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गौचर, कर्णप्रयाग सहित विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों ने पुष्प वर्षा कर किया मुख्यमंत्री का स्वागत*


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का सोमवार को विधानसभा सत्र में प्रतिभाग करने के लिए भराड़ीसैंण (गैरसैंण) आगमन के दौरान रुद्रप्रयाग एवं चमोली जनपद में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने भव्य स्वागत किया।


मुख्यमंत्री के रुद्रप्रयाग जनपद आगमन पर कैबिनेट मंत्री श्री भरत सिंह चौधरी एवं अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया।


चमोली जनपद आगमन पर विधायक श्री अनिल नौटियाल, विधायक श्री भूपाल राम टम्टा, जिलाधिकारी श्री गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक श्री सुरजीत सिंह पंवार तथा मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।


इस दौरान गौचर, कर्णप्रयाग, खेती सहित विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों ने पुष्प वर्षा कर मुख्यमंत्री का स्वागत एवं अभिनंदन किया।


मुख्यमंत्री ने आदिबद्री में स्थानीय दुकानों पर पहुंचकर लोगों और बच्चों से मुलाकात की तथा उनका कुशलक्षेम जाना। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों से आत्मीय संवाद भी किया।


मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्थानों पर लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हुए उनके स्नेह और आत्मीय स्वागत के लिए सभी का हार्दिक आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने आदिबद्री मंदिर में की पूजा-अर्चना, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना*


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को चमोली जनपद स्थित आदिबद्री मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की।


मुख्यमंत्री ने विधानसभा सत्र में प्रतिभाग करने के लिए भराड़ीसैंण (गैरसैंण) जाते समय आदिबद्री मंदिर में दर्शन एवं पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रदेशवासियों के सुखद एवं समृद्ध जीवन तथा राज्य की निरंतर प्रगति की कामना की।


156 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पुल-सुरंग मार्ग पर ट्रायल के आधार पर आवागमन शुरू, जल्द होगा लोकार्पण : मुख्यमंत्री*

*केदारनाथ और बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्गों को जोड़ने से सुगम होगी चारधाम यात्रा, रुद्रप्रयाग में यातायात जाम से मिलेगी राहत*

*मुख्यमंत्री ने ‘एक पुस्तक दान करें, ज्ञान का वृक्ष लगाएं’ अभियान की सराहना की*

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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को रुद्रप्रयाग में चारधाम सड़क परियोजना के अंतर्गत निर्मित पुल एवं सुरंग परियोजना का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने परियोजना की जानकारी प्राप्त करते हुए कहा कि जल्द ही इसका विधिवत लोकार्पण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा संचालित ‘एक पुस्तक दान करें, ज्ञान का वृक्ष लगाएं’ अभियान के अंतर्गत संगम लाइब्रेरी का भी अवलोकन किया।


चारधाम सड़क परियोजना के अंतर्गत रुद्रप्रयाग में लगभग 156 करोड़ रुपये की लागत से अलकनंदा नदी पर 200 मीटर लंबे पुल और 900.30 मीटर लंबी सुरंग का निर्माण किया गया है। पुल, सुरंग और संपर्क मार्ग सहित इस परियोजना की कुल लंबाई लगभग 1.18 किलोमीटर है। यह महत्वपूर्ण परियोजना केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-107) को बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-07) से सीधे जोड़ेगी।


पुल-सुरंग मार्ग पर सोमवार से ट्रायल के आधार पर आवागमन शुरू कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल्द ही इस महत्वपूर्ण परियोजना का विधिवत लोकार्पण किया जाएगा। मार्ग पर नियमित यातायात शुरू होने के बाद केदारनाथ और बदरीनाथ धाम जाने वाले तीर्थयात्रियों को रुद्रप्रयाग बाजार से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे चारधाम यात्रा के दौरान नगर में यातायात का दबाव कम होगा तथा स्थानीय निवासियों और तीर्थयात्रियों को जाम की समस्या से राहत मिलेगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा को अधिक सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। बेहतर सड़क संपर्क और आधुनिक अवसंरचना के विकास से श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलने के साथ ही स्थानीय व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा।


इस दौरान मुख्यमंत्री ने रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में किए जा रहे ढलान सुरक्षा एवं स्थिरीकरण कार्यों की भी जानकारी ली। इन कार्यों का उद्देश्य भूस्खलन से होने वाले जोखिम को कम करना तथा यात्रा मार्ग को अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाना है।


मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा संचालित ‘एक पुस्तक दान करें, ज्ञान का वृक्ष लगाएं’ अभियान के अंतर्गत संगम लाइब्रेरी का अवलोकन करते हुए इस अभिनव पहल की सराहना की। जिलाधिकारी श्री विशाल मिश्रा की पहल पर शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों में अध्ययन के प्रति रुचि विकसित करना, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपयोगी पुस्तकें उपलब्ध कराना तथा पुस्तकालयों को समृद्ध बनाना है।


अभियान को जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं आम नागरिकों का उत्साहजनक सहयोग मिल रहा है। अभियान के अंतर्गत संगम पुस्तकालय को 2,500 से अधिक पुस्तकें प्राप्त हो चुकी हैं। इनमें प्रतियोगी परीक्षाओं, सामान्य ज्ञान, साहित्य तथा विभिन्न विषयों की उपयोगी पुस्तकें शामिल हैं। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस अभियान में 150 पुस्तकें उपलब्ध कराकर अपना योगदान दिया है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि पुस्तकें ज्ञान अर्जित करने और व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। पुस्तक दान जैसे अभियान विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हैं, जिन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अध्ययन सामग्री की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग से पुस्तकालयों को समृद्ध बनाने की यह पहल युवाओं में पढ़ने और सीखने की संस्कृति को प्रोत्साहित करेगी।


जिलाधिकारी श्री विशाल मिश्रा ने बताया कि अभियान के माध्यम से प्राप्त पुस्तकों को विद्यार्थियों और पाठकों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता के माध्यम से पुस्तकालयों को अध्ययन और ज्ञानवर्धन के प्रभावी केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।


इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री भरत सिंह चौधरी, बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष श्री विजय कप्रवान, सीमांत क्षेत्र अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष श्री चंडी प्रसाद भट्ट, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष श्रीमती ऐश्वर्या रावत, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पूनम कठैत, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री भारत भूषण भट्ट, श्री गिरवर सिंह रावत, जिला पंचायत सदस्य श्री जयवर्धन कांडपाल, श्री अमित कुमार मैखंडी एवं श्री गंभीर सिंह बिष्ट, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष श्री महावीर पंवार, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य श्री अजय सेमवाल, महानिदेशक सूचना श्री बंशीधर तिवारी, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग श्री विशाल मिश्रा, मुख्य विकास अधिकारी श्री राजेंद्र सिंह रावत, उपजिलाधिकारी श्री सोहन सिंह सैनी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

 


वाल्मीकि, संस्कृत रामायण के प्रसिद्ध रचयिता हैं जो आदिकवि के रूप में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने संस्कृत मे रामायण की रचना की।महर्षि वाल्मीकि मूलतः निषाद थे, उनके द्वारा रची रामायण वाल्मीकि रामायण कहलाई। रामायण एक महाकाव्य है जो कि राम के जीवन के माध्यम से हमें जीवन के सत्य व कर्तव्य से, परिचित करवाता है।

वाल्मीकि ने संस्कृत के प्रथम महाकाव्य की रचना की थी जो रामायण के नाम से प्रसिद्ध है। प्रथम संस्कृत महाकाव्य की रचना करने के कारण वाल्मीकि आदिकवि कहलाये।

 रामायण में भगवान वाल्मीकि ने 24000 श्लोकों में श्रीराम उपाख्यान ‘रामायण’ लिखी। ऐसा वर्णन है कि- एक बार वाल्मीकि क्रौंच पक्षी के एक जोड़े को निहार रहे थे।

 वह जोड़ा प्रेमालाप में लीन था, तभी उन्होंने देखा कि बहेलिये ने प्रेम-मग्न क्रौंच (सारस) पक्षी के जोड़े में से नर पक्षी का वध कर दिया। इस पर मादा पक्षी विलाप करने लगी। उसके विलाप को सुनकर वाल्मीकि की करुणा जाग उठी और द्रवित अवस्था में उनके मुख से स्वतः ही यह श्लोक फूट पड़ा।

    मा निषाद प्रतिष्ठां त्वंगमः शाश्वतीः समाः।
    यत्क्रौंचमिथुनादेकं वधीः काममोहितम्॥

    (अर्थ : हे दुष्ट, तुमने प्रेम मे मग्न क्रौंच पक्षी को मारा है। जा तुझे कभी भी प्रतिष्ठा की प्राप्ति नहीं हो पायेगी और तुझे भी वियोग झेलना पड़ेगा।)

उसके बाद उन्होंने प्रसिद्ध महाकाव्य "रामायण" (जिसे "वाल्मीकि रामायण" के नाम से भी जाना जाता है) की रचना की और "आदिकवि वाल्मीकि" के नाम से अमर हो गये।

अपने महाकाव्य "रामायण" में उन्होंने अनेक घटनाओं के समय सूर्य, चंद्र तथा अन्य नक्षत्र की स्थितियों का वर्णन किया है। इससे ज्ञात होता है कि वे ज्योतिष विद्या एवं खगोल विद्या के भी प्रकाण्ड ज्ञानी थे।

अपने वनवास काल के दौरान भगवान"श्रीराम" वाल्मीकि के आश्रम में भी गये थे।

भगवान वाल्मीकि को "श्रीराम" के जीवन में घटित प्रत्येक घटना का पूर्ण ज्ञान था। सतयुग, त्रेता और द्वापर तीनों कालों में वाल्मीकि का उल्लेख मिलता है इसलिए भगवान वाल्मीकि को सृष्टिकर्ता भी कहते है, रामचरितमानस के अनुसार जब श्रीराम वाल्मीकि आश्रम आए थे तो आदिकवि वाल्मीकि के चरणों में दण्डवत प्रणाम करने के लिए वे जमीन पर डंडे की भांति लेट गए थे और उनके मुख से निकला था

 "तुम त्रिकालदर्शी मुनिनाथा, विस्व बदर जिमि तुमरे हाथा।"

अर्थात आप तीनों लोकों को जानने वाले स्वयं प्रभु हैं। ये संसार आपके हाथ में एक बैर के समान प्रतीत होता है।

महाभारत काल में भी वाल्मीकि का वर्णन मिलता है। जब पांडव कौरवों से युद्ध जीत जाते हैं तो द्रौपदी यज्ञ रखती है, जिसके सफल होने के लिये शंख का बजना जरूरी था परन्तु कृष्ण सहित सभी द्वारा प्रयास करने पर भी पर यज्ञ सफल नहीं होता तो कृष्ण के कहने पर सभी वाल्मीकि से प्रार्थना करते हैं। जब वाल्मीकि वहां प्रकट होते हैं तो शंख खुद बज उठता है और द्रौपदी का यज्ञ सम्पूर्ण हो जाता है। इस घटना को कबीर ने भी स्पष्ट किया है "सुपच रूप धार सतगुरु आए। पांडों के यज्ञ में शंख बजाए।"

 

 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने वाल्मीकि जयंती की पूर्व संध्या पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों एवं शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।


मुख्यमंत्री श्री धामी ने अपने संदेश में कहा कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन एवं उनकी रचनाएं हमें सत्य, प्रेम और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने आदिकाव्य रामायण की रचना कर समाज के समक्ष आदर्श जीवन, नैतिक मूल्यों और मानवीय मर्यादाओं का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने सामाजिक समरसता, समानता, सद्भाव एवं मानवता का संदेश दिया। उनकी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं और समतामूलक समाज के निर्माण के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती हैं।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि हम सभी को महर्षि वाल्मीकि के महान विचारों एवं आदर्शों को अपने आचरण में उतारने का संकल्प लेना चाहिए। उनके बताए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा एवं सम्मान की अभिव्यक्ति होगी।


*लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं सांस्कृतिक आयोजन: मुख्यमंत्री।

*देवभूमि की सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता: मुख्यमंत्री।**

- उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहने संबंधी टिप्पणी पर मुख्यमंत्री ने जताई आपत्ति, प्रदेश के स्वाभिमान और सम्मान का उठाया मुद्दा

**लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के साथ युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना आवश्यक: मुख्यमंत्री*

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 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी आज हल्द्वानी में आयोजित ‘कुमाऊं द्वार महोत्सव’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने महोत्सव में उपस्थित लोगों का स्वागत एवं अभिनंदन किया तथा उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए आयोजकों के प्रयासों की सराहना की।



मुख्यमंत्री ने कहा कि हल्द्वानी कुमाऊं का प्रवेश द्वार होने के साथ ही पर्वतीय समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। यह क्षेत्र कुमाऊं की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक जीवनशैली और लोक कलाओं की विशिष्ट पहचान को व्यापक मंच प्रदान करता है। महोत्सव में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि प्रदेशवासी अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं से गहराई से जुड़े हुए हैं।


मुख्यमंत्री ने ‘वैदेही कल्चरल एजुकेशन एंड आर्ट फाउंडेशन’ के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था लोकगायन और लोकनृत्य के माध्यम से विशेष रूप से युवा पीढ़ी को उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदेश की संस्कृति और परंपराओं को नई पहचान देने के साथ ही इन्हें देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण है। यहां के लोकगीतों और लोकनृत्यों में पर्वतीय जीवन, प्राकृतिक सौंदर्य, ऋतु परिवर्तन, लोक आस्थाओं और गौरवशाली इतिहास की झलक देखने को मिलती है। छोलिया नृत्य, झोड़ा, चांचरी, बरदा नाटी और न्योली जैसी लोक विधाएं प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए हैं। इसी प्रकार बेड़ा गीत, मांगल गीत और चैती गीत जैसी पारंपरिक गायन शैलियां उत्तराखंड के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न अंग हैं।


उन्होंने कहा कि ढोल, दमाऊ, तुर्री, भंकोरा और रणसिंहा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्र उत्तराखंड की लोक संस्कृति को विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं। इनकी धुनों में पहाड़ के जनजीवन, लोक आस्थाओं और परंपराओं की झलक मिलती है। डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया के विस्तार से उत्तराखंड का लोक संगीत प्रदेश की सीमाओं से बाहर निकलकर देश-विदेश में पहचान बना रहा है। यह प्रसन्नता का विषय है कि युवा पीढ़ी भी लोक संगीत में रुचि ले रही है और इसे आगे बढ़ाने में योगदान दे रही है।





 *देवभूमि की अस्मिता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध राज्य सरकार* 


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। राज्य सरकार ने प्रदेश के भविष्य, जनहित और देवभूमि की विशिष्ट पहचान को ध्यान में रखते हुए समान नागरिक संहिता लागू करने, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने, दंगारोधी कानून लागू करने और सशक्त भू-कानून की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।


उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल एक भौगोलिक प्रदेश नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है। देवभूमि की अस्मिता की रक्षा करना राज्य सरकार के लिए राजनीतिक विषय नहीं, बल्कि संकल्प है। इसी उद्देश्य से सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों और अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि कानून के शासन को सुनिश्चित करना और प्रदेश के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है।


# *## पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से युवाओं को मिल रहे रोजगार के अवसर* 


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के साथ-साथ युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। नकल माफिया पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। इसके परिणामस्वरूप भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।


उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी एवं निष्पक्ष चयन प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी नौकरी प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के हित में बड़े और आवश्यक निर्णय लेने से सरकार पीछे नहीं हटेगी। उनके अनुसार, प्रदेश का हित सत्ता से, जनहित राजनीति से और राष्ट्रहित वोटबैंक की राजनीति से ऊपर है।





मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हुए रामपुर तिराहा गोलीकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान को प्रदेश की जनता आज भी याद करती है। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों ने अनेक कठिनाइयों का सामना किया और उत्तराखंड राज्य के निर्माण के लिए संघर्ष किया। ऐसे ऐतिहासिक संदर्भों के बीच प्रदेश के लोगों के सम्मान से जुड़ी टिप्पणियां और भी संवेदनशील हो जाती हैं।




 *राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील विषयों पर जिम्मेदार संवाद जरूरी* 


मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोभाल का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के लिए समर्पित व्यक्तित्वों के संबंध में राजनीतिक बयान देते समय राष्ट्रहित और सार्वजनिक जीवन की मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि क्या राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के सम्मान से जुड़े विषयों को भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखना उचित है।



 *अंकिता भंडारी प्रकरण में न्याय को सर्वोपरि रखने पर दिया जोर* 


मुख्यमंत्री ने अंकिता भंडारी प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी बेटी को न्याय दिलाना समाज और व्यवस्था की गंभीर जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस संवेदनशील मामले में न्यायिक प्रक्रिया, तथ्यों और प्रमाणों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने प्रकरण में न्यायालय द्वारा दोषियों को सुनाई गई सजा और जमानत याचिकाओं से संबंधित न्यायिक कार्यवाही का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून के अनुसार चलने वाली प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि बहन अंकिता को न्याय मिलना सर्वोपरि है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी संवेदनशील मामले को राजनीतिक लाभ का माध्यम बनाने के बजाय तथ्यों के आधार पर संवाद किया जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि किसी बेटी के दुख को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना और बिना प्रमाण के आरोप लगाना कितना उचित है।


 *अंतिम छोर तक विकास पहुंचाना सरकार का संकल्प* 


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प विकास की यात्रा को प्रदेश के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक युवा को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें, प्रत्येक बहन-बेटी सशक्त बने और प्रत्येक परिवार के जीवन में खुशहाली आए।


उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश की जनता के सहयोग, विश्वास और आशीर्वाद से उत्तराखंड विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और जनकल्याण के लक्ष्यों की दिशा में निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।

  डोईवाला:

shrimd bjagwat katha श्री राम उपाध्याय


श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस में शुगर मिल कॉलोनी डोईवाला   में व्यास श्री राम उपाध्याय जी ने श्रीकृष्ण भगवान की बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया और श्री वृन्दावन भूमि में बसने का कारण बताया ।



 साथ ही गोपियों और बाल सखाओं के साथ खेलते खेलते प्रभु ने जो भी लीलाएं की, पूतना वध, कालिया दाह, बकटासुर वध इत्यादि को विस्तार पूर्वक बताते हुए, यशोदा माता और नंद बाबा के भावों को व्यक्त किया। जमुना जी के महत्व, वृन्दावन की रज का वर्णन करते हुए उन्होंने मुक्ति के भाव की व्याख्या भी की।

 गोपियाँ बाल कृष्ण के दर्शन कर नृत्य में मग्न रही और नंद बाबा से बधाई मांगती नज़र आई।

संगीतमयी भजनों की धुन पर समस्त श्रद्धालु नाचे गाते श्री कृष्ण की बाल लीला का आनंद उठाते रहे।

गिरिराज जी की महिमा  का वर्णन करते  हुए गोवर्धन पूजा का कारण बताया। कालिया नाग की लीला का 


  डोईवाला ;








श्रीमद् भागवत सप्ताह के सात दिवसीय आयोजन में गार्डन कॉलोनी शुगर मिल डोईवाला देहरादून में चतुर्थ दिवस में व्यास जी महाराज राम उपाध्याय ने बताया भगवान भक्त के वश में रहकर ही पृथ्वी पर अवतार लेते है और नाना प्रकार के रूप धारण करते है। बैकुंठ के सुख छोड़कर पृथ्वी  पर  भी आ जाते है। क्योंकि ,भगवान भक्तों के अधीन रहते है।



उन्होंने बताया भक्ति नौ प्रकार की होती है , उन्ही में से एक भक्ति से प्रह्लाद ने भगवान को प्रसन्न कर लिया था।

 साथ ही उन्होंने वृन्दावन धाम की महिमा का वर्णन करते हुए बताया चित्रकूट और अयोध्या साकेत रूप का और वृन्दावन गौ लोक धाम का स्वरूप है। 


एक प्रसंग में राधा रानी ,ठाकुर जी से कहती है जहां गोवर्धन नही है, जमुना नही है , वहां में वास नहीं करूँगी। प्रभु के द्वारा वृन्दावन को पृथ्वी पर भेजने पर ही  राधा रानी पृथ्वी पर प्रकट हुई। 

वृन्दावन धाम मोक्ष धाम है , जिसकी रज रज में श्री राधा रानी विराजमान है।शास्त्रों में प्रमाणित है कि राधा और कृष्ण एक ही रूप है। इसमें कोई अतिशयोक्ति नही है,केवल रसिक ही इस प्रेम को जान सकता है।

गजेंद्र मोक्ष की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि एक बार गज सरोवर पर पानी पीने गया तो ग्राह ने गजराज को पानी मे खींच लिया, कोई उसको  बचा नही सका। जब उसने अंत मे हरिनाम स्मरण किया तब प्रभु उसे मुक्त कराने अवयं चले आये।

कच्छप अवतार की कथा सुनाते हुए , भगवान शिव के विष पान और नीलकंठ महादेव के नाम की व्याख्या की। 

प्रभु के वामनावतार ने कैसे एक राक्षस को भक्ति भाव मे लगा कर जगत का कल्याण किया। 



सूर्य वंशावली का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि इस वंश में भगवान राम अवतार लेकर प्रकट होते है।

प्रभु श्री राम के अवतार लेने के अनेक कारण है।राम  ही केवल प्रेम प्यारा इसी  लिये भक्तों के प्रेम में पड़कर भगवान  पृथ्वी पर अवतार लेते है।श्री राम के जीवन चरित्र की सूक्ष्म व्याख्या के बाद श्री कृष्णावतार के कारण का वर्णन किया। किस प्रकार प्रभु कृष्ण रूप में  मथुरा में श्री वासुदेव और देवकी  की संतान बनकर कंस का नाश करने के लिये आये। 

कथा में श्री वामन भगवान एवम कृष्ण वासुदेव जी की झांकी ने सभी का मन मोह लिया।उपस्थित श्रद्धालुओं ने कृष्ण जन्म की बधाइयां दी झूम झूम कर नाचे और कृष्ण जन्म धूम धाम से बनाया। गोपियों ने भी भगवान के प्रकट  होने पर बधाइयां दी।

कथा में डोईवाला के  विधायक श्री बृज भूषण गैरोला जी , श्री विक्रम नेग ने व्यास पीठ पर विराजमान श्री राम  उपाध्याय जी का सम्मान किया और कथा श्रवण किया। उपस्थित कॉलोनीवासियों और श्रद्धालुओं  ने  श्री कृष्ण जन्म का भरपूर आनंद उठाया।




*समीक्षा बैठक में अधिकारियों को दिये भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश*

*कहा, प्रधानाचार्यों की पदोन्नति प्रक्रिया में भी तेजी लायें अधिकारी* 

देहरादून:


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प्राथमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत विभिन्न जनपदों में बेसिक शिक्षकों के रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की जायेगी। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दे दिये गये हैं। इसके अलावा राजकीय इण्टर काॅलेजों में प्रधानाचार्यों के रिक्त पदों पर पदोन्नति प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये गये हैं। 


सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने आज शासकीय आवास पर विद्यालयी शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने प्राथमिक शिक्षा विभाग में बेसिक शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने को विभागीय अधिकारियों को कहा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विभिन्न जनपदों में बेसिक शिक्षकों के 400 से अधिक पद रिक्त हैं। जिन पर भर्ती प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जायेगी, ताकि विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर किया जा सके। विभागीय मंत्री डाॅ. रावत ने शिक्षकों के समायोजन के निर्देश देते हुये कहा कि कई विद्यालयों में छात्र संख्या न्यून है लेकिन वहां जरूरत से ज्यादा शिक्षक तैनात है। ऐसे में इन विद्यालयों के शिक्षकों को उन स्कूलों में भेजा जाय जहां पर छात्र संख्या अधिक है लेकिन पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं। 

बैठक में डाॅ. रावत ने राजकीय इण्टर काॅलेजों में प्रधानाचार्यों के रिक्त पदों पर पदोन्नति प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये, ताकि रिक्त पदों पर प्रधानाचार्यों की शीघ्र तैनाती की जा सके। जिससे विद्यालयों में शैक्षणिक व प्रशासनिक गतिविधियों को और अधिक सुदृढ़ हो सकेगी। इसके अलावा डाॅ. रावत ने विभागीय विभिन्न योजनाओं के समीक्षा कर अधिकारियों को भूमि-पूजन, शिलान्यास, उद्घाटन व लोकार्पण करने के निर्देश दिये। 



बैठक में सचिव शिक्षा ज्योति यादव, अपर सचिव नमामि बंसल, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा आकांक्षा कोण्डे, निदेशक एससीईआरटी वंदना गब्र्याल, निदेशक माध्यमिक शिक्षा विनोद कुमार सिमल्टी, निदेशक प्राथमिक शिक्षा के.एस. रावत, उप निदेशक जे.पी. काला सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। 


*बाॅक्स*


*खेल मैदान के निर्माण को खेल विभाग के साथ होगा एमओयू*


सूबे के शिक्षा मंत्री डाॅ. रावत ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक जनपद पर ब्लाॅक स्तर पर एक-एक विद्यालय में खेल मैदान का निर्माण किया जायेगा। जिसके लिये भूमि शिक्षा विभाग अपने विद्यालय परिसरों में उपलब्ध करायेगा। इस संबंध में शीघ्र इसके लिये खेल एवं युवा कल्याण विभाग के साथ एक एमओयू किया जायेगा। जिसकी एसओपी तैयार करने के निर्देश विभगाीय अधिकारियों को दे दिये गये हैं। इससे पूर्व विभागीय मंत्री की पहल पर प्रादेशिक खेलों के लिये युवा कल्याण विभाग तथा शिक्षा विभाग का वार्षिक खेल कैण्डर लागू किया जा चुका है। 



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