ऋषिकेश:
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान( एम्स ऋषिकेश) में आयोजित वार्षिक समारोह पायरेक्सिया-2019 का बृहस्पतिवार देर शाम विधिवत आगाज हो गया। इस दौरान विभिन्न रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। एम्स स्क्वायर में बृहस्पतिवार देर शाम मुख्य अतिथि संस्थान के अध्यक्ष पद्मश्री प्रोफेसर समीरन नंदी ने पांच दिवसीय फेस्ट पायरेक्सिया 2019 का दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर एम्स प्रेसिडेंट प्रो. समीरन नंदी ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ साथ शिक्षणेत्तर गतिविधियां भी नितांत आवश्यक हैं। इस दौरान उन्होंने छात्र छात्राओं को पढ़ाई के साथ ही खेल, संगीत आदि क्षेत्रों में भी प्रतिभाग के लिए प्रेरित किया। प्रो.नंदी ने ऋषिकेश एम्स संस्थान को देश के श्रेष्ठ मेडिकल संस्थानों में से एक बताया। इस दौरान उन्होंने एम्स ऋषिकेश के वार्षिक कार्यक्रम पायरेक्सिया को बेहतर व चर्चित कार्यक्रम बताया। उन्होंने बताया कि दुनिया के पहले किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन प्रोफेसर थॉमस एक अच्छे चिकित्सक के साथ ही अच्छी पेंटिंग भी करते थे, उन्होंने बताया कि इसके अलावा थॉमस अच्छे टेनिस प्लेयर भी थे और वह पुस्तकें भी लिखा करते थे।
एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने पायरेक्सिया कार्यक्रम को सराहा और बताया कि इस तरह के कार्यक्रमों से विद्यार्थियों में रचनात्मक गतिविधियों का संचार होता है। एम्स निदेशक प्रो.रवि कांत ने विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए ऐसे कार्यक्रमों की निरंतरता पर जोर दिया। इस दौरान निदेशक एम्स पद्मश्री प्रोफेसर समीरन नंदी के व्यक्तित्व व कृतित्व को सराहनीय बताया। उन्होंने बताया कि एक सर्जन के ओवरऑल डेवलपमेंट के लिए छह चीजों की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि एक अच्छे सर्जन के अपने विषय में दक्षता के साथ ही उसमें अच्छा व्यवहारिक ज्ञान और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भी रूचि का होना जरूरी है। गौरतलब है कि पायरेक्सिया कार्यक्रम डीन स्टूडेंट्स वैलफेयर प्रो.मनोज गुप्ता की देखरेख में आयोजित किया जा रहा है। इस मौके पर संस्थान के डीन स्टूडेंट्स वैलफेयर प्रो.मनोज गुप्ता ने बताया कि इस तरह के आयोजनों से बच्चों में प्रतिस्पर्धा की सोच विकसित होती है।
जो लोग जीत दर्ज कराते हैं उनमें इसके लिए हौंसला विकसित होता है जबकि उपविजेता बच्चों में अगली प्रतिस्पर्धा में मुकाबले का जज्बा पैदा होता है। पायरेक्सिया के पहले दिन एम्स ऋषिकेश के एमबीबीएस व नर्सिंग विद्यार्थियों के अलावा विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के छात्र छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित दर्शकों की तालियां बटोरीं। इस अवसर पर उपनिदेशक (प्रशासन) अंशुमन गुप्ता, एमएस डा.ब्रह्मप्रकाश,डीन एकेडमिक प्रो.सुरेखा किशोर, डीन एलुमिनाई प्रो.बीना रवि, प्रो.मनोज गुप्ता, डा.सौरभ वाष्र्णेय, डा.संजीव मित्तल, डा.रवि गुप्ता,सीमा डेंटल कॉलेज के प्रिंसिपल डा.हिमांशु ऐरन,डा.बलराम जीओमर, डा.मनु मल्होत्रा आदि मौजूद थे।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान( एम्स ऋषिकेश) में आयोजित वार्षिक समारोह पायरेक्सिया-2019 का बृहस्पतिवार देर शाम विधिवत आगाज हो गया। इस दौरान विभिन्न रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। एम्स स्क्वायर में बृहस्पतिवार देर शाम मुख्य अतिथि संस्थान के अध्यक्ष पद्मश्री प्रोफेसर समीरन नंदी ने पांच दिवसीय फेस्ट पायरेक्सिया 2019 का दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर एम्स प्रेसिडेंट प्रो. समीरन नंदी ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ साथ शिक्षणेत्तर गतिविधियां भी नितांत आवश्यक हैं। इस दौरान उन्होंने छात्र छात्राओं को पढ़ाई के साथ ही खेल, संगीत आदि क्षेत्रों में भी प्रतिभाग के लिए प्रेरित किया। प्रो.नंदी ने ऋषिकेश एम्स संस्थान को देश के श्रेष्ठ मेडिकल संस्थानों में से एक बताया। इस दौरान उन्होंने एम्स ऋषिकेश के वार्षिक कार्यक्रम पायरेक्सिया को बेहतर व चर्चित कार्यक्रम बताया। उन्होंने बताया कि दुनिया के पहले किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन प्रोफेसर थॉमस एक अच्छे चिकित्सक के साथ ही अच्छी पेंटिंग भी करते थे, उन्होंने बताया कि इसके अलावा थॉमस अच्छे टेनिस प्लेयर भी थे और वह पुस्तकें भी लिखा करते थे।
एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने पायरेक्सिया कार्यक्रम को सराहा और बताया कि इस तरह के कार्यक्रमों से विद्यार्थियों में रचनात्मक गतिविधियों का संचार होता है। एम्स निदेशक प्रो.रवि कांत ने विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए ऐसे कार्यक्रमों की निरंतरता पर जोर दिया। इस दौरान निदेशक एम्स पद्मश्री प्रोफेसर समीरन नंदी के व्यक्तित्व व कृतित्व को सराहनीय बताया। उन्होंने बताया कि एक सर्जन के ओवरऑल डेवलपमेंट के लिए छह चीजों की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि एक अच्छे सर्जन के अपने विषय में दक्षता के साथ ही उसमें अच्छा व्यवहारिक ज्ञान और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भी रूचि का होना जरूरी है। गौरतलब है कि पायरेक्सिया कार्यक्रम डीन स्टूडेंट्स वैलफेयर प्रो.मनोज गुप्ता की देखरेख में आयोजित किया जा रहा है। इस मौके पर संस्थान के डीन स्टूडेंट्स वैलफेयर प्रो.मनोज गुप्ता ने बताया कि इस तरह के आयोजनों से बच्चों में प्रतिस्पर्धा की सोच विकसित होती है।
जो लोग जीत दर्ज कराते हैं उनमें इसके लिए हौंसला विकसित होता है जबकि उपविजेता बच्चों में अगली प्रतिस्पर्धा में मुकाबले का जज्बा पैदा होता है। पायरेक्सिया के पहले दिन एम्स ऋषिकेश के एमबीबीएस व नर्सिंग विद्यार्थियों के अलावा विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के छात्र छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित दर्शकों की तालियां बटोरीं। इस अवसर पर उपनिदेशक (प्रशासन) अंशुमन गुप्ता, एमएस डा.ब्रह्मप्रकाश,डीन एकेडमिक प्रो.सुरेखा किशोर, डीन एलुमिनाई प्रो.बीना रवि, प्रो.मनोज गुप्ता, डा.सौरभ वाष्र्णेय, डा.संजीव मित्तल, डा.रवि गुप्ता,सीमा डेंटल कॉलेज के प्रिंसिपल डा.हिमांशु ऐरन,डा.बलराम जीओमर, डा.मनु मल्होत्रा आदि मौजूद थे।
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