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डोईवाला;
शहीद दुर्गा मल्ल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गांधी-शास्त्री जयंती कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र डा.केएल तलवाड़ ने कहा कि यद्यपि गांधी जी एक राजनेता के रूप में जाने जाते हैं।
किंतु उनके द्वारा लिखी पुस्तकों और संपादित  पत्र-पत्रिकाओं में उनके आर्थिक विचार भी मिलते हैं। वे अर्थशास्त्र और नीतिशास्त्र में भेद नहीं करते थे। धन कभी साध्य नहीं हो सकता, वह साधन मात्र है और साधन हमेशा पवित्र होना चाहिए।
कुटीर उद्योग धंधे भारतीय अर्थव्यवस्था के अनुरूप हैं क्योंकि इसमें श्रम का अधिक और पूंजी का कम प्रयोग होता है। खादी वस्त्र नहीं विचार है जो भारतीयों कों एकता के सूत्र में बांधती है और स्वदेशी का महत्व सिखाती है।विकेंद्रीकरण, श्रम की प्रतिष्ठा, स्वरोजगार,ग्रामस्वराज्य और आत्मनिर्भरता के साथ ही उन्होंने सादगी से जीवन को अपने विचारों में प्रमुखता दी।उनके आर्थिक विचारों से पाश्चात्य देशों के अर्थशास्त्रियों ने भी प्रेरणा ली है,वह अपने समय से बहुत आगे थे।
शहीद दुर्गा मल्ल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्राचार्य डा. एमसी नैनवाल ने गांधी-शास्त्री के चित्रों पर माल्यार्पण किया। समस्त स्टाफ व विद्यार्थियों ने सर्वधर्म प्रार्थना सभा में भाग लिया।

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