Halloween party ideas 2015

 विरासत में आज ---






छोलिया नृत्य, कुमाऊँ

हज़ार साल पुराने इस नृत्य की उत्पत्ति ख़ासिया साम्राज्य में हुआ। यह नृत्य दसवीं शताब्दी से प्रचलन में है जब विवाह तलवारों की नोक पर हुआ करते थे।
बाद में यह नृत्य राजपूत घरानों में प्रचलन में रहा। पुरानी परंपराओं को जीवित रखते हुए, इस नृत्य में राजपूत लोग विवाह के समय अपने यह से दुल्हन के घर तक नाचते हुए जाते हैं और यह विशेष रूप से पुरुषों द्वारा संचालित किया जाता है। यह नृत्य तलवारों और ढालो के साथ जोड़ी में किया जाता है।

विश्वमोहन भट्ट और सलिल भट्ट 

शुभारंभ के बाद आज की विशेष प्रस्तुति में ग्रैमी अवार्ड से सम्मानित एवं मोहन वीणा के निर्माता विश्व मोहन भट्ट एवं उनके पुत्र सलिल भट्ट ने अपनी मोहन वीणा की जुगलबंदी से दर्शकों का मन मोह लिया । मोहन वीणा की ऐसी जुगलबंदी देहरादून वासियों के लिए ऐसा पहला अवसर रहा। विश्व मोहन भट्ट जी पूरी दुनिया को पहले ही अपनी शैली का दीवाना बना चुके हैं ।

  विश्व मोहन भट्ट  ने पश्चिमी हवाईयन गिटार के अपने सफल संयोजन द्वारा सितार , सरोद और वीणा तकनीकों से अपने सम्पूर्ण आत्मसात के द्वारा अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया है। एक सुविकसित डिज़ाइन देकर एवं 14 अतिरिक्त तार जोड़कर विश्व मोहन जी ने मोहन वीणा को एक विशेष प्रकार से बनाया है । प्रभावशाली गति और दोषरहित लय के साथ,  भट्ट निस्संदेह दुनिया में सबसे अधिक और महान स्लाइड प्लेयर में से एक है।

श्री  विश्व मोहन , ने संयुक्त राज्य, अमेरिका, यूएसएसआर, कनाडा, ग्रेट ब्रिटेन, जर्मनी, स्पेन, फ्रांस, इटली, नीदरलैंड, स्कॉटलैंड, स्विट्जरलैंड, डेनमार्क, दुबई, अल-शारजाह, बहरीन, मस्कट, अबू धाबी आदि एवं पूरे भारत में प्रदर्शन किया है


श्री  विश्व मोहन भट्ट  के पुत्र एवं सात्विक वीणा के निर्माता सलिल भट्ट ने सात्विक वीणा को पूरी तरीके से लकड़ी से बनाया है । जिसका आकार गिटार से मिलता जुलता है । लकड़ी से बने होने के कारण सात्विक वीणा का स्वर भारी हो जाता है और यही इस सात्विक वीणा की विशेषता है। सलिल भट्ट को 'स्लाइड टू फ्रीडम के लिए कनाडा के संगीत के सबसे प्रसिद्ध अवार्ड “जूनो अवार्ड” से भी सम्मानित किया गया है।
इस एल्बम में सलिल ने हम कनाडियन ब्लूज लीजेंड डॉग कॉक्स के साथ मिलकर ब्लूज संगीत एवं भारतीय संगीत का समायोजन दर्शाया है।

कार्यक्रम की शुरुआत खुद पंडित जी द्वारा रचित विश्वरंजिनी नामक नए राग से करेंगे। यह कर्नाटिक और हिंदुस्तानी संगीत का एक संयोजन है जो की पंडित जी ने खुद बनाया है। यह संदेश देता है कि संगीत क्षेत्र में भेदभाव नहीं किया जा सकता।
इसके बाद वह अपने ग्रैमी विजेता एल्बम से अपनी रचना 'ए मीटिंग बाय द रिवर' बजाया। फिर सलिल भट्ट भोपाली पहाड़ी में धुन बजाई । इसके बाद वे वैष्णव जन, गांधीजी के पसंदीदा भजन और वन्दे मातरम की प्रस्तुति भी दी ।

12 अक्टूबर के  कार्यक्रम  :

स्थान:   डॉ. बी.आर अम्बेडकर स्टेडियम, कौलागढ़, देहरादून

6PM: उत्तराखंड से झोड़ा और चंचरी
7PM: गरिमा आर्य चतुरलाल द्वारा कथक
8PM: कानपुर से शाहिद नियाज़ी और सामी नियाज़ी द्वारा कव्वाली

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