ऋषिकेश :
उत्तम सिंह
आखिर क्या हो गया है, पर्यावरण की सुध लेनेवाले और गंगा की रक्षा करनेवाले बुद्धिजीवियों को? 2 माह होने जो आये , तीर्थनगरी ऋषिकेश में स्वच्छ्ता और गंगा की पवित्रता को बनाये रखने के क्लिय कुछ समाजसेवी ट्रेन्चिंग ग्राउंड को कहीं और ले जाने के लिये ,शासन प्रशासन के सामने धरने पर बैठे रहे। परन्तु कोई सहायक नही बना।
तीर्थनगरी ऋषिकेश शहर से टचिंग ग्राउंड को अन्यत्र शिफ्ट करने की मांग को लेकर जागृति प्रयास संस्था के बनैर तले 58 दिनो से आन्दोलन पर बैठे रहे ।
जब प्रशासन ,मेयर ,विधायक ने सुध लेने को तैयार नहीं तो क्षुब्ध होकर जागृति प्रयास संस्था के सदस्य गंगा में कूद पडे । उन्होंने पूर्व मे जल समाधि के चेतावनी दे दी थी । लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी पर संस्था का सदस्य दुःखी होकर ये कदम उठाने को मजबूर हुए।
शहर के बीचो - बीच बने कूडे के ढेर को अन्यत्र शिफ्ट करने की माँग को लेकर चल रहा धरने पर बैठे इन लोगों पर पुलिस ने आत्महत्या का मुकदमा दर्ज किया है ।जहां लोकतंत्र मे जनता के पास एकमात्र साधन होता है आन्दोलन वही अब जनता की आवाज को कुचलने के लिये कानून का सहारा लिया गया है । आन्दोलनकारियो को डराने के लिये कानून का सहारा लिया । वहीं जागृति प्रयास संस्था के अध्यक्ष अरविंद हटवाल का कहना है कि इस मुद्दे पर अब आर पार लडाई लडी जायेगी ।
उत्तम सिंह
आखिर क्या हो गया है, पर्यावरण की सुध लेनेवाले और गंगा की रक्षा करनेवाले बुद्धिजीवियों को? 2 माह होने जो आये , तीर्थनगरी ऋषिकेश में स्वच्छ्ता और गंगा की पवित्रता को बनाये रखने के क्लिय कुछ समाजसेवी ट्रेन्चिंग ग्राउंड को कहीं और ले जाने के लिये ,शासन प्रशासन के सामने धरने पर बैठे रहे। परन्तु कोई सहायक नही बना।
तीर्थनगरी ऋषिकेश शहर से टचिंग ग्राउंड को अन्यत्र शिफ्ट करने की मांग को लेकर जागृति प्रयास संस्था के बनैर तले 58 दिनो से आन्दोलन पर बैठे रहे ।
जब प्रशासन ,मेयर ,विधायक ने सुध लेने को तैयार नहीं तो क्षुब्ध होकर जागृति प्रयास संस्था के सदस्य गंगा में कूद पडे । उन्होंने पूर्व मे जल समाधि के चेतावनी दे दी थी । लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी पर संस्था का सदस्य दुःखी होकर ये कदम उठाने को मजबूर हुए।
शहर के बीचो - बीच बने कूडे के ढेर को अन्यत्र शिफ्ट करने की माँग को लेकर चल रहा धरने पर बैठे इन लोगों पर पुलिस ने आत्महत्या का मुकदमा दर्ज किया है ।जहां लोकतंत्र मे जनता के पास एकमात्र साधन होता है आन्दोलन वही अब जनता की आवाज को कुचलने के लिये कानून का सहारा लिया गया है । आन्दोलनकारियो को डराने के लिये कानून का सहारा लिया । वहीं जागृति प्रयास संस्था के अध्यक्ष अरविंद हटवाल का कहना है कि इस मुद्दे पर अब आर पार लडाई लडी जायेगी ।
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