देवभूमि उद्यमिता योजना 2.0 के तहत श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय में सत्र 2026-27 का प्रथम ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित
ऋषिकेश:
उत्तराखंड सरकार के उच्च शिक्षा विभाग तथा भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (EDII), अहमदाबाद के सहयोग से संचालित देवभूमि उद्यमिता योजना 2.0 के अंतर्गत श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर, ऋषिकेश में सत्र 2026-27 का प्रथम ओरिएंटेशन कार्यक्रम उत्साहपूर्वक आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में उद्यमिता, नवाचार तथा स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहित कर उन्हें रोजगार खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले युवा उद्यमी बनने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति प्रोफेसर अम्बरीश कुमार महाजन ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि आज का युग नवाचार और उद्यमिता का युग है। उत्तराखंड प्राकृतिक संसाधनों, पर्यटन, आयुष, कृषि, जैविक उत्पादों तथा स्थानीय हस्तशिल्प की दृष्टि से अपार संभावनाओं वाला राज्य है। यदि युवा इन अवसरों को नवाचार एवं तकनीक के साथ जोड़कर उद्यम के रूप में विकसित करें, तो वे न केवल आत्मनिर्भर बनेंगे, बल्कि राज्य और राष्ट्र की आर्थिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे। उन्होंने विद्यार्थियों से देवभूमि उद्यमिता योजना द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे निःशुल्क प्रशिक्षण, रेसिडेंशियल बूटकैंप, विशेषज्ञ मार्गदर्शन, बिजनेस आइडिया पिचिंग तथा सीड फंडिंग जैसी सुविधाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वविद्यालय में उद्यमिता एवं नवाचार की संस्कृति को और सुदृढ़ बनाने के लिए सभी आवश्यक सहयोग का आश्वासन भी दिया।
कार्यक्रम में परिसर निदेशक प्रोफेसर महावीर सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना विद्यार्थियों के लिए स्वरोजगार एवं स्टार्टअप की दिशा में एक सशक्त मंच प्रदान करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने नवाचारी विचारों को व्यवसायिक रूप देकर आत्मनिर्भर भारत और विकसित उत्तराखंड के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
विश्वविद्यालय की देवभूमि उद्यमिता योजना की नोडल अधिकारी एवं सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन एंटरप्रेन्योरशिप एंड इन्क्यूबेशन (पर्यटन) की निदेशक प्रोफेसर अनीता तोमर ने स्वागत भाषण एवं योजना की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय ने उद्यमिता विकास को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में सम्मिलित किया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम, बूटकैंप, मेंटरिंग सत्र, बिजनेस प्लान प्रतियोगिताएँ, उद्योग भ्रमण, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) जागरूकता कार्यक्रम तथा स्टूडेंट एंटरप्रेन्योरशिप क्लब जैसी अनेक गतिविधियों का नियमित आयोजन किया जा रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि विश्वविद्यालय को उत्तराखंड सरकार द्वारा पर्यटन क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन एंटरप्रेन्योरशिप एंड इन्क्यूबेशन स्थापित करने का दायित्व सौंपा गया है। यह केंद्र इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, वेलनेस एवं स्पिरिचुअल टूरिज्म, सांस्कृतिक विरासत पर्यटन, सामुदायिक पर्यटन, कृषि पर्यटन तथा शैक्षिक पर्यटन जैसे क्षेत्रों में नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहा है।
प्रोफेसर तोमर ने विश्वविद्यालय की उल्लेखनीय उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय की छात्रा मान्या राजपाल को अपने वेलनेस एवं स्पिरिचुअल टूरिज्म आधारित स्टार्टअप के लिए उत्तराखंड सरकार से ₹75,000 का सीड फंड प्राप्त हुआ, जो विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय है। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय के छात्र अभिषेक घंसाला द्वारा स्थापित कसेरा एंटरप्राइजेज हिमालयी जैविक उत्पादों के माध्यम से स्थानीय संसाधनों, महिला स्वयं सहायता समूहों तथा ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुका है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रत्येक सफल स्टार्टअप की शुरुआत एक छोटे से विचार से होती है, जिसे सही मार्गदर्शन, परिश्रम और दृढ़ संकल्प सफलता तक पहुँचाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान जिला समन्वयक (District Coordinator) सुश्री सपना नेगी तथा डॉ. मनीष चन्द्र ने देवभूमि उद्यमिता योजना 2.0 की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने योजना के उद्देश्यों, प्रशिक्षण प्रक्रियाओं, रेसिडेंशियल बूटकैंप, विशेषज्ञ मेंटरशिप, बिजनेस आइडिया पिचिंग, सीड फंडिंग तथा राज्य में स्थापित 11 उत्कृष्टता केंद्रों (Centres of Excellence) की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में उद्यमिता के उभरते अवसरों से परिचित कराया।
कार्यक्रम का सफल संचालन प्रोफेसर धर्मेन्द्र तिवारी ने किया। कार्यक्रम में फैकल्टी मेंटर्स प्रोफेसर धर्मेन्द्र तिवारी, ने विद्यार्थियों को अध्ययन के साथ-साथ नवाचार, नेतृत्व क्षमता, समस्या समाधान कौशल तथा उद्यमिता को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में उद्यमिता केवल व्यवसाय स्थापित करने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक विकास का प्रभावी साधन भी है। कार्यक्रम के प्रथम चरण में लगभग 68 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और योजना के विभिन्न आयामों की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की छात्रा एवं देवभूमि उद्यमिता योजना की सफल युवा उद्यमी मान्या राजपाल ने अपने उद्यमिता सफर को प्रतिभागियों के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक साधारण विचार, उचित मार्गदर्शन, निरंतर परिश्रम तथा देवभूमि उद्यमिता योजना के सहयोग से उनके स्टार्टअप को आकार मिला और उन्हें उत्तराखंड सरकार से ₹75,000 का सीड फंड प्राप्त हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने, नवाचार को अपनाने तथा चुनौतियों से न घबराकर अपने विचारों को सफल उद्यम में परिवर्तित करने का आह्वान किया। उनका प्रेरणादायी अनुभव उपस्थित छात्र-छात्राओं के लिए अत्यंत उत्साहवर्धक एवं प्रेरणास्पद रहा।
इस अवसर पर फैकल्टी मेंटर्स प्रोफेसर अंजनी प्रसाद दुबे तथा डॉ. शालिनी रावत, प्रोफेसर सुरमान आर्य, डॉ. सुनीति कुमार कुडियाल, डॉ. श्रीकृष्ण नौटियाल सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन इस विश्वास के साथ हुआ कि देवभूमि उद्यमिता योजना 2.0 के माध्यम से विश्वविद्यालय के विद्यार्थी नवाचार आधारित स्टार्टअप स्थापित कर उत्तराखंड में उद्यमिता की नई पहचान बनाएंगे तथा आत्मनिर्भर भारत और विकसित उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।






