Halloween party ideas 2015

रुद्रप्रयाग;

भूपेंद्र भण्डारी
आपदा प्रभावित केदारघाटी में जिन्दगियां फिर से तारों पर लटक गयी हैं। उफनती मंदाकिनी नदी के उपर फिर से मौत की ट्रॉलियां  चलनी शुरु हो गयी हैं जिससे आम जनमानस में फिर से डर के साये में सफर करने को मजबूर है। आपदा के पांच साल हो चुके हैं और अभी तक विजयनगर झूला पुल बनकर तैयार नहीं हो पाया है। 
भले ही केदारनाथ यात्रा ने इस बार सारे रिकार्डों को ध्वस्त किया हो और सरकार व प्रशासन ने भी इसे अपनी उपलब्द्वि बताकर खुद अपनी पीठ भी थपथपा दी है मगर हकीकत यह है कि केदारघाटी अभी भी 2013 की आपदा के दंश को झेल रही है। मानसून काल आते ही नदियों में बनाये गये अस्थाई पुलों को हटा दिया जाता है और फिर शुरु हो जाती है झूलती हुई जिन्दगी। पांच सालों में ग्रामीणों के संर्घर्षों का प्रतिफल कुछ मिला तो वह है सिर्फ आश्वासन, ऐसे में ग्रामीण अपनी रोजर्मरा की आवश्यक्ताओं को पूरा करने के लिए मौत का सफर तय करने को मजबूर हैं। 

2013 से लेकर आज तक इन ट्ालियों से कई हादसे हो गये हैं कई बच्चों की जानें जा चुकी हैं तो कई इनके तारों से कट चुके हैं कई बार तो उफनती नदी के बीच में ट्राली खराब हो जाने से घण्टों तक जिन्दगियां हवा में झूलती रहती हैं। सबसे ज्यादा दिक्कतें तो स्कूली बच्चों को हो रही हैं जिन्हें घूप व बारिश में घण्टों लाइन लगाकर अपनी बारी का इंतेजार करना पडता है। वहीं इन पांच सालों में जिले के अधिकारी भी नेताओं की रटी रटाई बातों को ही दोहरा रहे हैं। कि जल्दी पुल बनकर तैयार हो जायेगा। इस बार भी लोक निमार्ण विभाग ने दावा किया है कि 15 अगस्त तक पुल को आवाजाही के लिए तैयार कर दिया जायेगा।

मानसून काल में एक बार फिर से विभाग ने आश्वासन का सगूफा फेंक कर जनता के आक्रोश को थामने का प्रयास तो किया है मगर पांच सालों से आक्रोशित जनता का गुव्वार फिर कब फूट पडता है यह कहा नहीं जा सकता है। लेकिन इतना तो तय है कि इस बार  बरसात में , फिर से जिन्दगियां तारों पर ही झूलती रहेंगी

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