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मानसून अवधि के दौरान संभावित आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने हेतु प्रदेशभर में दिनाँक 02 जुलाई 2026 को आयोजित राज्यस्तरीय आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल में SDRF उत्तराखंड पुलिस की 37 टीमों ने सेनानायक श्री अर्पण यदुवंशी के निर्देशन में सक्रिय सहभागिता की। इस अभ्यास में SDRF ने जिला प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वित रूप से राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया।




मॉक ड्रिल के दौरान भूस्खलन, बादल फटना, सड़क दुर्घटना, बाढ़ तथा मार्ग अवरुद्ध होने जैसी काल्पनिक आपदा परिस्थितियाँ निर्मित कर त्वरित प्रतिक्रिया, खोज एवं बचाव, घायलों को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाने, संचार व्यवस्था तथा विभिन्न एजेंसियों के मध्य समन्वय का व्यावहारिक परीक्षण किया गया। इस संयुक्त अभ्यास का उद्देश्य वास्तविक आपदा की स्थिति में समयबद्ध एवं प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करना है।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए आपदा प्रबंधन से जुड़ी सभी एजेंसियों का सदैव तत्पर रहना आवश्यक है तथा इस प्रकार की मॉक ड्रिल आपदा से निपटने की तैयारियों को और अधिक सुदृढ़ बनाती हैं।


SDRF उत्तराखंड पुलिस द्वारा प्रदेशभर में आयोजित इस संयुक्त मॉक ड्रिल में पूर्ण समर्पण एवं दक्षता के साथ प्रतिभाग करते हुए अन्य विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया गया, जिससे मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारियों को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।


आन्‍ध्र प्रदेश कैडर के 1991 बैच के भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद खजूरिया ने 02.07.2026 को इन्‍दिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी (IGNFA), देहरादून के निदेशक का पद सँभाला। उन्होंने श्रीमती भारती की जगह ली है, जो 30.06.2026 को सेवानिवृत्त हुईं।  



इन्‍दिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी के निदेशक के रूप में कार्यभार सँभालने से पहले, वे आन्‍ध्र प्रदेश पर्यावरण प्रबंधन निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत थे।


भारतीय वन सेवा के आन्‍ध्र प्रदेश कैडर के 1991 बैच के अधिकारी डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद खजूरिया एक जाने-माने वन विशेषज्ञ और शिक्षाविद् हैं और उनके पास 35 वर्षों से अधिक का कार्य अनुभव है। 

वे मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं। उन्होंने कनाडा की टोरंटो यूनिवर्सिटी से पीएच.डी. की है और वन प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण तथा नीति निर्माण में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभा चुके हैं। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में कई शोध पत्र भी प्रकाशित किए हैं।


वे एक कुशल एवं योग्‍य अधिकारी हैं और 'अमृत काल' के उद्देश्यों के अनुरूप भारतीय वन सेवा प्रशिक्षण को उचित आकार देने के लिए एक स्पष्ट दृष्टिकोण रखते हैं। 

निदेशक का पद सँभालने के बाद, उन्होंने आईजीएनएफए के संकाय सदस्यों तथा कर्मचारियों से वार्ता की और अकादमी में चल रहीं विभिन्न गतिविधियों का जायजा लिया।


 

*राज्य में बनाया जायेगा विशेषज्ञ चिकित्सकों का पृथक कॉडर-स्वास्थ्य मंत्री*



नेशनल डॉक्टर्स डे के अवसर पर राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में आयोजित ‘‘पांचवें डॉक्टर ऑफ़ द ईयर’’ सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करेगी। इन सेंटर्स के माध्यम से राज्य के चिकित्सकों को भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार किया जाएगा।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने अपने संबोधन में कहा कि 2026 के अंत तक सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सभी रिक्त पदों में नियुक्ति हो जाएगी। साथ ही पदोन्नति को भी शत प्रतिशत पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टर्स का एक अलग से काडर बनाया जाएगा। उन्होंने सभी चिकित्सकों को स्ट्रेस फ्री लाइफस्टाइल अपनाने की सलाह दी। उन्होंने सभी मेडिकल कॉलेज को योग और मेडिटेशन के माध्यम से चिकित्सकों एवं मेडिकल छात्रों को मानसिक रूप से स्वस्थ रहकर देश और समाज की सेवा का आव्हान किया। 


मुख्य अतिथि स्वास्थ्य मंत्री सुबोध ने पूरे प्रदेश से चयनित 32 उत्कृष्ट डॉक्टर को इस वर्ष का ‘‘डॉक्टर ऑफ़ द ईयर’’ अवार्ड प्रदान किया। तीन डॉक्टर्स को आउटस्टैंडिंग लीडरशिप अवॉर्ड तथा तीन डॉक्टर्स को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।


कार्यक्रम के अध्यक्ष उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो (डॉ.) भानु दुग्गल ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य का इतना व्यवसायीकरण नहीं होना चाहिए कि समाज का एक तबका इसका लाभ ही ना ले सके। भारतीय चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डॉ जे. एन. नौटियाल ने स्वस्थ जीवन एवं सफल इलाज में आयुष चिकित्सा के महत्व को रेखांकित किया। स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलपति, डॉ. राजेंद्र डोभाल ने कहा कि उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश के मेडिकल कॉलेजों में नए डॉक्टरों में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की।


राजकीय दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉक्टर गीता जैन ने आज के दिन के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया की किस तरह से देश में राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस की शुरुआत हुई। इससे पूर्व अपने स्वागत संबोधन में कार्यक्रम के आयोजन एवं दिव्या हिमगिरि के संपादक कुंवर राज स्थान ने कार्यक्रम के विषय के बारे में बताया और इस वर्ष चयनित डॉक्टरों की प्रक्रिया और पूर्व के कार्यक्रमों के बारे में बताया।तथा धन्यवाद ज्ञापन एचएनबी उत्तराखंड मेडिकल एजुकेशन यूनिवर्सिटी के डीन एमके पंत ने दिया। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने डॉ योगेश्वरी को भी सम्मानित किया।


कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो (डॉ.) भानु दुग्गल ने की। इसके साथ ही विशिष्ट अतिथि के रूप में कपकोट के विधायक सुरेश गड़िया, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अरुण त्रिपाठी, स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ राजेंद्र डोभाल, दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ गीता जैन, भारतीय चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डॉ जे. एन. नौटियाल भी मंचासीन थे। कार्यक्रम के अंत में दून राजकीय मेडिकल कालेज की प्राचार्या गीता जैन एवं कार्यक्रम के संयोजक डॉ कुँवर राज अस्थाना ने मंचासीन सभी अतिथियों को मोमेंटो देकर सम्मानित किया।


*जिनको सम्मानित किया गया*


1. डॉ. राकेश रावत - वीसीएसजी गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च, श्रीनगर

2. डॉ. अच्युत नारायण पाण्डेय - वीसीएसजी गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च, श्रीनगर

3. डॉ. विनिता रावत कृ वीसीएसजी गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च, श्रीनगर

4. डॉ. अनिश गुप्ता कृ अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश

5. डॉ. पंकज कंडवाल - अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश

6. डॉ. सिद्धार्थ गुप्ता - दून ईएनटी हॉस्पिटल, देहरादून

7. डॉ. साशा लाबरू - नियोवाइज चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल, देहरादून

8. डॉ. आनंद कुमार गोयल - गौतम बुद्ध चिकित्सा महाविद्यालय, देहरादून

9. डॉ. तृप्ति चौधरी - गौतम बुद्ध चिकित्सा महाविद्यालय, देहरादून

10. डॉ. ज्योत्सना सेठ - सीमा डेंटल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, ऋषिकेश

11. डॉ. धीराज गुप्ता - गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार

12. डॉ. सुमन कुमारी पाण्डेय - गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार

13. डॉ. गोदावरी जोशी - गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी

14. डॉ. सुभाष जोशी - गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी

15. डॉ. हरि शंकर पाण्डेय - गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी

16. डॉ. विनिता गुप्ता - एसजीआरआर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंस, देहरादून

17. प्रो. डॉ. पंकज कुमार गर्ग - एसजीआरआर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंस, देहरादून

18. डॉ. (प्रो.) प्रशांत शारदा - एसजीआरआर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंस, देहरादून

19. डॉ. उर्मिला पलारिया - एसएसजे गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च, अल्मोड़ा

20. डॉ. अनिल पाण्डेय - एसएसजे गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च, अल्मोड़ा

21. डॉ. अमित कुमार सिंह - एसएसजे गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च, अल्मोड़ा

22. डॉ. जॉली अग्रवाल - गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, देहरादून

23. डॉ. श्रुति बर्नवाल - गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, देहरादून

24. डॉ. विवेकानंद सत्यवाली - गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, देहरादून

25. डॉ. सुबोध नौटियाल - गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, देहरादून

26. डॉ. शैली व्यास - हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, जॉलीग्रांट, देहरादून

27. डॉ. वीणा अस्थाना - हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, जॉलीग्रांट, देहरादून

28. डॉ. सिद्धांत खन्ना - कृष्णा मेडिकल सेंटर एंड मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून

29. डॉ. शिवम डंग - कृष्णा मेडिकल सेंटर एंड मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून

30. डॉ. अंजना टाक - उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, देहरादून

31. डॉ. पारुल शर्मा - उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, ऋषिकुल परिसर, हरिद्वार

32. डॉ. राजीव कुमार - उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, गुरुकुल परिसर, हरिद्वार

*लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड*


1. डॉ. महेश कुरियाल - अध्यक्ष, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), देहरादून

2. डॉ. जे. एन. नौटियाल - अध्यक्ष , भारतीय चिकित्सा परिषद, देहरादून

3. डॉ. यशवंत सिंह बिष्ट - प्रोफ़ेसर एंड हेड, हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, जॉलीग्रांट, देहरादून


*आउटस्टैंडिंग लीडरशिप अवॉर्ड*


1. डॉ. गीता जैन - प्राचार्य, गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज, देहरादून

2. डॉ. गोविन्द तितियाल - प्राचार्या, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी

3. डॉ. सौरभ वार्ष्णेय - अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश

मुख्यमंत्री धामी ने डॉक्टर्स डे पर चिकित्सकों को बताया “देवभूमि के आरोग्य प्रहरी”, सेवा भावना को किया नमन* 



 *स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण को लेकर उत्तराखंड सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री धामी* 

 *आयुष्मान भारत योजना से प्रदेश में 12 लाख से अधिक मरीजों को मिला निःशुल्क उपचार का लाभ* 

 *दुर्गम क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए टेलीमेडिसिन और हेली एंबुलेंस सेवाएं बनीं सहारा* 


 *चिकित्सकों की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री* 


 *स्वस्थ उत्तराखंड के निर्माण में चिकित्सकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी* 



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, देहरादून शाखा द्वारा  चकराता रोड देहरादून स्थित स्थानीय होटल में नेशनल डॉक्टर्स डे के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को डॉक्टर्स डे की शुभकामनाएं दीं तथा उत्कृष्ट चिकित्सकों को सम्मानित किया।


मुख्यमंत्री ने भारत रत्न डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती एवं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन चिकित्सा सेवा, मानव कल्याण और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सक केवल रोगों का उपचार करने वाले विशेषज्ञ नहीं होते, बल्कि वे समाज में विश्वास, उम्मीद और जीवन की नई ऊर्जा का संचार करते हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में चिकित्सकों को विशेष सम्मान दिया गया है। चिकित्सक अपनी सेवा, संवेदना और समर्पण से मानवता की सबसे बड़ी सेवा करते हैं। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में चिकित्सक कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच भी जनसेवा कर रहे हैं और पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती के महत्वपूर्ण आधार हैं।


उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों और समस्त स्वास्थ्य योद्धाओं के योगदान को याद करते हुए कहा कि संकट के उस दौर में स्वास्थ्य कर्मियों ने अपने कर्तव्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। अनेक चिकित्सकों ने मानव जीवन की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान तक दिया, उनका त्याग सदैव प्रेरणादायी रहेगा।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उत्तराखंड में आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से लाखों जरूरतमंद परिवारों को कैशलेस उपचार की सुविधा मिल रही है। प्रदेश में अब तक 62 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं तथा लगभग 12 लाख से अधिक मरीजों को 2300 करोड़ रुपये से अधिक का निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया गया है।


उन्होंने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए मेडिकल कॉलेजों, नर्सिंग संस्थानों और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में पांच मेडिकल कॉलेज संचालित हैं जबकि दो मेडिकल कॉलेज निर्माणाधीन हैं। इसके साथ ही नर्सिंग शिक्षा को भी मजबूत किया जा रहा है।


मुख्यमंत्री ने बताया कि देहरादून, हल्द्वानी और श्रीनगर मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को बढ़ाया जा रहा है। हल्द्वानी में आधुनिक कैंसर संस्थान का निर्माण प्रगति पर है। जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। किच्छा में एम्स के सेटेलाइट सेंटर का निर्माण भी अंतिम चरण में है।


उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार किया गया है। इसके साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में हेली एंबुलेंस सेवा भी लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हो रही है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्तियों पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चिकित्सकों की सुरक्षा, सम्मान और उनके बेहतर कार्य वातावरण को सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। किसी भी चिकित्सक के साथ हिंसा या अभद्र व्यवहार को स्वीकार नहीं किया जाएगा।


उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक जैसे डिजिटल हेल्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेलीमेडिसिन स्वास्थ्य सेवाओं में नए अवसर लेकर आई हैं, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत समर्पित मानव संसाधन ही है। मरीज के लिए चिकित्सक उपचार के साथ विश्वास और संवेदना का प्रतीक होता है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार, चिकित्सा संस्थानों, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और समाज के सामूहिक प्रयासों से उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में सेवा दे रहे चिकित्सकों का योगदान विशेष रूप से सराहनीय है।


मुख्यमंत्री ने सभी चिकित्सकों से अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने का आह्वान किया और कहा कि स्वस्थ चिकित्सक ही स्वस्थ समाज के निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकता है।


उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि उत्तराखंड का प्रत्येक नागरिक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ सके और सभी के सहयोग से एक स्वस्थ, सशक्त एवं आत्मनिर्भर उत्तराखंड का निर्माण किया जाएगा।



इस अवसर पर विधायक श्रीमती सविता कपूर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारी, चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉक्टर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


 विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को प्रदान किए गए मान्यता प्रमाण पत्र* 

 " *वन नेशन-वन एजुकेशन" की दिशा में उत्तराखण्ड की ऐतिहासिक पहल, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का शुभारंभ* 

 *धामी सरकार का बड़ा फैसला : सभी अल्पसंख्यक समुदायों को समान शैक्षणिक अवसर देने की नई व्यवस्था लागू*

 किताब-कॉपी और कौशल से सशक्त होगा अल्पसंख्यक समाज, शिक्षा को बनाया विकास का आधार : मुख्यमंत्री*

 *आस्था और आधुनिकता के संतुलन के साथ उत्तराखण्ड में शिक्षा व्यवस्था का नया युग शुरू* 

Madarsa Board  closed in uttarakhand


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र भी वितरित किए।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अल्पसंख्यक विद्यालयों के विद्यार्थियों को एन.सी.ई.आर.टी. की पुस्तकें भी भेंट कीं और कहा कि गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा की दिशा में यह पहल विद्यार्थियों के भविष्य को मजबूत आधार प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड देवभूमि होने के साथ-साथ ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्म की समृद्ध परंपरा वाली भूमि रही है। इस पवित्र धरती ने सदियों से विश्व को ज्ञान और संस्कार का संदेश दिया है। ऐसे में राज्य की जिम्मेदारी है कि शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखण्ड देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित हो।

उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य के साथ राज्य सरकार ने समाज के सभी वर्गों को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और संस्कारयुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 1 जुलाई 2026 से उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना की है। इसके साथ ही मदरसा बोर्ड को समाप्त कर नई व्यवस्था लागू की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल एक संस्था की शुरुआत नहीं, बल्कि राज्य के प्रत्येक बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने वाला निर्णय है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक बच्चे को समान अवसर मिले और वह आधुनिक शिक्षा, तकनीक एवं कौशल के माध्यम से आगे बढ़ सके।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय ज्ञान, नवाचार और तकनीक का युग है। एआई, मशीन लर्निंग, डिजिटल तकनीक और नए कौशल भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं। ऐसे में आवश्यक है कि उत्तराखण्ड का कोई भी बच्चा विकास की इस यात्रा से पीछे न छूटे।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना किसी समुदाय की पहचान या परंपराओं को प्रभावित करने के लिए नहीं, बल्कि सभी वर्गों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है। सरकार का प्रयास है कि बच्चे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए विज्ञान, गणित, कंप्यूटर, कौशल विकास और आधुनिक शिक्षा में दक्ष बनें।

उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज को सशक्त, आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने का सबसे प्रभावी साधन है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से युवा न केवल अपने जीवन को बेहतर बनाते हैं बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत सभी अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों को समान अवसर प्रदान किए जाएंगे। पहले की व्यवस्थाओं में जिन वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया, उन्हें भी अब शिक्षा के क्षेत्र में बराबरी का अवसर मिलेगा।


उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने देश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी है। यह नीति केवल डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि कौशल, नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता और रोजगार से जोड़ने पर बल देती है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट कक्षाओं, कौशल विकास, स्टार्टअप और आधुनिक प्रशिक्षण को बढ़ावा दे रही है ताकि राज्य का युवा भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सके।


उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल मान्यता देने वाली संस्था नहीं होगा, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शी व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन का मजबूत माध्यम बनेगा।


मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जिन संस्थानों को मान्यता प्रदान की जा रही है, वे केवल प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं कर रहे, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में नई सोच और नई व्यवस्था के सहभागी बन रहे हैं। इन संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे ज्ञानवान, संस्कारित, संवेदनशील और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक तैयार करें।


उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता है। अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं के बावजूद भारतीयता सभी को जोड़ने वाली शक्ति है। राज्य सरकार इसी भावना के साथ सभी वर्गों के विकास के लिए कार्य कर रही है।


मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में यह प्राधिकरण हजारों बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा और उत्तराखण्ड को गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाएगा।

उन्होंने धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों, शिक्षण संस्थाओं और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों से इस पहल को सफल बनाने में सहयोग की अपील की।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी,  श्री प्रदीप बत्रा, विधायक श्री उमेश शर्मा काउ, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह सहित जनप्रतिनिधिगण, विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के धर्मगुरु, शिक्षाविद एवं शिक्षण संस्थाओं के प्रबंधक उपस्थित रहे।


 

DM Dehradun coronation hospital



*आईसीयू में एसी बंद, रजिस्टर अधूरे, वार्डों में गंदगी; डीएम ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश*

*लावारिस मरीज के लिए देवदूत बने जिलाधिकारी, तत्काल मिली इमरजेंसी चिकित्सा*


देहरादून :

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बुधवार की रात ठीक 8ः00 बजे जिला कोरोनेशन अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। अचानक हुए इस निरीक्षण से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में लापरवाही, गंदगी और घोर अनियमितताओं की परतें खुलती चली गईं, जिस पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (ब्डव्) और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (ब्डै) की एक संयुक्त समिति गठित कर तत्काल रिपोर्ट तलब की है।


*आईसीयू में उमस, रजिस्टर खाली और पीआरओ पर गिरी गाज*

जिलाधिकारी जब सबसे पहले आईसीयू  वार्ड में पहुंचे, तो वहां की स्थिति बेहद चौंकाने वाली थी। जीवन रक्षक माने जाने वाले आईसीयू में मानक के विपरीत एयर कंडीशन बंद पड़ा था, जिससे मरीज उमस और सफोकेशन (घूटन) से बेहाल थे। हैरान करने वाली बात यह रही कि अस्पताल के पीआरओ (च्त्व्) को कई बार कहने के बाद भी एसी चालू नहीं कराया गया, जिस पर डीएम ने पीआरओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश देते हुए सीएमएस से जवाब मांगा है। इसके अलावा, आईसीयू के स्टॉक रजिस्टर में 29 जून से दवाओं का कोई विवरण नहीं था और सिस्टर इंचार्ज आकस्मिक अवकाश पर पाई गईं। कार्मिकों के उपस्थिति रजिस्टर में भी भारी खामियां मिलीं।


*गंभीर मरीज को अनावश्यक रेफर करने पर जताई नाराजगी*

अस्पताल के बाल रोग कक्ष, पुरुष, महिला और सर्जरी वार्डों का हाल भी बदतर मिला। पुरुष वार्ड में लीवर की बीमारी से पीड़ित एक ऐसे मरीज को रेफर करने की तैयारी थी, जो अस्पताल में ही रिकवर हो सकता था। इस अनावश्यक रेफरल पर डीएम ने सख्त आपत्ति जताई। यही नहीं, मरीज को ओढ़ने के लिए फटी हुई कंबल दी गई थी, जिस पर अस्पताल मैटर्न से स्पष्टीकरण मांगते हुए सभी फटे कंबलों को तत्काल कंडम (नष्ट) करने का आदेश दिया गया।


अस्पताल की लिफ्ट में चारों तरफ पान की पीक और गंदगी पसरी थी, जबकि सुरक्षा के लिहाज से लिफ्ट में सीसीटीवी कैमरा तक नहीं लगा था। महिला शौचालय में पुरुष यूरिनल लगा देख जिलाधिकारी ने व्यवस्था पर भारी नाराजगी व्यक्त की।


*लावारिस मरीज के लिए देवदूत बने जिलाधिकारी*

सर्जरी वार्ड में जिलाधिकारी एक लावारिस मरीज के लिए साक्षात देवदूत बनकर पहुंचे। उस वक्त मरीज की हालत बेहद नाजुक थी और उसका शुगर लेवल 40ः से भी कम हो चुका था, लेकिन उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। मरीज के पास गंदगी का अंबार था और बासी खाने की प्लेटें छूटी हुई थीं। जिलाधिकारी की सक्रियता के चलते मरीज को तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। प्रशासनिक अमले के पहुंचने की भनक लगते ही डीएम के आने से महज पांच मिनट पहले वार्ड में आनन-फानन में पोछा लगाया जा रहा था।


जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सीएमओ और सीएमएस को संयुक्त रूप से अस्पताल की इन सभी परिलक्षित कमियों और व्यवस्थागत खामियों को तत्काल दूर करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं, ताकि आम जनता को बेहतर और सम्मानजनक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।


इस दौरान जिलाधिकारी ने वार्ड में मरीजों से बात करते हुए उनका हाल जाना और अस्पताल से मिल रही सुविधाओं का फीडबैक भी लिया। निरीक्षण के दौरान आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी मनीष शर्मा सहित अस्पताल के अन्य चिकित्सा अधिकारी मौजूद थे।

 

 

*02 जुलाई को सहसपुर से होगा विकसित भारत-ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका मिशन (VB-GRAM G) का शुभारंभ*

*ग्राम्य विकास मंत्री की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित होगा प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम, स्वयं सहायता समूहों एवं ग्रामीणों की रहेगी व्यापक सहभागिता*


*देहरादून, 




मुख्य विकास अधिकारी देहरादून अभिनव शाह ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य रोजगार गारंटी प्रकोष्ठ, उत्तराखण्ड शासन एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार विकसित भारत-ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका मिशन (VB-GRAM G) का शुभारंभ 01 जुलाई 2026 से किया जा रहा है। इसी क्रम में 02 जुलाई 2026 को प्रातः 11:00 बजे विकासखण्ड परिसर, सहसपुर में प्रदेश स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में  मंत्री, ग्राम्य विकास विभाग, उत्तराखण्ड सरकार की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, आजीविका संवर्धन तथा स्वयं सहायता समूहों को और अधिक सशक्त बनाते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करना है।

मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान मा0 केंद्रीय ग्राम्य  विकास मंत्री द्वारा VB-GRAM G के पंजीकृत श्रमिकों से संवाद स्थापित किया जाएगा तथा स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित गतिविधियों एवं आजीविका मॉडल का प्रदर्शन भी किया जाएगा। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों, ग्रामीणों एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों की सहभागिता रहेगी।

मुख्य विकास अधिकारी  ने जनपद के विकासखण्ड अधिकारी कालसी, विकासनगर एवं सहसपुर को निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने विकासखण्डों से अधिकाधिक संख्या में स्वयं सहायता समूहों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित करें। उन्होंने अधिकारियों को कार्यक्रम की सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध एवं सुव्यवस्थित ढंग से पूर्ण करने तथा कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए समुचित समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी दिए हैं।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत-ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका मिशन (VB-GRAM G) ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, स्वयं सहायता समूहों को सशक्त आधार मिलेगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सतत एवं समावेशी विकास को नई गति प्राप्त होगी।


*ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, अनधिकृत डंपिंग व मानकविहीन प्लांटों पर होगी कड़ी कार्रवाई-डीएम*


देहरादून :


जनपद में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बुधवार को नगर निगम, नगर पालिकाओं, जिला पंचायत, छावनी परिषद तथा सभी उप जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वच्छ एवं प्रदूषणमुक्त देहरादून के लक्ष्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि मा० उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्रियान्वयन के लिये एक प्रकोष्ठ का गठन किया जाए। नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत, जिला पंचायत, छावनी परिषद् द्वारा समस्त निर्वाचित प्रतिनिधियों, पार्षदों, वार्ड मेम्बरों को उपलब्ध करायी जाए। प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी सदस्य नामित करें, जो मौका मुआयना कर डम्प साइट व अन्य कूड़ा प्रबन्धन कार्याे के चित्र व प्रमाण सहित आख्या प्रस्तुत करें। एसडब्ल्यूएम का परिहन स्थानीय निकाय से अनाधिकृत वाहनों से न हो, जिससे अनाधिकृत डम्प साईट न बनें।

जिलाधिकारी ने सभी एसडीएम को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित अनधिकृत कचरा डंपिंग स्थलों तथा बल्क वेस्ट जनरेटरों का चिन्हांकन कर विस्तृत विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को वैज्ञानिक एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित करना सभी संबंधित विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

जिलाधिकारी ने बायो-रिमेडिएशन प्लांटों का स्थलीय निरीक्षण कर उनकी कार्यप्रणाली का आकलन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो प्लांट निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं, उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

उन्होंने ऋषिकेश, विकासनगर, देहरादून सहित जनपद की सभी सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग साइटों का निरीक्षण करने तथा नगर निगमों द्वारा किए जा रहे लीगेसी वेस्ट के निस्तारण कार्यों की दो दिनों के भीतर जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।

बैठक में जिलाधिकारी ने नगर निगमों एवं छावनी परिषद क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों का फोटोग्राफ सहित विस्तृत प्रस्तुतीकरण (प्रेजेंटेशन) तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि कार्यों की गुणवत्ता एवं प्रगति का प्रभावी मूल्यांकन किया जा सके।


बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, उप जिलाधिकारी अपर्णा ढौंडियाल, नगर आयुक्त ऋषिकेश विजयनाथ शुक्ला, विभिन्न नगर पालिकाओं के अधिशासी अधिकारी तथा वर्चुअल माध्यम से सभी उप जिलाधिकारी एवं छावनी परिषद के अधिकारी उपस्थित रहे।


         

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सुवाखोली और किंगरेट पिक्चर पैलेस मार्ग पर प्रवर्तन कार्रवाई, नियमों के उल्लंघन पर प्राधिकरण की सख्ती बरकरार*


 मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ अपना अभियान और तेज करते हुए बुधवार को मसूरी क्षेत्र में दो अलग-अलग स्थानों पर सीलिंग की कार्रवाई की। प्राधिकरण की टीम ने स्वीकृत मानचित्र के विपरीत तथा बिना वैधानिक अनुमति किए जा रहे निर्माणों को सील कर स्पष्ट संदेश दिया कि विकास प्राधिकरण की अनुमति के बिना या स्वीकृत मानचित्र से हटकर किए जाने वाले निर्माण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।


एमडीडीए की प्रवर्तन टीम ने सबसे पहले चम्बा-टिहरी मोटर मार्ग स्थित सुवाखोली क्षेत्र में कार्रवाई की। यहां विनोद बिष्ट द्वारा स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण कार्य कराया जा रहा था। निरीक्षण में अनियमितताएं पाए जाने के बाद प्राधिकरण ने भवन को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। संबंधित निर्माण में भवन उपविधियों का उल्लंघन किया गया था, जिसके चलते नियमानुसार कार्रवाई की गई। इसके बाद प्राधिकरण की टीम ने मसूरी के किंगरेट पिक्चर पैलेस मार्ग पर पहुंचकर सुसमा जैसवाल द्वारा कराए जा रहे अवैध निर्माण का निरीक्षण किया। जांच में निर्माण कार्य नियमानुसार न पाए जाने पर संबंधित भवन को भी सील कर दिया गया। दोनों कार्रवाइयों के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा और पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।


एमडीडीए अधिकारियों ने बताया कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ लगातार निगरानी की जा रही है। जहां भी बिना स्वीकृति निर्माण या स्वीकृत मानचित्र के विपरीत कार्य होने की सूचना मिल रही है, वहां तत्काल निरीक्षण कर विधिक कार्रवाई की जा रही है। अभियान का उद्देश्य केवल नियमों का पालन सुनिश्चित करना ही नहीं, बल्कि मसूरी जैसे संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्र में सुनियोजित, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल विकास को बढ़ावा देना भी है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी अवैध निर्माणों के विरुद्ध अभियान पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा और किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर सीलिंग, ध्वस्तीकरण सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। 

सीलिंग अभियान के दौरान सहायक अभियंता अजय मलिक, अवर अभियंता अनुराग नौटियाल, सुपरवाइजर तथा पुलिस बल मौजूद रहा। अधिकारियों ने नियमानुसार पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए दोनों स्थानों पर सीलिंग की कार्रवाई संपन्न कराई। प्राधिकरण ने कहा कि प्रवर्तन दल नियमित रूप से क्षेत्र का निरीक्षण कर रहा है और अवैध निर्माणों के विरुद्ध अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।


*उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी बोले: कानून से ऊपर कोई नहीं, अवैध निर्माणों पर होगी लगातार कार्रवाई*


मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में नियोजित एवं सुरक्षित विकास सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बिना स्वीकृति या स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किए जाने वाले निर्माण न केवल भवन निर्माण नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि भविष्य में जनसुरक्षा और शहरी व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन सकते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में किसी प्रकार की ढील नहीं बरती जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी भवन स्वामी निर्माण शुरू करने से पहले आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करें और स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप ही निर्माण कराएं। एमडीडीए का प्रवर्तन अभियान आगे भी पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और सख्ती के साथ जारी रहेगा तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सीलिंग, ध्वस्तीकरण और अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।


*सचिव मोहन सिंह बर्निया ने की नियमों के पालन की अपील*


प्राधिकरण के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि एमडीडीए लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रहा है और शिकायत मिलने पर तत्काल जांच की जाती है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले सभी आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करें तथा स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप ही निर्माण कराएं। नियमों का पालन करने से अनावश्यक कानूनी कार्रवाई से बचा जा सकता है और क्षेत्र का सुव्यवस्थित विकास सुनिश्चित होगा।

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