला 2026 शांति, सुरक्षा और समन्वय के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हो।*


*बैठक में अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था- श्री वी. मुरूगेशन, अपर पुलिस महानिदेशक, प्रशासन- श्री ए. पी. अंशुमान, पुलिस महानिरीक्षक, दूरसंचार/फायर सर्विस- श्रीमती विम्मी सचदेवा, पुलिस महानिरीक्षक/निदेशक यातायात- श्री कृष्ण कुमार वी.के, पुलिस महानिरीक्षक, एसटीएफ- श्री नीलेश आनन्द भरणे, पुलिस महानिरीक्षक, कार्मिक- श्री सुनील कुमार मीणा, पुलिस महानिरीक्षक, एसडीआरएफ/कुम्भ मेला- श्री योगेन्द्र सिंह रावत, पुलिस महानिरीक्षक, मुख्यालय/पी एंड एम- श्री बरिन्दरजीत सिंह, पुलिस उप महानिरीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था- श्री धीरेन्द्र गुंज्याल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ- श्री अजय सिंह, पुलिस अधीक्षक, अभिसूचना- श्री मणीकान्त मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारीगण उपस्थित रहे।*


 फलदार पौधों का किया निःशुल्क वितरण*


*प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधारोपण और संरक्षण की अपील, हरेला पर्व की दी शुभकामनाएं*



देहरादून,


 प्रदेश के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने उत्तराखण्ड की समृद्ध पर्यावरणीय एवं सांस्कृतिक परंपरा के प्रतीक हरेला पर्व की पूर्व संध्या पर अपने कैंप कार्यालय में उद्यान विभाग द्वारा आयोजित निःशुल्क फलदार पौधा वितरण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों एवं आम नागरिकों ने भाग लिया। इस दौरान आम, लीची, अमरूद, नींबू, अनार, कटहल सहित विभिन्न फलदार, सगंध एवं औषधीय प्रजातियों के पौधों का निःशुल्क वितरण किया गया।


इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरेला उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराता है। केवल पौधारोपण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों का संरक्षण और संवर्धन भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।


कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि पिछले वर्ष हरेला पर्व के अवसर पर उद्यान विभाग द्वारा 9 लाख से अधिक फलदार पौधों का रोपण किया गया था। इस वर्ष इस अभियान का विस्तार करते हुए 10 लाख फलदार पौधों, 50 हजार चाय के पौधों तथा 50 हजार रेशम विभाग के पौधों सहित कुल 11 लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस राज्यव्यापी अभियान का शुभारंभ आज देहरादून जनपद से किया गया। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि फलदार पौधों को प्राथमिकता देने का उद्देश्य यह है कि लोग फलों के प्रति स्वाभाविक लगाव के कारण इन पौधों की नियमित देखभाल करते हैं, जिससे पौधों के जीवित रहने की संभावना भी बढ़ती है और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों को भविष्य में आर्थिक एवं पोषण संबंधी लाभ भी प्राप्त होगा। कृषि मंत्री ने प्रदेशवासियों से हरेला पर्व पर अधिक से अधिक पौधे लगाने, उनका संरक्षण करने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित और स्वच्छ उत्तराखण्ड के निर्माण में सहभागी बनने का आह्वान किया।


इस अवसर पर कैंट विधायक सविता कपूर, सरकार में दायित्वधारी ज्योति कोटिया,  निदेशक उद्यान डॉ आरके सिंह, निदेशक कृषि दिनेश कुमार, मंडल अध्यक्ष प्रदीप रावत, मंडल अध्यक्ष राजीव गुरुंग सहित अन्य अधिकारीगण एवं कृषकगण उपस्थित रहे।


*एमडीडीए का बड़ा शिकंजा, 30 बीघा अवैध प्लॉटिंग ध्वस्त, कई निर्माणों पर सीलिंग*




देवभूमि उत्तराखंड से निकली *सोमनाथ स्वाभिमान पर्व* यात्रा 

आज दिनांक 15 जुलाई 2026 को 6:30 बजे गुजरात के वेरावल (सोमनाथ) स्टेशन पर पहुंची, जहां गुजरात सरकार के युवा एवं संस्कृति विभाग द्वारा शानदार गरबा नृत्य, एवं पुष्प वर्षा के साथ तीर्थयात्रियों का भव्य स्वागत किया गया।

somnath swabhiman parv yatra


उत्तराखंड से *सोमनाथ स्वाभिमान पर्व* यात्रा के तीर्थ यात्रियों ने आज राम मंदिर और गीता मंदिर का भ्रमण किया। उत्तराखंड से आए सभी श्रद्धालु राम मंदिर और गीता मंदिर (श्री गोलोकधाम तीर्थ) के दर्शन-पूजन कर अभीभूत महसूस कर रहे थे। मंदिर दर्शन के बाद सभी तीर्थ यात्रियों ने समुद्र तट के विहंगम दृश्य को देखा। जिनमें से कई श्रद्धालु पहली बार समुद्र का विस्तार देखकर अचंभित रहे। सायं काल में श्रद्धालुओं ने श्री सोमनाथ जी का दर्शन-पूजन किया तथा सोमनाथ जी की भव्य आरती में भाग लिया।

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