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रूद्रप्रयाग:

भूपेंद्र भंडारी 

केदारनाथ यात्रा के लिए हवाई जहाज़ से जानेवाले तीर्थ यात्रियों को सावधान रहना होगा क्योकि हेली सेवाएं शुरू होने के बाद जहाँ टिकटों की कालाबारी को लेकर विवादों में है तो वहीं इनका संचालन भी नियम कायदो को ताक पर रखकर किया जा रहा है। 

 केदारनाथ के लिए ढेड सप्ताह पूर्व शुरू हुई हेली सेवायें विवादों में घिर गई हैं। इसके संचालन में भारी अनिमिताएं बरतना इसका प्रमुख कारण है। आपको बताते चले कि देर से शुरू होने के कारण हेली सेवाओं के जरिए केदारनाथ की यात्रा करने वाले तीर्थ यात्रियों की भारी तादाद  है। प्रशासन द्वारा तीस प्रतिशत जीएनवीएन तथा 70 प्रतिशत आॅनलाइन के जरिए हेली टिकट बुकिंग की व्यवस्था की है। 

लेकिन हेली संचालकों और प्रशासन के कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण हेली टिकटों की जमकर कालाबाजारी की जा रही है। ब्लैक में केदारनाथ धाम जाने का किराया 15 हजार से ज्यादा है। ऐसे में आॅनलाइन टिकट बुक करने वालों का कई दिनों तक नम्बर ही नहीं आ रहा है। जिस कारण वे भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। 

 दूसरी तरफ हेली सेवाएं नियम कायदों को ताक पर रखकर संचाललित की जा रही है। गुप्तकाशी मस्ता में आर्यर एविएशन हेली कम्पनी क्षतिग्रस्त हेली पैड से उड़ान भर रही है, पैंसे कमाने के एवज में हेली कम्पनियों तीर्थ यात्रियों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। जबकि दूसरी तरफ यूकाड़ा की गाइड लाइन को दरकिनार करते हुए आबादी के बीचों बीच हेली पैड बने हुए हैं जिससे स्थानीय लोग तो भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा। केदारनाथ के विधायक मनोज रावत ने कहा कि हेली सेवाओं के संचालन में हो रही अनिमिताओं के खिलाफ जल्दी मोर्चा खोला जायेगा।  



 हेली सेवाओं के संचालन में हो रही अनियमिताओं और कालाबाजारी को लेकर शासन स्तर पर भी शिकायतें पहुंच रही हैं। इसी को देखते हुए  गढ़वाल आयुक्त वीवीआरसी पुरूषोत्तम ने हेली संचालकों के साथ बैठक कर कालाबाजारी पर पूरी तरह से रोक लगाने को कहा। जिला प्रशासन को निर्देश देते हुए कहा कि हेली सेवाओं की मनमानी और टिकटों की कालाबाजारी से देवभूमि की छवि खराब होती जा रही हे। इस लिए ब्लैक माकेर्टिंग करने वालों को किसी भी सूरत में बख़्शा  न जाय और पारदर्शिता के साथ इनका संचालन करवाया जाय। 

 दरअसल केदारनाथ धाम के चलाई जाने वाली हैली सेवायें हमेशा से विवादों में रही हैं। हैली के टिकटों की कालाबाजारी के इस खेल में प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर पुलिस की भी संलिप्तता रहती है। 

जिस कारण इस पूरे खेल को अंजाम दिया जाता है। अब बिल्ली को दूध की रखवाली के लिए रखेंगे तो क्या होगा समझा जा सकता है। अब देखना होगा की गढ़वाल आयुक्त के निर्देश का पालन होता है या इन्हें भी ठेंगा दिखाया जायेगा।

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