तहसील विकासनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत ढकरानी में विश्व प्रसिद्ध आसन वेटलैंड (रामसर साइट) के प्रतिबंधित बफर जोन में दो दर्जन से अधिक स्टोन क्रेशर बिना किसी पर्यावरणीय अनुमति के संचालित किए जा रहे हैं। ये क्रेशर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT), माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों की खुली अवहेलना कर रहे हैं।
इन अवैध स्टोन क्रेशरों से निकलने Y0प गंदा पानी हजारों बीघा फसलों को बर्बाद कर किसानों की आजीविका छीन चुका है।न अंधाधुंध मशीनी खनन के कारण किसानों के खेत यमुना की भेंट चढ़ गए हैं। यमुना का पानी उत्तराखंड की सीमा में हर बरसात में तबाही मचा रहा है। रात-दिन चलने वाले इन क्रेशरों की तेज आवाज स्थानीय निवासियों के साथ-साथ जलजीवों और वन्यजीवों के जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है, जिससे गांव के लोग अपना घर-बार छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।
आसन वेटलैंड में साइबेरियन पक्षियों सहित अन्य प्रवासी पक्षियों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। चारों ओर सिर्फ स्टोन क्रेशरों का शोर और धूल के गुब्बार फैले हुए हैं। कभी हरा-भरा और सुंदर दिखने वाला यह क्षेत्र अब धूल और यमुना के विशाल गड्ढों में तब्दील हो चुका है। हजारों जीव-जंतुओं का जीवन समाप्त हो चुका है।
उक्त खनिज सामग्री को यमुना जल विद्युत निगम की क्षतिग्रस्त परियोजना के पुलों से हजारों ट्रक एवं अन्य भारी वाहनों द्वारा प्रतिदिन आवागमन कराया जा रहा है। शक्ति नहर के पुलों की समयावधि समाप्त होने तथा क्षतिग्रस्त स्थिति के कारण इन पर भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगाई जा चुकी थी, फिर भी ओवरलोडेड खनन सामग्री से भरे हजारों वाहनों का आवागमन निरंतर जारी है। इससे उत्तराखंड जल विद्युत निगम की परियोजना को गंभीर खतरा बना हुआ है। इनमें से एक पुल पहले भी गिर चुका है। यदि परियोजना को और नुकसान पहुंचता है तो प्रदेश में विद्युत संकट के साथ आर्थिक संकट भी उत्पन्न हो सकता है।
स्थानीय किसानों, पर्यावरणविदों और ग्रामवासियों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि आसन वेटलैंड जैसी अंतरराष्ट्रीय महत्व की साइट को बचाने के लिए अवैध खनन और क्रेशरों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
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