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  श्री हनुमान जन्मोत्सव 02 अप्रैल विशेष

Hanuman janmoutsav 2026


हनुमान जी की माता अंजनि के पूर्व जन्म की कहानी

कहते हैं कि माता अंजनि पूर्व जन्म में देवराज इंद्र के दरबार में अप्सरा पुंजिकस्थला थीं। ‘बालपन में वो अत्यंत सुंदर और स्वभाव से चंचल थी एक बार अपनी चंचलता में ही उन्होंने तपस्या करते एक तेजस्वी ऋषि के साथ अभद्रता कर दी थी।

गुस्से में आकर ऋषि ने पुंजिकस्थला को श्राप दे दिया कि जा तू वानर की तरह स्वभाव वाली वानरी बन जा, ऋषि के श्राप को सुनकर पुंजिकस्थला ऋषि से क्षमा याचना मांगने लगी, तब ऋषि ने कहा कि तुम्हारा वह रूप भी परम तेजस्वी होगा।

तुमसे एक ऐसे पुत्र का जन्म होगा जिसकी कीर्ति और यश से तुम्हारा नाम युगों-युगों तक अमर हो जाएगा, अंजनि को वीर पुत्र का आशीर्वाद मिला।

*श्री हनुमानजी की बाल्यावस्था*

ऋषि के श्राप से त्रेता युग मे अंजना मे नारी वानर के रूप मे धरती पे जन्म लेना पडा इंद्र जिनके हाथ में पृथ्वी के सृजन की कमान है, स्वर्ग में स्थित इंद्र के दरबार (महल) में हजारों अप्सरा (सेविकाएं) थीं, जिनमें से एक थीं अंजना (अप्सरा पुंजिकस्थला) अंजना की सेवा से प्रसन्न होकर इंद्र ने उन्हें मनचाहा वरदान मांगने को कहा, अंजना ने हिचकिचाते हुए उनसे कहा कि उन पर एक तपस्वी साधु का श्राप है, अगर हो सके तो उन्हें उससे मुक्ति दिलवा दें। इंद्र ने उनसे कहा कि वह उस श्राप के बारे में बताएं, क्या पता वह उस श्राप से उन्हें मुक्ति दिलवा दें।  

अंजना ने उन्हें अपनी कहानी सुनानी शुरू की, अंजना ने कहा ‘बालपन में जब मैं खेल रही थी तो मैंने एक वानर को तपस्या करते देखा, मेरे लिए यह एक बड़ी आश्चर्य वाली घटना थी, इसलिए मैंने उस तपस्वी वानर पर फल फेंकने शुरू कर दिए, बस यही मेरी गलती थी क्योंकि वह कोई आम वानर नहीं बल्कि एक तपस्वी साधु थे।    

मैंने उनकी तपस्या भंग कर दी और क्रोधित होकर उन्होंने मुझे श्राप दे दिया कि जब भी मुझे किसी से प्रेम होगा तो मैं वानर बन जाऊंगी। मेरे बहुत गिड़गिड़ाने और माफी मांगने पर उस साधु ने कहा कि मेरा चेहरा वानर होने के बावजूद उस व्यक्ति का प्रेम मेरी तरफ कम नहीं होगा’। अपनी कहानी सुनाने के बाद अंजना ने कहा कि अगर इंद्र देव उन्हें इस श्राप से मुक्ति दिलवा सकें तो वह उनकी बहुत आभारी होंगी। इंद्र देव ने उन्हें कहा कि इस श्राप से मुक्ति पाने के लिए अंजना को धरती पर जाकर वास करना होगा, जहां वह अपने पति से मिलेंगी। शिव के अवतार को जन्म देने के बाद अंजना को इस श्राप से मुक्ति मिल जाएगी।

इंद्र की बात मानकर अंजना धरती पर आईं और केसरी से विवाह - इंद्र की बात मानकर अंजना धरती पर चली आईं, एक शाप के कारण उन्हें नारी वानर के रूप मे धरती पे जन्म लेना पडा। उस शाप का प्रभाव शिव के अन्श को जन्म देने के बाद ही समाप्त होना था। और एक शिकारन के तौर पर जीवन यापन करने लगीं। जंगल में उन्होंने एक बड़े बलशाली युवक को शेर से लड़ते देखा और उसके प्रति आकर्षित होने लगीं, जैसे ही उस व्यक्ति की नजरें अंजना पर पड़ीं, अंजना का चेहरा वानर जैसा हो गया। अंजना जोर-जोर से रोने लगीं, जब वह युवक उनके पास आया और उनकी पीड़ा का कारण पूछा तो अंजना ने अपना चेहरा छिपाते हुए उसे बताया कि वह बदसूरत हो गई हैं। अंजना ने उस बलशाली युवक को दूर से देखा था लेकिन जब उसने उस व्यक्ति को अपने समीप देखा तो पाया कि उसका चेहरा भी वानर जैसा था।

अपना परिचय बताते हुए उस व्यक्ति ने कहा कि वह कोई और नहीं वानर राज केसरी हैं जो जब चाहें इंसानी रूप में आ सकते हैं। अंजना का वानर जैसा चेहरा उन दोनों को प्रेम करने से नहीं रोक सका और जंगल में केसरी और अंजना ने विवाह कर लिया।

केसरी एक शक्तिशाली वानर थे जिन्होने एक बार एक भयंकर हाथी को मारा था। उस हाथी ने कई बार असहाय साधु-संतों को विभिन्न प्रकार से कष्ट पँहुचाया था। तभी से उनका नाम केसरी पढ़ गया, 

"केसरी" का अर्थ होता है सिंह। उन्हे "कुंजर सुदान"(हाथी को मारने वाला) के नाम से भी जाना जाता है।

*पंपा सरोवर*

अंजना और मतंग ऋषि - पुराणों में कथा है कि केसरी और अंजना ने विवाह कर लिया पर संतान सुख से वंचित थे । अंजना अपनी इस पीड़ा को लेकर मतंग ऋषि के पास गईं, तब मंतग ऋषि ने उनसे कहा-पप्पा (कई लोग इसे पंपा सरोवर भी कहते हैं) सरोवर के पूर्व में नरसिंह आश्रम है, उसकी दक्षिण दिशा में नारायण पर्वत पर स्वामी तीर्थ है वहाँ जाकर उसमें स्नान करके, बारह वर्ष तक तप एवं उपवास करने पर तुम्हें पुत्र सुख की प्राप्ति होगी। 

अंजना को पवन देव का वरदान*

मतंग रामायण कालीन एक ऋषि थे, जो शबरी के गुरु थे। अंजना ने मतंग ऋषि एवं अपने पति केसरी से आज्ञा लेकर तप किया था बारह वर्ष तक केवल वायु पर ही जीवित रही, एक बार अंजना ने “शुचिस्नान” करके सुंदर वस्त्राभूषण धारण किए। तब वायु देवता ने अंजना की तपस्या से प्रसन्न होकर उस समय पवन देव ने उसके कर्णरन्ध्र में प्रवेश कर उसे वरदान दिया, कि तेरे यहां सूर्य, अग्नि एवं सुवर्ण के समान तेजस्वी, वेद-वेदांगों का मर्मज्ञ, विश्वन्द्य महाबली पुत्र होगा।

अंजना को भगवान शिव का वरदान*

अंजना ने मतंग ऋषि एवं अपने पति केसरी से आज्ञा लेकर नारायण पर्वत पर स्वामी तीर्थ के पास, अपने आराध्य शिव की तपस्या में मग्न थीं । शिव की आराधना कर रही थीं तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें वरदान मांगने को कहा, अंजना ने शिव को कहा कि साधु के श्राप से मुक्ति पाने के लिए उन्हें शिव के अवतार को जन्म देना है, इसलिए शिव बालक के रूप में उनकी कोख से जन्म लें। 

 (कर्नाटक राज्य के दो जिले कोप्पल और बेल्लारी में रामायण काल का प्रसिद्ध किष्किंधा)

‘तथास्तु’ कहकर शिव अंतर्ध्यान हो गए। इस घटना के बाद एक दिन अंजना शिव की आराधना कर रही थीं और दूसरी तरफ अयोध्या में, इक्ष्वाकु वंशी महाराज अज के पुत्र और अयोध्या के महाराज दशरथ, अपनी तीन रानियों के कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी साथ पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए, श्रृंगी ऋषि को बुलाकर 'पुत्र कामेष्टि यज्ञ' के साथ यज्ञ कर रहे थे।

यज्ञ की पूर्णाहुति पर स्वयं अग्नि देव ने प्रकट होकर श्रृंगी को खीर का एक स्वर्ण पात्र (कटोरी) दिया और कहा "ऋषिवर! यह खीर राजा की तीनों रानियों को खिला दो। राजा की इच्छा अवश्य पूर्ण होगी।" जिसे तीनों रानियों को खिलाना था लेकिन इस दौरान एक चमत्कारिक घटना हुई, एक पक्षी उस खीर की कटोरी में थोड़ा सा खीर अपने पंजों में फंसाकर ले गया और तपस्या में लीन अंजना के हाथ में गिरा दिया। अंजना ने शिव का प्रसाद समझकर उसे ग्रहण कर लिया।

हनुमान जी का जन्म त्रेता युग मे अंजना के पुत्र के रूप मे, चैत्र शुक्ल की पूर्णिमा की महानिशा में हुआ।

*अन्य कथा अनुसार हनुमान अवतार*

सामान्यत: लंकादहन के संबंध में यही माना जाता है कि  सीता की खोज करते हुए लंका पहुंचे और रावण के पुत्र सहित अनेक राक्षसों का अंत कर दिया। तब रावण के पुत्र मेघनाद ने श्री हनुमान को ब्रह्मास्त्र छोड़कर काबू किया और रावण ने श्री हनुमान की पूंछ में आग लगाने का दण्ड दिया। तब उसी जलती पूंछ से श्री हनुमान ने लंका में आग लगा रावण का दंभ चूर किया। किंतु पुराणों में लंकादहन के पीछे भी एक ओर रोचक कथा जुड़ी है, जिसके कारण श्री हनुमान ने पूंछ से लंका में आग लगाई।

*श्री हनुमान शिव अवतार है।*

शिव से ही जुड़ा है यह रोचक प्रसंग। एक बार माता पार्वती की इच्छा पर शिव ने कुबेर से सोने का सुंदर महल का निर्माण करवाया। किंतु रावण इस महल की सुंदरता पर मोहित हो गया। वह ब्राह्मण का वेश रखकर शिव के पास गया। उसने महल में प्रवेश के लिए शिव-पार्वती से पूजा कराकर दक्षिणा के रूप में वह महल ही मांग लिया। भक्त को पहचान शिव ने प्रसन्न होकर वह महल दान दे दिया।

दान में महल प्राप्त करने के बाद रावण के मन में विचार आया कि यह महल असल में माता पार्वती के कहने पर बनाया गया। इसलिए उनकी सहमति के बिना यह शुभ नहीं होगा। तब उसने शिवजी से माता पार्वती को भी मांग लिया और भोलेभंडारी शिव ने इसे भी स्वीकार कर लिया। जब रावण उस सोने के महल सहित मां पार्वती को ले जाना लगा। तब अचंभित और दुखी माता पार्वती ने विष्णु को स्मरण किया और उन्होंने आकर माता की रक्षा की।

जब माता पार्वती अप्रसन्न हो गई तो शिव ने अपनी गलती को मानते हुए मां पार्वती को वचन दिया कि त्रेतायुग में मैं वानर रूप हनुमान का अवतार लूंगा उस समय तुम मेरी पूंछ बन जाना। जब मैं माता सीता की खोज में इसी सोने के महल यानी लंका जाऊंगा तो तुम पूंछ के रूप में लंका को आग लगाकर रावण को दण्डित करना।

हनुमान जी की प्रसिद्धि कथा*

अंजना के पुत्र होने के कारण ही हनुमान

जी को अंजनेय नाम से भी जाना जाता है

जिसका अर्थ होता है 'अंजना द्वारा उत्पन्न'। माता श्री अंजनी और कपिराज

श्री केसरी हनुमानजी को अतिशय प्रेम करते थे।

श्री हनुमानजी को सुलाकर वो फल-फूल लेने गये थे इसी समय बाल हनुमान भूख एवं अपनी माता की अनुपस्थिति में भूख के कारण आक्रन्द करने लगे। इसी दौरान उनकी नजर क्षितिज पर पड़ी। सूर्योदय हो रहा था। बाल हनुमान को लगा की यह कोई लाल फल है। (तेज और पराक्रम के लिए कोई अवस्था नहीं होती)।

यहां पर तो श्री हनुमान जी के रुप में

माताश्री अंजनी के गर्भ से प्रत्यक्ष शिवशंकर अपने ग्यारहवें रुद्र में लीला कर रहे थे और श्री पवनदेव ने उनके उड़ने की शक्ति भी प्रदान की थी। जब शिशु हनुमान को भूख लगी तो वे उगते हुये सूर्य को फल समझकर उसे पकड़ने आकाश में उड़ने लगे। उस लाल फल को लेने के लिए हनुमानजी वायुवेग से आकाश में उड़ने लगे। उनको देखकर देव, दानव सभी विस्मयतापूर्वक कहने लगे कि बाल्यावस्था में एसे पराक्रम दिखाने वाला यौवनकाल में क्या नहीं करेगा। उधर भगवान सूर्य ने उन्हें अबोध शिशु समझकर अपने तेज से नहीं जलने दिया। जिस समय हनुमान सूर्य को पकड़ने के लिये लपके, उसी समय राहु

सूर्य पर ग्रहण लगाना चाहता था।हनुमानजी ने सूर्य के ऊपरी भाग में जब राहु का स्पर्श किया तो वह भयभीत होकर वहाँ से भाग गया। उसने इन्द्र के पास जाकर शिकायत की "देवराज! आपने मुझे अपनी क्षुधा शान्त करने के साधन के रूप में सूर्य और चन्द्र दिये थे। आज अमावस्या के दिन जब मैं सूर्य को ग्रस्त करने गया तब देखा कि दूसरा राहु सूर्य को पकड़ने जा रहा है।"

राहु की बात सुनकर इन्द्र घबरा गये और उसे साथ लेकर सूर्य की ओर चल पड़े। राहु को देखकर हनुमानजी सूर्य को छोड़ राहु पर झपटे। राहु ने इन्द्र को रक्षा के लिये पुकारा तो उन्होंने हनुमानजी पर वज्रायुध से प्रहार किया जिससे वे एक पर्वत पर गिरे और उनकी बायीं ठुड्डी टूट गई। हनुमान की यह दशा देखकर वायुदेव

को क्रोध आया। उन्होंने उसी क्षण अपनी गति रोक दिया। इससे संसार की कोई

भी प्राणी साँस न ले सकी और सब पीड़ा से तड़पने लगे। तब सारे सुर, असुर, यक्ष, किन्नर आदि ब्रह्मा जी की शरण में गये। ब्रह्मा उन सबको लेकर वायुदेव के पास गये। वे मूर्छत हनुमान को गोद में लिये उदास बैठे थे। जब ब्रह्माजी ने उन्हें सचेत किया तो वायुदेव ने अपनी गति का संचार करके सभी प्राणियों की पीड़ा दूर की।

तभी श्री ब्रह्माजी ने श्री हनुमानजी को वरदान दिया कि इस बालक को कभी ब्रह्मशाप नहीं लगेगा, कभी भी उनका एक भी अंग शस्तर नहीं होगा, ब्रह्माजीने अन्य देवताओं से भी कहा कि इस बालक को आप सभी वरदान दें तब देवराज इंन्द्रदेव ने हनुमानजी के गले में कमल की माला पहनाते हुए कहा की मेरे वज्रप्रहार के कारण इस बालक की हनु (दाढ़ी) टूट गई है इसीलिए इन कपिश्रेष्ठ का नाम आज से हनुमान रहेगा और मेरा वज्र भी इस बालक को नुकसान न पहुंचा सके ऐसा वज्र से कठोर होगा। श्री सूर्यदेव ने भी कहा कि इस बालक को में अपना तेज प्रदान करता हूं और मैं इसको शस्त्र-समर्थ मर्मज्ञ बनाता हुं ।

*हनुमानजी के कुछ नाम एवं उनका अर्थ*

हनुमानजी को मारुति, बजरंगबली इत्यादि नामों से भी जानते हैं।  मरुत शब्द से ही मारुति शब्द की उत्पत्ति हुई है। महाभारत में हनुमानजी का उल्लेख मारुतात्मज के नाम से किया गया है। हनुमानजी का अन्य एक नाम है, बजरंगबली। बजरंगबली यह शब्द व्रजांगबली के अपभ्रंश से बना है। जिनमें वज्र के समान कठोर अस्त्र का सामना करनेकी शक्ति है, वे व्रजांगबली है। जिस प्रकार लक्ष्मण से लखन, कृष्ण से किशन ऐसे सरल नाम लोगों ने अपभ्रंश कर उपयोगमें लाए, उसी प्रकार व्रजांगबली का अपभ्रंश बजरंगबली हो गया।

*हनुमानजी की विशेषताएं*

अनेक संतों ने समाज में हनुमानजी की उपासना को प्रचलित किया है। ऐसे हनुमान जी के संदर्भ में समर्थ रामदास स्वामी कहते हैं, ‘हनुमानजी हमारे देवता हैं ।’ हनुमानजी शक्ति, युक्ति एवं भक्ति का प्रतीक हैं। इसलिए समर्थ रामदासस् वामी ने हनुमानजी की उपासना की प्रथा आरंभ की। महाराष्ट्र में उनके द्वारा स्थापित ग्यारह मारुति प्रसिद्ध हैं। साथ ही संत तुलसीदास ने उत्तर भारत में मारुति के अनेक मंदिर स्थापित किए तथा उनकी उपासना दृढ की। दक्षिण भारत में मध्वाचार्य को मारुति का अवतार माना जाता है। इनके साथ ही अन्य कई संतों ने अपनी विविध रचनाओं द्वारा समाज के समक्ष मारुति का आदर्श रखा है।

1).  *शक्तिमानता*

हनुमानजी सर्वशक्तिमान देवता हैं। जन्म लेते ही हनुमानजी ने सूर्यको निगलनेके लिए उडान भरी। इससे यह स्पष्ट होता है कि, वायुपुत्र अर्थात वायुतत्त्व से उत्पन्न हनुमानजी, सूर्यपर अर्थात तेज तत्त्व पर विजय प्राप्त करने में सक्षम थे। पृथ्वी, आप, तेज, वायु एवं आकाश तत्त्वों में से तेज तत्त्व की तुलना में वायुतत्त्व अधिक सूक्ष्म है अर्थात अधिक शक्तिमान है। सर्व देवताओंमें केवल हनुमानजीको ही अनिष्ट शक्तियां कष्ट नहीं दे सकतीं। लंकामें लाखों राक्षस थे, तब भी वे हनुमानजीका कुछ नहीं बिगाड पाएं। इससे हम हनुमानजीकी शक्तिका अनुमान लगा सकते हैं।

1). *भूतों के स्वामी*

हनुमानजी भूतों के स्वामी माने जाते हैं। किसी को भूत बाधा हो, तो उस व्यक्ति को हनुमानजी के मंदिर ले जाते हैं। साथ ही हनुमानजी से संबंधित स्तोत्र जैसे हनुमत्कवच, भीमरूपी स्तोत्र अथवा हनुमानचालीसा का पाठ करनेके लिए कहते हैं ।

2). *भक्त*

साधना में जिज्ञासु, मुमुक्षु, साधक, शिष्य एवं भक्त ऐसे उन्नति के चरण होते हैं। इसमें भक्त यह अंतिम चरण है। भक्त अर्थात वह जो भगवानसे विभक्त नहीं है। हनुमानजी भगवान श्रीराम से पूर्णतया एकरूप हैं। जब भी नवविधा भक्ति में से दास्य भक्ति का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण देना होता है, तब हनुमानजी का उदाहरण दिया जाता है। वे अपने प्रभु राम के लिए प्राण अर्पण करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं । प्रभु श्रीराम की सेवा की तुलना में उन्हें सब कुछ कौडी के मोल लगता है। हनुमान सेवक एवं सैनिक का एक सुंदर सम्मिश्रण हैं। स्वयं सर्वशक्तिमान होते हुए भी वे, अपने-आपको श्रीरामजीका दास कहलवाते थ। उनकी भावना थी कि उनकी शक्ति भी श्रीरामजी की ही शक्ति है। मान अर्थात शक्ति एवं भक्तिका संगम।

3). *मनोविज्ञान में निपुण एवं राजनीति में कुशल*

अनेक प्रसंगों में सुग्रीव इत्यादि वानर ही नहीं, वरन् राम भी हनुमानजी से परामर्श करते थे। लंका में प्रथम ही भेंट में हनुमानजी ने सीता के मन में अपने प्रति विश्वास निर्माण किया। इन प्रसंगों से हनुमानजी की बुद्धिमानता एवं मनोविज्ञान में निपुणता स्पष्ट होती है। लंकादहन कर हनुमानजी ने रावण की प्रजा में रावणके सामर्थ्य के प्रति अविश्वास उत्पन्न किया। इस बातसे उनकी राजनीति-कुशलता स्पष्ट होती है।

4.  *जितेंद्रिय*

 सीता को ढूंढने जब हनुमानजी रावण के अंतःपुर में गए, तो उस समय की उनकी मनः स्थिति थी, उनके उच्च चरित्र का सूचक है। इस संदर्भ में वे स्वयं कहते हैं, ‘सर्व रावण पत्नियों को निःशंक लेटे हुए मैंने देखा; परंतु उन्हें देखने से मेरे मन में विकार उत्पन्न नहीं हुआ।’ 

वाल्मीकि रामायण, सुंदरकांड 11.42-43

इंद्रियजीत होने के कारण हनुमानजी रावणपुत्र इंद्रजीत को भी पराजित कर सके। तभी से इंद्रियों पर विजय पाने हेतु हनुमानजी की उपासना बतायी गई।

5).  *भक्तों की इच्छा पूर्ण करने वाले*

*हनुमानजी को इच्छा पूर्ण करने वाले देवता मानते हैं, इसलिए व्रत रखने वाले अनेक स्त्री-पुरुष हनुमानजी की मूर्ति की श्रद्धापूर्वक निर्धारित परिक्रमा करते हैं।*

*कई लोगों को आश्चर्य होता है कि, जब किसी कन्या का विवाह निश्चित न हो रहा हो, तो उसे ब्रह्मचारी हनुमानजी की उपासना करने के लिए कहा जाता है। वास्तव में अत्युच्च स्तर के देवताओं में ‘ब्रह्मचारी’ या ‘विवाहित’ जैसा कोई भेद नहीं होता। ऐसा अंतर मानव-निर्मित है। मनोविज्ञान के आधार पर कुछ लोगों की यह गलत धारणा होती है कि, सुंदर, बलवान पुरुष से विवाह की कामना से कन्याएं हनुमानजी की उपासना करती हैं।परंतु वास्तविक कारण कुछ इस प्रकार है। लगभग 30 प्रतिशत व्यक्तियों का विवाह भूतबाधा, जादू-टोना इत्यादि अनिष्ट शक्तियों के प्रभावके कारण नहीं हो पाता। हनुमानजी की उपासना करने से ये कष्ट दूर हो जाते हैं एवं उनका वि

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जौनपुर:



/शहर के प्राचीनतम शिक्षण संस्थान राजा श्री कृष्ण दत्त इंटर कॉलेज के 28 जनवरी 1987 को हिंदी विभाग में नियुक्त श्री अशोक कुमार तिवारी जी का आज विद्यालय के नवनिर्मित नीता कुंवर सभागार में एक भव्य विदाई समारोह आयोजित किया गया जिसमें प्रधानाचार्य डॉक्टर संजय चौबे ने अशोक कुमार तिवारी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व की चर्चा करते हुए विद्यालय के प्रति समर्पण भाव की सराहना की। महाविद्यालय एवं इंटर कॉलेज के प्रबंधक डॉ सत्यराम प्रजापति ने सेवा में निवृत्त प्रवक्ता के संस्थान के प्रति लगाव से अन्य शिक्षकों को सीख लेने का संदेश दिया। राज पीजी कॉलेज के वर्तमान प्राचार्य प्रोफेसर शंभू राम ने अध्यापकों से गुरुतर दायित्व का निर्वहन करते हुए छात्रों की संख्या एवं पठन-पाठन के प्रति समर्पित भाव के लिए तत्पर रहने का सुझाव दिया। कॉलेज के उपप्रबंधक जियाराम यादव ने तिवारी जी के शुभ स्वास्थ्य एवं उत्तम जीवन की कामना की। विद्यालय की पूर्व प्रधानाचार्य प्रेमचंद जी ने "जिंदगी कांटों का सफर है।हौसला इसकी पहचान है रास्ते पर तो सभी चलते हैं जो रास्ता बनाए उसे इंसान कहते हैं।।" के साथ एक अध्यापक के दायित्व का बोध कराया।

राज पी जी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य एवं एन सी सी के संघीय अधिकारी प्रोफेसर(कैप्टन) डॉ अखिलेश्वर शुक्ला ने कहा कि शिक्षक (गुरु) कभी सेवानिवृत्ति नहीं होता किसी भी शिक्षक का सामाजिक दायित्व कभी समाप्त नहीं होता विश्व विकास के साथ विनाश की स्थिति ना आवे इसका ध्यान शिक्षक समाज को विशेष रूप से रखना चाहिए। कार्यक्रम का सफल संचालन कॉलेज के एन सी सी के संघीय अधिकारी लेफ्टिनेंट बृजभूषण यादव ने किया। विदाई समारोह से अभिभूत शिक्षक अशोक तिवारी ने इस भव्य आयोजन के लिए प्रबंधक ,प्रधानाचार्य, आगंतुक अतिथियों एवं विद्यालय के सभी शिक्षकों के प्रति गदगद भाव से आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर कॉलेज के वरिष्ठ प्रवक्ता  अंजनी कुमार श्रीवास्तव,डॉ विश्वनाथ यादव, डॉ बृजेश कुमार सिंह, डॉक्टर रमेश चंद्र, राघवेंद्र सिंह, राम प्रताप, सत्य प्रकाश सिंह, पवन कुमार साहू,संतलाल,आनंद कुमार तिवारी,रमेश कुमार त्रिपाठी,नागेंद्र प्रसाद,अनिल कुमार यादव,यादव सुभाष,संजय सिंह विनय ओझा,ऋषिकेश, सूरज, पूजा सिंह, रंजना प्रजापति, ज्योति सिंह, रंजना चौरसिया, लिपिक सुभाष कुमार मिश्रा सहित विद्यालय के समस्त शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।


ऋषिकेश : 

raided education officer doiwala


उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) देहरादून की टीम ने डोईवाला के उपखंड शिक्षा अधिकारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। मामले में महिला सहयोगी को भी पकड़ा है। इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप की स्थिति है।

जानकारी के मुताबिक बुधवार को हरिद्वार-देहरादून रोड स्थित नेपाली फार्म तिराहे पर विजिलेंस टीम ने सुनियोजित तरीके से छापा मारकर आरोपी अधिकारी को दबोचा। आरोपी की पहचान धनवीर सिंह बिष्ट के रूप में हुई है, जो वर्तमान में उप शिक्षा अधिकारी एवं प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी, डोईवाला के पद पर तैनात थे।

इस मामले में थाना सतर्कता सेक्टर देहरादून में मुकदमा संख्या 7/2026 दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत कार्रवाई की जा रही है।

1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा

सूत्रों के अनुसार, आरोपी अधिकारी शिकायतकर्ता से 1 लाख रुपए की रिश्वत मांग रहे थे। यह रकम गंगा वैली जूनियर हाईस्कूल, ऋषिकेश में शिक्षा का अधिकार के तहत पढ़ रहे छात्रों की प्रतिपूर्ति (रिइम्बर्समेंट) के बिल पास कराने के एवज में मांगी गई थी। विजिलेंस की ट्रैप टीम ने मौके पर ही आरोपी को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया।

इस मामले में एक अन्य आरोपी पुष्पांजलि, पत्नी पंकज शर्मा, निवासी डालनवाला, देहरादून को भी गिरफ्तार किया गया है। वह वर्तमान में स्वामी उत्तरांचल मॉडर्न स्कूल, गुमानीवाला, ऋषिकेश से जुड़ी हुई बताई जा रही हैं।

विजिलेंस विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मामले की गहन जांच जारी है और आने वाले दिनों में इससे जुड़े अन्य खुलासे भी हो सकते हैं।

विजिलेंस की इस सख्त कार्रवाई से सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

 

जल्द  झूले-फिसलपट्टी से युक्त होगा आदर्श प्राथमिक विद्यालय न.5

संदीप सिंह रावत

DM pauri swati Bhadoriya



आज चैत्र शुक्ल चतुर्दशी  अप्रैल 1 को विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र के अंतर्गत प्रवेशोत्सव के रूप में मनाया गया। पौड़ी नगर में आदर्श प्राथमिक विद्यालय नंबर 5 के बाल विद्यार्थियों के लिए यह एक यादगार अवसर रहा।


जहा नई कक्षा, नई पुस्तके प्राप्त हुई वही अपने समक्ष जिला।अधिकारी  स्वाति एस भदौरिया से संवाद और प्रोत्साहन पाकर बाल विद्यार्थी उत्साह से लबरेज नजर आए।


बच्चो की खुशी तब दोगुनी हो गई जब जिला अधिकारी ने विद्यालय परिसर में झूले और फिसलपट्टी ना होने पर जल्द बच्चो के शारीरिक विकास और खेल कूद के मद्देनजर जल्द इनको स्थापित करने के लिए संबंधित शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए।


*जिलाधिकारी ने बच्चों से किया आत्मीय संवाद, बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु स्कूल के प्लेइंग एरिया में झूला -फिसलपट्टी इत्यादि लगाने हेतु प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।


ज्ञात रहे जनपद पौड़ी में शैक्षणिक सत्र 2026-27  प्राथमिक से लेकर इंटरमीडिएट तक जिले के सभी राजकीय विद्यालयों में प्रवेश उत्सव के तहत छात्र-छात्राओं का स्वागत किया गया और उन्हें निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें वितरित की गईं। 


इस बार विशेष पहल के तहत सत्र के प्रथम दिन ही विद्यार्थियों को नयी पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी, जिससे पढ़ाई का क्रम बिना किसी विलंब के प्रारंभ हो सके।


जनपद स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय संख्या पांच, पौड़ी में किया। उन्होंने नन्हें विद्यार्थियों को स्वयं पुस्तकें वितरित करते हुए उनसे आत्मीय संवाद भी किया और उनके उज्जवल भविष्य के लिए प्रेरित भी किया।


विद्यालय परिसर में इस दौरान उल्लासपूर्ण माहौल देखने को मिला और बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में भागीदारी की। 


जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने अपने संबोधन में कहा कि समय पर पाठ्य सामग्री उपलब्ध होना शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे विद्यार्थियों को शुरुआत से ही पढ़ाई में निरंतरता मिलती है और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विद्यालयों में पुस्तक वितरण का कार्य शीघ्र और सुचारु रूप से पूर्ण किया जाए।


उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि विद्यालय के खेल क्षेत्र में बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले, फिसलपट्टी लगाने हेतु शीघ्र प्रस्ताव तैयार कर उपलब्ध कराएं, ताकि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहन मिल सके।


जिला शिक्षाधिकारी (प्रारंभिक) अंशुल बिष्ट ने बताया कि जनपद के सभी विद्यालयों में प्रवेश उत्सव के साथ-साथ पुस्तक वितरण सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने कहा कि समय पर पुस्तकों की उपलब्धता से बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा और उनकी पढ़ाई अधिक प्रभावी होगी।


कार्यक्रम में प्रधानाचार्य आरती बहुगुणा, वार्ड सदस्य दिनेश रावत, अरविन्द रावत सहित विद्यालय परिवार एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

उत्तराखंड में आए दिन बढ़ रही अराजकता को लेकर मुख्यमंत्री धामी ने कठोर निर्देश दे दिए हैं यह निर्देश लगातार कई महीनो से दिए जा रहे हैं कि उत्तराखंड प्रदेश में कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से चलने हेतु एवं अराजक तत्वों के विरोध कठोर कार्यवाही की जाए इसके बावजूद भी आए दिन कहीं ना कहीं प्रदेश में मर्डर करने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।

कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि प्रदेश में लगातार कानून व्यवस्था को बिगाड़ने होने में अधिक अधिक हाथ कुछ तथागत उन पुलिस कर्मचारियों का भी है जो अपराधों की परिस्थित को दबा देते हैं। यह कहना भी काम नहीं होगा कि तथा कथित कुछ नेता भी अनावश्यक प्रकार के दबाव बनाकर पुलिस से यह कार्य करवाते हैं जब कोई गरीब और लाचार जनता पुलिस के पास बड़ी उम्मीद लेकर कोई शिकायत लेकर जाती है तो उनकी शिकायतों को अधिकतर रद्दी की टोकरी में फेंक दिया जाता है या फिर उन पर सिर्फ कार्यवाही का आश्वासन दिया जाता है कार्रवाई होती ही नहीं है।

यदि यह सारे कार्य सही होते  तो जिला अधिकारी के जनता दरबार में इतनी भीड़ नहीं पहुंचते। स्थानीय स्तर पर काम न होने के कारण लोग सीधे ही एसपी एसपीसीओ सिटी उच्च अधिकारियों के चक्कर काटते हैं क्योंकि स्थानीय स्तर पर उन्हें किसी भी प्रकार की मदद नहीं मिलती है। हां तो तब हो जाती है जबकि रसूक वाले लोगों का कोई ना कोई कनेक्शन जिला अधिकारी कार्यालय से लेकर डीजीपी कार्यालय एसपी ऑफिस तक बना रहता है और वह वहां तक भी पहुंचने वाले फरियादी को मजबूर कर देते हैं कि वह चुप करके बैठ जाए और सहता रहे। विभाग अपनों को बचाने में लगा रहता है और इस प्रकार अनगिनत अपराधों की चाहे वह महिलाओं के विरुद्ध हूं अथवा बुजुर्गों के अथवा किसी लाचार और बेसहारा के उनकी लिस्ट लंबी होती चली जाती है और अपराधियों को एक प्रकार की शरण और सहायता मिल जाती है जिसका नतीजा यह होता है जो अब हमारे प्रदेश में हो रहा है।

 

शिकायतों का और फिर का लंबे समय तक पड़े रहना भी इसका एक कारण है। हो सकता है विभाग की अपनी कुछ मजबूरियां होती हैं उनके पास मैनपॉवर ना हो या समय ना होता हो परंतु फिर भी जनता के रक्षक बनने का बीमा एक मात्र मित्र पुलिस उत्तराखंड के पास ही है यदि रक्षक ही अपने कार्य से विमुख हो जाए तो जनता का जो हाल होता है वही आज की तारीख में उत्तराखंड में हो रहा है इसी बात को लेकर मुख्यमंत्री धामी ने कड़े निर्देश दिए जिसका अनुसरण करते हुए पुलिस मुख्यालय में  लॉ एंड ऑर्डर को लेकर उच्च स्तरीय बैठक कर डीजीपी ने  अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए।



देहरादून में हाल ही में हुई आपराधिक घटनाओं की संवेदनशीलता के दृष्टिगत *पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड श्री दीपम सेठ द्वारा आज पुलिस मुख्यालय में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में आईजी गढ़वाल श्री राजीव स्वरूप, आईजी एसटीएफ श्री नीलेश आनन्द भरणे, एसएसपी देहरादून श्री प्रमेंद्र डोबाल तथा एसएसपी एसटीएफ श्री अजय सिंह एवं अन्य अधिकारीगण* उपस्थित रहे।


*बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट रूप से जिम्मेदारियां निर्धारित करते हुए निम्न निर्देश दिए गए—*


▪️ *आईजी गढ़वाल* को देहरादून की कानून-व्यवस्था की दैनिक मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।


▪️ *एसएसपी देहरादून* को अधीनस्थ अधिकारियों की स्पष्ट टास्किंग कर उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा गया, साथ ही क्षेत्र में  प्रभावी पुलिसिंग बनाए रखने के निर्देश दिए ।


▪️ *क्षेत्राधिकारी एवं थाना प्रभारी* स्वयं फील्ड में सक्रिय रहकर चिन्हित हॉटस्पॉट क्षेत्रों में पुलिस की विजिबिलिटी बढ़ाएं तथा बैरियर्स पर सघन चेकिंग सुनिश्चित करें। *विशेष रूप से प्रातःकालीन समय में क्षेत्राधिकारी पुलिसबल की उपस्थिति और सक्रियता बढ़ाएं।*


▪️ *आईजी एसटीएफ एवं एसएसपी एसटीएफ* को देहरादून में सक्रिय आपराधिक तत्वों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।


▪️ *सत्यापन अभियान* के अंतर्गत पीजी एवं किरायेदारों का सघन सत्यापन कराने तथा होम-स्टे में संचालित गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया।


▪️ *निर्धारित समय के बाद संचालित हो रहे बार एवं पब्स पर सख्त कार्रवाई* करने के निर्देश दिए गए।


पुलिस महानिदेशक ने स्पष्ट कहा कि *राजधानी देहरादून में आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण हेतु एक विशेष अभियान चलाकर  सख्त कार्यवाही सुनिश्चित की जाय। उन्होंने सभी अधिकारियों को पूर्ण मुस्तैदी, सतर्कता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करते हुए आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।*


 डोईवाला:



डोईवाला पुलिस द्वारा स्वामी राम हिमालयन अस्पताल/विश्व विद्यालय जौलीग्रान्ट मे हुयी मारपीट की घटना का संज्ञान लेते हुए गार्डो के विरूद्ध किया अभियोग पंजीकृत 


दिनांक 27.03.26 को श्री चन्द्र भूषण उप मुख्य सुरक्षा अधिकारी स्वामी राम हिमालयन अस्पताल/विश्व विधालय जौलीग्रान्ट द्वारा सूचना दी कि हिमालयन अस्पताल/विश्व विघालय जौलीग्रान्ट मे तीन युवक द्वारा परिसर मे आकर क्लास रूम में घुसकर छात्र-छात्राओं के साथ अनावश्यक रूप से गाली-गलौज कर अभद्र व्यवहार किया जा रहा है तथा आपस मे झगड़ा करने पर उतारू हो रहे है, जिससे अस्पताल मे आने-जाने वाले मरीजो/तीमारदारों तथा संस्थान मे अध्यनरत् छात्र-छात्रओ को परेशानी हो रही थी ।

              प्राप्त सूचना पर डोईवाला पुलिस द्वारा मौके पर जाकर उक्त तीनो युवको को संस्थान मे आने का कारण पूछा तो कोई संतोषजनक उत्तर नही दिया गया, जिनको संस्थान से जाने के लिए एवं शोर-शराबा नही करने हेतु काफी समझाया गया लेकिन तीनो आरोपी और अधिक आक्रोशित होने लगे, मौके पर शान्ति व कानून व्यवस्था सुचारू रखने हेतु तथा उक्त युवको द्वारा किसी संगेय अपराध कारित करने की प्रबल सभावना के दृष्टिगत दिनांक 27.03.2026 को उक्त तीन युवक (1) जय भण्डारी (2) उजैब जैदी (3) अभिजीत सिंह को डोईवाला पुलिस द्वारा नियमानुसार अन्तर्गत *धारा 170 बीएनएसएस* मे गिरफ्तार नियमानुसार उप-जिला मजिस्ट्रेट डोईवाला देहरादून के समक्ष पेश किया गया था। 


     उपरोक्त घटना के क्रम मे अब बाद में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमे उक्त युवक के साथ में, स्वामी राम हिमालयन अस्पताल/विश्व विघालय जौलीग्रान्ट मे नियुक्त गार्डो द्वारा मारपीट किया जाना दिख रहा है, जिसपर डोईवाला पुलिस द्वारा तत्काल संज्ञान लेते हुए कोतवाली डोईवाला पर सम्बन्धित धाराओ मे अभियोग पंजीकृत किया गया है ।

 

 *मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयास रंग लाए, केंद्र से मिली बड़ी सड़क परियोजना को हरी झंडी* 

 *ऋषिकेश में जाम से मिलेगी राहत, 12.67 किमी बाईपास निर्माण को केंद्र की स्वीकृति* 

 *चारधाम यात्रा और पर्यटन को मिलेगा बूस्ट, धामी सरकार की पहल से बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट मंजूर*

CM strict about law and order in ddun


 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निरंतर प्रयासों और प्रभावी पैरवी के फलस्वरूप ऋषिकेश बाईपास के 4-लेन निर्माण कार्य को भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से बड़ी स्वीकृति प्राप्त हुई है। मंत्रालय द्वारा इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए ₹1105.79 करोड़ की तकनीकी, प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी की गई है।


यह बहुप्रतीक्षित परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-7 पर टीनपानी फ्लाईओवर (किमी 529.750) से लेकर खरासोटे पुल (किमी 542.420) तक विकसित की जाएगी। लगभग 12.670 किलोमीटर लंबा यह बाईपास भट्टोवाला एवं ढालवाला गांवों से होकर गुजरेगा और इसे EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एवं कंस्ट्रक्शन) मोड पर क्रियान्वित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस स्वीकृति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश बाईपास परियोजना के पूर्ण होने से क्षेत्र में यातायात का दबाव कम होगा, जाम की समस्या से राहत मिलेगी और स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ चारधाम यात्रा एवं पर्यटन गतिविधियों को भी बड़ी सुविधा प्राप्त होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा, “ *यह परियोजना उत्तराखंड के समग्र विकास और बेहतर कनेक्टिविटी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारी सरकार राज्य के दूरस्थ और शहरी क्षेत्रों को मजबूत सड़क नेटवर्क से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।”* 


मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना के लिए प्रारंभिक अनुमान ₹1151.18 करोड़ था, जिसे संशोधित कर ₹1139.40 करोड़ किया गया और अंततः ₹1105.79 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है।

परियोजना को तीन वर्षों की समयावधि में पूरा किया जाएगा और कार्य में किसी प्रकार की लागत या समय वृद्धि स्वीकार नहीं की जाएगी। निविदाएं ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के माध्यम से आमंत्रित की जाएंगी तथा सभी कार्य निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप किए जाएंगे।

इस परियोजना के लिए व्यय वित्त वर्ष 2025-26 में भारत सरकार के बजट प्रावधान (GBS) के अंतर्गत किया जाएगा। देहरादून स्थित क्षेत्रीय अधिकारी को इस कार्य के लिए ड्रॉइंग एवं डिस्बर्सिंग ऑफिसर (DDO) नामित किया गया है।

इस परियोजना के पूर्ण होने से ऋषिकेश क्षेत्र में यातायात व्यवस्था सुगम होगी, जाम की समस्या में कमी आएगी तथा राज्य के आर्थिक और पर्यटन विकास को नई गति मिलेगी।

₹55.52 करोड़ की लागत से बन रहे अत्याधुनिक साइंस सेंटर का मुख्यमंत्री ने किया निरीक्षण


*विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार का बनेगा प्रमुख केंद्र*


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को जनपद चम्पावत के भ्रमण के दौरान लगभग ₹55.52 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन अत्याधुनिक साइंस सेंटर का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, प्रगति एवं समयबद्धता का बारीकी से अवलोकन करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।


निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित वैज्ञानिक गैलरियों एवं चार मंजिला साइंस कैंपस सुविधा का अवलोकन किया। इस कैंपस में 40 विद्यार्थियों के लिए छात्रावास, स्टाफ क्वार्टर तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जिससे यह केंद्र विद्यार्थियों के लिए आवासीय वैज्ञानिक शिक्षण का भी महत्वपूर्ण स्थल बनेगा।


इस अवसर पर यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत ने अवगत कराया कि दो मंजिला साइंस गैलरी ब्लॉक में “फन साइंस गैलरी”, प्रदर्शनी कक्ष, विज्ञान एवं कृषि गैलरी, प्रशिक्षण हॉल तथा अत्याधुनिक एस्ट्रोनॉमी गैलरी विकसित की जा रही है। इसके अतिरिक्त परिसर में 120 क्षमता वाला ऑडिटोरियम, 71 सीटों वाला आधुनिक प्लैनेटेरियम (तारामंडल) — जिसमें इनर एवं आउटर डोम की सुविधा होगी — तथा स्टाफ के लिए कॉन्फ्रेंस एवं डेवलपमेंट हॉल जैसी विश्वस्तरीय व्यवस्थाएं भी स्थापित की जा रही हैं।


निरीक्षण के उपरांत मुख्यमंत्री ने विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा तैयार किए गए विज्ञान मॉडलों का अवलोकन किया तथा नन्हे वैज्ञानिकों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि यह साइंस सेंटर भविष्य में प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार का प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि विज्ञान के बिना विकास की परिकल्पना अधूरी है और इस केंद्र के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भी आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों एवं खगोल विज्ञान को समझने का अवसर प्राप्त होगा। राज्य सरकार का उद्देश्य युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित कर उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाना है।


मुख्यमंत्री  श्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया कि निर्माण कार्य को निर्धारित समयसीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए। साथ ही उन्होंने निर्माण के दौरान पर्यावरणीय मानकों एवं श्रमिकों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने पर भी बल दिया।


इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी, दर्जा राज्य मंत्री श्याम नारायण पांडे, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सिंह सामंत, भाजपा प्रदेश मंत्री निर्मल मेहरा, नगर पालिका अध्यक्ष प्रेमा पांडे, ब्लॉक प्रमुख अंचला बोहरा, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती, अपर जिलाधिकारी कृष्णनाथ गोस्वामी सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, अधिकारी, विभिन्न विद्यालयों के छात्र छात्राएं एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

लॉ एंड ऑर्डर पर सीएम धामी सख्त, अधिकारियों को कड़ी चेतावनी


*कानून व्यवस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों पर कार्यवाही के लिए सघन अभियान चलाने के डीजीपी को दिए निर्देश*

*कुठालगेट चौकी इंचार्ज और उप आबकारी निरीक्षक निलंबित*


देहरादून में हाल ही में हुई कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटना पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य में किसी भी कीमत पर कानून व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा।


मुख्यमंत्री के निर्देश पर सोबन सिंह उप,  उप आबकारी निरीक्षक क्षेत्र-3 मसूरी, जनपद-देहरादून और प्रभारी कुठालगेट चौकी उपनिरीक्षक ना.पु अशोक कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। 

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रदेशभर में तत्काल प्रभाव से व्यापक चेकिंग अभियान चलाया जाए और सभी अवांछित एवं हुड़दंग करने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि रोड रेज, फायरिंग, और देर रात तक चलने वाली अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाया जाए।

मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता आम जनता की सुरक्षा है और इसके लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा। उन्होंने पुलिस और प्रशासन को पूरी सख्ती और मुस्तैदी के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।


मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।देहरादून में हालिया घटना के बाद संबंधित अधिकारियों के निलंबन को इसी सख्ती का उदाहरण बताते हुए उन्होंने कहा कि आगे भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।

उधर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय में शहर में लॉ एंड ऑर्डर को लेकर गृह और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने रोड रेज और हुड़दंग की घटनाओं के बढ़ने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए ऐसी घटनाओं रोकने के लिए निगरानी बढ़ाए जाने और हुड़दंगियों पर कठोर कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए।


मुख्य सचिव ने देहरादून शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों में पुलिस की गस्त बढ़ाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने एसएसपी देहरादून को अपने सभी थानेदारों को पीक ऑवर में गस्त बढ़ाए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि डे - नाईट पेट्रोलिंग के साथ ही मॉर्निंग पेट्रोलिंग को भी बढ़ाया जाए। 


मुख्य सचिव ने बार और रेस्टोरेंट क्लोजिंग के लिए निर्धारित समय को कठोरता से लागू करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि सप्ताहांत में देहरादून को पार्टी और हुड़दंगियों को अड्डा ना बनने दिया जाए, इसके लिए हुड़दंगियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। 

मुख्य सचिव ने बार संचालन के नियमों का पालन ना करने वाले बार और अवैध बार संचालकों पर भी कठोर कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अपनी ड्यूटी को मुस्तेदी से ना करने वाले लापरवाह अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि शहर के आसपास के क्षेत्रों में खुले होम स्टे पर भी निगरानी किए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए होम स्टे की मैपिंग की जाए एवं निगरानी रखी जाए कि ये होम स्टे जो टूरिज्म प्रमोशन के लिए बने थे, कहीं लगातार बार लाइसेंस लेकर इसका दुरुपयोग तो नहीं कर रहे हैं। किरायेदारों और पीजी में रहने वालों का भी सघन सत्यापन अभियान चलाया जाए।


मुख्यमंत्री ने चम्पावत को दी ₹36.83 करोड़ की विकास योजनाओं की सौगात।


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद चम्पावत के समग्र विकास को नई दिशा देते हुए जनकल्याण एवं आधारभूत संरचना को सशक्त बनाने के लिये 36.83 करोड़ की 17 योजनाओं शिलान्यास एवं लोकार्पण किया। इसमें ₹ 7.12 करोड़ लागत वाली 4 योजनाओं का लोकार्पण तथा ₹29.71 करोड़ की 13 योजनाओं का शिलान्यास शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा इन योजनाओं से चम्पावत के अंतिम छोर तक विकास का लाभ पहुंचेगा और जनपद तेजी से “आदर्श जनपद” के रूप में स्थापित होगा। मुख्यमंत्री ने गांधी चौक में स्थापित 100 फीट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज का विधिवत अनावरण भी किया।


इस अवसर पर अपने सम्बोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता का प्रतीक है, जो प्रत्येक नागरिक में राष्ट्रसेवा का भाव जागृत करता है तथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता है।


मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड विकास और समृद्धि के नए आयाम स्थापित कर रहा है तथा चम्पावत को “आदर्श जनपद” बनाने का संकल्प इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि जनपद में ₹117 करोड़ से अधिक की लागत से गोलज्यू कॉरिडोर का निर्माण प्रगति पर है। स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करते हुए जिला चिकित्सालय में ₹20 करोड़ की लागत से 50 बेड का अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर यूनिट स्थापित किया गया है तथा ₹5 करोड़ की लागत से सीटी स्कैन एवं एमआरआई जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों को अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ₹57 करोड़ की लागत से बन रहा साइंस सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस युग में बच्चों को आधुनिक ज्ञान से जोड़ते हुए उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगा। उन्होंने बताया कि शारदा कॉरिडोर के निर्माण से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

उन्होंने कहा कि खेल क्षेत्र में बेटियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लोहाघाट में ₹257 करोड़ की लागत से राज्य का पहला महिला स्पोट्र्स कॉलेज निर्माणाधीन है। इसके साथ ही भारत-नेपाल सीमा पर ड्राई पोर्ट निर्माण तथा बुजुर्गों के लिए ₹8.99 करोड़ की लागत से वृद्धाश्रम भवन निर्माणाधीन है।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान वीर सैनिकों, वीर नारियों एवं पर्यावरण मित्रों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया और कहा कि सरकार विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

इस दौरान दर्जा राज्य मंत्री श्याम नारायण पांडे, अध्यक्ष जिला पंचायत आनंद सिंह अधिकारी, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सामंत, अध्यक्ष नगर पालिका चंपावत श्रीमती प्रेमा पांडेय, लोहाघाट गोविंद वर्मा, ब्लॉक प्रमुख अंचला बोहरा, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव, मुख्य विकास अधिकारी डॉ जीएस खाती, व्यापार मंडल अध्यक्ष विकास शाह सहित जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी कर्मचारी, भूतपूर्व सैनिक, वीर नारियां एवं बड़ी संख्या में नागरिक व अन्य मौजूद रहे।

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