Halloween party ideas 2015

उत्तरकाशी;
दिलीप कुमार


 गंगा अपने मायके से मैली  है,  आपने सही सुना।  अपने मायके से मैली होती हुई नजर दिखाई दे रही है गंगा।
 उत्तरकाशी जिले की  बात कर रहे है, जहाँ बाल्मीकि बस्ती से गंदा पानी और मल- मूत्र सीधे गंगा के घाटों तक पहुँच रहा है।
 वही दूसरी ओर केदारघाट में मनुष्य के शवों को जलाया जाता है वहाँ पर दारू की बोतल, कटे बाल,पुल के नीचे पड़े कूड़े-कचरे कि ढेर,अध जली लकड़िया,टूटा हुआ कांच,बिखरी पड़ी हुई बाल काटने की ब्लेड ,कपड़े आदि गंगा नदी में समाहित  हो रहे है।
  आपको बता दे उत्तरकाशी से गोमुख की दूरी 105 किलोमीटर के तकरीबन होगी। जहां से गंगा नदी निकलती है। ऐसे मैं आप सोच सकते है कि कब गंगा आपने मायके से साफ-सुथरी नही है। तो आगे क्या स्थिति होगी माँ गंगा की।
   सवाल नमामि गंगे पर खड़े हो रहे है कि आखिर गंगा कितनी साफ हुई और कहाँ तक साफ हुई?
आखिरकार करोड़ो के बजट से कितनी साफ हो पाई गंगा एक बार फिर सवालो के घेरो में गंगा?

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