Halloween party ideas 2015

 श्री राम हमारे देश की संस्कृति का आधार है, भारत भूमि के श्वास है,उनका  स्मरण  मात्र  ही हमारे सभी तापों को नष्ट कर देता है. अयोध्या की पवन भूमि पर जन्मे मर्यादा पुरुषोतम  श्री राम के जन्मदिवस को रामनवमी के रूप में देश भर में अनंत काल से मनाया जाता रहा है और मनाया जाता रहेगा. उनके विग्रह  को भूमि पर स्थान मिले या नहीं मिले, हमारे दिलों में उनका सर्वोत्तम सर्वोच्च स्थान सदा बना रहेगा. 




मुख्यमंत्री श्री तीरथ सिंह रावत ने रामनवमी के पावन पर्व की  सभी प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि  मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का जीवन हमें मर्यादा के पालन, त्याग और साहस की प्रेरणा देता है। आइये, हम भगवान श्रीराम के इन गुणों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें। रामनवमी का यह पर्व सभी आस्थापूर्वक और हर्षोल्लास से मनाएं, परंतु इस दौरान कोविड को लेकर भारत सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन अवश्य करें। सभी मास्क पहनें, नियमित रूप से हाथ धोएं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन अवश्य करें। 

ऐसे करें रामनवमी का पूजन, न भूलें हनुमान जी को 




राम नवमी के दिन स्नान कर उत्तर दिशा में मंडप बनाकर राम दरबार की मूर्ति, प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। हनुमान जी को विराजमान करें। इस दिन भगवान राम का मय पंचायतन करना चाहिए। इस मंडप में विराजमान सीता, राम, लक्ष्मण, हनुमान जी का विविध उपचारों (जल, पुष्प, गंगाजल, वस्त्र, अक्षत, कुमकुम) आदि से पूजन करना चाहिए। पूजन के बाद आरती का आयोजन करना चाहिए।

 


नौ दिन तक चलने वाला यह पर्व मां दुर्गा के नौ अलग-अलग अवतारों को समर्पित है। चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन, भक्त माँ सिद्धिदात्री को अपनी पूजा अर्पित करते हैं। 

 माँ सिद्धिदात्री निराकार आदिशक्ति की अभिव्यक्ति हैं। भगवान शिव स्वयं आदिशक्ति की पूजा करते हैं। माँ सिद्धिदात्री अपने भक्तों को आध्यात्मिक ज्ञान का आशीर्वाद देती हैं और अज्ञान को नष्ट करती हैं। माँ सिद्धिदात्री को महिलाओं के श्रृंगार की वस्तुओं के साथ चढ़ाया जाता है। भक्त उन्हें कमल का फूल, धूप, दीप और कपूर का प्रकाश अर्पित कर प्रसन्न करते हैं। उसे भोग हलवा, चने और अन्य विभिन्न खाद्य पदार्थों का लगाया जाता है।

माँ सिद्धिदात्री की कहानी

देवी कुष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान के साथ ब्रह्मांड का निर्माण किया, उन्होंने फिर एक और देवी माँ सिद्धिदात्री की रचना की। माँ सिद्धिदात्री ने अष्ट सिद्धि के साथ भगवान शिव को प्रसन्न किया, जो पूर्णता के प्राथमिक रूप थे और दस माध्यमिक रूप भी। बाकी ब्रह्मांड बनाने के लिए भगवान ब्रह्मा को एक पुरुष और एक महिला की आवश्यकता थी। उन्होंने माँ सिद्धिदात्री से प्रार्थना की, जिन्होंने भगवान शिव के शरीर के आधे हिस्से को एक महिला के शरीर में बदल दिया। इसलिए भगवान शिव को अर्धनारीश्वर के रूप में भी जाना जाता है। यह मां सिद्धिदात्री की कृपा थी, जिन्होंने भगवान ब्रह्मा को ब्रह्मांड बनाने में मदद की।

 





Post a comment

Powered by Blogger.