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देहरादून :




राज्य की बेशकीमती जमीनों को औने पौने दामों पर बेचने का लगाया आरोप। सरकारी जमीने बेचने के निर्णयों को निरस्त कर संपत्तियों को उनके मूल विभागों को लौटाने की कीगई मांग।


मंत्री गणेश जोशी की आय से अधिक सम्पत्ति मामले में न्यायालय के निर्देशों का पालन करने। सहकारिता विभाग मे कोरोना काल में हुई नियुक्तियों की जांच करने तथा एमबीबीएस में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुए एडमिशनों की जांच करने की मांग।


प्रदेश कांग्रेस कमेटी के 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने आज राज्यपाल से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन प्रेषित करते हुए धामी सरकार पर राज्य की बेशकीमती जमीनों को औने-पौने दामों पर बेचने का आरोप लगाते हुए सरकार के निर्णयों को निरस्त करने की मांग की।

राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 154 के अनुसार राज्य की कार्यपालिका शक्ति आपमें निहित है और अनुच्छेद 166 के अनुसार राज्य सरकार की समस्त कार्यवाही आपके नाम से होती है। जिन शासनादेशों से उत्तराखंड की सरकारी जमीनें और धरोहर भवन निजी हाथों में सौंपे जा रहे हैं, वे भी “श्री राज्यपाल की स्वीकृति” के नाम से जारी हुए हैं। इसलिए राज्य की इन संपत्तियों के संवैधानिक संरक्षक आप हैं। इसी विश्वास के साथ उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी आपके संज्ञान में निम्न तथ्य लाना चाहती हैः-

1. मंत्रिपरिषद की शक्ति एक व्यक्ति के हाथ मेंः 20 दिसंबर 2022 के कैबिनेट निर्णय संबंधी शासनादेश द्वारा सभी विभागों की सरकारी भूमि पर अंतिम निर्णय का अधिकार मुख्यमंत्री को दे दिया गया। राज्य कैबिनेट का यह निर्णय भारत के संविधान के अनुच्छेद 164(2) के सामूहिक उत्तरदायित्व और कार्य नियमावली के नियम 3 (प्रभारी मंत्री) तथा नियम 7 (बहुविभागीय मामलों में परामर्श) के विपरीत है।

2. जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट, मसूरीः कैबिनेट के इस निर्णय के बाद उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद द्वारा हजारों करोड़ रुपये बाजार भाव वाली जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट, मसूरी की 142 एकड़ भूमि और राष्ट्रीय धरोहर 15 साल के लिए लगभग 1 करोड़ रुपये सालाना किराये पर एक निजी कंपनी को दे दी गई। प्रकाशित कंपनी अभिलेखों के अनुसार टेंडर की तीनों बोलीदाता कंपनियाँ एक ही व्यक्ति से जुड़ी थीं। सरकारी संपत्ति को इस प्रकार लीज पर देने का अधिकार किसी को नहीं था। मुख्यमंत्री द्वारा भूमि संबंधी निर्णय लेने के अधिकारों को अपने स्तर पर केंद्रित करने तथा बाजार में प्रतिस्पर्धा का आभास उत्पन्न कर सरकारी संपत्तियों के निजी आवंटन की प्रक्रिया अपनाने को लेकर गंभीर संवैधानिक एवं प्रशासनिक सवाल उत्पन्न हुए हैं।

3. जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट को लीज पर देने की प्रक्रिया में कार्य नियमावली (रूल्स ऑफ बिजनेस) और तब उत्तराखंड में प्रचलित “उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली” आदि के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ। इन निर्णयों की वैधानिकता और उनके लिए अपनाई गई प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा आवश्यक है।

4. यू0आई0आई0डी0बी0 अधिनियम, 2023 का उल्लंघनः सरकारी भूमियों और संपत्तियों के संबंध में बनाए गए यू0आई0आई0डी0बी0 अधिनियम, 2023 की धारा 28(3)(घ) के अनुसार हर परियोजना पर सरकार और संबंधित विभाग का अनुमोदन अनिवार्य है, और धारा 28(4) के अनुसार मुद्रीकरण राज्य सरकार के निर्देश पर ही हो सकता है। बाद में मूल विभाग की सहमति की शर्त यह कहकर हटा दी गई कि मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। सरकारी भूमियों और संपत्तियों को लीज हेतु यू0आई0आई0डी0बी0 को हस्तांतरित करने वाली फाइलों में किसी विभागीय मंत्री की सहमति दर्ज नहीं है।

5. सरकारी जमीनों और संपत्तियों को यू0आई0आई0डी0बी0 को देने के सभी निर्णय मुख्यमंत्री ने अकेले लिएः नियोजन विभाग की पत्रावली पर मुख्यमंत्री के अनुमोदन (जनवरी 2025) से शासनादेश संख्या 28, दिनांक 15.01.2025 जारी हुआ, जिससे पटवाडांगर, नगऊ, धनौल्टी और मगरा की भूमि दी गई। ई-पत्रावली ई-93327 के नोट 19 पर मुख्यमंत्री के अनुमोदन (19.11.2025) से आई0डी0पी0एल0 ऋषिकेश, डाकपत्थर, रामगढ़, एच0एम0टी0 रानीबाग, पाटकोट-मरचूला, सलेमपुर महमूद और माजरी ग्रांट की भूमि का रास्ता खुला और शासनादेश संख्या 815, दिसंबर 2025 जारी हुआ। पत्रावलियों से स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री जी ने सरकारी विभागों की संपत्तियों को लीज पर देने अथवा बेचने का निर्णय अकेले लिया है। यू0आई0आई0डी0बी0 अधिनियम, 2023 के अनुसार ये निर्णय बोर्ड द्वारा लिए जाने थे, अकेले मुख्यमंत्री इन्हें नहीं ले सकते थे। जमीनें अनुशंसा समिति की संस्तुति पर दी गई हैं, जबकि यू0आई0आई0डी0बी0 अधिनियम, 2023 में अनुशंसा समिति का कहीं उल्लेख नहीं है। जमीनों और संपत्तियों को यू0आई0आई0डी0बी0 को हस्तांतरित करते समय संवैधानिक प्रावधानों, कार्य नियमावली (रूल्स ऑफ बिजनेस) तथा यू0आई0आई0डी0बी0 अधिनियम, 2023 के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है।

6. बिना राजस्व अभिलेख और बिना पैमाइश के हस्तांतरणः 15 जनवरी 2025 को पटवाडांगर की भूमि यू0आई0आई0डी0बी0 को हस्तांतरित करने के लिए जारी शासनादेश में इस भूमि को “कृषि विभाग की” बताया गया है, जबकि राजस्व विभाग ने 04.09.2025 को अधिसूचना संख्या 661 से गाँव का सर्वेक्षण शुरू किया और राजस्व परिषद ने 09.09.2025 के पत्र संख्या 2708 में लिखा कि यह 108 एकड़ भूमि “वन विभाग एवं राजस्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज नहीं” है। डाकपत्थर की भूमि भी बंदोबस्त पूरा हुए बिना और बिना खसरा संख्या के दे दी गई। बिना राजस्व अभिलेखों और स्पष्ट मालिकाना हक के भूमि का हस्तांतरण राज्य में प्रचलित भू-राजस्व अधिनियम तथा जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम का उल्लंघन है।

7. शासनादेशों की अपनी शर्तों और वन कानून का उल्लंघनः भूमि और संपत्ति हस्तांतरण के लिए निर्गत सभी शासनादेशों की शर्त है कि धार्मिक या ऐतिहासिक महत्व की इमारत वाली भूमि नहीं दी जाएगी और भूमि केवल अनुमोदित परियोजना के लिए दी जाएगी। इनमें से कोई भी परियोजना अनुमोदित नहीं है। हर की पैड़ी का अलकनंदा होटल और ऋषिकेश सहित 25 निरीक्षण भवन (जिनमें 1866 से 1928 तक के ब्रिटिशकालीन भवन भी हैं) इस सूची में हैं। रामगढ़ के राजकीय उद्यान की 8 हेक्टेयर भूमि में से लगभग 4 हेक्टेयर घना वन है, जिसका गैर-वन उपयोग वन संरक्षण कानून के विरुद्ध है।

8. मूल्य तय किए बिना 90 साल की लीजः अनुशंसा समिति के 29.08.2025 के कार्यवृत्त के अनुसार भूमि के मूल्य और राजस्व साझेदारी पर चर्चा “आगामी बैठक” में होनी थी, फिर भी पटवाडांगर की 13.64 एकड़ भूमि 90 साल के लिए 37.80 करोड़ रुपये के रिजर्व प्राइस पर टेंडर कर दी गई। नैनीताल शहर के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट को होटल परियोजना के लिए वहाँ से हटाने के निर्देश दिए गए। प्रचलित बाजार भाव के अनुसार कम से कम 1,00,000 करोड़ रुपये की ये 40 सरकारी संपत्तियाँ राज्य के 13 में से 12 जिलों में हैं।

अतः आपसे निवेदन है किः-

(1). जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट से संबंधित सभी पत्रावलियाँ मँगाई जाएँ, नियम विरुद्ध की गई जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की लीज निरस्त की जाए और पूरे मामले की उच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जाँच कराई जाए।

(2). 20 दिसंबर 2022 के कैबिनेट निर्णय के अंतर्गत मुख्यमंत्री द्वारा अकेले लिए गए सभी निर्णय तथा उनसे जारी शासनादेश निरस्त किए जाएँ।

(3) यू0आई0आई0डी0बी0 के तीनों टेंडर, पटवाडांगर (टेंडर संख्या 97862/2026), अलकनंदा होटल हरिद्वार (टेंडर संख्या 99265/2026) और ऋषिकेश निरीक्षण भवन (टेंडर संख्या 99301/2026), तत्काल निरस्त किए जाएँ।

(4). यू0आई0आई0डी0बी0 और सिडकुल को दी गई सभी जमीनें और संपत्तियाँ उनके मूल विभागों को वापस की जाएँ, और लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवनों को पी0पी0पी0 में देने की प्रक्रिया रोकी जाए।


उपरोक्त के अलावा निम्नलिखित महत्वपूर्ण प्रकरणों की ओर भी आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहते हैंः-


1. कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति का मामलाः

राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में माननीय न्यायालय द्वारा मुकदमा दर्ज करने की अनुमति से संबंधित निर्देश दिये जाने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा अभी तक आवश्यक अनुमति प्रदान नहीं की गई है। यह अत्यंत गंभीर विषय है कि जब किसी जनप्रतिनिधि के विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामले में न्यायालय द्वारा निर्देश दिये गये हों, तब सरकार की ओर से कार्रवाई में देरी क्यों की जा रही है? इससे सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति कथित जीरो टॉलरेंस की नीति पर भी सवाल उठते हैं। अतः इस मामले में तत्काल वैधानिक अनुमति एवं निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए।


2. कोरोना काल में सहकारिता विभाग की भर्तियों में कथित घोटालाः

कोरोना महामारी के दौरान जब आम नागरिकों को घरों से बाहर निकलने तक की अनुमति नहीं थी तथा पूरा देश अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा था, उस समय प्रदेश के सहकारिता मंत्री श्री धन सिंह रावत के कार्यकाल में राज्य से बाहर प्रतियोगी परीक्षा आयोजित कर सहकारिता विभाग में भर्तियां की गईं। इन भर्तियों में कथित रूप से अभ्यर्थियों से 20-20 लाख रुपये लेकर नौकरियां बेचे जाने के गंभीर आरोप सामने आये हैं। यह प्रकरण न केवल युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि प्रदेश की भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। इस पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच एजेंसी से जांच कराई जानी अत्यंत आवश्यक है, ताकि दोषियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सके।

3. एमबीबीएस दाखिलों में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामलाः

विगत वर्ष प्रदेश में एमबीबीएस की कई सीटों पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिले किये जाने का मामला प्रकाश में आया था। चिकित्सा शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में इस प्रकार की अनियमितताएं न केवल योग्य एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के अधिकारों का हनन हैं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और गुणवत्ता के लिए भी गंभीर खतरा हैं। दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने गंभीर मामले में अभी तक प्रभावी एवं निर्णायक जांच सामने नहीं आई है। अतः इस प्रकरण की समयबद्ध जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए तथा अनुचित तरीके से प्राप्त दाखिलों के संबंध में नियमानुसार निर्णय लिया जाना चाहिए।

महोदय, उपरोक्त तीनों प्रकरण राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया एवं भ्रष्टाचार पर नियंत्रण से सीधे जुड़े हुए हैं। इन मामलों में सरकार की चुप्पी और कार्रवाई में देरी से यह संदेश जा रहा है कि सत्ता में बैठे प्रभावशाली व्यक्तियों को संरक्षण दिया जा रहा है, जबकि आम नागरिकों एवं युवाओं के लिए न्याय प्राप्त करना कठिन होता जा रहा है।

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रतिनिधिमंडल ने कहा इस ज्ञापन की प्राप्ति के 10 दिनों के भीतर उपरोक्त निर्णयों को निरस्त करने और संपत्तियों को उनके मूल विभागों को लौटाने की कार्यवाही की जाए। यदि इस अवधि में राज्य सरकार और मुख्यमंत्री के ये निर्णय वापस नहीं लिए गए और जमीनें विभागों को नहीं लौटाई गईं, तो उत्तराखंड की जनता की संपत्ति बचाने के लिए कांग्रेस को मजबूरन माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ेगी।


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल ने राज्यपाल महोदय के संज्ञान मे यह भी लाते हुए कहा कि काबिना मंत्री रेखा आर्य के पति ने उनपर 210 करोड़ का घोटाला करने का आरोप लगाया है जिसकी सी बी आई तथा ई डी के माध्यम से जाँच कराई जानी आवश्यक है।


प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, चुनाव प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष डॉ0 हरक सिंह रावत, विधायक मदन बिष्ट, फुरकान अहमद, पूर्व विधायक मनोज रावत, प्रदेश उपाध्यक्ष सीपी सिंह, राजीव महर्षि, प्र्रदेश महामंत्री राजेन्द्र शाह, महिला अध्यक्ष जयोति रौतेला, सुरेन्द्र सिंह रांगड, राजेश चमोली आदि शामिल थे। 


 देहरादून:


 देर रात परेड ग्राउंड, देहरादून में  केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के कल 06 नवंबर को प्रस्तावित कार्यक्रम के दृष्टिगत तैयारियों का जायज़ा लिया।

Amit shah central minister programme dehradun


इस दौरान अधिकारियों को सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

*केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी के उत्तराखंड में विभिन्न कार्यक्रम*


दिनांक – 06 नवम्बर 2026


कार्यक्रम 1 – उत्तराखंड राज्योत्सव समारोह

स्थान – परेड ग्राउंड, देहरादून

समय – सुबह 11:50 बजे


कार्यक्रम 2 – उत्तराखंड पुलिस का राष्ट्रपति निशान अलंकरण समारोह

स्थान – रिजर्व पुलिस लाइन, देहरादून

समय – दोपहर 1:50 बजे


  

 धनतेरस का पंचांग और शुभ मुहूर्त इस प्रकार है:


Dhanteras 2022


धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त - 


।त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 6 नवंबर 2026, प्रातः 10:30 बजे

• त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर 2026, प्रातः 10:47 बजे

• प्रदोष काल: शाम 5:32 बजे से रात 8:09 बजे तक

• वृषभ काल (शुभ पूजा विंडो): शाम 6:02 बजे से शाम 7:57 बजे तक

  पूजा और दीपदान करना फलदायी साबित होगा।
 

धनतेरस पर कौन से उपाय करने से मिलेगा लाभ?

धनतेरस के दिन धन्वंतरि का पूजन करना चाहिए. साथ ही नवीन झाडू एवं सूपड़ा खरीदकर भी उनका पूजन करना चाहिए। इस दिन सायंकाल दीपक प्रज्वलित कर घर, दुकान आदि को श्रृंगारित करना फलदायी साबित होता है। इस दिन लोग मंदिर, गोशाला, नदी के घाट, कुओं, तालाब, बगीचों में भी दीपक लगाएं।


 क्यों मनाते हैं धनतेरस? कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि उत्पन्न हुए थे। इनके उत्पन्न होने के समय इनके हाथ में एक अमृत कलश था जिस कारण धनतेरस पर बर्तन खरीदने का भी रिवाज है। मान्यता है कि इस दिन खरीदारी करने से उसमें तेरह गुणा वृद्धि होती है। धनतेरस पर कई लोग धनिया के बीज भी खरीदते हैं। पिर दिवाली वाले दिन इन बीजों को लोग अपने बाग-बगीचों में बोते हैं।

इसके अलावा धनतेरस के दिन लोग झाडू, पानी भरने का बर्तन, मां लक्ष्मी की मूर्ति और दीयों की खरीददारी भी करते हैं।


 इसलिए मनाते हैं धनतेरस:

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय शरद पूर्णिमा को चंद्रमा, कार्तिक द्वादशी को कामधेनु गाय, त्रयोदशी को धनवन्तरि, चतुर्दशी को मां काली और अमावस्या को लक्ष्मी माता सागर से उत्पन्न हुई थीं। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को धनवन्तरि का जन्म माना जाता है, इसलिए धनवन्तरि के जन्मदिवस के उपलक्ष में धनतेरस मनाया जाता है।


  धनतेरस के दिन कुबेर की ऐसे करें पूजा :

धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है। मान्‍यता है कि उनकी पूजा करने से व्‍यक्ति को जीवन के हर भौतिक सुख की प्राप्‍ति होती है। इस दिन भगवान कुबेर की प्रतिमा या फोटो धूप-दीपक दिखाकर पुष्‍प अर्पित करें। फिर दक्षिण दिशा की ओर हाथ जोड़कर सच्‍चे मन से इस मंत्र का उच्‍चारण करें:



- ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये
  धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥




धनतेरस के दिन इसलिए जलाया जाता है यम के लिए दीपक:


धनतेरस के दिन सोने-चांदी, धातु की चीजें, बर्तन आदि की खरीदारी शुभ मानी जाती है। लेकिन इसके अलावा धनतेरस के दिन मृत्‍यु के देवता यमराज की पूजा भी की जाती है। इस दिन संध्‍या के समय घर के मुख्‍य दरवाजे के दोनों ओर अनाज के ढेर पर मिट्टी का बड़ा दीपक रखकर उसे जलाएं। दीपक का मुंह दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए। दीपक जलाते समय इस मंत्र का जाप करें:

मृत्‍युना दंडपाशाभ्‍यां कालेन श्‍याम्‍या सह|
त्रयोदश्‍यां दीप दानात सूर्यज प्रीयतां मम ||




इसलिए मनाते हैं धनतेरस:

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय शरद पूर्णिमा को चंद्रमा, कार्तिक द्वादशी को कामधेनु गाय, त्रयोदशी को धनवन्तरि, चतुर्दशी को मां काली और अमावस्या को लक्ष्मी माता सागर से उत्पन्न हुई थीं। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को धनवन्तरि का जन्म माना जाता है, इसलिए धनवन्तरि के जन्मदिवस के उपलक्ष में धनतेरस मनाया जाता है।







अठूरवाला सांस्कृतिक मंच की निर्देशक डॉ. ममता कुंवर ने किया सुलोचना का अभिनय करते हुये रामलीला में मेघनाथ वध एवं सुलोचना का हृदयविदारक विलाप बना आकर्षण का केंद्र।



atthorwala ramlila


    रामलीला के मंच पर मेघनाथ वध के पश्चात सुलोचना का करुण विलाप अत्यंत भावुक एवं शानदार दृश्य के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस मार्मिक प्रसंग में डॉ. ममता कुंवर ने सुलोचना की भूमिका का जीवंत अभिनय करते हुए अपने शानदार संवाद, भावपूर्ण अभिव्यक्ति और अद्भुत अभिनय कला से दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

पति के वियोग में सुलोचना की पीड़ा, समर्पण, प्रेम और विरह की भावनाओं को जिस संवेदनशीलता और प्रभावशाली अंदाज में डॉ. ममता कुंवर ने मंच पर साकार किया, उसने उपस्थित दर्शकों की आंखें नम कर दीं। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो रामायण का यह प्रसंग साक्षात मंच पर जीवंत हो उठा हो।

उनके अभिनय ने न केवल दर्शकों का मन मोह लिया, बल्कि भारतीय संस्कृति, नारी के समर्पण और पारिवारिक मूल्यों की गहरी संवेदनाओं को भी उजागर किया। 

   डॉ. ममता कुंवर को इस शानदार, सजीव एवं भावपूर्ण अभिनय के लिए सभी लोगो ने हार्दिक बधाई एवं साधुवाद। दिया

 

*’राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदान किए जाएंगे उत्तराखंड गौरव सम्मान पुरस्कार’*

uttarakhand rajya gaurav samman


उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश के लिए अपना विशेष योगदान देने वाले 15 महानुभावों को उत्तराखंड गौरव सम्मान पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया जाएगा। उत्तराखंड गौरव सम्मान पुरस्कार-2026 हेतु चयनित महानुभावों को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर परेड ग्राउंड देहरादून में आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम में ये पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। 


जिन महानुभावों को उत्तराखंड गौरव सम्मान पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे उनमें राजनीतिक एवं शासकीय क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए स्वर्गीय मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी (मरणोपरांत), चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष योगदान हेतु डॉक्टर जीवन सिंह तितियाल, उद्यमिता हेतु श्री मनमोहन भारद्वाज, फिल्म जगत से श्रीमती हिमानी शिवपुरी, लोक जागर गायिका श्रीमती हेमा नेगी करासी, शिक्षा एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में डॉक्टर गिरीश रंजन तिवारी, सामाजिक क्षेत्र में सुश्री अनीता थपलियाल शर्मा, श्री कश्मीर सिंह, पर्यावरण के क्षेत्र में पर्यावरणविद श्री सुरेश भाई, लोक गायिका श्रीमती रेशमा शाह के साथ ही खेल के क्षेत्र में सुश्री एकता बिष्ट, सुश्री वंदना कटारिया, सुश्री अंकिता ध्यानी, सुश्री निकिता चंद एवं श्री कपिल पोखरिया, शामिल हैं।

 सेनानायक SDRF श्री अर्पण यदुवंशी के दिशा-निर्देशों में SDRF की टीमें केदारताल क्षेत्र में लगातार सर्च एवं रेस्क्यू अभियान संचालित कर रही


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हैं। 


अत्यंत दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, भारी बर्फबारी एवं प्रतिकूल मौसम के बावजूद SDRF के जवान पूरे समर्पण एवं तत्परता के साथ घटनास्थल पर सर्चिंग कर रहे हैं। शेष लापता व्यक्तियों की तलाश एवं उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान निरंतर जारी है।


*केदारताल ट्रेक रेस्क्यू अभियान: एक और महिला का शव बरामद, हेलीकॉप्टर से मातली हेलीपैड उत्तरकाशी पहुंचाया गया* 


उत्तरकाशी, 04 नवंबर 2026।


केदारताल ट्रेक पर लापता ट्रेकर्स एवं सपोर्टिंग स्टाफ की तलाश में संचालित सर्च एवं रेस्क्यू अभियान के दौरान SDRF व  NIM की टीम द्वारा सर्चिंग के दौरान एक और शव बरामद किया गया, जिसे हेलीकॉप्टर के माध्यम से मातली हेलीपैड, उत्तरकाशी पहुंचाया गया।


इस प्रकार अब तक रेस्क्यू अभियान के दौरान कुल 04 शव बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें 02 पुरुष एवं 02 महिलाएं शामिल हैं।


सेनानायक SDRF श्री अर्पण यदुवंशी के दिशा-निर्देशों में SDRF की टीमें अत्यंत दुर्गम एवं चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में लगातार सर्च एवं रेस्क्यू अभियान संचालित कर रही हैं। शेष लापता व्यक्तियों की तलाश के लिए अन्य रेस्क्यू एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर अभियान निरंतर जारी है।


कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने की डिबीटी के माध्यम से मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को 2 करोड़ 84 लाख रुपए की धनराशि हस्तांतरित



देहरादून:  


मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के अंतर्गत उत्तराखंड सरकार द्वारा पात्र लाभार्थियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का क्रम लगातार जारी है।इसी क्रम में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने आज अपने यमुना कॉलोनी स्थित कैंप कार्यालय में योजना के तहत सितंबर एवं अक्टूबर 2026 माह की धनराशि सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों में DBT के जरिए हस्तांतरित की। विभागीय मंत्री ने बताया कि सितंबर 2026 में प्रदेश के 13 जनपदों के कुल 4,750 लाभार्थियों को 1 करोड़ 42 लाख 50 हजार रुपये की धनराशि वितरित की गई जबकि अक्टूबर 2026 में 4,727 लाभार्थियों के खातों में 1 करोड़ 41 लाख 81 हजार रुपये की धनराशि भेजी गई। इस प्रकार दोनों महीनों में कुल 9,477 लाभार्थियों को 2 करोड़ 84 लाख 31 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।


विभागीय मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना प्रदेश के उन बच्चों के लिए सुरक्षा और संबल का माध्यम है, जिन्होंने कोरोना महामारी एवं अन्य विषम परिस्थितियों में अपने माता-पिता अथवा संरक्षक को खोया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार इन बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का प्रयास है कि कोई भी पात्र बच्चा आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा, पोषण और बेहतर जीवन के अवसरों से वंचित न रहे। इसी उद्देश्य से योजना के तहत प्रतिमाह 3,000 रुपये की सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचाई जा रही है। विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि पात्र बच्चों को योजना का लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से मिले।



विभागीय मंत्री ने बताया कि जिला स्तरीय समिति द्वारा योजना के अंतर्गत कुल 6,544 बच्चों को अनुमोदित किया गया है। सितंबर 2026 में 30 तथा अक्टूबर 2026 में 23 बच्चों ने 21 वर्ष की आयु पूर्ण की। योजना प्रारंभ होने से अब तक 1,565 बच्चे 21 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हैं। वहीं मृत्यु, सेवायोजन, माता-पिता के पुनर्विवाह एवं लाभार्थी के विवाह सहित अन्य कारणों से 252 बच्चे योजना से बाहर हुए हैं। इस प्रकार योजना से बाहर होने वाले बच्चों की कुल संख्या 1,817 हो गई है।कहा कि  मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के माध्यम से राज्य सरकार जरूरतमंद एवं प्रभावित बच्चों को आर्थिक संबल प्रदान करने के साथ उनके भरण-पोषण, शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए निरंतर प्रयासरत है।


विदित हो कि मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना की शुरुआत कोविड-19 महामारी एवं अन्य बीमारियों के कारण माता-पिता अथवा संरक्षक को खोने वाले बच्चों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। योजना के तहत 1 मार्च 2020 से 31 मार्च 2022 की अवधि में प्रभावित हुए पात्र बच्चों को 21 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक प्रतिमाह 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता एवं भरण-पोषण भत्ता प्रदान किया जा रहा है।


*जनपदवार वितरित धनराशि*


सितंबर एवं अक्टूबर 2026 में अल्मोड़ा में 17.01 लाख, बागेश्वर में 5.07 लाख, चमोली में 6.06 लाख, चंपावत में 14.76 लाख, देहरादून में 40.70 लाख, हरिद्वार में 34.98 लाख, नैनीताल में 28.29 लाख, पौड़ी गढ़वाल में 26.58 लाख, पिथौरागढ़ में 9.30 लाख, रुद्रप्रयाग में 11.16 लाख, टिहरी गढ़वाल में 38.07 लाख, ऊधमसिंह नगर में 37.80 लाख तथा उत्तरकाशी में 14.16 लाख रुपये की धनराशि वितरित की गई।


इस अवसर पर सीपीओ अंजना गुप्ता , डिप्टी सीपीओ राजीव नयन तिवारी आदि उपस्थित रहे


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