आज 13 अप्रैल 2021 को शिक्षा संस्थानों से संबंधित जो गाइडलाइन जारी की गई है, उसमें 2021 में बोर्ड की परीक्षा देने वाले 10वीं एवं 12वीं के छात्र छात्राओं को ही स्कूल में आने की अनुमति दी गई है. वह भी कोविड-19 के अनुसार । इसके अतिरिक्त छठी सातवीं आठवीं नौवीं और 11वीं कक्षाओं को यह अनुमति नहीं दी गई है ।परंतु यहां सरकार एक बात भूल रही है कि 2022 में जिन विद्यार्थियों की बोर्ड की परीक्षाएं हैं वह स्कूल आएंगे अथवा नहीं। उनके लिए कोई भी गाइडलाइन तय नहीं की गई है ।
यदि इन बच्चों को भी स्कूल आने की अनुमति स्कूल दे रहा है तो परिवहन की व्यवस्था क्यों नहीं कर रहा है यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है। अनेकों प्रकार के बहाने बनाकर संस्थान इस बात को टाल रहे हैं की बस की व्यवस्था किस प्रकार से की जा सकती है ।क्योंकि बच्चे बहुत कम है। बच्चे अपने परिवहन की व्यवस्था खुद करेंगे ।तब भी सवाल यह उठता है। क्या, वे बच्चे अन्य वाहनों द्वारा जैसे ऑटो,रिक्शा से आने पर संक्रमित नही होंगे।और यदि ऐसा हो जाता है तो ये जिम्मेदारी किसकी होगी?
और जो दसवीं और बारहवीं के बच्चे अपने साधन से स्कूल आ रहे हैं क्या वह उस साधन के लाइसेंस पाने के हकदार हैं? यह भी विचारणीय प्रश्न है।
अभिभावक इस प्रकार की व्यवस्था को लेकर अत्यंत परेशान है क्योंकि उनके बच्चे स्कूल से कई किमी की दूरो पर है,जहां या तो साधन नही या उनके स्वयं के पास भी साधन नही है।
जब कोरोना संक्रमण पीक पर जा रहा है तो 2022 में बोर्ड इम्तिहान देनेवाले बच्चों को भी संक्रमण के मध्य क्यों जाने दिया जा रहा है। उनको भी ऑनलाइन कक्षाएं क्यों नहीं कराई जा रही हैं कई प्राइवेट स्कूलों तक तो सरकार के आदेश तक भी नही पंहुच रहे है।
ऐसे में सरकार को 2022 में बोर्ड की परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के लिए भी कोई गाइडलाइन बनानी चाहिए और यदि बच्चों को स्कूल बुलाया जाता है तो स्कूल के तमाम स्टाफ का पहले कोरोनावायरस टेस्ट करा लेना चाहिए ताकि मां-बाप को यह रहे कि उनका बच्चा सुरक्षित स्थान पर जा रहा है।
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