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 देहरादून: 

 

शिक्षक दिसव के मौके पर देहरादून में तकनीकी विश्वविद्यालय में दिव्य हिमगिरी की ओर से आयोजित टीचर ऑफ द ईयर अवार्ड से शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इनमें उत्तरकाशी जिले की रवांई घाटी के कोटी बनाल निवासी शिक्षक दिनेश रावत भी शामिल हैं। उनको शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया है। 




दिनेश रावत वह शिक्षक हैं, जो जिस भी स्कूल में जाते हैं। उस स्कूल को अपना बना लेते हैं। बच्चों को पढ़ाने के उनके तरीके ऐसे होते हैं कि बच्चे खेल-खेल में बहुत कुछ सीख जाते हैं। अपने शिक्षण कौशल से उन्होंने बच्चों को ना केवल अच्छी शिक्षा दी, बल्कि उनमें अपनी लोक संस्कृति की भी अलख जगाई। 


शिक्षक दिनेश रावत ने पिथौरागढ़ जिले के मेतली जैसे दुर्गम स्कूल में पहली बार पत्रिका प्रकाशन किया, जो करीब 15 किलोमीटर पैदल जाना पड़ता है। ऐसे स्कूल को एक आदर्श स्कूल के रूप में सबके सामने रखा, जिस स्कूल के बारे में पहले कोई जानता भी नहीं थी। लेकिन, उनके प्रयासों से प्राथमिक विद्यालय को मेतली पिथौरागढ़ जिले में तो पहचान मिली ही। साथ ही राज्यभर में मेतली प्राथमिक विद्यालय के नाम को लोगों जाना और पहचाना।


हरिद्वार जिले में स्थानांतरण के बाद भी दिनेश रावत लगातार शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रहे हैं। हरिद्वार जिले में उन्होंने कोरोना काल में बच्चों के लिए ई-कंटेंट तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कक्षावार पाठों के वीडियो बनाकर बच्चों की पढ़ाई को आसान बनाने का काम किया। 


इतना ही नहीं, शिक्षक दिनश रावत ने कोरोना के सबसे खतरनाक दौर में भी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने एक कोरोना याद्धा के रूप में काम किया। जब लोग अपने घरों में थे, दिनश रावत बच्चों को पढ़ाने के साथ ही कोरोना में रेलवे स्टेशन और बस स्टेशनों पर बाहर से आने वाले लोगों की चेकिंग और जांच में जुटे हुए थे। 


शिक्षक दिनेश रावत सामाजिक कार्यों में भी हिस्सेदारी निभाते हैं। साहित्य के क्षेत्र में एक मुकाम की ओर बढ़ रहे हैं। उनकी अब तक चार-पांच पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। उनमें कविता संग्रह और रंवाई क्षेत्र के लोक पर आधारित पुस्तकें हैं। साथ ही स्थानीय बोली-भाषा के उत्थान के लिए भी लगातार काम कर रहे हैं। 


वहीं, कई संगठन एवं संस्थाओं द्वारा साहित्यक और  सामाजिक में उल्लेखनीय योगदान हेतु सम्मानित किया गया तो दूरस्थ पिथौरागढ़ जनपद के नेपाल सीमा से सट्टे धारचूला विकास खंड के मेतली में रहते हुए शिक्षा विभाग द्वारा तीन बार विकास खंड स्तर पर मासिक उत्कृष्ठ शिक्षक के रुप में भी सम्मानित हो चुके हैं।


दिनेश रावत को राष्ट्रीय युवा पुरस्कार भी मिल चुका है। उन्होंने शिक्षा विभाग में आने से पहले लोक कला के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य किए। साथ ही स्वास्थ्य विभाग में भी सराहनीय सेवाएं दीं। युवाओं को लोक कला और थियेटर के क्षेत्र में प्रशिक्षण भी दे चुके हैं। 


उपलब्धियां

1. बच्चों के भाषाई कौशल विकसित करने और बाल रचनात्मकता व सृजन क्षमता को प्रोत्साहित करने के लिए विद्यालय की बाल पत्रिका का प्रकाशन।

2. कक्षा शिक्षण को रुचिकर बनाने के लिए शिक्षण में आईसीटी, कठपुतली कला, पाठों का नाटकीय रूपांतरण एवं गतिविधि आधारित शिक्षण भी उनकी शिक्षण विधा का अहम हिस्सा है। 

3. दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के सुविधा के लिए विद्यालय में पुस्तकालय की स्थापना कराने जैसे बेहतरीन काम किए।

4. स्वच्छता को प्रोत्साहित करने हेतु आओ संवारे खुद को।

5 विद्यालय में प्रतिवर्ष प्रवेश उत्सव एवं वार्षिक उत्सव का आयोजन।

6. सामुदायिक सहयोग से विद्यालय सौन्दर्यकरण।

7. शिक्षक की अब तक पांच मौलिक पुस्तकें एवं देशभर की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं सेकंडों आलेख प्रकाशित हो चुके हैं।

8. शिक्षक स्टेट रिसोर्स पर्सन के रूप में भी शिक्षक प्रशिक्षण, प्रशिक्षण साहित्य निर्माण में समय-समय पर प्रतिभाग करते रहें हैं।

9. समाज सेवा एवं राष्ट्रीय विकास में उल्लेखनीय योगदान हेतु शिक्षक वर्ष 2009 में भारत के महा महिम उपराष्ट्रति जी द्वारा ष्राष्ट्रीय युवा पुरूस्कारष् से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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