रुद्रप्रयाग:
भूपेंद्र भण्डारी
आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील माना जाने वाले रुद्रप्रयाग जिले में 2013 आपदा के बाद जिंदगी पटरी पर लौटने पर बड़े-बड़े दावे किए जाते हों, इस दावों में कई सावन यू ही बीत गये लेकिन आज भी जिले में 23 गांव के 472 परिवार विस्थापन की आस में खौफ केसाये में जीने को मजबूर हैं,
रिपोर्ट देखिए-
लगभग 7 दशकों से बद्रीनाथ-केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग नासूर बने सिरोबगढ़ लेड स्लाइडिंग जोन के ठीक ऊपर बसे खांकरा ग्रामपंचायत का छांतीखाल गांव के लोग हर सावन में किसी अनहोनी दशहत के सांये मे जीने को मजबूर है, सिरोबगढ मेें हर दिन भूस्खलन होता है और उसके ठीक 140 मीटर ऊपर बसे छांतीखाल गांव की जमीन व मकान धीरे-धीरे खण्डर बनते जा रहे हैं।
रूद्रप्रयाग के खांकरा ग्रामपंचायत का छांतीखाल गांव में 16 परिवारों का विस्थापन होना था, जिनमें से अबतक मात्र 4 परिवारों का ही विस्थापन हो पाया, लेकिन कई दशकों से विस्थापन की मांग कर रहे ग्रामीणों के आरोप है कि जो लोग खतरे की जद में ज्यादा है और लेडस्लाइडिंग जोन के सबसे नजदीक है उनको दरकिनार कर सिपारिश लगाने वाले लोगों का विस्थापन कर दिया गया, और जिनके मकान खण्डर हो गये या होने वाले हैं ।वो आज भी विस्थापन की मांग कर थक चुके हैं।
अब पूरे जिले की बात करें तो आपदा प्रभावित रुद्रप्रयाग जिले के 23 गांवों के 472 परिवारों का विस्थापन लंबे से अधर में लटका हुआ है, जिला प्रशासन ने इन गांवों का भूगर्भीय सर्वेक्षण करवाकर विस्थापन की रिपोर्ट शासन को भेजी हुई है, रुद्रप्रयाग जिले में जखोली के 3 गांव के 192 परिवार, उखीमठ के 17 गाँवों के 248 परिवार, वही रुद्रप्रयाग के 3 गांव के 32 परिवारों का विस्थापन होना प्रस्तावित है, इन सभी 472 परिवारों के विस्तापन में 16 करोड़ 52 लाख रुपये खर्च होने थे, जिसमे प्रत्येक विस्तापित परिवार को 3.5 लाख रुपये मिलने थे इसके साथ ही विस्थापित होंने वाली नई जगहों पर मूलभूत सुविधाओं को विकसित करने के भी वादे किए गए थे, विस्थापित होने वाले गांव में प्रमुख रूप से पांजणा, मूसाढुंग, जैली, कालीमठ, सेमी तल्ली, सिल्ला बमनगांव, कुणजेठी, जाग तल्ला, बलसुंडी जैसे करीब 23 गांव सम्मलित हैं जिसमें सबसे ज्यादा पांजणा गांव में 148 परिवारों का विस्थापन वर्षों से अटका पड़ा हैं वही प्रशासन आज भी विस्तापन वही दावे कर रहा है जो वो वर्षों से पीड़ितों से करता आया है, डीएम का कहना है कि रुद्रप्रयाग में आपदा के बाद विस्तापन के मामले में अब तक कछुवा गति से चल रहा, जिला प्रशासन का कहना है कि विस्थापन के लिए शासन से 2 करोड़ 37 लाख रुपये मिले हैं जिससे 56 परिवारों का विस्थापन हो चुका है, बाकी बचे हुए परिवारों के विस्तापन के लिए शासन से डिमांड की गई है।
भूपेंद्र भण्डारी
आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील माना जाने वाले रुद्रप्रयाग जिले में 2013 आपदा के बाद जिंदगी पटरी पर लौटने पर बड़े-बड़े दावे किए जाते हों, इस दावों में कई सावन यू ही बीत गये लेकिन आज भी जिले में 23 गांव के 472 परिवार विस्थापन की आस में खौफ केसाये में जीने को मजबूर हैं,
रिपोर्ट देखिए-
लगभग 7 दशकों से बद्रीनाथ-केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग नासूर बने सिरोबगढ़ लेड स्लाइडिंग जोन के ठीक ऊपर बसे खांकरा ग्रामपंचायत का छांतीखाल गांव के लोग हर सावन में किसी अनहोनी दशहत के सांये मे जीने को मजबूर है, सिरोबगढ मेें हर दिन भूस्खलन होता है और उसके ठीक 140 मीटर ऊपर बसे छांतीखाल गांव की जमीन व मकान धीरे-धीरे खण्डर बनते जा रहे हैं।
रूद्रप्रयाग के खांकरा ग्रामपंचायत का छांतीखाल गांव में 16 परिवारों का विस्थापन होना था, जिनमें से अबतक मात्र 4 परिवारों का ही विस्थापन हो पाया, लेकिन कई दशकों से विस्थापन की मांग कर रहे ग्रामीणों के आरोप है कि जो लोग खतरे की जद में ज्यादा है और लेडस्लाइडिंग जोन के सबसे नजदीक है उनको दरकिनार कर सिपारिश लगाने वाले लोगों का विस्थापन कर दिया गया, और जिनके मकान खण्डर हो गये या होने वाले हैं ।वो आज भी विस्थापन की मांग कर थक चुके हैं।
अब पूरे जिले की बात करें तो आपदा प्रभावित रुद्रप्रयाग जिले के 23 गांवों के 472 परिवारों का विस्थापन लंबे से अधर में लटका हुआ है, जिला प्रशासन ने इन गांवों का भूगर्भीय सर्वेक्षण करवाकर विस्थापन की रिपोर्ट शासन को भेजी हुई है, रुद्रप्रयाग जिले में जखोली के 3 गांव के 192 परिवार, उखीमठ के 17 गाँवों के 248 परिवार, वही रुद्रप्रयाग के 3 गांव के 32 परिवारों का विस्थापन होना प्रस्तावित है, इन सभी 472 परिवारों के विस्तापन में 16 करोड़ 52 लाख रुपये खर्च होने थे, जिसमे प्रत्येक विस्तापित परिवार को 3.5 लाख रुपये मिलने थे इसके साथ ही विस्थापित होंने वाली नई जगहों पर मूलभूत सुविधाओं को विकसित करने के भी वादे किए गए थे, विस्थापित होने वाले गांव में प्रमुख रूप से पांजणा, मूसाढुंग, जैली, कालीमठ, सेमी तल्ली, सिल्ला बमनगांव, कुणजेठी, जाग तल्ला, बलसुंडी जैसे करीब 23 गांव सम्मलित हैं जिसमें सबसे ज्यादा पांजणा गांव में 148 परिवारों का विस्थापन वर्षों से अटका पड़ा हैं वही प्रशासन आज भी विस्तापन वही दावे कर रहा है जो वो वर्षों से पीड़ितों से करता आया है, डीएम का कहना है कि रुद्रप्रयाग में आपदा के बाद विस्तापन के मामले में अब तक कछुवा गति से चल रहा, जिला प्रशासन का कहना है कि विस्थापन के लिए शासन से 2 करोड़ 37 लाख रुपये मिले हैं जिससे 56 परिवारों का विस्थापन हो चुका है, बाकी बचे हुए परिवारों के विस्तापन के लिए शासन से डिमांड की गई है।
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