नई दिल्ली;
आज , संसद के केंद्रीय कक्ष में आयोजित बैठक में कांग्रेस दल ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) अध्यक्ष सोनिया गांधी को कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुन लिया है।
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को भारी हार और उसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तरफ से पद छोड़ने के फैसले के एक हफ्ते बाद कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में इसका ऐलान किया गया है। मोदी के नेतृत्व में एनडीए ने 352 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है।
जबकि कांग्रेस मात्र 52 सीटों पर सिमट कर रह गई।
लोकसभा में कांग्रेस का नेता चुनने के लिए शनिवार को कांग्रेस संसदीय दल की संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में बैठक आयोजित की गई। कांग्रेस के नव-निर्वाचित सांसदों की यह बैठक 17 जून से शुरू हो रहे संसद सत्र से ठीक पहले आयोजित की गई। एक अन्य ट्वीट में सुरजेवाला ने राहुल गांधी के हवाले से कहा- 'हर कांग्रेस सदस्य को अवश्य यह याद रखना चाहिए कि आप रंग, आस्था या स्किन से परे संविधान और हर भारतीय के लिए लड़ रहे हैं। इससे पहले, पार्टी में बड़ा तबका कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को संसदीय दल के नेता की जिम्मेदारी लेने की मांग कर रहा था। ऐसी चर्चा थी कि अगर वह संसदीय दल के नेता नहीं बनते हैं, तो पार्टी के वरिष्ठ नेता शशि थरूर या मनीष तिवारी को नेता चुना जा सकता है। कांग्रेस के पास लोकसभा में सिर्फ 52 सांसद हैं।
ऐसे में दूसरी बार पार्टी को लोकसभा में नेता विपक्ष का पद नहीं मिल पाएगा। इससे पहले, 15 मई 1999 को लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को इसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा था। उस वक्त तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उस वक्त पार्टी के सीनियर नेता शरद पवार, पीए संगमा और तारिक अनवर की तरफ से उनके विदेशी मूल को लेकर प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर विरोध को देखते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था।
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