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रुद्रप्रयाग:

भूपेंद्र   भण्डारी



उत्तराखंड में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थिति यूँ तो किसी से छिपी नहीं है खास तौर पर पहाड़ों के विद्यालयों की और भी दयनीय स्थिति है लेकिन रूद्रप्रयाग जनपद मुख्यालय के नजदीक प्राथमिक विद्यालय उत्यासू बेहतर शिक्षा के लिए नजीर पेश कर रहा है। 
 
वास्तव में सरकारी शिक्षा व्यवस्था के प्रति आपके मन में जो धारण बनी है वह बिल्कुल बदल जायेगी। ये तस्वीर किसी प्राईवेट काॅनवंेट स्कूल की नहीं बल्कि रूद्रप्रयाग मुख्यालय के नजदीक प्राथमिक विद्यालय उत्यासू की हैं, जहां तैनात प्रमिला भण्डारी और उनकी सहायिका शिखा रावत के समर्पण भाव, मेहनत लग्न की बदौलत यह विद्यालय न केवल गुणात्मक शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों का भविष्य सँवार रहा है। बल्कि बच्चों को व्यावहारिक ज्ञान की तालिम भी दे रहा है। अमूमन सरकारी विद्यालयों की बदहाल शिक्षा स्थिति से अभिभावक भी खिन्न रहते हैं लेकिन इस विद्यालय में प्राईवेट स्कूलों के बच्चे भी दाखिला ले रहे हैं। हर वर्ष यहां विद्यार्थीयों की संख्या बढ़ रही है।


 प्राथमिक विद्यालय उत्यासू में बेहतर शैक्षणिक माहौल के साथ साथ बच्चों को पर्यावरणीय शिक्षा, खेल-कूद और क्रियात्माक शिक्षा भी दी जा रही है। रूखे रेगिस्तान जैसी जमीन पर स्थिति इस विद्यालय परिसर में रंगबिरंगे फूल, बच्चों और अध्यापकों द्वारा विद्यालय में लगाये गए विभिन्न प्रकार के फल-फूलों के पेड़ पौधों से ऐसी हरियाली फैली है कि यहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति प्रभावित हो जाता है। यहीं नहीं प्रशिसु आध्यापक भी विद्यालयी ज्ञान लेने के लिए इसी विद्यालय को चुनते हैं।

पिछले 18 वर्षों से इस विद्यालय में प्रमिला भण्डारी अपनी सेवाआएं दे रही हैं। शुरूआती दिनों में विद्यालय की काफी दीन-हीन स्थिति थी। जर्जर भवन में छात्र-छात्राएं पढ़ने को मजबूर थे और शैक्षणिक व्यवस्थाओं के भारी अभाव के कारण बच्चों का भविष्य भी अंधकारमय बना हुआ था, लेकिन पहले प्रमिला भण्डारी  और फिर वर्ष 2011 में उनके साथ उनकी सहायिका शिखा रावत द्वारा समर्पण भाव और मेहनत की बदौलत उन्होंने न केवल विद्यालय प्रबन्धन समिति से यहां विद्यालय का नया भवन निर्मित करवाया बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में बच्चों को बेहतर शिक्षा का माहौल भी तैयार किया हैं। जिससे यहां बच्चों को प्राईवेट स्कूलों जैसी गुणात्मक शिक्षा मिल रही है। यहां तैनात अध्यापिकाएं विद्यालय समय से एक घंटे पूर्व और छूटी के एक घंटे बाद तक विद्यालय के कार्य करती है। जबकि विद्यालय के कई कार्य घर पर भी करती हैं। वर्ष 2009 में उन्होंने अपने संसाधनों से विद्यालय में फर्नीचर उपलब्ध किए। इसी को देखते हुए पिछले वर्ष प्रमिला भण्डारी को उनके विशिष्ठ कार्यों के लिए जिलाधिकारी द्वारा सम्मानित भी किया गया।

 प्राथमिक विद्यालय उत्यासू में तैनात शिक्षिकाओं जैसी जिम्मेदारी अगर सूबे के हर शिक्षक समझते तो शायद आज पहाड़ के सैकड़ों विद्यालय बंदी के कगार पर न होते। अब जरूरत है तो ऐसी ही नजीर पेश करने की।


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