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 सहकारिता, उच्च शिक्षा, दुग्ध विकास एवं प्रोटोकाॅल (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री डाॅ धन सिंह रावत ने आज विधानसभा स्थित सभा कक्ष में राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना उत्तराखंड की समीक्षा बैठक की। इस दौरान अपर निबंधक सहकारिता एवं राज्य समेकित सहकाारी विकास परियोजना के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आनंद शुक्ला ने पावर प्वाइंट के माध्यम से परियोजना की प्रगति पर प्रेजेंटेशन दिया। बैठक में सहकारिता मंत्री डाॅ धन सिंह रावत ने परियोजना से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर अधिकारियों से विस्तारपूर्वक चर्चा की। परियोजना की समीक्षा करते हुए डाॅ रावत ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को तत्काल धरातल पर उतारने के लिए अधिकारियों को त्वरित कार्रवाही के निर्देश दिये। ताकि अधिक से अधिक लोग इस महत्वकांक्षी परियोजना का लाभ उठा सके। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से प्रदेश में 55 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होगा और लगभग 60 लाख लोग लाभान्वित होंगे।

बैठक में सहकारिता मंत्री डाॅ धन सिंह रावत ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘संकल्प से सिद्धि’ एवं वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने हेतु प्रदेश में ‘राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना’ तैयार की गई है। जिसका 14 फरवरी 2019 को प्रधानमंत्री नरेेन्द्र मोदी  द्वारा विधिवत् शुभारम्भ किया गया। इस महत्वकांक्षी परियोजना का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश की सहकारिताओं का सर्वांगीण विकास, ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से हो रहे पलायन को रोकना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन एवं कृषकों के जीवन स्तर में सुधार करना है। उन्हांेने कहा कि इसके लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम द्वारा 3340 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है।

सहकारिता मंत्री डाॅ रावत ने बताया कि राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना के जरिये स्वरोजगार को बढ़वा देकर लोगों को आत्मनिर्भर बनाया जायेगा। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत दस क्षेत्रों पर फोकस किया जायेगा। जिसमें दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन, भेड़-बकरी पालन, कृषि और कृषि उत्पाद, फूड प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन, विपणन, माॅर्डन बैंकिंग व सहकारी बैंक, सहकारिता एवं होम स्टे शामिल है। उन्होनेे कहा कि प्रथम चरण में काॅपरेटिव सेक्टर, भेड़-बकरी पालन, मत्स्य पालन और डेरी के लिए 100 करोड़ रूपये स्वीकृत कर दिये हैं।
बैठक में परियोजना से संबंधित बिंदुओं पर चर्चा करते हुए डाॅ रावत ने कहा कि इस योजना के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में छोटी-छोटी कृषि जोत में सहकारी सामूहिक खेती की जायेगी जिसमें आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जायेगा। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों को ‘खेतों से लेकर बाजार तक’ सुरक्षित पहुंचाने के लिए विपणन सहाकरी समितियों को सुदृढ़ किया जायेगा। वहीं उन्होंने कोल्ड चेन विकसित करने, डेरी फार्म की स्थापना करने सहित भेड-बकरी और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस योजना से 55 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होगा जबकि 60 लाख लोग लाभान्वित होंगे।

वहीं बैठक में सहकारिता सचिव डाॅ आर मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना के कार्यों की प्रगति को लेकर प्रत्येक माह में समीक्षा बैठक की जायेगी। ताकि इस महत्वकांक्षी परियोजना को जल्द से जल्द धरातल पर उतार कर प्रदेशवासियों को लाभान्वित किया जा सके।

बैठक में सचिव सहकारिता डाॅ. आर मीनाक्षी सुंदरम, निबंधक सहकारिता बी.एम. मिश्र, संयुक्त निदेशक डेरी विकास जयदीप अरोड़ा, निबंधक सहकारिता रामेंद्री मंद्रवाल, अपर निबंधक एवं राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना के निदेशक आनंद शुक्ला,  डिप्टी रजिस्ट्रार एम.पी. त्रिपाठी सहित दुग्ध, एवं सहकारिता विभाग के कई अधिकारी उपस्थित रहे।


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