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 UGC पर पिछले 48 घंटे से बवाल मचा हुआ है। भारत के सवर्ण सकते में है।



यूजीसी एक्ट को लेकर पूरे देश भर में हंगामा मचा हुआ है। सरकार को घेरने की तैयारी में सवर्णों ने कमर कस ली है। 24 घंटे के अंदर  मीडिया, सोशल मीडिया सहित अनेक प्लेटफार्म पर स्वर्ण ने विरोध जताया है। यहां तक कि युवाओं ने कमल के फूल को  भूल बताते हुए नारे लगाने शुरू कर दिया है।

30/1/2026 को समस्त स्वर्ण समाज एक बड़ा  ज्ञापन देने जा रहे हैं UGC bill जो संविधान विरोधी कानून बनाया गया है विभिन्न स्थानों से भाजपा कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफों की खबर भी आ रही है।


- शुभांकर मिश्रा ने वीडियो बनाया 

- सुशांत सिन्हा ने वीडियो बनाया 

- Zee न्यूज़ ने DNA शो में दिखाया 

- ट्विटर पर लगातार ट्रेंडिंग में बना हुआ है 

- अब तक कई लाख लोगो ने पोस्ट डाला 

- MP निशिकांत दुबे ने सफ़ाई दी  

- करनी सेना आंदोलन की तैयारी में जुटी 

- अनिल मिश्रा ने वकीलों से मीटिंग की 


 सवर्ण समाज इस विषय पर एकदम एकजुट है। सूत्रों के अनुसार बड़े आंदोलनों की तैयारी तय है।


जाने माने वकील विष्णु शंकर जैन भी इस गजट  के खिलाफ  कूद पड़े है। जिस पर उन्हें दो महीने बाद कि तारीख सौंप दी गयी। 

मंडल की आग  से युवाओं को बचाते हुए जो हाथ झुलसे थे वो आज भी भूले नही है  आरक्षण हटाना तो दूर की कौड़ी है, सवर्णों को अब अधिक सामना करना पड़ सकता है। ऐसी अनेकों पोस्टो से सोशल मीडिया भरा पड़ा है और काफी हद तक यह सही भी है।

*शिमला: राष्ट्रीय देव भूमि पार्टी ने 28 जनवरी को BJP कार्यालय घेराव की घोषणा की, UGC के 'काले कानून' के खिलाफ बड़ा आंदोलन**


पंकज शर्मा ने कहा, "यह कथित सामाजिक न्याय का कानून सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ सबसे बड़ा अन्याय है। अगर किसी विशेष समुदाय (SC/ST) का छात्र सामान्य वर्ग के छात्र पर आरोप लगा दे, तो आरोपी को तुरंत दोषी मान लिया जाएगा, जबकि बचाव के लिए कोई ठोस सुरक्षा कवच नहीं होगा। यह झूठे आरोपों को बढ़ावा देगा और निर्दोषों को परेशान करेगा।"


पार्टी इसे **सामान्य वर्ग के अधिकारों पर हमला** बता रही है और दावा कर रही है कि यह लड़ाई किसी एक पार्टी या व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे सवर्ण समाज की है। बयान में भावुक अपील की गई है: "जब नाश मनुज पर छाता है तो पहले विवेक मर जाता है।" साथ ही सामान्य वर्ग के लोगों से हाथ जोड़कर विनम्र निवेदन किया गया है कि वे बड़ी संख्या में पहुंचें और आंदोलन को मजबूत बनाएं।


UGC के नए नियमों की पृष्ठभूमि

UGC ने जनवरी 2026 में जारी इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में **जाति-आधारित भेदभाव** को पूरी तरह रोकना है। मुख्य प्रावधान:

- सभी संस्थानों में **Equal Opportunity Centre (EOC)** स्थापित करना अनिवार्य।

- भेदभाव की शिकायतों पर त्वरित जांच और कार्रवाई।

- जाति आधारित उत्पीड़न रोकने के लिए संवेदनशीलता प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम।

- उल्लंघन पर संस्थान की मान्यता रद्द करने तक की सजा।


ये नियम मुख्य रूप से SC/ST/OBC समुदाय के छात्रों को सुरक्षा देने के लिए हैं, लेकिन कुछ संगठनों का मानना है कि यह सामान्य वर्ग के खिलाफ पक्षपातपूर्ण हो सकता है, क्योंकि शिकायतों पर सख्त कार्रवाई के प्रावधान से दुरुपयोग का खतरा है।


 पार्टी और आंदोलन का संदर्भ

राष्ट्रीय देव भूमि पार्टी हिमाचल में देवभूमि क्षत्रिय संगठन और सवर्ण मोर्चा से जुड़ी हुई है। पार्टी अध्यक्ष  रूमित सिंह ठाकुर ने भी सोशल मीडिया पर इसी आंदोलन की अपील की है, जिसमें UGC नियमों के अलावा अन्य मुद्दों (जैसे माइनस 40% मार्क्स वाले स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स नीति) का भी जिक्र है। पार्टी ने इसे "हक की आवाज" बताया है और युवाओं-छात्रों को शिमला पहुंचने का आह्वान किया है।


अभी तक इस आंदोलन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया BJP या सरकार की तरफ से सामने नहीं आई है, लेकिन शिमला में 28 जनवरी को ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना है।

एक कविता सोशल मीडिया पर हुई वायरल--


राष्ट्रवाद का झोला टांगे मैं सवर्ण आवारा हूँ,

मुसलमान से यदि बच जाऊं तो सत्ता का चारा हूँ।

कांग्रेस ने दर्द दिए तब भी हमने कमल का फूल चुना,

लेकिन अब जेल में डाल रहे ये हमें कोई पड़ताल बिना। 

इतने दिन तक भक्ति की फिर भी मोदी का मारा हूँ,

वोट बैंक की कुटिल राजनीति में मैं सवर्ण बेचारा हूँ।

भरोसा किया अपने नेताओं पर, मैं यूँ ही नहीं हारा हूँ,

अभी भी चुप्पी साधी मैंने, तो मैं ही बहुत बड़ा नकारा हूँ। 


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