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हरिद्वार :

अंजनी बिट के  श्यामपुर  वन दरोगा दुबे ओर  वनरक्षक अशोक ने रात्रि गश्त के दौरान पाया कि कुछ लोग चंडीदेवी पुल की नीचे सिंचाई विभाग के अंतर्गत पड़नेवाले क्षेत्र में  खैर के पेड़ों को निशाना बनाकर आरी  चला रहे है. यह स्थान गंगा से कुछ ही दूरी पर स्थित है। 
शोर मचाने पर , अज्ञात लोग भाग खड़े हुए ।  वन विभाग द्वारा सिचाई विभाग को यह सूचना दे दी गई परन्तु सिंचाई विभाग ने अब तक वहां से कटे हुए 22 खैर के पेड वहां से उठाये है और न ही पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई ।

 इस उदासीन रवैये से सिंचाई विभाग पर प्रशन चिन्ह लगता है ?असल में नमामि गंगे परियोजना को योजना को ठेंगा दिखाते हुए  विभाग कार्यवाही करने से परहेज कर रहा है.

जबकि  सिंचाई विभाग के इंजीनियर के अनुसार  त्योहारों के चलते अभी तक ट्रेक्टर नहीं मिल पाया , इसलिए लकड़ी नहीं उठाई गयी.  साथ ही उनका यह भी कहना  है कि  ६ दिन से उन्हें  कोई ट्रेक्टर नहीं मिल पाया , इसलिए ऐसा नहीं हो पाया।  यहाँ तक कि  रिपोर्ट दर्ज़ होने या न होने के विषय में कोई सटीक उत्तर वह नहीं दे सके. 
ऐसा लग रहा हैं कि ये  22 पेड सांठ गांठ से काटे गए  है । अतः  सिंचाई  विभाग  मौन है.
ये एक विडंबना ही है,कि  हरिद्वार में चंडी घाट  के पुल के नीचे २५ वर्ष पूर्व तक खैर की लकड़ियों का घना जंगल हुआ करता था. जिसका संरक्षण करने में तमाम सरकारें, नेतागण, और विभाग असफल रहे है.  तब से ही यह क्षेत्र वन तस्करों के हाथों  में झूल रहा है. जब चाहे जितनी लकड़ी ले जाएँ।  ये करते करते आज यह आलम आ गया है कि उक्त क्षेत्र में गिने चुने पेड रह गए है. उन्हें भी ठिकाने लगाया जा रहा है.
हमने हरिद्वार की आबोहवा में जहर ऐसे ही घोला है, जहाँ घने जंगल और पारिस्थितिक तंत्र से जुड़े पुराने वृक्ष थे, वे भी काट दिए. नए वृक्षारोपण मात्र दिखावा बनकर रह गया है.

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