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बुनियादी सुविधाओं से लैस होंगे सूबे के प्राथमिक विद्यालय : डॉ0 धन सिंह रावत

एनईपी के अंतर्गत आंगनवाडी कार्यकर्त्रियों को दिया जायेगा विशेष प्रशिक्षण

 राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने को लेकर समीक्षा बैठक


देहरादून:




सूबे में बुनियादी शिक्षा के ढांचे को और बेहत्तर बनाने के लिए प्राथमिक एवं पूर्व प्राथमिक विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किया जायेगा। एनईपी के अंतर्गत आंगनबाडी कार्यकर्त्रियों को विशेष प्रशिक्षण दे कर आंगनबाडियों में बालवाटिका नाम से कक्षाएं प्रारम्भ की जायेंगी। बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने हेतु मध्यान भोजन योजना को चरणबद्ध रूप से पूर्व प्राथमिक कक्षाओं तक लागू किया जायेगा।


विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने आज सचिवालय स्थित सभागार में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने को लेकर विभागीय अधिकारियों की बैठक ली। जिसमें उन्होंने सूबे के प्राथमिक एवं पूर्व प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा-कक्ष, फर्नीचर, पेयजल, शौचालय, बिजली, खेल सामग्री एवं मैदान आदि बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के अंतर्गत राज्य के आंगनबाडी केन्द्रों का सुदृढ़िकरण करते हुये आंगनबाडी कार्यकर्त्रियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जायेगा। आंगनबाडियों में बालवाटिका नाम से कक्षाएं प्रारम्भ की जायेंगी। बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने की दृष्टि से मध्यान भोजन योजना को चरणबद्ध रूप से पूर्व प्राथमिक कक्षाओं तक लागू किया जायेगा। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि बालवाटिका कक्षाओं के लिए शिक्षक हस्त पुस्तिका तैयार कर दी गई है जबकि बच्चों के लिए बालवाटिका अभ्यास पुस्तिका तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्राथमिक विद्यालयों के परिसर में स्थित आंगनवाडियों के लिये एक्टीविटी लर्निंग मैटेरियल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है। आंगनबाडी कार्यकर्त्रियों एवं राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम टीम द्वारा वर्ष में दो बार आंगनबाडी केन्द्रों में पंजीकृत बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर फस्ट एड दिया जाता है। आंगनबाडी केन्द्रों का प्राथमिक विद्यालयों के साथ लिंकिंग की प्रक्रिया गतिमान है। इसके अलावा पूर्व प्राथमिक कक्षाओं को प्राथमिक विद्यालयों  के साथ संचालित किये जाने हेतु वर्तमान आधारभूत ढांचे का सुदृढ़करण किया जा रहा है। जिसके तहत 4457 को-लोकेटेड आंगनबाडी केन्द्रों में बालवाटिका प्रारम्भ करने की तैयारी चल रही है।


बैठक में मुख्य सचिव डॉ0 एस0एस0 संधू, सचिव शिक्षा रविनाथ रमन, सचिव पंचायतीराज हरीशचन्द्र सेमवाल, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा बंशीधर तिवारी, निदेशक सीमैट सीमा जौनसारी, निदेशक प्राथमिक शिक्षा बंदना गर्ब्याल सहित बाल विकास विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।



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हिप्पोक्रेटिक ओथ की जगह ‘महर्षि चरक शपथ’ लेंगे मेडिकल छात्रः डॉ0 धन सिंह रावत*

मेडिकल शिक्षण संस्थानों में स्थापित होगी चरक, सुश्रुत एवं धन्वंतरि की मूर्तियां*

राजकीय मेडिकल एवं नर्सिंग कॉलेजों में निर्माण कार्य समय पर पूर्ण करने के निर्देश


सूबे के मेडिकल एवं नर्सिंग कॉलेजों में दीक्षा सत्रारंभ के अवसर पर हिप्पोक्रेटिक शपथ की बजाय छात्र-छात्राएं अब ‘महर्षि चरक शपथ’ लेंगे, जो भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के सर्वोच्च ग्रंथ चरक संहिता से ली जायेगी। प्रदेश के प्रत्येक मेडिकल शिक्षण संस्थानों में भारतीय चिकित्सा पद्धति की महान विभूतियों चरक, सुश्रुत एवं धन्वंतरि की मूर्तियां स्थापित की जायेगी। जिसकी शुरूआत राज्य के मेडिकल कॉलेजों से की जायेगी। सभी राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं नर्सिंग कॉलेज में निर्माण कार्यार्ं की धीमी गति पर असंतोष व्यक्त करते हुए महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा को निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिये।


यह बात प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने आज सचिवालय स्थित डीएमएमसी सभागार में आयोजित चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में कही। उन्होंने कहा कि मेडिकल, नर्सिंग एवं अन्य चिकित्सा शिक्षण संस्थानों में दीक्षा सत्रारंभ (प्रोग्राम इंडक्शन ओरिएंटेशन सेरेमनी) के दौरान ली जाने वाली हिप्पोक्रेटिक शपथ की जगह छात्र-छात्राएं ‘महर्षि चरक शपथ’ लेंगी। डॉ0 रावत ने कहा कि ‘महर्षि चरक शपथ’ को भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के सर्वोच्च ग्रंथ चरक संहिता से लिया जायेगा। जिसको तैयार करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि देश में स्वास्थ्य शिक्षा ढांचे में नये बदलाव के अनुसार राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने भी मेडिकल छात्रों की ओर से ली जाने वाली हिप्पोक्रेटिक शपथ को बदल कर ‘महर्षि चरक शपथ’ लेने की सिफारिश की है। विभागीय मंत्री ने कहा कि राज्य के मेडिकल शिक्षण संस्थानों में भारतीय चिकित्सा विज्ञान के प्रणेता महर्षि चरक, महर्षि सुश्रुत एवं महर्षि धन्वंतरि की मूर्तियां स्थापित की जायेगी। उन्होंने कहा कि सबसे पहले तीनों विभूतियों की मूर्तियां मेडिकल एवं नर्सिंग कॉलेजां में लगेगी, जिसके निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिये गये हैं। बैठक में डॉ0 रावत ने मेडिकल एवं नर्सिंग कॉलेजों में चल रहे निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई। उन्होंने महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा को निर्माणाधीन कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर प्रत्येक सप्ताह कार्यदायी संस्थाओं के साथ निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करने एवं निर्माण कार्य नियत समय पर पूर्ण कराने को कहा। बैठक में चिकित्सा संस्थानों में एनएमसी मानकों के अनुसार फैकल्टी की तैनाती करने, श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में कार्यरत नर्सिंग एवं लैब टैक्नीशियनों के एकमुश्त समाधान के तहत नियमित करने, मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत संविदा कार्मिकों को न्यूनतम वेतनमान दिये जाने, फैकल्टी के नियमित चयन हेतु मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसरों, एसोसिएट एवं असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती नियमावली में आयु सीमा संशोधन किये जाने सहित अन्य बिन्दुओं पर विस्तार से चर्चा कर विभागीय अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिये।


बैठक में सचिव स्वास्थ्य राधिका झा, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ0 आशीष श्रीवास्तव, कुलपति उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय प्रो0 हेमचन्द्र, अपर सचिव चिकित्सा शिक्षा अरूणेन्द सिंह चौहान, संयुक्त सचिव अरविंद सिंह पांगती, अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्राचार्य दून मेडिकल कॉलेज डॉ0 आशुतोष सयाना, उप निदेशक एम0सी0 पंत सहित विभागीय अधिकारी एवं विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।




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