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आज जौली ग्रांट एयरपोर्ट पर कई एनजीओ और कई आम नागरिक देहरादून जौली ग्रांट एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिए 10,000 पेड़ों को बचाने के लिए आगे आए । जौली ग्रांट एयरपोर्ट पर दृष्टिकोण समिति, हिमालय पुत्र, ए एस के ग्रुप, मिट्टी फाउंडेशन, एचएसआई, मैड फाउंडेशन, एफ एफ आई संगठन एवं अन्य एनजीओ और आम नागरिकों ने पेड़ों को बचाने के लिए हुमन चैन बनाई और पेड़ो को रक्षा सूत्र बांधा गया । आज सुबह से ही जौली ग्रांट एयरपोर्ट पर भीड़ जुटने शुरू हो गई थी। दृष्टिकोण समिति के अध्यक्ष मोहित उनियाल ने कहा कि आज हमारी प्रकृति खतरे में है ।  जॉली ग्रांट एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए दस हज़ार पेडों को काटने की तैयारी की जा रही है जो दुर्भाग्यपूर्ण है । 

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, इंदिरा पर्यावरण भवन में आगंतुकों का अभिनंदन करते हुए लिखा है - "प्रकृति रक्षति रक्षिता:" जिसका मतलब है प्रकृति से सुरक्षा पाते रहने के लिए उसका संरक्षण करना जरूरी है ।

‘प्रकृति रक्षा करती है, अगर वह संरक्षित है’ । 

मगर आज ‘‘पर्यावरण से ज्यादा महत्व पैसे को’’, ‘‘पारदर्शिता से ज्यादा महत्व मुनाफाखोरी को’’ और ‘‘संरक्षण से ज्यादा महत्व लाभ कमाने’’ को दिया है । जिस दिन भी जौली ग्रांट एयरपोर्ट के एक पेड़ पर भी आरी चली तो उस पेड़ से पहले हमारे ऊपर सरकार को आरि लानी पड़ेगी।

मेंड एनजीओ से करण कपूर ने बताया कि एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए पूर्व में भी वन के बड़े हिस्से को खत्म किया गया है और अब वन विभाग द्वारा शिवालिक एलीफैंट रिज़र्व के 215 एकड़ वन भूमि के हस्तांतरण का प्रस्ताव तैयार किया है । प्रस्ताव के मुताबिक इसमें कुल 9745 पेड़ कटेंगे जिसमे खैर,शीशम,सागौन, गुलमोहर व कई अन्य प्रजाति के पेड़ काटने का प्रस्ताव भेजा गया है ।

पर्यावरण प्रेमी विनोद बगियाल ने कहा की पेड़ो के कटान से वन में मौजूद हाथी,गुलदार,चीतल,सांभर व अन्य वन्य जीवों के भविष्य के लिए बड़ा खतरा पैदा होगा । 

यही नही एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए दी जाने वाली जमीन राजाजी नेशनल पार्क के इको सेंसेटिव जोन के 10 किमी के दायरे में पड़ती है और इसके 3 किमी के दायरे में एलीफैंट कॉरिडोर है । इतनी भारी संख्या में पेड़ो के कटने से डोईवाला व देहरादून क्षेत्र के मौसम में भारी बदलाव होगा जिससे बड़ी मुश्किल पैदा हो सकती है ।

उनियाल ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है । अगर सरकार अथवा बड़े उद्योगपतियों द्वारा कहीं भी किसी बड़े प्रोजेक्ट की तैयारी की जाती है तो क्षेत्रीय जनता व जन प्रतिनिधियों की राय ली जाती है व उन्हें आपत्ति का समय दिया जाता है, मगर एयरपोर्ट के लिए 215 एकड वन व आवासीय भूमि हस्तांतरण करने से पहले क्षेत्र की जनता से राय नही ली गई जो आम नागरिक के संवैधानिक अधिकारों का हनन है । सरकार को कोई भी बड़ा कदम लेने से पहले एक बार फिर सोचना चाहिये ।

केंद्र सरकार द्वारा पर्यावरण को कमजोर करने के लिए पहले ही पर्यावरण प्रभाव आंकलन अधिसूचना लाई गई है जिसके खिलाफ पूरे देश मे विरोध किया जा रहा है ।

आयुष जोशी ने कहा कि थानों वन क्षेत्र में पेड़ों के कटान का पुरजोर विरोध दर्ज किया जाएगा । इस आंदोलन में देहरादून ही नहीं देश के अलग-अलग राज्यों से संगठन और आम नागरिक भी जुड़ रहे हैं हमारा उत्तराखंड पेड़ों जंगल प्रकृति के नाम से भी पहचाना जाता है और आज सरकार इस प्रकृति को इस जंगल को काटने जा रही है

प्रतीक बहुगुणा ने कहा कि जब लोग उत्तराखंड में प्रवेश करते हैं और उनको जंगल दिखता हैं तो वह समझ जाते हैं कि हम उत्तराखंड प्रदेश में प्रवेश कर चुके हैं मगर सरकार लगातार उत्तराखंड के पेड़ काट दी जा रही है ऑल वेदर रोड में कई हजार पेड़ काट दिए गए हैं और अब एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए 10000 काटने की तैयारी कर रहा है धीरे धीरे उत्तराखंड में सारे पेड़ और जंगल काट दिए जाएंगे तब उत्तराखंड दिल्ली और मुंबई से ज्यादा प्रदूषित हो जाएगा।

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