महिलाओं ने सड़क पर उतरकर किया चक्का जाम, प्रशासन पर मिलीभगत के आरोप
देहरादून :
.देहरादून–धनोल्टी मार्ग पर स्थित ग्राम झोल शेरकी (मालदेवता, ब्लॉक रायपुर) में 1 मार्च 2026 को हुए दर्दनाक हादसे की यादें अभी लोगों के दिलों से मिट भी नहीं पाई हैं कि एक बार फिर उसी संकरी ग्रामीण सड़क पर भारी डंपरों का संचालन शुरू हो गया है। इस कदम से क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है।
ज्ञात हो कि 1 मार्च को एक तेज रफ्तार डंपर ने एक युवक को कुचल दिया था | जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम छा गया था और ग्रामीणों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
ग्रामीणों का कहना है कि हादसे के बाद गांववासियों ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी थी कि इस मार्ग से डंपरों का संचालन बंद किया जाए, क्योंकि यह सड़क अत्यंत संकरी है और घनी आबादी के बीच से होकर गुजरती है। इसके बावजूद क्रशर और खनन माफियाओं द्वारा नियम-कानूनों को दरकिनार कर दोबारा भारी वाहनों का संचालन शुरू कर दिया गया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने न तो सड़क की क्षमता की तकनीकी जांच करवाई और न ही किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था लागू की। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।इस पूरै मामले की जानकारी स्थानीय निवासी एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता आदर्श राठौर ,अजय कप्तान,हिमांशु सिंह एवं अन्य साथियों द्वारा समाने लायी गयी | बुधवार सुबह जैसे ही भारी डंपर गांव की सीमा में प्रवेश करने लगे, ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। बड़ी संख्या में महिलाओं ने सड़क पर उतरकर डंपरों को रोक दिया और चक्का जाम कर दिया। ग्रामीणों ने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन करते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
महिलाओं का कहना है कि यह सड़क भारी वाहनों के लिए नहीं बनी है और यदि डंपर संचालन बंद नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
एक ओर पीड़ित परिवार अपने जवान बेटे को खोने के गम से उबर नहीं पाया है, वहीं दूसरी ओर उन्हें न्याय के नाम पर केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं। अब तक न तो दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई है और न ही पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया गया है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
इस मार्ग से भारी डंपरों का संचालन तत्काल बंद किया जाए।
मृतक के परिवार को उचित मुआवजा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
क्षेत्र में चल रहे अवैध क्रशरों की उच्चस्तरीय जांच कर उन्हें बंद किया जाए।
सड़क की क्षमता के अनुसार तकनीकी जांच और सुरक्षा मानक लागू किए जाएं।
भारी वाहनों की गति पर नियंत्रण हेतु पुलिस निगरानी बढ़ाई जाए।बड़ा सवाल क्या प्रशासन किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या फिर ग्रामीणों की सुरक्षा से ज्यादा माफियाओं के हित अहम हैं?
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