धनतेरस का पंचांग और शुभ मुहूर्त इस प्रकार है:
धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त -
।त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 6 नवंबर 2026, प्रातः 10:30 बजे
• त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर 2026, प्रातः 10:47 बजे
• प्रदोष काल: शाम 5:32 बजे से रात 8:09 बजे तक
• वृषभ काल (शुभ पूजा विंडो): शाम 6:02 बजे से शाम 7:57 बजे तक
इसलिए मनाते हैं धनतेरस:
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय शरद पूर्णिमा को चंद्रमा, कार्तिक द्वादशी को कामधेनु गाय, त्रयोदशी को धनवन्तरि, चतुर्दशी को मां काली और अमावस्या को लक्ष्मी माता सागर से उत्पन्न हुई थीं। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को धनवन्तरि का जन्म माना जाता है, इसलिए धनवन्तरि के जन्मदिवस के उपलक्ष में धनतेरस मनाया जाता है।
धनतेरस के दिन कुबेर की ऐसे करें पूजा :
धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है। मान्यता है कि उनकी पूजा करने से व्यक्ति को जीवन के हर भौतिक सुख की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान कुबेर की प्रतिमा या फोटो धूप-दीपक दिखाकर पुष्प अर्पित करें। फिर दक्षिण दिशा की ओर हाथ जोड़कर सच्चे मन से इस मंत्र का उच्चारण करें:
- ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये
धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
धनतेरस के दिन इसलिए जलाया जाता है यम के लिए दीपक:
धनतेरस के दिन सोने-चांदी, धातु की चीजें, बर्तन आदि की खरीदारी शुभ मानी जाती है। लेकिन इसके अलावा धनतेरस के दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा भी की जाती है। इस दिन संध्या के समय घर के मुख्य दरवाजे के दोनों ओर अनाज के ढेर पर मिट्टी का बड़ा दीपक रखकर उसे जलाएं। दीपक का मुंह दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए। दीपक जलाते समय इस मंत्र का जाप करें:
मृत्युना दंडपाशाभ्यां कालेन श्याम्या सह|
त्रयोदश्यां दीप दानात सूर्यज प्रीयतां मम ||
इसलिए मनाते हैं धनतेरस:
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय शरद पूर्णिमा को चंद्रमा, कार्तिक द्वादशी को कामधेनु गाय, त्रयोदशी को धनवन्तरि, चतुर्दशी को मां काली और अमावस्या को लक्ष्मी माता सागर से उत्पन्न हुई थीं। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को धनवन्तरि का जन्म माना जाता है, इसलिए धनवन्तरि के जन्मदिवस के उपलक्ष में धनतेरस मनाया जाता है।
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