मुख्यमंत्री के अधीन विभाग में वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मियों को बाहर करने की तैयारी, 62 पदों पर सीधी भर्ती पूरी, नियुक्ति पत्र की तैयारी से बढ़ी बेचैनी
देहरादून :
कर्मचारी राज्य बीमा योजना एवं श्रम चिकित्सा सेवाएं, उत्तराखंड में पिछले करीब 15 वर्षों से उपनल के माध्यम से सेवाएं दे रहे फार्मासिस्टों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। विभाग में फार्मासिस्ट के 62 स्वीकृत पदों पर सीधी भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाने की तैयारी बताई जा रही है। ऐसे में वर्षों से इन्हीं पदों के सापेक्ष सेवाएं दे रहे उपनल फार्मासिस्टों के सामने सेवा से बाहर होने का खतरा मंडराने लगा है।फार्मासिस्टों का कहना है कि उन्होंने 15 वर्षों से अधिक समय तक लगातार विभाग में सेवाएं दी हैं। इस दौरान कर्मचारी राज्य बीमा योजना के बीमित व्यक्तियों और उनके आश्रितों को दवाइयां उपलब्ध कराने से लेकर चिकित्सा व्यवस्था को सुचारु रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
लेकिन अब उन्हीं स्वीकृत पदों पर नियमित भर्ती होने के बाद इन कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा होने की आशंका है। यदि सभी 62 पदों पर नियुक्तियां हो जाती हैं तो फार्मासिस्ट के स्वीकृत पदों पर कोई रिक्ति नहीं बचेगी और लंबे समय से कार्यरत उपनल कर्मियों के लिए विभाग में जगह बनाए रखना चुनौती बन जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि कर्मचारी राज्य बीमा योजना विभाग मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के अधीन है। ऐसे में मुख्यमंत्री के अपने विभाग में वर्षों से लगातार सेवाएं दे रहे उपनल कर्मियों के भविष्य पर तलवार लटकना सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
एक तरफ सरकार उपनल कर्मचारियों के हितों, सेवा सुरक्षा और समान कार्य-समान वेतन की बात करती है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से विभाग की व्यवस्था संभाल रहे कर्मचारियों के सामने नई भर्ती के बाद सेवा समाप्त होने की स्थिति पैदा हो रही है।
यदि मुख्यमंत्री के अधीन विभाग में ही 15 वर्षों से सेवाएं दे रहे उपनल कर्मियों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो प्रदेश के अन्य विभागों में वर्षों से कार्यरत उपनल कर्मचारियों को सरकार से क्या उम्मीद रखनी चाहिए?
उपनल कर्मियों का कहना है कि वर्षों की सेवा, अनुभव और विभागीय कार्यप्रणाली की जानकारी को नजरअंदाज कर उन्हें बाहर किया गया तो यह केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि उनके परिवारों के भविष्य का भी सवाल होगा।
62 पदों पर भर्ती पूरी होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार वर्षों से कार्यरत उपनल फार्मासिस्टों के अनुभव और सेवा अवधि को ध्यान में रखते हुए उनके भविष्य की कोई राह निकालेगी, या फिर 15 वर्षों की सेवा के बाद उन्हें विभाग से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा?
मामला अब सिर्फ 62 पदों का नहीं, बल्कि वर्षों से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा बने उपनल कर्मचारियों के भविष्य का है।
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