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शहीद दुर्गामल्ल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डोईवाला, देहरादून में विधायी एवं संसदीय कार्य विभाग, उत्तराखण्ड शासन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता 2025–26 के पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन 09 सितम्बर 2026 को किया गया। कार्यक्रम की आयोजक एवं उत्तराखण्ड युवा संसद की राज्य नोडल अधिकारी डॉ. राखी पंचोला रहीं।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय श्री सहदेव सिंह, प्रमुख सचिव, विधायी एवं संसदीय कार्य विभाग, उत्तराखण्ड शासन रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री अरविन्द कुमार, अपर सचिव, संसदीय कार्य विभाग, उत्तराखण्ड शासन उपस्थित रहे।  कार्यक्रम में श्री पूरन गिरी उपसचिव, निदेशक उच्च शिक्षा के प्रतिनिधि डॉ. प्रमोद डोबरियाल, उपनिदेशक माध्यमिक श्री रमेश तोमर तथा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. देवेश भट्ट सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे।


मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. देवेश भट्ट द्वारा सभी आगन्तुक अतिथियों का स्वागत किया गया। महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया।


सत्र 2025–26 में आयोजित तरुण सभा तथा किशोर सभा के परिणाम घोषित करते हुए अपर सचिव श्री अरविन्द कुमार ने बताया कि तरुण सभा प्रतियोगिता में  पुनः प्रथम स्थान शहीद दुर्गामल्ल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डोईवाला को प्राप्त हुआ।


द्वितीय स्थान रामचन्द्र उनियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उत्तरकाशी को तथा तृतीय स्थान राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रुद्रपुर को प्राप्त हुआ। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गोपेश्वर ने चतुर्थ तथा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नई टिहरी ने पंचम स्थान प्राप्त किया।


श्री अरविन्द कुमार ने बताया कि इस सत्र में राज्य के 13 जनपदों के 76 महाविद्यालयों में युवा संसद/तरुण सभा का आयोजन किया गया।

किशोर सभा के परिणामों की घोषणा करते हुए बताया गया कि प्रथम स्थान जनपद हरिद्वार के पी.एम. श्री राजकीय महाविद्यालय, भौरी, रुड़की को प्राप्त हुआ। द्वितीय स्थान राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, डोभालवाला, देहरादून को तथा तृतीय स्थान राजकीय महाविद्यालय,  मैठाना  दशोली को प्राप्त हुआ।


चतुर्थ स्थान राजकीय इंटर कॉलेज, दूनाकोट, पिथौरागढ़ तथा पंचम स्थान पी.एम. श्री राजकीय महाविद्यालय, बागेश्वर को प्राप्त हुआ।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. देवेश भट्ट ने अपने उद्बोधन में कहा कि युवा संसद केवल एक प्रतियोगिता या मंचन नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना जागृत करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को समझाने का माध्यम है।


उन्होंने कहा कि सभी महाविद्यालयों एवं विद्यालयों में इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय परंपराओं तथा नागरिक दायित्वों की जानकारी प्राप्त हो सके।


कार्यक्रम की आयोजक एवं राज्य नोडल अधिकारी डॉ. राखी पंचोला ने राज्य, जिला, महाविद्यालय एवं विद्यालय स्तर पर युवा संसद कार्यक्रम के आयोजन की प्रक्रिया से प्रतिभागियों को परिचित कराया।


उन्होंने कहा कि युवा संसद के माध्यम से विद्यार्थियों में संसदीय कार्यप्रणाली की समझ विकसित होती है।


निदेशक उच्च शिक्षा के प्रतिनिधि डॉ. प्रमोद डोबरियाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि युवा संसद में केवल अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि स्थानीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।


उन्होंने सुझाव दिया कि आगामी युवा संसद कार्यक्रमों में स्थानीय समस्याओं एवं जनहित से जुड़े विषयों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि विद्यार्थी अपने आसपास की सामाजिक एवं स्थानीय समस्याओं को समझकर उनके समाधान के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना सीख सकें।

मुख्य अतिथि माननीय श्री सहदेव सिंह, प्रमुख सचिव, विधायी एवं संसदीय कार्य विभाग, उत्तराखण्ड शासन ने अपने संबोधन में कहा कि भारत विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक राष्ट्र-शक्तियों में से एक है। उन्होंने कहा कि युवाओं को राज्य की प्रगति, उन्नति तथा विकास से जुड़े सभी कार्यों से अवगत कराया जाना आवश्यक है।

उन्होंने प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया तथा सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ दीं।

कार्यक्रम में अनुभाग अधिकारी श्री अरविन्दर सिंह ने भी सक्रिय सहभागिता प्रदान की।

कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों एवं संबंधित अधिकारियों को सम्मानित किया गया। 20 जनपदीय नोडल अधिकारियों तथा 52 सर्वश्रेष्ठ युवा सांसदों (प्रत्येक जनपद से दो) को भारत सरकार की नियमावली के अनुरूप प्रमाण-पत्र एवं ट्रॉफी प्रदान की गई।


कार्यक्रम में संबंधित जनपदों के नोडल अधिकारियों ने अपने-अपने छात्र-छात्राओं के साथ सहभागिता की। देहरादून की जिला नोडल अधिकारी डॉ. अंजली वर्मा, हरिद्वार जनपद के नोडल अधिकारी गजेन्द्र सिंह, ऊधम सिंह नगर के नोडल अधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. अजीत सिंह सहित टिहरी, पौड़ी एवं अन्य जनपदों के नोडल अधिकारियों ने भी अपने छात्र-छात्राओं के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की।

कार्यक्रम के अंत में हिमालय दिवस के उपलक्ष्य में उपस्थित सभी ने हिमालय के संरक्षण, संवर्धन एवं पर्यावरण सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता की शपथ  प्रभारी, विधि प्रकोष्ठ, डॉ. राजकुमारी भंडारी द्वारा दिलाई गई।


कार्यक्रम का संचालन उत्तराखण्ड युवा संसद की राज्य नोडल अधिकारी डॉ. राखी पंचोला ने किया। समारोह में विभिन्न जनपदों से आए छात्र-छात्राओं, नोडल अधिकारियों, प्राध्यापकों एवं अतिथियों की सक्रिय सहभागिता रही।


समारोह का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय कार्यप्रणाली, नेतृत्व क्षमता, तार्किक अभिव्यक्ति, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा राष्ट्र निर्माण की भावना को विकसित करना रहा। पुरस्कार वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।इस अवसर पर  महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक उपस्थित रहे।

 *ग्रामीण विकास मंत्री भरत चौधरी का बड़ा प्रशासनिक फैसला: एबीडीओ को मिला प्रमोशन, विकासखंडों को मिले बीडीओ*        

                                                                                                                                              

*पदोन्नति के बाद खंड विकास अधिकारियों को मिली नई तैनाती देहरादून ;



ग्रामीण विकास विभाग में लंबे समय से लंबित सहायक खंड विकास अधिकारियों (एबीडीओ) के पदोन्नति प्रकरण पर ग्रामीण विकास मंत्री श्री भरत सिंह चौधरी ने त्वरित निर्णय लेते हुए एबीडीओ को पदोन्नत कर खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) बनाने की महत्वपूर्ण पहल की है।मंत्री के इस निर्णय से लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे अधिकारियों को न केवल उनका वाजिब हक और सम्मान मिला है, बल्कि विकासखंड स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था को भी मजबूती मिलने का रास्ता साफ हुआ है। पदोन्नत अधिकारियों की तैनाती से विकासखंडों में बीडीओ की उपलब्धता बढ़ेगी और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों के संचालन में गति आएगी।  


 *एक निर्णय, दो बड़े लाभ*

 मंत्री भरत सिंह चौधरी के इस फैसले का सीधा लाभ कर्मचारी हित और जनहित, दोनों को मिलने वाला है। एक ओर लंबे समय से लंबित प्रमोशन का समाधान हुआ है, वहीं दूसरी ओर विकासखंडों को स्थायी रूप से खंड विकास अधिकारी उपलब्ध होने से ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी को मजबूती मिलेगी। 

विकासखंड स्तर पर बीडीओ की भूमिका ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण होती है। अधिकारियों की उपलब्धता से योजनाओं की निगरानी, विभागीय समन्वय, जनसमस्याओं के समाधान तथा विकास कार्यों की गति में सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।


*पदोन्नत अधिकारियों ने की मंत्री के निर्णय की सराहना*                                      पदोन्नत हुए अधिकारियों ने कैबिनेट मंत्री के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि लंबे समय से लंबित पदोन्नति होने से उन्हें नई जिम्मेदारी और कार्य करने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि “त्वरित और जनहित में निर्णय लेना किसी नेता की केवल राजनीतिक क्षमता नहीं, बल्कि उसकी प्रशासनिक क्षमता और संवेदनशीलता का भी परिचायक है।” अधिकारियों ने इसे कर्मचारी हित में लिया गया महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय बताते हुए मंत्री का आभार व्यक्त किया।


*जनता तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाने में मिलेगी मदद*                                ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन विकासखंड स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था पर काफी हद तक निर्भर करता है। ऐसे में पदोन्नत अधिकारियों के बीडीओ के रूप में कार्यभार संभालने से विकासखंडों में प्रशासनिक क्षमता बढ़ेगी। इसका सकारात्मक असर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित विकास योजनाओं, स्वयं सहायता समूहों, आजीविका गतिविधियों और अन्य ग्रामीण विकास कार्यक्रमों की निगरानी एवं क्रियान्वयन पर पड़ने की उम्मीद है।


*कर्मचारी सम्मान और जनहित—दोनों को प्राथमिकता*    कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी का यह निर्णय इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि इसमें कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित पदोन्नति के अधिकार का समाधान करने के साथ-साथ विकासखंडों में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया गया है।एक ओर कर्मचारियों को उनका हक और सम्मान मिला, तो दूसरी ओर विकासखंडों को अधिकारी—यानी इस फैसले से कर्मचारी हित के साथ ग्रामीण जनता के हित को भी मजबूती मिली है।

 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को हल्द्वानी स्थित शहीद स्मारक पहुंचकर अमर शहीदों को नमन किया और पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।



मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर शहीदों का बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा। राष्ट्र के प्रति उनका समर्पण, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि शहीद स्मारक भावी पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति और देश सेवा की प्रेरणा देता रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शहीदों के परिजनों के सम्मान एवं कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।


इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट, सांसद श्री अजय भट्ट सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन बोले- तकनीकी युग में साहित्य की भूमिका और भी महत्वपूर्ण*

*छात्र पाठ्यक्रम से आगे पढ़ें, आधुनिकता के साथ अपनी जड़ों से भी जुड़े रहें: मुख्य सचिव*


हरिद्वार:

DPS ranipur golden jublee programme


           डीपीएस स्कूल रानीपुर के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘द गोल्डन जुबली लिटरेसी फेस्टिवल-गोल्डन कंटिन्यूम : स्वर्ण अक्षर-2026’ में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य सचिव उत्तराखंड श्री आनंद वर्द्धन ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य सचिव ने दीप प्रज्वलित कर एवं राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन के साथ किया।


         कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव श्री आनंद वर्द्धन  ने कहा कि ‘स्वर्ण अक्षर’ नाम अपने आप में विशेष अर्थ रखता है। स्वर्ण अनमोलता का प्रतीक है, जबकि अक्षर मानव मन के विचारों, कल्पना और शक्ति को अभिव्यक्त करने का माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान के लिए 50 वर्षों की यात्रा एक महत्वपूर्ण उपलब्धि और गौरव का विषय है।


           उन्होंने कहा कि किसी संस्था का निर्माण केवल कक्षाओं और भवनों से नहीं, बल्कि छात्रों, शिक्षकों और उससे जुड़े लोगों के योगदान से होता है। आज का दौर तकनीकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है, ऐसे समय में साहित्य की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि चारों ओर उपलब्ध सूचना को ज्ञान नहीं कहा जा सकता। साहित्य व्यक्ति को प्रश्न पूछना, चिंतन करना और अपने ज्ञान का विस्तार करना सिखाता है।


         मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड का हिमालय, लोक परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत साहित्य के महत्व को रेखांकित करती हैं। उन्होंने छात्रों को पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर अधिक से अधिक साहित्य पढ़ने और निरंतर सीखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यालय के विकास में योगदान देने वाले शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि डीपीएस के छात्र विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।


           उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे समय-समय पर स्वयं से तीन सवाल जरूर पूछें—मैंने क्या सीखा, मैंने क्या योगदान दिया और मैंने किसकी मदद की। उन्होंने कहा कि आधुनिकता को अपनाते हुए अपनी संस्कृति, परंपराओं और जड़ों से जुड़े रहना आवश्यक है।


        इस अवसर पर डीपीएस रानीपुर की 50 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा पर आधारित शॉर्ट फिल्म का प्रदर्शन किया गया। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न शास्त्रीय एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।


       इस दौरान  जिला अध्यक्ष भाजपा आशुतोष शर्मा, शिवालिक नगर पालिका अध्यक्ष राजीव शर्मा, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, चीफ फाइनेंस ऑफिसर बीएचईएल राजेश कुमार द्विवेदी, कार्यकारी निदेशक बीएचईएल रंजन कुमार, स्कूल प्रिंसिपल अनुपम जग्गा, वाइस प्रिंसिपल डॉ पविंदर सिंह, वाइस प्रिंसिपल एकेडमिक्स श्रीमती अनुपमा श्रीवास्तव,प्रो-वाइस चेयरमैन डीपीएस रानीपुर एन एस राणा सहित अध्यापक अध्यापिका, छात्र छात्राएं एवं अभिभावक मौजूद रहे।

 

Rashifal

मेष

अ, आ, चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो

काम में मेहनत और नेतृत्व क्षमता का अच्छा इस्तेमाल कर पाएंगे। वरिष्ठों का सहयोग मिल सकता है। व्यापारिक योजनाओं को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाएं। नए सौदे में शर्तें ध्यान से देखें। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और अटका धन मिलने की संभावना है। पुराने मतभेद बातचीत से दूर किए जा सकते हैं। जीवनसाथी के साथ अच्छा समय रहेगा। ऊर्जा अच्छी रहेगी, लेकिन काम के बीच आराम करें।


वृषभ

ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो

काम का दबाव रह सकता है। विवादों से दूर रहकर अपने लक्ष्य पर ध्यान दें। निवेश के मामलों में सावधानी बरतें। साझेदारों के साथ पारदर्शिता रखें। अनियोजित खर्च बजट बिगाड़ सकते हैं, इसलिए खरीदारी पर नियंत्रण रखें। पार्टनर के विचारों को समझने की कोशिश करें। गले या पेट से जुड़ी हल्की परेशानी हो सकती है।


मिथुन

का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह

नेटवर्किंग और बातचीत से कामकाज में नए अवसर बन सकते हैं। मार्केटिंग और संचार से जुड़े कारोबार में गतिविधियां बढ़ सकती हैं। आय के नए स्रोत बन सकते हैं और वित्तीय मामले आपके पक्ष में रहेंगे। प्रेम जीवन में ताजगी रहेगी। साथ समय बिताने की योजना बन सकती है। मानसिक शांति बनी रहेगी। पर्याप्त नींद लें।


कर्क

ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो

सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। रुके हुए काम व्यवस्थित तरीके से पूरे करने पर ध्यान दें। नए संपर्क बन सकते हैं। किसी भी आर्थिक लेनदेन में लिखापढ़ी रखें। पैसों के लेनदेन में सतर्कता बरतें और बड़ा उधार देने से बचें। परिवार और जीवनसाथी से भावनात्मक सहयोग मिलेगा। पाचन तंत्र का ध्यान रखें और घर का हल्का भोजन करें।


सिंह

मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे

चंद्रमा के सिंह में होने से आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता मजबूत रह सकती है। नई जिम्मेदारी संभालने का अवसर मिल सकता है। कारोबार में नई रणनीति बनाने का अच्छा समय है। बड़े जोखिम से पहले सोच-विचार करें। आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा और निवेश से अच्छा रिटर्न मिल सकता है। दांपत्य जीवन में गर्मजोशी और आपसी समझ बनी रहेगी। ऊर्जा अच्छी रहेगी। अपनी दिनचर्या व्यवस्थित रखें।


कन्या

ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

ऑफिस की राजनीति से दूर रहें और अपने काम पर फोकस करें। प्रतिस्पर्धियों की गतिविधियों पर नजर रखें। कागजी मामलों में सावधानी बरतें। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। फिजूलखर्ची पर ब्रेक लगाएं। संवाद बनाए रखने से रिश्ते में गलतफहमियां नहीं बढ़ेंगी। थकान और आंखों में भारीपन हो सकता है।


तुला

रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते

टीम वर्क से काम बेहतर तरीके से पूरा होगा। सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। साझेदारी और व्यापारिक संपर्कों से नए अवसर मिल सकते हैं। धन का प्रवाह अच्छा रहेगा और रुका पैसा वापस मिलने के योग हैं। प्रेम संबंधों में मजबूती आएगी। अविवाहितों के लिए नए रिश्ते पर बातचीत हो सकती है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। योग और प्राणायाम लाभकारी रहेंगे।


वृश्चिक

तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

कठिन काम भी मेहनत से पूरे किए जा सकते हैं। अधिकारियों से संवाद अच्छा रखें। जोखिमभरे सौदों से बचें और पुराने आर्थिक दायित्वों को व्यवस्थित करें। पैसों के मामले में सतर्क रहें। लेनदेन संभलकर करें। जीवनसाथी के साथ भावनात्मक जुड़ाव बढ़ेगा। सिरदर्द या तनाव हो सकता है। आराम और पर्याप्त पानी का ध्यान रखें।


धनु

ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे

वरिष्ठों का मार्गदर्शन मिलेगा। अटके हुए काम पूरे करने पर ध्यान दें। नए समझौतों पर विचार कर सकते हैं। आर्थिक शर्तों की अच्छी तरह जांच करें। आय में वृद्धि के योग हैं। शेयर या म्यूचुअल फंड में समझदारी से निवेश फायदा देगा। पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताने का अवसर मिलेगा। मानसिक और शारीरिक रूप से सामान्य महसूस करेंगे।


मकर

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

निरंतर मेहनत से काम में प्रगति होगी। नई जिम्मेदारी मिल सकती है। रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन से जुड़े काम में नई संभावनाएं बन सकती हैं। धन संचय में सफलता मिलेगी। अचल संपत्ति की योजना बन सकती है। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा और परिवार में सामंजस्य बना रहेगा। घुटनों या जोड़ों में दर्द हो सकता है। अधिक भागदौड़ से बचें।


कुंभ

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा

रचनात्मक काम करने वालों को पहचान मिल सकती है। नौकरी से जुड़े नए विकल्प सामने आएंगे। तकनीकी क्षेत्र में नए प्रोजेक्ट और संपर्क मिल सकते हैं। आय-व्यय में संतुलन रहेगा। अचानक होने वाले खर्चों से बचें। पार्टनर के साथ मन की बात साझा करने से विश्वास मजबूत होगा। मानसिक तनाव कम करने के लिए ध्यान और आराम करें।


मीन

दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची

काम में प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। वरिष्ठों से सराहना मिल सकती है। दूर के बाजारों और ग्राहकों से नए संपर्क बन सकते हैं। धन की आवक सुचारू रूप से बनी रहेगी और आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। दांपत्य जीवन में प्रेम और समझ बनी रहेगी। ऊर्जा अच्छी रहेगी। योग और नियमित व्यायाम जारी रखें।




*सचिव आपदा प्रबंधन ने दिखाई हरी झंडी*

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 प्रदेश में ग्लेशियर झीलों से संभावित जोखिमों को कम करने तथा आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से चमोली जनपद स्थित सरस्वती ताल तथा उत्तरकाशी जनपद स्थित केदारताल के सर्वेक्षण के लिए विशेषज्ञ दल मंगलवार को रवाना हो गया है। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) से दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी तथा माननीय आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री श्री मदन कौशिक ने इस महत्वपूर्ण अभियान के लिए विशेषज्ञ दल को शुभकामनाएं दी हैं।

माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश में स्थित संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का व्यापक सर्वेक्षण एवं वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है। इसके अंतर्गत झीलों की वर्तमान स्थिति, जलस्तर, आकार में होने वाले परिवर्तन, आसपास के भू-भाग की स्थिति तथा संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों का आकलन किया जाएगा। मा0 मुख्यमंत्री ने कहा कि संभावित खतरे की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों तक समय रहते चेतावनी पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए आधुनिक सेंसर, जलस्तर मापक उपकरण, संचार प्रणाली तथा अन्य आवश्यक तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसी भी संभावित आपदा की स्थिति में समय रहते प्रभावी कदम उठाए जा सकें।

माननीय आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री श्री मदन कौशिक ने बताया कि ग्लेशियर झीलों से संभावित आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए सभी आवश्यक सुरक्षात्मक एवं जोखिम न्यूनीकरण उपायों पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां आपदा की स्थिति में सुरक्षित निकासी मार्ग, संभावित प्रभावित क्षेत्रों का चिन्हांकन, संचार व्यवस्था, स्थानीय स्तर पर चेतावनी तंत्र तथा राहत एवं बचाव की तैयारियों को मजबूत किया जाएगा।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखण्ड में कुल 13 ग्लेशियर झीलों को संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित किया गया है। इनमें से 04 ग्लेशियर झीलों का सर्वेक्षण किया जा चुका है, जबकि शेष संवेदनशील झीलों का भी चरणबद्ध तरीके से सर्वेक्षण एवं वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में चमोली जनपद स्थित सरस्वती ताल तथा उत्तरकाशी जनपद स्थित केदारताल का बैथीमेट्री सर्वेक्षण करने के लिए विशेषज्ञ दल को रवाना किया गया है। सर्वेक्षण के दौरान दोनों ग्लेशियर झीलों की वर्तमान स्थिति, जलस्तर, संभावित खतरे के कारकों तथा डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में पड़ने वाले संभावित प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा।

सचिव श्री सुमन ने बताया कि सरस्वती ताल लगभग 5700 मीटर तथा केदारताल लगभग 4750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। अत्यधिक ऊंचाई एवं कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में स्थित इन झीलों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण आपदा जोखिम न्यूनीकरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

वहीं माननीय उपाध्यक्ष, राज्य सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विभाग श्री विनय रुहेला तथा ले. कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी (सेवानिवृत्त) ने भी विशेषज्ञ दल को शुभकामनाएं दी हैं। इस अवसर पर एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, जेसीईओ श्री दिनेश कुमार पुनेठा आदि उपस्थित रहे। 


*विभिन्न विशेषज्ञ संस्थानों की संयुक्त भागीदारी*

देहरादून। सर्वेक्षण अभियान में विभिन्न विशेषज्ञ संस्थानों एवं सुरक्षा बलों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। विशेषज्ञ दल में यूएसडीएमए, यूएलएमएमसी, बाबा साहनी पुराविज्ञान संस्थान लखनऊ, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, एनआईएच रुड़की, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ तथा नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के विशेषज्ञ शामिल हैं। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की संयुक्त भागीदारी से ग्लेशियर झीलों की स्थिति, संभावित जोखिमों तथा डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव का बहुआयामी एवं वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। दल में श्री रोहित कुमार (यूएसडीएमए, देहरादून), श्री निखिल पुनिया (यूएसडीएमए, देहरादून), डॉ. विशाल (यूएलएमएमसी, देहरादून), श्री दीपक भट्ट (यूएलएमएमसी, देहरादून), डॉ. शेख नवाज अली (बीएसआईपी, लखनऊ), श्री शुभजीत घोष (बीएसआईपी, लखनऊ), श्री प्रकाश रंजन जेना (बीएसआईपी, लखनऊ), डॉ. पिंकी बिष्ट (वाडिया, देहरादून), श्री स्वप्निल बिष्ट (वाडिया, देहरादून), श्री शिव्यांक सिंह नेगी (वाडिया, देहरादून), श्री शिव शंकर यादव (एनआईएच, रुड़की), डॉ. शिवानंद मंडराहा (एनआईएच, रुड़की), श्री नितेश खेतवाल (एसडीआरएफ, देहरादून), श्री संदीप सिंह (एसडीआरएफ, देहरादून), श्री सचिन कुमार (एनडीआरएफ, गदरपुर), श्री मनीष कुमार (एनडीआरएफ, गदरपुर), श्री महेंद्र (जिला चमोली), श्री मनोज सिंह (जिला चमोली), श्री शार्दुल गुसाईं, डीडीएमओ (जिला उत्तरकाशी) तथा इंजी. नरेंद्र सिंह रावत (जिला उत्तरकाशी) शामिल हैं।

 

          


                    भारतीय जनसंघ (1951) एवं भारतीय जनता पार्टी (1980)  के संस्थापक सदस्य रहे राजा यादवेन्द्र दत्त दुबे का जन्म 07 दिसंबर 1918 को राजमहल में हुआ था। 

27 वर्ष की अवस्था में ही पिता राजा श्री कृष्ण दत्त जी महाराज के देहत्याग के पश्चात वैदिक विधि विधान के साथ राज्याभिषेक हुआ था। राज परिवार से जुड़े सभी संस्कारों -ब्यवहारों से सम्पन्न राजा साहब पहले तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े फिर राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई।            


  राजनीति में उनकी पकड़ इतनी मजबूत हो चुकी थी कि  स्वतंत्र भारत के प्रथम आम चुनाव (1952) में स्टार प्रचारक की भूमिका में रहे। लोगों को अपने कार्य व्यवहार एवं ओजस्वी भाषण से इतना प्रभावित किया कि द्वितीय विधानसभा चुनाव (9157) में जौनपुर सदर से प्रत्याशी घोषित कर दिया गया, और विजयी होकर जनसंपर्क में अपना अधिकांश समय देने लगे। 1962 में जौनपुर सदर से कांग्रेसी सरकार में गृह मंत्री रहे हरगोविंद सिंह जैसे लोकप्रिय नेता को हराकर उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता विरोधी दल की भूमिका में रहे। 1967 के आम चुनाव में बरसठी से विधायक बने। उन्होंने ने जिसे चाहा चुनाव लडाया और जिताया भी।           


यह दौर ऐसा था जब बीबीसी लंदन से राजा साहब के चुनाव का कवरेज होता था। एक बार तो बीबीसी लंदन ने यह कहा कि - राजा यादवेन्द्र दत्त दुबे एवं राममनोहर लोहिया के सामने खड़ा होने के लिए कोई कांग्रेसी प्रत्याशी तैयार नहीं है। जबकि उस दौर में कांग्रेस का ही बोलबाला था।                   राजा साहब 1977 एवं 1989 में दो बार सांसद रहे। संसद में उनके भाषण की चर्चा राजनीतिक हल्कों में हुआ करता था।                   


     जनसंघ के अध्यक्ष रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय को जौनपुर से उपचुनाव में प्रत्याशी घोषित किया गया कि राजा साहब के लोकप्रियता का लाभ मिलेगा। लेकिन बाहरी प्रत्याशी के नाम पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।                           

     राजा साहब को तीन बार जेल भी जाना पड़ा था । पहली बार  महात्मा गांधी की हत्या में  गोडसे द्वारा प्रयोग में लाई गई गाड़ी और पिस्तौल को राजा साहब का बताया गया और 60 दिनों तक नैनी सेंट्रल जेल में कठोर कारावास में रखा गया। जिसमें बाद में निर्दोष साबित हुए। फिर इमरजेंसी और राममंदिर शिलापूजन के समय जेल यात्रा करना पड़ा।           

   राज पीजी कॉलेज के प्राचार्य रहे प्रोफेसर (डॉ) अखिलेश्वर शुक्ला ने संसद में अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर राजा साहब के एक भाषण की चर्चा करते हुए  बताया कि -राजा साहब के लम्बे भाषण के चलते जब लोकसभा अध्यक्ष द्वारा समय समाप्त होने की बात कही गई तो प्रधानमंत्री रहे भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई और उप प्रधानमंत्री रहे लाल कृष्ण आडवाणी ने अपना समय भी राजा साहब को देने का आग्रह किया।  इस दौरान कांग्रेस के नेता सीएम स्टीफन ने भाषण के बीच में टोका टाकी शूरु कर दिया तो राजा साहब ने भोजपुरी में समक्षाते हुए कहा कि --"तोहार उमर चालीस होई आई --अबही ना गई तोहार लरिकाई" - इसके बाद पुरा सदन ठहाकों से गूंज उठा ।                        


                              हवेली राजनेताओं एवं आमजन के आने जाने से गुलजार रहता था।  राजा साहब स्वयं भी प्रायः गांवों का दौरा किया करते थे। स्मरण शक्ति इतनी प्रबल थी कि जो एक बार मिला उसे नाम से ही पुकारते थे।                

              राजमहल में संघ के द्वितीय सरसंघचालक गुरु गोलवलकर, भाऊराव देवरस, वेणुगोपाल, नानाजी देशमुख, पं दीनदयाल उपाध्याय, प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई, उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कलराज मिश्र, सहित अन्य दलों के नेताओं का भी आना जाना लगा रहता था।           

  राजा साहब स्वयं की गाड़ी एवं राजपरिवार का झंडा ही प्रयोग करते थे।                  

      राजा साहब हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत सहित विज्ञान एवं ज्योतिष की‌ भी अच्छी जानकारी रखते थे।                   

    वह जीवन का अंतिम दिन अंक गणित का सर्वोच्च अंक - 09-09-1999 को प्रातः 09 बजे जब राजा साहब ने शरिर त्याग किया तो उनके शव यात्रा में जो जनसैलाब उमड़ा वह न *भूतो न भविष्यति*। हवेली से रामघाट तक लोगों का रेला उमड़ पड़ा था। आगे गृह राज्यमंत्री, अनेकों राजनीतिज्ञ, व्यापारी से लेकर आमजन शवयाञा में शरीक थे।  जिस जगह पर चंदन की लकड़ी से दाह-संस्कार किया गया वहां की अग्नि आज भी निर्बाध गति से प्रज्वलित हो रही है और वही अग्नि अन्य शवदाह में प्रयुक्त किया जा रहा है।                                    राजा यादवेन्द्र दत्त दुबे जी को अपने तरफ से जनपद वासियों की तरफ से सत सत नमन सहित श्रद्धांजलि अर्पित  करता हूं  


         प्रोफेसर (कैप्टन) डॉ अखिलेश्वर शुक्ला, पूर्व प्राचार्य -राज पीजी कॉलेज जौनपुर -उतर प्रदेश।                     .

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