Halloween party ideas 2015



देहरादून :



 हिमवंत फाउंडेशन सोसाइटी द्वारा देवांचल विहार, चकडालनवाला धर्मपुर मार्ग देहरादून में स्वतंत्रता दिवस और तीज कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ।संस्था अध्यक्ष संगीता थपलियाल ने बताया कि इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गये। देश भक्ति गीत और तीज त्योहार दोनों तरह के गीत संगीत का आयोजन किया गया।

देश की सीमाओं की सुरक्षा में तैनात फ़ौजी जवानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गयी संस्था अध्यक्ष ने कहा कि देश के जवान सीमा पर खड़े हैं तभी हम लोग यहाँ पर बेफ़िक्री से त्योहार मना पा रहे है ।कहा अब तेजी से जनरेशन गेप देखने को मिल रहा है तकनीकी विकास तेजी से बढा है।


 इस कार्यक्रम में जूनियर और सीनियर श्रेणी दो स्तर प्रतियोगिता करके पर तीज   क्वीन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया सीनियर श्रेणी में प्रथम मधु बलूनी  द्वितीय कुशला पवार और तृतीय सुमन नेगी  तीज क्वीन बनी और जबकि जूनियर श्रेणी में  डॉ. रक्षा रतूड़ी प्रथम,  आशा तोमर  द्वितीय तथा  सुमन रावत तृतीय  स्थान पर  तीज क्वीन बनी । इसके अतिरिक्त आशा बिष्ट को सामाजिक योगदान देने के लिए सम्मानित  किया गया ।

 

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देहरादून:

भारी वर्षा के चलते देहरादून जनपद के सभी शिक्षण संस्थान है कक्षा 1 से 12 तक एवं आंगनबाड़ी केदो में 18 अगस्त 2026 को अवकाश घोषित किया जा रहा है जिलाधिकारी देहरादून डॉक्टर आशीष कुमार चौहान के निर्देशानुसार 18 अगस्त को सभी स्कूल बंद रहेंगे।

 

उत्तरकाशी:

nagpanchami attaknaur uttarkashi


 नाग पंचमी के पावन पर्व पर गंगोत्री क्षेत्र के पूर्व विधायक विजयपाल सिंह सजवाण ने धनारी एवं टकनौर क्षेत्र में आयोजित विभिन्न नाग पंचमी महोत्सवों में प्रतिभाग कर देवदर्शन एवं देव आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की मंगलकामना की।


सर्वप्रथम पूर्व विधायक सजवाण ने धनारी क्षेत्र के पंचाणगांव स्थित भगवान श्री चन्दन नाग देवता के सिद्धपीठ मन्यारा धाम पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की और देव आशीर्वाद प्राप्त किया। गांव की ऊंचाई पर स्थित यह दिव्य धाम क्षेत्र की गहरी देव आस्था, लोक परंपराओं एवं समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे पावन धाम हमारी सनातन परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत बनाए रखने के साथ ही समाज को आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता प्रदान करते हैं।


उन्होंने पंचाणगांव के समस्त ग्रामवासियों को प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले इस धार्मिक आयोजन की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए भगवान श्री चन्दन नाग देवता से समस्त क्षेत्रवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं खुशहाली की कामना की।


इसके उपरांत विजयपाल सजवाण ने टकनौर क्षेत्र के बार्सू गांव में भगवान श्री बासुकी नाग देवता के सानिध्य में आयोजित नाग पंचमी देव महोत्सव में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर भगवान बासुकी नाग देवता का दुग्धाभिषेक एवं विशेष पूजा-अर्चना के दर्शन प्रमुख कार्यक्रम रहे।


महोत्सव के दौरान यमुनोत्री क्षेत्र की गीठ पट्टी के राना गांव से भगवान श्री समेश्वर देवता तथा पड़ोसी पाला गांव से सर्पनाथ देवता, नारायण देवता व नरसिंह देवता के साथ भगवान समेश्वर देवता की देव डोलियों के आगमन एवं दिव्य मिलन के भी दर्शन किए। देव डोलियों के इस पावन संगम ने पूरे क्षेत्र को श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से अभिभूत कर दिया।


पूर्व विधायक ने कहा कि उत्तराखंड की विशिष्ट देव संस्कृति, लोक आस्था और देव डोलियों की परंपरा हमारी सबसे बड़ी सांस्कृतिक पहचान है। सदियों से चली आ रही यह परंपरा न केवल हमारी जड़ों से जोड़ती है, बल्कि आपसी भाईचारे, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता को भी मजबूत करती है।


उन्होंने बार्सू गांव के समस्त ग्रामवासियों को नाग पंचमी देव महोत्सव की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए भगवान श्री बासुकी नाग देवता एवं समेश्वर महाराज से समस्त क्षेत्रवासियों पर अपनी कृपा बनाए रखने तथा क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि, खुशहाली एवं यश का वास होने की मंगलकामना की।


हरिद्वार:

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आगामी कुंभ मेला-2027 में हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं के लिए उत्तर प्रदेश की सीमा पर मंडावर-छुटमलपुर में भव्य स्वागत द्वार आकार ले रहा है। समुद्र मंथन की पौराणिक कथा और कुंभ की आध्यात्मिक परंपरा को केंद्र में रखकर तैयार किया जा रहा यह स्वागत द्वार श्रद्धालुओं के लिए केवल प्रवेश का संकेत नहीं होगा, बल्कि देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से परिचय कराने वाला प्रमुख आकर्षण भी बनेगा।


मेला प्रशासन की ओर से राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्मित कराए जा रहे इस स्वागत द्वार के लिए राज्य सरकार ने 204.19 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। लगभग साढ़े छह मीटर ऊंचा यह स्वागत द्वार कुंभ नगरी हरिद्वार की ओर बढ़ते श्रद्धालुओं के लिए भव्य प्रवेश बिंदु के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका वास्तुशिल्प और सज्जा कुंभ के आध्यात्मिक महत्व के साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपराओं को भी प्रतिबिंबित करेगी।


समुद्र मंथन भारतीय पौराणिक परंपरा में कुंभ की अवधारणा से गहराई से जुड़ी कथा है। इसी कथा से अमृत कलश और कुंभ पर्व की धार्मिक मान्यता का संबंध माना जाता है। ऐसे में समुद्र मंथन की थीम पर आधारित स्वागत द्वार श्रद्धालुओं को कुंभ की आध्यात्मिक यात्रा से जोड़ने के साथ ही हरिद्वार की धार्मिक महत्ता का प्रतीक बनेगा।


यह मार्ग उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए हरिद्वार पहुंचने के प्रमुख मार्गों में शामिल है। ऐसे में मंडावर में बनने वाला यह स्वागत द्वार बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए कुंभ नगरी की पहली भव्य झलक प्रस्तुत करेगा। प्रवेश द्वार के आसपास के क्षेत्र में भी आवश्यक सौंदर्यीकरण कराया जाएगा, ताकि कुंभ क्षेत्र में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को एक आकर्षक और उत्सवपूर्ण वातावरण का अनुभव हो।


स्वागत द्वार का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है और इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। निर्माण कार्य में गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को तेजी से धरातल पर उतारने के लिए स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों को तय समयसीमा के भीतर इसका निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने निर्माण कार्य की नियमित निगरानी करने और गुणवत्ता के मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने को भी कहा है।


मंडावर का यह स्वागत द्वार कुंभ नगरी हरिद्वार में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भव्य स्वागत स्थल के रूप में विकसित होगा। समुद्र मंथन की पौराणिक गाथा से जुड़ी इसकी थीम श्रद्धालुओं को कुंभ की धार्मिक परंपरा और हरिद्वार की आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने के साथ ही देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान की भव्य झलक भी प्रस्तुत करेगी।

कुंभ की तैयारियों के तहत पेयजल योजनाओं में तेजी, अपर मेलाधिकारी ने किया स्थलीय निरीक्षण


हरिद्वार:


हरिद्वार में अगले वर्ष आयोजित होने वाले कुंभ मेला-2027 की तैयारियों के तहत अवस्थापना विकास कार्यों एवं जन-सुविधाओं के विस्तार से जुड़ी योजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारा जा रहा है। कुंभ के दौरान देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। निर्माण कार्यों की गति और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए मेला प्रशासन के अधिकारी नियमित रूप से स्थलीय निरीक्षण कर रहे हैं।


इसी क्रम में अपर मेलाधिकारी श्री दयानंद सरस्वती ने सोमवार को तकनीकी सेल के अधिकारियों के साथ कनखल एवं उत्तरी हरिद्वार क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति से संबंधित विभिन्न निर्माणाधीन योजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने उत्तराखंड जल संस्थान द्वारा पेयजल वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए बिछाई जा रही पाइपलाइनों की प्रगति, गुणवत्ता और कार्य की गति का जायजा लिया तथा संबंधित अधिकारियों से कार्यों की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली।


अपर मेलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को पेयजल वितरण लाइनों को बिछाने के कार्य में तेजी लाते हुए निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कुंभ मेला-2027 के दौरान हरिद्वार में श्रद्धालुओं की संख्या में बड़ी वृद्धि होगी, जिससे पेयजल की मांग भी बढ़ेगी। ऐसे में पेयजल आपूर्ति से जुड़ी सभी योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करना आवश्यक है, ताकि मेला अवधि में श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को पर्याप्त एवं निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।


उन्होंने पाइपलाइन बिछाने के लिए की जा रही खुदाई के दौरान आम लोगों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क अथवा सार्वजनिक स्थान पर खुदाई वाले स्थानों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की जाए और कार्य पूरा होने के बाद खुदाई को उचित तरीके से भरकर एवं समतल कर सुरक्षित बनाया जाए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि निर्माण कार्यों के कारण आमजन के आवागमन में अनावश्यक परेशानी न हो।


अपर मेलाधिकारी ने भूपतवाला क्षेत्र में पावन धाम तथा प्राइमरी पाठशाला पंपिंग पेयजल योजनाओं के पुनर्गठन कार्य का भी स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने दोनों योजनाओं की क्रमशः 85 एवं 95 प्रतिशत प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कार्यदायी संस्था के अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों योजनाएं अब अंतिम चरण में हैं, इसलिए शेष कार्यों को भी बिना किसी अनावश्यक विलंब के पूरा किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अंतिम चरण के कार्यों में गति बनाए रखते हुए योजनाओं को शीघ्र पूरा कर उपयोग में लाया जाए।


श्री दयानंद सरस्वती ने कहा कि स्वच्छ, पर्याप्त और निर्बाध पेयजल आपूर्ति कुंभ मेला-2027 की व्यवस्थाओं की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए पेयजल से संबंधित योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के साथ ही निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक कार्य की नियमित निगरानी की जाए तथा निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।


निरीक्षण के दौरान उत्तराखंड जल संस्थान के अधिशासी अभियंता विपिन चौहान, सहायक अभियंता राकेश बमराड़ा, मनोज डबराल तथा तकनीकी सेल के अभियंता अतुल शांडिल्य सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


*180 दिन से अधिक लंबित शिकायतों पर अधिकारियों को चेतावनी, निस्तारण संभव न होने वाले प्रकरण स्पेशल क्लोज में उच्चस्तर पर भेजने के निर्देश*


देहरादून:



जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने कलेक्ट्रेट सभागार में सीएम हेल्पलाइन एवं मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन शिकायतों का निस्तारण सर्वाेच्च प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित किया जाए तथा लंबित प्रकरणों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।

सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने विशेष रूप से 180 दिन से अधिक समय से लंबित शिकायतों की विभागवार स्थिति की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को चेतावनी के साथ इन शिकायतों का प्राथमिकता से निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनसामान्य की शिकायतों के निस्तारण में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक शिकायत का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करते हुए शिकायतकर्ता को भी निस्तारण की जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

जिलाधिकारी ने कहा कि जिन शिकायतों का निस्तारण विभागीय स्तर पर संभव नहीं है, ऐसे प्रकरणों को स्पेशल क्लोज के अंतर्गत आवश्यक विवरण एवं स्पष्ट आख्या सहित उच्चस्तर पर हस्तांतरित किया जाए, ताकि ऐसे मामलों का उचित स्तर पर समाधान किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायतों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने अथवा बिना ठोस कारण के अग्रसारित करने की प्रवृत्ति पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए।


मुख्यमंत्री घोषणाओं को समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने मुख्यमंत्री घोषणाओं की विभागवार समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों से घोषणाओं की वर्तमान प्रगति, लंबित कार्यों तथा आ रही बाधाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मा0 मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं का क्रियान्वयन निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन मुख्यमंत्री घोषणाओं के क्रियान्वयन के लिए भूमि का चयन किया जाना है, संबंधित विभाग ऐसे प्रकरणों में आवश्यक प्रस्ताव तैयार कर सीधे जिलाधिकारी को प्रस्तुत करें, ताकि भूमि चयन एवं अन्य आवश्यक कार्यवाही में अनावश्यक विलंब न हो।

जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि मा0 मुख्यमंत्री की घोषणाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा अनावश्यक विलंब पाए जाने पर संबंधित विभागी अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि घोषणाओं से संबंधित कार्यों की नियमित रूप से विभागीय स्तर पर समीक्षा करें तथा प्रगति में आ रही समस्याओं का समय रहते समाधान सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाएं शासन की प्राथमिकताओं से जुड़ी हैं और इनके प्रभावी क्रियान्वयन से आमजन को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचता है। इसलिए सभी विभागीय अधिकारी आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए घोषणाओं को धरातल पर उतारना सुनिश्चित करें।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के. मिश्रा, अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मिता परमार, मुख्य शिक्षा अधिकारी श्री जायसवाल, अपर पुलिस अधीक्षक, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी शशिकांत गिरी, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास जितेन्द्र कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।



*श्रीलंका के 40 अधिकारियों ने किया यूएसडीएमए का भ्रमण*

देहरादून:

Srilanka USDMA


नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस (एनसीजीजी) के तत्वावधान में आपदा प्रबंधन विषय पर आयोजित क्षमता निर्माण कार्यक्रम के तहत श्रीलंका के 40 सदस्यीय सिविल सेवा अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) पहुंचकर राज्य में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों एवं नवाचारों की जानकारी प्राप्त की। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से पूर्व चेतावनी व्यवस्था, मौसम आधारित जोखिम प्रबंधन, भूस्खलन न्यूनीकरण, तकनीकी संसाधनों के उपयोग तथा समुदाय की भागीदारी से संचालित आपदा प्रबंधन तंत्र को समझा। इस दौरान उन्होंने उत्तराखण्ड में मानव वन्य जीव संघर्षों को कम करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली। 

इस अवसर पर यूएसडीएमए के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) श्री प्रकाश चंद्र ने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक एवं प्राकृतिक परिस्थितियां आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में निरंतर तैयारी और जोखिम को पहले से समझने की मांग करती हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में आपदा प्रबंधन को केवल घटना के बाद की प्रतिक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि जोखिम की पहचान, न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, प्रशिक्षण, तकनीकी क्षमता और विभागीय समन्वय को एक साथ जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने में वैज्ञानिक संस्थानों एवं स्थानीय समुदायों की सहभागिता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

यूएसडीएमए के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) एवं डीआईजी श्री राजकुमार नेगी ने बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति में सूचना प्राप्ति से लेकर राहत एवं बचाव कार्यों के संचालन तक विभिन्न स्तरों पर स्पष्ट समन्वय व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। उन्होंने राज्य एवं जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों की भूमिका, घटना प्रतिक्रिया प्रणाली (आईआरएस), बहु-स्रोत चेतावनी तंत्र तथा तकनीक आधारित सूचना एवं निर्णय सहायता प्रणालियों के बारे में प्रतिनिधिमंडल को विस्तार से अवगत कराया।

मौसम विशेषज्ञ डॉ. पूजा राणा ने उत्तराखण्ड में मौसम संबंधी जोखिमों की निगरानी और पूर्व चेतावनी के लिए अपनाई जा रही वैज्ञानिक व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा उपग्रह आधारित निगरानी, डॉप्लर वेदर रडार, स्वचालित मौसम केंद्र, स्वचालित वर्षामापी तथा अन्य आधुनिक उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों का निरंतर विश्लेषण किया जाता है। मौसम संबंधी इस रियल-टाइम सूचना के आधार पर विभिन्न अवधि के पूर्वानुमान एवं प्रभाव आधारित चेतावनियां तैयार की जाती हैं, जिससे संवेदनशील क्षेत्रों में समय रहते आवश्यक तैयारियां की जा सकें।

उत्तराखण्ड भू-स्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र (यूएलएमएमसी) के जियोलाॅजिस्ट डॉ. रघुवीर नेगी ने राज्य में भूस्खलन के जोखिम को कम करने के लिए अपनाए जा रहे वैज्ञानिक उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, भू-वैज्ञानिक एवं भू-तकनीकी अध्ययन, रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस आधारित विश्लेषण, ड्रोन सर्वेक्षण, ढलानों की निगरानी तथा वर्षा और भूस्खलन के बीच संबंधों के अध्ययन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर जोखिम वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त उपचारात्मक एवं स्थिरीकरण उपाय तय किए जाते हैं। इनमें जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाना, ढलानों को स्थिर करना तथा आवश्यक इंजीनियरिंग हस्तक्षेप शामिल हैं। अत्यधिक वर्षा और भूस्खलन से प्रभावित होने वाले श्रीलंका के लिए उत्तराखण्ड में अपनाई जा रही ये व्यवस्थाएं विशेष रूप से उपयोगी एवं अध्ययन योग्य रहीं।

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने उत्तराखण्ड की आपदा प्रबंधन प्रणाली से जुड़े विभिन्न पहलुओं को लेकर अधिकारियों एवं विशेषज्ञों के साथ संवाद किया और राज्य में अपनाए जा रहे तकनीकी एवं संस्थागत उपायों में विशेष रुचि दिखाई। इस अवसर पर संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री दिनेश कुमार पुनेठा, एनसीजीजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ए.पी. सिंह, डॉ. एमके भण्डारी सहित अन्य अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।


*अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मजबूत होता है आपदा प्रबंधन-सुमन*

देहरादून। सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में निरंतर सीखने, अनुभव साझा करने और नई कार्यप्रणालियों को अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के अधिकारियों के साथ संवाद एवं अनुभवों का आदान-प्रदान आपदा जोखिमों से निपटने की तैयारियों को व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है। उत्तराखण्ड में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में विकसित संस्थागत व्यवस्थाओं, तकनीकी नवाचारों और जमीनी अनुभवों को साझा करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा रही प्रभावी प्रणालियों को समझना भी राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमता को और मजबूत करने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के साथ भविष्य की आपदाओं के प्रति अधिक सक्षम, समन्वित और लचीली व्यवस्था विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं।


- मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर SIR पर की समीक्षा 

- ⁠मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, ईआरओ फील्ड विजिट में करेंगे क्रॉस वेरिफिकेशन


देहरादून:

Chief election commissioner will review field visit SIR


 मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ.बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने सोमवार को सचिवालय में सभी जनपदों के जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कांन्फ्रेंस कर विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की समीक्षा की। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दोनों मंडलायुक्तों को आगामी 15 दिन आवंटित जनपदों में कैम्प करने के आदेश दिए हैं। सभी जनपदों के डीईओ एवं ईआरओ को दावे एवं आपत्तियों के चरण में सुपर चैकिंग / फील्ड विजिट अभियान के तहत सत्यापन करने के भी निर्देश दिए हैं।


मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने आगामी 15 दिन आयुक्त कुमांऊ को नैनीताल, ऊधमसिंह नगर एवं आयुक्त गढ़वाल को देहरादून, हरिद्वार में कैंम्प करने के आदेश जारी किए हैं। इस दौरान दोनों आयुक्त आयोग द्वारा नियत मानकों के अनुरुप फील्ड विजिट के तहत विशेष रुप से ऐसे बूथों को सत्यापन करेंगे जहां नाम जोड़ने हेतु (फार्म 6) और नाम हटाने हेतु (फार्म 7) के सबसे अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसके साथ ही जिलाधिकारी रेंडम फील्ड विजट ( बूथों का औचक निरीक्षण) कर सुपर चैकिंग करेंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन बूथों पर फार्म 6 के आवेदन 4 प्रतिशत से अधिक और फार्म 7 के आवेदन 2 प्रतिशत से अधिक हैं वहां  ईआरओ फॉर्म्स को क्रॉस वेरिफाई करेंगे।


समीक्षा बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जनपदों के डीईओ को फार्म 6, फार्म 7 एवं फार्म 8 के तहत प्राप्त आवेदनों को नियमानुसार जांच कर ससमय निस्तारण के निर्देश दिए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जनपदों को निर्देश दिए कि दावे आपत्तियों का निस्तारण तय समय सीमा के अंदर किया जाए।


बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डा. विजय कुमार जोगदंडे, संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री प्रकाश चन्द्र दुम्का, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री किशन सिंह नेगी, सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री मस्तू दास के अतरिक्त सभी जिलाधिकारी उपस्थित रहे।

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