Halloween party ideas 2015


                                                                                                                                                                                            अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में डिपार्टमेंट ऑफ ट्रॉमा सर्जरी की ओर ट्रॉमा केयर विषय पर आयोजित पांचवीं एटीएलएस व चौथी एटीसीएन नेशनल वर्कशॉप में विषय विशेषज्ञों ने प्रतिभागी चिकित्सकों को दुर्घटना में बुजुर्ग व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं व आग से झुलसे मरीजों के उपचार संबंधी जानकारियां दी। ऐसे मौके पर इलाज में बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों से प्रतिभागियों को विस्तारपूर्वक अवगत कराया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने दुर्घटना में दुपहिया वाहन सवारों के गंभीर चोटिल होने व सिर की चोट से होने वाली मौतों के ग्राफ को कम करने के लिए हेलमेट के उपयोग को नितांत जरुरी बताया।                                                                                                                              कार्यशाला में एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में प्राकृतिक आपदाओं, वाहनों में तकनीकि खराबी व मानवीय लापरवाही से होने वाली दुर्घटनाएं आम बात है। ऐसी स्थिति में राज्य में कार्यरत चिकित्सकों व नर्सिंग कर्मचारियों का ट्रॉमा केयर में दक्ष होना नितांत आवश्यक है। निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने बताया कि इसी के मद्देनजर दिल्ली एम्स के बाद ऋषिकेश एम्स में भी एटीएलएस व एटीसीएन प्रशिक्षण कोर्स को अनिवार्य कर दिया गया है, जिसमें दुर्घटनाओं में सिर की गंभीर चोट,स्पाइन इंजरी, प्रेगनेंसी ट्रॉमा आदि विषयों के कौशल प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है।                                                                                                                                                           निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत ने बताया कि आपदाओं व बड़ी दुर्घटनाओं की स्थिति से निपटने के लिए ऋषिकेश एम्स चिकित्सकीय तौर पर पूरी तरह से तैयार व बचनबद्ध है। कार्यशाला में दक्षिण भारत के कोजीकोड केरला के एस्टर अस्पताल से आए डा.राधीश नम्भियार ने दुर्घटना में घायल गंभीर मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करते वक्त रखी जाने वाली आवश्यक सावधानियों और मरीज को भेजने व रिसीव करने वाले चिकित्सक की जिम्मेदारी, उनके मध्य पारस्परिक संवाद स्थापित करने पर जोर दिया, जिससे मरीज के उपचार में होने वाली किसी भी प्रकार की चूक से बचा जा सके।                                                                                                                                                                                       उन्होंने बताया कि दुर्घटना में सिर पर लगने वाली गंभीर चोटों की वजह से ज्यादातर होने वाली मौतों को कम किया जा सकता है। डा. नाम्भियार ने बताया कि देश में अधिकांश दुर्घटनाओं में बिना हेलमेट के दुपहिया वाहन चलाने वाले सवार सिर की गंभीर चोट से ग्रस्त हो जाते हैं। कईदफा ऐसे मरीज ठीक तो हो जाते हैं, मगर अधिकांश हैड इंजरी के शिकार रोगी के उपचार से पड़ने वाले आर्थिक बोझ से परिवार, सोसाइटी पर भारी पड़ने लगते हैं। ऐसे मरीजों की देखरेख में परिवार के एक से अधिक सदस्यों को जुटना पड़ता है। लिहाजा कुछ सावधानियों व नियमों का पालन करने से ऐसी गंभीर स्थितियों से बचा जा सकता है।                                                                                                                                                               कार्यशाला में एटीएलएस विशेषज्ञ एस्टर हास्पिटल के डा.राधीश नाम्बियार, एम्स ऋषिकेश के डा.सौरभ वार्ष्णेय, डा. मनु मल्होत्रा,डा.अमूल्य रतन, डा.मधुर उनियाल ने ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट पर व्याख्यानमाला प्रस्तुत की। कार्यशाला के आयोजन में ट्राॅमा सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद कमर आजम,प्रो.सुरेश कुमार शर्मा,मेडिकल एजुकेशन विभागाध्यक्ष प्रो. शालिनी राव, डा. अमूल्य रतन, नर्सिंग की ओर से डा. राजेश कुमार व महात्मा गांधी हास्पिटल जयपुर की एनिट जॉर्ज ने अहम भूमिका निभाई।

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