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 देहरादून:

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मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में मण्डल रेल प्रबन्धक, उत्तर रेलवे मुरादाबाद श्रीमती विनीता श्रीवास्तव के साथ मुख्य सचिव कार्यालय में बैठक सम्पन्न हुयी। बैठक के दौरान उत्तर रेलवे से सम्बन्धित प्रकरणों एवं परियोजनाओं के सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा हुयी। 

मुख्य सचिव ने ऋषिकेश- डोईवाला बाईपास रेलवे लाईन परियोजना के तहत् जिलाधिकारी देहरादून को राजाजी नेशनल पार्क एवं वन विभाग की 3.62 हेक्टेयर वन भूमि को लेकर रेलवे, मुख्य वन्यजीव वार्डन और राजाजी नेशनल पार्क के साथ मिलकर संयुक्त सर्वेक्षण कराते हुए निरीक्षण आख्या शासन को उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने देहरादून- मोहण्ड- सहारनपुर टनल आधारित रेलवे लाईन परियोजना के सम्बन्ध में परियोजना का फाईनल लोकेशन सर्वे कराते हुए अद्यतन स्थिति से शीघ्र अवगत कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने रेलवे को हर्रावाला रेलवे स्टेशन विस्तारीकरण का मास्टर प्लान को भी शासन से साझा किए जाने की बात कही। कहा कि रेलवे और जिला प्रशासन संयुक्त सर्वे करते हुए शीघ्र ही निरीक्षण आख्या शासन को उपलब्ध कराए।

मुख्य सचिव ने कुम्भ मेला - 2027 के दौरान यातायात व्यवस्था दुरूस्त रखने एवं श्रद्धालुओं को सुगम यात्रा उपलब्ध कराने के दृष्टिगत रेलवे अधिकारियों को जिलाधिकारी हरिद्वार, एसएसपी हरिद्वार, मेलाधिकारी एवं राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) को मिलकर संयुक्त रूप से ट्रैफिक प्लान तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने रेलवे सुरंग हरिद्वार के पास ढलान स्थिरीकरण (slop stabilization) कार्य को शीघ्र कराते हुए कृत कार्यवाही की आख्या शासन को भी उपलब्ध कराए जाने की बात कही।


इस अवसर पर सचिव परिवहन श्री बृजेश कुमार संत, अपर सचिव श्रीमती रीना जोशी सहित रेलवे के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चिन्तन शिविर एवं डॉयलाग ऑन विजन 2047 में प्रशासनिक अधिकारियों को किया संबोधित

*विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करने में भूमिका निभाएगा विकसित उत्तराखंड का विजन*  


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सिविल सर्विसेस इंस्टीट्यूट में आयोजित चिन्तन शिविर एवं डॉयलाग ऑन विजन 2047 में राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित किया। 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस दो दिवसीय शिविर के माध्यम से, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संकल्प के अनुसार 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए ठोस, व्यवहारिक और समयबद्ध रणनीति तैयार की जाएगी। इस दौरान उत्तराखण्ड के समग्र विकास से जुड़े सभी प्रमुख क्षेत्रों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। जिससे राज्य के भविष्य के लिए एक स्पष्ट, व्यवहारिक और समयबद्ध दिशा निर्धारित की जा सकेगी।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प तभी साकार हो सकता है जब देश का प्रत्येक राज्य समान रूप से विकसित हो। इसके लिए उत्तराखण्ड को भी अपने संसाधनों, क्षमताओं और विशिष्टताओं के अनुरूप विकास की एक स्पष्ट और दीर्घकालिक दिशा तय करनी होगी। 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत “विकसित भारत” का संकल्प किसी एक सरकार, किसी एक कार्यकाल या किसी एक योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि ये एक ऐसा व्यापक और दीर्घकालिक राष्ट्रीय दृष्टिकोण है, जिसमें भारत को आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी, सामरिक तथा सांस्कृतिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और वैश्विक नेतृत्वकर्ता राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का संकल्प निहित है। इस विज़न की सबसे बड़ी विशेषता है कि इसमें विकास को केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे मानव केंद्रित, समावेशी और सतत बनाया गया है। विकसित भारत का अर्थ एक ऐसे भारत का निर्माण है जहाँ प्रत्येक नागरिक को समान अवसर प्राप्त हों, जहाँ शासन व्यवस्था पारदर्शी, संवेदनशील और जन-केंद्रित हो। 


*प्रशासनिक तंत्र की भूमिका*

मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति निर्माण से लेकर उसके क्रियान्वयन और अंतिम सफलता तक प्रशासन की सक्रियता, संवेदनशीलता और दक्षता ही ये तय होती है। इसलिए इस विज़न को साकार करने में प्रशासनिक तंत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए हमारे प्रशासन को न केवल तेजी और पारदर्शिता के साथ कार्य करना होगा, बल्कि प्रत्येक नीति, निर्णय और योजना को ‘लक्ष्य आधारित’ एवं ‘जन-केंद्रित’ दृष्टि से लागू करना होगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि आप लोग अपने कार्यों को केवल आदेश देने या मीटिंग करने तक सीमित न रखें, बल्कि अपने दायरे में आने वाले प्रत्येक कार्य को नवाचार, पारदर्शिता, समयबद्ध और परिणाम केंद्रित दृष्टिकोण के साथ तत्परता और जवाबदेही के साथ पूर्ण करें। मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि आज हम विकसित उत्तराखंड से विकसित भारत के संकल्प को साकार करने का रोडमैप बना रहे हैं। इसका अर्थ केवल योजनाएं और नीतियां बनाने या लक्ष्य निर्धारित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हमें ये ये देखना होगा कि हमारी योजनाओं और नीतियों से आम नागरिकों के जीवन में क्या बदलाव आएगा। इसके लिए हमें, किसानों की आय वृद्धि, युवाओं के लिए रोजगार सृजन, महिलाओं के लिए समान अवसर जैसे मानकों पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति ही विकसित उत्तराखंड और विकसित भारत की वास्तविक कसौटी तय करेंगे। 


*टीम उत्तराखंड की तरह कार्य करें* 

मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि पर्वतीय राज्य होने के नाते हमारे सामने कुछ विशेष चुनौतियाँ भी हैं, लेकिन इन्हीं चुनौतियों के भीतर अनेकों अवसर छिपे हुए हैं। यदि हम अपनी नीतियों और योजनाओं को राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, स्थानीय आवश्यकताओं और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालें, तो उत्तराखण्ड इकोनॉमी और इकोलॉजी के बीच संतुलन स्थापित कर देश में विकास को नई दिशा दे सकता है। इसके लिए हमें तय करना होगा कि वर्ष 2047 में हमारा राज्य शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यटन, कृषि, ऊर्जा, तकनीक और सुशासन जैसे क्षेत्रों में किस स्तर तक पहुँचना चाहिए।  साथ ही साथ विभागीय सीमाओं से ऊपर उठकर विजन 2047 को साकार करने के लिए सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए आगामी पच्चीस वर्षों की स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करनी होगी। उन्होंने कहा कि हमें “सोलो प्लेयर” वाली मानसिकता से ऊपर उठकर निकलकर “टीम उत्तराखंड” के रूप में कार्य करना होगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिस स्थान से आपने अपनी सेवा शुरु की है वहां के विकास पर विशेष ध्यान दें, साथ ही जन जन की सरकार, जन जन के द्वार कार्यक्रम के दौरान सामने आने वाली जनसमस्याओं को डायरी में नोट करते हुए, उनके निराकरण करें। 


*विकसित उत्तराखण्ड की नींव*

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित उत्तराखंड की नींव सुशासन, तकनीक एवं नवाचार और जन केंद्रित सतत एवं संतुलित विकास के तीन स्तंभों पर टिकी है। सुशासन का अर्थ केवल नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना नहीं बल्कि हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि हर निर्णय समय पर हो, हर योजना पारदर्शी हो और हर अधिकारी अपने दायित्व के प्रति जवाबदेह हो। उन्होंने कहा कि हमें ई-गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स सहित आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके शासन को और अधिक प्रभावी, तेज और पारदर्शी बनाना होगा। साथ ही ये भी सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि दूरस्थ और सीमांत गाँवों तक भी पहुँचे। इसके साथ ही, हमारी नीतियों और योजनाओं के केंद्र में आम नागरिकों का कल्याण सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास प्रशासन की सबसे बड़ी पूंजी है और इसे बनाए रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील राज्य में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। आपदा प्रबंधन को हमें विकास योजना का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा। 


*निर्धारित करें आउटपुट और आउटकम*

उन्होंने कहा कि अधिकारियों को प्रत्येक योजना का स्पष्ट आउटपुट और आउटकम निर्धारित करना होगा। केवल रुपया व्यय हो जाना ही किसी योजना की सफलता का पैमाना नहीं है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आपका प्रत्येक निर्णय केवल आज को प्रभावित नहीं करता, बल्कि आने वाले भविष्य की दिशा भी तय करता है। बतौर प्रशासनिक अधिकारी आपके निर्णय, कार्य और नीतियों से जनता के जीवन में जो सकारात्मक परिवर्तन हुए हैं, वही भविष्य में आपकी वास्तविक पहचान बनेंगे। इसलिए अपने दायित्वों को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी न समझें, बल्कि इसे समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का अवसर मानकर निभाएँ। उन्होंने कहा कि कभी कभी देखने में आता है कि जनता की बात अनसुनी रह जाती है, कभी लालफीताशाही कार्यों में देरी लाती है ये स्थितियाँ प्रशासन पर जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और विकसित उत्तराखण्ड की ये यात्रा लंबी है, यदि हमारी दिशा सही रहेगी, हमारी नीति स्पष्ट रहेगी, हमारी नीयत साफ रहेगी और हमारा संकल्प अडिग रहेगा तो हम अपने लक्ष्य को पूर्ण करने में अवश्य सफल रहेंगे।


*संबोधन में बाद भी मंथन में शामिल हुए सीएम*

सिविल सर्विसेस इंस्टीट्यूट में आयोजित चिन्तन शिविर एवं डॉयलाग ऑन विजन 2047 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उद्घाटन सत्र के बाद भी काफी देर तक शामिल हुए। प्रथम सत्र में संबोधन के बाद, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मंच के नीचे हॉल की प्रथम पंक्ति में बैठ गए। इस दौरान मंच पर विभिन्न विषयों पर मंथन और संवाद चलता रहा, सीएम पुष्कर सिंह धामी इस दौरान हॉल में बैठकर, परिचर्चा को सुनते रहे, साथ ही संवाद के प्रमुख बिंदुओं और सुझावों को नोट भी करते रहे। 


इस अवसर पर सेतु आयोग के सीईओ श्री शत्रुघ्न सिंह, प्रमुख सचिव श्री आर. के. सुधांशु, डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, नीति आयोग से प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. नीलम पटेल, आईएएस अधिकारी एवं विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ मौजूद थे।


जगद्गुरु शंकराचार्य श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी के साथ हुए दुर्व्यवहार के विरोध में महादेव मंदिर प्रांगड़,नागल ज्वालापुर,डोईवाला में कांग्रेस का मौन उपवास।



धर्मनगरी प्रयागराज में जगद्गुरु शंकराचार्य श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी के साथ हुए दुर्व्यवहार के विरोध में आज कांग्रेसजनों द्वारा महादेव मंदिर प्रांगण, नागल ज्वालापुर में दो घंटे का मौन उपवास किया गया।


यह कार्यक्रम डोईवाला से पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी व डोईवाला ब्लॉक प्रमुख गौरव चौधरी के संयोजन में आयोजित किया गया। मौन उपवास के माध्यम से कांग्रेसजनों व क्षेत्रवासियों ने न केवल इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की निंदा की, बल्कि सनातन संस्कृति, धार्मिक गरिमा और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प भी दोहराया।


डोईवाला ब्लॉक प्रमुख गौरव चौधरी ने कहा कि जगद्गुरु शंकराचार्य जी जैसे पूज्य संत के साथ दुर्व्यवहार केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि हमारी सनातन परंपरा और सांस्कृतिक चेतना का अपमान है। कांग्रेस पार्टी इस प्रकार की घटनाओं का पुरजोर विरोध करती है और समाज में सौहार्द व सम्मान की भावना को बनाए रखने के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।


परवादून कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल ने कहा की संत समाज का अपमान किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। यह मौन उपवास हमारी आस्था, संस्कृति और सनातन मूल्यों की रक्षा का प्रतीक है। सरकार को चाहिए कि वह इस घटना पर संवेदनशीलता दिखाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाए।

कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी धर्म, संस्कृति और संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करती रहेगी।


इस अवसर पर डोईवाला ब्लॉक प्रमुख गौरव चौधरी,परवादून कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल,उमेद बोरा,रफल सिंह,वीरेंद्र थापा,जितेंद्र कुमार,सुनील दत्त राजेन्द्र उपाध्याय,योगराज चंद्र बोरा,माधोसिंह,धर्मेन्द्र मुंमगाई,धर्मेन्द्र बिष्ट,धन सिंह बोरा,अर्जुन लोधी,अंकित कुमार,विशाल कुमार,राहुल कुमार,आकाश कुमार,चंदर बोरा,राजपाल लोधी,युवराज आदि भारी संख्या में क्षेत्रवासी व कांग्रेस जन उपस्थित रहे।

 डोईवाला:




डोईवाला:


 नगर कांग्रेस डोईवाला कार्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम में अपना अमूल्य सहयोग प्रदान करने के लिए ज़िला पंचायत अध्यक्ष सुखविंदर कौर ,जिला अध्यक्ष परवादून ,मोहित उनियाल पूर्व जिला अध्यक्ष अश्वनी बहुगुणा, ब्लॉक प्रमुख डोईवाला गौरव सिंह, पूर्व गन्ना समिति अध्यक्ष मनोज नौटियाल, नगर पालिका अध्यक्ष प्रत्याशी सागर मनवाल, पूर्व मंत्री शूरवीर सजवान,पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट , सेवादल प्रदेश अध्यक्ष हेमा पुरोहित , डोईवाला कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष महेंद्र भट्ट , सेवादल कांग्रेस ज़िलाध्यक्ष सुनील कुमार वर्मन, डोईवाला डोईवाला कांग्रेस पार्टी के मंडल अध्यक्ष संजीव भट्ट आशीष मनवाल साजिद अली ,देवराज सावन ,शार्दुल नेगी ,अमित सैनी ,प्रवीण सैनी ,भारत भूषण भाई ,मनोज चमोली ,रोहीत नेगी ,जस्सू भाई ,अर्जुन रावत,बलविंदर सिंह,मोईन खान,राहुल खरोला,मोहित कपूरवान,बालेन्दर सजवान,ताजबर नेगी,कीर्ति नेगी मनु नेगी,सतीश नेगी,बलदेव भाई,वनिताअसवाल ,शांति रावत,प्रभा नेगी,सुमन रावत,रेखा रावत,लक्ष्मी बिष्ट,दीपा थपलियाल ,मंगल सजवान,खेम सिंह सजवान,देवनी सजवान,रोशन नेगी,आदि मौजूद रहे ।

 महाराजा मनुजेंद्र शाह की जन्मपत्री के अनुसार तिथि घोषित



राजमहल नरेंद्र नगर राजमहल में सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए महाराजा मनुजेंद्र शाह की जन्मपत्री और पंचांग के सूक्ष्म विचार के बाद बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि औपचारिक रूप से घोषित की गई। परंपरानुसार ब्रह्म मुहूर्त में 23 अप्रैल को प्रातः 6:15 बजे बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ विधि-विधान के साथ खोले जाएंगे।


यह उल्लेखनीय है कि टिहरी राजपरिवार की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसके अनुसार सबसे पहले बद्रीनाथ धाम के कपाट की तिथि महाराजा की कुंडली के आधार पर तय की जाती है। इसके उपरांत केदारनाथ धाम, गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम—चारों धामों के कपाट खोलने की तिथियाँ अलग-अलग समय पर परंपरानुसार निर्धारित की जाती हैं। चारधाम परंपरा में बद्रीनाथ धाम को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहीं से संपूर्ण यात्रा का आध्यात्मिक संकेत मिलता है।


आज इस ऐतिहासिक अवसर पर बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी राजमहल नरेंद्र नगर में परंपरा के इस पावन अनुष्ठान में सम्मिलित हुए। गौरतलब है कि अध्यक्ष द्विवेदी शीतकालीन यात्राओं को निरंतर प्रोत्साहित करने के साथ-साथ मुख्य चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं को भी सुदृढ़ करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यह सभी व्यवस्थाएँ पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार द्वारा सुनिश्चित की जा रही हैं।


इस अवसर पर अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने राज्य और देशभर के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएँ देते हुए बद्रीनाथ धाम आने का सादर निमंत्रण दिया। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस वर्ष से ऋषिकेश में बस अड्डे के समीप पर्यटन विभाग के विशाल परिसर में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का कार्यालय संचालित होगा, क्योंकि यहीं से तीर्थयात्रियों को लेकर विभिन्न गंतव्यों के लिए बसें प्रस्थान करती हैं—जिससे यात्रियों को सुविधा और समन्वय दोनों में लाभ मिलेगा।


कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष द्विवेदी ने टिहरी राजपरिवार के सदस्यों—महाराजा मनुजेंद्र शाह , भवानी प्रताप राव, कीर्ति प्रताप—कुल पुरोहितों तथा बद्रीनाथ धाम के मुख्य पुजारियों (रावल) से भेंट कर उन्हें आगामी बद्रीनाथ-केदारनाथ-गंगोत्री-यमुनोत्री यात्रा की तैयारियों की जानकारी दी और सभी को बधाई दी।


इस प्रकार, आस्था, परंपरा और आधुनिक व्यवस्थाओं के समन्वय के साथ चारधाम यात्रा 2026 की औपचारिक शुरुआत की घोषणा हुई—जो देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक निरंतरता का जीवंत प्रमाण है। 🙏

 धामी सरकार जनता के द्वार पर, 452 कैम्पों में 3,56,992 नागरिकों की सहभागिता

 आज 7 कैम्प, 2933 लोगों को मौके पर मिला समाधान — धामी सरकार का सुशासन मॉडल सफल



प्रदेश में सुशासन को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम आम जनता के लिए अत्यंत प्रभावी और भरोसेमंद सिद्ध हो रहा है। इस अभिनव पहल के माध्यम से सरकार स्वयं जनता के द्वार तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित कर रही है।

कार्यक्रम के अंतर्गत आज कुल 7 कैम्पों का आयोजन किया गया, जिनमें 2933 नागरिकों ने प्रतिभाग कर विभिन्न विभागों से जुड़ी सेवाओं और समस्याओं का समाधान प्राप्त किया। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि जनता इस पहल पर पूर्ण विश्वास जता रही है।

अब तक कार्यक्रम की अवधि में कुल 452 कैम्पों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें 3,56,992 (तीन लाख छप्पन हजार नौ सौ बानवे) से अधिक नागरिकों ने प्रत्यक्ष रूप से सहभागिता की है। इन कैम्पों के माध्यम से राजस्व, सामाजिक कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पेंशन, प्रमाण पत्र, शिकायत निस्तारण सहित अनेक सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराई गईं।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम इसी सोच का सशक्त उदाहरण है, जिसमें शासन और जनता के बीच की दूरी को समाप्त किया गया है।



इस कार्यक्रम ने न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत किया है, बल्कि आम नागरिकों का सरकार पर विश्वास भी और अधिक गहरा किया है। प्रदेशभर में इस पहल को मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के जन-केंद्रित, संवेदनशील और जवाबदेह शासन मॉडल को दर्शाती है।


सरकारी भूमि अतिक्रमण मामलों में मिलीभगत पाए जाने पर सम्बन्धित के विरूद्ध विधिक एक्शन तय

अपनी सम्पतियों में अतिक्रमण पर आंख न मूंदे विभाग; अतिक्रमण को करना ही है ध्वस्तः डीएम  

सरकार की एक-एक ईंच भूमि बचाने को जिला प्रशासन प्रतिबद्ध; 

बिष्ट गांव घंघोड़ा में वन भूमि पर अतिक्रमण पर जिला प्रशासन का एक्शन; अवैध अतिक्रमण ध्वस्त


देहरादून दिनांक 23 जनवरी 2026;





 सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध जिला प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण को ध्वस्त किया गया। यह कार्रवाई जिलाधिकारी सविन बसंल के निर्देशों के क्रम में उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी के नेतृत्व में राजस्व एवं वन विभाग की संयुक्त टीम द्वारा की गई।

जिले में सरकारी भूमि पर किए जा रहे अतिक्रमण, अवैध प्लाटिंग तथा वन भूमि पर कब्जों के विरुद्ध जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए निरंतर एवं प्रभावी प्रवर्तन अभियान शुरू कर दिया है। जिलाधिकारी के निर्देशों पर सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सरकारी एवं वन भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया जा सके।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा, निर्माण अथवा उपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अतिक्रमण हटाने के लिए नियमित ड्राइव चलाई जा रही है, जो आगे भी निरंतर जारी रहेगी। अतिक्रमण के मामलों में यदि किसी अधिकारी/कर्मचारी अथवा किसी अन्य व्यक्ति की मिलीभगत पाई जाती है, तो उनके विरुद्ध कड़ी विभागीय एवं विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बिना स्वीकृत लेआउट एवं नियमों के की जा रही अवैध प्लाटिंग के विरुद्ध भी जिला प्रशासन ने कड़ा रूख अपनाते हुए अवैध प्लाटिंग पर रोक लगाने के लिए सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। स्पष्ट किया गया है कि नियमों के विरुद्ध की गई प्लाटिंग का ध्वस्तीकरण के साथ ही दोषियों पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग की निष्क्रियता के चलते वन भूमि पर हुए अतिक्रमणों के मामलों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने ध्वस्तीकरण ड्राइव प्रारंभ की है। यह अभियान निरंतर गतिमान रहेगा और वन भूमि तथा विभागों की सरकारी सम्पतियों को अतिक्रमणमुक्त कराने के लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक एवं विधिक कदम उठाए जाएंगे।

प्रशासन द्वारा स्पष्ट किया गया कि संबंधित भूमि राजस्व अभिलेखों में खाता-खतौनी संख्या 254, खसरा संख्या 949(क), कुल रकबा 1.3700 हेक्टेयर के रूप में दर्ज है, जो कि वन विभाग के नाम अभिलेखित एवं संरक्षित भूमि है। उक्त भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य, अवैध अध्यासन अथवा उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित है। इसके बावजूद कुछ व्यक्तियों द्वारा नियमों की अवहेलना करते हुए भूमि को खुर्द-बुर्द कर अवैध निर्माण व रास्ता निर्माण किया गया, जिसे प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से ध्वस्त कर दिया। इसके अतिरिक्त पो०ओ० घंघोड़ा, मौजा बिष्ट गांव, परगना पछवादून, तहसील व जिला देहरादून में स्थित भूमि खसरा संख्या 986, रकबा 0.1700 हेक्टेयर, जो कि जंगल-झाड़ी के खाते में दर्ज है, तथा भूमि खसरा संख्या 949(क), रकबा 0.3700 हेक्टेयर, जो कि वन विभाग के खाते में अंकित है। अभियान के दौरान राजस्व, वन, नगर निगम/नगर पालिका एवं पुलिस विभाग के बीच समन्वय स्थापित कर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे अवैध कब्जों एवं प्लाटिंग से संबंधित सूचनाएं प्रशासन को उपलब्ध कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

इन दोनों भूमि क्षेत्रों से सटी हुई कुछ भूमि अनुसूचित जाति के व्यक्तियों की निजी भूमि है। जानकारी में आया कि कुछ व्यक्तियों द्वारा इन निजी भूमियों पर अवैध प्लॉटिंग कर विक्रय की तैयारी की जा रही थी। जांच में यह भी सामने आया कि प्लॉटिंग की जा रही भूमि तक किसी भी दिशा से वैध आवागमन मार्ग उपलब्ध नहीं था। इसके चलते संबंधित व्यक्तियों द्वारा वन विभाग की भूमि खसरा संख्या 949(क) पर अवैध रूप से कब्जा कर पक्के रास्ते का निर्माण कर दिया गया, जो कि स्पष्ट रूप से कानून का उल्लंघन है। जिला प्रशासन द्वारा इस अवैध रास्ते को भी ध्वस्त कर वन भूमि को मुक्त कराया गया।

जिला प्रशासन ने दो टूक कहा है कि कानून का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी। सार्वजनिक हित, पर्यावरण संरक्षण एवं शासकीय संपत्तियों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है, और इस दिशा में किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वन विभाग, जंगल-झाड़ी एवं अन्य सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण, अवैध प्लॉटिंग या निर्माण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में यदि ऐसे प्रयास पाए गए तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक एवं विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे भूमि क्रय-विक्रय से पूर्व राजस्व अभिलेखों की विधिवत जांच अवश्य करें तथा किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि की जानकारी तत्काल प्रशासन को दें, ताकि सरकारी भूमि एवं वन क्षेत्र का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।



रेन बसेरा में रहने वाले लोगों का जाना हाल; नगर निगम को सफाई व्यवस्था, गर्म पानी, बिस्तर स्वच्छ रखने के निर्देश

नगर निगम तहसील प्रशासन को प्रतिदिन अलाव प्वांईट की मय फोटो  सूचना प्रस्तुत करने के निर्देश

देहरादून:

DM dehradun visit regarding cold wave

holiday 24 jan dist dehradun


 राजधानी देहरादून में लगातार हो रही बारिश एवं बढ़ती ठंड को दृष्टिगत रखते हुए शीतलहरी में रात्रि में जिलाधिकारी सविन बसंल शहर के चौक चौराहों पर पंहुच अलाव व्यवस्था देखी तथा इस दौरान उन्होंने रेनबसेरों में रहने वालों का हाल जाना तथा नगर निगम एवं तहसील प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।


जिलाधिकारी सविन बंसल ने देहरादून में देर सांय चौक चौराहों पर अलाव व्यवस्था का औचक निरीक्षण करते हुए रैन बसेरों में रह रहे असहाय एवं जरूरतमंद लोगों का हाल चाल जाना।


जिलाधिकारी ने रैन बसेरा का निरीक्षण कर वहां ठहरे लोगों से बातचीत की तथा उनकी आवश्यकताओं की जानकारी ली। उन्होंने नगर निगम एवं तहसील प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिए कि ठंड के मौसम में कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति असुविधा का शिकार न हो, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। सभी चौक चौराहो पर अलावा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए इसकी दैनिक सूचना उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।


जिलाधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा असहाय, निराश्रित एवं बेघर लोगों की सहायता के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ठंड एवं बारिश के दौरान रैन बसेरों में रह रहे लोगों को पर्याप्त कंबल, भोजन एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।


उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि रैन बसेरों की नियमित निगरानी की जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त व्यवस्थाएं तत्काल की जाएं, जिससे किसी भी व्यक्ति को ठंड से प्रभावित न होना पड़े। इस अवसर पर उप जिलाधिकारी सदर हरिगिरी, डीडीएमओ ऋषभ कुमार मौजूद रहे।



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