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देहरादून:

टीबी एक्टिव केस पैन्डिंग (उन्मूलन) की समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सम्बन्धित प्रभारी अधिकारी ने अवगत कराया है कि 10 दिसम्बर से विकासखण्ड सहसपुर, विकासनगर एवं कालसी में घर-घर जाकर लोगों को स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा टीवी उन्मूलन हेतु जागरूक किया जायेगा और लोगों के स्वास्थ्य की जांच की जायेगी। जांच में टीबी की रिपोर्ट सामने आने पर उसका निःशुल्क ईलाज किया जाएगा तथा उन्होंने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों में वर्तमान समय में टीबी का सम्पूर्ण इलाज निःशुल्क किया जाता है। जिलाधिकारी ने सीएमओ को निर्देश दिये कि सभी सरककारी एवं गैर सरकारी अस्पताओं को टीबी के केस की रिपोर्टिंग को प्राथमिकता दें और सामने आये टीबी के मरीजों का प्राथमिकता से इलाज करें।
जिलाधिकारी कैम्प कार्यालय में जिलाधिकारी एस ए मुरूगेशन की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग के सौजन्य से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं से सम्बन्धित जिला क्वालिटी इन्श्योरेंश कमेटी, अन्र्तविभागीय समन्वय समिति (जन्म - मृत्यु ), आरएनटीसीपी एक्टिव केश फाइन्डिंग, जिला स्वास्थ्य और परिवार कल्याण समिति की अनुमोदित आरओपी एवं मातृ मृत्यु एवं शिशु मृत्यु की समीक्षा बैठक आयोजित की गयी।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न शाखाओं के प्रभारियों द्वारा उनके नियंत्रण में चलाई जा रही योजनाओं/कार्यक्रमों का ओवरहेड प्रोजैक्टर के माध्यम से विस्तृत प्रजेंन्टेशन दिया गया। 
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अवगत कराया कि स्वच्छ भारत अभियान के अन्तर्गत जनपद में कायाकल्प कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसके अन्तर्गत जो सरकारी अस्पताल स्वच्छता के मानक में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हंै और विभिन्न मामलों में 70 प्रतिशत् से अधिक की स्कोरिंग करता है, ऐसे सरकारी अस्पतालों को योजना के तहत जनपद स्तरीय, सीएचसी और पीएचसी स्तर पर अलग-अलग प्रोत्साहन धनराशि प्रदान की जाती है। ज8नपद में योजना के तहत 3 एसडीएच, 03 सीएचसी और 10 पीएचसी अस्पताल क्वालिफाई हो चुके हैं, जिसमें प0 दीन दयाल उपाध्याय कोरनेशन अस्पताल विगत दो वर्षों से पुरस्कृत होता आ रहा है। उन्होंने अवगत कराया कि प्रोत्साहन स्वरूप मिलने वाली धनराशि से चिकित्सालयों में इलाज की सुविधाओं को प्रमोट किया जाता है। 
संयुक्त निदेशक जनगणना जे टी वर्गीज ने अवगत कराया कि जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्रों की खराब रिर्पोटिंग के चलते डूप्लीकेसी बढ रही है और सही आंकड़े प्राप्त नही हो पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ई-डिस्ट्रिक एवं भारत सरकार के साफ्टवेयर में जन्म-मृत्यु के दोनों में आंकड़े आपस में कम्पाइल नही हो रहे हैं और ग्राम पंचायत स्तर पर जो रिपोर्ट प्राप्त हो रही है वो साफ्टवेयर में न आकर मैनुअली आ रही है। 
जिलाधिकारी ने कायाकल्प योजना के तहत् प्राप्त होने वाली धनराशि को समय पर और सही कार्यों में पारदर्शिता के साथ व्यय करने के निर्देश दिये, साथ ही सभी अस्पतालों को अपने प्रदर्शन में और स्वच्छता सर्वेक्षण में सुधार करने के भी निर्देश दिये।  उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र, नगरीय क्षेत्र तथा सरकारी और सभी प्राईवेट स्वास्थ्य इकाईयों को जन्म-मृत्यु पंजीकरण को अनिवार्य रूप से करते हुए उसकी उचित साफ्टवेयर और प्रोपर चैनल के माध्यम से सही और समय से रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिये साथ ही अनिवार्य रूप से जिला निर्वाचन कार्यालय को भी इसकी सूचना तत्काल प्रदान करने के निर्देश दिये ताकि निर्वाचन की प्रक्रिया में यथानुसार तत्काल संशोधन किया जा सके।
 उन्होंने सभी सरकारी एवं गैर सरकारी अस्पतालों में शिशु एवं गर्भवती महिला के उपचार के दौरान मृत्यु होने पर भी अनिवार्य रूप से उचित माध्यम से रिपोर्टिंग करने के निर्देश दिये। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग तथा आईसीडीएस को निर्देश दिये कि क्षेत्रों में अपने अधीनस्थ कार्मिकों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती महिलाओं की कांउसिलिंग करने, मेडिकल उपचार का लाभ देने और विभिन्न योजनाओं के सम्बन्ध में जागरूक करने के साथ ही जन्म मृत्यु का अनिवार्य पंजीकरण करवाने को प्रेरित करने के निर्देश दिये। 
जिलाधिकारी ने जिला पंचायतीराज अधिकारी को निर्देश दिये कि जन्म-मृत्यु पंजीकरण से सम्बन्धित सही रिपोर्टिंग प्रदान करें, साथ ही मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिये कि सीएचसी, पीएचसी स्तर पर भी जन्म-मृत्यु के लिए लागइन आईडी एवं पासवर्ड सुविधा प्रदान करें और दो सप्ताह के भीतर जन्म-मृत्यु पंजीकरण और विभिन्न विभागों के स्तर से सही रिर्पोटिंग सुनिश्चित करने हेतु एक समन्वय बैठक आयोजित करने के निर्देश दिये, जिसमें मुख्य विकास अधिकारी, पंचायतराज, ग्राम्य विकास, स्वास्थ्य, आईसीडीएस, ई-डिस्ट्रिक्ट, जनगणना, निर्वाचन  आदि विभागों के अधिकारी सहित खण्ड विकास अधिकारियों को अनिवार्य रूप से बैठक में आमंत्रित किया जाए। 
इस अवसर पर नगर मजिस्टेªट मनुज गोयल, यातायात पुलिस अधीक्षक लाकेश्वर सिंह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व बीर ंिसंह बुदियाल, अपर जिलाधिकारी प्रशासन अरविन्द पाण्डेय, मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ एस.के गुप्ता, उप जिलाधिकारी मसूरी मीनाक्षी पटवाल, सी.ओ फायर पुलिस एस के राणा, डीपीओ क्षमा बहुगुणा सहित स्वास्थ्य एवं अन्य सम्बन्धित विभागों के अधिकारी/कार्मिक उपस्थित थे। 

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