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देहरादून:


प्रदेश के वन एवं वन्य जीव, पर्यावरण एवं ठोस, अपशिष्ट निवारण, श्रम, सेवायोजन, प्रशिक्षण, आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री डाॅ0 हरक सिंह रावत ने विधान सभा में आयुष विभाग के अधिकारियों के साथ आयुष विभाग तथा आयुष मेडिकल कालेजों में रिक्त पदों के सापेक्ष चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों की भर्ती तथा अन्य विभागीय बिन्दुओं के बारे में समीक्षा बैठक ली। ने

उन्होंने  सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिये कि होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक तथा इनसे सम्बन्धित मेडिकल कालेजो में रिक्त पडे सभी चतुर्थ श्रेणी तथा तृतीय श्रेणी के जरूरी पदों को आउट सोर्सिग के माध्यम से तेजी से भरे जाय। इसके लिए उन्होने होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक के निदेशकों के साथ ही सम्बन्धित मेडिकल कालेजों के कुलपति को पदों को भरने हेतु अधिकृत किया गया। 

बैठक में निर्णय लिया गया कि कोविड-19 के दौरान किये गये अनुकरणीय कार्यो के लिए होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक चिकित्सको और कर्मचारियों को भी एैलोपैथिक कार्मिको की भाॅति 11 हजार रूपये का पारितोष प्रदान किया जाय। इस दौरान केन्द्र एवं राज्य में एैलोपैथिक चिकित्सकों की भाॅति आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक चिकित्सकों को भी 4, 9, 13 एवं 20 वर्ष की सेवाओं पर डायानामिक एश्योर्ड कैरियर प्रोमोशन (डीएसीपी) के संदर्भ में भी सकारात्मक पहल की गई। 

मा0 मंत्री ने राजकीय यूनानी मेडिकल कालेज पिरान कलियर के निर्माण के सम्बन्ध में प्रस्तावित धनराशि को जारी करने के लिए अग्रिम व यथोचित कार्यवाही किये जाने के निर्देश अधिकारियों को  दिये तथा मोहनपुर हरिद्वार एवं राजभवन में संचालित आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक चिकित्सालयों में पदों के सृजन हेतु होमवर्क करने के भी निर्देश दिये। 

 इस अवसर पर सचिव डी सैन्थिल पाण्डियन, उत्तराखण्ड आयुर्वेद वि.वि. के कुलपति प्रो0 डाॅ0 एस. के. जोशी, कुल सचिव एस.के चैबे, निदेशक आयुर्वेदिक, डाॅ. एम.पी सिंह व निदेशक होम्योपैथिक डाॅ. ए बी भटट, उप निदेशक डाॅ. कमलजीत सिंह सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे।



स्थायी लोक अदालत में आज अध्यक्ष स्थायी लोक अदालत राजीव कुमार एवं सदस्य मंजु श्री सकलानी, उपेन्द्र सिंह की उपस्थिति में वादी उमेश, प्रतिवादी दि आॅरियण्टल इंश्योरेंस कम्पनी लि0 तथा वादी श्रीमती प्रेमलता एवं प्रतिवादी एच.डी.एफ.सी. एग्रो जनरल इंश्योरेंस कम्पनी लि0 व अन्य के वाद पर फैसला सुनाया। 

स्थायी लोक अदालत ने उपरोक्त दोनों वादों में वादियों तथा प्रतिवादियों का पक्षों को  सुनने के उपरान्त महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। अदालत ने माना कि दोनों वादों में विपक्षी ने गलत तथ्यों के आधार पर वादी का क्लेम खारिज कर दिया था। 

उन्होंने उपरोक्त वादों में प्रतिवादि कम्पनी दि ओरियेन्टल इंश्योरेंश लि0 तथा एचडीएफसी विपक्षी इंश्योरेंस कम्पनी को मुआवजा धनराशि एवं वाद व्यय तथा मानसिक व शारीरिक संवेदना हेतु 30 दिन के अन्दर निर्धारित मुआवजा भुगतान करने के आदेश दिए। 


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