धनौल्टी :
देवेंद्र बेलवाल
जिस आलू फ़ार्म मे सैकड़ो कुन्टल आलू लगता था और साथ मे जौनपुर ब्लाक और थौलधार के दर्जनों गांव के साथ दुसरे राज्य के लिए भी भेज जाता था और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता था ।उत्तराखंड सरकार और उद्यान विभाग की उदासीनता के कारण ये फ़ार्म बंजर हो गये ।आलू फ़ार्म 800एकड़ जमीन और बाटवालधार ऐपल गार्डेन की जमीन 51 हैक्टेयर बगीच हुआ करता था। अब ऐसी स्थिति आने पर लोग बेरोजगार हो गए है.
जब यही बगीचा उत्तरप्रदेश में था अच्छा खासा आलू हुआ करता था, परन्तु जब से उत्तराखंड अलग राज्य हुआ तो तब ये दोनों फ़ार्म बंजर हो गये ।
अब तो पर्यटक बाटवालधार ऐपल गार्डेन को पर्यटन देखने जाते है , तो उस बंजर फ़ार्म को देखकर मायूस होकर लोटना पड़ा रहा है । सेब ,आडु ,खुमानी, पुलम ,अखरोट के दो हजार के करीब से सूख ही गये है तथा जो कर्मचारी के भवन बने थे । वो आज खंडहर में तब्दील हो गए।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार अपने बगीचे और फ़ार्म को तो बचा नहीं पा रही है और बात करती है किसानो को दुगुनी आय दिलाने की।
जिससे किसानों को इन फ़ार्म बंजर होने से भारी नुकसान हो रहा है तथा सेब के बगीचे से नुकसान हो रहा है बगीचों में इतनी झाड़ी उग गयीं कि जंगली जनवारो का अड्डा हो गया है। जगली सूअरों ने किसानों में उत्पात मचाया हुआ है.
किसान यूनियन अध्यक्ष रधुवीर रमोला और क्षेत्र पंचायत सदस्य तपेन्दर बेलवाल प्रधान सुमित्रा देवी और किसानों का कहना है कि कि अगर सरकार और विभाग इस बगीचे और फ़ार्म पर ध्यान नहीं देतीं तो एक जनआंदोलन किया जायेगा।
देवेंद्र बेलवाल
जिस आलू फ़ार्म मे सैकड़ो कुन्टल आलू लगता था और साथ मे जौनपुर ब्लाक और थौलधार के दर्जनों गांव के साथ दुसरे राज्य के लिए भी भेज जाता था और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता था ।उत्तराखंड सरकार और उद्यान विभाग की उदासीनता के कारण ये फ़ार्म बंजर हो गये ।आलू फ़ार्म 800एकड़ जमीन और बाटवालधार ऐपल गार्डेन की जमीन 51 हैक्टेयर बगीच हुआ करता था। अब ऐसी स्थिति आने पर लोग बेरोजगार हो गए है.
जब यही बगीचा उत्तरप्रदेश में था अच्छा खासा आलू हुआ करता था, परन्तु जब से उत्तराखंड अलग राज्य हुआ तो तब ये दोनों फ़ार्म बंजर हो गये ।
अब तो पर्यटक बाटवालधार ऐपल गार्डेन को पर्यटन देखने जाते है , तो उस बंजर फ़ार्म को देखकर मायूस होकर लोटना पड़ा रहा है । सेब ,आडु ,खुमानी, पुलम ,अखरोट के दो हजार के करीब से सूख ही गये है तथा जो कर्मचारी के भवन बने थे । वो आज खंडहर में तब्दील हो गए।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार अपने बगीचे और फ़ार्म को तो बचा नहीं पा रही है और बात करती है किसानो को दुगुनी आय दिलाने की।
जिससे किसानों को इन फ़ार्म बंजर होने से भारी नुकसान हो रहा है तथा सेब के बगीचे से नुकसान हो रहा है बगीचों में इतनी झाड़ी उग गयीं कि जंगली जनवारो का अड्डा हो गया है। जगली सूअरों ने किसानों में उत्पात मचाया हुआ है.
किसान यूनियन अध्यक्ष रधुवीर रमोला और क्षेत्र पंचायत सदस्य तपेन्दर बेलवाल प्रधान सुमित्रा देवी और किसानों का कहना है कि कि अगर सरकार और विभाग इस बगीचे और फ़ार्म पर ध्यान नहीं देतीं तो एक जनआंदोलन किया जायेगा।
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