उत्तराखंड में आए दिन बढ़ रही अराजकता को लेकर मुख्यमंत्री धामी ने कठोर निर्देश दे दिए हैं यह निर्देश लगातार कई महीनो से दिए जा रहे हैं कि उत्तराखंड प्रदेश में कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से चलने हेतु एवं अराजक तत्वों के विरोध कठोर कार्यवाही की जाए इसके बावजूद भी आए दिन कहीं ना कहीं प्रदेश में मर्डर करने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।
कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि प्रदेश में लगातार कानून व्यवस्था को बिगाड़ने होने में अधिक अधिक हाथ कुछ तथागत उन पुलिस कर्मचारियों का भी है जो अपराधों की परिस्थित को दबा देते हैं। यह कहना भी काम नहीं होगा कि तथा कथित कुछ नेता भी अनावश्यक प्रकार के दबाव बनाकर पुलिस से यह कार्य करवाते हैं जब कोई गरीब और लाचार जनता पुलिस के पास बड़ी उम्मीद लेकर कोई शिकायत लेकर जाती है तो उनकी शिकायतों को अधिकतर रद्दी की टोकरी में फेंक दिया जाता है या फिर उन पर सिर्फ कार्यवाही का आश्वासन दिया जाता है कार्रवाई होती ही नहीं है।
यदि यह सारे कार्य सही होते तो जिला अधिकारी के जनता दरबार में इतनी भीड़ नहीं पहुंचते। स्थानीय स्तर पर काम न होने के कारण लोग सीधे ही एसपी एसपीसीओ सिटी उच्च अधिकारियों के चक्कर काटते हैं क्योंकि स्थानीय स्तर पर उन्हें किसी भी प्रकार की मदद नहीं मिलती है। हां तो तब हो जाती है जबकि रसूक वाले लोगों का कोई ना कोई कनेक्शन जिला अधिकारी कार्यालय से लेकर डीजीपी कार्यालय एसपी ऑफिस तक बना रहता है और वह वहां तक भी पहुंचने वाले फरियादी को मजबूर कर देते हैं कि वह चुप करके बैठ जाए और सहता रहे। विभाग अपनों को बचाने में लगा रहता है और इस प्रकार अनगिनत अपराधों की चाहे वह महिलाओं के विरुद्ध हूं अथवा बुजुर्गों के अथवा किसी लाचार और बेसहारा के उनकी लिस्ट लंबी होती चली जाती है और अपराधियों को एक प्रकार की शरण और सहायता मिल जाती है जिसका नतीजा यह होता है जो अब हमारे प्रदेश में हो रहा है।
शिकायतों का और फिर का लंबे समय तक पड़े रहना भी इसका एक कारण है। हो सकता है विभाग की अपनी कुछ मजबूरियां होती हैं उनके पास मैनपॉवर ना हो या समय ना होता हो परंतु फिर भी जनता के रक्षक बनने का बीमा एक मात्र मित्र पुलिस उत्तराखंड के पास ही है यदि रक्षक ही अपने कार्य से विमुख हो जाए तो जनता का जो हाल होता है वही आज की तारीख में उत्तराखंड में हो रहा है इसी बात को लेकर मुख्यमंत्री धामी ने कड़े निर्देश दिए जिसका अनुसरण करते हुए पुलिस मुख्यालय में लॉ एंड ऑर्डर को लेकर उच्च स्तरीय बैठक कर डीजीपी ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए।
देहरादून में हाल ही में हुई आपराधिक घटनाओं की संवेदनशीलता के दृष्टिगत *पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड श्री दीपम सेठ द्वारा आज पुलिस मुख्यालय में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में आईजी गढ़वाल श्री राजीव स्वरूप, आईजी एसटीएफ श्री नीलेश आनन्द भरणे, एसएसपी देहरादून श्री प्रमेंद्र डोबाल तथा एसएसपी एसटीएफ श्री अजय सिंह एवं अन्य अधिकारीगण* उपस्थित रहे।
*बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट रूप से जिम्मेदारियां निर्धारित करते हुए निम्न निर्देश दिए गए—*
▪️ *आईजी गढ़वाल* को देहरादून की कानून-व्यवस्था की दैनिक मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
▪️ *एसएसपी देहरादून* को अधीनस्थ अधिकारियों की स्पष्ट टास्किंग कर उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा गया, साथ ही क्षेत्र में प्रभावी पुलिसिंग बनाए रखने के निर्देश दिए ।
▪️ *क्षेत्राधिकारी एवं थाना प्रभारी* स्वयं फील्ड में सक्रिय रहकर चिन्हित हॉटस्पॉट क्षेत्रों में पुलिस की विजिबिलिटी बढ़ाएं तथा बैरियर्स पर सघन चेकिंग सुनिश्चित करें। *विशेष रूप से प्रातःकालीन समय में क्षेत्राधिकारी पुलिसबल की उपस्थिति और सक्रियता बढ़ाएं।*
▪️ *आईजी एसटीएफ एवं एसएसपी एसटीएफ* को देहरादून में सक्रिय आपराधिक तत्वों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
▪️ *सत्यापन अभियान* के अंतर्गत पीजी एवं किरायेदारों का सघन सत्यापन कराने तथा होम-स्टे में संचालित गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया।
▪️ *निर्धारित समय के बाद संचालित हो रहे बार एवं पब्स पर सख्त कार्रवाई* करने के निर्देश दिए गए।
पुलिस महानिदेशक ने स्पष्ट कहा कि *राजधानी देहरादून में आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण हेतु एक विशेष अभियान चलाकर सख्त कार्यवाही सुनिश्चित की जाय। उन्होंने सभी अधिकारियों को पूर्ण मुस्तैदी, सतर्कता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करते हुए आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।*
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