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हरिद्वार;
आंखों में आंसू, मन में चुभन और मुख पर चिंता की रेखाएं रही होंगी ,जब सानंद जी को लगा होगा अब माँ गंगा का सानिध्य टूट जाएगा,  मां के आंचल से बच्चा दूर चला जायेगा ।
हृदय की पीड़ा कितनी वृहद स्तर तक पंहुच गयी होगी जब अंतिम समय को निकट जानकर उन्होंने माँ गंगा को नमन किया होगा। वे नही रहे, पहली बार इतिहास में ऐसा नही हो रहा है। गंगा के लिए संत तपस्या करते रहे है, परंतु इस घनघोर कलियुग में कौन व्यक्ति अपने स्वार्थ छोड़कर  गंगा के लिए तपस्यारत रहेगा ?
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रो. जी.डी. अग्रवाल के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। अपने शोक सन्देश मे मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि गंगा के विभिन्न मुद्दों के लिए अनशनरत प्रो.जी.डी.अग्रवाल के निधन से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है। उनकी मुख्य मांग थी कि गंगा के लिए अलग से एक्ट बनाया जाए और राज्य में तमाम जलविद्युत परियोजनाओं को रद्द किया जाए। इस कार्य के अध्ययन और उस पर योजना बनाने में थोड़ा समय लगता है। हमारी सरकार और केंद्र सरकार लगातार उनसे संपर्क में थी, बातचीत होती थी। केंद्रीय पेयजल मंत्री सुश्री उमा भारती ने उनसे मुलाकात की थी। उसके बाद जल संसाधन मंत्री श्री नितिन गड़करी ने भी फोन पर प्रोफेसर साहब से बातचीत की थी।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से भी इस मुद्दे पर पूरी संवेदनशीलता दिखाई गई थी। सरकार के प्रतिनिधि लगातार उनके संपर्क में थे। हरिद्वार के सांसद श्री रमेश पोखरियाल ‘‘निशंक‘‘ भी उनसे मुलाकात करने पहुंचे थे। हमारी कोशिश थी कि किसी तरह से उनकी जान बचायी जा सके। लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी उन्होंने अनशन तोड़ने से इनकार कर दिया। जैसे ही उन्होंने 9 अक्टूबर को जल का त्याग किया, उन्हें फौरन ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया था। एम्स के डाक्टरों ने भी उनकी जान बचाने का भरसक प्रयास किया। 
मातृ सदन  में पिछले 108 दिनों स गंगा के लिए अनशन पर बैठे  भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), कानपुर के पूर्व प्रोफेसर गुरू दास अग्रवाल, जो स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के नाम से विख्यात थे , वे अब नही रहे। आज अपराह्न उन्होंने एम्स ऋषिकेश में अंतिम सांस ली।
जबकि प्रोफ़ेसर जी डी अग्रवाल के पत्र के  अनुसार कल लगभग 1:00 अपराह्न शासन ने जबरदस्ती मातृ सदन से उठाकर एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया था ।जहां  उनके शरीर  मे पोटेशियम की मात्रा अत्यंत कम पायी गयी। डॉक्टरों के द्वारा उनके किये गए गंगा के प्रयासों की सराहना की गई। डॉक्टरों के द्वारा किये गए प्रयास भी उन्हें बचा नही सके ।  और अंततः  आज 11 अक्टूबर,2018 अपराह्न 1:00 बजे  उनकी मृत्यु हो गयी। अपने होशों हवास में सुबह ही पत्र लिखकर डॉक्टरों को धन्यवाद करनेवाले स्वामी सानन्द की मृत्यु भी अपने पीछे कई अधूरे सवाल छोड़ गई है।
ज्ञात हो कि गंगा के संरक्षण हेतु संवैधानिक निर्देशों के मुताबिक कानून की मांग को लेकर 22 जून, 2018 यानी 108 दिनों से हरिद्वार के मातृ सदन में आमरण अनशन पर बैठे हुए थे  और 9 अक्टूबर, 2018 से उन्होंने जल त्यागाने का भीषण संकल्प भी ले लिया था।उनकी मांग ऐसे कानून की थी जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 - जीने का अधिकार, 39(ख) - समुदाय के भौतिक संसाधनों का सामूहिक हित में सर्वोत्तम उपयोग, 39(ग) - आर्थिक व्यवस्था में संसाधनों का अहितकारी संकेद्रण न हो, 48क - पर्यावरण का संरक्षण व संवर्धन राज्य की जवाबदेही और 51क, नागरिकों के मूल कर्तव्यों के तहत (छ) प्राकृतिक पर्यावरण का संरक्षण व संवर्धन, व (ज) वैज्ञानिक दृष्टिकोण, इंसानियत और ज्ञान की खोजबीन व सुधार की भावना से भरपूर संवैधानिक खाके को सुनिश्चित करे।
इसीलिए देश के अनेकों  विद्ववानों ने स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के आमरण अनशन समाप्त करवाकर उनका बहूमूल्य जीवन बचाने  की और उनके वैज्ञानिक मार्गदर्शन में गंगा को बर्बाद करने की सभी संविधान-विरोधी नीतियों को वापस लेने की अपील की थी।
जिसमे मेधा पाटकर, अरुणा राय, मल्लिका साराभाई, ललिता रामदास, कविता श्रीवास्तव, राजेन्द्र सिंह, राजमोहन गांधी, एडमिरल लक्ष्मीनारायण रामदास, भरत झुनझुनवाला, सुधीन्द्र कुलकर्णी, आनंद पटवर्धन, स्वामी अग्निवेश, प्रो. अनिल सदगोपाल, रवि चोपड़ा, डा. अरविंद गुप्ता, मधु पूर्णिमा किश्वर, प्रो. मिशेल डेनीनो, प्रो. मक्कखन लाल, डा. टी. हनुमान चैधरी, अरविंद केजरीवाल, आलोक अग्रवाल, संजय सिंह, पंकज पुष्कर, संदीप पाण्डेय आदि  शामिल  थे।

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