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  रुद्रप्रयाग:

 पिछले चालीस दिनों से अपनी छः सूत्रीय मांगों को लेकर आन्दोलनररत आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का गुुस्सा अब उग्र लगा लगा  है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के इस आन्दोलन पर सरकार की चुप्पी अब इतनी चुभने  लगी है कि महिलाओं का अब तक का शांत आन्दोलन सड़कों पर फूटने वाला है।
 महिलाओं का आक्रोश दिन-प्रतिदिन उग्र होता जा रहा है। जिन महिला आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के भरोसे भविष्य के कर्णधारों की नींव रखने का जिम्मा है, वे पिछले चालीस दिनों से अपने अधिकारों के लिए आन्दोलन कर रही  हैं।

रूद्रप्रयाग जनपद के तीनों विकासखण्डों में पिछले चालीस दिनों से आँगनबाड़ी व मिनी आँगनबाड़ी कार्यकत्रियांँ सम्मानजनक मासिक वेतन समेत छः सूत्रीय मांगों को लेकर कार्यबहिष्कार पर हैं। आँगनबाड़ी सेविकाओं का साफ तौर पर कहना है कि जितना कार्य उनसे करवाया जा रहा है उसके हिसाब से उनका मानदेय एक दैनिक मजदूरी करने वाले से भी तीन गुना कम है। जिस देश और प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातें होती हो वहां महिलाओं के साथ ऐसा भेदभाव सरकार की कथनी और करनी को स्पष्ट दर्शाती है।

दरअसल आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के इस आन्दोलन को सत्तापक्ष को छोड़कर जनपद के सभी सामाजिक,राजनीतिक संगठनों द्वारा समर्थन दिया जा रहा है। हालांकि रूद्रप्रयाग के दोनों विधायकों द्वारा इन सेविकाओं के आन्दोलन को अब तक नजरअंदाज किया गया है। जनप्रतिनिधियो ंकी इस उदासीनता को लेकर भी आगनबाड़ी कार्यकत्रियां आक्रोशित हैं। सेविकाओं का साफ तौर पर कहना है कि अगर इस बीच उनकी मांगे नहीं सुनी जाती है तो वे आने वाले 27 जनवरी को रूद्रप्रयाग की सड़कों पर महारैली निकालकर आक्रोश व्यक्त करेंगे।

दरअसल आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के इस आन्दोलन को सत्तापक्ष को छोड़कर जनपद के सभी सामाजिक,राजनीतिक संगठनों द्वारा समर्थन दिया जा रहा है। हालांकि रूद्रप्रयाग के दोनों विधायकों द्वारा इन सेविकाओं के आन्दोलन को अब तक नजरअंदाज किया गया है। जनप्रतिनिधियो ंकी इस उदासीनता को लेकर भी आगनबाड़ी कार्यकत्रियां आक्रोशित हैं। सेविकाओं का साफ तौर पर कहना है कि अगर इस बीच उनकी मांगे नहीं सुनी जाती है तो वे आने वाले 27 जनवरी को रूद्रप्रयाग की सड़कों पर महारैली निकालकर आक्रोश व्यक्त करेंगे।

 आपकोे बताते चले कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वाररा छ वर्ष के बच्चों को स्कूल से पूर्व व्यावहारिक ज्ञान की तालिम देना है। 7 माह से 3 वर्ष के बच्चों को पूरक पोषाहार देना, उनके मासिक वजन की रिपोर्ट बनाना, कुपोषित बच्चों की देखभाल करने के आलावा गर्भवतीमहिलाओं की देखभाल करना है। इसके लिए उन्हें मासिक मानदेय के रूप में छ हजार रूपया दिया जाता है। लेकिन जिला प्रशासन से लेकर सरकार की कई अन्य योजनाओं  और कार्यों का सम्पादन भी इन्हीं कार्यकत्रियों के जिम्मा सौंपा गया है। टीकाकरण में भागीदारी, पल्स पोलियों का कार्य, मुख्यनिर्वाचन का कार्य, जनगणना, पशु गणना, पचायती चुनावों में ड्यूटी, कुपोषणको हटाने सहित कई अन्य कार्य इन्हीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा किए जा रहे हैं।

आपकोे बताते चले कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा छ वर्ष के बच्चों को स्कूल से पूर्व व्यावहारिक ज्ञान की तालिम देना है। 7 माह से 3 वर्ष के बच्चों को पूरक पोषाहार देना, उनके मासिक वजन की रिपोर्ट बनाना, कुपोषित बच्चों की देखभाल करने के आलावा गर्भवतीमहिलाओं की देखभाल करना है। इसके लिए उन्हें मासिक मानदेय के रूप में छ हजार रूपया दिया जाता है। लेकिन जिला प्रशासन से लेकर सरकार की कई अन्य योजनाओं  और कार्यों का सम्पादन भी इन्हीं कार्यकत्रियों के जिम्मा सौंपा गया है। टीकाकरण में भागीदारी, पल्स पोलियों का कार्य, मुख्यनिर्वाचन का कार्य, जनगणना, पशु गणना, पचायती चुनावों में ड्यूटी, कुपोषणको हटाने सहित कई अन्य कार्य इन्हीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा किए जा रहे हैं। ऐसे में साफ है कि जितना ज्यादा काम इनके कंधों पर है उसका वाजिब दाम इन्हें नहीं दिया जा रहा है।   आँगनबाड़ी कार्यकत्रियों के हड़ताल पर जाने से ये सारी व्यवस्थाएं पटरी से उतरती हुई नजर आ रही है।

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