Halloween party ideas 2015

 नगर पालिका अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह नेगी जी के नेतृत्व में छात्रसंघ पदाधिकारी का प्रतिनिधिमंडल  उच्च शिक्षा मंत्री डॉक्टर धन सिंह रावत  से मिला उन्होंने शहीद दुर्गा मल्ल राजकीय स्नातकोत्तर  महाविद्यालय में एमएससी तथा एमकॉम की कक्षाएं संचालित करवाने की मांग को लेकर एक ज्ञापन  उच्च शिक्षा मंत्री  को दिया गया.



 जिसमें उन्हें अवगत कराया गया कि पिछले काफी समय से छात्र संघ तथा छात्र-छात्राओं द्वारा महाविद्यालय में एमएससी तथा एमकॉम की मांग की जा रही है साथ ही महाविद्यालय हेतु जनरेटर के लिए ज्ञापन दिया गया। इसमें  उच्च शिक्षा मंत्री  ने आश्वासन दिया कि इसी सत्र से महाविद्यालय में एमएससी तथा एमकॉम की कक्षाएं संचालित की जाएगी तथा महाविद्यालय में जनरेटर की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

मौके पर छात्रसंघ अध्यक्ष मोहित डंगवाल, छात्रसंघ UR आशुतोष सिंह, छात्र नेता अभिनव गोपाल राणा आदि उपस्थित रहे।

  

-आर्थिक रूप में मजबूती के लिए स्टोन फ्रूट्स की बढ़ती संभावना पर दिया जोर

                                                           देहरादून; 

fruit stone new m8ssion by Dhaad


उत्तराखंड में पहाड़ी क्षेत्रों में स्टोन फ्रूट की बागवानी को बेहतर करने की दिशा में चलाए जा रहे अभियान के तहत 'धाद' संस्था और दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से विमर्श में विशेषज्ञों ने पारंपरिक बीज और आधुनिक तकनीक के बारे में बताया

। इस दौरान सभी ने कहा कि उत्तराखंड में स्टोन फ्रूट्स (गुठलीदार फल: आडू, प्लम, खुमानी) की संभावना काफी है। इसलिए इसपर जोर दिया जाना चाहिए ताकि आर्थिक रूप से भी किसान मजबूत हो सके। कहा कि यदि हम स्टोन फ्रूट्स पर कार्य करेंगे तो सेब और कीवी से ज्यादा लाभ इनसे कमा सकते हैं। वक्ताओं ने हिमाचल की भांति उत्तराखंड को भी स्टोन फ्रूट की ओर रुख करने पर जोर दिया।

शनिवार को दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के सभागार में 'आडू, प्लम, खुमानी का महीना' के तहत विमर्श आयोजित किया गया। जिसमें काफी संख्या में लोग शामिल हुए। वक्ताओं में आडू, प्लम, खुमानी के बहाने गुठली वाले फलों की बात पारम्परिक बीज और आधुनिक तकनीक के मायने पर बात रखी। आड़ू प्लम खुमानी का महीना अभियान का परिचय देते हुए धाद के सचिव तन्मय ने कहा कि धाद का हरेला गाँव अध्याय लगातार पहाड़ के गाँव उसके उत्पादन और बाजार के पक्ष में विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम चला रहा है। इसमें हमने पहाड़ के फलों माल्टे के बाद स्टोन फ्रूट आड़ू,प्लम,खुमानी के बाबत यह पहल प्रारम्भ की है। जिसमे हम समाज किसान और बाजार पर संवाद आयोजित कर रहे है।      मुख्य वक्ता बीज बचाओ आंदोलन के प्रणेता विजय जड़धारी ने कहा कि घनश्याम सैलानी यदि चिपको शब्द न करते और इस बारे में आह्वान न करते तो आज लोग इस तरह पेड़ के प्रति जागरूक न होते। कहा कि उत्तराखंड हमने बनाया है तो इसकी पहचान भी बनाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। यह पहचान उत्तराखंड के हिसाब से बन पाएगी। कभी दक्षिण और अभी कहीं बात करना ठीक नहीं है। कहा कि हमारी मिट्टी को नशाखोर बना दिया है। आज पहाड़ के प्रति कुछ युवा जागरूक हो रहे हैं और बागवानी के प्रति संभावना को करके दिखा रहे हैं। यह उत्तराखंड में बागवानी के परिपेक्ष्य में बेहतर प्रयास है।कृषक बागवानी संगठन के अध्यक्ष व प्रगतिशील किसान बीरभान सिंह ने कहा कि हम संगठन के माध्यम से यहां जल और संसाधनों से आजीविका को बढ़ाने पर कार्य कर रहे हैं। उत्तराखंड में स्टोन फ्रूट्स को लेकर बताया कि यहां भी इसकी संभावना है। उत्तराखंड में 1000 से 2000 मीटर के तापमान में यह होता है जहां स्टोन फ्रूट पर कार्य किया जा सकता है। ऐसे फलों का मई से जून तक उत्पादन हो और नजदीकी बाजार मिले तो हमें दिल्ली नहीं भागना पड़ेगा। हिमाचल की भांति उत्तराखंड को भी स्टोन फ्रूट की ओर रुख करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं और जैविक चीजों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। ऐसी स्थित में स्टोन फ्रूट्स ऐसी प्रजाति है जिसमें खाद, दवा नहीं डालनी पड़ती यह जैविक के रूप में बेहतर उत्पादन है। उत्तराखंड में प्रतिवर्ष एक करोड़ से ज्यादा लोग यात्रा में आते हैं। बाहर से आने वाले चाहते हैं कि इन फलों का स्वाद लेने के साथ ही वो अपने साथ लेकर जाएं। यदि पहाड़ों में ये सभी चीजें होंगी तो आर्थिक रूप से भी मजबूत होंगे। कोर टीम हरेला गांव के सदस्य व प्रगतिशील किसान पवन बिष्ट ने कहा कि एक सर्वे के अनुसार उत्तराखंड बनने के बाद 85 लाख सेब के पौधे लग चुके हैं। जो भी देश व सोसाइटी अगली पीढ़ी को लेकर सोचती है तो वह बेहतर करती है। बीजों को एकत्रित किया जाना चाहिए। बच्चों को खेल-खेल में जागरूक करने के लिए  हमने बीज लाओ अभियान किया है। जिसमें 10 हजार बच्चों को जोड़ना है। जिसमें बच्चे खेल खेल में बच्चे बीज एकत्र कर स्कूल में इकट्ठा करेंगे। इस बीज को धाद की फंची अभियान के तहत नर्सरी स्वामी तक पहुंचाने का कार्य करेंगे। बच्चों को उद्यान के बारे में जागरूक करना होगा। उन्होंने काफल, बुरांस, मैलू को बाजार तक लाने की भी बात की।   धाद के अध्यक्ष लोकेश नवानी ने कहा कि आडू, खुमानी आदि की हमने पहले ब्रांडिंग नहीं की। आज माल में जाकर खरीदकर इसकी पहचान समझ आती है। कहा कि सरकार को उत्तराखंड के फलों का उत्पादन करने वालों की तरफ ध्यान देना चाहिए। यदि सरकार ध्यान देगी तो राज्य इस क्षेत्र में काफी विकसित होगा। आयोजन का सञ्चालन हिमांशु आहूजा ने किया।   

 खेल-खेल में जैविक प्राकृतिक, मृदा पर आधारित दिनेश सेमवाल के बनाए गए सीढ़ी पोस्टर को भी लांच किया। वक्ताओं से विभा पुरी, दिनेश सेमवाल,संजीव कंडवाल, प्रेम बहुखंडी, अवधेश शर्मा, संदीप गुसाईं, विनोद भट्ट आदि ने अपने सवाल रखे । इस अवसर पर आरसी कोश्यारी,दिनेश सेमवाल,शिव प्रकाश जोशी,अवधेश शर्मा,सत्यव्रत आई.पी.एस.,टी.आर. बरमोला, जी.सी.उनियाल, बीजू नेगी, एस नौटियाल,विनोद भट्ट, नीना रावत, आशा डोभाल, बीरेंद्र खंडूरी, मेजर जी केडी सिंह, बीएम उनियाल, साकेत रावत, अनीता त्रिवेदी, विवेक तिवारी, कल्पना बहुगुणा, श्वेता,नीलेश, सुनीता बहुगुणा, आलोक सरीन, सुभाष चन्द्र नौटियाल, विनोद कुमार, आशीष शर्मा, जेपी मैठाणी, संजीव कंडवाल, पी के डबराल, दिनेश गुसाईं,प्रोफेसर रचना नौटियाल,रवीन्द्र नेगी, मनोज, राजू गुसाईं, नीरज कुमार, शुभम शर्मा मौजूद थे

 देहरादून:  

05 people swept away withvehichle into the rover yamuna


आज दिनांक 31.05.2025 की शाम को पुलिस चौकी डाकपत्थर द्वारा SDRF टीम को सूचना प्राप्त हुई कि कटापत्थर के पास दो वाहन नदी में बह रहे हैं जिसमें संभवतः कुछ व्यक्ति सवार हैं।


सूचना मिलते ही पोस्ट डाकपत्थर से SDRF टीम उप निरीक्षक सुरेश तोमर के नेतृत्व में रेस्क्यू उपकरणों के तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई।


विकासनगर निवासी पांच युवक एक स्कूटी व एक बाइक के साथ यमुना नदी के किनारे गए थे। इसी दौरान अचानक नदी का जलस्तर बढ़ने से वे सभी नदी के तेज बहाव में बह गए, साथ ही उनकी स्कूटी व बाइक भी बह गई।


SDRF टीम द्वारा घटनास्थल पर पहुंचकर तत्परता एवं सूझबूझ के साथ रेस्क्यू अभियान चलाया गया। कड़ी मशक्कत के बाद पांचों युवकों को सकुशल यमुना नदी से बाहर निकाला गया, 


 **सुरक्षित निकाले गए पांच युवक* 

1-अनुज पुत्र श्री अमृतलाल उम्र 20 वर्ष निवासी विकास नगर 

2-आयुष पुत्र श्री सुंदरलाल उम्र 21 वर्ष, निवासी विकास नगर 

3-मन्नू पुत्र श्री अरविंद पाल उम्र 18 वर्ष निवासी बदमा वाला विकास नगर

4-दीपक पुत्र श्री राकेश उम्र 18 वर्ष,निवासी दिनकर बिहार विकास नगर

5- रोहित पुत्र श्री रमेश प्रसाद, उम्र 18 वर्ष निवासी विकास नगर

 लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर की 300वीं जयंती, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सुधारों का विराट उत्सव: त्रिवेंद्र 

MP trivendra singh rawat attend Ahilya bai holkar anniversary in vikasnagar


आज विकासनगर, देहरादून में लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर जी की 300वीं जयंती के पावन अवसर पर समस्त पाल-गडरिया समाज द्वारा एक भव्य रैली एवं जनसभा का आयोजन किया गया।


 कार्यक्रम में हरिद्वार से सांसद एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। अध्यक्षता पूर्व राज्य मंत्री श्री खीम सिंह पाल और मुनेश पाल जी ने की।


इस अवसर को केवल एक समारोह न मानते हुए, इसे भारत की सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सुधारों के उत्सव के रूप में मनाया गया। सांसद हरिद्वार श्री रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से संपूर्ण भारतवर्ष में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के योगदान को स्मरण किया जा रहा है।


उन्होंने कहा कि इतिहास में अनेक राजा-रानियों ने शासन किया, लेकिन देवी अहिल्याबाई एक ऐसी पुण्यश्लोका विभूति रहीं, जिन्हें आज भी राष्ट्र प्रातः स्मरणीय के रूप में पूजता है। उन्होंने कहा कि लोकमाता ने सती प्रथा के उन्मूलन, महिला शिक्षा के प्रोत्साहन, तथा स्त्रियों को संपत्ति में अधिकार दिलाने जैसे साहसिक कार्यों से समाज में व्यापक बदलाव लाया। श्री रावत ने कहा की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित अनेक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों में देवी अहिल्याबाई का स्मरण पीढ़ियों से संस्कार के रूप में होता आया है।उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के जिस मजबूत भवन की नींव अहिल्याबाई होल्कर जी ने रखी, उसे वर्तमान में देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने और अधिक मजबूती प्रदान की है — “सबका साथ, सबका विकास” के मंत्र को यथार्थ में बदलते हुए। श्री रावत ने ने सभी से आग्रह किया कि हम सभी देवी अहिल्या बाई होल्कर जी के आदर्शों को आत्मसात करें और समाज में समानता, शिक्षा और सेवा की भावना को आगे बढ़ाएं।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में पाल-गडरिया समाज के लोग उपस्थित रहे|


आपदा मित्र योजना की तर्ज पर प्रारंभ होगी आपदा सखी योजना : मुख्यमंत्री*


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को निकट देहरादून स्थित एक होटल में उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्राधिकरण द्वारा आयोजित Monsoon -2025: Preparedness  कार्यशाला में प्रतिभाग किया। 


मुख्यमंत्री ने इस दौरान आपदा मित्र योजना की तर्ज पर “आपदा सखी योजना“ प्रारंभ किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा इस योजना के शुरू होने से महिला स्वयंसेवकों को आपदा से पूर्व चेतावनी, प्राथमिक चिकित्सा, राहत एवं बचाव कार्यों, मनोवैज्ञानिक सहायता आदि के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। यह योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में सहायक सिद्ध होने के साथ आपदा प्रबंधन में समाज की सक्रिय सहभागिता को और अधिक मजबूत एवं प्रभावी बनाएगी।


मुख्यमंत्री ने कहा यह कार्यशाला आपदा प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाली चुनौतियों के बेहतर प्रबंधन के लिए सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि आपदा की दृष्टि से उत्तराखण्ड संवेदनशील राज्य है। हमें बीते वर्षों में आई प्राकृतिक आपदाओं से सबक लेते हुए काम करना है। मुख्यमंत्री ने कहा प्राकृतिक आपदाओं को टाला नहीं जा सकता, लेकिन त्वरित प्रतिक्रिया, सतर्कता और समन्वित राहत एवं बचाव कार्यों से जन-धन की हानि को कम किया जा सकता है। जिसके लिए सभी विभागों के बीच समन्वय के साथ सजगता एवं संवेदनशीलता भी बेहद जरूरी है। 


*आपदा प्रबंधन सभी विभागों का सामूहिक दायित्व है*


मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन सभी विभागों का सामूहिक दायित्व है। जिसमें सभी विभागों के साथ आम जनता की सक्रिय सहभागिता भी आवश्यक है। उन्होंने कहा आपदा प्रबंधन में जनभागीदारी का होना बेहद आवश्यक है। जब तक समाज जागरूक, प्रशिक्षित और सतर्क नहीं होगा, तब तक किसी भी सरकारी प्रयास का प्रभाव सीमित ही रहेगा। आपदा के दौरान सबसे पहले स्थानीय नागरिक ही मौके पर होते हैं।  इसलिए ग्रामीण स्तर पर आपदा प्रबंधन समितियों, महिला एवं युवा समूहों, स्वयंसेवी संगठनों तथा रेडक्रॉस जैसी संस्थाओं को प्रशिक्षित करना भी आवश्यक है।


*आपदाओं के निपटारे के लिए प्रोएक्टिव और रिएक्टिव दोनों प्रकार की रणनीति अपनाना जरूरी*


मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदाओं के प्रभावी निपटारे के लिए हमें प्रोएक्टिव और रिएक्टिव दोनों प्रकार की रणनीतियों को अपनाना होगा। जैसे 2024 में गौरीकुंड में बादल फटने की घटना के दौरान प्रोएक्टिव अप्रोच अपनाकर  हजारों लोगों की जान बचाने में सफलता प्राप्त की थी। वर्ष 2024 में ही टिहरी जनपद के तोली गांव में हुए भू-स्खलन से पूर्व ही प्रशासन की त्वरित कार्यवाही के कारण 200 से अधिक लोगों की जान बचाई जा सकी थी। आपदा के समय प्रभावितों के साथ खड़े रहना हमारी प्राथमिकता है। 


*पूर्वानुमान पर गंभीरता से काम करने पर आपदा के प्रभाव को कम किया जा सकता है*


मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वानुमान पर गंभीरता से काम करने पर आपदा के प्रभाव को कम किया जा सकता है। राज्य सरकार आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक उपायों को अपनाने पर जोर दे रही है। राज्य में रैपिड रिस्पॉन्स टीम गठित करने के साथ  ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग और सैटेलाइट मॉनिटरिंग के माध्यम से आपदा के संभावित जोखिम क्षेत्रों की पहचान कर रही है। आपदा के नुकसान को कम करने के लिए राज्य में आपदा प्रबंधन विभाग, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ एवं स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा सिल्क्यारा रेस्क्यू अभियान के दौरान भी उन्होंने स्वयं टनल में फंसे मजदूरों से संवाद किया था, जिससे उनका हौसला बढ़ाया जा सका था। 


मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन के लिए एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अन्य सैन्य बलों से अधिकारियों को निरंतर समन्वय और संवाद स्थापित करने के लिए कहा। उन्होंने कहा भूस्खलन, बाढ़ और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर, जेसीबी, क्रेन एवं आवश्यक उपकरणों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। साथ ही संवेदनशील और पुराने पुलों की तकनीकी जांच कर आवश्यकतानुसार बैली ब्रिज एवं वैकल्पिक व्यवस्था हेतु भंडारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने नदियों के किनारे बसे क्षेत्रों में जलस्तर की निरंतर मॉनिटरिंग के लिए तकनीकी यंत्रों और मानव संसाधन की तैनाती करने, खाद्यान्न, ईंधन, पेयजल एवं जीवनरक्षक औषधियों की पर्याप्त आपूर्ति सभी जिलों में अभी से सुनिश्चित करने के साथ सभी आवश्यक दिशा निर्देश दिए। 


मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने कहा कि यह कार्यशाला आगामी मानसून से पहले व्यवस्थाओं को सशक्त और प्रभावी बनाएगी। उत्तराखंड को कई प्रकार की आपदा का सामना करना पड़ता है। इस वर्ष मौसम विभाग ने मानसून के जल्द आने और सामान्य से अधिक होने का अनुमान लगाया है। हमें मानसून से पूर्व पुख्ता इंतजाम करके आपदा के प्रभाव को कम करना है। आपदा के दौरान संसाधनों का बेहतर उपयोग और तकनीकी संसाधनों का प्रयोग आपदा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है, जिसका हमने और बेहतर इस्तेमाल करना है। 


सदस्य, राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण श्री राजेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय मौसम विभाग ने आगामी मानसून में उत्तराखंड के लिए  सामान्य से अधिक बारिश का पूर्वनुमान लगाया है। ऐसे में उत्तराखंड के लिए 15 जून से सितंबर तक आपदा की नजर से महत्वपूर्ण समय है। उत्तराखंड राज्य बाढ़, बादल फटने, भूस्खलन, भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। इनसे बचने के लिए बेहतर पूर्वानुमान, बुनियादी ढांचों, जन जागरूकता, बेहद जरूरी है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार की सराहना करते हुए कहा कि इस वर्ष चार धाम यात्रा बेहद सुचारू रूप से चल रही है। चार धाम यात्रा का प्रबंधन बेहद अच्छा है। उन्होंने भूस्खलन के बचाव के लिए उत्तराखंड को एन.डी.एम.ए ने 140 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की है। एन.डी.एम.ए द्वारा 190 संवेदनशील झीलों के लिए उत्तराखंड को 40 करोड़ का आवंटन हो चुका है। उन्होंने कहा फॉरेस्ट फायर को लेकर उत्तराखंड की तैयारियां इस वर्ष बेहद अच्छी हैं। उत्तराखंड को फॉरेस्ट फायर के लिए करीब 16 करोड़ की स्कीम को स्वीकृति प्रदान की है। भूकंप के लिए भी उत्तराखंड को आवश्कता अनुसार धनराशि दी जाएगी। एन.डी.एम.ए ने पूरे देश में आने वाली आपदाओं के लिए गाइडलाइन बनाई हैं, जिसे जिले स्तर तक पहुंचाना है। 


उपाध्यक्ष, उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबन्धन सलाहकार समिति श्री विनय रोहेला ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से आपदा के दौरान होने वाले नुकसान को कम से कम किया गया है। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में सिल्क्यारा रेस्क्यू अभियान में हमने सफलता हासिल की है। रूद्रपुर में आई बाढ़ के दौरान भी मुख्यमंत्री जी ग्राउंड जीरो पर थे। उन्होंने बताया घनसाली में आई आपदा के दौरान भी मुख्यमंत्री धामी सीधे आपदा प्रभावितों के बीच में पहुंचे थे, जिससे प्रभावितों का मनोबल बढ़ा था। मुख्यमंत्री जी ने कुशल आपदा प्रबंधन ने राज्य को विकसित प्रदेश बनाने की ओर आगे बढ़ाया है। 


सचिव, आपदा श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि यह कार्यशाला मानसून से पूर्व की तैयारियों को और मजबूत बनाने के लिए की जा रही है। उन्होंने बताया कार्यशाला में मौसम पूर्वानुमान, बाढ़ पूर्वानुमान, ईडब्ल्यूएस की निगरानी और प्रसार , भूस्खलन पूर्व चेतावनी प्रणाली, भूस्कालन जोखिम न्यूनीकरण के लिए भू-जांच की आवश्यकता, संसाधन और परिचालन संबंधी तैयारी, ग्लेशियर निगरानी, मानसून में होने वाली बीमारियों से बचाव, मार्गों पर भूस्खलन एवं बेस्ट प्रैक्टिसेज जैसे विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी। जिसका लाभ आने वाले समय में हमारे राज्य को मिलेगा। 


इस दौरान प्रमुख सचिव श्री आर के सुधांशु, सचिव श्री शैलेश बगौली, प्रमुख वन संरक्षक श्री धनंजय मोहन एवं  विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष और विशेषज्ञ मौजूद थे।



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में त्याग, सेवा और समर्पण की प्रतिमूर्ति  अहिल्याबाई होल्कर को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने करुणा, सेवा और धर्मनिष्ठा से भारतीय इतिहास में अद्वितीय स्थान प्राप्त किया। उन्होंने शासन को केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि जनसेवा, न्याय और धर्म की पुनर्स्थापना का साधन बनाया। उन्होंने काशी विश्वनाथ से लेकर सोमनाथ, द्वारका से लेकर रामेश्वरम्, अयोध्या और मथुरा के साथ ही हमारी देवभूमि के बद्रीनाथ, केदारनाथ और हरिद्वार में मंदिरों और घाटों का जीर्णोद्वार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कई धर्मशालाओं और रास्तों के निर्माण के साथ ही जनसेवा के अनेक कार्य कराएं।  


मुख्यमंत्री ने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर ने भारत में धर्मस्थलों का पुनर्निर्माण कर भारत की सांस्कृतिक आत्मा को पुनर्जीवित करने का कार्य किया। उन्होंने संपूर्ण भारत की सनातन संस्कृति को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया है। उन्होंने उस कालखंड में नारी सशक्तिकरण की ऐसी अनुपम मिसाल प्रस्तुत की, जिसकी कल्पना कर पाना भी उस समय कठिन था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण के अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है। वर्षों तक उपेक्षित रहे हमारे गौरवशाली इतिहास, महान राष्ट्रनायकों के योगदान और सांस्कृतिक विरासत को आज न केवल पुनर्स्थापित किया जा रहा है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय चेतना का आधार भी बनाया जा रहा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हमारी सनातन संस्कृति की पताका संपूर्ण विश्व में गर्व से लहरा रही है। भारत पुनः विश्वगुरु बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण, बद्रीनाथ के मास्टर प्लान और केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण कार्य तेजी से हो रहे हैं। अहिल्याबाई होल्कर को आदर्श मानकर प्रधानमंत्री के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी अनेक कार्य किए जा रहे हैं।  महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, उज्ज्वला योजना लखपति दीदी जैसी योजनाओं द्वारा महिला सशक्तीकरण के लिए कार्य किये जा रहे हैं। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हेतु पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। केदारखंड और मानसखंड के मंदिर क्षेत्रों के सौंदर्यीकरण के कार्य किये जा रहे हैं। हरिपुर कालसी में यमुनातीर्थ स्थल के पुनरुद्धार की दिशा में भी प्रयास किये जा रहे हैं। हरिद्वार ऋषिकेश कॉरिडोर के साथ ही शारदा कॉरिडोर के निर्माण की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। राज्य में सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण देने के साथ ही ‘मुख्यमंत्री नारी सशक्तिकरण योजना‘, मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना, मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना और पोषण अभियान जैसी विभिन्न योजनाएं प्रारंभ की गई हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में एक सख्त भू-कानून भी लाया गया है, जिससे राज्य के मूल स्वरूप के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता को लागू करने का ऐतिहासिक कार्य किया है। प्रदेश में देश का सबसे प्रभावी नकल विरोधी कानून भी लागू किया है, जिसके परिणाम स्वरुप उत्तराखंड में पिछले 3 वर्ष में लगभग 23 हजार से अधिक युवाओं ने सरकारी नौकरियां प्रदान की गई है। 


इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव श्री विनोद तावड़े, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री महेन्द्र भट्ट, महामंत्री संगठन श्री अजेय कुमार, भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमती दीप्ति रावत भारद्वाज, जनप्रतिनिधिगण और पार्टी पदाधिकारी उपस्थित थे।

 जौनपुर:




 आज भारतीय जनता पार्टी सदर विधानसभा द्वारा पूर्वांचल विश्विद्यालय के महंत अवैद्यनाथ, संगोष्ठी भवन में लोकमाता पुण्यश्लोक अहिल्याबाई हॉल्कर त्रिशताब्दी स्मृति अभियान तहत आयोजित संगोष्ठी का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। 

   संगोष्ठी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता श्री मनीष शुक्ला जी व खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री ( स्वतन्त्र प्रभार ) गिरीश चन्द्र यादव  रहे और विशिष्ट अतिथि के नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष श्रीमती मनोरमा मौर्या  व करंजाकला ब्लॉक की श्रीमती पूनम यादव रही।कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष पुष्पराज सिंह  ने किया।

कार्यक्रम की शुरुआत मंचाशीन अतिथियों द्वारा लोकमाता पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर जी प्रतिमा पर पुष्पांजली व दीप प्रज्वलित करके के किया गया। 

        

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मनीष शुक्ला  ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होलकर का जीवन संघर्षमय रहा है , अहिल्याबाई का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के चौंडी गाँव में हुआ था, उनका विवाह 10-12 वर्ष की आयु में मल्हार राव होलकर के पुत्र खंडेराव से हुआ था. बाद में, खंडेराव की मृत्यु हो गई और अहिल्याबाई विधवा हो गईं, अहिल्याबाई ने 1767 से 1795 तक मालवा क्षेत्र में होलकर राजवंश का शासन किया , उन्होंने एक कुशल प्रशासक के रूप में काम किया और अपने क्षेत्र में न्याय और शांति स्थापित की , अहिल्याबाई ने कई मंदिरों, घाटों, कुओं और तालाबों का निर्माण करवाया, विशेष रूप से गंगा नदी के तटों पर निर्माण कराया।

      कार्यक्रम को संबोधित करते हुए खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री स्वतन्त्र प्रभार गिरीश चन्द्र यादव ने कहा कि अहिल्याबाई ने सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया, उन्होंने समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद की, जिससे उन्हें एक महान परोपकारी शासिका के रूप में जाना जाता है, उन्होंने हिंदू मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों का संरक्षण किया, जिससे उन्हें एक धार्मिक शासिका के रूप में जाना जाता है ।

    पूर्व विधायक सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि राजमाता अहिल्याबाई होलकर, मालवा साम्राज्य की होलकर रानी थीं। उन्हें भारत की सबसे दूरदर्शी महिला शासकों में से एक माना जाता है। 18वीं शताब्दी में, मालवा की महारानी के रूप में, धर्म का संदेश फैलाने में और औद्योगीकरण के प्रचार-प्रसार में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा था।

 कार्यक्रम संयोजक निवर्तमान मण्डल अध्यक्ष राजकेसर पाल  ने कार्यक्रम में आए हुए सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।

   कार्यक्रम का संचालन निवर्तमान मंडल अध्यक्ष धर्मेन्द्र मिश्रा ने किया।

      कार्यक्रम में प्रमुख रूप से पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव, श्याममोहन अग्रवाल, आशीष गुप्ता, डा रामसूरत मौर्या, सारिका सोनी, उपेन्द्र मिश्रा, अजय यादव, प्रशांत सिंह दीपक, डॉ कमलेश निषाद, अमित श्रीवास्तव, विकास शर्मा, अजय सिंह, प्रमुख प्रतिनिधि सुनील यादव मम्मन, श्यामबाबू यादव, मिडिया प्रभारी मनीष श्रीवास्तव, जितेंद्र सिंह, शरद सिंह, मदन सोनी, नंदलाल यादव, संतोष मौर्य, बसन्त प्रजापति , कृष्णकुमार जायसवाल, ब्रह्मेश शुक्ला, सचिन पांडेय व संजय पाठक आदि लोग उपस्थित रहे।

 

*बकरीद के नाम पर हिंसा, क्रूरता व अवैध गतिविधियों पर लगे विराम: डॉ सुरेंद्र जैन*

नई दिल्ली:

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 विश्व हिंदू परिषद ने बकरीद के नाम पर होने वाली हिंसा, क्रूरता व अवैध गतिविधियों पर विराम लगाने की मांग करते हुए कथित पर्यावरण प्रेमियों के साथ उसके पूरे ईको सिस्टम की इस मामले में चुप्पी पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संगठन के केंद्रीय संयुक्त महा मंत्री डॉ सुरेंद्र जैन ने मजहबी आधार पर लाखों पशुओं की निर्मम तरीके से तड़फा तड़फ़ा कर नृशंस हत्या को जस्टिफाई करने वालों से भी आज पूछा कि आखिर कौनसी कुरान में बकरीद पर बकरे की बलि का हवाला दिया गया है। यदि यह सिर्फ प्रतीकात्मक है तो इसके अन्य सात्विक व मानवीय विकल्प भी तो हैं, जिन्हें कुछ मुस्लिम लोगों के समूहों ने अपनाना प्रारंभ भी कर दिया है। इसके लिए आखिर लाखों निरीह जानवरों की जान क्यों ली जाती है और सात्विक समाज के मन मस्तिष्क को खराब क्यों किया जाता है।

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री विनोद बंसल द्वारा जारी एक प्रेस वक्तव्य में उन्होंने आज कहा कि दिल्ली से लेकर मुंबई तक संपूर्ण देश में बकरीद की बर्बर परंपराओं को लेकर एक बेचैनी महसूस की जा रही है। संपूर्ण देश में दो करोड़ से अधिक मासूम प्राणियों के कत्ल होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। इस अमानवीय प्रथा को लेकर पूरा देश गुस्से में है। 

इस दिन का दृश्यांकन करते हुए उन्होंने कहा कि हर बकरीद पर जहां-तहां खून बिखरा होता है, कई सड़कें खून से सनी होती है, कई जगह के सीवर खून और मांस बहाने की वजह से जाम हो जाते हैं, कई जगह नदियों में इतना खून बहता है कि उनका रंग ही बदल जाता है। शाकाहारी और संवेदनशील समाज त्राहि त्राहि करने लग जाता है। 

डॉ जैन ने कहा कि दिवाली, होली आदि हिंदू त्योहारों पर तथाकथित पर्यावरण प्रेमी पत्रकार, बुद्धिजीवी हिंदुओं को सांकेतिक रूप में या इको फ्रेंडली होली दिवाली मनाने का आह्वान करते हैं। कुछ जगह न्यायपालिका का एक वर्ग भी स्वत: संज्ञान लेकर उपदेशात्मक आदेश भी देता देखा गया है। किंतु, एक ही दिन में करोड़ों मासूम बकरों की क्रूर हत्या पर ये सभी कथित  पर्यावरण विद् चुप्पी क्यों साध लेते हैं? इसके कारण पूरे देश का शाकाहारी और संवेदनशील समाज गुस्से में है। 

उन्होंने पूछा कि हिंदुओं को होली, दिवाली पर उपदेश देने वाले भला अभी तक इको फ्रेंडली बकरीद या अहिंसक सांकेतिक बकरीद का आह्वान क्यों नहीं कर पा रहे हैं? ऐसा लगता है कि ये सभी लोग हिंदू विरोधी इको सिस्टम का हिस्सा हैं ! पर्यावरण की रक्षा केवल इनका एक बहाना है, इनका असली उद्देश्य तो सिर्फ हिंदुओं को अपमानित करना ही है।

डॉ जैन ने चुनौती भरे लहजे में कहा कि बकरों की हत्या को कुछ लोग अपना कानूनी व धार्मिक अधिकार बताते हैं। मैं उनको चुनौती देता हूं कि वह बताएं कि कुरान के किस हिस्से में मासूम बकरों की कुर्बानी देने का आदेश  दिया गया है। धार्मिक अधिकार के नाम पर मानवता को कैसे आतंकित किया जा सकता है? 

उन्होंने यह भी कहा कि यह भारत के कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों का भी उल्लंघन है। कुछ कट्टरपंथी संविधान की अनुच्छेद 25 के अंतर्गत मिले अधिकारों की बात तो करते हैं लेकिन वे भूल जाते हैं कि यही प्रावधान  सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य की रक्षा की बात भी करता है। बकरीद की परंपरा से इन तीनों का उल्लंघन किया जाता है। संविधान का अनुच्छेद 48 पशुओं के संरक्षण और पालन की बात करता है। गुजरात, मुम्बई, उत्तराखंड आदि कई उच्च न्यायालयों ने स्पष्ट रूप से सार्वजनिक स्थलों पर कुर्बानी को वर्जित भी किया है। इसलिए यह कहना कि यह उनका कानूनी और धार्मिक अधिकार है, यह पूर्ण रूप से गलत है। 

ईद आजकल कुर्बानी के नाम पर क्रूर हिंसा का खुला प्रदर्शन और वहां के सभ्य समाज को आतंकित करने का एक माध्यम सा भी बन गई है। बाकी सब धर्म की परंपराओं में मानवीय जीवन मूल्यों को ध्यान में रखकर सुधार किए गए हैं। सभी सभ्य समाज कुर्बानी जैसी बर्बर परंपरा को छोड़ रहे हैं। जिस तरह की चुनौतियां कुछ मुस्लिम नेताओं द्वारा दी जा रही है ऐसा लगता है कि वे संवेदनशील समाजों को आतंकित करना चाहते हैं। हिंदू समाज इन गीदड़ भभकियों से डरेगा नहीं और किसी भी सार्वजनिक स्थल पर मासूम जीवों की अवैध रूप से क्रूर हत्या नहीं होने देगा। हिंदू समाज अपनी भावनाओं व संविधान के प्रावधानों की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहा है। वह उम्मीद करता है कि मुस्लिम नेता और तथाकथित पर्यावरण प्रेमी भी सभ्य समाजों की भावनाओं का सम्मान करेंगे और सांकेतिक एवं अहिंसक ईद मनाने का आह्वान कर इस दिशा में आगे बढ़ेंगे।


विनोद बंसल 

राष्ट्रीय प्रवक्ता 

विश्व हिंदू परिषद

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