यूएन वूमेन के 'शी लीड्स उत्तराखंड' कार्यशाला में डॉ. सुनीता विद्यार्थी का संबोधन: राजनीतिक सशक्तिकरण और चुनावी चुनौतियों पर रखी बेबाक राय
यूएन वूमेन द्वारा आयोजित दो दिवसीय 'शी लीड्स उत्तराखंड' कार्यशाला में डॉ. सुनीता विद्यार्थी ने 'शी लीड्स' एलुमिनाई के रूप में वक्ता के तौर पर शिरकत की। अपने विशेष आग्रह पर उत्तराखंड में इस कार्यक्रम का शेड्यूल तय होने के लिए उन्होंने यूएन वूमेन का आभार जताया।
संबोधन के प्रमुख बिंदु:
स्वयं विकल्प बनने का आह्वान: जब तक महिलाएं खुद को मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश नहीं करेंगी, तब तक उन्हें स्वतः प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा।
सिलेक्टिव एंपावरमेंट पर प्रहार: 'पिक एंड चूज़' और 'सिलेक्टिव एंपावरमेंट' की राजनीति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि किसी एक चेहरे को आगे रखकर जनता के सामने प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व पेश करने की प्रवृत्ति से ऊपर उठना होगा।
संगठनों की जिम्मेदारी: राजनीतिक दलों और संगठनों को महिलाओं को वास्तविक चुनावी अवसरों से जोड़ने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना चाहिए।
सर्वदलीय महिला प्रतिनिधियों की भागीदारी:
कार्यशाला ने सभी राजनीतिक दलों और स्थानीय निकायों की जनप्रतिनिधियों को एक मंच पर लाने का काम किया:
ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत सदस्य
पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष और पूर्व नगर निगम मेयर
यूएन वूमेन टीम का आभार:
दो दिवसीय प्रशिक्षण में महिलाओं के कौशल विकास (Skill Enhancement) और चुनाव से जुड़ी बारीकियों/सावधानियों पर मार्गदर्शन देने के लिए डॉ. सुनीता विद्यार्थी ने श्रीमती कांता सिंह, काव्या जी, श्री हमराज सिंह और यूएन वूमेन की पूरी टीम का धन्यवाद किया।
सबसे खास बात यह रहीं कि सुनीता विद्यार्थी ने 53 महिलाओं जो कि सभी राजनीतिक दलों से थी उनको इस प्रोग्राम का लाभ लेने के लिए recommend किया.
यही खासियत उन्हें खास बनाती हैं कि उन्होंने सभी महिलाओं को मंच दिलाकर अपनी अलग पहचान बनाई.
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