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देहरादून,



उत्तराखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष और चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक धीरेंद्र प्रताप ने धामी कैबिनेट द्वारा राज्य आंदोलनकारियों को 10% आरक्षण दिए जाने के सवाल पर राज्यपाल से हस्ताक्षर किए जाने हेतु पुनः अनुरोध किए जाने का फैसले का स्वागत किया है।

धीरेंद्र प्रताप ने यद्यपि यह भी कहा है कि जब राज्यपाल स्वयं भारतीय जनता पार्टी की तमाम रैलियों में भाजपा के कार्यकर्ता की तरह खड़े हो रहे हैं  तो कोई इस बात का सवाल नहीं होना चाहिए  कि राज्यपाल की पार्टी की सरकार के मुखिया उन्हें 10% आरक्षण पर हस्ताक्षर करने को कहें और वह उसे नहीं माने।

धीरेंद्र प्रताप ने कहा "देर आयद दुरुस्त आयद".

 यदि अब भी चुनाव आचार संहिता लगने से पहले राज्यपाल विधेयक पर हस्ताक्षर कर देते हैं तो राज्य आंदोलनकारियों के प्रति यह सरकार की सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

धीरेंद्र प्रताप ने कहा यद्यपि 10% आरक्षण को लागू करने में भाजपा का कोई रोल नहीं था और यह सारा व्यक्तिगत प्रयास उनका (धीरेंद्र प्रताप) और मुख्यमंत्री हरीश रावत का था। अन्यथा गुजरात में तो हार्दिक पटेल ने 10 -10 लाख लोगों की रैली की लेकिन लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं दिला पाए .

उन्होंने राज्य आंदोलनकारियों से कहा कि वर्ष 2016 में गैरसैण विधान सभा सत्र में आरक्षण के इस विधेयक को पास कराने के बाद लगातार उन्होंने 6 साल की लड़ाई लड़ी और तब जाकर अब सरकार के कानों पर जूं रेंगी ।

उन्होंने राज्य आंदोलनकारी क्रांति कुकरेती और अन्य आंदोलनकारियों को भी इस सफलता पर बधाई दी और कहा कि यदि सरकार ने इस मामले में धोखा दिया तो राज्य के तमाम आंदोलनकारियों को फिर से नए संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए।

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