समाज में शान्ति, एकता और सद्भाव बनाने के लिये तालकटोरा इंडोर स्टेडियम, नई दिल्ली में अमनो एकता सम्मेलन का आयोजन
दिल्ली:
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने विशिष्ट अतिथि के रूप में ताल कटोरा इंडोर स्टेडियम, नई दिल्ली में आयोजित अमनो एकता सम्मेलन में सहभाग किया। उन्होने हजारों की संख्या में उपस्थित भाई-बहनों को सम्बोधित किया।
अमनो एकता सम्मेलन की अध्यक्षता हज़रत मौलाना क़ारी सय्यद मुहम्मद उस्मान, साहब मंसूरपूरी जी, अध्यक्ष ज़मीयत उलमा-ए-हिन्द ने किया।
ज़मीयत उलेमा हिन्द के महासचिव श्री मौलाना महमूद मदनी साहब ने कहा कि समाज मंे शान्ति, एकता और सद्भाव बनाने के लिये अमनो एकता सम्मेलन का आयोजन किया गया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सभी को सम्बोधित करते हुये कहा कि ’’गर्व से कहो हम भारतीय हैं।’’ उन्होेेने संदेश दिया कि राष्ट्र भावना और राष्ट्रीयता की मशाल को अपने दिलों में जाग्रत रखे ताकि भारत की अस्मिता पर कभी आंच न आने पाये। अपने दिलों में मोहब्बत और भाईचारा की भावना को बनायें रखे। अपने दिलों को नफरत का दरिया न बनायें बल्कि मोहब्बत, भाईचारे, शान्ति, एकता और अमन का समन्दर बनायें।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि देश में कहीं भी न दूरंगी नीति होगी न दूरंगा रंग होगा। हमें अपने वतन के लिये जीना, वतन को चमन बनाने के लिये, वतन में अमन लाने के लिये और हर भारतीय में देशभक्ति जगाने के, लिये कौमी एकता के लिये सबको मिलकर प्रयत्न करना होगा तभी हम अपने राष्ट्र में अमन, शान्ति और एकता की स्थापना कर सकते है।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि हमें जिम्मेदारी लेनी होगी कि आईएसआई या कुछ ऐसे भटके हुये लोग जो कुछ भी ऐसा करते है तो हमें कहना होगा कि यह इस्लाम नहीं है ताकि लोगों को सही संदेश जाये। उन्होने कहा कि इस्लाम वतन को जोड़ कर रखने का संदेश देता है; सब की सलामती का संदेश देता है; वतन की सलामती का संदेश देता है। आज इस मंच से हम कह दें पूरे विश्व को कि इस्लाम सब की सलामती चाहता है, क्योकि एकता की आवाज में बहुत बड़ी ताकत है, उस ताकत को समझें। स्वामी जी महाराज ने कहा कि शक से नही, शिकायतों से नही बल्कि हक से कहे कि यह वतन हमारा है।
हज़रत मौलाना क़ारी सय्यद मुहम्मद उस्मान, साहब मंसूरपूरी जी, ने कहा कि वर्तमान समय में देश की बदलती हुई सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि में, जिसमें देश के मिले जुले सामाजिक ताने-बाने, धार्मिक सहिष्णुता, साम्प्रदायिक सद्भाव, अमन और शान्ति पर आधारित चिरकालीन व्यवस्था को ध्वस्त करने की कोशिशें की जा रही है। यह हम सभी की साझा जिम्मेदारी है कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भाईचारें, सद्भाव, सौहार्द, अमन, शान्ति और एकता को बनायें रखने के लिये हर सम्भव प्रयास करें ताकि विध्वंसक तत्वों की साजिशें नाकाम हों और इस हेतु विभिन्न धर्मों की विचारधाराओं को एक साथ लाकर अनेकता में एकता और आपसी मेलजोल को बनाया रखा जा सके।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने अमन और एकता सम्मेलन में सहभाग करने आये विशिष्ट अतिथियों, मौलाना, इमाम और मस्ज़िदों से आये विद्धानों को पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट करते हुये स्वामी जी महाराज ने पानी, पेड़ और प्रकृति को सुरक्षित रखने का संदेश दिया। साथ ही उन्होने कहा कि बाहर सड़कों पर भले ही जाम हो परन्तु अपने दिलों को जाम न होने दें, अपने दिलों में मोहब्बत का दरिया बहने दें। उन्होने कहा कि वतन की शान्ति और अमन के लिये अपना समर्पण और सेवा सदैव बनायें रखे जिससे वतन में समृद्धि की रोशनी सदैव फैलती रहे। उन्होने कहा कि कब तक पंचर लगाते रहेंगे अब समय आ गया है कि वतन की एकता को कोई पंचर न करे इसका ध्यान रखे। उन्होने कहा कि हम सभी अपने-अपने क्षेत्र में जो भी करते है उसे देश की सेवा समझते हुये; वतन की सेवा समझते हुये इस्लाम के सच्चे अर्थ को अपने जीवन का हिस्सा बनाते हुये आगे बढे। उन्होने कहा कि यह अमन, शान्ति और एकता की यात्रा है अतः मेरा वतन मेरी शान, मेरा वतन मेरी जान इस विचार से आगे बढ़े और देश की सेवा करें।
स्वामी जी महाराज ने हजारों की संख्या में भाई-बहनों को देश में अमन, शान्ति और एकता बनायें रखने का संकल्प कराया।
अमनो एकता सम्मेलन में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, आर्कबिशप अनिल कुटु जी, ज़मीयत उलेमा हिन्द के महासचिव श्री मौलाना महमूद मदनी साहब, मौलाना अरशद मदनी जी, हज़रत मौलाना क़ारी सय्यद मुहम्मद उस्मान, साहब मंसूरपूरी जी, अखिल भारतीय उलेमा मशयख बोर्ड के अध्यक्ष सैयद मोहम्मद अशरफ किछौछवी जी, चीफ ग्रंथि गुरूद्वारा बंगला साहब श्री रणजीत सिंह जी, अजमेर दरगाह शरीफ सलमान चिश्ती साहब, बौद्ध धर्म से लामा लोबजंग जी, जैन धर्म से लोकेश मुनि जी और अनेक इमाम, मौलाना और मस्जिदों के प्रतिनिधि एवं इस्लाम धर्म के विद्वान उपस्थित थे। ताल कटोरा स्टेडियम खचाखच भरा हुआ था लोग इंडोर स्टेडियम के बाहर खड़े होकर धर्मगुरूओं को सुन रहे थे।
दिल्ली:
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने विशिष्ट अतिथि के रूप में ताल कटोरा इंडोर स्टेडियम, नई दिल्ली में आयोजित अमनो एकता सम्मेलन में सहभाग किया। उन्होने हजारों की संख्या में उपस्थित भाई-बहनों को सम्बोधित किया।
अमनो एकता सम्मेलन की अध्यक्षता हज़रत मौलाना क़ारी सय्यद मुहम्मद उस्मान, साहब मंसूरपूरी जी, अध्यक्ष ज़मीयत उलमा-ए-हिन्द ने किया।
ज़मीयत उलेमा हिन्द के महासचिव श्री मौलाना महमूद मदनी साहब ने कहा कि समाज मंे शान्ति, एकता और सद्भाव बनाने के लिये अमनो एकता सम्मेलन का आयोजन किया गया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सभी को सम्बोधित करते हुये कहा कि ’’गर्व से कहो हम भारतीय हैं।’’ उन्होेेने संदेश दिया कि राष्ट्र भावना और राष्ट्रीयता की मशाल को अपने दिलों में जाग्रत रखे ताकि भारत की अस्मिता पर कभी आंच न आने पाये। अपने दिलों में मोहब्बत और भाईचारा की भावना को बनायें रखे। अपने दिलों को नफरत का दरिया न बनायें बल्कि मोहब्बत, भाईचारे, शान्ति, एकता और अमन का समन्दर बनायें।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि देश में कहीं भी न दूरंगी नीति होगी न दूरंगा रंग होगा। हमें अपने वतन के लिये जीना, वतन को चमन बनाने के लिये, वतन में अमन लाने के लिये और हर भारतीय में देशभक्ति जगाने के, लिये कौमी एकता के लिये सबको मिलकर प्रयत्न करना होगा तभी हम अपने राष्ट्र में अमन, शान्ति और एकता की स्थापना कर सकते है।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि हमें जिम्मेदारी लेनी होगी कि आईएसआई या कुछ ऐसे भटके हुये लोग जो कुछ भी ऐसा करते है तो हमें कहना होगा कि यह इस्लाम नहीं है ताकि लोगों को सही संदेश जाये। उन्होने कहा कि इस्लाम वतन को जोड़ कर रखने का संदेश देता है; सब की सलामती का संदेश देता है; वतन की सलामती का संदेश देता है। आज इस मंच से हम कह दें पूरे विश्व को कि इस्लाम सब की सलामती चाहता है, क्योकि एकता की आवाज में बहुत बड़ी ताकत है, उस ताकत को समझें। स्वामी जी महाराज ने कहा कि शक से नही, शिकायतों से नही बल्कि हक से कहे कि यह वतन हमारा है।
हज़रत मौलाना क़ारी सय्यद मुहम्मद उस्मान, साहब मंसूरपूरी जी, ने कहा कि वर्तमान समय में देश की बदलती हुई सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि में, जिसमें देश के मिले जुले सामाजिक ताने-बाने, धार्मिक सहिष्णुता, साम्प्रदायिक सद्भाव, अमन और शान्ति पर आधारित चिरकालीन व्यवस्था को ध्वस्त करने की कोशिशें की जा रही है। यह हम सभी की साझा जिम्मेदारी है कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भाईचारें, सद्भाव, सौहार्द, अमन, शान्ति और एकता को बनायें रखने के लिये हर सम्भव प्रयास करें ताकि विध्वंसक तत्वों की साजिशें नाकाम हों और इस हेतु विभिन्न धर्मों की विचारधाराओं को एक साथ लाकर अनेकता में एकता और आपसी मेलजोल को बनाया रखा जा सके।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने अमन और एकता सम्मेलन में सहभाग करने आये विशिष्ट अतिथियों, मौलाना, इमाम और मस्ज़िदों से आये विद्धानों को पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट करते हुये स्वामी जी महाराज ने पानी, पेड़ और प्रकृति को सुरक्षित रखने का संदेश दिया। साथ ही उन्होने कहा कि बाहर सड़कों पर भले ही जाम हो परन्तु अपने दिलों को जाम न होने दें, अपने दिलों में मोहब्बत का दरिया बहने दें। उन्होने कहा कि वतन की शान्ति और अमन के लिये अपना समर्पण और सेवा सदैव बनायें रखे जिससे वतन में समृद्धि की रोशनी सदैव फैलती रहे। उन्होने कहा कि कब तक पंचर लगाते रहेंगे अब समय आ गया है कि वतन की एकता को कोई पंचर न करे इसका ध्यान रखे। उन्होने कहा कि हम सभी अपने-अपने क्षेत्र में जो भी करते है उसे देश की सेवा समझते हुये; वतन की सेवा समझते हुये इस्लाम के सच्चे अर्थ को अपने जीवन का हिस्सा बनाते हुये आगे बढे। उन्होने कहा कि यह अमन, शान्ति और एकता की यात्रा है अतः मेरा वतन मेरी शान, मेरा वतन मेरी जान इस विचार से आगे बढ़े और देश की सेवा करें।
स्वामी जी महाराज ने हजारों की संख्या में भाई-बहनों को देश में अमन, शान्ति और एकता बनायें रखने का संकल्प कराया।
अमनो एकता सम्मेलन में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, आर्कबिशप अनिल कुटु जी, ज़मीयत उलेमा हिन्द के महासचिव श्री मौलाना महमूद मदनी साहब, मौलाना अरशद मदनी जी, हज़रत मौलाना क़ारी सय्यद मुहम्मद उस्मान, साहब मंसूरपूरी जी, अखिल भारतीय उलेमा मशयख बोर्ड के अध्यक्ष सैयद मोहम्मद अशरफ किछौछवी जी, चीफ ग्रंथि गुरूद्वारा बंगला साहब श्री रणजीत सिंह जी, अजमेर दरगाह शरीफ सलमान चिश्ती साहब, बौद्ध धर्म से लामा लोबजंग जी, जैन धर्म से लोकेश मुनि जी और अनेक इमाम, मौलाना और मस्जिदों के प्रतिनिधि एवं इस्लाम धर्म के विद्वान उपस्थित थे। ताल कटोरा स्टेडियम खचाखच भरा हुआ था लोग इंडोर स्टेडियम के बाहर खड़े होकर धर्मगुरूओं को सुन रहे थे।
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