Halloween party ideas 2015

रुद्रप्रयाग :
भूपेंद्र भंडारी 
देवभाषा संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिये जाने की बातें तो सरकारें कर रही हैं मगर संस्कृत भाषा देवभूमि में ही उपेक्षित बनी हुई है। यहां के संस्कृत महाविद्यालयों में संसाधनों की कमी तो है ही साथ ही अध्यापकों की भी भारी कमी बनी हुई है। रुद्रप्रयाग चमोली जनपद में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा  देने के लिए 18 विद्यालय तो खोले गये हैं मगर विद्यालयों की स्थिति इस कदर है कि यहां शिक्षा के नाम पर महज रस्म अदायगी ही हो रही है।
 रुद्रप्रयाग जनपद में तीन संस्कृत महाविद्यालयों के साथ ही सात संस्कृत विद्यालय संचालित हो रहे हैं इन विद्यालयों में वर्षों पूर्व शासन स्तर से पदों की स्वीकृतियां भी हैं मगर मौजूदा हालत यह हैं कि इन विद्यालयों में सिर्फ ताला खोलने के लिए एक-एक अध्यापक हैं। बच्चों की रुचि तो संस्कृत के प्रति है मगर संसाधनों के अभाव में बच्चों का भी संस्कृत शिक्षा से अरुचि साफ दिख रही है। इन विद्यालयों के जरिये जहां कई बच्चे राजकीय सेवाओं में अपना भविष्य संवारना चाह रहे हैं वहीं कई बच्चे अपनी पैतृक  परंपराओं को आगे बडाते हुए अपना रोजगार संवारना चाह रहे हैं। 
विद्यालय के प्राचार्य व राष्ट्पति पुरस्कार  से सम्मानित डा0 सुरेशचरण बहुगुणा का कहना है कि हमारे धर्म ग्रन्थों की शुरुआत देवभूमि से ही हुई है इसी लिए उत्तराखण्ड को संस्कृत प्रदेश भी कहा जाता है यहां के विद्यालयों में अध्यापकों की भारी कमी बनी हुई है वर्षों से नियुक्ति प्रक्रिया नहीं होने से पद रिक्त पडे।

एक टिप्पणी भेजें

www.satyawani.com @ All rights reserved

www.satyawani.com @All rights reserved
Blogger द्वारा संचालित.