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 ऋषिकेश;

 पर्यटन राज्य मंत्री भारत सरकार श्री के. जे. अल्फोंस जी और परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने माननीय मंत्री के दिल्ली स्थित कार्यालय में नीदरलैण्ड से आये जल विशेषज्ञों के साथ भेंट वार्ता हुई। जल और हरित पर्यटन पर हुई इस वार्ता में नीदरलैण्ड से आयी जल विशेषज्ञ ब्रिजित वैन बरेन, इनर सेंस की संस्थापक और मैरियन, प्रबन्ध निदेशक पीस प्लेज, जल विशेषज्ञ ऐरिक, जल वैज्ञानिक डोल्फ और जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती ने जल को स्वच्छ करने तथा जल की गुणवत्ता को अनेक गुणा बढ़ाने हेतु अपने विचार और तकनीक माननीय मंत्री जी से साझा किये।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि जल की गुणवत्ता को बनाये रखना नितांत आवश्यक है जल जहां हमें जीवन देता है वही दूसरी ओर प्रदूषित जल से अनेक बीमारियों का सामना भी करना पड़ता है। जल का अगर सही उपयोग करे तो वह जीवन और जीविका का साधन बन सकता है। स्वामी जी महाराज ने कहा कि कुम्भ के दौरान भारत से पूरे विश्व में वसुधैवक कुटुम्बकम का संदेश; अध्यात्म और श्रेष्ठ संस्कारों का संदेश प्रसारित करते है परन्तु अब समय आ गया है कि हम अपने पर्व और आयोजनों के माध्यम से स्वच्छ जल, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रसारित करे। हम सभी को मिलकर कुम्भ मेला को आइकाॅनिक स्वच्छ, स्वस्थ और हरित स्थल के रूप में विकसित करना है।
स्वामी जी ने कहा कि कुम्भ मेला सहिष्णुता और समायोजन के साथ पूरी दूनिया के लिये एक उदाहरण है और संयुक्त राष्ट्र संघ ने इसे मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा प्रदान किया है भारत की इस पौराणिक धरोहर के माध्यम से हम पूरी दूनिया में पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रसारित कर सकते है। उन्होने कहा कि हमें भारत को एक संस्कृतिक पर्यटन के साथ-साथ जल पर्यटन और हरित पर्यटन के रूप में विकसित करना होगा।

नीदरलैंड से आयी ब्रिजित वैन बरेन, इनर सेंस की संस्थापक और मैरियन, प्रबन्ध निदेशक पीस प्लेज जो विश्व स्तर पर जल संरक्षण, ऊर्जा, हेल्थ केयर, विश्व शान्ति के लिये कार्य कर रहे है। साथ ही अपने पूरे दल के साथ जल विशेषज्ञ ब्रिजित वैन बरेन, जल विशेषज्ञ मैरियन और इनके दल के सदस्य 12 वर्षो से जल की गुणवत्ता को बचाने के लिये कार्य कर रहे है। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपनी नीदरलैण्ड यात्रा के दौरान इस जल विशेषज्ञों के दल से मुलाकात कर जल की गुणवत्ता को बढ़ाने के विभिन्न पहलुओं पर विशद चर्चा की थी तथा पूरे दल को भारत आने का निमंत्रण दिया था। उसी कड़ी में यह दल भारत आया हुआ है।
श्री के. जे. अल्फोंस जी ने भारत को जल और हरित पर्यटन के रूप में विकसित करने के स्वामी जी महाराज के सुझाव को महत्वपूर्ण बताते हुये कहा कि इससे स्वच्छ पर्यटन विकसित होगा तथा हम भारत में और अधिक पर्यटकों को आकर्षित कर सकते है।
श्री के. जे. अल्फोंस जी ने नीदरलैण्ड से आये दल को प्रयाग कुम्भ में आने का निमंत्रण दिया। जल विशेषज्ञों ने कहा कि नीदरलैण्ड और अन्य स्थानों से लगभग 50 लोगों का दल प्रयाग कुम्भ मेले में आयेगा जिसमें विख्यात जल विशेषज्ञ होंगे जो जल पर्यटन और जल संसद में सहभाग कर अपने विचार और तकनीक को साझा करेंगे।
नीदरलैण्ड से आये जल प्रतिनिधिमंडल को स्वामी जी महाराज ने प्रयाग कुम्भ में होने वाली जल संसद में सहभाग करने हेतु आंमत्रित किया तथा प्रतिवर्ष परमार्थ निकेतन में आयोजित होने वाले अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में सहभाग कर विश्व के अनेक देशों से आये योग जिज्ञासुओं को जल की गुणवत्ता के विषय में जानकारी देने हेतु आंमत्रित किया।
इस अवसर पर  परमार्थ निकेतन से स्वामिनी अदित्यनन्दा सरस्वती जी, सुश्री गंगा नन्दिनी त्रिपाठी, नीदरलैण्ड से आये जल वैज्ञानिक डोल्फ, आचार्य दीपक शर्मा, कई अन्य जल अधिकारियों ने सहभाग किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने माननीय के. जे. अल्फोंस जी को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट कियाI

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