*विकास, सुशासन और जनकल्याण के विकल्प रहित संकल्प के साथ कार्य कर रही सरकार – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी*
*राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रखा विकास कार्यों का लेखा जोखा*
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराडीसैंण) में स्थित विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए सरकार की उपलब्धियों, नीतियों और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार “विकल्प रहित संकल्प” के साथ उत्तराखंड को समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत देवभूमि के देवी-देवताओं, देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों और उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले आंदोलनकारियों के त्याग और संघर्ष के कारण ही आज उत्तराखंड विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है।
*गैरसैंण उम्मीदों का प्रतीक*
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के लिए गैरसैंण केवल भौगोलिक स्थान नहीं बल्कि ये पहाड़ की आकांक्षाओं, उम्मीदों और स्वाभिमान का प्रतीक है। गैरसैंण उस संकल्प का प्रतीक है जिसके लिए उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन चला था। इसलिए सरकार ने अपने कार्यकाल में न केवल गैरसैंण को अपने हृदय में बसाए रखा, बल्कि ये भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि हमारी सरकार की प्रत्येक रीति और नीति में गैरसैंण की छाप हो।
*अटल जी के सपने को साकार करने का संकल्प*
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के गठन का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को जाता है, जिन्होंने इस राज्य की नींव रखी। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में राज्य को नई दिशा और गति मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2021 में बाबा केदार की पावन धरा से कहा था कि “21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा।” उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस संकल्प को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और विकास की योजनाओं को धरातल पर उतारने में जुटी है।
*ऐतिहासिक बजट: विकास का रोडमैप*
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस बार प्रस्तुत बजट कई मायनों में ऐतिहासिक है। यह वर्तमान विधानसभा का अंतिम पूर्णकालिक बजट होने के साथ-साथ राज्य के आगामी विकास की दिशा तय करने वाला दस्तावेज भी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत बजट का आकार 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं है, बल्कि राज्य के सवा करोड़ लोगों की आकांक्षाओं और उम्मीदों का प्रतिबिंब है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में मातृशक्ति के सम्मान, युवाओं के उत्थान, किसानों के कल्याण, विज्ञान एवं नवाचार के विकास, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पर्यटन के विस्तार जैसे सभी क्षेत्रों में संतुलित विकास का प्रयास किया गया है।
*विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने की प्रतिबद्धता*
मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनकी सरकार केवल घोषणाएं नहीं करती बल्कि उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा भी करती है। उन्होंने बताया कि मुख्यसेवक के रूप में की गई 3885 घोषणाओं में से 2408 घोषणाओं को धरातल पर उतारा जा चुका है और शेष पर तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं बल्कि उन्हें परिणामों में बदलना है, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
*आर्थिक प्रगति में तेजी*
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राज्य की जीएसडीपी में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और प्रति व्यक्ति आय में लगभग 41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य बजट का आकार भी 60 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इसके साथ ही निवेश, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
*रोजगार और उद्योगों को बढ़ावा*
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार ने रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए 30 से अधिक नई नीतियां लागू की हैं। इसके परिणामस्वरूप राज्य में 20 हजार से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए हैं और स्टार्टअप की संख्या 700 से बढ़कर लगभग 1750 हो गई है। उन्होंने कहा कि पर्यटन, होटल और होमस्टे क्षेत्र में भी तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। हेली सेवाओं और हेलीपोर्ट की संख्या बढ़ने से भी पर्यटन और कनेक्टिविटी को नई गति मिली है।
*नकल माफिया और भ्रष्टाचार पर सख्ती*
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने राज्य में नकल माफिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है, जिसके बाद भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार के मामलों में आईएएस और पीसीएस स्तर के अधिकारियों सहित 200 से अधिक लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
*समान नागरिक संहिता और ऐतिहासिक निर्णय*
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने कई ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय लिए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की गई है। उन्होंने कहा कि इस कानून के माध्यम से महिलाओं को समान अधिकार मिले हैं और समाज में समानता तथा न्याय की भावना को मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने राज्य की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए सख्त भू-कानून और धर्मांतरण विरोधी कानून जैसे कदम भी उठाए हैं।
*इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी में बड़ा निवेश*
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से उत्तराखंड में लगभग दो लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विभिन्न विकास परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सड़क, रेल, रोपवे और हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने के लिए कई परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना और कई रोपवे परियोजनाएं राज्य के विकास को नई गति देंगी।
*किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए योजनाएं*
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। किसानों को तीन लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है और कृषि उपकरणों पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं और प्रदेश की करीब 1 लाख 70 हजार महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं। युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए भी कई योजनाएं लागू की गई हैं।
*पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा*
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए धार्मिक, साहसिक, ईको-टूरिज्म और वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि केदारखंड और मानसखंड मंदिरों के विकास, शीतकालीन यात्रा, फिल्म पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से राज्य की पहचान वैश्विक स्तर पर मजबूत हो रही है।
*विकसित उत्तराखंड का लक्ष्य*
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन स्थापित करते हुए उत्तराखंड का समग्र और सतत विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार का “विकल्प रहित संकल्प” है कि अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचे, युवाओं को रोजगार मिले, किसानों की आय बढ़े और उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि जनता के सहयोग और सरकार की प्रतिबद्धता के बल पर उत्तराखंड आने वाले वर्षों में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।
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खेलभूमि उत्तराखंड में जमीनी स्तर पर सुविधाओं के विस्तार के लिए ठोस कदम*
*इस बार के बजट में धामी सरकार ने किया है प्रावधान*
*लेगेसी पॉलिसी पर अमल की भी चल रही है तैयारी*
38 वें राष्ट्रीय खेलों के भव्य आयोजन के बाद प्रदेश की धामी सरकार जमीनी स्तर पर खेल सुविधाओं के और विस्तार में जुट गई है। इस क्रम में प्रदेश के हर ब्लाक में अब मिनी स्टेडियमों का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को बजट सत्र के तीसरे दिन सदन को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हर ब्लाक में मिनी स्टेडियम के निर्माण के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में प्रावधान किया गया है।
वर्ष 2025 में उत्तराखंड ने न सिर्फ 38 वें राष्ट्रीय खेलों की सफल
मेजबानी की थी, बल्कि 103 पदक जीतकर इस स्तर के आयोजन में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी किया था। इस आयोजन ने उत्तराखंड को खेलभूमि के रूप में भी पहचान दी।
इस आयोजन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का आधारभूत खेल ढांचा विकसित किया गया। लेगेसी पॉलिसी बनाकर सरकार ने इस खेल ढांचे का इस्तेमाल एकेडमी के तौर पर करने का निर्णय लिया है। ताकि खेल प्रतिभाओं को उचित प्रशिक्षण प्राप्त हो सके। इस संबंध में शासन स्तर पर कार्यवाही चल रही है।
अब वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में हर ब्लाक में मिनी स्टेडियम के निर्माण के लिए प्रावधान कर दिए जाने को भी अहम माना जा रहा है। बुधवार को प्रश्नकाल में जब खेल मंत्री रेखा आर्या पर्वतीय क्षेत्रों में खेल मैदान और मिनी स्टेडियम से संबंधित सवाल का जवाब दे रही थीं, तब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदन को यह अहम जानकारी दी। खेल मंत्री रेखा आर्या के अनुसार-पर्वतीय क्षेत्र में मिनी स्टेडियम के लिए 1.18 एकड़ भूमि की आवश्यकता होती है। इसके निर्माण के लिए एक करोड़ 70 लाख रूपये दिए जाने का प्रावधान है।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास योजनाओं के लिए प्रदान की ₹ 75.36 करोड की वित्तीय स्वीकृति*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने एस.सी.एस.पी. के अन्तर्गत जनपद पौड़ी गढ़वाल के विधानसभा क्षेत्र पौड़ी के विकासखण्ड पाबौ मे बेडा का जगड मोटर मार्ग के किमी0 1.00 से 5.00 तक सुदृढीकरण एवं डामरीकरण कार्य हेतु ₹ 3.58 करोड़, जनपद हरिद्वार के राजकीय उपजिला चिकित्सालय रुड़की में विद्युत रिवाईरिंग कार्य हेतु ₹ 3.93 करोड के साथ ही राज्य योजना के अन्तर्गत जनपद देहरादून के विधानसम क्षेत्र मसूरी के अन्तर्गत न्यू कैंट मोटर मार्ग किमी० 1 चै0 0.375 से चै० 1.625 (सालावाला पुल से विजय कॉलोनी पुल) तक मार्ग को दो लेन से 10.50 मी० चौडाई में परिवर्तित (अपग्रेड) किये जाने (द्वितीय चरण) हेतु कुल धनराशि ₹ 16.87 करोड़ की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।
मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा क्षेत्र चम्पावत के अन्तर्गत बूम से टनकपुर के शारदा नदी के दांये पार्श्व पर (तटबन्ध) बाढ़ सुरक्षा कार्य एवं शारदा नदी के दांये पार्श्व पर पर बूम व उचौलीगोठ में बाढ़ सुरक्षा कार्य हेतु ₹ 15.69 करोड की योजना स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।
मुख्यमंत्री द्वारा नगर निगम, ऋषिकेश क्षेत्रान्तर्गत एकत्रित लीगेसी वेस्ट निस्तारण हेतु ₹ 6.79 करोड़ तथा नगर निगम, पिथौरागढ़ में देवभूमि रजत जयन्ती पार्क के निर्माण हेतु ₹ 9.81 करोड की योजना स्वीकृत किये जाने के साथ ही टनकपुर में मीडिया सेंटर एवं गेस्ट हाउस तथा टनकपुर में कम्यूनिटी हॉल निर्माण किये जाने हेतु ₹ 14.24 करोड स्वीकृत करते हुए प्रथम किश्त के रूप में ₹ 1.00 करोड़ अवमुक्त किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।
*मुख्यमंत्री ने किया श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की बेहतर सुरक्षा हेतु एआई बेस्ड सिस्टम अधिष्ठापित किये जाने का अनुमोदन*
मुख्यमंत्री द्वारा राज्य में स्थित चारधाम एवं मुख्य पर्यटन स्थलों पर लगातार श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी के दृष्टिगत उनकी बेहतर सुरक्षा व्यवस्था हेतु संदिग्ध तत्वों एवं गतिविधियों पर निगरानी के लिए एआई बेस्ड फेसियल रिकुनाईजेशन सिस्टम एवं डाटा एनेलेटिक्स साफ्टवेयर सिस्टम विभिन्न 05 जनपदों में अधिष्ठापित किये जाने हेतु ₹ 4.45 करोड स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।
धामी सरकार के चार साल में बने 819 पंचायत भवन*
*प्रदेश में सात हजार किमी से अधिक सड़कें हुईं गड्डा मुक्त*
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूसरे कार्यकाल के बीते चार साल में प्रदेश में 819 पंचायत भवनों का निर्माण पुननिर्माण किया गया है।
प्रदेश में पंचायत भवनों की संख्या 5867 है। इसमें से 1134 पंचायत भवन लंबे समय से जीर्णशीर्ण चल रहे थे। इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंचायतीराज विभाग को अभियान चलाकर जीर्ण- शीर्ण भवनों का पुनर्निमाण करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद गत चार वर्ष में विभाग ने 819 पंचायत भवनों का निर्माण- पुननिर्माण कर लिया है। शेष भवनों पर भी कार्य किया जा रहा है। मंगलवार को विभागीय मंत्री सतपाल महाराज ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह जानकारी सदन के सामने रखी।
*7 हजार किमी से अधिक सड़कें गड्डा मुक्त*
प्रदेश में लोकनिर्माण विभाग नवंबर के प्रथम सप्ताह तक सात हजार से अधिक किमी सडकों को गड्डा मुक्त कर चुका है। सदन में विभाग की ओर से प्रस्तुत जानकारी के अनुसार प्रदेश की सड़कों को गड्डा मुक्त करने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के क्रम में विभाग ने वर्ष 2025-26 में मानसून काल से पूर्व 3134 किमी लंबी सड़कों को गड्डा मुक्त किया। जबकि मानसून के बाद 10 नवंबर 2025 तक 4149.17 किमी लंबी सड़कों को गड्डा मुक्त किया। इस दौरान अकेले हरिद्वार जनपद में 313 किमी से अधिक लंबी सड़कों को गड्डामुक्त किया गया।
*रोपवे परियोजनाओं पर काम तेज*
प्रदेश में विभिन्न तीर्थ स्थलों को रोपवे से जोड़ने की प्रक्रिया गतिमान है। पर्यटन मंत्री ने मंगलवार को विधानसभा में बताया कि विभाग ने कद्दूखाल से सुरकंडा देवी मंदिर के लिए पीपीपी मोड़ में रोपवे का संचालन शुरु कर दिया है। इसके अलावा जनपद चम्पावत में ठुलीगाड़ से पूर्णागिरी रोपवे भी पीपीपी मोड में निर्माणाधीन है। साथ ही जनपद उत्तरकाशी में जानकी चट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक के लिए भी रोपवे पीपीपी मोड में विकसित किया जा रहा है। साथ ही साथ गौरीकुंड से केदारनाथ धाम, गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के लिए भी रोपवे निर्माण की प्रक्रिया गतिमान है।
: *वनाग्नि रोकने के गंभीर प्रयासों से बढ़ी उम्मीदें*
*राज्य सरकार ने एक वर्ष में पांच करोड़ रूपये से ज्यादा का पिरूल खरीदा*
*पहली बार मिला फायर वाचर्स को सुरक्षा कवच, दस लाख का सामूहिक बीमा*
*प्रधानों की अध्यक्षता में कमेटी, ग्राम पंचायत को 30 हजार की प्रोत्साहन राशि*
प्रदेश में वनाग्नि को रोकने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जिन गंभीर प्रयासों को शुरू किया गया है, उनसे सार्थक परिणामों की उम्मीदें बढ़ रही हैं। सरकार ने वन विभाग के माध्यम से एक वर्ष के भीतर ग्रामीणों से पांच करोड़ 42 लाख रूपये का पिरूल खरीदा है। चीड़ के जंगलों में आग लगने के मूल कारण को खत्म करने के लिए ग्रामीणों से वर्ष 2025 में 5532 टन पिरूल खरीदा गया है। इस लक्ष्य को अब बढ़ाकर 8555 टन कर दिया गया है। सरकार की ये ही मंशा है कि पिरुल एकत्रित कर आग की आशंका को न्यूनतम स्तर पर पहुंचा दिया जाए।
वनाग्नि को रोकने के लिए धामी सरकार के प्रयासों में जनजागरूकता पर भी फोकस किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर 1239 जागरूकता कैंप लगाए गए हैं। सबसे अहम काम सरकार ने यह किया है कि ग्राम प्रधानों की अध्यक्षता में फाॅरेस्ट फायर मैनेजमेंट कमेटी गठित की है, जो विभाग के साथ मिलकर जंगल बचाने में जुट रही हैं। इसके लिए संबंधित ग्राम पंचायत को 30 हजार रूपये प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। मंगलवार को बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल में वन मंत्री सुबोध उनियाल ने यह जानकारी साझा कीं।
*फायर वाचर्स की धामी सरकार ने की चिंता*
वनाग्नि के दौरान फायर वाचर्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी सुरक्षा के लिए धामी सरकार ने पहली बार बीमे का सुरक्षा कवच उपलब्ध कराया है। फायर वाचर्स का दस लाख का सामूहिक बीमा किया गया है। 5600 फायर वाचर्स ने पिछले वर्ष वनाग्नि रोकने में अपना योगदान दिया था।
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: *पूर्व उपनल कर्मियों को समान कार्य समान वेतन के लिए 289.98 करोड़ की व्यवस्था, सरकार का बड़ा निर्णय*
उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2026–27 के बजट में पूर्व उपनल कर्मियों को समान कार्य के लिए समान वेतन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बजट में इस मद के लिए 289 करोड़ 98 लाख 29 हजार रुपये की राशि का प्रावधान किया है।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों और श्रमिकों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि पूर्व उपनल कर्मियों ने विभिन्न विभागों में लंबे समय तक महत्वपूर्ण सेवाएं दी हैं और उनके हितों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने समान कार्य के लिए समान वेतन की व्यवस्था को लागू करने हेतु बजट में पर्याप्त धनराशि सुनिश्चित की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय सरकार की समावेशी और संवेदनशील शासन व्यवस्था का प्रतीक है।सरकार लगातार कर्मचारियों के कल्याण, प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और प्रदेश में पारदर्शी व उत्तरदायी शासन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस निर्णय से पूर्व उपनल कर्मियों को राहत मिलेगी और वे अधिक उत्साह के साथ राज्य के विकास में योगदान दे सकेंगे।
[: *वन्य जीवों से नुकसान पर मुआवजे का दायरा बढ़ा*
*भालुओं से फसल चौपट होने के मामलों में भी मुआवजे पर सरकार गंभीर*
*मकान को क्षति पहुंचने पर मुआवजे का पहले ही हो चुका है निर्णय*
*ततैंया औैर मधुमक्खी के काटने पर भी अब मिल रहा है मुआवजा*
वन्य जीवों से होने वाले कई तरह के नुकसान पर अभी तक मुआवजे की व्यवस्था नहीं थी, लेकिन धामी सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लेकर लोगों को राहत प्रदान की है। राहत देने के लिए सरकार के प्रयास अभी थमे नहीं हैं। अब धामी सरकार भालुओं से किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को भी मुआवजे के दायरे में लाने की कोशिश में जुटी है। भालुओं से मकान-भवनों को होने वाले नुकसान पर धामी सरकार पहले ही मुुआवजे की व्यवस्था कर चुकी है।
धामी सरकार ने अपने चार साल के कार्यकाल में वन्य जीवों से लोगों के नुकसान पर मुआवजे को लेकर गंभीरता दिखाई है। वन्य जीवों के हमले से मौत पर मिलने वाले मुआवजे को छह लाख करना बेहद अहम फैसला रहा है। पहले ऐसे मामलों में चार लाख मुआवजा दिया जा रहा था। इसी तरह, ततैंया, मधुमक्खी के हमले में भी मुआवजे की सरकार ने व्यवस्था की है।
बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल में वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि भालुओं के व्यवहार में आए परिवर्तन और इससे हो रहे नुकसान पर भी सरकार की निगाह है। इसी लिए, भारतीय वन्य जीव संस्थान को इस विषय पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार जरूरी कदम उठाएगी। उनियाल ने जानकारी दी कि भालुओं से फसल के नुकसान पर मुआवजा देने के संबंध में भी सरकार गंभीरता से विचार कर रही है
: *मुख्यमंत्री ने भराड़ीसैंण में अग्निवीर कैडेट्स से किया संवाद*
*अग्निवीरों के भविष्य की सुरक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री*
*वर्दीधारी पदों में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था*
*सैनिकों के अनुशासन और समर्पण से प्रेरणा लेकर जनता की सेवा कर रहा हूँ : मुख्यमंत्री*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को भराड़ीसैंण में अग्निवीर सैनिकों के रूप में भर्ती होने वाले कैडेट्स के साथ संवाद किया। संवाद के दौरान कैडेट्स ने मुख्यमंत्री से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका मुख्यमंत्री ने सहजता से उत्तर दिया।
संवाद के दौरान शंकर सिंह राणा ने मुख्यमंत्री से पूछा कि सैनिक पुत्र होने के कारण आपने सैनिकों के जीवन और गतिविधियों को नजदीक से देखा है, क्या आपका मन सेना में जाने का नहीं हुआ? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सेना में जाना अन्य सेवाओं की अपेक्षा अत्यंत सम्माननीय माना जाता है। उन्होंने कहा कि वे अपने जीवन को भी एक सैनिक के जीवन की तरह अनुशासित और समर्पित मानकर कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि अपने पिताजी के साथ रहते हुए उन्होंने सेना के अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को करीब से देखा है। जिस प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ हमारे सैनिक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं, उसी भावना से वे प्रदेश के मुख्य सेवक के रूप में उत्तराखण्ड की देवतुल्य जनता की सेवा करने का प्रयास करते हैं।
हिमांशु रौतेला ने प्रश्न किया कि प्रदेश के मुखिया होने के नाते आप अपने परिवार को कैसे समय दे पाते हैं? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई व्यक्ति राजनीतिक और सामाजिक जीवन में सक्रिय होता है तो उसकी जिम्मेदारियां बहुत बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्य सेवक के रूप में प्रदेश के सभी लोग उनका परिवार हैं और सभी गांव उनके अपने गांव हैं।
ओ.पी. कण्डारी ने पूछा कि जब हम अग्निवीर के रूप में अपनी सेवा पूरी कर वापस आएंगे, उसके बाद सरकार हमारे रोजगार के लिए क्या व्यवस्था कर रही है? मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्दीधारी पदों पर अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की है। इसके अतिरिक्त केन्द्र सरकार द्वारा भी अनेक क्षेत्रों में अग्निवीरों को अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर अग्निवीर के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
रितेश पंवार ने मुख्यमंत्री से पूछा कि आपकी पहचान “धाकड़ धामी” के रूप में क्यों बनी? मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि का व्यवहार जनता के साथ सदैव सौम्य होना चाहिए। हालांकि राज्यहित और जनहित में कई बार कठोर और साहसिक निर्णय लेने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है। प्रदेश में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है तथा दंगा रोधी कानून भी लागू किया गया है। पिछले चार वर्षों में राज्य सरकार ने जन अपेक्षाओं और प्रदेशहित में अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं।
अमन सेमवाल ने पूछा कि आपके चेहरे पर हमेशा मुस्कान का क्या राज है? मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें कार्य करने की ऊर्जा और प्रेरणा प्रदेश की जनता के आशीर्वाद से मिलती है। उन्होंने कहा कि सरकार जन अपेक्षाओं के अनुरूप प्रदेश के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है और आज अनेक क्षेत्रों में उत्तराखण्ड देश में अग्रणी स्थान पर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनभावनाओं के अनुरूप राज्य के विकास को नई गति देने के लिए पूरे संकल्प और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
इस अवसर पर अग्निवीरों और पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे सैनिक सीमांत और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों में देश की सेवा करते हैं। देवभूमि उत्तराखण्ड की विशेषता है कि यहां लगभग हर परिवार से कोई न कोई सदस्य सेना या अर्द्धसैन्य बलों में सेवाएं दे रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना तेजी से आत्मनिर्भर बन रही है। रक्षा क्षेत्र में भारत का निर्यात भी लगातार बढ़ रहा है और भारतीय सेना वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और सक्षम सेना के रूप में स्थापित हुई है। सेना में निरंतर आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सैनिकों और पूर्व सैनिकों के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। देहरादून में भव्य सैन्यधाम का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें राज्य के वीर बलिदानियों की गौरवगाथाएं और स्मृतियां संजोई जाएंगी। उन्होंने कहा कि वे पूर्व सैनिकों को अपने अभिभावक के रूप में देखते हैं।
इस अवसर पर यूथ फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल अजय कोठियाल (सेनि.), पूर्व सैनिकगण तथा अग्निवीर उपस्थित थे।
[: *कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए देवभूमि परिवार विधेयक पेश*
*देवभूमि परिवार आईडी में मुखिया के तौर पर परिवार की वरिष्ठतम महिला सदस्य का नाम होगा*
कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक पारदर्शी तरीके से सहायता पहुँचाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने मंगलवार को “देवभूमि परिवार विधेयक- 2026” को सदन पटल पर रख दिया है। इस विधेयक के कानून बन जाने पर प्रदेश में
एकीकृत और सत्यापित परिवार-आधारित डेटाबेस “देवभूमि परिवार” की स्थापना हो सकेगी। विधेयक का उद्देश्य विभिन्न विभागों में बिखरे लाभार्थी डेटा को एक मंच पर लाकर योजनाओं के संचालन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समन्वित बनाना है। देवभूमि परिवार आईडी में मुखिया के तौर पर परिवार की 18 वर्ष से अधिक आयु की वरिष्ठतम महिला सदस्य का नाम दर्ज होगा।
वर्तमान में राज्य के अलग-अलग विभाग अपनी-अपनी योजनाओं के लिए अलग लाभार्थी डेटाबेस का उपयोग करते हैं। इसके कारण कई बार लाभार्थी आंकड़ों का दोहराव, पुनः सत्यापन की जटिल प्रक्रियाएँ और विभागों के बीच समन्वय की कमी जैसी समस्याएँ सामने आती हैं। इससे न केवल प्रशासनिक संसाधनों पर अतिरिक्त भार पड़ता है, बल्कि योजनाओं के आकलन और प्रभावी क्रियान्वयन में भी बाधाएँ उत्पन्न होती हैं।
अब इस विधेयक के माध्यम से राज्य में एक एकीकृत परिवार-स्तरीय डेटा भंडार स्थापित किया जाएगा, जो विभिन्न विभागों और एजेंसियों के लिए लाभार्थी संबंधी सूचनाओं का एक विश्वसनीय स्रोत (Single Source of Truth) के रूप में कार्य करेगा। इससे योजनाओं का बेहतर लक्ष्योन्मुखी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी सहायता अधिक प्रभावी ढंग से पहुँच सकेगी।
इसके साथ ही, इस डेटा प्रणाली के प्रभावी प्रबंधन, संरक्षण और संरचनात्मक सुधारों के लिए एक उपयुक्त संस्थागत तंत्र का भी गठन किया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत विभागों के बीच सुरक्षित और विनियमित डेटा आदान-प्रदान की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी, जिससे योजनाओं के बेहतर लक्षित वितरण और समन्वय को मजबूती मिलेगी।
यह पूरी व्यवस्था डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 (DPDP Act 2023) के प्रावधानों के अनुरूप संचालित की जाएगी, ताकि नागरिकों के डेटा का उपयोग सहमति, पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ सुनिश्चित किया जा सके।
*देवभूमि परिवार विधेयक- 2026” सुशासन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और उत्तराखंड के नागरिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुँच सकेगा।*
*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री*
दूसरे दिन*ये विधेयक भी प्रस्तुत किए गए*
उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक – 2026
उत्तराखंड दुकान और स्थापन (रोजगार विनियमन और सेवा शर्त) (संशोधन) विधेयक – 2026
उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश लोक सेवा (शारीरिक रूप से विकलांग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित और पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1993) (संशोधन) विधेयक 2026
उत्तराखंड जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम, 2026
उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026
उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम, विधेयक, 2026
उत्तराखंड भाषा संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2026
उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026
उत्तराखंड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) विधेयक, 2026
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