रूद्रप्रयाग :
भूपेंद्र भण्डारी
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के एक चरण का मतदान हो चुका है और दूसरे चरण के लिए प्रत्याषियों ने कमर कसी हुई है लेकिन लोकतंत्र के सबसे छोटे इस फार्मेट में राजनीति का जो गंदलाता घालमेल दिखाई दे रहा वह न केवल सामाजिक ताने बाने को बिगाड़ रहा है बल्कि स्वच्छ लोकतंत्र के लिए भी शुभ संकेत नहीं है।
इस रिपोर्ट को देखिए और तय करें कि आपने किसके हाथों में सत्ता सौंपनी है-
- भले ही कहने के लिए लोकतंत्र में जनता का राज चलता हो, लेकिन इन दिनों त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में प्रत्याशियों ने जिस तरह का माहौल गाँव की गलियों में बना रखा है उससे एक स्वच्छ लोकतंत्र की कल्पना करना बेहद मुश्किल है। मतदाताओं को लुभाने और वोट की खरीद फरोख्त के लिए जमकर शराब और धन बल का प्रयोग किया जा रहा है, हर गांव चैराहों पर इन दिनों शराब की महफिले सजी है, विकास के मुद्दों की बजाय वोटरों को धन और शराब के जाम में डूबोने की गणित चल रही है। जिन युवाओं और ग्रामीणों ने विकास की बात करने थी उनकी नशों में शराब का नशा दौड़ रहा है ऐसे में विकास के सवाल गौण नजर आ रहे हैं। हालांकि बहुत लोग हैं जो इस पूरे माहौल को लोकतंत्र के लिए घातक बता रहे हैं।
- ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत जैसे लोकतंत्र के सबसे छोटे फार्मेट में जो गांव गलियों में इन दिनों दूषित वातावरण चल रहा है वह न केवल लोकतंत्र की मर्यादा और आदर्शो को कलंकित कर रहा है बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर रहा है कि आखिर चुनाव जीतने के लिए लाखों रूपये खर्च करने वाला प्रत्याशी चुनाव जीतने के बाद कैसे गांव और क्षेत्र का विकास करेंगें? स्वभाविक है कि वह भ्रष्टाचार करने के लिए ही राजनीति में आ रहे हैं। ऐसे में जनता को तय करना है कि स्वच्छ और ईमानदार राजनीति के लिए सत्ता की बागडोर किन हाथों में देनी है।
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