डोईवाला;
जहां कोरोनावायरस के कहर के चलते सभी प्रकार के ट्रांसपोर्ट बंद हैं कर्फ्यू जैसा माहौल है लोग अपने घरों में कैद हैं वही आज ई वाला रेलवे स्टेशन से पहले कुछ मजदूर अपना सामान लेकर अपने घर उत्तर प्रदेश लखीमपुर खीरी की ओर जाते हुए नजर आए ।
इन सात मजदूरों से जब हमारे रिपोर्टर ने पूछा तो उन्होंने बताया कि यह उत्तर प्रदेश लखीमपुर खीरी के रहने वाले हैं और पिछले 10 दिन से नांगल ज्वालापुर में एक ठेकेदार के यहां काम कर रहे हैं। आज उनके ठेकेदार ने उन्हें वहां से निकाल दिया है और उनकी मजदूरी का पैसा भी नहीं दिया है ।नांगल ज्वालापुर से डोईवाला लगभग 8 से 10 किलोमीटर दूर है वहां से यह लोग बिना साधन के पैदल ही डोईवाला पहुं। जहां रेलवे स्टेशन पर हमारे पत्रकार द्वारा इनसे पूछे जाने पर इन्होंने अपना हाल बताया वे भूखे हैं उन्हें खाना नहीं मिला है।
उनके पास पैसे भी नहीं है हैं और वह पुलिस से मिलकर इस समस्या का हल चाहते हैं या तो अपने घर जाना चाहते हैं या वे चाहते हैं कि उनके लिए यहां रहने की खाने की व्यवस्था हो जाए ।
इतना तक कि कर्फ्यू लगा है इस बाबत थानाध्यक्ष से हमने बात की जिन्होंने बताया कि इन मजदूरों का शीघ्र ही समस्या का समाधान किया जाएगा। सवाल यह उठता है कि इस माहौल में कोरोना के दूसरे स्तर के दौरान ,क्या लोगों की इंसानियत मर गई है ।क्या ,इनको रखने वाले ठेकेदार को यह नहीं सोचना चाहिए कि यह मजदूर इस समय बिना किसी साधन के कहां जाएंगे।
प्रशिक्षु आईएएस अपूर्वा पांडे मौके पर पहुंची और उन्होंने संबंधित ठेकेदार को निर्देश दिए की लॉक डाउन की स्थिति तक वह इन मजदूरों को अपने यहां रखें और इनके खाने पीने की व्यवस्था भी करें साथ ही उन्होंने मीडिया के लोगों का धन्यवाद दिया कि उनके द्वारा इस प्रकार पैनी नजर रखना और शासन प्रशासन को सूचित करना सराहनीय है।
जहां कोरोनावायरस के कहर के चलते सभी प्रकार के ट्रांसपोर्ट बंद हैं कर्फ्यू जैसा माहौल है लोग अपने घरों में कैद हैं वही आज ई वाला रेलवे स्टेशन से पहले कुछ मजदूर अपना सामान लेकर अपने घर उत्तर प्रदेश लखीमपुर खीरी की ओर जाते हुए नजर आए ।
इन सात मजदूरों से जब हमारे रिपोर्टर ने पूछा तो उन्होंने बताया कि यह उत्तर प्रदेश लखीमपुर खीरी के रहने वाले हैं और पिछले 10 दिन से नांगल ज्वालापुर में एक ठेकेदार के यहां काम कर रहे हैं। आज उनके ठेकेदार ने उन्हें वहां से निकाल दिया है और उनकी मजदूरी का पैसा भी नहीं दिया है ।नांगल ज्वालापुर से डोईवाला लगभग 8 से 10 किलोमीटर दूर है वहां से यह लोग बिना साधन के पैदल ही डोईवाला पहुं। जहां रेलवे स्टेशन पर हमारे पत्रकार द्वारा इनसे पूछे जाने पर इन्होंने अपना हाल बताया वे भूखे हैं उन्हें खाना नहीं मिला है।
उनके पास पैसे भी नहीं है हैं और वह पुलिस से मिलकर इस समस्या का हल चाहते हैं या तो अपने घर जाना चाहते हैं या वे चाहते हैं कि उनके लिए यहां रहने की खाने की व्यवस्था हो जाए ।
इतना तक कि कर्फ्यू लगा है इस बाबत थानाध्यक्ष से हमने बात की जिन्होंने बताया कि इन मजदूरों का शीघ्र ही समस्या का समाधान किया जाएगा। सवाल यह उठता है कि इस माहौल में कोरोना के दूसरे स्तर के दौरान ,क्या लोगों की इंसानियत मर गई है ।क्या ,इनको रखने वाले ठेकेदार को यह नहीं सोचना चाहिए कि यह मजदूर इस समय बिना किसी साधन के कहां जाएंगे।
प्रशिक्षु आईएएस अपूर्वा पांडे मौके पर पहुंची और उन्होंने संबंधित ठेकेदार को निर्देश दिए की लॉक डाउन की स्थिति तक वह इन मजदूरों को अपने यहां रखें और इनके खाने पीने की व्यवस्था भी करें साथ ही उन्होंने मीडिया के लोगों का धन्यवाद दिया कि उनके द्वारा इस प्रकार पैनी नजर रखना और शासन प्रशासन को सूचित करना सराहनीय है।
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