रुद्रप्रयाग;
भूपेंद्र भण्डारी
रूद्रप्रयाग के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाऐं रेशम उत्पादन के जरीए स्वरोजगार कर अपनी आर्थिकी मजबूत कर रही हैं, रूद्रप्रयाग के अगस्तमुनि जखोली और उखीमठ विकासखण्ड़ में ग्रामीण महिलाऐं स्वय् सेवी संस्थाओं के साथ मिलकर रेशम कीट को पाल कर उत्पादन ही नही कर रही हैं बल्कि रेशम के धागे बनाने से लेकर रेशम के कपड़े बना उन्हें स्वयं बाजार में विक्रय भी कर ही हैं, ।
रूद्रप्रयाग के अगस्तमुनि के बडमा, डांगी, सिलघाटा गांव, तिलवाड़ा, मयाली, मस्तुरा, मनसुना, कालीमठ समेत करीब 35 गावों की महिलाए रेशम उत्पादन से जुड़ी हुई है, महिलाएं अपने घरेलू कार्य करने के साथ ही रेशम उत्पादन कर 4 से 5 हजार की कमाई प्रतिमाह कर रही हैं, रेशम उत्पादन से जुड़ी महिलाओं वंदना और का कहना है कि रेशम का धागे की कीमत 450 रूपये है एक महिला 1 महिने में करीब 5 किलो रेशम के धागे का उत्पादन कर लेती है, इसके बार उसकी बुनाई से भी अच्छी आय हो जाती है।
भूपेंद्र भण्डारी
रूद्रप्रयाग के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाऐं रेशम उत्पादन के जरीए स्वरोजगार कर अपनी आर्थिकी मजबूत कर रही हैं, रूद्रप्रयाग के अगस्तमुनि जखोली और उखीमठ विकासखण्ड़ में ग्रामीण महिलाऐं स्वय् सेवी संस्थाओं के साथ मिलकर रेशम कीट को पाल कर उत्पादन ही नही कर रही हैं बल्कि रेशम के धागे बनाने से लेकर रेशम के कपड़े बना उन्हें स्वयं बाजार में विक्रय भी कर ही हैं, ।
रूद्रप्रयाग के अगस्तमुनि के बडमा, डांगी, सिलघाटा गांव, तिलवाड़ा, मयाली, मस्तुरा, मनसुना, कालीमठ समेत करीब 35 गावों की महिलाए रेशम उत्पादन से जुड़ी हुई है, महिलाएं अपने घरेलू कार्य करने के साथ ही रेशम उत्पादन कर 4 से 5 हजार की कमाई प्रतिमाह कर रही हैं, रेशम उत्पादन से जुड़ी महिलाओं वंदना और का कहना है कि रेशम का धागे की कीमत 450 रूपये है एक महिला 1 महिने में करीब 5 किलो रेशम के धागे का उत्पादन कर लेती है, इसके बार उसकी बुनाई से भी अच्छी आय हो जाती है।
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